📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
1. राजस्थान में 1857 की क्रांति का प्रारंभ सर्वप्रथम कहाँ हुआ?
2. ठाकुर कुशल सिंह ने 1857 ई. में क्रांतिकारियों का नेतृत्व कहां किया?
(ब) आउवा
(द) नीमच
उत्तर- 1.
(स) 2.
(ब)
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति का शुभारंभ .................... को हुआ।
2. खैरवाड़ा छावनी में .................... रेजीमेंट थी।
उत्तर- 1. 28 मई, 1857 2. भील।
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. राजस्थान में 1857 ई. के समय कौन-कौनसी सैनिक छावनियाँ स्थित थीं?
उत्तर- राजस्थान में 1857 ई. के समय 6 सैनिक छावनियाँ थीं। ये थीं-(1) नसीराबाद, (2) नीमच, (3) एरिनपुरा (4) देवली (5) ब्यावर तथा (6) खैरवाड़ा।
प्रश्न 2. कोटा में 1857 ई. की क्रांति का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर- कोटा में 1857 ई. की क्रांति का नेतृत्व लाला जयदयाल व मेहराब अली खाँ ने किया।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के क्या कारण रहे थे?
उत्तर- राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के कारण
राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
(i) अंग्रेज राज्यों के आंतरिक शासन में हस्तक्षेप करने लगे और उन्होंने राजाओं की प्रभुसत्ता समाप्त कर उन्हें अपनी कृपा दृष्टि पर निर्भर बना दिया।
(ii) निःसन्तान राजाओं द्वारा गोद लेने सम्बन्धी मामलों में अंग्रेजों के हस्तक्षेप से कंपनी सरकार के विरुद्ध राजाओं में असंतोष की भावना बलवती होती गई।
(iii) राजस्थान में अंग्रेजों की धर्म प्रचार नीति, सामाजिक सुधार एवं आर्थिक नीतियों के कारण यहां की सामान्य जनता की भावना अंग्रेजों के विरुद्ध चरम पर थी।
(iv) अंग्रेज कंपनी ने राज्यों के आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप कर आर्थिक शोषण की नीति लागू की।
(v) सामन्त अपनी दुःखद स्थिति का जिम्मेदार अंग्रेजों को ही मानते थे। अतः उनमें अंग्रेजों के प्रति रोष था।
(vi) 1857 ई. की क्रांति का तात्कालिक कारण एनफील्ड राइफलों में प्रयुक्त कारतूसों में गाय एवं सूअर की चर्बी का प्रयोग किया जाना था।
प्रश्न 2. आउवा के ठाकुर कुशल सिंह का 1857 ई. के संघर्ष में योगदान को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
आउवा के विद्रोह का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर- आउवा के ठाकुर कुशल सिंह का 1857 के संघर्ष में योगदान-
(1) आउवा के ठाकुर कुशल सिंह दिल्ली की ओर जाते एरिनपुरा के विद्रोहियों से मिले और इन सैनिकों को अपने साथ आउवा ले गये।
(2) आउवा में क्रांति का नेतृत्व ठाकुर कुशल सिंह चम्पावत द्वारा किया गया।
(3) ठाकुर कुशल सिंह के नेतृत्व में यहाँ के सैनिकों ने 8 सितम्बर, 1857 ई. को बिठौरा (पाली) में कैप्टन हीथकोट व जोधपुर महाराजा तख्तसिंह की संयुक्त सेना को पराजित किया।
(4) 18 सितम्बर, 1857 ई. को क्रांतिकारियों ने जोधपुर के पॉलिटिकल एजेन्ट मोकमैसन को चेलावास के युद्ध में हराया तथा उसका सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया।
(5) ब्रिगेडियर होम्स के नेतृत्व में सेना ने जनवरी 1858 में आउवा पर आक्रमण कर किले पर अधिकार कर लिया तथा आउवा विद्रोह को समाप्त किया।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
अध्याय 2 - 1857 का स्वतंत्रता संग्राम एवं राजस्थान
[BOX: [875, 140, 905, 400]]
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
[BOX: अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न]
वस्तुनिष्ठ प्रश्न-
1. भारत में 1857 ई. की क्रांति की शुरुआत सर्वप्रथम कहाँ हुई?
(ब) मेरठ
(द) नीमच
2. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति का तात्कालिक कारण है-
3. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के समय मेर रेजीमेंट थी-
(ब) नीमच छावनी में
(द) ब्यावर छावनी में
4. नीमच-छावनी में सैनिकों ने किसके नेतृत्व में विद्रोह कर शस्त्रागार में आग लगा दी?
(ब) मोहम्मद अली बेग
(द) तिलक राज।
5. किसके नेतृत्व में सेना ने जनवरी, 1858 ई. में आउवा पर आक्रमण कर किले पर अधिकार कर लिया-
(ब) मोकमैसन
(द) शावर्स
6. लाला जयदयाल व मेहराब अली खाँ ने 1857 ई. में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया-
(ब) एरिनपुरा में
(द) कोटा में
7. राजस्थान में 1857 की क्रांति के कारण रहे—
8. राजस्थान में सबसे ज्यादा सुनियोजित व सुनियंत्रित क्रांति कहाँ हुई?
(ब) नीमच में
(द) एरिनपुरा में
9. किस छावनी के विद्रोही सैनिक 'चलो दिल्ली मारो फिरंगी' का नारा लगाते हुए दिल्ली की ओर चल पड़े थे—
(ब) एरिनपुरा
(द) देवली
10. जोधपुर लीजियन रेजीमेंट की एरिनपुरा छावनी का मुख्यालय था—
(ब) टोंक
(द) उदयपुर
11. आज भी लोग होली आदि के लोक गीतों के माध्यम से कहाँ की क्रांति को याद करते हैं—
(ब) कोटा की
(द) आउवा की
12. 1857 की क्रांति की असफलता का कारण है—
उत्तर— 1. (ब) 2. (स) 3. (द) 4. (ब) 5. (अ) 6. (द) 7. (द) 8. (स) 9. (ब) 10. (स) 11. (द) 12. (द)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
1. एरिनपुरा छावनी में ................. रेजीमेन्ट थी।
2. 1857 ई. की क्रांति के समय जयपुर में ................. पोलिटिकल एजेन्ट नियुक्त थे।
3. 1857 ई. की क्रांति के समय राजस्थान के तत्कालीन ए.जी.जी. (एजेन्ट टू गवर्नर जनरल) ................. थे।।
4. 1857 ई. की क्रांति के समय अधिकांश राजा-महाराजाओं द्वारा अंग्रेजों को भरपूर ................. प्रदान किया गया।
5. विद्रोह की समाप्ति के पश्चात् अंग्रेजों ने ................. वर्ग की शक्ति को ................. की नीति अपनाई।
6. डूंगजी, जवाहर जी एवं लोटू जाट द्वारा ................. की सैनिक छावनी को ................. आम जनता में बहुत ही प्रसन्नता का कारण बना।
7. अंग्रेज कंपनी ने राज्यों के साथ ................. वसूलने की प्रथा द्वारा ................. शोषण की नीति लागू कर दी।
8. राजस्थान के ................. ने क्रांति के प्रवाह को ................. के लिए पर्याप्त प्रयास किये।
उत्तर— 1. जोधपुर लीजियन 2. कर्नल ईडन 3. जार्ज पैट्रिक लॉरेन्स 4. सहयोग 5. सामन्त, समाप्त करने 6. नसीराबाद, लूटना 7. खिराज, आर्थिक 8. शासकों, रोकने।
स्तंभ 'अ' को स्तंभ 'ब' से सुमेलित कीजिए—
स्तंभ 'अ' | स्तंभ 'ब' |
1. नसीराबाद | (अ) मेर रेजीमेन्ट |
2. ब्यावर | (ब) 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेन्ट्री |
3. देवली | (स) भील रेजीमेंट |
4. खैरवाड़ा | (द) कोटा कन्तिजेंट |
5. एरिनपुरा | (य) जोधपुर लीजियन |
उत्तर— 1. (ब) 2. (अ) 3. (द) 4. (स) 5. (य)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. 1857 की क्रांति के समय राजस्थान में कहां-कहाँ और कौन-कौन पोलिटिकल एजेन्ट नियुक्त थे?
उत्तर— 1857 की क्रांति के समय राजस्थान में मेवाड़, मारवाड़ एवं जयपुर में क्रमशः मेजर शावर्स, मॉक मैसन और कर्नल ईडन पोलिटिकल एजेन्ट नियुक्त थे।
प्रश्न 2. 1857 की क्रांति के समय ए.जी.जी. कौन थे?
उत्तर— 1857 की क्रांति के समय ए.जी.जी. जार्ज पैट्रिक लॉरेन्स थे।
प्रश्न 3. ए.जी.जी. लॉरेन्स को मेरठ विद्रोह की सूचना कब और कहाँ मिली?
उत्तर— 19 मई, 1857 ई. को ए.जी.जी. लॉरेन्स को मेरठ विद्रोह की सूचना माउन्ट आबू में मिली।
प्रश्न 4. एरिनपुरा में विद्रोह का नेतृत्व कसने किया?
उत्तर— एरिनपुरा में मोती खाँ, सूबेदार शीतल प्रसाद एवं तिलकराज के नेतृत्व में जोधपुर लीजियन ने विद्रोह कर दिया।
प्रश्न 5. किसके नेतृत्व में और कब अंग्रेजी सेना ने आउवा किले पर अधिकार कर लिया?
उत्तर— ब्रिगेडियर होम्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने जनवरी 1858 ई. में आउवा के किले पर अधिकार कर लिया।
प्रश्न 6. नीमच छावनी में विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ?
उत्तर— नीमच छावनी में विद्रोह मोहम्मद अली बेग के नेतृत्व में हुआ।
प्रश्न 7. ए.जी. जी. लॉरेन्स को मेरठ विद्रोह की सूचना मिलने पर क्या किया?
उत्तर— मेरठ विद्रोह की सूचना मिलने पर ए.जी.जी. लॉरेन्स ने सभी राजाओं को निर्देशित किया कि राज्यों में शान्ति बनाए रखे तथा शक्ति से विद्रोहियों का दमन करें।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. अंग्रेज कम्पनी के किन कार्यों ने राजस्थान में कम्पनी के विरुद्ध असंतोष की भावना का प्रसार किया? (कोई दो कार्य)
उत्तर- अंग्रेज कम्पनी ने (i) राज्यों के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप करके तथा (ii) किसानों, सामन्तों एवं जनसाधारण के हितों पर कुठाराघात करके राजस्थान में कम्पनी के विरुद्ध असंतोष की भावना का प्रसार किया।
प्रश्न 2. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति की असफलता के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर- राजस्थान में 1857 की क्रांति की असफलता के कारण-(i) अधिकांश राजा-महाराजाओं द्वारा अंग्रेजों का भरपूर सहयोग करना। (ii) कुशल एवं संगठित नेतृत्व का अभाव।
प्रश्न 3. 1857 की क्रांति के कोई दो परिणाम लिखिए।
उत्तर- 1857 की क्रांति के कोई दो परिणाम-(i) अंग्रेजों ने सामन्त वर्ग की शक्ति को समाप्त करने की नीति अपनाई। (ii) अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का राज्य में विस्तार किया गया।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. 1857 ई. की क्रांति के समय राजस्थान में तत्कालीन ए.जी.जी. तथा पॉलिटिकल एजेन्ट कौन और कहाँ नियुक्त थे तथा ब्रिटिश सैनिक छावनियों की क्या स्थिति थी?
उत्तर- 1857 ई. की क्रांति के समय राजस्थान में मेवाड़, मारवाड़ एवं जयपुर में क्रमशः मेजर शावर्स, मॉक मैसन और कर्नल ईडन पॉलिटिकल एजेन्ट नियुक्त थे। ये सभी राजस्थान के तत्कालीन ए.जी.जी. जार्ज पैट्रिक लॉरेंस के अधीन थे। राजस्थान में इस समय 6 सैनिक छावनियाँ थीं जो नसीराबाद, नीमच, एरिनपुरा, देवली, ब्यावर तथा खैरवाड़ा में थीं। इन सैनिक छावनियों में पाँच हजार भारतीय सैनिकों के अतिरिक्त कोई भी यूरोपियन सैनिक नहीं था।
प्रश्न 2. एरिनपुरा में विद्रोह पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- एरिनपुरा में विद्रोह-21 अगस्त, 1857 ई. को एरिनपुरा में विद्रोह प्रारंभ हो गया। जोधपुर लीजियन ने मोती खाँ, सूबेदार शीतल प्रसाद एवं तिलक राज के नेतृत्व में विद्रोह का बिगुल बजा दिया। वे क्रांति के नेताओं के आदेशानुसार 'चलो दिल्ली, मारो फिरंगी' के नारे लगाते हुए दिल्ली की ओर चल पड़े।
आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह रास्ते में इन सैनिकों से मिले और इन्हें अपने साथ आउवा ले गए।
प्रश्न 3. 1857 ई. में हुए कोटा विद्रोह पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- कोटा विद्रोह-कोटा में क्रांति की शुरुआत 15 अक्टूबर, 1857 ई. को लाला जयदयाल व मेहराब अली खाँ के द्वारा की गई। विद्रोही सैनिकों ने कैप्टन बर्टन का सिर काटकर पूरे कोटा शहर में घुमाया। कोटा के महाराव रामसिंह (द्वितीय) को क्रांतिकारियों द्वारा कोटा दुर्ग में कैद कर दिया गया।
जून, 1858 में अंग्रेजों ने कोटा रियासत पर पुनः अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया तथा क्रांतिकारी जयदयाल तथा मेहराब अली खाँ को फाँसी पर चढ़ा दिया गया।
प्रश्न 4. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के समय की छावनियों, उनके मुख्यालय तथा रेजीमेंट के नाम को एक तालिका में दिखाइए।
उत्तर- राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के समय छ: छावनियाँ थीं। इन्हें निम्न तालिका में दर्शाया गया है-
क्र. सं. | छावनी | मुख्यालय | रेजीमेंट |
1. | नसीराबाद | अजमेर | बंगाल नेटिव इन्फेन्ट्री |
2. | नीमच | ग्वालियर | मालवा, मेवाड़ राजपूताना रेजीमेंट |
3. | एरिनपुरा | पाली | जोधपुर लीजियन |
4. | देवली | टोंक | कोटा कन्टिन्जेंट |
5. | ब्यावर | अजमेर | मेर रेजीमेंट |
6. | खैरवाड़ा | उदयपुर | भील रेजीमेंट |
प्रश्न 5. राजाओं में उत्तराधिकार के प्रश्न पर फैले असंतोष ने राजस्थान में 1857 की क्रांति को हवा दी। समझाइए।
उत्तर- राजाओं में उत्तराधिकार के प्रश्न पर असंतोष-निःसंतान राजाओं द्वारा गोद लेने सम्बन्धी मामलों में कम्पनी ने अपना निर्णय देशी रियासतों पर लादने की कोशिश की। कम्पनी इन निर्णयों के अन्तर्गत ही 1826 ई. में अलवर राज्य में हस्तक्षेप कर अलवर राज्य के दो हिस्से करवा दिए। 1826 ई. में ही भरतपुर के लोहागढ़ दुर्ग को नष्ट कर पॉलिटिकल एजेन्ट के अधीन काउन्सिल की नियुक्ति की। 1844 ई. में बांसवाड़ा महारावल लक्ष्मणसिंह की नाबालिगी के कारण अंग्रेजी नियंत्रण की स्थापना हुई। इन सभी कारणों से कम्पनी सरकार के विरुद्ध राजाओं में कम्पनी सरकार के विरुद्ध असंतोष की भावना बलवती हो गई थी जिसने राजस्थान में 1857 की क्रांति को हवा दी।
प्रश्न 6. नसीराबाद में हुए विद्रोह का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर- नसीराबाद में विद्रोह-(i) 28 मई, 1857 को नसीराबाद की छावनी में सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
(ii) इन भारतीय सैनिकों ने तोपखाने के सैनिकों को अपनी तरफ मिलाकर तोपों पर अधिकार कर लिया।
(iii) विद्रोही सैनिकों ने छावनी को लूट लिया।

चित्र: तालिका: 1857 की क्रांति के समय राजस्थान की छावनियाँ
(iv) मेजर स्पॉटिस वुड एवं न्यूबरी की हत्या कर सैनिकों ने दिल्ली की ओर प्रस्थान किया।
प्रश्न 7. नीमच में विद्रोह का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर—नीमच में विद्रोह— (i) नीमच में विद्रोह 3 जून, 1857 को प्रारंभ हुआ और नीमच छावनी में सैनिकों ने मोहम्मद अली बेग के नेतृत्व में विद्रोह कर शस्त्रागार में आग लगा दी। (ii) नीमच छावनी के किले में तैनात सेना ने भी संघर्ष का बिगुल बजा दिया। (iii) विद्रोही सैनिक चित्तौड़गढ़, हमीरगढ़, बनेड़ा में अंग्रेजी बंगलों को लूटते हुए शाहपुरा पहुँचे। शाहपुरा के जागीरदार ने विद्रोही सैनिकों के लिए रसद की आपूर्ति की। (iv) नीमच की क्रांति की सूचना शावर्स ने कोटा, बूंदी और मेवाड़ की सेवाओं की सहायता से नीमच पर पुनः अधिकार कर लिया।
निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के कारणों का विवेचन कीजिए।
उत्तर—राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के कारण
राजस्थान में 1857 ई. की क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—
(1) कम्पनी का राज्यों के आंतरिक शासन में हस्तक्षेप— कम्पनी के इस आश्वासन के बावजूद कि वे राज्यों के आंतरिक प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, अंग्रेज राज्यों के आंतरिक प्रशासन में हस्तक्षेप करने लगे। इस हस्तक्षेप के द्वारा अंग्रेजों ने राजाओं की प्रभुसत्ता को समाप्त कर उन्हें अपनी कृपा दृष्टि पर निर्भर बना दिया।
(2) राज्यों में उत्तराधिकार के प्रश्न पर असंतोष— निःसंतान राजाओं द्वारा गोद लेने सम्बन्धी मामलों में कम्पनी ने अपना निर्णय देशी रियासतों पर लादने की कोशिश की। इससे अलवर, भरतपुर तथा बांसवाड़ा के राजाओं में कंपनी सरकार के विरुद्ध असंतोष की भावना बलवती होती गई।
(3) सामान्य जनता की अप्रसन्नता— राजस्थान में सामान्य जनता की भावना अंग्रेजों के विरुद्ध चरम पर थी। अंग्रेजों की अपनी धर्म प्रचार नीति, सामाजिक सुधार एवं आर्थिक नीतियों को यहाँ की जनता ने अपने धर्म व जीवन में अंग्रेजी हस्तक्षेप की संज्ञा दी।
(4) राज्यों के आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप— अंग्रेज कंपनी ने राज्यों के साथ खिराज वसूलने की प्रथा द्वारा आर्थिक शोषण की नीति लागू कर दी। इसके अतिरिक्त राज्यों में शांति-व्यवस्था स्थापित करने एवं विभिन्न सैनिक छावनियों की स्थापना कर इन सभी के रख-रखाव का खर्चा संबंधित राज्यों से वसूल किया गया।
(5) सामन्तों की मनोदशा— 1818 की संधियों के पश्चात् राज्य के शासकों की सामन्तों पर निर्भरता प्रायः समाप्त हो गई। सामन्त अपनी दुःखद स्थिति का उत्तरदायी मुख्यतः अंग्रेजों को ही मानते थे। आउवा, कोठारिया और सलूम्बर ठिकाने इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
(6) तात्कालिक कारण— भारत में 1857 ई. की क्रांति का तात्कालिक कारण एनफील्ड राइफलों में प्रयुक्त कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग किया जाना था, जिन्हें प्रयोग में लेने से पहले मुँह से खोलना पड़ता था।
प्रश्न 2. 1857 की क्रांति की असफलता के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर—1857 की क्रांति की असफलता के कारण
1857 की क्रांति की असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—
(1) अधिकांश राजा-महाराजाओं द्वारा अंग्रेजों को भरपूर सहयोग प्रदान किया गया।
(2) क्रांति निर्धारित समय से पूर्व ही प्रारंभ हो गई थी।
(3) क्रांति की शुरुआत कुछ सीमित स्थानों पर ही हुई।
(4) कोटा, नसीराबाद, भरतपुर, धौलपुर, टोंक आदि में विद्रोह अलग-अलग समय पर शुरू हुए।
(5) क्रांतिकारियों के मध्य कुशल एवं संगठित नेतृत्व का अभाव था।
(6) राजस्थान के क्रांतिकारियों में परस्पर तालमेल का अभाव था। साथ ही इनके पास साधनों का भी अभाव था।
(7) मारवाड़, मेवाड़ व जयपुर आदि के शासकों ने तांत्या टोपे का सहयोग नहीं किया।
प्रश्न 3. 1857 की क्रांति के परिणामों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर—क्रांति के परिणाम
1857 की क्रांति के परिणाम निम्नलिखित रहे—
(1) राजस्थान के शासकों ने क्रांति के प्रवाह को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास किये। अतः क्रांति की असफलता के बाद ब्रिटिश सरकार ने राजाओं को अपनी ओर करने हेतु उन्हें अंग्रेजी शिक्षा देना आरंभ किया। यही नहीं, पुरस्कार देना व उपाधियाँ देना भी शुरू किया।
(2) सामन्तों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था। इसलिए विद्रोह की समाप्ति के पश्चात् अंग्रेजों ने सामन्त वर्ग की शक्ति को समाप्त करने की नीति अपनाई।
(3) अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का विस्तार किया ताकि नौकरशाही में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त अनुभवी एवं स्वामीभक्त व्यक्तियों की भर्ती की जा सके।
(4) अंग्रेजों ने अपने सैनिक एवं व्यापारिक हितों की पूर्ति के लिए तीव्र यातायात के साधनों का विकास किया।
(5) क्रांति ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की जड़ों को हिलाकर रख दिया।