📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. आपकी राय में दलितों और आदिवासियों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए आरक्षण इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है? इसका एक कारण बताइए।
उत्तर- हमारी राय में दलितों और आदिवासियों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए आरक्षण इसलिए इतना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि समाज में इन तबकों को सदियों तक पढ़ने-लिखने और नई निपुणताएँ हासिल करने के अवसरों से वंचित रखा गया है, इन्हें आरक्षण प्रदान करके ही समाज में आगे बढ़ाया जा सकता है। असमानता को खत्म करने का आरक्षण एक ठोस कदम है।
प्रश्न 1. क्या आपको ऐसा लगता है कि रत्नम को परम्परागत रस्म निभाने के लिए जिस तरह मजबूर किया जा रहा था, वह उसके मौलिक अधिकारों का हनन था?
उत्तर- हाँ, रत्नम को परम्परागत रस्म (सभी पुजारियों के पैर धोकर उस धोवन के पानी से नहाना) निभाने के लिए जिस तरह मजबूर किया जा रहा था, वह उसके मौलिक अधिकारों का हनन था।
प्रश्न 2. आपको ऐसा क्यों लगता है कि दलित परिवार शक्तिशाली जातियों के गुस्से की आशंका से डरे हुए थे?
उत्तर- दलित परिवार के लोग शक्तिशाली जातियों के गुस्से की आशंका से निश्चित रूप से डरे हुए थे। इसके कई कारण थे-
(1) उनमें से बहुत सारे सवर्णों (शक्तिशाली जातियों) के खेत-खलिहानों में दिहाड़ी मजदूर थे। अगर प्रभुत्वशाली जातियाँ उन्हें काम देना बंद कर दें तो वे खायेंगे? जिन्दगी कैसे चलेगी?
(2) उन्हें यह आदेश दिया गया था कि कोई भी रत्नम व उसके परिवार से सम्पर्क नहीं रखे। एक रात को रत्नम के परिवार की झोंपड़ी में आग लगा दी गई। वे डरे हुए थे कि यदि वे मुँह खोलेंगे तो उनकी हालत भी रत्नम जैसी बना दी जाएगी।
प्रश्न 1. सिर पर मैला उठाने का आप क्या अर्थ समझते हैं?
उत्तर- बहुत सारे लोग झाड़ू, टिन और टोकरियों के सहारे पशुओं/इंसानों के मल-मूत्र ठिकाने लगाते हैं। वे बिना पानी वाले (सूखे) शौचालयों से गंदगी उठाकर दूर के स्थानों पर फेंककर आते हैं। हाथ से मैला उठाने वाले पीढ़ी दर पीढ़ी यही काम करते हैं। यह काम आम-तौर पर दलित औरतें और लड़कियाँ करती हैं। सिर पर मैला उठाने का यही आशय है।
प्रश्न 2. ऐसे दो मौलिक अधिकारों का उल्लेख करें जिनका सिर पर मैला ढोने की प्रथा के जरिए उल्लंघन हो रहा है।
उत्तर- सिर पर मैला ढोने की प्रथा के जरिए- (1) समानता के अधिकार का तथा (2) शोषण के विरुद्ध अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।
प्रश्न 3. सफाई कर्मचारी आन्दोलन ने 2003 में जनहित याचिका क्यों दायर की? अपनी याचिका में उन्होंने किस बात पर आपत्ति व्यक्त की थी?
उत्तर- सफाई कर्मचारी आन्दोलन ने 2003 में सिर पर मैला ढोने की प्रथा के आज भी चलते रहने के विरुद्ध याचिका दायर की। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि सिर पर मैला ढोने की प्रथा न केवल आज भी चल रही है, बल्कि रेलवे जैसे सरकारी उपक्रमों में भी बड़े पैमाने पर प्रचलित है। याचिकाकर्ताओं ने अपने मौलिक अधिकारों को लागू करवाने का आग्रह किया।
प्रश्न 4. 2005 में इस याचिका पर विचार करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने क्या किया?
उत्तर- इस याचिका के जवाब में न्यायालय ने निष्कर्ष दिया कि 1993 में पारित किए गए कानून के बाद देशभर में सिर पर मैला ढोने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। न्यायालय ने केन्द्र व राज्य सरकार के प्रत्येक विभाग/मन्त्रालय को आदेश दिया कि वे 6 माह के भीतर इस बात की सच्चाई का पता लगाएँ। अगर सिर पर मैला ढोने की प्रथा अभी भी प्रचलन में पाई जाती है तो सम्बन्धित सरकारी विभागों को ऐसे लोगों की मुक्ति और पुनर्वास के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम तैयार करना चाहिए। तत्पश्चात् हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम 6 दिसम्बर, 2013 से लागू हुआ।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. दो ऐसे मौलिक अधिकार बताइये जिनका दलित समुदाय प्रतिष्ठापूर्ण और समतापरक व्यवहार पर जोर देने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सवाल का जवाब देने के लिएपर दिए गए मौलिक अधिकारों को दोबारा पढ़िये।
उत्तर— समानता का अधिकार और शोषण के विरुद्ध अधिकार का दलित समुदाय प्रतिष्ठापूर्ण और समतापरक व्यवहार पर जोर देने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। यथा—
(1) समानता का अधिकार— समानता के अधिकार के अन्तर्गत यह स्पष्ट कहा गया है कि कानून की नजर में सभी लोग समान हैं अर्थात् सभी लोगों को देश का कानून बराबर सुरक्षा प्रदान करेगा। अनुच्छेद 15 में कहा गया है कि भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। समानता के अधिकार का हनन होने पर दलित इस प्रावधान का सहारा ले सकते हैं। इस अधिकार के अन्तर्गत खेल के मैदान, होटल, दुकान इत्यादि सार्वजनिक स्थानों पर सभी को बराबर पहुँच का अधिकार होगा। अनुच्छेद 17 के अनुसार अस्पृश्यता या छुआछूत का उन्मूलन किया जा चुका है। इसका अभिप्राय यह है कि अब कोई भी व्यक्ति दलितों को पढ़ने, मन्दिरों में जाने और सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता। इस तरह यदि दलित समुदाय को यह लगता है कि सरकार या कोई अन्य समुदाय या व्यक्ति उनके साथ समानता का बर्ताव नहीं कर रहा है तो वह समानता के मौलिक अधिकार का उपयोग कर सकता है।
(2) शोषण के विरुद्ध अधिकार— संविधान में कहा गया है कि मानव-व्यापार, जबरिया श्रम और 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मजदूरी पर रखना अपराध है।
प्रश्न 2. रत्नम की कहानी और 1989 के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को दोबारा पढ़िये। अब एक कारण बताइये कि रत्नम ने इसी कानून के तहत शिकायत क्यों दर्ज कराई?
उत्तर— रत्नम ने 1989 के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत शिकायत इसलिए दर्ज कराई क्योंकि इस कानून में शारीरिक रूप से खौफनाक और नैतिक रूप से निन्दनीय अपमानों के स्वरूपों की सूची दी गयी है। इसका मकसद ऐसे लोगों को सजा दिलाना है जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति को कोई अखाद्य अथवा गंदा पदार्थ पीने या खाने के लिए विवश करता है या कोई ऐसा कृत्य करते हैं जो मानवीय प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है।
प्रश्न 3. सी.के. जानू और अन्य आदिवासी कार्यकर्त्ताओं को ऐसा क्यों लगता है कि आदिवासी भी अपने परम्परागत संसाधनों के छीने जाने के खिलाफ 1989 के इस कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं? इस कानून के प्रावधानों में ऐसा क्या खास है जो उनकी मान्यता को पुष्ट करता है?
उत्तर— आदिवासी कार्यकर्त्ता अपनी परम्परागत जमीन पर अपने कब्जे की बहाली के लिए अर्थात् अपने परम्परागत संसाधनों के छीने जाने के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इस कानून में ऐसे कृत्यों की सूची भी है जिनके जरिये आदिवासियों को उनके साधारण संसाधनों से वंचित किया जाता है। इस कानून में यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति के नाम पर आवंटित की गई या उसके स्वामित्व वाली जमीन पर कब्जा करता है या खेती करता है या अपने नाम पर स्थानान्तरित करवा लेता है, तो उसे सजा दी जायेगी।
सी.के. जानू और अन्य आदिवासी कार्यकर्त्ताओं को इसी प्रावधान के आधार पर ऐसा लगता है कि आदिवासी भी अपने परम्परागत संसाधनों के छीने जाने के खिलाफ 1989 के कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कानून के उक्त प्रावधान उनकी मान्यता को पुष्ट करते हैं।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
(1) मौलिक अधिकारों का उपयोग तथा हाशियाई तबकों के लिए कानून—हाशियाई तबकों ने मौलिक अधिकारों को दो तरह से इस्तेमाल किया है—(1) अपने मौलिक अधिकारों पर जोर देकर उन्होंने सरकार को अपने साथ हुए अन्याय पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है। जैसे—अस्पृश्यता या छुआछूत का उन्मूलन, अनुच्छेद 15 में समानता के अधिकार का बिना भेदभाव के क्रियान्वयन। समानता के अधिकार का हनन होने पर दलित इस प्रावधान (अनु. 15) का सहारा लेते हैं। इसी तरह मुसलमानों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने संविधान में दिये गए धर्म, सांस्कृतिक व शैक्षणिक अधिकारों की स्वतन्त्रता के अधिकारों का सहारा लिया है।
(2) हाशियाई तबकों ने इस बात के लिए भी दबाव डाला है कि सरकार इन कानूनों को लागू करे। कई बार हाशियाई तबकों के संघर्ष की वजह से ही सरकार को मौलिक अधिकारों की भावना के अनुरूप नए कानून बनाने पड़े हैं। हमारे देश में हाशियाई तबकों के लिए खास कानून और नीतियाँ बनाई गई हैं। सरकार इस तरह की नीतियों को प्रोत्साहन देती है ताकि खास तबकों को सही अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
(2) सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन—(1) संविधान को लागू करने के लिए राज्य और केन्द्र सरकारें जनजातीय आबादी वाले या भारी दलित आबादी वाले इलाकों में विशेष प्रकार की योजनाएं लागू करती हैं, जैसे दलितों और आदिवासियों को सरकार की ओर से मुफ्त या रियायती दरों पर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराना आदि।
(2) सरकार व्यवस्था में निहित असमानता को खत्म करने के लिए कानूनों का भी इस्तेमाल करती है, जैसे—शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दलितों व आदिवासियों के लिए सीटों के आरक्षण का कानून।
(3) सरकार इन विद्यार्थियों को विशेष छात्रवृत्ति भी देती है।
(3) दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा-हाशियाई समुदायों को भेदभाव और शोषण से बचाने के लिए नीतियों के अलावा हमारे देश में कई कानून भी बनाए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं-(1) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, (2) सिर पर मैला उठाने वालों को काम पर रखने और सूखे शौचालयों के निर्माण पर पाबंदी कानून, 1993, (3) अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (4) हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 आदि।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न—
1. संविधान के किस अनुच्छेद में अस्पृश्यता का उन्मूलन किया गया है—
2. समानता के अधिकार का हनन होने पर दलित जिस प्रावधान का सहारा लेते हैं, वह है—
3. संविधान के किस अधिकार के तहत धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक समुदाय अपनी संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं—
4. निम्न में से कौनसा कानून सिर पर मैला उठाने वालों को काम पर रखने और सूखे शौचालयों के निर्माण पर पाबन्दी लगाता है—
5. 'कट ऑफ' का क्या अर्थ है?
6. निम्न में से हाशियाई समूह के अन्तर्गत आते हैं—
(ब) दलित
(द) उपर्युक्त सभी
7. अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम कब बनाया गया?
(ब) 1992
(द) 2002
8. हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम कब लागू हुआ?
(ब) 6 दिसम्बर, 2006
(द) 1 जनवरी, 2016
9. संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार क्या दण्डनीय अपराध है?
(ब) अस्पृश्यता
(द) शिक्षा
10. आरक्षण की व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवार को क्या प्रमाण देना होता है?
(ब) शिक्षा का प्रमाण
11. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी अधिनियम पारित किया गया—
(ब) 2005 में
(द) 2001 में
12. किन समुदायों को भेदभाव और शोषण से बचाने के लिए हमारे देश में नीति और कानून बनाए गए हैं?
(ब) अमीर वर्ग
(द) ब्राह्मण समुदाय
उत्तरमाला- 1. (द) 2. (ब) 3. (स) 4. (ब) 5. (ब) 6. (द) 7. (अ) 8. (स) 9. (ब) 10. (स) 11. (स) 12. (अ)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये-
1. हमारे संविधान में ऐसे कई सिद्धान्त सूत्रबद्ध किये गये हैं जो हमारे समाज और राज्य व्यवस्था को .................... बनाते हैं।
2. अनुच्छेद 17 के अनुसार .................... का उन्मूलन किया जा चुका है।
3. हमारे देश में .................... तबकों के लिए खास कानून और नीतियाँ बनाई गई हैं।
4. संवैधानिक रूप से आदिवासियों की जमीन को किसी .................... व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता।
5. 1970-80 के दशकों में आदिवासियों ने न केवल .................... के लिए आवाज उठाई, बल्कि अपनी जमीन को हासिल करने के लिए भी .................... चलाए।
6. आदिवासी कार्यकर्ता अपनी परंपरागत जमीन पर अपने कब्जे की .................... के लिए .................... के अधिनियम का सहारा लेते हैं।
7. परंपरागत वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम 2006 में कहा गया है कि .................... एवं .................... संरक्षण वनवासियों के अधिकारों में आता है।
8. आज हमारे देश में हाशियायी समूह यह दलील दे रहे हैं कि एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते उन्हें भी .................... का अधिकार मिलना चाहिए।
उत्तर- 1. लोकतांत्रिक 2. अस्पृश्यता/छुआछूत 3. हाशियाई 4. गैर-आदिवासी 5. बराबरी, आंदोलन 6. बहाली, 1989 7. वन, जैव विविधता 8. बराबर।
सही या गलत बताइए-
1. हाशियाई तबकों के संघर्ष की वजह से भी सरकार को मौलिक अधिकारों की भावना के अनुरूप नए कानून बनाने पड़े हैं।
2. भारत में अब अस्पृश्यता एक दण्डनीय अपराध है।
3. भारत में मुसलमान तथा पारसी समुदायों को अपनी संस्कृति की सुरक्षा का अधिकार नहीं है।
4. आरक्षण की नीति से सामाजिक न्याय हतोत्साहित हुआ है।
5. आदिवासी कार्यकर्ता अपनी परम्परागत जमीन पर अपने कब्जे की बहाली के लिए 1989 के अधिनियम का सहारा लेते हैं।
उत्तर- 1. सही 2. सही 3. गलत 4. गलत 5. सही।
सही मिलान कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| 1. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी अधिनियम | (i) 1989 |
2. हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम - (ii) 2006
3. अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम - (iii) 2013
उत्तर- 1. (ii) 2. (iii) 3. (i)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संविधान में अस्पृश्यता के खिलाफ किन्हीं दो अनुच्छेदों के नाम लिखिए।
उत्तर- (1) अनुच्छेद 15 तथा (2) अनुच्छेद 17
प्रश्न 2. संविधान में दिये गए सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल अधिकार का उद्देश्य क्या है?
उत्तर- इस मूल अधिकार का उद्देश्य है कि अल्पसंख्यक समूहों की संस्कृति पर न तो बहुसंख्यक समुदाय की संस्कृति का वर्चस्व हो और न ही वह नष्ट हो।
प्रश्न 3. आग्रही किसे कहा जाता है?
उत्तर- जो व्यक्ति या संगठन पुरजोर तरीके से अपनी बात रखता है, उसे आग्रही कहा जाता है।
प्रश्न 4. नैतिक रूप से निन्दनीय से क्या आशय है?
उत्तर- नैतिक रूप से निन्दनीय ऐसे घृणित और अपमानजनक कृत्यों को कहा जाता है जो सभ्यता और प्रतिष्ठा के सारे कायदे-कानूनों तथा समाज स्वीकृत मूल्यों के खिलाफ होते हैं।
प्रश्न 5. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 किसलिए पारित किया गया है?
उत्तर- यह कानून जमीन और संसाधनों पर वन्य समुदायों के अधिकारों को मान्यता न देने के कारण उनके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए पारित किया गया है।
प्रश्न 6. सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देने के लिए सरकारें क्या-क्या कार्य करती है? (कोई एक कार्य बताइए)
उत्तर- राज्य और केन्द्र सरकारें सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देने के लिए जनजातीय आबादी वाले या दलित आबादी वाले इलाकों में विशेष प्रकार की योजनाएँ लागू करती हैं, जैसे मुफ्त या रियायती दरों पर छात्रावास की सुविधाएँ देना।
प्रश्न 7. कॉलेजों, विशेषकर पेशेवर संस्थानों में दाखिले के लिए सरकार ने क्या नीति अपना रखी है?
उत्तर- कॉलेजों, खासतौर से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सरकार ने 'कट-ऑफ' या न्यूनतम अंक सीमा तय की हुई है।
प्रश्न 8. 'कट ऑफ' या 'न्यूनतम अंक सीमा' का क्या अर्थ है?
उत्तर- इसका अभिप्राय है कि पेशेवर संस्थानों या कॉलेजों में सभी दलित और आदिवासी उम्मीदवार दाखिला नहीं पा सकते, केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले परीक्षार्थी ही प्रवेश ले सकते हैं।
प्रश्न 9. हाशियायी समुदायों को भेदभाव और शोषण से बचाने के लिए बनाए गए किन्हीं दो कानूनों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
(ii) अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकार) अधिनियम, 2006.
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. आज हमारे देश के हाशियायी समूह अपने हाशियाकरण से निपटने के लिए क्या दलील दे रहे हैं?
उत्तर- आज हमारे देश के आदिवासी, दलित, मुसलमान, औरतें एवं अन्य हाशियायी समूह यह दलील दे रहे हैं कि एक लोकतांत्रिक देश का नागरिक होने के नाते उन्हें भी बराबर के अधिकार मिलने चाहिए। उनमें से बहुत सारे लोगों ने अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए संविधान का भी सहारा लिया है।
प्रश्न 2. मुसलमानों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने मौलिक अधिकारों का किस प्रकार हाशियाकरण से निपटने में सहारा लिया है?
उत्तर- मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने धर्म और सांस्कृतिक व शैक्षणिक अधिकारों की स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर दिया है। मुसलमान और पारसी आदि सांस्कृतिक-धार्मिक समूहों को अपनी संस्कृति की सुरक्षा का अधिकार मिला हुआ है। इस अधिकार का उद्देश्य यह है कि इन समूहों की संस्कृति पर न तो बहुसंख्यक समुदाय की संस्कृति का वर्चस्व हो और न ही वह नष्ट हो।
प्रश्न 3. भारत में हाशियायी तबकों ने मूल अधिकारों का इस्तेमाल कितनी तरह से किया है?
उत्तर- भारत में हाशियायी तबकों ने मूल अधिकारों को दो तरह से इस्तेमाल किया है। पहला, अपने मौलिक अधिकारों पर जोर देकर उन्होंने सरकार को अपने साथ हुए अन्याय पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है। दूसरा, उन्होंने इस बात के लिए दबाव डाला है कि सरकार इन कानूनों को लागू करे। कई बार हाशियायी तबकों के संघर्ष की वजह से
ही सरकार को मौलिक अधिकारों की भावना के अनुरूप नये कानून बनाने पड़े हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार कैसी नीतियाँ लागू करती है?
अथवा
सरकार किस प्रकार सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देती है? कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर- सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य और केन्द्र सरकारें जनजातीय आबादी वाले या दलित आबादी वाले इलाकों में विशेष प्रकार की योजनाएँ लागू करती हैं। उदाहरण के लिए-
(i) कई स्थानों पर दलितों और आदिवासियों को सरकार की ओर से मुफ्त या रियायती दरों पर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है ताकि वे शिक्षा सम्बन्धी सुविधाएँ हासिल कर सकें जो मुमकिन है कि उनके अपने इलाकों में उपलब्ध नहीं हों।
(ii) कुछ जरूरी सुविधायें उपलब्ध कराने के लिए सरकार कानूनों का भी इस्तेमाल करती है ताकि असमानता को खत्म किया जा सके। आरक्षण की व्यवस्था इसी तरह की एक महत्त्वपूर्ण नीति है।
प्रश्न 2. आरक्षण की नीति किस तरह काम करती है?
उत्तर- देशभर की सभी राज्य सरकारों के पास अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी व अतिपिछड़ी जातियों की अपनी-अपनी सूचियाँ हैं। इसी तरह की एक सूची केन्द्र सरकार के पास भी होती है। जो विद्यार्थी शैक्षणिक संस्थान में दाखिले के लिए या जो उम्मीदवार सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन देते हैं, उन्हें जाति और जनजाति प्रमाण-पत्र के रूप में अपनी जाति या जनजाति का सबूत देना होता है। अगर कोई खास दलित जाति या जनजाति सरकारी सूची में है तो उस जाति या जनजाति का उम्मीदवार आरक्षण का लाभ उठा सकता है।
प्रश्न 3. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के निर्माण की पृष्ठभूमि को संक्षेप में व्यक्त करें।
उत्तर- यह कानून 1989 में दलितों तथा अन्य समुदायों की माँगों के जवाब में बनाया गया था। उस समय सरकार पर इस बात के लिए भारी दबाव पड़ रहा था कि वह दलितों और आदिवासियों के साथ रोजमर्रा होने वाले दुर्व्यवहार और अपमान पर रोक लगाने के लिए ठोस कार्यवाही करे। इस समय दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अपने हकों का दावा करने वाले बहुत सारे आग्रही दलित संगठन सामने आए और उन्होंने अपने हकों के लिए पुरजोर आवाज उठाई। वे तथाकथित जातीय दायित्वों को निर्वाह करने को तैयार नहीं थे और समानता का अधिकार चाहते थे। उन्होंने इस बात का दबाव बनाया कि नए कानूनों में दलितों के साथ होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा की भी सूची बनाई जाये और इस तरह के अपराध करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया जाये। इसी पृष्ठभूमि में इस कानून का निर्माण किया गया।
प्रश्न 4. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 के कानून के मुख्य प्रावधानों को स्पष्ट करें।
उत्तर- इस कानून की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह कानून जमीन और संसाधनों पर वन्य समुदायों के अधिकारों को मान्यता न देने के कारण उनके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए पारित किया गया है।
प्रमुख प्रावधान-
(1) इस कानून में वन्य समुदायों को घर के आस-पास जमीन, खेती और चराई योग्य जमीन और गैर-लकड़ी वन उत्पादों पर उनके अधिकार को मान्यता दी गई है।
(2) इस कानून में यह भी कहा गया है कि वन एवं जैव विविधता संरक्षण भी वनवासियों के अधिकारों में आता है।
प्रश्न 5. विभिन्न प्रदेशों की सरकारें किस प्रकार आदिवासियों को, संवैधानिक कानूनों का उल्लंघन करके, विस्थापित कर रही हैं?
उत्तर- संवैधानिक रूप से आदिवासियों की जमीन को किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता। लेकिन विभिन्न प्रदेशों की सरकारें आदिवासियों के इस संवैधानिक कानून का उल्लंघन कर रही हैं। ये सरकारें लकड़ी व्यापार, पेपर मिल आदि के नाम पर गैर-आदिवासी घुसपैठियों को जनजातीय जमीनों का दोहन करने और आदिवासियों को उनके परम्परागत जंगलों से विस्थापित करने की छूट देती हैं। इसके अतिरिक्त जंगलों को आरक्षित या अभयारण्य घोषित करके भी उन्हें वहाँ से बेदखल किया जा रहा है।
प्रश्न 6. विस्थापित किये गये आदिवासियों के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?
उत्तर- जो आदिवासी पहले से ही विस्थापित कर दिये गये हैं और जो अब वापस नहीं लौट सकते, उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए। अर्थात् सरकार को ऐसी योजनाएँ बनानी चाहिए जिनके सहारे वे नये स्थानों पर रह सकें।
और काम कर सकें। जब सरकार आदिवासियों से छीनी गई जमीन पर औद्योगिक या अन्य परियोजनाओं के निर्माण के लिए बेहिसाब पैसा खर्च कर सकती है तो इन विस्थापितों को पुनर्वास देने के लिए मामूली-सा खर्चा करने में क्यों हिचकिचाती है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. 1989 के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989-यह अधिनियम 1989 में दलितों तथा अन्य समुदायों की माँगों के जवाब में बनाया गया था। इस कानून में अपराधों की एक लम्बी सूची दी गयी है। यह कानून अपराधों के विभिन्न प्रकारों तथा दोषियों के जघन्य कृत्यों का उल्लेख करते हुए दोषियों को सजा देता है। इस कानून में कई स्तर के अपराधों के बीच फर्क किया गया है। यथा-
(1) इसमें शारीरिक रूप से खौफनाक और नैतिक रूप से निन्दनीय अपमान के स्वरूपों की सूची दी गई है। इसका मकसद ऐसे लोगों को सजा दिलाना है जो (i) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति को कोई अखाद्य अथवा गंदा पदार्थ पीने या खाने के लिए विवश करते हैं। (ii) अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति को नंगा करते हैं या उसे नंगा घुमाते हैं या उसके चेहरे अथवा देह पर रंग लगाते हैं या कोई और ऐसा कृत्य करते हैं जो मानवीय प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है।
(2) इसमें ऐसे कृत्यों की सूची भी है जिनके जरिये दलितों और आदिवासियों को उनके साधारण संसाधनों से वंचित किया जाता है या उनसे गुलामों की तरह काम करवाया जाता है। परिणामस्वरूप इस कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति के नाम पर आवंटित की गई या उसके स्वामित्व वाली जमीन पर कब्जा करता है या खेती करता है या उसे अपने नाम स्थानांतरित करवा लेता है तो उसे सजा दी जायेगी।
(3) इस कानून में दलित एवं आदिवासी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से बचने के लिए ऐसे लोगों को दण्डित किया जाये जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला को अपमानित करने के लिए उसके साथ जोर-जबरदस्ती करते हैं।
(4) आदिवासी कार्यकर्त्ता अपनी परम्परागत जमीन पर अपने कब्जे की बहाली के लिए इस कानून का सहारा लेते हैं।