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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Social Science Chapter 10 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठगत प्रश्न

प्रश्न 1. इस अध्याय की भूमिका को एक बार फिर पढ़िए। आपको ऐसा क्यों लगता है कि बदले की भावना इस समस्या से निपटने का सही रास्ता नहीं हो सकती? अगर सारे समूह बदले के रास्ते पर चल पड़ें तो क्या होगा?

उत्तर- इस अध्याय की भूमिका में यह प्रश्न उठाया गया है कि धर्म से संबंधित किसी भी तरह के वर्चस्व को खत्म कैसे किया जाए? यदि किसी देश में बहुसंख्यक धर्मावलम्बी अल्पसंख्यक धर्मावलम्बियों के साथ भेदभाव करते हैं, अत्याचार करते हैं तो इसे रोकने के लिए क्या किया जाये? अध्याय की भूमिका में इस हेतु दो रास्ते दिखाये गये हैं—प्रथम तो यह कि सारे समूह बदले के रास्ते पर चल पड़ें और द्वितीय, संघर्ष का रास्ता चुनते हुए यह आवाज उठायें कि धर्म और आस्था के आधार पर किये जाने वाले भेदभाव का अन्त किया जाये अर्थात् धर्म से संबंधित किसी भी तरह के वर्चस्व को खत्म किया जाये।

इसमें दूसरा रास्ता सही है क्योंकि यह अन्ततः विश्व शांति की ओर ले जाता है। और पहला रास्ता जिसमें बदला लेने की बात कही गयी है, यदि इसे सारे धर्मावलम्बी समूह अपनायेंगे तो इससे विभिन्न समुदायों के बीच परस्पर सहयोग व भाईचारा खत्म होगा एवं हिंसा बढ़ेगी तथा इसमें विश्वयुद्ध का खतरा बना रहेगा।

प्रश्न 2. सरकारी स्कूलों में अक्सर कई धर्मों के बच्चे आते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए धर्मनिरपेक्ष राज्य के तीन उद्देश्यों को दोबारा पढ़िए। आप इस बारे में दो वाक्य लिखिए कि सरकारी स्कूलों को किसी एक धर्म को बढ़ावा क्यों नहीं देना चाहिए?

उत्तर- धर्मनिरपेक्ष राज्य के तीन उद्देश्य ये हैं—

(1) कोई एक धार्मिक समुदाय किसी दूसरे धार्मिक समुदाय को न दबाए।

(2) कुछ लोग अपने ही धर्म के अन्य सदस्यों को न दबाएं।

(3) राज्य न तो किसी खास धर्म को थोपेगा और न ही लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनेगा।

सरकारी स्कूलों को किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देना चाहिए क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। यह सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखता है और स्वयं को धर्म से दूर रखता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. अपने आस-पड़ोस में प्रचलित धार्मिक क्रियाकलापों की सूची बनाइये। आप विभिन्न प्रकार की प्रार्थनाओं, विभिन्न देवताओं की पूजा, विभिन्न पवित्र स्थानों, विभिन्न प्रकार के धार्मिक संगीत और गायन आदि को देख सकते हैं। क्या इससे धार्मिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता का पता लगता है?

उत्तर- (नोट- विद्यार्थी अपने आस-पड़ोस में प्रचलित धार्मिक क्रियाकलापों की सूची स्वयं बनाएँ। ये धार्मिक क्रियाकलाप पूजा-पाठ, नमाज, प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों, धार्मिक संगीत, गायन, त्योहारों के रूप में बताये जा सकते हैं।)

भारत में विभिन्न प्रकार की प्रार्थनाओं, विभिन्न देवताओं की पूजा, विभिन्न पवित्र स्थानों, विभिन्न प्रकार के धार्मिक संगीत और गायन आदि को देखने से यह स्पष्ट होता है कि यहाँ धार्मिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता है। सभी धर्मावलम्बी शांतिपूर्वक ढंग से पूजा-अर्चना, इबादत अपने-अपने ढंग से करने के लिए स्वतंत्र हैं। राज्य इनकी गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करता है। सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखता है।

प्रश्न 2. अगर किसी धर्म के लोग यह कहते हैं कि उनका धर्म नवजात शिशुओं को मारने की छूट देता है तो क्या सरकार किसी तरह का दखल देगी या नहीं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताइये।

उत्तर- भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप की भी छूट दी गयी है। धर्म से राज्य का फासला सैद्धान्तिक है। संविधान में दिये गये आदर्शों तथा मूल अधिकारों की रक्षा के आधार पर राज्य किसी भी धर्म के मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। यदि कोई धर्म नवजात शिशुओं को मारने की छूट देता है, तो यह व्यक्ति के जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है। ऐसी स्थिति में संविधान के आदर्शों एवं जीवन के अधिकार के उल्लंघन को रोकने के लिए राज्य धर्म के मामले में हस्तक्षेप कर नवजात शिशुओं को मारने को रोकने की कार्यवाही कर सकता है।

प्रश्न 3. इस तालिका को पूरा कीजिये-

उद्देश्य

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

इस उद्देश्य के उल्लंघन का एक उदाहरण

1. एक धार्मिक समुदाय दूसरे समुदाय पर वर्चस्व नहीं रखता।

इससे बहुमत की निरंकुशता और उसके कारण मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होगा।

यहूदी धर्म को मानने वाले इजरायल में मुसलमान और ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाना।

2. राज्य न तो किसी धर्म को थोपता है और न ही लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनता है।

सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करना।

सऊदी अरब में गैर-मुसलमानों को मंदिर या गिरजाघर बनाने की छूट नहीं है।

3. एक ही धर्म के कुछ लोग अपने ही धर्म के दूसरे लोगों को न दबाएं।

सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों का राज्य द्वारा आश्वासन देना।

समाज की प्रभुत्वशाली जातियों द्वारा दलितों को दबाना।

प्रश्न 4. अपने स्कूल की छुट्टियों के वार्षिक कैलेंडर को देखिये। उनमें से कितनी छुट्टियाँ विभिन्न धर्मों से संबंधित हैं? इससे क्या संकेत मिलता है?

उत्तर- अपने स्कूल की छुट्टियों के वार्षिक कैलेंडर में लगभग 30 छुट्टियाँ विभिन्न धर्मों से सम्बन्धित हैं। इससे हमें निम्न संकेत मिलता है-

(1) भारत वास्तविक अर्थों में एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।

(2) भारत में सभी धर्मों को समानता प्रदान की गई है।

(3) यहाँ सभी धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाता है तथा उन्हें अपने धार्मिक क्रियाकलापों को करने की छूट प्रदान की गई है।

प्रश्न 5. एक ही धर्म के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोणों के कुछ उदाहरण दें।

उत्तर- एक ही धर्म के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोणों के उदाहरण—

(1) हिन्दुओं में अनेक लोग जातिप्रथा आदि का विरोध करते हैं तो ऐसे भी लोग हैं जो उसे सही ठहराते हैं।

(2) मुस्लिमों में प्रगतिशील लोग महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता तथा समानता के अधिकार के पक्षधर हैं तो रूढ़िवादी लोग इसका विरोध करते हैं।

(3) इसी प्रकार हिन्दुओं में शैव, वैष्णव; मुस्लिमों में शिया, सुन्नी; जैनियों में दिगम्बर, श्वेताम्बर; बौद्धों में हीनयान, महायान; सिक्खों में केशधारी, नामधारी तथा ईसाइयों में कैथोलिक व प्रोटेस्टेंट दृष्टिकोण वाले लोग पाये जाते हैं।

प्रश्न 6. भारतीय राज्य धर्म से फासला भी रखता है और उसमें हस्तक्षेप भी करता है। यह उलझाने वाला विचार लग सकता है। इस पर कक्षा में एक बार फिर चर्चा कीजिये। चर्चा के लिए इस अध्याय में दिए गए उदाहरणों के अलावा आप अपनी जानकारी के अन्य उदाहरणों का भी सहारा ले सकते हैं।

उत्तर- भारतीय राज्य धर्म से फासला रखता है- भारतीय राज्य स्वयं को धर्म से दूर रखता है। राज्य न तो किसी खास धर्म को थोपेगा और न ही लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनेगा। भारतीय राज्य की बागडोर न तो किसी एक धार्मिक समूह के हाथों में है और न ही राज्य किसी एक धर्म को समर्थन देता है। भारत में कचहरी, थाने, सरकारी विद्यालय तथा कार्यालयों जैसे सरकारी संस्थानों में किसी खास धर्म को प्रोत्साहन देने या उसका प्रदर्शन करने की अपेक्षा नहीं की जाती है।

दूसरे, सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करने और धार्मिक क्रियाकलापों में दखल न देने के लिए, राज्य कुछ धार्मिक समुदायों को कुछ विशेष छूट देता है। उदाहरण के लिए, पगड़ी पहनना सिक्ख धर्म की प्रथाओं के मुताबिक महत्वपूर्ण है। फलतः इस धार्मिक आस्था में दखलंदाजी से बचने के लिए राज्य ने कानून में यह रियायत दे दी है कि सिक्खों को हैलमेट पहनने की जरूरत नहीं है।

भारतीय राज्य धर्म में हस्तक्षेप भी कर सकता है- जब कोई धर्म संविधान में दिये गये आदर्शों, मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है तो मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकने तथा नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारन्टी देने के लिए राज्य धर्म में हस्तक्षेप कर मूल अधिकारों के उल्लंघन को रोकता है।

उदाहरण के लिए, भारतीय संविधान ने छुआछूत पर पाबन्दी लगाई है। इसी प्रकार माँ-बाप की सम्पत्ति में बराबर हिस्से के अधिकार का सम्मान करने के लिए राज्य को समुदायों के धर्म पर आधारित 'निजी कानूनों' में ही हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

राज्य का हस्तक्षेप सहायता के रूप में भी हो सकता है। जैसे- राज्य भारतीय धार्मिक समुदायों के स्कूलों को सीमित आर्थिक सहायता प्रदान कर सकता है।

स्पष्ट है कि संविधान में दिये गये आदर्शों के आधार पर राज्य किसी भी धर्म के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है। ये आदर्श राज्य के हस्तक्षेप की कसौटी हैं।

प्रश्न 7. पाठ्यपुस्तक में पृष्ठ संख्या 27 पर दिया गया यह पोस्टर 'शान्ति' के महत्व को रेखांकित करता है। इस पोस्टर में कहा गया है कि "शान्ति कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है...... यह हमारी आपसी भिन्नताओं और साझा हितों को नजरअंदाज करके नहीं चल सकती।" ये वाक्य क्या बताते हैं? अपने शब्दों में लिखिए। धार्मिक सहिष्णुता से इसका क्या सम्बन्ध है?

उत्तर- पोस्टर के वाक्य यह बताते हैं कि शांति तभी स्थापित की जा सकती है जब आपसी भिन्नताओं और साझा हितों को ध्यान में रखें। यदि हम एक-दूसरे के हितों के प्रति सहिष्णुता का बर्ताव करेंगे तो शांति अपने आप स्थापित होने लगेगी और यदि हम एक-दूसरे की भिन्नताओं और हितों को नजरअंदाज करेंगे तो इससे शांति भंग होगी। धार्मिक सहिष्णुता भी शांति स्थापना का एक रास्ता है। इसके अंतर्गत सभी धर्मावलंबी एक-दूसरे के धर्मों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखते हैं और सर्वधर्म समभाव के दृष्टिकोण का पालन करते हैं। अतः धार्मिक सहिष्णुता का शांति के साथ सकारात्मक सम्बन्ध है।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ-सार

(1) धर्मनिरपेक्षता की समझ - धर्मनिरपेक्षता का मूलमंत्र यह है कि धर्म से संबंधित किसी भी तरह का वर्चस्व खत्म होना चाहिए। धर्म और आस्था के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। इतिहास में हमें धर्म के आधार पर भेदभाव, बेदखली और अत्याचार के अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं। भेदभाव की ऐसी घटनाएँ तब और अधिक बढ़ जाती हैं जब दूसरे धर्मों के स्थान पर राज्य किसी एक धर्म को अधिकृत मान्यता प्रदान करता है।

(2) धर्मनिरपेक्षता क्या है? - धर्म को राज्य से अलग रखने की अवधारणा को ही धर्मनिरपेक्षता कहा जाता है।

(3) धर्म को राज्य से अलग रखना महत्वपूर्ण क्यों है?

(i) बहुमत धर्मावलम्बियों की निरंकुशता और उसके कारण अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का हनन वह प्रमुख कारण है जिसके चलते लोकतांत्रिक समाजों में राज्य और धर्म को अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण माना जाता है ताकि धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव व अत्याचार न हों।

(ii) लोकतांत्रिक समाजों में धर्म को राज्य से अलग रखने का दूसरा कारण यह है कि लोगों के धार्मिक चुनाव के अधिकार की रक्षा हो सके तथा किसी भी नागरिक को एक धर्म से निकलने और दूसरे धर्म को अपनाने या धार्मिक उपदेशों की अलग ढंग से व्याख्या करने की स्वतंत्रता की रक्षा हो सके।

(4) भारतीय धर्मनिरपेक्षता क्या है?

भारतीय संविधान में कहा गया है कि भारतीय राज्य धर्मनिरपेक्ष होगा अर्थात् प्रथमत: राज्य स्वयं को धर्म से दूर रखता है। यह न तो किसी खास धर्म को थोपेगा और न ही लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनेगा। दूसरे, राज्य सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करेगा और धार्मिक क्रियाकलापों में दखल न देने के लिए राज्य कुछ खास धार्मिक समुदायों को कुछ विशेष छूट देता है। तीसरे, कोई एक धार्मिक समुदाय किसी दूसरे धार्मिक समुदाय को न दबाए या कुछ लोग अपने ही धर्म के अन्य सदस्यों को न दबाएँ इस हेतु भारतीय राज्य धर्म के क्षेत्र में हस्तक्षेप भी करता है।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

1. हिटलर ने जर्मनी में अत्याचार किये-

(अ) यहूदियों पर
(ब) मुसलमानों पर
(स) हिन्दुओं पर
(द) ईसाइयों पर

2. 1960 के दशक में किस देश में मजदूरों की कमी हो गई थी?

(अ) भारत
(ब) फ्रांस
(स) अमेरिका
(द) इजरायल

3. कहाँ के स्कूलों में बच्चे सुबह सबसे पहले 'वफादारी की शपथ' लेते हैं?

(अ) चीन
(ब) पाकिस्तान
(स) भारत
(द) संयुक्त राज्य अमेरिका

4. धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय राज्य कौनसी नीति अपनाता है?

(अ) राज्य का खुद को धर्म से दूर रखना
(ब) अहस्तक्षेप की नीति अपनाना
(स) धर्म में हस्तक्षेप करना
(द) उपरोक्त सभी

5. भारत में राज्य द्वारा खुद को धर्म से दूर रखने का उदाहरण है—

(अ) राज्य द्वारा किसी एक धर्म को समर्थन न देना
(ब) छुआछूत रोकने हेतु कानून बनाना
(स) माँ-बाप की सम्पत्ति में बराबर हिस्से हेतु धार्मिक निजी कानूनों में हस्तक्षेप करना।
(द) इनमें से कोई नहीं

6. वर्ष 2004 में कौनसे देश में कानून बनाया गया कि कोई भी विद्यार्थी इस्लामी बुरका, यहूदी टोपी या बड़े-बड़े ईसाई क्रॉस जैसे धार्मिक अथवा राजनीतिक चिह्न धारण करके स्कूल नहीं आयेगा?

(अ) चीन
(ब) इंग्लैंड
(स) फ्रांस
(द) भारत

7. भारतीय सरकार की धर्मनिरपेक्षता की नीति के संदर्भ में निम्न में से किस संस्थान को त्यौहार मनाने की आजादी है?

(अ) न्यायालय
(ब) संसद
(स) निजी स्कूल
(द) पुलिस स्टेशन

8. हम एक सरकारी स्कूल में क्या नहीं कर सकते?

(अ) राष्ट्रगान गाना
(ब) राष्ट्रीय ध्वज फहराना
(स) धार्मिक त्यौहार मनाना
(द) गणतंत्र दिवस मनाना

9. राज्य द्वारा किसी एक धर्म को मान्यता प्रदान करने पर क्यों होता है?

(अ) भेदभाव की घटनाएँ बढ़ जाती हैं
(ब) भेदभाव खत्म हो जाता है।
(स) सभी धर्म आपस में मिलजुल कर रहते हैं
(द) लोग दूसरे धर्म का सम्मान करने लगते हैं।

10. धर्म को राज्य से अलग रखने की अवधारणा को कहा जाता है—

(अ) धार्मिक
(ब) धर्मनिरपेक्षता
(स) संप्रभु
(द) स्वतंत्र

11. सिक्खों के लिए, क्या पहनना धर्मानुसार महत्त्वपूर्ण है?

(अ) वर्दी
(ब) पगड़ी
(स) कुर्ता
(द) शर्ट

12. इजरायल राज्य में कौनसा धर्म बहुसंख्यक है?

(अ) ईसाई
(ब) मुस्लिम
(स) यहूदी
(द) सिख

13. धर्मनिरपेक्षता से तात्पर्य है :

(अ) राज्य का अपने धर्म से
(ब) राज्य द्वारा चुने गए धर्म से
(स) धर्म को राज्य से अलग रखने से
(द) धर्म सभा द्वारा चुने गए धर्म से

उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (ब) 3. (द) 4. (द) 5. (अ) 6. (स) 7. (स) 8. (स) 9. (अ) 10. (ब) 11. (ब) 12. (स) 13. (स)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये-

1. ............... ने जर्मनी में कई लाख लोगों को केवल धर्म के आधार पर मार दिया था।

2. धर्म को राज्य से अलग रखने की अवधारणा को ............... कहा जाता है।

3. भारतीय संविधान ............... को अपने स्कूल और कॉलेज खोलने का अधिकार देता है।

4. संयुक्त राज्य अमेरिका में स्कूलों में ली जाने वाली शपथ में ............... शब्द आते हैं।

5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य का धर्म से फासला ............... है।

6. आपकी कक्षा में उपस्थित अन्य धर्म के सहपाठियों के साथ आप ............... करना पसंद करेंगे।

7. भारत एक धर्मनिरपेक्ष ............... है।

8. धर्म से संबंधित किसी भी तरह का ............... खत्म होना चाहिए। यही ............... का मूलमंत्र है।

उत्तर- 1. हिटलर 2. धर्मनिरपेक्षता 3. धार्मिक समुदायों 4. ईश्वर की छत्रछाया 5. सैद्धान्तिक 6. मित्रता 7. राज्य 8. वर्चस्व, धर्मनिरपेक्षता।

सही या गलत बताइए-

1. सऊदी अरब में गैर-मुसलमानों को मन्दिर या गिरजाघर बनाने की छूट नहीं है।

2. भारत में सरकारी स्कूलों में धार्मिक उत्सव मनाये जाते हैं।

3. संविधान में दिये गये आदर्शों के आधार पर राज्य किसी भी धर्म के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

4. भारतीय संविधान अपने नागरिकों को मौलिक अधिकारों का आश्वासन देता है।

5. धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय धर्मनिरपेक्षता का तीसरा तरीका है-हस्तक्षेप।

उत्तर- 1. सही 2. गलत 3. गलत 4. सही 5. सही।

सही मिलान कीजिये-

(अ)

(ब)

1. यहूदियों पर घोर अत्याचार

(i) सऊदी अरब

2. मुसलमानों एवं ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ अमानवीय व्यवहार

(ii) भारत

3. गैर-मुसलमानों को मंदिर/गिरजाघर बनाने की छूट नहीं

(iii) इजरायल

4. सिख युवकों को हैलमेट न पहनने - (iv) संयुक्त राज्य अमेरिका की छूट

5. स्कूलों में वफादारी की शपथ - (v) जर्मनी

उत्तर-1. (v) 2. (iii) 3. (i) 4. (ii) 5. (iv)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के साथ भेदभाव व उत्पीड़न की घटनाएँ कब अधिक बढ़ जाती हैं?

उत्तर- भेदभाव व उत्पीड़न की ऐसी घटनाएँ तब और ज्यादा बढ़ जाती हैं जब दूसरे धर्मों के स्थान पर राज्य किसी एक धर्म को अधिकृत मान्यता प्रदान कर देता है।

प्रश्न 2. धर्मनिरपेक्षता क्या है?

उत्तर- धर्म को राज्य से अलग रखने की अवधारणा को धर्मनिरपेक्षता कहा जाता है।

प्रश्न 3. धर्मनिरपेक्षता का मूलमंत्र क्या है?

उत्तर- धर्मनिरपेक्षता का मूलमंत्र यह है कि धर्म से संबंधित किसी भी तरह का वर्चस्व खत्म होना चाहिए।

प्रश्न 4. भारत में विद्यालयों में कोई धार्मिक आयोजन न करने का नियम क्या निजी स्कूलों में लागू होता है?

उत्तर- नहीं, भारत में विद्यालयों में कोई धार्मिक आयोजन न करने का नियम निजी स्कूलों में लागू नहीं होता है।

प्रश्न 5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता की नीति को स्पष्ट कीजिये।

उत्तर- भारत में राज्य खुद को धर्म से दूर रखता है, वह धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति अपनाता है।

प्रश्न 6. लोकतांत्रिक समाजों में राज्य और धर्म को अलग रखना क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर- बहुमत की निरंकुशता और उसके कारण मौलिक अधिकारों का हनन को रोकने के लिए राज्य और धर्म को अलग रखना महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 7. धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय धर्मनिरपेक्षता का कोई एक तरीका लिखिए।

उत्तर- भारतीय राज्य स्वयं को धर्म से दूर रखता है।

प्रश्न 8. भारतीय धर्मनिरपेक्षता और अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता में क्या अन्तर है?

उत्तर- अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता में धर्म और राज्य के बीच स्पष्ट अलगाव है, लेकिन भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की छूट दी गई है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. धर्मनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- 'धर्मनिरपेक्षता' से आशय है कि धर्म और आस्था के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। धर्म से संबंधित किसी भी तरह का वर्चस्व खत्म होना चाहिए।

प्रश्न 2. अस्पृश्यता उन्मूलन क्यों आवश्यक है?

उत्तर- अस्पृश्यता के अन्तर्गत एक ही धर्म के लोग (ऊँची जाति के हिन्दू) अपने ही धर्म के अन्य सदस्यों (कुछ निचली जातियों) को दबाते हैं। धर्म के नाम पर अलग-थलग करने और भेदभाव को रोकने के लिए भारतीय संविधान ने अस्पृश्यता पर पाबंदी लगाई है। इससे निचली जातियों के मौलिक अधिकारों का हनन रुकता है। अतः अस्पृश्यता उन्मूलन आवश्यक है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-II

प्रश्न 1. धर्म को राज्य से अलग रखना महत्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर- धर्मनिरपेक्षता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—धर्म को राजसत्ता से अलग करना। एक लोकतांत्रिक देश में यह बहुत आवश्यक है। यथा—

(1) बहुमत की निरंकुशता और उसके कारण मौलिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए लोकतांत्रिक समाजों में राज्य और धर्म को अलग-अलग रखना अति आवश्यक है।

(2) लोगों के धार्मिक चुनाव के अधिकार की रक्षा करने अर्थात् देश के किसी भी व्यक्ति को एक धर्म से निकलने और दूसरे धर्म को अपनाने या धार्मिक उपदेशों की अलग ढंग से व्याख्या करने की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए भी धर्म को राज्य से अलग रखना महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 2. भारतीय धर्मनिरपेक्षता क्या है?

उत्तर- भारतीय धर्मनिरपेक्षता—भारतीय संविधान में कहा गया है कि भारतीय राज्य धर्मनिरपेक्ष होगा। भारत के संविधान के अनुसार, केवल धर्मनिरपेक्ष राज्य ही निम्नलिखित बातों का ख्याल रख सकता है—

(1) कोई एक धार्मिक समुदाय किसी दूसरे धार्मिक समुदाय को न दबाए।

(2) कुछ लोग अपने ही धर्म के अन्य सदस्यों को न दबाएं।

(3) राज्य न तो किसी खास धर्म को थोपेगा और न ही लोगों की धार्मिक स्वतन्त्रता छीनेगा।

प्रश्न 3. भारतीय धर्मनिरपेक्षता और अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता के बीच मुख्य अन्तर क्या है?

उत्तर- भारतीय धर्मनिरपेक्षता और अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता के बीच प्रमुख अन्तर यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में...

राज्य और धर्म, दोनों एक-दूसरे के मामलों में किसी तरह का दखल नहीं दे सकते; जबकि भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की छूट दी गई है। उदाहरण के लिए, भारतीय संविधान ने छुआछूत को खत्म करने के लिए हिन्दू धार्मिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप किया है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय राज्य क्या काम करता है?

उत्तर- धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय राज्य कई तरह के काम करता है। यथा-

(1) धर्म से पृथकता- भारतीय राज्य, प्रथमतः, स्वयं को धर्म से दूर रखता है। भारतीय राज्य की बागडोर न तो किसी धार्मिक समूह के हाथों में है और न ही राज्य किसी एक धर्म को समर्थन देता है। भारत में कचहरी, थाने, सरकारी विद्यालय और दफ्तर जैसे सरकारी संस्थानों में किसी खास धर्म को प्रोत्साहन देने या उसका प्रदर्शन करने की अपेक्षा नहीं की जाती है।

(2) अहस्तक्षेप की नीति- धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए भारतीय धर्मनिरपेक्षता का दूसरा तरीका है- अहस्तक्षेप की नीति। इसका मतलब है कि सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करने, धार्मिक क्रियाकलापों में दखल न देने के लिए, राज्य कुछ खास धार्मिक समुदायों को कुछ विशेष छूट भी देता है। उदाहरण के लिए, सिखों को हैलमेट पहनने के कानून में रियायत देना क्योंकि पगड़ी पहनना सिख धर्म की प्रथाओं के मुताबिक महत्वपूर्ण है। अतः इस धार्मिक आस्था में दखलंदाजी से बचने के लिए राज्य ने कानून में रियायत दे दी है।

(3) हस्तक्षेप की नीति- धार्मिक वर्चस्व को रोकने लिए भारतीय धर्मनिरपेक्षता का तीसरा तरीका हस्तक्षेप करने का है। मौलिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए राज्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है क्योंकि ये मौलिक अधिकार धर्मनिरपेक्ष सिद्धान्तों पर आधारित हैं। राज्य का हस्तक्षेप सहायता के रूप में भी हो सकता है। जैसे- धार्मिक समुदायों के स्कूलों व कालेजों को सीमित आर्थिक सहायता प्रदान करना।

इकाई दो : संसद तथा कानूनों का निर्माण

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