📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. न्यूनतम वेतन के लिए कानून की जरूरत क्यों पड़ती है?
उत्तर—बहुत सारे मजदूरों को उनके मालिक सही मेहनताना नहीं देते। चूंकि मजदूरों को काम की जरूरत होती है, इसलिए वे सौदेबाजी भी नहीं कर पाते और बहुत कम मजदूरी पर ही काम करने को तैयार हो जाते हैं। मजदूरों को इस शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम वेतन के कानून की जरूरत पड़ती है।
प्रश्न 1. आपको ऐसा क्यों लगता है कि किसी फैक्ट्री में सुरक्षा कानूनों को लागू करना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है?
उत्तर—किसी फैक्ट्री में सुरक्षा कानूनों को लागू करना इसलिए बहुत महत्त्वपूर्ण होता है ताकि अनुच्छेद 21 में दिए गए जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं हो।
प्रश्न 2. क्या आप कुछ दूसरी ऐसी स्थितियों का उल्लेख कर सकते हैं जहाँ कानून या नियम तो मौजूद हैं, परंतु उनके क्रियान्वयन में ढिलाई के कारण लोग उनका पालन नहीं करते? (उदाहरण के लिए मोटर गाड़ियों की तेज रफ्तार, हेलमेट/सीट-बेल्ट न पहनना और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना)। कानूनों को लागू करने में क्या समस्याएँ आती हैं? क्या आप क्रियान्वयन में सुधार के लिए कुछ सुझाव दे सकते हैं?
उत्तर—हाँ, ऐसी कुछ स्थितियाँ हैं—(1) धूम्रपान निषिद्ध सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना (2) सड़क किनारे पेशाब।
करना। (3) जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार न करना (4) रेलवे फाटक बन्द होने पर भी उसके नीचे से निकलना (5) मोटर गाड़ियों की तेज रफ्तार (6) हेलमेट/सीट बेल्ट न पहनना (7) वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग (8) यातायात सिग्नल तोड़ना आदि।
कानूनों को लागू करने में समस्याएँ— (1) लोगों की कानूनों से अनभिज्ञता। (2) कानून के कमजोर तथा ढीले-ढाले होने और उनके क्रियान्वयन की मशीनरी के सुस्त तथा भ्रष्ट होने तथा कानून पालन न करने वालों को दंडित न किये जाने से कानून को लागू करने में समस्यायें आती हैं। (3) पर्याप्त स्टाफ का अभाव जैसे—यातायात पुलिसकर्मियों की कमी।
सुधार के लिए सुझाव— (1) लोगों को सामान्य कानूनों से अवगत कराया जाये। (2) कानून के सही क्रियान्वयन के लिए यह आवश्यक है कि कानून बिल्कुल स्पष्ट हों। उन्हें लागू करने से पूर्व उनके प्रति समाज में जागरूकता पैदा की जाये। (3) सरकारी मशीनरी कानूनों को लागू करने में पारदर्शिता बरते तथा कानूनों के क्रियान्वयन में ढिलाई करने वाले कर्मचारियों को दंडित किये जाने की स्पष्ट व्यवस्था हो। (4) साथ ही कानून का पालन न करने वालों के लिए भी दंड की स्पष्ट व्यवस्था कानून में होनी चाहिए। (5) पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. दो मजदूरों से बात करके पता लगाएँ कि उन्हें कानून द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन मिल रहा है या नहीं। इसके लिए आप निर्माण मजदूरों, खेत मजदूरों, फैक्ट्री मजदूरों या किसी दुकान पर काम करने वाले मजदूरों से बात कर सकते हैं।
उत्तर—नोट— यह प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थी स्वयं करें।
प्रश्न 2. विदेशी कंपनियों को भारत में अपने कारखाने खोलने का क्या फायदा है?
उत्तर— विदेशी कंपनियों को भारत में कारखाने खोलने का लाभ यहाँ का सस्ता श्रम है। अगर ये कंपनियाँ अमेरिका या किसी और विकसित देश में काम करें तो उन्हें भारत जैसे गरीब देशों के मजदूरों के मुकाबले वहाँ के मजदूरों को ज्यादा वेतन देना पड़ेगा। भारत में न केवल वे कम कीमत पर काम करवा सकती हैं, बल्कि यहाँ के मजदूर ज्यादा घंटों तक भी काम कर सकते हैं। तीसरे, यहाँ मजदूरों के लिए आवास जैसी दूसरी चीजों पर भी खर्चे की ज्यादा जरूरत नहीं होती। इस तरह ये कंपनियाँ यहाँ कम लागत पर ज्यादा मुनाफा कमा सकती हैं। चौथे, लागत में कमी लाने के लिए यहाँ सुरक्षा उपायों की भी अक्सर अनदेखी कर दी जाती है। यहाँ बेरोजगारी इतनी ज्यादा है कि थोड़ी-सी तनख्वाह के बदले न जाने कितने लोग असुरक्षित स्थितियों में काम करने को तैयार हो जाते हैं। मजदूरों की इस कमजोरी का फायदा उठाकर मालिक कार्यस्थल पर सुरक्षा की जिम्मेदारी से बच जाते हैं।
प्रश्न 3. क्या आपको लगता है कि भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को सामाजिक न्याय मिला? चर्चा करें।
उत्तर— भोपाल गैस त्रासदी से पीड़ित लोगों को सामाजिक न्याय नहीं मिला है। 36 साल बाद भी लोग न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं और यूनियन कार्बाइड के जहर से ग्रस्त लोगों के लिए नौकरियों की मांग कर रहे हैं। वे यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन एंडरसन को सजा दिलाने के लिए भी आंदोलनरत हैं लेकिन एंडरसन को सरकार अभी तक सजा नहीं दिला सकी है। इन्हें अभी तक पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि भी प्राप्त नहीं हुई है।
प्रश्न 4. जब हम कानूनों को लागू करने की बात करते हैं तो इसका क्या मतलब होता है? कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी है? कानूनों को लागू करना इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर— जब हम कानूनों को लागू करने की बात करते हैं तो इसका मतलब यह है कि कानून को क्रियान्वित किया जाना बहुत आवश्यक है। जब कोई कानून ताकतवर लोगों से कमजोर लोगों की रक्षा के लिए बनाया जाता है तो उसको लागू करना और भी महत्त्वपूर्ण बन जाता है। उदाहरण के लिए, प्रत्येक मजदूर को सही वेतन मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कार्यस्थलों का नियमित रूप से निरीक्षण करना चाहिए और अगर कोई कानून का उल्लंघन करता है तो उसको सजा देनी चाहिए। इस प्रकार कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी दबाव डालकर सरकार और निजी कंपनियों को कानून के पालन को बाध्य करना चाहिए। यदि कानूनों को लागू नहीं करवाया जायेगा तो शक्तिशाली लोग कानूनों का उल्लंघन करते रहेंगे और शक्तिहीनों का शोषण जारी रहेगा।
प्रश्न 5. कानून के जरिए बाजारों को सही ढंग से काम करने के लिए किस तरह प्रेरित किया जा सकता है? अपने जवाब के साथ दो उदाहरण दें।
उत्तर— बाजार में मजदूरों का शोषण न हो, उनको वाजिब मेहनताना मिले इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जहाँ न्यूनतम वेतन का कानून बनाया है, उसी तरह बाजार में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए भी सुरक्षा कानून बनाए हैं। इन कानूनों के जरिये मजदूर, उपभोक्ता और उत्पादक तीनों के संबंधों इस तरह से संचालित किया जाता है कि उनमें से किसी का शोषण न हो। इन कानूनों के जरिये इस बात की कोशिश की जाती है कि बाजार में अनुचित तरीकों पर अंकुश लगाया जाये।
प्रश्न 6. मान लीजिये कि आप एक रासायनिक फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर हैं। सरकार ने कंपनी को आदेश
दिया है कि वह वर्तमान जगह से 100 किलोमीटर दूर किसी दूसरे स्थान पर अपना कारखाना चलाए। इससे आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? अपनी राय पूरी कक्षा के सामने पढ़कर सुनायें।
उत्तर- (प्रदूषण फैलाने वाली रासायनिक फैक्ट्री को वर्तमान जगह से 100 किलोमीटर दूर किसी दूसरे स्थान पर ले जाने के आदेश से फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे पर्यावरण की सुरक्षा सम्बन्धी आदेशों को देने के साथ ही मजदूरों की आय की सुनिश्चितता के बारे में भी ध्यान दें।) इस संदर्भ में आप अपनी राय बना सकते हैं। अपनी राय को कक्षा के सामने पढ़कर सुनाएं।
प्रश्न 7. इस इकाई में आपने सरकार की विभिन्न भूमिकाओं के बारे में पढ़ा है। इनके बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
उत्तर- बाजार में हर जगह लोगों के शोषण की संभावना रहती है, चाहे वे मजदूर हों, उपभोक्ता हों या उत्पादक। लोगों को इस तरह के शोषण से बचाने के लिए सरकार कुछ कानून बनाती है। इन कानूनों के जरिये इस बात की कोशिश की जाती है कि बाजार में अनुचित तौर-तरीकों पर अंकुश लगाया जाये। कानून बना देने के बाद सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि कानूनों को लागू किया जाये ताकि ताकतवर लोगों से कमजोरों की रक्षा की जा सके। कानून के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार कार्यस्थलों का नियमित रूप से निरीक्षण करती है और अगर कोई कानून का उल्लंघन करता है तो उसको सजा देती है। इन कानूनों को बनाने, लागू करने और कायम रखने के लिए सरकार व्यक्तियों या निजी कंपनियों की गतिविधियों को नियंत्रित कर सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करती है। इस प्रकार सरकार को न केवल सही कानून बनाने चाहिए बल्कि उनको सही ढंग से लागू भी करना चाहिए। अगर कानून कमजोर हों और उनको सही ढंग से लागू न किया जाये तो उनसे भारी नुकसान हो सकता है। भोपाल गैस त्रासदी इस बात का सबूत है।
प्रश्न 8. आपके इलाके में पर्यावरण को दूषित करने वाले स्रोत कौनसे हैं? (क) हवा (ख) पानी और (ग) मिट्टी में प्रदूषण के सम्बन्ध में चर्चा करें। प्रदूषण को रोकने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं? क्या आप कोई और उपाय सुझा सकते हैं?
उत्तर- हमारे इलाके में पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले अनेक स्रोत हैं-
प्रदूषण को रोकने के लिए निम्न कदम उठाये गये हैं-
(1) पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं तथा अन्य लोगों के इस दबाव से निपटने के लिए भोपाल गैस त्रासदी के बाद भारत सरकार ने पर्यावरण के बारे में नए कानून बनाए। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिए प्रदूषण फैलाने वालों को ही जिम्मेदार माना जाने लगा।
(2) अदालतों ने स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा बताते हुए अपने फैसलों में कहा कि जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और इसमें प्रदूषण-मुक्त हवा और पानी का अधिकार भी शामिल है।
(3) सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह आदेश भी दिया कि दिल्ली में डीजल से चलने वाले सभी सार्वजनिक वाहन सी. एन. जी. ईंधन का इस्तेमाल करें। इन प्रयासों से दिल्ली जैसे शहरों के वायु प्रदूषण में काफी गिरावट आई है।
प्रदूषण रोकने के लिए एक सुझाव यह दिया जा सकता है कि हम कारखानों में ज्यादा स्वच्छ तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दें तथा प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगायें। रासायनिक खाद का कम प्रयोग करना चाहिए। हमें अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
प्रश्न 9. पहले पर्यावरण को किस तरह देखा जाता था? क्या अब सोच में कोई बदलाव आया है? चर्चा करें।
उत्तर- पहले पर्यावरण को एक मुफ्त चीज माना जाता था। किसी भी उद्योग को हवा-पानी में प्रदूषण छोड़ने की खुली छूट मिली हुई थी। चाहे नदियाँ हों, हवा हो या भूमिगत पानी- पर्यावरण दूषित हो रहा था और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। ढीले सुरक्षा मानकों से न केवल यूनियन कार्बाइड को फायदा मिला, बल्कि उसे प्रदूषण से निपटने के लिए पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ा। भोपाल त्रासदी ने पर्यावरण के मुद्दों को अगली कतार में ला दिया। पर्यावरणवादियों के दबाव से निपटने के लिए अब भारत सरकार ने पर्यावरण के बारे में नये कानून बनाए हैं जिनमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिए प्रदूषण
फैलाने वालों को ही जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके पीछे यह दृष्टिकोण है कि हमारे पर्यावरण पर अगली पीढ़ियों का भी हक बनता है और उसे केवल औद्योगिक विकास के लिए नष्ट नहीं किया जा सकता। अदालतों ने भी अपने निर्णयों में यह कहा है कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह प्रदूषण पर अंकुश लगाने, नदियों को साफ रखने और जो दोषी हैं उन पर भारी जुर्माना लगाने के लिए कानून और प्रक्रियायें तय करे।
प्रश्न 10. प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण पाठ्यपुस्तक केपर दिये कार्टून के जरिए क्या कहना चाह रहे हैं? इसका 2016 में बनाए गए उस कानून से क्या संबंध है जिसको पाठ्यपुस्तक केपर आपने पढ़ा था?
उत्तर- इस कार्टून में अपने बेटे की मदद के लिए एक लड़के को नौकरी पर रख लिया दिखाया गया है। यह 2016 के उस कानून का उल्लंघन है जिसमें 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सभी व्यवसायों में तथा किशोरों (14-18 वर्ष) के जोखिमवादी व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में नियोजन करने पर प्रतिबन्ध है। ऐसा करना अब एक संज्ञेय अपराध बना दिया गया है।
इस कार्टून के जरिए कार्टूनिस्ट इस बात पर व्यंग्य कर रहे हैं कि महिला एक तरफ बच्चों पर बोझ को बुरा बतला रही है तथा दूसरी तरफ अपने बच्चे के लिए दूसरे बालक पर बोझ डाल रही है। यह कार्टून 2016 के कानून का भी मखौल उड़ाता नजर आ रहा है।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
कानून की आवश्यकता—चाहे बाजार हो, दफ्तर हो या कोई कारखाना हो, बहुत सारी स्थितियों में लोगों को गलत तौर-तरीकों से बचाने के लिए कानून जरूरी होते हैं। निजी कंपनियाँ, ठेकेदार, व्यवसायी आदि अधिक लाभ कमाने हेतु गलत हथकंडे भी अपनाने लगते हैं; जैसे—वे मजदूरों को कम मेहनताना देते हैं, बच्चों से काम करवाते हैं, काम की स्थितियों पर ध्यान नहीं देते या पर्यावरण का ख्याल नहीं रखते और इस तरह आसपास के लोगों को भी नुकसान पहुँचाते हैं।
कानून बनाना, उनको लागू करना व उनकी निगरानी करना—सरकार की जिम्मेदारी—सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह निजी कंपनियों के इन गलत तौर-तरीकों को रोकने और सामाजिक न्याय प्रदान करने, शोषण को रोकने हेतु कानून बनाए, उनको लागू करे और उन पर निगरानी रखे। भारत सरकार ने ऐसे अनेक कानून बनाए हैं। जैसे—न्यूनतम मेहनताना कानून, कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम करने वाले कानून, चीजों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए यह बताने वाले कानून, जरूरी चीजों की कीमतों को नियंत्रण में रखने वाले कानून, कार्यस्थल पर बाल मजदूरी को रोकने वाले कानून, मजदूर यूनियन बनाने सम्बन्धी कानून आदि। कानून बनाने और लागू करने वाली संस्था के नाते यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि सुरक्षा कानूनों को सही ढंग से लागू किया जाये, जीवन के अधिकार का उल्लंघन न हो। यदि कानून कमजोर हों और उनको सही ढंग से लागू न किया जाये तो उनसे भारी नुकसान हो सकता है। भोपाल गैस त्रासदी इस बात का सबूत है कि भारत में सुरक्षा कानून ढीले थे और उन कमजोर सुरक्षा कानूनों को भी ठीक से लागू नहीं किया गया था।
कानून व सामाजिक न्याय के क्षेत्र में आम जनता की जिम्मेदारियाँ—सरकार के साथ-साथ आम लोगों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे दबाव डालकर निजी कंपनियों और सरकार दोनों को समाज के हित में काम करने के लिए बाध्य कर सकते हैं।
पर्यावरण की रक्षा के लिए नये कानून—1984 में हमारे पास पर्यावरण की रक्षा के लिए बहुत कम कानून थे। इन कानूनों को लागू करने की व्यवस्था और भी कमजोर थी। इसलिये यूनियन कार्बाइड को प्रदूषण से निपटने के लिए पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ा। भोपाल गैस त्रासदी के बाद भारत सरकार ने पर्यावरण के बारे में नये कानून बनाए और इनमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिए प्रदूषण फैलाने वालों को ही जिम्मेदार माना गया। अदालतों ने भी स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा बताया। लेकिन मध्य वर्ग के लोग पर्यावरण की चिंता में प्राय: गरीबों की पीड़ा को ध्यान में नहीं रखते, इससे बहुत सारे लोगों की रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए लोगों को इस बात के लिए आवाज उठानी चाहिए कि स्वस्थ वातावरण की सुविधा सबको मिले। मजदूर अधिकारों के क्षेत्र में भी अभी हालात काफी खराब हैं, लोगों को इस बात के लिए भी आवाज उठानी चाहिए कि कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएँ ताकि सबको जीवन का अधिकार मिल सके।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. लोगों को शोषण से बचाने के लिए सरकार—
2. निम्न में से किस कानून में यह निश्चित किया गया है कि किसी का भी मेहनताना एक निर्धारित न्यूनतम राशि से कम नहीं होना चाहिए—
3. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 5 से 14 साल की उम्र के कितने बच्चे विभिन्न व्यवसायों में नौकरी करते हैं—
(ब) 12 लाख
(द) 40 लाख से ज्यादा
4. किस मौलिक अधिकार में यह कहा गया है कि 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने या खदान या किसी अन्य खतरनाक व्यवसाय में काम पर नहीं रखा जा सकता—
5. न्यूनतम मेहनताना कानून निम्न में से किसके हित में है?
(ब) फैक्ट्री मजदूरों के
(द) उपर्युक्त सभी के
6. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास दूषित इलाकों में स्थित हैंडपंपों को सरकार ने किस रंग से पुतवा दिया है?
(ब) लाल
(द) नीला
7. यूनियन कार्बाइड का कारखाना स्थित है—
(ब) जयपुर में
(द) उदयपुर में
8. भोपाल गैस त्रासदी कब घटित हुई थी?
9. निम्न में से कौनसा मजदूर अधिकार के अन्तर्गत आता है?
(ब) सही मेहनताना का अधिकार
10. ज्यादा मुनाफे के लालच में क्या कार्य किये जाते हैं?
11. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री के आसपास स्थित दूषित इलाकों के हैंडपम्पों पर सरकार द्वारा लाल रंग पुतवाने के बावजूद स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि—
12. बंधुआ मजदूर के तौर पर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, यह सुनिश्चित किस अधिकार द्वारा किया गया?
(द) सुरक्षा का अधिकार
उत्तरमाला- 1. (स) 2. (ब) 3. (द) 4. (ब) 5. (द) 6. (ब) 7. (अ) 8. (स) 9. (द) 10. (द) 11. (स) 12. (ब)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये-
1. बाजार में हर जगह लोगों के .................... की संभावना बनी रहती है।
2. .................... के अनुसार किसी का भी मेहनताना एक निर्धारित न्यूनतम राशि से कम नहीं होना चाहिए।
3. सरकार की जिम्मेदारी है कि .................... को सही ढंग से लागू किया जाये।
4. 1984 में .................... की रक्षा के लिए हमारे पास बहुत कम कानून थे।
5. कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त .................... बनाये जाने चाहिए।
6. कानून .................... ही काफी नहीं होता, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि कानूनों को .................... किया जाये।
7. अगर मजदूर गरीब या शक्तिहीन है तो .................... गंवाने या .................... की कार्रवाई के डर से वह कम वेतन पर भी काम करने को तैयार हो जाता है।
8. जिस तरह मजदूरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए न्यूनतम .................... का कानून बनाया गया है, उसी तरह बाजार में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी .................... बनाए गए हैं।
उत्तर- 1. शोषण 2. न्यूनतम मेहनताना कानून 3. सुरक्षा कानूनों 4. पर्यावरण 5. कानून 6. बना देना, लागू 7. आमदनी, बदले 8. वेतन, कानून।
सही या गलत बताइए-
1. निजी कम्पनियाँ, ठेकेदार, कारोबारी लोग आमतौर पर कम से कम मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं।
2. बिजली से चलने वाले करघों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण 1980 और 1990 के दशकों में ज्यादातर कपड़ा मिल बन्द हो गई थीं।
3. विदेशी कम्पनियों के भारत आने का एक कारण यहाँ का सस्ता श्रम है।
4. विकासशील देश अपने विषैले और खतरनाक उद्योगों को विकसित देशों में ले जा रहे हैं।
5. न्यायालयों ने स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में जीवन का अभिन्न अंग माना है।
उत्तर- 1. गलत 2. सही 3. सही 4. गलत 5. सही।
सही मिलान कीजिए-
(अ) | (ब) |
1. न्यूनतम मेहनताना कानून | (i) विद्युत उपकरण सुरक्षा मानक |
2. कार्यस्थल सुरक्षा कानून | (ii) एक निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम नहीं |
3. बालश्रम अधिनियम | (iii) आपातकालीन द्वार |
4. गुणवत्ता मानक कानून | (iv) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सभी व्यवसायों में नियोजन पर प्रतिबन्ध |
उत्तर- 1. (ii) 2. (iii) 3. (iv) 4. (i)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. बाजार में लोगों को शोषण से बचाने के लिए सरकार क्या करती है?
उत्तर- सरकार कानून बनाकर बाजार में जारी अनुचित तौर-तरीकों पर अंकुश लगाती है।
प्रश्न 2. मजदूरों को वाजिब मेहनताना मिले, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कौनसा कानून बनाया है?
उत्तर- न्यूनतम वेतन कानून।
प्रश्न 3. चीजों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, यह बताने वाले कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर- क्योंकि विद्युत उपकरणों, भोजन, दवाई आदि की खराब गुणवत्ता के कारण उपभोक्ताओं का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
प्रश्न 4. किस अधिनियम में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया है कि 14 साल तक के बच्चों को नौकरी पर रखना एक गंभीर अपराध है?
उत्तर- बाल मजदूरी रोकथाम अधिनियम में।
प्रश्न 5. सुरक्षा कानूनों को सही ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर- सुरक्षा कानूनों को सही ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की है।
प्रश्न 6. यूनियन कार्बाइड संयंत्र में सुरक्षा मानकों के खुलेआम उल्लंघन का कोई एक कारण बताइये।
उत्तर- भारत में सुरक्षा मानक ढीले थे तथा उन्हें भी ठीक से लागू नहीं किया जा रहा था।
प्रश्न 7. यूनियन कार्बाइड को प्रदूषण से निपटने के लिए क्यों कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ा?
उत्तर— भारत में पर्यावरण को एक मुफ्त चीज माना जाता था। इसलिए यूनियन कार्बाइड को प्रदूषण से निपटने के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ा।
प्रश्न 8. भारत में पर्यावरणीय मुद्दों पर ताजा अनुसंधानों से क्या बात सामने आई है?
उत्तर— ताजा शोधों से यह बात सामने आई है कि मध्य वर्ग के लोग पर्यावरण की चिंता तो करने लगे हैं, लेकिन वे अक्सर गरीबों की पीड़ा को ध्यान में नहीं रखते।
प्रश्न 9. यूनियन कार्बाइड के पश्चिम वर्जीनिया स्थित कम्पनी में चेतावनी और निगरानी की क्या व्यवस्था मौजूद थी?
उत्तर— कंप्यूटरीकृत चेतावनी की व्यवस्था।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. न्यूनतम मेहनताना कानून क्या है और इसकी जरूरत क्यों है और यह कानून किसके हित में है?
उत्तर— न्यूनतम मेहनताना कानून—न्यूनतम मेहनताना कानून में यह निश्चित किया गया है कि किसी का भी मेहनताना एक निर्धारित न्यूनतम राशि से कम नहीं होना चाहिए।
इस कानून की इसलिए आवश्यकता पड़ी क्योंकि बहुत सारे मजदूरों को उनके मालिक सही मेहनताना नहीं देते। चूंकि मजदूरों को काम की जरूरत होती है, इसलिए वे सौदेबाजी नहीं कर पाते और बहुत कम मजदूरी पर ही काम करने को तैयार हो जाते हैं।
यह कानून सारे मजदूरों तथा घरेलू नौकरों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।
प्रश्न 2. निजी कम्पनियाँ, ठेकेदार, व्यवसायी आदि अधिक लाभ कमाने हेतु क्या हथकण्डे अपनाने लगते हैं?
उत्तर— निजी कम्पनियाँ, ठेकेदार, कारोबारी लोग आदि अधिक लाभ कमाने हेतु निम्नलिखित हथकण्डे अपनाने लगते हैं—
(i) वे मजदूरों को उनका हक नहीं देते और कई बार तो उनका मेहनताना तक नहीं देते।
(ii) वे बच्चों से काम करवाते हैं।
(iii) वे काम की स्थितियों पर ध्यान नहीं देते तथा पर्यावरण का ख्याल नहीं रखते।
प्रश्न 3. लोगों को शोषण से बचाने के लिए सरकार क्या करती है?
उत्तर— बाजार में हर जगह लोगों के शोषण की संभावना बनी रहती है, चाहे वे मजदूर हों, उपभोक्ता हों, या उत्पादक हों। लोगों को इस तरह के शोषण से बचाने के लिए सरकार कुछ कानून बनाती है। इन कानूनों के जरिए इस बात की कोशिश की जाती है कि बाजार में अनुचित तौर तरीकों पर अंकुश लगाया जाये।
प्रश्न 4. सर्वोच्च न्यायालय ने सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) के मुकदमे में क्या निर्णय दिया?
उत्तर— सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) के मुकदमे में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार में प्रदूषण मुक्त हवा और पानी का अधिकार भी शामिल है।
प्रश्न 5. शोषण से मुक्ति के अधिकार का क्या अर्थ है?
उत्तर— शोषण से मुक्ति के अधिकार का अर्थ है—किसी को भी कम मेहनताना पर काम कराने या बंधुआ मजदूर के तौर पर काम कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 6. मजदूर यूनियन/संगठन बनाने से संबंधित कानून बनाने की जरूरत क्यों है?
उत्तर— मजदूर यूनियन/संगठन बनाने से संबंधित कानून बनाने की जरूरत इसलिए है कि यूनियनों में संगठित होकर मजदूर अपनी संयुक्त ताकत के सहारे सही वेतन और बेहतर कार्यस्थिति के लिए आवाज उठा सकते हैं।
प्रश्न 7. यूनियन कार्बाइड के भोपाल और अमेरिकी संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के अन्तर को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर— (1) यूनियन कार्बाइड के अमेरिकी संयंत्रों में कंप्यूटरीकृत चेतावनी और निगरानी की व्यवस्था विद्यमान थी, जबकि भोपाल यूनियन कार्बाइड कारखाने में गैस के रिसाव की निगरानी केवल मजदूरों के अंदाज के सहारे चलाई जाती थी।
(2) अमेरिकी स्थित कारखानों में खतरा पैदा होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था मौजूद थी, जबकि भोपाल में ऐसा कुछ नहीं था।
प्रश्न 8. अलग-अलग देशों, जैसे—अमेरिका और भारत के बीच सुरक्षा मानकों में भारी अन्तर क्यों है? भारत में दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मामूली मुआवजा क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर— भारतीय मजदूर का मोल अभी भी ज्यादा नहीं माना जाता। हमारे यहाँ बेरोजगारी इतनी अधिक है कि थोड़े से वेतन के बदले में न जाने कितने लोग असुरक्षित स्थितियों में भी काम करने को तैयार हो जाते हैं। मजदूरों की इस कमजोरी का लाभ उठाकर मालिक कार्यस्थल पर सुरक्षा की जिम्मेदारी से बच जाते हैं।
प्रश्न 9. बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 में वर्ष 2016 में क्या संशोधन किया गया?
उत्तर— वर्ष 2016 में संसद ने बाल श्रम (प्रतिषेध एवं...
विनियमन) अधिनियम, 1986 में यह संशोधन किया है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सभी प्रकार के व्यवसायों में तथा किशोरों (14-18 वर्ष) के जोखिमवादी व्यवसायों तथा प्रक्रियाओं में नियोजन पर प्रतिबंध है। बच्चों या किशोरों के नियोजन को अब एक संज्ञेय अपराध बना दिया गया है।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. हाल के वर्षों में न्यायालयों के पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर जुड़े आदेशों से लोगों की रोजी-रोटी पर भी बुरा असर पड़ा है। किसी एक उदाहरण से इसे स्पष्ट कीजिये।
उत्तर- अदालत ने यह आदेश दिया कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों में काम करने वाले उद्योगों को बंद कर दिया जाये या उन्हें शहर से बाहर दूसरे इलाकों में भेज दिया जाये। इनमें से कई कारखाने आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहे थे। इन कारखानों की गंदगी से यमुना नदी भी प्रदूषित हो रही थी क्योंकि इन कारखानों को नियमों के हिसाब से नहीं चलाया जा रहा था।
अदालत के आदेशों से दिल्ली में प्रदूषण की समस्या तो हल हो गई, लेकिन इन कारखानों के बंद हो जाने से बहुत सारे मजदूरों के रोजगार खत्म हो गये।
प्रश्न 2. प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से क्या प्रदूषण की समस्या खत्म हो गई है? यदि नहीं, तो इस समस्या का समाधान बताइये।
उत्तर- प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को एक स्थान से हटाकर दूर-दराज के इलाकों में ले जाकर चलाने से पहले स्थान के प्रदूषण की समस्या तो खत्म हो गई, लेकिन अब प्रदूषण की समस्या इन नये इलाकों में पैदा हो रही है। ये इलाके प्रदूषित होने लगे हैं। दूसरे, कारखानों को बंद कराने या दूर-दराज के दूसरे स्थानों में स्थानान्तरित कर देने से मजदूरों के रोजगार और उनकी सुरक्षा की स्थितियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
इस चुनौती का हल यही है कि हम कारखानों में ज्यादा स्वच्छ तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाने तथा कड़े सुरक्षा मानकों को अपनाने पर बल दें। इसके लिए सरकार को कारखाने मालिकों को प्रोत्साहित करना चाहिए तथा उनकी आवश्यक सहायता भी करनी चाहिए। साथ ही प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना भी करना चाहिए।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भोपाल यूनियन कार्बाइड संयंत्र में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अवहेलना होने के कारणों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर- यूनियन कार्बाइड में खुलेआम सुरक्षा मानकों की अवहेलना के कारण—यूनियन कार्बाइड संयंत्र में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अवहेलना के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—
(1) ढीले सुरक्षा मानक—भारत में उस समय सुरक्षा कानून ढीले थे। ढीले सुरक्षा मानकों से कम्पनी को फायदा मिला।
(2) सरकार द्वारा ठीक ढंग से कानूनों का क्रियान्वयन नहीं—ढीले सुरक्षा कानूनों को भी सरकार द्वारा ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा था। यथा—
(i) सरकारी अफसर इस कारखाने को खतरनाक कारखानों की श्रेणी में रखने को तैयार नहीं थे।
(ii) इस कारखाने को घनी आबादी वाले इलाके में खोलने पर सरकार ने कोई ऐतराज नहीं किया। जब भोपाल के कुछ नगर निगम अधिकारियों ने इस बात पर उँगली उठाई कि 1978 में मिक उत्पादक कारखाने की स्थापना सुरक्षा मानकों के खिलाफ थी तो सरकार का कहना था कि प्रदेश को भोपाल के संयंत्र में लगातार निवेश चाहिए ताकि रोजगार मिलते रहें।
(iii) सरकार की राय में यूनियन कार्बाइड से इस बात की मांग करना असंभव था कि वह साफ-सुथरी तकनीक या ज्यादा सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाए।
(iv) सरकारी निरीक्षक कारखाने में अपनाई जा रही दोषपूर्ण प्रक्रियाओं को बार-बार मंजूरी देते रहे। जब कारखाने में बार-बार गैस का रिसाव होने लगा और सबको यह बात समझ में आ चुकी थी कि कहीं कुछ भारी गड़बड़ी चल रही है, तब भी निरीक्षकों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
(3) कंपनी द्वारा सुरक्षा उपायों की अनदेखी—कम्पनी ने भी लागत में कमी लाने के लिए सुरक्षा उपायों की अनदेखी की। यूनियन कार्बाइड के कारखाने में एक भी सुरक्षा उपकरण या तो सही ढंग से काम नहीं कर रहा था या उनकी संख्या कम थी। मजदूरों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण की अवधि भी 6 महीने से घटाकर 15 दिन कर दी गई थी। मिक कारखाने के लिए रात की पाली के मजदूर का पद ही खत्म कर दिया गया था।
इससे स्पष्ट होता है कि कानून बनाने और उसे लागू करने वाली संस्था—सरकार—ने सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया। लोगों के हितों की रक्षा करने के स्थान पर सरकार और कंपनी, दोनों ही उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज करती गईं।