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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Social Science Chapter 4 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठगत प्रश्न

गतिविधि

प्रश्न 1. बैगा औरतें और मर्द जो काम करते हैं, उनको ध्यान से पढ़ें। क्या आपको उनमें कोई क्रम दिखाई देता है? उनके कामों में क्या फर्क थे?

उत्तर- हाँ, हमें उनके कार्यों में समय के आधार पर एक निश्चित क्रम दिखाई देता है। इसी क्रम में उनके मध्य कामों में भी निम्नानुसार अन्तर दिखाई देता है—

(1) चैत में औरतें सामग्री इकट्ठा करने और बचे-खुचे ठूँठों को काटने जाती थीं वे सागो, इमली और मशरूम (कुकुरमुत्ता) आदि फल बीनकर लाती थीं पुरुष बड़े पेड़ों को काटते थे और शिकार पर जाते थे। शिकार पूर्णिमा के समय पूर्व से शुरू होता था। (2) बैसाख में जंगलों को जलाया जाता था। औरतें अधजली लकड़ियों को ईंधन के लिए बीन लेती थीं। आदमी शिकार पर जाते रहते थे लेकिन गाँव से दूर नहीं जाते थे। (3) जेठ में बुआयी होती थी और शिकार चलता रहता था। (4) आषाढ़ से भादों तक मर्द खेतों में काम करते थे। (5) पूस में फटकन किया जाता था। नाच-गाना और शादियाँ भी पूस के महीने में ही होती थीं। (6) माघ में पुरुष नए बेवड़ की तरफ चल देते थे। इस दौरान शिकार व चीजों का संग्रह ही जीने की मुख्य गतिविधि होती थी।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

फिर से याद करें-

प्रश्न 1. रिक्त स्थान भरें :

(क) अंग्रेजों ने आदिवासियों को ........................ के रूप में वर्णित किया।
(ख) झूम खेती में बीज बोने के तरीके को .................... कहा जाता है।
(ग) मध्य भारत में ब्रिटिश भूमि बंदोबस्त के अंतर्गत आदिवासी मुखियाओं को .................... स्वामित्व मिल गया।
(घ) असम के .................... और बिहार की .................... में काम करने के लिए आदिवासी जाने लगे।

उत्तर- (क) जंगली और बर्बर (ख) छितराना, (ग) भूमि का (घ) चाय बागानों, कोयला खदानों।

प्रश्न 2. सही या गलत बताएँ :

(क) झूम काश्तकार जमीन की जुताई करते हैं और बीज रोपते हैं।
(ख) व्यापारी संथालों से कृमिकोष खरीदकर उसे पाँच गुना ज्यादा कीमत पर बेचते थे।
(ग) बिरसा ने अपने अनुयायियों का आह्वान किया कि वे अपना शुद्धिकरण करें, शराब पीना छोड़ दें और डायन व जादू-टोने जैसी प्रथाओं में यकीन न करें।
(घ) अंग्रेज आदिवासियों की जीवन पद्धति को बचाए रखना चाहते थे।

उत्तर- (क) गलत, (ख) सही, (ग) सही, (घ) गलत।

[आइए विचार करें-]

प्रश्न 3. ब्रिटिश शासन में घुमंतू काश्तकारों के सामने कौनसी समस्याएँ थीं?

उत्तर- ब्रिटिश शासन में घुमंतू काश्तकारों के सामने निम्न समस्याएँ थीं-

(1) घुमंतू काश्तकारों के लिए कम पानी तथा सूखी मिट्टी वाली जमीन पर हलों की मदद से खेती करना आसान नहीं था।

(2) हलों की मदद से खेती करने वाले घुमंतू काश्तकारों के खेत अच्छी उपज नहीं दे पाते थे।

(3) अच्छी उपज नहीं होने पर उन्हें लगान चुकाने में दिक्कत आती थी।

प्रश्न 4. औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की ताकत में क्या बदलाव आए?

उत्तर- औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की ताकत में निम्न महत्त्वपूर्ण बदलाव आए-

(1) उन्हें कई-कई गाँवों पर जमीन का मालिकाना हक तो मिला लेकिन उनकी कई शासकीय शक्तियाँ छिन गईं।

(2) उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।

(3) उन्हें अंग्रेज अधिकारियों को नजराना देना पड़ता था। साथ ही, अंग्रेजों के प्रतिनिधि की हैसियत से उन्हें जनजातीय समूहों को अनुशासित रखना पड़ता था।

(4) पहले उनके पास जो ताकत थी अब वह नहीं रही। वे परम्परागत कामों को करने से लाचार हो गए।

प्रश्न 5. दीकुओं से आदिवासियों के गुस्से के क्या कारण थे?

उत्तर- आदिवासी लोग मिशनरी, महाजन, हिंदू भू-स्वामियों तथा अंग्रेज अधिकारियों को दीकु (बाहरी लोग) मानते थे। दीकुओं से आदिवासियों के गुस्से के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-

(1) आदिवासी दीकुओं को अपनी गरीबी तथा दयनीय अवस्था के लिए जवाबदेह मानते थे।

(2) उनका मानना था कि कंपनी की भू-नीतियाँ उनकी पारंपरिक भूमि व्यवस्था को नष्ट कर रही थीं।

(3) हिंदू भूस्वामी तथा महाजन उनकी जमीन हड़पते जा रहे थे।

(4) मिशनरी उनके धर्म तथा पारंपरिक संस्कृति का मजाक उड़ाया करते थे।

प्रश्न 6. बिरसा की कल्पना में स्वर्ण युग किस तरह का था? आपकी राय में यह कल्पना लोगों को इतनी आकर्षक क्यों लग रही थी?

उत्तर- (1) बिरसा की कल्पना में स्वर्ण युग निम्न प्रकार का था-

(i) जिसमें लोग अच्छी जिंदगी जीते थे।

(ii) जब वे नदियों पर बांध बनाते थे तथा प्राकृतिक झरनों का उपयोग करते थे।

(iii) जब वे पेड़-पौधे लगाते थे तथा बाग तैयार करते थे। साथ ही, अपनी आजीविका के लिए खेती करते थे।

(iv) जब लोग ईमानदारी से बिना एक-दूसरे को हानि पहुँचाए, साथ-साथ रहते थे।

(2) बिरसा की यह कल्पना लोगों को इसलिए आकर्षक लग रही थी कि उन्हें विगत समय में मिशनरियों, भू-स्वामियों, महाजनों तथा ब्रिटिश अधिकारियों के शोषण का शिकार होना पड़ा था। ब्रिटिश शोषक नीतियों ने उनसे उनके कई पारंपरिक अधिकार छीन लिए थे।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ-सार

(1) उन्नीसवीं सदी तक देश के विभिन्न भागों में आदिवासी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय थे।

(2) कुछ जनजातीय समुदाय झूम (घुमंतू) खेती करते थे, कुछ आदिवासी समूह शिकारी तथा संग्राहक थे तो कुछ पशुपालक थे। कुछ जनजातीय कबीले ऐसे भी थे जो एक जगह टिक कर खेती करते थे।

(3) औपनिवेशिक शासन से आदिवासियों के समक्ष अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं। उनकी जीवन पद्धति में अनेक बदलाव आये।

(4) अंग्रेजों के आने से आदिवासियों के मुखियाओं की शक्ति कम हो गई।

(5) घुमंतू अथवा झूम काश्तकारों को स्थायी रूप से बसाने की कोशिश की गई। यद्यपि इसमें अंग्रेज पूरी तरह सफल नहीं हुए।

(6) आदिवासियों का जीवन जंगलों से जुड़ा हुआ था किन्तु अंग्रेजों ने सारे जंगलों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इससे आदिवासियों के समक्ष अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं।

(7) उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में आदिवासियों ने अपने शोषण के विरुद्ध अनेक बगावतें कीं।

(8) छोटा नागपुर में बिरसा मुंडा ने मुंडा जनजाति के विद्रोह का नेतृत्व किया।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

[अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न]

बहुचयनात्मक प्रश्न-

1. घुमंतू किसान मुख्यतः रहते थे-

(अ) दक्षिण भारत में
(ब) पश्चिमी भारत में
(स) पूर्वोत्तर और मध्य भारत में
(द) उत्तर भारत में

2. मजदूरी करना अपमान की बात मानी जाती थी-

(अ) बैगा समुदाय में
(ब) खोंड समुदाय में
(स) गोंड समुदाय में
(द) संथालों में

3. मध्य प्रदेश में घुमंतू खेती को कहा जाता है-

(अ) झूम कृषि
(ब) बेवड़
(स) रैगढ़
(द) इनमें से कोई नहीं

4. संथालों ने बगावत की थी—

(अ) 1831-32 में
(ब) 1855 में
(स) 1910 में
(द) 1940 में

5. कुल्लू के गद्दी समुदाय के लोग थे—

(अ) झूम कृषक
(ब) शिकारी तथा संग्राहक
(स) मजदूर
(द) गड़रिये

6. बिरसा किस जनजाति से था—

(अ) गोंड
(ब) संथाल
(स) मुंडा
(द) बैगा

7. दीकू से आशय है—

(अ) आदिवासी
(ब) दीपक
(स) बाहरी व्यक्ति
(द) मुखिया

8. कश्मीर में बकरियाँ पालने वाला आदिवासी समुदाय कौनसा है?

(अ) बकरवाल
(ब) गद्दी
(स) लबाडिया
(द) वन गुज्जर

9. वर्ली विद्रोह कहाँ हुआ था?

(अ) मध्य भारत
(ब) महाराष्ट्र
(स) उड़ीसा
(द) इनमें से कोई नहीं

10. बिरसा राज का प्रतीक था—

(अ) लाल झंडा
(ब) हरा झंडा
(स) केसरिया झंडा
(द) सफेद झंडा

11. 18वीं सदी में किस भारतीय उत्पाद की यूरोपीय बाजारों में अत्यधिक माँग थी?

(अ) सूती वस्त्र
(ब) भारतीय पटसन
(स) कॉफी
(द) रेशम

12. कुछ समय के लिए बिना खेती छोड़ दी जाने वाली जमीन को कहते हैं—

(अ) परती
(ब) रैयत
(स) जोत
(द) भूखण्ड

13. 1940 में महाराष्ट्र में कौनसा जनजातीय विद्रोह हुआ था—

(अ) कॉल विद्रोह
(ब) संथाल विद्रोह
(स) वर्ली विद्रोह
(द) बख्तर विद्रोह

उत्तरमाला—1. (स) 2. (अ) 3. (ब) 4. (ब) 5. (द) 6. (स) 7. (स) 8. (अ) 9. (ब) 10. (द) 11. (द) 12. (अ) 13. (स)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—

1. मुंडा एक जनजातीय समूह है जो .................... में रहता है।

2. .................... खुद को जंगल की संतान मानते थे।

3. पंजाब के पहाड़ों में रहने वाले .................... और आंध्रप्रदेश के .................... समुदाय गाय-भैंस के झुंड पालते थे।

4. .................... अपने भूस्वामियों का भाड़ा चुकाते थे और भूस्वामी .................... को लगान देते थे।

5. कश्मीर के .................... बकरियाँ पालते थे।

6. .................... में आये बदलावों से आदिवासियों के जीवन पर भारी प्रभाव पड़ा।

7. .................... बिरसा राज का प्रतीक था।

8. भारतीय .................... की अच्छी गुणवत्ता सबको आकर्षित करती थी।

उत्तर— 1. छोटा नागपुर 2. बैगा 3. वन गुज्जर, लबाडिया 4. पट्टेदार, सरकार 5. बकरवाल 6. वन कानूनों 7. सफेद झंडा 8. रेशम।

सही या गलत बताइए—

1. बिरसा का जन्म एक संथाल परिवार में हुआ था।

2. आदिवासी समूह जंगलों को अपनी जिन्दगी के लिए बहुत जरूरी मानते थे।

3. आंध्रप्रदेश का लबाडिया समुदाय गाय-भैंस के झुंड पालता था।

4. ब्रिटिश शासन के तहत आदिवासियों के मुखियाओं के कामकाज और अधिकार पूर्ववत् थे।

5. झूम काश्तकारों को स्थायी रूप से बसाने की अंग्रेजों की कोशिश पूर्णतः सफल रही।

6. रेशम के कीट कपास के पादपों पर पाले जाते हैं।

7. झूम खेती को घुमंतू खेती भी कहा जाता है।

8. आदिवासियों के बीच आर्थिक और सामाजिक फर्क होता था।

उत्तर— 1. गलत 2. सही 3. सही 4. गलत 5. गलत 6. गलत 7. सही 8. गलत।

सही मिलान कीजिए—

(अ)

(ब)

1. मुंडा

(i) उड़ीसा

2. खोंड

(ii) महाराष्ट्र

3. गद्दी समुदाय

(iii) छोटा नागपुर

4. बस्तर विद्रोह

(iv) कुल्लू

5. वर्ली विद्रोह

(v) मध्य भारत

उत्तर— 1. (iii) 2. (i) 3. (iv) 4. (v) 5. (ii)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. दीकू किसे कहा जाता था?

उत्तर— जनजातियों द्वारा बाहरी लोगों को दीकू कहा जाता था।

प्रश्न 2. बिरसा मुंडा के अनुयायी दो अन्य जनजातीय समूहों के नाम दीजिए।

उत्तर— (1) संथाल (2) उराँव।

प्रश्न 3. परती भूमि किसे कहते हैं?

उत्तर— ऐसी जमीन जो कुछ समय के लिए बिना खेती छोड़ दी जाये ताकि उसकी मिट्टी पुनः उपजाऊ हो जाये, परती भूमि कहलाती है।

प्रश्न 4. खोंड आदिवासी समुदाय कहाँ रहता है?

उत्तर— खोंड आदिवासी समुदाय उड़ीसा के जंगलों में रहता है।

प्रश्न 5. खोंड अपनी आजीविका कैसे चलाते थे?

उत्तर— खोंड अपनी आजीविका शिकार एवं संग्रहण द्वारा चलाते थे।

प्रश्न 6. जो चीजें वनों में उत्पादित नहीं होती थीं उन्हें आदिवासी किस प्रकार प्राप्त करते थे?

उत्तर— ऐसी चीजों को आदिवासी अदला-बदली अथवा खरीद-फरोख्त द्वारा प्राप्त करते थे।

प्रश्न 7. पशुपालन से आजीविका प्राप्त करने वाली कोई दो जनजातियों के नाम दीजिए।

उत्तर— (1) पंजाब के वन गुज्जर (2) कश्मीर के बकरवाल।

प्रश्न 8. वन विभाग ने वन गांव क्यों बसाए?

उत्तर— रेलवे स्लीपर्स के लिए पेड़ काटने तथा लकड़ी को ढोने हेतु सस्ते श्रम की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वन गांव बसाये गये।

प्रश्न 9. महुआ के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर— महुआ एक फूल है जिसे खाया जाता है या शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

प्रश्न 10. कौनसा आदिवासी समूह रेशम के कीड़े पालता था?

उत्तर— वर्तमान झारखण्ड में स्थित हजारीबाग के आस-पास रहने वाले 'संथाल' आदिवासी रेशम के कीड़े पालते थे।

प्रश्न 11. सोंग्रम संगमा द्वारा विद्रोह कब और कहाँ हुआ?

उत्तर— सोंग्रम संगमा द्वारा विद्रोह सन् 1906 में असम में हुआ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. बिरसा के बारे में क्या कहा समझा जाता था?

उत्तर— (1) लोगों का कहना था कि बिरसा भगवान का अवतार है। वह सभी बीमारियों को दूर कर सकता है। वह अनाज को भी कई गुना कर सकता है।

(2) बिरसा ने स्वयं के बारे में घोषणा की कि ईश्वर ने उसे अपने लोगों के कष्ट को दूर करने तथा उन्हें दीकुओं की गुलामी से मुक्त कराने के कार्य के लिए भेजा।

प्रश्न 2. मुंडा तथा उस क्षेत्र के अन्य जनजातीय लोग ब्रिटिश शासन से क्यों नाराज थे?

उत्तर— (1) वे ब्रिटिश शासन के अंतर्गत हो रहे परिवर्तनों को देखकर तथा इससे होने वाली परेशानियों को झेलकर परेशान थे।

(2) उन्हें लगता था कि उनके जीवन जीने का पारंपरिक तरीका कहीं खो-सा गया है। उनकी आजीविका खतरे में थी। उन्हें लगता था कि उनका धर्म एवं उनकी संस्कृति खतरे में हैं।

प्रश्न 3. वन उत्पादों की आपूर्ति कम होने पर जनजातीय लोग क्या करते थे?

उत्तर— (1) कुछ जनजातीय लोग पड़ोस के गाँवों में जाकर छोटी-मोटी नौकरियाँ कर लेते थे।

(2) कुछ लोग खेतिहर मजदूर के रूप में काम करते थे।

(3) कुछ अन्य लोग बोझा ढोने का काम करते थे या फिर सड़क निर्माण कार्य में मजदूरों के रूप में काम कर लेते थे।

प्रश्न 4. बैगा लोग दूसरों के लिए काम करने से क्यों कतराते थे?

उत्तर— (1) बैगा लोग स्वयं को जंगल की सन्तान मानते थे जिसे केवल वन उत्पादों से अपना जीवन-यापन करना चाहिए था।

(2) बैगा लोगों का यह मानना था कि किसी बैगा के लिए मजदूरी करना अपमान की बात थी।

प्रश्न 5. 19वीं सदी से पूर्व आदिवासी समूहों में प्रचलित आर्थिक गतिविधियाँ कौन-कौनसी थीं?

उत्तर— 19वीं सदी से पूर्व आदिवासी समूहों में प्रचलित गतिविधियाँ थीं— (1) झूम खेती करना (2) पशुओं का शिकार करना (3) वन उत्पादों का संग्रह करना (4) पशुपालन तथा (5) एक ही जगह खेती करना।

प्रश्न 6. बिरसा आंदोलन का क्या उद्देश्य था?

उत्तर— बिरसा आंदोलन का उद्देश्य था—

(1) आदिवासी समाज में सुधार करना।

(2) दीकुओं को जनजातीय क्षेत्रों से बाहर करना।

प्रश्न 7. जनजातीय लोग व्यापारियों तथा महाजनों को अपनी मुसीबत की जड़ क्यों समझते थे?

उत्तर— (1) व्यापारी उन्हें अधिक कीमत पर अपना सामान देते थे जबकि उनसे उनका सामान सस्ती दरों पर प्राप्त करते थे।

(2) सूदखोर महाजन लोग उन्हें ऊँची ब्याज दरों पर ऋण देते थे।

(3) इसके कारण ये लोग कर्ज एवं गरीबी के दलदल में फँस जाते थे। इसी कारण वे व्यापारियों एवं महाजनों को अपनी मुसीबत की जड़ समझते थे।

प्रश्न 8. कुछ पशुपालक जनजातियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— (1) पंजाब की पहाड़ियों में रहने वाले वन गुज्जर तथा आंध्रप्रदेश के लबाड़िया लोग मवेशियों का पालन करते थे।

(2) हिमाचल प्रदेश में कुल्लू के गद्दी समुदाय के लोग गड़रिए थे।

(3) कश्मीर के बकरवाल लोग बकरियों का पालन करते थे।

प्रश्न 9. छोटा नागपुर के मुंडा समाज में भू-स्वामित्व के अधिकारों की चर्चा कीजिए।

उत्तर— (1) मुंडा समाज में जमीन पर पूरे कबीले का अधिकार होता था।

(2) कुल के सभी सदस्यों को उन मूल निवासियों का वंशज माना जाता था जिन्होंने पहली बार वनों को काटकर कृषि भूमि को तैयार किया था।

अतः सभी लोगों का भूमि पर समान अधिकार था।

प्रश्न 10. औपनिवेशिक काल में आरक्षित वनों से क्या आशय है?

उत्तर— (1) औपनिवेशिक काल में आरक्षित वन ऐसे जंगल थे जहाँ अंग्रेजों की जरूरतों के लिए इमारती लकड़ी पैदा होती थी।

(2) इन जंगलों में लोगों को स्वतंत्रतापूर्वक घूमने, झूम खेती करने, फल इकट्ठा करने या पशुओं का शिकार करने की इजाजत नहीं थी।

प्रश्न 11. रेलवे स्लीपर्स हेतु पेड़ काटने तथा लकड़ी ढोने के लिए अंग्रेज अधिकारियों ने मजदूरों का इंतजाम किस प्रकार किया?

उत्तर— अंग्रेज अधिकारियों ने झूम अथवा घुमंतू काश्तकारों को खेती करने के लिए जंगल में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े इस शर्त पर दिये कि गाँवों में रहने वालों को वन विभाग के लिए मजदूरी करनी होगी तथा जंगलों की देखभाल करनी होगी।

इस प्रकार उन्होंने सस्ते श्रम का इंतजाम कर लिया।

प्रश्न 12. घुमंतू किसानों की दो विशेषताएँ बताइये।

उत्तर— (1) घुमंतू किसान मुख्य रूप से पूर्वोत्तर और मध्य भारत की पर्वतीय और जंगली पट्टी में ही रहते थे।

(2) इन समुदायों की जिन्दगी जंगलों में बेरोकटोक आवाजाही और फसल उगाने के लिए जमीन और जंगलों के इस्तेमाल पर आधारित थी।

प्रश्न 13. बिरसा आंदोलन के क्या राजनीतिक उद्देश्य थे?

उत्तर— (1) बिरसा मिशनरियों, महाजनों, हिंदू जमींदारों तथा सरकार को अपने क्षेत्र से बाहर निकाल देना चाहता था। वह नहीं चाहता था कि अंग्रेज अधिकारी वहाँ रहें।

(2) इस आंदोलन का उद्देश्य बिरसा के नेतृत्व में मुंडा राज स्थापित करना था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न-II

प्रश्न 1. औपनिवेशिक वन कानूनों के विरोध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।

उत्तर— (1) अनेक आदिवासी समूहों ने औपनिवेशिक वन कानूनों का विरोध किया। उन्होंने नए नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया और उन्हीं तौर-तरीकों से चलते रहे जिन्हें सरकार गैर-कानूनी घोषित कर चुकी थी।

(2) कई बार उन्होंने खुलेआम बगावत भी कर दी। 1906 में सोंगराम संगमा द्वारा असम और 1930 के दशक में मध्यप्रांत में हुआ वन सत्याग्रह इसी तरह के विद्रोह थे।

प्रश्न 2. काम की तलाश में घर से दूर जाने वाले आदिवासियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— (1) काम की तलाश में घर से दूर जाने वाले आदिवासियों की दशा बहुत खराब थी।

(2) असम के चाय बागानों तथा झारखण्ड की कोयला खदानों में आदिवासियों को बड़ी संख्या में भर्ती किया गया।

(3) इन लोगों को ठेकेदारों की मार्फत भर्ती किया जाता था। ये ठेकेदार उन्हें बहुत कम वेतन देते थे तथा वापस घर भी नहीं लौटने देते थे।

प्रश्न 3. अंग्रेजों की नीतियों एवं अपने शोषण के विरुद्ध आदिवासियों के प्रतिरोध का वर्णन कीजिये।

उत्तर— (1) उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दियों के दौरान देश के विभिन्न भागों में आदिवासी समूहों ने नये कानूनों, अपने व्यवहार पर लगी बंदिशों, नये करों तथा व्यापारियों एवं महाजनों द्वारा किये जा रहे शोषण के विरुद्ध अनेक बार विद्रोह किया।

(2) 1831-32 में कोल आदिवासियों ने, 1855 में संथालों ने, 19वीं सदी के आखिरी दशक में बिरसा मुंडा ने विद्रोह किया। 1910 में मध्य भारत में बस्तर विद्रोह तथा 1940 में महाराष्ट्र में वर्ली विद्रोह हुआ।

प्रश्न 4. अंग्रेजों के आने से पहले आदिवासियों के मुखियाओं के क्या अधिकार थे?

उत्तर— (1) अंग्रेजों के आने से पहले बहुत सारे इलाकों में आदिवासियों के मुखियाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान होता था।

(2) उनके पास औरों से ज्यादा आर्थिक ताकत होती थी तथा वे अपने इलाके पर नियंत्रण रखते थे।

(3) कई जगह उनकी अपनी पुलिस होती थी और वे जमीन एवं वन प्रबन्धन के स्थानीय नियम स्वयं बनाते थे।

प्रश्न 5. बिरसा के सुधारवादी विचारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— (1) बिरसा ने अपने लोगों से शराब छोड़ने को कहा। उसकी राय में शराब न केवल लोगों के वैयक्तिक एवं पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर रही थी बल्कि, समाज भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता था।

(2) बिरसा ने लोगों से अपील की कि वे अपने गाँवों में साफ-सफाई रखें।

(3) बिरसा ने लोगों को डायन तथा जादू-टोने में विश्वास न करने को कहा।

प्रश्न 6. बिरसा आंदोलन का क्या महत्त्व था?

उत्तर- इस आंदोलन के दो महत्त्व थे—

(1) इसने औपनिवेशिक सरकार को जनजातियों के हक में वन अधिनियमों में सुधार करने के लिए मजबूर कर दिया ताकि दीकु लोग जनजातियों की जमीन पर आसानी से कब्जा न कर सकें।

(2) इस आंदोलन से साबित हो गया कि जनजातियाँ अन्याय का विरोध करने एवं औपनिवेशिक सरकार के दमनात्मक एवं शोषक शासन के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट करने में सक्षम हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. घुमंतू या झूम या स्थानान्तरी खेती का वर्णन कीजिए।

उत्तर- (1) झूम खेती प्राय: जंगल में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों पर की जाती थी।

(2) किसान पेड़ों को काट देते थे तथा वहाँ की पूरी वनस्पति को जला देते थे, ताकि कृषि भूमि तैयार हो सके।

(3) घास-फूस तथा वनस्पतियों को जलाने से बनी राख को खेतों में फैला देते थे। वे जमीन की जुताई नहीं करते थे। कुदालों से जमीन की ऊपरी सतह को खुरच देते थे।

(4) बीजों को रोपने के बजाय वे इस जमीन पर बीजों को छितरा देते थे।

(5) एक बार फसल के तैयार होने पर वे उसकी कटाई करते थे तथा इसी तरह की अन्य कृषि भूमि तैयार करने के लिए दूसरी जगहों पर चले जाते थे।

इसी कारण झूम कृषि को स्थानांतरित कृषि (खेती) भी कहा जाता है।

प्रश्न 2. खोंड लोगों की शिकार एवं खाद्य-संग्रह गतिविधि का वर्णन कीजिए।

उत्तर- (1) खोंड लोग उड़ीसा के जंगलों में रहते थे। ये मूलतः शिकारी तथा संग्राहक थे।

(2) इस समुदाय के लोग टोलियाँ बना कर शिकार पर निकलते थे और जो हाथ लगता था उसे आपस में बाँट लेते थे।

(3) वे जंगलों से मिले फल और जड़ें खाते थे। खाना पकाने के लिए वे साल और महुआ के बीजों का तेल इस्तेमाल करते थे।

(4) इलाज के लिए वे बहुत सारी जंगली जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते थे और जंगलों से इकट्ठा हुई चीजों को स्थानीय बाजारों में बेच देते थे।

(5) स्थानीय बुनकरों और चमड़ा कारीगरों को कपड़े व चमड़े की रँगाई के लिए कुसुम और पलाश के फूल उपलब्ध कराते थे।

प्रश्न 3. आदिवासी समुदाय बाजार और व्यापारियों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगा था। रेशम का उदाहरण देकर समझाइये।

उत्तर- आदिवासी समुदाय बाजार और व्यापारियों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगे थे। इसे रेशम के व्यापार के निम्न उदाहरण से समझा जा सकता है—

(1) अठारहवीं सदी में भारतीय रेशम की यूरोपीय बाजारों में भारी माँग थी। भारतीय रेशम की अच्छी गुणवत्ता सबको आकर्षित करती थी अतः ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी इस माँग को पूरा करने के लिए रेशम उत्पादन पर जोर देने लगे।

(2) वर्तमान झारखण्ड में स्थित हजारीबाग के आस-पास रहने वाले संथाल रेशम के कीड़े पालते थे।

(3) रेशम के व्यापारी अपने एजेंटों को भेजकर आदिवासियों को कर्जे देते थे और उनके कृमिकोषों को इकट्ठा कर लेते थे। एक हजार कृमिकोषों के लिए 3-4 रुपए मिलते थे।

(4) इसके बाद इन कृमिकोषों को बर्धवान या गया भेज दिया जाता था जहाँ उन्हें पाँच गुना कीमत पर बेचा जाता था।

(5) इससे निर्यातकों और रेशम उत्पादकों के बीच कड़ी का काम करने वाले बिचौलियों को अत्यधिक मुनाफा होता था तथा रेशम उत्पादकों को बहुत मामूली फायदा ही मिलता था। यह स्थिति लगभग सभी प्रकार के उत्पादों के लिए थी।

अतः सारे आदिवासी समुदाय बाजार और व्यापारी समुदाय बाजार और व्यापारियों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगे थे।

प्रश्न 4. बिरसा मुंडा का प्रारम्भिक जीवन का वर्णन कीजिए।

उत्तर- बिरसा मुंडा का प्रारम्भिक जीवन- 1870 के दशक के मध्य में बिरसा का जन्म छोटा नागपुर के एक मुंडा परिवार में हुआ था। उसके पिता गरीब थे। बिरसा का बचपन भेड़-बकरियाँ चराते, बाँसुरी बजाते और स्थानीय अखाड़ों में नाचते-गाते बीता था। उनकी परवरिश मुख्य रूप से बोहोंडा के आस-पास के जंगलों में हुई। लड़कपन में ही बिरसा ने अतीत में हुए मुंडा विद्रोहों की कहानियाँ सुन ली थीं। उन्होंने कई बार समुदाय के सरदारों (मुखियाओं) को विद्रोह का आह्वान करते देखा था। बिरसा के समुदाय के लोग ऐसे स्वर्ण युग की बात किया करते थे जब मुंडा लोग दीकुओं के उत्पीड़न से पूरी तरह आजाद थे।

बिरसा स्थानीय मिशनरी स्कूल में जाने लगे जहाँ उन्हें मिशनरियों के उपदेश सुनने का मौका मिला। वहाँ उन्होंने सुना कि यदि मुंडा समुदाय के लोग अच्छे ईसाई बन जाएँ।

और अपनी 'खराब आदतें' छोड़ दें तो वे स्वर्ग का साम्राज्य हासिल कर सकते हैं और अपने खोये हुए अधिकार वापस पा सकते हैं। बाद में बिरसा ने एक जाने-माने वैष्णव धर्म प्रचारक के साथ भी कुछ समय बिताया। उन्होंने जनेऊ धारण किया और शुद्धता व दया पर जोर देने लगे।

अपनी किशोरावस्था में बिरसा जिन विचारों के संपर्क में आए, उनसे वह काफी गहरे तौर पर प्रभावित थे।

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