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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Social Science Chapter 1 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठगत प्रश्न

गतिविधि

प्रश्न-चित्र 1 (पाठ्यपुस्तक) को ध्यान से देखें। यह चित्र किस प्रकार उपनिवेशवाद का बोध कराता है?

उत्तर- इस चित्र में ब्राह्मणों को ब्रिटिश सत्ता की प्रतीक ब्रिटेनिया को शास्त्र भेंट करते हुए दर्शाया गया है, वे उसे अपने प्राचीन पवित्र ग्रन्थ सौंप रहे हैं। इससे पता चल रहा है कि ब्रिटिश सत्ता ने भारत पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है तथा उससे भारतीय संस्कृति की रक्षा करने का आग्रह किया जा रहा है।

गतिविधि

प्रश्न-स्रोत 1 और 2 को देखें। क्या आपको प्रतिवेदनों के स्वरूप में कोई फर्क दिखाई देता है? बताएँ कि आपको क्या फर्क लगता है?

उत्तर- हमें दोनों प्रकार के प्रतिवेदनों के स्वरूप में मौलिक फर्क दिखाई देता है। दोनों प्रकार के प्रतिवेदनों का स्वरूप अलग-अलग प्रकार का है। जहाँ स्रोत 1 में सरकारी कर्मचारियों द्वारा गृह विभाग को रिपोर्टें भेजी गई हैं, वहीं स्रोत 2 में अखबार द्वारा दी गई रिपोर्ट है। स्रोत 1 की रिपोर्ट में विद्रोहियों के विरुद्ध की गयी कार्यवाही का वर्णन किया गया है। यह रिपोर्ट उन कारणों को भी नहीं बताती।

जिनकी वजह से ऐसी स्थिति आई। साथ ही यह रिपोर्ट उन कारणों को भी नहीं बताती है कि ऐसी स्थिति आई क्यों थी। यह विद्रोहियों के पक्ष को उजागर नहीं करती है।

दूसरी ओर, स्रोत 2 की रिपोर्ट मीडिया के निष्पक्ष रिपोर्टिंग का एक उदाहरण है। इसमें वर्णन है कि पुलिस ने हड़ताल क्यों की थी, हड़ताल कहाँ और कैसे हुई थी। अतः यह प्रतिवेदन अधिक वास्तविक है। यह मानवतावाद के विरुद्ध सरकार की प्रवृत्ति को उजागर करता है।

आइए कल्पना करें

प्रश्न- कल्पना कीजिए कि आप इतिहासकार हैं। आप यह पता लगाना चाहते हैं कि आजादी मिलने के बाद एक दुर्गम आदिवासी इलाके की खेती में क्या बदलाव आए हैं। इन जानकारियों को ढूँढने के विभिन्न तरीकों की सूची बनाएँ।

उत्तर- किसी दुर्गम आदिवासी इलाके की खेती में आए परिवर्तन के बारे में जानकारियाँ एकत्र करने के कुछ तरीके निम्न प्रकार हैं-

(1) सम्बन्धित क्षेत्र के कलेक्टर, तहसीलदार आदि के कार्यालय से रिपोर्ट एकत्र करना।

(2) पत्रिका, समाचार-पत्र आदि से जानकारियाँ एकत्र करना।

(3) सम्बन्धित राज्य के कृषि विभाग से जानकारियाँ एकत्र करना।

(4) उस क्षेत्र में स्वयं जाकर अवलोकन एवं कृषकों से साक्षात्कार के माध्यम से जानकारियाँ एकत्र करना।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

फिर से याद करें-

प्रश्न 1. सही और गलत बताएँ-

(क) जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, तीन काल खण्डों में बाँट दिया था।
(ख) सरकारी दस्तावेजों से हमें ये समझने में मदद मिलती है कि आम लोग क्या सोचते हैं।
(ग) अंग्रेजों को लगता था कि सही तरह शासन चलाने के लिए सर्वेक्षण महत्त्वपूर्ण होते हैं।

उत्तर- (क) गलत (स्पष्टीकरण- जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को हिन्दू, मुस्लिम, ब्रिटिश तीन काल खण्डों में बाँटा था।) (ख) गलत (ग) सही।

आइए विचार करें-

प्रश्न 2. जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को जिस तरह काल-खण्डों में बाँटा है, उसमें क्या समस्याएँ हैं?

उत्तर- जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को तीन काल-खण्डों—हिन्दू, मुस्लिम तथा ब्रिटिश—में बाँटा। उसके अनुसार भारत में अंग्रेजों के आने से पहले यहाँ हिन्दू तथा मुस्लिम तानाशाहों का ही राज चलता था। जेम्स मिल द्वारा भारतीय इतिहास के इस तरह किये गये कालखण्डों के विभाजन में अनेक समस्याएँ हैं, जो निम्न प्रकार हैं-

(1) जेम्स मिल द्वारा किया गया काल-खण्डों का यह विभाजन धर्म पर आधारित था जो उचित नहीं है।

(2) उसने हिन्दू तथा मुस्लिम काल को धार्मिक बैर, जातिगत बन्धन तथा अन्धविश्वासों से भरपूर माना तथा अंग्रेजी शासन को प्रगति तथा सभ्यता का प्रतीक माना।

(3) इतिहास के किसी दौर को 'हिन्दू' या 'मुसलमान' दौर नहीं कहा जा सकता। किसी भी दौर में सभी धर्म एक साथ चलते हैं।

(4) प्राचीन भारत में भी सभी शासकों का एक ही धर्म नहीं होता था।

(5) विभाजन का यह आधार सच्चाई से बहुत दूर था। इसका उद्देश्य लोगों को विभाजित कर उनमें फूट डालना था।

प्रश्न 3. अंग्रेजों ने सरकारी दस्तावेजों को किस तरह सुरक्षित रखा?

उत्तर- अंग्रेजों ने सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए सभी शासकीय संस्थानों में अभिलेख कक्ष बनवाये। उन्होंने तहसील के दफ्तरों, कलेक्ट्रेट, कमिश्नर के दफ्तर, प्रान्तीय सचिवालय, कचहरी आदि सभी के लिए उनके पृथक्-पृथक् रिकॉर्ड रूम बनवाये, जिनमें सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता था। महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को बचाकर रखने के लिए अभिलेखागार (आर्काइव) तथा संग्रहालय जैसे संस्थान भी बनाये गये।

उन्नीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में सुलेखनवीसों द्वारा दस्तावेजों की नकलें बनवाई जाती थीं। बाद में छपाई तकनीक द्वारा सरकारी दस्तावेजों की अनेक प्रतियाँ बनाई जाने लगीं।

प्रश्न 4. इतिहासकार पुराने अखबारों से जो जानकारी जुटाते हैं, वह पुलिस की रिपोर्टों में उपलब्ध जानकारी से किस तरह अलग होती है?

उत्तर- इनमें मुख्य अन्तर निष्पक्षता का होता है। सामान्यतः अखबार की रिपोर्ट गलत नहीं होती। इन रिपोर्टों में घटनाओं का सही विवरण दिया जाता है। अखबार घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत नहीं करते हैं। ये घटनाओं का सही, विस्तृत और निष्पक्ष विवरण प्रस्तुत करते हैं। दूसरी तरफ पुलिस की रिपोर्टों में उपलब्ध जानकारी के पक्षपातपूर्ण होने की सम्भावना होती है। कई बार ये रिपोर्ट्स वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में या उन्हें खुश करने के लिए लिखी जाती हैं। इन रिपोर्टों में जाँच अधिकारी व्यक्तिगत रूप से भी पक्षपात कर सकते हैं।

अतः यदि इतिहासकार केवल पुलिस रिपोर्टों से उपलब्ध जानकारी पर आधारित रहे तो सम्भव है कि गलत इतिहास प्रस्तुत होवे।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ-सार

(1) इतिहास अलग-अलग समय पर आने वाले बदलावों के बारे में ही होता है। इसका संबंध इस बात से है कि अतीत में चीजें किस तरह की थीं और उनमें क्या बदलाव आए हैं।

(2) समय को हमेशा साल या महीनों के पैमाने पर ही नहीं देखा जा सकता। ऐसी प्रक्रियाओं के लिए कोई तारीख तय करना गलत होता है जो एक लम्बे समय तक चलती रहती हैं।

(3) एक समय था जब युद्ध तथा बड़ी-बड़ी घटनाओं के ब्यौरों को ही इतिहास माना जाता था। अब इतिहासकार बहुत सारे दूसरे मुद्दों और दूसरे सवालों के बारे में भी लिखने लगे हैं।

(4) स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री तथा राजनीतिक दार्शनिक जेम्स मिल ने सन् 1817 में तीन विशाल खण्डों में 'ब्रिटिश भारत का इतिहास' (ए हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इण्डिया) नामक पुस्तक लिखी। इसमें उन्होंने भारतीय इतिहास को तीन काल खंडों—(1) हिन्दू, (2) मुस्लिम तथा (3) ब्रिटिश—में बाँटा था।

(5) भारत पर अंग्रेजों के शासन में लोगों के पास समानता, स्वतंत्रता या मुक्ति नहीं थी। न ही यह आर्थिक विकास और प्रगति का दौर था। अनेक इतिहासकार इस युग को 'औपनिवेशिक युग' कहते हैं।

(6) अंग्रेजी शासन द्वारा तैयार किये गये सरकारी रिकार्ड इतिहासकारों के लिए एक प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन इनसे हमें यही पता चलता है कि सरकारी अफसर क्या सोचते थे, उनकी दिलचस्पी किन चीजों में थी और बाद के लिए वे किन चीजों को बचाए रखना चाहते थे। इन रिकार्ड्स से हमें यह समझने में हमेशा मदद नहीं मिलती कि देश के दूसरे लोग क्या महसूस करते थे और उनकी कार्रवाइयों की क्या वजह थी?

(7) आम जनता के बारे में जानने के लिए हमें सरकारी रिकार्ड्स के अतिरिक्त अन्य स्रोतों, जैसे-डायरियों, तीर्थ-यात्रियों व यात्रियों के संस्मरण, महत्त्वपूर्ण लोगों की आत्मकथाएँ तथा स्थानीय बाजारों में बिकने वाली लोकप्रिय पुस्तक-पुस्तिकाएँ महत्त्वपूर्ण हो जाती हैं।

(8) लेकिन आदिवासी, किसान, खदानों में काम करने वाले मजदूर या सड़क पर जिंदगी गुजारने वाले गरीब किस तरह के अनुभवों से गुजर रहे थे, की जानकारी आत्मकथाओं और दूसरे स्रोतों से भी नहीं मिल पाती है।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

1. ऐतिहासिक सवाल हमें किस बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं?

(अ) समय के बारे में
(ब) राष्ट्रीय आंदोलनों के बारे में
(स) नक्शे के बारे में
(द) संधियों के बारे में

2. भारत में प्रथम गवर्नर-जनरल थे—

(अ) रॉबर्ट क्लाइव
(ब) वॉरेन हेस्टिंग्स
(स) डलहौजी
(द) वेलेजली।

3. वॉरेन हेस्टिंग्स भारत के पहले गवर्नर जनरल बने—

(अ) 1771 में
(ब) 1772 में
(स) 1773 में
(द) 1770 में

4. भारत का अन्तिम वायसराय था—

(अ) लॉर्ड माउन्टबेटन
(ब) लॉर्ड कर्जन
(स) इरविन
(द) प्रिंस चार्ल्स।

5. रॉबर्ट क्लाइव ने हिन्दुस्तान के नक्शे तैयार करने का काम सौंपा था—

(अ) जेम्स मिल को
(ब) वॉरेन हेस्टिंग्स को
(स) जेम्स रेनेल को
(द) ड्यूक ऑफ कर्नाट को।

6. भारतीय इतिहास के प्रमुख स्रोत हैं—

(अ) सरकारी दस्तावेज
(ब) अखबारों की रिपोर्टें
(स) यात्रियों के संस्मरण
(द) उपर्युक्त सभी।

7. ब्रिटिश सत्ता का प्रतीक है—

(अ) जेम्स रेनेल
(ब) रॉबर्ट क्लाइव
(स) ब्रिटेनिया
(द) रानी विक्टोरिया

8. जेम्स मिल कहाँ का निवासी था?

(अ) आयरलैंड
(ब) स्कॉटलैंड
(स) फिनलैंड
(द) नीदरलैंड

9. 1817 में स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री और राजनीतिक दार्शनिक जेम्स मिल ने तीन विशाल खंडों में कौनसी किताब लिखी?

अथवा

जेम्स मिल द्वारा लिखी गई पुस्तक हैं—

(अ) मध्यकालीन भारत
(ब) ब्रिटिश भारत का इतिहास
(स) द ग्रेट रिबेलियन
(द) ब्रिटिश से पूर्व भारत

अथवा

'ब्रिटिश भारत का इतिहास' पुस्तक के लेखक थे—

(अ) डलहौजी
(ब) जेम्स मिल
(स) लॉरेंस
(द) बेंटिक

10. खुशनवीसी का आशय है?

(अ) बहुत सुन्दर ढंग से चीजें लिखने वाले
(ब) बहुत खुश रहने वाले
(स) सुन्दर नक्काशी करने वाले
(द) इनमें से कोई नहीं

11. भारत में छपाई तकनीक फैलने लगी थी—

(अ) 18वीं सदी के प्रारम्भ में
(ब) 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध में
(स) 19वीं सदी के मध्य तक
(द) 20वीं सदी में

12. जेम्स मिल के अनुसार भारत को सभ्यता की राह पर किस प्रकार ले जाया जा सकता है?

(अ) तानाशाही द्वारा
(ब) हिन्दू शासकों द्वारा
(स) ब्रिटिश शासन द्वारा
(द) मुसलमानों द्वारा

13. जनगणना की प्रक्रिया प्रारंभ हुई—

(अ) 19वीं सदी के प्रारंभ में
(ब) 19वीं सदी के आखिर से
(स) 18वीं सदी से
(द) 20वीं सदी के आखिर से

उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (ब) 3. (स) 4. (अ) 5. (स) 6. (द) 7. (स) 8. (ब) 9. (ब) 10. (अ) 11. (स) 12. (स) 13. (ब)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. आम समझ के हिसाब से .................... को तारीखों का पर्याय माना जाता था।

2. महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को बचाकर रखने के लिए .................... होते हैं।

3. राष्ट्रीय .................... और राष्ट्रीय .................... सर्वप्रथम नई दिल्ली में बनवाया गया।

4. उन्नीसवीं सदी के मध्य तक .................... तकनीक भी फैलने लगी थी।

5. .................... के शासन काल में लोगों के पास समानता, स्वतन्त्रता या आजादी नहीं थी।

6. औपनिवेशिक शासन के दौरान जनगणना के अलावा वानस्पतिक सर्वेक्षण, .................... सर्वेक्षण और .................... सर्वेक्षण भी किये गए।

7. भारत पर अंग्रेजों की विजय के समर्थक .................... को वर्चस्व स्थापित करने की प्रक्रिया में .................... बहुत महत्त्वपूर्ण लगता था।

8. ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा लिखे इतिहास प्रथम गवर्नर जनरल .................... के शासन से शुरू होते थे और आखिरी वायसराय .................... के साथ खत्म होते थे।

उत्तर-1. इतिहास, 2. अभिलेखागार, 3. संग्रहालय, 4. छपाई, 5. अंग्रेजों, 6. पुरातात्विक, वन 7. रेनेल, नक्शे तैयार करना 8. वारेन हेस्टिंग्स, लार्ड माउण्टबेटन।

सही या गलत बताइए-

1. आम समझ के हिसाब से इतिहास को तारीखों का पर्याय माना जाता था।

2. अंग्रेजी शासन से पहले सारा अंधकार का दौर था।

3. डायरियों, आत्मकथाओं, संस्मरण आदि से आम पढ़े-लिखे लोगों की सोच पता चलती है।

4. अंग्रेजों को लगता था कि दस्तावेजों का कोई महत्त्व नहीं होता।

उत्तर-1. सही 2. गलत 3. सही 4. गलत।

सही मिलान कीजिए-

(अ)(ब)
1. जेम्स रेनेल(i) भारत के पहले गवर्नर जनरल
2. लॉर्ड माउण्टबेटन(ii) हिन्दुस्तान के नक्शे
3. जेम्स मिल(iii) आखिरी वायसराय
4. वारेन हेस्टिंग्स(iv) अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक दार्शनिक

उत्तर-1. (ii) 2. (iii) 3. (iv) 4. (i)

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. क्या इतिहास को केवल तारीखों का पर्याय माना जा सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?

उत्तर-नहीं। क्योंकि कई ऐतिहासिक घटनाएँ एक लम्बी प्रक्रिया का परिणाम हो सकती हैं।

प्रश्न 2. भारत के कोई चार गवर्नर-जनरलों के नाम दीजिए।

उत्तर-(1) वारेन हेस्टिंग्स, (2) लॉर्ड डलहौजी (3) लॉर्ड कर्जन, (4) इरविन।

प्रश्न 3. ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा लिखे गये भारतीय इतिहास में मुख्यतः किनका वर्णन है?

उत्तर-इनके द्वारा लिखे गये इतिहास में मुख्यतः गवर्नर-जनरलों तथा वायसरॉयों की नीतियों एवं कार्यों का वर्णन है।

प्रश्न 4. जेम्स मिल कौन था?

उत्तर-जेम्स मिल स्कॉटलैंड का अर्थशास्त्री तथा राजनीतिक दार्शनिक था।

प्रश्न 5. जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को कितने कालखण्डों में बाँटा था?

उत्तर-तीन कालखण्डों में-(1) हिन्दू, (2) मुस्लिम तथा (3) ब्रिटिश।

प्रश्न 6. एशियाई समाजों के बारे में मिल को क्या लगता था?

उत्तर-मिल को लगता था कि सभी एशियाई समाज सभ्यता के मामले में यूरोप से पीछे हैं।

प्रश्न 7. इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को अंग्रेजों से भिन्न रूप से कितने काल-खण्डों में बाँटा है?

उत्तर-इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को अंग्रेजों से भिन्न रूप से तीन काल-खण्डों में-(1) प्राचीन काल, (2) मध्य काल, (3) आधुनिक काल में बाँटा है।

प्रश्न 8. भारत के औपनिवेशिक इतिहास लेखन के कोई दो महत्त्वपूर्ण स्रोत बतलाइये।

उत्तर-(1) अंग्रेजी शासन द्वारा तैयार किये गये सरकारी रिकार्ड।

(2) महत्त्वपूर्ण लोगों की आत्मकथाएँ तथा तीर्थ यात्रियों व यात्रियों के संस्मरण।

प्रश्न 9. जनगणना से क्या जानकारियाँ एकत्रित की जाती थीं?

उत्तर-जनगणना के द्वारा भारत के सभी प्रान्तों में रहने वाले लोगों की संख्या, उनकी जाति, इलाके और व्यवसाय के बारे में जानकारियाँ एकत्रित की जाती थीं।

प्रश्न 10. खुशनवीसी कौन होते हैं?

उत्तर-खुशनवीसी या सुलेखनवीस वे लोग होते हैं जो बहुत सुन्दर ढंग से चीजें लिखते हैं।

प्रश्न 11. पश्चिम में आधुनिक काल को क्या माना जाता है?

उत्तर-पश्चिम में आधुनिक काल को विज्ञान, तर्क, लोकतंत्र, मुक्ति और समानता जैसी आधुनिकता की ताकतों के विकास का युग माना जाता है।

प्रश्न 12. सरकारी रिकार्ड्स पर आधारित इतिहास से हमें क्या समझने में सहायता नहीं मिलती है?

उत्तर-सरकारी रिकार्ड्स पर आधारित इतिहास से हमें देश के दूसरे लोगों की भावनाओं व उनकी कार्रवाइयों की वजहों की जानकारी नहीं मिलती है।

प्रश्न 13. ब्रिटेनिया का सम्बन्ध किस देश से है?

उत्तर-ग्रेट ब्रिटेन से।

प्रश्न 14. भारत का मानचित्र बनाने के लिए रॉबर्ट क्लाइव ने किसको पहली बार नियुक्त किया?

उत्तर-जेम्स रेनेल को।

लघुत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. इतिहास क्या है? समझाइए।

उत्तर-(1) इतिहास केवल तारीखों का अध्ययन ही नहीं है।

(2) यह अलग-अलग समय पर समाज में आये बदलावों का भी अध्ययन है।

(3) इसका सम्बन्ध इस बात से भी है कि अतीत में चीजें किस तरह की थीं और उनमें क्या बदलाव आए हैं।

प्रश्न 2. आधुनिक इतिहासकार किस तरह के मुद्दों तथा सवालों पर भी लिखने लगे हैं?

उत्तर— वर्तमान में इतिहासकार इन मुद्दों तथा सवालों पर भी लिखने लगे हैं—

(1) लोग किस तरह अपनी आजीविका चलाते थे।

(2) लोग क्या पैदा करते थे तथा क्या खाते थे।

(3) शहर किस तरह बने तथा बाजार किस तरह फैले।

(4) रियासतें किस तरह बनीं, नये विचार कैसे पनपे तथा संस्कृति व समाज किस तरह बदले।

प्रश्न 3. कोई इतिहास या कहानी लिखते समय उसे टुकड़ों या अध्यायों में क्यों बाँटा जाता है?

उत्तर— (1) ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि हर अध्याय में कुछ सामंजस्य रहे।

(2) इससे इतिहास अथवा कहानी को आसानी से समझा जा सकता है।

(3) इस प्रक्रिया में सिर्फ उन घटनाओं पर जोर दिया जाता है जो उस इतिहास अथवा कहानी को पेश करने में मददगार होती हैं।

प्रश्न 4. इतिहास को अलग-अलग काल-खण्डों में बाँटने का प्रयत्न क्यों किया जाता है?

उत्तर— इतिहास को अलग-अलग काल-खण्डों में बाँटने का प्रयत्न इसलिये किया जाता है जिससे किसी एक दौर अथवा समयावधि की विशेषताओं तथा उसके केन्द्रीय तत्त्वों को समझा जा सके। काल-खण्डों में बाँटने से एक अवधि से दूसरी अवधि के बीच आए बदलावों की भी जानकारी हो जाती थी।

प्रश्न 5. इतिहासकार औपनिवेशिक युग किसे कहते हैं?

उत्तर— अंग्रेजों के शासन काल में लोगों के पास समानता, स्वतंत्रता या आजादी नहीं थी तथा न ही यह आर्थिक विकास और प्रगति का दौर था। इस दौर को इतिहासकार 'औपनिवेशिक युग' कहते हैं।

प्रश्न 6. औपनिवेशीकरण किसे कहते हैं?

उत्तर— जब एक देश पर दूसरे देश के दबदबे से वहाँ राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक बदलाव (मूल मान्यताओं, पसन्द-नापसन्द तथा रीति-रिवाज व तौर-तरीकों आदि में बदलाव) आते हैं, तो इस प्रक्रिया को औपनिवेशीकरण कहते हैं।

प्रश्न 7. भारत की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए अंग्रेजों ने क्या कोशिशें कीं?

उत्तर— (1) अंग्रेजों ने अपने सारे खर्चों को निपटाने के लिए राजस्व वसूला।

(2) उन्होंने अपनी जरूरत की चीजों को सस्ती कीमत पर खरीदा।

(3) निर्यात के लिए उन्होंने यहाँ पर महत्त्वपूर्ण फसलों की खेती कराई।

प्रश्न 8. दस्तावेजों की प्रतियाँ किस प्रकार बनाई जाती थीं?

उत्तर— खुशनवीसी या सुलेखनवीस दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक नकलें बनाते थे। उन्नीसवीं सदी के मध्य तक छपाई तकनीक प्रचलित होने के कारण अब इसके द्वारा दस्तावेजों की प्रतियाँ बनाई जाने लगी थीं।

प्रश्न 9. अंग्रेजी शासन के दौरान किये जाने वाले प्रमुख सर्वेक्षण बतलाइये।

उत्तर— अंग्रेजी शासन के दौरान अनेक प्रकार के सर्वेक्षण कराये गये। इनमें प्रमुख निम्न थे—

(1) राजस्व सर्वेक्षण, (2) जनगणना सर्वेक्षण, (3) वानस्पतिक सर्वेक्षण, (4) प्राणि वैज्ञानिक सर्वेक्षण, (5) पुरातत्वीय सर्वेक्षण, (6) मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण, (7) वन सर्वेक्षण आदि।

प्रश्न 10. औपनिवेशिक शासन में कराये गये सर्वेक्षणों के उद्देश्य बताइये।

उत्तर— (1) पूरे देश का नक्शा तैयार करना।

(2) धरती की सतह, मिट्टी की गुणवत्ता, वहाँ मिलने वाले पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं एवं स्थानीय इतिहासों तथा फसलों का पता लगाना।

(3) प्रशासन को समुचित ढंग से चलाने के लिए जानकारियाँ एकत्रित करना।

प्रश्न 11. अधिकृत सरकारी रिकार्डों से हमें क्या पता चलता है?

उत्तर— अधिकृत सरकारी रिकार्डों से हमें केवल निम्न सूचनाएँ मिलती हैं—

(1) सरकारी अफसर क्या सोचते थे।

(2) उनकी दिलचस्पी किन चीजों में थी।

(3) बाद के लिए वे किन चीजों को बचाये रखना चाहते थे।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-II

प्रश्न 1. अभिलेखागारों का क्या महत्त्व है?

उत्तर— (1) इनमें महत्त्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखे जाते हैं।

(2) अभिलेखागारों में हम उन पत्रों एवं ज्ञापनों को देख

सकते हैं जो उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में प्रशासन की एक शाखा से दूसरी शाखा के पास भेजे गये थे।

(3) इनमें हम जिला अधिकारियों द्वारा तैयार किये गये नोट्स तथा रिपोर्ट एवं उच्च अधिकारियों द्वारा प्रान्तीय अधिकारियों को भेजे गए सुझाव एवं निर्देश देख सकते हैं।

प्रश्न 2. सरकारी रिकॉर्ड्स की क्या सीमाएँ थीं? वर्णन कीजिए।

अथवा

इतिहास के स्रोत के रूप में सरकारी रिकॉर्ड्स का अध्ययन करते समय आप किन बातों को ध्यान में रखेंगे?

उत्तर- (1) सरकारी रिकॉर्ड्स निष्पक्ष नहीं होते। वे सरकारी कार्यों को जायज ठहराते थे।

(2) इनसे केवल सरकारी दृष्टिकोण की ही जानकारी मिलती थी।

(3) सरकारी रिकॉर्ड्स से यह समझने में मदद नहीं मिलती कि देश के दूसरे लोग क्या महसूस करते थे और उनकी कार्यवाहियों की क्या वजह थी।

प्रश्न 3. अंग्रेजों द्वारा सुझाए गये वर्गीकरण से हटकर इतिहासकारों द्वारा भारतीय इतिहास को जिस तरह से काल-खण्डों में बाँटा गया है, उसकी क्या समस्याएँ हैं?

उत्तर- अन्य इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को प्राचीन काल, मध्य काल तथा आधुनिक काल में बाँटा है। इस विभाजन की निम्न समस्याएँ हैं-

(1) इतिहास को इन काल-खण्डों में बाँटने का यह तरीका भी पश्चिम से ही लिया गया है।

(2) पश्चिम में आधुनिक काल को विज्ञान, तर्क, लोकतन्त्र, मुक्ति तथा समानता आदि तत्त्वों से युक्त माना जाता है जबकि उनके अनुसार मध्यकालीन समाज में ये विशेषताएँ नहीं थीं।

(3) अंग्रेजों के शासन में, जिसे आधुनिक काल कहा जाता है, भारत में लोगों के पास न तो समानता, स्वतन्त्रता तथा आजादी ही थी, न ही यह आर्थिक विकास और प्रगति का दौर था।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. आपके विचारानुसार किसी ऐसी घटना या प्रक्रिया के लिए कोई तारीख तय कर देना क्यों गलत है, जो एक लम्बे समय तक चलती रहती है?

उत्तर- ऐसी प्रक्रियाओं के लिए जो एक लम्बे समय तक चलती रहती हैं कोई तारीख तय करना गलत होता है क्योंकि समय को हमेशा साल या महीनों के पैमाने पर ही नहीं देखा जा सकता। जैसे भारत में लोगों ने अचानक एक दिन सुबह-सवेरे चाय पीना शुरू नहीं कर दिया था। इसका स्वाद धीरे-धीरे ही उनकी जबान पर चढ़ा था। इस तरह की प्रक्रियाओं के लिए कोई स्पष्ट तिथि नहीं हो सकती। इसी तरह हम ब्रिटिश शासन की स्थापना के लिए भी कोई एक तिथि नहीं बता सकते। राष्ट्रीय आन्दोलन किस दिन शुरू हुआ या अर्थव्यवस्था या समाज में किस दिन बदलाव आए, इसके लिए भी कोई एक तारीख बताना सम्भव नहीं है। ये सारी चीजें एक लम्बे समय में घटती हैं। ऐसे में हम सिर्फ एक अवधि की ही बात कर सकते हैं, एक लगभग सही अवधि के बारे में बता सकते हैं जब वे खास बदलाव दिखाई देने शुरू हुए होंगे।

प्रश्न 2. लोग इतिहास को तारीखों से जोड़कर क्यों देखते हैं? समझाइए।

उत्तर- अधिकांश लोग इतिहास को तारीखों से जोड़कर देखते हैं। इस जुड़ाव का मुख्य कारण है कि किसी समय युद्ध और बड़ी-बड़ी घटनाओं के ब्यौरों को ही इतिहास माना जाता था। यह इतिहास राजा-महाराजाओं और उनकी नीतियों के बारे में होता था। इतिहासकार यह लिखते थे कि कौनसे साल राजा को ताज पहनाया गया, किस साल उसका विवाह हुआ, किस साल उसके घर में बच्चा पैदा हुआ, कौनसे साल उसने कौनसी लड़ाई लड़ी, वह कब मरा और उसके बाद कौन सा शासक गद्दी पर बैठा। इस तरह की घटनाओं के लिए निश्चित तिथि आसानी से बताई भी जा सकती है। अतः इस तरह के इतिहासों में तिथियों का महत्त्व बना रहता और लोग उसे तारीखों से ही जोड़कर देखते हैं।

प्रश्न 3. भारत में ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा लिखे गये इतिहासों की सामान्य विशेषता बताइये।

उत्तर- भारत में ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा लिखे गये इतिहासों की मुख्य सामान्य विशेषता है कि उन्होंने जो भी इतिहास लिखे उनमें भारत के हरेक गवर्नर-जनरल का शासनकाल महत्त्वपूर्ण है। ये इतिहास प्रथम गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के शासन से शुरू होते थे और आखिरी वायसराय लॉर्ड माउण्टबेटन के साथ खत्म होते थे। इनमें दूसरे गवर्नर-जनरलों—हेस्टिंग्स, वेलेजली, बेंटिक, डलहौजी, कैनिंग, लॉरेन्स, लिटन, रिपन, कर्जन, हार्डिंग, इरविन—के बारे में भी खूब वर्णन है। इनके इतिहास में गवर्नर जनरलों और वायसरायों का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला ही छाया रहता था। इतिहास की इन किताबों में सारी तारीखों का महत्त्व इन अधिकारियों, उनकी गतिविधियों, नीतियों, उपलब्धियों के आधार पर ही तय होता था। यह ऐसे था मानो इन लोगों के जीवन के बाहर कोई ऐसी चीज नहीं थी जिसे जानना महत्त्वपूर्ण हो। इन लोगों के जीवन के क्रम ब्रिटिश भारत के इतिहास में अलग-अलग अध्यायों का

विषय बन जाता था। भारतीय समाज के अन्य पक्षों का इन्होंने बहुत कम वर्णन किया है।

प्रश्न 4. एशियाई समाज, संस्कृति एवं सभ्यता विशेषतः भारत के प्रति जेम्स मिल के क्या विचार थे?

उत्तर—एशियाई समाज, संस्कृति एवं सभ्यता के प्रति जेम्स मिल के विचार पूर्वाग्रह से ग्रसित थे। वह अंग्रेजी शासन को प्रगति तथा सभ्यता का प्रतीक मानता था। उसके अनुसार सारे एशियाई समाज सभ्यता के मामले में यूरोप से पीछे थे। इतिहास की उसकी समझदारी ये थी कि भारत में अंग्रेजों के आने से पहले यहाँ हिन्दू और मुसलमान तानाशाहों का ही राज चलता था। यहाँ चारों ओर केवल धार्मिक बैर, जातिगत बन्धनों और अन्धविश्वासों का ही बोलबाला था। मिल के अनुसार ब्रिटिश शासन ही भारत में सभ्यता ला सकता था। मिल ने यहाँ तक सुझाव दिया कि अंग्रेजों को भारत के सम्पूर्ण भू-भाग पर कब्जा कर लेना चाहिए जिससे भारतीयों को ज्ञान तथा सुखी जीवन प्रदान किया जा सके। वह अंग्रेजी शासन से पहले यहाँ अन्धकार का दौर मानता था।

प्रश्न 5. अंग्रेजों की किस समझदारी के चलते ज्ञापन, टिप्पणी और प्रतिवेदन पर आधारित शासन की संस्कृति पैदा हुई?

उत्तर—अंग्रेजों की मान्यता थी कि चीजों को लिखना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। उनके लिए हर निर्देश, हर योजना, नीतिगत फैसले, सहमति, जांच को साफ-साफ लिखना जरूरी था। वे तमाम अहम दस्तावेजों तथा पत्रों को सँभालकर रखना भी आवश्यक समझते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने के बाद चीजों का अच्छी तरह अध्ययन किया जा सकता था और उन पर वाद-विवाद किया जा सकता था। अंग्रेजों की उक्त समझदारी के चलते ज्ञापन, टिप्पणी और प्रतिवेदन पर आधारित शासन की संस्कृति पैदा हुई।

प्रश्न 6. भारत के पिछले 250 वर्षों का इतिहास जानने के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।

उत्तर—भारत के पिछले 250 वर्षों का इतिहास जानने के प्रमुख स्रोत अग्र प्रकार हैं—

(1) सरकारी रिकॉर्ड—अंग्रेजी शासन में रखे गये सरकारी रिकॉर्ड इतिहासकारों का महत्त्वपूर्ण साधन हैं। अंग्रेज विश्वास करते थे कि चीजों को लिखना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। अंग्रेज सभी महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों तथा पत्रों को सम्भालकर रखना आवश्यक मानते थे। उन्होंने विभिन्न दफ्तरों के अलग-अलग रिकार्ड रूम बनवाये थे। महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को बचाकर रखने के लिए अभिलेखागार और संग्रहालय आदि बनवाये थे। इनमें उपलब्ध सरकारी रिकार्डों तथा दस्तावेजों से भारत के पिछले इतिहास को जानने में बहुत मदद मिलती है।

(2) सर्वेक्षण रिपोर्टें—औपनिवेशिक शासन के दौरान अनेक सर्वेक्षण किये गये। इन सर्वेक्षण रिपोर्टों से भी हमें भारत के पिछले 250 वर्षों के इतिहास को जानने में मदद मिलती है।

(3) अन्य स्रोत—उक्त दोनों प्रकार के स्रोतों से अधिकांशतः सरकारी अफसरों की सोच का ही पता चल पाता है। देश के अन्य लोगों के विचार जानने के लिए लोगों की डायरियों, यात्रियों के संस्मरणों, महत्त्वपूर्ण लोगों की आत्मकथाओं, विभिन्न पुस्तक-पुस्तिकाओं तथा अखबारों की खबरों को स्रोत के रूप में काम में लिया जाता है।

प्रश्न 7. आपके विचार में सरकारी अफसरों को छोड़कर देश के दूसरे लोगों के विचारों के बारे में जानने के क्या स्रोत हैं?

उत्तर—सरकारी अफसरों के विचार अधिकृत सरकारी रिकार्ड्स से पता चलते हैं। इन्हें छोड़कर देश के दूसरे लागों के विचारों के बारे में जानने हेतु अन्य स्रोतों की आवश्यकता है। इस हेतु लोगों द्वारा लिखी गई डायरियाँ, तीर्थ यात्राओं एवं यात्रियों के संस्मरण, महत्त्वपूर्ण लोगों की आत्मकथाएँ और स्थानीय बाजारों में बिकने वाली लोकप्रिय पुस्तक-पुस्तिकाएँ आदि महत्त्वपूर्ण हैं। छपाई की तकनीक के विकास के बाद अखबारों की भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका है। नेताओं तथा सुधारकों द्वारा लिखे गये लेख तथा कवियों एवं उपन्यासकारों द्वारा रचित रचनाएँ भी इन स्रोतों में शामिल हैं। लेकिन इन स्रोतों से भी केवल पढ़ना-लिखना जानने वाले लोगों के विचार ही मालूम होते हैं।

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