Iswaran the Storyteller
Iswaran the Storyteller (कहानीकार ईश्वरन)
प्रथम दिन जब दादाजी ने उसे अलमारी में लगी खूँटी से बाँधा तो टोटो ने उसे तोड़कर स्वयं को स्वतन्त्र कर लिया। उसने वॉलपेपर व लेखक का ब्लेजर फाड़ डाला। नौकरों के आवास-भवन में उसने अन्य जानवरों को रात को पलक भी नहीं झपकने दी। अस्तबल में उसने नाना के लम्बे कान में दाँत गाड़ दिये। उसने पुलाव-व्यंजन चुरा लिया और एक वृक्ष की शाखा पर चढ़ गया ताकि चावल को अकेले खा सके। निःसन्देह उसका केतली वाला दुःसाहस तो उसकी जान ले लेता।
3. Iswaran the Storyteller
[ ईश्वरन, कहानी सुनाने वाला ]
—R.K. Laxman
- पाठ के विषय में : एक रात महेन्द्र नींद से जागा और एक 'काली धुँधली आकृति' देखी। डर के कारण वह पसीना-पसीना हो गया। क्या यह एक भूत था?
कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद
The story ........................................ uncritically.
कठिन शब्दार्थ : supervisors (सूप्वाइज्(र)ज) = निरीक्षक, various (वेअरिस्) = विभिन्न, construction (कन्स्ट्रक्शन्) = निर्माण, sites (साइट्स) = स्थल, activities (ऐक्टिविटिज) = गतिविधियाँ, coal mining (कोल् माइन्ड्) = कोयला खदान, bachelor (बैचुल(र)) = कुँवारा, adjust (अजस्ट्) = समायोजन करना, conditions (कन्डिशूनूज) = परिस्थितियाँ, ill-equipped (इक्-इक्विप्ूट) = साधनरहित, circuit house (सकिट हाउस) = विश्राम-गृह, makeshift (मेक्शिफ्ट्) = काम-चलाऊ, stone quarry (स्टोज क्वॉरि) = पत्थर-खदान, asset (ऐसेट्) = उपयोगी व्यक्ति, uncomplainingly (अनकम्प्लेन्ड्ल्लि) = बिना शिकायत के/खुशी से, anecdotes (ऐैनिकूडोट्स) = किस्से, varied (वेअरिड्) = विविध, amazing (अमेज्डू) = आश्चर्यजनक, capacity (कैंपैसटि) = क्षमता, ingredients (इनग्रीडिअन्ट्) = घटक/तत्त्व, desolate (डेसलट्) = निर्जन, landscape (लैण्डस्केप्) = भू-दृश्य, visible (विजिबल्) = दिखाई देने वाला, miraculously (मिřैक्यलसलिस) = चमत्कारपूर्णता से, conjure up (कनूज(र) अप्) = जादू से/बाजीगरी से पैदा करना, delicious (डिलिशृस्) = स्वादिष्ट, zinc-sheet (जिङ्क-शीट्) = जिंक से बनी चदरें, leisurely (लेश(र)लि) = विश्रामपूर्ण/फुर्सत भरा, pouring
(पॉ(र)इ्) = उंडेलते हुए, muttering (मटर(र)ड्) = बुदबुदाते हुए, dozing off (डोजिंग ऑफ्) = नींद (दिन के समय झपकी), thriller (थ्रिल(र)) = सनसनीखेज फिल्म/नाटक/पुस्तक आदि, thrall (थ्रॉल) = मन पर छा जाना, imaginative (इमैजिनेटिव) = कल्पित, flourishes (फ्लरिशेज) = आगे बढ़ना, uprooted (अपरूट्ड्) = उखड़ा हुआ, arched (आच्) = चापीय/चाप रूप में, gesture (जेसचं(र)) = हाव-भाव, deserted (डिर्जिट्ड) = वीरान, enormous (इनॉर्मस्) = विशाल, bushy beast (बुशि बीस्ट) = झाड़ीदार/घना पशु, lying sprawled (लाइङ्ग् स्प्रॉलुड्) = फैला पड़ा था, uncritically (अनक्रिटिकल्लि) = बिना आलोचना।
हिन्दी अनुवाद : यह कहानी गणेश को महेन्द्र नाम के नवयुवक ने सुनाई थी। महेन्द्र एक कम्पनी में कनिष्ठ निरीक्षक था जो कि विभिन्न प्रकार के निर्माण स्थलों जैसे उद्योगों, पुलों, बाँधों आदि के लिए अपने निरीक्षकों की सेवाएँ भाड़े पर उपलब्ध कराती थी। महेन्द्र का काम कार्य-स्थलों की गतिविधियों पर दृष्टि रखना था। उसे अपने मुख्य कार्यालय के निर्देशानुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहना पड़ता था : कोयले की खान के क्षेत्र से किसी रेलवे पुल के निर्माण स्थल को, वहाँ से कुछ महीने बाद किसी रसायन संयन्त्र पर जो कहीं लगाया जा रहा हो।
वह कुँवारा था। उसकी आवश्यकताएँ साधारण थीं और वह हर प्रकार की परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लेता था, चाहे कोई घटिया-सा विश्राम-गृह हो और चाहे पत्थरों के खदान के बीच कोई काम-चलाऊ टेंट। परन्तु उसका रसोइया ईश्वरन उसके लिए बड़े काम का आदमी था। ईश्वरन को महेन्द्र से बड़ा लगाव था और जहाँ कहीं भी महेन्द्र की नियुक्ति होती वह उसके साथ खुशी से चला जाता था। वह महेन्द्र के लिए भोजन पकाता, उसके कपड़े धोता, और रात को उसके साथ गप्प-शप्प करता था। वह विभिन्न विषयों पर अनगिनत कहानियाँ-किस्से गढ़ सकता था।
ईश्वरन में एक गुण यह था कि वह उन निर्जन स्थानों में भी जहाँ कोई दुकान आदि दिखाई न देती थी वहाँ, सब्जियों व पकाने की अन्य वस्तुएँ न जाने कहाँ से पैदा कर देता था। वह टीनों के छप्पर के नीचे नये कार्य-स्थल पर आने के एक घण्टे के भीतर ही ताजी सब्जियों से बना स्वादिष्ट भोजन जादू की भाँति तैयार कर देता था।
महेन्द्र सबेरे जल्दी उठकर नाश्ता खाकर अपने काम पर चला जाता था, वह साथ में पकाया हुआ कुछ भोजन भी ले जाता था। पीछे से ईश्वरन छप्पर को ठीक करता, कपड़े धोता और फिर पानी की कई बाल्टियों से मजे से नहाता था और नहाते समय कोई प्रार्थना भी गुनगुनाता रहता था।
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इतने में दोपहर के भोजन का समय हो जाता था। खाना खाकर सोने से पहले वह कुछ देर पढ़ता था। प्रायः वह कई सौ पृष्ठों की तमिल भाषा में रोमांचक पुस्तक पढ़ता था। उसमें दिए गए काल्पनिक वर्णन व वृत्तान्त ईश्वरन के मन पर छा जाते थे।
उसके अपने वर्णन भी उन तमिल लेखकों से प्रभावित होते थे जिनकी पुस्तकें वह पढ़ता था। जब वह कोई साधारण-सी घटना का वर्णन भी करता था तो उसमें भी रोमांच और आश्चर्यजनक अन्त पैदा करने का प्रयास करता था। उदाहरण के लिए, जब उसे यह बताना होता कि उसने सड़क पर गिरा हुआ पेड़ देखा तो वह भौंहों को चढ़ाकर और हाथों को नाटकीय ढंग से हिलाकर कहता था— सड़क सुनसान थी और मैं अकेला। अचानक मैंने सड़क पर कोई वस्तु देखी जो लगता था जैसे कोई बड़ा भारी झाड़ीदार जैसा पशु सड़क के आर-पार लेटा हुआ है। मेरे मन में आया लौट चलूँ। परन्तु जब मैं समीप आया तो देखा कि गिरा हुआ पेड़ था, जिसकी सूखी टहनिियाँ फैली पड़ी थीं। महेन्द्र अपनी टाट की कुर्सी पर लेट जाता और ईश्वरन की कहानियों को बिना आलोचना किए सुनता रहता था।
"The place .................................... and collapsed."
कठिन शब्दार्थ : timber (टिम्ब(र)) = इमारती लकड़ी, logs (लॉग्ज) = पेड़ से काटा लकड़ी का लट्ठा, prologue (प्रोलॉगू) = प्रस्तावना, tusker (टस्कू(र)) = हाथी, escaped (इस्केपूट) = बच निकला, roam (रोम्) = विचरण करना, creepers (क्रीप(र)ज) = लताएँ, emulation (एम्युलेश्न्) = अनुकरण, outskirts (आउटस्कट्स) = बस्ती का बाहरी भाग/सीमा, fences (फेन्सूज) = बाड़, smashed (स्मेश्ट) = चूर-चूर कर देना, grunted (ग्रन्ट्ड) = चिंघाड़ा, shrubs (श्रुब्ज) = झाड़ियाँ, depredations (डिप्रेडेश्नूज्) = विध्वंस, inhabitants (इनहैबिट्टन्ट्स) = निवासी, disappeared (डिसपिअ(र)ड) = ओझल हो गये, grabbed (ग्रैबड) = झपटकर पकड़ा, menacingly (मेनसूड़ गलि) = धमकी से, hypnotised (हिपर्नेटाइज्ड) = सम्मोहित किया, trumpeted (ट्रम्पूट्ड) = चिंघाड़ा, mustering (मसट(र)ङ्) = एकत्रित करते हुए, whacked (वैकुट) = कसकर चोट की, toenail (टेनिल) = पैर की अंगुली का नाखून, shivered (शिव(र)ड) = काँपा (डर या ठण्ड से), collapsed (कलैप्स्ट्) = अचानक गिरना।
हिन्दी अनुवाद : ईश्वरन अपनी कहानी सुनाना शुरू करता— जहाँ का मैं रहने वाला हूँ वह स्थान इमारती लकड़ी के लिए प्रसिद्ध है। वहाँ बड़ा समृद्ध जंगल है। लकड़ी के लट्ठे हाथियों द्वारा ट्रकों पर लादे जाते हैं। वे विशाल, हृष्ट-पुष्ट पशु होते हैं। जब वे बिगड़ जाते हैं तो
बड़े-बड़े अनुभवी महावत भी उन पर काबू नहीं पा सकते। इस भूमिका के पश्चात् ईश्वरन हाथी से सम्बन्धित कोई किस्सा सुनाने में लग जाता।
"एक दिन एक नर हाथी लकड़ियों के प्रांगण से भाग निकला और इधर-उधर झाड़ियों को रौंदता, जंगली बेलों को उखाड़ता और टहनियों को मन-मर्जी से तोड़ता हुआ घूमने लगा। आप जानते हैं, श्रीमान्, कि जब एक हाथी पागल हो जाता है तब वह कैसे व्यवहार करता है।" अपनी ही कहानी से उत्तेजित होकर ईश्वरन पागल हाथी की नकल करता हुआ फर्श पर उछल-कूद करने लग जाता।
ईश्वरन अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हुआ कहता— हाथी हमारे नगर के बाहर किनारे पर आ गया। वह चारदीवारी को ऐसे तोड़ रहा था जैसे माचिस की तीलियाँ हों। फिर वह मुख्य सड़क पर आ गया और फल, मिट्टी के बर्तन व कपड़े की सब दुकानों को उसने तोड़ डाला। लोग घबरा कर इधर-उधर भागने लगे। फिर हाथी ईंटों की चार-दीवारी तोड़ कर स्कूल के खेल के मैदान में आ गया जहाँ पर बच्चे खेल रहे थे। सब बच्चे दौड़ कर कमरों में घुस गए और दरवाजे कस कर बन्द कर लिए। हाथी चिंघाड़ता हुआ घूम रहा था, फुटबाल के गोल के खम्बे उखाड़ दिए, व%.्लीबॉल के नेट को फाड़ डाला और पानी का ड्रम ठोकर मारकर चपटा बना दिया और सब झाड़ियाँ उखाड़ डालीं। सभी अध्यापक स्कूल की छत पर चढ़ गए। वहाँ से वे हाथी की लूटपाट का दृश्य बेबस खड़े देख रहे थे। नीचे मैदान में एक भी व्यक्ति न था। गलियाँ ऐसे खाली पड़ी थीं जैसे वहाँ के वासी अचानक लुप्त हो गए हों।
मैं उस समय छोटी कक्षा में पढ़ता था और छत पर खड़ा यह दृश्य देख रहा था। न जाने मुझे अचानक का सूझी। एक अध्यापक के हाथ से छड़ी लेकर मैं सीढ़ियों से नीचे उतर कर आँगन में आ गया। हाथी चिंघाड़ा और मुझे डराने के लिए टहनी हिलाई जो उसने अपनी सूंड में पकड़ रखी थी। उसने जोर से पाँवर धरती पर मारा जिससे धूल-मिट्टी उड़ी। उसे देख कर डर लगता था। परन्तु मेरे हाथ में डंडा पकड़े धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा। लोग सम्मोहित हुए आस-पास की छतों से यह दृश्य देख रहे थे। हाथी ने क्रोध से मुझे देखा और वह मुझ पर टूट पड़ने को तत्पर था। वह अपनी सूंड उठा कर जोर से चिंघाड़ा। उसी क्षण मैं की ओर बढ़ा और अपनी पूरी शक्ति बटोर कर उसके तीसरे नाखून पर जोर से डण्डा मारा। क्षण-भर के लिए तो वह पशु भौंचक्का दिखाई दिया : फिर वह सिर से पैर तक काँपा और धड़ाम से गिर पड़ा।
At this point .......................... Iswaran continued.
कठिन शब्दार्थ : unfinished (अनफिनिश्ड) = अपूर्ण/अधूरी, mumbling (मूब्लड्) =
बुदबुदाते/फुसफुसाते, rapt (रैप्ट) = तल्लीन, shrug (श्रग्) = कंधे उचकाना, casually (कैशुअलि) = अकस्मात्/लापरवाही से, paralyses (पैर)लाइज्ज) = लकवाग्रस्त कर देना, horror (हॉर(र)) = दहशत, credible (क्रेडब्ल) = विश्वसनीय, inimitable (इनिमिटब्ल्) = अति उत्कृष्ट (जिसकी नकल नहीं हों सके), auspicious (ऑस्पिषस्) = शुभ, ancestors (ऐनसेसट(र)ज) = पूर्वज, complimented (कॉम्प्लिमन्ट्ड) = बधाई दी, culinary skills (कलिनरि स्किल्ज्) = पाक कला-कौशल, garish (गेअरिश्) = अरुचिकर चमकीला/भड़कीला, supernatural (सूप्नैन्रल्) = अलौकिक/दिव्य, occupying (आकुयुपाइङ्ग्) = भूक्षेत्र में रहना, burial ground (बेरिअल् ग्राउन्ड) = दफनाने की जमीन, pleasant reverie (प्लेजून्ट् रेवरि) = दिवा-स्वप्न, drifted (ड्रिफ्ट्ड) = विचरण किया, skull (स्कल) = खोपड़ी। | प्रसन्न दिख रहा था परन्तु अचानक उसने भूत-प्रेतों की कहानी सुनानी आरम्भ कर दी।
उसने कहना शुरू किया—आप जानते हैं, श्रीमान् कि पूरा कारखाना क्षेत्र किसी समय कब्रिस्तान था। महेन्द्र इतना बढ़िया भोजन करने के पश्चात् दिन के सपनों में डूबा गया था। यह सुनकर उसे एकदम एक झटका-सा लगा। ईश्वरन कहता गया—मैं तो उसी दिन से यह जानता था जब मुझे रास्ते में पड़ी खोपड़ी मिली थी। अभी भी कभी-कभी मुझे खोपड़ियाँ व हड्डियाँ पड़ी मिल जाती हैं।
He went on .................................................miles away.
कठिन शब्दार्थ : ghosts (गोस्ट्) = प्रेतात्मा/भूत, off and on (ऑफ् एण्ड ऑन) = कभी-कभी, ugly (अगलि) = कुरूप/भद्दा, matted (मैट्टिट्) = उलझे हुए गंदे (बाल), shrivelled (श्रिवल्ड्) = मुरझाया, skeleton (स्केलिट्न) = कंकाल/ढाँचा, foetus (फोट्स) = भ्रूण, interrupted (इन्टरप्ट्ड) = बाधित किया, sharply (शापुलि) = तेजी से, crazy (क्रेजि) = पागल, spirits (स्पिरिट्स) = प्रेतात्माएँ, figment (फिगमॅन्ट) = मनगढ़ंत बात, digestive (डाइजेसेटिव्) = पाचन, sulk (सल्क) = नाराज, cheerful (चिअफ्ल्) = प्रसन्न, talkative (टॉक्टिव्) = वाचाल, peered into (पीअ(र)ड इन्टु) = में झाँकना, vicinity (वसिनटि) = पास-पड़ोस में, twinkling (ट्विङ्कल्इ) = झिलमिलाते।
हिन्दी अनुवाद : इस बिन्दु पर कहानी को छोड़ ईश्वरण खड़ा हो जाता और बुदबुदाता हुआ कहता—मैं गैस जलाकर और खाना गर्म करके अभी आया। महेन्द्र जो कहानी को बड़े ध्यान से सुन रहा था, वह अधर में रह जाता। जब ईश्वरण लौटता तो वह कहानी को आते ही फिर शुरू न करता। महेन्द्र उसे याद कराता कि कहानी अभी समाप्त नहीं हुई थी। तब ईश्वरन अचानक कंधे उचकाकर कहता—हाँ, हाथी का उपचार करने एक पशु-चिकित्सक को बुलाया गया था और दो दिन पश्चात् उसका महावत उसे जंगल में ले गया था। | हिन्दी अनुवाद : वह सुनाता गया कि कभी-कभी रात को उसे भूत कैसे दिखाई देते थे। “मैं इनसे आसानी से नहीं डरता, श्रीमान्। मैं एक साहसी व्यक्ति हूँ। परन्तु एक स्त्री का भयानक भूत पूर्णिमा की आधी रात को कभी-कभी दिखाई देता है। वह बड़ी कुरूप स्त्री है, उसके उलझे बाल हैं और चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ी हैं, वह कंकाल के समान है और अपनी गोद में भ्रूण उठाए हुए होती है।”
महेन्द्र यह वर्णन सुनकर काँप उठा और उसने आवेश में आकर ईश्वरण को टोक दिया—“तुम पागल हो, ईश्वरण। भूत-प्रेत नाम की कोई चीज नहीं होती। यह सब तुम्हारी कल्पना मात्र है। अपने पाचन तंत्र की जाँच कराओ— और हो सके तो अपने दिमाग की भी। तुम बकवास कर रहे हो।”
महेन्द्र ने पूछा, “अच्छा ईश्वरण, तुम यह बताओ कि तुमने हाथी को कैसे गिरा दिया था।”
मैं समझता हूँ, श्रीमान्, इसका सम्बन्ध जापानी कला कराटे या जु-जित्सु से था जिसके बारे में मैंने कहीं पढ़ा था। देखो, इससे नाड़ी तन्त्र अस्थायी रूप से शिथिल हो जाता था। कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता था जिस दिन ईश्वरण कोई रोमांचक दहशत वाली और उत्कण्ठा वाली कहानी न सुनाए। चाहे कहानी विश्वास करने योग्य हो या नहीं, महेन्द्र को कहानी सुनने में आनन्द आता था क्योंकि ईश्वरण का सुनाने का ढंग निराला था। ईश्वरण के कारण महेन्द्र को अपने कमरे में टीव्ही की कमी अनुभव नहीं होती थी। | उसने कमरा छोड़ दिया और सोने चला गया। यह आशा करते हुए कि ईश्वरण दो-एक दिन तक नाराज रहेगा। परन्तु अगले दिन ही उसने देखा कि वह तो पहले की भाँति प्रसन्न व बातूनी था।
उस दिन से महेन्द्र को अपनी सभी बहादुरीपूर्ण बातों के बावजूद सोते समय कुछ बेचैनी रहने लगी। हर रात वह अपने कमरे के समीप वाली खिड़की में से बाहर अंधेरे में झाँकता था यह देखने के लिए कि आस-पास कोई छाया |
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तो नहीं घूम रही है। परन्तु उसे अँधेरा ही अँधेरा दिखाई देता था जिसमें मीलों दूर तक फैक्ट्री की टिमटिमाती बत्तियाँ थीं।
He had ........................................................... next day!
कठिन शब्दार्थ : admire (अड़माइअ(र)) = प्रशंसा करना, altogether (ऑल्टगेद(र)) = पूर्णतया, moan (मोन्) = कराहट, prowling (प्राउल्ङ्) = शिकार के लिए दबे पाँव विचरण करना, guttural (गट्(र)ल) = कंठ्य, curiosity (क्युरिअॉसिटि) = उत्सुकता, behold (बिहोल्ड) = देखना, wailing (वेलङ्) = विलाप, feline (फीलाइन्) = बिल्ली प्रजाति से सम्बन्धित, temptation (टेम्प्टेशन्) = चाह, windowsil (विण्डोसिल) = खिड़की के नीचे का तंग खाना, clutching (क्लचूड़) = पकड़े हुए, sweat (स्वेट्) = पसीना, pillow (पिलो) = तकिया, panting (पैन्टङ्) = हाँफते हुए, ghastly (गास्ट्लि) = अत्यन्त अप्रिय/हानिकर, subconscious (सबकॉन्शस्) = अवचेतन, faded (फेड़ड्) = रंग उतरना, greeted (ग्रीट्ड) = अभिवादन किया, resolving (रिजॉल्व्ड्) = कृतसंकल्प होकर, haunted place (हॉम्प्ट्ड प्लेस्) = भूतहा स्थान।
हिन्दी अनुवाद : उसे पूर्णिमा की रात में चाँदनी में धुला सफेद भू-दृश्य बहुत सुन्दर लगता था। परन्तु ईश्वरन की उस भूत-स्त्री की कहानी सुनने के पश्चात् पूर्णिमा की रात को खिड़की से बाहर झाँकने का उसमें साहस न रह गया था। एक रात अपनी खिड़की के समीप कराहने की आवाज सुनकर महेन्द्र की नींद खुली। पहले तो उसने यह समझा कि कोई बिल्ली चूहों के शिकार के लिए घूम रही है, परन्तु आवाज गले की इतनी गहराई से आ रही थी कि यह बिल्ली की आवाज नहीं हो सकती थी। उसे बाहर देखने की जिज्ञासा हुई, पर उसे डर लग रहा था कि कोई भयानक दृश्य न हो जिससे उसकी हृदय गति रुक जाए। परन्तु आवाज ऊँची होती गई और स्पष्ट रूप से वह बिल्ली की नहीं थी। वह अपनी जिज्ञासा को रोक न सका। खिड़की के समीप बैठकर उसने बाहर चाँदनी रात में झाँका। थोड़ी दूरी पर ही एक छाया गठरी-सी उठाए खड़ी थी। महेन्द्र डर से पसीना-पसीना हो गया और हाँफते हुए वह अपने तकिए पर जा गिरा। धीरे-धीरे जब वह इस भयानक दृश्य के प्रभाव से उबरा तो उसने अपने मन को समझाया कि यह अवश्य ही उसके अपने मन की किसी प्रकार की कल्पना होगी, कोई ऐसी चाल जो उसके अवचेतन मन ने उस पर चली होगी।
सवेरे जब वह उठा, नहाया और नाश्ता करने अपने कमरे से बाहर आया तो रात वाली भयानक घटना उसके मन से निकल चुकी थी। ईश्वरन ने दरवाजे पर उसका दोपहर के
खाने का पैकेट व थैला थमाया। जैसे ही महेन्द्र बाहर कदम रख रहा था, ईश्वरन धृष्टता से मुस्कुराया और बोला, 'श्रीमान्, याद है जब मैंने आपको उस स्त्री भूत की बात सुनाई थी तो आप मुझसे नाराज हो गए थे। अब तो आपने भी कल रात उसे देख लिया है। जब मैंने आपके कमरे से आवाज आती सुनी तो दौड़कर आया था..........'
महेन्द्र को कंपकंपी-सी हुई। उसने ईश्वरन का वाक्य पूरा न सुना। वह सीधा अपने कार्यालय में गया और अपना त्याग-पत्र दे दिया। उसने भूतों वाले उस स्थान को अगले दिन ही छोड़ कर जाने का निश्चय कर लिया था!
TEXTUAL QUESTIONS
Think About It :
Q. 1. In what way is Iswaran an asset to Mahendra?
ईश्वरन किस प्रकार से महेन्द्र के लिए उपयोगी व्यक्ति है?
Ans. Iswaran is an asset to Mahendra in the following way. He was Mahendra's devoted servant. He accompanied Mahindra wherever he was transferred.
He could prepare tasty food from fresh vegetables which he could procure even from a desolate place. He was a very good story-teller. Mahendra didn't feel the need to buy a T.V. set. He washed Mahendra's clothes and cleaned his tent.
ईश्वरन निम्न तरीके से महेन्द्र के लिए उपयोगी है। वह महेन्द्र का समर्पित नौकर था। जहाँ भी महेन्द्र का स्थानान्तरण हुआ वह वहाँ गया।
वह ताजी सब्जियों, जो वह एक निर्जन स्थान से भी प्राप्त कर सकता था, से स्वादिष्ट व्यंजन बना सकता था। वह एक बहुत अच्छा कहानी सुनाने वाला था। महेन्द्र को टी.वी. सेट खरीदने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। वह महेन्द्र के वस्त्र धोता था और टेंट साफ करता था।
Q. 2. How does Iswaran describe the uprooted tree on the highway? What effect does he want to create in his listeners?
ईश्वरन सड़क पर पड़े एक उखड़े वृक्ष का कैसे वर्णन करता है? वह अपने सुनने वालों पर क्या प्रभाव उत्पन्न करना चाहता है?
Ans. Once Iswaran saw an uprooted tree on the highway. With arched eyebrows and stretched hands he said, "The road was deserted and I was all alone. Suddenly I spotted something that looked like an enormous bushy beast lying
sprawled across the road. I was half inclined to turn and go back but I came closer. I saw that it was a fallen tree with its dry branches spread out." Iswaran described even a simple incident in such an interesting dramatic way with gestures that it created suspense and surprise in his listeners.
एक बार ईश्वरन ने एक उखड़ा वृक्ष हाइवे पर देखा। भौंहें चापनुमा बनाकर और हाथ फैलाकर उसने कहा, "सड़क निर्जन थी और मैं अकेला था। मैंने कोई चीज देखी जो एक विशाल झाड़ीदार पशु, जो सड़क पर फैले हुए पड़ा हो, जैसे लगी। मैं घूमने तथा वापस जाने का कम इच्छुक था लेकिन मैं नजदीक आया। मैंने देखा कि यह तो एक गिरा हुआ वृक्ष था जिसकी शाखाएँ फैली हुई थीं।" ईश्वरन ने एक सामान्य घटना को भी इतने रुचिपूर्ण नाटकीय तरीके से हाव-भाव से बताया कि इससे श्रोताओं में भी रहस्य और विस्मय उत्पन्न हो गया।
Q. 3. How does he narrate the story of the tusker? Does it appear to be plausible?
वह हाथी की कहानी कैसे सुनाता है? क्या यह सम्भव लगता है?
Ans. He narrates the story of the tusker in a curious way. He says that one day a tusker escapes from the timber yard and begins to roam about, stamping on bushes, tearing up wild creatures and breaking branches at will. At the outskirts of his town, the mad elephant breaks down the fences, smashes all the fruit stalls, mud pots and clothes. People run helter-skelter in panic. The elephant then enters a school ground by breaking the brick wall. Boys run into the classrooms. The beast pulls out the football goal post, tears down the volleyball net, kicks and flattens the drum kept for water, and uproots the shrubs. Teachers climb up the terrace.
Iswaran grabs a cane from a teacher and comes downstairs. The beast swings a branch, stamps its feet, kicks up a lot of mud and dust. Iswaran musters courage and whacks its third toe-nail and then only it collapses.
The story is implausible. Iswaran was a junior class student only. How could he go near this mad elephant.
वह उत्सुक तरीके से हाथी की कहानी को वर्णित करता है। वह कहता है कि एक दिन एक हाथी टिम्बर यार्ड से निकल
भागता है और विचरण करने लगता है, झाड़ियों को कुचलते हुए, जंगली लताओं को चीरते हुए और चाहे जिन शाखाओं को तोड़ते हुए। उसके कस्बे की सीमा पर, पागल हाथी, बाड़ों को तोड़ता है, सभी फल-स्थालों, मिट्टी के बर्तनों और कपड़ों को फाड़-तोड़ कर नष्ट कर देता है। लोग भय से इधर-उधर दौड़ते हैं। हाथी फिर दीवार तोड़कर विद्यालय के मैदान में घुसता है। बच्चे कक्षा-कक्षाओं में भाग जाते हैं। यह जानवर फुटबाल के गोल पोस्ट को उखाड़ देता है, वॉलीबॉल नेट को फाड़ देता है, पानी के लिए रखे ड्रमों को ठोकर मारकर समतल कर देता है और झाड़ियों को उखाड़ देता है। अध्यापकगण छत पर चढ़ जाते हैं।
ईश्वरन एक अध्यापक से एक डण्डा लेता है और नीचे आता है। यह जानवर एक शाखा को घुमाता है, पैर मारता है, बहुत-सा गारा व धूल फेंकता है। ईश्वरन साहस बोटोरता है और इसके पैर की तीसरी अंगुली के नाखून पर कसकर चोट मारता है और तब जाकर यह गिरता है।
कहानी असम्भाव्य लगती है। ईश्वरन एक जूनियर क्लास विद्यार्थी है। वह इस मदमस्त/पागल हाथी के पास कैसे जा सकता था।
Q. 4. Why does the author say that Iswaran seemed to more than make up for the absence of a TV in Mahendra's living quarters?
लेखक क्यों कहता है कि महेंन्द्र के घर में ईश्वरन टी.वी. की कमी की पूर्ति बहुत अच्छी तरह से करता था?
Ans. The author says that Iswaran seemed to more than make up for the absence of a TV in Mahendra's living quarters because every night, after dinner he used to narrate an interesting event/story to Mahendra. His style of narrating is very interesting, full of suspense and dramatic. His gestures and hand movements add colour to his narration. So, Iswaran is himself a living T.V. set.
लेखक कहता है कि महेंन्द्र के घर में ईश्वरन टी.वी. की कमी की पूर्ति बहुत अच्छी तरह से करता दिखाई देता था क्योंकि प्रत्येक रात को डिनर के उपरान्त वह महेंन्द्र को एक रुचिकर घटना/कहानी सुनाता था। उसके कहानी वर्णन की शैली बहुत रुचिकर है, सस्पेन्स से भरी है और नाटकीय है। उसके हाव-भाव व हाथों की क्रियाएँ वर्णन को अधिक रंगीन बनाते हैं। अतः ईश्वरन स्वयं एक जिंदा टेलीविजन है।
Q. 5. Mahendra calls ghosts or spirits a figment of the imagination. What happens to him on a full-moon night?
महेश्वर भूत व प्रेतात्माओं को काल्पनिक/मनगढ़न्त मानता है। उसे पूर्णिमा की रात क्या होता है?
Ans. Mahendra calls ghosts or spirits a figment of imagination because there are no such things. Iswaran is crazy. He should get his digestive system examined and may be his head as well. He is talking nonsense.
On a full-moon night, he wakes up from his sleep. He hears a low moan to his window. With curiosity, he looks out. There, not too far, was a dark cloudy form clutching a bundle. Mahendra breaks into a cold sweat and falls back on the pillow, panting.
महेश्वर भूतों या प्रेतात्माओं को कल्पना की गढ़न्त कहता है क्योंकि ऐसी कोई चीज नहीं होती है। ईश्वरण पागल है। उसे अपने पाचन तन्त्र की जाँच करवानी चाहिए और शायद अपने दिमाग की भी। वह निरर्थक बातें करता है।
एक पूर्ण चन्द्रमा की रात को, वह अपनी नींद से जागता है। वह खिड़की के पास धीमी-धीमी कराहट सुनता है। उत्सुकता के साथ, वह बाहर झाँकता है। वहाँ, अधिक दूर नहीं, एक काली, गंदली-सी आकृति जिसने एक बण्डल पकड़ रखा था, दिखाई दी। महेन्द्र पसीना-पसीना हो जाता है और अपने तकिये पर पुनः गिर जाता है, हाँपने लगता है।
Q. 6. Can you think of some other ending for the story?
क्या आप कहानी का कोई दूसरा अन्त सोच सकते हो?
Ans. Yes, I can think of another ending for the story. It should end in this manner. Iswaran in disguise makes low moan near the window. Mahendra sees a dark cloudy form. Though he breaks into a cold sweat, he musters courage and embraces the form. To his surprise, it is Iswaran in disguise.
हाँ, मैं कहानी के लिए दूसरा अन्त विचार सकता हूँ। इसे इस तरह से अन्त होना चाहिए। ईश्वरण खिड़की के नजदीक भेष बदलकर कराहट निकालता है। महेन्द्र एक काली गंदली-सी आकृति देखता है। यद्यपि वह पसीना-पसीना हो जाता है, वह साहस बटोरता है और उस आकृति को बाहों में भर लेता है। उसे विस्मय होता है कि यह ईश्वरण है जिसने भेष बदल रखा है।
ADDITIONAL QUESTIONS
I. Multiple Choice Questions :
1. To whom was the story narrated by Mahendra?
(A) Suresh
(B) Dinesh
(C) Ganesh
(D) Writer
2. What was Mahendra professionally?
(A) A police inspector.
(B) A junior supervisor in a firm.
(C) A school teacher.
(D) None of the above.
3. Mahendra would listen to Iswaran's tales ............ .
(A) critically
(B) with a pinch of salt
(C) uncritically
(D) indifferently
4. Which art did Iswaran use to bring down the elephant?
(A) A Malasian magic trick.
(B) A hypnotic mantra.
(C) A Japanese art, Karate or jujitsu.
(D) None of the above
5. Was Mahendra as brave as his talk?
(A) Yes
(B) No
(C) Can't say
(D) None
6. What did Mahendra do the next morning?
(A) He resigned his job.
(B) He prayed for a transfer.
(C) He prayed for a leave.
(D) None.
Answers— 1. (C) 2. (B) 3. (C) 4. (C) 5. (B) 6. (A)
II. Answer the following questions in about 60 words :
Q. 1. How does Iswaran make his stories look real?
ईश्वरन अपनी कहानियों को सच्ची दिखने वाली कैसे बनाता है?
Ans. Iswaran makes his stories look real by creating a background, and giving vivid descriptions of the scenes. When Iswaran used to narrate even the smallest of incidents he would try to work in suspense and a surprise ending in the account. In tusker's story, he tells he belongs to the place where elephants are used to haul the logs on to lorries.
ईश्वरन अपनी कहानियों को सच्ची दिखने वाली बनाता है उनकी पृष्ठभूमि देकर और दृश्यों का विविध वर्णन देकर। जब ईश्वरन कोई साधारण-सी घटना का वर्णन भी करता था तो उसमें भी रोमांच और आश्चर्यजनक अंत पैदा करने का प्रयास करता था। हाथी की कहानी में वह बताता है