Work and Energy
कार्य तथा ऊर्जा
प्रश्न 3. दो वस्तुएँ तथा क्रमशः और द्रव्यमान की की दूरी पर रखी हैं। इनको मिलाने वाली रेखा पर द्रव्यमान की एक अन्य वस्तु से कितनी दूरी पर रखें कि उस पर तथा का गुरुत्वाकर्षण बल बराबर व विपरीत हो?
उत्तर- दिया गया है-
माना कि द्रव्यमान की वस्तु से दूरी पर रखी है। इस बिन्दु पर वस्तु तथा का गुरुत्वाकर्षण बल बराबर है।
.....(1)
.....(2)
समीकरण (1) तथा समीकरण (2) से
या
या
अतः द्रव्यमान की एक अन्य वस्तु से की दूरी पर रखनी होगी।
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 129
प्रश्न 1. किसी वस्तु पर का बल लगता है। मान लीजिए बल की दिशा में विस्थापन है (चित्र में)। मान लीजिए वस्तु के विस्थापन के समय लगातार वस्तु पर बल लगता रहता है। इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
हल- दिया गया है-
बल
विस्थापन
कार्य
कार्य
या
पृष्ठ 130
प्रश्न 1. हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है?
उत्तर- यदि किसी वस्तु पर बल लगाया जाये और बल की दिशा में वस्तु गति करे तो हम कहते हैं कि कार्य किया गया है।
कार्य के लिए विस्थापन का होना आवश्यक है।
प्रश्न 2. जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किए गए कार्य का व्यंजक लिखिए।
उत्तर- जब बल विस्थापन की दिशा में ही लगता है, तब किया गया कार्य
प्रश्न 3. कार्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- जब किसी वस्तु पर का बल लगाने पर, वस्तु में विस्थापन बल की दिशा में हो जाता है, तो किया गया कार्य (जूल) कहलाता है।
प्रश्न 4. बैलों की एक जोड़ी खेत जोतते समय किसी हल पर बल लगाती है। जोता गया खेत लंबा है। खेत की लंबाई को जोतने में कितना कार्य किया गया?
उत्तर- दिया गया है-
बैलों द्वारा लगाया गया बल
जोता गया खेत
कार्य
या
576
पृष्ठ 134
प्रश्न 1. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा क्या होती है?
उत्तर- गतिज ऊर्जा-किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी चाल के साथ बढ़ती है। किसी निश्चित वेग से गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा, उस वस्तु पर इस वेग को प्राप्त करने के लिए किए गए कार्य के बराबर होती है।
प्रश्न 2. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखो।
उत्तर- यदि कोई द्रव्यमान की एक वस्तु एक समान वेग से गतिशील है तो वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान होगा-
प्रश्न 3. के वेग से गतिशील किसी द्रव्यमान की वस्तु की गतिज ऊर्जा है। यदि इसके वेग को दोगुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी? यदि इसके वेग को तीन गुना बढ़ा दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी?
उत्तर- (i) दिया गया है-
वेग
वस्तु का द्रव्यमान
गतिज ऊर्जा
गतिज ऊर्जा
अतः वस्तु का द्रव्यमान
(ii) जब वेग को दोगुना कर दिया हो तब
गतिज ऊर्जा
अतः वेग को दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा जूल हो जायेगी।
(iii) जब वेग को तीन गुना कर दिया हो-
गतिज ऊर्जा
अतः वेग तीन गुना करने पर गतिज ऊर्जा जूल हो जायेगी।
पृष्ठ 139
प्रश्न 1. शक्ति क्या है?
उत्तर- किसी कारक/साधन के कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। माना कोई साधन समय में कार्य करता है, तो
साधन की शक्ति
या
जूल/से. या वाट शक्ति का मात्रक है। शक्ति का बड़ा मात्रक किलोवाट, मेगावाट होता है। यह एक अदिश राशि है।
प्रश्न 2. वाट शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- किसी स्रोत द्वारा एक सेकण्ड में एक जूल ऊर्जा खर्च करने की दर को एक वाट शक्ति कहते हैं।
अतः
प्रश्न 3. एक लैंप विद्युत ऊर्जा में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है?
उत्तर- दिया गया है-
ऊर्जा
समय
शक्ति
शक्ति
या
प्रश्न 4. औसत शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- कुल उपयोग की गई ऊर्जा को कुल लिए गए समय से भाग देकर निकाली गई शक्ति को औसत शक्ति कहते हैं। अतः:
औसत शक्ति
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. निम्न सूचीबद्ध क्रियाकलापों को ध्यान से देखिए। अपनी कार्य शब्द की व्याख्या के आधार पर तर्क दीजिए कि इनमें कार्य हो रहा है अथवा नहीं।
- सूमा एक तालाब में तैर रही है।
- एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझा उठा रखा है।
- एक पवन-चक्की (विंड-मिल) कुएँ से पानी उठा रही है।
- एक हरे पौधे में प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया हो रही है।
- एक इंजन ट्रेन को खींच रहा है।
- अनाज के दाने सूर्य की धूप में सूख रहे हैं।
- एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है।
उत्तर—
(1) हाँ, इस स्थिति में कार्य संपादित हो रहा है। लेकिन यहाँ पर कार्य ऋणात्मक है, चूँकि बल पीछे की ओर आरोपित हो रहा है जबकि विस्थापन आगे की दिशा में हो रहा है।
(2) इस स्थिति में कोई भी कार्य संपादित नहीं हो रहा है, क्योंकि बल नीचे की ओर आरोपित किया जा रहा है जबकि विस्थापन आगे की दिशा में हो रहा है। जबकि कार्य के संपादन के लिए आरोपित बल की दिशा और विस्थापन की दिशा समान होनी चाहिए।
(3) हाँ, इस स्थिति में कार्य संपादन हो रहा है, क्योंकि बल ऊपर की ओर आरोपित किया जा रहा है तथा पानी भी पवन-चक्की द्वारा ऊपर की ओर ही उठाया जा रहा है।
(4) इस स्थिति में कोई कार्य संपादित नहीं हो रहा है, क्योंकि न तो कोई बल आरोपित किया जा रहा है और न ही वस्तु विस्थापित हो रही है।
(5) हाँ, इस स्थिति में कार्य हो रहा है क्योंकि इंजन, रेलगाड़ी पर बल लगा रहा है तथा रेलगाड़ी, आरोपित बल की दिशा में ही विस्थापित हो रही है।
(6) इस स्थिति में कोई कार्य सम्पादित नहीं हो रहा है क्योंकि यहाँ पर न तो कोई बल आरोपित हो रहा है और न ही कोई विस्थापन उत्पन्न हो रहा है।
(7) हाँ, इस स्थिति में कार्य संपादित हो रहा है, क्योंकि पवन के कारण नाव उसी दिशा में विस्थापित हो रही है जिस दिशा में हवा उसे धकेल रही है। इसलिए कार्य हो रहा है।
प्रश्न 2. एक पिंड को धरती से किसी कोण पर फेंका जाता है। यह एक वक्र पथ पर चलता है और वापस धरती पर आ गिरता है। पिंड के पथ के प्रारंभिक तथा अन्तिम बिन्दु एक ही क्षैतिज रेखा पर स्थित हैं। पिंड पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया गया?
उत्तर— गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा वस्तु पर शून्य कार्य किया जायेगा, क्योंकि गुरुत्व बल के विरुद्ध किए गए कार्य में, वस्तु का द्रव्यमान एवं गुरुत्वीय त्वरण तो स्थिर रहते हैं, परन्तु उसकी ऊँचाई शून्य हो जाती है। ऐसा पथ के आरम्भिक तथा अन्तिम बिन्दुओं के एक ही क्षैतिज तल में स्थित होने के कारण होता है। चूँकि बल सदा विस्थापन की दिशा में समकोण पर कार्य करता है, इसलिए पिंड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।
प्रश्न 3. एक बैटरी बल्ब जलाती है। इस प्रक्रम में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर— बैटरी में रासायनिक क्रिया होती है, जिससे रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। विद्युत ऊर्जा बल्ब को जलाकर प्रकाश ऊर्जा और ऊष्मा ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है।
प्रश्न 4. द्रव्यमान पर लगने वाला कोई बल इसके वेग को से में परिवर्तित कर देता है। बल द्वारा किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
उत्तर— दिया गया है-
वस्तु का द्रव्यमान
प्रारंभिक वेग
अंतिम वेग
समय
कार्य
कार्य बल विस्थापन
बल को ज्ञात करने के लिए त्वरण का मान ज्ञात होना चाहिए।
त्वरण की परिभाषा से-
या
ऋणात्मक त्वरण का अर्थ है कि मंदन हो रहा है।
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यहाँ पर बल विपरीत दिशा में लगाया जा रहा है।
गति के तीसरे समीकरण से-
विस्थापन
किया गया कार्य = बल विस्थापन
या
यहाँ पर बल विस्थापन की दिशा के विपरीत दिशा में लगता है इसलिए किया गया कार्य ऋणात्मक है।
प्रश्न 5. द्रव्यमान का एक पिंड मेज पर बिन्दु पर रखा है। इसे बिन्दु तक लाया जाता है। यदि तथा को मिलाने वाली रेखा क्षैतिज है तो पिंड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- दिया गया है-
द्रव्यमान
गुरुत्वीय त्वरण (लिया गया है)
गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य
इस स्थिति में, गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा। चूँकि बिन्दु तथा बिन्दु को जोड़ने वाली रेखा एक ही क्षैतिज रेखा में है। इस कारण से होगी और इसके साथ ही गुरुत्वाकर्षण बल का कोई भी घटक पिंड के विस्थापन की दिशा में कार्य नहीं करता है।
प्रश्न 6. मुक्त रूप से गिरते एक पिंड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन करती है? कारण बताइए।
उत्तर- यह ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ही है, क्योंकि जब कोई पिंड मुक्त रूप से गिरता है, तब जिस अनुपात में पिंड की स्थितिज ऊर्जा में कमी आती है, उसी अनुपात में उसकी गतिज ऊर्जा में वृद्धि भी होती है। इसलिए पिंड की कुल ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।
प्रश्न 7. जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन से ऊर्जा रूपांतरण होते हैं?
उत्तर- साइकिल चलाते समय स्थितिज ऊर्जा, पेशीय ऊर्जा में और शरीर की पेशीय ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है।
प्रश्न 8. जब आप अपनी सारी शक्ति लगाकर एक बड़ी चट्टान को धकेलना चाहते हैं और इसे हिलाने में असफल हो जाते हैं, तो क्या इस अवस्था में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है? आपके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ चली जाती है?
उत्तर- चूँकि हम चट्टान को हिलाने में असफल हो जाते हैं तो विस्थापन न होने के कारण हमने कोई कार्य नहीं किया, पर ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, जो ऊष्मा ऊर्जा में बदल जाता है, जो कि हमारे शरीर में जैव रासायनिक क्रियाओं द्वारा पसीने और थकान के रूप में प्रकट होता है।
प्रश्न 9. किसी घर में एक महीने में ऊर्जा की यूनिटें व्यय हुई। यह ऊर्जा जूल में कितनी होगी?
हल- कुल यूनिट
हम जानते हैं-
प्रश्न 10. द्रव्यमान का एक पिंड धरती से की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी है? यदि पिंड को मुक्त रूप से गिरने दिया जाए तो जब पिंड ठीक आधे रास्ते पर है उस समय इसकी गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए। []
हल- दिया गया है-
पिंड का द्रव्यमान
ऊँचाई
पिंड की स्थितिज ऊर्जा
जब वस्तु आधी ऊँचाई पर होती है, तब मुक्त रूप से गिरने पर आरम्भिक वेग
ऊँचाई
गुरुत्वीय त्वरण
गति के तीसरे समीकरण से,
मान रखने पर
पिण्ड की गतिज ऊर्जा
जूल
प्रश्न 11. पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी उपग्रह पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया जाएगा? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर- पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी उपग्रह पर गुरुत्व बल का मान शून्य होता है। चूँकि उपग्रह की गति की दिशा कक्षा के लम्बवत् होती है। इस तरह, बल और विस्थापन की दिशायें एक-दूसरे के लम्बवत् होती हैं।
अतः किया गया कार्य
यहाँ पर है
अतः एकसमान वृत्तीय गति की स्थिति में किया गया कुल कार्य शून्य होता है।
प्रश्न 12. क्या किसी पिण्ड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में, इसका विस्थापन हो सकता है? सोचिए। इस प्रश्न के बारे में अपने मित्रों तथा अध्यापकों से विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर- किसी पिण्ड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में इसका विस्थापन सम्भव हो सकता है। यदि पिण्ड समान वेग से पहले ही चला आ रहा हो, तो किसी बल की अनुपस्थिति में यह पूर्णवत् उसी वेग से चलता रहेगा। अतः इसका विस्थापन सम्भव है। यदि पिण्ड विरामावस्था में है तो न्यूटन के गति के नियमानुसार, यह तब तक विरामावस्था में रहती है, जब तक कि उस पर लगा बल उसकी इस अवस्था में कोई परिवर्तन न कर दे। अतः विरामावस्था में किसी बल की अनुपस्थिति में वस्तु का विस्थापन सम्भव नहीं है।
प्रश्न 13. कोई मनुष्य भूसे के एक गट्ठर को अपने सिर पर 30 मिनट तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कुछ कार्य किया या नहीं? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर- उसने कोई कार्य नहीं किया है। चूँकि यहाँ पर व्यक्ति ने उसकी दिशा में कोई विस्थापन नहीं किया है।
प्रश्न 14. एक विद्युत-हीटर (ऊष्मक) की घोषित शक्ति है। 10 घंटे में यह कितनी ऊर्जा उपयोग करेगा?
उत्तर- दिया गया है-
शक्ति
समय घण्टे
चूँकि हम जानते हैं कि किया गया कार्य ही ऊर्जा होती है।
या वाट घण्टे
यूनिट
प्रश्न 15. जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम को स्पष्ट कीजिए। गोलक कुछ समय पश्चात् विराम अवस्था में क्यों आ जाता है? अंततः इसकी ऊर्जा का क्या होता है? क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है?
उत्तर- (i) सरल लोलक के गोलक की स्थितिज ऊर्जा उस समय सबसे अधिक होती है जब उसे एक तरफ खींचा जाता है। जब इसे दोलन के लिए छोड़ा जाता है, उस स्थिति में उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है और उसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती है। किन्तु माध्य की स्थिति में गतिज ऊर्जा अधिकतम एवं स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाती है। परन्तु कुल ऊर्जा सदैव संरक्षित रहती है।
(ii) लोलक का गोलक अन्त में रुक जाता है। ऐसा लोलक जिस बिन्दु से बंधा रहता है, उसके साथ घर्षण के कारण तथा दोलन करते हुए गोलक के हवा के साथ घर्षण के कारण होता है। इस घर्षण के कारण दोलन करते हुए गोलक की यांत्रिक ऊर्जा धीरे-धीरे ऊष्मा या ताप ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। अंततः यह ताप ऊर्जा वातावरण में खो जाती है।
(iii) अन्त में यह ताप ऊर्जा वातावरण में खो जाती है।
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(iv) नहीं, यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त का उल्लंघन नहीं है।
प्रश्न 16. द्रव्यमान का एक पिंड एक नियत वेग से गतिशील है। पिंड पर कितना कार्य करना चाहिए कि यह विराम अवस्था में आ जाए?
उत्तर -
द्रव्यमान
नियत वेग
पिंड की गतिज ऊर्जा
यह पिंड गति में है।
अतः इस पिंड को विराम अवस्था में लाने के लिए समान मात्रा में कार्य करने की आवश्यकता होगी।
अर्थात् पिंड पर किया जाने वाला कार्य होगा।
प्रश्न 17. द्रव्यमान की कार को जो के वेग से चल रही है, रोकने के लिए किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
उत्तर - दिया गया है-
द्रव्यमान
वेग
कार को रोकने के लिए किये गये कार्य का मान
प्रश्न 18. निम्न में से प्रत्येक स्थिति में द्रव्यमान के एक पिंड पर एक बल लग रहा है। विस्थापन की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर है जो एक लंबे तीर से प्रदर्शित की गई है। चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए और बताइए कि किया गया कार्य ऋणात्मक है, धनात्मक है या शून्य है।
उत्तर -
(1) इस स्थिति में किए गए कार्य की मात्रा शून्य है, क्योंकि बल विस्थापन के लंबवत् कार्य कर रहा है।
कोण पर किया गया कार्य
(2) इस स्थिति में किया गया कार्य धनात्मक है, क्योंकि वस्तु का विस्थापन आरोपित बल की दिशा में हो रहा है।
(3) इस स्थिति में किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि आरोपित बल की विपरीत दिशा में वस्तु का विस्थापन हो रहा है।
प्रश्न 19. सोनी कहती है कि किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। क्या आप उससे सहमत हैं? बताइए क्यों?
उत्तर - हम उसके कथन से सहमत हैं, क्योंकि जब कोई वस्तु विराम अवस्था में होती है तथा उसकी गति शून्य होती है, तब उसमें त्वरण भी शून्य होता है।
यदि सभी बलों का कुल योग शून्य हो तो भी वस्तु का त्वरण शून्य होता है।
जब वस्तु एक समान वेग से गति में होती है, उसका त्वरण शून्य होता है, क्योंकि इस स्थिति में एक साथ कई संतुलनकारी बल कार्य कर सकते हैं।
प्रश्न 20. चार युक्तियाँ, जिनमें प्रत्येक की शक्ति है, घंटे तक उपयोग में लाई जाती हैं। इनके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा जूल में परिकलित कीजिए।
हल -
कुल युक्तियाँ
एक युक्ति की शक्ति
समय
कुल शक्ति कुल युक्तियाँ युक्ति की शक्ति
या
व्यय ऊर्जा शक्ति समय
उत्तर
प्रश्न 21. मुक्त रूप से गिरता एक पिंड अंततः धरती तक पहुँचने पर रुक जाता है। इसकी गतिज ऊर्जा का क्या होता है?
उत्तर— जब कोई पिण्ड मुक्त रूप से गिरता है तब उस पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे गतिज ऊर्जा में बदलने लगती है।
लेकिन जैसे ही पिण्ड पृथ्वी तल पर पहुँचता है तो यह रुक जाता है, जिससे इसका अन्तिम वेग शून्य हो जाता है।
पिण्ड की गतिज ऊर्जा
यहाँ पर अन्तिम वेग का मान शून्य है।
अतः गतिज ऊर्जा
अतः गतिज ऊर्जा शून्य हो जायेगी।
यह गतिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा आदि में रूपान्तरित हो जाती है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. ऊर्जा का मात्रक है-
(अ) वाट
(ब)
(स)
(द) वाट सेकण्ड
2. स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान-
(अ) नियत रहता है
(ब) बढ़ता रहता है
(स) घटता रहता है
(द) शून्य होता है
3. द्रव्यमान का पत्थर मुक्त रूप से दूरी तक गिरता है, इसकी गतिज ऊर्जा का मान होगा-
(अ)
(ब)
(स)
(द) शून्य
4. एक वस्तु का द्रव्यमान आधा तथा वेग दुगुना कर दिया जाता है तो इसकी गतिज ऊर्जा का मान पहले की अपेक्षा होगा-
(अ) चार गुना
(ब) दुगुना
(स) आधा
(द) आठ गुना
5. बन्दूक से दागी गई की गोली की चाल है। गोली की गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए-
(अ)
(ब)
(स)
(द) कोई भी नहीं।
6. कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपान्तरण की दर को कहते हैं-
(अ) कार्य
(ब) शक्ति
(स)
(द)
7. गतिज ऊर्जा का मान निर्भर रहता है-
(अ) केवल वस्तु के द्रव्यमान पर
(ब) केवल वस्तु के वेग पर
(स) द्रव्यमान व वेग दोनों पर
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
8. किसी पिण्ड का वेग दुगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा का मान-
(अ) आधा हो जाता है
(ब) अपरिवर्तित रहता है
(स) चार गुना हो जाता है
(द) दुगुना हो जाता है।
उत्तरमाला
| 1. (द) | 2. (ब) | 3. (अ) | 4. (ब) | 5. (अ) |
|---|---|---|---|---|
| 6. (ब) | 7. (स) | 8. (स) |
रिक्त स्थान वाले प्रश्न-
- किया गया कार्य बल तथा विस्थापन के .................... के बराबर होता है।
- जब बल विस्थापन की दिशा के विपरीत दिशा में लगता है, तो किया गया कार्य .................... होता है।
- किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा का मान का सूत्र .................... होता है।
- स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा = ....................
उत्तरमाला- 1. गुणनफल 2. ऋणात्मक 3. 4. अचर।
सत्य/असत्य कथन वाले प्रश्न-
निम्नलिखित कथनों में सत्य तथा असत्य कथन छाँटिए-
- कार्य करने के लिए दो दशाओं का होना आवश्यक है-
(i) वस्तु पर कोई बल लगना चाहिए।
(ii) वस्तु विस्थापित होनी चाहिए। सत्य/असत्य
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- 1 जूल किसी वस्तु पर किये गये कार्य की वह मात्रा है जब 1 न्यूटन का बल वस्तु को बल की क्रिया रेखा की दिशा में 1 मीटर विस्थापित कर दे। सत्य/असत्य
- किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। सत्य/असत्य
- वस्तु पर किया गया कार्य के बराबर होता है। सत्य/असत्य
उत्तरमाला- 1. सत्य 2. सत्य 3. सत्य 4. असत्य।
मिलान वाले प्रश्न-
निम्नलिखित प्रश्नों में भाग (अ) का मिलान भाग (ब) से करके सही कूट (कोड) का चयन कीजिए-
| प्रश्न 1. भाग (अ) | भाग (ब) |
|---|---|
| (i) कार्य का मात्रक | (a) |
| (ii) किया गया कार्य = | (b) |
| (iii) गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा = | (c) |
| (iv) स्थितिज ऊर्जा | (d) बल विस्थापन |
| (v) शक्ति | (e) जूल |
उत्तर-(i) (e) (ii) (d) (iii) (a) (iv) (b) (v) (c)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. एक कुली एक अटैची लेकर खड़ा है। क्या वह कोई कार्य सम्पादित कर रहा है?
उत्तर- नहीं, चूँकि विस्थापन शून्य है।
प्रश्न 2. जब किसी तीर को छोड़ा जाता है तो उसकी गतिज ऊर्जा कहाँ से प्राप्त होती है?
उत्तर- संचित स्थितिज ऊर्जा से।
प्रश्न 3. पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर किसी द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कितनी होती है?
उत्तर- .
प्रश्न 4. एक वृत्ताकार पथ में गति कर रही वस्तु द्वारा एक चक्कर में किये गये कार्य का मान कितना होगा?
उत्तर- शून्य, क्योंकि वृत्ताकार पथ में एक चक्कर में विस्थापन शून्य होता है।
प्रश्न 5. न्यूनतम तथा अधिकतम कार्य के लिये बल तथा विस्थापन के बीच कितना कोण होगा?
उत्तर- एवं .
प्रश्न 6. किसी निकाय में अभिविन्यास के कारण कौनसी ऊर्जा संग्रहित होगी?
उत्तर- स्थितिज ऊर्जा।
प्रश्न 7. क्या किसी वस्तु को उठाने में किया गया कार्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसे उठाने में कितना समय लगा?
उत्तर- नहीं, क्योंकि कार्य, बल एवं विस्थापन का गुणनफल होता है।
प्रश्न 8. दो हर प्रकार की समान वस्तुएँ A व B एक ही वेग से लम्बवत् दिशा में गति कर रही हैं। उनकी गतिज ऊर्जा का अनुपात बताइये।
उत्तर-
प्रश्न 9. ऊर्जा संरक्षण के नियम को प्रयोगात्मक रूप से सत्यापित करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
उत्तर- जेम्स प्रेस्कॉट जूल।
प्रश्न 10. एक व्यक्ति न्यूटन के बल से एक मकान की दीवार को धक्का दे रहा है। किया गया कार्य क्या होगा?
उत्तर- किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि विस्थापन नहीं हो रहा है।
प्रश्न 11. जब हम धनुष पर तीर चढ़ाते हैं तो उसमें कैसी ऊर्जा संचित होती है?
उत्तर- स्थितिज ऊर्जा।
प्रश्न 12. यांत्रिक ऊर्जा के मुख्य दो रूप कौन-कौनसे हैं?
उत्तर- (1) गतिज ऊर्जा (2) स्थितिज ऊर्जा।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. वस्तु पर लग रहे बल के कारण, वस्तु पर कार्य न होने के प्रतिबन्ध बताइये।
उत्तर- वस्तु पर कार्य न होने के प्रतिबन्ध-
निम्न स्थितियों में किया गया कार्य का मान शून्य होगा-
(i) जब बल द्वारा वस्तु में विस्थापन नहीं हो, तो कार्य का मान शून्य होगा।
(ii) बल जब विस्थापन की दिशा के लम्बवत् कार्य करे, तो बल का मान शून्य होगा।
(iii) विस्थापन के अनुदिश बल के घटक का मान शून्य होने पर कार्य का मान भी शून्य होगा।
प्रश्न 2. बल द्वारा धनात्मक व ऋणात्मक कार्य कब होता है? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर- (1) धनात्मक- जब किसी वस्तु पर आरोपित बल और विस्थापन एक ही दिशा में होता है तो किया गया कार्य धनात्मक होता है।
उदाहरण- जब घोड़ा गाड़ी को खींचता है तो
आरोपित बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होता है। अतः घोड़े द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होता है।
(2) ऋणात्मक - जब बल विस्थापन की दिशा के विपरीत दिशा में लगता है तो किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
उदाहरण के लिए - चलती गाड़ी में ब्रेक लगाने पर रुकने तक कार जितनी दूरी तक चलती है, वह बल के विरुद्ध होता है। ऐसी स्थिति में किया गया कार्य ऋणात्मक कार्य है।
प्रश्न 3. शक्ति किसे कहते हैं? शक्ति एवं कार्य में क्या अन्तर है?
उत्तर - शक्ति - कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपान्तरण की दर को शक्ति कहते हैं। माना कोई साधन समय में कार्य करता है, तो
साधन की शक्ति
इसका मात्रक जूल/सेकण्ड या वाट शक्ति होता है। शक्ति का बड़ा मात्रक किलोवाट है। यह एक अदिश राशि है।
कार्य - यह बल व विस्थापन के गुणनफल से ज्ञात करते हैं या कार्य () की गणना करनी हो तो कार्य () = शक्ति () समय () होता है। कार्य एक अदिश राशि है। इसका मात्रक जूल होता है।
प्रश्न 4. गुलेल में ऊर्जा कैसे संचित होती है?
उत्तर - जब गुलेल के रबड़ को किसी गोली या कंकड़ के साथ खींचते हैं, तो रबड़ को खींचने में किया गया कार्य उसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अब यदि गोली या कंकड़ को छोड़ दिया जाता है, तब गुलेल में संचित स्थितिज ऊर्जा कंकड़ की गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है, जिससे कंकड़ गतिशील हो दूर जाकर गिरता है।
प्रश्न 5. एक महिला और उसकी बेटी एकसमान वेग से दौड़ रही हैं। यदि महिला का द्रव्यमान बेटी से दोगुना है, तो उन दोनों की गतिज ऊर्जा में क्या अनुपात होगा?
उत्तर - गतिज ऊर्जा
यहाँ = समान
= महिला का बेटी से दुगुना द्रव्यमान
इसलिए दोनों की गतिज ऊर्जाओं का अनुपात होगा।
प्रश्न 6. फर्श पर चाबी भरकर खिलौने को रखने पर यह चलने लगता है। क्या उपार्जित ऊर्जा, चाबी द्वारा भरे गए लपेटनों की संख्या पर निर्भर करती है?
उत्तर - खिलौने में चाबी भरते समय किया गया कार्य लपेटनों में, स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है। यह उपार्जित ऊर्जा, चाबी द्वारा भरे गए लपेटनों की संख्या पर निर्भर करती है। लपेटनों की संख्या अधिक होने पर अधिक ऊर्जा संचित होती है, जिससे खिलौना अधिक देर तक चलता है।
प्रश्न 7. गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं? इसके कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर - गतिज ऊर्जा - किसी वस्तु में, उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं। किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी चाल के साथ बढ़ती है।
उदाहरण -
(1) वायु की गतिज ऊर्जा से पवन चक्की चलती है।
(2) गतिशील पानी, पन बिजली संयन्त्र में टरबाइनें चलाता है।
(3) एक बन्दूक की गोली लक्ष्य को गतिज ऊर्जा के कारण ही भेद पाती है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. कार्य की परिभाषा दीजिये। बल तथा कार्य में सम्बन्ध बताइये। सम्पादित कार्य के लिए आवश्यक सूत्र ज्ञात कीजिये (जब विस्थापन बल की दिशा में हो)।
उत्तर - कार्य - किसी वस्तु पर लगने वाले बल द्वारा किया गया कार्य, बल के परिमाण तथा बल की दिशा में चली गई दूरी अर्थात् विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है।
कार्य में केवल परिमाण होता, कोई दिशा नहीं होती।
सम्पादित कार्य जब विस्थापन बल की दिशा में हो -
चित्र में एक वस्तु किसी समय स्थिति पर है। इस वस्तु पर बल लगाने पर यह बल की दिशा में दूरी से विस्थापित होकर नई स्थिति पर पहुँच जाती है। तब बल द्वारा सम्पादित कार्य () होगा -
या
या
प्रश्न 2. स्थितिज ऊर्जा को समझाइये। गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा हेतु आवश्यक सूत्र ज्ञात कीजिये।
उत्तर - स्थितिज ऊर्जा - वस्तु की स्थिति अथवा
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आकृति में परिवर्तन के कारण जो ऊर्जा उत्पन्न होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा - गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किए गए कार्य के कारण वस्तुओं में संचित ऊर्जा, गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहलाती है।
माना द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी तल पर रखी है। यदि पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण है तो वस्तु पर कार्यरत गुरुत्वीय बल-
अब इस वस्तु को पृथ्वी तल (स्थिति A) से ऊँचाई (स्थिति B) तक ऊर्ध्वाधर दिशा में विस्थापित करते हैं।
अतः: गुरुत्वीय बल के विपरीत किया गया कार्य-
या ()
यही कार्य वस्तु में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
अतः: स्थितिज ऊर्जा
इस गणना में पृथ्वी तल को शून्यांकी अवस्था माना गया है। अतः: गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा ऊँचाई के समानुपातिक होती है।
प्रश्न 3. यांत्रिक ऊर्जा कितने प्रकार की होती है? गतिज ऊर्जा के लिये सूत्र ज्ञात कीजिये।
उत्तर- यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है-
(1) गतिज ऊर्जा (2) स्थितिज ऊर्जा।
चित्र-गतिज ऊर्जा की गणना
गतिज ऊर्जा-किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं।
गतिज ऊर्जा के लिये सूत्र की स्थापना निम्न प्रकार से करते हैं-
माना द्रव्यमान की वस्तु विराम अवस्था में स्थिति A पर है। इस पर बल लगाने पर यह बल की दिशा में दूरी तय करती है। यदि बल के कारण वस्तु में उत्पन्न त्वरण () तथा दूरी तय करने में किया गया कार्य हो तो,
त्वरण
या
कार्य = बल विस्थापन
या
कार्य
.....(1)
यदि स्थिति B पर वस्तु का वेग है तो गति के तृतीय समीकरण के अनुसार-
या
का मान समीकरण (1) में रखने पर-
अर्थात् बल द्वारा कुल किया गया कार्य = है। यही कार्य वस्तु को गतिज ऊर्जा प्रदान करता है क्योंकि यह कार्य वस्तु में संचित हो जाता है।
अतः: वस्तु की गतिज ऊर्जा
.....(2)
समीकरण (2) से स्पष्ट है कि गतिज ऊर्जा वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग पर निर्भर करती है।
अतः: द्रव्यमान की एक समान वेग से गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान-
प्रश्न 4. सिद्ध कीजिये कि वस्तु ऊँचाई से जैसे-जैसे धरातल की ओर आती है, स्थितिज ऊर्जा घटती है एवं समान मात्रा में गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
उत्तर- माना द्रव्यमान की वस्तु पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर चित्र में बिन्दु A पर स्थिर अवस्था में है। बिन्दु A पर वस्तु में केवल स्थितिज ऊर्जा होगी और गतिज ऊर्जा शून्य होगी। बिन्दु A पर स्थितिज ऊर्जा का मान है। माना वस्तु स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती है और जब वस्तु धरातल पर पहुँचती है तब उसकी चाल
होती है। अतः बिन्दु B पर गतिज ऊर्जा का मान होगा। यहाँ पर इसलिए स्थितिज ऊर्जा होगी।
गति के तीसरे समीकरण से बिन्दु B पर वस्तु की चाल
बिन्दु B पर वस्तु की गतिज ऊर्जा
()
या
अर्थात् पृथ्वी के धरातल पर वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान बिन्दु A पर स्थितिज ऊर्जा के तुल्य होता है। स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु की स्थितिज ऊर्जा में कमी, उसकी गतिज ऊर्जा में वृद्धि के तुल्य होती है। वस्तु ऊँचाई से जैसे-जैसे धरातल की ओर आती है, स्थितिज ऊर्जा घटती है एवं समान मात्रा में गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
अर्थात्
आंकिक प्रश्न-
प्रश्न 1. किसी वस्तु पर बल लग रहा है। बल की दिशा में वस्तु विस्थापित होती है। यदि विस्थापन होते समय लगातार वस्तु पर बल लगता रहे, तो किए गए कार्य की गणना कीजिए।
हल-
किया गया कार्य
प्रश्न 2. यदि किसी कार का द्रव्यमान है तो उसके वेग को से तक बढ़ाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
हल- दिया गया है-
कार का द्रव्यमान
कार का प्रारम्भिक वेग
कार का अन्तिम वेग
कार की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
मान रखने पर-
इसी प्रकार कार की अन्तिम गतिज ऊर्जा
अतः किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
उत्तर
प्रश्न 3. एक इंजन मिनट में जूल ऊर्जा उत्पन्न करता है। उसकी शक्ति की गणना कीजिए।