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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Social Science Chapter 8 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठगत प्रश्न

गतिविधि

प्रश्न- शुरुआत से ही कांग्रेस सभी भारतीय लोगों के हक में और उनकी ओर से बोलने का संकल्प व्यक्त कर रही थी। कांग्रेस ने ऐसा क्यों किया?

उत्तर- कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपने को एक अखिल भारतीय संगठन के रूप में स्थापित करना चाहती थी। इस प्रकार वह देश के सभी वर्गों को एक मंच पर ला सकती थी। अन्यथा, वह अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाती।

गतिविधि

प्रश्न- उपर्युक्त टिप्पणी (स्रोत 2) के आधार पर शुरुआती कांग्रेस के बारे में कौनसी समस्याओं का पता चलता है?

उत्तर- उपर्युक्त टिप्पणी के आधार पर शुरुआती कांग्रेस के बारे में निम्न समस्याओं का पता चलता है—

(1) शुरुआती कांग्रेस के नेता धनी थे और प्राय: अपने व्यक्तिगत कार्यों में व्यस्त रहते थे।

(2) वे संगठन में अधिक रुचि नहीं लेते थे और इसके कार्यों के लिए पर्याप्त समय भी नहीं निकालते थे।

गतिविधि

प्रश्न- पता लगाएं कि पहला विश्व युद्ध किन देशों ने लड़ा था?

उत्तर- प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में 36 देश शामिल थे। इस युद्ध का एक पक्ष मित्र-राष्ट्र की शक्तियाँ थीं जबकि दूसरा पक्ष केन्द्रीय शक्तियाँ थीं।

(1) मित्र-राष्ट्रों का नेतृत्व ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस, रूस एवं इटली कर रहे थे।

(2) केन्द्रीय शक्तियों का नेतृत्व जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी एवं ऑटोमन साम्राज्य के हाथों में था।

गतिविधि

प्रश्न- जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करें। जलियाँवाला बाग क्या है? यहाँ किस तरह के अत्याचार हुए? ये अत्याचार कैसे हुए?

उत्तर- (1) 13 अप्रैल, 1919 के दिन रौलट एक्ट के विरोध में सभा करने हेतु कई लोग अमृतसर नगर के जलियाँवाला बाग में एकत्र हुए। इस बाग में केवल एक ही निकास था।

(2) जनरल डायर ने बिना चेतावनी दिये इन निर्दोष नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। इन नागरिकों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। उनमें से सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई।

(3) नगर में पहले से ही मार्शल लॉ लगा हुआ था। इस कानून का उल्लंघन करने वालों को सबक सिखाने के उद्देश्य से जनरल डायर ने 200 भारतीय तथा 50 अंग्रेज सैनिकों के साथ इस बाग में प्रवेश किया। उन्होंने निकास...

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द्वार को बन्द कर भीड़ पर अंधाधुन्ध गोलियाँ बरसाईं और सैकड़ों लोगों को मार दिया।

गतिविधि

प्रश्न- पाठ्यपुस्तक के स्रोत 4 को पढ़ें। इस रिपोर्ट के मुताबिक लोग महात्मा गाँधी को किस तरह देखते थे? आपकी राय में लोग ऐसा क्यों सोचते थे कि गाँधीजी जमींदारों के विरोधी हैं परन्तु सरकार के विरोधी नहीं हैं? आपकी राय में लोग गाँधीजी के अनुयायी क्यों थे?

उत्तर- इस रिपोर्ट के अनुसार—

(1) लोग महात्मा गाँधी को एक साधु, एक पंडित, इलाहाबाद के एक ब्राह्मण, यहाँ तक कि एक देवता के रूप में देखते थे।

(2) मेरी राय में लोग ऐसा इसलिए सोचते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि उन्होंने ही प्रतापगढ़ में पट्टेदारों की गैर-कानूनी बेदखली रुकवा दी थी।

(3) मेरी राय में लोग गाँधीजी के अनुयायी इसलिए थे क्योंकि वे मानते थे कि गाँधीजी उन्हें मुसीबतों और गरीबी से छुटकारा दिला सकते हैं।

आइए कल्पना करें

प्रश्न- मान लीजिए कि आप भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय हैं। इस अध्याय को पढ़ने के बाद संक्षेप में बताइए कि आप संघर्ष के लिए कौनसे तरीके अपनाते और आप किस तरह का स्वतन्त्र भारत रचते?

उत्तर-

(1) मैं संघर्ष के लिए अहिंसा, सत्याग्रह, नागरिक अवज्ञा, हड़ताल जैसे शान्तिपूर्ण तरीके अपनाता। इसका कारण है कि इन तरीकों से लोग राष्ट्रीय आन्दोलन में अधिक रचनात्मक भूमिका निभा सकते थे। मैं हिंसा का तरीका नहीं अपनाता।

(2) मैं ऐसा स्वतन्त्र भारत रचता जिसमें सभी लोग आत्म-सम्मान के साथ जीवन-यापन करते। देश में गरीबी का नामोनिशान नहीं होता। सभी धर्मों के लोग सहिष्णुता के साथ-साथ रहते, जातिगत भेदभाव भी खत्म करता। इसके साथ मेरे स्वतन्त्र भारत में भ्रष्टाचार के लिए भी कोई जगह नहीं होती।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

फिर से याद करें-

प्रश्न 1. 1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से क्यों असन्तुष्ट थे?

उत्तर- 1870 से 1880 के दशकों में लोगों की ब्रिटिश शासन से असन्तुष्टि के मुख्य कारण निम्न थे—

(1) 1878 में आर्म्स एक्ट पारित किया गया जिसके जरिए भारतीयों द्वारा अपने पास हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया।

(2) सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराने के उद्देश्य से 1878 में ही वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट भी पारित किया गया।

(3) 1883 में सरकार ने इल्बर्ट बिल लागू करने का प्रयास किया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया था कि भारतीय न्यायाधीश भी ब्रिटिश या यूरोपीय व्यक्तियों पर मुकदमे चला सकते हैं। परन्तु जब अंग्रेजों के विरोध की वजह से सरकार ने यह विधेयक वापस ले लिया तो भारतीयों ने इस बात का काफी विरोध किया।

(4) 1870 और 1880 के दशकों में अनेक राजनीतिक संगठन अस्तित्व में आए जिन्होंने कई मुद्दों को उठाकर जनता को उनसे अवगत कराया।

प्रश्न 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किन लोगों के पक्ष में बोल रही थी?

उत्तर- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के किसी एक वर्ग या समुदाय के पक्ष में नहीं बल्कि विभिन्न समुदायों के सभी लोगों के पक्ष में बोल रही थी। कांग्रेस गरीबों, काश्तकारों, मजदूरों, सैनिकों, वनवासियों, पेशेवर समूहों जमींदारों तथा उद्योगपतियों सभी के पक्ष में बोल रही थी।

प्रश्न 3. पहले विश्व युद्ध से भारत पर कौनसे आर्थिक असर पड़े?

उत्तर- पहले विश्व युद्ध से भारत पर निम्नलिखित आर्थिक असर पड़े—

(1) इस युद्ध की वजह से ब्रिटिश भारत सरकार के रक्षा व्यय में भारी वृद्धि हो गई थी। इस खर्चे को निकालने के लिए सरकार ने निजी आय और व्यावसायिक मुनाफे पर कर बढ़ा दिया था।

(2) सैनिक व्यय में वृद्धि तथा युद्धक सामग्री की आपूर्ति की वजह से जरूरी चीजों की कीमतों में भारी उछाल आया और आम लोगों की जिन्दगी मुश्किल होती गई।

(3) इस युद्ध ने औद्योगिक वस्तुओं; जैसे—जूट के बोरे, कपड़े, रेल की पटरियाँ आदि की माँग बढ़ा दी और अन्य देशों से भारत आने वाले आयात में कमी ला दी थी।

(4) व्यावसायिक समूहों ने युद्ध से बेहिसाब मुनाफा कमाया। युद्ध के दौरान भारतीय उद्योगों का विस्तार हुआ और भारतीय व्यावसायिक समूह विकास के लिए अधिक अवसरों की माँग करने लगे।

प्रश्न 4. 1940 के मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में क्या माँग की गई थी?

उत्तर- 1940 के मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में देश के पश्चिमोत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में मुस्लिमों के लिए स्वतन्त्र राज्यों की माँग की गई थी।

आइए विचार करें—

प्रश्न 5. मध्यममार्गी कौन थे? वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ किस तरह का संघर्ष करना चाहते थे?

उत्तर— (1) कांग्रेस के वे राजनेता मध्यममार्गी कहलाते थे, जो अपने उद्देश्यों एवं तरीकों में मध्यममार्गी थे।

(2) वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष करना चाहते थे। वे प्रतिवेदन देना, निन्दा करना, जनमत बनाना, प्रार्थना-पत्र देना, अखबारों द्वारा सन्देश देना आदि कार्यों द्वारा संघर्ष करना चाहते थे। इसे निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है—

(i) उन्होंने सरकार और प्रशासन में भारतीयों को और ज्यादा जगह दिए जाने के लिए आवाज उठाई।

(ii) उनका आग्रह था कि विधान परिषदों में भारतीयों को ज्यादा जगह दी जाए, परिषदों को ज्यादा अधिकार दिए जाएँ और जिन प्रान्तों में परिषदें नहीं हैं वहाँ उनका गठन किया जाए।

(iii) उनकी माँग थी कि सरकार में भारतीयों को भी ऊँचे पद दिए जाएँ।

(iv) मध्यममार्गी राजनेता सरकार को भारतीयों की भावना से अवगत कराना चाहते थे।

प्रश्न 6. कांग्रेस में आमूल परिवर्तनवादी की राजनीति मध्यममार्गी की राजनीति से किस तरह भिन्न थी?

उत्तर— कांग्रेस में आमूल परिवर्तनवादी की राजनीति मध्यममार्गी की राजनीति से निम्नलिखित प्रकार से भिन्न थी—

(1) आमूल परिवर्तनवादी ज्यादा आमूल परिवर्तनवादी उद्देश्य और पद्धतियों के अनुरूप काम करते थे; जबकि मध्यममार्गी अपने उद्देश्यों एवं तरीकों में मध्यममार्गी थे।

(2) आमूल परिवर्तनवादियों ने 'निवेदन की राजनीति' के लिए नरमपंथियों की आलोचना की और आत्मनिर्भरता तथा रचनात्मक कामों के महत्त्व पर जोर दिया; जबकि मध्यममार्गी निवेदन की राजनीति करते थे।

(3) आमूल परिवर्तनवादियों का मानना था कि लोगों को स्वराज के लिए अवश्य लड़ाई करनी चाहिए; जबकि मध्यममार्गी सरकार को भारतीयों की भावना से अवगत कराना चाहते थे।

(4) आमूल परिवर्तनवादी सरकार के नेक इरादों पर नहीं बल्कि अपनी ताकत पर विश्वास करते थे; जबकि मध्यममार्गियों के विचार में अंग्रेज न्याय एवं स्वतन्त्रता के आदर्शों का सम्मान करते थे। इसलिए वे भारतीयों की उचित माँगों को अवश्य मान जाएँगे।

प्रश्न 7. चर्चा करें कि भारत के विभिन्न भागों में असहयोग आन्दोलन ने किस-किस तरह के रूप ग्रहण किए? लोग गाँधीजी के बारे में क्या समझते थे?

उत्तर— (1) नागपुर अधिवेशन में पारित असहयोग आन्दोलन के प्रस्ताव का अर्थ-अंग्रेजी शासन के साथ सहयोग न करने अर्थात् असहयोग करने का आन्दोलन था। इसमें हजारों विद्यार्थियों ने स्कूल कॉलेज छोड़ दिए, अनेक वकीलों ने वकालत छोड़ दी, अंग्रेजों द्वारा दी गई उपाधियों को वापस लौटा दिया गया, विधानमण्डल का बहिष्कार किया गया तथा जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई।

(2) अंग्रेजी शासन के प्रति असहयोग करने के अतिरिक्त भी लोगों ने गाँधीजी के आह्वान का अपने हिसाब से अर्थ निकाला। अतः देश के विभिन्न भागों में असहयोग आन्दोलन ने अलग-अलग रूप ग्रहण किये—

(i) खेड़ा, गुजरात में पाटीदार किसानों ने अंग्रेजों की ऊँची भू-राजस्व माँग के विरुद्ध अहिंसक मुहिम चला दी।

(ii) तटीय आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु के भीतरी भागों में शराब की दुकानों की घेराबन्दी की गई।

(iii) आन्ध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में आदिवासी और गरीब किसानों ने बहुत सारे 'वन सत्याग्रह' किए।

(iv) पंजाब में सिखों के अकाली आन्दोलन ने अपने गुरुद्वारों में अंग्रेजों की सहायता से जमे बैठे भ्रष्ट महंतों को हटाने के लिए आन्दोलन चलाया।

(v) असम में चाय बागान मजदूरों ने अपनी तनख्वाह में इजाफे की माँग शुरू कर दी।

(3) लोग गाँधीजी को एक तरह का मसीहा, एक ऐसा व्यक्ति मानने लगे थे जो उन्हें मुसीबतों और गरीबी से छुटकारा दिला सकता है। किसानों को लगता था कि गाँधीजी उन्हें जमींदारों के खिलाफ संघर्ष में मदद देंगे। खेतिहर मजदूरों को यकीन था कि वे उन्हें जमीन दिला देंगे।

प्रश्न 8. गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर— गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला इसलिए लिया कि उनके विचार में नमक पर टैक्स वसूलना पाप है; क्योंकि यह हमारे भोजन का बुनियादी हिस्सा होता है। इसे अमीर और गरीब समान मात्रा में प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 9. 1937-47 की उन घटनाओं पर चर्चा करें जिनके फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ।

उत्तर— 1937-47 की घटनाएँ जिनके फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ, निम्न प्रकार हैं—

(1) 1930 के दशक में मुस्लिम जनता को अपने साथ लामबंद करने में कांग्रेस की विफलता ने लीग को अपना सामाजिक जनाधार फैलाने में मदद की।

(2) हिन्दू-मुस्लिम दंगे व 1937 के प्रांतीय चुनाव इसके ज्यादा बड़े कारण रहे।

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(3) 1940 के दशक के शुरुआती सालों में जिस समय कांग्रेस के ज्यादातर नेता जेल में थे, उस समय लीग ने अपना प्रभाव फैलाने के लिए तेजी से प्रयास किए।

(4) दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए कांग्रेस और लीग से बातचीत शुरू कर दी। यह वार्ता असफल रही क्योंकि लीग का कहना था कि उसे भारतीय मुसलमानों का एकमात्र प्रतिनिधि माना जाए। कांग्रेस ने इस दावे को मंजूर नहीं किया।

(5) 1946 के प्रान्तीय चुनावों में लीग को मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर बेजोड़ सफलता मिली। इससे लीग 'पाकिस्तान' की माँग पर कायम रही।

(6) मार्च, 1946 में ब्रिटिश कैबिनेट मिशन कांग्रेस और मुस्लिम लीग को प्रस्ताव के कुछ खास प्रावधानों पर सहमत नहीं करा सका।

(7) लीग ने 16 अगस्त, 1946 को 'प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस' मनाने का आह्वान किया। इसी दिन कलकत्ता में दंगे भड़क उठे और मार्च, 1947 तक हिंसा उत्तरी भारत के विभिन्न भागों में फैल गई।

अन्ततः भारत-विभाजन के फलस्वरूप एक नए देश—पाकिस्तान—का जन्म हुआ।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ-सार

(1) भारत में 1850 के बाद बने राजनीतिक संगठनों में राष्ट्रवादी चेतना गहराई से दिखाई देने लगी थी। 1870 से 1880 के दशकों में ब्रिटिश शासन के प्रति असन्तोष और ज्यादा गहरा हुआ था।

(2) पूना सार्वजनिक सभा, इण्डियन एसोसिएशन, मद्रास महाजन सभा, बॉम्बे रेजीडेंसी एसोसिएशन तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आदि प्रमुख राजनीतिक संगठन थे।

(3) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में बम्बई में हुई थी। अपने पहले बीस वर्षों में कांग्रेस अपने उद्देश्यों और तरीकों के लिहाज से 'मध्यमार्गी' पार्टी थी।

(4) विपिनचन्द्र पाल, बाल गंगाधर तिलक तथा लाला लाजपत राय जैसे नेताओं ने 'निवेदन की राजनीति' के लिए नरमपंथियों की आलोचना की और आत्मनिर्भरता तथा रचनात्मक कामों के महत्त्व पर जोर दिया।

(5) 1905 में वायसराय कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया। इससे देश भर में गुस्से की लहर फैल गई।

(6) 1915 में गाँधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। 1919 में उन्होंने रौलट कानून के खिलाफ सत्याग्रह का आह्वान किया।

(7) 1920 में गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन चलाया जिसे 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद वापस ले लिया।

(8) 1930 में गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया। अप्रैल, 1930 में गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए दाण्डी यात्रा की।

(9) भारतीय जनता के साझा संघर्षों के चलते 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट में प्रान्तीय स्वायत्तता का प्रावधान किया गया।

(10) 1942 में गाँधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ 'भारत छोड़ो आन्दोलन' चलाया तथा भारतीय जनता को 'करो या मरो' का आह्वान किया। अंग्रेजों ने भारतीयों का बर्बर रूप से दमन किया किन्तु आखिर में ब्रिटिश सरकार को भारत को आजाद करना पड़ा।

(11) आजादी से पहले भारत के विभिन्न भागों में दंगे फैले जिनमें लाखों लोग मारे गये तथा करोड़ों लोगों को अपने घर-बार छोड़कर भागना पड़ा।

(12) देश का विभाजन हुआ तथा एक नये देश—पाकिस्तान—का जन्म हुआ। स्वतन्त्रता का आनन्द विभाजन की पीड़ा तथा हिंसा के साथ हमारे सामने आया।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

1. वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित किया गया—

(अ) 1870 में
(ब) 1878 में
(स) 1883 में
(द) 1885 में

2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई—

(अ) 1885 में
(ब) 1890 में
(स) 1895 में
(द) 1905 में

3. 1905 में बंगाल विभाजन करने वाला वायसराय था—

(अ) माउन्टबेटन
(ब) लॉर्ड इरविन
(स) लॉर्ड कर्जन
(द) लॉर्ड एटली

4. "स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।" नारा दिया था—

(अ) तिलक
(ब) विपिनचन्द्र पाल
(स) लाला लाजपत राय
(द) गोखले

5. चौरी-चौरा घटना हुई थी—

(अ) अप्रैल, 1919 में
(ब) दिसम्बर, 1920 में
(स) फरवरी, 1921 में
(द) फरवरी, 1922 में

6. 1930 में शुरू हुए आन्दोलन का नाम है—

(अ) असहयोग आन्दोलन
(ब) भारत छोड़ो आन्दोलन
(स) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(द) इनमें से कोई नहीं

7. बंगाल विभाजन के विरोध में किया गया आन्दोलन किस नाम से जाना जाता है?

(अ) नमक आन्दोलन
(ब) सत्याग्रह आन्दोलन
(स) बंगाल एकीकरण आन्दोलन
(द) स्वदेशी आन्दोलन

8. खिलाफत आन्दोलन का नेता था—

(अ) सैयद अहमद खाँ
(ब) मोहम्मद अली और शौकत अली
(स) महात्मा गाँधी तथा नेहरू
(द) खान अब्दुल गफ्फार खाँ

9. जलियांवाला हत्याकांड के विरोध में किसने अपनी 'नाइटहुड' की उपाधि लौटा दी थी?

(अ) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ब) महात्मा गाँधी ने
(स) गोखले ने
(द) जवाहरलाल नेहरू ने

10. स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे—

(अ) महात्मा गाँधी
(ब) पेरियार
(स) सी. राजगोपालाचारी
(द) बाल गंगाधर तिलक

11. मुस्लिम लीग ने 'प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस' मनाने का आह्वान किया—

(अ) 15 अगस्त, 1946
(ब) 14 अगस्त, 1946
(स) 16 अगस्त, 1946
(द) 17 अगस्त, 1946

12. 'आजाद हिन्द फौज' का गठन किया—

(अ) चितरंजन दास ने
(ब) ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने
(स) सुभाषचन्द्र बोस ने
(द) बी.के. दत्त ने

उत्तरमाला- 1. (ब) 2. (अ) 3. (स) 4. (अ) 5. (द) 6. (स) 7. (द) 8. (ब) 9. (अ) 10. (स) 11. (स) 12. (स)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. 26 जनवरी, 1930 को पूरे देश में............मनाया गया।

2. मध्यमार्गी धड़ा............की राजनीति के विरुद्ध था।

3. 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट में............का प्रावधान किया गया।

4. मुस्लिम लीग ने............को '............कार्यवाही दिवस' मनाने का आह्वान किया।

5. ............में वायसराय कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया।

6. 1945 में विश्व युद्ध खत्म होने के बाद अंग्रेजों ने............स्वतंत्रता के लिए............तथा लीग से बातचीत शुरू कर दी।

7. बंगाल विभाजन के पश्चात उपजे............आन्दोलन को आंध्र के डेल्टा इलाकों में............आन्दोलन के नाम से जाना गया।

8. ब्रिटिश सरकार ने............एक्ट के तहत............की स्वतंत्रता जैसे मूलभूत अधिकारों पर अंकुश लगाया।

उत्तर- 1. स्वतंत्रता दिवस, 2. बहिष्कार, 3. प्रान्तीय

स्वायत्तता, 4. 16 अगस्त 1946, प्रत्यक्ष, 5. 1905, 6. भारतीय, कांग्रेस 7. स्वदेशी, वंदेमातरम, 8. रौलेट, अभिव्यक्ति।

सही या गलत बताइए-

1. 1870 और 1880 के दशकों में बने ज्यादातर राजनीतिक संगठनों की बागडोर भारत के सामान्य नागरिकों के हाथों में थी।

2. लाला लाजपतराय ने नारा दिया—'स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।'

3. 1942 में गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने को दांडी मार्च किया।

4. खान अब्दुल गफ्फार खान 'खुदाई खिदमतगार संगठन' के संस्थापक थे।

उत्तर- 1. गलत 2. गलत 3. गलत 4. सही

सही मिलान कीजिए-

(अ)

(ब)

1. कांग्रेस के प्रारम्भिक नेता

(i) वायसराय कर्जन

2. बंगाल का विभाजन

(ii) 1922

3. जलियांवाला हत्याकांड

(iii) 1930

4. चौरी-चौरा काण्ड

(iv) जनरल डायर

5. सविनय अवज्ञा आन्दोलन

(v) फिरोजशाह मेहता

उत्तर- 1. (v) 2. (i) 3. (iv) 4. (ii) 5. (iii)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कब तक अपने उद्देश्यों एवं तरीकों में मध्यमार्गी पार्टी थी?

उत्तर- कांग्रेस प्रारम्भिक 20 वर्षों तक अपने उद्देश्यों एवं तरीकों में 'मध्यमार्गी' पार्टी थी।

प्रश्न 2. मध्यमार्गी नेताओं का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

उत्तर- मध्यमार्गी नेताओं का प्रमुख उद्देश्य सरकार को अपनी माँगें बताना और उन्हें भारतीयों की भावना से अवगत कराना था।

प्रश्न 3. आमूल परिवर्तनवादी विचारधारा के मुख्य नेता कौन थे?

उत्तर- (1) बिपिन चन्द्र पाल, (2) बाल गंगाधर तिलक, (3) लाला लाजपत राय।

प्रश्न 4. बंगाल का विभाजन कब हुआ?

उत्तर- बंगाल का विभाजन 1905 में हुआ।

प्रश्न 5. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'नाइटहुड' की उपाधि क्यों वापस लौटा दी?

उत्तर- रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी 'नाइटहुड' की उपाधि वापस लौटा दी।

प्रश्न 6. आजाद हिन्द फौज (इण्डियन नेशनल आर्मी) का गठन किसने किया?

उत्तर- आजाद हिन्द फौज का गठन सुभाषचन्द्र बोस ने किया था।

प्रश्न 7. तिलक ने किस समाचार पत्र का सम्पादन किया था?

उत्तर- तिलक ने मराठी अखबार 'केसरी' का सम्पादन किया था।

प्रश्न 8. मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई?

उत्तर- मुस्लिम लीग की स्थापना सन् 1906 में हुई।

प्रश्न 9. 1920 के दशक के मध्य की दो महत्त्वपूर्ण घटनाएँ कौनसी थीं?

उत्तर- (1) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना।

(2) हिन्दुओं के संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना।

प्रश्न 10. इल्बर्ट बिल में क्या प्रावधान था?

उत्तर- इल्बर्ट बिल में प्रावधान था कि भारतीय न्यायाधीश भी ब्रिटिश या यूरोपीय व्यक्तियों पर मुकदमे चला सकते हैं।

प्रश्न 11. वंदेमातरम् आन्दोलन क्या था?

उत्तर- स्वदेशी आन्दोलन को आंध्र के डेल्टा इलाकों में वंदेमातरम् आन्दोलन के नाम से जाना जाता था।

प्रश्न 12. ऑल इण्डिया मुस्लिम लीग का गठन कब और कहाँ किया गया?

उत्तर- ऑल इण्डिया मुस्लिम लीग का गठन ढाका में वर्ष 1906 में किया गया।

प्रश्न 13. जलियांवाला बाग हत्याकांड कब व कहाँ हुआ?

उत्तर- जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-I

प्रश्न 1. भारत का मतलब है यहाँ की जनता-इस विचार के आने से भारतीयों के मन में कौनसी जागरूकता पैदा हुई?

उत्तर- इस विचार के साथ यह एहसास भी सामने आया कि अंग्रेज भारत के संसाधनों व यहाँ के लोगों की जिन्दगी पर कब्जा जमाए हुए हैं और जब तक यह नियन्त्रण खत्म नहीं होता, भारत यहाँ के लोगों का, भारतीयों का नहीं हो सकता।

प्रश्न 2. 1870 और 1880 के दशकों में बने प्रमुख राजनीतिक संगठनों के नाम दीजिए।

उत्तर- 1870 और 1880 के दशकों में बने प्रमुख राजनीतिक संगठन थे-(1) पूना सार्वजनिक सभा, (2) इण्डियन एसोसिएशन, (3) मद्रास महाजन सभा, (4) बॉम्बे प्रेजीडेंसी एसोसिएशन, (5) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आदि।

प्रश्न 3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारम्भिक नेताओं के नाम बताइए।

उत्तर- (1) दादाभाई नौरोजी, (2) फिरोजशाह मेहता, (3) बदरुद्दीन तैयबजी, (4) सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी, (5) डब्ल्यू.सी. बैनर्जी, (6) रोमेश चन्द्र दत्त, (7) एस. सुब्रह्मण्यम् अय्यर।

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प्रश्न 4. लखनऊ समझौते से क्या तात्पर्य है?

उत्तर— 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने ऐतिहासिक लखनऊ समझौते पर हस्ताक्षर किए एवं देश में प्रतिनिधिक सरकार के गठन के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया।

प्रश्न 5. गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद देश में अपने शुरुआती वर्ष किस तरह बिताये?

उत्तर— महात्मा गाँधी ने पहले साल पूरे भारत का दौरा किया। इस दौरान वे यहाँ के लोगों, उनकी जरूरतों और हालात को समझने में लगे रहे। शुरुआती वर्षों में उनके प्रयास चम्पारण, खेड़ा और अहमदाबाद के स्थानीय आन्दोलनों के रूप में सामने आये।

प्रश्न 6. रौलेट अधिनियम या कानून क्या था?

उत्तर— रौलेट कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा 1919 में पास किया गया वह कानून था जो अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता जैसे मूलभूत अधिकारों पर अंकुश और पुलिस को और ज्यादा अधिकार देता था।

प्रश्न 7. गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने का आह्वान कब और क्यों किया?

उत्तर— जब किसानों की एक भीड़ ने फरवरी, 1922 में चौरी-चौरा में एक पुलिस थाने पर हमला कर उसमें आग लगा दी तो गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन समाप्त करने का आह्वान किया।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-II

प्रश्न 1. स्वदेशी आन्दोलन क्या था? इसके कौन-कौनसे उद्देश्य थे?

उत्तर— (1) वह आन्दोलन जो बंगाल विभाजन के बाद शुरू हुआ, उसे स्वदेशी आन्दोलन कहा जाने लगा।

(2) इस आन्दोलन के मुख्य उद्देश्य थे—ब्रिटिश शासन का विरोध करना और स्वदेशी उद्यम, राष्ट्रीय शिक्षा, भारतीय भाषाओं के प्रयोग एवं स्वयं-सहायता के विचारों को प्रोत्साहन देना। स्वराज के लिए संघर्ष हेतु आमूल परिवर्तनवादियों ने जनता को लामबंद करने और ब्रिटिश संस्थाओं एवं वस्तुओं के बहिष्कार पर जोर दिया।

प्रश्न 2. खिलाफत आन्दोलन का वर्णन कीजिए।

उत्तर— खिलाफत आन्दोलन ऑटोमन साम्राज्य पर 1920 में थोपी गई एक बहुत ही सख्त सन्धि के विरुद्ध आन्दोलन था। ऑटोमन साम्राज्य का खलीफा मुस्लिम समाज का धार्मिक प्रधान था। भारतीय मुसलमान चाहते थे कि पुराने ऑटोमन साम्राज्य में स्थित पवित्र मुस्लिम स्थानों पर खलीफा का नियन्त्रण बना रहना चाहिए।

प्रश्न 3. दांडी मार्च से आप क्या समझते हैं?

उत्तर— गाँधीजी और उनके अनुयायी साबरमती से 240 किलोमीटर दूर स्थित दांडी तक पैदल चलकर गए और वहाँ उन्होंने 6 अप्रैल, 1930 को समुद्र तट पर बिखरा नमक इकट्ठा करते हुए नमक कानून का सार्वजनिक रूप से उल्लंघन किया। उन्होंने पानी उबालकर नमक बनाया। इस घटना को ही दांडी मार्च कहते हैं।

प्रश्न 4. क्या 1870 एवं 1880 के दशक के राजनीतिक संगठनों के लक्ष्य प्रदेश आधारित थे? उनका क्या मत था?

उत्तर— (1) यद्यपि इनमें से कई संगठन देश के विशिष्ट भागों में ही काम करते थे, परन्तु वे अपने लक्ष्य को भारत के सभी लोगों का लक्ष्य बताते थे।

(2) वे मानते थे कि लोगों को सम्प्रभु होना चाहिए अर्थात् भारत के लोगों को अपने मामले में निर्णय लेने की आजादी होनी चाहिए।

प्रश्न 5. प्रथम विश्व युद्ध के बाद सिपाहियों में औपनिवेशिक शासन के विरोध की भावना कैसे उत्पन्न हुई?

उत्तर— प्रथम विश्व युद्ध के समय बहुत सारे भारतीय सिपाहियों को दूसरे देशों में युद्ध के मोर्चों पर भेज दिया गया। इनमें से बहुत सारे सिपाही युद्ध के बाद यह समझदारी लेकर लौटे कि साम्राज्यवादी शक्तियाँ एशिया और अफ्रीका के लोगों का किस तरह शोषण कर रही हैं। फलस्वरूप ये लोग भी भारत में औपनिवेशिक शासन का विरोध करने लगे।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. जनराष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं? विस्तारपूर्वक समझाइए।

उत्तर— जनराष्ट्रवाद—जनराष्ट्रवाद से आशय है—किसी देश की आम जनता में इस भावना का उदय होना कि यह देश यहाँ रहने वाले किसी भी वर्ग, रंग, जाति, पंथ, भाषा या लिंग वाले सभी लोगों का घर है। यह देश और इसके सारे संसाधन और इसकी सारी व्यवस्था उन सभी के लिए है। भारत की जनता को इस जवाब के साथ जब यह अहसास भी आया कि अंग्रेज भारत के संसाधनों व यहाँ के निवासी लोगों की जिंदगी पर कब्जा जमाए हुए हैं और जब तक यह नियंत्रण खत्म नहीं होता, भारत यहाँ के लोगों का, भारतीयों का नहीं हो सकता। इस चेतना को 1870 और 1880 के दशक में बने राजनीतिक संगठनों ने और गहरा किया तथा 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। उसने सभी भारतीय लोगों के हक में और उनकी ओर से बोलने का संकल्प व्यक्त किया तथा भारतीयों के लिए अनेक माँगों को उठाते हुए अंग्रेज सरकार के शोषण के विरुद्ध तथा स्वतन्त्रता के लिए आन्दोलन चलाए।

1919 के बाद, अंग्रेजों के खिलाफ चल रहा यह संघर्ष धीरे-धीरे एक जन आन्दोलन में बदलने लगा। किसान, आदिवासी, विद्यार्थी तथा महिलाएँ भी बड़ी संख्या में इस आन्दोलन से जुड़ते गए। बीस के दशक से मजदूर और

व्यावसायिक समूह भी कांग्रेस को सक्रिय समर्थन देने लगे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय उद्योगों का विस्तार हुआ तथा भारतीय व्यावसायिक समूह विकास के लिए और अधिक अवसरों की माँग करने लगे। युद्ध से लौटे भारतीय सिपाही भी भारत में औपनिवेशिक शासन का विरोध करने लगे। 1917 में रूसी क्रांति की घटना के समाचारों ने किसानों और मजदूरों में भारतीय राष्ट्रवाद की प्रेरणा को बढ़ाया।

इस प्रकार भारत की समग्र जनता में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा पैदा हुई एवं समूची जनता में भारतीय राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई और जनराष्ट्रवाद का उदय हुआ।

प्रश्न 2. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी की भूमिका की विवेचना कीजिए।

उत्तर- भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी की भूमिका

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी की भूमिका को निम्नलिखित बिन्दुओं के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है—

(1) रॉलट सत्याग्रह- गाँधीजी ने अंग्रेजों द्वारा 1919 में पारित किए गए रॉलट कानून के विरुद्ध सत्याग्रह का आह्वान किया क्योंकि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाता था। गाँधीजी ने लोगों से इस कानून का अहिंसक विरोध करने तथा हड़तालें करने का आह्वान किया। फलस्वरूप अप्रैल, 1919 में देश में जगह-जगह जुलूस निकाले गए तथा हड़तालें की गईं। सरकार ने इसके विरोध में दमन चक्र चलाया और इसी के तहत 13 अप्रैल को 'जलियांवाला हत्याकांड' घटित हुआ।

(2) खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन- 1920 में अंग्रेजों द्वारा तुर्की के सुल्तान के अपमान से भारतीय मुसलमान अंग्रेज सरकार के खिलाफ थे और जलियांवाला हत्याकांड से भारतीय नेता व्यथित थे। गाँधीजी ने मुसलमानों के खिलाफत आंदोलन का समर्थन करते हुए असहयोग आंदोलन चलाया। 1921-22 के दौरान यह आंदोलन व्यापक हो गया। विद्यार्थी, वकील, शिक्षक आदि इसमें शामिल हुए और ब्रिटिश शासन व विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया। लेकिन 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद इस आंदोलन को गाँधीजी ने वापस ले लिया क्योंकि वे हिंसक आंदोलन के विरुद्ध थे।

(3) सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च- असहयोग आंदोलन के समाप्त होने के बाद गाँधीजी ने गाँवों में व्यापक सामाजिक कार्य किया। इससे कांग्रेस का जनाधार व्यापक हो गया। 1930 में गाँधीजी ने पूर्ण स्वराज के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन किया और 240 किमी. की पैदल यात्रा कर दांडी में नमक कानून को तोड़ा। इस आंदोलन में किसानों, आदिवासियों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। इसके परिणामस्वरूप 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट पारित किया गया।

(4) भारत छोड़ो आंदोलन- 1942 में गाँधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू करते हुए भारतीय जनता को 'करो या मरो' का आह्वान किया। अंग्रेजी दमन चक्र के चलते हुए भी यह आंदोलन फैलता गया। यह एक व्यापक जन आंदोलन में परिणत हो गया। अन्ततः इस आंदोलन ने ब्रिटिश राज को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

प्रश्न 3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के लिए उत्तरदायी परिस्थितियों की विवेचना कीजिए।

अथवा

1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से क्यों असंतुष्ट थे?

उत्तर- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के लिए निम्न परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं—

(1) 1870 और 1880 के दशकों में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष और ज्यादा गहरा हो गया था।

(2) 1878 में आर्म्स एक्ट पारित किया गया जिसके जरिए भारतीयों द्वारा अपने पास हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया।

(3) 1878 में ही वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट भी पारित किया गया जिससे सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराया जा सके। इस कानून के अनुसार किसी अखबार में कोई आपत्तिजनक सामग्री छापने पर सरकार उस प्रिंटिंग प्रेस सहित उसकी सारी सम्पत्ति को जब्त कर सकती थी।

(4) सरकार ने अंग्रेजों के विरोध की वजह से इल्बर्ट बिल भी वापस ले लिया।

(5) वैसे तो पढ़े-लिखे भारतीयों द्वारा एक अखिल भारतीय संगठन की जरूरत 1880 से ही महसूस की जा रही थी परन्तु इल्बर्ट बिल ने इस चाह को और गहरा कर दिया।

(6) दिसम्बर, 1885 में देश भर के 72 प्रतिनिधियों ने बम्बई में सभा करके भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का फैसला लिया। एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अफसर, ए.ओ. ह्यूम इसके प्रथम अध्यक्ष बनाए गए।

प्रश्न 4. अपने पहले बीस सालों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य माँगें क्या थीं?

उत्तर- अपने पहले बीस सालों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य माँगें निम्न थीं—

(1) कांग्रेस चाहती थी कि सरकार में भारतीयों को भी ऊँचे पद दिए जाएँ क्योंकि तब तक ज्यादातर महत्त्वपूर्ण

744 —

नौकरियों पर गोरे अफसरों का ही कब्जा था। इसने माँग की कि सिविल सेवा के लिए लंदन के साथ-साथ भारत में भी परीक्षा आयोजित की जाए।

(2) इसने माँग की कि न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग किया जाए।

(3) आर्म्स एक्ट को निरस्त करने की भी माँग की।

(4) इसने अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतन्त्रता की भी माँग की।

(5) चूँकि बढ़ते लगान के कारण काश्तकार और जमींदार विपन्न हो गए थे, इसलिए कांग्रेस ने माँग की थी कि लगान कम किया जाए।

(6) इसके अतिरिक्त इसने सैनिक व्यय में कटौती एवं सिंचाई पर अधिक व्यय की माँग की।

(7) इसने नमक कर, विदेशों में भारतीय मजदूरों तथा वनवासियों के हितों से सम्बन्धित माँगें भी कीं।

प्रश्न 5. स्वदेशी आंदोलन क्या था? इसके कौन-कौनसे उद्देश्य थे? इसके अन्तर्गत क्या कार्य किये गए?

अथवा

स्वदेशी आंदोलन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- स्वदेशी आंदोलन-वह आंदोलन जो बंगाल के विभाजन के बाद शुरू हुआ, उसे स्वदेशी आंदोलन कहा जाने लगा।

स्वदेशी आंदोलन के मुख्य उद्देश्य- इस आंदोलन के मुख्य उद्देश्य थे-(i) ब्रिटिश शासन का विरोध करना।

(ii) स्वदेशी उद्यम, राष्ट्रीय शिक्षा, भारतीय भाषाओं के प्रयोग एवं स्वयं-सहायता के विचारों को प्रोत्साहन देना।

(iii) स्वराज के लिए संघर्ष हेतु जनता को लामबंद करना।

(iv) ब्रिटिश संस्थाओं एवं वस्तुओं के बहिष्कार पर जोर देना।

स्वदेशी आंदोलन के अन्तर्गत किये गये कार्य-

(1) इस आंदोलन के तहत अंग्रेजी कपड़े तथा अन्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होलियाँ जलाई गईं।

(2) अपने देश में ही बनी वस्तुओं के लिए जन जागरण किया गया।

प्रश्न 6. बंगाल विभाजन पर एक लेख लिखिए।

उत्तर- बंगाल विभाजन-सन् 1905 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया। उस वक्त बंगाल ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा प्रान्त था। बिहार और उड़ीसा के कुछ भाग भी उस समय बंगाल का हिस्सा थे।

उद्देश्य-अंग्रेजों के अनुसार बंगाल विभाजन का उद्देश्य प्रशासकीय सुविधा था। परन्तु इस 'प्रशासकीय सुविधा' से केवल अंग्रेज अफसरों और व्यापारियों को ही फायदा होना था। इस विभाजन द्वारा सरकार ने गैर-बंगाली इलाकों को अलग करने की बजाय उसके पूर्वी भागों को अलग करके असम में मिला दिया। इसके पीछे अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य बंगाली राजनेताओं के प्रभाव पर अंकुश लगाना और बंगाली जनता को बाँटना था।

प्रतिरोध- बंगाल के विभाजन से देश भर में गुस्से की लहर फैल गई। मध्यममार्गी और आमूल परिवर्तनवादी, कांग्रेस के सभी धड़ों ने इसका विरोध किया। विशाल जनसभाओं का आयोजन किया गया और जुलूस निकाले गए। जनप्रतिरोध के नए-नए रास्ते ढूँढे गए। इससे जो संघर्ष उपजा उसे स्वदेशी आंदोलन के नाम से जाना जाता है।

अंग्रेजी कपड़े, शक्कर तथा अन्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होलियाँ जलाई गईं। अपने देश में ही बनी वस्तुओं के लिए जनजागरण किया गया।

यह आंदोलन बंगाल में सबसे ताकतवर था परन्तु अन्य इलाकों में भी इसकी भारी अनुगूँज सुनाई दी।

प्रश्न 7. मुस्लिम लीग का उदय बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशक की महत्वपूर्ण घटना थी। समझाइये।

उत्तर- मुस्लिम लीग का उदय बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशक की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसका वर्णन निम्न प्रकार है-

(1) मुसलमान जमींदारों और नवाबों के एक समूह ने ढाका में सन् 1906 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन किया।

(2) मुस्लिम लीग ने बंगाल विभाजन का समर्थन किया। लीग ने माँग की कि मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचिका की व्यवस्था की जाए। 1909 में सरकार ने यह माँग मान ली।

(3) अब परिषदों में कुछ सीटें मुसलमान उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दी गईं जिन्हें मुस्लिम मतदाताओं द्वारा ही चुनकर भेजा जाना था। इससे राजनेताओं में अपने धार्मिक समुदाय के लोगों को अपना राजनीतिक समर्थक बनाने का लालच पैदा हो गया।

प्रश्न 8. रौलट सत्याग्रह पर एक लेख लिखिए।

उत्तर- रौलट एक्ट-1919 में औपनिवेशिक सरकार ने रौलट कानून को पारित कर दिया। यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता जैसे मूलभूत अधिकारों पर अंकुश लगाने और पुलिस को और ज्यादा अधिकार देने के लिए लागू किया गया था।

रौलट सत्याग्रह-इस कानून से भारतीयों में तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ। महात्मा गाँधी, मोहम्मद अली जिन्ना तथा

अन्य नेताओं का मानना था कि सरकार के पास लोगों की बुनियादी स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इस कानून को 'शैतान की करतूत' और निरंकुशवादी बताया। गाँधीजी ने रौलट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि इस कानून का विरोध करने के लिए 6 अप्रैल, 1919 को अहिंसक विरोध दिवस के रूप में, 'अपमान व याचना' दिवस के रूप में मनाया जाए और हड़तालें की जाएँ।

आन्दोलन शुरू करने के लिए सत्याग्रह सभाओं का गठन किया गया।

रौलट सत्याग्रह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ पहला अखिल भारतीय संघर्ष था हालांकि यह मोटे तौर पर शहरों तक ही सीमित था। अप्रैल, 1919 में पूरे देश में जगह-जगह जुलूस निकाले गए और हड़तालों का आयोजन किया गया।

आन्दोलन का दमन—सरकार ने इन आन्दोलनों को कुचलने के लिए दमनकारी रास्ता अपनाया। सरकार द्वारा अनेक स्थानों पर आन्दोलनकारियों पर लाठियाँ, गोलियाँ चलाई गईं। अनेक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

13 अप्रैल बैसाखी के दिन अमृतसर में जनरल डायर द्वारा जलियाँवाला बाग में किया गया हत्याकांड इसी दमन का हिस्सा था। इस जनसंहार पर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी पीड़ा और गुस्सा जताते हुए नाइटहुड की उपाधि वापस लौटा दी।

प्रश्न 9. गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन क्यों चलाया? इस आन्दोलन के दौरान क्या कार्य किये गये?

उत्तर—असहयोग आन्दोलन-पंजाब में हुए अत्याचारों (जलियाँवाला हत्याकांड) तथा खिलाफत के मामले में हुए अत्याचारों के विरुद्ध मिल कर अभियान चलाने तथा स्वराज की माँग हेतु महात्मा गाँधी ने 1920 में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आन्दोलन शुरू करने का निश्चय किया। यह आन्दोलन 'असहयोग आन्दोलन' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

आन्दोलन के दौरान की गतिविधियाँ—(1) शीघ्र ही असहयोग आन्दोलन पूरे देश में शुरू हो गया।

(2) 1921-22 के दौरान असहयोग आन्दोलन को और गति मिली। हजारों विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ दिए।

(3) मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास, सी. राज-गोपालाचारी और आसफ अली जैसे बहुत सारे वकीलों ने वकालत छोड़ दी।

(4) अंग्रेजों द्वारा दी गई उपाधियों को वापस लौटा दिया गया और विधान मण्डलों का बहिष्कार किया गया।

(5) जगह-जगह लोगों ने विदेशी कपड़ों की होली जलाई। 1920 से 1922 के बीच विदेशी कपड़ों के आयात में भारी गिरावट आ गई।

(6) स्वदेशी का व्यापक प्रचार हुआ। चरखे का काफी प्रचार हुआ और यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया।

आन्दोलन को स्थगित करना—जब यह आन्दोलन अपने चरम पर था तभी फरवरी, 1922 में चौरी-चौरा पुलिस थाने पर हुए हिंसक हमले की घटना से व्यथित होकर गाँधीजी ने अचानक असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।

प्रश्न 10. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान क्यों किया गया?

उत्तर—1945 में विश्व युद्ध खत्म होने के बाद अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए कांग्रेस और लीग से बातचीत शुरू कर दी। लेकिन यह वार्ता असफल रही क्योंकि लीग का कहना था कि उसे भारतीय मुसलमानों का एकमात्र प्रतिनिधि माना जाए। कांग्रेस इस दावे को मंजूर नहीं कर सकती थी क्योंकि बहुत सारे मुसलमान अभी भी उसके साथ थे।

इस प्रकार 1945 तक मुस्लिम जनता में मुस्लिम लीग के बढ़ते सामाजिक आधार और कांग्रेस की मुस्लिम जनता को अपने साथ लामबंद करने की असफलता से लीग की आकांक्षाएँ प्रबल हो गई थीं।

दूसरे, 1946 के दोबारा प्रान्तीय चुनावों में मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर बेजोड़ सफलता मिली और लीग पाकिस्तान की माँग पर अड़ने लगी।

तीसरे, 1946 में ब्रिटिश सरकार ने स्वतंत्र भारत के लिए एक सही राजनीतिक बंदोबस्त सुझाने के लिए तीन सदस्यीय परिसंघ भारत भेजा जिसने यह सुझाव दिया कि भारत अविभाजित रहे और उसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को कुछ स्वायत्तता देते हुए ढीले-ढाले महासंघ के रूप में प्रस्तुत किया जाए। लेकिन कांग्रेस और लीग दोनों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अतः विभाजन अब अवश्यंभावी हो गया।

चौथे, कैबिनेट मिशन की विफलता के बाद मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की अपनी माँग मनवाने के लिए जन आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया। उसने 16 अगस्त, 1946 को 'प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस' मनाने का आह्वान किया। जिससे कलकत्ता में दंगे भड़क गए और मार्च, 1947 तक उत्तर-भारत के विभिन्न भागों में भी हिंसा फैल गई। अतः पाकिस्तान की माँग को स्वीकार कराने के लिए ही मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया था।

सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-III

इकाई एक : भारतीय संविधान और धर्मनिरपेक्षता

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