Mere Sang Ki Auratein
मेरे संग की औरतें (मृदुला गर्ग)
उत्तर-पान की दुकान के सामने खड़े लोग चुपचाप होकर यह खबर सुन रहे थे कि "पानी हमारे स्टूडियो की सीढ़ियों तक पहुँच गया है और किसी भी क्षण स्टूडियो में प्रवेश कर सकता है।"
प्रश्न 4. बाढ़ के बढ़ने का समाचार सुनकर मित्र से विदा लेते हुए लेखक ने क्या कहा था?
उत्तर- लेखक ने मित्र से विदा लेते हुए कहा था- "पता नहीं कल हम कितने पानी में रहें। ........ बहरहाल जो कम पानी में रहेगा, वह ज्यादा पानी में फँसे मित्र की सुधि लेगा।"
प्रश्न 5. "सारा शहर जगा हुआ है।" लेखक ने इसका क्या कारण बताया?
उत्तर- पटना शहर में पश्चिम दिशा से बाढ़ आने की सूचना पाकर लोग भय, आशंका और अनिष्ट होने की चिन्ता से घिरे हुए थे और वे बाढ़ आने की स्थिति जान रहे थे। इस कारण सारा शहर सावधान होकर जगा हुआ था।
दीर्घ उत्तरातत्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. बाढ़ को बढ़ता देखकर पटनावासियों की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर- बाढ़ को बढ़ता देखकर पटनावासी सहज थे। वे उत्साहित थे और उनके चेहरों पर हँसी थी। कुछ दुकानदार अवश्य हड़बड़ी में थे। वे अपना सामान कुछ ऊँचे स्थान पर रखने में लगे हुए थे। साथ ही कुछ लोगों के दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी। वे हताश और निराश भी थे। लोग घरों से बाहर जाकर बाढ़ के दृश्य को पास में जाकर देखने को लालायित रहे किन्तु वहाँ तक जा नहीं सके। घर में उचित खाद्य सामग्री की व्यवस्था करने लगे। बाजारों में भीड़ लग गयी।
प्रश्न 2. पटना में बाढ़ आने की सूचना मिलने पर लेखक ने क्या व्यवस्था की?
उत्तर- लेखक को जब पटना में बाढ़ आने की सूचना मिली, तो लेखक उस समय राजेन्द्र नगर चौराहे पर थे तो उन्होंने सोचा पता नहीं कल हम कितने पानी में रहें। पानी में फँस गये तो क्या होगा, इसलिए एक सप्ताह की खाद्य सामग्री (खुराक) एक ही साथ ले लूँ इसलिए घर में ईंधन, आलू, मोमबत्ती, दियासलाई, सिगरेट, पीने का पानी और काम्पोज की गोलियों की व्यवस्था की, अर्थात् इनका संग्रह किया और बाढ़ आने की प्रतीक्षा करने लगा।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. आकाशवाणी से बाढ़ का समाचार सुनकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
उत्तर- आकाशवाणी से समाचार प्रसारित हुआ कि 'पानी हमारे स्टूडियो की सीढ़ियों तक पहुँच चुका है और किसी भी क्षण स्टूडियो में प्रवेश कर सकता है।' इस समाचार को सुनकर लोगों की यह प्रतिक्रिया रही-
(1) इस समाचार से लोगों को अनिष्ट की आशंका एवं चिन्ता होने लगी।
(2) दुकानदारों ने हड़बड़ी में अपना सामान सँभालना प्रारम्भ किया और कुछ अपना सामान सुरक्षित जगहों पर भेजने लगे।
(3) दुकानों पर खरीद-बिक्री बन्द हुई। केवल पान की दुकानों पर लोग बाढ़ को लेकर बातें करने लगे।
(4) लेखक और उनके मित्र लोगों को सहज देखकर स्वयं को सँभालने लगे।
(5) इस समाचार से लोग अधिक परेशान नहीं हुए और सहज बने रहे।
प्रश्न 2. गाँधी मैदान की ओर से जाते समय लेखक ने क्या-क्या देखा?
उत्तर- लेखक बाढ़ का पानी देखने के लिए अपने मित्र के साथ रिक्शे पर बैठकर कॉफी हाउस के पास पहुँचा, उसके बन्द हो जाने से वह मित्र के साथ 'अप्सरा' सिनेमा हॉल के बगल में गाँधी मैदान की ओर चल पड़ा। पैलेस होटल और इण्डियन एयरलाइन्स दफ्तर के सामने पानी भर रहा था। पानी की तेज धारा पर लाल-हरे 'नियन' विज्ञापनों की परछाइयाँ सैकड़ों रंगीन साँपों के समान दिखाई दे रही थीं। गाँधी मैदान की रेलिंग के सहारे हजारों लोग खड़े होकर बाढ़ के बढ़ने का दृश्य देख रहे थे। वह दृश्य स्मृतियों के रूप में मन में भले ही उभर रहा था, परन्तु उन पर बाढ़ के पानी का गरिक आवरण पड़ गया था। लेखक को बाढ़ के पानी के इस तरह के बहव को देखने का यह अनुभव सर्वथा नया था।
2. मेरे संग की औरतें
(मृदुला गर्ग)
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं, फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं?
उत्तर- लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था लेकिन उनके बारे में सुना था कि वे अनपढ़ थीं, लेकिन उनके मन में देश-भक्ति की भावना भरी हुई थी। इसी कारण उन्होंने अपने जीवन के अन्तिम दिनों में अपने पति के मित्र क्रान्तिकारी प्यारेलाल शर्मा को बुलवाकर उनसे अपनी इच्छा प्रकट की थी कि वे हमारी बेटी की शादी किसी देशभक्त क्रान्तिकारी से करवाये, अंग्रेजों के किसी भक्त से नहीं। उनकी इस भावना में देश की आजादी का पवित्र भाव था। जीवन भर पर्दे में रहकर अपनी बेटी की शादी के लिए पर-पुरुष से बात करने की हिम्मत दिखाई। इससे उनके साहसी व्यक्तित्व और मन में समायी स्वतंत्रता
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की भावना का सहज पता चलता है। लेखिका उनके इन्हीं गुणों से प्रभावित थीं।
प्रश्न 2. लेखिका की नानी की आजादी के आन्दोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?
उत्तर- लेखिका की नानी यद्यपि अनपढ़, पर्दा करने वाली और परम्परागत जीवन जीने वाली थीं और आजादी के आन्दोलन में उनका सक्रिय योगदान नहीं था, तथापि वे आजादी का महत्त्व समझती थीं। इसलिए वे अपनी इकलौती बेटी का विवाह 'आजादी के सिपाही' किसी नौजवान से ही कराना चाहती थीं। इसी कारण अपनी मृत्यु का आभास होने पर उन्होंने पति से अपने मित्र स्वतंत्रता-सेनानी प्यारेलाल शर्मा को बुलाने का आग्रह किया। उनके आने पर लेखिका की नानी ने कहा कि "वचन दीजिए कि मेरी लड़की के लिए वर आप तय करेंगे।" ".......आप अपनी तरह आजादी का सिपाही ढूँढ़कर इसकी शादी करवा दीजिएगा।" इस कारण उन्होंने एक ऐसे होनहार युवक से अपनी बेटी की शादी करवा दी थी, जो आजादी के आन्दोलन में भाग लेने के अपराध में आई.सी.एस. की परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। इस प्रकार लेखिका की नानी की आजादी के आन्दोलन में परोक्ष भागीदारी रही।
प्रश्न 3. लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में—
(क) लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।
(ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।
उत्तर-(क) लेखिका की माँ का व्यक्तित्व-अपने आप में असाधारण या उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और गोपनीय बात को कभी दूसरे से नहीं कहती थीं। इसके साथ ही वे स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिए काम करती थीं। इसके कारण घर में उनका सम्मान होता था। घर के सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों में उनकी राय ली जाती थी और उसी को अन्तिम माना जाता था। उनका सारा समय किताबें पढ़ने, साहित्यचर्चा करने और संगीत सुनने में बीतता था। ये उनकी चरित्रगत विशेषताएँ थीं।
(ख) लेखिका की दादी के घर का माहौल- लेखिका की दादी के घर का माहौल परम्परागत नहीं था, उसमें परिवार के सदस्यों को बँधी-बँधाई लीक से हटकर चलने की छूट थी। स्वयं दादी पर अपरिग्रह की सनक सवार थी। लेखिका की परदादी को लड़की-लड़के में भेदभाव नहीं था। इसी कारण जब लेखिका की माँ गर्भवती हुई, तो परदादी ने मन्दिर में जाकर भगवान् से लड़की होने की मन्नत माँगी थी। इसी प्रकार लेखिका की दादी भी पहली
मर्तबा में ही तैयार हो गई थी कि गोद में खेलेगी, तो पोती। इस प्रकार घर में वैचारिक समानता का वातावरण था। लेखिका की माँ घर का कुछ भी काम न कर स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेती थी, किताबें पढ़ती थी और संगीत सुनती थी। लेखिका के दादाजी अंग्रेजों के बड़े प्रशंसक थे। इतना सब होते हुए भी घर की स्त्रियाँ अपने तरीके से जीने के लिए स्वतन्त्र थीं।
प्रश्न 4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पटोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी?
उत्तर- लेखिका की परदादी को कतार से बाहर चलने का शौक था, इस कारण वे स्वयं को सबसे अलग दिखाना चाहती थीं। समाज में अधिकतर लोगों की अभिलाषा रहती है कि घर में पहली सन्तान पुत्र हो। परन्तु परदादी ने पटोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की होने की मन्नत माँगी, क्योंकि वे पुत्री को पुत्र की अपेक्षा घर के काम में हाथ बँटाने वाली तथा बड़े-बूढ़ों की सेवा करने वाली मानती थीं। परदादी का विचार होगा कि बेटी बड़ी होकर घर-परिवार को अच्छी तरह चलाती है तथा उसकी शादी पर कन्यादान करने का पुण्य भी मिलता है। बेटी जन्मजात स्नेही स्वभाव की होती है। इस कारण भी परदादी ने लड़की पैदा होने की कामना की होगी।
प्रश्न 5. 'डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है'-पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर- इस पाठ के आधार पर यह स्पष्ट है कि यदि कोई सगा-संबंधी गलत राह पर हो तो उसे डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव देने के बजाय उसके साथ सहजता से ही व्यवहार करना चाहिए। लेखिका की नानी ने भी यही किया। उन्होंने अपने पति की अंग्रेज-भक्ति का न तो मुखर विरोध किया और न समर्थन किया। वे जीवनभर अपने आदर्शों पर चलती रहीं। परिणामस्वरुप समय आने पर वे मनवांछित कार्य कर सकें।
इसी प्रकार लेखिका की माँ ने चोर के साथ जो सहजता का व्यवहार कर उससे उन्होंने उसकी पूरी मानसिकता को ही बदल दिया और वह चोरी छोड़कर खेती करने लगा। अतएव यह कथन सत्य है कि डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही रास्ते पर लाया जा सकता है।
प्रश्न 6. 'शिक्षा बच्चों का जन्म-सिद्ध अधिकार है।' इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- यह बात सत्य है कि शिक्षा पाना बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसके प्रति सरकार और समाज को
सजग रहना चाहिए। लेखिका ने भी बच्चों को शिक्षा दिलाने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। लेखिका कर्नाटक के छोटे से कस्बे बागल कोट में जब पहुँची तो वहाँ उसके दो बच्चों को पढ़ाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। इसलिए उसने वहाँ एक अच्छा स्कूल खोलने की कोशिश की। इसके लिए उसने प्रयास रूप में कैथोलिक बिशप से प्रार्थना की कि वह वहाँ एक स्कूल खोले। परन्तु बिशप के तैयार न होने पर लेखिका ने अपने प्रयासों से कुछ उत्साही लोगों को साथ लेकर वहाँ प्राइमरी स्कूल खुलवाया जिसमें सामान्य वर्ग के साथ अफसरों तक के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
प्रश्न 7. पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा-भाव से देखा जाता है?
उत्तर– श्रद्धा का आधार सद्गुण ही होते हैं। सद्गुणी व्यक्ति के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है। पाठ के आधार पर निम्नलिखित जनों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा गया- लेखिका की नानी अपने जीवन में इसलिए श्रद्धेय बनीं क्योंकि उन्होंने परिवार और समाज से विरोध लेकर अपनी पुत्री का विवाह देश-प्रेमी क्रान्तिकारी से करने की बात कही। लेखिका की परदादी इसलिए श्रद्धेय बनीं क्योंकि उन्होंने दो धोतियों से अधिक संचय न करने का संकल्प किया था। उन्होंने परम्परा के विरुद्ध लड़के की बजाय लड़की होने की मन्नत माँगी थी। लेखिका की माता इसलिए श्रद्धेय बनीं क्योंकि उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए कार्य किया। कभी किसी से झूठ नहीं बोला और कभी किसी की गोपनीय बात किसी अन्य से नहीं कही। ये सभी जन अपने आप में सच्चे, दृढ़-निश्चयी थे इसलिए इनके प्रति श्रद्धा प्रकट की गई।
प्रश्न 8. 'सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है'– इस कथन के आधार पर लेखिका की बहिन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर– लेखिका और उसकी छोटी बहिन रेणु में अकेले अपने चुने रास्ते पर चलने का दृढ़ साहस था। लेखिका ने अपने साहस के बल पर बिहार के रूढ़िवावादी लोगों के बीच रहकर नारी जागृति का कार्य किया। उन्होंने शादीशुदा औरतों को पर-पुरुषों के साथ नाटक में काम करने के लिए प्रेरित किया। बागल कोट में बच्चों के लिए एक प्राइमरी स्कूल खुलवाया। इसी प्रकार लेखिका की बहिन रेणु भी अपने हठी स्वभाव की धनी थी। वह स्कूल की बस न आने पर सबके मना करने पर भी भयंकर वर्षा के बीच पैदल ही स्कूल चली गयी। इससे सिद्ध होता है कि ये दोनों व्यक्तित्व स्वतन्त्र सोच के धनी थे और अपनी सोच के आधार पर अपनी राह पर चलने की हिम्मत रखते थे।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 1. लेखिका स्वतन्त्रता प्राप्ति के दिन इण्डिया गेट पर आयोजित जश्न में शामिल क्यों नहीं हो सकें?
उत्तर– बुखार से पीड़ित होने के कारण।
प्रश्न 2. लेखिका के पिता को आई.सी.एस. की परीक्षा में बैठने से क्यों रोक दिया गया था?
उत्तर– स्वतन्त्रता के आन्दोलन में भाग लेने के कारण।
प्रश्न 3. “अब तुम्हारी मर्जी, चाहे चोरी करो या खेती।” यह बात किसने और किसको कही थी?
उत्तर– लेखिका की परदादी ने चोर को।
प्रश्न 4. पिता से प्राप्त उपन्यास 'ब्रदर्स कारामजोव' का एक अध्याय लेखिका को पहली बार पढ़ने में ही कंठस्थ हो गया था, यह अध्याय किससे सम्बन्धित था?
उत्तर– यह अध्याय बच्चों पर होने वाले अनाचार-अत्याचार से सम्बन्धित था।
प्रश्न 5. लेखिका की माँ का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर– वह अत्यन्त सुन्दर, ईमानदार, सत्यप्रिय और निष्पक्ष थीं।
प्रश्न 6. गाड़ी में बैठना उसकी दृष्टि में सामंतशाही का प्रतीक था, यह बात किसके लिए कही गई है?
उत्तर– लेखिका की चौथी बहन रेणु के लिए।
लघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 1. लेखिका की नानी मरने से पहले मुँहजोर क्यों हो उठी थी?
उत्तर– लेखिका की नानी मरने से पहले मुँहजोर इसलिए हो उठी थी, क्योंकि उसे लगने लगा कि यदि उसकी पुत्री का विवाह उनकी तरह ही किसी अंग्रेज समर्थक से करवा दिया गया तो वह भी दूसरों के इशारों पर चलने को मजबूर हो जायेगी।
प्रश्न 2. 'मजे की बात यह थी।' लेखिका के अनुसार मजे की बात क्या थी?
उत्तर– मजे की बात यह थी कि हमारे देश में आजादी की जंग लड़ने वाले ही अंग्रेजों के सबसे बड़े प्रशंसक थे। चाहे गाँधी-नेहरू हों या फिर मेरे पिताजी के घर वाले।
प्रश्न 3. लेखिका के घर में किस बात की छूट थी? उस छूट का क्या परिणाम निकला?
उत्तर– लेखिका के घर में निजत्व बनाये रखने की छूट थी। उस छूट का यह परिणाम निकला कि लेखिका सहित तीन बहनें और छोटा भाई लेखन क्षेत्र में आ गये।
प्रश्न 4. लेखिका 15 अगस्त, 1947 के आजादी के जश्न में शामिल क्यों नहीं हो पाई थी?
उत्तर– लेखिका 15 अगस्त, 1947 के आजादी के जश्न
में टाइफाइड से पीड़ित होने के कारण शामिल नहीं हो पायी थी, क्योंकि उसके चिकित्सक ने उसे बाहर जाने के लिए मना कर दिया था।
प्रश्न 5. चोर ने चोरी का धन्धा क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर— लेखिका की परदादी ने चोर से सद्भाव से पूर्ण होकर कहा था—"अब तुम्हारी मर्जी, चाहे चोरी करो या खेती।" तब से उसने खेती करना प्रारम्भ कर दिया था और चोरी का धन्धा छोड़ दिया था।
प्रश्न 6. पिताजी द्वारा भेजी गाड़ी जब बस अड्डे से रेणु को लेने जाती थी तब वह गाड़ी में बैठकर आने से इनकार क्यों कर देती थी?
उत्तर— रेणु पिताजी द्वारा उसे लाने भेजी गयी गाड़ी पर बैठकर आने से इनकार इसलिए कर देती थी, क्योंकि वह उस व्यवस्था को सामंतशाही की प्रतीक मानती थी जिसके वह खिलाफ थी।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. लेखिका तथा उसकी बहनें हीन-भावना की शिकार क्यों नहीं बन पायें?
उत्तर— लेखिका तथा उसकी बहनों को देशभक्त माँ तथा गौरवशाली नानी का विराट् व्यक्तित्व सुनने को मिला था जिनके मन में आजादी के प्रति लगाव था। माँ और नानी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर वे देशभक्ति, निडरता, लेखन आदि के कार्य करते हुए संस्कारी बनीं उन्होंने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे उनके परिवार को नीचा देखना पड़े। पारिवारिक देखे और सुने इन सशक्त संस्कारों के कारण वे हीन-भावना की शिकार नहीं बन पायी थीं।
प्रश्न 2. 'लेखिका की रचनाओं को ससुराल में कोई नहीं पढ़ता था'- इस बात का लेखिका पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर— लेखिका की रचनाओं को तमाम खानदान के सदस्य पढ़ा करते थे लेकिन ससुराल का कोई भी सदस्य नहीं पढ़ता था। यदि ससुराल पक्ष में कोई उनके लेखन को पढ़ता तो लेखिका का सम्मान करना पड़ता और उसमें कमी होती तो उस पर व्यंग्य करते। उसे हीन भावना से देखते। इसलिए ससुराल वाले तटस्थ रहे। अतः यह सोचकर लेखिका को पहले तो बुरा लगा लेकिन बाद में यह सोच कर अच्छा लगा कि चलो ससुराल में कोई उस पर आलोचना दृष्टि रखने वाला नहीं है।
प्रश्न 3. लेखिका की परदादी ने भगवान् से क्या मन्नत माँगी थी? उनकी माँगी मन्नत सबको चौंकाने वाली क्यों थी?
उत्तर— लेखिका की परदादी ने भगवान् से मन्नत माँगी थी कि वह अपनी पतोहू की गोद में पहली सन्तान के रूप में लड़की दे। यह गैर रवायती मन्नत माँग कर ही उन्हें चैन नहीं
पड़ा। उसे भगवान् और अपने बीच पोशीदा रखने के बजाय सरेआम उसका ऐलान कर दिया। लोगों के मुँह खुले के खुले रह गए। उसकी मन्नत सबको चौका देने वाली इसलिए थी कि उस काल में सभी लड़की की जगह लड़के की चाहत रखते। उनकी मान्यता है कि लड़के से वंशवृद्धि होती है लड़की से नहीं। इसलिए सभी आश्चर्यचकित थे।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. 'हमने अपनी माँ को कभी भारतीय माँ जैसा नहीं पाया।' इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— लेखिका की माँ भारतीय परम्परा में माँ की परम्परा निर्वहन करने वाली स्त्री नहीं थीं, क्योंकि वह न तो अपने बच्चों को लाड़ करती थी, न उनके लिए खाना पकाती थी, और न अच्छी पत्नी और बहू होने की सीख देती थी। वह कुछ बीमार रहती थी और कुछ साहित्य-चर्चा एवं संगीत-चर्चा में रुचि रखने के कारण वह एक परम्परागत माँ का कर्त्तव्य संतान के प्रति नहीं निभा पाती थी। वह बिस्तर पर लेते-लेते किताब पढ़ने में अपना समय व्यतीत करती थी। उसे परिवार के किसी भी सदस्य से न तो कोई शिकायत थी और न वह किसी का अनादर करती थी। इस कारण लेखिका ने कहा कि "हमने अपनी माँ को कभी भारतीय माँ जैसा नहीं पाया।"
प्रश्न 2. लेखिका की नानी ने मरने से पहले प्यारेलाल शर्मा के समक्ष जो प्रस्ताव किया, उससे उनके किन गुणों का पता चलता है?
उत्तर— लेखिका की नानी ने अपनी मृत्यु नजदीक मानकर अपनी पन्द्रह वर्षीय पुत्री के विवाह के लिए प्यारेलाल शर्मा के समक्ष जो प्रस्ताव किया, उससे पता चलता है कि वे मरने से पहले पर्दानशीं होते हुए भी मुँहजोर हो गई थीं। अपने पति के रहन-सहन को वे अंग्रेजों जैसा मानती थीं। अतः वह किसी अंग्रेज समर्थक साहब से अपनी पुत्री का विवाह नहीं चाहती थीं। वह देश की आजादी का महत्त्व समझती थीं और आजादी के सिपाहियों का जीवन अनुकरणीय मानती थीं। वह ममतामयी माँ थीं, उनमें दूरदर्शिता थी और पति का विरोध करने की शालीनता भी थी। वह साहबों के फरमाबरदारों को गुलाम जैसा मानती थीं। इस तरह लेखिका की नानी ममतामयी, स्वतन्त्र व्यक्तित्व वाली, विवेकशील, दूरदर्शी एवं सच्ची देशभक्त थीं।
प्रश्न 3. लेखिका ने बिहार के डालमिया नगर में सामाजिक चेतना जगाने का काम किस प्रकार किया?
उत्तर— डालमिया नगर में पति-पत्नी सिनेमाहॉल में अलग-अलग बैठते थे, अर्थात् सारी स्त्रियाँ एक तरफ और सारे पुरुष एक तरफ बैठते थे। लेखिका ने वहाँ के इस सामाजिक चलन को बदलने का निश्चय किया। उन्होंने साल भर तक प्रयास किया और शादीशुदा और पराई मर्दों के साथ