प्रश्न [1]. क्या शून्य एक परिमेय संख्या है? क्या इसे qp के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q=0 है?
हल - हाँ, शून्य एक परिमेय संख्या है तथा इसे qp के रूप में निम्नानुसार लिखा जा सकता है-
0=10 यहाँ p=0 तथा q=1 इस प्रश्न के अनुसार qp में q का मान शून्य को छोड़कर कोई भी संख्या हो सकती है जैसे 0=10,20,30,−10,−20,−30 आदि। अतः शून्य एक परिमेय संख्या है। उत्तर
प्रश्न [2].3 और 4 के बीच में छ: परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल - प्रश्नानुसार माना कि a=3 तथा b=4
अब 3 तथा 4 के मध्य की संख्या
=2a+b=23+4=27 अब 3 तथा 27 के बीच की परिमेय संख्या
=2a+b=23+27=226+7=413 27 तथा 4 के बीच की परिमेय संख्या
=227+4=227+8=415 अब 413 तथा 27 के बीच की परिमेय संख्या
=2413+27=2413+14=827
Number line showing points 3, 13/4, 27/8, 7/2, 15/4, 4
27 तथा 415 के बीच की परिमेय संख्या
=2a+b=227+415=2414+15=829 अब 829 तथा 415 के बीच की परिमेय संख्या
=2829+415=2829+30=1659 इस प्रकार 3 व 4 के बीच की छ: परिमेय संख्याएँ क्रमशः 413,827,27,829,1659 व 415 हैं। उत्तर
वैकल्पिक विधि -
हल - 3 व 4 के बीच की छ: परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की यह भी विधि है। चूँकि हम छ: संख्याएँ ज्ञात करना चाहते हैं इसलिए 6+1=7 को हर के रूप में लेकर 3 और 4 को परिमेय संख्याओं के रूप में लिखते हैं -
अर्थात् 3=1×73×7=721 तथा 4=1×74×7=728 तब 3 और 4 के बीच छ: परिमेय संख्याएँ क्रमशः 722,723,724,725,726 व 727 होंगी। उत्तर
प्रश्न [3].53 और 54 के बीच पाँच परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल - प्रश्नानुसार माना कि a=53 तथा b=54
किन्हीं भी दो संख्याओं a व b के बीच की परिमेय संख्या =2a+b अर्थात् 253+54=253+4=107 अब 53 व 107 के बीच की परिमेय संख्या
=253+107=2106+7=2013
Number line showing positions of 3/5, 13/20, 27/40, 7/10, 15/20, 31/40, 4/5
107 तथा 54 के बीच की परिमेय संख्या
=2107+54=2107+8=2015
2013 तथा 107 के बीच की परिमेय संख्या
=22013+107=22013+14=4027
2015 तथा 54 के बीच की परिमेय संख्या
=22015+54=22015+16=4031
इस प्रकार 53 तथा 54 के बीच की पाँच परिमेय संख्याएँ क्रमशः 2013,4027,107,4031 तथा 2015 हैं। उत्तर
वैकल्पिक विधि-
हल- 53 और 54 के बीच में पाँच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की यह भी विधि है। चूँकि हम पाँच संख्याएँ ज्ञात करना चाहते हैं इसलिए दोनों संख्याओं 53 व 54 में 10 का गुणा करने पर प्राप्त संख्या-
53×1010=5030 तथा 54×1010=5040 हैं। अब 53 व 54 के बीच में पाँच परिमेय संख्याएँ क्रमशः 5031,5032,5033,5034 तथा 5035 होंगी। उत्तर
4. नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य? कारण के साथ अपने उत्तर दीजिए-
(i) प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्ण संख्या होती है। (ii) प्रत्येक पूर्णांक एक पूर्ण संख्या होती है। (iii) प्रत्येक परिमेय संख्या एक पूर्ण संख्या होती है।
उत्तर- (i) सत्य है। प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्ण संख्या होती है। यह कथन सत्य है क्योंकि पूर्ण संख्याओं के संग्रह में सभी प्राकृत संख्याएँ भी होती हैं, केवल शून्य ही अतिरिक्त होता है।
Box containing 'प्राकृत संख्याएँ 1, 2, 3, .....' and '0'
पूर्ण संख्याएँ अतः यह भी कहा जा सकता है कि प्रत्येक पूर्ण संख्या प्राकृत संख्या नहीं होती लेकिन प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्ण संख्या होती है। (ii) असत्य है। दिया गया कथन कि प्रत्येक पूर्णांक एक पूर्ण संख्या होती है सत्य नहीं है क्योंकि पूर्ण संख्याओं के संग्रह में 0,1,2,3,... आदि संख्याएँ ही होती हैं ऋणात्मक संख्याएँ जैसे −3,−2,−1 आदि नहीं।
पूर्णांक संख्याएँ (iii) असत्य है। दिया गया कथन कि प्रत्येक परिमेय संख्या एक पूर्ण संख्या होती है, सत्य नहीं है क्योंकि पूर्ण संख्याएँ परिमेय संख्याओं का ही भाग होती हैं। जैसे 75 एक परिमेय संख्या है किन्तु पूर्ण संख्या नहीं है।
Number line showing integers and fractions with arrows pointing to 'पूर्ण संख्याएँ' and 'परिमेय संख्याएँ'
608
प्रश्नावली 1.2
1. नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य हैं। कारण के साथ अपने उत्तर दीजिए-
(i) प्रत्येक अपरिमेय संख्या एक वास्तविक संख्या होती है। (ii) संख्या रेखा का प्रत्येक बिन्दु m के रूप का होता है, जहाँ m एक प्राकृत संख्या है। (iii) प्रत्येक वास्तविक संख्या एक अपरिमेय संख्या होती है।
उत्तर-(i) दिया गया कथन सत्य है क्योंकि प्रत्येक वास्तविक संख्याओं का संग्रह परिमेय और अपरिमेय संख्याओं से मिलकर ही बनता है। अर्थात् अन्य शब्दों में कहा जाए तो परिमेय संख्या एवं अपरिमेय संख्या दोनों ही वास्तविक संख्याओं का भाग होती हैं।
(ii) दिया गया कथन असत्य है क्योंकि वास्तविक संख्याएँ ..... −4,−3,−2,−1 संख्या रेखा पर हैं लेकिन ये किसी भी प्राकृत संख्या के वर्गमूल के रूप में नहीं होती। (iii) दिया गया कथन असत्य है क्योंकि वास्तविक रेखाओं के संग्रह में परिमेय एवं अपरिमेय संख्याएँ दोनों होती हैं। अतः परिमेय संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ होते हुए भी अपरिमेय संख्याएँ नहीं हो सकतीं।
2. क्या सभी धनात्मक पूर्णांकों के वर्गमूल अपरिमेय होते हैं? यदि नहीं, तो एक ऐसी संख्या के वर्गमूल का उदाहरण दीजिए जो एक परिमेय संख्या है।
हल- नहीं। सभी धनात्मक पूर्णांकों के वर्गमूल अपरिमेय नहीं होते हैं। जैसे- 4,9,16,25,36,.... आदि धनात्मक पूर्णांक हैं लेकिन इनके वर्गमूल एक अपरिमेय संख्या न होकर परिमेय संख्या है, जैसे-
4=2= एक परिमेय संख्या 9=3= एक परिमेय संख्या 16=4= एक परिमेय संख्या 25=5= एक परिमेय संख्या 36=6= एक परिमेय संख्या आदि।
3. दिखाइए कि संख्या रेखा पर 5 को किस प्रकार निरूपित किया जा सकता है?
हल-∵5=(2)2+(1)2
यहाँ हम 5 की रचना एक समकोण त्रिभुज के कर्ण की लम्बाई के रूप में तथा आधार व लम्ब की लम्बाई के रूप में 2 व 1 एकक (इकाई) के रूप में करेंगे।
Right-angled triangle construction for root 5
माना कि OX एक संख्या रेखा है जिस पर O शून्य (0) को और A,2 एकक लम्बाई को निरूपित करता है। अब एक रेखा AB,OA पर खींची जो A बिन्दु पर लम्ब है अर्थात् AB⊥OA। अब AB=1 एकक लम्बाई पर B बिन्दु लिखेंगे।
Number line construction for root 5
अब OB2=OA2+AB2
=(2)2+(1)2=4+1=5 ∴OB=5
संख्या रेखा पर निरूपण करने के लिए एक परकार की सहायता से O को केन्द्र और OB को त्रिज्या मानकर हम संख्या रेखा पर एक बिन्दु P अंकित करेंगे जो कि संख्या रेखा पर 5 के संगत है। अतः P वह बिन्दु होगा जो अपरिमेय संख्या 5 का निर्धारण करेगा। यहाँ OP=OB=5=2.236 (लगभग)
4. कक्षा के लिए क्रियाकलाप (वर्गमूल सर्पिल की रचना)-
हल- कागज की एक बड़ी शीट लीजिए और नीचे दी गई विधि से वर्गमूल सर्पिल की रचना कीजिए। अर्थात् सबसे पहले एक O बिन्दु लीजिए और एकक लम्बाई का रेखाखण्ड OP1 खींचिए। एकक लम्बाई वाले OP1 पर लम्ब रेखाखण्ड P1P2 खींचिए अर्थात् OP1⊥P1P2।
इसी प्रकार OP2 पर लम्ब रेखाखण्ड P2P3 खींचिए व OP3 पर लम्ब रेखाखण्ड P3P4 खींचिए। इस प्रक्रिया को जारी रखते हुए OPn−1 पर एकक लम्बाई वाला लम्ब रेखाखण्ड खींचकर आप रेखाखण्ड Pn−1Pn प्राप्त कर सकते हो। इस प्रकार आप बिन्दु O,P1,P2,
Square root spiral construction
आकृति : वर्गमूल सर्पिल की रचना
P3,…,Pn… प्राप्त कर लेंगे और उन्हें मिलाकर 2,3,4,… को प्रदर्शित करने वाला एक सुन्दर सर्पिल प्राप्त कर सकते हो।
प्रश्नावली 1.3
1. निम्नलिखित भिन्नों को दशमलव रूप में लिखिए और बताइए कि प्रत्येक का दशमलव प्रसार किस प्रकार का है-
2. आप जानते हैं कि 71=0.142857 है। वास्तव में लम्बा भाग दिए बिना क्या आप यह बता सकते हैं कि 72,73,74,75,76 के दशमलव प्रसार क्या हैं? यदि हाँ, तो कैसे?
उत्तर- हाँ। प्रश्न में दी गई सभी संख्याओं क्रमशः 71,72,73,74,75,76 का दशमलव प्रसार आवर्ती दशमलव है जो कि 1,4,2,8,5,7 का ही प्रसार है। जैसे-
Division calculation of 1/7
अर्थात् 71=0.142857 72 का मान ज्ञात करने के लिए यह जानना आवश्यक होगा कि शेषफल 2 कब आता है तथा उससे सम्बन्धित भागफल, जो कि इस प्रश्न में 2 है, तब वहाँ से आरम्भ होने वाला नया भागफल लिखना होगा। अर्थात् 72=0.285714 इसी प्रकार 73=0.428571,74=0.571428,75=0.714285,76=0.857142
3. निम्नलिखित को qp के रूप में व्यक्त कीजिए, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q=0 है- (i) 0.6 (ii) 0.47 (iii) 0.001
हल-(i) क्योंकि हम यह नहीं जानते हैं कि 0.6 क्या है, अतः माना x=0.6
या x=0.6666..... .....(i) दोनों पक्षों में 10 का गुणा करने पर 10x=10×(0.6666...)=6.6666.... ⇒10x=6.6666.... .....(ii) समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर 10x−x=(6.6666.....)−(0.6666) या 9x=6 ⇒x=96=32 अर्थात् x=32 अतः 0.6=32उत्तर
(ii) क्योंकि हम यह नहीं जानते हैं कि 0.47 क्या है, अतः माना कि x=0.47 या x=0.4777..... .....(i) दोनों पक्षों में 10 से गुणा करने पर 10x=10×(0.4777.....)=4.777..... ⇒10x=4.777..... .....(ii) समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर 10x−x=(4.777.....)−(0.4777.....) ⇒9x=4.3 या x=94.3=9043
अतः 0.47=9043 उत्तर
(iii) क्योंकि हम यह नहीं जानते हैं कि 0.001 क्या है, अतः माना कि x=0.001 ∴x=0.001001001..... .....(i) दोनों पक्षों में 1000 से गुणा करने पर 1000x=1000×(0.001001001.....) 1000x=1.001001..... .....(ii) समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर 1000x−x=(1.001001...)−(0.001001...) ⇒999x=1 ⇒x=9991 अतः 0.001=9991 उत्तर
4.0.99999..... को qp के रूप में व्यक्त कीजिए। क्या आप अपने उत्तर से आश्चर्यचकित हैं? अपने अध्यापक और कक्षा के सहयोगियों के साथ उत्तर की सार्थकता पर चर्चा कीजिए।
हल- माना कि x=0.9999..... .....(i)
दोनों पक्षों में 10 से गुणा करने पर 10x=10×(0.99999.....) 10x=9.9999..... .....(ii) समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर 10x−x=(9.9999....)−(0.9999....) ⇒9x=9 ⇒x=99=1 अतः 0.99999.....=1 हाँ! हम उत्तर से आश्चर्यचकित हैं। परन्तु उत्तर सार्थक है क्योंकि प्रश्नानुसार हम देखते हैं कि 0.9999..... सतत है अर्थात् दशमलव के बाद 9 का अंक लगातार आएगा। अर्थात् 1 और 0.9999 के बीच कोई रिक्तता या शून्यता नहीं है। अतः वे समान हैं।
5.171 के दशमलव प्रसार में अंकों की पुनरावृत्ति खण्ड में अंकों की अधिकतम संख्या क्या हो सकती है? अपने उत्तर की जाँच करने के लिए विभाजन क्रिया कीजिए।
हल-
Long division table for 1/17
यहाँ शेष 1 रहने पर चरण B अर्थात् आगे का हल प्रथम चरण A के अनुसार है।
∴171=0.0588235294117647.....
=0.0588235294117647 ∴171 के भागफल में अंकों की अधिकतम संख्या 16 है। यह भागफल या दी गई संख्या 171 अनवसानी आवर्ती दशमलव है।
प्रश्न 6.qp (q=0) के रूप की परिमेय संख्याओं के अनेक उदाहरण लीजिए, जहाँ p और q पूर्णांक हैं, जिनका 1 के अतिरिक्त अन्य कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है और जिसका सांत दशमलव निरूपण (प्रसार) है। क्या आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि q को कौनसा गुण अवश्य सन्तुष्ट करना चाहिए?
हल-qp (q=0) के रूप की परिमेय संख्याएँ क्रमशः 21,87,250639,167,2511… आदि हो सकती हैं जिनका सांत दशमलव निरूपण होता है। सांत दशमलव की परिभाषा के अनुसार जब किसी परिमेय संख्या का हर 2 या 5 या दोनों की घात में हो तो ऐसी परिमेय संख्याओं से सांत दशमलव प्राप्त होता है। अन्य शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि परिमेय संख्या qp (q=0) को सांत दशमलव रूप में निरूपित करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक q ऐसा लिया जाए कि q के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 के घात या 5 के घात या दोनों ही हों।
प्रश्न 7. ऐसी तीन संख्याएँ लिखिए जिनके दशमलव प्रसार अनवसानी अनावर्ती हों।
हल- हम जानते हैं कि एक अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार अनवसानी अनावर्ती होता है या इसका विलोम अर्थात् वह संख्या जिसका दशमलव प्रसार अनवसानी अनावर्ती होता है, अपरिमेय होती है।
अतः: 2=1.41421356237… 3=1.73205080756… 51=0.44721359549… 10=3.16227766016… इन उदाहरणों के अतिरिक्त छात्र स्वयं भी कुछ अन्य अपरिमेय या ऐसी संख्याएँ लिख सकते हैं जिनके दशमलव प्रसार अनवसानी हों। जैसे- 0.01001000100001… 0.202002000200002… 0.003000300003… आदि।
प्रश्न 8. परिमेय संख्याओं 75 और 119 के बीच की तीन अलग-अलग अपरिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल- परिमेय संख्या 75 का दशमलव निरूपण निम्नानुसार है-
Division of 5 by 7
इसके आगे हल करने की प्रक्रिया पूर्वानुसार है।
∴75=0.714285
अब दूसरी संख्या 119 का दशमलव निरूपण निम्नानुसार है-
Division of 9 by 11
इसको आगे हल करने की प्रक्रिया चरण E के अनुसार है।
∴119=0.81
अब 75=0.714285 तथा 119=0.81 के मध्य अनेक अपरिमेय संख्याओं को ज्ञात किया जा सकता है। उनमें से कोई तीन 0.7507500075000075...., 0.767076700767000767.... तथा 0.808008000800008.... भी हो सकती हैं।
9. बताइए कि निम्नलिखित संख्याओं में कौन-कौन संख्याएँ परिमेय और कौन-कौन संख्याएँ अपरिमेय हैं- (i) 23 (ii) 225 (iii) 0.3796 (iv) 7.478478.... (v) 1.101001000100001....
हल- अपरिमेय संख्याएँ-(i) व (v) हैं।
(i) 23 अभाज्य संख्या होने के कारण अपरिमेय है क्योंकि अभाज्य संख्या एक पूर्ण वर्ग संख्या नहीं होती है। (v) 1.101001000100001.... यह संख्या अपरिमेय है क्योंकि दशमलव प्रसार अनवसानी अनावर्ती है।
परिमेय संख्याएँ-(ii), (iii) व (iv) हैं। (ii) 225 का वर्गमूल 15×15=15 होता है जो कि एक परिमेय संख्या है। (iii) 0.3796 का दशमलव प्रसार सांत दशमलव होने के कारण परिमेय संख्या है। (iv) 7.478478.... का दशमलव प्रसार अनवसानी आवर्ती होने के कारण एक परिमेय संख्या है।
प्रश्नावली 1.4
1. बताइए नीचे दी गई संख्याओं में कौन-कौन परिमेय हैं और कौन-कौन अपरिमेय हैं- (i) 2−5 (ii) (3+23)−23 (iii) 7727 (iv) 21 (v) 2π
उत्तर-(i)2−5
हम जानते हैं कि एक परिमेय तथा अपरिमेय संख्या का अन्तर सदा ही अपरिमेय संख्या होता है। दी गई संख्या में 2 एक परिमेय संख्या है जिसमें से 5 अपरिमेय संख्या को घटाना है। घटाने पर निश्चित ही एक अपरिमेय संख्या प्राप्त होगी अर्थात् 2−5= अपरिमेय संख्या।
(ii)(3+23)−23
=3+23−23=3= एक परिमेय संख्या अर्थात् दी गई संख्या एक परिमेय संख्या है।
(iii)7727=72= एक परिमेय संख्या अर्थात् दी गई संख्या एक परिमेय संख्या है।
(iv)21 दी गई संख्या 21 में 1 परिमेय संख्या है तथा 2 एक अपरिमेय संख्या है। हम जानते हैं कि शून्येतर परिमेय संख्या तथा एक अपरिमेय संख्या का भागफल सदैव एक अपरिमेय संख्या होता है। अतः दी गई संख्या एक अपरिमेय संख्या है।
(v)2π, इस दी गई संख्या में 2 एक परिमेय संख्या है तथा π एक अपरिमेय संख्या है। हम जानते हैं कि एक शून्येतर परिमेय संख्या तथा एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल सदैव ही एक अपरिमेय संख्या होता है। अतः दी गई संख्या एक अपरिमेय संख्या है।
2. निम्नलिखित व्यंजकों में से प्रत्येक व्यंजक को सरल कीजिए- (i) (3+3)(2+2) (ii) (3+3)(3−3) (iii) (5+2)2 (iv) (5−2)(5+2)
हल-(i)(3+3)(2+2)
=3×2+32+23+3×2 =6+32+23+6उत्तर
(ii)(3+3)(3−3)
=(3)2−(3)2 [∵(a+b)(a−b)=a2−b2]
=9−3=6उत्तर
(iii)(5+2)2
=(5)2+(2)2+25×2 [सूत्र (a+b)2=a2+b2+2ab के अनुसार]
=5+2+210 =7+210उत्तर
(iv)(5−2)(5+2)
=(5)2−(2)2 [सूत्र (a−b)(a+b)=a2−b2 के अनुसार]
=5−2=3. उत्तर
3. आपको याद होगा कि π को एक वृत्त की परिधि (मान लीजिए c) और उसके व्यास (मान लीजिए d) के अनुपात से परिभाषित किया जाता है, अर्थात् π=dc है। यह इस तथ्य का अंतर्विरोध करता हुआ प्रतीत होता है कि π अपरिमेय है। इस अंतर्विरोध का निराकरण आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर- इसका कोई अंतर्विरोध नहीं है क्योंकि एक वृत्त की परिधि (c) तथा उसका व्यास (d) अपरिमेय होते हैं। इसका कारण यह है कि जब कभी भी एक स्केल से या किसी अन्य युक्ति से लम्बाई मापते हैं, तब केवल एक निकटतम परिमेय मान प्राप्त होता है। इसी कारण आप यह अनुभव नहीं कर पाते हैं कि c या d अपरिमेय हैं। यहाँ
π=dc अतः π एक अपरिमेय संख्या है।
4. संख्या रेखा पर 9.3 को निरूपित कीजिए।
उत्तर-9.3 को संख्या रेखा पर प्रदर्शित करने के लिए सर्वप्रथम एक दी हुई रेखा पर एक स्थिर बिन्दु A से 9.3 इकाई की दूरी पर एक अन्य बिन्दु B अंकित किया अर्थात् AB=9.3 इकाई। बिन्दु B से 1 इकाई की दूरी पर एक और बिन्दु C अंकित कर दिया। अब रेखा AC का समद्विभाग कर बिन्दु O ज्ञात कर लिया। अब O को केन्द्र मानकर OC के बराबर त्रिज्या लेकर एक अर्द्धवृत्त की रचना की। अब AC पर एक लम्ब रेखा खींचिए जो B से होकर जाए तथा अर्द्धवृत्त को बिन्दु D पर काटे। इस प्रकार प्राप्त BD=9.3 है।
केन्द्र B से BD त्रिज्या का चाप खींचा जो BX को E पर काटे। इस प्रकार प्राप्त BE संख्या रेखा पर 9.3 को निरूपित करता है।
Geometric construction of square root of 9.3 on a number line
गणितीय परिकलन- ∵OA=OC=OD (अर्द्धवृत्त की त्रिज्या) OA=OC=OD=21AC
=21[AB+BC] [∵AC=AB+BC]
=21[9.3+1.0] =21×10.3=5.15
अब पुनः समकोण त्रिभुज OBD से पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार, OB2+BD2=OD2 ∴BD2=OD2−OB2
दी गई संख्या में 3−1 का अंश व हर में गुणा करने पर
=3+13−1×3−13−1 =(3)2−1(3−1)2=23+1−23
=24−23=(2−3) =2+(−1)3 ∴a+b3=2+(−1)3 दोनों पक्षों की तुलना करने पर a=2,b=(−1)उत्तर
2.2.37 को qp के रूप में व्यक्त कीजिए जहाँ p तथा q पूर्णांक हैं तथा q=0 है।
हल- माना कि x=2.37
x=2.373737...... .....(i) दोनों पक्षों में 100 का गुणा करने पर 100x=100×(2.373737.....) 100x=237.373737 .....(ii) समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर 99x=235 x=99235उत्तर
3.2 को संख्या रेखा पर प्रदर्शित कीजिए।
हल-2 का संख्या रेखा पर प्रदर्शन-
माना कि 1 इकाई =1 सेमी. संख्या पर AX पर 1 सेमी. की दूरी पर A (शून्य) से 1,2,3,..... भाग अंकित किए गए। इस प्रकार AB=1 सेमी., अब AB के बिन्दु B पर परकार की सहायता से 90∘ का कोण बनाइए। बिन्दु B से 1 सेमी. का लम्बा चाप काटिए जो समकोण की भुजा को बिन्दु C पर काटता है। A व C को मिला दिया। यहाँ, AC2=AB2+BC2 (पाइथागोरस प्रमेय से)
Geometry construction of square root of 2 on a number line
⇒AC=AB2+BC2=12+12
=1+1=2 अर्थात् AC की लम्बाई =2 सेमी. होगी। पुन: AC लम्बाई को परकार में भरकर बिन्दु A से एक चाप खींचिए जो AX संख्या रेखा को बिन्दु D पर काटता है। इस प्रकार संख्या रेखा पर AD=2 सेमी. =2 इकाई होगी।
4. नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य? कारण के साथ अपने उत्तर दो।
(i) प्रत्येक पूर्ण संख्या एक प्राकृत संख्या होती है। (ii) प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या होता है। (iii) प्रत्येक परिमेय संख्या एक पूर्णांक होती है।
हल- (i) असत्य है, क्योंकि शून्य एक पूर्ण संख्या है परन्तु प्राकृत संख्या नहीं है।
(ii) सत्य है, क्योंकि प्रत्येक पूर्णांक m को 1m के रूप में लिखा जा सकता है व इसलिए यह एक परिमेय संख्या है। (iii) असत्य है, जैसे 53 एक पूर्णांक नहीं है।
5.71 और 72 के बीच की एक अपरिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।
हल- हम हल कर सकते हैं कि
71=0.142857 तथा यह भी सरलता से ज्ञात किया जा सकता है कि 72=0.285714 71 और 72 के बीच की एक अपरिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए हम एक ऐसी संख्या ज्ञात करते हैं जो इन दोनों के बीच स्थित अनवसानी अनावर्ती होती है।
इस प्रकार की संख्याएँ 71 और 72 के बीच अपरिमित रूप से ज्ञात कर सकते हैं। इस प्रकार की संख्या का एक उदाहरण 0.150150015000150000..... है।
6. निम्नलिखित व्यंजकों को सरल कीजिए- (i) (5+7)(2+5) (ii) (5+5)(5−5) (iii) (3+7)2 (iv) (11−7)(11+7)
हल-
(i) (5+7)(2+5)
=10+55+27+35
=(36)−25=(62)−25 [∵36=6×6=62]
=62×−25=6−5 [सूत्र (xm)n=xm×n के अनुसार]
=651 [सूत्र x−m=xm1 के अनुसार] =6×6×6×6×61
=77761 उत्तर
निबन्धात्मक प्रश्न-
3 को संख्या रेखा पर प्रदर्शित कीजिए।
हल-3 का संख्या रेखा पर प्रदर्शन-
संख्या रेखा AX पर पूर्व में ज्ञात की गई लम्बाई AD =
(ii) (5+5)(5−5)
=(52)−(5)2=25−5=20
(iii) (3+7)2
=(3)2+237+(7)2 =3+221+7=10+221
(iv) (11−7)(11+7)
=(11)2−(7)2=11−7=4
कारण सहित बताइए कि क्या 8×6 एक अपरिमेय संख्या है?
हल - 8×6=8×6
[सूत्र na×nb=nab के अनुसार]
=2×2×2×2×3 =(2)4×3=22×3
संख्या रेखा AX पर पूर्व में ज्ञात की गई लम्बाई AD = 2 काटी। पुनः: बिन्दु D पर परकार की सहायता से 90∘ का कोण बनाइए। बिन्दु D से 1 सेमी. का लम्बा चाप काटिए जो समकोण की भुजा को बिन्दु E पर काटता है। बिन्दु A व E को मिलाइए। यहाँ, AE=AD2+DE2=(2)2+12