📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-
1. निम्न में से हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी?
(स) अभयसिंह
उत्तर-1. (अ)
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. मराठा शक्ति को सर्वप्रथम .................... ने संगठित किया।
2. राजस्थान के राज्यों में सर्वप्रथम 29 सितम्बर, 1803 को .................... ने अंग्रेजों के साथ संधि स्वीकार कर ली।
उत्तर-1. शिवाजी 2. भरतपुर राज्य
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. पेशवा बाजीराव की मराठा नीति क्या थी?
उत्तर- पेशवा बाजीराव की मराठा नीति मराठों के ध्वज को अटक से कटक तक फहराने की थी।
प्रश्न 2. राजस्थान में मराठों ने सर्वप्रथम कब व कहाँ प्रवेश किया?
उत्तर- राजस्थान में मराठों ने सर्वप्रथम 1711 ई. में मेवाड़ में प्रवेश किया।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. जयपुर उत्तराधिकार संघर्ष पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर- उदयपुर के महाराणा अमरसिंह (द्वितीय) की पुत्री चंद्रकुंवर बाई का विवाह सवाई जयसिंह के साथ 1708 ई. में इसी शर्त पर हुआ कि मेवाड़ की राजकुमारी से उत्पन्न पुत्र ही जयपुर के सिंहासन पर बैठेगा। लेकिन 1743 ई. में सवाई जयसिंह की मृत्यु के बाद सवाई जयसिंह का ज्येष्ठ पुत्र ईश्वरीसिंह गद्दी पर बैठा। इसके प्रतिक्रिया में मेवाड़ की राजकुमारी चंद्रकुंवर बाई से उत्पन्न पुत्र माधोसिंह ने अपने मामा महाराणा जगतसिंह (द्वितीय) के सहयोग से ईश्वरीसिंह को चुनौती दी।

चित्र: भारत का जनसंख्या पिरामिड

चित्र: जापान का जनसंख्या पिरामिड
मराठा सरदार मल्हार राव होल्कर द्वारा भी माधोसिंह का पक्ष लिया गया। परिणामतः दोनों के मध्य 'राजमहल' और 'बगरू' के युद्ध हुए। अन्ततः अपने सेनापति हरगोविन्द नाटाणी की कुटिलता से ईश्वरसिंग को आत्महत्या करनी पड़ी और माधोसिंह मराठों के सहयोग से जयपुर का शासक बन गया।
प्रश्न 2. हुरड़ा सम्मेलन में क्या अहदनामा तैयार किया गया?
उत्तर- हुरड़ा सम्मेलन में जो अहदनामा तैयार किया गया उसमें यह निश्चित हुआ कि (i) इस सम्मेलन में शामिल सभी राजपूत शासक (यथा-मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय, आमेर के सवाई जयसिंह, जोधपुर के अभयसिंह, नागौर के बख्तसिंह, कोटा के महाराव दुर्जनशाल आदि) एक-दूसरे के साथ मिलकर रहेंगे।
(ii) एक का शत्रु व मित्र दूसरे का शत्रु व मित्र होगा।
(iii) कोई भी नई योजना सभी मिल कर निश्चित करेंगे।
(iv) वर्षा ऋतु के पश्चात् रामपुरा में पुनः सभी एकत्र होंगे।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न-
1. मराठों ने कोटा व बूँदी पर आक्रमण किए—
(ब) 1720 ई. में
(द) 1728 ई. में
2. राजस्थान के राजपूत राजाओं ने मराठों की बढ़ती शक्ति को रोकने के लिए हुरड़ा (भीलवाड़ा) में एक सम्मेलन बुलाया—
3. राजपूत शासकों में एकता का अभाव था क्योंकि—
4. जोधपुर में उत्तराधिकार संघर्ष हुआ—
5. जिस राजपूत राज्य के विरोध के कारण सिरोही से अंग्रेजों की तत्काल संधि नहीं हो सकी, वह था—
(ब) मारवाड़ राज्य
(द) जयपुर राज्य
6. सिरोही राज्य ने अंग्रेजों के साथ सहायक संधि पर हस्ताक्षर किए—
(ब) 1817 ई. में
(द) 1816 ई. में
7. राजस्थान के राज्यों में सर्वप्रथम 29 सितम्बर, 1803 को किस राज्य ने अंग्रेजों के साथ संधि स्वीकार कर ली—
(ब) कोटा
(द) जयपुर
8. 1734 में हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन हुआ—
(ब) अजमेर में
(द) जयपुर में
9. राजस्थान में सर्वप्रथम 1711 ई. में मराठों ने प्रवेश किया—
(ब) अलवर में
(द) मारवाड़ में
10. 22 अप्रैल, 1734 में मराठों का राजस्थान की राजनीति में प्रथम हस्तक्षेप था—
(ब) जयपुर के शासन में
(द) डूंगरपुर के शासन में
11. 1761 में महाराणा राजसिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद मेवाड़ के राजसिंहासन के लिए उत्तराधिकार संघर्ष हुआ—
12. जन साधारण में कंपनी के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया हुई—
उत्तर- 1. (स) 2. (ब) 3. (द) 4. (ब) 5. (ब) 6. (अ) 7. (अ) 8. (अ) 9. (स) 10. (अ) 11. (अ) 12. (द)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. राजपूत शासक समान जाति, भाषा, रीति-रिवाज, परंपरा में से एक थे फिर भी उनमें .................... का अभाव था।
2. राजस्थान के शासकों के पारस्परिक .................... के कारण मराठों का हस्तक्षेप बढ़ता रहा।
3. .................... अपनी शक्ति के विस्तार तथा अन्य राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए राजपूत शासकों से मैत्री करने के लिए उत्सुक हुए।
4. 1818 ई. की संधियों के परिणामस्वरूप अंग्रेजों को दिए जाने वाले .................... से देशी शासकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई।
5. आमेर के सवाई जयसिंह की उदासीनता व निर्णयों की .................... बना दिया।
6. 1818 ई. तक .................... राज्य को छोड़कर राजस्थान के सभी राज्यों ने .................... का संरक्षण स्वीकार कर लिया।
7. राजस्थान में .................... मिशनरियों का .................... होने से ईसाई धर्म का प्रचार आरंभ हुआ।
8. जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष में मराठा सरदार .................... द्वारा .................... का पक्ष लिया।
उत्तर- 1. एकता 2. वैमनस्य 3. अंग्रेज 4. खिराज 5. असफल 6. सिरोही, कंपनी 7. ईसाई, प्रवेश 8. मल्हार राव होल्कर, माधोसिंह।
स्तंभ 'अ' को स्तंभ 'ब' से सुमेलित कीजिए-
स्तंभ 'अ' | स्तंभ 'ब' |
1. मराठों का मेवाड़ में प्रवेश | (अ) 17 जुलाई, 1734 |
2. हुरड़ा सम्मेलन | (ब) 1735 ई. |
3. पेशवा बाजीराव ने अपनी माता राधा बाई को राजस्थान में तीर्थ यात्रा को भेजा। | (स) ईश्वरसिंह व माधोसिंह |
4. राजमहल और बगरू के युद्ध | (द) रामसिंह व बख्तसिंह |
5. जोधपुर उत्तराधिकार संघर्ष | (य) सन् 1711 |
उत्तर- 1. (य) 2. (अ) 3. (ब) 4. (स) 5. (द)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. मराठों ने उत्तरी भारत में विस्तार की नीति कब अपनाई?
उत्तर- औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् मराठा शक्ति ने उत्तर-भारत में विस्तार की नीति अपनाई।
प्रश्न 2. मराठों का राजस्थान की राजनीति में प्रथम हस्तक्षेप कहाँ हुआ?
उत्तर- 22 अप्रैल, 1734 को मराठों ने बूँदी के शासक बुधदेव को पुनः शासक बनवाकर राजस्थान की राजनीति में हस्तक्षेप प्रारंभ किया।
प्रश्न 3. हुरड़ा सम्मेलन के अहदनामा की शर्तों का पालन किस प्रकार हुआ?
उत्तर- हुरड़ा सम्मेलन के अहदनामा की सभी शर्तें कागज तक ही सीमित रह गईं। उनकी कोई पालना नहीं की गई।
प्रश्न 4. मराठों को राजस्थान के शासकों के उत्तराधिकार में दखल का अवसर किस कारण मिला?
उत्तर- राजस्थान के राजपूत शासकों में उत्तराधिकार के कोई निश्चित नियम नहीं थे। इसी कारण मराठों को यहाँ उत्तराधिकार में दखल देने का अवसर मिला।
प्रश्न 5. जोधपुर उत्तराधिकार संघर्ष किन-किन के मध्य हुआ?
उत्तर- जोधपुर में रामसिंह और बख्तसिंह के मध्य उत्तराधिकार का संघर्ष हुआ।
प्रश्न 6. मेवाड़ के गृहयुद्ध से मेवाड़ की क्या हानि हुई?
उत्तर- मेवाड़ के गृहयुद्ध से मेवाड़ की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनैतिक प्रगति के मार्ग अवरुद्ध हो गए।
प्रश्न 7. राजपूत शासकों, सामंतों तथा प्रजा में राजनैतिक, आर्थिक व सामाजिक अव्यवस्था किन कारणों से पैदा हुई?
उत्तर- मुगल साम्राज्य के पतन तथा मराठों द्वारा फैलाई गई अराजकता के कारण।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. हुरड़ा सम्मेलन में किन-किन प्रमुख राजपूत शासकों ने भाग लिया?
उत्तर- हुरड़ा सम्मेलन में मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय, आमेर के सवाई जयसिंह, जोधपुर के अभयसिंह, नागौर के बख्तसिंह तथा कोटा के महाराव दुर्जनशाल आदि प्रमुख शासकों ने भाग लिया।
प्रश्न 2. मराठों के विरुद्ध राजपूत शासकों की नीति की असफलता के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर- (1) राजस्थान के शासकों में एकता का अभाव तथा (2) आमेर के शासक सवाई जयसिंह की उदासीनता व निर्णयों की अस्पष्टता के कारण मराठों के विरुद्ध राजपूत शासकों की नीति असफल रही।
प्रश्न 3. राजस्थान में अंग्रेजों का झुकाव क्यों हुआ?
उत्तर- राजस्थान के राज्यों में उत्पन्न राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक अव्यवस्था से प्रेरित होकर अंग्रेज अपनी शक्ति के विस्तार तथा अन्य राजनीतिक-आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए राजपूत शासकों से मैत्री करने के लिए उत्सुक हुए।
प्रश्न 4. मराठों का राजस्थानी शासकों पर प्रभुत्व क्यों बढ़ता गया?
उत्तर- मराठों का राजस्थानी शासकों पर प्रभुत्व निम्न कारणों से बढ़ता गया—
(i) राजपूत शासक जाति, भाषा, रीति-रिवाज, परंपरा की दृष्टि से समान थे, फिर भी उनमें एकता का अभाव था।
(ii) आमेर के सवाई जयसिंह की उदासीनता व निर्णयों की अस्पष्टता ने मराठों के विरुद्ध नीति को असफल बना दिया था।
प्रश्न 5. मेवाड़ में उत्तराधिकार संघर्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- मेवाड़ में उत्तराधिकार संघर्ष- मेवाड़ गद्दी के दो दावेदार थे—(i) अमरसिंह और (ii) रतनसिंह। दोनों ने मराठों से सहायता प्राप्त करने के प्रयास किए। परिणामस्वरूप गृहयुद्ध प्रारंभ हो गया। इस गृहयुद्ध में मराठा हस्तक्षेप होने लगा जिससे मेवाड़ की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनैतिक प्रगति के मार्ग अवरुद्ध हो गए।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. मराठा शक्ति के राजस्थान में प्रवेश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-मराठा शक्ति का राजस्थान में प्रवेश- राजस्थान में सर्वप्रथम 1711 ई. में मराठों ने मेवाड़ में प्रवेश किया। 1726 ई. में मराठों ने कोटा व बूँदी पर आक्रमण किए। इसके पश्चात् 1728 ई. में डूंगरपुर, बाँसवाड़ा के शासकों ने खिराज देना स्वीकार किया। 22 अप्रैल, 1734 ई. में मराठों ने बूँदी के शासक बुधसिंह को पुनः वहाँ का शासक बनवा दिया। 17 जुलाई, 1734 को राजपूत राजाओं ने मराठों की बढ़ती शक्ति को रोकने के लिए हुरड़ा में एक सम्मेलन बुलाया, लेकिन यह सम्मेलन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया। इसके बाद 1736 ई. में पेशवा बाजीराव ने राजस्थान का दौरा किया और यहाँ से चौथ वसूली की।
प्रश्न 2. जोधपुर-उत्तराधिकार संघर्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-जोधपुर-उत्तराधिकार संघर्ष- जोधपुर में रामसिंह और बख्तसिंह के मध्य उत्तराधिकार संघर्ष प्रारंभ हुआ। दोनों ही मराठा-सहायता के प्रयास में जुट गए। फलतः यहाँ पेशवा, सिंधिया व होल्कर के हस्तक्षेप बढ़ गए। अन्ततः रियासत का विभाजन हुआ और दोनों को आधा-आधा राज्य मिला। मारवाड़ रियासत के विभाजन से उसकी आर्थिक दशा सोचनीय हो गई, व्यापार नष्ट हो गया, कृषि बर्बाद हो गई तथा मराठों की माँगें निरन्तर बढ़ती गईं। लेकिन वे कोई समझौता करने पर सहमत नहीं थे।
प्रश्न 3. राजस्थान में उत्तराधिकार संघर्ष के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर-राजस्थान में उत्तराधिकार संघर्ष के कारण- राजस्थान में उत्तराधिकार संघर्ष के निम्नलिखित दो प्रमुख कारण थे-
(1) राजस्थान के राजपूत शासकों में उत्तराधिकार के कोई निश्चित नियम नहीं थे।
(2) यहाँ उत्तराधिकार संघर्ष का दूसरा प्रमुख कारण था- सत्ता के उत्तराधिकारियों में सत्ता लोलुपता, पारस्परिक वैमनस्य और मराठों का दखल।
प्रश्न 4. राजस्थान के उत्तराधिकार संघर्ष में मराठों के दखल के क्या परिणाम निकले?
उत्तर-राजस्थान के उत्तराधिकार संघर्ष में मराठों की दखल के परिणाम-
(1) उत्तराधिकार संघर्ष में मराठों की दखल ने यहाँ के राज्यों में पारस्परिक वैमनस्य को बढ़ावा दिया।
(2) मराठों ने यहाँ अराजकता फैलाई जिससे राजपूत शासकों, सामन्तों तथा प्रजा में राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक अव्यवस्था उत्पन्न हो गई।
(3) यहाँ के चहुँमुखी विकास में बाधा पहुँची व प्रगति के मार्ग अवरुद्ध हो गए।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. अंग्रेजों ने राजस्थान में राजपूत शासकों से संधियाँ क्यों और कब की?
उत्तर-अंग्रेजों द्वारा राजस्थान के शासकों से संधियाँ करने के कारण- मुगल साम्राज्य के पतन और मराठों द्वारा फैलाई गई अराजकता ने राजपूत शासकों, सामन्तों तथा प्रजा में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक अव्यवस्था उत्पन्न कर दी थी। ऐसी स्थिति में अंग्रेज अपनी शक्ति के विस्तार एवं अन्य राजनीतिक-आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए राजपूत शासकों से मैत्री करने के लिए उत्सुक हुए।
संधियों का समय- सन् 1817 से 1818 ई. की अवधि में राजपूत शासकों से अंग्रेज सरकार ने संधियाँ करनी शुरू की। राजस्थान के राज्यों में सर्वप्रथम 29 सितम्बर, 1803 को भरतपुर राज्य ने अंग्रेजों के साथ संधि स्वीकार कर ली। 1818 तक सिरोही राज्य को छोड़कर सभी राज्यों ने कंपनी के संरक्षण को स्वीकार कर लिया और 1823 ई. में सिरोही ने भी यह संधि स्वीकार कर ली। इस प्रकार एक ही वर्ष में लगभग सम्पूर्ण राजस्थान अंग्रेजों के संरक्षण में आ गया।
संधियों के परिणाम- इन संधियों के निम्न प्रमुख परिणाम निकले-
(i) 1818 की संधियों के परिणामस्वरूप अंग्रेजों को दिए जाने वाले खिराज से देशी शासकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई।
(ii) इन संधियों से अंग्रेजों को यहाँ के शासकों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अवसर मिल गया।
(iii) अंग्रेजों ने शासकों को सामन्तों के विशेषाधिकार तथा शक्ति नष्ट करने हेतु दबाव डाला। इससे सामन्तों की प्रतिष्ठा को हानि पहुँची।
(iv) स्वदेशी व्यापार, उद्योग व हस्तशिल्प नष्ट होने लगे।
(v) राजस्थान में ईसाई मिशनरियों के प्रवेश से ईसाई धर्म का प्रचार प्रारंभ हुआ जिसकी प्रतिक्रिया में 1857 का स्वतंत्रता संघर्ष हुआ।