📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
गतिविधि
प्रश्न 1. कल्पना कीजिए कि आप कम्पनी की सेना में सिपाही हैं। आप नहीं चाहते कि आपका भतीजा कम्पनी की फौज में नौकरी करे। आप उसे क्या कारण बतायेंगे?
उत्तर- कम्पनी की फौज में नौकरी न करने हेतु हम उसे निम्न कारण बतायेंगे—
(1) कम्पनी द्वारा दिये जा रहे वेतन-भत्ते बहुत कम हैं।
(2) सेवा शर्तें बहुत कठिन हैं।
(3) कम्पनी के नियम तथा कार्य हमारी धार्मिक भावनाओं तथा आस्था को ठेस पहुँचाते हैं।
(4) भारतीय सिपाहियों के साथ भेदभाव किया जाता है।
गतिविधि
प्रश्न 1. सीताराम और विष्णुभट्ट के मुताबिक लोगों के दिमाग में मुख्य चिंताएँ कौनसी थीं?
उत्तर- (1) सीताराम के अनुसार— मुख्यतः अवध को अंग्रेजों द्वारा हड़प लिए जाने के कारण ही लोग तथा सिपाही नाराज थे। यह खबर कि बन्दूक के कारतूस में गाय एवं सुअर की चर्बी का उपयोग हुआ है, भी सैनिकों के दिमाग में चिन्ता पैदा कर रही थी।
(2) विष्णुभट्ट के अनुसार— लोगों के दिमाग में मुख्य चिन्ता इस बात को लेकर थी कि अंग्रेजों ने हिन्दुओं एवं मुसलमानों का धर्म-भ्रष्ट कर उन्हें ईसाई बनाने की तैयारी कर ली थी।
प्रश्न 2. उनकी राय में शासकों ने क्या भूमिका निभाई? सिपाही क्या भूमिका निभाते दिखाई दे रहे थे?
उत्तर- (1) शासक— शासक लोग सिपाहियों को अंग्रेजों के विरुद्ध भड़का रहे थे तथा उन्हें विद्रोह करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसके लिए वे कई झूठी बातें तथा वायदे किया करते थे ताकि किसी तरह सिपाहियों को उनकी बात का यकीन हो जाए।
(2) सिपाही— दूसरी तरफ सिपाही लोग भी दूसरे बटालियनों के सिपाहियों तक यह खबर पहुँचाने में लगे हुए थे कि अंग्रेज किस तरह हमारे धार्मिक मामलों में दखल कर रहे हैं। वे अपने प्राणों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह की योजनाएँ बनाने में लगे हुए थे।
गतिविधि
प्रश्न 1. मुगल सम्राट विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए क्यों तैयार हुए?
उत्तर-मेरठ पर कब्जा करने के पश्चात् वहाँ के सिपाही दिल्ली की ओर बढ़े। दिल्ली रेजिमेंट के सिपाहियों ने भी विद्रोह कर दिया तथा अपने अफसरों की हत्या कर दी। ये सभी सिपाही लालकिला पहुँच कर जबरन महल में घुस गये तथा बहादुरशाह जफर को उन्होंने अपना नेता घोषित कर दिया। ऐसी स्थिति में अनिच्छा के बावजूद मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए तैयार होना पड़ा।
प्रश्न 2. सिपाहियों के प्रस्ताव को मानने से पहले उन्होंने हालात का जो हिसाब लगाया होगा, उसके बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
उत्तर-(1) बहादुरशाह जानता था कि वह बूढ़ा होने के कारण विद्रोहियों को नेतृत्व प्रदान करने में असमर्थ था।
(2) वह अंग्रेजों की भारी ताकत से पूरी तरह वाकिफ था।
(3) उसे यह भी पता था कि उसके समर्थन की कीमत क्या है। उसे पता था कि सिपाहियों के दिलों में चिंगारी भरी हुई है तथा उसकी आरम्भिक विजय का अर्थ क्या है?
(4) उसने इस आधार पर यह सोचा होगा कि अब कम्पनी के भारतीय सिपाही उठ खड़े होंगे। यदि उन्हें एक सही नेतृत्व मिल जाए तो अभी मौका है कि वे अंग्रेजों को निकाल बाहर करेंगे।
(5) वह जानता था कि वे रियासतें जिनकी सत्ता छीन ली गई है, निश्चित रूप से विद्रोहियों का साथ देंगी।
इस प्रकार सभी हालात का अनुमान लगाकर उसने सिपाहियों के प्रस्ताव को माना होगा।
[गतिविधि ]
प्रश्न-उन स्थानों की सूची बनाएँ जहाँ 1857 के मई, जून और जुलाई महीनों में विद्रोह हुए।
उत्तर-
मई, 1857 — मेरठ, दिल्ली, नसीराबाद।
जून, 1857 — लखनऊ, झांसी, कानपुर, नीमच।
जुलाई, 1857 — दानापुर।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
फिर से याद करें-
प्रश्न 1. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की अंग्रेजों से ऐसी क्या माँग थी जिसे अंग्रेजों ने ठुकरा दिया?
उत्तर-रानी लक्ष्मीबाई चाहती थी कि कम्पनी उसके पति की मृत्यु के बाद गोद लिए गए बेटे को उसके राज्य का वैध उत्तराधिकारी मान ले किन्तु अंग्रेजों ने इसे ठुकरा दिया।
प्रश्न 2. ईसाई धर्म अपनाने वालों के हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजों ने क्या किया?
उत्तर-ऐसे भारतीय जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था उनके हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजों ने 1850 में एक नया कानून बनाया जिसके अनुसार उन्हें अपने पूर्वजों की सम्पत्ति प्राप्त करने का अधिकार दे दिया गया।
प्रश्न 3. सिपाहियों को नए कारतूसों पर क्यों ऐतराज था?
उत्तर-बन्दूक में कारतूस लगाने के लिए उसके ऊपर लगी एक पट्टी को दाँत से काटना पड़ता था। ऐसी खबर थी कि उस पट्टी को बनाने में गाय एवं सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी चीजों के उपयोग से हिन्दू एवं मुसलमान सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती थी। अतः उन्हें कारतूसों पर ऐतराज था।
प्रश्न 4. अन्तिम मुगल बादशाह ने अपने आखिरी साल किस तरह बिताए?
उत्तर-अन्तिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर ने अपने अन्तिम दिन रंगून (आधुनिक म्यांमार की राजधानी) की जेल में बिताये। यहीं पर 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
[आइए विचार करें-]
प्रश्न 5. मई, 1857 से पहले भारत में अपनी स्थिति को लेकर अंग्रेज शासकों के आत्मविश्वास के क्या कारण थे?
उत्तर-(1) अंग्रेजों को अपनी श्रेष्ठता तथा सैनिक ताकत पर विश्वास था।
(2) अंग्रेजों की सोच थी कि भारतीय सिपाही उनके विश्वसनीय हैं। उन्हीं के बल पर उन्होंने इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया था।
(3) वे जानते थे कि कई स्थानीय जमींदार एवं राजा उनके शासन का समर्थन करते हैं।
(4) 1857 से पहले उन्होंने इन्हीं सैनिकों की सहायता से कई लड़ाइयाँ जीती थीं तथा कई बड़े विद्रोहों को कुचला था। अतः वे भारत में अपनी स्थिति को लेकर आत्मविश्वास से भरे हुए थे।
प्रश्न 6. बहादुरशाह जफर द्वारा विद्रोहियों को समर्थन देने से जनता और राज-परिवारों पर क्या असर पड़ा?
उत्तर-(1) आम जनता बहादुरशाह जफर द्वारा विद्रोहियों को अपना समर्थन दिए जाने से बहुत उत्साहित हुई। इससे उनमें आशा का संचार हुआ। वे सोचने लगे कि अब शायद अत्याचारी एवं शोषक अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंका जा सकेगा।
(2) विभिन्न ब्रिटिश नीतियों के कारण कई राज-परिवारों को अपनी सत्ता गँवानी पड़ी थी। वे इस खबर से बहुत खुश हुए। उन्होंने भी विद्रोहियों का समर्थन दिया। वे अब सोचने लगे थे कि अगर मुगल बादशाह पुनः शासन स्थापित कर लें तो वे मुगल आधिपत्य में दोबारा अपने इलाकों का शासन बेफिक्र होकर चलाने लगेंगे।
प्रश्न 7. अवध के बागी भूस्वामियों से समर्पण करवाने के लिए अंग्रेजों ने क्या किया?
उत्तर— (1) अंग्रेजों ने वफादार भूस्वामियों के लिए इनामों की घोषणा की। अंग्रेजों ने घोषणा की कि जो भूस्वामी ब्रिटिश राज के प्रति स्वामि-भक्त बने रहेंगे, उन्हें अपनी जमीन पर पारम्परिक अधिकार का उपभोग करने की स्वतन्त्रता बनी रहेगी।
(2) जिन भूस्वामियों ने विद्रोह किया था, उनसे कहा गया कि यदि उन्होंने किसी अंग्रेज की हत्या न की हो और वे आत्मसमर्पण करना चाहते हों तो उनकी सुरक्षा की गारन्टी दी जाएगी तथा जमीन पर उनके दावे तथा अधिकार का विरोध नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सैकड़ों सिपाहियों, विद्रोहियों, नवाबों और राजाओं पर मुकदमे चलाए गए और उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया।
प्रश्न 8. 1857 की बगावत के फलस्वरूप अंग्रेजों ने अपनी नीतियाँ किस तरह बदलीं?
उत्तर— (1) ब्रिटिश संसद ने 1858 में एक कानून पारित किया जिसके द्वारा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के सभी अधिकार ब्रिटिश सरकार के हाथ में आ गए। इस प्रकार ब्रिटिश सरकार का भारत पर प्रत्यक्ष नियन्त्रण हो गया। ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य को भारत मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया और उसे भारत के शासन से संबंधित मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया। उसे सलाह देने के लिए इण्डिया काउन्सिल का गठन किया गया। भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय का ओहदा दिया गया।
(2) भारतीय शासकों को ब्रिटिश शासन के अधीन उनके क्षेत्र पर शासन करने के अधिकार को सुनिश्चित किया गया।
(3) उत्तराधिकारी के रूप में पुत्र को गोद लेने की प्रथा को मंजूरी दी गई।
(4) ब्रिटिश सेना में भारतीय सिपाहियों के अनुपात को कम कर दिया गया, जबकि यूरोपीय सिपाहियों के अनुपात को बढ़ाया गया।
(5) सेना में अब गोरखा, सिख एवं पठानों के अनुपात को बढ़ाया गया।
(6) मुसलमानों की जमीन व सम्पत्ति बड़े पैमाने पर जब्त की गई। उन्हें संदेह एवं शत्रु की दृष्टि से देखा जाने लगा।
(7) अंग्रेजों ने भारतीय रिवाज, धर्म तथा सामाजिक प्रथाओं का सम्मान करने का फैसला किया।
(8) जमींदार एवं भूस्वामियों की रक्षा करने तथा जमीन पर उनके अधिकारों को सुरक्षित करने वाली नीतियाँ बनाई गईं।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
(1) अंग्रेजों की नीतियों से राजाओं, रानियों, किसानों, जमींदारों, आदिवासियों, सिपाहियों, सब पर तरह-तरह से असर पड़े।
(2) अठारहवीं सदी के मध्य से ही राजाओं तथा नवाबों की ताकत छिनने लगी थी।
(3) किसान तथा जमींदार भारी-भरकम लगान से परेशान थे तो सिपाही अपने वेतन-भत्तों तथा सेवा-शर्तों से परेशान थे। जनता अंग्रेजों द्वारा किये जा रहे सुधारों से व्यथित थी।
(4) उक्त परिस्थितियों में मई, 1857 में कम्पनी के शासन के विरुद्ध बगावत शुरू हो गई। मेरठ से शुरू होकर शीघ्र ही बगावत दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, बरेली, फैजाबाद, झाँसी तथा अन्य स्थानों पर फैल गई।
(5) विद्रोहियों ने बहादुरशाह जफर को अपना नेता घोषित कर दिया।
(6) विद्रोही टुकड़ियों से लड़ते हुए अनेक मोर्चों पर अंग्रेजों की हार हुई। किन्तु कम्पनी ने पूरी ताकत से विद्रोह को कुचलने हेतु इंग्लैंड से और फौजी बुलवाये।
(7) सितम्बर, 1857 में दिल्ली पुनः अंग्रेजों के कब्जे में आ गई। बहादुर शाह जफर को आजीवन कारावास की सजा देकर रंगून जेल में भेज दिया गया।
(8) अंग्रेजों ने 1859 के आखिर तक देश पर पुनः पूरा नियन्त्रण कर लिया था। लेकिन इस विद्रोह के बाद उन्होंने अपनी नीतियों में अनेक बदलाव किये।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न—
1. अवध पर सहायक सन्धि थोपी गई थी—
(ब) 1801 में
(द) 1856 में।
2. आखिरी मुगल बादशाह थे—
(ब) अकबर
(द) मुहम्मद शाह।
3. 1857 में सबसे पहले विद्रोह कहाँ प्रारम्भ हुआ?
(ब) दिल्ली
(द) लखनऊ।
4. बैरकपुर में अंग्रेज अफसरों पर हमला करने वाला क्रान्तिकारी था—
(ब) बख्तसिंह
(द) मंगल पाण्डे।
5. कानपुर में क्रान्तिकारियों का नेता था—
(ब) नाना साहब
(द) बख्तसिंह।
6. मध्य भारत के जंगलों में रहते हुए अंग्रेजों के साथ छापामार युद्ध किया—
(ब) लक्ष्मीबाई
(द) नाना साहब।
7. बिहार में विद्रोही सिपाहियों का साथ किसने दिया?
(ब) तांत्या टोपे
(द) लक्ष्मी बाई
8. बहादुरशाह की पत्नी का क्या नाम था?
(ब) बेगम जीनत महल
(द) बेगम हजरत महल
9. बहादुरशाह जफर की मृत्यु कहाँ हुई?
(ब) दिल्ली
(द) अहमदनगर
10. मध्यप्रदेश के मांडला क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
(स) नाना साहब
11. 1857 की क्रांति का कारण नहीं है—
12. 1857 के विद्रोह के शांत होने पर ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 1858 के कानून के अन्तर्गत ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकार हस्तांतरित किए गए—
718 —
उत्तरमाला- 1. (ब) 2. (स) 3. (अ) 4. (द) 5. (ब) 6. (अ) 7. (स) 8. (ब) 9. (अ) 10. (अ) 11. (ब) 12. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. ............... की रियासत अंग्रेजों के कब्जे में जाने वाली आखिरी रियासतों में से थी।
2. बिहार के एक पुराने जमींदार ............... ने विद्रोही सिपाहियों का साथ दिया।
3. सितम्बर, 1857 में ............... दोबारा अंग्रेजों के कब्जे में आ गई।
4. ............... के बाद इतिहास का एक ............... शुरू हुआ।
5. रंगून जेल में नवम्बर, 1862 में ............... ने अन्तिम सांस ली।
6. मार्च, 1858 में ............... अंग्रेजों के कब्जे में चला गया।
7. सैनिकों ने ब्रिटिश कंपनी के विरुद्ध ............... किया।
8. ............... ने 1858 में एक नया कानून पारित किया और ............... के सारे अधिकार ब्रिटिश साम्राज्य के हाथ में सौंप दिए।
उत्तर- 1. अवध, 2. कुँवरसिंह, 3. दिल्ली, 4. 1857, नया चरण 5. बहादुरशाह जफर, 6. लखनऊ, 7. विद्रोह, 8. ब्रिटिश संसद, ईस्ट इण्डिया कम्पनी।
सही या गलत बताइए-
1. अठारहवीं सदी के मध्य से ही राजाओं और नवाबों की ताकत छिनने लगी थी।
2. अंग्रेजों ने 1850 में एक नया कानून बनाया जिससे ईसाई धर्म अपनाना कठिन हो गया।
3. अंग्रेजों को लगता था कारतूसों के मुद्दे पर पैदा हुई उथल-पुथल कुछ समय में शान्त हो जायेगी।
4. 1857 की क्रांति का प्रारंभ आउवा से हुआ।
5. जून 1858 में तांत्या टोपे को मार दिया गया।
6. अंग्रेजों ने वफादार भू-स्वामियों के लिए ईनामों का ऐलान कर दिया।
उत्तर- 1. सही 2. गलत 3. सही 4. गलत 5. गलत 6. सही।
सही मिलान कीजिए-
(अ) | (ब) |
1. 1857 के विद्रोह का शुभारम्भ | (i) लखनऊ |
2. बिरजिस कद्र | (ii) रंगून जेल |
3. रानी अवन्ति बाई लोधी | (iii) मेरठ |
4. कुँवर सिंह | (iv) रामगढ़ |
5. बहादुरशाह जफर | (v) बिहार |
उत्तर- 1. (iii) 2. (i) 3. (iv) 4. (v) 5. (ii)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. अंग्रेजी साम्राज्य में अवध का विलय कब हुआ?
उत्तर- 1856 में।
प्रश्न 2. किस आधार पर अवध का विलय अंग्रेजी साम्राज्य में किया गया?
उत्तर- गवर्नर जनरल डलहौजी ने कहा कि नवाब ने यहाँ कुशासन फैला रखा है तथा समुचित प्रशासन के लिए यहाँ ब्रिटिश शासन का होना जरूरी है।
प्रश्न 3. यह नया कानून कब बनाया गया कि आवश्यकता पड़ने पर सिपाहियों को समुद्र पार भी जाना पड़ सकता है?
उत्तर- सन् 1856 में।
प्रश्न 4. ब्रिटिश भू-नीति का सिपाहियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर- सिपाही नाराज थे क्योंकि उनमें से अधिकतर किसान थे तथा गाँवों में उनका परिवार था।
प्रश्न 5. सिपाही विद्रोह कब शुरू हुआ?
उत्तर- मई, 1857 में।
प्रश्न 6. सिपाही विद्रोह की शुरुआत कहाँ से हुई?
उत्तर- मेरठ से।
प्रश्न 7. नाना साहब कौन था?
उत्तर- नाना साहब स्वर्गीय पेशवा बाजीराव का दत्तक पुत्र था।
प्रश्न 8. नाना साहब का सेनापति कौन था?
उत्तर- नाना साहब का सेनापति तांत्या टोपे था।
प्रश्न 9. राज-शक्ति कम्पनी के हाथ से ब्रिटिश ताज को कब स्थानांतरित की गई?
उत्तर- सन् 1858 में।
प्रश्न 10. 1858 से गवर्नर जनरल को क्या कहा जाने लगा?
उत्तर- वायसराय।
प्रश्न 11. 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय प्रशासन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन क्या था?
उत्तर- 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत पर शासन की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी ले ली थी।
प्रश्न 12. 1857 के बाद से अंग्रेजों द्वारा मुसलमानों के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार क्यों किया जाने लगा?
उत्तर- क्योंकि अंग्रेज मानने लगे थे कि मुस्लिम लोग ही विद्रोह के लिए उत्तरदायी थे।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने हितों की रक्षा हेतु कम्पनी से क्या बातचीत की?
उत्तर- झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने हितों की रक्षा हेतु कम्पनी से माँग की कि कम्पनी उनके पति की मृत्यु के बाद उनके गोद लिए हुए बेटे को राजा मान ले। कम्पनी ने उनकी माँग ठुकरा दी।
प्रश्न 2. नाना साहेब की किस माँग को अंग्रेजों ने ठुकरा दिया था?
उत्तर— नाना साहेब ने कम्पनी से आग्रह किया था कि उनके पिता को जो पेंशन मिलती थी वह उनकी मृत्यु के बाद उन्हें मिलने लगे। लेकिन अंग्रेजों ने उनकी इस माँग को ठुकरा दिया था।
प्रश्न 3. मंगल पाण्डे कौन था? वह क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर— (1) मंगल पाण्डे बैरकपुर में कम्पनी की सेना में सिपाही था।
(2) उसने 29 मार्च, 1857 को बैरकपुर में अपने अफसरों पर हमला किया था जिसके लिए उसे फाँसी पर लटका दिया गया था।
प्रश्न 4. 1857 की क्रान्ति के प्रमुख नायकों के नाम लिखिए। (कोई चार नाम)
उत्तर— (1) मंगल पाण्डे, (2) बहादुरशाह जफर, (3) नाना साहेब, (4) तांत्या टोपे, (5) रानी लक्ष्मीबाई, (6) बेगम हजरत महल, (7) मौलवी अहमदुल्ला शाह, (8) बख्त खान, (9) कुँवरसिंह, (10) बिरजिस कद्र, (11) रानी अवन्तिबाई लोधी आदि।
प्रश्न 5. सन् 1857 के विद्रोह के मुख्य केन्द्रों के नाम लिखिए।
उत्तर— सन् 1857 के विद्रोह के मुख्य केन्द्र थे—
(1) मेरठ, (2) दिल्ली, (3) लखनऊ, (4) कानपुर, (5) फैजाबाद, (6) बरेली, (7) झाँसी।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. देश में मुगल सत्ता को पूरी तरह खत्म करने के लिए अंग्रेजों ने क्या योजना बनाई?
उत्तर— (1) 1849 में गवर्नर लार्ड डलहौजी ने घोषणा की कि बहादुरशाह जफर की मौत के बाद बादशाह के परिवार को लाल किले से निकालकर उसे दिल्ली में कहीं और बसाया जाएगा।
(2) 1856 में लार्ड कैनिंग ने यह फैसला लिया कि बहादुरशाह जफर अन्तिम मुगल सम्राट होगा। उसकी मृत्यु के पश्चात् उसके किसी भी वंशज को सम्राट स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्हें केवल राजकुमारों के रूप में मान्यता दी जायेगी।
प्रश्न 2. 1857 की क्रांति के क्या कारण थे?
उत्तर— 1857 की क्रांति के प्रमुख कारण थे—
(i) राजाओं और नवाबों की छिनती सत्ता;
(ii) किसान और जमींदारों का भारी-भरकम लगान से परेशान होना;
(iii) कम्पनी के भारतीय सिपाहियों की वेतन तथा सेवा शर्तों से असंतुष्टि तथा उनकी धार्मिक भावनाओं व आस्था पर ठेस पहुँचना।
(iv) अंग्रेजों का भारतीयों से घृणा करना।
प्रश्न 3. कम्पनी की सेना में काम कर रहे सिपाहियों के असंतोष के कारण बताइये।
अथवा
1857 की क्रांति में भारतीय सैनिकों की असंतुष्टि के क्या कारण थे?
उत्तर— (1) अधिकतर सिपाही किसान परिवार से आते थे। अत्यधिक लगान तथा कर-वसूली के सख्त तरीकों के कारण किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा था। किसानों का गुस्सा जल्दी ही सिपाहियों में फैल गया।
(2) वे अपने पद, वेतन-भत्तों तथा सेवा-शर्तों से भी नाखुश थे।
(3) अंग्रेजों द्वारा बनाए कुछ नए नियमों के कारण भी उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची थी।
प्रश्न 4. निम्नलिखित ने 1857 के विद्रोह के दौरान क्या प्रतिक्रिया दिखलाई—नाना साहेब, बेगम हजरत महल।
उत्तर— (1) नाना साहेब—उन्होंने अपनी हथियारबंद सेना जुटाई तथा अंग्रेजों को कानपुर से निकाल बाहर किया। उन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि वे मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर के एक गवर्नर हैं।
(2) बेगम हजरत महल—बेगम हजरत महल लखनऊ के पदच्युत नवाब वाजिद अली शाह की विधवा थी। उन्होंने लखनऊ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 5. 1857 का सैनिक विद्रोह जन विद्रोह बन गया। समझाइए।
उत्तर— भारत में सन् 1857 में एक सैनिक विद्रोह हुआ जिसने शीघ्र ही जन विद्रोह का रूप धारण कर लिया। समाज के विभिन्न तबकों को अंग्रेजी शासन से परेशानियाँ थीं तथा वे सब मानते थे कि उनका शत्रु एक ही है। मई, 1857 में शुरू हुए इस विद्रोह ने भारत में कम्पनी का अस्तित्व ही खतरे में डाल दिया था। मेरठ से शुरू होकर शीघ्र ही यह उत्तर भारत के विभिन्न भागों में फैल गया। समाज के विभिन्न तबकों के असंख्य लोग इस विद्रोह से जुड़ गये और इसने एक जन-विद्रोह का रूप कर लिया।
प्रश्न 6. ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के शासन की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी लेने के तहत क्या कार्य किये गये?
उत्तर-(1) ब्रिटिश संसद ने 1858 में एक नया कानून पारित किया जिसके द्वारा ईस्ट इण्डिया के सभी अधिकार ब्रिटिश साम्राज्य के पास आ गये।
(2) ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल के एक सदस्य को भारत मन्त्री के रूप में भारत के शासन से सम्बन्धित मामलों को संभालने का जिम्मा दिया गया।
(3) उसे सलाह देने हेतु इण्डिया काउन्सिल नामक परिषद् का गठन किया।
(4) भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय का ओहदा देकर उसे इंग्लैंड के राजा/रानी का निजी प्रतिनिधि घोषित कर दिया गया।
प्रश्न 7. माना कि आप विद्रोह के दौरान अवध में तैनात ब्रिटिश अधिकारी हैं। विद्रोहियों से लड़ाई की अपनी योजनाओं को गुप्त रखने के लिए आप क्या करेंगे? अपनी योजनाओं को गुप्त रखने के लिये हम-
उत्तर-(1) योजनाओं के केवल विश्वस्त यूरोपीय अधिकारियों से ही साझा करेंगे।
(2) हम कुछ गुप्तचर भी रखेंगे जो हमें हमारी सेना में फैले विरोधियों के बारे में हमें सूचना देंगे।
(3) भारतीय सिपाहियों को योजना की जानकारी नहीं होने देंगे।
(4) विद्रोही नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजेंगे।
(5) योजना की कार्यान्वति पर नजर रखेंगे।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारण बतलाइये।
उत्तर- 1. राजाओं, नवाबों की छिनती सत्ता- भारत में अब भी शासन मुगल बादशाह के नाम पर चलता था। इस नामधारी मुगल सम्राट का सम्मान देश की एकता का प्रतीक था। लेकिन कम्पनी ने मुगलों के शासन को खत्म करने की भी पूरी योजना बना ली थी। कम्पनी द्वारा जारी सिक्कों पर से मुगल बादशाह का नाम हटा दिया गया। 1849 में यह घोषणा कर दी कि बहादुरशाह की मृत्यु के बाद लाल किला खाली करा लिया जायेगा और शाहजादे को इस पदवी के प्रयोग पर रोक लगा दी जायेगी। इससे जनता में असन्तोष भड़क गया। दूसरी तरफ, डलहौजी की विलय नीति के कारण सतारा, झाँसी, नागपुर और दूसरे राज्यों को अंग्रेजों ने हथिया लिया। पेशवा बाजीराव के दत्तक पुत्र नाना साहब की पेंशन बन्द कर दी जिससे नाना साहब और अन्य राज्य अंग्रेजों के शत्रु हो गए।
2. किसान और सिपाही में गुस्सा- गाँवों में किसान और जमींदार भारी भरकम लगान और कर वसूली के सख्त तौर-तरीकों से परेशान थे। बहुत सारे लोग महाजनों से लिया गया कर्ज नहीं लौटा पा रहे थे जिससे उनकी पीढ़ियाँ पुरानी जमीनें उनके हाथ से निकलती जा रही थी। अकाल और गरीबी के कारण भी किसानों में असन्तोष था। ऊपर से जबरन लगान वसूली भी समस्या बन गयी।
कम्पनी के तहत काम करने वाले भारतीय सिपाही अपने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों के कारण परेशान थे। कई नये नियम उनकी धार्मिक भावनाओं और आस्था को ठेस पहुँचाते थे। सिपाही गाँवों के हालात से भी परेशान थे। सेना से हटाये गये सैनिक बेरोजगारी के कारण अंग्रेजों के शत्रु हो गये। भारतीयों को उच्च पद पर नियुक्त नहीं किया गया तथा उन्हें अंग्रेज कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन दिया जा रहा था।
3. सामाजिक और धार्मिक कारण- अंग्रेज भारतीयों को घृणा से देखते थे। भारतीय परम्परावादी लोग शिक्षा के प्रसार से अपना प्रभाव कम होने की शंका करने लगे। हिन्दू और मुसलमानों के रीति-रिवाजों की खुली निन्दा की जाने लगी। भारतीयों को यकीन हो गया कि अंग्रेज उनका धर्म, उनके सामाजिक रीति-रिवाज तथा परम्परागत जीवनशैली को नष्ट कर रहे थे।
उक्त सभी कारणों से देश में 1857 का विद्रोह फैल गया।
प्रश्न 2. अंग्रेजों द्वारा भारतीय समाज में किस तरह के सुधार किए गए? भारतीयों ने इसके प्रति क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
उत्तर- 1. भारतीय समाज में अंग्रेजों द्वारा किये गये सुधार-
(1) सती प्रथा को समाप्त करने के लिए कानून बनाये गए। विधवा पुनर्विवाह को भी अंग्रेजों द्वारा प्रोत्साहित किया गया तथा इस सम्बन्ध में भी कानून पारित किए गए।
(2) शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी भाषा को प्रोत्साहित किया गया।
(3) कम्पनी ने ईसाई मिशनरियों को अपने क्षेत्र में स्वतन्त्रतापूर्वक कार्य करने की स्वीकृति दी। इन्हें जमीन तथा सम्पत्ति खरीदने की भी छूट दी गई।
(4) ईसाई बनने के लिए कानून बनाकर धर्म-परिवर्तन को आसान कर दिया गया। अब जो लोग ईसाई धर्म ग्रहण करते थे उन्हें उनकी पारिवारिक सम्पत्ति में अधिकार प्रदान किया गया।
2. भारतीयों की प्रतिक्रिया-
(1) कई भारतीयों ने यह माना कि अंग्रेज इस प्रकार उनका धर्म भ्रष्ट कर रहे थे। इन कार्यों से वे उनके सामाजिक रीति-रिवाजों तथा जीवन के पारम्परिक स्वरूप को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
(2) दूसरी तरफ ऐसे भारतीय भी थे जो मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में बदलाव चाहते थे।
प्रश्न 3. मेरठ में 1857 के विद्रोह के प्रारम्भ होने की घटना का वर्णन कीजिए।
उत्तर- (1) 29 मार्च, 1857 को मंगल पाण्डे नामक सिपाही ने बैरकपुर छावनी में अपने अफसरों पर हमला कर दिया। इस आरोप में उसे फाँसी पर लटका दिया गया। चंद दिन बाद मेरठ में तैनात कुछ सिपाहियों ने नए कारतूसों के साथ फौजी अभ्यास करने से इनकार कर दिया। सिपाहियों को लगता था कि उन कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी का लेप चढ़ाया गया था। 85 सिपाहियों को नौकरी से निकाल दिया गया। उन्हें अपने अफसरों का आदेश न मानने के आरोप में 10-10 साल की सजा दी गई। यह 9 मई, 1857 की बात है।
(2) मेरठ में तैनात दूसरे भारतीय सिपाहियों की प्रतिक्रिया बहुत जबरदस्त रही। 10 मई को सिपाहियों ने मेरठ की जेल पर धावा बोलकर वहाँ बन्द सिपाहियों को आजाद करा लिया। उन्होंने अंग्रेज अफसरों पर हमला करके उन्हें मार गिराया। उन्होंने बन्दूक और हथियार कब्जे में ले लिए और अंग्रेजों की इमारतों व सम्पत्तियों को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने फिरंगियों के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया।
इस प्रकार मेरठ में विद्रोह का शुभारम्भ हुआ।
प्रश्न 4. मेरठ से दिल्ली तक 1857 के विद्रोह की अग्नि कैसे फैली? दिल्ली से सम्बन्धित कुछ घटनाओं का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर- (1) मेरठ के विद्रोही सिपाही यह सोच रहे थे कि अंग्रेजों के जाने के बाद देश का शासन कौन चलाएगा। उन्होंने मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को देश का शासक बनाने का फैसला किया।
(2) मेरठ के कुछ सिपाहियों की एक टोली 10 मई की रात को घोड़ों पर सवार होकर सुबह जल्दी ही दिल्ली पहुँच गई। जैसे ही उनके आने की खबर फैली, दिल्ली में तैनात टुकड़ियों ने भी बगावत कर दी। यहाँ भी अंग्रेज अफसर मारे गए।
(3) देशी सिपाहियों ने हथियार व गोला-बारूद कब्जे में ले लिया और इमारतों को आग लगा दी। विजयी सिपाही लाल किले की दीवारों के आसपास जमा हो गए। वे बादशाह से मिलना चाहते थे। बादशाह अंग्रेजों की भारी ताकत से दो-दो हाथ करने को तैयार नहीं थे लेकिन सिपाही भी अड़े रहे। आखिरकार वे जबरन महल में घुस गए और उन्होंने बहादुरशाह जफर को अपना नेता घोषित कर दिया।
प्रश्न 5. 1857 की बगावत देश के विभिन्न भागों में किस प्रकार फैली? चर्चा कीजिए।
उत्तर- (1) 1857 के विद्रोह का शुभारम्भ मेरठ से हुआ। यहाँ से यह दिल्ली तक पहुँचा। दिल्ली में अनेक अंग्रेज अफसर मारे गये। दिल्ली पर विद्रोहियों का कब्जा हो गया।
(2) खबर फैलने के साथ ही विद्रोहों का सिलसिला शुरू हो गया। एक के बाद एक हर रेजिमेंट में सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया और वे दिल्ली, कानपुर व लखनऊ जैसे मुख्य बिन्दुओं पर दूसरी टुकड़ियों का साथ देने को निकल पड़े।
(3) उनकी देखा-देखी कस्बों और गाँवों के लोग भी बगावत के रास्ते पर चलने लगे। वे स्थानीय नेताओं, जमींदारों और मुखियाओं के पीछे संगठित हो गये।
(4) स्वर्गीय पेशवा बाजीराव के दत्तक पुत्र नाना साहेब कानपुर के पास रहते थे। उन्होंने सेना इकट्ठा की और ब्रिटिश सैनिकों को शहर से खदेड़ दिया। उन्होंने खुद को पेशवा घोषित कर दिया। उन्होंने ऐलान किया कि वह बादशाह बहादुरशाह जफर के तहत गवर्नर हैं।
(5) लखनऊ में बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोहों को बढ़ावा देने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई भी विद्रोही सिपाहियों के साथ जा मिलीं। उन्होंने नाना साहेब के सेनापति ताँत्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों को भारी चुनौती दी।
(6) मध्यप्रदेश के मांडला क्षेत्र में, राजगढ़ की रानी अवन्ति बाई लोधी ने 4000 सैनिकों की फौज तैयार की और अंग्रेजों के खिलाफ उसका नेतृत्व किया।
(7) विद्रोही टुकड़ियों के सामने अंग्रेजों की संख्या बहुत कम थी। बहुत सारे मोर्चे पर उनकी जबरदस्त हार हुई। इससे लोगों को यकीन हो गया कि अब अंग्रेजों का शासन खत्म हो चुका है। अब लोगों को विद्रोहों में कूद पड़ने का गहरा आत्मविश्वास मिल गया था। खास तौर से अवध के इलाके में चौतरफा बगावत की स्थिति थी।
(8) फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्ला शाह ने भविष्यवाणी की कि अंग्रेजों का शासन जल्दी ही खत्म हो जाएगा। वे अपने समर्थकों की एक विशाल संख्या के साथ अंग्रेजों से लड़ने लखनऊ जा पहुँचे।
(9) बरेली के सिपाही बख्त खान ने लड़ाकों की एक विशाल टुकड़ी के साथ दिल्ली की ओर कूच कर दिया। वह इस बगावत में एक मुख्य व्यक्ति साबित हुए।
(10) बिहार के एक पुराने जमींदार कुँवर सिंह ने भी विद्रोही सिपाहियों का साथ दिया और महीनों तक अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।
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प्रश्न 6. अंग्रेजों ने 1857 के विप्लव पर किस प्रकार काबू पाया?
उत्तर- अंग्रेजों ने 1857 के विप्लव पर दमनात्मक नीति अपनाकर काबू पाया। इसे निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है—
(1) कम्पनी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर विद्रोह को कुचलने हेतु इंग्लैंड से और फौजी मँगवाए, विद्रोहियों को जल्दी सजा देने के लिए नए कानून बनाए और विद्रोह के मुख्य केन्द्रों पर धावा बोल दिया।
(2) सितम्बर, 1857 में दिल्ली दोबारा अंग्रेजों के कब्जे में आ गई। अन्तिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई। उनके बेटों को उनकी आँखों के सामने गोली मार दी गई। बहादुरशाह और उनकी पत्नी बेगम जीनत महल को अक्टूबर, 1858 में रंगून जेल में भेज दिया गया जहाँ नवम्बर, 1862 में बहादुरशाह जफर की मृत्यु हो गई।
(3) मार्च, 1858 में अंग्रेजों का लखनऊ पर भी अधिकार हो गया। जून, 1858 में रानी लक्ष्मीबाई की शिकस्त हुई और उन्हें मार दिया गया। दुर्भाग्यवश ऐसा ही रानी अवन्ति बाई लोधी के साथ हुआ। खेड़ी की शुरुआती विजय के बाद उन्होंने अपने आपको अंग्रेजी फौज से घिरा पाया और वे शहीद हो गईं।
(4) ताँत्या टोपे मध्य भारत के जंगलों में रहते हुए आदिवासियों और किसानों की सहायता से छापामार युद्ध चलाते रहे।
(5) विद्रोही ताकतों की हार से लोगों की हिम्मत टूटने लगी। बहुत सारे लोगों ने विद्रोहियों का साथ छोड़ दिया।
(6) अंग्रेजों ने कूटनीति से काम लेते हुए वफादार भूस्वामियों के लिए इनामों की घोषणा की तथा विद्रोह में भाग लेने वालों को समर्पण करने पर कुछ शर्तों के साथ माफ करने की घोषणा की।
(7) इस सबके बावजूद अंग्रेजों ने सैकड़ों सिपाहियों, विद्रोहियों, नवाबों तथा राजाओं पर मुकदमे चलाए तथा उन्हें फाँसी पर लटका दिया।
इस प्रकार 1859 के आखिर तक अंग्रेजों ने देश पर दोबारा नियन्त्रण स्थापित कर लिया।