In the Kingdom of Fools
In the Kingdom of Fools (मूर्खों के राज्य में)
कि वह उस स्थान से सम्बन्धित है जहाँ हाथियों को लॉरी में लट्टे पकड़ कर रखने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Q. 2. Compare and contrast Mahendra and Iswaran.
महेन्द्र व ईश्वरन की तुलना कीजिए।
Ans. Mahendra is a bachelor junior supervisor. His needs were simple and he is able to adjust himself in all kinds of odd conditions. He doesn't believe in ghosts. Iswaran is the multi-purpose cook of Mahendra. He is a good story-teller. He was attached to Mahendra and followed him wherever he is posted. He believes in ghosts.
महेन्द्र एक कुंवारा कनिष्ठ सुपरवाइजर है। उसकी जरूरतें साधारण थीं तथा वह सभी प्रकार की विषम परिस्थितियों में अपने को समायोजित कर सकता है। वह भूतों में विश्वास नहीं करता है। ईश्वरन, महेन्द्र का बहुउद्देशीय रसोइया है। वह एक अच्छा कहानी सुनाने वाला है। उसे महेन्द्र से लगाव था और जहाँ कहीं महेन्द्र की नियुक्ति होती वह वहाँ चला जाता है। वह भूतों में विश्वास करता है।
III. Answer the following questions in about 80 words :
Q. 1. Discuss Iswaran's qualities as a good story-teller.
एक अच्छे कहानी सुनाने वाले के रूप में ईश्वरन के गुणों पर चर्चा करें।
Ans. Iswaran does not pick up the thread of the story right away. He builds up his stories. Iswaran has all the qualities of a good story-teller. First, he generates interest by the art of narration. Second, he creates suspense and surprise by adding dramatic gestures in his stories. Third, he introduces the story by giving a background. Fourth, he presents vivid descriptions of the scenes. And fifth, he is the store-house of the stories.
ईश्वरन कहानी का सूत्र एकदम से नहीं पकड़ता था। वह अपनी कहानियों को गढ़ता है। ईश्वरन में एक अच्छे कहानी सुनाने वाले के सभी गुण हैं। प्रथम, वह वर्णन-कला द्वारा रुचि पैदा करता है। द्वितीय, वह अपनी कहानी में नाटकीय हाव-भाव के द्वारा रहस्य व विस्मय उत्पन्न करता है। तृतीय, वह पृष्ठभूमि देकर कहानी प्रस्तुत करता है। चतुर्थ, वह दृश्यों का वैविध्यपूर्ण प्रस्तुतिकरण करता है। पंचम, वह कहानियों का भण्डार-गृह है।
4. In the Kingdom of Fools
[ मूर्खों के राज्य में ]
---[(Kannada Folktale (ed.)]
A.K. Ramanujan
- पाठ के विषय में -यह विश्वास किया जाता है कि मूर्ख इतने खतरनाक होते हैं कि केवल बहुत बुद्धिमान लोग ही इनका प्रबन्ध कर सकते हैं (अर्थात् इनसे पार पा सकते हैं)। इस कहानी में मूर्ख कौन हैं? उनके साथ क्या घटित होता है?
| कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद |
|---|
| In the Kingdom......................................you next." |
| कठिन शब्दार्थ : disobeyed (डिसबेड) = अवज्ञा की, delighted (डिलाइटिड्) = प्रसन्न, disciple (डिसाइपलू) = शिष्य, stirring (स्टरड़्) = हिलना/डोलना, strangers (स्ट्रेन्ज(र)) = अजनबी, wander (वॉनड़(र)) = निष्प्रयोजन घूमना, groceries (ग्रोसरिज्) = खाद्य वस्तुएँ, astonishment (अस्टॉनिष्मन्ट) = विस्मय। |
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उसका शिष्य खुश हो गए। उन्होंने इस प्रकार की स्थिति के बारे में कभी नहीं सुना था। वे अपनी आवश्यकता की सभी खाद्य वस्तुएँ एक रुपये में खरीद सकते थे।
जब वे भोजन पका तथा खा चुके तो गुरु को लगा कि यह तो मूर्खों का राज्य है तथा यहाँ ठहरना कोई अच्छा विचार नहीं है। "यह स्थान हमारे ठहरने के लिए उपयुक्त नहीं है, चलो, यहाँ से निकल चलें," उन्होंने अपने शिष्य को बोला। पर शिष्य उस स्थान को छोड़कर नहीं जाना चाहता था। यहाँ हर वस्तु सस्ती थी। वह तो अच्छा सस्ता भोजन ही चाहता था। गुरु बोले, "ये सभी मूर्ख हैं। यह स्थिति बहुत समय तक नहीं चल सकेगी, और कोई नहीं बता सकता कि वे आपके साथ कैसा बर्ताव करें।"
But the disciple ............................. the house.
कठिन शब्दार्थ : sacred (सेक्रिड) = पवित्र, bull (बुल) = सांड, broke into (ब्रोकू इनूट) = सेंध लगाई, sneaked (स्नीकूट) = चुपके से आना, pursuing (पंस्यूइंग) = अनुसरण करते हुए, wrongdoer (रॉङ्झुअ(र)) = गलत करने वाला, compensate (कॉम्पेनसेट) = क्षतिपूर्ति करना, injustice (इन्जूसटिस) = अन्याय, summoned (समन्ड) = बुला भेजना।
हिन्दी अनुवाद : पर शिष्य, गुरु की बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह सुनने को (अर्थात् मानने को) तैयार नहीं हुआ। वह वहीं रहना चाहता था। अंत में गुरु ने अपना प्रयास छोड़ दिया तथा बोले, "तुम जो जी में आए करो, मैं तो जा रहा हूँ", और वह चले गए। शिष्य उसी राज्य में ठहरा रहा, हर दिन वह पेट भरता रहता—केले, घी तथा चावल, गेहूँ आदि खाता रहता, तथा सड़क के पवित्र साँड़ की भाँति मोटा हो गया।
एक दिन दिन-दहाड़े, एक चोर ने किसी धनी व्यापारी के घर में सेंध लगा ली। उसने दीवार में छेद किया तथा चुपके से घुसा गया, तथा जब वह लूट का माल बाहर लेकर जा रहा था, उस पुराने घर की दीवार उसके सिर पर गिर गई तथा उसी स्थान पर उसकी मृत्यु हो गई। उसका भाई भागकर राजा के पास पहुँचा तथा उसने शिकायत की, "सरकार, जब मेरा भाई अपना पुराना धंधा कर रहा था, तो उसके सिर पर दीवार आ गिरी तथा वह चल बसा। इसका सारा दोष इस व्यापारी का है। उसे अच्छी मजबूत दीवार बनवानी चाहिए थी। आप इस अपराधी को अवश्य दण्ड दें तथा मेरे परिवार को इस अन्याय के लिए क्षतिपूर्ति करें।"
राजा बोला, "न्याय मिलेगा। चिन्ता मत करो", तथा तुरन्त उसने उस घर के स्वामी को बुला लिया।
When the merchant ............................. it very well.
कठिन शब्दार्थ : burgled (बग्लड) = सेंधमारी की, accused (अक्यूज्ड) = अभियुक्त, pleads (प्लीज) = निवेदन करना/तर्क देना, guilty (गिल्टि) = दोषी, murdered (मंडेड) = हत्या की, put up (पुट अप) = निर्माण करना, built (बिल्टु) = निर्माण करना, messengers (नूज़(र)ज) = संदेशवाहक, bricklayer (ब्रिकुलेअ(र)) = मिस्त्री, execution (एक्सिक्यूशन्) = फांसी, complicated (कॉम्प्लिकेटेड) = जटिल, distracted (डिस्ट्रैक्टिड) = ध्यान बांटना।
हिन्दी अनुवाद : जब सौदागर आया, राजा ने उससे प्रश्न किया।
"तुम्हारा नाम क्या है?"
"अमुक और अमुक, हे राजन्।"
"क्या जब उस मृतक ने आपके घर में सेंध लगाई तो तुम घर पर ही थे?"
"जी हाँ, महाराज। उसने दीवार में छेद किया तथा दीवार कमजोर थी। वह उस पर गिर गई।"
"अपराधी अपना अपराध स्वीकार करता है। तुम्हारी दीवार ने इस व्यक्ति के भाई की जान ले ली। तुम उसके हत्यारें हो। हमें तुम्हें दण्ड देना होगा।"
"सरकार", निरुपाय व्यापारी बोला, "दीवार मैंने नहीं बनाई थी। यह तो वास्तव में उस व्यक्ति का दोष है जिसने दीवार चुनी थी। उसने इसे ठीक से नहीं बनाया। आप उसे दण्ड दें।"
"वह व्यक्ति कौन है?"
"सरकार, 'यह दीवार मेरे पिता के समय बनाई गई थी। मैं उस व्यक्ति को जानता हूँ। वह अब एक वृद्ध व्यक्ति है। वह पास में ही रहता है।"
राजा ने अपने दूतों को उस राजमिस्त्री को पकड़ लाने के लिए भेजा जिसने दीवार बनाई थी। दूत उसके हाथ-पाँवों बाँधकर उसे ले आए।
"तुम्मीं से कह रहा हूँ, क्या तुम्मीं ने इस व्यक्ति के पिता के जीवनकाल में दीवार बनाई थी?"
"जी हाँ, सरकार, मैंने बनाई थी।"
"यह दीवार तुमने किस प्रकार की बनाई थी। वह एक गरीब व्यक्ति पर गिर पड़ी तथा उसकी जान ले ली। तुम उसकी मौत के दोषी हो। हमें तुम्हें मृत्युदण्ड देना होगा।"
इससे पूर्व कि राजा उसकी मौत की सजा सुनाए, बेचारे राजमिस्त्री ने निवेदन किया, "अपना आदेश सुनाने से पूर्व कृपया मेरी बात सुन लें। यह सच है कि मैंने ही वह दीवार बनाई थी और वह मजबूत नहीं बनी। पर इसका कारण यह था कि मेरा मस्तिष्क उस समय अपने काम में नहीं था। मुझे भली-भाँति उस नर्तकी की याद है जो सारे दिन अपनी पायल झनकारती गली में आती-जाती रही और मैं अपनी आँखें तथा मन उस दीवार पर स्थिर न रख सका जो मैं बना रहा था। आप उस नर्तकी को बुला लें। मैं जानता हूँ कि वह कहाँ रहती है।"
"तुम सही कहते हो। मामला गंभीर है। हमें इसकी तह तक जाना होगा। ऐसे पेचीदे मामलों को निपटाना सरल नहीं होता। वह नर्तकी जहाँ भी हो उसे बुलाओ।"
नर्तकी जो अब एक वृद्ध महिला बन चुकी थी, भय से काँपती राजदरबार में आई।
"क्या कई वर्ष पूर्व जब यह गरीब व्यक्ति दीवार बना रहा था, तुम्हीं सड़क पर आ-जा रही थीं? क्या तुमने उसे देखा था?"
"जी हाँ, सरकार। मुझे भली-भाँति याद है।"
"So you did ................................. name him?"
कठिन शब्दार्थ : innocent (इनैन्सन्ट) = निर्दोष, goldsmith (गोल्डस्मिथ) = सुनार, jewellery (जुअलरि) = आभूषण, scoundrel (स्काउन्ड्रल्) = दुष्ट/बेईमान, damned (डैमड्) = झुंझलाहट व्यंजक शब्द, absolutely (ऐब्सलूट्लि) = पूर्णतया, weighing (वेइङ्) = तौलते हुए, evidence (एविडन्स्) = प्रमाण, culprit (कलप्रिट्) = दोषी, bailiffs (बेलिफ़्स) = न्यायिक अधिकारी, accusation (ऐक्यजुएशन्) = आरोप, impatient (इम्पेशन्ट) = बेचैन, mess (मेस्) = झंझट भरा।
हिन्दी अनुवाद : "तो तुम अपनी पायल झनकारती आ-जा रही थीं। तुम जवान थीं और तुमने उसका ध्यान काम से भटका दिया, इस कारण उसने खराब दीवार बना दी। वह दीवार एक गरीब सेंधमार पर गिर गई तथा उसकी जान ले ली। तुमने एक निरपराध व्यक्ति की हत्या की। तुम्हें दण्ड देना ही पड़ेगा।"
नर्तकी ने एक मिनट सोचा और फिर बोली, "सरकार, रुकिए। मुझे अब याद आया कि मैं उस सड़क पर क्यों आ-जा रही थी। मैंने कुछ सोना एक सुनार को अपने आभूषण बनाने हेतु दिया था। वह सुस्त और शैतान था। उसने अनेक बहाने बनाए, बोला कि आज आभूषण देगा, कुछ समय पश्चात् देगा। सारा दिन यही करता रहा। उसने मुझे दर्जनों बार अपने घर दौड़ाया। तभी इस राजमिस्त्री ने मुझे देखा था। दोष मेरा नहीं है। सरकार, दोष तो उस अधम सुनार का है।"
"बेचारी महिला, यह बिल्कुल सही कह रही है," राजा ने सबूत को तौल कर सोना (अर्थात् गवाही को ध्यान में रखकर कहा)। "आखिरकार हमने अभियुक्त को पकड़ ही लिया। उस सुनार को बुलाओ वह जहाँ कहीं भी छिपा है। फौरन बुलाओ।"
राजा के अमीन ने स्वर्णकार की खोज कर ली जो अपनी दुकान के कोने में छिपा बैठा था। जब उसने अपने विरुद्ध आरोप सुना तो उसने अपनी कहानी सुनाई।
"महाराज", वह बोला, "मैं तो गरीब सुनार हूँ। यह सच है कि मैंने इस नर्तकी को अपने द्वार पर कई बार आने पर विवश किया। मैंने उसको बहाने बनाकर टाला क्योंकि मैं उसके आभूषण तब तक नहीं बना सकता जब तक मैं एक धनी व्यापारी का ऑर्डर पूरा न कर लेता, उसके यहाँ विवाह होने जा रहा तथा वे लोग प्रतीक्षा नहीं कर सकते थे। आप जानते ही हैं कि धनी लोग कितने अधीर होते हैं।"
"वह धनी व्यक्ति कौन है जिसने तुम्हें बेचारी महिला के आभूषण बनाने से रोके रखा, उसे सड़क पर आने-जाने के लिए विवश किया जिससे इस राजमिस्त्री का ध्यान इतना भटक गया कि उसने दीवार खराब कर दी और जो एक निर्दोष व्यक्ति पर गिर पड़ी तथा उसके प्राण ले लिए? क्या तुम उसका नाम बता सकते हो?"
The goldsmith named ............................ and ghee.
कठिन शब्दार्थ : ruled (रूल्ड्) = व्यवस्था दी, inherited (इनहेरिटेड्) = विरासत में प्राप्त की, criminal (क्रिमिनल्) = अपराधी, sins (सिन्स्) = पाप, horrible (हॉर्बल्) = डरावने/भयानक, crime (क्राइम्) = अपराध, stake (स्टेक्) = सूली, फांसी का तख्ता, impaling (इम्पेलङ्) = फांसी, immediately (इमीजिअट्ल्) = तुरन्त।
हिन्दी अनुवाद : सुनार ने व्यापारी का नाम बताया और वह वही व्यक्ति था जो उस घर का असली मालिक था जिस घर की दीवार गिर गई थी। अब न्याय अंतिम चरण पर आ पहुँचा है, राजा ने सोचा, अपराधी वही व्यापारी निकला। जब उसे कठोरतापूर्वक राजदरबार में वापस बुलाया गया वह चीखता हुआ आया, "वह व्यक्ति मैं नहीं था जिसने आभूषणों का ऑर्डर दिया था, वह मेरे पिताजी थे। उनका देहान्त हो चुका है। मैं तो निर्दोष हूँ।"
पर राजा ने अपने मन्त्री से सलाह की तथा निर्णय दे दिया। "यह सच है कि तुम्हारे पिता असली कातिल हैं। वह अब संसार से कूच कर चुके हैं पर उनके स्थान पर किसी को तो दण्ड मिलना ही चाहिए। तुमने अपने अपराधी पिता की सम्पत्ति विरासत में पाई है, उनकी सम्पद्धा तथा उनके पाप भी। जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था तभी मुझे फौरन पता चल गया था कि तुम ही इस निर्मम अपराध की जड़ में हो। तुम्हें मरना ही होगा।"
और राजा ने आदेश दिया कि फाँसी के लिए एक नई सूली तैयार की जाए। जब सेवकों ने सूली को पैना कर लिया और अपराधी को फाँसी देने के लिए इसे तैयार कर लिया तो राजमन्त्री को महसूस हुआ कि धनी व्यापारी इतना दुबला-पतला है कि वह सूली पर भली-भाँति फिट नहीं किया। राजा को भी इस बात से चिन्ता हो गई।
"अब हम क्या करें?" वह बोला तभी अचानक उनके दिमाग में आया कि उन्हें बस किसी भी एक ऐसे मोटे व्यक्ति को खोजना था जिस पर सूली फिट आ जाए। नौकरों को तुरन्त एक ऐसे व्यक्ति की खोज में सारे शहर में भेज दिया गया जो सूली पर फिट आ जाए, और उन लोगों की दृष्टि उस शिष्य पर पड़ी जो महीनों तक केले, चावल, गेहूँ तथा घी खाकर मोटा हो गया था।
"What have I ............................................ after me."
कठिन शब्दार्थ : decree (डिक्री) = शासनादेश, vision (विशन) = मानसिक प्रतिबिम्ब, scrape (स्केप) = खुद बुलाई मुसीबत, scolded (स्कोल्ड्ड) = डांटा, whisper (विसप(र)) = कानाफूसी, addressed (अड्रेस्ट) = सम्बोधित किया।
हिन्दी अनुवाद : "मैंने कौनसा अपराध किया है? मैं निर्दोष हूँ। मैं तो एक संन्यासी हूँ।" वह चीखा।
"यह सच हो सकता है। पर यह तो शाही आदेश है कि हम एक ऐसे मोटे व्यक्ति को खोज लें जो सूली पर फिट हो जाए," वे बोले, तथा वे उस शिष्य को सूली के पास ले गए। शिष्य को अपने ज्ञानी गुरु के शब्द याद आ गए : "यह मूर्खों की नगरी है। तुम नहीं जानते कि ये लोग अगले क्षण तुम्हारे साथ क्या बर्ताव करेंगे।" जब वह अपनी मौत की घड़ियाँ गिन रहा था, उसने मन में गुरु को याद किया, उनसे निवेदन किया कि वह जहाँ भी हों उसकी पुकार सुन लें। गुरु ने सब कुछ एक स्वप्न छाया में देख लिया, उनमें चमत्कारी शक्ति थी, वह दूर तक देख सकते थे, और वह भविष्य को भी उसी प्रकार देख सकते थे जैसे कि वर्तमान तथा भूतकाल को। वह अपने शिष्य की प्राण रक्षा हेतु तुरन्त आ पहुँचा, जो अपने भोजन की लालसा के कारण ऐसी मुसीबत में फँस गया था।
जैसे ही वह आए, उन्होंने अपने शिष्य को डाँटा-फटकारा तथा धीरे से उससे कुछ कहा। फिर वह राजा के पास गए तथा बोले, "सर्वाधिक बुद्धिमान महाराज, दोनों में कौन बड़ा होता है—गुरु या शिष्य?"
"निश्चय ही गुरु। इसमें कोई सन्देह नहीं। तुम यह पूछ क्यों रहे हो?"
"तब आप मुझे ही पहले सूली पर लटकाएँ। मेरे शिष्य को मेरे पश्चात् सूली पर चढ़ाएँ।"
When the disciple ............ promptly executed.
कठिन शब्दार्थ : clamour (क्लैम(र)) = शोर-शराबा करना, puzzled (पज्ल्ड) = घबरा गया, mystery (मिस्ट्रि) = रहस्य, solemn (सॉलम्) = गम्भीर/सत्यनिष्ठ, earshot (इअशॉट्) = श्रवण सीमा, ascetic (असेटिक्) = संन्यासी, postponed (पॅस्पोनुड) = स्थगित किया, prison (प्रिज़न्) = जेल, disguised (डिसगाइज्ड) = वेश बदला, promptly (प्रॉम्प्ट्लि) = शीघ्रता से।
हिन्दी अनुवाद : जब शिष्य ने यह सुना, तो वह समझ गया और शोर-शराबा करने लगा, "पहले मुझे! आप मुझे यहाँ पहले आये थे! मुझसे पहले मृत्यु दो, उसे नहीं!"
गुरु तथा शिष्य इस बात पर झगड़ पड़े कि कौन पहले मृत्यु वरण करे। राजा इस व्यवहार को देखकर हैरान था। उसने गुरु से पूछा, "आप मरना क्यों चाहते हैं? हमने तो इस व्यक्ति को चुना क्योंकि हमें सूली के लिए उपयुक्त मोटा व्यक्ति चाहिए था।"
"आप मुझसे ऐसे प्रश्न न करें। पहले मुझे ही सूली पर चढ़ाएँ," गुरु ने उत्तर दिया।
"क्यों? इसमें कुछ भेद अवश्य है। बुद्धिमान व्यक्ति की भाँति मुझे भी समझाओ।"
"क्या आप यह वचन देते हैं कि यदि मैं आपको वह रहस्य बता दूँ तो आप मुझे मृत्यु-दण्ड दे देंगे?" गुरु ने पूछा।
राजा ने उसे वह पवित्र वचन दे दिया। गुरु उसे एक ओर ले गया, जहाँ नौकर-चाकर उनकी बात न सुन सकें। उसने राजा से कानाफूसी की, "क्या आप जानते हैं हम अभी क्यों मरना चाहते हैं, हम दोनों हैं? हम समस्त संसार का भ्रमण कर चुके हैं पर हमें आपके जैसी नगरी अथवा राजा नहीं मिल पाया। आपकी बनाई सूली परमात्मा की न्याय की सूली है। यह नई है। इस पर अब तक किसी अपराधी को मृत्यु-दण्ड नहीं दिया गया है। जो व्यक्ति इस पर पहले पहल मरेगा वह इस देश का राजा बनकर पुनर्जन्म लेगा और जो उसके पश्चात् मरेगा वह इस देश का भावी मन्त्री बनेगा। हम अपने संन्यासी जीवन से तंग आ चुके हैं। कुछ दिनों हम राजा तथा राजमन्त्री बनने का आनन्द लेना चाहते हैं। अब आप अपना वचन पूरा करें। महाराज, हमें फाँसी दे दें। याद रखो, मैं पहले मरना चाहूँगा।"
राजा गम्भीर विचारों में खो गया। वह नहीं चाहता था कि अगले जन्म में कोई अन्य व्यक्ति उसके राज्य का स्वामी बन जाए। उसे विचार करने हेतु कुछ समय की आवश्यकता थी। इस कारण उसने फाँसी दण्ड को अगले दिन सम्पन्न करने का आदेश दे दिया, तथा अपने राजमन्त्री से उसने गुपचुप मन्त्रणा की। "अगले जन्म में हमारे लिए यह सही नहीं होगा कि अपना राज्य अन्य लोगों को सौंप दें। आओ, हम स्वयं ही सूली पर चढ़ जाएँ तथा हम राजा और मन्त्री के रूप में पुनः जन्म ले लेंगे। महात्मा लोग झूठ नहीं बोलते", वह बोला तथा मन्त्री सहमत हो गया।
इसलिए उसने बधिकों को बोला "हम आज रात अपराधियों को भेजेंगे। जैसे ही पहला व्यक्ति आपके पास पहुँचे, उसे मार देना। फिर दूसरे व्यक्ति का भी वही हाल करना। यही मेरी आज्ञा है। कोई गलती मत करना।"
उस रात राजा तथा मन्त्री चुपके से कारावास में गए, उन्होंने गुरु तथा शिष्य को मुक्त कर दिया, स्वयं दोनों ने गुरु तथा शिष्य का भेष बना लिया, तथा अपने स्वामि-भक्त नौकरों के साथ जिस प्रकार पहले से व्यवस्था कर रखी थी, उन्हें सूली पर ले जाया गया तथा तुरन्त मौत के घाट उतार दिया गया।
When the bodies ..................................... other place.
कठिन शब्दार्थ : crows (क्रोज) = कौए, vultures (वलूच(र)ज) = गिद्ध, mourned (मॉिण्ड) = शोक प्रकट किया, persuade (पस्वेड्) = मनाया।
हिन्दी अनुवाद : जब उनके शवों को कौवों तथा गिद्धों को खिलाने हेतु सूली से उतारा गया तो लोग घबरा गए। उन्हें अपने सामने मृत राजा तथा मन्त्री के शव दिखाई दिए। सारे नगर में उलझन अथवा व्याकुलता थी। सारी रात उन लोगों ने शोक-संताप किया तथा राज्य के भविष्य के बारे में चर्चा की। कुछ लोगों को अचानक गुरु तथा शिष्य की याद आई और उन दोनों को पकड़ लिया गया जब वे चुपचाप नगर से बाहर चले जाने वाले थे। "हम लोगों को एक राजा तथा राजमन्त्री की आवश्यकता है," एक व्यक्ति ने कहा। अन्य लोग सहमत हो गए। गुरु तथा शिष्य से विनती की कि आप हमारे राजा तथा राजमन्त्री बन जाएँ। उन्हें शिष्य को राजी करने में बहुत तर्क-वितर्क नहीं करना पड़ा पर गुरु को राजी करने में अधिक समय लगा। अन्त में वे दोनों, मूर्ख राजा तथा राजमन्त्री के राज्य पर शासन करने को इस शर्त पर तैयार हो गए कि उन्हें सभी पुराने कानूनों को बदलने का अधिकार होगा। तभी से यह तय हो गया कि रात पुनः रात रहेगी तथा दिन दिन रहेगा, तथा आपको कुछ भी एक सिक्के के बदले में नहीं मिलेगा। वह राज्य किसी भी अन्य स्थान के समान हो गया।
TEXTUAL QUESTIONS
Think About It :
Q. 1. What are the two strange things the guru and his disciple find in the Kingdom of Fools?
मूर्खों के राज्य में गुरु तथा उसके चेले को कौनसी दो अजीब बातें मिलती हैं?
Ans. The first is that it was broad daylight but there was no one about. Everyone was asleep. Even, the cattle were asleep too. The second is that the whole town woke up in the evening and in the market everything cost the same, a single duddu—whether it is rice or banana or other grocery.
प्रथम यह है कि यह दिन का समय था फिर भी एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था। प्रत्येक सोया हुआ था। यहाँ तक कि पशु भी सोए हुए थे। दूसरा यह कि पूरा कस्बा शाम को जागा और बाजार में भी प्रत्येक वस्तु का दाम समान था, एक डूड़ू—चाहे यह चावल है या केला है या अन्य खाद्य-सामग्री है।
Q. 2. Why does the disciple decide to stay in the Kingdom of Fools? Is it a good idea?
शिष्य मूर्खों के राज्य में ठहरने का निश्चय क्यों करता है? क्या यह अच्छा विचार है?
Ans. The disciple decides to stay in the
Kingdom of Fools because of his love for cheap and good food there. It is not a good idea. It is dangerous to live with fools. You never know what they will do to you next.
शिष्य मूर्खों के राज्य में रहने का निश्चय सस्ते व अच्छे भोजन की उपलब्धता के अपने प्रेम के कारण करता है। यह सुविचार नहीं है। मूर्खों के साथ रहना खतरनाक है। आप नहीं जान पाएंगे कि आगे वे आपके साथ क्या करेंगे।
Q. 3. Name all the people who are tried in the King's court, and give the reasons for their trial.
उन सब व्यक्तियों के नाम बताओ जिन्हें दरबार में मुकदमे के लिए बुलाया जाता है और उन पर मुकदमे का कारण भी बताओ।
Ans. First of all the merchant whose wall collapsed causing thief's death was called for getting such a weak wall constructed. He put the blame on the mason who built the wall. The mason was called. He told that his attention was diverted by a dancing girl who kept on going up and down the street. So the fault was of the dancing girl. The dancing girl when called, put the blame on the goldsmith who made her walk up and down the street several times making false promises. The goldsmith passed on the blame to the rich merchant who had ordered to make jewellery for him urgently. This merchant happened to be the original owner of the house whose wall had collapsed and killed the thief. But he had died so his son was called again and sentenced to be hanged.
सर्वप्रथम, उस व्यापारी/सودागर को बुलाया गया जिसने इतनी कमजोर दीवार बनवाई थी कि वह गिर गई थी। उसने, दीवार बनाने वाले कारीगर पर दोषारोपण कर दिया। कारीगर को बुलाया गया। उसने बताया कि उसका ध्यान एक नर्तकी ने बाँट दिया था। जो बार-बार गली से ऊपर-नीचे जाती थी। नर्तकी को जब बुलाया गया तो उसने सुनार पर आरोप लगाया जो झूठे वादों से आभूषणों के लिए बार-बार गली से ऊपर-नीचे जाने को बाध्य करता था। सुनार ने उस समृद्ध व्यवसायी पर आरोप लगाया जिसका अर्जेंट आभूषण तैयार करवाने का आदेश दिया हुआ था। संयोग से यह व्यापारी उस ही घर का वास्तविक मालिक था जिसकी दीवार गिरी थी और चोर को मार दिया था। किंतु वह मर चुका था इसलिए उसके पुत्र को पुनः बुलाया गया और फाँसी की सजा सुनाई गई।
Q. 4. Who is the real culprit according to the king? Why does he escape punishment?
राजा के अनुसार असली अपराधी कौन है? वह राजा से कैसे बच जाता है?
Ans. The rich merchant whose wall collapses and kills the burglar is the real culprit. He escapes punishment because he is too thin to fit in the newly made stake.
समृद्ध व्यवसायी, जिसकी दीवार गिरती है और सेंधमार को मार देती है, वास्तविक दोषी है। वह सजा से बच जाता है क्योंकि वह इतना पतला था कि नये बनाये फाँसी के तख्ते में नहीं आ सकता था।
Q. 5. What are the Guru's words of wisdom? When does the disciple remember them?
गुरु की बुद्धिमत्ता के शब्द क्या थे? शिष्य ने यह कब महसूस किया?
Ans. Guru's word of wisdom are; "this is no place for us; let's go; they are all fools; this won't last very long; you can't tell what they'll do to you next."
The disciple remembers them when the king's men found him fit for the stake without his fault.
गुरु के बुद्धिमानी के शब्द हैं; "यह स्थान हमारे लिए नहीं है; चलो चलते हैं; वे सभी मूर्ख हैं; यह बात लम्बे समय चलने वाली नहीं; आप नहीं बता सकते कि आगे वे आपके साथ क्या करेंगे।"
शिष्य तब याद करता है जब बिना उसकी गलती के राजा के आदमी उसे सूली पर चढ़ाने को फिट पाते हैं।
Q. 6. How does the guru manage to save his disciple's life?
गुरु अपने शिष्य की जिन्दगी कैसे बचाता है?
Ans. The guru sees everything in a vision. He arrives at once to save his disciple. He tells something in a whisper to him. Then he requests the king to put him (the guru) to death first because he is greater. The disciple says that he wants death first. Thus, they get into a fight. The king is puzzled. He asks the guru to solve this mystery. The guru says that whoever dies first will be reborn as the king of this country and whoever dies second will be reborn as the minister of this country. The next day, the king and the minister, owing to greed, put themselves on the stake. Thus, the guru manages to save his disciple.
गुरु मानसिक दृष्टि से प्रत्येक चीज देख लेता है। वह अपने शिष्य को बचाने तुरन्त आता है। वह, शिष्य को कुछ कानाफूसी करता है। फिर वह, राजा से कहता है कि बड़ा होने के कारण गुरु को पहले मृत्यु-दण्ड दिया जाए। शिष्य कहता है कि वह पहले मरना चाहता है। इस प्रकार वे झगड़ने लगते हैं। राजा घबरा जाता है। वह गुरु से इस रहस्य को बताने को कहता है। गुरु बताता है कि जो पहले मरेगा वह इस देश के राजा के रूप में पुनर्जन्म लेगा और जो दूसरे नंबर पर मरेगा वह इस देश के मन्त्री के रूप में पुनर्जन्म लेगा। अगले दिन, राजा व मन्त्री, लालच के कारण, अपने आपको सूली पर टँगवा लेते हैं। इस प्रकार, गुरु अपने शिष्य को बचाने में सफल होता है।
ADDITIONAL QUESTIONS
I. Multiple Choice Questions :
1. A guru and his disciple arrived in the city in the broad daylight. They found—
(A) that everyone was awake.
(B) That everyone was asleep.
(C) that people were drinking and dancing.
(D) None.
2. The guru and his disciple were astonished to find that—
(A) everything was costly.
(B) everything was below standard.
(C) everything cost the same.
(D) None.
3. Whom did the merchant accuse for the thief's death?
(A) the man who built the wall.
(B) the dancing girl.
(C) the goldsmith.
(D) None.
4. How was the rich merchant saved from the execution?
(A) The king pardoned him.
(B) His crime was not proved.
(C) The crime was committed by the rich merchant's father, not by him.
(D) He was too thin to be properly executed on the stake.
5. What is the message of the story?
(A) Be wise and stay away from foolish people.
(B) Obey king's orders.
(C) Kings are dangerous.
(D) Kings are fools.
- What is the theme of this lesson?
(A) Foolish people are unpredictable and dangerous.
(B) Gurus are wise.
(C) Have good friends.
(D) Kings are foolhardy.
Answers—1. (B) 2. (C) 3. (A) 4. (D) 5. (A) 6. (A)
II. Answer the following questions in about 60 words :
Q. 1. Why was it decided to execute the disciple?
शिष्य को सूली पर चढ़ाने का निश्चय क्यों किया गया था?
Ans. Originally, the new stake was made for the execution of the merchant, in place of his dead father, for the death of a thief. As the merchant was too thin to fit the new stake, a fat man was searched to fit the stake. They found the disciple to be fat enough to fit the stake. So, it was decided to execute the disciple.
मौलिक रूप से, फाँसी का नया तख्ता व्यापारी को, उसके मृत पिता के स्थान पर चोर की मृत्यु के लिए, सूली पर चढ़ाने के लिए बनवाया गया था। जैसाकि व्यापारी नये तख्ता के लिए बहुत पतला था, उस तख्ता में सही बैठने के लिए एक मोटा व्यक्ति तलाशा गया। उन्हें शिष्य नये तख्ता के लिए पर्याप्त मोटा लगा। इसलिए, शिष्य को सूली पर चढ़ाने का निर्णय किया गया।
Q. 2. What complain did the burglar's brother make to the king?
सेंधमार के भाई ने राजा से क्या शिकायत की थी?
Ans. The burglar's brother complained the king that his brother was pursuing his ancient trade. The weak wall of the house of the merchant fell on him and killed him. The king must punish the merchant and compensate the family. As the merchant should have built a good and strong wall. The burglar's brother demanded compensation for the loss of his brother's life.
सेंधमार के भाई ने राजा से शिकायत की कि उसका भाई अपने पुराने धंधे पर था। व्यापारी के घर की कमजोर दीवार उस पर गिर गई और उसे मार डाला। राजा इस व्यापारी को दण्ड दे और परिवार को मुआवजा दिलवाए।
क्योंकि व्यापारी को अच्छी व मजबूत दीवार बनानी चाहिए थी। चोर के भाई ने अपने भाई की जिन्दगी की हानि के लिए हर्जाना भी माँगा।
III. Answer the following questions in about 80 words :
Q. 1. How is the life distinct 'In The Kingdom of Fools'?
इस कहानी में जीवन अलग कैसे है?
Ans. Life in this tale is distinct in manner—Here, night has been changed into day and day into night. Everyone awakes at night, tills his fields, runs his business only after dark and goes to bed as soon as the sun comes up. Everything costs a duddu whether a measure of rice or a bunch of bananas. Anyone who disobeyed would be punished with death. The people did as they were told for fear of death.
जीवन इस कथा में इस तरह से भिन्न है—यहाँ रात को दिन में व दिन को रात में बदल दिया गया है। प्रत्येक व्यक्ति रात में जागता है, अपने खेत जोतता है, अँधेरे के बाद ही अपना व्यवसाय चलाता है और सोने तब जाता है जब सूर्य निकलता है। प्रत्येक चीज की कीमत एक दुद्दु है चाहे चावल की मात्रा हो या केलों का एक गुच्छा। जो कोई भी अवज्ञा करता उसे मृत्यु की सजा दी जाती थी। मृत्यु के डर से लोग वैसे ही करते थे जैसा उन्हें करने को कहा जाता था।
Q. 2. How does the kingdom become normal again?
राज्य पुनः सामान्य कैसे बनता है?
Ans. After the death of the foolish king and his minister, the people of the kingdom discussed its future. They decided to appoint the guru and his disciple as their new king and minister. The guru and the disciple finally agrees to rule the kingdom on the condition that they will change all the old laws. From then on, night becomes again a night and day becomes again a day. Now, one cannot get everything for a duddu. It becomes like any other place.
मूर्ख राजा व उसके मन्त्री की मृत्यु के बाद, राजधानी के लोगों ने राजधानी के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने गुरु व उसके शिष्य को अपना नया राजा व मन्त्री नियुक्त करने का निर्णय किया। गुरु व शिष्य आखिरकार उस राज्य का शासन करने को इस शर्त पर सहमत हो जाते हैं कि वे