📚 कक्षा 9 गणित (Mathematics)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल
पाठ 8: चतुर्भुज
Quadrilaterals
📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27•📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक•🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 गणित (RBSE)
📘 गणित
सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल
Quadrilaterals
चतुर्भुज
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्नावली 8.1
प्रश्न 1. यदि एक समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, तो दर्शाइए कि वह एक आयत है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD जिसमें विकर्ण AC और BD हैं
हल- दिया है - प्रश्नानुसार ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसमें विकर्ण AC= विकर्ण BD।
सिद्ध करना है - ABCD एक आयत है। उपपत्ति - विकर्णों के आधार पर △ABC और △ABD में AB=AB (उभयनिष्ठ भुजाएँ) AC=BD (दिया है) तथा BC=AD (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) ∴△ABC≅△ABD (सर्वांगसमता के नियम SSS के अनुसार) ⇒∠DAB=∠CBA .....(i) (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) परन्तु ∠DAB+∠CBA=180∘ .....(ii) [∵AD∥BC और AB एक तिर्यक रेखा इन्हें काटती है। तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोणों का योगफल 180∘ होता है।] समीकरण (i) व (ii) से ∠DAB=∠CBA= एक समकोण अतः ABCD एक आयत है क्योंकि यदि समान्तर चतुर्भुज का एक कोण 90∘ हो, तो वह आयत होता है। (इति सिद्धम्)
प्रश्न 2. दर्शाइए कि एक वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
वर्ग ABCD जिसके विकर्ण O पर प्रतिच्छेद करते हैं
हल- दिया है - एक वर्ग ABCD है जिसमें इसके विकर्ण क्रमशः AC तथा BD हैं।
सिद्ध करना है - (i) AC=BD तथा (ii) AC⊥BD
उपपत्ति- (i) विकर्णों के कारण वर्ग में बने △ABC और △BAD में AB=AB (उभयनिष्ठ भुजा) ∠ABC=∠BAD (प्रत्येक 90∘) तथा BC=AD (वर्ग की भुजाएँ) अतः △ABC≅△BAD (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) अर्थात् AC=BD (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) (इति सिद्धम्)
(ii) पुनः △AOB और △AOD में AO=AO (उभयनिष्ठ भुजाएँ) AB=AD (वर्ग की भुजाएँ) OB=OD (क्योंकि वर्ग के विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं) अतः △AOB≅△AOD (सर्वांगसमता के नियम SSS के अनुसार) ∴∠AOB=∠AOD (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) लेकिन ∠AOB+∠AOD=180∘ (रैखिक युग्म अभिगृहीत से) ∴∠AOB=∠AOD=90∘ अर्थात् AO⊥BD या AC⊥BD (इति सिद्धम्)
प्रश्न 3. समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण AC कोण A को समद्विभाजित करता है। (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि (i) यह ∠C को भी समद्विभाजित करता है। (ii) ABCD एक समचतुर्भुज है।
समान्तर चतुर्भुज ABCD जिसमें विकर्ण AC कोण A और C को विभाजित करता है
हल- (i) दिया है - एक समान्तर चतुर्भुज ABCD है जिसमें विकर्ण AC, ∠A को समद्विभाजित करता है।
सिद्ध करना है - दिया गया विकर्ण AC, ∠C को भी समद्विभाजित करता है।
उपपत्ति-चित्रानुसार AB∥DC तथा AC एक तिर्यक रेखा इन्हें प्रतिच्छेदित करती है। ∴∠1=∠3 (एकान्तर कोण) .....(i) ∠2=∠4 (एकान्तर कोण) .....(ii) परन्तु ∠1=∠2 .....(iii) [क्योंकि AC, ∠A को समद्विभाजित करती है।] अतः ∠3=∠4 अतः AC, ∠C को भी समद्विभाजित करती है। (ii) सिद्ध करना है- ABCD एक समचतुर्भुज है। भाग (i) से- समीकरण (i), (ii) और (iii) से ∠1=∠2=∠3=∠4 अब △ABC में, ∠1=∠4 .....(iv) ⇒AB=BC [त्रिभुज में समान कोणों के सामने की भुजायें समान होती हैं।] इसी प्रकार △ADC में, AD=DC .....(iv) और ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। ∴AB=CDAD=BC} .....(vi) समीकरण (iv), (v) व (vi) से AB=BC=CD=DA अतः ABCD एक समचतुर्भुज है। (इतिसिद्धम्)
4. ABCD एक आयत है जिसमें विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि (i) ABCD एक वर्ग है (ii) विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है।
साथ ही प्रत्येक कोण अर्थात् ∠A=∠B=∠C=∠D=90∘ (i) बने त्रिभुज ABC और △ADC में ∠1=∠2 तथा ∠3=∠4 क्योंकि विकर्ण AC दोनों कोणों को समद्विभाजित करता है।
तथा AC=AC (उभयनिष्ठ भुजायें) ∴△ABC≅△ADC (सर्वांगसमता के नियम ASA के अनुसार) अतः AB=AD .....(ii) समीकरण (i) तथा (ii) से AB=BC=AD=DC अर्थात् आयत की सभी भुजायें समान हैं। अतः यह एक वर्ग है।
(ii) संलग्न चित्रानुसार
Rectangle ABCD with diagonal BD
△ABD तथा △BDC में AB=BC [क्योंकि आयत ABCD एक वर्ग है।] AD=DC [क्योंकि आयत ABCD एक वर्ग है।] तथा BD=BD (उभयनिष्ठ भुजायें) अतः △ABD≅△BDC (सर्वांगसमता के नियम SSS के अनुसार) ∴∠ABD=∠CBD .....(iii) (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं।) और ∠ADB=∠CDB .....(iv) (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं।) अतः समीकरण (iii) व (iv) के आधार पर यह कहा जा सकता है कि विकर्ण BD दोनों कोणों B तथा D को समद्विभाजित करता है।
5. समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD पर दो बिन्दु P और Q इस प्रकार स्थित हैं कि DP=BQ है (देखिए आकृति)।
Parallelogram ABCD with diagonal BD and points P, Q
दर्शाइए कि (i) △APD≅△CQB (ii) AP=CQ
(iii) ΔAQB≅ΔCPD (iv) AQ=CP (v) APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
हल-(i) प्रश्न में दिए चित्र के ΔAPD तथा ΔCQB से
DP=BQ (दिया है) ∠ADP=∠QBC क्योंकि समान्तर चतुर्भुज ABCD में AD∥BC तथा BD एक तिर्यक रेखा उन्हें काटती है। ∴∠ADB=∠DBC (एकान्तर कोण) ∴∠ADP=∠QBC AD=CB क्योंकि समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। ∴ΔAPD≅ΔCQB (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) (ii) ∴AP=CQ (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) (iii) अब पुनः ΔAQB तथा ΔCPD से BQ=DP (दिया है) ∠ABQ=∠PDC क्योंकि समान्तर चतुर्भुज ABCD में AB∥CD तथा BD एक तिर्यक रेखा इनको काटती है। ∴∠ABD=∠BDC (एकान्तर कोण) ∴∠ABQ=∠PDC AB=CD क्योंकि समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं। ∴ΔAQB≅ΔCPD (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) (iv) ∴AQ=CP (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं।) (v) अब चतुर्भुज APCQ से AP=CQ (भाग ii से) तथा AQ=CP (भाग iv से) अर्थात् चतुर्भुज APCQ की सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं। हम जानते हैं कि एक समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं। अतः APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है तथा AP और CQ शीर्षों A और C से विकर्ण BD पर क्रमशः लम्ब हैं (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि (i) ΔAPB≅ΔCQD (ii) AP=CQ
Geometry figure showing parallelogram ABCD with diagonal BD and perpendiculars AP and CQ
हल-प्रश्नानुसार ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसमें AB∥DC तथा BD एक तिर्यक रेखा है।
∴∠1=∠2 (एकान्तर कोण) .....(i) (i) अब आकृति में बनने वाले ΔAPB और ΔCQD में ∠APB=∠CQD=90∘ (दिया है) ∠1=∠2 [समीकरण (i) के अनुसार] तथा AB=CD [क्योंकि समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।] ∴ΔAPB≅ΔCQD (सर्वांगसमता के नियम AAS के अनुसार) (ii) ∴AP=CQ (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं)
ABCD एक समलम्ब है, जिसमें AB∥DC और AD=BC है (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि (i) ∠A=∠B (ii) ∠C=∠D (iii) ΔABC≅ΔBAD (iv) विकर्ण AC=विकर्ण BD है। [संकेत-AB को बढ़ाइए और C से होकर DA के समान्तर एक रेखा खींचिए जो बढ़ी हुई भुजा AB को E पर प्रतिच्छेद करे।]
Trapezium ABCD with extension to E
हल-(i) प्रश्नानुसार दी गई आकृति में AB रेखा को आगे बढ़ाया तथा रेखा CE∥AD खींच दी। अब क्योंकि AD∥CE और तिर्यक रेखा AE उनको क्रमशः A और E बिन्दुओं पर काटती है।
∴∠A+∠E=180∘ या ∠A=180∘−∠E .....(1) क्योंकि AB∥CD तथा AD∥CE है अतः AECD एक समान्तर चतुर्भुज है। अर्थात् AD=CE या BC=CE [क्योंकि AD=BC (दिया है)]
अतः △BCE में BC=CE ⇒∠CBE=∠CEB क्योंकि बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण भी बराबर होते हैं। ∴180∘−∠B=∠E [∵∠CBE+∠ABC=180∘ (रैखिक युग्म अभिगृहीत से)] ∴∠CBE=180∘−∠ABC ⇒180∘−∠E=∠B…(2) समीकरण (1) व (2) से ∠A=∠B (ii) ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज है जिसमें AB∥DC ∴∠A+∠D=180∘…(3) तथा ∠B+∠C=180∘…(4) क्योंकि दो समान्तर रेखाओं के लिए तिर्यक रेखा के एक ही ओर के दो अन्तःकोणों का योगफल 180∘ होता है। समीकरण (3) व (4) से ∠A+∠D=∠B+∠C परन्तु ∠A=∠B (सिद्ध कर चुके हैं) ∴∠A+∠D=∠A+∠C ⇒∠D=∠C या ∠C=∠D (इति सिद्धम्) (iii) दिए गए △ABC और △BAD में AB=AB (उभयनिष्ठ भुजाएँ) ∠A=∠B (सिद्ध कर चुके हैं) तथा BC=AD (दिया है) ∴△ABC≅△BAD (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) (iv) अतः AC=BD (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) अतः यह कहा जा सकता है कि समलम्ब चतुर्भुज ABCD में विकर्ण AC= विकर्ण BD।
Geometry figure showing a quadrilateral ABCD with points P, Q, R, S on sides AB, BC, CD, DA respectively and diagonals AC and BD
प्रश्नावली 8.2
ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें P, Q, R और S क्रमशः भुजाओं AB, BC, CD और DA के मध्य-बिन्दु हैं (देखिए आकृति)। AC उसका एक विकर्ण है। दर्शाइए कि (i) SR∥AC और SR=21AC है। (ii) PQ=SR है। (iii) PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
हल-प्रश्नानुसार दी गई आकृति के △ABC में, बिन्दु P, AB का मध्य बिन्दु है और Q, BC का मध्य बिन्दु है।
∴PQ∥AC और PQ=21AC (मध्य बिन्दु प्रमेय से) (i) △ACD में, R बिन्दु CD का तथा S बिन्दु AD का मध्य-बिन्दु है। तो SR∥AC और SR=21AC (मध्य बिन्दु प्रमेय के अनुसार) (ii) क्योंकि PQ=21AC तथा SR=21AC ∴PQ=21AC=SR या PQ=SR (iii) हमने यह भी सिद्ध किया है कि PQ∥AC तथा SR∥AC अर्थात् PQ∥SR क्योंकि दो रेखाएँ जो दी गई रेखा के समान्तर होती हैं, परस्पर समान्तर होती हैं। अब PQ=SR तथा PQ∥SR हम जानते हैं कि यदि चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर और समान्तर होता है तो यह एक समान्तर चतुर्भुज होता है। ∴PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
ABCD एक समचतुर्भुज है और P, Q, R और S क्रमशः भुजाओं AB, BC, CD और DA के मध्य-बिन्दु हैं। दर्शाइए कि चतुर्भुज PQRS एक आयत है।
हल-दिया है-ABCD एक समचतुर्भुज है जिसकी भुजाओं AB, BC, CD तथा DA के मध्य-बिन्दु क्रमशः P, Q, R और S हैं। PQ, QR, RS और SP को मिला दिया।
684
सिद्ध करना है- PQRS एक आयत है।
Geometry figure showing a rectangle ABCD with midpoints P, Q, R, S on sides AB, BC, CD, DA respectively, forming a quadrilateral PQRS inside. Diagonals AC and BD intersect at O. Line segments MN are also shown.
उपपत्ति- △ABC में, AB तथा BC का मध्य बिन्दु P और Q हैं। अतः मध्य-बिन्दु प्रमेय के अनुसार, PQ∥AC और PQ=21AC .....(i) इसी प्रकार △ADC में, CD तथा AD का मध्य-बिन्दु R और S हैं। अतः मध्य-बिन्दु प्रमेय के अनुसार, SR∥AC और SR=21AC .....(ii) अब समीकरण (i) व (ii) से PQ∥SR और PQ=SR अतः PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है क्योंकि चतुर्भुज PQRS में सम्मुख भुजाओं PQ और SR एक युग्म समान एवं समान्तर हैं। चूंकि ABCD एक समचतुर्भुज है। इसलिए ∠AOD=90∘ या ∠MON=90∘ (समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।) अब SR∥AC और SP∥BD है तो SMON भी एक समान्तर चतुर्भुज है। इसलिए ∠MSN=∠MON=90∘ (समान्तर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।) या ∠PSR=90∘ अतः PQRS एक आयत है क्योंकि PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है जिसका एक कोण 90∘ है। इतिसिद्धम्
3.ABCD एक आयत है, जिसमें P,Q,R और S क्रमशः भुजाओं AB,BC,CD और DA के मध्य-बिन्दु हैं। दर्शाइए कि चतुर्भुज PQRS एक समचतुर्भुज है।
हल- दिया है- प्रश्नानुसार एक आयत ABCD है जिसमें इसकी भुजाओं AB,BC,CD और DA के मध्य बिन्दु क्रमशः P,Q,R और S हैं। चित्र में PQ,QR,RS और SP को मिलाया गया है।
सिद्ध करना है-PQRS एक समचतुर्भुज है। रचना-A तथा C को मिलाया। उपपत्ति-चित्रानुसार △ABC में भुजाओं AB तथा BC के मध्य-बिन्दु क्रमशः P और Q हैं। ∴PQ∥AC और PQ=21AC .....(i)
Geometry figure showing a rectangle ABCD with midpoints P, Q, R, S on sides AB, BC, CD, DA respectively, forming a rhombus PQRS inside.
△ADC में R और S क्रमशः CD और AD के मध्य-बिन्दु हैं। अतः: SR∥AC और SR=21AC .....(ii) अब समीकरण (i) तथा (ii) से PQ∥SR और PQ=SR .....(iii) अर्थात् PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है। ∵ABCD एक आयत है। (दिया है) या AD=BC या 21AD=21BC या AS=BQ .....(iv) △APS और △BPQ में AP=BP [क्योंकि P बिन्दु AB का मध्य बिन्दु है।] ∠PAS=∠PBQ=90∘ तथा AS=BQ (iv से) ∴△APS≅△BPQ (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) या PS=PQ (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं।) समीकरण (iii) व (iv) से हम कह सकते हैं कि PQRS एक ऐसा समान्तर चतुर्भुज है जिसमें PS=PQ अर्थात् दो आसन्न भुजाएँ बराबर हैं। अतः PQRS एक समचतुर्भुज है।
4.ABCD एक समलम्ब है, जिसमें AB∥DC है। साथ ही, BD एक विकर्ण है और E भुजा AD का मध्य-बिन्दु है। E से होकर एक रेखा AB के समान्तर
खींची गई है, जो BC को F पर प्रतिच्छेद करती है (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि F भुजा BC का मध्य-बिन्दु है।
Triangle ABC with line EF parallel to AB
हल-प्रश्नानुसार माना कि EF रेखा को विकर्ण BD,O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।
अब △DAB में E बिन्दु भुजा AB का मध्य-बिन्दु है तथा EO∥AB है क्योंकि EF∥AB (दिया है) और EF का एक भाग है। अतः O बिन्दु △DAB की दूसरी भुजा BD का मध्य-बिन्दु है। हम जानते हैं कि त्रिभुज की एक भुजा के मध्य-बिन्दु से दूसरी भुजा के समान्तर खींची गई रेखा तीसरी भुजा को मध्य-बिन्दु पर प्रतिच्छेद करती है। अब △BCD में बिन्दु O,BD का मध्य बिन्दु है और OF∥DC। क्योंकि EF∥AB तथा AB∥DC (दिया है) अतः EF∥DC और OF,EF का ही एक भाग है। ∴F,△BCD की भुजा BC का भाग है। (मध्य-बिन्दु प्रमेय के विलोम के अनुसार)
5. एक समान्तर चतुर्भुज ABCD में E और F क्रमशः भुजाओं AB और CD के मध्य-बिन्दु हैं (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि रेखाखण्ड AF और EC विकर्ण BD को समत्रिभाजित करते हैं।
Parallelogram ABCD with line segments AF and EC intersecting diagonal BD at P and Q
हल-दिया है : एक समान्तर चतुर्भुज ABCD में E और F क्रमशः भुजाओं AB और CD के मध्य बिन्दु हैं।
सिद्ध करना है : DP=PQ=QB प्रमाण : △APB में E भुजा AB का मध्य बिन्दु है और AF∥EC (दिया है) अतः मध्य बिन्दु प्रमेय से Q भुजा PB का मध्य बिन्दु है। अतः : PQ=QB ...(i) (किसी त्रिभुज की एक भुजा के मध्य बिन्दु से दूसरी भुजा के समान्तर खींची गई रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है।) अब, △DCQ में F, भुजा CD का मध्य बिन्दु है और AF∥EC (दिया है) अतः: मध्य बिन्दु प्रमेय से, P भुजा DQ का मध्य बिन्दु है। इसलिए DP=PQ ...(ii) समीकरण (i) व (ii) से DP=PQ=QB इतिसिद्धम्
6.ABC एक त्रिभुज है जिसका कोण C समकोण है। कर्ण AB के मध्य-बिन्दु M से होकर BC के समान्तर खींची गई रेखा AC को D पर प्रतिच्छेद करती है। दर्शाइए कि (i) D भुजा AC का मध्य-बिन्दु है। (ii) MD⊥AC है। (iii) CM=MA=21AB है।
हल-(i) △ABC में भुजा AB का मध्य-बिन्दु M है, प्रश्नानुसार यह दिया है।
Triangle ABC with line m passing through M parallel to BC intersecting AC at D
MD∥BC ∴AD=DC (मध्य-बिन्दु प्रमेय के विलोम के अनुसार) अतः AC भुजा का मध्य बिन्दु D है। (ii) माना कि भुजा BC के समान्तर खींची गई रेखा m है। (दिया है) तथा तिर्यक रेखा AC है। ∴∠1=∠C (संगत कोण) या ∠1=90∘ [∵∠C=90∘] (दिया है) अतः MD⊥AC। (iii) आकृति में बने △AMD तथा △CMD में ∠1=∠2=90∘ (सिद्ध कर चुके हैं) AD=DC (सिद्ध कर चुके हैं) तथा MD=MD (उभयनिष्ठ भुजा) अतः △AMD≅△CMD (सर्वांगसमता के नियम SAS के अनुसार) ∴AM=CM (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) .....(1)
दिया है कि AB भुजा का मध्य बिन्दु M है। ∴AM=21AB .....(2) समीकरण (1) व (2) से CM=AM=21AB
--- अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न ---
वस्तुनिष्ठ प्रश्न-
चित्र में, ABCD एक समचतुर्भुज है। यदि AC=8 सेमी. और DB=6 सेमी. हो, तो BC का मान होगा-
Rhombus ABCD with diagonals intersecting at center
(A) 5 सेमी. (B) 4 सेमी. (C) 7 सेमी. (D) 3.5 सेमी.
चित्र में, ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, तो x का मान होगा-
Parallelogram ABCD with angles (x+80) and (3x-10)
(A) 25∘ (B) 60∘ (C) 75∘ (D) 45∘
एक समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुज क्षेत्रफल में समान हैं और एक ही आधार पर स्थित हैं। यदि समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई 2 सेमी. हो, तो त्रिभुज की ऊँचाई है- (A) 4 सेमी. (B) 1 सेमी. (C) 2 सेमी. (D) 3 सेमी.
समान्तर चतुर्भुज ABCD में ∠A=70∘ हो, तो ∠B का मान है- (A) 10∘ (B) 110∘ (C) 70∘ (D) 90∘
चतुर्भुज जिसमें दोनों विकर्ण बराबर होते हैं- (A) समान्तर चतुर्भुज (B) समचतुर्भुज (C) आयत (D) समलम्ब चतुर्भुज
एक समचतुर्भुज ABCD में, यदि ∠ACB=40∘, तब ∠ADB= (A) 70∘ (B) 45∘ (C) 50∘ (D) 60∘
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। M,BD का मध्य बिन्दु है और BM,∠B को समद्विभाजित करता है। तब ∠AMB= (A) 45∘ (B) 60∘ (C) 90∘ (D) 75∘
यदि किसी समचतुर्भुज के विकर्ण 18 सेमी. एवं 24 सेमी. हैं तब उसकी भुजा होगी- (A) 16 सेमी. (B) 15 सेमी. (C) 20 सेमी. (D) 17 सेमी.
किसी आयत की आसन्न भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने पर बनने वाली आकृति है- (A) वर्ग (B) समचतुर्भुज (C) समलम्ब चतुर्भुज (D) इनमें से कोई नहीं
किसी वर्ग की आसन्न भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने पर बनने वाली आकृति है- (A) समचतुर्भुज (B) वर्ग (C) आयत (D) समान्तर चतुर्भुज
--- उत्तर-तालिका ---
1. (A)
2. (D)
3. (A)
4. (B)
5. (C)
6. (C)
7. (C)
8. (B)
9. (B)
10. (B)
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो-
किसी चतुर्भुज की भुजाओं के प्रतिच्छेद बिन्दुओं को ............... कहते हैं।
किसी वर्ग के विकर्ण आपस में ............... पर समद्विभाग होते हैं।
समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर ............... करते हैं।
समचतुर्भुज के विकर्ण परस्पर समकोण पर ............... कटते हैं।
चतुर्भुज में जिन भुजाओं में उभयनिष्ठ शीर्ष न हों उन्हें ............... भुजाएँ कहते हैं।
सत्य/असत्य-निम्नलिखित कथनों के लिए सत्य अथवा असत्य लिखिए-
चतुर्भुज में जिन भुजाओं में उभयनिष्ठ शीर्ष हों उन्हें सम्मुख भुजाएँ कहते हैं।
चतुर्भुज की एक ही भुजा पर बनने वाले कोण आसन्न कोण कहलाते हैं।
किसी चतुर्भुज की भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को एक क्रम से मिलाने वाले रेखाखण्डों द्वारा बना चतुर्भुज एक समलम्ब चतुर्भुज होता है।
किसी त्रिभुज की एक भुजा के मध्य बिन्दु से दूसरी भुजा के समान्तर खींची गई रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है।
एक समचतुर्भुज के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
उत्तर- 1. असत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. सत्य 5. सत्य
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
दिये गये चित्र में BC=AD तथा AB=CD हो तो ∠ABC और ∠ADC बराबर होंगे, क्यों?
Quadrilateral ABCD with markings on sides
हल-∵ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। इसलिए सम्मुख कोण बराबर होंगे।
यदि एक समान्तर चतुर्भुज ABCD में ∠A=∠B+60∘ हो, तो ∠A व ∠B के मान लिखिए।
हल- (i) ∠A=120∘ (ii) ∠B=60∘
समान्तर चतुर्भुज ABCD में ∠A तथा ∠B के अर्द्धक परस्पर बिन्दु O पर काटते हैं तो ∠AOB का मान बताओ।
हल- समान्तर चतुर्भुज के अर्द्धक परस्पर समकोण पर काटते हैं अतः ∠AOB=90∘ होगा।
समान्तर चतुर्भुज ABCD में AC विकर्ण है। यदि ∠CAB=30∘ तथा ∠ACB=50∘ हो तो ∠ADC का माप लिखिए।
Quadrilateral ABCD with diagonal AC and angles
हल-∠B=∠D∴∠B=180−80=100
अतः ∠D=100∘ उत्तर
चित्रानुसार समान्तर चतुर्भुज DEFG में DF=6.4 सेमी. तथा GE=4.2 सेमी. है। (AD+AE) का माप लिखिए।
Quadrilateral GDEF with diagonals
हल-AD=21DF=21×6.4=3.2 सेमी.
AE=21GE=21×4.2=2.1 सेमी. अतः AD+AE=5.3 सेमी. उत्तर
दिये गये चित्र में ∠GDE+∠DEF=180∘, इस स्थिति में कौनसी रेखाएँ समान्तर होंगी?
Quadrilateral GDEF
हल-GD∥EF.
यदि एक आयत की आसन्न भुजाएँ समान हों तो आकृति कहलाती है-
हल- वर्ग।
आयत, समान्तर चतुर्भुज, वर्ग, समचतुर्भुज, समलम्ब चतुर्भुज में से किन में "विकर्ण उन कोणों के अर्द्धक होते हैं जिनमें से होकर वे गुजरते हैं?" उनके नाम लिखो।
हल- वर्ग, समचतुर्भुज।
किसी आयत ABCD के विकर्ण परस्पर बिन्दु O पर प्रतिच्छेदित करते हैं। यदि ∠BOC=40∘ हो तो ∠OAD का मान ज्ञात कीजिए।
हल-∠OAD=45∘
समान्तर चतुर्भुज ABCD में यदि ∠D=115∘ हो तो ∠A तथा ∠B ज्ञात कीजिए।
हल-∠A=65∘ तथा ∠B=115∘
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
सामने के चित्र में ABCD कोई चतुर्भुज है। H,E,F और G क्रमशः AB,BC,CD और DA के मध्य-बिन्दु हैं। क्या HEFG एक समान्तर चतुर्भुज है, क्यों?
Quadrilateral ABCD with midpoints H, E, F, G forming inner quadrilateral
688
[संकेत- GF∥AC और GF=21AC क्यों? HE∥AC और HE=21AC क्यों? GF∥HE और GF=HE ]
हल-उपपत्ति-△ABC में H,E क्रमशः AB तथा BC के मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा है।
HE=21AC तथा HE∥AC .....(i) △DAC में G,F क्रमशः AD तथा CD के मध्य-बिन्दु हैं। ∴GF=21AC तथा GF∥AC .....(ii) (i) व (ii) से-HE=GF तथा HE∥GF ∴ चतुर्भुज HEFG एक समान्तर चतुर्भुज है। (इति सिद्धम्)
2. दिये गये चित्र में, ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। P और Q क्रमशः सम्मुख भुजाओं AB और CD के मध्य-बिन्दु हैं। सिद्ध कीजिए कि PRQS एक समान्तर चतुर्भुज है।
Quadrilateral ABCD with points P on AB, Q on CD, and diagonals intersecting at S and R
हल-दिया हुआ है-ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। जहाँ P,AB का तथा Q,DC का मध्य-बिन्दु है।
सिद्ध करना है-PRQS एक समान्तर चतुर्भुज है। चतुर्भुज APCQ में, AP=PB तथा DQ=QC ∵DC=AB तथा DC∥AB ∴AP=QC एवं AP∥QC इसी प्रकार PR∥SQ एवं PR=SQ .....(1) चतुर्भुज PBQD में, PB=DQ तथा PB∥DQ QB=DP तथा QB∥DP अतः: QR=SP एवं QR∥SP .....(2)
समीकरण (1) तथा (2) से, PRQS एक समान्तर चतुर्भुज होगा। (यही सिद्ध करना था)
3.ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, जिसमें P और Q क्रमशः सम्मुख भुजाओं AB और CD के मध्य-बिन्दु हैं। यदि AQ,DP को S पर प्रतिच्छेद करे और BQ,CP को R पर प्रतिच्छेद करे, तो दर्शाइए कि - (i) APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है। (ii) DPBQ एक समान्तर चतुर्भुज है। (iii) PSQR एक समान्तर चतुर्भुज है।
Quadrilateral ABCD with points P on AB, Q on CD, and intersecting lines forming PSQR
हल-(i) चतुर्भुज APCQ में,
AP∥QC (चूँकि AB∥CD) .....(1) AP=21AB,CQ=21CD (दिया है) साथ ही, AB=CD (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) इसलिए, AP=QC .....(2) अतः: APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है। [(1) और (2) से]
(ii) इसी प्रकार, DPBQ एक समान्तर चतुर्भुज है, क्योंकि DQ∥PB और DQ=PB है। (iii) चतुर्भुज PSQR में, SP∥QR (SP,DP का एक भाग है और QR,QB का एक भाग है) इसी प्रकार, SQ∥PR है। अतः: PSQR एक समान्तर चतुर्भुज है।
4. सिद्ध करो कि समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
हल-दिया है-एक समान्तर चतुर्भुज ABCD है।
Parallelogram ABCD with diagonal AC
सिद्ध करना है- AB=CD तथा AD=BC रचना-समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण A तथा C को मिलाया। उपपत्ति-चित्रानुसार AB∥DC तथा AC एक तिर्यक रेखा इन्हें काटती है। ∴∠DCA=∠BAC (एकान्तर कोण) पुन: AD∥BC तथा AC एक तिर्यक रेखा इन्हें काटती है। ∴∠DAC=∠BCA (एकान्तर कोण) अब △ABC तथा △ADC में ∠BAC=∠DCA तथा AC=AC (दोनों में उभयनिष्ठ) ∠BCA=∠DAC अतः △ABC≅△CDA (सर्वांगसमता के नियम ASA के अनुसार) अतः AB=CD तथा AD=BC (क्योंकि ये सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग हैं) (इति सिद्धम्)
सिद्ध कीजिए कि समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
हल-
Parallelogram ABCD with diagonals AC and BD intersecting at O
दिया है-ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसमें विकर्ण AC व BD बिन्दु O पर प्रतिच्छेद करते हैं। सिद्ध करना है-OA=OC,OB=OD उपपत्ति-DB और AC, समान्तर रेखाओं AB व BC की दो तिर्यक रेखाएँ हैं। △AOD व △COB में, ∠ADO=∠CBO (आन्तरिक एकान्तर कोण) AD=CB (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।) ∠OAD=∠OCB (आन्तरिक एकान्तर कोण)
ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB=AC है। AD बहिष्कोण PAC को समद्विभाजित करता है और CD∥BA है। (आकृति में देखिये)
Triangle ABC with exterior angle PAC bisected by AD, and CD parallel to BA
दर्शाइए कि (i) ∠DAC=∠BCA (ii) ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
हल-(i) △ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB=AC (दिया है)
∴∠ABC=∠ACB (बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण) साथ ही, ∠PAC=∠ABC+∠ACB (त्रिभुज का बहिष्कोण) या ∠PAC=∠ACB+∠ACB ∠PAC=2∠ACB .....(i) अब, AD कोण PAC को समद्विभाजित करती है। ∴∠PAC=2∠DAC .....(ii) अतः 2∠DAC=2∠ACB (समीकरण (i) और (ii) से) या ∠DAC=∠ACB
(ii) अब ये दोनों बराबर कोण वे एकान्तर कोण हैं जो रेखाखण्डों BC और AD को तिर्यक रेखा AC द्वारा प्रतिच्छेद करने से बनते हैं। ∴BC∥AD साथ ही BA∥CD है। इस प्रकार, चतुर्भुज ABCD की सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर हैं। अतः ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
दर्शाइए कि एक समान्तर चतुर्भुज के कोणों के समद्विभाजक एक आयत बनाते हैं।
हल-माना, P, Q, R तथा S क्रमशः समान्तर चतुर्भुज ABCD के ∠A और ∠B,∠B और ∠C,∠C और ∠D तथा ∠D और ∠A के समद्विभाजकों
के प्रतिच्छेद बिन्दु हैं, जैसा कि आकृति में दिखाया गया है।
Quadrilateral ABCD with diagonals AC and BD intersecting at points P, Q, S, R
△ASD में, चूँकि DS कोण D और AS कोण A को समद्विभाजित करते हैं, इसलिए ∠DAS+∠ADS=21∠A+21∠D
=21(∠A+∠D) =21×180∘=90∘ (∠A और ∠D तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण हैं) ∠DAS+∠ADS+∠DSA=180∘ या 90∘+∠DSA=180∘ या ∠DSA=180∘−90∘=90∘ अतः: ∠PSR=90∘ (∠DSA का शीर्षाभिमुख कोण) इसी प्रकार से यह दिखाया जा सकता है कि ∠APB=90∘ या ∠SPQ=90∘ (जैसा कि ∠DSA के लिए किया था) इसी प्रकार, ∠PQR=90∘ और ∠SRQ=90∘ है। इसलिए, PQRS एक ऐसा चतुर्भुज है जिसके सभी कोण समकोण हैं। अतः हम यह सिद्ध कर चुके हैं कि ∠PSR=∠PQR=90∘ और ∠SPQ=∠SRQ=90∘ है। अर्थात् सम्मुख कोणों के दोनों युग्म बराबर हैं। अतः: PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है, जिसमें एक कोण (वास्तव में सभी कोण) समकोण हैं। इसलिए PQRS एक आयत है।
3.△ABC में, D,E और F क्रमशः भुजाओं AB,BC और CA के मध्य-बिन्दु हैं (देखिये आकृति)। दर्शाइए कि बिन्दुओं D,E और F को मिलाने पर △ABC चार सर्वांगसम त्रिभुजों में विभाजित हो जाता है।
Triangle ABC with midpoints D, E, F forming four smaller triangles
हल-चूँकि D और E क्रमशः भुजाओं AB और BC के मध्य-बिन्दु हैं, इसलिए मध्यमान प्रमेय से
DE∥AC इसी प्रकार, DF∥BC और EF∥AB है। इसलिए, ADEF,BDFE और DFCE में से प्रत्येक एक समान्तर चतुर्भुज है। अब, DE समान्तर चतुर्भुज BDFE का एक विकर्ण है। ∴△BDE≅△FED इसी प्रकार △DAF≅△FED और △EFC≅△FED अतः: चारों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
4. दिए गए चित्र में ABCD और AEFG दो समान्तर चतुर्भुज हैं। यदि ∠C=60∘ हो, तो ∠GFE और ∠AGF का मान ज्ञात कीजिए।
Two parallelograms ABCD and AEFG
हल-दिए हुए समान्तर चतुर्भुज ABCD और AEFG की भुजायें समान्तर हैं।
यानी GF∥DC और FE∥CB ∴∠GFE=∠DCB
=∠C =60∘ उत्तर
∴∠C=60∘ दिया हुआ है। पुनः: ∠AGF और ∠GFE समान्तर चतुर्भुज AGFE में एक ही भुजा GF पर बने कोण हैं। ∴∠AGF+∠GFE=180∘ ∠AGF+∠C=180∘ ∠AGF+60∘=180∘ ∠AGF=180∘−60∘