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📚 कक्षा 9 हिंदी (Hindi)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 1: दो बैलों की कथा (प्रेमचंद)

Do Bailon Ki Katha

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 हिन्दी (RBSE) 📘 क्षितिज (गद्य खण्ड) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Do Bailon Ki Katha

दो बैलों की कथा (प्रेमचंद)

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1. दो बैलों की कथा

( प्रेमचन्द )

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. काँजीौस में कैद पशुओं की हाजिरी क्यों ली जाती होगी?

उत्तर— काँजीहौस में कैद पशुओं की हाजिरी कैद पशुओं की संख्या, उनकी विभिन्न आवश्यकताओं की पड़ताल, जिससे उनके खाने-पीने का इन्तजाम उसके अनुसार किया जा सके, पशुओं के व्यवहार का आकलन तथा सभी कैद पशुओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ली जाती होगी।

प्रश्न 2. छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?

उत्तर—छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। उसकी सौतेली माँ उसे मारती थी और उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती थी। वह माँ के बिछड़ने का दर्द जानती थी। इसलिए हीरा-मोती की व्यथा देखकर उसके मन में उनके प्रति प्रेम उमड़ आया, क्योंकि उसे लगा कि वे भी उसी की तरह अभागे हैं।

(1) सरल-सीधा और अत्यधिक सहनशील नहीं होना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक सीधे इन्सान को 'गधा' कहा जाता है। इसलिए मनुष्य को अपने अधिकारों के प्रति संघर्षरत रहना चाहिए।
(2) मनुष्य को हमेशा स्वामिभक्ति, सहयोग, निःस्वार्थ परोपकार, मित्रता और नारियों के प्रति सहयोग की भावना रखनी चाहिए।
(3) आजादी पाने के लिए मनुष्य को बड़े से बड़ा कष्ट उठाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
(4) मनुष्य को नारी जाति का सम्मान करने वाला, धर्म की मर्यादा मानने वाला तथा सच्ची आत्मीयता रखने वाला होना चाहिए।

प्रश्न 4. प्रस्तुत कहानी में प्रेमचन्द ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ 'मूर्ख' का प्रयोग न कर किस नये अर्थ की ओर संकेत किया है?

उत्तर— प्रस्तुत कहानी में प्रेमचन्द ने गधे के लिए रूढ़ अर्थ 'मूर्ख' का प्रयोग न करके उसे सन्तोषी, सहनशील, सुख-दुःख में समान रहने वाले, क्रोधरहित एवं स्थिर व्यवहार वाला बताया है। इस आधार पर उसकी तुलना ऋषि-मुनियों के स्वभाव से की है। इस प्रकार कथाकार ने गधे के सहिष्णु, निरापद, सद्गुणी एवं सन्तोषी स्वभाव वाले अर्थ की ओर संकेत किया है।

प्रश्न 5. किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?

उत्तर— 'दो बैलों की कथा' में कुछ घटनाएँ ऐसी हैं, जिनसे हीरा और मोती की गहरी दोस्ती का पता चलता है। यथा-

(1) वे एक-दूसरे को सूंघ कर व चाटकर अपना प्रेम प्रकट करते थे।
(2) दोनों बैलगाड़ी या हल में जोते जाने पर ज्यादा से ज्यादा बोझ स्वयं धोने का प्रयास करते थे।

(3) मटर के खेत में दोनों मस्त होकर, सींग मिलाकर एक-दूसरे को ढेलने लगे। तब हीरा को क्रोधित देखकर मोती ने उसके साथ कठोर व्यवहार किया और दोस्ती को दुश्मनी में नहीं बदलने दिया।
(4) गया द्वारा हीरा की निर्दयतापूर्वक पिटाई करने पर मोती का क्रोध भड़क उठा और वह हल, जुआ आदि लेकर भाग निकला और उनको तोड़-ताड़कर बराबर कर दिया।

(5) दोनों मित्रों ने सहयोगी रणनीति से साँड का मुकाबला कर उसे परास्त किया।
(6) मटर के खेत में मोती के पकड़े जाने पर हीरा भी उसके पास आ गया। रखवालों ने उसे भी पकड़ लिया।
(7) काँजीहौस में दीवार गिराने पर जब हीरा की रस्सी नहीं टूटी तो मोती भी अकेले बाहर नहीं गया। इस तरह के आचरण से दोनों में गहरी दोस्ती दिखाई दी।

प्रश्न 6. "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।"-हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचन्द के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-हीरा के उक्त कथन के माध्यम से प्रेमचन्द का स्त्री-जाति के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त हुआ है। भारतीय संस्कृति में 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' कथन से नारी को सम्मानित एवं पूज्या माना गया है। हमारे समाज में कुछ लोग स्त्री को केवल भोग्या तथा साधारण जीव मानते हैं, उसका शोषण-उत्पीड़न करते हैं, मारते-पीटते भी हैं, परन्तु प्रेमचन्द का ऐसा दृष्टिकोण नहीं रहा है। उन्होंने स्त्री को समता एवं सम्मान का पात्र बताया है।

प्रश्न 7. किसान जीवन वाले समाज में पशु और मनुष्य के आपसी सम्बन्धों को कहानी में किस तरह व्यक्त किया गया है?

उत्तर-कहानी में किसान जीवन वाले समाज में मनुष्य और पशु का घनिष्ठ संबंध बताया गया है। वे एक-दूसरे के सहायक और पूरक रहे हैं। किसान पशुओं को घर का सदस्य मानकर उनसे प्रेम करता है और पशु भी अपने स्वामी के लिए जी-जान देने को तैयार रहते हैं। झूरी हीरा-मोती को घर के सदस्यों की तरह स्नेह करता था। इसीलिए हीरा-मोती दो बार उसकी ससुराल से भाग कर अपने थान पर खड़े हुए थे। उन्हें देखकर वह ही नहीं उसकी पत्नी भी आनन्द से भर उठी थी। इससे पता चलता है कि किसान अपने पशुओं से मानवीय व्यवहार करते हैं।

प्रश्न 8. "इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे"-मोती के इस कथन के आलोक में उसकी विशेषताएँ बताइए।

उत्तर-इस कथन से ज्ञात होता है कि मोती स्वभाव से उग्र किन्तु परोपकारी, सहयोगी और दयालु बैल है। वह अत्याचार का विरोधी, पीड़ितों के प्रति सहानुभूति रखने वाला और आजादी का समर्थक है। इसीलिए वह काँजीहौस की दीवार तोड़कर बन्द पड़े पशुओं को आजाद कर देता है। उसे इस बात पर संतोष होता है कि अब चाहे कुछ भी हो। इतना तो हो गया कि मेरे प्रयास से नौ-दस प्राणियों की जान बच गयी। अतः वह आशावादी, स्वार्थीहीन और साहसी पशु था।

प्रश्न 9. आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।

उत्तर-आशय-सामान्य पशु होते हुए भी हीरा और मोती एक-दूसरे के मनोभावों को समझ लेते थे तथा मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे। इससे कथाकार का मानना है कि उन दोनों बैलों के पास अवश्य ही कोई गुप्त शक्ति थी जिसके माध्यम से मूक-भाषा में वे एक-दूसरे की मन की भावनाओं को समझ लेते थे। मनुष्य सभी जीवों में श्रेष्ठ है, परन्तु उसके पास ऐसी गुप्त शक्ति का

अभाव है, जो बिना बोले ही दूसरों की भावनाओं को स्पष्टतया समझ सके।

(ख) उस एक रोटी से उनकी भूख तो क्या शांत होती, पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया।

उत्तर-आशय-गया के घर में हीरा-मोती के साथ अत्याचार होता था। गया उन्हें मारता था और खाने के लिए सूखा भूसा देता था। दोनों बैल इसे अपना अपमान समझते थे। सन्ध्या के समय उसी घर की एक छोटी सी बच्ची ने दो रोटियाँ लाकर उन दोनों को खिलायीं। एक रोटी से उनकी भूख क्या शान्त होती, परन्तु छोटी बच्ची के प्रेमपूर्ण व्यवहार को देखकर उन दोनों में एक शक्ति का संचार हो गया, मानो उन्हें अच्छा भोजन मिल गया and उनके हृदय में यह भाव जागा कि यहाँ पर भी किसी सज्जन का वास है।

प्रश्न 10. गया ने हीरा-मोती को दोनों बार सूखा भूसा खाने के लिए दिया क्योंकि-

(क) गया पराये बैलों पर अधिक खर्च नहीं करना चाहता था।

(ख) गरीबी के कारण खली आदि खरीदना उसके बस की बात न थी।

(ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुःखी था।

(घ) उसे खली आदि सामग्री की जानकारी न थी।

सही उत्तर के आगे ()(\sqrt) का निशान लगाइए।

उत्तर-(ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुःखी था। (\sqrt)

रचना और अभिव्यक्ति-

प्रश्न 11. हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाई, लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती की इस प्रतिक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें।

उत्तर-प्रस्तुत कहानी में हीरा-मोती को स्वतन्त्रता-आन्दोलन के क्रान्तिकारियों के प्रतीक रूप में रखा गया है। इन दोनों ने गया के घर जाने पर मातृभूमि के प्रेम दर्शाने और अत्याचार-शोषण का विरोध करने में अपनी क्षमता का परिचय दिया। इस संघर्ष में उन्हें वहाँ प्रताड़ना मिली, मार भी खानी पड़ी और भूसा भी रखा गया, फिर भी वे अपने ढंग से उसका विरोध करते रहे। इस तरह गुलामी के बदले आजादी की लालसा में उन्होंने संघर्षरत रहने की अपनी बलवती भावना का परिचय दिया।

प्रश्न 12. क्या आपको लगता है कि यह कहानी आजादी की लड़ाई की ओर संकेत करती है?

उत्तर-अप्रत्यक्ष रूप से यह कहानी अंग्रेजों की दास्ता से मुक्ति की कहानी है और इसमें हीरा-मोती क्रान्तिकारियों

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के प्रतीक हैं। जिस समय यह कहानी लिखी गयी, उस समय भारत में स्वतन्त्रता आन्दोलन चल रहा था। अपनी बात को खुलकर न कह सकने के कारण प्रेमचन्द ने दो बैलों के माध्यम से आजादी की लड़ाई की ओर संकेत किया। हीरा-मोती को लेकर कहानी में जो घटना-क्रम एवं विचारार्भिव्यक्ति दर्शायी गई है, वह सब आजादी की लड़ाई से मेल खाती है। जहाँ झूरी का घर स्वराज्य का और गया का घर पराधीनता का प्रतीक है वहीं हीरा अहिंसा का और मोती क्रान्ति का प्रतीक है और रेवड़ में चरने वाले पशु स्वतन्त्रता के प्रतीक हैं। अन्त में इन दोनों की विजय बताई गयी है।

भाषा-अध्ययन-

प्रश्न 13. बस इतना ही काफ़ी है।

फिर मैं भी जोर लगाता हूँ।

'ही', 'भी' वाक्य में किसी बात पर जोर देने का काम कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को निपात कहते हैं। कहानी में से ऐसे पाँच वाक्य छाँटिये, जिनमें निपात का प्रयोग हुआ हो।

उत्तर-(1) जोर तो मारता ही जाऊँगा।

(2) न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती।

(3) एक ने भी उसमें मुँह न डाला।

(4) आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा।

(5) साँड को भी संगठित शत्रुओं से लड़ने का तजरबा न था।

प्रश्न 14. रचना के आधार पर वाक्यभेद बताइए तथा उपवाक्य छाँटकर उसके भेद भी लिखिए—

उत्तर-रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं—(1) सरल वाक्य (2) संयुक्त वाक्य (3) मिश्र वाक्य।

( क ) दीवार का गिरना था कि अधमरे-से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।

उत्तर-यह मिश्र वाक्य है।

(i) दीवार का गिरना था - प्रधान या मुख्य उपवाक्य

(ii) अधमरे से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे। - आश्रित क्रिया विशेषण उपवाक्य

( ख ) सहसा एक दृढ़ियल आदमी, जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यन्त कठोर, आया।

उत्तर-यह मिश्र वाक्य है।

(i) सहसा एक दृढ़ियल आदमी आया। - प्रधान उपवाक्य

(ii) जिसकी आँखें लाल थीं। - आश्रित क्रिया उपवाक्य

(iii) और मुद्रा अत्यन्त कठोर - आश्रित क्रिया उपवाक्य

( ग ) हीरा ने कहा-गया के घर से नाहक भागे।

उत्तर-यह मिश्र वाक्य है।

(i) हीरा ने कहा। - प्रधान उपवाक्य

(ii) गया के घर से नाहक भागे। - आश्रित संज्ञा उपवाक्य

( घ ) मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे।

उत्तर-मिश्र वाक्य है।

(i) तो बिकेंगे। - प्रधान उपवाक्य

(ii) मैं बेचूँगा। - आश्रित क्रिया-विशेषण उपवाक्य

( ङ ) अगर वह मुझे पकड़ता तो मैं बे-मारे न छोड़ता।

उत्तर-मिश्र वाक्य है।

(i) मैं बे-मारे न छोड़ता। - प्रधान उपवाक्य

(ii) अगर वह मुझे पकड़ता। - आश्रित क्रिया-विशेषण उपवाक्य

प्रश्न 15. कहानी में जगह-जगह मुहावरों का प्रयोग हुआ है। कोई पाँच मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर-कहानी में प्रयुक्त मुहावरे-ईंट का जवाब पत्थर से देना, सिंहनी का रूप धारण करना, सींग मारना, गम खाना, जी-तोड़ काम करना, सिर झुकाना, धौल-धप्पा होना, कोर कसर उठा न रखना, पसीना आना, दिल भारी होना, आँख न उठाना, पलट जाना, टाल जाना, जान से हाथ धोना, नाकों में नथ डालना, जान जोखिम में डालना, मन फीका होना, अकड़ निकल जाना, खलबली मचना, मन फीका करना, माथा चूमना, काम आना आदि।

वाक्य-प्रयोग—(1) शत्रु तभी शान्त होगा, जब ईंट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा

(2) मालकिन ने तुरन्त पास आकर दोनों के माथे चूम लिये

(3) काँजीहौस में बंद होने पर दोनों की अकड़ निकल गई

(4) काँजीहौस की दीवार गिरने पर सभी जानवरों में खलबली मच गई

(5) यहीं रहे तो जान से हाथ धोना पड़ेगा


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. 'दो बैलों की कथा' किस लड़ाई की ओर संकेत करती है?

उत्तर-'दो बैलों की कथा' कहानी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की लड़ाई की ओर संकेत करती है।

प्रश्न 2. झूरी कौन था? उसका हीरा-मोती के साथ क्या सम्बन्ध था?

उत्तर-झूरी एक किसान था। हीरा-मोती उसके दो बैल थे।

प्रश्न 3. काँजीहौस के अन्दर का दृश्य कैसा था?

उत्तर-काँजीहौस के अन्दर बिना चारा-पानी के जमीन पर मुर्दों के समान अनेक भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे पड़े थे।

प्रश्न 4. गया ने जब बैलों को हल में जोता तो बैलों पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर— गया ने जब बैलों को हल में जोता तो वे दोनों अड़ियल बन गए।

प्रश्न 5. बाल सभा ने क्या किया?

उत्तर— बाल सभा ने बैलों के घर लौटने पर उनका अभिनन्दन किया।

प्रश्न 6. पशुओं में ऐसा कौनसा गुण होता है जो मनुष्य में इनकी अपेक्षा कम है?

उत्तर— मन के भावों को समझ लेने का गुण।

लघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. "नहीं, हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।" यह किसने और किस आशय से कहा?

उत्तर— यह हीरा ने कहा। दोनों बैल जब हल लेकर भागे, तो गया अपने दो आदमियों के साथ लाठी लेकर आया। उस समय गया को देखकर मोती ने कहा कि मैं भी इसे कुछ मजा चखाता हूँ। तब हीरा ने कहा कि गया इस समय हमारा मालिक जैसा है। अतः मालिक पर प्रहार करना हम सेवकों का धर्म नहीं है।

प्रश्न 2. बेदम होकर गिर पड़े साँड को लक्ष्य कर हीरा-मोती ने कौनसी नीति-विषयक बातें कही?

उत्तर— बेदम होकर गिरे साँड को लक्ष्य करके हीरा ने कहा कि 'गिरे हुए बैरी पर सींग नहीं चलाना चाहिए।' मोती ने फिर कहा कि 'यह सब ढोंग है, बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।' अर्थात् उसके प्रति सदाशयता या क्षमा भाव नहीं रखना चाहिए। इस प्रकार हीरा-मोती ने साँड को लक्ष्य कर सुन्दर नीति-विषयक बातें कही।

प्रश्न 3. हीरा और मोती के स्वभाव में क्या अन्तर दिखाई देता है? कहानी के आधार पर बताइए।

उत्तर— मोती स्वभाव से कुछ उग्र, अन्याय व अत्याचार का विरोध करने में 'जैसे को तैसा' सिद्धान्त को मानने वाला, परोपकारी व दयालु है। हीरा भी अन्याय का विरोधी है लेकिन मोती की तरह उग्र नहीं है। इस तरह हीरा के मुकाबले मोती का स्वभाव अधिक स्वाभाविक प्रतीत होता है।

प्रश्न 4. हीरा-मोती ने दूसरी बार गया के घर भेजे जाने का किस प्रकार विरोध किया? कहानी के आधार पर बताइए।

उत्तर— हीरा और मोती गया के घर नहीं जाना चाहते थे लेकिन भेजे जाने पर पहले तो मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा परन्तु हीरा ने उसे सँभाल लिया। सूखी घास नहीं खायी और गया द्वारा हीरा की नाक पर डंडे बरसाए जाने पर मोती ने हल, रस्सी, जुआ, जोत, सब तोड़-ताड़कर गया के घर से भाग गए।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. काँजीौस में हीरा-मोती ने किस तरह एकता दिखाई थी?

उत्तर— काँजीहौस के अन्दर अनेक भैंसें, बकरियाँ, घोड़े, गधे आदि पशु बन्द थे। भूख-प्यास के कारण वे बेहाल थे और एकदम मरियल बने हुए थे। ऐसे में हीरा-मोती ने काँजीहौस की दीवार को सींग मार-मार कर तोड़ डाला। इससे वहाँ के सारे पशु आजाद हो गए। गधे वहाँ से भागने को तैयार नहीं थे। तब हीरा-मोती ने उन्हें भी खदेड़कर बाहर कर दिया। इस तरह काँजीहौस में हीरा-मोती ने एकता और साहस का परिचय दिया, परन्तु अन्ततः वे पूरी तरह सफल नहीं हुए।

प्रश्न 2. 'दो बैलों की कथा' में लेखक ने सच्चे मित्रों की क्या पहचान बतायी है?

उत्तर— प्रस्तुत कहानी में लेखक ने हीरा-मोती बैलों के माध्यम से सच्चे मित्रों की यह पहचान बतायी है कि सच्चे मित्र आपस में खूब मेल-जोल से रहते हैं। वे कभी आपस में कुछ धौल-धप्पा, शरारत या कुलेल-क्रीड़ा भी करते हैं, परन्तु उससे उनका प्रेम बढ़ता है। सच्चे मित्र हर समय एक-दूसरे की निस्वार्थ भाव से सहायता-सहयोग करते हैं। जैसे हीरा-मोती एक साथ हल या गाड़ी को खींचते थे, नाँद में खली-भूसा एक साथ खाते थे और विपदा आने पर एक साथ उसका सामना करते थे।

प्रश्न 3. 'दो बैलों की कथा' के आधार पर सिद्ध कीजिए कि एकता में ही शक्ति है।

उत्तर— गया के घर से दूसरी बार भागने पर हीरा-मोती रास्ता भटक गए। वे दोनों एक खेत में मटर खाने घुसे, तो वहाँ उनका मुकाबला एक बड़े भयानक साँड से हुआ। तब हीरा-मोती ने योजना बनाई कि कैसे साँड का मुकाबला करें। साँड जब एक को आगे से मारता, तो उसी समय दूसरा उस पर पीछे से सींग से प्रहार करता। इस तरह वे दोनों उस साँड का मुकाबला करते रहे। हीरा-मोती ने योजनानुसार साँड के हमले को विफल कर दिया। इससे साँड बेदम होकर गिर पड़ा। तब हीरा-मोती ने उसे छोड़ दिया। यदि वे दोनों मिलकर साँड का मुकाबला नहीं करते, तो जान से हाथ धो बैठते। इससे सिद्ध होता है कि एकता में ही शक्ति है।

प्रश्न 4. 'स्वतन्त्रता सहज में नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है।'
'दो बैलों की कथा' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
'दो बैलों की कथा' का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— मुंशी प्रेमचन्द ने 'दो बैलों की कथा' के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि आजादी बिना संघर्ष के नहीं

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मिलती है। उसके लिए परस्पर एकता व सहयोग रखकर, संघर्ष एवं बलिदान-त्याग का मार्ग अपनाकर आगे बढ़ना पड़ता है। हीरा और मोती दोनों बैल गया के अत्याचार से, काँजीहौस रूपी जेल से, दढ़ियल कसाई के बन्धन से तभी मुक्त होते हैं, जब वे संघर्ष करते हैं, अनेक कष्ट झेलकर भी वे हार नहीं मानते हैं। देश को पराधीनता से मुक्ति भी एकता, सहयोग परहित निःस्वार्थ भाव एवं संघर्ष से मिल सकी, यही उद्देश्य प्रस्तुत कहानी में व्यंजित हुआ है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. हीरा-मोती किस प्रकार सहयोग एवं प्रेम करते थे? इससे क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर-सच्चे मित्र एक-दूसरे पर पूरा विश्वास करते हैं। वे एक-दूसरे के लिए त्याग भी करते हैं और एकसाथ खाते-पीते भी हैं। ये सभी गुण हीरा और मोती दोनों बैलों में भी देखे जा सकते हैं। हीरा-मोती गहरे मित्र हैं, वे आपस में कौल-क्रीड़ा, शरारत आदि भी करते हैं। हीरा-मोती एक साथ ही नाँद में मुँह डालते थे, एक साथ खली-भूसा खाते थे और आपस में एक-दूसरे को चाट-सूँघकर या सींग मिलाकर प्रेम प्रकट करते थे। हल या गाड़ी पर जोते जाने पर दोनों की यह चेष्टा रहती थी कि ज्यादा से ज्यादा बोझ मेरी गर्दन पर ही रहे। इसी प्रकार मुसीबत आने पर वे एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते थे। काँजीहौस में मोती हीरा की रस्सी तोड़ने का प्रयास करता रहा, परन्तु वह अकेला वहाँ से बाहर नहीं आया। इस प्रकार हीरा-मोती के परस्पर सहयोग एवं प्रेम को देखकर शिक्षा मिलती है कि आपस में अटूट प्रेम, मित्रता एवं सहयोग रखना चाहिए।

प्रश्न 2. 'दो बैलों की कथा' कहानी का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-'दो बैलों की कथा' कहानी के माध्यम से प्रेमचन्द ने भारतीय कृषक समाज और पशुओं के भावात्मक सम्बन्ध का वर्णन किया है। इसका मूल भाव यह है कि सहनशीलता, सरलता, सीधापन आदि गुणों का आज के परिवेश में कोई महत्व नहीं है। भारतीयों की पराधीनता काल में इसी कारण शोषण-उत्पीड़न हुआ। संघर्षशील और शक्तिशाली का सदा सम्मान होता है। जापान और अमेरिका ने इसी आधार पर सम्मान अर्जित किया है। अत्याचार और अन्याय का शिकार न होकर सदा संघर्ष करने से सम्मान भी मिलता है और आजादी भी हासिल होती है। स्वामी के प्रति वफादारी निभाने का वर्णन करना कहानी का प्रमुख लक्ष्य है। कहानीकार का सच्ची मित्रता पर प्रकाश डालना भी एक उद्देश्य है। एक सच्चा मित्र ही सुख-दुःख में साथ देता है। आत्मरक्षा के लिए सदैव संघर्ष करना चाहिए। एकता में सदा बल है, इस सर्वविदित सत्य को दर्शाना भी कहानी का मूल भाव है।

रचनाकार परिचय सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. मुंशी प्रेमचन्द का साहित्यिक परिचय दीजिए।

उत्तर-मुंशी प्रेमचन्द एक महान कथाकार थे। उन्हें उपन्यास-सम्राट् के रूप में भी जाना जाता है। उनका जन्म सन् 1880 में बनारस के निकट लमही नामक गाँव के एक साधारण कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। प्रेमचन्द ने आरम्भ में उर्दू में लिखना शुरू किया तथा बाद में हिन्दी में आए थे। उन्होंने वरदान, सेवासदन, रंगभूमि, कर्मभूमि, गबन, निर्मला, प्रेमाश्रम, गोदान आदि ग्यारह उपन्यासों की रचना की है तथा तीन सौ के लगभग कहानियाँ लिखी हैं जिनमें 'कफन', 'पूस की रात', 'दो बैलों की कथा', 'पंचपरमेश्वर', 'बड़े घर की बेटी', 'शतरंज के खिलाड़ी' आदि प्रमुख हैं। प्रेमचन्द की कहानियों में भावानुकूल एवं पात्रानुकूल भाषा का सार्थक प्रयोग किया गया है। इनकी भाषा-शैली में प्रेरणा देने की शक्ति के साथ पाठकों को चिन्तन के लिए उकसाने की शक्ति समाहित है।


अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

निर्देश-निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर प्रश्नों के सही उत्तर दीजिए :

(1)

जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे जैसा खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असन्तोष की छाया भी न दिखाई देगी। वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता हो; पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। उसके चेहरे पर एक विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। सुख-दुःख, हानि-लाभ, किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा। ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गये हैं; आदमी उसे बेवकूफ समझता है। सद्गुणों का इतना अनादर नहीं देखा। कदाचित् सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।

प्रश्न 1. गधे के चेहरे पर कभी असन्तोष की छाया क्यों नहीं दिखाई देती?

प्रश्न 2. कदाचित् सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है। इसका आशय स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3. आदमी गधे को बेवकूफ क्यों समझता है?

प्रश्न 4. ऋषियों-मुनियों के गुण किसमें पराकाष्ठा पर पहुँच गए हैं?

प्रश्न 5. कौनसे महीने में गधा प्रसन्न दिखाई देता है?

प्रश्न 6. 'पराकाष्ठा' शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर-1. गधा स्वभाव से सरल, संतोषी और हर हाल में संतुष्ट रहने वाला पशु है।