The Beggar
The Beggar (भिखारी)
162
lost. The house got burnt in the fire with all his belongings. He had to leave his old school, teachers and friends when he joined the high school. Then his cat which was a part of his life was also missing. Without all the above he felt insecure.
लेखक उस सुरक्षा की बात कर रहा है जो वह अपने घर में महसूस किया करता था और अपने पुराने स्कूल के दोस्तों के साथ तथा अपनी बिल्ली के साथ महसूस करता था। सभी अचानक खो गये थे। घर उनकी सभी सम्पत्ति के साथ जल गया था। हाई स्कूल में आने पर उसे अपना पुराना स्कूल, अध्यापक तथा मित्र छोड़ने पड़े थे। फिर उसकी बिल्ली, जो उसके जीवन का एक हिस्सा थी, भी खो गयी थी। इन सबके बिना वह असुरक्षित महसूस करता था।
--- Anton Chekhov
- पाठ के विषय में : लशकॉफ नामक भिखारी को किस बात ने अपने तरीके बदलने के लिए प्रेरित किया? आओ पढ़ें और पता लगाएँ।
कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद
Kind sir, .............................. somewhere before.
कठिन शब्दार्थ : Have pity (हैव् पिटि) = दया करें, copecks (कोपेक्स) = रूबल (जैसे भारत में रुपया है) का सौवाँ भाग (जैसे भारत में 'पैसा' है), swear (स्वेअ(र)) = कसम खाना, intrigue (इन्ट्रीग्) = षड्यन्त्र, victim (विक्टिम्) = शिकार, calumny (कैल्म्नी) = झूठा आरोप, ragged (रैग्ड) = फटा हुआ, fawn-coloured (फॉन् कलर्ड) = पीले रंग का, suppliant (सप्लाअन्ट) = प्रार्थी, drunken (ड्रड़कन्) = नशीली।
हिन्दी अनुवाद : 'मेहरबानी महोदय, दया करें; अपना ध्यान एक निर्धन, भूखे आदमी की ओर दें! तीन दिनों से मैंने कुछ नहीं खाया है, मेरे पास किसी स्थान पर रहने के लिए पाँच कोपेक्स (सिक्के) नहीं हैं, मैं ईश्वर की कसम खाता हूँ। आठ वर्ष तक मैं गाँव के एक स्कूल में अध्यापक था और तब षड्यंत्रों के कारण मेरी नौकरी छूट गई। मैं झूठे आरोपों का शिकार हो गया। एक वर्ष से मेरे पास करने के लिए कुछ नहीं है (अर्थात् बेकार हूँ)। वकील सर्गेई ने प्रार्थी के फटे हुए पीले रंग के ओवरकोट की ओर, उसकी निस्तेज, शराबी आँखों की ओर, उसके दोनों गालों पर लाल धब्बों की ओर देखा और उसे महसूस हुआ मानो कि उसने इस आदमी को कहीं देखा था।
"I have now .............................................. damn you!"
कठिन शब्दार्थ : province (प्रॉविन्स) = प्रान्त, mendicant (मेड्िकेन्ट) = भिखारी, obliged to (अब्लाइज़्ड टु) = दबाव में आना, circumstances (सकमस्टन्सज्) = परिस्थितियाँ, expelled (इक्स्पेलुड) = निकाल दिया, mumbled (मम्बूलुड) = बुदबुदाया, अस्पष्ट बोला, taken aback (टेकन अबैक्) = भौंचक्का रह जाना, flushed (फ्लशट्) = क्रोध से लाल हो गया, expression (इक्स्प्रेषन्) = भाव, disgust (डिस्गस्ट्) = अरुचि, तिरस्कार, swindling (स्विन्ड्डलिङ्ग्) = ठगी, damn you (डैम्यू) = बदमाश, शैतान।
हिन्दी अनुवाद : ‘‘अब मुझे कालुगा प्रान्त में एक नौकरी की पेशकश आई है,'' भिखारी कहता गया, ‘‘परन्तु वहाँ पहुँचने के मेरे पास रुपए नहीं हैं। कृपया मेरी सहायता कीजिए। मुझे माँगने में शर्म आती है परन्तु परिस्थितियों के वश मुझे माँगना पड़ रहा है।’’
सर्गेई की नज़रें उस व्यक्ति के बड़े जूतों के ऊपर पड़ीं जिनमें से एक ऊँचे था और दूसरा नीचा और अचानक उसे कुछ याद आ गया।
‘‘देखिए, मुझे ऐसा लगता है कि मैं तुमसे सदोव्द्या गली में परसों मिल चुका हूँ’’, उसने कहा, ‘‘परन्तु तब तुमने मुझे बताया था कि तुम एक विद्यार्थी जिसे निकाल दिया गया है और तुम गाँव के स्कूल में अध्यापक नहीं थे। क्या तुम्हें याद है?’’
‘‘न-नहीं, वैसा नहीं हो सकता है’’, हक्का-बक्का होकर भिखारी अस्पष्ट बोलने लगा। ‘‘मैं गाँव के स्कूल का अध्यापक हूँ और यदि आप चाहें तो मैं आपको अपने प्रपत्र (दस्तावेज़) दिखा सकता हूँ।’’
‘‘झूट बोल रहे हो! तुमने स्वयं को एक विद्यार्थी बताया था और तुमने मुझे यह भी बताया था कि किस कारण तुम्हें निष्कासित किया गया था। क्या तुम्हें याद नहीं है?’’
सर्गेई लाल-पीला हो गया और तिरस्कार के भाव से उस फटे-हाल प्राणी के पास से मुड़ गया।
‘‘श्रीमान्! यह सरासर बेईमानी है!’’ वह क्रुद्ध होकर चिल्लाया। ‘‘यह ठगी है। मैं अभी तुम्हारे पीछे पुलिस भेजता हूँ, तुम शैतान!’’
"Sir!" he said, ................................................. chop wood."
कठिन शब्दार्थ : fiction (फिक्शन्) = मनगढ़ंत कहानी, formerly (फॉर्मलि) = पहले, choir (क्वाइज्र(र)) = चर्च की भजन-मण्डली, drunkenness (ड्रड़कूनस) = नशे की आदत, get along (गेटू ऑलॉड्) = गुजारा करना, chop (चॉप) = काटना, hastened (हेस्नूड) = जल्दी की।
हिन्दी अनुवाद : ‘‘श्रीमान्जी!’’ वह अपना हाथ अपने
हृदय के ऊपर रखकर बोला, "सही बात यह है कि मैं झूठ बोल रहा था। मैं न तो विद्यार्थी हूँ और न ही स्कूल में अध्यापक। वह सब मनगढ़न्त बात थी। पहले मैं रूसी भजनमण्डली में काम किया करता था और मद्यपान करने के अपराध में मुझे निकाल दिया गया था। परन्तु मैं और क्या कर सकता हूँ? झूठ बोले बगैर मेरा गुजारा नहीं चल सकता है। जब तक मैं सच बोलूँगा, कोई मुझे कुछ भी नहीं देगा, मैं क्या कर सकता हूँ?"
"तुम क्या कर सकते हो? तुम यह पूछते हो कि तुम क्या कर सकते हो?" उसके समीप आकर सर्गेई चीख पड़ा। "काम! यह तो तुम कर सकते हो? तुम्हें अवश्य काम करना चाहिए!"
"काम-हाँ। वह तो मुझे भी मालूम है, परन्तु मुझे काम कहाँ मिल सकेगा?"
"तुम मेरे लिए लकड़ियाँ काटना कैसे पसन्द करोगे?"
"वह करने के लिए मैं मना नहीं करूँगा, परन्तु आजकल निपुण लकड़ी काटने वाले भी भूखों मर रहे हैं।"
"क्या तुम आकर मेरे लिए लकड़ियाँ काटोगे?"
"हाँ श्रीमान् जी, मैं काटूँगा।"
"बहुत अच्छा, हम थोड़े समय में ही जान जाएँगे।"
सर्गेई अपने हाथ मलता हुआ तेजी से आगे बढ़ा। उसने रसोई में से अपने रसोइया को पुकारा।
"सुनो, ओल्गा," वह बोला, "इस महाशय को लकड़ियों वाले स्थान पर ले जाओ और इसे लकड़ियाँ काटने दो।"
The scarecrow of ................ banged the door.
कठिन शब्दार्थ : scarecrow (स्केअक्रो) = डरावना पुतला, shrugged (श्रग्ड) = कंधे उचकाए, perplexity (परप्लेक्सटि) = परेशानी, irresolutely (रेजलूट्ली) = अनिश्चयपूर्वक, obvious (ऑब्िवअस्) = स्पष्ट, gait (गेट्) = चाल, consented (कन्सेन्टेड़) = मान गया, trapped (ट्रैपूट) = फँस गया, undermined (अनुड़माइन्ड्) = क्षीण कर दिया, vodka (वॉड्का) = रूसी शराब, slightest (स्लाइट्स्ट) = थोड़ा-सा भी, inclination (इन्क्लिनेशन्) = मन का झुकाव, toil (टॉइल्) = परिश्रम, glared (ग्लेअ(र)ड) = घूरा, wrathfully (रॉथफुलि) = गुस्से से, shoved (शव्ड) = धक्का दिया, banged (बैङ्गूड) = आवाज के साथ खटाक से खोलना।
हिन्दी अनुवाद : भिखारी के उस डरावने पुतले ने मानो हैरान होकर अपने कंधे उचकाए और रसोइया के पीछे-पीछे हिचकिचाते हुए चला गया। उसकी चाल से यह स्पष्ट झलक रहा था कि उसने लकड़ियाँ काटना इसलिए स्वीकार नहीं किया था कि वह भूखा था और उसे काम की जरूरत थी, परन्तु केवल गर्व और शर्मी से स्वीकार
किया था और क्योंकि वह अपने ही शब्द-जाल में फँस गया था। यह बात भी स्पष्ट थी कि रूसी मदिरा ने उसकी शक्ति को क्षीण कर दिया था और वह अस्वस्थ था और परिश्रम के प्रति उसकी तनिक भी रुचि नहीं थी। सर्गेई तेजी से भोजन-कक्ष में गया। उसकी खिड़की से लकड़ियों की कोठरी और आँगन में होने वाली सारी गतिविधियाँ नजर आ रही थीं। खिड़की के पास खड़े होकर सर्गेई ने पिछले दरवाजे से प्रांगण में आकर गंदी बर्फ के आर-पार शैड में आते हुए भिखारी और रसोइया को देखा। ओल्गा, अपने साथी को क्रोध से घूरने लगी और अपनी कोहनी से उसे एक तरफ हटा दिया, शैड को खोल दिया और क्रोध से खटाक की आवाज के साथ दरवाजा बन्द कर दिया।
Next he saw ......................................... out to him.
कठिन शब्दार्थ : pseudo (सूड़ो) = नकली, log (लॉग) = लकड़ी का छोटा-सा लट्ठा, fists (फिस्ट्स) = मुट्ठी, flung (फ्लड) = डाल दी, spat (स्पैट्) = थूका, scold (स्कोल्ड्) = फटकारा, झिड़का, billet (बिलिट्) = लकड़ी का छोटा किन्तु मोटा टुकड़ा, feebly (फीबुलि) = कमजोरी से, wavered (वेव(र)ड) = इधर-उधर हिली, freezing (फ्रीजिङ्) = बर्फ से ठण्डे, cautiously (कोर्शिलि) = सावधानी से, vanished (वैनिष्ट) = लुप्त हो गया, spoiled (स्पॉइल्ड) = नाकारा, menial labour (मीनअल् लेबर) = तुच्छ, छोटा काम, announced (अनाउन्स्ट) = घोषणा की, waif (वेफ्) = बेघर, घुमक्कड़, appearance (अपिअरन्स्) = उपस्थिति, barely (बेअलि) = मुश्किल से, shovel (शवल्) = बेलचे से हटाना, rugs (रग्स) = कालीन, mattresses (मैट्र्सुस) = बिस्तर के गद्दे।
हिन्दी अनुवाद : इसके बाद उसने नकली अध्यापक को लकड़ी के एक लट्ठे के ऊपर बैठे हुए और अपनी हथेली के ऊपर अपने लाल गालों को रखकर विचारों में मग्न देखा। उस महिला ने उसके पैरों के पास एक कुल्हाड़ी डाल दी। क्रोध से भरकर थूका और उसे फटकारने लगी जैसा कि उसके होंठों की आकृति से अनुमान लगाया जा सकता था। भिखारी ने हिचकिचते हुए लकड़ी के एक टुकड़े को अपनी तरफ खींचा। इसे अपने पैरों के बीच में जमाया और उस पर कमजोर हाथों से कुल्हाड़ी का प्रहार किया। लकड़ी का टुकड़ा हिला और गिर गया। भिखारी ने दोबारा उसे अपनी तरफ खींचा, अपने ठण्ड से जमे हुए हाथों पर फूँक मारी और बड़ी सावधानी से उस पर हल्का आघात किया मानो वह डरा हुआ था कि कहीं कुल्हाड़ी उसके लम्बे जूते के ऊपर न लग जाए या उसकी अंगुली को नहीं काट दे; अब लकड़ी का टुकड़ा दोबारा जमीन पर गिर गया। सर्गेई का क्रोध समाप्त हो चुका था और अब उसे अपने
पर अफसोस और थोड़ी शर्मिंदगी महसूस होने लगी थी, क्योंकि उसने एक नाकारा, शराबी और सम्भवतः बीमार व्यक्ति को ठण्ड में शारीरिक काम करने में लगा दिया था। एक घण्टे बाद ओल्गा अन्दर आई और उसने घोषणा की कि लकड़ी के टुकड़े काट दिए गये थे।
"ठीक है! उसे आधा रूबल दे दो," सर्गेई ने कहा।
"अगर उसकी इच्छा हो तो प्रत्येक महीने की पहली तारीख को लकड़ियाँ काटने आ जाया करे। हम उसकी खातिर हमेशा काम ढूँढ दिया करेंगे।"
महीने की पहली तारीख को वह घुमक्कड़ व्यक्ति आ जाया करता था और बार-बार आधा रूबल कमा लिया करता था। यद्यपि वह मुश्किल से ही अपनी टाँगों पर खड़ा हो सकता था। उस दिन के पश्चात् वह प्रायः प्रांगण में आ जाया करता था और हर बार उसके लिए काम तलाश कर दिया जाता था। कभी वह बर्फ को बेलचे से हटा दिया करता था, कभी लकड़ी वाले शैड को ढंग से कर देता था, कभी गद्दों या कालीनों की मिट्टी झाड़ दिया करता था। हर बार उसे 20 से 40 कोपेक्स तक मिल जाया करते थे और एक बार उसे एक जोड़ा पुराने पायजामे भी दे दिए गए।
When Sergei ................................. yard for work.
कठिन शब्दार्थ : hired (हाइअ(र)ड) = भाड़े पर रखना, hauling (हाल्ङ्ग) = खींच कर बाहर निकालना, sober (सोबं (र)) = गम्भीर, gloomy (ग्लूमि) = निराश, उदास, wagons (वैगन्स) = छकड़ा/गाड़ियाँ, pretence (प्रिटेन्स) = बहाना, दिखावा, shivered (शिव(र)ड) = काँप रहा था, embarrassed (इम्बैरेस्ट्र) = शर्मिंदा हुआ, carters (काट(र)स) = गाड़ीवान, jeered (जिअ(र)ड) = मजाक उड़ाया, idleness (आइइल्नूस) = आलस्य, feebleness (फीबलनस) = कमजोरी, tattered (टैटेड) = घिसा और फटा हुआ, effect (इफेक्ट) = प्रभाव, tapped (टैपूंट) = थपकी दी, parting (पाटिङ्ग) = जुदा होना।
हिन्दी अनुवाद : जब सर्गेई दूसरे मकान में स्थानान्तरित हुए, तो उन्होंने सामान बाँधने और फर्नीचर को बाहर निकलवाने में उसको भाड़े पर रख लिया। इस बार वह घुमक्कड़ गम्भीर, उदास तथा शान्त था। उसने मुश्किल से ही फर्नीचर को छुआ और अपना सिर लटकाकर गाड़ियों के पीछे घूमता रहा और उसने व्यस्त रहने का दिखावा भी नहीं किया। वह केवल ठण्ड में काँपता रहा और उस समय लज्जित महसूस करने लगा जब गाड़ी हाँकने वालों ने उसके आलसी होने, उसकी निर्बलता और घिसे-पिते बेढंगे ओवरकोट का मजाक उड़ाया। जब स्थानान्तरण का काम समाप्त हो गया, तब सर्गेई ने उसे बुलाया।
"अच्छा, मुझे खुशी है कि मेरे शब्दों का असर हुआ है," उसे एक रूबल देते हुए वह बोला। "यह तुम्हारी
तकलीफों का पुरस्कार है। मैं देख रहा हूँ कि तुम गम्भीर हो और काम करने में तुम्हें कोई आपत्ति नहीं होती है। तुम्हारा क्या नाम है?"
"लशकॉफ।"
"ठीक है, लशकॉफ, अब मैं तुम्हें कोई दूसरी, साफ-सुथरी नौकरी दे सकता हूँ। क्या तुम लिखना जानते हो?"
"मैं लिख सकता हूँ।"
"तो कल मेरा यह पत्र मेरे एक मित्र के पास ले जाना और आपको नकल करने (लिखने) का कुछ काम मिल जाएगा। कठोर परिश्रम करते रहना, शराब मत पीना और जो कुछ भी मैंने आपसे कहा है, उसे याद रखना। अलविदा!"
एक व्यक्ति को सही रास्ते पर लगा देने की खुशी से सर्गेई ने लशकॉफ के कंधे के ऊपर हल्के से थपथपाया और यहाँ तक कि जुदा होते समय उससे हाथ मिलाया। लशकॉफ ने पत्र ले लिया और उस दिन के बाद वह उस प्रांगण में कभी भी काम के लिए वापस नहीं आया।
Two years went ..................... glad, indeed.
कठिन शब्दार्थ : curly (कलि) = घुँघराले, timidly (टिमिडलि) = डरते-डरते, individual (इन्डिविजुअल) = व्यक्ति, notary (नउटरि) = लेखपत्रों को प्रमाणित करने वाला अधिकारी, delighted (डिलाइटिड) = आनन्दित हुआ, godson (गॉडसन्) = धर्मपुत्र, push (पुश्) = प्रेरणा दी, to give roasting (टु गिव रोस्ट्रड्) = मजाक उड़ाना, sinking (सिङ्कूङ्) = बेहोश होना, protection (प्रोटेक्शन्) = सुरक्षा, dragged (ड्रेग्ड) = खींचकर बाहर किया, indeed (इन्डीड़) = वास्तव में।
हिन्दी अनुवाद : दो वर्ष बीत गए। फिर एक दिन शाम को, ज्यों ही सर्गेई एक थियेटर की टिकट-खिड़की के पास अपनी सीट बुक कराने के लिए भुगतान कर रहा था, तो उसने अपने नजदीक एक आदमी को देखा जिसके कोट का कालर घुँघराले रोएं का था और वह सील मछली की त्वचा की बनी एक फटी-पुरानी टोपी पहने हुए था। उस छोटे व्यक्ति से डरते हुए टिकट-विक्रेता से गैलरी की एक सीट देने के लिए कहा और ताँबे के सिक्कों में उसके लिए भुगतान किया।
"लशकॉफ, क्या तुम हो?" सर्गेई जोर से बोला, उसने बौने व्यक्ति के रूप में अपने पुराने लकड़ी काटने वाले को पहचाना। "तुम्हारा कैसा हाल-चाल है? तुम क्या काम कर रहे हो? तुम्हारा सब-कुछ कैसे चल रहा है?"
"ठीक ही है। अब मैं एक लेखप्रमाणक (नोटरि) हूँ और मुझे प्रति महीना पैंतीस रूबल मिलते हैं।"
"भगवान का धन्यवाद करो! यह बहुत अच्छा है! मुझे तुम्हारी इस बात पर बड़ी खुशी हुई है। लशकॉफ, मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई है। देखिए, आप एक प्रकार से मेरे धर्मपुत्र हैं। आप जानते ही हैं कि मैंने तुम्हें सही मार्गदर्शन
दिया था। क्या तुम्हें याद है कि मैंने तुम्हारी आलोचना की थी, एह? मैंने उस दिन तुम्हें लगभग अपने पैरों पर गिरा दिया था। भले पुरुष, मेरे शब्द याद रखने के लिए तुम्हारा धन्यवाद।''
"आपका भी धन्यवाद", लशकॉफ ने कहा, "यदि मैं आपके पास नहीं आता तो आज तक स्वयं को अध्यापक या विद्यार्थी कहता फिरता। हाँ, आपके संरक्षण में आकर मैं गड्डे से बाहर निकल आया हूँ।"
"मुझे वास्तव में अत्यधिक खुशी है।"
"Thank you for................................... to the gallery."
कठिन शब्दार्थ : deeds (डीड़्ज) = कार्य, grateful (ग्रेट्फ्लू) = आभारी, noble (नोबुलू) = सज्जन, indebted (इन्डेटेड्) = आभारी, ऋणी, sot (सॉर्टू) = पियक्कड़, miserable (मिजरबुलू) = बेचारा, creature (क्रीच(र)) = प्राणी, ruin (रूइन्) = सर्वनाश, pleasure (प्लेश(र)) = खुशी, carry on (कैरि ऑन) = जारी रखना, strain (स्ट्रेन्) = आवाज, misery (मिजरि) = दुःख, shed (शेड्) = बहाए, owing to (ओोइङ टू) = के कारण, however (हाउएव(र)) = फिर भी, bowed (बोड) = नतमस्तक हुआ।
हिन्दी अनुवाद : "आपके दयालु शब्दों और कार्यों के लिए आपका धन्यवाद। मैं आपका और आपकी रसोइया का अत्यधिक आभारी हूँ। भगवान उस भली और नेक महिला को खुश रखे! उस समय आपने बहुत ही अच्छी बात कही थी और मैं आपका आजीवन ऋणी रहूँगा, लेकिन स्पष्ट बात यह है कि आपकी रसोइया, ओल्गा ने मुझे बचाया (उबारा) है।"
"वह कैसे?"
"जब कभी मैं लकड़ियाँ काटने के लिए आपके घर आया करता था तो वह कहना प्रारम्भ कर देती थी : 'अरे, तुम पियक्कड़! अरे तुम दयनीय प्राणी! तबाही के अतिरिक्त तेरे भाग्य में कुछ भी नहीं है।' और तब वह मेरे सामने बैठ जाया करती थी और उदास हो जाया करती थी, मेरे चेहरे की तरफ देखा करती थी और रो पड़ती थी। 'ओ, तू अभागे व्यक्ति! इस संसार में तेरे भाग्य में कोई खुशी नहीं है और अगले जन्म में भी तुझे खुशी नसीब नहीं होगी। शराबी! तू नरक में जलेगा। अरे, तू बदकिस्मत व्यक्ति!' और इसी प्रकार, उसी लहजे में वह बड़बड़ाती रहती थी। मैं आपसे यह बयान नहीं कर सकता हूँ कि उसे मेरे कारण कितना दुःख हुआ होगा और उसने मेरे लिए कितने आँसू बहाए होंगे। परन्तु मुख्य बात यह थी—वह मेरे लिए लकड़ियाँ काटा करती थी। श्रीमान्जी, क्या आपको पता है कि मैंने आपके लिए एक लकड़ी भी नहीं काटी थी? वह सब-कुछ उसने किया था। इस बात ने मुझे बचाया है और
उसी कारण मैं बदल गया हूँ, मैं इस बात का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता हूँ कि मैंने उसकी उपस्थिति में शराब पीना क्यों छोड़ दिया था। मुझे केवल यह ज्ञात है कि उसके शब्दों और नेक कार्यों की वजह से ही मेरे हृदय में परिवर्तन आ गया है, उसी ने मुझे ठीक मार्ग पर लगा दिया है और मैं उसे कभी नहीं भूलूँगा। खैर, अब जाने का समय हो गया है, घण्टी बज चुकी है।" लशकॉफ ने प्रणाम किया और जुदा होकर गलियारे में चला गया।
TEXTUAL QUESTIONS
Think About It :
Q. 1. Has Lushkoff become a beggar by circumstances or by choice?
क्या लशकॉफ परिस्थितिवश भिखारी बना था अथवा अपनी इच्छा से?
Ans. Lushkoff became a beggar by choice and not by circumstances. He never asked for work. He always asked for alms. He would say that he was hungry for many days and had nothing to eat. He never looked for work.
लशकॉफ अपनी इच्छा से भिखारी बना था न कि परिस्थितिवंश। वह कभी काम की माँग नहीं करता था। वह सदा भीख की माँग करता था। वह कहता था कि वह अनेक दिनों से भूखा था और उसके पास खाने को कुछ नहीं था। वह कभी काम की तलाश नहीं करता था।
Q. 2. What reasons does he give to Sergei for his telling lies?
वह सर्गेई को अपने झूठ बोलने के लिए क्या कारण बताता है?
Ans. The beggar justifies telling lies because he can not get along without this tact. He will that nobody will give him anything if he tells the truth.
भिखारी झूठ बोलने को उचित ठहराता है, क्योंकि झूठ बोले बिना इसका काम नहीं चलता है। उसने कहा कि यदि वह सच बोलेगा तो उसे कोई कुछ नहीं देगा।
Q. 3. Is Lushkoff a willing worker? Why, then, does he agree to chop wood for Sergei?
क्या लशकॉफ इच्छा से काम करता है? तब क्यों वह सर्गेई की लकड़ी काटना स्वीकार करता है?
Ans. No, Lushkoff was not a willing worker. He agreed because he had been trapped by his own words. He had said that he would not refuse to chop wood if he could get such work.
नहीं, लशकॉफ स्वेच्छा से काम करने वाला आदमी नहीं था। वह सहमत इसलिए हुआ क्योंकि वह अपने ही शब्दों
के जाल में फँस चुका था। उसने कहा था कि वह लकड़ियाँ काटने के काम से इनकार नहीं करेगा अगर उसे ऐसा काम मिल जाए।
Q. 4. Sergei says, "I am happy that my words have taken effect." Why does he say so? Is he right in saying this?
सर्गेई कहता है, ‘‘मैं प्रसन्न हूँ कि मेरे शब्दों का असर हुआ है।’’ वह ऐसा क्यों कहता है? क्या उसका ऐसा कहना सही है?
Ans. When Sergei moved into another house, he hired Lushkoff to help him in packing and hauling the furniture. Sergei thought that Lushkoff had been doing the work very well and had rather stopped begging for his work. After the moving was over Sergei sent for him and said, "I am happy that my words have taken effect." He had asked him not to beg but work and earn his bread. So he thought that his words had the right effect on him.
In my opinion, he was not right in saying so. He was still a work shirker.
जब सर्गेई दूसरे मकान में चला गया तो उसने लश्कॉफ को पैकिंग करने तथा फर्नीचर सरकाने के काम में सहायता के लिए लगाया। सर्गेई ने सोचा कि लश्कॉफ काम बहुत अच्छी तरह कर रहा था और उसने काम के लिए (काम की वजह से) भीख माँगना बन्द कर दिया था। स्थानान्तरण पूरा होने के बाद सर्गेई ने उसे बुलाया और कहा, ‘‘मैं खुश हूँ कि मेरे शब्दों का असर हो रहा है।’’ उसने उसे भीख नहीं माँगने तथा काम करने एवं आजीविका कमाने को कहा था। अतः उसने सोचा कि उसके शब्दों का उस पर सही असर हुआ था।
मेरे विचार में, ऐसा कहने में वह सही नहीं था। वह अभी भी एक कामचोर था।
Q. 5. Lushkoff is earning thirty-five roubles a month. How is he obliged to Sergei for this?
लश्कॉफ प्रति महीना 35 रूबलस कमा रहा है। वह इसके लिए सर्गेई का किस प्रकार आभारी है?
Ans. Sergei sent Lushkoff to his friend with a letter to work as a copying clerk. Lushkoff was obliged to Sergei for recommending him for the job to his friend. With his hard work and sincerity he had become a notary officer and started earning thirty-five roubles per month.
Thus, Sergei dragged Lushkoff out of a pit and helped him stand on his own feet. So Lushkoff was very grateful to Sergei.
सर्गेई ने लश्कॉफ को एक नकल करने वाले क्लर्क के रूप में कार्य करने के पत्र के साथ अपने मित्र के पास भेजा। अपने मित्र को उसे कार्य पर लगाने की सिफारिश के लिए लश्कॉफ सर्गेई का आभारी था। कठिन परिश्रम तथा वफादारी से वह एक लेखप्रमाणक (नोटेररि) बन गया तथा प्रति महीना पैंतीस रूबल कमाने लगा।
इस प्रकार सर्गेई ने लश्कॉफ को गड्ढे से बाहर निकाला और उसे अपने पैरों पर खड़े होने में मदद की। अतः लश्कॉफ सर्गेई का बहुत आभारी था।
Q. 6. During their conversation Lushkoff reveals that Sergei’s cook, Olga, is responsible for the positive change in him. How has Olga saved Lushkoff?
वार्ता के मध्य लश्कॉफ खुलासा करता (बताता) है कि उसमें सकारात्मक परिवर्तन की जिम्मेदार सर्गेई की रसोइया, ओल्गा है। ओल्गा ने लश्कॉफ का जीवन कैसे बचाया?
Ans. Sergei’s cook, Olga, helped in changing the life of Lushkoff. She admonished and scolded him for his drinking habit. She always called him a miserable man. She always sat opposite to him and grew sad by looking into his face. She wept for him for his misery. She suffered great misery for his sake. She used to chop wood for him. Owing to her words and noble deeds, a change took place in his heart. He stopped drinking at the sight of her. So she changed his life.
सर्गेई की रसोइया, ओल्गा ने लश्कॉफ के जीवन को बदलने में सहायता की। वह उसे सदैव उसकी शराबखोरी की आदत के लिए फटकारती थी तथा प्रताड़ित करती थी। वह उसे दुःखी प्राणी कहकर पुकारती थी। वह हमेशा उसके सामने बैठ जाती तथा उसके चेहरे को देखकर दुःखी होती थी। वह उसके कष्ट के लिए रोती थी। उसने उसके लिए बहुत कष्ट सहे। वह उसके लिए लकड़ी काटा करती थी। उसके शब्दों तथा अच्छे कार्यों से उसके हृदय में परिवर्तन हुआ। उसने उसे देखकर ही शराब पीना छोड़ दिया। इस प्रकार उसने उसका जीवन बदल दिया।
ADDITIONAL QUESTIONS
I. Multiple Choice Questions :
1. What did the mendicant claim to be?
(A) a village schoolteacher.
(B) a postman.
(C) a clerk.
(D) None.
What was Sergei?
(A) A doctor
(B) A teacher
(C) An advocate
(D) A merchantHow much did Sergei pay the beggar for chopping wood?
(A) one rouble
(B) half a rouble
(C) five roubles
(D) None of the aboveWhere did Sergei meet Lushkoff two years later?
(A) At the ticket window of a theatre.
(B) In the market-place.
(C) At a cloth shop.
(D) None.Whom did Lushkoff give greater credit for his reformation?
(A) To Sergei
(B) To Olga
(C) To Sergei's friend
(D) To himselfWho chopped the wood for Lushkoff?
(A) Olga
(B) Lushkoff's friend
(C) Lushkoff himself
(D) None.
Answers— 1. (A) 2. (C) 3. (B) 4. (A) 5. (B) 6. (A)
II. Answer the following questions in about 60 words :
Q. 1. What various jobs did the beggar do for the advocate?
भिखारी ने वकील के भिन्न-भिन्न प्रकार के क्या कार्य किए?
Ans. The beggar chopped wood for the advocate. At times he would shovel the snow and beat the dust of rugs and mattresses. Sometimes, he would put the wood-shed in order. When Sergei moved into another house, he hired him to help in the packing and hauling of the furniture.
भिखारी वकील के लिए लकड़ी काटता था। यदाकदा वह बेलचे से बर्फ हटाता और कालीन तथा गद्दों की धूल झाड़ता था। कई बार वह लकड़ियों के छप्पर में लकड़ियाँ व्यवस्थित करता था। जब सर्गेई दूसरे घर में गया तो उसने, उसे फर्नीचर को पैक करने और ढोने के लिए रख लिया था।
Q. 2. How did the advocate know that he had seen the beggar before?
वकील ने किस प्रकार जाना कि वह पहले उस भिखारी से मिल चुका था?
Ans. At first, Sergei looked at the ragged, fawn-coloured overcoat of the beggar, at his dull, drunken eyes, at the red spot on either cheek, and it seemed to him as if he had seen that man somewhere before. Then the advocate saw the beggar's gumboots—one was high and the other was low. He knew that he had seen the beggar somewhere before.
प्रारम्भ में सर्गेई भिखारी के पीले कोट, उसकी नीरस नशीली आँखों और उसके दोनों गालों पर लाल निशान की ओर देखा तथा उसे लगा कि उसने उस व्यक्ति को पहले कहीं देखा था। तब वकील ने भिखारी के जूते देखे—एक जूता ऊँचा था और दूसरा जूता नीचा था। वह जान गया कि वह भिखारी से पहले कहीं मिल चुका है।
Q. 3. What role did the cook play in changing the beggar's life?
भिखारी के जीवन में परिवर्तन लाने में भोजन पकाने वाली की क्या भूमिका थी?
Ans. When the beggar went to chop wood, the cook would rebuke and condemn him. She would sit opposite him grow sad and wept. She shed tears. She used to chop the wood for him. He didn’t chop one single stick of wood for Sergei. He did it all. Owing to her words and noble deeds, a change took place in his heart. She set him right.
जब भिखारी लकड़ी काटने जाता था तो भोजन पकाने वाली उसे फटकारती थी और उसकी भर्त्सना करती थी। वह उसके सामने बैठ जाती थी और उदास हो जाती थी और रोती थी। वह आँसू बहाती थी। वह उसके लिए लकड़ी काटती थी। भिखारी ने सर्गेई के लिए एक भी लकड़ी नहीं काटी थी। ये सब ओल्गा ने किया था। उसके शब्दों व अच्छे कार्यों के कारण उसके हृदय में एक बदलाव आया। उसने उसे ठीक कर दिया था।
III. Answer the following questions in about 80 words :
Q. 1. How did the beggar earn money while he worked for the advocate?
जब भिखारी वकील के लिए काम करता था तो धन कैसे अर्जित करता था?
Ans. When Olga gave a report that the work of chopping wood was finished, the advocate asked her to give him half a rouble. Then the advocate asked him to come if he wanted to work for him. He used to come on the first day