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📚 कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 15: जनसुविधाएँ

Public Facilities

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27•📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक•🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठगत प्रश्न

प्रश्न 1. (i) क्या चेन्नई में सभी के लिए पानी का संकट है? (ii) क्या आप बता सकते हैं कि अलग-अलग लोगों को अलग-अलग मात्रा में पानी क्यों मिलता है? दो कारण बताएँ।

उत्तर— (i) नहीं, चेन्नई में सभी के लिए पानी का संकट नहीं है। कुछ प्रभावशाली लोगों को आवश्यकता से अधिक जल उपलब्ध है।

(ii) अलग-अलग लोगों को अलग-अलग मात्रा में पानी मिलने के दो कारण ये हैं—

(अ) जहाँ पानी का भंडारण किया गया है, उसके आसपास के इलाकों में पानी ज्यादा आता है जबकि दूर की बस्तियों को कम पानी मिलता है।
(ब) प्रभावशाली वर्गों के इलाकों में पानी, गरीबों की बस्तियों की तुलना में ज्यादा आता है।

प्रश्न 1. जनसुविधाएँ क्या होती हैं? जनसुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार पर क्यों होनी चाहिए?

उत्तर— जनसुविधाएँ—ऐसी सुविधाएँ जिनका सम्बन्ध व्यक्ति की मूलभूत सुविधाओं से होता है, जनसुविधाएँ कहलाती हैं। जैसे—पानी, स्वच्छता, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, अस्पताल, विद्यालय, कॉलेज आदि।

जनसुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार पर ही होनी चाहिए क्योंकि हमारे संविधान में जीवन के अधिकार का भी आश्वासन दिया गया है जो देश के सभी लोगों को प्राप्त है। अतः इसकी जिम्मेदारी सरकार पर ही है।

प्रश्न 2. आपको ऐसा क्यों लगता है कि जनसुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार के ऊपर ही होनी चाहिए जबकि वह इन कामों को निजी कंपनियों के जरिये भी करवा सकती है?

उत्तर— जनसुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार के ऊपर ही होनी चाहिए। सरकार को इसे निजी कंपनियों के द्वारा नहीं करवाना चाहिए क्योंकि निजी कंपनियाँ सुविधाएँ तो मुहैया कराती हैं, लेकिन उनकी कीमत इतनी ज्यादा होती है कि चंद लोग ही उसका खर्च उठा पाते हैं। जो लोग इन सुविधाओं के एवज में खर्च नहीं कर पाएँगे वे सम्मानजनक जीवन जीने से वंचित रह जायेंगे। लेकिन ये लोगों की मूलभूत आवश्यकताएँ होती हैं जिनका पूरा होना समाज के सभी लोगों के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 1. (अ) अगर सरकार जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींच ले तो क्या होगा? (ब) क्या आपको लगता है कि यह सही कदम होगा?

उत्तर— (अ) यदि सरकार जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींच ले तो निजी कंपनियाँ जलापूर्ति के क्षेत्र में आगे आयेंगी लेकिन पानी के इस्तेमाल में जबरदस्त असमानता बढ़ जायेगी तथा पानी की दर अत्यधिक बढ़ जायेगी। बहुत सारे लोग पानी का खर्च उठाने में अक्षम हो जायेंगे तथा लोग पानी के लिए आंदोलनरत हो जायेंगे।

(ब) सरकार द्वारा जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींचना सही कदम नहीं होगा।

प्रश्न 1. जलापूर्ति में सुधार के लिए आपकी राय में क्या किया जा सकता है?

उत्तर— (i) जलापूर्ति में सुधार के लिए जल-विभाग को वर्षा के जल के संचय की योजनाएँ बनानी चाहिए ताकि भूमिगत जल स्तर में सुधार लाया जा सके।

(ii) जलापूर्ति विभाग को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए शुल्क के जरिये पैसा एकत्रित करना चाहिए।

(iii) आवश्यकता पड़ने पर पानी की ढुलाई और वितरण के लिए निजी कंपनियों की भी सेवाएँ ली जाएँ लेकिन पानी के टैंकरों की दर सरकारी जलापूर्ति विभाग ही तय करे तथा वही उन्हें काम करने की इजाजत दे।

प्रश्न 1. क्या आपको लगता है कि समुचित स्वच्छता सुविधाओं के अभाव से लोगों का जीवन प्रभावित होता है? कैसे?

उत्तर— समुचित स्वच्छता सुविधाओं के अभाव से लोगों में बीमारियाँ फैलती हैं और बीमारियों से उनका स्वास्थ्य कमजोर होता है। स्वास्थ्य के लिए उनका खर्चा बढ़ जाता है, जिससे उन्हें पोषण के मद में कमी करनी पड़ती है। इस सबका प्रभाव यह होता है कि लोगों की कार्यक्षमता घट जाती है, वे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. आपको ऐसा क्यों लगता है कि दुनिया में निजी जलापूर्ति के उदाहरण कम हैं?

उत्तर— दुनिया में निजी जलापूर्ति के उदाहरण कम हैं क्योंकि निजी कंपनियाँ मुनाफे के लिए चलती हैं। कई जगह निजी कंपनियाँ टैंकरों या सीलबन्द बोतलों के जरिये पानी की आपूर्ति करती हैं, लेकिन उनकी कीमत इतनी ज्यादा होती है कि चंद लोग ही उसका खर्च उठा पाते हैं। यह सुविधा सस्ती दर पर सभी लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होती; जितना खर्च करेंगे, उसके मुताबिक ही सुविधा पायेंगे। इसका नतीजा यह होगा कि जो इन सुविधाओं के एवज में खर्च नहीं कर पायेंगे वे सम्मानजनक जीवन जीने से वंचित रह जायेंगे।

रह जायेंगे। इससे हमको ऐसा लगता है कि दुनिया में निजी जलापूर्ति के उदाहरण कम हैं।

प्रश्न 2. क्या आपको लगता है कि चेन्नई में सबको पानी की सुविधा उपलब्ध है और वे पानी का खर्च उठा सकते हैं? चर्चा करें।

उत्तर— चेन्नई में सबको पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नगरपालिका की आपूर्ति से शहर की लगभग आधी जरूरत ही पूरी हो पाती है। कुछ इलाकों में नियमित रूप से पानी आता है, कुछ इलाकों में बहुत कम पानी आता है। जलापूर्ति में कमी का बोझ ज्यादातर गरीबों पर पड़ता है। जब मध्यम वर्ग के लोगों के सामने पानी की किल्लत पैदा हो जाती है तो इस वर्ग के लोग बोरवेल खोद कर, टैंकरों से पानी खरीद कर या बोतलबंद पानी खरीद कर अपना काम चला लेते हैं।

पानी की उपलब्धता के अलावा कुछ ही लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुँच है। सम्पन्न तबके के लोग अधिक खर्च करके बोतलबंद पानी या जलशोधक उपकरणों के सहारे साफ पानी का इंतजाम कर सकते हैं। परन्तु गरीब इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। ऐसा लगता है कि जिन लोगों के पास पैसा है, उन्हीं के पास पानी का अधिकार है। यह स्थिति सबको पर्याप्त तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य से बहुत दूर है।

प्रश्न 3. किसानों द्वारा चेन्नई के जल व्यापारियों को पानी बेचने से स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ रहा है? क्या आपको लगता है कि स्थानीय लोग भूमिगत पानी के इस दोहन का विरोध कर सकते हैं? क्या सरकार इस बारे में कुछ कर सकती है?

उत्तर— किसानों द्वारा चेन्नई के जल व्यापारियों को पानी बेचने से न केवल खेती का पानी छिन जाता है, बल्कि गाँव के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति भी कम पड़ने लगती है। फलस्वरूप सारे कस्बों और गांवों में भूमिगत जल स्तर बुरी तरह गिर चुका है। स्थानीय लोग भूमिगत पानी के इस दोहन का विरोध कर सकते हैं। सरकार को भी चाहिए कि ऐसे अवांछित भूमिगत पानी के दोहन को रोका जाये और सार्वजनिक जल वितरण प्रणाली का विस्तार किया जाये।

प्रश्न 4. ऐसा क्यों है कि ज्यादातर निजी अस्पताल और निजी स्कूल कस्बों या ग्रामीण इलाकों की बजाय बड़े शहरों में ही हैं?

उत्तर— ज्यादातर निजी अस्पताल और निजी स्कूल कस्बों या ग्रामीण इलाकों की बजाय बड़े शहरों में इसलिए हैं कि इन शहरों में कस्बों तथा गांवों की तुलना में जन-सुविधाएँ अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। जनसुविधाओं के अभाव में निजी स्कूल व निजी अस्पताल गांवों या कस्बों में नहीं खोले जा रहे हैं। दूसरे, निजी स्कूलों और निजी अस्पतालों की सेवाएँ महँगी होती हैं। इन महँगी सेवाओं पर सम्पन्न वर्ग ही खर्च कर सकता है। गांवों तथा कस्बों में शहरों की तुलना में सम्पन्नता का अभाव है। इन कारणों से वहां निजी स्कूल व निजी अस्पताल नहीं खुल पा रहे हैं।

प्रश्न 5. क्या आपको लगता है कि हमारे देश में जन-सुविधाओं का वितरण पर्याप्त और निष्पक्ष है? अपनी बात के समर्थन में एक उदाहरण दें।

उत्तर— नहीं, हमें यह नहीं लगता है कि हमारे देश में जन-सुविधाओं का वितरण पर्याप्त और निष्पक्ष है। उदाहरण के लिए, चेन्नई में पानी की भारी कमी है। नगरपालिका की आपूर्ति से शहर की लगभग आधी जरूरत ही पूरी हो पाती है। कुछ इलाकों में नियमित रूप से पानी आता है; कुछ इलाकों में बहुत कम पानी आता है। यथा—

(1) अण्णानगर क्षेत्र—चेन्नई के अण्णानगर जैसे उच्चवर्गीय इलाके के नलों में 24 घंटे पानी रहता है। जब पानी की आपूर्ति कम होती है तो वहां के रामगोपाल जैसे निवासी नगर जल निगम में परिचित एक बड़े अफसर से बात करते हैं और फौरन उनके लिए पानी के टैंकर का इंतजाम हो जाता है।

(2) मैलापुर जैसे क्षेत्र—शहर के ज्यादातर इलाकों की तरह मैलापुर में पानी की कमी है। यहाँ नगरपालिका दो दिन में एक बार पानी उपलब्ध कराती है। कुछ लोगों की जरूरतें निजी बोरवेल से पूरी हो जाती हैं। लेकिन बोरवेल का पानी खारा है। लोग उसे शौचालय और साफ-सफाई के लिए ही इस्तेमाल करते हैं। दूसरे कामों के लिए टैंकरों का पानी खरीदना पड़ता है। पानी खरीदने के लिए प्रति माह 500-600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पीने के पानी को साफ करने के लिए लोगों के घरों में ही जल शोधन उपकरण लगवाये हुए हैं।

(3) मडीपाक्कम जैसे इलाके—मडीपाक्कम जैसे इलाकों में चार दिन में एक बार पानी मिलता है। पानी की कमी के कारण वे लोग परिवार को भी अपने साथ में नहीं रख पा रहे हैं। पीने के लिए पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं।

(4) सैदापेट के पास झुग्गी बस्ती—30 झुग्गियों के लिए कोने में एक ही नल है। नल में रोज 20 मिनट के लिए एक बोरवेल से पानी आता है। इस दौरान एक परिवार को ज्यादा से ज्यादा 3 बाल्टियाँ भरने का मौका मिलता है। इसी पानी को लोग नहाने, धोने और पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। गर्मियों में पानी और भी कम मिलता है। उन्हें टैंकरों का घंटों इंतजार करना पड़ता है।

इस उदाहरण से स्पष्ट है कि हमारे देश में जनसुविधाओं का न तो पर्याप्त वितरण है और न ही यह वितरण निष्पक्ष है।

प्रश्न 6. अपने इलाके की पानी, बिजली आदि कुछ जनसुविधाओं को देखें। क्या उनमें सुधार की कोई गुंजाइश है? आपकी राय में क्या किया जाना चाहिए?

उत्तर- अपने क्षेत्र की स्थिति के आधार पर यह प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 7. क्या आपके इलाके के सभी लोग उपयुक्त जनसुविधाओं का समान रूप से इस्तेमाल करते हैं? विस्तार से बताएँ।

उत्तर- नहीं, हमारे इलाके के सभी लोग उपयुक्त जनसुविधाओं का समान रूप से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। हमारे इलाके में सभी वर्गों के लोग रहते हैं। इनमें आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न लोग सरकारी जनसुविधाओं के साथ-साथ निजी कंपनियों द्वारा प्रदत्त जनसुविधाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। जबकि गरीब लोग केवल सरकारी जनसुविधाओं पर आश्रित हैं।

सरकारी जनसुविधाओं पर अत्यधिक भार होने के कारण उनकी प्राप्ति हेतु गरीब लोगों को घंटों इन्तजार करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त उन्हें पानी, बिजली जैसी सुविधाएं भी कम मात्रा में प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 8. जनगणना के साथ-साथ कुछ जन-सुविधाओं के बारे में भी आंकड़े इकट्ठा किये जाते हैं। अपने शिक्षक के साथ चर्चा करें कि जनगणना का काम कब और किस तरह किया जाता है?

उत्तर- हमारे देश में जनगणना का कार्य प्रत्येक दस वर्ष बाद किया जाता है। पिछली जनगणना सन् 2011 में हुई है। जनगणना का कार्य जनगणना विभाग द्वारा किया जाता है। प्रत्येक राज्य में जनगणना विभाग अन्य राज्य कर्मचारियों, से, विशेषकर शिक्षकों से, इस कार्य में सहायता लेता है। वह सरकार द्वारा निर्धारित बिन्दुओं के आधार पर जनगणना का कार्य करता है। गणक प्रत्येक घर जाकर परिवार के मुखिया से घर के सदस्यों की संख्या, उनके नाम आदि का विवरण लेते हैं। इसके साथ ही धर्म, जाति (यदि पूछी जाये), व्यवसाय, जन-सुविधाओं की उपलब्धता सम्बन्धी आंकड़े लेते हैं। इन समस्त आंकड़ों का जनगणना विभाग वर्गीकरण, सारणीयन तथा विश्लेषण कर सामान्य निष्कर्ष निकालता है तथा उन निष्कर्षों को प्रकाशित करता है।

प्रश्न 9. हमारे देश में निजी शैक्षणिक संस्थान-स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान बड़े पैमाने पर खुलते जा रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी शिक्षा संस्थानों का महत्त्व कम होता जा रहा है। आपकी राय में इसका क्या असर हो सकता है? चर्चा कीजिये।

उत्तर- निजी शैक्षणिक संस्थानों ने समय की मांग के अनुसार अपने को ढाला है जबकि सरकारी शिक्षा संस्थानों ने समय की मांग के अनुरूप तकनीकी ढंग से अपने आप को परिवर्तित नहीं किया है, इसके कारण इनकी तुलना में निजी शिक्षा संस्थानों का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। हमारी राय में इसका निम्न असर हो सकता है—

(1) निजी शैक्षणिक संस्थानों का महत्त्व बढ़ने से शिक्षा महंगी हो जायेगी तथा गरीब और सामान्य लोगों को उच्च शिक्षा प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होगी।

(2) सरकारी शैक्षणिक संस्थानों का महत्त्व घटने तथा निजी शैक्षणिक संस्थानों का महत्त्व घटने से भारतीय संविधान के सामाजिक-आर्थिक न्याय के आदर्श को गहरा धक्का लगेगा।

(3) गरीब वर्गों के लोग उच्च शिक्षा से वंचित रह जायेंगे जिससे आगे जाकर देश का उचित सामाजिक-आर्थिक विकास अवरुद्ध होगा।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ-सार

1. जनसुविधाओं से आशय- ऐसी सुविधाएँ जिनका सम्बन्ध व्यक्ति की मूलभूत सुविधाओं से होता है, जनसुविधाएँ कहलाती हैं। जैसे-पानी, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा आदि। जनसुविधाओं का सम्बन्ध हमारी बुनियादी जरूरतों से होता है। किसी जनसुविधा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह होती है कि एक बार निर्माण हो जाने के बाद उसका बहुत सारे लोग इस्तेमाल करते हैं।

2. सरकार की भूमिका- सरकार की एक अहम जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त जनसुविधाएँ मुहैया कराये।

3. भारत में जनसुविधाओं की स्थिति- भारत में जनसुविधाओं के मोर्चे पर संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है क्योंकि (1) आपूर्ति में कमी है। (2) वितरण में भारी असमानता दिखाई देती है। (3) महानगरों और बड़े शहरों के मुकाबले कस्बों और गांवों में तो इन सुविधाओं की स्थिति और भी खराब है। (4) सम्पन्न बस्तियों के मुकाबले गरीब बस्तियों में सेवाओं की स्थिति कमजोर है।

4. जन-सुविधायें समतापरक ढंग से मिलनी चाहिए- जन-सुविधाओं को निजी कम्पनियों के हाथों में सौंप देने से समस्या हल होने वाली नहीं है क्योंकि ये कम्पनियाँ लाभ के आधार पर काम करेंगी और सेवाएँ महंगी हो जायेंगी जो सबके लिए उपभोग्य नहीं रह जायेंगी। जबकि देश के प्रत्येक नागरिक को इन सुविधाओं को पाने का अधिकार है और उसे ये सुविधाएँ समतापरक ढंग से मिलनी चाहिए।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

1. निम्नलिखित में से कौनसी सुविधा जन-सुविधा नहीं है—

(अ) बिजली की आपूर्ति
(ब) पानी की आपूर्ति
(स) शिक्षा की व्यवस्था
(द) होटल की व्यवस्था

2. चेन्नई की निम्न से किस बस्ती में पानी की सर्वाधिक कमी है—

(अ) सैदापेट की झुग्गी बस्ती में
(ब) अन्ना नगर में
(स) मैलापुर में
(द) मडीपाक्कम में

3. सरकार को जन-सुविधाओं के लिए पैसा मिलता है—

(अ) बैंकों से
(ब) जनता से मिलने वाले कर से
(स) विदेशी कंपनियों से
(द) राष्ट्रीय कंपनियों से

4. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत पानी के अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है—

(अ) अनुच्छेद 14
(ब) अनुच्छेद 17
(स) अनुच्छेद 21
(द) अनुच्छेद 23

अथवा

पानी के अधिकार को किस अधिकार का हिस्सा माना गया है?

(अ) शिक्षा का अधिकार
(ब) सूचना का अधिकार
(स) जीवन का अधिकार
(द) संवैधानिक उपचारों का अधिकार

5. चेन्नई में किस मूलभूत सुविधा की कमी है?

(अ) भोजन
(ब) वस्त्र
(स) पानी
(द) बिजली

6. निम्नलिखित में से जनसुविधा है—

(अ) स्वास्थ्य और स्वच्छता
(ब) बिजली
(स) पानी
(द) उपर्युक्त सभी

7. केन्द्रीय बजट 2018-19 के अनुसार केन्द्रीय सरकार करों एवं शुल्कों के रूप में राज्यों को 1 रुपये में कितना हिस्सा देती है?

(अ) 24 पैसे
(ब) 18 पैसे
(स) 10 पैसे
(द) 9 पैसे

8. कम दूरी के लिए सार्वजनिक परिवहन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है—

(अ) रेल
(ब) बस
(स) हवाई जहाज
(द) इनमें से कोई नहीं

9. 2011 के सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत के कितने प्रतिशत परिवारों के पास पेयजल सुविधा उपलब्ध है?

(अ) 20 प्रतिशत
(ब) 48 प्रतिशत
(स) 87 प्रतिशत
(द) 92 प्रतिशत

10. भारतीय संविधान 6-14 वर्ष के बच्चों को किस अधिकार की गारन्टी देता है?

(अ) सूचना का अधिकार
(ब) शिक्षा का अधिकार
(स) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
(द) घूमने का अधिकार

11. जन-सुविधाओं को मुहैया कराने की जिम्मेदारी होती है—

(अ) सरकार की
(ब) राष्ट्रीय कंपनी की
(स) अन्तर्राष्ट्रीय कंपनी की
(द) सामाजिक कार्यकर्ता की

12. जन-सुविधाओं का सम्बन्ध किससे होता है?

(अ) झुग्गी झोंपड़ी से
(ब) लोगों की मूलभूत सुविधाओं से
(स) निजी कंपनी से
(द) विपक्षी दल से

उत्तरमाला—1. (द) 2. (अ) 3. (ब) 4. (स) 5. (स) 6. (द) 7. (अ) 8. (ब) 9. (स) 10. (ब) 11. (अ) 12. (ब)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये—

1. .................... से सम्बन्धित बीमारियों के कारण हर रोज 1600 से ज्यादा भारतीय मौत के मुँह में चले जाते हैं।

2. भारतीय संविधान 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को .................... की गारंटी देता है।

3. .................... का सम्बन्ध लोगों की मूलभूत सुविधाओं से होता है।

4. जलापूर्ति में .................... का बोझ ज्यादातर .................... पर पड़ता है।

5. मुंबई की .................... एक अच्छी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली है।

6. तेज .................... के कारण बड़े शहरों में भी .................... बस प्रणाली जरूरत के हिसाब से कम साबित होती जा रही है।

7. ग्रामीण इलाकों में .................... और .................... दोनों के लिए पानी की जरूरत पड़ती है।

8. बहुत सारी .................... कंपनियाँ शहर के आसपास के इलाकों से .................... खरीद कर शहरों में बेचती है।

उत्तर—1. पानी 2. शिक्षा के अधिकार 3. जनसुविधाओं 4. कमी, गरीबों 5. उपनगरीय रेलवे 6. शहरीकरण, सार्वजनिक, 7. मनुष्यों, मवेशियों 8. निजी, पानी।

सही या गलत बताइए—

1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 के अन्तर्गत पानी के अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है।

2. किसी जनसुविधा का एक बार निर्माण हो जाने के बाद उसका बहुत सारे लोग इस्तेमाल कर सकते हैं।

3. निजी कम्पनियाँ जनसुविधाएँ बहुत सस्ती दरों पर उपलब्ध कराती हैं।

4. बजट के जरिए सरकार अपने नफे-नुकसान का ब्यौरा पेश करती है।

5. महानगरों और बड़े शहरों के मुकाबले कस्बों और गाँवों में जनसुविधाओं की स्थिति ज्यादा अच्छी है।

उत्तर—1. गलत 2. सही 3. गलत 4. सही 5. गलत।

सही मिलान कीजिए—

(अ)

(ब)

पानी की भारी किल्लत

- मुंबई

सफल मेट्रो रेल परियोजना

- हैदराबाद

जल विभाग के दायरे में वृद्धि

- दिल्ली

उपनगरीय रेलवे

- चेन्नई

उत्तर—(अ) | (ब)

पानी की भारी किल्लत

- चेन्नई

सफल मेट्रो रेल परियोजना

- दिल्ली

जल विभाग के दायरे में वृद्धि

- हैदराबाद

उपनगरीय रेलवे

- मुंबई

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. जन-सुविधाएँ क्या हैं?

उत्तर—एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए व्यक्ति को जिन मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है, उसे जन-सुविधाएँ कहा जाता है।

प्रश्न 2. प्रमुख जन-सुविधाओं के नाम लिखिये।

उत्तर-प्रमुख जन-सुविधायें हैं-पानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, विद्यालय और कालेज आदि।

प्रश्न 3. जन-सुविधा की एक विशेषता बताइये।

उत्तर- एक बार निर्माण हो जाने के बाद उसका बहुत सारे लोग इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्रश्न 4. जन-सुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी किसकी है?

उत्तर- जन-सुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार की है।

प्रश्न 5. जन-सुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार की ही क्यों होनी चाहिए?

उत्तर- जन-सुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार की ही होनी चाहिए क्योंकि सरकार ही इन्हें सस्ती और समतापरक ढंग से लोगों को मुहैया करा सकती है।

प्रश्न 6. कोई निजी कंपनी जन सुविधाओं के कामों में दिलचस्पी क्यों नहीं लेती है?

उत्तर- निजी कंपनियाँ मुनाफे के लिए चलती हैं और ज्यादातर जनसुविधाओं से मुनाफे की गुंजाइश नहीं होती। फलस्वरूप कोई निजी कंपनी इस तरह के कामों में दिलचस्पी नहीं लेती।

प्रश्न 7. भारतीय संविधान में किन-किन अधिकारों को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है?

उत्तर- भारतीय संविधान में पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि अधिकारों को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है।

प्रश्न 8. भारतीय संविधान कितने वर्ष की आयु के सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार की गारंटी देता है?

उत्तर- भारतीय संविधान 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार की गारंटी देता है।

प्रश्न 9. शिक्षा के अधिकार का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पहलू क्या है?

उत्तर- शिक्षा के अधिकार का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि सभी बच्चों को समान रूप से स्कूली शिक्षा उपलब्ध हो।

प्रश्न 10. ज्यादा पानी के इस्तेमाल पर उसकी दर बढ़ जाती है। इसके पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है?

उत्तर- ज्यादा पानी के इस्तेमाल पर उसकी दर को बढ़ाने के पीछे सरकार का यह उद्देश्य है कि पानी का उपभोग आवश्यकता के अनुसार किया जाये, उसका दुरुपयोग न हो।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली कोई दो जन सुविधाएँ बताइये।

उत्तर- सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली दो जन सुविधाएँ ये हैं-

(i) सरकार द्वारा नागरिकों को पीने हेतु स्वच्छ जल की आपूर्ति की जाती है।

(ii) सरकार द्वारा नागरिकों के स्वास्थ्य हेतु अस्पतालों की व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 2. जन सुविधाएँ क्या हैं? प्रमुख जन सुविधाओं के नाम लिखिए।

उत्तर- एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए व्यक्ति को जिन मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है, उसे जन-सुविधाएँ कहा जाता है। प्रमुख जन-सुविधाएँ हैं-पानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, विद्यालय और कॉलेज आदि।

प्रश्न 3. भारत में जन-सुविधाओं की दो कमियाँ बताइये।

उत्तर- भारत में जन-सुविधाओं की दो कमियाँ ये हैं-

(i) भारत में जन-सुविधाओं की आपूर्ति में कमी है।

(ii) यहाँ जन-सुविधाओं के वितरण में भारी असमानता दिखाई देती है।

प्रश्न 4. जलापूर्ति सुधार के लिए कोई दो उपाय लिखिए।

उत्तर- (i) जलापूर्ति में सुधार के लिए जल-विभाग को वर्षा के जल के संचय की योजनाएँ बनानी चाहिए ताकि भूमिगत जलस्तर में सुधार लाया जा सके।

(ii) जलापूर्ति विभाग को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए शुल्क के जरिए पैसा एकत्रित करना चाहिए।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-II

प्रश्न 1. जीवन के अधिकार के रूप में पानी की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिये।

उत्तर- जीवन और स्वास्थ्य के लिए पानी आवश्यक है। पानी न केवल हमारी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है, बल्कि साफ पानी से अनेक बीमारियों से भी निजात मिलती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत पानी के अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है। इसका अभिप्राय यह है कि अमीर-गरीब, हर व्यक्ति का यह अधिकार है कि उसे सस्ती कीमत पर दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिले। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी इसका एक अंग है।

प्रश्न 2. बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन के महत्त्वपूर्ण साधनों का उल्लेख कीजिये।

उत्तर- बड़े शहरों में कम दूरी के लिए बसें ही सार्वजनिक परिवहन के सबसे महत्त्वपूर्ण साधन हैं। ज्यादातर कामकाजी लोग बसों से ही अपनी मंजिल तक पहुँचते हैं। तेज शहरीकरण के कारण बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली जरूरत के हिसाब से कम साबित होती जा रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए महानगरों में सरकार मेट्रो रेल परियोजनाएँ क्रियान्वित कर रही है।

प्रश्न 3. पोर्तो एलेग्रे में सार्वजनिक जलापूर्ति व्यवस्था का वर्णन कीजिये।

उत्तर— पोर्तो एलेग्रे ब्राजील का एक शहर है। यहाँ नगर जल विभाग ने सभी लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करा दिया है। यहाँ पानी की औसत कीमत कम रखी गई है और गरीबों से केवल आधी कीमत ली जाती है। विभाग को जो भी फायदा होता है उसका इस्तेमाल जलापूर्ति में सुधार के लिए किया जाता है। जल विभाग का काम पारदर्शी ढंग से चलता है। विभाग को कौनसी योजना हाथ में लेनी चाहिए, इस बारे में सब लोग मिलकर तय करते हैं। जन-सभाओं में जनता प्रबंधकों का पक्ष सुनती है और जल विभाग की प्राथमिकताएं तय करने में वोट के जरिए फैसला करती है।

प्रश्न 4. 'सुलभ इंटरनेशनल' के स्वच्छता के अभियान को स्पष्ट कीजिये।

उत्तर— गैर सरकारी संगठन 'सुलभ इंटरनेशनल' पिछले लगभग पाँच दशक से निम्न जाति, निम्न आय वर्ग के लोगों के सामने मौजूद स्वच्छता के अभाव की समस्या से निपटने के लिए कोशिश कर रहा है। इसने 8,500 से ज्यादा सामुदायिक शौचालय इकाइयाँ और 15,00,000 से ज्यादा घरेलू शौचालय बनाए हैं जिससे दो करोड़ लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। सुलभ की सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर गरीब और मेहनतकश वर्ग के लोग होते हैं। शहरों में इन शौचालयों के इस्तेमाल पर दो रुपया शुल्क लिया जाता है। स्थानीय विभाग इन सेवाओं की स्थापना के लिए जमीन और पैसा मुहैया कराते हैं जबकि रख-रखाव की लागत कई बार प्रयोक्ताओं से मिलने वाले पैसे से पूरी की जाती है।

प्रश्न 5. क्या सरकार जनसुविधाओं के लिए निजी कंपनियों का भी सहारा ले सकती है? यदि हाँ, तो कैसे?

उत्तर— हाँ, सरकार कुछ जन सुविधाओं के लिए निजी कंपनियों का भी सहारा ले सकती है। जैसे—सड़कें बनाने के ठेके निजी कंपनियों या ठेकेदारों को दिए जाते हैं। दिल्ली में बिजली के वितरण का काम दो निजी कंपनियों के हाथ में है। लेकिन सरकार को इन कंपनियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इन सुविधाओं को सस्ती कीमत पर सभी लोगों तक पहुँचाने के लक्ष्य को पूरा करने में कोई कसर न छोड़ें।

प्रश्न 6. सरकार को जनसुविधाओं के लिए पैसा कहाँ से मिलता है? पानी का उदाहरण देकर समझाइये।

उत्तर— सरकार जनसुविधाओं के लिए पैसे की व्यवस्था बजट के द्वारा करती है। बजट में सरकार के नफे-नुकसान का ब्यौरा होता है। जनता से कर तथा सुविधा हेतु शुल्क से प्राप्त होने वाली राशि जनसुविधा पर खर्च की जाती है। उदाहरण के लिए पानी की आपूर्ति हेतु सरकार को पानी की व्यवस्था करने, पानी को दूर तक पहुँचाने, पाइपलाइनों का जाल बिछाने, पानी को साफ करने तथा गंदे पानी के निस्तारण पर खर्च करना पड़ता है। सरकार इन खर्चों को कुछ मात्रा में करों के जरिए तथा कुछ मात्रा में पानी की कीमत वसूल करके पूरा करती है। पानी का मूल्य इस प्रकार तय किया जाता है कि गरीबों पर अधिक भार न आवे।

निबन्धात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. सरकार जरूरत के हिसाब से पानी मुहैया नहीं कर पा रही है और बहुत सारे जल विभाग घाटे में चल रहे हैं, इसलिए क्या जलापूर्ति का काम निजी कंपनियों को सौंप दिया जाना चाहिए? क्या निजी कंपनियाँ ज्यादा बेहतर काम कर सकती हैं? सतर्क उत्तर दीजिये।

उत्तर— यद्यपि सरकार जरूरत के हिसाब से पानी मुहैया नहीं कर पा रही है और बहुत सारे जल विभाग घाटे में चल रहे हैं, तथापि सस्ती और समतापरक जलापूर्ति सरकार ही कर सकती है, निजी कंपनियाँ नहीं। निजी कंपनियाँ अपना कार्य लाभ के लिए करती हैं। यदि जलापूर्ति का काम निजी कंपनियों से कराया जायेगा तो जलापूर्ति महंगी हो जायेगी और गरीब तथा निम्न वर्ग के लोगों के लिए इसकी कीमत चुकाना आसान नहीं रहेगा। इससे जलापूर्ति में भेदभाव और बढ़ जायेगा। इसलिए जलापूर्ति का काम निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाना चाहिए।

निम्नलिखित तथ्यों से भी यह कहा जा सकता है कि जलापूर्ति का काम सरकार द्वारा ही किया जाना चाहिए—

(1) दुनिया भर में जलापूर्ति की जिम्मेदारी सरकार पर रही है। निजी जलापूर्ति व्यवस्था के उदाहरण बहुत कम हैं। जहाँ जलापूर्ति की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपी गई, वहाँ पानी की कीमतों में भारी इजाफा हुआ। इस कारण वहाँ बहुत सारे लोगों के लिए पानी का खर्च उठाना संभव नहीं हो पाया। ऐसे शहरों में लोगों के विशाल प्रदर्शन हुए। बोलिविया आदि देशों में तो दंगे भी फैल गये जिसके दबाव में सरकार को जलापूर्ति व्यवस्था निजी हाथों से छीन कर दोबारा अपने हाथों में लेनी पड़ी।

(2) दुनिया में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ सार्वभौमिक जलापूर्ति सब लोगों तक पहुँच चुकी है। जैसे—ब्राजील के पोर्तो एलेग्रे शहर में। भारत में भी जल विभागों की सफलता के कई उदाहरण हैं; जैसे—मुंबई जलापूर्ति विभाग, हैदराबाद का जलापूर्ति विभाग, चेन्नई के जल विभाग द्वारा टैंकरों को अनुबंधित करना आदि। अन्य शहरों के जलापूर्ति विभाग भी अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करके, अपनी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाकर, जनसहभागिता को साथ लेकर इस समस्या को सुलझा सकते हैं।

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