Mere Bachpan Ke Din
मेरे बचपन के दिन (महादेवी वर्मा)
हिंदी कक्षा IX
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नहीं, मुझे लगता है माधो औरत के कफन के चन्दे की शराब पी गया। वही मुस्कान मालूम होती है।
मैं तुम्हारा जूता फिर देखता हूँ। कैसे फट गया यह, मेरी जनता के लेखक?
प्रश्न 1. लेखक क्या करने को तैयार नहीं है?
प्रश्न 2. लेखक का हौंसला कैसे पस्त हो जाता है?
प्रश्न 3. लेखक प्रेमचन्द को कैसा मानता है?
प्रश्न 4. कौन कफन के चन्दे की शराब पी गया था?
प्रश्न 5. पूस की रात में हल्कू के साथ क्या हुआ था?
प्रश्न 6. किसका लड़का मर गया था?
उत्तर-1. लेखक प्रेमचन्द की तरह फटे जूते पहनकर फोटो खिंचवाने को तैयार नहीं, क्योंकि वह पर्दा-पसन्द है। अंगुली नहीं दिखनी चाहिए, भले ही तलवा घिस जाए।
2. लेखक का हौंसला सभी कष्टों को झेल कर भी मुस्कुराते प्रेमचन्द के व्यंग्यात्मक मुस्कान से पस्त हो जाता है।
3. लेखक प्रेमचन्द को जनता का लेखक मानता है।
4. माधव कफन के चन्दे की शराब पी गया था।
5. पूस की रात में नीलगाय हल्कू का खेत चर गई थी।
6. सुजान भगत का लड़का मर गया था।
6. मेरे बचपन के दिन
( महादेवी वर्मा )
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. "मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।" इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि -
( क ) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
उत्तर- उस समय अर्थात् सन् 1900 के आसपास लड़कियों के प्रति लोगों का दृष्टिकोण अच्छा नहीं था। उस समय परिवार में लड़कियों की अपेक्षा लड़कों को अधिक महत्त्व दिया जाता था। प्रायः लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था। उन्हें बोझ समझा जाता था। उनके पैदा होते ही घर में मातम छा जाता था। अतः लेखिका के परिवार में दो सौ वर्ष तक कोई लड़की पैदा नहीं हुई थी।
( ख ) लड़कियों के जन्म के सम्बन्ध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
उत्तर- आज लड़कियों के जन्म के सम्बन्ध में कुछ परिस्थितियाँ बदली हैं। पढ़े-लिखे लोग लड़का-लड़की के अन्तर को धीरे-धीरे कम करते जा रहे हैं। लड़कियों के विकास के लिए कई सरकारी-गैर-सरकारी योजनाएँ चल रही हैं। बहुत-से जागरूक लोग लड़का-लड़की को समान
दृष्टि से देखते हैं और लड़कियों को अच्छी तरह से पालन-पोषण के साथ खूब पढ़ाते-लिखاتے भी हैं लेकिन संकीर्ण मानसिकता की आज भी कमी नहीं है। भ्रूण-हत्या इसका उदाहरण है। जन्म के बाद उनके साथ भेदभाव किया जाता है। परिणामस्वरूप आज लड़कियों की संख्या घटती जा रही है।
प्रश्न 2. लेखिका उर्दू-फारसी क्यों नहीं सीख पाई?
उत्तर- लेखिका महादेवी वर्मा की उर्दू-फारसी सीखने में रुचि नहीं थी। उनके मन में बैठ गया था कि ये भाषाएँ सीखना मेरे बस की बात नहीं है। परन्तु उसके बाबा चाहते थे कि वह उर्दू-फारसी सीखे, इसलिए एक मौलवी साहब को भी उन्होंने लगाया था, परन्तु लेखिका उसके आते ही चारपाई के नीचे छिप जाती थी। परिणामस्वरुप वह उर्दू-फारसी नहीं सीख पाई।
प्रश्न 3. लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर- लेखिका ने अपनी माँ की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है -
(1) लेखिका की माँ हिन्दी और संस्कृत की ज्ञाता थीं।
(2) वह धार्मिक विचारों वाली महिला थीं और पूजा-पाठ किया करती थीं।
(3) गीत लिखने के अलावा वह मीरां के पदों को गाया करती थीं।
(4) वह साम्प्रदायिक सद्भाव रखती थीं। नवाब साहब के परिवार से उनका पारिवारिक सम्बन्ध था।
(5) बच्चों को शिक्षित एवं संस्कार-युक्त करने के प्रति वह विशेष जागरूक थीं।
(6) गीता में उन्हें विशेष रुचि थी तथा उन्हें लिखने का भी शौक था।
प्रश्न 4. जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक सम्बन्धों को लेखिका ने आज के सन्दर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?
उत्तर- जवारा के नवाब के साथ लेखिका के पारिवारिक संबंध बिना किसी भेदभाव के घनिष्ठ थे। दोनों परिवारों के लोग सुख-दुःख, पर्व-त्योहार, जन्मदिन आदि सभी मौकों पर आपस में आत्मीयता रखकर सम्मलित होते थे। उनमें साम्प्रदायिक कट्टरता तो जरा भी नहीं थी। महादेवी से नवाब साहब का लड़का राखी बँधाता था और मुहर्रम पर उनके यहाँ से सभी बच्चों के कपड़े आते थे। इस प्रकार का स्नेह-भाव आज के सन्दर्भ में स्वप्न जैसा लगता है, क्योंकि आज साम्प्रदायिकता, वैमनस्यता एवं धार्मिक-कट्टरता ने लोगों में अलगाववाद को बढ़ावा दिया है।
रचना और अभिव्यक्ति -
प्रश्न 5. जेबुन्रिसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम
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करती थी। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?
उत्तर—जेबुन्निसा के स्थान पर यदि मैं लेखिका के लिए कुछ काम करता, तो मैं भी उनसे कुछ अपेक्षाएँ रखता। मैं उनसे बराबरी, प्रेम और आदर की अपेक्षा करता। महादेवी कविता लिखती थीं, तो उनसे कविता कैसी रची जाती है- इसकी जानकारी हासिल करता। साथ ही पढ़ाई के सम्बन्ध में उचित सहायता-सहयोग की अपेक्षा रखता।
प्रश्न 6. महादेवी वर्मा को काव्य-प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का पुरस्कार मिला हो और वह देश-हित में या किसी आपदा-निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगे?
उत्तर—मुझे भी यदि ऐसा पुरस्कार मिले, तो मैं उसे जरूरत पड़ने पर देश-हित या आपदा-निवारण में देने में संकोच नहीं करूँगा। मैं ऐसे कार्य से स्वयं को गौरवान्वित मानूँगा। देश या समाज के हित को व्यक्तिगत हित से श्रेष्ठ मानना वस्तुतः महान् कर्तव्य होता है। इससे सभी को खुशी होती है।
प्रश्न 7. लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है, उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर—महादेवी वर्मा जिस क्रास्थवेट गर्ल्स कालेज में पढ़ती थीं, उसमें देश के विभिन्न भागों की छात्राएँ पढ़ती थीं। उनके साथ छात्रावास में रहने वाली छात्राएँ अवधी, बुन्देली, बघेली आदि बोलियों का प्रयोग करती थीं। जेबुन्निसा मराठी शब्दों का प्रयोग करती थी, तो कुछ लड़कियाँ खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग करती थीं। इस प्रकार वहाँ पढ़ने वाली सभी छात्राएँ परस्पर व्यवहार में अपनी-अपनी मातृभाषा का प्रयोग कर सुन्दर वातावरण बना देती थीं।
प्रश्न 8. महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आयी होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
एक-दूसरे से स्नेहपूर्ण भाषा में वार्तालाप करते थे। इस प्रकार के वातावरण को देखकर हमें काफी प्रसन्नता होती थी और हमारे परिवार भी उनसे एकदम घुल-मिल कर रहने लगे थे।
प्रश्न 9. महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
उत्तर—15 अगस्त, 2019। हमारे विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया था। मुझे उसमें महाराणा प्रताप के शौर्य पर आधारित एक कविता पढ़नी थी। मैंने अपनी कक्षा में और अन्त:कक्ष प्रतियोगियों में अनेक बार कविता पाठ किया था, परन्तु सांस्कृतिक मंच से कविता पढ़ने का यह पहला ही अवसर था। कार्यक्रम प्रारम्भ होने पर मंच-संचालक ने ज्यों-ज्यों वक्ताओं के नामों की घोषणा की, मेरी बेचैनी बढ़ती गयी। मन धक-धक करने लगा था। मन में घबराहट होने लगी थी कि कहीं कविता भूल नहीं जाऊँ। हथेलियों पर पसीना आ गया तथा गला सूखने-सा लगा, हाथ-पाँवों में कम्पन महसूस होने लगा था। परन्तु मैं मन को सांत्वना भी देता रहा। उद्घोषक महोदय ने ज्यों ही मेरा नाम पुकारा, मैं स्वयं को संयमित करके माइक पर पहुँचा, फिर बड़ी सावधानी और धैर्य से कविता-पाठ करने लगा। मेरा कविता-पाठ समाप्त होते ही सभी ने तालियाँ बजाईं और आचार्यजी ने मुझे शाबाशी दी। इस तरह कविता-पाठ की सफलता से मुझे काफी प्रसन्नता हुई।
भाषा-अध्ययन -
प्रश्न 10. पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए—
विद्वान्, अनन्त, निरपराधी, दण्ड, शान्ति।
उत्तर—
| शब्द | विलोम शब्द |
|---|---|
| विद्वान् | मूर्ख |
| अनन्त | सीमित, संक्षिप्त |
| निरपराधी | अपराधी |
| दण्ड | पुरस्कार |
| शान्ति | अशान्ति |
प्रश्न 11. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए।
उत्तर—
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| निराहारी | निर् | + आहर | + ई |
| साम्प्रदायिकता | सम्+प्र | + दाय | + इक+ता |
| अप्रसन्नता | अ | + प्रसन्न | + ता |
अपनापन - अपना + पन
किनारीदार - किनारी + दार
स्वतन्त्रता स्व + तन्त्र + ता
प्रश्न 12. निम्नलिखित उपसर्गों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए-
उपसर्ग-अन्, अ, सत्, स्व, दुर्
प्रत्यय-दार, हार, वाला, अनीय।
उत्तर- उपसर्ग/प्रत्यय शब्द
$\begin{array}{lll}
\text{अन्} & - & \text{अनाचार, अनुपयोगी, अनन्त} \
\text{अ} & - & \text{अन्याय, असत्य, अनाथ} \
\text{सत्} & - & \text{सज्जन, सद्गति, सत्कार} \
\text{स्व} & - & \text{स्वार्थ, स्वतन्त्र, स्वराज्य, स्वाधीन} \
\text{दुर} & - & \text{दुर्गति, दुराचार, दुर्गन्ध} \
\text{दार} & - & \text{दुकानदार, किरायेदार, जमींदार} \
\text{हार} & - & \text{पालनहार, सिरजनहार, मनिहार} \
\text{वाला} & - & \text{गाड़ीवाला, दूधवाला, पानवाला} \
\text{अनीय} & - & \text{माननीय, पठनीय, पूजनीय}
\end{array}$
प्रश्न 13. पाठ में आये सामासिक पद छाँटकर विग्रह कीजिए।
उत्तर-पद विग्रह समास-नाम
$\begin{array}{lll}
\text{पूजा-पाठ} & \text{पूजा और पाठ} & \text{द्वन्द्व} \
\text{परमधाम} & \text{परम है जो धाम} & \text{कर्मधारय} \
\text{दुर्गापूजा} & \text{दुर्गा की पूजा} & \text{तत्पुरुष} \
\text{कुलदेवी} & \text{कुल की देवी} & \text{तत्पुरुष} \
\text{पंचतन्त्र} & \text{पाँच तन्त्रों का समूह} & \text{द्विगु} \
\text{रोना-धोना} & \text{रोना और धोना} & \text{द्वन्द्व} \
\text{कवि-सम्मेलन} & \text{कवियों का सम्मेलन} & \text{तत्पुरुष} \
\text{छात्रावास} & \text{छात्रों के लिए आवास} & \text{तत्पुरुष} \
\text{निराहार} & \text{बिना आहार के} & \text{अव्ययीभाव} \
\text{चाची-ताई} & \text{चाची और ताई} & \text{द्वन्द्व} \
\text{मनमोहन} & \text{मन का मोहन है जो,} & \
& \text{वह (कृष्ण)} & \text{बहुव्रीहि} \
\text{जन्मदिन} & \text{जन्म का दिन} & \text{तत्पुरुष} \
\text{कृपानिधान} & \text{कृपा के निधान} & \text{तत्पुरुष} \
\text{उर्दू-फारसी} & \text{उर्दू और फारसी} & \text{द्वन्द्व}
\end{array}$
पाठेतर सक्रियता -
बचपन पर केन्द्रित मैक्सिम गोर्की की रचना 'मेरा बचपन' पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।
'मातृभूमि : ए विलेज विदाउट विमेन' (2005) फिल्म में देखें।
मनीष झा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कन्या-भ्रूण हत्या की त्रासदी को अत्यन्त बारीकी से दिखाया गया है।
उत्तर- फिल्म स्वयं देखें।
कल्पना के आधार पर बताइए कि लड़कियों की संख्या कम होने पर भारतीय समाज का रूप कैसा होगा?
उत्तर- भारत में लड़कियों की संख्या कम होने पर समाज का रूप बिखर जायेगा। यदि लड़कियों का जन्म नहीं होगा, तो अनेक युवक बिना विवाह किये रह जायेंगे। समाचार में लड़कियों की खरीद-फरोख्त का दुराचार चल पड़ेगा। एक लड़की के लिए तीन चार लड़के वर-रूप में सामने आ जायेंगे। तब लड़की वालों से दहेज की माँग भी कोई नहीं करेगा, उल्टे लड़के वालों को लड़की के गरीब पिता की आर्थिक सहायता करनी पड़ेगी। लड़कियों की संख्या कम होने से परिवार एवं समाज में मधुर स्नेह-सम्बन्ध कम हो जायेंगे। भैया-दूज, राखी आदि त्यौहार की रौनक फीकी पड़ जायेगी। लड़की कोमलता, मधुरता, त्याग-भावना, स्नेह-भाव एवं सेवा-भावना आदि से मण्डित रहती है। लड़कियों के न होने या कम होने से परिवारों में इन मधुर भावनाओं का लोप हो जायेगा। इस तरह समाज की दशा एकदम नीरस, दयनीय तथा चिन्तनीय बन जायेगी।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. 'स्त्री दर्पण' क्या है?
उत्तर- 'स्त्री-दर्पण' एक पत्रिका का नाम है।
प्रश्न 2. नवाब साहिबा के अनुसार राखी के दिन राखी बँधवाने तक भाई को कैसे रहना चाहिए?
उत्तर- नवाब साहिबा के अनुसार राखी के दिन राखी बँधवाने तक भाई को निराहार रहना चाहिए।
प्रश्न 3. इस्लाम के मुहर्रम में किस रंग के कपड़े बनवाए जाते हैं?
उत्तर- इस्लाम के मुहर्रम में हरे रंग के कपड़े बनवाए जाते हैं।
प्रश्न 4. महादेवी के जन्म के समय समाज में लड़कियों की दशा कैसी थी?
उत्तर- महादेवी के जन्म के समय समाज में लड़कियों को बोझ माना जाता था। उनके पैदा होते ही उन्हें मार दिया जाता था।
प्रश्न 5. सुभद्राजी कहाँ की रहने वाली थी?
उत्तर- सुभद्राजी कोल्हापुर की रहने वाली थी।
प्रश्न 6. लेखिका की भेंट गाँधीजी से किस स्थान में हुई थी?
उत्तर- लेखिका की भेंट गाँधीजी से आनन्द भवन में हुई थी।
लघूत्तरात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. लेखिका के जन्म पर उसकी खातिर क्यों की गई? 'मेरे बचपन के दिन' पाठ के आधार पर लिखिए।
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उत्तर—लेखिका ने बताया कि उनके घर-परिवार में पिछले दो सौ वर्षों से कोई कन्या का जन्म नहीं हुआ था। उनके बाबा ने अपनी कुलदेवी दुर्गा की विशेष आराधना कर कन्या-जन्म की प्रार्थना की थी। इस तरह दुर्गा-पूजा के बाद कन्या रूप में लेखिका का जन्म हुआ था इसी कारण उसकी बड़ी आस्था के साथ खातिर की गई।
प्रश्न 2. लेखिका को कवि-सम्मेलनों में भाग लेने से क्या लाभ रहा?
उत्तर—उस समय कवि-सम्मेलन होते थे, वहाँ जाकर लेखिका कविता-पाठ करती थीं। उन सम्मेलनों में उन्हें पुरस्कार मिलता था। इससे उन्हें सौ से अधिक पदक मिले होंगे। एक बार उन्हें चाँदी का नक्काशीदार सुन्दर कटोरा मिला था। इस प्रकार लेखिका को प्रतिभा निखारने एवं शिक्षित समाज में प्रतिष्ठा बढ़ने का लाभ रहा।
प्रश्न 3. 'मेरे बचपन के दिन' संस्मरण के आधार पर बताइए कि जेबुन्िसा कौन थी? वह महादेवी की क्या मदद करती थी?
उत्तर—जेबुन्िसा एक मराठी लड़की थी, जो सुभद्राजी के जाने के बाद उनकी जगह पर छात्रावास में आयी थी। वह महादेवी की डेस्क साफ कर देती थी, किताबें ठीक से रख देती थी, जिससे लेखिका को कविता लिखने का भी समय मिल जाता था। वह मराठी शब्दों से मिश्रित हिन्दी बोलती थी। लेखिका भी उससे कुछ-कुछ मराठी सीखने लगी थी।
प्रश्न 4. 1917 में स्वतन्त्रता संग्राम का क्या स्वरूप था?
उत्तर—1917 में गाँधीजी के नेतृत्व में स्वतन्त्रता-संग्राम शुरू हो चुका था। इसकी पहल गाँधीजी ने सत्याग्रह से की। जगह-जगह हिन्दी के कवि-सम्मेलनों के द्वारा जन-जागरण का कार्य शुरू हो चुका था।
प्रश्न 5. बेगम साहिबा की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर—बेगम साहिबा मुसलमान होते हुए भी लेखिका महादेवीजी के परिवार से भावनात्मक रूप से जुड़ी थी। वह एक मिलनसार तथा खुले विचारों वाली महिला थी। उन्होंने महादेवी के परिवार के साथ ऐसे सम्बन्ध जोड़ लिए थे जैसे वह उन्हीं के परिवार का हिस्सा हो।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. हमारे समाज में महादेवी वर्मा के बचपन और वर्तमान स्थिति में क्या परिवर्तन आ गया है?
उत्तर—महादेवी वर्मा के बचपन में हिन्दुओं एवं मुसलमानों में आपसी भेदभाव कम ही था। उस समय दोनों सम्प्रदाय भाई-चारे का व्यवहार रखते थे। परन्तु अब राजनीतिक कुचक्र के कारण हिन्दू-मुसलमानों में वैसा प्यार और भाईचारा नहीं रह गया है। महादेवी वर्मा के जन्म-काल में लड़कियों को अनेक कष्ट सहने पड़ते थे, नारी-सम्मान की कमी थी, परन्तु अब वैसी स्थिति नहीं है। अब कन्याओं की सुख-सुविधा एवं शिक्षा आदि को लेकर काफी परिवर्तन आ गया है। फिर भी पिछड़े वर्गों में स्थिति कुछ चिन्तनीय बनी हुई है।
प्रश्न 2. लेखिका की शिक्षा की शुरूआत किस तरह हुई?
उत्तर—लेखिका के परिवार में हिन्दी का कोई वातावरण नहीं था। परिवार में हिन्दी की शुरूआत इनकी माँ से हुई। लेखिका को उनकी माँ ने ‘पंचतन्त्र’ पढ़ना सिखाया, कुछ संस्कृत भी पढ़ी। इनके बाबा इन्हें विदुषी बनाना चाहते थे, इसलिए वे चाहते थे कि बालिका महादेवी संस्कृत के साथ उर्दू-फारसी भी सीख ले। परन्तु लेखिका ने उर्दू-फारसी नहीं सीखी। फिर इन्हें मिशन स्कूल में प्रवेश दिलाया। वहाँ इनका मन नहीं लगा तो क्रास्थवेट गर्ल्स कालेज में भेजा गया, जहाँ उन्हें पाँचवीं में प्रवेश मिला।
प्रश्न 3. 'मेरे बचपन के दिन' संस्मरण के आधार पर बताइए कि महादेवी वर्मा के जीवन पर किन-किन लोगों का अधिक प्रभाव पड़ा?
उत्तर—महादेवी वर्मा ने संस्मरण में बताया कि उनके बाबा उन्हें विदुषी बनाना चाहते थे। फिर माँ ने ‘पंचतन्त्र’ पढ़ना सिखाया, भजन के पदों से प्रभावित किया। इस प्रकार महादेवी वर्मा के जीवन पर पहले बाबा और माँ का प्रभाव पड़ा। फिर सहपाठिन रूप में सुभद्रा कुमारी चौहान का प्रभाव पड़ा और वे कविता-रचना करने लगीं और कवि-सम्मेलनों में भाग लेने लगीं। गाँधीजी का महादेवी पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा, इससे वे देशसेवा के कार्य में लग गईं। जवारा की बेगम साहिबा का भी साम्प्रदायिक सद्भाव रखने का प्रभाव पड़ा।
प्रश्न 4. महादेवी वर्मा ने मिशन स्कूल में जाना क्यों बन्द किया?
उत्तर—महादेवी वर्मा की माँ ने उसे ‘पंचतन्त्र’ पढ़ाया था, गीता के श्लोक एवं मीराँ के पद सुनाये थे। जब माँ पूजा-पाठ करती तो लेखिका भी वहीं पर बैठ जाती थी। इस प्रकार घर का वातावरण बहुत अच्छा था। महादेवी वर्मा को जब मिशन स्कूल में दाखिला कराया, तो वहाँ का वातावरण एकदम भिन्न था। वहाँ प्रार्थना भी दूसरी थी। इस कारण उनका मन नहीं लगा और लेखिका ने उस स्कूल में जाना बन्द कर दिया।
निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. महादेवी वर्मा के लिखने-पढ़ने के संस्कार किस तरह विकसित हुए?
उत्तर—महादेवी का जन्म होने पर उनके बाबा ने उन्हें विदुषी बनाने का निश्चय व्यक्त किया। इसी कारण उन्हें बचपन में संस्कृत के साथ उर्दू-फारसी का भी ज्ञान
कराया। वे अपनी माँ से जो ब्रजभाषा में तुकबन्दी किया करती थी। महादेवी का अधिकतर समय अपनी माँ के साथ सबेरे प्रभाती और शाम को मीरा के पद सुनते हुए बीता था। यही सुनते-सुनते महादेवीजी ने ब्रज भाषा में तुकबन्दी करना शुरू किया था तथा माँ से गीता का पाठ सुनती थी। फिर क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज में जाने पर लेखिका में लिखने-पढ़ने के संस्कार विकसित होने लगे। वे वहाँ पर सुभद्राजी का अनुसरण कर कविताएँ लिखने का अभ्यास करने लगीं और उनके साथ कवि-सम्मेलनों में जाने लगीं। कॉलेज की सहपाठिनी लड़कियों के साथ रहने से उनकी प्रतिभा का विकास हुआ। इस तरह उनमें सुशिक्षा के संस्कार विकसित होते रहे।
प्रश्न 2. 'मेरे बचपन के दिन' पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— 'मेरे बचपन के दिन' पाठ में लेखिका वर्मा ने स्मृतियों के सहारे कई रोचक घटनाओं का वर्णन किया है। उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों से आने वाली पीढ़ी को अवगत कराया। लेखिका ने तत्कालीन समाज के साथ-साथ अपने परिवार में स्त्री की स्थिति का चित्रण किया है। उन्होंने अपने शिक्षित परिवार के साथ-साथ घर के धार्मिक और सद्भावपूर्ण वातावरण का भी चित्रण किया है। अतः इस पाठ का प्रमुख उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी के मन में मेलजोल की भावना को मजबूत करना है। साथ ही पाठ हमें साम्प्रदायिक सद्भाव से जुड़कर तथा राष्ट्रीय एकता को समृद्ध करने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार हम अपनी स्वतन्त्रता के प्रति सजग रहकर देश की सुरक्षा के लिए तन-मन-धन से अपने प्राण न्योछावर करने का संकल्प ले सकते हैं।
रचनाकार परिचय सम्बन्धी प्रश्न–
प्रश्न 1. महादेवी वर्मा के जीवन परिचय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर— हिन्दी साहित्य में आधुनिक मीरा के नाम से प्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका महादेवी वर्मा का जन्म वर्ष 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था। इन्होंने मैट्रिक से लेकर एम.ए. तक की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। वर्ष 1933 में प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य पद को सुशोभित किया। इन्हें 'यामा' काव्य ग्रन्थ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। महादेवी ने गद्य-पद्य दोनों ही विधाओं पर समान अधिकार से अपनी लेखनी चलाई। इनकी नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, अतीत के चलचित्र, स्मृति के रेखाएँ, शृंखला की कड़ियाँ, पथ के साथी आदि प्रमुख रचनाएँ हैं। इन्होंने अपनी रचनाओं में खड़ी बोली, संस्कृत, ब्रज आदि भाषाओं का प्रयोग किया है। 1987 में इनका निधन हो गया था।
अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न–
निर्देश– निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनसे सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
( 1 )
बचपन की स्मृतियों में एक विचित्र-सा आकर्षण होता है। कभी-कभी लगता है, जैसे सपने में सब देखा होगा। परिस्थितियाँ बहुत बदल जाती हैं। अपने परिवार में मैं कई पीढ़ियों के बाद उत्पन्न हुई। मेरे परिवार में प्रायः दो सौ वर्ष तक कोई लड़की थी ही नहीं। सुना है, उसके पहले लड़कियों को पैदा होते ही परमधाम भेज देते थे। फिर मेरे बाबा ने बहुत दुर्गा-पूजा की। हमारी कुलदेवी दुर्गा थीं। मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है। परिवार में बाबा फारसी और उर्दू जानते थे। पिता ने अंग्रेजी पढ़ी थी। हिन्दी का कोई वातावरण नहीं था।
प्रश्न 1. बचपन में लेखिका के परिवार का शैक्षिक वातावरण कैसा था?
प्रश्न 2. लेखिका के बाबा ने दुर्गा-पूजा क्यों की?
प्रश्न 3. पहले लड़कियों को पैदा होने पर क्या करते थे?
प्रश्न 4. "मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।"-से लेखिका का क्या आशय है?
प्रश्न 5. बचपन की स्मृतियों का क्या असर रहता है?
प्रश्न 6. लड़की पैदा हो, इसके लिए लेखिका के बाबा ने क्या किया?
उत्तर—1. बचपन में लेखिका के परिवार में उर्दू, फारसी, अंग्रेजी और संस्कृत के जानकार थे। परन्तु परिवार में हिन्दी का कोई वातावरण नहीं था।
2. परिवार में लड़की का जन्म हो, इस अभिलाषा से पूरित होकर लेखिका के बाबा ने दुर्गा-पूजा की।
3. पहले लड़कियों को पैदा होने पर बोझ समझ कर मार दिया जाता था।
4. लेखिका के बचपन के समय लड़कियों को पैदा होते ही परमधाम पहुँचा दिया जाता था, पर लेखिका को परिवार का प्यार मिला।
5. जब भी बचपन की याद आती है, मन प्रसन्नता से भर जाता है और ऐसा प्रतीत होता है कि बचपन क्यों चला गया।
6. अपने परिवार को शापमुक्त करने तथा घर में लड़की पैदा होने के लिए लेखिका के बाबा ने देवी दुर्गा की बहुत पूजा-अर्चना की।
( 2 )
उसी बीच आनन्द भवन में बापू आये। हम लोग तब अपने जेब-खर्च में से हमेशा एक-एक दो-दो देश