Is Jal Pralay Mein
इस जल प्रलय में (फणीश्वरनाथ रेणु)
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लोग शोषण करना ही जानते हैं। कवि ने ऐसी व्यवस्था पर व्यंग्य किया है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. बच्चों के काम पर जाने की स्थिति समाज और देश के लिए भयानक कैसे है? इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर- बच्चों के लिए बचपन का समय खेलने-कूदने और पढ़ने-लिखने के लिए होता है। स्वाभाविक रूप से बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास हेतु उनका खेलना-कूदना एवं पढ़ना-लिखना सर्वथा उचित माना गया है। इससे ही उनके जीवन की नींव मजबूत होती है, व्यक्तित्व का सही विकास हो पाता है। परन्तु इसके विपरीत बच्चों को काम पर भेजा जाए, उनसे मजदूरी कराई जाए और बचपन को मजबूरी से दबा दिया जाए, तो उनका जीवन एकदम कष्टमय, असंतुलित एवं तनावग्रस्त हो जायेगा और वे देश के श्रेष्ठ नागरिक नहीं बन पायेंगे। अतः बच्चों के काम पर जाने के परिणाम देश व समाज के लिए अच्छे नहीं रहेंगे।
प्रश्न 2. 'बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता का मूल भाव या प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- 'बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता का मूल भाव बच्चों से बचपन छीन लिये जाने की पीड़ा व्यक्त करना है। बच्चों की जो उम्र खेलने-कूदने, पढ़ाई करने एवं निश्चिन्त खाने-पहनने की होती है, उस उम्र में उन्हें मजबूरी में काम पर जाना पड़े, यह हमारे समाज की घोर विडम्बना है। समाज की संवेदनशीलता मर गई है, घोर आर्थिक विषमता एवं शोषण का चक्र मानव को पशु जैसा हृदयहीन बना रहा है। प्रस्तुत कविता का प्रतिपाद्य ऐसी सामाजिक-आर्थिक विडम्बना की ओर इशारा या व्यंग्य करना है, जिसमें कुछ बच्चे खेल, शिक्षा एवं जीवन की उमंग से वंचित रह रहे हों। बच्चों का बचपन बचे, उनका शोषण न हो, यही इस कविता का कथ्य है। क्योंकि आज के बच्चे, कल का भविष्य हैं। इसी बात को याद दिलाने की भरपूर कोशिश कवि द्वारा की गई है।
रचनाकार का परिचय सम्बन्धी प्रश्न-
प्रश्न 1. कवि राजेश जोशी का जीवन परिचय दीजिए।
उत्तर- कवि राजेश जोशी का जन्म सन् 1946 में मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ में हुआ। राजेश जोशी ने पत्रकारिता के साथ-साथ अध्यापन भी किया। राजेश जोशी के अनेक काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें 'एक दिन बोलेंगे पेड़', 'मिट्टी का चेहरा', 'नेपथ्य में हँसी' आदि हैं। इनकी कविताएँ गहरे सामाजिक अभिप्राय वाली होती हैं। वे जीवन के गहरे संकट में भी गहरी आस्था उभारती हैं। इनकी कविताओं में स्थानीय बोली-बानी, मिजाज सभी व्यास हैं। उनके काव्यलोक में मनुष्यता को बचाए रखने की प्रबल आस है। उन्हें माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्यप्रदेश का शिखर-सम्मान तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।
1. इस जल प्रलय में
(फणीश्वरनाथ 'रेणु')
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे?
उत्तर- बाढ़ की खबर सुनकर लोग नीचे का सामान ऊपर रखने लगे। जरूरी चीजों जैसे ईंधन, मोमबत्ती, दियासलाई, पीने का पानी आदि का संग्रह करने लगे ताकि बाढ़ से घिर जाने पर कुछ दिनों का गुजारा चल सके। कुछ निचले इलाकों के लोग अपना सामान रिक्शा, टमटम, टेम्पो आदि में लादकर अन्यत्र ले जा रहे थे।
प्रश्न 2. बाढ़ की सही जानकारी लेने और बाढ़ का रूप देखने के लिए लेखक क्यों उत्सुक था?
उत्तर- लेखक ने अपने जीवन में बाढ़ के दृश्यों को कई बार देखा था और बाढ़ पीड़ितों की सहायता भी की थी लेकिन बाढ़ से स्वयं अब तक घिरा नहीं था। इसलिए लेखक पटना में आई बाढ़ की सही स्थिति जानने और उसका भयानक रूप देखने के लिए उत्सुक था।
प्रश्न 3. सबकी जबान पर एक ही जिज्ञासा-'पानी कहाँ तक आ गया है?' - इस कथन से जनसमूह की कौन-सी भावनाएँ व्यक्त होती हैं?
उत्तर- इस कथन से जनसमूह की ये भावनाएँ व्यक्त हैं -
(1) कहीं बाढ़ का पानी ज्यादा तो नहीं आया? (आशंका)
(2) कितनी विकराल बाढ़ आयी होगी? (जिज्ञासा)
(3) बाढ़ से कितनी हानि होगी, कैसे सामना करना पड़ेगा? (उत्सुकता)
(4) बाढ़ यदि भयानक रूप धारण करे तो क्या होगा? (भय)
प्रश्न 4. 'मृत्यु का तरल दूत' किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर—बाढ़ के गेरुआ-झाग-फेन से भरे पानी के तेज बहाव को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा गया है, क्योंकि प्रतिवर्ष भीषण बाढ़ आने से हजारों प्राणियों की जीवन-लीला समाप्त हो जाती है।
प्रश्न 5. आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तरफ से कुछ सुझाव दीजिए।
उत्तर—बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए निम्नलिखित सुझाव कारगर हो सकते हैं-
(1) बाढ़ वाले क्षेत्रों में बड़े बाँधों का निर्माण करवाया जावे, ताकि पानी के बहाव को रोका जा सके।
(2) बड़े बाँधों से छोटी-छوٹی नहरें निकाली जावें, ताकि पानी का दबाव कम हो।
(3) वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर भूखनन एवं अवैध कटान पर रोक लगाई जावे।
(4) मकानों की नींवें एवं दीवारों का निर्माण मजबूत ढाँचे से किया जावे।
(5) बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा समय-समय पर आपदा की सूचना उपलब्ध कराई जावे, ताकि जन-धन की हानि न हो सके।
(6) बाढ़ नियंत्रण विभाग को सभी संभावित खतरों से निपटने के लिए पूर्व में ही साधन तैयार रखने चाहिए ताकि जरूरत के समय उनका सदुपयोग किया जा सके।
(7) स्वयंसेवी संस्थाओं को आपदा से निपटने के लिए बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए और सहयोग करना चाहिए।
प्रश्न 6. 'ईह! जब दानापुर डूब रहा था तो पटनाियाँ बाबू लोग उलटकर देखने भी नहीं गए अब बूझो!' इस कथन के द्वारा लोगों की किस मानसिकता पर चोट की गई है?
उत्तर—इस कथन से लोगों की उस मानसिकता पर चोट की गई है जिसमें संकट के समय लोग एक-दूसरे की सहायता करने की बजाय केवल निहित स्वार्थों को महत्त्व देते हैं और केवल अपने ही हित-सुख की चिन्ता करते हैं।
प्रश्न 7. खरीद-बिक्री बन्द हो चुके पर भी पान की बिक्री अचानक क्यों बढ़ गई थी?
उत्तर—बाढ़ आने के कारण सामान्य दुकानों पर भी खरीद-बिक्री बन्द हो गई थी। परन्तु बाढ़ का हाल जानने, उसका दृश्य देखने के लिए लोग घरों से निकल कर पान की दुकानों के आसपास एकत्र होने लगे। वहाँ पर वे पान खाने के साथ ही बाढ़ की भीषणता पर चर्चा भी करते। इस कारण पान की बिक्री अचानक बढ़ गई थी।
प्रश्न 8. जब लेखक को यह अहसास हुआ कि उसके इलाके में भी पानी घुसने की संभावना है, तो उसने क्या-क्या प्रबन्ध किये?
उत्तर—बाढ़ का पानी अपने इलाके में घुस आने की संभावना से लेखक ने गृहस्वामिनी से पूछकर गैस, कोयला, तेल आदि के साथ आलू, मोमबत्ती, दियासलाई, पीने का पानी तथा काम्पोज की गोलियों का इन्तजाम किया। इनके साथ ही उसने बाढ़ आने पर छत पर जाने का भी प्रबन्ध सुनिश्चित किया। तब वह बाढ़ का दृश्य देखने के लिए उत्सुक हो गया।
प्रश्न 9. बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कौन-कौनसी बीमारियाँ फैलने की आशंका रहती है?
उत्तर—बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में प्रायः (1) हैजा, (2) आन्त्रशोथ एवं मलेरिया फैलने की आशंका रहती है। इसके साथ ही पकाही घाव की (पानी में पैर की अंगुलियाँ सड़ने की) बीमारी हो जाती है।
प्रश्न 10. नौजवान के पानी में उतरते ही कुत्ता भी पानी में कूद गया। दोनों ने किन भावनाओं के वशीभूत होकर ऐसा किया?
उत्तर—कुत्ता स्वामिभक्त जानवर होता है और वह अपने मालिक को बहुत चाहता है। जब डॉक्टर ने कुत्ते को साथ ले जाने से मना किया, तो बीमार नौजवान नाव से तुरन्त पानी में उतर गया। तब उसका स्वामिभक्त कुत्ता भी पानी में कूद गया। इन दोनों ने आपसी लगाव एवं प्रेम-भावना के वशीभूत होकर ऐसा किया।
प्रश्न 11. "अच्छा है, कुछ भी नहीं। कलम थी वह भी चोरी चली गई। अच्छा है, कुछ भी नहीं-मेरे पास।" मूवी कैमरा, टेपरिकार्डर आदि की तीव्र उत्कण्ठा होते हुए भी लेखक ने अन्त में उपर्युक्त कथन क्यों कहा?
उत्तर—लेखक बाढ़ के उस भीषण दृश्य को मूवी कैमरा या टेपरिकार्डर में उतारना चाहता था, परन्तु उसके पास ये चीजें थीं नहीं। फिर उसने तुरन्त सोचकर कहा कि 'अच्छा हुआ, कुछ भी मेरे पास नहीं।' लेखक ने ऐसा इसलिए कहा कि बाढ़ का भीषण दृश्य किसी पर्यटक के लिए अवश्य रोमांचकारी हो सकता है, उसे देखकर भय एवं उत्सुकता हो सकती है। लेकिन लेखक संवेदनशील एवं भावुक व्यक्ति होने से न तो ऐसे दृश्य देख पाता है और न उसे लिख सकता है। दुःख और विपत्ति के समय पर भयानक दृश्य को वह कैद भी नहीं कर सकता है।
प्रश्न 12. आपने यह देखा होगा कि मीडिया द्वारा प्रस्तुत की गई घटनाएँ कई बार समस्याएँ बन जाती हैं, ऐसी किसी घटना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—मार्च के महीने में वासन्ती नवरात्रि के अवसर पर जोधपुर में किले के एक हिस्से में देवी-पूजन का मेला भरता
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है। उस मेले में काफी भीड़ रहती है। एक समाचार चैनल ने ऐसा समाचार बार-बार प्रसारित किया कि अष्टमी के दिन मेले में भगदड़ मच गई, जिससे सैकड़ों-हजारों लोग दबकर मर गये। समाचार चैनल ने एक-दो सामान्य भीड़ वाले दृश्यों का प्रसारण भी किया और घायलों एवं हताहतों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की। इससे राजस्थान सरकार और स्थानीय जनता को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। लोग अपनों की तलाश में भगदड़ स्थल पर जाने लगे, पुलिस फोर्स एवं बड़े अधिकारी भी वहाँ पहुँचे। परन्तु जिस तरह से समाचार को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था, वैसा कुछ नहीं निकला। चार-पाँच लोग सीढ़ियों से फिसल कर घायल हो गये थे और जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था। यह तो समाचार चैनल ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ऐसा कर दिया था। बाद में सरकार की ओर से उस समाचार चैनल को इस कारण खूब फटकार लगाई गई।
प्रश्न 13. अपनी देखी-सुनी किसी आपदा का वर्णन कीजिए।
उत्तर– दो साल पहले की बात है। जुलाई की अन्तिम तारीख थी, रविवार था और रात्रि के समय सारा गाँव काम-धन्धे से निवृत्त होकर सोने की तैयारी कर रहा था। मैं भी अपनी पढ़ाई बन्द करके लेट गया था। तभी लगभग साढ़े नौ बजे रात बादल उमड़ने-घुमड़ने और गरजने लगे। पहले तो हल्की बूँदा-बाँदी हुई, लेकिन फिर जोरदार वर्षा होने लगी। बादल चारों ओर से इस तरह उमड़-घुमड़ के आये कि सर्वत्र पानी ही पानी हो गया। ज्यों-ज्यों समय बीता वर्षा का जोर बढ़ने लगा। इस तरह वर्षा को देखकर गाँव के लोगों को आशंका होने लगी थी। इसलिए सभी लोग सावधान भी हो गये थे। रात्रि करीब साढ़े बारह बजे नदी का पानी गाँव की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत हुआ। पानी का वेग लगातार बढ़ रहा था। गाँव के समझदार लोगों ने एक घण्टे पहले ही अपने बाल-बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया था। परन्तु कुछ लोग इस काम में सफल नहीं रहे और वे बाढ़ की चपेट में आ गये। तब कुछ लोग ऊँचे पेड़ों पर चढ़ गये, कुछ लोग पक्के मकानों की छतों पर चढ़ गये। अधिकतर लोग गाँव के पंचायत भवन और स्कूल भवन में एकत्र हो गये। उस समय सभी को केवल अपनी सूझ रही थी। रात का घनघोर अँधेरा, उसमें भय एवं त्रास से लोगों का हाहाकार, चीत्कार, घबराहट आदि से दृश्य बड़ा भयानक बन गया था। कहीं बाढ़ के वेग से पेड़ गिर रहे थे, तो कहीं कच्चे झोंपड़े बह रहे थे और कहीं बहते हुए मवेशी आत्म-रक्षार्थ व्यर्थ प्रयास कर रहे थे। सभी को इस प्राकृतिक आपदा ने विवश कर दिया था। ऐसी विनाश-लीला के साये में अपने पाँच वर्षीय छोटे भाई को अपनी पीठ पर बाँधकर मैं एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया
और सारी रात काँपते-काँपते बाढ़ की इस विनाशलीला को अपनी कातर दृष्टि से देखता रहा। उस समय मुझे बार-बार ईश्वर का ध्यान आ रहा था। इस तरह सुबह पाँच बजे वर्षा बन्द हुई, कुछ समय के बाद नदी का वेग भी कुछ कम होने लगा। लोगों ने राहत की साँस ली। कुछ समय बाद दिन का उजाला फैल गया। जो लोग इस भीषण बाढ़ से बच गये थे, वे अपने-अपने घरों को लौट आये। आठ बजे तक नदी का पानी एकदम उतर the गया था। गाँव के अधिकतर लोगों का सामान उसमें बह गया था। मैं भी पेड़ से उतरकर घर आ गया था। हम दोनों भाइयों को सकुशल देखकर परिवार के सभी लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने बाढ़ की ऐसी भीषण स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी। आज उस भीषण बाढ़ का स्मरण होते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लोगों को ऐसी आपदा से भगवान् बचाये।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 1. लेखक को हाईस्कूल में किस विषय पर लेख लिखने पर प्रथम पुरस्कार मिला था?
उत्तर– ‘बाढ़’ विषय पर लेख लिखने पर।
प्रश्न 2. पाठ में ‘पटनियाँ’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर–पटना के रहने वाले लोगों के लिए।
प्रश्न 3. ‘बलवाही’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर–‘बलवाही’ एक प्रकार का लोकनृत्य है।
प्रश्न 4. परती ज़मीन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर–वह ज़मीन जो जोती-बोई न जाती हो।
प्रश्न 5. बाढ़ का पानी देखने वालों की आँखों में, जुबान पर क्या जिज्ञासा थी?
उत्तर–एक ही जिज्ञासा थी—“पानी कहाँ तक आ गया है?”
लघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 1. लेखक तैरना क्यों न सीख सका?
उत्तर– लेखक का गाँव परती जमीन पर था। वहाँ जल-साधनों का अभाव था। इसलिए वह गाँव के अन्य लोगों की तरह तैरना नहीं सीख सका।
प्रश्न 2. लेखक ने बाढ़ को शहरी आदमी की हैसियत से कब भोगा?
उत्तर– लेखक ने सन् 1967 में शहरी आदमी की हैसियत से बाढ़ को भोगा जब 18 घंटे की अविराम वृष्टि के कारण पुनपुन नदी का पानी उसके निवास-स्थल राजेन्द्र नगर में घुस आया था।
प्रश्न 3. पान की दुकान के सामने खड़े लोग चुपचाप होकर क्या सुन रहे थे?