📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) मृदा निर्माण के लिए उत्तरदायी दो मुख्य जलवायु कारक कौन-से हैं?
उत्तर- मृदा निर्माण के लिए उत्तरदायी दो प्रमुख जलवायु कारक निम्न हैं-
(1) तापमान
(2) वर्षा।
(ii) भूमि निम्नीकरण के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर- भूमि निम्नीकरण के दो कारण निम्न हैं-
(1) कृषि सम्बन्धी गतिविधियाँ
(2) निर्माण सम्बन्धी गतिविधियाँ।
(iii) भूमि को महत्त्वपूर्ण संसाधन क्यों माना जाता है?
उत्तर- भूमि एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। अधिकांश उत्पादन तथा आर्थिक क्रियाएँ भूमि पर ही होती हैं। भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे- कृषि, वानिकी, खनन, आवास निर्माण, सड़क निर्माण, उद्योगों की स्थापना आदि। अतः मनुष्य की अधिकांश आवश्यकताएँ भूमि के द्वारा ही पूरी होती हैं, भूमि लोगों के जीवन तथा आजीविका का सबसे महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है।
(iv) किन्हीं दो सोपानों के नाम बताइए जिन्हें सरकार ने पौधों और प्राणियों के संरक्षण के लिए आरंभ किया है।
उत्तर- पौधों और प्राणियों के संरक्षण हेतु सरकार द्वारा उठाए गए दो महत्त्वपूर्ण कदम निम्न प्रकार हैं-
(v) जल संरक्षण के तीन तरीके बताइए।
उत्तर- जल संरक्षण करने के तीन तरीके निम्न प्रकार हैं-
1. वन तथा अन्य वनस्पतियों का विस्तार करना चाहिए इससे धरातलीय प्रवाह मंद होता है तथा भूमिगत जल पुनः पूरित होता है।
2. जल रिसाव को कम करने के लिए खेतों को सिंचित करने वाली नहरों को ठीक से पक्का करना चाहिए।
3. रिसाव और वाष्पीकरण से होने वाली जल की क्षति को रोकने के लिए खेतों में स्प्रिंकलरों द्वारा सिंचाई की जानी चाहिए।
प्रश्न 2. सही उत्तर को चिह्नित कीजिए-
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मृदा निर्माण का नहीं है?
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकृति के संरक्षण के अनुकूल नहीं है?
उत्तर- (i) (ख) (ii) (ग) (iii) (ग)
प्रश्न 3. निम्नलिखित का मिलान कीजिए-
(v) समोच्चरेखीय जुताई
उत्तर- (क) (iii), (ख) (iv), (ग) (i), (घ) (ii)
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से सत्य अथवा असत्य बताइए। यदि सत्य है तो उनके कारण लिखिए-
(i) भारत का गंगा, ब्रह्मपुत्र का मैदान अत्यधिक आबाद प्रदेश है।
(ii) भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता कम हो रही है।
(iii) तटीय क्षेत्रों में पवन गति रोकने के लिए वृक्ष कतार में लगाए जाते हैं, जिसे बीच की फसल उगाना कहते हैं।
(iv) मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन पारितंत्र को व्यवस्थित रख सकते हैं।
उत्तर- (i) सत्य, भारत में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र के मैदान की मिट्टी काफी उपजाऊ है तथा यह समतल है तथा जल उपलब्धता भी पर्याप्त है, अतः इन मैदानों में काफी आबादी निवास करती है।
(ii) सत्य, भारत में जल का वितरण काफी असमान है, जल के अधिकतम स्रोत प्रदूषित होते जा रहे हैं तथा जनसंख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है, अतः देश में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता कम हो रही है।
(iii) असत्य।
(iv) असत्य।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
1. भूमि—भूमि सबसे महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। पृथ्वी के लगभग 30 प्रतिशत भाग पर भूमि है। विश्व के विभिन्न भागों में भूमि और जलवायु के भिन्न लक्षणों के कारण जनसंख्या का वितरण काफी असमान है।
2. भूमि उपयोग - भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे—कृषि, वानिकी, खनन, सड़क निर्माण, उद्योगों की स्थापना आदि। भूमि का उपयोग भौतिक कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है। जैसे—स्थलाकृति, मृदा, जलवायु, खनिज और जल की उपलब्धता। मानवीय कारक, जैसे—जनसंख्या और प्रौद्योगिकी भी भूमि उपयोग प्रतिरूप के महत्त्वपूर्ण निर्धारक हैं।
3. निजी और सामुदायिक भूमि - स्वामित्व के आधार पर भूमि को निजी भूमि और सामुदायिक भूमि में बाँटा जा सकता है। सामुदायिक भूमि को साझा संपत्ति संसाधन भी कहते हैं। लोगों ने सामुदायिक भूमि पर अनाधिकृत हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में कृषि और निर्माण सम्बन्धी गतिविधियों के प्रकार के कारण निम्नीकरण, भूस्खलन, मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण पर्यावरण के लिए मुख्य खतरा है।
4. भूमि संसाधन का संरक्षण - विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के बचाव हेतु भूमि संसाधन का संरक्षण किया जाना चाहिए, वनारोपण, भूमि उद्धार, रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के विनियमित उपयोग तथा अतिचारण पर रोक आदि भूमि संरक्षण के लिए प्रयुक्त सामान्य तरीके हैं।
5. मृदा - पृथ्वी के पृष्ठ पर दानेदार कणों के आवरण की पतली परत मृदा कहलाती है। मृदा चट्टानों, जैव पदार्थ और खनिजों के अपक्षय की प्रक्रिया के माध्यम से बनती है।
6. मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक - मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक जनक शैल का स्वरूप और जलवायविक हैं। मृदा निर्माण के अन्य कारक स्थलाकृति, जैव पदार्थों की भूमिका और मृदा निर्माण के संघटन में लगा समय है।
7. मृदा का निम्नीकरण और संरक्षण के उपाय - मृदा अपरदन और क्षीणता मृदा संसाधन के लिए दो मुख्य खतरे हैं जिनसे मृदा का निम्नीकरण होता है। इसके संरक्षण की निम्न विधियाँ हैं—मल्च बनाना, वेदिका फार्म, समोच्चरेखीय जुताई, रक्षक मेखलाएँ, समोच्चरेखीय रोधिकाएँ, चट्टान बाँध, बीच की फसल उगाना आदि।
8. जल - जल महत्त्वपूर्ण नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है तथा यह पृथ्वी के तीन-चौथाई भाग पर पाया जाता है; किन्तु अलवणीय जल केवल 2.7 प्रतिशत ही है। इसका लगभग 70 प्रतिशत भाग बर्फ की चादरों और हिमानियों के रूप में पाया जाता है। केवल एक प्रतिशत अलवण जल मानव उपयोग हेतु उपलब्ध है जो भौम जल, नदियों, झीलों के रूप में तथा वायुमंडल में जलवाष्प के रूप में पाया जाता है।
अलवणीय जल की कुल मात्रा स्थिर रहती है। यह वाष्पीकरण, वर्षण और बहने की प्रक्रियाओं द्वारा जल महासागरों, वायु, भूमि और पुनः महासागरों में चक्रण द्वारा निरंतर गतिशील है। इसे चल-चक्र कहते हैं।
जल का उपयोग पीने, धुलाई करने, कृषि व औद्योगिक उत्पादन करने, विद्युत उत्पादन करने आदि में किया जाता है।
अलवणीय जल की आपूर्ति की कमी के प्रमुख कारण हैं—बढ़ती जनसंख्या, भोजन और नकदी फसलों की बढ़ती माँग, बढ़ता नगरीकरण और बेहतर होता जीवन स्तर है।
9. जल उपलब्धता की समस्याएँ - विश्व में अलवणीय जल बहुत कम है, अतः कई देशों में जल संकट उत्पन्न हो रहा है। इस जलयान के कारण हैं—वर्षण में विविधता, अति उपयोग तथा जल स्रोतों का संदूषण आदि।
10. जल संसाधनों का संरक्षण - विश्व में शुद्ध एवं पर्याप्त जल स्रोतों का संकट बन रहा है, अतः जल का संरक्षण किया जाना आवश्यक है। जल संसाधनों का उपयोग बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। जल संग्रहण पृष्ठीय प्रवाह को बचाने का दूसरा उपाय है।
11. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव - हमारे जैवमंडल में अनेक प्रकार की प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव पाए जाते हैं जो हमारे बहुमूल्य संसाधन हैं। हमारे जीवन में इनके कई उपयोग हैं।
12. प्राकृतिक वनस्पति का वितरण - प्राकृतिक वनस्पति कई कारकों पर निर्भर करती है, अतः विश्व में इसका वितरण असमान है। विश्व की वनस्पति के मुख्य प्रकारों को चार वर्गों—(1) वन, (2) घास, (3) गुल्म, (4) टुंड्रा में रखा जा सकता है।
13. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन का संरक्षण - बढ़ती जनसंख्या के कारण प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवों पर संकट उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण एवं पारितंत्र में संतुलन बनाए रखने हेतु इनका संरक्षण करना आवश्यक है।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर भूमि है-
2. भूमि का उपयोग निम्न में से किस कार्य हेतु किया जाता है—
3. चट्टान, मलबे, मृदा आदि का ढालों से नीचे की ओर वृहद संचलन क्या कहलाता है?
4. प्राणियों और पक्षियों के व्यापार प्रतिबन्ध की सूची कौनसी संस्था बनाती है?
5. भूमि का उपयोग निम्न में से किस भौतिक कारक द्वारा निर्धारित होता है—
6. निम्न में से कौनसे मानवीय कारक भूमि उपयोग प्रतिरूप के महत्त्वपूर्ण निर्धारक हैं?
7. पारितंत्र में अपघटक के रूप मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है—
8. मृदा संरक्षण हेतु उपयोग में ली जाने वाली विधियों में सम्मिलित हैं—
9. वनों में हमें निम्न में से कौनसा उत्पाद प्राप्त होता है—
10. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन के संरक्षण हेतु निम्न में से क्या उपाय किया गया है?
11. कौनसे ग्रह को 'जल ग्रह' कहते हैं?
12. जल की कमी वाला प्रदेश है—
13. कौनसा चित्र पूर्णतः ग्रामीण प्राकृतिक परिवेश को दर्शाता है?
उत्तरमाला- 1. (ख) 2. (घ) 3. (क) 4. (ख) 5. (घ) 6. (घ) 7. (ग) 8. (घ) 9. (घ) 10. (घ) 11. (ख) 12. (ख) 13. (क)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
1. जब पौधों के बीच अनावृत भूमि जैव पदार्थ जैसे प्रवाल से ढक दी जाती है तो उसे .................... कहते हैं।
2. सभी जीवित जातियाँ जीवित रहने के लिए एक-दूसरे से परस्पर संबंधित और निर्भर रहती हैं, इस जीवन आधारित तंत्र को .................... कहते हैं।
3. वायु तथा जल के द्वारा ऊपरी मृदा का क्षरण होता है उसे मृदा .................... कहा जाता है।
4. केवल एक सेंटीमीटर मृदा को बनने में .................... वर्ष लगते हैं।
5. मृदा संसाधन का उपयोग .................... कार्यों में किया जाता है।
6. कम वर्षा वाले .................... प्रदेशों में कंटीली झाड़ियाँ एवं गुल्म उगते हैं।
7. विश्व की .................... प्रतिशत जनसंख्या भूमि क्षेत्र के .................... प्रतिशत भाग पर ही रहती है।
8. पृथ्वी के .................... पर दानेदार कणों के आवरण की .................... मृदा कहलाती है।
उत्तर- 1. मल्च बनाना 2. पारितंत्र 3. अपरदन 4. सैकड़ों 5. कृषि 6. शुष्क 7. 90, 30 8. पृष्ठ, पतली परत।
सही या गलत बताइए-
1. जलवायु में परिवर्तन और मानव हस्तक्षेप के कारण पौधों और जन्तुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट हो सकते हैं।
2. भारत में शेरों, चीतों, हिरणों, भारतीय सारंग तथा मोर को मारना अवैध है।
3. मॉस और लाइकेन घास स्थलों पर पाई जाती है।
4. गिद्ध मृत जीव-जन्तुओं को खाने के कारण एक अपमार्जक नहीं है।

चित्र: चार चित्रों का समूह (क, ख, ग, घ) जिसमें ग्रामीण और शहरी परिवेश दर्शाया गया है
5. एक टपकता नल एक वर्ष में 1200 लीटर जल व्यर्थ करता है।
6. रेशम के कीट कपास के पादपों पर पाले जाते हैं।
उत्तर- 1. सही 2. सही 3. गलत 4. गलत 5. सही 6. गलत।
सही मिलान कीजिए-
(अ) | (ब) |
1. वेदिका फार्म | (i) पृथ्वी |
2. जलग्रह | (ii) टुंड्रा वनस्पति |
3. मॉस | (iii) अपमार्जक |
4. गिद्ध | (iv) मृदा संरक्षण |
5. सामुदायिक भूमि | (v) साझा सम्पत्ति संसाधन |
उत्तर- 1. (iv) 2. (i) 3. (ii) 4. (iii) 5. (v)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भूमि उपयोग किसे कहते हैं?
उत्तर- भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है, जैसे- कृषि, वानिकी, खनन, कारखाने लगाना आदि; इसे भूमि उपयोग कहते हैं।
प्रश्न 2. निजी भूमि एवं सामुदायिक भूमि में क्या अन्तर है?
उत्तर- निजी भूमि व्यक्तियों के स्वामित्व में होती है जबकि सामुदायिक भूमि समुदाय के स्वामित्व में होती है।
प्रश्न 3. भूमि का उपयोग किन कारकों पर निर्भर होता है?
उत्तर- भूमि का उपयोग भौतिक कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है, जैसे- स्थलाकृति, मृदा, जलवायु, खनिज और जल की उपलब्धता आदि।
प्रश्न 4. भूमि संसाधन का किन तरीकों से संरक्षण किया जा सकता है? कोई दो तरीके बताइए।
उत्तर- (1) वनों का विस्तार करना।
(2) उर्वरकों के विनियमित उपयोग तथा अतिचारण पर रोक लगाना।
प्रश्न 5. मृदा किसे कहते हैं?
उत्तर- पृथ्वी के पृष्ठ पर दानेदार कणों के आवरण की पतली परत को मृदा कहते हैं।
प्रश्न 6. भूस्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर- सामान्य रूप से शैल, मलबा या ढाल से गिरने वाली मिट्टी के वृहत संचलन को भूस्खलन कहा जाता है।
प्रश्न 7. अपक्षय किसे कहते हैं?
उत्तर- तापमान परिवर्तन, तुषार क्रिया, पौधों, प्राणियों और मनुष्य के क्रियाकलाप द्वारा अनावृत शैलों का टूटना अपक्षय कहलाता है।
प्रश्न 8. वेदिका फार्म कहाँ तथा क्यों बनाये जाते हैं?
उत्तर- चौड़े, समतल सोपान अथवा वेदिका तीव्र ढालों पर बनाए जाते हैं ताकि सपाट सतह फसल उगाने के लिए उपलब्ध हो जाए।
प्रश्न 9. रक्षक मेखलाएँ किसे कहते हैं?
उत्तर- रक्षक मेखलाओं में तटीय प्रदेशों और शुष्क प्रदेशों में पवन गति को रोकने हेतु वृक्षों की कतार बनाई जाती है ताकि मृदा आवरण को बचाया जा सके।
प्रश्न 10. जैवमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर- प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन केवल स्थलमण्डल, जलमंडल और वायुमण्डल के बीच जुड़े एक संकरे क्षेत्र में ही पाए जाते हैं जिसे जैवमण्डल कहते हैं।
प्रश्न 11. वनस्पति की वृद्धि किस पर निर्भर करती है?
उत्तर- वनस्पति की वृद्धि मुख्य रूप से तापमान और आर्द्रता पर निर्भर करती है।
प्रश्न 12. पारितंत्र किसे कहते हैं?
उत्तर- जैवमण्डल में सभी जीवित जातियाँ जीवित रहने के लिए एक-दूसरे से परस्पर संबंधित और निर्भर रहती हैं। इस जीवन आधारित तंत्र को पारितंत्र कहते हैं।
प्रश्न 13. विश्व की वनस्पति को मुख्य रूप से कितने वर्गों में रखा जा सकता है? नाम लिखिए।
उत्तर- चार वर्गों में-(1) वन (2) घास स्थल (3) गुल्म (4) टुंड्रा।
प्रश्न 14. भारत में ऐसे दो पशु-पक्षियों के नाम लिखिए, जिन्हें मारना अवैध है।
उत्तर- (1) शेर (2) मोर।
प्रश्न 15. राष्ट्रीय वन/उद्यान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए एक या एक से अधिक पारितंत्रों की पारिस्थितिक एकता की रक्षा के लिए नामित किया गया प्राकृतिक क्षेत्र राष्ट्रीय वन अथवा उद्यान कहलाता है।
प्रश्न 16. वर्षा जल संग्रहण किसे कहते हैं?
उत्तर- घर की छत पर वर्षा जल को एकत्रित करके, उसका संग्रहण करना एवं विभिन्न उत्पादक उपयोगों में लाना वर्षा जल संग्रहण कहलाता है।
प्रश्न 17. जल संग्रहण के कोई दो उपाय लिखिए।
उत्तर- (1) वन और वनस्पति आवरण में वृद्धि करना।
(2) खेतों को सिंचित करने वाली नहरों को ठीक से पक्का करना।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. सामुदायिक भूमि को साझा सम्पत्ति संसाधन क्यों कहा जाता है?
उत्तर- सामुदायिक भूमि का सामान्य रूप से उपयोग समुदाय से संबंधित व्यक्तियों के लिए किया जाता है, जैसे चारा, फलों, नट या औषधीय बूटियों को एकत्रित करना। इसलिए इसे साझा संपत्ति संसाधन भी कहते हैं।
प्रश्न 2. वर्तमान में निर्माण सम्बन्धी गतिविधियों के प्रसार के कारण पैदा कौनसे मृदा-परिवर्तन पर्यावरण के लिए प्रमुख खतरा हैं?
उत्तर- वर्तमान समय में कृषि और निर्माण सम्बन्धी गतिविधियों के प्रसार के कारण मृदा में निम्नीकरण, भूस्खलन, मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण आदि की घटनाएँ पर्यावरण के लिए प्रमुख खतरा हैं।
प्रश्न 3. भूस्खलन से क्या हानि होती है?
उत्तर- भूस्खलन नदी के प्रवाह को कुछ समय के लिए रोक देता है। नदी अवरुद्धता के अचानक फूट पड़ने से निचली घाटियों के आवासों में विध्वंस आ जाता है। पहाड़ी भू-भाग में यह एक मुख्य और विस्तृत रूप से फैली प्राकृतिक आपदा है जो प्राय: जीवन और संपत्ति को आघात पहुँचाती है।
प्रश्न 4. जल के अभाव के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर- जल के अभाव के प्रमुख कारण ये हैं-
(1) मौसमी अथवा वार्षिक वर्षण में विविधता का होना।
(2) जल का अति उपयोग करना।
(3) जल स्रोतों का संदूषण किया जाना।
प्रश्न 5. जल चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर- वाष्पीकरण, वर्षण और बहने की प्रक्रियाओं द्वारा जल महासागरों, वायु, भूमि, नदियों तथा पुनः महासागरों में चक्रण द्वारा निरन्तर गतिशील है, यही जल चक्र कहलाता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. "विश्व के विभिन्न भागों में जनसंख्या का वितरण असमान पाया जाता है।" इसका क्या कारण है?
उत्तर- भूमि और जलवायु के भिन्न-भिन्न लक्षणों के कारण विश्व के विभिन्न भागों में जनसंख्या का वितरण असमान पाया जाता है। विश्व में ऊबड़-खाबड़ स्थलाकृति, पर्वतों के तीव्र ढाल, जलाक्रांत संभावित निम्न क्षेत्र, मरुस्थल क्षेत्र एवं सघन वन क्षेत्र सामान्यतः विरल अथवा निर्जन हैं। जबकि उर्वर मैदानों और नदी घाटियों में कृषि के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध है, अतः ये स्थान विश्व के सघन बसे क्षेत्र हैं।
प्रश्न 2. भूमि उपयोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- भूमि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे-कृषि, वानिकी, खनन, सड़क निर्माण, उद्योगों की स्थापना इत्यादि। इसे भूमि उपयोग कहा जाता है। भूमि का उपयोग भौतिक कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है; जैसे-स्थलाकृति, मृदा, जलवायु, खनिज, जल की उपलब्धता आदि। मानवीय कारक जैसे जनसंख्या और प्रौद्योगिकी भी भूमि उपयोग प्रतिरूप के महत्वपूर्ण निर्धारक हैं।
प्रश्न 3. स्वामित्व के आधार पर भूमि के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- स्वामित्व के आधार पर भूमि को दो भागों में बाँटा गया है-
(1) निजी भूमि- निजी भूमि पर व्यक्तियों का स्वामित्व होता है जिसे वे निजी हित हेतु उपयोग में लेते हैं।
(2) सामुदायिक भूमि- सामुदायिक भूमि पर समुदाय का स्वामित्व होता है। इसका उपयोग समुदाय से सम्बन्धित व्यक्तियों के लिए किया जाता है, जैसे-चारा, फलों, नट या औषधीय बूटियों को एकत्र करना। इस सामुदायिक भूमि को साझा संपत्ति संसाधन भी कहते हैं।
प्रश्न 4. भूस्खलन किसे कहते हैं? इसे रोकने की प्रविधियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भूस्खलन-सामान्य रूप से शैल, मलबा या ढाल से गिरने वाली मिट्टी के वृहत संचलन को भूस्खलन कहते हैं। यह भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी तथा लंबे समय तक भारी वर्षा होने के कारण होता है।
भूस्खलन रोकने की प्रविधियाँ-
(1) भूस्खलन वाले स्थानों पर आवास निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।
(2) भूमि को खिसकने से बचाने के लिए प्रतिधारी दीवार का निर्माण करना।
(3) भूस्खलन वाले क्षेत्रों में वनस्पति आवरण में वृद्धि करना।
(4) सतही अपवाह तथा झरना प्रवाहों के साथ-साथ भूस्खलन की गतिशीलता को नियन्त्रित करने के लिए पृष्ठीय अपवाह नियन्त्रण उपाय कार्यान्वित किए जाने चाहिए।
प्रश्न 5. भूमि संसाधन के संरक्षण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- विश्व में बढ़ती जनसंख्या तथा बढ़ती माँग के कारण वन भूमि तथा कृषि योग्य भूमि का विनाश हुआ है, जिसके फलस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों के समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। अतः भूमि संसाधन का संरक्षण किया जाना चाहिए। वनरोपण, भूमि उद्धार, रासायनिक कीटनाशकों
और उर्वरकों के विनियमित उपयोग तथा अतिचारण पर रोक आदि भूमि संरक्षण के लिए प्रयुक्त कुछ सामान्य तरीके हैं। | भूमि संसाधन का संरक्षण पारितन्त्र के लिए अति आवश्यक है।
प्रश्न 6. मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक तथा उनकी भूमिका को चित्र बनाकर दर्शाइये।
उत्तर-
चित्र : मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक
प्रश्न 7. मृदा अपरदन को रोकने की कोई दो विधियाँ बताइये।
उत्तर- (1) वेदिका फार्म- चौड़े, समतल सोपान अथवा वेदिका तीव्र ढालों पर बनाए जाते हैं ताकि सपाट सतह फसल उगाने के लिए उपलब्ध हो जाए। इससे पृष्ठीय प्रवाह और मृदा अपरदन कम होता है।
(2) समोच्चरेखीय रोधिकाएँ- समोच्च रेखाओं पर रोधिकाएँ बनाने के लिए पत्थरों, घास, मृदा का उपयोग किया जाता है। रोधिकाओं के सामने जल एकत्र करने के लिए खाइयाँ बनाई जाती हैं, इससे मृदा अपरदन कम होता है।
प्रश्न 8. अलवणीय जल पृथ्वी का सबसे अधिक मूल्यवान पदार्थ क्यों है?
उत्तर- पृथ्वी पर लगभग तीन-चौथाई भाग पर जल पाया जाता है; किन्तु उसमें से अधिकांश महासागरों का लवणीय जल है जो मानवीय उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। अलवणीय जल मात्र 2.7 प्रतिशत है, जिसका भी लगभग 70 प्रतिशत भाग बर्फ की चादरों और हिमानियों के रूप में अंटार्कटिका, ग्रीनलैण्ड तथा पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। केवल एक प्रतिशत अलवणीय जल ही मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है, अतः अलवणीय जल पृथ्वी का सबसे अधिक मूल्यवान पदार्थ है।
प्रश्न 9. जल उपलब्धता की समस्या को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- विश्व में अलवणीय जल बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है अतः विश्व के कई देशों में जल की कमी है। अधिकांश अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, दक्षिणी एशिया, पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के भाग, उत्तर-पश्चिमी मैक्सिको, दक्षिणी अमेरिका के भाग और सम्पूर्ण आस्ट्रेलिया अलवणीय जल की आपूर्ति की कमी का सामना कर रहे हैं। ये देश ऐसे जलवायु प्रदेशों में स्थित हैं जहाँ अक्सर सूखा पड़ता है, अतः वहाँ पर जलाभाव की विकट समस्या बनी हुई है। विश्व के विभिन्न देशों में अति उपयोग तथा जल स्रोतों के प्रदूषण के कारण भी जल का अभाव उत्पन्न हो रहा है।
प्रश्न 10. प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- वनस्पति तथा वन्य जीवन महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं। ये सभी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाने में हमारी मदद करते हैं। वनों से हमें लकड़ी प्राप्त होती है तथा वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं। वन ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं जिसमें हम साँस लेते हैं। इनसे हमें गोंद, फल, फूल, औषधि, तेल, कागज आदि प्राप्त होते हैं। वन वर्षा को आकर्षित करते हैं तथा मृदा की सुरक्षा करते हैं। वन्य जीवन के अन्तर्गत जन्तु, पक्षी, कीट एवं जलीय जीव आते हैं जिनसे हमें दूध, मांस, खाल, ऊन आदि प्राप्त होते हैं। कीट, जैसे मधुमक्खी, हमें शहद देती है तथा फूलों के परागण में मदद करती है और पारितंत्र में अपघटक के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 11. सी.आई.टी.ई.एस. (C.I.T.E.S.) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- वन्य वनस्पति तथा वन्य जीवों के संरक्षण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक कदम उठाए गए हैं। इसके अन्तर्गत सी.आई.टी.ई.एस. (द कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इनडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा) की स्थापना की गई। जिससे प्राणियों और पक्षियों की अनेक जातियों की सूची तैयार की गई है। इस सूची में दिए गए सभी पक्षियों और प्राणियों के व्यापार करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे वन्य जीवों के संरक्षण में मदद

चित्र: मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक
मिलेगी। सी.आई.टी.ई.एस. सरकारों के बीच वन्य संरक्षण हेतु किया गया एक समझौता है।
प्रश्न 12. दावानल के कारण तथा नियंत्रण के उपाय बताइये।
उत्तर- दावानल के कारण-
(1) तड़ित झंझा के कारण प्राकृतिक अग्नि का लगना।
(2) लोगों की लापरवाही के कारण घास-फूस में जनित ऊष्मा के कारण अग्नि का लगना।
(3) स्थानिक लोगों, ऊधमी एवं शरारती लोगों द्वारा किसी उद्देश्य से अग्नि लगाना।
दावानल नियंत्रण के कुछ उपाय-
(1) शिक्षण द्वारा अग्नि लगने से रोकना।
(2) परीक्षण बिंदुओं, निपुण भूमि चौकसी तथा संचार जाल के समन्वित जाल द्वारा अग्नि लगने का शीघ्र पता लगाना।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. प्राकृतिक संसाधन के रूप में भूमि के उपयोग को स्पष्ट कीजिए। भूमि के संरक्षण की आवश्यकता एवं तरीकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भूमि का उपयोग- भूमि एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। विश्व के कुल भूपृष्ठ के कुल क्षेत्रफल के लगभग 30 प्रतिशत भाग पर भूमि है। भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है; जैसे- कृषि करना, वानिकी, आवास निर्माण, सड़क निर्माण, खनन, उद्योगों की स्थापना आदि। भूमि का उपयोग मुख्य रूप से स्थलाकृति, मृदा, जलवायु, खनिज, जल उपलब्धता, जनसंख्या, प्रौद्योगिकी आदि तत्त्वों पर निर्भर करता है। विश्व में भूमि का उपयोग निजी भूमि एवं सामुदायिक भूमि दोनों के रूप में किया जाता है।
भूमि के संरक्षण की आवश्यकता- भूमि की उपलब्धता सीमित है, इसे बढ़ाया नहीं जा सकता है। जबकि विश्व की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है। इस कारण लोग आवास एवं कृषि हेतु वनों को नष्ट करते जा रहे हैं जिससे पारितंत्र में असन्तुलन उत्पन्न हो रहा है। नगरीकरण एवं बढ़ते उद्योगों के कारण सामुदायिक भूमि पर अनधिकृत हस्तक्षेप निरन्तर बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में कृषि और निर्माण सम्बन्धी गतिविधियों के प्रसार के कारण निम्नीकरण, भूस्खलन, मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण पर्यावरण के लिए खतरा बन गए हैं। इन सभी कारणों से भूमि का संरक्षण आवश्यक है।
भूमि संरक्षण के तरीके- बढ़ती जनसंख्या एवं बढ़ती भूमि के कारण विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया है, अतः इसे रोकना आवश्यक है। वनरोपण, भूमि उद्धार, रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के विनियमित उपयोग तथा अतिचारण पर रोक आदि भूमि संरक्षण के लिए अपनाए जाने वाले सामान्य तरीके हैं।
प्रश्न 2. मृदा से आप क्या समझते हैं? मृदा के निम्नीकरण को रोकने तथा संरक्षण के उपायों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
मृदा संरक्षण के उपाय बताइए।
उत्तर- मृदा- पृथ्वी के धरातल पर दानेदार कणों के आवरण की पतली परत मृदा कहलाती है। मृदा का प्रकार स्थल स्वरूप द्वारा निर्धारित होता है तथा मृदा का निर्माण चट्टानों से प्राप्त खनिजों एवं जैव पदार्थ तथा भूमि पर पाए जाने वाले खनिजों से होता है। अपक्षय की प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है।
मृदा निम्नीकरण रोकने तथा संरक्षण के उपाय- मृदा संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-
(1) मल्च बनाना- इस विधि के अन्तर्गत पौधों के बीच अनावृत भूमि जैव पदार्थ जैसे प्रवाल से ढक दी जाती है। इस विधि से मृदा की आर्द्रता रुकी रहती है।
(2) वेदिका फार्म- इस विधि में चौड़े, समतल सोपान अथवा वेदिका तीव्र ढालों पर बनाए जाते हैं ताकि सपाट सतह फसल उगाने के लिए उपलब्ध हो जाए। इनसे पृष्ठीय प्रवाह और मृदा अपरदन कम होता है।
(3) समोच्चरेखीय जुताई- मृदा अपरदन रोकने की इस विधि में एक पहाड़ी ढाल पर समोच्च रेखाओं के समान्तर जुताई ढाल से नीचे बहते जल के लिए एक प्राकृतिक अवरोध का निर्माण करती है।
(4) रक्षक मेखलाएँ- मृदा संरक्षण की इस विधि में तटीय प्रदेशों और शुष्क प्रदेशों में पवन गति रोकने के लिए वृक्ष कतारों में लगाए जाते हैं ताकि मृदा आवरण को बचाया जा सके।
(5) समोच्चरेखीय रोधिकाएँ- समोच्च रेखाओं पर रोधिकाएँ बनाने के लिए पत्थरों, घास, मृदा का उपयोग किया जाता है। रोधिकाओं के सामने जल एकत्र करने के लिए खाइयाँ बनाई जाती हैं।
(6) चट्टान बाँध- यह जल के प्रवाह को कम करने में मदद करते हैं। यह नालियों की रक्षा करते हैं तथा मृदा की क्षति को रोकते हैं।
(7) बीच की फसल उगाना- इस विधि के अन्तर्गत वर्षा दोहन से मृदा को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग समय पर भिन्न-भिन्न फसलें एकांतर कतारों में उगाई जाती हैं।
प्रश्न 3. जल उपलब्धता की समस्या को स्पष्ट करते हुए जल संसाधनों के संरक्षण के उपायों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- जल उपलब्धता की समस्या- जल एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है तथा पृथ्वी के लगभग तीन-चौथाई
भाग पर जल उपलब्ध है किन्तु इसमें से अधिकांश जल लवणीय है, जो मनुष्य के उपयोग में नहीं आता। पृथ्वी पर केवल 2.7 प्रतिशत जल ही अलवणीय है जिसमें से भी लगभग 70 प्रतिशत भाग बर्फ की चादरों तथा हिमानियों के रूप में अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड और पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। अतः मनुष्य के लिए मात्र एक प्रतिशत अलवणीय जल ही उपलब्ध हो पाता है। किन्तु अत्यधिक उपयोग एवं जल प्रदूषकों के कारण कई देशों में जल का संकट उत्पन्न हो गया है। जल स्रोतों के सूखने अथवा जल प्रदूषण के कारण अलवणीय जल की आपूर्ति की कमी के मुख्य कारक बढ़ती जनसंख्या, भोजन एवं नकदी फसलों की बढ़ती मांग, बढ़ता नगरीकरण और बेहतर होता जीवनस्तर है। आज विश्व के अनेक देश जल संकट से गुजर रहे हैं।
जल संसाधनों के संरक्षण के उपाय— वर्तमान में विश्व में शुद्ध एवं पर्याप्त जल स्रोतों की उपलब्धता बड़ा संकट बनता जा रहा है। अतः जल संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। जल संसाधनों के संरक्षण हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
(1) अशोधित या आंशिक रूप से शोधित वाहित मल, कृषि रसायनों का विसर्जन और जल निकायों में औद्योगिक बहिःस्राव जल के प्रमुख प्रदूषक हैं। इन प्रदूषकों को जल निकायों में छोड़ने से पूर्व बहिःस्रावों को उपयुक्त विधि से शोधित करके जल प्रदूषण नियंत्रित किया जा सकता है।
(2) वन और अन्य वनस्पति आवरण धरातलीय प्रवाह को मंद करते हैं तथा भूमिगत जल को पुनः पूरित करते हैं। अतः वनों का विस्तार किया जाना चाहिए।
(3) जल संग्रहण पृष्ठीय प्रवाह को बचाने की एक अन्य विधि है।
(4) जल रिसाव को कम करने के लिए खेतों को सिंचित करने वाली नहरों को ठीक से पक्का करना चाहिए।
(5) रिसाव और वाष्पीकरण से होने वाली जल क्षति को रोकने हेतु स्प्रिंकलरों से खेतों की सिंचाई करनी चाहिए।
प्रश्न 4. प्राकृतिक वनस्पति के वितरण का वर्णन कीजिये।
अथवा
प्राकृतिक वनस्पति के मुख्य प्रकारों का वर्णन कीजिये।
उत्तर— विश्व में प्राकृतिक वनस्पति का वितरण तापमान और आर्द्रता पर निर्भर करता है। इन्हीं कारकों पर वनस्पति की वृद्धि निर्भर करती है। इस आधार पर विश्व की वनस्पति के मुख्य प्रकारों को निम्न चार वर्गों में रखा जा सकता है—
(1) वन— भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में विशाल वृक्ष उग सकते हैं। इस प्रकार वन प्रचुर जल आपूर्ति वाले क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं। जैसे-जैसे आर्द्रता कम होती है वैसे-वैसे वृक्षों का आकार और उनकी सघनता कम होती है।
(2) घास स्थल— सामान्य वर्षा वाले क्षेत्रों में छोटे आकार वाले वृक्ष और घास उगती है जिससे विश्व के घास स्थलों का निर्माण होता है।
(3) गुल्म— कम वर्षा वाले शुष्क प्रदेशों में कँटीली झाड़ियाँ एवं गुल्म उगते हैं। इस प्रकार के क्षेत्रों में पौधों की जड़ें गहरी होती हैं। वाष्पोत्सर्जन से होने वाली आर्द्रता की हानि को घटाने के लिए इन पेड़ों की पत्तियाँ काँटेदार और मोमी सतह वाली होती हैं।
(4) टुंड्रा वनस्पति— यह शीत ध्रुवीय प्रदेशों में पाई जाती है। टुंड्रा वनस्पति में मॉस और लाइकेन सम्मिलित हैं।
प्रश्न 5. वनों से क्या लाभ है? विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर— वनों से लाभों को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है—
(1) वन तथा वन्य जीव पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
(2) वन में वन्य जीवों को आश्रय मिलता है।
(3) वनों से हमें इमारती लकड़ी, फल, रबर, कागज, गोंद आदि उत्पाद प्राप्त होते हैं।
(4) वनों से उद्योगों हेतु कई प्रकार का कच्चा माल प्राप्त होता है।
(5) वन मृदा अपरदन को रोकने में मदद करते हैं।
(6) वन वर्षा को आकर्षित करते हैं जिससे भूमिगत जल का स्तर बना रहता है।
(7) वनों से हमें कई प्रकार की औषधियाँ मिलती हैं।
(8) वन्य जीवों से हमें मांस, खाल, ऊन आदि उत्पाद प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 6. प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन के संरक्षण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवों का संरक्षण— जनसंख्या की बढ़ती मांग से प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीवों पर संकट उत्पन्न हो गया है अतः प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवों के संरक्षण हेतु अनेक उपाय किए गए हैं, जो निम्न प्रकार हैं—
(1) प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीवों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्य जीव अभयारण्यों की स्थापना की गई है।
(2) वन्यजीवों के शिकार पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।
(3) वनों में मानवीय गतिविधियों पर नियन्त्रण लगाने के प्रयास किए गए हैं।
(4) प्रादेशिक और सामुदायिक स्तर पर वन एवं वन्य जीवों के प्रति जागरूकता हेतु अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
(5) वन्य वनस्पति तथा वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की स्थापना की गई है।