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📚 कक्षा 9 हिंदी (Hindi)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 4: साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)

Sanwle Sapnon Ki Yaad

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 हिन्दी (RBSE) 📘 क्षितिज (गद्य खण्ड) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Sanwle Sapnon Ki Yaad

साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)

  1. उपभोक्तावाद से हमारे समाज का चरित्र बदल रहा है। इससे हम उत्पाद के प्रति दिन-प्रतिदिन समर्पित होते जा रहे हैं।
  2. उपभोक्तावाद के प्रचलन से अब सुख की व्याख्या उपभोग का भोग करना अर्थात् अपनी सुख-सुविधाओं का एकाकी ही भोग करना हो गया है।
  3. मनुष्य उत्पादों का भोग नहीं करता बल्कि उत्पाद ही उसके जीवन का भोग करते हैं।
  4. गद्यांश में उपभोक्तावादी दर्शन की चर्चा है। नए दर्शन के अन्तर्गत उत्पादन बढ़ाने पर अत्यधिक बल दिया गया है।
  5. वाक्य में रेखांकित शब्द क्रिया विशेषण है।

(2)

सुख-सुविधाओं और अच्छे इलाज के अतिरिक्त यह अनुभव काफी समय तक चर्चा का विषय भी रहेगा, पढ़ाई के लिए पाँचसितारा पब्लिक स्कूल है, शीघ्र ही शायद कालेज और यूनिवर्सिटी भी बन जाए। भारत में तो यह स्थिति अभी नहीं आयी पर अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में आप मरने के पहले ही अपने अन्तिम संस्कार और अनन्त विश्राम का प्रबन्ध भी कर सकते हैं-एक कीमत पर। आपकी कब्र के आसपास सदा हरी घास होगी, मनचाहे फूल होंगे। चाहे तो वहाँ फव्वारे होंगे और मन्द ध्वनि में निरन्तर संगीत भी। कल भारत में भी यह संभव हो सकता है। अमेरिका में आज जो हो रहा है, वह कल भारत में भी आ सकता है। प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हों।

प्रश्न 1. उपभोक्तावाद के कारण अब कौन-सी संस्कृति विकसित हो रही है?

प्रश्न 2. उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण सुख-सुविधाओं और अच्छे इलाज के लिए क्या किया जा रहा है?
प्रश्न 3. अमेरिका में आज ऐसा क्या हो रहा है जिसके अनुकरण की चर्चा भारत में भी हो रही है?

प्रश्न 4. प्रतिष्ठा के हास्यास्पद रूप से क्या तात्पर्य है?
प्रश्न 5. भारत में कौनसी स्थिति अभी नहीं आई है?

प्रश्न 6. लेखक गद्यांश में किस समाज की झलक प्रस्तुत कर रहा है? यह समाज किसका है?

उत्तर-1. उपभोक्तावाद के कारण अब अन्धानुकरण की प्रवृत्ति, सुख-भोग की लालसा एवं पाँचसितारा संस्कृति विकसित हो रही है।

2. पाँचसितारा होटलों और पाँचसितारा अस्पतालों का निर्माण एवं उपयोग किया जा रहा है।
3. अमेरिका में लोग अपने अन्तिम संस्कार और अनंत विश्राम की व्यवस्था करने लगे हैं, आने वाले समय में भारत में भी यह सब होने लगेगा।

4. अपने अन्तिम संस्कार और अनंत विश्राम के लिए अच्छा प्रबन्ध करना ऐसी झूठी प्रतिष्ठा है जिसे सुनकर हँसी आती है।
5. मरने से पहले अन्तिम संस्कार का प्रबन्ध कर लिया जाए, भारत में अभी ऐसी स्थिति नहीं आई है।

6. लेखक गद्यांश में उपभोक्तावादी समाज की झलक प्रस्तुत कर रहा है। यह समाज विशिष्ट जनॉ का है।

4. साँवले सपनों की याद

( जाबिर हुसैन )

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी-प्रेमी बना दिया?

उत्तर- बचपन में सालिम अली की एयरगन से नीले कण्ठ वाली एक गौरैया घायल होकर गिरी थी। उसी घटना ने उनकी जीवन-दिशा को बदल दिया। तब गौरैया आदि पक्षियों की देखभाल, सुरक्षा और खोजबीन में जुट गये। इसके बाद वे पक्षियों की खोज में नये-नये स्थानों पर जाते रहे और पक्षी प्रेमी बन गये।

प्रश्न 2. सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्यावरण से सम्बन्धित किन सम्भावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गईं थीं?

उत्तर- सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सामने केरल की 'साइलेंट वैली' सम्बन्धी खतरों की बात उठाई। सालिम अली इन रेगिस्तानी हवाओं के कुप्रभावों, जैसे- क्षेत्र का पक्षी विहीन हो जाना, पेड़-पौधों का नष्ट हो जाना, गन्दगी का जमावड़ा लग जाना, क्षेत्र का प्राणीविहीन हो जाना इत्यादि बातों का लेखा-जोखा उनके सामने पेश किया। चौधरी साहब ग्रामीण पृष्ठभूमि के होने के कारण सालिम अली की बातें सुनकर उनकी आँखें नम हो गयीं होंगी।

प्रश्न 3. लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि "मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है?"

उत्तर- डी.एच. लॉरेंस प्रकृति-प्रेमी कवि थे। वे अपनी छत पर बैठकर गौरैया के साथ काफी समय बिताते थे। इसी कारण लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने ऐसा कहा होगा कि मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में बहुत कुछ जानती है। फ्रीडा का आशय लॉरेंस के पक्षी-प्रेम को स्पष्ट करना था।

प्रश्न 4. आशय स्पष्ट कीजिए-
(क) वो लॉरेंस की तरह नैसर्गिक जिन्दगी का प्रतिरूप बन गये थे।

उत्तर-आशय-लॉरेंस का जीवन बहुत सीधा-सादा था, प्रकृति के प्रति उनके मन में जिज्ञासा थी। सालिम अली भी लॉरेंस की तरह प्रकृति प्रेमी थे। वे प्रकृति से इतना घुल-मिल गये थे कि उनका जीवन ही जैसे प्रकृतिमय हो गया था। उनका जीवन भी नैसर्गिक था, तो प्रकृति के प्रति भी वे नैसर्गिक बन गये थे।

( ख ) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा?

उत्तर-आशय-सालिम अली रूपी पक्षी मौत की गोद में सो चुका है। यदि कोई व्यक्ति अपने दिल की धड़कन उनके दिल में तथा अपने शरीर की गर्मी उनके शरीर में डाल भी दे, तो उन्हें जीवित नहीं कर सकता। वे जन्मजात प्रकृति-प्रेमी एवं पक्षी-प्रेमी थे, वे मौलिक थे, इसी कारण किसीं और के दिल की धड़कन से उनके सपने पूरे नहीं हो सकते।

( ग ) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।

उत्तर-आशय-टापू सीमित आकार का होता है। टापू बन्धन तथा सीमा का प्रतीक है और सागर की कोई सीमा नहीं होती है। सालिम अली अपने कार्य-क्षेत्र में टापू की तरह सीमित नहीं रहे। वे तो पक्षियों की खोज में प्रकृति के विशाल परिवेश में घूमते रहे और अपना कार्य-क्षेत्र विस्तृत बनाकर अथाह सागर के समान प्रकृति से जो-जो अनुभव प्राप्त किए और उन्हें संजोया।

प्रश्न 5. इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइए।

उत्तर-प्रस्तुत पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की विशेषताएँ निम्नांकित हैं-

( 1 ) मिश्रित भाषा का प्रयोग-लेखक ने प्रस्तुत संस्मरण में हिन्दी, उर्दू तथा अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया है। हिन्दी के तत्सम एवं तद्भव शब्दों का मिला-जुला प्रयोग सशक्त भावाभिव्यक्ति के अनुकूल है।

( 2 ) सुगठित वाक्य-योजना-संस्मरण-लेखन में व्यक्तित्व-चित्रण आदि को लेकर लम्बे और सुगठित वाक्यों का प्रयोग किया गया है। इससे वाक्य-योजना भावानुरूप दिखाई देती है। जैसे-‘‘सुनहरे परिंदों के खूबसरत पंखों पर सवार साँवले सपनों का एक हुजूम मौत की खामोश वादी की तरफ अग्रसर है।’’

( 3 ) मुहावरों व अलंकारों का प्रयोग-प्रस्तुत संस्मरण में भावाभिव्यक्ति एवं भाषा सौन्दर्यवर्द्धन की दृष्टि से मुहावरों और अलंकारों का सुन्दर प्रयोग हुआ है।

( 4 ) शैली-विधान-प्रस्तुत संस्मरण में मुख्यतया भावात्मक शैली ही अपनायी गई है, परन्तु कहीं पर प्रश्न-शैली, ललित शैली तथा आवेश शैली का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 6. इस पाठ में लेखक ने सालिम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर-सालिम अली सुप्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी, विचारशील व्यक्ति एवं प्रकृति-प्रेमी थे। उन्हें पक्षियों से विशेष लगाव था। वे हमेशा गले में या आँखों पर दूरबीन लगाकर पक्षियों के प्रत्येक क्रिया-कलाप को निहारते रहते थे। वे पर्यावरण-प्रेमी एवं घुमक्कड़ स्वभाव के थे। वे पहाड़ों, जंगलों, झरनों को उन्हीं की नजर से देखते थे और पक्षियों के मधुर कलरव को संगीत के समान रोमांचकारी मानते थे। वे अद्वितीय 'बर्ड वाचर' थे और प्रकृति के संरक्षण के लिए चिंतित भी रहते थे। सालिम अली वस्तुतः सरल हृदय के मानव थे और अपने लक्ष्य को लेकर जिन्दगी की ऊँचाइयों को छूने में सफल रहे थे।

प्रश्न 7. 'साँवले सपनों की याद' शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर-यह रचना लेखक जाबिर हुसैत्र द्वारा अपने मित्र सालिम अली की याद में लिखा गया संस्मरण है। इस संस्मरण में सालिम अली को जीवन भर सुनहरे पक्षियों की दुनिया में खोया रहने वाला बताया गया है। वे प्रकृति परिवेश और पक्षियों की सुरक्षा और खोज के सपनों में खोये रहते थे। श्रीकृष्ण की बंशी का मधुर स्वर और यमुना का साँवला जल उन्हें सपनों की याद दिला जाता था। इसी कारण वे सपनों के मिथक बन गये हैं। अतः उन्हें लक्ष्यकर लिखे गये संस्मरण का शीर्षक सर्वथा उचित एवं सार्थक है। यह शीर्षक रहस्यनात्मक एवं जिज्ञासावर्द्धक भी है।

रचना और अभिव्यक्ति-

प्रश्न 8. प्रस्तुत पाठ सालिम अली की पर्यावरण के प्रति चिन्ता को भी व्यक्त करता है। पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं?

उत्तर-पर्यावरण बचाने या संरक्षण के लिए हम अग्र योगदान कर सकते हैं-

(1) हम अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पौधों-पादपों का रोपण कर इस काम के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें।

(2) हम पशु-पक्षियों एवं वन्य जीवों की रक्षा करें। छोटे पक्षियों के लिए दाना-पानी की यथासंभव व्यवस्था करें।

(3) हम यथासंभव प्लास्टिक की थैलियों या अन्य ऐसी दूषित चीजों का उपयोग न के बराबर करें।

(4) कूड़ा-कर्कट घर के सामने या खुले में न फेंकें, उसे सिर्फ कूड़ेदान में ही डालें। गन्दगी न फैलने दें।

(5) प्रकृति का अवैध दोहन-खनन रोकें, पर्यावरण के प्रति जन-चेतना जगाने का प्रयास करें।


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न–

प्रश्न 1. वृन्दावन क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर– वृन्दावन भगवान कृष्ण की लीला स्थली होने से प्रसिद्ध है।

प्रश्न 2. साइलेंट वेली कहाँ है?

उत्तर– साइलेंट वेली केरल प्रान्त में है।

प्रश्न 3. 'यायावरी' क्या होती है?

उत्तर– यायावरी घुमक्कड़ी प्रवृत्ति होती है।

प्रश्न 4. सालिम अली किसकी तरह प्रकृति में विलीन हो रहे हैं?

उत्तर– प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी सालिम अली उस वन पक्षी की तरह प्रकृति में विलीन हो रहे हैं।

प्रश्न 5. वृन्दावन किसके जादू से खाली नहीं होता?

उत्तर– वृन्दावन की बाँसुरी की आवाज के जादू से कभी खाली नहीं होता।

लघूत्तरात्मक प्रश्न–

प्रश्न 1. लेखक ने भारत के किस प्रधानमंत्री को गाँव की मिट्टी से जुड़ा हुआ माना है और क्यों?

उत्तर– लेखक ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह को गाँव की मिट्टी से जुड़ा हुआ माना है, क्योंकि वे ग्रामीण जीवन से जुड़े हुए थे। इसलिए वे खेती, पर्यावरण, मिट्टी तथा पशु-पक्षियों आदि की समस्याओं के बारे में भली प्रकार से जानते थे।

प्रश्न 2. "इस हुजूम के आगे-आगे चल रहे हैं, सालिम अली।" यहाँ किस सफ़र का उल्लेख हुआ है?

उत्तर– यहाँ लेखक ने सालिम अली की अन्तिम यात्रा का उल्लेख किया है। वे पिछले सफ़रों में पक्षियों के बारे में जानकारी लेकर लौट आते थे, परन्तु आज स्वयं पक्षी की तरह प्रकृति में विलीन हो रहे थे। इस सफ़र में उनका शव सबसे आगे चल रहा था और उसके पीछे शवयात्रा में सम्मिलित लोगों का हुजूम था।

प्रश्न 3. सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री से किस उद्देश्य से मुलाकात की थी? इसका प्रधानमंत्री पर क्या असर पड़ा था?

उत्तर– सालिम अली ने 'साइलेंट वैली' के पर्यावरण को बचाने का अनुरोध करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाकात की। पर्यावरण के सम्भावित खतरों का उन्होंने जो चित्र सामने रखा, उससे प्रधानमंत्री पर यह असर हुआ कि उनकी आँखें नम हो गई और उन्होंने सालिम अली को सहयोग का आश्वासन दिया।

प्रश्न 4. सालिम अली की मौत कैसे हुई? उनकी आँखों पर चढ़ी दूरबीन कब उतरी? बताइए।

उत्तर–सालिम अली ने जीवन में लम्बी यात्राएँ की थीं, उन्हें कैंसर हो गया था और उस जानलेवा बीमारी से लगभग नब्बे वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। जीवन के अन्तिम समय तक उनकी आँखों पर दूरबीन चढ़ी रही वह सालिम अली की मौत के बाद ही उतरी थी।

प्रश्न 5. 'पंखों पर सवार साँवले सपनों का हुजूम' किसे और क्यों कहा गया है? 'साँवले सपनों की याद' पाठ के आधार पर लिखिए।

उत्तर– पक्षी-प्रेमी एवं पर्यावरणविद् सालिम अली को 'पंखों पर सवार साँवले सपनों का हुजूम' कहा गया है। क्योंकि सालिम अली जीवनभर पक्षियों के जीवन का अध्ययन करने के लिए घुमक्कड़ों की तरह भ्रमण करते रहे। पक्षियों को निहारने के लिए वे सदा गले में दूरबीन लटकाये यायावरी करते रहते थे।

दीर्घ उत्तरामक प्रश्न–

प्रश्न 1. "मेरी आँखें नम हैं।" लेखक ने इसका क्या कारण बताया?

उत्तर– सुप्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी सालिम अली का सारा जीवन प्रकृति एवं पक्षियों के प्रेम में व्यतीत हुआ। वे प्रतिदिन अपने गले में लम्बी दूरबीन लटकाकर अपनी खोजपूर्ण यात्रा पर निकल पड़ते थे। इसलिए ऐसा प्रतीत होता था कि सायंकाल तक वे लौट आयेंगे, परन्तु इस बार वे मृत्यु के आगोश में इस तरह समा गये कि फिर लौटकर नहीं आ सके। इस तरह उनकी मृत्यु से उत्पन्न दुःख और अवसाद के कारण लेखक की आँखें नम हो गई।

प्रश्न 2. 'साँवले सपनों की याद' पाठ से क्या प्रेरणा मिलती है?

अथवा

'साँवले सपनों की याद' पाठ का क्या प्रतिपाद्य है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर– 'साँवले सपनों की याद' नामक संस्मरण में सुप्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी, प्रकृति-प्रेमी और पर्यावरण विज्ञानी सालिम अली का व्यक्ति-चित्र उबारा गया है। इससे यह प्रेरणा मिलती है कि हमें पक्षियों तथा अन्य जीव-जन्तुओं से प्रेम करना चाहिए। हमें पशु-पक्षियों के व्यवहार का ज्ञान कर उनके संवर्द्धन का प्रयास करना चाहिए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति चिन्ता रखनी चाहिए। पर्यावरण की सुरक्षा से ही प्रकृति का विकास होता है तथा जीव-जन्तुओं को स्वच्छन्द जीवन मिलता है। हम जो कार्य प्रारम्भ करें, उसे दृढ़ता से आगे बढ़ाएँ।

प्रश्न 3. वृन्दावन में कृष्ण की मुरली का जादू हमेशा क्यों बना रहता है?

उत्तर– वृन्दावन कृष्ण की लीलाभूमि रहा, इस कारण

भारतीयों के मन में वहाँ पर कृष्ण द्वारा की गई रास-लीला एवं मुरली का सुरीला स्वर बार-बार गूँजता रहता है। जब भी भक्त-यात्री वृन्दावन की गलियों में घूमने जाते हैं, वहाँ यमुना-तट पर आते हैं, तो उन्हें कृष्ण के मुरली-वादन की मधुर अनुभूति होने लगती है और लगता है कि अभी कहीं से निकलकर कृष्ण प्रकट हो जायेंगे और मधुर स्वर में मुरली बजाना शुरू कर देंगे। इसी कारण वृन्दावन में श्रद्धालु सदैव आते रहते हैं और मुरली का जादू हमेशा बना रहता है।

प्रश्न 4. "सालिम अली, तुम लौटोगे ना!" संस्मरण के अन्त में लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर-लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है कि सालिम अली रोजाना गले में दूरबीन लटकाये और कन्धे में झोला डाले पक्षियों के विषय में जानकारी करने चले जाते थे। वे पक्षियों के विषय में दुर्लभ जानकारी लेकर लौट आते थे। इस तरह का दैनिक कार्य होने से लेखक को आज भी यह एहसास होता है कि सालिम अली शायद अभी अपने सफर पर गये हैं और कुछ समय बाद लौट आयेगें। जबकि सालिम अली संसार से चिर-यात्रा पर चले गये हैं। अतः अपनी संवेदना प्रकट करने के लिए लेखक ने ऐसा कहा है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. 'साँवले सपनों की याद' पाठ के आधार पर बताइए कि सामान्य लोग पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान किस तरह de सकते हैं?

उत्तर- 'साँवले सपनों की याद' पाठ से ज्ञात होता है कि सालिम अली प्रकृति और उससे जुड़े विभिन्न अंगों-नदी, पहाड़, झरने, आबशारों आदि को प्रकृति की निगाह से देखते थे और उन्हें बचाने के लिए प्रयत्नशील रहते थे। उन्होंने केरल साइलेंट वैली को बचाने का अनुरोध किया। इसी तरह सामान्य लोग भी अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अपना योगदान दे सकते हैं, जैसे-

(1) अधिकाधिक पेड़ लगाकर
(2) पेड़ को कटने से बचाकर
(3) प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का प्रयोग न करके
(4) अपने आसपास साफ-सफाई करके
(5) जल स्रोतों को दूषित होने से बचाकर
(6) वन्य जीवों तथा पक्षियों की रक्षा करके आदि।

रचनाकार परिचय सम्बन्धी प्रश्न-

प्रश्न 1. जाबिर हुसैन का जीवन परिचय लिखिए।

उत्तर- जाबिर हुसैन का जन्म सन् 1945 में बिहार प्रदेश में हुआ। ये अंग्रेजी भाषा और साहित्य के अध्यापक के साथ राजनीतिज्ञ और श्रेष्ठ लेखक भी हैं। डोली बीनी का मजार, जो आगे हैं, अतीत का चेहरा, लोगों, एक नदी रेत भरी आदि इनकी महत्त्वपूर्ण रचनाएँ हैं। जाबिर हुसैन ने राजनैतिक-सामाजिक जीवन में आम आदमी के संघर्ष को निकटता से

महसूस किया है। इस अनुभव को उन्होंने अपने साहित्य में भी प्रकट किया है। उनके द्वारा संघर्षरत आम आदमी और विशिष्ट व्यक्तियों पर लिखी गई डायरियाँ काफी चर्चित और प्रशंसित हैं। जाबिर हुसैन की कृतियों में प्रयुक्त भाषा आम आदमी के निकट है। उनकी भाषा कलात्मक, सरल तथा रोचक है। उन्होंने अपनी भाषा में उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का भी प्रयोग किया है। हुसैनजी की रचनाओं से पता चलता है कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।

अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न-

निर्देश—निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनसे सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(1)

इस हुजूम में आगे-आगे चल रहे हैं, सालिम अली। अपने कंधों पर सैलानियों की तरह अपने अन्तहीन सफ़र का बोझ उठाए। लेकिन यह सफर पिछले तमाम सफ़रों से भिन्न है। भीड़-भाड़ की जिन्दगी और तनाव के माहौल से सालिम अली का यह आखिरी पलायन है। अब तो वो उस वन-पक्षी की तरह प्रकृति में विलीन हो रहे हैं, जो जिन्दगी का आखिरी गीत गाने के बाद मौत की गोद में जा बसा हो। कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा।

प्रश्न 1. यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है? इसके लेखक का नाम भी बताइए।

प्रश्न 2. सालिम अली का यह सफर पिछले तमाम सफ़रों से भिन्न किस कारण था?

प्रश्न 3. सालिम अली अब किसमें विलीन हो रहे थे?

प्रश्न 4. सालिम अली की तुलना किससे की गई है?

प्रश्न 5. उक्त गद्यांश में किस हुजूम की चर्चा की गई है?

प्रश्न 6. इस गद्यांश में वर्णित हुजूम में सबसे आगे कौन है?

उत्तर— 1. यह गद्यांश 'साँवले सपनों की याद' शीर्षक पाठ (संस्मरण) से लिया गया है। इसके लेखक जाबिर हुसैन हैं।

  1. यह सफर मृत्यु के आगوش में जाने का था, उनकी जीवन-यात्रा का अन्तिम सफर था। इसी कारण भिन्न था।

  2. सालिम अली प्रकृति की गोद में विलीन होने जा रहे थे।

  3. सालिम अली की तुलना उस वन-पक्षी की गई है जो अपने जीवन का अन्तिम गीत गाने के बाद मौत को गले लगा लेता है।

  4. उक्त गद्यांश में सालिम अली के शव को कन्धे पर उठाए लोगों के हुजूम की चर्चा की गई है।