📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. नेपाल की जनता एक नया संविधान क्यों चाहती थी?
उत्तर- नेपाल के लोग लोकतंत्र के रास्ते पर चलना चाहते थे और इसके लिए उन्हें एक नया लोकतांत्रिक आदर्शों से युक्त संविधान चाहिए था। पिछले राजतंत्रात्मक संविधान में वे आदर्श नहीं थे जो वे नेपाल के लिए चाहते थे।
प्रश्न 2. नीचे दी गई किस परिस्थिति में मंत्री को अपनी सत्ता के दुरुपयोग का दोषी कहा जायेगा-
उत्तर- उक्त में (ख) एवं (ग) परिस्थिति में मंत्री को अपनी सत्ता के दुरुपयोग का दोषी कहा जायेगा।
प्रश्न 3. अपने शिक्षक के साथ चर्चा करें कि राज्य और सरकार के बीच क्या फर्क होता है?
उत्तर- राज्य एक ऐसी राजनीतिक संस्था होती है जो एक निश्चित भू-भाग में रहने वाले संप्रभु लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। राज्य के चार अंग हैं- जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार और संप्रभुता। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार राज्य का एक अंग है। सरकार की जिम्मेदारी होती है कानून बनाना और लागू करना। चुनावों के द्वारा सरकार बदल भी सकती है। राज्य सरकार की तुलना में अधिक व्यापक शब्द है।
प्रश्न 4. अग्रलिखित परिस्थितियों में कौनसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है-
उत्तर—
[BOX: [172, 505, 305, 950]]
1990 का नेपाल का संविधान |
भाग-7 : कार्यपालिका |
अनुच्छेद 35 : कार्यकारी शक्तियाँ |
नेपाल अधिराज्य की कार्यकारी शक्तियाँ महामहिम नरेश एवं मंत्रिपरिषद में निहित होंगी। |
[BOX: [295, 505, 400, 950]]
2015 का नेपाल का संविधान |
भाग-7 : संघीय कार्यपालिका |
अनुच्छेद 75 : कार्यकारी शक्तियाँ |
नेपाल की कार्यकारी शक्तियाँ, संविधान और कानून के अनुसार मंत्रिपरिषद में निहित होंगी। |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. किसी लोकतांत्रिक देश को संविधान की जरूरत क्यों पड़ती है?
उत्तर— किसी लोकतांत्रिक देश को संविधान की जरूरत होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(1) आदर्शों को सूत्रबद्ध करने के लिए— संविधान उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी इच्छा और सपनों के अनुसार रच सकते हैं। यह नियमों का एक ऐसा समूह होता है जिसको एक देश के सभी लोग अपने देश को चलाने की पद्धति के रूप में अपना सकते हैं।
(2) संविधान द्वारा ही यह तय किया जाता है कि उस देश की राजनीतिक व्यवस्था कैसी होगी।
(3) सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए— लोकतांत्रिक समाजों में प्रायः संविधान ही ऐसे नियम तय करता है जिनके द्वारा राजनेताओं के हाथों सत्ता के दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
(4) बहुमत की निरंकुशता पर प्रतिबंध लगाने के लिए— लोकतांत्रिक समाजों में भी बहुमत की निरंकुशता का खतरा बना रहता है। अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यकों की इस निरंकुशता पर प्रतिबंध लगाना भी संविधान का महत्वपूर्ण कार्य है।
(5) व्यापक हित के सिद्धांतों की रक्षा के लिए— लोकतांत्रिक समाजों में कई बार हम किसी मुद्दे पर बहुत तीखे ढंग से सोचने लगते हैं। ऐसे विचार हमारे व्यापक हितों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। संविधान हमें ऐसी भावनाओं से बचाने में मदद करता है। इस प्रकार संविधान हमें ऐसे फैसले लेने से रोकता है जिनसे उन बड़े सिद्धांतों को ठेस पहुंच सकती है जिनमें देश आस्था रखता है।
नेपाल के इन दोनों संविधानों में 'कार्यकारी शक्ति' के उपयोग में क्या फर्क दिखाई देता है? इस बात को ध्यान में रखते हुए क्या आपको लगता है कि नेपाल को एक नये संविधान की जरूरत है? क्यों?
उत्तर— 1990 के नेपाल का संविधान इस सिद्धांत पर आधारित था कि शासन की सर्वोच्च शक्ति राजा के पास रहेगी क्योंकि वह एक राजतंत्र था। 2015 का नेपाल का संविधान लोकतांत्रिक राज्य का संविधान है, इसमें अंतिम सत्ता जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों से बनी मंत्रिपरिषद में निहित है। चूँकि संविधान एवं कानून में भी यह व्यवस्था कर दी गई है। अतः नेपाल को एक नये संविधान की कोई जरूरत नहीं है।
प्रश्न 3. अगर निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्ति पर कोई अंकुश न होता तो क्या होता?
उत्तर— अगर निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्ति पर कोई अंकुश न होता तो वे सत्ता का दुरुपयोग करके अन्यायपूर्ण निर्णय लेते जिनसे देश में अराजकता और हिंसा के फैलने की आशंकाएँ बनी रहतीं। जन प्रतिनिधि जनमत की उपेक्षा करके अपने फैसलों को जबरन देश की जनता पर थोपते।
प्रश्न 4. निम्नलिखित स्थितियों में अल्पसंख्यक कौन हैं? इन स्थितियों में अल्पसंख्यकों के विचारों का सम्मान करना क्यों महत्वपूर्ण है? इसका एक-एक कारण बताइये।
उत्तर- (क) इस स्थिति में महिला शिक्षक अल्पसंख्यक हैं। अल्पसंख्यक महिला शिक्षकों के विचारों का सम्मान करना इसलिए आवश्यक है ताकि बहुमत की निरंकुशता से अल्पसंख्यकों का नुकसान न हो।
प्रश्न 5. नीचे दिये गये बाएँ कॉलम में भारतीय संविधान के मुख्य आयामों की सूची दी गई है। दूसरे कॉलम में प्रत्येक आयाम के सामने दो वाक्यों में लिखिये कि आपकी राय में यह आयाम क्यों महत्वपूर्ण है?
मुख्य आयाम | महत्व |
(1) संघवाद | |
(2) शक्तियों का बंटवारा | |
(3) मौलिक अधिकार | |
(4) संसदीय शासन पद्धति |
उत्तर- (1) संघवाद- (i) संघवाद में राष्ट्रीय स्तर के फैसले केन्द्रीय सरकार लेती है और प्रांतीय स्तर के फैसले प्रांतीय स्तर की सरकार लेती है। पंचायती राज व्यवस्था शासन का तीसरा स्तर है।
(ii) कार्यक्षेत्र की स्पष्टता के लिए भारतीय संविधान में तीन सूचियों के द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कौनसे स्तर की सरकार किन मुद्दों पर कानून बना सकती है ताकि केन्द्र-राज्य विवाद पैदा न हो।
(2) शक्तियों का बंटवारा- (i) सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए शक्तियों का बंटवारा तीन अंगों—कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका—में किया गया है।
(ii) शक्तियों के बंटवारे के आधार पर प्रत्येक अंग दूसरे अंग पर अंकुश रखता है और इस तरह तीनों अंगों के बीच सत्ता का संतुलन बना रहता है।
(3) मौलिक अधिकार- (i) संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदत्त मौलिक अधिकार देश के सभी नागरिकों को राज्य की सत्ता के मनमाने और निरंकुश इस्तेमाल से बचाते हैं।
(ii) प्रत्येक नागरिक इस स्थिति में है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय में पहल कर सकता है।
(4) संसदीय शासन पद्धति- (i) विधायिका के सभी स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव लोग स्वयं करते हैं।
(ii) ये प्रतिनिधि कार्यपालिका का गठन करते हैं जो प्रत्यक्ष विधायिका के प्रति और अन्ततः जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
प्रश्न 6. उन भारतीय राज्यों के नाम लिखिए जिनकी सीमाएँ निम्नलिखित पड़ोसी देशों से लगती हैं-
उत्तर- (क) बांग्लादेश से सीमा लगने वाले राज्य- (1) पश्चिम बंगाल (2) असम (3) मेघालय (4) त्रिपुरा (5) मिजोरम।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार
(1) संविधान- हर समाज के कुछ मूलभूत नियम होते हैं, जिनसे उस समाज का स्वरूप तय होता है और अलग-अलग समाजों के बीच फर्क पता चलता है। बड़े समाजों के एक साथ रहने वाले कई अलग-अलग समुदाय ऐसे नियमों को आम सहमति के द्वारा तय करते हैं। आधुनिक देशों में यह सहमति आमतौर पर लिखित रूप में पायी जाती है। जिस दस्तावेज में हमें ऐसे नियम मिलते हैं, उसे संविधान कहा जाता है।
(2) किसी देश को संविधान की जरूरत क्यों पड़ती है? अथवा संविधान के उद्देश्य-
(1) यह दस्तावेज उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी इच्छा और सपनों के अनुसार रच सकते हैं। अर्थात् संविधान ही यह बताता है कि हमारे समाज का मूलभूत स्वरूप क्या हो।
(2) संविधान देश की राजनीतिक व्यवस्था को तय करता है।
(3) लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था में संविधान की भूमिका-
(1) लोकतांत्रिक समाजों में संविधान ही ऐसे नियम तय करता है जिनके द्वारा राजनेताओं के हाथों सत्ता के दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
(2) लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था में संविधान बहुमत की निरंकुशता को रोकता है।
(3) संविधान ऐसे प्रावधानों को आसानी से पलटने नहीं देता जिनके जरिए नागरिकों को अधिकारों का आश्वासन मिलता है और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा होती है।
(4) भारतीय संविधान के मुख्य लक्षण- (1) संघवाद, (2) संसदीय शासन पद्धति, (3) शक्तियों का बंटवारा, (4) मौलिक अधिकार, (5) धर्मनिरपेक्षता।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. बड़े-बड़े समाजों में विभिन्न समुदायों में नियमों को आम सहमति के जरिए तय किया जाता है। आधुनिक देशों में यह सहमति प्रायः लिखित रूप में पायी जाती है। जिस दस्तावेज में हमें ऐसे नियम मिलते हैं, उसे कहा जाता है—
(ब) पवित्र ग्रंथ
(द) राजनीतिशास्त्र
2. समानता का अधिकार भारतीय संविधान में दिया गया है—
3. जब अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यक की बहुमत की निरंकुशता का दबदबा एक समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के ऊपर होता है, तो उसे कहा जाता है—
(ब) राष्ट्रीय वर्चस्व
(द) संघवाद
4. भारतीय संविधान सभा का गठन किया गया था—
(ब) 1945 ई. में
(द) 1946 ई. में
5. निम्नलिखित में कौनसा खंड भारतीय संविधान की 'अंतरात्मा' कहलाता है?
6. किस अधिकार में यह कहा गया है कि धर्म, जाति, वंश या लिंग के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता—
7. भारतीय संविधान का जनक किसे कहा जाता है?
(ब) वल्लभभाई पटेल को
8. भारत में कितनी स्तरीय शासन व्यवस्था है?
(ब) द्वि-स्तरीय
(द) बहु-स्तरीय
9. ऐसे लोगों का समूह जो कानूनों को लागू करने तथा शासन चलाने का काम देखते हैं, कहलाता है—
(ब) कार्यपालिका
(द) इनमें से कोई नहीं
10. संविधान सभा के अध्यक्ष थे—
(ब) डॉ. अम्बेडकर
11. अंतःसामुदायिक वर्चस्व कहते हैं—
12. एक से ज्यादा स्तर की सरकारों का होना कहलाता है—
(ब) साम्राज्यवाद
(द) संघवाद
13. यदि 13 साल की बच्ची चूड़ियों के कारखाने में काम कर रही है तब उसके किस मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है?
उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (ब) 3. (स) 4. (द) 5. (ब) 6. (अ) 7. (स) 8. (स) 9. (ब) 10. (द) 11. (अ) 12. (द) 13. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. .................... का मतलब है देश में एक से ज्यादा स्तर की .................... का होना।
2. .................... में हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं।
3. .................... देश के सभी नागरिकों को राज्य की सत्ता के मनमाने और निरंकुश इस्तेमाल से बचाते हैं।
4. .................... से कम उम्र के बच्चों को मजदूरी पर रखना अपराध है।
5. कानून की नजर में सभी लोग .................... हैं।
6. भारतीय संविधान के अनुसार .................... में वोट डालने का अधिकार सभी .................... नागरिकों का है।
7. .................... एवं .................... अधिकार के अंतर्गत सभी अल्पसंख्यक समुदाय अपनी संस्कृति की रक्षा और विकास हेतु शैक्षणिक स्थान खोल सकते हैं।
8. कार्यपालिका का काम है .................... लागू करना और शासन ....................।
उत्तर- 1. सरकारों 2. विधायिका 3. मौलिक अधिकार 4. 14 वर्ष 5. समान 6. भारत, वयस्क 7. सांस्कृतिक, शैक्षणिक 8. कानून, चलाना।
सही या गलत बताइए-
1. दिसम्बर, 1946 में भारत का संविधान बना लिया गया था।
2. केवल लोकतांत्रिक देशों का ही संविधान होता है।
3. नेपाल में लोकतंत्र के लिए कई जनसंघर्ष हो चुके हैं।
4. समानता का अधिकार भारतीय संविधान में दिया गया एक नीति निर्देशक तत्व है।
5. संसदीय शासन पद्धति में सरकार के सभी स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव लोग खुद करते हैं।
6. संघवाद का तात्पर्य है एक से अधिक स्तर की सरकारों का होना।
उत्तर- 1. गलत 2. गलत 3. सही 4. गलत 5. सही 6. सही।
सही मिलान कीजिए-
( अ ) | ( ब ) |
1. संविधान का उद्देश्य | (i) विधायिका |
2. संविधान सभा के सदस्य | (ii) शासन चलाने के आदर्शों को सूत्रबद्ध करना |
3. भारतीय संविधान के जनक | (iii) वल्लभभाई पटेल |
4. निर्वाचित प्रतिनिधि | (iv) अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता |
5. स्वतंत्रता का अधिकार | (v) डॉ. अम्बेडकर |
उत्तर- 1. (ii) 2. (iii) 3. (v) 4. (i) 5. (iv)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संविधान किसे कहा जाता है?
उत्तर- संविधान नियमों का एक ऐसा समूह होता है जिसको एक देश के सभी लोग अपने देश को चलाने की पद्धति के रूप में अपना सकते हैं।
प्रश्न 2. स्वतंत्र भारत के लिए संविधान सभा ने किस अवधि में संविधान के प्रारूप को तैयार किया?
उत्तर- दिसम्बर, 1946 से नवम्बर, 1949 के बीच संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए नए संविधान का प्रारूप तैयार किया।
प्रश्न 3. संविधान का कोई एक उद्देश्य बताइये।
उत्तर- संविधान का मुख्य उद्देश्य होता है- देश की राजनीतिक व्यवस्था को तय करना।
प्रश्न 4. अंतर-सामुदायिक वर्चस्व किसे कहते हैं?
उत्तर- अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यकों की निरंकुशता जब एक समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के ऊपर होती है, तो उसे अंतर-सामुदायिक वर्चस्व कहते हैं।
प्रश्न 5. अंत:सामुदायिक वर्चस्व किसे कहते हैं?
उत्तर- जब एक ही समुदाय के भीतर कुछ लोग दूसरों को दबा सकते हैं तो उसे अंत:सामुदायिक वर्चस्व कहते हैं।
प्रश्न 6. भारतीय संविधान सभा के किन्हीं दो महत्वपूर्ण सदस्यों के नाम लिखिये।
उत्तर- (1) सरदार वल्लभ भाई पटेल (2) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर।
प्रश्न 7. संघवाद से क्या आशय है?
उत्तर- देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकारों का होना तथा प्रत्येक स्तर की सरकार को संविधान से ही शक्ति और अधिकार मिलते हों।
प्रश्न 8. संविधान के अनुसार राज्य के कितने अंग हैं?
उत्तर- संविधान के अनुसार राज्य के तीन अंग हैं- (1) विधायिका, (2) कार्यपालिका और (3) न्यायपालिका।
प्रश्न 9. धर्मनिरपेक्ष राज्य किसे कहते हैं?
उत्तर- धर्मनिरपेक्ष राज्य वह होता है जिसमें राज्य अधिकृत रूप से किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में बढ़ावा नहीं देता।
प्रश्न 10. मौलिक अधिकारों का क्या महत्व है?
उत्तर- मौलिक अधिकार देश के सभी नागरिकों को राज्य की सत्ता के मनमाने और निरंकुश इस्तेमाल से बचाते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1. संविधान के कोई दो उद्देश्य बताइये।
उत्तर- संविधान के उद्देश्य- (1) संविधान उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी इच्छा और सपनों के अनुसार रच सकते हैं। अर्थात् संविधान ही बताता है कि हमारे समाज का मूलभूत स्वरूप क्या हो।
(2) संविधान का दूसरा मुख्य उद्देश्य होता है- देश की राजनीतिक व्यवस्था को तय करना कि वह राजतंत्रात्मक होगी या लोकतंत्रात्मक।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान में नीति-निर्देशक तत्वों का खण्ड क्यों जोड़ा गया था?
उत्तर- भारतीय संविधान में नीति-निर्देशक तत्वों का खण्ड संविधान सभा के सदस्यों ने इसलिए जोड़ा था ताकि और ज्यादा सामाजिक व आर्थिक सुधार लाए जा सकें। वे चाहते थे कि स्वतंत्र भारतीय राज्य जनता की गरीबी दूर करने वाले कानून और नीतियाँ बनाते हुए इन सिद्धांतों को मार्गदर्शक के रूप में हमेशा अपने सामने रखें।
प्रश्न 3. भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार बतलाइये।
उत्तर- भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार हैं- (1) समानता का अधिकार, (2) स्वतंत्रता का अधिकार, (3) शोषण के विरुद्ध अधिकार, (4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, (5) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार तथा (6) संवैधानिक उपचार का अधिकार।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-II
प्रश्न 1. लोकतांत्रिक समाज में संविधान की भूमिका को संक्षेप में बताइये।
उत्तर- लोकतांत्रिक समाज में संविधान की भूमिका- (1) लोकतांत्रिक समाजों में प्राय: संविधान ही ऐसे नियम तय करता है जिनके द्वारा राजनेताओं के हाथों सत्ता के दुरुपयोग
को रोका जा सकता है। भारतीय संविधान में ऐसे बहुत से नियम मौलिक अधिकारों वाले खण्ड में दिये गये हैं।
(2) लोकतंत्र में संविधान बहुमत की निरंकुशता को रोकता है। यह अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यकों की निरंकुशता पर प्रतिबन्ध लगाता है।
(3) संविधान हमें ऐसे फैसले लेने से भी रोकता है जिनसे उन बड़े सिद्धान्तों को ठेस पहुंच सकती है, जिनमें देश आस्था रखता है।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान में दिये गये मौलिक अधिकारों के उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर— भारतीय संविधान में दिये गये मौलिक अधिकारों के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि इन अधिकारों का दोहरा उद्देश्य है—
पहला यह कि, हरेक नागरिक ऐसी स्थिति में हो कि वह इन अधिकारों के लिए दावेदारी कर सके।
दूसरा यह कि, ये अधिकार हर उस सत्ता और संस्था के लिए बाध्यकारी हों जिसे कानून बनाने का अधिकार दिया गया है।
निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. निरंकुशता क्या है? संविधान में इसका क्या हल होना चाहिए?
उत्तर— निरंकुशता से आशय है— किसी अंकुश या प्रतिबंधता का न होना। राजतंत्र में राजा की सत्ता प्रायः निरंकुश होती है। इस तरह की स्थिति लोकतांत्रिक समाजों में भी उस स्थिति में पैदा हो सकती है, जहाँ बहुमत वाला गुट लगातार ऐसे फैसले लागू करता है जिसमें अल्पसंख्यकों की सहमति नहीं होती और उनका नुकसान होता है। इसे बहुमत की निरंकुशता कहा जाता है।
संविधान में बहुमत की निरंकुशता का हल— संविधान में इसके हल के लिए दिए गए नियमों में इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि अल्पसंख्यकों को किसी ऐसी चीज से वंचित न किया जाए जो बहुसंख्यकों के लिए सामान्य रूप से उपलब्ध है। अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यकों की इस निरंकुशता या दबदबे पर प्रतिबंध लगाना भी संविधान का महत्त्वपूर्ण कार्य है, यह दबदबा अंतर-सामुदायिक वर्चस्व का हो सकता है और अंतः सामुदायिक वर्चस्व का भी हो सकता है।
तीसरे, संविधान को हमें ऐसे फैसले लेने से भी रोकना चाहिए जिनसे उन बड़े सिद्धान्तों को ठेस पहुँचती हो, जिसमें देश आस्था रखता है, जैसे-दलगत राजनीति के स्थान पर किसी तानाशाह को शासन सौंपना, एक अच्छा संविधान इस तरह के उन्माद से भी बचाता है।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान के मुख्य लक्षणों की विवेचना कीजिये।
उत्तर— भारतीय संविधान के मुख्य लक्षण
भारतीय संविधान के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं—
(1) संघवाद— संघवाद से आशय है—देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकारों का होना और प्रत्येक स्तर की सरकार को शक्तियाँ व अधिकार संविधान से ही मिलते हों। भारतीय संविधान में केन्द्र तथा राज्य स्तर पर शक्तियों का बंटवारा तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है। ये हैं—संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं। इन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को दिया गया है। राज्य सूची में प्रादेशिक महत्व के विषय हैं। इन पर कानून बनाने का अधिकार राज्य स्तर की सरकारों को दिया गया है। और समवर्ती सूची में दिये गये विषयों पर दोनों ही सरकारों को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है। इस प्रकार इन सूचियों द्वारा यह बताया गया है कि कौनसे स्तर की सरकार किन मुद्दों पर कानून बना सकती है।
(2) संसदीय शासन पद्धति— भारतीय संविधान में संसदीय शासन पद्धति अपनायी गयी है। सरकार के सभी स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव लोग स्वयं करते हैं। संविधान में सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार प्रदान किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं भी चुनाव लड़ सकता है, चाहे उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि कैसी भी क्यों न हो। ये प्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
(3) शक्तियों का बंटवारा— संविधान के अनुसार राज्य के तीन अंग हैं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। तीनों अंगों को शासन के पृथक्-पृथक् कार्य सौंपे गये हैं। विधायिका को कानून निर्माण करने, कार्यपालिका को उन कानूनों को लागू करने एवं शासन चलाने तथा न्यायपालिका को न्यायालयों की व्यवस्था करने का कार्य सौंपा गया है। सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए तीनों अंगों की शक्तियाँ एक-दूसरे से अलग रखी गयी हैं। इस बंटवारे के आधार पर प्रत्येक अंग दूसरे अंग पर अंकुश रखता है। इस प्रकार सत्ता संतुलन बना रहता है।
(4) मौलिक अधिकार— भारतीय संविधान में सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं। ये अधिकार हैं—(1) समानता का अधिकार (2) स्वतन्त्रता का अधिकार (3) शोषण के विरुद्ध अधिकार (4) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार
(5) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार तथा
(6) संवैधानिक उपचार का अधिकार।
(5) धर्मनिरपेक्षता- भारतीय संविधान एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है। इसमें राज्य अधिकृत रूप से किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में बढ़ावा नहीं देता है।
प्रश्न 3. भारतीय संविधान में समानता का अधिकार क्यों आवश्यक है?
उत्तर- भारतीय संविधान में निम्नलिखित स्थितियों की स्थापना के लिए समानता का अधिकार आवश्यक है-
(1) कानून की नजर में सभी लोग समान हों। अर्थात् सभी लोगों को देश का कानून बराबर सुरक्षा प्रदान करे।
(2) राज्य, धर्म, जाति या लिंग के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ कोई भेदभाव नहीं कर सके।
(3) सार्वजनिक स्थलों, जैसे- खेल के मैदान, होटल, दुकान, पार्क आदि पर सभी को बराबर पहुँचने का अधिकार हो।
(4) रोजगार के मामले में राज्य किसी के साथ भेदभाव न कर सके।
भारतीय संविधान के समानता के अधिकार में भारतीय नागरिकों को समानता के उक्त अधिकार प्रदान किए गए हैं। इस दृष्टि से भारतीय संविधान में नागरिकों के बीच सत्ता के भेदभाव को रोकने तथा राज्य द्वारा सबको समान व्यवहार करने के लिए समानता का अधिकार आवश्यक है।
प्रश्न 4. भारतीय संविधान में शक्तियों का बंटवारा आवश्यक है? क्यों?
उत्तर- भारतीय संविधान के अनुसार सरकार के तीन अंग हैं- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
विधायिका में हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं जो देश के लिए कानूनों का निर्माण करते हैं। कार्यपालिका ऐसे लोगों का समूह है जो कानूनों को लागू करने और शासन चलाने का काम देखते हैं। न्यायालयों की व्यवस्था को न्यायपालिका कहा जाता है।
सरकार का कोई भी अंग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सके, इसलिए भारतीय संविधान में शक्तियों का बंटवारा तीनों अंगों में किया गया है। शक्तियों के बंटवारे से सरकार के सभी अंगों की शक्तियाँ एक दूसरे से अलग होंगी। शक्तियों के इस बंटवारे के आधार पर प्रत्येक अंग दूसरे अंग पर अंकुश रखता है और इस तरह तीनों अंगों के बीच सत्ता का संतुलन बना रहता है।
इससे स्पष्ट होता है कि सत्ता के तीनों अंगों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए तथा सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए शक्तियों का बंटवारा आवश्यक है।
प्रश्न 5. भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिये।
अथवा
भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों में कोई दो मौलिक अधिकारों के बारे में विस्तार से लिखें।
उत्तर- भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार
भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार निम्नलिखित हैं-
(1) समानता का अधिकार- समानता के अधिकार से आशय है कि कानून की नजर में सभी लोग समान हैं अर्थात् सभी लोगों को देश का कानून बराबर सुरक्षा प्रदान करेगा। इस अधिकार में यह भी कहा गया है कि धर्म, जाति या लिंग के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक स्थानों पर सभी को बराबर पहुंच का अधिकार होगा। रोजगार के मामले में राज्य किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। यद्यपि इसके कुछ अपवाद भी हैं। छुआछूत की प्रथा का उन्मूलन कर दिया गया है तथा राज्य कोई भेदभावजनक पदवियां प्रदान नहीं करेगा।
(2) स्वतंत्रता का अधिकार- इस अधिकार के अंतर्गत अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता, सभा या संगठन बनाने की स्वतंत्रता, देश के किसी भाग में आने-जाने और रहने तथा कोई भी व्यवसाय, पेशा या कारोबार करने का अधिकार शामिल है।
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार- संविधान में कहा गया है कि मानव व्यापार, जबरिया श्रम और 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मजदूरी पर रखना अपराध है।
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार- सभी नागरिकों को पूरी धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छा का धर्म अपनाने तथा शांतिपूर्वक उसका प्रचार-प्रसार करने का अधिकार है।
(5) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार- संविधान में कहा गया है कि धार्मिक या भाषायी, सभी अल्पसंख्यक समुदाय अपनी संस्कृति की रक्षा और विकास के लिए अपने-अपने शैक्षणिक संस्थान खोल सकते हैं।
(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार- यदि किसी नागरिक को लगता है कि राज्य द्वारा उसके किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है तो इस अधिकार का सहारा लेकर वह अदालत में जा सकता है।