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📚 कक्षा 9 संस्कृत (Sanskrit)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 2: द्वितीयः पाठः - स्वर्णकाकः

Swarnakakah

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 संस्कृत (RBSE) 📘 शेमुषी प्रथमो भागः सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Swarnakakah

द्वितीयः पाठः - स्वर्णकाकः

त्वरित नेविगेशन: 📝 शब्दार्थ एवं अनुवाद

(अ) रघुवंशात्
(ब) 'काकली' इत्यस्मात्
(स) मेघदूतात्
(द) भारतचरितात्

  1. 'भारतीवसन्तगीतिः' इति पाठस्य रचयिता कः?
    (अ) कलानाथशास्त्री
    (ब) प्रभाकरणशास्त्री
    (स) राधावल्लभवत्रिपाठी
    (द) पं. जानकीवल्लभ शास्त्री

  2. 'भारतीवसन्तगीतिः' इति पाठे कविः कां सम्बोधयति?
    (अ) दुर्गाम्
    (ब) लक्ष्मीम्
    (स) सरस्वतीम्
    (द) गङ्गाम्

  3. कविः वाणीं कां वादयितुं प्रार्थयति?
    (अ) वीणाम्
    (ब) सारङ्गीम्
    (स) ढोलकम्
    (द) करतालम्

  4. सरसाः रसालाः कदा लसन्ति?
    (अ) वर्षाकाले
    (ब) वसन्ते
    (स) हेमन्तकाले
    (द) शिशिरकाले

  5. वसन्ते केषां नतां पंक्तिम् अवलोकयतु?
    (अ) नीम्बवृक्षाणाम्
    (ब) कोकिलानाम्
    (स) शुकानाम्
    (द) मधुमाधवीनाम्

  6. 'वसन्ते लसन्तीह सरसा रसाला'-इत्यत्र रेखांकितपदे सन्धिः वर्तते-
    (अ) गुण
    (ब) अयादि
    (स) दीर्घ
    (द) यण्

उत्तरमाला-1. (ब) 2. (द) 3. (स) 4. (अ) 5. (ब) 6. (द) 7. (स)।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

( क ) संस्कृत में प्रश्नोत्तर-

प्रश्न 1. वाणि! कीदृशीं वीणां निनादयतु?

उत्तरम्-वाणि! नवीनां वीणां निनादयतु।

प्रश्न 2. कविः कीदृशीं गीतिं गातुं कथयति?

उत्तरम्-कविः ललित-नीति-लीनां गीतिं गातुं कथयति।

प्रश्न 3. वसन्ते कीदृशाः रसालाः लसन्ति?

उत्तरम्-वसन्ते सरसाः रसालाः लसन्ति।

प्रश्न 4. मधुरमञ्जरीपिञ्जरीभूतमालाः कदा लसन्ति?

उत्तरम्-मधुरमञ्जरीपिञ्जरीभूतमालाः वसन्ते लसन्ति।

प्रश्न 5. मन्दमन्दं किम् बहति?

उत्तरम्-सनीतं समीचं मन्दमन्दं वहति।

प्रश्न 6. सरस्वत्याः अदीनां वीणाम् आकर्ण्य किम् चलेत्?

उत्तरम्-सरस्वत्याः अदीनां वीणाम् आकर्ण्य नितान्तं शान्तिशीलं सुमं चलेत्।

( ख ) शब्दार्थ-लेखनम्-

प्रश्नः-अधोलिखितशब्दानां हिण्याम् अर्थ लिखत-

उत्तरम्-शब्दाः अर्थाः

  1. मृदुम् - कोमल

  2. रसालाः - आम (आम्र)

  3. समीरे - हवा में

  4. कलिन्दात्मजायाः - यमुना नदी के
    [नोट-अन्य शब्दों के हिन्दी अर्थ पूर्व में दिये गए हैं, वहाँ देखिए।]

( ग ) प्रश्न-निर्माणम्-

प्रश्न 1. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्न-निर्माणं कुरूत-

  1. अये वाणि! नवीनां वीणां निनादय।
  2. अये वाणि! ललित-नीतिलीनां गीतिं मृदु गाय।
  3. मधुमाधवीनां नतां पंक्तिम् अवलोकयतु।
  4. सनीतं मन्दमन्दं समीरम् अनुभवतु।
  5. सरस्वत्याः अदीनां वीणां श्रुत्वा सुमं चलेत्।

उत्तरम्-प्रश्न-निर्माणम्-

  1. अये वाणि! काम् निनादय?
  2. अये वाणि! कीदृशीं गीतिं मृदु गाय?
  3. कासां नतां पङ्क्तिम् अवलोकयतु?
  4. कीदृशं समीरम् अनुभवतु?
  5. कस्याः अदीनां वीणां श्रुत्वा सुमं चलेत्?

पाठ-परिचय-प्रस्तुत पाठ श्री पद्म्शास्त्री द्वारा रचित 'विश्वकथाशतकम्' नामक कथा-संग्रह से लिया गया है, जिसमें विभिन्न देशों की सौ लोक-कथाओं का संग्रह है। यह बर्मा देश की एक श्रेष्ठ कथा है, जिसमें लोभ और उसके दुष्परिणाम के साथ-साथ त्याग और उसके सुपरिणाम का वर्णन, एक सुनहले पंखों वाले कौवे के माध्यम से किया गया है।

कठिन शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं पठितावबोधनम्-

( 1 ) पुरा कस्मिश्चिद् ग्रामे ....... समीपम् आगच्छत्।
कठिन-शब्दार्थ-पुरा = प्राचीन समय में (प्राचीनकाले)। न्यवसत् = रहती थी (अवसत्)। दुहिता = पुत्री (सुता)। स्थाल्याम् = थाली में (स्थालीपात्रे)। तण्डुलान् = चावलों को (अक्षतान्)। निक्षिप्य = रखकर (स्थापयित्वा)। आदिदेश = आदेश दिया। विहगेभ्यः = पक्षियों से (विहगेभ्यः)। किञ्चित्कालादनन्तरम् = कुछ समय बाद। समुड्डीय = उड़कर (उत्प्लत्य)।
हिन्दी-अनुवाद-पुराने समय में किसी गाँव में एक निर्धन वृद्धा स्त्री रहा करती थी। उसकी एक विनम्र, सुन्दर पुत्री

थी। एक दिन माता ने थाली में चावल रखकर पुत्री को आदेश दिया-"पुत्री, सूर्य की धूप में (रखे) चावलों की पक्षियों से रक्षा करना।" कुछ समय बाद एक विचित्र कौवा उड़कर उसके समीप आया। | (i) का रोदितुम् आरब्धा? (ii) काक: बालिकायै किं दास्यति? II. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (i) बालिकया कीदृशः काकः पूर्व न दृष्टः? (ii) सूर्योदयात्प्राग् बालिकया कुत्र गन्तव्यम्? III. भाषिककार्यम्- (i) 'दास्यामि' इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्? (ii) 'शोकः' इत्यस्य पर्यायपदं चित्वा लिखत।

(ii) कन्या वृक्षसमीपं सूर्योदयात्पूर्वमेव उपस्थिता।
III. (i) स्वर्णमयः। (ii) दुहिता।
( 4 ) चिरकालं भवने ..................................... स्वगृहं गच्छ।"
कठिन-शब्दार्थ- चिरकालं = बहुत समय तक (बहुकालं यावत्)। सज्जितानि = सजाकर रखी हुई (अलंकृतानि)। श्रान्ता = थकी हुई (क्लान्ताम्)। प्राह = कहा (उवाच)। लघु = थोड़ा-सा, अल्प। प्रातराशः = सुबह का नाश्ता। स्वर्णस्थाल्ल्यां = सोने की थाली में। व्याजहार = कहा (अकथयत्)। पर्यवेषितम् = परोसा गया (पर्यवेषणं कृतम्)। एतादृक् = इस प्रकार का (ईदृशम्)। अद्यावधिः = आज तक। खादितवती = खाया गया। ब्रूते = बोला (अवदत्)।
हिन्दी-अनुवाद- बहुत काल तक, महल में सजी अनोखी वस्तुओं को देखकर बालिका हैरान हो गई। उसको थका हुआ देखकर कौवा बोला- "पहले तुम थोड़ा प्रातःकालीन नाश्ता कर लो, बताओ तुम सोने की थाली में भोजन करोगी या फिर चाँदी की थाली में, अथवा ताँबे की थाली में? बालिका ने कहा-"मैं निर्धन, तांबे की थाली में ही खा लूँगी।" लेकिन तब वह बालिका आश्चर्य से चकित हो गई जब सोने के कौवे ने उसे सोने की थाली में भोजन परोसा। बालिका ने आज तक ऐसा स्वादिष्ट भोजन नहीं खाया था। कौवा बोला- "हे बालिका! मैं चाहता हूँ कि तुम हमेशा यहीं पर रहो, परन्तु (घर पर) तुम्हारी माता अकेली है। अतः तुम शीघ्र ही अपने घर चली जाओ।"

पठित-अवबोधनम्-

प्रश्नाः-I. एकपदेन उत्तरत-

(i) भवने कानि सज्जितानि आसन्?
(ii) श्रान्तां बालिकां विलोक्य कः प्राह?
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(i) भवने किं दृष्ट्वा बालिका विस्मयं गता?
(ii) स्वर्णकाकेन कस्यां भोजनं परिवेशितम्?
III. भाषिककार्यम्-
(i) 'वद' इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् अस्ति?
(ii) 'प्रातराशः' इत्यस्य विशेषणपदं किम्?

उत्तराणि-I. (i) विचित्रविचित्रवस्तूनि। (ii) काकः।

II. (i) भवने विचित्रविचित्रवस्तूनि सज्जितानि दृष्ट्वा बालिका विस्मयं गता।
(ii) स्वर्णकाकेन स्वर्णस्थाल्ल्यां भोजनं परिवेशितम्।
III. (i) त्वम्। (ii) लघु।

( 5 ) इत्युक्त्वा काकः ..................................... सज्जाता।
कठिन-शब्दार्थ- इत्युक्त्वा = ऐसा कहकर (एवं कथयित्वा)। कक्षाभ्यन्तरतः = कमरे के अन्दर से। निसार्य = निकालकर। यथेच्छम् = अपनी इच्छा के

पठित-अवबोधनम्-

प्रश्नाः-I. एकपदेन उत्तरत-

(i) काकः कति मञ्जूषाः निस्सार्य प्रत्यवदत्?
(ii) बालिका कीदृशी मञ्जूषा गृहीता?
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(i) मञ्जूषायां कानि आसन्?
(ii) बालिका गृहमागत्य का समुद्घाटिता?
III. भाषिककार्यम्-
(i) 'लघुतमाम्' इति विशेषणस्य विशेष्यपदं किम्?
(ii) 'प्रत्यवदत्' इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?

उत्तराणि-I. (i) तिस्रः। (ii) लघुतमा।

II. (i) मञ्जूषायां महाहर्णिण हीरकाणि आसन्।
(ii) बालिका गृहमागत्य मञ्जूषा समुद्घाटिता।
III. (i) मञ्जूषास्। (ii) काकः।

( 6 ) तस्मिन्नेव ग्रामे ..................................... अकारयत्।
कठिन-शब्दार्थ- अपरा = अन्य। न्यवसत् = रहती थी। अभिज्ञातवती = जान गई। निक्षिप्य = फेंककर। तथैव = उसी प्रकार। स्वर्णपक्षः = स्वर्णमय पंखों वाला। भक्षयन् = खाता हुआ। आकारयत् = बुलाया। निर्भर्त्सयन्ती = निन्दा करती हुई (भर्त्सना कुर्वती)। प्रावोचत् = कहा। प्रयच्छ = दीजिए। अब्रवीत् = बोला। उत्तरयामि = उतारता हूँ। प्रायच्छत् = प्रदान की। अकारयत् = कराया।

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सीढ़ी उतारता हूँ।" तो तुम बताओ कि तुम सोने की बनी सीढ़ी से आओगी, चाँदी की सीढ़ी से या फिर ताम्र की सीढ़ी से? गर्वभरी (घमण्डयुक्त) बालिका ने कहा—"मैं तो सोने की बनी सीढ़ी से आऊँगी", किन्तु सोने के कौवे ने उसके लिए ताम्र की बनी सीढ़ी ही दी। सोने के कौवे ने उसे भोजन भी ताम्र के बर्तन में ही कराया।

पठित-अवबोधनम्–

प्रश्ना:-
I. एकपदेन उत्तरत–

(i) ग्रामे अपरा वृद्धा कीदृशी न्यवसत्?
(ii) सा वृद्धा कस्य रहस्यम् अभिज्ञातवती?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत–

(i) सूर्यातपे वृद्धया किं कृतम्?
(ii) स्वर्णकाकः लुब्धां बालिकां भोजनं कस्मिन् अकारयत्?

III. भाषिककार्यम्–
(i) 'तस्मिन्' इति पदस्य विशेष्यपदं किम्?
(ii) 'सुता' इति पदस्य पर्यायपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत।

उत्तराणि–

I. (i) लुब्धा। (ii) स्वर्णकाकस्य।
II. (i) सूर्यातपे वृद्धया तण्डुलान् निक्षिप्य स्वसुता रक्षार्थं नियुक्ता।
(ii) स्वर्णकाकः लुब्धां बालिकां भोजनं ताम्रभाजने एव अकारयत्।
III. (i) ग्रामे। (ii) पुत्री।

( 7 ) प्रतinिवृत्तिकाले ......................................... पर्यत्यजत।
कठिन-शब्दार्थ–

  • प्रतिनिवृत्तिकाले = लौटने के समय (प्रत्यागमनस्य समये)।
  • तिस्रः = तीन।
  • मञ्जूषाः = सन्दूकें (पेटिकाः)।
  • तत्पुरः = उसके सामने।
  • समुक्षिप्ताः = रखीं।
  • लोभाविष्टा = लोभ से परिपूर्ण (लोभेन परिपूर्णा)।
  • बृहत्तमा = सबसे बड़ी।
  • आगत्य = आकर।
  • तर्षिता = लालची।
  • उद्घाटयति = खोलती है।
  • लुब्धया = लालची।
  • पर्यत्यजत = छोड़ दिया (अत्यजत्)।

हिन्दी-अनुवाद– लौटने (विदाई) के समय सोने के कौवे ने कक्ष (कमरे) के अन्दर से तीन सन्दूकें लाकर उसके सामने रखीं। लोभ से परिपूर्ण मन वाली उस लड़की ने उनमें से सबसे बड़ी सन्दूक ली। घर पर आकर वह लालची लड़की जब उस सन्दूक को खोलती है तो उसमें वह एक भयंकर काले साँप को देखती है। लालची बालिका को लालच का फल मिल गया। उसके पश्चात् उसने लोभ को बिल्कुल त्याग दिया।

पठित-अवबोधनम्–

प्रश्ना:-
I. एकपदेन उत्तरत–

(i) लुब्धया बालिकया कस्य फलं प्राप्तम्?
(ii) लोभाविष्टा सा कीदृशीं मञ्जूषां गृहीतवती?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत–

(i) गृहमागत्य बालिकया मञ्जूषायां कः विलोकितः?

(ii) लुब्धा बालिका किं पर्यत्यजत?
III. भाषिककार्यम्–
(i) 'लुब्धया' इति विशेषणस्य विशेष्यपदं किम् प्रयुक्तम्?
(ii) 'लघुतमार्म्' इत्यस्य गद्यांशात् विलोमपदं चित्वा लिखत।

उत्तराणि–

I. (i) लोभस्य। (ii) बृहत्तमाम्।
II. (i) गृहमागत्य बालिकया मञ्जूषायां भीषणः कृष्णसर्पः विलोकितः।
(ii) लुब्धा बालिका लोभं पर्यत्यजत।
III. (i) बालिकया। (ii) बृहत्तमार्म्।


पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत–

(क) माता काम आदिष्टत?
(ख) स्वर्णकाकः कान् अखादत्?
(ग) प्रासादः कीदृशः वर्त्तते?
(घ) गृहमागत्य तया का समुद्घाटिता?
(ङ) लोभाविष्टा बालिका कीदृशीं मञ्जूषां नयति?

उत्तराणि–

(क) पुत्रीम्।
(ख) तण्डुलान्।
(ग) स्वर्णमयः।
(घ) मञ्जूषा।
(ङ) बृहत्तमाम्।

( अ ) अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत–

( क ) निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्?

उत्तरम्– निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता विनम्रा मनोहारा च आसीत्।

( ख ) बालिका पूर्वं कीदृशः काकः न दृष्टः आसीत्?

उत्तरम्– बालिका पूर्वं स्वर्णकाकः न दृष्टः आसीत्।

( ग ) निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां कानि अपश्यत्?

उत्तरम्– निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां महार्हाणि हीरकाणि अपश्यत्।

( घ ) बालिका किं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता?

उत्तरम्– बालिका स्वर्णमयं प्रासादं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता।

( ङ ) गर्विता बालिका कीदृशं सोपानम् अयाचत कीदृशं च प्राप्नोति?

उत्तरम्– गर्विता बालिका स्वर्णसोपानम् अयाचत परं ताम्रमयं प्राप्नोति।

प्रश्न 2. ( क ) अधोलिखितानां शब्दानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत।

उत्तरम्–

शब्द विलोमपद
(i) पश्चात् पूर्वम्
(ii) हसितुम् रोदितुम्
(iii) अधः उपरि
(iv) श्वेतः कृष्णः
(v) सूर्यास्तः सूर्योदयः

(vi) सुप्तः - प्रबुद्धः
(ख) सन्धिं कुरुत।

उत्तरम्—पद \quad\quad\quad\quad सन्धिः

(i) नि + अवसत् - न्यवसत्
(ii) सूर्य + उदयः - सूर्योदयः
(iii) वृक्षस्य + उपरि - वृक्षस्योपरि
(iv) हि + अकारयत् - ह्यकारयत्
(v) च + एकाकिनी - चैकाकिनी
(vi) इति + उक्त्वा - इत्युक्त्वा
(vii) प्रति + अवदत् - प्रत्यवदत्
(viii) प्र + उक्तम् - प्रोक्तम्
(ix) अत्र + एव - अत्रैव
(x) तत्र + उपस्थिता - तत्रोपस्थिता
(xi) यथा + इच्छम् - यθέच्छम्

प्रश्न 3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
(क) ग्रामे निर्धना स्त्री अवसत्।

उत्तरम्—ग्रामे का अवसत्?

(ख) स्वर्णकाकं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्।

उत्तरम्—कं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्?

(ग) सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता।

उत्तरम्—कस्मात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता?

(घ) बालिका निर्धनमातुः दुहिता आसीत्।

उत्तरम्—बालिका कस्याः दुहिता आसीत्?

(ङ) लुब्धा वृद्धा स्वर्णकाकस्य रहस्यमभिज्ञातवती।

उत्तरम्—लुब्धा वृद्धा कस्य रहस्यमभिज्ञातवती?

प्रश्न 4. प्रकृति-प्रत्यय-संयोगं कुरुत ( पाठात् चित्वा वा लिखत)।

उत्तरम्—

(क) वि + लोक् + ल्यप् - विलोक्य
(ख) नि + क्षिप् + ल्यप् - निक्षिप्य
(ग) आ + गम् + ल्यप् - आगत्य
(घ) दृश् + क्त्वा - दृष्ट्वा
(ङ) शी + क्त्वा - शयित्वा
(च) लघु + तमप् - लघุตमम्/लघुतमः

प्रश्न 5. प्रकृतिप्रत्यय-विभागं कुरुत।

उत्तरम्—पद \quad\quad\quad\quad प्रकृति-प्रत्यय

(क) रोदितुम् \quad\quad रुद् + तुमुन्
(ख) दृष्ट्वा \quad\quad\quad दृश् + क्त्वा
(ग) विलोक्य \quad\quad वि + लोक् + ल्यप्
(घ) निक्षिप्य \quad\quad नि + क्षिप् + ल्यप्
(ङ) आगत्य \quad\quad\quad आ + गम् + ल्यप्
(च) शयित्वा \quad\quad शी + क्त्वा
(छ) लघुतमम् \quad\quad लघु + तमप्

प्रश्न 6. अधोलिखितनि कथनानि कः/का, कं/काम् च कथयति—

उत्तरम्—कथनानि \quad\quad\quad\quad कः/का \quad कं/काम्

(क) पूर्व प्रातराशः क्रियताम् स्वर्णकाकः बालिकाम्
(ख) सूर्यातपे तण्डुलान् \quad\quad वृद्धा \quad बालिकाम्
खेगेभ्यो रक्ष
(ग) तण्डुलान् मा भक्षय \quad बालिका \quad स्वर्णकाकम्

दास्यामि
(ङ) भो नीचकॉक! अहमागता, लुब्धाबालिका स्वर्णकाकम्

प्रश्न 7. उदाहरणमनुसृत्य कोष्ठकगतेषु पदेषु पञ्चमी-विभक्तः प्रयोगं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयत—
यथा—मूषकः बिलाद् बहिः निर्गच्छति। (बिल)
(क) जनः .......................... बहिः आगच्छति। (ग्राम)
(ख) नद्यः .......................... निस्सरन्ति। (पर्वत)
(ग) .......................... पत्राणि पतन्ति। (वृक्ष)
(घ) बालकः .......................... विभेति। (सिंह)
(ङ) ईश्वरः .......................... त्रायते। (क्लेश)
(च) प्रभुः भक्तं .......................... निवारयति। (पाप)

उत्तरम्—(क) जनाद् बहिः आगच्छति। (ख) नद्यः पर्वतेभ्यः निस्सरन्ति। (ग) वृक्षात् पत्राणि पतन्ति। (घ) बालकः सिंहाद् विभेति। (ङ) ईश्वरः क्लेशात् त्रायते। (च) प्रभुः भक्तं पापाद निवारयति।


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
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बहुविकल्पात्मकप्रश्नाः—
1. 'स्वर्णकाकः' इति पाठः कस्मात् ग्रन्थात् सङ्कलितः?
(अ) विश्वकथाशतकात् (ब) नीतिशताकात्
(स) पञ्चतन्त्रात् (द) हितोपदेशात्
2. 'स्वर्णकाकः' इति पाठस्य रचयिता कः?
(अ) प्रभाकरशास्त्री \quad\quad\quad (ब) कलानाथशास्त्री
(स) श्रीपद्मशास्त्री \quad\quad\quad (द) पं. रूपकिशोरशास्त्री
3. स्वर्णकाकः कान् अखदत्?
(अ) फलानि \quad\quad\quad\quad (ब) तण्डुलान्
(स) मोदकान् \quad\quad\quad (द) रत्नान्
4. लोभाविष्टा बालिका कीदृशीं मज्जूषां नयति?
(अ) लघुत्तमाम् \quad\quad\quad (ब) रजतमीम्
(स) स्वर्णमयीम् \quad\quad\quad (द) बृहत्माम्
5. निर्धना वृद्धा कुत्र अवसत्?
(अ) वने \quad\quad\quad\quad\quad\quad (ब) ग्रामे
(स) नगरे \quad\quad\quad\quad\quad (द) पर्वते
6. काकः कक्षाभ्यन्तरात् कति मज्जूषाः निस्सारयति?

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(अ) पञ्च
(स) द्वे
(ब) चतस्रः
(द) तिस्रः

  1. “........शीघ्रमेव स्वगृहं गच्छ।”
    उपर्युक्तवाक्ये पूरणीयं कर्तृपदं किम्?
    (अ) अहम्
    (ब) सा
    (स) त्वम्
    (द) वयम्

  2. “यदा काकः शयित्वा प्रबुद्धः” -इत्यत्र कर्तृपदं वर्तते-
    (अ) यदा
    (ब) काकः
    (स) शयित्वा
    (द) प्रबुद्धः

उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (स) 3. (ब) 4. (द) 5. (ब) 6. (द) 7. (स) 8. (ब)।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-
(क) संस्कृत में प्रश्नोत्तर-

प्रश्न 1. निर्धनवृद्धायाः पुत्री कीदृशी आसीत्?

उत्तरम्—सा विम्रा मनोहर ा आसीत्।

प्रश्न 2. वृद्धा स्त्री सुपुत्रीं किमादिदेश?

उत्तरम्—सा आदिदेश यत्-'सूर्यातपे तण्डुलान् खगेभ्यो रक्ष।'

प्रश्न 3. बालिकया कीदृशः काकः पूर्वं न दृष्टः?

उत्तरम्—बालिकया स्वर्णपक्षो रजतचञ्चुः स्वर्णकाकः पूर्वं न दृष्टः।

प्रश्न 4. स्वर्णकाकः कम् वृक्षमनु आगन्तुम् कथयति?

उत्तरम्—स्वर्णकाकः पिप्पलवृक्षमनु आगन्तुं कथयति।

प्रश्न 6. कया लोभस्य फलं प्राप्तम्?

उत्तरम्—लुब्धया बालिकया लोभस्य फलं प्राप्तम्।

(ख) शब्दार्थ-लेखनम्-

प्रश्नः—अधोलिखितशब्दानां हिण्याम् अर्थं लिखत-

उत्तरम्—

शब्दाः अर्थाः
1. दुहिता पुत्री
2. स्थाल्याम् थाली में

| 4. ताम्रभाजने | ताँबे के बर्तन में |

[ नोट-अन्य शब्दों के हिन्दी अर्थ पूर्व में दिए गये हैं, वहाँ देखिए।]

(ग) प्रश्न-निर्माणम्-

प्रश्न 1. अधोलिखितवाक्येषु कालाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्न-निर्माणं कुरूत-

  1. कस्मिंश्चिद् ग्रामे एका निर्धना स्त्री न्यवसत्।

  2. तस्याः दुहिता विनम्रा मनोहरा च आसीत्।

  3. सूर्यातपे तण्डुलान् खगेभ्यो रक्ष।

  4. स्वर्णकाकेन स्वर्णस्थाल्ल्यां भोजनं परिवेशितम्।

  5. त्वं शीघ्रमेव स्वगृहं गच्छ।

उत्तरम्—प्रश्न-निर्माणम्—

  1. कुत्र एका निर्धना स्त्री न्यवसत्?
  2. तस्याः दुहिता कीदृशी आसीत्?
  3. सूर्यातपे कान् खगेभ्यो रक्ष?
  4. स्वर्णकाकेन कस्याम् भोजनं परिवेशितम्?
  5. त्वं शीघ्रमेव कुत्र गच्छ?

[ घ ] सार-लेखनम्-

प्रश्नः—'स्वर्णकाकः।' इति कथायाः सारं हिन्दीभाषायां लिखत।