📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
गतिविधि
प्रश्न- कल्पना कीजिए कि आप 1850 के दशक में जी रहे हैं। आपने वुड के नीतिपत्र (वुड्स डिस्पैच) के बारे में सुना है। इसके बारे में अपनी प्रतिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर- इसके बारे में मेरी प्रतिक्रियाएँ निम्न प्रकार होंगी—
(1) वुड के नीति पत्र ने प्राच्यवादी ज्ञान को बिल्कुल
नकार दिया तथा उसके स्थान पर यूरोपीय शिक्षा पद्धति को अपनाने से होने वाले व्यावहारिक लाभ का उल्लेख किया। जबकि भारत का प्राच्य ज्ञान बहुत उन्नत था।
(2) मैं उसके उस तर्क का प्रबल विरोध करना चाहूँगा जिसमें उसने कहा कि यूरोपीय शिक्षा का व्यावहारिक लाभ आर्थिक क्षेत्र में भी होगा।
गतिविधि
प्रश्न 1. कल्पना कीजिए कि आप 1850 के दशक में एक गरीब परिवार में पैदा हुए हैं। अब बताएँ कि सरकार द्वारा नियंत्रित पाठशालाओं पर आपकी क्या राय होगी?
उत्तर- 1850 के दशक में सरकार द्वारा नियंत्रित पाठशालाओं पर एक गरीब परिवार के बच्चे के रूप में मेरी राय निम्न प्रकार होगी—
(1) पहले की व्यवस्था में गरीब किसान परिवारों के बच्चे पाठशाला जा सकते थे क्योंकि कक्षा की समय-सारणी में थोड़ी-बहुत ढील थी।
(2) नियमित हाजिरी नई व्यवस्था के अनुशासन की मुख्य माँग है। यह हाजिरी फसल कटने के समय भी जरूरी है जबकि गरीब परिवारों के बच्चों को खेतों में काम करना पड़ता है।
(3) पहले की व्यवस्था में गरीब बच्चों से कम फीस ली जाती थी तथा अधिक आय वालों से अधिक। नई व्यवस्था में सभी की फीस समान होने से गरीब बच्चों को स्कूल फीस चुकाने में दिक्कत होगी।
प्रश्न 2. क्या आपको मालूम है कि प्राथमिक स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों में से लगभग 50 प्रतिशत बच्चे 13-14 साल की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते स्कूल छोड़ चुके होते हैं? क्या आप बता सकते हैं कि इस स्थिति के कारण क्या हैं?
उत्तर- (1) हाँ, मुझे मालूम है कि प्राथमिक स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों में से लगभग 50 प्रतिशत बच्चे 13-14 साल की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते स्कूल छोड़ चुके होते हैं।
(2) स्कूल छोड़ने के निम्नलिखित कारण हैं—
(i) हमारी आबादी का एक-तिहाई हिस्सा आज भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहा है। अतः इन परिवारों के बच्चे आर्थिक अक्षमता के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते।
(ii) जागरूकता के अभाव में कई माता-पिता शिक्षा को उचित महत्त्व नहीं देते।
(iii) सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का अभाव है। अतः इन क्षेत्रों के बच्चे आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
फिर से याद करें-
प्रश्न 1. निम्नलिखित के जोड़े बनाएँ-
1. विलियम जोन्स (a) अंग्रेजी शिक्षा को प्रोत्साहन
2. रवीन्द्रनाथ टैगोर (b) प्राचीन संस्कृतियों का सम्मान
3. टॉमस मैकॉले (c) गुरु
4. महात्मा गांधी (d) प्राकृतिक परिवेश में शिक्षा
5. पाठशालाएँ (e) अंग्रेजी शिक्षा के विरुद्ध
उत्तर- 1. (b); 2. (d); 3. (a); 4. (e); 5. (c)
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से सही या गलत बताएँ-
उत्तर- (क) सही; (ख) गलत; (ग) गलत; (घ) गलत।
आइये विचार करें-
प्रश्न 3. विलियम जोन्स को भारतीय इतिहास, दर्शन और कानून का अध्ययन क्यों जरूरी दिखाई देता था?
उत्तर- निम्न कारणों से विलियम जोन्स को भारतीय इतिहास, दर्शन और कानून का अध्ययन जरूरी दिखाई देता था—
(1) विलियम जोन्स के अनुसार भारत को समझने के लिए यह आवश्यक था कि उन पवित्र तथा कानूनी ग्रंथों को समझा जाए जिनकी रचना प्राचीन काल में की गई थी।
(2) केवल इन्हीं ग्रंथों द्वारा हिंदुओं एवं मुसलमानों के वास्तविक विचारों तथा कानूनों से अवगत हुआ जा सकता था तथा इन्हीं ग्रंथों का नए सिरे से अध्ययन भारत के भविष्य के विकास को आधार प्रदान कर सकता था।
(3) उसका मानना था कि इस कार्य से न केवल ब्रिटिश लोगों को भारतीय संस्कृति से सीखने का अवसर प्राप्त होगा बल्कि भारतीयों को भी अपनी विरासत को फिर से उजागर करने, उसे समझने तथा अपने खोए हुए गौरवपूर्ण अतीत को फिर से प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
(4) उनके अनुसार इस प्रक्रिया में ब्रिटिश लोग भारतीय संस्कृति के अभिभावक तथा मालिक दोनों की भूमिकाएँ निभा रहे थे।
प्रश्न 4. जेम्स मिल और टॉमस मैकॉले ऐसा क्यों सोचते थे कि भारत में यूरोपीय शिक्षा अनिवार्य है?
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उत्तर—(1) जेम्स और थॉमस मैकॉले पूर्व समाजों के ज्ञान को त्रुटिपूर्ण तथा अवैज्ञानिक मानते थे तथा यूरोपीय शिक्षा को वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक मानते थे।
(2) जेम्स मिल का विचार था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावहारिक एवं उपयोगी चीजों का पठन-पाठन होना चाहिए। अतः भारतीयों को उन वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकासों से अवगत कराया जाना चाहिए जिनका उदय पश्चिम में हुआ है।
(3) मैकॉले के अनुसार भारत एक असभ्य देश था, जिसे सभ्य बनाने की जरूरत थी।
(4) मैकॉले के अनुसार, यूरोपीय पुस्तकालय के किसी एक खाने में रखी किताबों में समाहित ज्ञान भारत एवं अरब के संपूर्ण देशी साहित्यों के ज्ञान से भी अधिक है। उसका मानना था कि पूर्वी ज्ञान की कोई भी शाखा उस ज्ञान से अपनी तुलना नहीं कर सकती जिसे इंग्लैंड ने पैदा किया है।
(5) मैकॉले मानते थे कि अंग्रेजी भाषा के ज्ञान से भारतीयों को दुनिया के कुछ बेहतरीन साहित्यों को पढ़ने का सुअवसर प्राप्त होगा। यह उन्हें पश्चिमी विज्ञान एवं दर्शन के विकास से भी अवगत कराएगी।
प्रश्न 5. महात्मा गाँधी बच्चों को हस्तकलाएँ क्यों सिखाना चाहते थे?
उत्तर—(1) महात्मा गाँधी के अनुसार हस्तकलाओं से बच्चों के मस्तिष्क एवं आत्मा का विकास होगा।
(2) उनका सोचना था कि केवल पढ़ना-लिखना अपने-आप में शिक्षा नहीं है। लोगों को अपने हाथ से काम करना सीखना चाहिए, उन्हें विभिन्न निपुणताओं को सीखना चाहिए तथा उन्हें यह जानना चाहिए कि विभिन्न चीजें किस तरह कार्य करती हैं। बच्चे को प्रत्येक प्रक्रिया के लिए 'क्यों' और 'किसलिए' का पता होना चाहिए।
प्रश्न 6. महात्मा गाँधी ऐसा क्यों सोचते थे कि अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों को गुलाम बना लिया है?
उत्तर—महात्मा गाँधी ऐसा इसलिए सोचते थे क्योंकि—
(1) उनका मानना था कि अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों के मस्तिष्क में हीनता की भावना भर दी है।
(2) इसने उन्हें पश्चिमी सभ्यता को सर्वश्रेष्ठ सभ्यता के रूप में देखने की शिक्षा दी है तथा अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की उनकी भावना को नुकसान पहुँचाया है। अतः वे इसे पाप मानते थे।
(3) गाँधीजी के अनुसार अंग्रेजी में दी जा रही शिक्षा ने भारतीयों को अपाहिज बना दिया है। उन्हें अपने सामाजिक परिवेश से काटकर अपनी ही भूमि पर अजनबी बना दिया है।
(4) अंग्रेजी शिक्षित भारतीय स्थानीय संस्कृति से घृणा करते हैं तथा अपनी जनता से जुड़ने के तौर-तरीके भूल चुके हैं।
महात्मा गांधी एक ऐसी शिक्षा चाहते थे जो भारतीयों को अपने सम्मान तथा आत्म-गौरव को पुनः प्राप्त करने में सहायता दे सके।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
(1) अंग्रेज मानते थे कि उन्हें देशी समाज को सभ्य बनाना है और उनके रीति-रिवाजों तथा मूल्य-मान्यताओं को बदलना है।
(2) कम्पनी के अनेक अंग्रेज अधिकारियों का विचार था कि अंग्रेजों को भारत में पश्चिमी ज्ञान की बजाय भारतीय ज्ञान को ही प्रोत्साहन देना चाहिए।
(3) 1781 में अरबी, फारसी, इस्लामिक कानून के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए कलकत्ता में एक मदरसा तथा 1791 में प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों की शिक्षा देने के उद्देश्य से बनारस में हिन्दू कॉलेज की स्थापना की गई।
(4) कम्पनी के अनेक अफसर प्राच्यवादियों के कटु आलोचक थे। इनमें जेम्स मिल तथा मैकॉले मुख्य थे।
(5) 1854 के वुड्स डिस्पैच में भारत में प्राच्यवादी ज्ञान के स्थान पर यूरोपीय शिक्षा अपनाने के लाभ बताये गये।
(6) स्कॉटलैंड के ईसाई प्रचारक विलियम एडम ने देशी स्कूलों की शिक्षा की प्रगति की रिपोर्ट में बतलाया कि शिक्षा देने का इनका तरीका स्थानीय आवश्यकताओं के काफी अनुकूल है।
(7) 1854 के बाद कम्पनी ने देशी शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए नई दिनचर्या तथा नये नियम बनाए।
(8) पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित कुछ भारतीय मानते थे कि पश्चिमी शिक्षा भारत का आधुनिकीकरण कर सकती है। महात्मा गाँधी का कहना था कि औपनिवेशिक शिक्षा ने भारतीयों के मस्तिष्क में हीनता का बोध पैदा कर दिया है।
(9) रवीन्द्रनाथ टैगोर शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक पश्चिमी सभ्यता तथा भारतीय परम्परा के श्रेष्ठ तत्त्वों का सम्मिश्रण चाहते थे।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न—
1. निम्न में से प्राच्यवादी नहीं है—
(ब) विलियम जोन्स
(द) नैथेनियल हॉलहेड
2. बनारस हिन्दू कॉलेज की स्थापना की गई—
(ब) 1791 में
(द) 1830 में
3. मैकॉले के मिनट्स के आधार पर अंग्रेजों का शिक्षा अधिनियम पारित किया गया—
(ब) 1832
(द) 1854
4. शांतिनिकेतन के संस्थापक थे—
(ब) महात्मा गांधी
(द) दयानन्द सरस्वती
5. देशी शिक्षा की विशेषता थी—
6. महात्मा गाँधी के अनुसार शिक्षा किस भाषा में दी जानी चाहिए?
(ब) अंग्रेजी भाषा में
(द) हिन्दी भाषा में
7. शान्ति निकेतन की स्थापना कब हुई?
(ब) सन् 1901 में
(द) सन् 1906 में
8. 1781 में अरबी, फारसी, इस्लामिक कानून के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए मदरसा कहाँ खोला गया?
(ब) दिल्ली
(द) जयपुर
9. अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों को 'अपनी ही भूमि पर अजनबी' बना दिया। किसका मानना था?
(ब) बाल गंगाधर तिलक
(द) महात्मा गाँधी
10. विलियम जोन्स ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा स्थापित सुप्रीम कोर्ट में किस पद पर थे?
(ब) जूनियर जज
(द) मुख्य जज
11. "अंग्रेजी शिक्षा ने हमें गुलाम बना दिया है।" यह कथन है—
(ब) विलियम एडम का
(द) रवीन्द्रनाथ टैगोर का
12. वुड्स डिस्पैच जारी किया—
(ब) विलियम जोन्स ने
(द) कोल ब्रुक ने
उत्तरमाला— 1. (अ) 2. (ब) 3. (स) 4. (स) 5. (द) 6. (स) 7. (ब) 8. (अ) 9. (द) 10. (ब) 11. (अ) 12. (अ)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
1. ....................के माहिर होने के साथ-साथ जोन्स एक ....................भी थे।
2. ....................प्राच्यवादियों के भारी समर्थक थे।
3. ....................के अनुसार शिक्षा केवल भारतीय भाषाओं में ही दी जानी चाहिए।
4. शांतिनिकेतन संस्था ....................में शुरू की गई थी।
5. ....................भारत को असभ्य देश मानते थे।
6. ....................स्कूलों में शिक्षा का तरीका काफी लचीला था।
7. ....................के विवरण के आधार पर ....................का अंग्रेजों का शिक्षा अधिनियम पारित किया गया।
8. एडम ने पाया कि ....................और ....................में एक लाख से ज्यादा पाठशालाएँ हैं।
9. महात्मा गाँधी का कहना था कि औपनिवेशिक ....................ने भारतीयों के मस्तिष्क में ....................का बोध पैदा कर दिया है।
उत्तर— 1. कानून, भाषाविद 2. वारेन हेस्टिंग्स 3. महात्मा गाँधी 4. 1901 5. मैकाले 6. देशी 7. मैकाले, 1835 8. बंगाल, बिहार 9. शिक्षा, हीनता।
सही या गलत बताइए—
1. विलियम जोन्स प्राच्यवादियों के घोर विरोधी थे।
2. मैकाले के मिनट्स के आधार पर 1835 का अंग्रेजों का शिक्षा अधिनियम पारित किया गया।
3. 1854 के नीतिपत्र के बाद अंग्रेजों ने कोई भी कदम नहीं उठाया।
4. महात्मा गाँधी एक ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे जो भारतीयों में प्रतिष्ठा और स्वाभिमान का भाव पुनर्जीवित करे।
5. टैगोर ने कला, संगीत और नृत्य के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा पर भी जोर दिया।
उत्तर— 1. गलत 2. सही 3. गलत 4. सही 5. सही।
सही मिलान कीजिए—
(अ) | (ब) |
हेनरी टॉमस कोलब्रुक | अंग्रेजी शिक्षा का विरोध |
जेम्स मिल | शांति निकेतन |
विलियम एडम | भाषाविद |
रवीन्द्रनाथ टैगोर | स्कॉटलैंड |
महात्मा गाँधी | प्राच्यवादी दृष्टिकोण विरोधी |
उत्तर—
(ब) |
हेनरी टॉमस कोलब्रुक — भाषाविद |
जेम्स मिल — प्राच्यवादी दृष्टिकोण विरोधी |
विलियम एडम — स्कॉटलैंड |
रवीन्द्रनाथ टैगोर — शांति निकेतन |
महात्मा गाँधी — अंग्रेजी शिक्षा का विरोध |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. अंग्रेजों का सांस्कृतिक मिशन क्या था?
उत्तर— देशी समाज को सभ्य बनाना तथा उनके रीति-रिवाजों और मूल्य-मान्यताओं को बदलना अंग्रेजों का सांस्कृतिक मिशन था।
प्रश्न 2. एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल का गठन किसने किया?
उत्तर— (1) विलियम जोन्स, (2) हेनरी टॉमस कोलब्रुक, तथा (3) नैथेनियल हॉलहेड।
प्रश्न 3. सन् 1781 में कलकत्ता में मदरसा क्यों खोला गया था?
उत्तर— अरबी, फारसी, इस्लामिक कानून के अध्ययन को बढ़ावा देते हुए 1781 में कलकत्ता में मदरसा खोला गया था।
प्रश्न 4. अंग्रेजों का शिक्षा अधिनियम कब लागू किया गया?
उत्तर— सन् 1835 में।
प्रश्न 5. 1835 के अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम के पश्चात् किसे 'अंधकार के मंदिर' की संज्ञा दी गई?
उत्तर— प्राच्य संस्थाओं, जैसे कलकत्ता मदरसा तथा बनारस संस्कृत कॉलेज आदि को।
प्रश्न 6. मिशनरियों ने अपना मिशन कहाँ स्थापित किया?
उत्तर— मिशनरियों ने डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनांतर्गत पड़ने वाले क्षेत्र सेरामपुर में अपना मिशन स्थापित किया।
प्रश्न 7. 1830 के दशक में कंपनी ने देशी स्कूलों में शिक्षा की प्रगति पर रिपोर्ट देने का जिम्मा किसे सौंपा?
उत्तर— स्कॉटलैंड के ईसाई प्रचारक विलियम एडम को।
प्रश्न 8. देशी स्कूलों में शिक्षा की दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर— (1) बच्चों की फीस निश्चित नहीं थी। (2) सालाना परीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी।
प्रश्न 9. शांतिनिकेतन में कैसी शिक्षा पर जोर दिया गया?
उत्तर— शांतिनिकेतन में कला, संगीत तथा नृत्य के साथ-
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साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा पर भी जोर दिया गया।
प्रश्न 10. भाषाविद का अर्थ बताइये।
उत्तर- भाषाविद एक ऐसा व्यक्ति होता है जो कई भाषाओं का जानकार और विद्यार्थी होता है।
प्रश्न 11. प्राच्यवादी किसे कहते हैं?
उत्तर- एशिया की भाषा और संस्कृति का गहन ज्ञान रखने वाले लोग प्राच्यवादी कहलाते हैं।
प्रश्न 12. तत्कालीन समय में मुंशी किसे कहते थे?
उत्तर- ऐसा व्यक्ति जो फारसी पढ़ना, लिखना और पढ़ाना जानता हो, तत्कालीन समय में मुंशी कहलाता था।
प्रश्न 13. एशियाटिक रिसर्च नामक शोध पत्रिका का प्रकाशन किसने शुरू किया?
उत्तर- एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल ने एशियाटिक रिसर्च नामक शोध पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।
प्रश्न 14. प्राच्यवाद के दो घोर आलोचकों के नाम लिखिए।
उत्तर- (1) जेम्स मिल (2) थॉमस बैबिंगटन मैकाले।
प्रश्न 15. वुड्स डिस्पैच कब जारी किया गया?
उत्तर- वुड्स डिस्पैच 1854 में जारी किया गया।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. प्राच्यवादी अंग्रेजी अधिकारियों के अनुसार 'देशी जनता' का दिल किस प्रकार जीता जा सकता था?
उत्तर- (1) शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान को प्रोत्साहन दिया जाये।
(2) हिन्दुओं तथा मुसलमानों को वही पढ़ाया जाये जिससे वे पहले से परिचित हैं तथा जिसे वे आदर और महत्त्व देते हैं।
प्रश्न 2. प्राचीन भारतीय ज्ञान के समर्थक चार अंग्रेजों के नाम लिखिये।
अथवा
प्राच्यवादी शिक्षा के समर्थक विद्वानों के नाम बताइये।
उत्तर- (1) विलियम जोन्स (2) हेनरी थॉमस कोलब्रुक (3) नैथेनियल हॉलहेड (4) वारेन हेस्टिंग्स।
प्रश्न 3. 'वुड के डिस्पैच' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- 1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी के लंदन स्थित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने भारतीय गवर्नर जनरल को शिक्षा के विषय में एक नीतिपत्र भेजा। चूँकि यह नीतिपत्र चार्ल्स वुड के नाम से जारी किया गया था, अतः इसे 'वुड के डिस्पैच' के नाम से जाना जाने लगा।
प्रश्न 4. प्राचीन संस्कृत ग्रंथों की शिक्षा देने हेतु अंग्रेजों ने कब, कहाँ और कौनसी संस्था की स्थापना की?
उत्तर- प्राचीन संस्कृत ग्रंथों की शिक्षा देने के लिए सन् 1791 में बनारस में हिन्दू कालेज की स्थापना की गई।
प्रश्न 5. भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर वुड डिस्पैच के कोई तीन प्रभाव बताइये।
उत्तर- वुड डिस्पैच के प्रभाव स्वरूप ही (i) शिक्षा संबंधी समस्त कार्यों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने हेतु सरकारी शिक्षा विभाग की स्थापना की गई, (ii) कलकत्ता, मद्रास और बम्बई में विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई तथा (iii) निम्न स्तर पर स्कूली शिक्षा में भी परिवर्तन किये गए।
प्रश्न 6. जेम्स मिल के शिक्षा सम्बन्धी विचारों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर- जेम्स मिल की राय में शिक्षा के जरिए उपयोगी और व्यावहारिक चीजों का ज्ञान दिया जाना चाहिए। इसलिए भारतीयों को उनके काव्य और धार्मिक साहित्य के बजाय यह पढ़ाना चाहिए कि पश्चिम ने किस तरह की वैज्ञानिक और तकनीकी सफलताएँ अर्जित कर ली हैं।
प्रश्न 7. 19वीं सदी में भारत में सक्रिय ईसाई प्रचारकों द्वारा व्यावहारिक शिक्षा की आलोचना क्यों की गई?
उत्तर- ईसाई प्रचारकों का मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य लोगों के नैतिक चरित्र में सुधार लाना होना चाहिए तथा नैतिकता का उत्थान केवल ईसाई शिक्षा के जरिए ही संभव होगा।
प्रश्न 8. 1813 तक ईस्ट इंडिया कंपनी ईसाई प्रचारकों की गतिविधियों के विरुद्ध क्यों थी?
उत्तर- कम्पनी को डर था कि प्रचारकों की गतिविधि स्थानीय लोगों के बीच असंतोष पैदा करेगी और लोग भारत में अंग्रेजों की उपस्थिति को शक की नजर से देखने लगेंगे। इसलिए कम्पनी उनके विरुद्ध थी।
प्रश्न 9. 1857 के पश्चात् ब्रिटिश सरकार प्रचारक शिक्षा को प्रत्यक्ष सहायता देने में क्यों आनाकानी करने लगी?
उत्तर- 1857 के विद्रोह के पश्चात् ब्रिटिश सरकार को लगता था कि स्थानीय रीति-रिवाजों, व्यवहारों, मान्यताओं और धार्मिक विचारों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ 'देशी' लोगों को भड़का सकती थी। अतः वह प्रचारक शिक्षा को प्रत्यक्ष सहायता देने में आनाकानी करने लगी।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. कोई एक उदाहरण देकर समझाइये कि देशी स्कूलों में शिक्षा स्थानीय आवश्यकताओं के लिए काफी अनुकूल थी।
उत्तर- देशी स्कूलों में शिक्षा स्थानीय आवश्यकताओं के लिए काफी अनुकूल थी। उदाहरणार्थ फसलों की कटाई के समय कक्षाएं बंद हो जाती थीं क्योंकि उस समय गाँव के बच्चे प्राय: खेतों में काम करने चले जाते थे। कटाई और अनाज निकल जाने के बाद पाठशाला दोबारा शुरू हो जाती थी। इसका परिणाम यह था कि साधारण काश्तकारों के बच्चे भी पढ़ाई कर सकते थे।
प्रश्न 2. शिक्षा के बारे में टैगोर तथा महात्मा गांधी के विचारों में क्या अन्तर था?
उत्तर— टैगोर और महात्मा गांधी शिक्षा के बारे में भिन्न मत भी रखते थे। गांधीजी पश्चिमी सभ्यता और मशीनों व प्रौद्योगिकी की उपासना के कट्टर आलोचक थे जबकि टैगोर आधुनिक पश्चिमी सभ्यता और भारतीय परंपरा के श्रेष्ठ तत्त्वों का सम्मिश्रण चाहते थे।
इसलिए उन्होंने शांतिनिकेतन में कला, संगीत और नृत्य के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा पर भी जोर दिया।
प्रश्न 3. वर्नाकुलर से क्या आशय है? बताइये।
उत्तर— वर्नाकुलर शब्द आमतौर पर मानक भाषा के अलग किसी स्थानीय भाषा या बोली के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भारत जैसे औपनिवेशिक देशों में अंग्रेज रोजमर्रा इस्तेमाल की स्थानीय भाषाओं और साम्राज्यवादी शासकों की भाषा अंग्रेजी के बीच फर्क को चिह्नित करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते थे।
निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. विलियम जोन्स कौन था? इसके बारे में लिखिये।
अथवा
विलियम जोन्स पर एक लेख लिखिये।
उत्तर— विलियम जोन्स—विलियम जोन्स सन् 1783 में कलकत्ता आया था। वह ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा स्थापित सुप्रीम कोर्ट में जूनियर जज था। कानून विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वह एक भाषाविद भी था। वह ग्रीक, लैटिन, फ्रेंच, अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि भाषाएँ जानता था।
उसे भारत के प्राचीन ज्ञान से बहुत लगाव था। कलकत्ता आने के बाद उसने संस्कृत विद्वानों से संस्कृत व्याकरण तथा संस्कृत काव्यों का अध्ययन किया। उसने कानून, दर्शन, धर्म, राजनीति, नैतिकता, अंकगणित, चिकित्सा विज्ञान तथा अन्य विज्ञानों की प्राचीन भारतीय पुस्तकों का भी अध्ययन किया।
जोन्स ने हेनरी टॉमस कोलब्रुक तथा नैथेनियल हॉलहेड के साथ मिलकर एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल का गठन किया तथा एशियाटिक रिसर्च नामक शोध पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।
जोन्स की राय थी कि भारत में शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजों को पश्चिमी ज्ञान की बजाय भारतीय ज्ञान को ही प्रोत्साहन देना चाहिए।
प्रश्न 2. 1854 के 'वुड्स डिस्पैच' की मुख्य विशेषताओं की व्याख्या कीजिये।
उत्तर— (1) यह शिक्षा के विषय में एक नोट था। चूँकि यह कम्पनी के नियंत्रक मण्डल के अध्यक्ष चार्ल्स वुड के नाम से जारी किया गया था, अतः इसे 'वुड्स डिस्पैच' कहा जाता है।
(2) इस डिस्पैच में प्राच्यवादी ज्ञान के स्थान पर यूरोपीय शिक्षा अपनाने से होने वाले व्यावहारिक लाभ पर बल दिया गया।
(3) इसके मुताबिक यूरोपीय शिक्षा के माध्यम से भारतीयों को व्यापार-वाणिज्य के विस्तार से होने वाले लाभों को समझने में मदद मिलेगी।
(4) इसके अनुसार यूरोपीय जीवन शैली से परिचित होने पर उनकी रुचि तथा इच्छाओं में बदलाव आएगा तथा ब्रिटिश वस्तुओं की माँग पैदा होगी।
(5) इसके अनुसार यूरोपीय शिक्षा से भारतीयों के नैतिक चरित्र का उत्थान होगा।
(6) इसके अनुसार प्राच्य साहित्य न केवल भयानक त्रुटियों से भरा हुआ था बल्कि यह लोगों में काम के प्रति दायित्व और समर्पण का भाव भी पैदा नहीं कर सकता था।
प्रश्न 3. 1854 के वुड्स डिस्पैच के बाद शिक्षा के क्षेत्र में क्या कदम उठाये गये? वर्णन कीजिये।
उत्तर— 1854 के वुड्स डिस्पैच के बाद शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कदम उठाये गये। इनमें प्रमुख निम्न प्रकार हैं—
(1) सरकारी शिक्षा विभागों का गठन किया गया जिससे शिक्षा सम्बन्धी सभी मामलों पर सरकार का नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
(2) विश्वविद्यालयी शिक्षा की व्यवस्था विकसित करने के लिए भी अनेक कदम उठाये गये।
(3) 1857 में जब मेरठ और दिल्ली में सिपाही विद्रोह कर रहे थे उसी समय कलकत्ता, मद्रास और बम्बई विश्वविद्यालयों की स्थापना की जा रही थी।
(4) वुड्स डिस्पैच के बाद स्कूली शिक्षा प्रणाली में भी अनेक परिवर्तन किये गये।
प्रश्न 4. देशी स्कूलों में शिक्षा की प्रगति पर विलियम एडम की रिपोर्ट के प्रमुख बिन्दु दीजिये।
अथवा
1850 के पहले भारत में देशी स्कूलों में शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर— (1) विलियम एडम के अनुसार बंगाल और बिहार में एक लाख से ज्यादा पाठशालाएँ थीं। ये बहुत छोटे-छोटे केंद्र थे जिनमें आम तौर पर 20 से ज्यादा विद्यार्थी नहीं होते थे। फिर भी, इन पाठशालाओं में पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या काफी बड़ी थी।
(2) ये पाठशालाएँ सम्पन्न लोगों या स्थानीय समुदाय द्वारा चलाई जा रही थीं। कई पाठशालाएँ स्वयं गुरु द्वारा ही प्रारम्भ की गई थीं।
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(3) देशी स्कूलों में शिक्षा का तरीका काफी लचीला था।
(4) बच्चों की फीस निश्चित नहीं थी। यह उनके माँ-बाप की आमदनी से तय होती थी : अमीरों को ज्यादा और गरीबों को कम फीस देनी पड़ती थी।
(5) छपी हुई किताबें नहीं होती थीं, पाठशाला की इमारत अलग से नहीं बनाई जाती थी, बेंच और कुर्सियाँ नहीं होती थीं, ब्लैक बोर्ड नहीं होते थे, अलग से कक्षाएँ लेने, बच्चों की हाजिरी लेने का कोई इंतजाम नहीं होता था, सालाना इम्तिहान और नियमित समय-सारणी जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
(6) कुछ पाठशालाएँ बरगद की छाँव में ही चलती थीं तो कई गाँव की किसी दुकान या मंदिर के कोने में या गुरु के घर पर ही बच्चों को पढ़ाया जाता था।
(7) शिक्षा मौखिक होती थी और क्या पढ़ाना है, यह बात विद्यार्थियों की जरूरतों को देखते हुए गुरु ही तय करते थे।
(8) विद्यार्थियों को अलग कक्षाओं में नहीं बिठाया जाता था। सभी एक जगह, एक साथ बैठते थे। अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के साथ गुरु अलग से बात कर लेते थे।
प्रश्न 5. 1854 के बाद कम्पनी ने देशी शिक्षा व्यवस्था में क्या परिवर्तन किये?
उत्तर— (1) 1854 के बाद कंपनी ने देशी शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने हेतु इसकी मौजूदा व्यवस्था के भीतर बदलाव किया। कंपनी ने एक नई दिनचर्या, नए नियमों और नियमित निरीक्षणों के जरिए पाठशालाओं को और व्यवस्थित किया।
(2) इसके लिए सबसे पहले तो कंपनी ने बहुत सारे पंडितों को सरकारी नौकरी पर रख लिया। इनमें से प्रत्येक पंडित को 4-5 स्कूलों की देखरेख का जिम्मा सौंपा जाता था। पंडितों का काम पाठशालाओं का दौरा करना और वहाँ अध्यापन की स्थितियों में सुधार लाना था।
(3) प्रत्येक गुरु को निर्देश दिया गया कि वे समय-समय पर अपने स्कूल के बारे में रिपोर्ट भेजें और कक्षाओं को नियमित समय-सारणी के अनुसार पढ़ाएँ।
(4) अध्यापन को पाठ्यपुस्तकों पर आधारित किया गया और विद्यार्थियों की प्रगति को मापने के लिए वार्षिक परीक्षाओं की रूपरेखा तैयार की जाने लगी।
(5) विद्यार्थियों से कहा गया कि वे नियमित रूप से शुल्क दें, नियमित रूप से कक्षा में आएँ, तय सीट पर बैठें और अनुशासन के नियमों का पालन करें।
प्रश्न 6. कम्पनी द्वारा देशी शिक्षा व्यवस्था में किये गये परिवर्तनों का क्या प्रभाव पड़ा? वर्णन कीजिये।
उत्तर— कम्पनी द्वारा देशी शिक्षा व्यवस्था में किये गये परिवर्तनों का प्रभाव अग्र प्रकार है—
(1) नए नियमों पर चलने वाली पाठशालाओं को सरकारी अनुदान मिलने लगे। जो पाठशालाएँ नई व्यवस्था के भीतर काम करने को तैयार नहीं थीं उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं दी जाती थी।
(2) जिन गुरुओं ने सरकारी निर्देशों का पालन करने की बजाय अपनी स्वतंत्रता बनाए रखी वे सरकारी सहायता प्राप्त और नियमों से चलने वाली पाठशालाओं के सामने कमजोर पड़ने लगे।
(3) पहले वाली व्यवस्था में गरीब किसानों के बच्चे भी पाठशालाओं में जा सकते थे क्योंकि शालाओं की समय-सारणी काफी लचीली होती थी। किन्तु नई व्यवस्था में अनुशासन की माँग थी कि बच्चे नियमित रूप से स्कूल आएँ। अब कटाई के मौसम में भी बच्चों का स्कूल में आना जरूरी था जबकि उस समय गरीब घरों के बच्चे खेतों में काम करने जाया करते थे। अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं आ पाता था तो इसे अनुशासनहीनता माना जाता था यानी, बच्चा पढ़ना-लिखना ही नहीं चाहता। इस प्रकार गरीब बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा।
प्रश्न 7. टैगोर को शान्तिनिकेतन की स्थापना की प्रेरणा कहाँ से मिली? वे कैसा स्कूल खोलना चाहते थे?
उत्तर— (1) टैगोर को शान्तिनिकेतन की स्थापना की प्रेरणा अपने स्कूल जीवन के अनुभवों से मिली थी।
(2) टैगोर निम्न विशेषताओं वाला स्कूल खोलना चाहते थे—
(i) टैगोर एक ऐसा स्कूल खोलना चाहते थे जहाँ बच्चे खुश रह सकें, जहाँ वे मुक्त और रचनाशील हों, जहाँ वे अपने विचारों और आकांक्षाओं को समझ सकें।
(ii) टैगोर के अनुसार बचपन का समय अपने आप सीखने का समय होता है। वह अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई शिक्षा व्यवस्था के कड़े और बंधनकारी अनुशासन से मुक्त होना चाहिए।
(iii) स्कूल के शिक्षक कल्पनाशील हों, बच्चों को समझते हों और उनके अंदर उत्सुकता, जानने की चाह विकसित करने में मदद दें। टैगोर के मुताबिक, वर्तमान स्कूल बच्चे की रचनाशीलता, चकित होने के उसके स्वाभाविक गुण को मार देते हैं।
(iv) टैगोर का मानना था कि सृजनात्मक शिक्षा को केवल प्राकृतिक परिवेश में ही प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसीलिए उन्होंने कलकत्ता से 100 किलोमीटर दूर एक ग्रामीण परिवेश में अपना स्कूल खोलने का फैसला लिया। उन्हें यह जगह निर्मल शांति से भरी (शान्तिनिकेतन) दिखाई दी जहाँ प्रकृति के साथ जीते हुए बच्चे अपनी स्वाभाविक सृजनात्मक मेधा को और विकसित कर सकते थे।