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📚 कक्षा 9 हिंदी (Hindi)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 10: माखनलाल चतुर्वेदी : कैदी और कोकिला

Makhanlal Chaturvedi (Kaidi Aur Kokila)

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 हिन्दी (RBSE) 📘 क्षितिज (काव्य खण्ड) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Makhanlal Chaturvedi (Kaidi Aur Kokila)

माखनलाल चतुर्वेदी : कैदी और कोकिला

महिमा एवं राधा-कृष्ण की प्रेमलीलाएँ हैं। रसखान की दो प्रमुख रचनाओं का वर्णन मिलता है—सुजान रसखान एवं प्रेमवाटिका। प्रेमवाटिका में प्रेम-विषयक दोहे हैं तथा सुजान रसखान में राधा-कृष्ण सम्बन्धित दोहे एवं कवित्त हैं। इनकी भाषा शैली मधुर, सरस एवं ब्रजभाषा युक्त है। कवित्त एवं दोहों की मधुरता ने वास्तव में इनके नाम को सार्थक किया है, रसखान वास्तव में ही रस की खान है।

कठिन शब्दार्थ, भावार्थ एवं अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न

कैदी और कोकिला

(1)
क्या गाती हो?
क्यों रह-रह जाती हो?
कोकिल बोलो तो!
क्या लाती हो?
सन्देशा किसका है?
कोकिल बोलो तो!

कठिन-शब्दार्थ— रह-रह जाती = चुप हो जाती। कोकिल = कोयल।

भावार्थ— स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने पर कवि को कारागार में जाना पड़ा। तब एक रात उसे वहाँ पर कोयल की कूक सुनाई पड़ती है। वह कहता है कि तुम रात में ही क्यों गाती हो? तुम फिर रह-रह अर्थात् कुछ क्षणों के बाद चुप क्यों हो जाती हो? हे कोयल, बोलो। तुम क्रान्तिकारी देशभक्तों को किसका सन्देश लाकर देती हो? स्वाधीनता संग्राम के कैदियों को तुम क्या सन्देश देती हो? हे कोयल, तुम स्पष्टतया बोलो।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. कोयल अर्द्धरात्रि में क्यों गाने लगती है?
प्रश्न 2. कवि कहाँ रहकर कोयल से प्रश्न करता है?

प्रश्न 3. 'कैदी और कोकिला' कविता में कोकिला को किसका प्रतीक बताया गया है?
प्रश्न 4. काव्य पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 5. कवि कोकिला से कौनसे दो प्रश्न करता है?
प्रश्न 6. कवि ने कोकिला के चुप होने का क्या आशय लगाया?

उत्तर-1. कोयल देखती है कि स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लेने वाले भारतीयों को कैद में डालकर अंग्रेज सरकार अत्याचार एवं दमन का व्यवहार करती है, उन्हें कठोर यातनाएँ देती है। अतः यह देखकर कोयल दुःखी होकर संवेदना रूप में गाने लगती है।

2. कवि कारागार में रहते हुए कोयल से प्रश्न करता है।

वह अपनी कोटरी में बैठा हुआ कोयल का गीत सुनकर जिज्ञासा भी प्रकट करता है।

3. प्रस्तुत कविता में कोकिला को स्वतंत्रतापूर्वक जीवनयापन करने वाले कैदियों के प्रति सद्भावना रखने वाले लोगों का प्रतीक बताया गया है।

4. स्वतन्त्रता आन्दोलन काल में कारागार में बन्द कवि अपनी कोटरी में कोयल की कूक सुनकर जिज्ञासा भाव से उससे पूछने लगता है कि कोयल तुम कूक कर चुप हो जाती हो और फिर कूकने लगती हो। इस तरह से किसका सन्देश सुनाती हो?

5. कवि ने कोकिला से दो प्रश्न किये कि क्या गाती हो? और क्यों चुप रह जाती हो? अर्थात् इस तरह गाने और चुप होने के पीछे क्या रहस्य है?

6. कवि ने कोकिला के चुप होने का आशय स्वतंत्रता सेनानियों के लिए لाये गए किसी सन्देश से लगाया।

(2)
ऊँचे काली दीवारों के घेरे में,
डाकू, चोरों, बटमारों के डेरे में,
जीने को नहीं देते पेट-भर खाना,
मरने भी देते नहीं, तड़प रह जाना।
जीवन पर अब दिन-रात कड़ा पहरा है,
शासन है, या तम का प्रभाव गहरा है?
हिमकर निराश कर चला रात भी काली,
इस समय कालीमामयी जगी क्यों आली?

कठिन-शब्दार्थ— बटमारों = लुटेरों। डेरे में = रहने के स्थान पर। तम = अँधेरा। हिमकर = चन्द्रमा। कालीमामयी = अंधकार से व्याप्त। आली = सखी।

भावार्थ— कवि अपने और जेल में बन्द अन्य कैदियों के सम्बन्ध में कोयल से कहता है कि हम क्रान्तिकारी देशभक्त इस जेल की ऊँचे काली दीवारों के घेरे में कैद हैं। वस्तुतः यह स्थान उनका निवास है जो डाकू, चोर, लुटेरे जैसे अपराधी हैं। जेल में भूखे पेट सोना पड़ता है क्योंकि यहाँ पेट-भर भोजन नहीं मिलता है। हमें न तो जीने देते हैं और न मरने देते हैं। हम तो यहाँ अंधकार में तड़पते रहते हैं। अंग्रेज सरकार का हम पर रात-दिन कड़ा पहरा रहता है। अंग्रेज शासन का प्रभाव गहरे अन्धकार के समान है। यहाँ रहते हुए प्रतीत होता है कि यह शासन के अत्याचारों रूपी अँधेरा हम सब पर व्याप्त है। वातावरण का अंधेरा धीरे-धीरे खत्म हो जाता है लेकिन अंग्रेजों द्वारा फैलाया गया अंधकार खत्म ही नहीं हो रहा है। चन्द्रमा भी हमारी दुर्दशा देखकर निराश हो मन्द पड़ चला है, जिसके कारण रात और भी अंधेरी प्रतीत होने लगी है। अब हम निराश होकर काली रात में जी रहे हैं। ऐसे में हे काली कोयल, तुम क्यों जाग गई हो? क्या तुम्हें भी हमारे दुःखों को देखकर नींद नहीं आ रही है?

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अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. कवि कोयल से क्या प्रश्न करता है?
प्रश्न 2. कवि को कारागार में किनके साथ रखा गया था?

प्रश्न 3. जेल में कवि के साथ कैसा व्यवहार किया गया?
प्रश्न 4. ‘हिमकर निराश कर चला’ का आशय क्या है?

प्रश्न 5. ‘शासन है या तम का प्रभाव गहरा है’ से कवि का क्या आशय है?
प्रश्न 6. अंग्रेजों द्वारा दी जा रही यातनाएँ किस प्रकार की हैं?

उत्तर-1. कवि कोयल से प्रश्न करता है कि असमय अर्थात् रात में जागकर क्यों करुण क्रन्दन कर रही है? इसका क्या कारण है?

2. कवि राजनीतिक कैदी था, परन्तु उसे चोर, डाकू आदि भयंकर अपराधी कैदियों के साथ रखा गया था।
3. जेल में कवि को अन्य कैदियों के साथ ही कोठरी में कैद किया गया। उनको भरपेट भोजन नहीं दिया गया और उनके साथ कठोरता का व्यवहार किया गया।
4. उस समय रात्रि का घना अंधकार फैला था। जेल में स्वतन्त्रता-सेनानियों को अनेक कष्ट दिये जा रहे थे। उन अत्याचारों को देखकर अब चन्द्रमा भी निराश होकर चला गया था-निस्तेज हो गया था। इस प्रकार वहाँ का वातावरण निराशामय हो गया था।
5. कवि का आशय है कि चारों तरफ अंधकार, निराशा, वेदना व्याप्त है। यह दुःख-दर्दियों का अंधकार अंग्रेजों के कारण है या कुदरत द्वारा प्रदत्त काली रात है।
6. अंग्रेज स्वतंत्रता सेनानियों को भरपेट भोजन नहीं देते थे; चोर, डकैत व कुख्यात गुण्डों के साथ उनको रखा जा रहा था। न तो उन्हें जीने दे रहे थे और न ही उन्हें मार रहे थे।
(3) क्यों हूक पड़ी?
वेदना बोझ वाली-सी;
कोकिल बोलो तो!
क्या लूटा?
मृदुल वैभव की
रखवाली-सी
कोकिल बोलो तो!
क्या हुई बावली?
अर्द्धरात्रि को चीखी,
कोकिल बोलो तो!
किस दावानल की
ज्वालाएँ हैं दीर्खीं?
कोकिल बोलो तो!

कठिन-शब्दार्थ- हूक पड़ी = दर्द के स्वर में रो पड़ी। मृदुल = मधुर। वैभव = धन-दौलत। बावली = पागल।

दावानल = जंगल में अपने आप फैलने वाली आग। ज्वालाएँ = आग की लपटें।

भावार्थ- कवि माखनलाल चतुर्वेदी कोयल से पूछता है कि हे कोयल, इस अँधेरी रात में जब सारा संसार सो रहा है, तब तुम किसकी भारी वेदना के बोझ से दर्द के स्वर में रो पड़ी हो? तुम मधुर वैभव की रखवाली करने वाली हो, ऐसे में विलाप करती-सी कूँकी हो तो बताओ कि उस खजाने से क्या लुट गया है? जो तुम आधी रात में चीख रही हो, क्या पागल हो गई हो? जो काली अँधेरी रात्रि में इतनी जोर से चीख रही हो या तुमने दावानल की तेज लपटें उठती हुई देखी हैं। क्या इसी कारण से तुम चीख रही हो? हे कोयल, तुम अपने चीखने का कारण बताओ।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. 'वेदना बोझ वाली-सी' से क्या अभिप्राय है?
प्रश्न 2. 'क्या हुई बावली' - कवि ने ऐसा क्यों कहा?

प्रश्न 3. 'दावानल की ज्वालाएँ' का आशय बताइये।
प्रश्न 4. 'मृदुल वैभव की रखवाली-सी' कवि ने किसे और क्यों कहा है?

प्रश्न 5. कवि को कोयल की कूक, हूक-सी क्यों जान पड़ती है?
प्रश्न 6. अर्द्धरात्रि में कोयल के कूकने पर कवि ने उसे क्या कहा?

उत्तर-1. उस समय देश अंग्रेजों का गुलाम था, परतन्त्रता की अनेक यन्त्रणाओं से देशवासी परेशान थे। देश की परतन्त्रता का वह दुःख भारी बोझ के समक्ष कष्टदायी था। और कोयल की कूक उस वेदना को व्यक्त कर रही थी।

2. कोयल आधी रात में जोर से कूक रही थी। वह देश की परतन्त्रता एवं जेल में बन्द स्वाधीनता सेनानियों की कष्टमय जिन्दगी को देखकर काफी दुःखी थी। इस असह्य दुःख-वेदना के कारण वह अर्द्धरात्रि में बावली-सी चीखने लगी थी।
3. जंगल में अपने आप सुलगने वाली भयंकर आग को दावानल कहते हैं। प्रस्तुत कविता में कैदियों को दी जाने वाली भयंकर यातनाओं को कवि ने 'दावानल की ज्वालाएँ' कहा है।
4. कोयल को कवि ने 'मृदुल वैभव की रखवाली-सी' कहा है, क्योंकि वह अपने कोमल कंठ से माधुर्य और सरसता की रक्षा करती है और इस संसार के लिए मृदुल भावनाएँ बचाए रखती है।
5. सामान्यतया कोयल सदैव मधुर व सरस आवाज में कूकती है लेकिन कवि की पीड़ाओं के मध्य आधी रात में कोयल का कूकना उसकी पीड़ा व वेदना समान प्रतीत हो रहा था।
6. अर्द्धरात्रि में कवि तथा उनके साथियों की पीड़ा को

व्यक्त करती हुई कोयल का जोर से कूकना उसे बावली या पागल बना रहा था।

(4) क्या? देख न सकती जंजीरों का गहना?
हथकड़ियाँ क्यों? यह ब्रिटिश-राज का गहना,
कोल्हू का चरक चूँ? जीवन की तान,
गिट्टी पर अंगुलियों ने लिखे गान!
हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जुआ,
खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ।
दिन में करुणा क्यों जगे, रुलानेवाली,
इसलिए रात में गजब ढा रही आली?
इस शान्त समय में,
अंधकार को बेध, रो रही क्यों हो?
कोकिल बोलो तो!
चुपचाप, मधुर विद्रोह-बीज
इस भाँति बो रही क्यों हो?
कोकिल बोलो तो!

कठिन-शब्दार्थ जंजीरों का गहना-\text{जंजीरों का गहना} = हथकड़ियाँ। चरक चूँ\text{चरक चूँ} = कोल्हू के लोहे के भारी पहियों के चलने से उत्पन्न आवाज। मोट\text{मोट} = चरस, चमड़े का एक बड़ा थैला-सा जिससे कुएँ से पानी निकाला जाता है। जुआ\text{जुआ} = हल या गाड़ी खींचते समय बैलों के कन्धों पर रखी जाने वाली लकड़ी। ब्रिटिश अकड़\text{ब्रिटिश अकड़} = अंग्रेजों का अहंकार। गजब ढा रही\text{गजब ढा रही} = आश्चर्यजनक कार्य कर रही। विद्रोह-बीज\text{विद्रोह-बीज} = स्वतन्त्रता-संग्राम के लिए ब्रिटिश-विरोधी प्रखर भावना।

भावार्थ -स्वतन्त्रता\text{-स्वतन्त्रता} आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने से कवि तथा अन्य क्रान्तिकारी देशभक्तों को अंग्रेज सरकार ने जेलों में डाल दिया था और उन्हें अनेक कठोर यातनाएँ दी गई थीं। फिर भी वे साहसपूर्वक सब कुछ सहन करते रहे। इसी सन्दर्भ में कवि कहता है कि हे कोयल, ये हम स्वाधीनता सेनानियों के लिए हथकड़ियाँ नहीं हैं, हमें जेल में कोल्हू खींचना पड़ता है, उसकी चर्रक-चूँ की आवाज को हम जीवन का संगीत मानते हैं। पत्थरों को तोड़कर हम गिट्टियाँ बनाते हैं, उन गिट्टियों पर मानो हमारी अंगुलियाँ गीत लिखती हैं। जेल में मैं पेट पर जुआ बाँधकर मोट या चरस को खींचता हूँ और कुएँ से पानी निकालता हूँ। कुएँ से पानी निकालने से हम ब्रिटिश-राज के अहंकार के कुएँ को खाली कर रहे हैं। इस तरह अब अंग्रेजों की अकड़ धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। दिन में दुःख एवं करुणा का अहसास कम होता है। जैसे-जैसे रात होती है, पीड़ा बढ़ती जाती है। इसलिए सखी कोयल तुम रात में रुलाकर गजब कर रही हो। इस शान्त, नीरव, पीड़दायक अंधेरी रात को बेधकर तुम रो क्यों रही हो? हे कोयल तुम बताओ कि चुपचाप अपनी करुण मधुर आवाज में क्यों हम सबके मन में विद्रोह के बीज बो रही है अर्थात् सभी स्वतंत्रता सेनानी दिन-भर की पीड़ा से

थककर जब रात को तुम्हारी करुण आवाज सुनते हैं तब सभी का हृदय विद्रोह करने को तैयार हो जाता है। कवि से पूछता है कि हे कोयल, तुम यह सब प्रयत्न क्यों कर रही हो बताओ तो, तुम क्यों चुपचाप स्वाधीनता-संघर्ष की गुपचुप तैयारी में संलग्न हो रही हो।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. कवि ने हथकड़ियों को ब्रिटिश-राज का गहना किस कारण बताया है?

प्रश्न 2. ब्रिटिश अकड़ का कुआँ कौन खाली कर रहे थे?

प्रश्न 3. कोयल रात में गजब क्यों ढा रही है? बताइए।

प्रश्न 4. रात में विद्रोह के बीज कौन बो रही है?

प्रश्न 5. कवि को जीवन की तान किसमें सुनाई पड़ती है?

प्रश्न 6. कवि ने करुणा का जन्म होना कब का बताया है?

उत्तर-1. स्वतंत्रता सेनानियों को देशप्रेम के कारण ब्रिटिश सरकार से जेल व पहनने को हथकड़ियाँ मिलीं जिसे देशभक्तों ने सहर्ष स्वीकार किया इसलिए गहना बताया गया।

2. क्रान्तिकारी देशभक्त एवं स्वतन्त्रता-सेनानी जो कारागार में बन्द थे, वे ब्रिटिश शासन का प्रबल विरोध कर उसकी अकड़ का कुआँ खाली कर रहे थे।

3. दिन में तो कैदियों को अनेक यातनाएँ दी जाती थीं, कठोर श्रम का काम कराया जाता था। इसलिए रात में वह कवि के दुःखभरे हृदय पर अपनी करुण-मधुर आवाज से मलहम लगाने आई है। कोयल को उसके सहानुभूति भरे स्वर से संघर्ष करने की बराबर प्रेरणा मिल रही है। इसी दृष्टि से कोयल रात में आश्चर्यजनक काम करने लगी है।

4. कोयल रात में करुणा कूक के द्वारा स्वाधीनता-सेनानियों के हृदय में चुपचाप विद्रोह के बीज बो रही है।

5. दिन में स्वतंत्रता सेनानियों से कोल्हू का चरक चलवाया जाता था। कठोर परिश्रम व घोर यातनाओं के बीच कोल्हू की चर्र-चूँ आवाज कवि को जीवन का मधुर गान प्रतीत होता है।

6. जब अर्द्धरात्रि में सारा वातावरण नीरव और शान्त हो जाता है तब व्यथित के हृदय में नींद की जगह करुणा उत्पन्न होती है इसलिए कवि ने करुणा का जन्म रात्रि के मध्य में बताया है।

(5) काली तू, रजनी भी काली,
शासन की करनी भी काली,
काली लहर कल्पना काली,
मेरी काल-कोठरी काली,
टोपी काली, कमली काली,
मेरी लौह-श्रृंखला काली,

पहरे की हुंकृति की ब्याली,
तिस पर है गाली, ए आली!
इस काले संकट-सागर पर
मरने की, मदमाती!
कोकिल बोलो तो!
अपने चमकीले गीतों को
क्योंकर हो तैराती!
कोकिल बोलो तो!

कठिन-शब्दार्थ—रजनी = रात। शासन = अंग्रेज राजा। करनी = करतूतें। काल-कोठरी = गम्भीर अपराधी के लिए बनी जेल की अंधेरी कोठरी। कमली = कम्बल। लौह-श्रृंखला = लोहे की साँकल। हुंकृति = हुंकार। ब्याली = साँपिन। संकट-सागर = भयंकर मुसीबत। मदमाती = मस्ती से भरी हुई।

भावार्थ—कैदी रूप में कवि कोयल से कहता है कि इस समय सब तरह अंधकार की कालिमा छायी हुई है, तुम काली हो, रात भी काली है और अंग्रेजों की करतूतें भी काली हैं। देश में निराशा रूपी काली लहर फैली हुई है और मन में काली (बुरी) कल्पनाएँ उठ रही हैं। तुम भी टोपी और कम्बल का रंग भी काला है। हमारी हथकड़ियाँ या बेड़ियाँ भी काले रंग की हैं। जेल में पहरेदारों की हुंकार भी साँपिन की तरह काली-जहरीली है। उस पर ये लोग बात-बात पर गालियाँ देते हैं।

कवि कहता है कि हे कोयल, इस समय अपार संकट सामने खड़ा है, इस मुश्किल की घड़ी में तुम मरने को तैयार क्यों दिखाई देती हो? तुम यहाँ पर हम क्रान्तिकारियों के मस्टी भरे गीत क्यों सुनती हो? तुम भी तो मस्ती से भरी हुई दिखाई देती हो। तुम चमकीले अर्थात् आशा और उत्साह से भरपूर गीतों को क्यों इस कारागार के पास तैरा रही हो? रात्रि में कारागार के समीप क्यों घूम-फिरकर ओज-तेज का संचार कर रही हो? हे कोयल, तुम कुछ स्पष्ट कहो, कुछ तो बोलो।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. पद्यांश में 'काली' शब्द का बार-बार प्रयोग क्यों किया गया है?
प्रश्न 2. 'काले संकट-सागर' से कवि का आशय क्या है?

प्रश्न 3. जेल के पहरेदारों का व्यवहार कैसा है?
प्रश्न 4. 'चमकीले गीतों' से क्या अभिप्राय है? बताइए।

प्रश्न 5. 'टोपी काली कमली काली' इसमें 'कमली' से क्या अभिप्राय है?
प्रश्न 6. कवि कोयल से क्या जानना चाहता है?

उत्तर—1. काला रंग निराशा, वेदना, दुःख-पीड़ा एवं व्यथा को व्यक्त करता है। परतंत्र भारत में सर्वत्र दुःख एवं पीड़ा का वातावरण है, इसलिए कवि ने 'काली' शब्द का प्रयोग बार-बार किया है।

2. इससे कवि का आशय यह है कि जेल के अन्दर अंग्रेज अफसर स्वाधीनता- सेनानियों एवं क्रान्तिकारियों के साथ अमानवीय बर्ताव करते हैं, वे उन्हें कठोर यातनाएँ देते हैं। जेल से बाहर भी आम जनता पर नाना प्रकार के अत्याचार एवं दमन करके उनका जीवन नर्किया बना दिया है। इससे भयानक संकट का काल आ गया है।
3. कैदियों पर पहरेदारी में नियुक्त अंग्रेज अमानवीय व्यवहार करते हैं। वे कैदियों को अनेक तरह से यातनाएँ देते हैं तथा बात-बात पर गाली भी देते रहते हैं।
4. कारागार में अँधेरा व्याप्त है, वहाँ पर कैद स्वाधीनता- सेनानियों के मन में भी कुछ अनिश्चय की स्थिति है। ऐसे में कोयल की कूक से उनमें कुछ आशा और उत्साह का संचार हो रहा है। इसी विशेषता से कोयल की कूक को चमकीले गीत कहा गया है।
5. इसमें 'कमली' से आशय 'कम्बल' से है जो कैदियों को जेलखाने में दिया जाता है।
6. कवि कोयल से जानना चाहता है कि देश में जब सर्वत्र कालिमा का अर्थात् निराशा व वेदना का वातावरण है तो फिर तुम क्यों हम सबके मन में उत्साह का संचार करना चाहती हो?

(6)

तुझे मिली हरियाली डाली,
मुझे नसीब कोटरी काली!
तेरा नभ-नभ में संचार
मेरा दस फुट का संसार!
तेरे गीत कहलावें वाह,

रोना भी मुझे गुनाह!
देख विषमता तेरी-मेरी,
बजा रही तिस पर रणभेरी!
इस हुंकृति पर,
अपनी कृति से और कहो क्या कर दूँ?
कोकिल बोलो तो!
मोहन के व्रत पर,
प्राणों का आसव किसमें भर दूँ!
कोकिल बोलो तो!

कठिन-शब्दार्थ—नसीब = भाग्य। नभ = आकाश। कहावें = कहलाते हैं। वाह = प्रशंसनात्मक। गुनाह = अपराध। विषमता = असमानता। रणभेरी = युद्ध का नगाड़ा। हुंकृति = हुंकार, गर्जना। कृति = रचना। मोहन = मोहनदास कर्मचन्द गाँधी। आसव = तरल पदार्थ, रस, मदिरा।

भावार्थ—अपनी तुलना कोयल से करता हुआ कवि कहता है कि हे कोयल, तुझे तो रहने-बैठने के लिए हरी-भरी टहनी मिली है, पर मेरे भाग्य में जेल की यह काल

कोठरी है, तू असीम आकाश में घूमती-फिरती है, परन्तु मेरी दुनिया दस फुट के कमरे में अर्थात् जेल की छोटी कोठरी में सिमट गई है। तेरे मधुर गीत (कूक) को सुनकर लोग प्रशंसा में वाह-वाह कहते हैं और मेरे लिए तो रोना भी अपराध या पाप है। हम दोनों में इतनी विषमता है, यह देखकर भी तुम युद्ध का नगाड़ा बजा रही हो, अर्थात् हमें स्वतन्त्रता-प्राप्ति के लिए संघर्षरत रहने की प्रेरणा दे रही हो, यह आश्चर्यजनक है।

हे कोयल, तुम्हारी इस हुंकार को सुनकर मैं पूछना चाहता हूँ कि अपनी रचना से मैं और क्या कर सकता हूँ? कोयल तुम मुझे बताओ। मोहनदास कर्मचंद गाँधी अर्थात् महात्मा गाँधी ने देश को स्वतन्त्रता दिलाने के लिए जो दृढ़ संकल्प लिया उसे पूरा करने के लिए मैं अपने प्राणों का आसव किसमें भर दूँ, अर्थात् अपनी प्राणशक्ति किसे दे दूँ? हे कोयल, तुम कुछ तो बताओ आखिर तुम क्या करवाना चाहती हो?

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न–

प्रश्न 1. 'मेरा दस फुट का संसार' से क्या आशय है?

प्रश्न 2. 'रोना भी है मुझे गुनाह!' इससे कवि की किस दशा का पता चलता है?

प्रश्न 3. कवि किस हुंकृति की बात कर रहा है?

प्रश्न 4. 'प्राणों का आसव' से क्या तात्पर्य है?

प्रश्न 5. कवि ने स्वयं की और कोयल की किस विषमता पर प्रकाश डाला है?

प्रश्न 6. कवि ने किसके व्रत पर अपने प्राणों का आसव देने की बात कही है?

उत्तर-1. कवि जेल की जिस काल-कोठरी में रह रहा है, उसका क्षेत्रफल दस फुट का है और कवि को उसी में सिमटकर रहना पड़ता है। 'मेरा दस फुट का संसार' का यही आशय है।

2. इसमें कवि कहना चाहते हैं कि हम कैदियों के लिए तो सामान्य हँसना-रोना भी गुनाह माना जाता है। वैसे भी रोना कमजोरी की निशानी माना जाता है और स्वतन्त्रता-सेनानियों की कमजोरी देशहित के लिए हानिकारक होगी।

3. कवि कोयल की उस हुंकृति की बात कर रहा है, जिसके द्वारा वह जेल में बन्द स्वतन्त्रता-सेनानियों तथा पराधीन भारतीयों में क्रान्ति की ज्वाला धधका देना चाहती है।

4. इसका आशय है प्राणशक्ति। देश को स्वतन्त्रता दिलाने के लिए सभी क्रान्तिकारियों, स्वाधीनता-सेनानियों तथा देशवासियों में प्रखर भावना का प्रसार हो, प्राणशक्ति का संचार हो तथा प्राणों के उत्सर्ग की प्रबल भावना बनी रहे।

5. कवि ने कोयल के स्वतंत्र भाव से गीत गाने पर वाह होने पर तथा परतंत्रता पर रोना भी गुनाह माने जाने पर विषमता की बात कही है। यहाँ स्वतंत्रता एवं परतंत्रता की विषमता भारी है।

6. कवि ने मोहनदास कर्मचंद गाँधी के स्वतंत्रता प्राप्ति के व्रत पर अपनी प्राणशक्ति देने की बात कही है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर–कोयल की करुण कूक से कवि सोचता है कि कोयल हमारी यातनाओं को देखकर रो रही है या फिर अंग्रेज शासन के खिलाफ क्रान्ति की लौ जगाये रखने का संदेश दे रही है।

प्रश्न 2. कवि ने कोकिल के बोलने के किन कारणों की सम्भावना बताई?

उत्तर–कवि ने कोकिल के बोलने के निम्नलिखित कारणों की सम्भावना व्यक्त की है–

(1) कोयल कैदियों के मन में स्वतन्त्रता की भावना जगाने आयी है।

(2) कवि को मिल रही यातनाओं के प्रति सहानुभूति जताने के लिए आयी है।

(3) वह अपनी कूक के माध्यम से स्वतन्त्रता-सेनानियों के लिए किसी का सन्देश दे रही है।

(4) उसने सारे देश में क्रान्ति रूपी दावा नल की ज्वालाएँ देख ली हैं।

(5) वह रणभेरी बजाने तथा विद्रोह के बीज बोने के लिए आह्वान कर रही है।

(6) सघन अंधकार में वह अपनी वेदना के बोझ से दबने कूकने लगी है।

प्रश्न 3. किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है और क्यों?

उत्तर–तत्कालीन ब्रिटिश शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है, क्योंकि वे क्रान्तिकारियों को जेल की काली दीवारों के भीतर कैद कर देते थे, वे उन्हें तरह-तरह की यातनाएँ देते थे और उनके साथ कोल्हू के बैल की तरह दुर्व्यवहार करते थे।

प्रश्न 4. कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जाने वाली यन्त्रणाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर–पराधीन भारत की जेलों में कैदियों को अमानवीय यातनाएँ दी जाती थीं-(1) वहाँ कैदियों को अत्यन्त छोटी कोठरियों में रखा जाता था। (2) उन्हें भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था। (3) उनसे कठोर परिश्रम कराया जाता था। इस दृष्टि से कोल्हू खींचना, गिट्टियाँ तोड़ना, पानी चरस से खींचना तथा अन्य कठोर कार्य करवाये जाते थे। (4) बात-बात पर जेल के अधिकारी व पहरेदार गालियाँ देते थे, मारते-पीटते थे। (5) राजनैतिक कैदियों को चोरों, लुटेरों एवं बटमारों के साथ रखा जाता था। (6) कैदियों को अपनी

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बात कहने का अवसर नहीं दिया जाता था। (7) उनके स्वास्थ्य एवं सुख का कोई ध्यान नहीं रखा जाता था।

प्रश्न 5. भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) मृदुल वैभव की रखवाली-सी, कोकिल बोलो तो!

उत्तर—यह संसार दुःख से भरा हुआ है। यहाँ कष्ट ही कष्ट है। यदि कहीं मृदुलता और सरलता दिखलायी पड़ती है तो वह केवल कोयल के मधुर स्वर में ही है। इसलिए कोयल ही मृदुलता की रखवाली करने वाली है। अतः कवि उससे जानना चाहता है कि यहाँ कारावास में अपनी मधुर करुण कूक के माध्यम से वह उससे क्या कहना चाहती है।

(ख) हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ।

उत्तर—अंग्रेजों के काल में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार होता था। जेल में कैदियों से कठोर श्रम कराते थे। उस समय कैदी के पेट पर जुआ बाँधकर कुएँ से चरस से पानी खिंचवाया जाता था। उनके साथ पशुओं जैसा क्रूर व्यवहार किया जाता था। फिर भी वह हार नहीं माना था। कवि का मानना है कि ऐसा काम करने से अंग्रेजों की अकड़ खत्म हो जायेगी और वे यहाँ से चले जायेंगे, अर्थात् ब्रिटिश शासन का अन्त हो जायेगा।

प्रश्न 6. अर्द्धरात्रि में कोयल की चीख से कवि को क्या अंदेशा है?

उत्तर—कवि को अंदेशा है कि कोयल कैदियों पर होने वाले अत्याचारों को देखकर द्रवित हो उठी है जिसके कारण आधी रात में उसके गले से वेदनायुक्त चीख निकल पड़ी है।

प्रश्न 7. कवि को कोयल से ईर्ष्या क्यों हो रही है?

उत्तर—कवि को कोयल से ईर्ष्या इसलिए हो रही है—(1) कोयल का बसेरा हरी-भरी डाली पर है, पर कवि कालकोठरी में कैद है। (2) कोयल विस्तृत आकाश में निर्बाध उड़ सकती है, जबकि कवि छोटी-सी कोठरी में सिमटकर बैठा है। (3) कोयल की तान को सुनकर लोग प्रशंसा में 'वाह' कह उठते हैं, जबकि कवि को रोना भी मना है।

प्रश्न 8. कवि के स्मृति-पटल पर कोयल के गीतों की कौन-सी मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं, जिन्हें वह अब नष्ट करने पर तुली है?

उत्तर—कवि की स्मृति में यह अंकित है कि—

(1) कोयल प्रातःकाल सूर्योदय होने पर अपना मधुर गीत सुनाती थी।

(2) विन्ध्याचल के वनों में झरनों के आसपास वह गीत सुनाती थी।

(3) तेज हवाओं के झोंकों के मध्य उसने कोयल का मधुर गान सुना था।

कवि की स्मृति में अंकित ये गीत घायल के घावों पर मरहम लगाने का काम कर सकते हैं, क्रार्तिकारी में जोश भर सकते हैं, परन्तु अंग्रेजों के अत्याचारों से क्षुब्ध होने से वह सारी मधुर स्मृतियों को नष्ट करना चाहती है।

प्रश्न 9. हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है?

उत्तर—अपराधियों को नियन्त्रित रखने के लिए हथकड़ियाँ पहनाई जाती हैं, परन्तु स्वतन्त्रता-सेनानियों एवं क्रान्तिकारी देशवासियों के लिए हथकड़ियाँ गहने या अलंकार से कम नहीं हैं। इससे उनके महान् त्याग, बलिदान एवं देशप्रेम की व्यंजना होती है। इनका सिर इनके कारण गर्व से ऊँचा उठता है और वे सहर्ष हथकड़ियाँ पहनने को तैयार रहते हैं। इससे उनमें जोश और उत्साह भर जाता है। इसी कारण हथकड़ियों को गहना कहा गया है।

प्रश्न 10. 'काली तू......ऐ आली।' इन पंक्तियों में 'काली' शब्द की आवृत्ति से उत्पन्न चमत्कार का विवेचन कीजिए।

उत्तर—उक्त पंक्तियों में काली शब्द की आवृत्ति विभिन्न प्रसंगों में और विभिन्न अर्थों में हुई है। इसलिए यहाँ शब्दगत यमक अलंकार का चमत्कार है। यहाँ 'काली' शब्द के विभिन्न अर्थ देखिए—

जैसे काला रंग, काले कारनामा, काली काल कोठरी, काली लहर, काली कल्पना, काली कम्बल आदि।

प्रश्न 11. काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए—
(क) किस दावानल की ज्वालाएँ हैं दीखीं?

उत्तर—भाव-सौन्दर्य—स्वतन्त्रता-संग्राम की आग दावानल की भाँति सारे देश में फैल चुकी थी। कवि को लगता है कि कोयल ने भी इस क्रान्ति की आग को देख लिया है।

शिल्प-सौन्दर्य—दावानल की ज्वालाएँ में रूपक अलंकार है। वैसे दावानल को स्वतन्त्रता हेतु क्रान्ति का प्रतीक बताया गया है। इसमें मानवीकरण अलंकार एवं प्रश्न-शैली है। शब्दावली तत्सम-प्रधान है।

(ख) तेरे गीत कहावें वाह, रोना भी है मुझे गुनाह।

देख विषमता तेरी-मेरी, बजा रही तिस पर रणभेरी!

उत्तर—भाव-सौन्दर्य—कोयल का जीवन स्वतन्त्र एवं निर्बाध है, जबकि कवि का जीवन यातनापूर्ण है। कोयल अपने मधुर गीतों से सभी को प्रिय लगती है, जबकि कवि का रोना भी अपराध है। कोयल की कूक अतीव प्रेरणादायी है।

शिल्प-सौन्दर्य—वर्णावृत्ति से अनुप्रास अलंकार है। खड़ी बोली एवं उर्दू का प्रयोग तथा मानवीकरण की योजना प्रशस्य है।

रचना और अभिव्यक्ति—

**प्रश्न 12. कवि जेल के आसपास अन्य पक्षियों का

चहकना भी सुनता होगा, लेकिन उसने कोकिला की ही बात क्यों की है?

उत्तर-यह निश्चित है कि कवि ने अन्य पक्षियों के चहकने के स्वर को भी सुना होगा लेकिन उसने कोयल की ही बात इसलिए की क्योंकि कोयल का मधुर स्वर उसे प्रभावित कर गया होगा और उसकी कोमल भावनाओं को छू गया होगा और फिर आधी रात में कूकना सुनकर कवि ने कोयल को ही चुना।

प्रश्न 13. आपके विचार में स्वतन्त्रता-सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार क्यों किया जाता होगा?

उत्तर-ब्रिटिश शासन स्वतन्त्रता-सेनानियों को अधिक परेशान करने के लिए ऐसा करता था। वह स्वतन्त्रता-सेनानियों को नीचा दिखाना चाहता था, उन पर राजद्रोह जैसा गम्भीर अपराध लगाकर मानसिक तौर पर उन्हें कमजोर करना चाहता था। वे भारतीयों की आजादी की माँग को चोर अपराध मानते थे। इस कारण वे कठोर व्यवहार करते थे और उन्हें मानसिक स्तर पर तोड़ने की दृष्टि से उन्हें चोरों, अपराधियों आदि के साथ ही कारावास में रखते थे।

पाठ्येतर सक्रियता -

  • पराधीन भारत की कौन-कौनसी जेलें मशहूर थीं, उनमें स्वतन्त्रता-सेनानियों को किस-किस तरह की यातनाएँ दी जाती थीं? इस बारे में जानकारी प्राप्त कर जेलों की सूची एवं स्वतन्त्रता-सेनानियों के नामों को राष्ट्रीय पर्व पर भित्तिपत्रिका के रूप में प्रदर्शित करें।

उत्तर-पराधीन भारत की प्रसिद्ध जेलें-

(1) पोरबंदर की जेल, (2) पूना की यरवदा जेल, (3) इलाहाबाद (नैनी) की जेल, (4) कोलकाता जेल, (5) अजमेर जेल, (6) देहरादून जेल, (7) पटना जेल इत्यादि। इन जेलों में कोल्हू चलाना, गिट्टियाँ तोड़ना, चक्की एवं रहँट चलाना, चरस से पानी खींचना तथा सरकारी कार्यालयों के लिए फर्नीचर, दरियाँ आदि बनाने का काम यातनापूर्वक कराया जाता था। (शेष छात्र स्वयं करें।)

  • स्वतन्त्र भारत की जेलों में अपराधियों को सुधारकर हृदय-परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। पता लगाइए कि इस दिशा में कौन-कौनसे कार्यक्रम चल रहे हैं?

उत्तर-स्वतन्त्र भारत की जेलों में अपराधियों को सुधारने के लिए अनेक कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनमें कुछ इस प्रकार हैं-

(2) जेलों में नशा-मुक्ति केन्द्र संचालित हो रहे हैं।
(3) अपराधियों के हृदय-परिवर्तन के लिए समय-समय पर जेलों में धार्मिक प्रवचनों का आयोजन किया जा रहा है।

(4) जेलों में लघु कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि भविष्य में वे स्वावलंबी बन सकें।
(5) जेलों में शिक्षा-सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कम्प्यूटर प्रशिक्षण के कार्यक्रम चल रहे हैं।
(6) अपराधियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें आत्म-सुधार का अवसर दिया जा रहा है।


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न -

प्रश्न 1. अंग्रेजी शासन कैदियों को कैसी यातनाएँ देता था?

उत्तर-अंग्रेजी शासन कैदियों को भूखा पेट रखते, रहट चलवाते, मोट खिंचवाते थे।

प्रश्न 2. कोयल के कूकने का समय क्या था?

उत्तर-कोयल अर्द्धरात्रि को कूक रही थी।

प्रश्न 3. कवि कोयल से तुलना किस विशेष सन्दर्भ में कर रहे थे?

उत्तर-कवि ने कोयल की स्वतंत्रता एवं स्वयं की परतंत्रता के सन्दर्भ में तुलना की।

प्रश्न 4. करुणा का संघनतम रूप कब स्पष्ट दिखाई पड़ता है?

उत्तर-अर्द्धरात्रि में जब सारा संसार सो जाता है तब पीड़ित की करुणा सघन रूप में व्यास होती है।

प्रश्न 5. कवि को जेल की कोठरी में किसके साथ रखे जाने पर दुःख है?

उत्तर-कवि को डाकू, चोरों व बटमारों के साथ रखे जाने पर दुःख है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न -

प्रश्न 1. कवि द्वारा जेल में कोयल से ही बात करने से क्या व्यंजित हुआ है?

उत्तर-कवि स्वाधीनता-सेनानी है और अंग्रेजों ने उसे जेल में डाला है। वहाँ पर अंग्रेज अधिकारी उसके साथ अनेक तरह से दुर्व्यवहार और अत्याचार करते हैं और अनेक यातनाएँ देते हैं। कोयल आधी रात में क्रान्तिकारी बन्दियों को कुछ संदेश देना चाहती है। इसी बात का आभास होने से कवि कोयल से बात करना चाहता है।

प्रश्न 2. 'दावानल की ज्वालाएँ हैं दीखीं?' इसमें 'दावानल' का प्रतीकार्थ क्या है?

उत्तर-इसमें दावानल का प्रतीकार्थ देश में सर्वत्र तीव्र गति से फैलने वाली क्रान्ति है। वन में आग की लपटों की तरह देश में क्रान्ति की लपटें फैलने लगी हैं, ब्रिटिश-शासन को विनष्ट करने लगी हैं।

प्रश्न 3. कवि और कोयल की स्थिति में क्या विषमता है?

उत्तर-