Reedh Ki Haddi
रीढ़ की हड्डी (जगदीशचन्द्र माथुर)
नाटक में अभिनय करने के लिए राजी कर लिया। इस तरह जो औरतें अपने पति के साथ बैठकर फिल्में भी नहीं देख पाती थीं, वे पराए मर्दों के साथ नाटक करने लगीं। लगभग चार साल तक लेखिका ने उनके साथ अनेक नाटकों का मंचन किया और अकाल राहत कोष के लिए धन एकत्र कर सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास किया।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर "एक हमारा जमाना था।"—कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस तरह की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?
उत्तर—मानव का यह स्वभाव है कि वह अतीत को अच्छा मानता है तथा वर्तमान काल से असंतुष्ट रहता है। इसीलिए वह बात-बात पर अतीत की तुलना वर्तमान से करने लगता है। वस्तुतः इस प्रकार की तुलना करना उचित नहीं है, क्योंकि समय के साथ ही व्यक्ति एवं समाज में परिवर्तन होता रहता है। व्यक्ति का जीवन-स्तर, आचार-विचार एवं आदर्श आदि सब बातें सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। जो अतीत को अच्छा मानता है, वह वर्तमान को बुरा ही मानेगा। अतएव इस तरह की तुलना असंगत है।
प्रश्न 2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उसकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर—रामस्वरूप स्त्री-शिक्षा का समर्थक एवं प्रगतिशील विचारों वाला व्यक्ति है। वह अपनी बेटी उमा को सुशिक्षित कराने हेतु बी.ए. तक पढ़ाता है। परन्तु जब उमा के विवाह के लिए वर की तलाश करता है, तो लड़की की उच्च शिक्षा ही बाधा बन जाती है। उधर लड़का शंकर और उसका पिता गोपाल प्रसाद मैट्रिक से अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते हैं, वे घर में बहू को मेम के रूप में देखने के विरोधी हैं। उनकी इच्छा का ध्यान रखकर रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपा लेता है। वस्तुतः रामस्वरूप के उक्त आचरण का यह विरोधाभास उसकी इस विवशता को व्यक्त करता है कि प्रगतिशील विचारों वाला होने पर भी लड़की का पिता होने के नाते उसे रूढ़िग्रस्त लोगों के सामने झुकना पड़ता है। इसमें समाज में वधू पक्ष की विवशता तथा नारी जाति की शोचनीय स्थिति का भी पता चलता है।
प्रश्न 3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
उत्तर—रामस्वरूप चाहते हैं कि उनकी बेटी उमा लड़के वालों के सामने सज-धज कर आवे। वह बी.ए. पास होने की बात को छिपाये रखे और लड़के वालों के सामने अपने सभी गुणों का खुलकर बखान करे तथा स्वयं को हर तरह से योग्य बताये। वस्तुतः उमा से इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करना उचित नहीं है। क्योंकि सभ्य समाज में स्त्री और पुरुष में भेदभाव रखना असंगत है। लड़की को भेड़-बकरी की तरह अच्छी तरह देखने पर ही रिश्ता करना सर्वथा अमानवीय व्यवहार है।
विवाह में लड़की की पसन्द-नापसन्द का अधिकार उसे भी मिलना चाहिए और उसके गुणों को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।
प्रश्न 4. गोपाल प्रसाद विवाह को 'बिजनेस' मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
उत्तर—गोपाल प्रसाद विवाह को बिजनेस मानते हैं। इसीलिए वे बातचीत के बीच कहते हैं- चलो अब बिजनेस की बात कर ली जाए। शादी को व्यवसाय मानना उचित नहीं है, क्योंकि इससे मानवीय संबंधों की गरिमा घट जाती है और व्यवहारगत मधुरता नष्ट हो जाती है।
रामस्वरूप द्वारा अपनी बेटी को बी.ए. पढ़ाना और वर पक्ष की चाहना के आधार पर उसकी शिक्षा को छिपाना भी गलत है। इन कारणों से दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं। गोपाल प्रसाद अधिक बड़ा अपराधी है, क्योंकि वह लड़की को मेम-कुर्सी की तरह सजावती सामान मानता है और भेड़-बकरी की तरह सौदा पाटना चाहता है। रामस्वरूप विवशता में घिरे होने के कारण ऐसा करता है, फिर भी उसका कार्य अपराधपूर्ण ही कहा जायेगा।
प्रश्न 5. ".........आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं............" उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
उत्तर—रीढ़ की हड्डी शरीर को खड़ा रखने में तथा स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। इसी प्रकार व्यक्ति का जीवन उसकी शारीरिक एवं चारित्रिक विशेषताओं पर टिका रहता है। जिसके शरीर में रीढ़ की हड्डी नहीं है, उसकी कमर बेसहारा होकर झुक जाती है। शंकर की कमर भी कुछ झुकी रहती है, कॉलेज में उसके दोस्त उसका मजाक उड़ाते थे कि शंकर की 'बैकबोन' नहीं है। गर्ल्स हॉस्टल के चक्कर काटने से उसकी पिटाई भी हुई थी, इसलिए वह कमर झुका कर चलता है। साथ
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ही होस्टल की नौकरानी के पैरों पड़ कर वहाँ से भागा था, जिसके कारण वह चरित्र से भी कमजोर था। उमा इस बात को जानती थी। इसी कारण उसने ऐसा कहा। इससे वह शंकर की शारीरिक एवं चारित्रिक दुर्बलता की ओर संकेत कर बताना चाहती है कि वह न तो पति बनने के योग्य है और न विवाह करने के योग्य है।
प्रश्न 6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की— समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर—हमारे समाज को रीढ़-विहीन, चरित्रहीन शंकर जैसे लड़कों की बिल्कुल जरूरत नहीं है। क्योंकि शंकर जैसे लड़के न तो समाज को और न परिवार को कुछ दे सकते हैं, उल्टे कलंकित ही कर सकते हैं। समाज को उमा जैसी लड़कियों की जरूरत है। ऐसी ही निर्भीक, साहसी और स्वाभिमानी लड़कियाँ रामप्रसाद जैसे विवाह को व्यापार समझने वाले भ्रष्ट, चालाक, व्यवहार-शून्य व्यक्ति को सबक सिखा कर समाज को एक नया रास्ता दिखा सकती हैं।
प्रश्न 7. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का शीर्षक संक्षिप्त, सार्थक और व्यंग्यात्मक है। इस एकांकी की मूल समस्या वर का व्यक्तित्वहीन होना है। यदि शंकर समझदार और व्यक्तित्व-सम्पन्न होता तो उसके पिता की यह हिम्मत नहीं होती कि भावी जीवन की डोर में बँधेने वाले दो प्राणियों के मध्य बैठकर इस प्रकार की फूहड़ बातें करता। कम पढ़ी-लिखी बहू की बात करके अशिक्षा को प्रोत्साहन देता। कम पढ़ी-लिखी बहू पिता की जरूरत हो सकती है, लेकिन पुत्र की नहीं। इसीलिए व्यक्तित्वविहीन शंकर पिता की हाँ में हाँ मिलाता है और अपनी कमजोरी तथा कायरता का प्रदर्शन करता है। इसीलिए उसे रीढ़ की हड्डी के बिना दिखाया गया है। अतः 'रीढ़ की हड्डी' सर्वथा सार्थक, व्यंग्यात्मक और सफल शीर्षक है।
प्रश्न 8. कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?
उत्तर—यदि देखा जाये तो इस एकांकी में मूल में दो पात्र अन्य पात्रों की अपेक्षा प्रमुख हैं—शंकर और उमा। इन दोनों के विवाह को लेकर एकांकी के कथानक का विकास हुआ है। लेकिन शंकर का चरित्र और व्यक्तित्व गिरा हुआ है। इसलिए वह एकांकी का मुख्य पात्र नहीं माना जा सकता है। उमा ही एकमात्र एकांकी का ऐसा पात्र है जो अपनी प्रतिभा और साहस के बल पर विवाह में उठने वाली बातों का सफाया करके दर्शकों के मन पर अपना स्थायी प्रभाव जमा देती है और शंकर तथा उसके
पिता को बेनकाब कर देती है। इसलिए उमा को ही एकांकी का प्रमुख पात्र कहना उचित है।
प्रश्न 9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपालदास की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
उत्तर—रामस्वरूप की चारित्रिक विशेषताएँ— 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में रामस्वरूप प्रमुख पुरुष पात्र है। वह उमा का पिता एवं अधेड़ उम्र का व्यक्ति है। रामस्वरूप अतीव मेहनती तथा प्रगतिशील विचारों वाला है। इसी कारण वह अपनी पुत्री उमा को उच्च शिक्षा दिलाता है। वह स्नेही पिता है। अपनी पुत्री के विवाह के लिए वह अत्यधिक चिंतित रहता है और अपनी इसी इच्छा को पूरी करने के लिए लड़के वाले से अपनी पुत्री की योग्यता भी छिपा लेता है। वह पत्नी से हँसी-मजाक करने से विनोदप्रिय भी है। रामस्वरूप लड़के वालों की अनुचित बातों का विरोध करना चाहता है, परन्तु विवाह योग्य कन्या का पिता होने से विवश रहता है। इस प्रकार एकांकी में रामस्वरूप के चरित्र की अनेक विशेषताओं का चित्रण हुआ है।
गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ— शंकर का पिता गोपाल प्रसाद वैसे तो सुशिक्षित वकील है, वह अनुभवी एवं अधेड़ उम्र का व्यक्ति है। वकीली पेशे के कारण वह चालाक, स्वार्थी, दकियानूसी विचारों से पोषित व्यक्ति है। वह आजकल के सामाजिक वातावरण को अच्छी तरह से समझता है इसीलिए ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की को अपने परिवार की बहू बनाने का आकांक्षी नहीं है। वह शंकालु एवं तुच्छ विचारों वाला ऐसा पात्र है, जो शादी के सम्बन्ध को पूरी तरह 'बिजनेस' मानता है। वह नारी का सम्मान करना नहीं जानता है तथा रूढ़िवादि विचारों का पक्षपाती है। वह अतीत की खूब प्रशंसा करता है और अपने लड़के की सभी कमियों को जानता हुआ भी उन्हें छिपाने का प्रयास करता है। वह सच्चाई का सामना नहीं कर पाता है और अन्त में गुस्से से भरकर दूसरों को ही दोषी बताता है। इस प्रकार एकांकी में गोपाल प्रसाद का चरित्र दोषों से व्याप्त दिखाई देता है।
प्रश्न 10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।
उत्तर—'रीढ़ की हड्डी' एकांकी सामाजिक खोखलेपन पर व्यंग्यात्मक ढंग से प्रकाश डालकर उसे दूर करने के उद्देश्य से लिखा गया है। हमारे समाज में लड़कियों के विवाह के सम्बन्ध में जो छान-बीन की जाती है, उन्हें जिस तरह नापा-तौला जाता है, वह एकदम अपमानजनक है। आज लड़की-लड़के दोनों में समानता का व्यवहार करने की चर्चा की जाती है, परन्तु ऐसा नहीं होता है। लड़के वाले स्वयं को निर्दोष, उच्च एवं सर्वगुण-सम्पन्न मानते हैं तथा लड़की-पक्ष को अपने से छोटा मानकर उनसे मनचाही फरमाइश करते
हैं। अन्त में उमा द्वारा जो उत्तर दिया जाता है, उससे नारी-चेतना का स्पष्ट प्रकाशन हुआ है। इस तरह प्रस्तुत एकांकी का उद्देश्य नारी-चेतना को जागृत करना, नारी-सम्मान की भावना का प्रसार करना तथा रिश्ते को लेकर परम्परागत रूढ़ियों का विरोध करना रहा है।
प्रश्न 11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर—समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के लिए निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं-
(1) लोगों के बीच सुशिक्षित नारी के लाभों का प्रचार किया जा सकता है।
(2) महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करें और माँ, बहिन एवं अन्य सभी नारियों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।
(3) सुशिक्षित कन्याओं को नौकरी दिलवाकर उन्हें पुरुषों के समान महत्त्व दिलवाया जा सकता है।
(4) कम पढ़ी-लिखी बहू चाहने वालों को समझा-बुझा कर प्रगति के रास्ते पर लाया जा सकता है।
(5) नारी-समाज के साथ हो रहे अत्याचार, शोषण आदि का पूरा विरोध कर संघर्ष में उनका साथ दें।
(6) दहेज-प्रथा एवं अनमेल विवाह का विरोध कर नारियों को उचित गरिमा प्रदान की जा सकती है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के माध्यम से लेखक ने समाज की किस मानसिकता पर प्रहार किया है?
उत्तर—समाज में स्त्रियों के प्रति व्याप्त रूढ़िवादि मानसिकता पर प्रहार किया है।
प्रश्न 2. लड़के वाले देखने आने पर उमा सितार पर कौन सा गीत गाती है?
उत्तर—मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
प्रश्न 3. एकांकी के आधार पर उमा के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर—उमा एक सुशिक्षित, प्रगतिशील विचारों, सादगी पसंद एवं स्वाभिमानी युवती है।
प्रश्न 4. गोपाल प्रसाद के अनुसार पढ़ना और काबिल होना किसका काम बताया गया है?
उत्तर—केवल मर्दों का।
प्रश्न 5. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद क्या कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान से करते हैं?
उत्तर—'एक हमारा जमाना था'।
प्रश्न 6. इस एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' किस बात का प्रतीक है?
उत्तर—मौलिक विचारों तथा व्यक्तित्व का प्रतीक है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. वह तुम्हारी लड़की तो मुँह फुलाकर पड़ी है। उमा के मुँह फुलाने का क्या कारण था?
उत्तर—उमा को लड़के वाले देखने आ रहे थे। माँ ने उसे सज-धज कर क्रीम-पाउडर लगाकर आने को कहा था। उसे बनाव-शृंगार पसन्द नहीं था। इस कारण वह माँ की बात सुनकर मुँह फुलाकर लेट गई थी।
प्रश्न 2. प्रेमा ने अपनी पुत्री को इंट्रेन्स तक ही पढ़ाने की बात क्यों कही?
उत्तर—प्रेमा का मानना था कि कम पढ़ी-लिखी लड़की के नखरे कम होते हैं। वह हर कही बात को सहजतया मान लेती है। जबकि अधिक पढ़ी-लिखी लड़कियाँ किसी बात को न तो सहजतया से लेती हैं और न सुनती हैं।
प्रश्न 3. शंकर अपनी पढ़ाई में एकाध साल का मार्जिन क्यों रखता था?
उत्तर—शंकर पढ़ने के साथ-साथ आवारागर्दी भी करता था। इसलिए वह बीच-बीच में एकाध साल फेल भी हो जाता था। इस कारण वह पढ़ाई में एकाध साल का मार्जिन रखता था।
प्रश्न 4. वकील साहब अपने जमाने के मैट्रिक को आज के जमाने के एम.ए. से अच्छा क्यों मानते हैं?
उत्तर—वकील साहब अपने जमाने के मैट्रिक को आज के जमाने के एम.ए. से अच्छा मानते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उस समय का मैट्रिक आज के एम.ए. से ज्यादा योग्य है।
प्रश्न 5. गोपाल प्रसाद लड़कियों की पढ़ाई के पक्ष में क्यों नहीं हैं?
उत्तर—उनका मानना है कि यदि लड़की पढ़-लिख गयी और अंग्रेजी अखबार पढ़ने लगी। पालिटिक्स आदि पर बहस करने लगी तो घर-गृहस्थी का काम कौन चलायेगा? इसलिए वे लड़कियों की पढ़ाई के पक्ष में नहीं हैं।
प्रश्न 6. उमा मीराँ का गाते-गाते एकाएक क्यों रुक गयी थी?
उत्तर—उमा का गाते-गाते जब एकाएक शंकर पर नजर गयी तब वह शंकर को पहचान गयी और उसने सोचा कि ऐसे आवारा लड़के के सामने उसे गाना गाना उचित नहीं लगा और वह गाते-गाते रुक गयी।
दीर्घ उत्तरातत्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. गोपाल प्रसाद लड़कों और लड़कियों के अन्तर को किन तर्कों द्वारा स्पष्ट करते हैं?
उत्तर—गोपाल प्रसाद का मानना है कि लड़कों को पढ़-लिख कर योग्य बनना जरूरी है जबकि लड़कियों को सहज और सरल बनकर गृहस्थी चलाना जरूरी है। वे इस बात की पुष्टि के लिए मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं,