📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. कम-से-कम तीन कारण बताइए कि विभिन्न समूह हाशिये पर क्यों चले जाते हैं?
उत्तर— विभिन्न समूहों के हाशिये पर चले जाने के तीन कारण ये हो सकते हैं—(1) अलग भाषा का बोलना, (2) अलग रीति-रिवाज अपनाना या बहुसंख्यक समुदाय के मुकाबले किसी दूसरे धर्म को अपनाना। (3) अपनी गरीबी के कारण, सामाजिक हैसियत में कमतर माने जाने की वजह से और शेष लोगों के मुकाबले कमतर मनुष्य के रूप में देखा जाना। इन वजहों से ये खुद को हाशिये पर महसूस करते हैं।
प्रश्न 2. दादू को उड़ीसा का अपना गाँव क्यों छोड़ना पड़ा?
उत्तर— नये कानून के तहत आदिवासियों का जंगल पर अधिकार खत्म कर दिया गया। जंगलों से उन्हें विस्थापित कर दिया गया तथा दादू को सरकारी अफसरों व ठेकेदारों ने इतना डरा-धमका दिया कि आखिरकार उसे अपनी जमीन बेचने और छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और जमीन से विस्थापित होने के बाद उसे अपना गाँव छोड़ना पड़ा।
प्रश्न 3. क्या आप अपने राज्य के किसी जनजातीय समुदाय का नाम बता सकते हैं?
उत्तर— भील, मीना, सहरिया, गरासिया आदि।
प्रश्न 4. वह समुदाय कौनसी भाषा बोलता है? क्या वे जंगलों के आस-पास रहते हैं? क्या वे काम की तलाश में दूसरे इलाकों में जाते हैं?
उत्तर— वे समुदाय अपनी लोक भाषाएँ, यथा भीली, गिरसिया आदि बोलते हैं।
हाँ, वे जंगलों के आस-पास भी रहते हैं। हाँ, वर्तमान में वे काम की तलाश में दूसरे इलाकों में भी जाते हैं।
प्रश्न 5. आज के भारत में कौनसी धातुएँ महत्त्वपूर्ण हैं? क्यों? वे धातुएँ कहाँ से हासिल होती हैं? क्या वहाँ आदिवासियों की आबादी है?
उत्तर- आज के भारत में लोहे, ताँबे, सोने-चाँदी के अयस्क, कोयले, हीरे आदि धातुएँ महत्त्वपूर्ण हैं। ये धातुएँ विकास की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व की हैं। भारत में ये धातुएँ जंगलों से मिलती हैं। हाँ, इन स्थानों पर आदिवासियों की आबादी है।
प्रश्न 6. आपकी राय में यह बात महत्त्वपूर्ण क्यों है कि आदिवासियों को भी उनके जंगलों और वनभूमि के इस्तेमाल से सम्बन्धित फैसलों में अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए?
उत्तर- भारत एक लोकतांत्रिक राज्य है और लोकतांत्रिक राज्य में यह बात प्रमुख होती है कि कानून निर्माण में जनता की भागीदारी हो। इस दृष्टि से जंगलों और वनभूमि के प्रयोग से सम्बन्धित फैसलों में उनमें निवास करने वाली जनजातियों की सहभागिता का होना आवश्यक होना चाहिए।
प्रश्न 7. अल्पसंख्यकों के लिए हमें सुरक्षात्मक प्रावधानों की क्यों जरूरत है?
उत्तर- अल्पसंख्यकों के लिए हमें सुरक्षात्मक प्रावधानों की जरूरत निम्नलिखित कारणों से है-
(1) अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के सांस्कृतिक वर्चस्व की आशंका से बचाने के लिए।
(2) अल्पसंख्यकों को भेदभाव एवं नुकसान की आशंका से बचाने हेतु।
(3) अल्पसंख्यकों को उनके जीवन, सम्पत्ति तथा कुशलक्षेम के बारे में सुरक्षा प्रदान करने हेतु।
(4) समानता व न्याय की स्थापना हेतु।
--- पाठ्यपुस्तक के प्रश्न ---
प्रश्न 1. 'हाशियाकरण' शब्द से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में दो-तीन वाक्य लिखिये।
उत्तर- हाशियाकरण शब्द से आशय है कि वह समुदाय जो समाज की मुख्यधारा से अलग कर किनारे या हाशिये पर धकेल दिया गया हो। ऐसा समुदाय समाज के केन्द्र में नहीं होता है तथा उसे इस तरह की बेदखली का एहसास रहता है।
प्रश्न 2. आदिवासी लगातार हाशिये पर क्यों खिसकते जा रहे हैं? दो कारण बताइये।
उत्तर- (1) 200 सालों में आए आर्थिक बदलावों, वन नीतियों और राज्य व निजी उद्योगों के राजनीतिक दबाव की वजह से इन लोगों को जंगलों से विस्थापित कर बागानों, निर्माण स्थलों, उद्योगों और घरों में नौकरी करने के लिए धकेला जा रहा है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि आज आदिवासियों का वन क्षेत्र पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही उन तक सीधी पहुँच है।
(2) जब आदिवासियों को उनकी जमीन से हटाया जाता है तो उनकी आय के स्रोत के अलावा वे अपनी परम्पराओं और रीति-रिवाजों को भी गँवा देते हैं जो उनके जीने और अस्तित्व के स्रोत हैं।
इन कारणों से आदिवासी लगातार हाशिये पर खिसकते जा रहे हैं।
प्रश्न 3. आप अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षाओं को क्यों महत्त्वपूर्ण मानते हैं? इसका एक कारण बताइए।
उत्तर- अल्पसंख्यक समुदाय को बहुसंख्यक समुदाय के सांस्कृतिक वर्चस्व की आशंका से बचाने के लिए संवैधानिक सुरक्षात्मक प्रावधानों का होना अति आवश्यक है। ये प्रावधान उन्हें भेदभाव और नुकसान की आशंका से भी बचाते हैं।
प्रश्न 4. अल्पसंख्यक और हाशियाकरण वाले हिस्से को दोबारा पढ़िये। अल्पसंख्यक शब्द से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- अल्पसंख्यक शब्द आमतौर पर ऐसे समुदायों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो संख्या की दृष्टि से बाकी आबादी के मुकाबले बहुत कम हैं। जैसे- भाषायी और धार्मिक अल्पसंख्यक। लेकिन अल्पसंख्यक की अवधारणा केवल संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सत्ता और संसाधनों तक पहुँच के मुद्दे तथा इसके सामाजिक व सांस्कृतिक आयाम भी जुड़े हुए हैं।
प्रश्न 5. आप एक बहस में हिस्सा ले रहे हैं जहाँ आपको इस बयान के समर्थन में तर्क देने हैं कि "मुसलमान एक हाशियाई समुदाय है।" इस अध्याय में दी गई जानकारियों के आधार पर दो तर्क पेश कीजिए।
उत्तर- भारत में मुसलमान एक हाशियाई समुदाय है क्योंकि-
(1) दूसरे समुदायों के मुकाबले उसे सामाजिक-आर्थिक विकास में उतना लाभ नहीं मिला है। मूलभूत सुविधाओं, साक्षरता और सरकारी नौकरियों की दृष्टि से मुसलमानों का प्रतिशत अन्य समुदायों की तुलना में काफी कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार मुसलमानों में साक्षरता जहाँ केवल 57% है, वहाँ हिन्दुओं, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध और जैन धर्मावलम्बियों की साक्षरता क्रमशः 63, 74, 67, 71 और 86 प्रतिशत है, जो मुसलमानों की साक्षरता प्रतिशत से काफी अधिक है।
(2) दूसरे, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत काफी कम है। प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट, 2006 के अनुसार भारत में मुसलमानों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 13.5 प्रतिशत है, लेकिन सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की संख्या इससे काफी कम है, वह विभिन्न क्षेत्रों में 1.8 से 10.8 प्रतिशत के बीच है। इससे स्पष्ट होता है कि मुसलमान विकास के विभिन्न संकेतकों पर पिछड़े हुए हैं।
प्रश्न 6. कल्पना कीजिए कि आप टेलीविजन पर 26 जनवरी की परेड देख रहे हैं। आपकी एक दोस्त आपके नजदीक बैठी है। वह अचानक कहती है, "इन आदिवासियों को तो देखो, कितने रंग-बिरंगे हैं। लगता है सदा नाचते ही रहते हैं।" उसकी बात सुनकर आप भारत में आदिवासियों के जीवन से सम्बन्धित क्या बातें उसको बतायेंगे? उनमें से तीन बातें लिखो।
उत्तर—अपनी दोस्त की बात सुनकर हम भारत में आदिवासियों के जीवन से सम्बन्धित निम्न तीन बातें बतायेंगे—
(1) भारत में 500 से ज्यादा तरह के आदिवासी समूह हैं। आदिवासी समाजों से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं क्योंकि उनके भीतर ऊँच-नीच का फर्क बहुत कम होता है। इसी वजह से ये समुदाय जाति-वर्ण पर आधारित समुदायों या राजाओं के शासन में रहने वाले समुदायों से बिल्कुल अलग होते हैं।
(2) आदिवासियों के बहुत सारे जनजातीय धर्म होते हैं। उनके धर्म इस्लाम, हिन्दू, ईसाई आदि धर्मों से बिल्कुल अलग हैं। वे प्रायः अपने पुरखों की, गाँव और प्रकृति की उपासना करते हैं। प्रकृति से जुड़ी आत्माओं में पर्वत, नदी, पशु आदि की आत्माएँ हैं। ग्राम आत्माओं की अक्सर गाँव की सीमा के भीतर निर्धारित पवित्र लताओं में पूजा की जाती है जबकि पुरखों की उपासना घर में ही की जाती है।
(3) आदिवासियों की अपनी भाषाएँ रही हैं। उनमें से ज्यादातर संस्कृत से बिल्कुल अलग और सम्भवतः उतनी ही पुरानी हैं।
प्रश्न 7. चित्रकथा पट्ट में आपने देखा कि हेलेन होप आदिवासियों की कहानी पर एक फिल्म बनाना चाहती है। क्या आप आदिवासियों के बारे में एक कहानी बना कर उसकी मदद कर सकते हैं?
उत्तर—आदिवासियों की कहानी के प्रमुख बिन्दु ये हो सकते हैं—
(1) आदिवासियों के परम्परागत जीवन को दर्शाएँ—उनका जंगलों में रहना, जंगलों पर उनका अधिकार, जंगलों पर उनकी जानकारी, उनका समानतापरक जीवन तथा उनका अपना पृथक् धर्म तथा उस धर्म का प्रकृति से सम्बन्ध। इसमें उनके स्वतन्त्र जीवन, उनका शिकार और जंगलों की चीजें बीनकर आजीविका चलाने से लेकर स्थानान्तरित कृषि के स्वरूप को दर्शाएँ और इस अवस्था में उनके निश्छल, स्वतन्त्र तथा रंग-बिरंगे जीवन को दर्शाएँ।
(2) आदिवासियों के जीवन में खलनायक की तरह प्रवेश करने वाले जनजातीय भूमि पर कब्जा करने वाले ताकतवर गुटों को दर्शाएँ, खनन और खनन परियोजनाओं के कारण उनके विस्थापित होने की स्थिति को दर्शाएँ तथा जमीन के लिए सशस्त्र बलों और उनके बीच टकराव को दर्शाएँ। इस तरह यह दिखाएँ कि किस प्रकार 19वीं सदी के मध्य के बाद से सरकारी कानूनों, सरकारी अधिकारियों तथा उद्योगपतियों व साहूकारों द्वारा उनकी जमीन उनसे छीन ली गई और वे भोजन व आजीविका के मुख्य स्रोतों से वंचित कर दिये गये। इससे उनकी परम्पराएँ और रीति-रिवाज भी खत्म होते जा रहे हैं।
(3) अन्त में यह दर्शाएँ कि आदिवासी जीवन के आर्थिक और सामाजिक आयाम परस्पर जुड़े हुए हैं। उनके संसाधनों के लिए होने वाली छीना-झपटी और विस्थापन की प्रक्रिया कितनी दर्दनाक और हिंसक होती है और किस प्रकार यह प्रक्रिया उन्हें तीन भागों में विभाजित कर देती है—(i) कुछ आदिवासी बेघर व जमीन रहित होकर शहर में आ गए या आस-पास के उद्योगों में श्रमिक का काम करके अपना जीवन बसर करने लगे और अपने रीति-रिवाज तथा परम्पराओं से दूर हटते गये। (ii) कुछ आदिवासी उग्र होकर संघर्षरत रहे और अन्ततः वे उग्रवादी गुटों से जुड़कर संघर्ष करते हुए हिंसक वारदातें करते गये हैं। पूर्वोत्तर का आतंकवाद तथा झारखण्ड के नक्सलवाद को इसी सन्दर्भ में दिखाएँ। (iii) कुछ आदिवासी अभी भी अपनी जमीनों पर काबिज हैं तथा अपने परम्परागत रीति-रिवाजों, धर्म को बनाए हुए हैं, लेकिन शिक्षा तथा विकास के क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं और हाशिये पर आ गए हैं। (iv) कुछ आदिवासियों ने अन्य धर्मों—जैसे ईसाई व हिन्दू धर्म—को अपना लिया है तथा अन्यों की तुलना में मुख्यधारा के अधिक नजदीक आ गए हैं।
प्रश्न 8. क्या आप इस बात से सहमत हैं कि आर्थिक हाशियाकरण और सामाजिक हाशियाकरण आपस में जुड़े हुए हैं? क्यों?
उत्तर—हाँ, हम इस बात से सहमत हैं कि आर्थिक हाशियाकरण और सामाजिक हाशियाकरण परस्पर जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक धर्मावलम्बी हैं, उन्हें दूसरे समुदायों के मुकाबले सामाजिक-आर्थिक विकास के उतने लाभ नहीं मिले हैं। साक्षरता, मूलभूत सुविधाओं तथा सरकारी नौकरियाँ प्राप्त करने में वे अन्य समुदायों से काफी पिछड़े रहे हैं। आदिवासियों को जब जंगलों से अलग कर दिया जाता है तो वे आर्थिक दृष्टि से हाशिये पर आ जाते हैं। लेकिन इसका असर उनकी परम्पराओं और रीति-रिवाजों पर भी पड़ता है और वे अन्य स्थानों पर सामाजिक दृष्टि से भी हाशिये पर आ जाते हैं।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
(1) सामाजिक रूप से हाशिये पर होने का क्या मतलब होता है?
सामाजिक रूप से हाशिये पर होने का अर्थ होता है- वह व्यक्ति या समुदाय जिसे किनारे या हाशिये पर धकेल दिया गया हो और वह चीजों के केन्द्र में नहीं रह गया हो। उनके हाशियाकरण के अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे- अलग भाषा का होना, अलग रीति-रिवाज का होना, अल्पसंख्यक धर्मावलम्बी होना, गरीबी, सामाजिक हैसियत में कमजोर होना आदि।
हाशियाकरण और अलग-थलग किये जाने का यह एहसास समुदायों को संसाधनों और मौकों का फायदा उठाने से रोकता है। उन्हें समाज के अधिक पढ़े-लिखे, धनी, जमींदार तथा राजनीतिक रूप से शक्तिशाली तबकों के मुकाबले शक्तिहीनता और पराजय का एहसास होता है। इस प्रकार आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी दायरे समाज के कुछ तबकों को हाशियायी महसूस करने के लिए विवश करते हैं।
( 2 ) आदिवासी लोग कौन हैं?
आदिवासी ऐसे समुदाय हैं जो जंगलों के साथ जीते आए हैं और आज भी उसी तरह जी रहे हैं। भारत की लगभग 8 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। देश के बहुत सारे महत्त्वपूर्ण खनन एवं औद्योगिक क्षेत्र आदिवासी इलाकों में हैं। भारत में 500 से ज्यादा तरह के आदिवासी समूह हैं। आदिवासी समाज औरों से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं क्योंकि उनके भीतर ऊँच-नीच का फर्क बहुत कम होता है। उनके धर्म इस्लाम, हिन्दू, ईसाई आदि धर्मों से बिल्कुल अलग हैं। उनकी अपनी अलग भाषाएँ रही हैं।
( 3 ) आदिवासी, विकास और हाशियाकरण— 19वीं सदी तक हमारे देश का बड़ा हिस्सा जंगलों से ढका हुआ था और आदिवासियों के पास इस हिस्से की गहरी पैठ थी। उनका जंगलों पर पूरा नियन्त्रण था। औपनिवेशिक शासन से पहले वे शिकार और चीजें बीनकर आजीविका चलाते थे, स्थानान्तरित खेती करते थे। लेकिन पिछले 200 सालों में आए आर्थिक बदलावों, वन नीतियों और राज्य व निजी उद्योगों के राजनीतिक दबाव के कारण इन लोगों को बागानों, निर्माण स्थलों, उद्योगों और घरों में नौकरी करने के लिए धकेला जा रहा है। आज उनका वन क्षेत्रों पर कोई नियन्त्रण नहीं है और न ही उन तक सीधी पहुँच है। आदिवासियों की भूमि पर ताकतवर गुटों ने कब्जा कर लिया है या खनन व खनन परियोजनाओं, बाँधों, राष्ट्रीय पार्क, वन्य जीव अभयारण्य के कारण उन्हें वहाँ से विस्थापित कर दिया गया है। इससे न केवल उनकी आमदी के स्रोत छिन गये हैं, बल्कि उनकी परम्पराएँ और रीति-रिवाज भी छूट रहे हैं। आज उन्हें हाशियायी और शक्तिहीन समुदाय के रूप में देखा जाता है।
( 4 ) अल्पसंख्यक और हाशियाकरण— हमारा संविधान धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करता है। संविधान के प्रावधान उन्हें भेदभाव और नुकसान की आशंका से बचाते हैं तथा बहुसंख्यक समुदाय के सांस्कृतिक वर्चस्व की आशंका से भी बचाते हैं। मौलिक अधिकारों को साकार करने में न्यायपालिका एक अहम भूमिका निभाती है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या में मुसलमानों की संख्या 14.2 प्रतिशत है। उन्हें हाशियायी समुदाय माना जाता है क्योंकि दूसरे समुदायों के मुकाबले उन्हें सामाजिक-आर्थिक विकास के उतने लाभ नहीं मिले हैं। न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर समिति की रिपोर्ट (2005) से पता चलता है कि विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक संकेतकों के हिसाब से मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे अन्य हाशियायी समुदायों से मिलती-जुलती है।
हाशियाकरण का सम्बन्ध अभाव, पूर्वाग्रह और शक्तिहीनता के अहसास से जुड़ा हुआ है। हमारे देश में कई और भी हाशियायी समुदाय हैं। लेकिन हाशियायी समुदायों का जीवन भी बदला जा सकता है।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न—
1. सामाजिक रूप से हाशियायी समुदाय की विशेषता है—
2. निम्न में से कौनसा समुदाय भारत में हाशिये पर है—
(ब) सिक्ख समुदाय
(द) मुस्लिम समुदाय
3. आदिवासी समूह औरों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है क्योंकि—
4. खनन और खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वालों में आदिवासियों का प्रतिशत है—
(ब) बीस
(द) सत्तर
5. अल्पसंख्यक की अवधारणा का सम्बन्ध है—
6. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में मुसलमानों की संख्या है—
(ब) 3.4%
(द) 82%
7. आदिवासियों की अधिक जनसंख्या वाला राज्य है—
(ब) हरियाणा
(द) उत्तर प्रदेश
8. न्यामगिरी किस समुदाय का पवित्र पर्वत है?
(ब) गोंड
(द) डोंगरिया कोंड
9. किस राज्य में 60 से ज्यादा अलग-अलग जनजातीय समूह रहते हैं?
(ब) गुजरात
(द) राजस्थान
10. सच्चर समिति का गठन कब किया गया?
(ब) 1996
(द) 2008
11. अकेले उड़ीसा में कितने जनजातीय समूह रहते हैं?
(ब) 50
(द) 60 से ज्यादा
12. आदिवासी समुदाय के संदर्भ में लोगों का पूर्वाग्रह है—
उत्तरमाला- 1. (द) 2. (द) 3. (अ) 4. (स) 5. (द) 6. (स) 7. (अ) 8. (द) 9. (स) 10. (स) 11. (द) 12. (द)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये-
1. आदिवासी जन समुदाय अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु .................... पर निर्भर है।
2. आदिवासी शब्द का अर्थ .................... है, ये .................... में निवास करते हैं।
3. सरकारी दस्तावेजों में आदिवासियों के लिए .................... शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। आदिवासी समुदायों की एक .................... भी में बनाई गई है।
4. .................... का मतलब होता है कि जिसे किनारे या हाशिये पर ढकेल दिया गया हो।
5. भारत की लगभग .................... आबादी आदिवासियों की है।
6. आदिवासी अक्सर अपने पुरखों की, गाँव और .................... की उपासना करते हैं।
7. हमारा संविधान धार्मिक और भाषायी .................... को सुरक्षा प्रदान करता है।
8. दूसरे अल्पसंख्यकों की तरह .................... के भी कई रीति-रिवाज और व्यवहार मुख्यधारा के मुकाबले काफी अलग हैं।
उत्तर- 1. वनों 2. मूल निवासी, जंगलों 3. अनुसूचित जनजाति, सूची 4. हाशिएई 5. 8 प्रतिशत 6. प्रकृति 7. अल्पसंख्यकों 8. मुसलमानों।
सही या गलत बताइए-
1. देश के बहुत सारे महत्त्वपूर्ण खनन एवं औद्योगिक क्षेत्र आदिवासी इलाकों में है।
2. आदिवासियों का एक ही जनजातीय धर्म होता है।
3. आदिवासियों में संथाली बोलने वालों की संख्या सबसे कम है।
4. अपनी जमीन और जंगलों से बिछड़ने पर आदिवासी समुदाय आजीविका और भोजन के अपने मुख्य स्रोतों से वंचित हो जाते हैं।
5. हाशिएई समुदाय अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता बनाये रखना चाहते हैं।
6. आदिवासियों के बहुत सारे जनजातीय धर्म होते हैं।
उत्तर- 1. सही 2. गलत 3. गलत 4. सही 5. सही 6. सही।
सही मिलान कीजिए-
( अ ) | ( ब ) |
1. किनारे पर ढकेल देना | - (i) मुख्यधारा |
2. विकास परियोजनाओं हेतु जबरन घर-बार से उजाड़ देना | - (ii) हाशियाकरण |
3. समाज का केन्द्र | - (iii) घेटोआइजेशन |
4. एक ही समुदाय का इलाका या बस्ती | - (iv) विस्थापन |
उत्तर- 1. (ii) 2. (iv) 3. (i) 4. (iii)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. आदिवासी शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर- आदिवासी शब्द का मतलब है 'मूल निवासी'।
प्रश्न 2. आदिवासी किन-किन की उपासना करते हैं?
उत्तर- आदिवासी सामान्यतः अपने पुरखों की, गाँव और प्रकृति की उपासना करते हैं।
प्रश्न 3. आदिवासी कौन लोग हैं?
उत्तर- आदिवासी ऐसे समुदाय हैं जो जंगलों के साथ जीते आए हैं और आज भी उसी तरह जी रहे हैं।
प्रश्न 4. भारत के किन राज्यों में आदिवासियों की संख्या अधिक है?
उत्तर- भारत के छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, पश्चिमी बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड एवं त्रिपुरा राज्यों में आदिवासियों की संख्या अधिक है।
प्रश्न 5. भारत में कौनसी भाषा बोलने वाले आदिवासियों की संख्या सर्वाधिक है?
उत्तर- भारत में संथाली भाषा बोलने वाले आदिवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
प्रश्न 6. आदिवासी समुदाय बड़ी-बड़ी रियासतों और रजवाड़ों के अधीन क्यों नहीं रहे?
उत्तर- आदिवासी समुदाय बड़ी-बड़ी रियासतों और रजवाड़ों के अधीन इसलिए नहीं रहे क्योंकि उनका जंगलों पर पूरा नियन्त्रण था।
प्रश्न 7. जब आदिवासियों को उनकी जमीन से हटाया जाता है तो वे क्या-क्या गँवा देते हैं?
उत्तर- आदिवासियों को जब उनकी जमीन से हटाया जाता है तो वे अपनी आमदनी के स्रोत, परम्पराएँ तथा रीति-रिवाज गँवा देते हैं।
प्रश्न 8. भारत में सबसे कम साक्षरता किस धार्मिक समुदाय की है?
उत्तर- भारत में सबसे कम साक्षरता मुस्लिम समुदाय की है।
प्रश्न 9. भारत में किस धार्मिक समुदाय की साक्षरता सबसे अधिक है?
उत्तर- जैन समुदाय की।
प्रश्न 10. ऐसे पांच उत्पाद बताइए जो जंगल में मिलते हैं और जिनका आप घर में इस्तेमाल करते हैं?
उत्तर- (1) गोंद (2) जड़ी-बूटियाँ (3) मोम (4) लाख (5) शहद।
प्रश्न 11. हाशियाई शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- हाशियाई का अर्थ होता है कि जिसे किनारे या हाशिये पर ढकेल दिया गया है, ऐसे में वह व्यक्ति चीजों के केन्द्र में नहीं रहता।
प्रश्न 12. भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है?
उत्तर- भारत की लगभग 8 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है।
प्रश्न 13. आदिवासी समाज औरों से बिल्कुल अलग क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर- आदिवासी समाज औरों से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं क्योंकि उनके भीतर ऊँच-नीच का फर्क बहुत कम होता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. औपनिवेशिक शासन से पहले आदिवासी समुदायों की जीविका के क्या साधन थे?
उत्तर- औपनिवेशिक शासन से पहले आदिवासी समुदाय शिकार और चीजें बीनकर आजीविका चलाते थे। वे एक जगह ठहर कर कम रहते थे। वे स्थानान्तरित खेती के साथ-साथ लंबे समय तक एक स्थान पर भी खेती करते थे।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. घेटोआइजेशन से क्या आशय है?
उत्तर- घेटोआइजेशन शब्द ऐसे इलाके या बस्ती के लिए इस्तेमाल होता है जिसमें मुख्य रूप से एक ही समुदाय के लोग रहते हैं। घेटोआइजेशन इस स्थिति तक पहुँचने वाली प्रक्रिया को कहा जाता है। यह प्रक्रिया विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों पर आधारित हो सकती है। भय या दुश्मनी किसी समुदाय को एकजुट होने के लिए मजबूर कर सकती है क्योंकि अपने समुदाय के लोगों के बीच रहने पर उन्हें ज्यादा राहत मिलती है। इस समुदाय के पास आमतौर पर वहाँ से निकल पाने के ज्यादा विकल्प नहीं होते।
नहीं होते हैं जिसके कारण वह शेष समाज से कटता चला जाता है।
प्रश्न 2. आदिवासियों के धर्म पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- आदिवासियों के बहुत सारे जनजातीय धर्म होते हैं। उनके धर्म इस्लाम, हिन्दू, ईसाई आदि धर्मों से बिल्कुल अलग हैं। वे प्रायः अपने पुरखों की, गाँव और प्रकृति की उपासना करते हैं।
प्रकृति से जुड़ी आत्माओं में पर्वत, नदी, पशु आदि की आत्माएँ हैं। ये विभिन्न स्थानों से जुड़ी होती हैं और इनका वहीं निवास माना जाता है। ग्राम आत्माओं की अक्सर गाँव की सीमा के भीतर निर्धारित पवित्र लता-कुंजों में पूजा की जाती है जबकि पुरखों की उपासना घर में ही की जाती है।
प्रश्न 3. आदिवासियों के विस्थापन के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- आदिवासियों को अनेक कारणों से अपनी जमीन से विस्थापित होना पड़ा है। यथा-
(1) आदिवासी इलाकों में खनिज पदार्थों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की भरमार रही है। इसीलिए इन जमीनों को खनन और अन्य विशाल औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बार-बार छीना गया है। सरकारी आँकड़ों से पता चलता है कि खनन और खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वालों में 50 प्रतिशत से ज्यादा केवल आदिवासी रहे हैं।
(2) आदिवासियों की बहुत सारी जमीन देश भर में बनाए गए सैकड़ों बाँधों के जलाशयों में डूब चुकी है। इन जगहों से उन्हें विस्थापित होना पड़ा है।
(3) भारत में 101 राष्ट्रीय पार्क (40,564 वर्ग किलोमीटर) और 543 वन्य जीव अभयारण्य (1,19,776 वर्ग किलोमीटर) हैं।* ये ऐसे इलाके हैं जहाँ मूल रूप से आदिवासी रहा करते थे। अब उन्हें वहाँ से उजाड़ दिया गया है। अगर वे इन जंगलों में रहने की कोशिश करते हैं तो उन्हें घुसपैठिया कहा जाता है।
(4) जनजातीय भूमि पर कब्जा करने में शक्तिशाली गुटों—सरकारी अधिकारियों, पूँजीपतियों और साहूकारों ने भी उनके भोलेपन का शोषण कर उनकी भूमि को हथियाया है और जिसके कारण भी उन्हें वहाँ से विस्थापित होना पड़ा है।
प्रश्न 4. विस्थापन के बाद आदिवासियों की स्थिति में आये परिवर्तन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- अपनी जमीन और जंगलों से बिछड़ने पर आदिवासी समुदाय आजीविका और भोजन के अपने मुख्य स्रोतों से वंचित हो जाते हैं। अपने परंपरागत निवास स्थानों के छिनते जाने की वजह से बहुत सारे आदिवासी काम की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं। वहाँ उन्हें छोटे-मोटे उद्योगों, इमारतों या निर्माण स्थलों पर बहुत मामूली वेतन वाली नौकरियाँ करनी पड़ती हैं। इस तरह वे गरीबी और लाचारी के जाल में फँसते चले जाते हैं। विस्थापित होने के कारण अपनी आय के स्रोतों को गँवाने के साथ-साथ वे अपनी परंपराएँ और रीति-रिवाज भी गँवा देते हैं जो उनके जीने और अस्तित्व के स्रोत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 45% और शहरी क्षेत्रों में 35% आदिवासी गरीबी की रेखा के नीचे गुजर बसर करते हैं। उनके बहुत सारे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। उनके बीच साक्षरता भी बहुत कम है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. हाशियाकरण के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- हाशियाकरण के कारण- हाशियाकरण किसी एक ही दायरे में महसूस नहीं होता। आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक सभी दायरे समाज के कुछ तबकों को हाशियायी महसूस करने के लिए विवश करते हैं। यथा-
(1) सामाजिक कारण- हाशियाकरण के सामाजिक कारण ये हो सकते हैं कि वे एक अलग भाषा बोलते हैं, अलग रीति-रिवाज अपनाते हैं या बहुसंख्यक समुदाय के मुकाबले किसी दूसरे धर्म के हैं।
(2) आर्थिक कारण- हाशियाकरण का आर्थिक कारण गरीबी है। गरीबी के कारण, सामाजिक हैसियत में 'कमतर' माने जाने की वजह से और शेष लोगों के मुकाबले कमतर मनुष्य के रूप में देखे जाने की वजह से खुद को हाशिये पर महसूस करते हैं।
(3) राजनैतिक कारण- कई बार हाशियायी समूहों को लोग दुश्मनी और डर के भाव से भी देखते हैं। फासले और अलग-थलग किए जाने का यह अहसास उन्हें संसाधनों और अवसरों का फायदा उठाने से रोक देता है। फलस्वरूप हाशियायी समुदाय अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में चूक जाता है। उसे समाज के ऐसे ताकतवर और वर्चस्वशाली तबकों के मुकाबले शक्तिहीनता और पराजय का अहसास रहता है जिनके पास जमीन, धन-दौलत है, जो ज्यादा पढ़े-लिखे और राजनैतिक रूप से ज्यादा ताकतवर हैं।
प्रश्न 2. मुसलमान और हाशियाकरण पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर- मुसलमान और हाशियाकरण
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या में मुसलमानों की संख्या 14.2 प्रतिशत है। उन्हें हाशियायी
* वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय पार्क (44,378 किमी.²) और 566 वन्य जीव अभयारण्य (1,22,420 किमी.²) हैं (2022 में)।
समुदाय माना जाता है क्योंकि दूसरे समुदायों के मुकाबले उन्हें सामाजिक-आर्थिक विकास में अन्य समुदाय जितने लाभ नहीं मिले हैं।
मुसलमानों के हाशियाकरण की स्थिति को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है—
1. मूलभूत सुविधाओं की दृष्टि से मुसलमानों की तुलनात्मक स्थिति—वर्ष 2008-09 के आँकड़ों के अनुसार मुस्लिम परिवार अन्य समुदायों की तुलना में अधिक कच्चे घरों में रहते थे। उनके 67.5 प्रतिशत घरों में ही बिजली थी जबकि हिन्दू घरों में 75.2% घरों में बिजली थी। इसी प्रकार 35.8% मुसलमान ही जहाँ पाइप के पानी का प्रयोग करते हैं, वहाँ 43.7 प्रतिशत हिन्दू लोग पाइप के पानी का प्रयोग करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मकान, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं में मुसलमान हिन्दुओं से काफी पिछड़े हुए हैं।
2. साक्षरता की स्थिति—2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम समुदाय की साक्षरता की दर अन्य समुदायों की तुलना में कम है। भारत में हिन्दू, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध और जैन समुदायों की साक्षरता दर जहाँ क्रमशः 63%, 74%, 67%, 71% तथा 86% है, वहीं मुसलमानों की साक्षरता दर 57 प्रतिशत है जो काफी कम है।
3. सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत—2006 की एक रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार भारत में मुसलमानों की जनसंख्या जहाँ 13.5 प्रतिशत है, वहाँ भारत में मुसलमान आई.ए.एस. 3 प्रतिशत, आईपीएस 4 प्रतिशत, आईएफएस 1.8 प्रतिशत, पी.एस.यू. 3.3 प्रतिशत, राज्यस्तरीय पीएसयू 10.8 प्रतिशत तथा बैंक सेवाओं में 2.2 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत में मुसलमान विकास के विभिन्न संकेतकों पर पिछड़े हुए हैं। विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक संकेतकों के हिसाब से मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति जैसे अन्य हाशियायी समुदायों से मिलती-जुलती है।
4. हाशियाकरण के अन्य पहलू—मुसलमानों के आर्थिक-सामाजिक हाशियाकरण का अन्य पहलू मुसलमानों के रीति-रिवाज हैं। दूसरे अल्पसंख्यकों की तरह मुसलमानों के भी कई रीति-रिवाज और व्यवहार मुख्यधारा के मुकाबले काफी अलग हैं। कुछ मुसलमानों में बुर्का, लम्बी दाढ़ी और फैज टोपी का चलन दिखाई देता है। बहुत सारे लोग सभी मुसलमानों को इन्हीं निशानियों से पहचानने की कोशिश करते हैं। इसी कारण अक्सर उन्हें अलग नजर से देखा जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि वे 'हम बाकी लोगों' जैसे नहीं हैं। अक्सर यही सोच उनके साथ गलत व्यवहार करने और भेदभाव का बहाना बन जाती है।