The Happy Prince
The Happy Prince (प्रसन्न राजकुमार)
सभी पुराने नियमों को परिवर्तित करेंगे। और तब से ही, रात, रात बन जाती है और दिन, दिन बन जाता है। अब, एक ड्डू में आप सभी चीज नहीं खरीद सकते हैं। यह भी दूसरे स्थानों जैसा बन जाता है।
5. The Happy Prince
[ प्रस्न्न राजकुमार ]
— Oscar Wilde
- पाठ के विषय में—प्रसन्न राजकुमार एक सुन्दर प्रतिमा थी। वह स्वर्ण से आच्छादित था, उसकी आँखों के लिए नीलम था और उसकी तलवार में एक लाल मणि थी। वह अपने सारे स्वर्ण जो उसके पास था और अपने कीमती पत्थरों का साथ छोड़कर क्यों जाना चाहता था?
| कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद |
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| High above ...................................... is raining. कठिन शब्दार्थ : column (कॉॉलम्) = स्तंभ, statue (स्टैचू) = प्रतिमा, gilded (गिल्झुड) = सोना चढ़ी, sapphires (सैफाइअ(र)ज) = नीलम, ruby (रूबि) = लालमणि, glowed (ग्लोउड्) = चमका, sword (सॉड्) = तलवार, hilt (हिल्ट्) = मूठ, swallow (स्वॅलो) = अबाबील पक्षी, put up (पुट अप्) = ठहरना, alighted (अलाइट्ड्) = उतरा, curious (क्युअरिअस्) = विचित्र । हिन्दी अनुवाद—नगर के एक भाग में ऊँचे स्तम्भ पर हैप्पी प्रिंस की मूर्ति स्थापित थी। उसके सम्पूर्ण शरीर पर सोने का पत्तर चढ़ा हुआ था तथा उसकी आँखों के स्थान पर दो चमकती नीलमणियाँ थीं, तथा तलवार की मूठ पर एक बड़ी-सी लालमणि चमक रही थी। एक रात नगर के ऊपर एक अबाबील उड़कर आया। उसके मित्र छह सप्ताह पूर्व ही मिश्र चले गए थे पर उसे पीछे ठहरना पड़ा था, फिर उसने भी मिश्र जाने का विचार बना लिया। सारा दिन वह उड़ता रहा, और रात को वह नगर में आया। 'मैं कहाँ ठहरूँगा?' उसने कहा, 'मुझे आशा है कि नगर ने तैयारियाँ कर ली हैं।' फिर उसे एक ऊँचे स्तम्भ पर लगी मूर्ति दिखाई दी। 'मैं यहीं पर रात बिता लूँगा', वह चीखा। 'यह अच्छा स्थान है, ढेर-सी ताजा हवा है।' इस कारण वह हैप्पी प्रिंस की टाँगों के ठीक बीच में उतरकर आ गया। 'मेरे पास एक सुनहरा शयनकक्ष है', उसने चारों ओर दृष्टि दौड़ाकर मंद स्वर में स्वयं से कहा, तथा सोने की तैयारी करने लगा; पर जब वह अपने पंखों के नीचे अपना सिर रखने वाला था कि एक बड़ी-सी बूँद उस पर आ गिरी। 'कितनी विचित्र बात है !' वह बोला, 'आकाश में |
| एक भी बादल का टुकड़ा नहीं है; सितारे भी बिल्कुल साफ और चमकदार हैं, और फिर भी वर्षा हो रही है।' |
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| Then another drop................... cannot move. कठिन शब्दार्थ : determined (डिटमिन्ड्) = दृढ़ निश्चयी, drenched (ड्रेन्च्ट्) = तर-बतर कर दिया, misery (मिजरि) = दुःख, lead (लेड्) = सीसा, polite (पलाइट्) = विनम्र, pricked (प्रिक्रूट) = सुई चुभे, coarse (कॉस्) = खुरदरे, seamstress (सीमस्ट्रेट्स) = दर्जीन, embroidering (इमब्रॉइड्(र)ड्) = कढ़ाई करते, pedestal (पेडिस्ट्ल) = स्तम्भ। हिन्दी अनुवाद—तभी एक और बूँद उस पर टपकी। 'ऐसी मूर्ति का क्या उपयोग यदि यह वर्षा से बचाव नहीं दे सकती?' वह बोला। 'मुझे किसी चिमनी के ऊपरी भाग को खोजना होगा,' और उसने उड़ T जाने का निर्णय लिया। पर उसके पंख खुलने से पूर्व ही एक तीसरी बूँद उस पर आ गिरी, और उसने ऊपर की ओर दृष्टि की तथा देखा—आह! उसने कैसा दृश्य देखा? हैप्पी प्रिंस की आँखों आँसुओं से तर थीं तथा उसके सुनहरे गालों पर से आँसू नीचे बह रहे थे। उसका चेहरा चाँदनी में इतना सुन्दर दिख रहा था कि छोटे से अबाबील पक्षी को उस पर दया आ गई। "तुम कौन हो?" उसने कहा। "मैं हैप्पी प्रिंस हूँ।" "फिर तुम रो क्यों रहे हो?" अबाबील ने पूछा। "तुमने तो मुझे भिगो ही दिया।" "जब मैं जीवित था तथा मेरे अंदर एक मानविय हृदय था," मूर्ति ने उत्तर दिया, "मुझे नहीं पता था कि आँसू क्या चीज़ हैं; क्योंकि मैं तो राजमहल में रहता था जहाँ दुःख-दर्द को कभी प्रवेश नहीं दिया जाता था। मेरे दरबारीगण मुझे हैप्पी प्रिंस कहा करते थे, तथा सचमुच मैं हैप्पी था। इस प्रकार मैं रहा तथा इसी दशा में मेरी मृत्यु हो गई। और अब जब मैं मर चुका हूँ उन लोगों ने मुझे यहाँ इतनी ऊँचाई पर रख दिया है कि मैं अपने नगर की सारी कुरूपता तथा दरिद्रता देख सकता हूँ, और यद्यपि मेरा हृदय सीसा धातु से बना है फिर भी मैं रोने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।" "क्या! क्या यह ठोस सोने का नहीं है?" अबाबील पक्षी स्वयं से बोला। यह इतना विनयशील था कि उसने कोई टिप्पणी मूर्ति के बारे में नहीं की। "बहुत दूर", मूर्ति ने अपनी मंद मधुर आवाज में कहना जारी रखा, "दूर एक छोटी तंग गली में एक निर्धन का घर है। उसके घर की एक खिड़की खुली है तथा उसमें से मैं एक महिला को मेज पर बैठे देख सकता हूँ। उसका चेहरा पतला तथा सिकुड़ा है, तथा उसके हाथ भद्दे और लाल हैं, वे सुई से बिंधे हुए हैं क्योंकि वह एक दर्जीन है। वह एक |
साटन से बने गाउन पर फूल काढ़ रही है जो रानी की परिचारिका का है, वह यह गाउन अगले शाही नृत्य में पहनेगी। कमरे के एक कोने में उसका छोटा-सा बेटा बीमार पड़ा है। उसे ज्वर है, तथा वह अपनी माँ से संतरे माँग रहा है। माँ के पास नदी का जल देने के अलावा कुछ भी नहीं है, इसलिए बच्चा रो रहा है। अबानील, क्या तुम उसके पास मेरी तलवार की मूठ से निकालकर लालमणि नहीं पहुँचोगे? मेरी टाँगें तो इस स्तम्भ से बँधी हैं और मैं हिल भी नहीं सकता।"
"I am waited church steeple."
कठिन शब्दार्थ : lotus (लोटस) = कमल, messenger (मेसिन्ज्र(र)) = संदेशवाहक/दूत, beak (बीक्) = चोंच, sculptured (स्कल्पच्र(र)ड) = निर्मित किये, balcony (बैलकनि) = छज्जा, masts (मास्ट्स) = मस्तूल, tossing (टॉस्ड्) = करवट बदलना, feverishly (फीवरिशुलि) = उत्तेजित होकर, thimble (थिम्बुल) = अंगुरताना, sank into (सैट्क् इन्रटू) = डूब गया, delicious (डिलिशस्) = स्वादिष्ट/सुगन्धित, slumber (स्लम्ब्(र)) = गहरी नींद, prospect (प्रॉस्पेक्ट्) = आसार, monuments (मॉन्युमेंट्स्) = स्मारक, steeple (स्टीपूल) = चर्च की मीनार का नुकीला शिखर।
हिन्दी अनुवाद-"मिस्र में मेरी प्रतीक्षा की जा रही है", अबाबील बोला। "मेरे मित्र नील नदी पर उड़ रहे हैं तथा विशाल कमल के फूलों से बातें कर रहे हैं। शीघ्र ही वे सोने चले जाएँगे।"
प्रिंस ने पक्षी से कहा कि एक रात रुक जाए और उसका संदेशवाहक बन जाए। "वह बालक इतना प्यासा है और उसकी माँ कितनी उदास है," वह बोला।
"मुझे बालक पसन्द नहीं हैं," अबाबील बोला, "मैं तो मिस्र जाना चाहता हूँ।"
पर हैप्पी प्रिंस इतना उदास दिखाई दिया कि छोटा अबाबील पक्षी भी उदास हो गया। "यहाँ तो बहुत ठंड है," वह बोला। पर वह प्रिंस के पास एक रात रुकने को राजी हो गया तथा उसका संदेशवाहक बन गया।
"धन्यवाद, छोटे पक्षी," प्रिंस बोला।
अबाबील ने प्रिंस की तलवार से विशाल मणिक निकाली तथा उसे चोंच में दबाकर नगर की छतों के ऊपर लेकर उड़ गया।
वह गिरजाघर के मीनार के पास से गुजरा जिस पर सफेद संगमरमर में देवगण खुदे हुए थे। वह महल के पास से गुजरा तथा उसने नृत्य का शोर सुना। एक सुन्दर लड़की छज्जे पर अपने प्रेमी के साथ आ गई।
"मुझे आशा है कि मेरी ड्रेस शाही नृत्य समारोह पर पहनने के लिए समय पर तैयार हो जाएगी," वह बोली।
"मैंने उस पर फूल काढ़ने को कह रखा है, पर दर्जिनें भी बहुत आलसी होती हैं।"
वह नदी के ऊपर से उड़ा, तथा उसने जलपोतों के मस्तूलों के ऊपर लालटेनें लटकती देखीं। अंत में वह गरीब महिला के घर पर पहुँचा तथा उसने झांका। बालक अपने बिस्तर पर बेचैनी से करवटें बदल रहा था, और उसकी माँ सो गई थी क्योंकि वह बहुत थकी थी। पक्षी अन्दर फुदककर चला गया तथा महिला की अंगुली पर पहनने वाली कैप के बगल में मेज पर वह विशाल लालमणि रख दी। फिर वह हल्के से पलंग के ऊपर उड़ा तथा अपने पंखों से उसने बालक के माथे पर हवा की। "अब मैं कितनी ठंडक महसूस कर रहा हूँ," बालक बोला। "मैं अवश्य ही अब स्वस्थ हो रहा हूँ," तथा वह मधुर नींद में चला गया।
इसके पश्चात् पक्षी हैप्पी प्रिंस के पास उड़कर वापस आ गया तथा उसे बताया कि उसने क्या काम किया था। "यह विचित्र बात है," वह बोला, "पर मैं काफी उष्ण महसूस कर रहा हूँ यद्यपि इतनी सर्दी है।"
"इसका कारण यह है कि तुमने एक नेक काम किया है," प्रिंस बोला। और छोटा पक्षी सोच में पड़ गया, तथा फिर सो गया। सोच-विचार करने पर उसे सदैव नींद आ जाती थी। जब दिन निकला, वह उड़कर नदी पर गया तथा उसने स्नान किया। "आज रात मैं मिस्र जाऊँगा," पक्षी बोला, तथा इस विचार से वह उल्लासित हो गया। उसने सभी स्मारकों का परिभ्रमण किया तथा गिरजाघर की छत पर बनी मीनार पर भी काफी समय तक बैठा रहा।
When the moon he said.
कठिन शब्दार्थ : commissions (कॅमिशनुज) = विशिष्ट कार्य, garret (गै(र)ट्) = अटारी, withered (विद(र)ड्) = सूखे, violets (वाइलट्स) = नीलाभ बैंगनी रंग के फूल वाला पौधा, crisp (क्रिसप) = खुश्क, pomegranate (पॉमिग्रै्निट) = अनार, grate (ग्रेट्) = अंगीठी की जाली में, sapphires (सैफाइअ(र)ज) = नीलम।
हिन्दी अनुवाद-जब चाँद निकला, तो वह उड़कर हैप्पी प्रिंस के पास पहुँचा।
"क्या आप मेरे द्वारा मिस्र में कोई काम करवाना चाहते हैं?" वह बोला। "मैं यहाँ से प्रस्थान करने वाला हूँ।"
"अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील," प्रिंस बोला। "क्या तुम मेरे पास एक रात और ठहर सकते हो?"
"मिस्र में मेरी प्रतीक्षा की जा रही है," अबाबील ने उत्तर दिया।
"अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील," प्रिंस बोला, "नगर के उस सुदूर छोर पर मुझे एक युवक अटारी में बैठा दिखाई दे रहा है। यह अपनी डेस्क के ऊपर पड़े कागजों पर झुका हुआ है, तथा उसके बगल में रखे गिलास में मुरझाए नीले
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फूलों का गुच्छा रखा है। उसके बाल भूरे तथा सख्त हैं, तथा उसके होंठ अनार की भाँति लाल हैं, और उसकी आँखें बड़ी तथा स्वप्निल हैं। वह थियेटर के डायरेक्टर के लिए एक नाटक समाप्त करने में जुटा है, पर उसे इतनी ठंड लग रही है कि वह आगे लिखने में असमर्थ है। अंगीठी के ऊपर वाली जाली में कोई आग नहीं है तथा भूख के कारण वह कमजोर हो गया है।"
"मैं आपके साथ एक रात और ठहरूँगा," पक्षी बोला जिसका दिल वास्तव में बहुत नेक था। उसने पूछा "क्या मैं उस युवा नाटककार के लिए दूसरी लालमणि ले जाऊँ।"
"अफ़सोस! मेरे पास अब दूसरी लालमणि नहीं है," प्रिंस ने बताया। "मेरे पास अब मेरी आँखें बची हैं। ये दुर्लभ नीलमों से बनी हैं, जिन्हें भारत से एक हजार वर्ष पूर्व लाया गया था।" उसने पक्षी को आदेश दिया कि एक आँख की नीलमणि निकाल लो तथा नाटककार को पहुँचा दो। "वह इसे किसी जौहरी को बेच देगा तथा अपने लिए ईंधन खरीद लेगा, और अपना नाटक पूरा कर लेगा," वह बोला।
"Dear Prince ......................................... beat her."
कठिन शब्दार्थ : plucked out (प्लकूट आउट) निकाल ली, darted (डाटुड) तेजी से गया, buried (बेरिड) ढका हुआ होना, flutter (फ्लट(र)) फड़फड़ाहट, appreciated (अप्रीशिएट्ड) प्रशंसा की, admirer (अडमाइअ़र(र)) प्रशंसक, harbour (हाब(र)) बंदरगाह, vessel (वेस्ल) जहाज, palm (पाम्) ताड़ वृक्ष, crocodiles (क्रॉकडाइल्ज्) मगरमच्छ।
हिन्दी अनुवाद-"प्रिय प्रिंस," अबाबील बोला। "मैं यह काम नहीं कर सकता," और वह रोने लगा।
"अबाबील पक्षी," प्रिंस बोला, "वैसा ही करो जैसा मैं कहता हूँ।"
इसलिए पक्षी ने प्रिंस की आँख से नीलमणि निकाल ली तथा विद्यार्थी की अटारी की दिशा में उड़ चला। यहाँ प्रवेश करना बहुत आसान था, क्योंकि छत में एक छेद था। इस छेद से वह अन्दर घुस गया तथा कमरे में पहुँच गया। नवयुवक अपना सिर अपनी हथेलियों में रखे हुए था, इस कारण उसे पक्षी के पंखों की फड़फड़ाहट सुनाई नहीं दी, तथा जब उसने दृष्टि ऊपर उठाई तो मुरझाए फूलों पर उसे सुन्दर नीलमणि रखी दिखाई दी।
"लगता है लोग अब मेरी प्रशंसा करने लगे हैं," वह चीखा। "यह नीलम भी किसी प्रशंसक ने दिया होगा। अब मैं अपना नाटक पूरा कर सकता हूँ," तथा वह काफी खुश दिखाई दिया।
अगले दिन पक्षी बंदरगाह पहुँच गया। वह एक विशाल जलपोत के मस्तूल के सिरे पर बैठ गया तथा नाविकों को काम करते देखता रहा। "मैं मिश्र जा रहा हूँ," वह & चिल्लाया, पर किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और जब चन्द्रमा निकला तो वह हैप्पी प्रिंस के पास वापस पहुँच गया।
"मैं अब तुमसे विदा लेने आया हूँ," वह बोला।
"अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील," प्रिंस ने कहा, "क्या तुम मेरे पास एक रात और नहीं ठहर सकते?"
"शीत ऋतु आ गई है," पक्षी ने उत्तर दिया, "तथा शीघ्र ही यहाँ हिमपात होने लगेगा। मिश्र में हरे ताड़ के वृक्षों पर सूर्य का ताप है, तथा मगरमच्छ वहाँ मिट्टी में पड़े रहते हैं और सुस्ती से चारों ओर देखते रहते हैं।"
"नीचे चौकोर मैदान में," हैप्पी प्रिंस ने बताया, "यहाँ एक माचिस बेचने वाली लड़की खड़ी है। उसने अपनी माचिसें नाले में गिरा दी हैं तथा सारी माचिसें खराब हो गई हैं। उसके पिता उसे पीटेंगे यदि वह कुछ पैसों के बिना घर लौटती है, तथा वह रो रही है। उसकी टाँगो में न जुराबें हैं, न जूते, और उसका सिर भी नंगा है। मेरी दूसरी आँख नोच लो तथा उस लड़की को दे दो, फिर उसका पिता उसे नहीं पीटेगा।"
"I will ......................................... they cried."
कठिन शब्दार्थ : swooped past (स्वूनपट पास्ट) तेजी से पास से गुजरा, marvellous (मावलस्) आश्चर्यजनक, listlessly (लिस्ट्स्ललि) निरुत्साह से, archway (आच्वे) मेहराबदार द्वार।
हिन्दी अनुवाद-"मैं तुम्हारे पास एक रात और ठहरूँगा," पक्षी बोला, "पर मैं तुम्हारी आँख नहीं नोच सकता। फिर तो तुम अंधे हो जाओगे।"
"अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील," प्रिंस बोला, "मेरे आदेश का पालन करो।"
अतः उसने प्रिंस की दूसरी आँख भी निकाल ली तथा उसे लेकर उड़ चला। माचिस वाली लड़की के पास से वह गुजरा तथा उसकी हथेली पर वह नीलमणि रख दी।
"यह शीशा कितना सुन्दर है!" छोटी लड़की बोली, और वह हँसती हुई घर की ओर दौड़ चली।
फिर पक्षी प्रिंस के पास लौट आया। "तुम अब दृष्टिहीन हो गए हो," वह बोला, "इसलिए मैं अब सदा ही तुम्हारे पास रहूँगा।"
"नहीं, छोटे अबाबील," बेचारे प्रिंस ने कहा, "तुम अवश्य मिश्र जाओ।"
"नहीं, मैं सदैव ही तुम्हारे पास बना रहूँगा," पक्षी बोला तथा वह प्रिंस के पाँवों के पास सो गया।
दूसरे दिन सारा समय वह प्रिंस के कंधों पर सवार रहा, तथा उसे वह उन अजनबी स्थानों के बारे में कहानियाँ सुनाता रहा जिन्हें उसने देखा था।
"प्रिय छोटे अबाबील," राजकुमार ने कहा, "तुम मुझे बहुत आश्चर्यजनक बातें बता रहे हो, लेकिन पुरुषों एवं \
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स्त्रियों (लोगों) की परेशानियाँ किसी भी अन्य बात से अधिक आश्चर्यजनक हैं। कोई भी रहस्य इतना बड़ा नहीं है जितनी कि गरीबी (तंगहाली)। मेरे नगर के ऊपर उड़ो, छोटे अबाबील, और जो कुछ तुम वहाँ देखो, मुझे बतलाओ।"
इसलिए पक्षी उस विशाल नगर के ऊपर उड़ा तथा उसने धनी लोगों को अपने सुन्दर घरों में मौज-मस्ती करते देखा जबकि भिखारी उन घरों के दरवाजों पर बैठे हुए थे। वह अंधेरी गलियों में उड़कर गया तथा उसने भूखे बच्चों के रक्तहीन चेहरों को देखा जो शांत शिथिल भाव से अंधेरी सड़कों को निहार रहे थे। पुल के अर्ध वृत्ताकार मेहराब के नीचे दो छोटे बालक एक-दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े थे ताकि गर्मी महसूस कर लें। "हमें बहुत भूख लगी है," वे बोले। "यहाँ मत लेटो," पहरेदार चिल्लाया, और वे बालक वर्षा में बाहर निकल गए।
तत्पश्चात् पक्षी वापस लौटा तथा उसने प्रिंस को वह सब कुछ बताया जो उसने देखा था।
"मेरा शरीर सोने के परत से ढका हुआ है," प्रिंस बोला। "तुम इसे पत्ता-पत्ता करके निकाल लो तथा उसे निर्धनों में बाँट दो, जीवित प्राणी सदैव यह सोचते हैं कि स्वर्ण उन्हें खुशी दे सकता है।"
टुकड़े-टुकड़े पत्तर पक्षी ने उखाड़ लिए, एक समय ऐसा आया जब प्रिंस नीरस तथा काला दिखने लगा। सोना जाकर उसने गरीबों में बाँटा तथा बच्चों के चेहरे गुलाबी हो गए, वे सड़क पर हँसने-खेलने लगे। "अब हमारे पास खाने को रोटी है!" वे चीखकर कहने लगे।
Then the snow ...................................... the suggestion.
कठिन शब्दार्थ : wore (वो(र)) = पहनी थी, scarlet (स्कालट) = सिंदूरी रंग की, skated (स्केट्ड) = बर्फ पर फिसलने का खेल, crumbs (क्रमूज) = बहुत छोटे-छोटे टुकड़े, baker (बेक(र)) = नानबाई (केक, ब्रेड, बिस्कुट आदि बनाने वाला), flapping (फ्लैप्सू) = फड़फड़ाते हुए, crack (क्रैक) = दरार, snapped (स्नैपूट) = टूटना, dreadfully (डेडफ्लि) = अत्यधिक, shabby (शैबि) = बुरी हालत में, proclamation (प्रॉकल्मेशन्) = सार्वजनिक घोषणा।
हिन्दी अनुवाद— फिर बर्फ गिरने लगी तथा बर्फ के बाद तुषारापात हुआ। सड़कें ऐसी दिखने लगीं मानो वे चाँदी से बनी हों। हर व्यक्ति ऊनी वस्त्र पहनकर घूमने लगा तथा छोटे बालकों ने लाल रंग की टोपियाँ पहनीं और बर्फ पर स्केटिंग करने लगे।
बेचारे छोटे अबाबील पक्षी को अधिकाधिक ठण्ड लगी, पर उसने प्रिंस का साथ नहीं छोड़ा, उसे इतना प्यार करने लगा था जब रोटी पकाने वाले दूसरी ओर देख रहे होते तो पक्षी उनके दरवाजे के बाहर पड़े रोटी के टुकड़े उठा लेता
और अपने पंखों को फड़फड़ाकर स्वयं को गर्म रखने की कोशिश करता।
पर अंत में उसे पता चल गया कि उसकी मौत निकट आ गई है। उसके पास मात्र इतनी शक्ति बची थी कि वह उड़कर प्रिंस के कंधे पर एक बार बैठ सके। "अलविदा, प्रिय प्रिंस!" वह बुदबुदाया। "क्या तुम मुझे अपना हाथ चूमने दोगे?"
"मुझे खुशी है कि तुम अब मिश्र जा रहे हो, छोटे पक्षी," प्रिंस बोला। "तुम वहाँ बहुत लम्बे समय तक ठहरे रहे पर तुम मुझे होंठों पर चुम लो, क्योंकि मैं तुम्हें प्यार करता हूँ।"
"मैं मिश्र नहीं जा रहा," पक्षी बोला। "मैं तो यमराज के घर जा रहा हूँ। मौत नींद का भाई होता है, है न?" और उसने हैप्पी प्रिंस के होंठों को चूमा, तथा उसके पैरों पर निर्जीव होकर गिर गया।
उस क्षण एक विचित्र टूटने की आवाज मूर्ति के अन्दर से आई, मानो कोई चीज टूट गई हो। तथ्य यह है कि प्रिंस का सीसे का बना हृदय बीच से टूट गया था। बहुत भयानक पाला जो पड़ रहा था।
दूसरी प्रात: तड़के ही मेयर नगर परिषद के सदस्यों के साथ नीचे मैदान में सैर कर रहा था। जब वे स्तम्भ के पास से गुजरे तो मेयर ने आँख उठाकर मूर्ति को देखा। "हे भगवान! हैप्पी प्रिंस कितना भद्दा लग रहा है!" वह बोला।
"बहुत ही भद्दा, सचमुच!" नगर पार्षदों ने कहा जो मेयर की बात से सदा सहमत रहते थे तथा वे सभी मूर्ति को देखने ऊपर गए।
"उसकी तलवार में जड़ी लालमणि गिर चुकी है, उसकी आँखों की मणियाँ भी गायब हैं और मूर्ति के शरीर पर अब स्वर्ण पत्तर भी नहीं रहा," मेयर बोला। "वास्तव में यह तो अब कोई भिखारी जैसा दिख रहा है।"
"भिखारी से बेहतर नहीं," नगर पार्षदों ने कहा।
"और इसकी टाँगों के पास एक मृत पक्षी भी पड़ा है।" मेयर बोलता रहा। "हमें एक घोषणा कर देना चाहिए कि पक्षियों को यहाँ मरने की अनुमति नहीं है।" और नगर क्लर्क ने इस सुझाव को नोट कर लिया।
So they ................................................. praise me.'
कठिन शब्दार्थ : melted (मेल्ट्ड) = पिघलाया, furnace (फनिस) = भट्टी (एक विशाल, बहुत गर्म, घेरे के अन्दर की आग), overseer (ओवसीअ(र)) = निरीक्षक, foundry (फाउन्ड्रि) = ढलाईघर।
हिन्दी अनुवाद— इस तरह उन लोगों ने हैप्पी प्रिंस की मूर्ति को उतार लिया। "चूँकि मूर्ति अब सुन्दर नहीं रही, इसलिए वह अब उपयोगी भी नहीं रही," विश्वविद्यालय के कला प्रोफेसर ने कहा।
फिर उन लोगों ने मूर्ति को भट्टी में गलाया। "कितनी विचित्र बात है!" ढलाईघर के मजदूरों के ओवर्सियर ने
TEXTUAL QUESTIONS
Think About It :
Q. 1. Why do the courtiers call the Prince 'the Happy prince'? Is he really happy? What does he see all around him?
दरबारी राजकुमार को 'हैप्पी प्रिंस' क्यों कहते हैं? क्या वह सचमुच खुश है? वह अपने चारों ओर क्या देखता है?
Ans. The courtiers call the prince 'the Happy Prince' because all his life he never knew sorrow and tears and lived in the Palace. No, he isn't really happy. He is now dead. His people installed his statue on a tall column. He sees ugliness and misery of the city from there.
दरबारी, राजकुमार को 'हैप्पी प्रिंस' इसलिए कहते हैं क्योंकि उसने जीवन भर दुःख व अश्रुओ को नहीं देखा और राजमहल में रहा।
नहीं, वह यथार्थ में प्रसन्न नहीं है। वह अब मृत है। उसके लोगों ने एक ऊँचे स्तम्भ पर उसकी प्रतिमा स्थापित कर दी। वह वहाँ से बाहर की कुरूपता व दुःख देखता है।
Q. 2. Why does the Happy Prince send a ruby for the seamstress? What does the swallow do in the seamstress' house?
राजकुमार दर्जिन को रूबी क्यों भेजता है अबाबील दर्जिन के घर क्या भेजता है?
Ans. The Prince sends a ruby for the seamstress because she is poor. Her little son has fever but he asks his mother to give him oranges. Mother has nothing but river water so he is crying. The swallow hops in the seamstress' house and places the great ruby on the table beside the woman's thimble. Then he flies gently round the bed, fanning the boy's forehead with his wings.
राजकुमार, दर्जिन के लिए एक लालमणि भेजता है क्योंकि वह गरीब है। उसके छोटे बालक को ज्वर है लेकिन वह अपनी माँ से संतेरे देने को कहता है। माँ के पास नदी जल के सिवा कुछ नहीं है इसलिए वह चिल्ला रहा है।
Q. 3. For whom does the Prince send the sapphires and why?
राजकुमार, नीलम किसके लिए भेजता है और क्यों?
Ans. The Prince sends the first sapphire to a playwright because he can not complete his play due to hunger and cold. Sapphire enables him to buy food and firewood and to complete his play.
The Prince sends the second sapphire to a matchgirl whose matchboxes fell into a gutter. Her father will beat if she goes without any money. She is crying. She is without shoes and stockings. The swallow slips the jewel into her palm. She runs home laughing.
राजकुमार प्रथम नीलमणि एक नाट्यलेखक को भेजता है क्योंकि वह भूख व शीत से अपने नाटक को पूर्ण नहीं कर सकता है। नीलमणि से भोजन व ईंधन खरीदता है और अपना नाटक पूर्ण करता है।
राजकुमार, दूसरी नीलमणि एक माचिस विक्रेता लड़की को भेजता है जिसकी सभी माचिसें एक गटर में गिर गई थीं। उसका पिता पिटाई करेगा यदि वह बिना धनराशि के जायेगी। वह रो रही है। उसके पास जूते-जुराब भी नहीं हैं। अबाबील उसकी हथेली में उस हीरे को रख देता है। वह हँसती हुई घर दौड़ जाती है।
Q. 4. What does the swallow see when it flies over the city?
जब अबाबील शहर के ऊपर उड़ता है तो वह क्या देखता है?
Ans. He sees the rich making merry in their beautiful houses while the beggars are sitting at the gates. He flies into dark lanes and sees the white faces of starving children looking out listlessly at the black streets. Under the archway of a bridge two little boys are lying in each other's arms to try to keep themselves warm.
वह देखता है कि धनवान अपने सुन्दर घरों में अपना
मनोरंजन कर रहे हैं जबकि उनके दरवाजे पर भिखारी बैठे हैं। वह अंधेरी सड़कों पर उड़ता है और भूखे बच्चों के सफेद पड़े चेहरों को देखता है जो निरुत्साह से काली गलियों की ओर देख रहे हैं। पुल के मेहराब वाले द्वार के नीचे दो छोटे बालक एक-दूसरे की बाहों में अपने को कुछ गर्म रखने का प्रयास करते हुए लेते हैं।
Q. 5. Why did the swallow not leave the Prince and go to Egypt?
अबाबौील, राजकुमार को छोड़कर मिस्र क्यों नहीं गया?
Ans. The swallow did not leave the Prince and go to Egypt because he had fallen in love with the Prince. He, by his possessions, tried to wipe the tears and minimise the miseries of the poor. The swallow learnt the value of sacrifices. He laid his life for a noble cause.
अबाबील, राजकुमार को छोड़कर मिस्र नहीं गया क्योंकि वह राजकुमार से प्रेम करने लगा था। उसने (राजकुमार ने), अपनी चीजों द्वारा, गरीबों के आंसुओं को पोंछने व दुःखों को कम करने का प्रयास किया। अबाबील ने त्याग की कीमत सीखे। उसने एक अच्छे उद्देश्य के लिए अपना जीवन दे दिया।
Q. 6. What are the precious things mentioned in the story? Why are they precious?
इस कहानी में कौनसी कीमती चीजों का जिक्र किया गया है? वे कीमती क्यों हैं?
Ans. The precious things mentioned in the story are—the leaden heart of the Happy Prince and the dead bird. They are precious because both try to wipe the tears and lessen the misery of the poor. Both sacrificed their lives for a Godly cause.
कहानी में जिक्र की गई कीमती वस्तुएँ हैं—हैप्पी प्रिंस का शीशे का दिल व मृत पक्षी। वे कीमती हैं क्योंकि दोनों गरीबों के आंसू पोंछने व दुःख कम करने का प्रयास करते हैं। दोनों ने ईश्वरीय कार्य के लिए जीवन त्याग दिया।
ADDITIONAL QUESTIONS
I. Multiple Choice Questions :
1. The statue of the Happy Prince had two bright for eyes.
(A) rubies
(B) diamonds
(C) sapphires
(D) glass balls
2. Where was the little swallow going to?
(A) Paris
(B) London
(C) Japan
(D) Egypt
3. What did the Happy Prince send to the playwright to help him?
(A) A sapphire from one of his eyes.
(B) A ruby from his sword hilt.
(C) A gold coin.
(D) Some money for warm clothes.
4. Whom did the Happy Prince help with the other sapphire?
(A) A seamstress.
(B) A little matchgirl.
(C) A beggar.
(D) All the above.
5. What happened with the swallow died?
(A) The leaden heart of the Happy Prince was broken into two pieces.
(B) The Prince cried.
(C) The people of the city cried.
(D) Nothing happened.
6. What did the swallow do before falling down dead?
(A) He kissed the Happy Prince on his lips.
(B) He told the Happy Prince that he was going to the House of Death.
(C) Both (A) and (B)
(D) Neither (A), nor (B).
Answers—
- (C)
- (D)
- (A)
- (B)
- (A)
- (C)
II. Answer the following questions in about 60 words :
Q. 1. Where does the swallow decide to spend the night and why?
अबाबील, रात कहाँ गुजारने का निश्चय करता है और क्यों?
Ans. The swallow wonders as to where he will put up and hopes that the town has made preparation. Then he sees the statue on the tall column and he decides to spend the night between the feet of the statue of the Happy Prince. He decides so because it is a fine position with plenty of fresh air. And he has a golden bed-room.
अबाबील सोचता है कि वह कहाँ रुकेगा तथा आशा करता है कि कस्बे ने तैयारियाँ की होंगी। तब वह लम्बे कॉलम पर प्रतिमा को देखता है और वह हैप्पी प्रिंस की प्रतिमा के पैरों के बीच रात्रि व्यतीत करने का निश्चय करता है। वह ऐसा विनिश्चय इसलिए करता है क्योंकि ताजा वायु के लिए यह एक उत्तम स्थान है। और उसके पास स्वर्ण शयन- कक्ष है।