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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Social Science Chapter 31 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. निम्न में से कौन-सा जोड़ा सुमेलित नहीं है?

मंदिर | स्थान

(अ) देलवाड़ा का जैन मंदिर - आबू पर्वत (सिरोही)
(ब) रणकपुर के जैन मंदिर - पाली
(स) श्री एकलिंगजी का मंदिर - जयपुर
(द) खाटूश्याम जी का मंदिर - सीकर

2. निम्न में से किस दुर्ग का सर्वाधिक उच्च भाग कटारगढ़ कहलाता है?

(अ) आमेर दुर्ग
(ब) कुंभलगढ़ का दुर्ग
(स) रणथंभौर दुर्ग
(द) जालौर दुर्ग

उत्तर-1.
(स) 2.
(ब)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. बूँदी में ............... खंभों की छतरी स्थापत्य कला का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।

2. बणी-ठणी चित्र शैली ............... की प्रसिद्ध शैली है।

उत्तर-1. चौरासी 2. किशनगढ़

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. मंदिरों का विकास किस काल से प्रारंभ हुआ?

उत्तर- मंदिरों का विकास गुप्तकाल से प्रारंभ हुआ।

प्रश्न 2. मूसी महारानी की छतरी कहाँ स्थित है?

उत्तर- मूसी महारानी की छतरी अलवर में स्थित है।

प्रश्न 3. विजय स्तम्भ का निर्माण किस शासक ने करवाया था?

उत्तर- विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. राजस्थान के प्रमुख दुर्गों के नाम बताइए एवं किन्हीं दो दुर्गों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- राजस्थान के प्रमुख दुर्ग- राजस्थान के प्रमुख दुर्ग ये हैं- (1) बूँदी दुर्ग (2) लोहागढ़ दुर्ग (3) रणथंभौर दुर्ग (4) जालौर दुर्ग (5) चित्तौड़गढ़ दुर्ग (6) कुंभलगढ़ दुर्ग (7) आमेर दुर्ग (8) गागरोन का जलदुर्ग (9) जोधपुर का मेहरागढ़ दुर्ग (10) बीकानेर का जूनागढ़ दुर्ग तथा (11) जैसलमेर का सोनारगढ़ दुर्ग।

(1) बूँदी दुर्ग- बूँदी शहर के उत्तरी छोर की पहाड़ी पर 1354 ई. में राव बरसिंह ने बूँदी दुर्ग को बनवाया था। दुर्ग के चारों तरफ सुदृढ़ परकोटा बना हुआ है। इसमें बने छत्रशाल महल, यंत्रशाला, बादल महल, अनिरुद्ध महल के भित्ति चित्र देखते ही बनते हैं। भवनों की छतियाँ, दरबार हॉल की अलंकृत स्तंभ स्थापत्य कला अनुपम है।

(2) लोहागढ़ दुर्ग- इस दुर्ग का निर्माण भरतपुर के जाट वंश के महाराजा सूरजमल ने करवाया था। इसके चारों ओर मिट्टी की दोहरी प्राचीर बनी है, इसलिए इसे मिट्टी का दुर्ग भी कहते हैं। इस पर कई आक्रमण हुए, लेकिन इसे कोई जीत नहीं पाया। अतः इसे अजय दुर्ग भी कहते हैं।

प्रश्न 2. राजस्थान में संगीत कला पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर- राजस्थान में संगीत कला- राजस्थान में प्राचीन काल से ही संगीत का प्रचलन रहा है। युद्ध के समय उत्साहवर्द्धक संगीत की ध्वनियाँ एवं वाद्य यंत्रों की गर्जना से जोषयुक्त वातावरण हो जाता था। यहाँ विविध रंगों से युक्त संगीत के साथ-साथ, श्रृंगार से युक्त मांड राग भी उल्लेखनीय रहा है।

यहाँ भक्तों ने भी संगीत की विभिन्न राग-रागिनियों को प्रचलित एवं प्रसारित किया जिसमें मीराबाई, दादू, चरणदास, दयाबाई, सहजोबाई के नाम विशिष्ट रहे।

संगीत के विविध घराने भी राजस्थान में विकसित हुए हैं। वहीं जनसामान्य के बीच लोकसंगीत में संस्कार, उत्सव पर्व, देवी-देवताओं के जागरण किए जाते हैं तथा वैवाहिक गीत भी गाये जाते हैं।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

अध्याय 10 - राजस्थान में कला एवं संस्कृति

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. भरतपुर के जाट वंश के महाराजा सूरजमल ने जिस दुर्ग का निर्माण करवाया, वह है-

(अ) लोहागढ़ दुर्ग
(ब) मेहरानगढ़ दुर्ग
(स) सोनारगढ़ दुर्ग
(द) जल दुर्ग

2. 10वीं शताब्दी में परमार राजाओं धारावर्ष और मुंज ने किस दुर्ग का निर्माण करवाया था-

(अ) रणथंभौर दुर्ग
(ब) जालौर दुर्ग
(स) चित्तौड़गढ़ दुर्ग
(द) बूँदी दुर्ग

3. आभानेरी मंदिर स्थित है-

(अ) जयपुर में
(ब) सीकर में
(स) दौसा में
(द) कोटा में

4. गोपाालसिंह की छतरी स्थित है-

(अ) अलवर में
(ब) बूँदी में
(स) रामगढ़ में
(द) करौली में।

5. बीकानेर के चित्रों में निम्न में से किस रंग का विशेष प्रयोग हुआ है?

(अ) हरे रंग का
(ब) पीले रंग का
(स) लाल रंग का
(द) नीले रंग का

6. राजस्थान की किस चित्रशैली में चित्रों की पृष्ठभूमि में कदम्ब वृक्ष अधिक मिलते हैं?

(अ) उदयपुर शैली में
(ब) किशनगढ़ शैली में
(स) कोटा-बूँदी शैली में
(द) जयपुर-अलवर शैली में।

7. राजस्थान राज्य का कौनसा दुर्ग मत्साकार पहाड़ी पर स्थित है और दो सुदृढ़ प्राचीरों से घिरा हुआ रहा है?

(अ) लोहागढ़ दुर्ग
(ब) कुंभलगढ़ दुर्ग
(स) आमेर दुर्ग
(द) चित्तौड़गढ़ दुर्ग

8. जो दुर्ग पीछे बलुआ पत्थर से बने होने के कारण सूरज की रोशनी पड़ने पर सोने जैसा चमकता है, वह है-

(अ) बीकानेर का जूनागढ़ दुर्ग
(ब) जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग
(स) जैसलमेर का सोनारगढ़ दुर्ग
(द) गागरोन का जल दुर्ग

9. रणकपूर जैन मंदिर स्थित है-

(अ) पाली में
(ब) सिरोही में
(स) जोधपुर में
(द) उदयपुर में

10. चौरासी खंभों की छतरी स्थित है-

(अ) अलवर में
(ब) बूँदी में
(स) करौली में
(द) रामगढ़ में

11. राजस्थान की जिस चित्र शैली में चित्रों की पृष्ठभूमि में लंबे खजूर के वृक्ष अधिक मिलते हैं, वह है—

(अ) उदयपुर शैली
(ब) किशनगढ़ शैली
(स) कोटा-बूंदी शैली
(द) जयपुर-अलवर शैली

12. जिस स्थान के चित्रों में लाल रंग का विशेष प्रयोग हुआ है, वह स्थान है—

(अ) जोधपुर
(ब) उदयपुर
(स) किशनगढ़
(द) बूँदी

उत्तर-1.
(अ) 2.
(ब) 3.
(स) 4.
(द) 5.
(ब) 6.
(अ) 7.
(द) 8.
(स) 9.
(अ) 10.
(ब) 11.
(स) 12.
(ब)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. .................... प्रायः सामरिक दृष्टि से और सुरक्षा के लिए बनाये जाते थे।

2. लोहागढ़ दुर्ग पर कई आक्रमण हुए लेकिन इसे कोई भी जीत नहीं पाया। अतः इसे .................... दुर्ग भी कहा जाता है।

3. रणथंभौर दुर्ग का निर्माण .................... वंशीय शासकों ने करवाया।

4. चित्तौड़गढ़ दुर्ग के विजय स्तंभ को भारतीय मूर्तिकला का .................... भी कहा जाता है।

5. कुंभलगढ़ दुर्ग के कटारगढ़ में .................... का जन्म हुआ था।

6. .................... जल दुर्ग दो नदियों काली सिंध और आहु नदी के संगम पर स्थित है।

7. लौहागढ़ दुर्ग....................जिले में स्थित है।

8. हाड़ौती के प्रमुख मंदिरों में से कमलेश्वर महादेव का मंदिर....................में स्थित है।

उत्तर-1. दुर्ग 2. अजयै 3. चौहान 4. शब्दकोष 5. महाराणा प्रताप 6. गागरोन का 7. भरतपुर 8. बूँदी।

स्तंभ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए-

स्तंभ 'अ'

स्तंभ 'ब'

1. लोहागढ़ दुर्ग

(अ) राव बरसिंह

2. बूँदी दुर्ग

(ब) राणा कुंभा

3. कुंभलगढ़ दुर्ग

(स) शाक्त देवालय

4. महिषासुर मर्दिनी की मूर्तियाँ

(द) वैष्णव देवालय

5. లక్ష్मीनारायण की मूर्ति

(य) महाराजा सूरजमल

उत्तर-1. (य) 2.
(अ) 3.
(ब) 4.
(स) 5.
(द)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न–

प्रश्न 1. शेखावाटी-जयपुर के दो प्रमुख मंदिरों के नाम लिखिए।

उत्तर– (1) खाटूश्याम जी का मंदिर (सीकर)

(2) गोविन्ददेव जी का मंदिर (जयपुर)

प्रश्न 2. मोलेला मूर्तिकला को किसने विश्व स्तर पर पहचान दिलवाई है?

उत्तर– राजसमंद जिले के मोलेला गाँव के कुम्हारों ने मोलेला मूर्तिकला को विश्व स्तर पर पहचान दिलवाई है।

प्रश्न 3. मिट्टी की मूर्तियों को आग में पकाकर बनाने की कला को क्या कहते हैं?

उत्तर– मिट्टी की मूर्तियों को आग में पकाकर बनाने की कला को टेराकोटा कहते हैं।

प्रश्न 4. छतरियाँ तथा देवल से क्या आशय है?

उत्तर– राजस्थान के शासकों, सामंतों, श्रेष्टि वर्ग आदि ने अपने पूर्वजों की स्मृति में जो स्मारक बनाए वे छतरियाँ या देवल के नाम से जाने जाते हैं।

प्रश्न 5. सुरक्षा एवं जीवनोपयोगी साधनों को ध्यान में रखते हुए गाँव कहाँ बसाये जाते थे?

उत्तर– सुरक्षा एवं जीवनोपयोगी साधनों को ध्यान में रखते हुए गाँव प्रायः नदियों, तालाबों व पहाड़ियों या उनके बीच बसाये जाते थे।

प्रश्न 6. सुरक्षा की दृष्टि से दुर्ग कहाँ बनाए जाते थे?

उत्तर– सुरक्षा की दृष्टि से दुर्ग ऊँची पहाड़ियों पर, गहरी नदियों के किनारे अथवा मैदानी भागों में बनाए जाते थे।

प्रश्न 7. चित्तौड़गढ़ दुर्ग कहाँ पर स्थित है?

उत्तर– चित्तौड़गढ़ दुर्ग मत्स्याकार पहाड़ी पर स्थित है, जो दो सुदृढ़ प्राचीरों से घिरा हुआ है।

प्रश्न 8. कुंभलगढ़ के नवीन परिवर्तित दुर्ग को किसने और कब बनवाया?

उत्तर– कुंभलगढ़ के नवीन परिवर्तित दुर्ग को महाराणा कुंभा ने अपने प्रसिद्ध शिल्प सूत्रधार मंडन के नेतृत्व में 1458 ई. में बनवाया।

प्रश्न 9. मेवाड़ के दो प्रमुख मंदिरों के नाम लिखिए।

उत्तर– मेवाड़ के दो प्रमुख मंदिर ये हैं— (1) श्री एकलिंगजी का मंदिर (उदयपुर) (2) श्रीनाथजी का मंदिर (नाथद्वारा)।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. मारवाड़ के चार प्रमुख मंदिरों के नाम लिखिए।

उत्तर– मारवाड़ के प्रमुख मंदिर हैं— (1) देलवाड़ा जैन मंदिर (आबू-पर्वत, सिरोही), (2) रणकपुर जैन मंदिर (पाली), (3) किराडू के मंदिर (बाड़मेर), (4) ओसिया के मंदिर (जोधपुर)।

प्रश्न 2. राजस्थान की चित्रकला की किन्हीं चार शैलियों के नाम लिखिए।

उत्तर– राजस्थान की चित्रकला की चार प्रमुख शैलियाँ ये हैं—(1) जयपुर शैली (2) किशनगढ़ शैली (3) कोटा-बूँदी शैली (4) बीकानेर-जोधपुर शैली।

प्रश्न 3. उदयपुर चित्र शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर—उदयपुर चित्र शैली की विशेषताएँ—

(i) उदयपुर चित्र-शैली के चित्रों में लाल रंग का विशेष रूप से प्रयोग हुआ है।

(ii) इसके चित्रों की पृष्ठभूमि में कदम्ब वृक्ष अधिक मिलते हैं।

(iii) इस शैली में हाथी और चकोर पक्षी अधिक चित्रित किए गए हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न—II

प्रश्न 1. दुर्ग क्यों बनाए जाते थे? राजस्थान के दुर्गों की सुरक्षा हेतु क्या प्रबन्ध किए जाते थे?

उत्तर— दुर्ग प्रायः सामरिक दृष्टि से और सुरक्षा के लिए बनाए जाते थे। राजस्थान के दुर्गों की सुरक्षा हेतु निम्न प्रमुख प्रबंध किए जाते थे—

(1) सुरक्षा की दृष्टि से दुर्ग ऊँची पहाड़ियों पर, गहरी नदियों के किनारे अथवा मैदानी भागों में बनाए जाते थे।

(2) दुर्ग के निकट प्रायः गहरी खाइयाँ बनाई जाती थीं जिनमें पानी भर कर जहरीले जानवर छोड़कर शत्रु को रोका जाता था।

प्रश्न 2. गाँव तथा नगर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर—गाँव—सुरक्षा एवं जीवनोपयोगी साधनों को ध्यान में रखते हुए प्रायः नदियों, तालाबों व पहाड़ियों या उनके बीच गाँव बसाये जाते थे। मकान प्रायः केलू या घास-फूँस से ढके कच्चे मकान होते थे। समृद्ध व्यक्तियों के घर में पाठशाला, ढालिया, पशुओं का छप्पर, अन्न के कोठे आदि होते थे।

नगर—नगर का कस्बा की बसावट सुनियोजित होती थी। नागदा, चीरवा, कल्याणपुर आदि कस्बे, घाटियों, पहाड़ियों या जंगल से घिरे स्थान में बसाए गए। नगर में मन्दिर, महल, भवन, परकोटा, जलाशय, सड़कों की व्यवस्था होती थी, जैसे—डेलवाड़ा, इंगोद आदि। सुरक्षार्थ बसाए गए नगरों में आमेर, बूंदी, अजमेर, उदयपुर, जैसलमेर व कुंभलगढ़ आदि उल्लेखनीय हैं।

प्रश्न 3. दुर्ग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर—दुर्ग—(i) दुर्ग प्रायः सामरिक दृष्टि से और सुरक्षा के लिए बनाए जाते थे। सुरक्षा की दृष्टि से दुर्ग ऊँची पहाड़ियों पर, गहरी नदियों के किनारे अथवा मैदानी भागों में बनाए जाते थे।

(ii) दुर्ग के निकट प्रायः गहरी खाइयाँ बनाई जाती थीं, जिनमें पानी भर कर जहरीले जानवर छोड़कर शत्रु को रोका जाता था। ये परिखा कही जाती थीं।

(iii) दुर्ग शासकों के आवास, सेना व जनसामान्य के लोगों के रहने के लिए सुरक्षित स्थल थे। दुर्ग में कृषि खाद्य भण्डारण, वापी, कुण्ड, जलाशय इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था होने के कारण सैनिक, योद्धा कई महीनों तक दुर्ग के सभी मार्ग बन्द कर शत्रु सेना को छकाते रहते थे।

प्रश्न 4. मंदिर किसे कहते हैं? राजस्थान में मंदिरों का निर्माण कबसे और किनके द्वारा किया जाता रहा है?

उत्तर—मंदिर—मंदिर में देवी-देवता की स्थापना होती है। इनका निर्माण शिल्प शास्त्रों के नियमानुसार होता है।

राजस्थान में मंदिरों का विकास गुप्त काल से माना जाता है जो गुर्जर-प्रतिहार, गुहिल, चन्देल, राठौड़, परमार, सोलंकी, चालुक्य तथा पाल शासकों के समय में भी होता रहा है।

मंदिर प्रायः राजा, महाराजाओं, रानियों, जागीरदारों, श्रेष्ठियों, जनसामान्य के स्त्री-पुरुषों के सहयोग के समय-समय पर निर्मित हुए हैं।

प्रश्न 5. मोलेला मूर्तिकला पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर—मोलेला मूर्तिकला—राजसमंद जिले के मोलेला गांव के कुम्हारों ने मोलेला कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। ये शिव-पार्वती, पनिहारी, भैरुजी, हाथी, गणेश, ऊँटा, घोड़ा, पुतली, हनुमान, तोता, चिड़िया, मोर, बांसुरी वाला, शेर, मगरमच्छ, मूषक आदि लोक देवी-देवताओं एवं जानवरों से सज्जित मिट्टी की फड़ बनाते हैं। यह मोलेला मूर्ति कला के नाम से विख्यात है। मिट्टी की मूर्तियों को आग में पका कर बनाने की कला को टेराकोटा कहते हैं।

प्रश्न 6. हवेलियों का निर्माण कैसे कराया जाता था? राजस्थान की प्रमुख हवेलियों एवं उनकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर—हवेलियाँ—राजस्थान में वास्तु नियमों के अनुरूप हवेलियों का निर्माण हुआ, जिसमें जयपुर की हवेली परम्परा प्रसिद्ध है। शेखावाटी की श्रेष्ठियों ने इस परम्परा को अपनाते हुए हवेलियों का निर्माण कराया।

ये हवेलियाँ अपनी विशालता, अनुपम नक्काशी तथा स्थापत्य कला के अद्भुत उदाहरण हैं।

प्रमुख हवेलियों में रामगढ़, नवलगढ़, मुकुन्दगढ़, मंडावा तथा लक्ष्मणगढ़ की हवेलियाँ अपनी विशालता के लिए, जैसलमेर की सालम सिंह, नथमल तथा पटवों की अनुपम नक्काशी के लिए तथा बीकानेर, फलोदी, भरतपुर, उदयपुर आदि की हवेलियाँ अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 7. छतरियों से आप क्या समझते हैं? राजस्थान की प्रमुख छतरियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर—छतरियाँ—राजस्थान के शासकों सामन्तों, श्रेष्ठि वर्ग आदि ने अपने पूर्वजों की स्मृति में जो स्मारक बनवाए, वे छतरियाँ तथा देवल के नाम से जाने जाते हैं।

अलवर में मूसी महारानी की छतरी, करौली में गोपाल सिंह की छतरी, बूंदी में चौरासी खंभों की छतरी, रामगढ़ में सेठों की छतरी, गेटोर में ईश्वरोंसिंह की छतरी, जोधपुर में जसवंतथड़ा, उदयपुर में आयड़ व जैसलमेर में बड़ा बाग की छतरियों की स्थापत्य कला अत्यधिक मोहक है।

निबन्धात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. अग्रलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए—

(अ) रणथंभौर दुर्ग
(ब) जालोर दुर्ग
(स) आमेर दुर्ग
(द) गागरोन का जल दुर्ग

उत्तर-(अ) रणथंभौर दुर्ग-ऊँची पहाड़ी के शिखर पर रणथंभौर का दुर्गम व दुर्भेद्य दुर्ग स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण चौहान वंशीय शासकों ने करवाया। इस दुर्ग में नौलखा दरवाजा, हम्मीर महल, 32 खंभों की छतरी आदि प्रमुख ऐतिहासिक स्थान हैं। यहाँ त्रिनेत्र गणेश का प्रसिद्ध मंदिर है। वर्तमान में यह दुर्ग तथा आस-पास का वन क्षेत्र 'रणथंभौर बाघ परियोजना' में आ जाने से इसके जीर्णोद्धार, संरक्षण एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

(ब) जालोर दुर्ग-पश्चिमी राजस्थान में सोनगरा चौहानों के शौर्य का प्रतीक जालोर दुर्ग अपनी प्राचीनता व सुदृढ़ता के लिए सुप्रसिद्ध है। पश्चिमी अरावली श्रृंखला की सोनगिरी पहाड़ी पर खड़े इस दुर्ग में चार दरवाजे हैं। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में परमार राजाओं धारावर्ष और मुंज ने करवाया था। दुर्ग में कुएँ, कुण्ड, मंदिर व एक दरगाह भी बनी हुई है।
(स) आमेर दुर्ग-ढूँढ़ाड़ क्षेत्र का आमेर दुर्ग पर्याप्त सुरक्षित रहा है। महाराजा मानसिंह के काल से ही इस दुर्ग की स्थापत्य कला में विशेष उन्नति हुई। यहाँ की स्थापत्य कला में हिन्दू एवं मुगल शैली का सुन्दर समन्वय झलकता है। भवनों में जड़े शीशों की सुन्दरता देखते ही बनती है। दुर्ग के प्रवेश द्वार गणेश गेट पर शिला देवी का प्रसिद्ध मंदिर बना हुआ है।
(द) गागरोन का जल दुर्ग-गागरोन का जल दुर्ग राजस्थान का प्रसिद्ध जल दुर्ग है, जो झालावाड़ जिले में स्थित है। यह दुर्ग दो नदियों काली सिंध और आहु नदी के संगम पर स्थित है। यह दुर्ग अपने प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ रणनीतिक कौशल के आधार पर निर्मित होने के कारण प्रसिद्ध है। यह दुर्ग हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

प्रश्न 2. राजस्थान राज्य के प्रमुख मंदिरों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- राजस्थान राज्य के प्रमुख मंदिर

राजस्थान राज्य के प्रमुख मंदिरों का निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत उल्लेख किया गया है—

(1) मेवाड़ के प्रमुख मंदिर-मेवाड़ के प्रमुख मंदिर हैं—जगदीश मंदिर (उदयपुर), सहस्रबाहु (सास-बहू मंदिर) (नागदा-उदयपुर), अम्बिका मंदिर (उदयपुर), श्रीनाथजी का मंदिर (नाथद्वारा), श्री एकलिंगजी का मंदिर (उदयपुर), ऋषभदेव का जैन मंदिर (उदयपुर), श्रीचारभुजानाथ मंदिर (गढ़बोर, राजसमंद)।

(2) मारवाड़ के प्रमुख मंदिर-मारवाड़ के प्रमुख मंदिर हैं—देलवाड़ा जैन मंदिर (आबू-पर्वत, सिरोही), रणकपुर

जैन मंदिर (पाली), किराडू के मंदिर (बाड़मेर), ओसियां के मंदिर (जोधपुर)।

(3) हाड़ौती के प्रमुख मंदिर-हाड़ौती के प्रमुख मंदिर हैं—हिन्दू मंदिर बाड़ोली (रावतभाटा), शिवमंदिर मण्डेदवारा (बारां), कंसवा मंदिर (कोटा), कमलेश्वर महादेव (बूंदी), सूर्य मंदिर झालरापाटन (झालावाड़) आदि।

(4) शेखावाटी-जयपुर के प्रमुख मंदिर-शेखावाटी-जयपुर के प्रमुख मंदिर हैं—आभानेरी मंदिर (दौसा), खाटूश्यामजी का मंदिर (सीकर) तथा गोविन्ददेवजी का मंदिर (जयपुर) आदि।

प्रश्न 3. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिए—

(अ) चित्तौड़गढ़ दुर्ग (ब) कुंभलगढ़ दुर्ग

उत्तर- (अ) चित्तौड़गढ़ दुर्ग

मध्यमिका नगरी के पतन के बाद चित्रकूट पहाड़ी पर 7वीं सदी में चित्तौड़गढ़ दुर्ग की नींव रखी गई। कालान्तर में प्रतिहार, चालुक्य, परमार तथा सिसोदिया शासकों द्वारा इसका समय-समय पर विकास और आगे विस्तार होता रहा। जिस शासन के अधीन यह दुर्ग रहा उसके शासन के काल के स्थापत्य को यहाँ देखा जा सकता है।

(1) दुर्ग की स्थिति—यह दुर्ग मत्स्याकार पहाड़ी पर स्थित है, जो दो सुदृढ़ प्राचीरों से घिरा हुआ रहा है।

(2) स्थापत्य—दुर्ग में सात प्रवेश द्वार तथा राजमहल, कलात्मक मंदिर, जलाशय आदि बने हुए हैं।

(3) विजय स्तंभ—दुर्ग पर बने प्राचीन तीर्थ-स्थल गौमुख कुण्ड के उत्तर-पूर्वी कोण पर कुंभा ने कीर्ति (विजय) स्तंभ बनवाया जो 47 फीट वर्गाकार व 10 फीट ऊँची जगती (चबूतरा), 122 फीट की ऊँचाई लिए नौ खंडों (मंजिलों) का स्मारक अपने स्थापत्य में बेजोड़ है। नौ खण्डों के विजय स्तंभ में असंख्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं। इसलिए इसे 'भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोष' भी कहा जाता है।

(ब) कुंभलगढ़ दुर्ग

कुंभलगढ़ दुर्ग का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है—

(1) दुर्ग का स्थान—कुंभलगढ़ का दुर्ग छोटी-बड़ी पहाड़ियों से मिलकर बना तथा घाटियों एवं बीहड़ जंगलों से घिरा होने के कारण एकाएक नजर नहीं आता। यह सर्वाधिक सुरक्षित दुर्ग है। इसे कुंभलमेर भी कहा जाता है।

(2) दुर्ग का पुनः निर्माण—दुर्ग के किसी प्राचीन अवशेष पर इसका पुनः निर्माण हुआ। नवीन परिवर्तित स्वरूप प्रदान करने वाले राणा कुंभा थे। इन्होंने अपने प्रसिद्ध शिल्पी सूत्रधार मंडन के नेतृत्व में 1458 ई. में इसे निर्मित करवाया।

(3) दुर्ग का स्थापत्य—(i) नौ पोलों (दरवाजों) से युक्त

दुर्ग के चारों ओर घुमावदार सुदृढ़ एवं चौड़ी दीवार बनी हुई है।

(ii) दीवारों के नीचे गहरी खाइयाँ व खड्ड़े बने हुए हैं जो इसे और अधिक दुर्गम बनाते हैं।

(iii) दुर्ग में समतल भूमि पर निर्मित स्थापत्य कला के नमूने अनूठे हैं, जैसे—नीलकंठ महादेव का मंदिर, यज्ञ वेदी के साथ ही कई जैन मंदिर, झालीबाव (बावड़ी), मामादेव (महादेव) का कुण्ड, कुंभस्वामी नामक विष्णु मंदिर, रायमल के पुत्र पृथ्वीराज का स्मारक आदि।

(iv) दुर्ग का सर्वाधिक उच्च भाग कटारगढ़ कहलाता है, यहीं महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। सीमा और सामरिक दृष्टि से इस दुर्ग का बड़ा महत्त्व रहा है।

प्रश्न 4. राजस्थान में मूर्तिकला पर एक लेख लिखिए।

उत्तर— राजस्थान में मूर्तिकला

गुप्तयुगीन मूर्तिकला-परम्परा का प्रभाव राजस्थान में भी रहा है। राजस्थान में वैष्णव, शैव, शाक्त आदि के साथ जैन धर्म को भी राजकीय संरक्षण प्राप्त था। अतः इनके मंदिर एवं मूर्तियाँ प्रसिद्ध हैं। यथा—

( अ ) मूर्तियों का प्रकार—

( 1 ) शैव मूर्तियाँ— शैव धर्म की प्राचीन परम्परा में शिव के लिंग-विग्रह व मानवीय प्रतिमाएँ पर्याप्त मात्रा में बनाई गईं। इन मूर्तियों में महेश मूर्ति, अर्द्धनारीश्वर, उमा-महेश्वर, हरिहर, अनुग्रह मूर्तियों को अधिक उत्कीर्ण किया है। इन सभी प्रतिमाओं की सुन्दरता अनुपम है।

( 2 ) वैष्णव मूर्तियाँ— वैष्णव मूर्तियों में दशावतार, लक्ष्मीनारायण, गजलक्ष्मी, गरुडासीन विष्णु आदि की मूर्तियों में वैकुण्ठ, अनन्त त्रैलोक्य मोहन को खूबसूरती से उत्कीर्ण किया गया है।

( 3 ) शाक्त मूर्तियाँ— शाक्त देवालयों में महिषासुर मर्दनी की मूर्तियों की प्रधानता है। ओसियाँ, वरमाण (सिरोही), झालरापाटन, चित्तौड़गढ़ आदि में सूर्य प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं।

( 4 ) जैन मूर्तियाँ— सिरोही क्षेत्र में बसन्तगढ़ और आड़ क्षेत्र से प्राप्त धातु की जैन प्रतिमाएँ, मीरपुर, आबू, देलवाड़ा जैन मंदिर, रणकपुर, चित्तौड़गढ़, ओसियाँ की जैन मूर्तियाँ विशेष उल्लेखनीय हैं।

( ब ) मूर्तिकला की विशेषताएँ— मूर्तियों में परिधान, आभूषण, केश-विन्यास तथा विभिन्न मुद्राओं में उत्कीर्णता इस युग की मूर्तिकला की विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 5. राजस्थान की चित्रकला की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर—राजस्थान की चित्रकला का विकास— राजस्थान में ऐतिहासिक काल से ही चित्रकला का सम्पन्न रूप रहा है। इसकी कलात्मकता में अजंता शैली के साथ-साथ मुगल शैली का प्रभाव दिखता है। यह कला राजदरबारों तक ही सीमित थी, परन्तु मुगल साम्राज्य के पतन के साथ ही चित्रकार राज्य संरक्षण प्राप्ति के लिए इधर-उधर चले गए। तब राजस्थानी शासकों ने उन्हें आश्रय दिया। मुगल चित्रकारों ने स्थानीय कलाकारों व चित्र परम्परा के साथ काम कर एक नूतन चित्र-शैली को जन्म दिया जो स्थानीय विशेषताओं के कारण स्वतंत्र शैली के रूप में विकसित हुई।

विभिन्न चित्र-शैलियाँ—

राजस्थान में चित्रकला की विभिन्न शैलियाँ अपनी अलग पहचान बनाती हैं। विभिन्न रियासतों में विकसित चित्रकला अपनी स्थानीय विशेषताओं के कारण वहाँ की शैली बन गई। इन विभिन्न शैलियों को रंग, पृष्ठभूमि, पशु-पक्षियों आदि की दृष्टि से पहचाना जा सकता है यथा—

(1) जयपुर-अलवर चित्र शैली की विशेषताएँ— जयपुर-अलवर शैली के चित्रों की विशेषताएँ हैं—हरे रंग का प्रयोग, चित्रों की पृष्ठभूमि में पीपल अथवा वटवृक्षों का अधिक मिलना तथा पशु-पक्षियों में मोर व घोड़े का अधिक चित्रण किया गया है।

(2) उदयपुर चित्र शैली की विशेषताएँ— उदयपुर चित्र-शैली के चित्रों में लाल रंग का विशेष रूप से प्रयोग हुआ है तथा चित्रों की पृष्ठभूमि में कदमवृक्ष अधिक मिलते हैं। उदयपुर शैली में हाथी और चकोरे पक्षी अधिक चित्रित किए गए हैं।

(3) किशनगढ़ शैली की विशेषताएँ— किशनगढ़ चित्र शैली के चित्रों में सफेद या गुलाबी रंग का विशेष प्रयोग हुआ है। यहाँ के चित्रों की पृष्ठभूमि में केले के पौधे को अधिक चित्रित किया गया है।

(4) कोटा-बूंदी शैली की विशेषताएँ— कोटा-बूंदी शैली के चित्रों में नीले-सुनहरे रंगों का विशेष प्रयोग हुआ है। चित्रों की पृष्ठभूमि में लम्बे खजूर के वृक्ष अधिक दर्शाए गए हैं।

(5) अन्य विशेषताएँ—(i) विभिन्न शैलियों में स्त्री-पुरुषों की आकृतियाँ भी अलग-अलग हैं। किशनगढ़ शैली में 'बणी-ठणी' में नारी सौंदर्य चित्रित किया गया है।

(ii) आमेर (जयपुर), जोधपुर व बीकानेर की शैली पर मुगल प्रभाव स्पष्ट झलकता है। प्रायः शिकार, मनोरंजन की क्रीड़ाओं व उत्सवों के चित्रों के साथ-साथ प्राकृतिक, दैनिक जीवन, रीति-रिवाज एवं परम्पराओं से संबंधित चित्र भी बनाए जाते थे।

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न—कक्षा 8

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