Sound
ध्वनि
हल- शक्ति |
अर्थात् | जूल/सेकण्ड
| | अतः इंजन की शक्ति जूल/सेकण्ड
11. ध्वनि (Sound)
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 145
प्रश्न 1. किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर- जब कोई वस्तु कम्पन करती है, तो यह अपने चारों ओर विद्यमान माध्यम के कणों को कम्पायमान कर देती है। ये कण कम्पायमान वस्तु से हमारे कानों तक स्वयं गति कर नहीं पहुँचते। सबसे पहले कम्पायमान वस्तु के सम्पर्क में रहने वाले माध्यम के कण अपनी संतुलित अवस्था से विस्थापित होते हैं। फिर ये अपने समीप के कणों पर एक बल लगाते हैं, जिसके फलस्वरूप निकटवर्ती कण अपनी विरामावस्था से विस्थापित हो जाते हैं। निकटवर्ती कणों को विस्थापित करने के पश्चात् प्रारम्भिक कण अपनी मूल अवस्थाओं में वापस लौट आते हैं। माध्यम में यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कि ध्वनि हमारे कानों तक नहीं पहुँच जाती। माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ माध्यम से होता हुआ संचरित होता है।
पृष्ठ 149
प्रश्न 1. तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है?
(a) प्रबलता (b) तारत्व।
उत्तर-(a) प्रबलता- ध्वनि की प्रबलता अथवा मृदुता मूलतः तरंग के आयाम से ज्ञात की जाती है। बड़े आयाम की ध्वनि प्रबल तथा छोटे आयाम की ध्वनि मृदु होती है।
तरंग की प्रबलता अधिक ऊर्जा से सम्बद्ध होती है। अधिक ऊर्जा से उत्पादित ध्वनि तरंग प्रबल होती है और दूर तक जाती है।
(b) तारत्व- ध्वनि का तारत्व, उसकी आवृत्ति द्वारा निर्धारित होता है। उच्च आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व अधिक एवं निम्न आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व कम होता है।
प्रश्न 2. अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है-
(a) गिटार (b) कार का हॉर्न।
उत्तर-(a) गिटार।
पृष्ठ 149
प्रश्न 1. किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-(i) ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य- न्यूनतम दूरी जिसमें ध्वनि तरंग अपनी पुनरावृत्ति करती है, उसकी तरंगदैर्घ्य (Wavelength) कहलाती है। अर्थात् दो क्रमागत संपीडनों या विरलनों (अनुदैर्घ्य तरंग के लिए) अथवा दो क्रमागत श्रृंगों या गर्तों (अनुप्रस्थ तरंग के लिए) के बीच की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।
इस प्रकार तरंगदैर्घ्य एक तरंग की लम्बाई होती है। इसे साधारणतः (लैम्डा) से प्रदर्शित करते हैं। इसका SI मात्रक, मीटर होता है।
, amplitude, crests (B, F), troughs (D, H), and compression/rarefaction regions" class="mx-auto rounded-lg shadow-sm max-w-full h-auto border border-slate-200 dark:border-slate-800" loading="lazy" />
चित्र में संपीडन तथा समीपवर्ती विरलन के केंद्रों के बीच की दूरी आधी तरंगदैर्घ्य के बराबर है।
(ii) आवृत्ति- किसी माध्यम में तरंग संचरण के कारण माध्यम के किसी कण द्वारा एकांक समय में किए गए कम्पनों की कुल संख्या, उस तरंग की आवृत्ति कहलाती है। आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) होता है।
है। इसे (न्यू) से प्रदर्शित करते हैं। (न्यू) = होता है। इस प्रकार से तरंग की आवृत्ति उसके आवर्तकाल के व्युत्क्रम होती है।
(iii) आवर्तकाल - दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों को किसी निश्चित बिन्दु से गुजरने में लगे समय को तरंग का आवर्तकाल कहते हैं।
इसे 'T' से प्रदर्शित करते हैं एवं इसका मात्रक 'सेकण्ड' होता है।
(iv) आयाम - किसी माध्यम में तरंग संचरण के कारण किसी कण का मूल स्थिति के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ तरंग का आयाम कहलाता है।
इसे साधारणतः 'a' से निरूपित करते हैं। उपरोक्त चित्र में PB तरंग का आयाम है।
प्रश्न 2. किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार संबंधित है?
उत्तर - चूँकि वेग =
माना T समय में एक तरंगदैर्घ्य दूरी (जो कि तरंगदैर्घ्य है) तय करती है, तो
यहाँ पर T एक तरंग द्वारा लिया गया समय है।
हम जानते हैं कि तरंगों की संख्या प्रति सेकण्ड होती है और यह तरंग की आवृत्ति (न्यू) कहलाती है।
इसलिए उपर्युक्त सम्बन्ध में हम के स्थान पर (न्यू) लिख सकते हैं। अतः:
या .....(1)
जहाँ पर = तरंग का वेग
= तरंग की आवृत्ति
और = तरंगदैर्घ्य
अर्थात् तरंग का वेग = आवृत्ति तरंगदैर्घ्य
अतः माध्यम में तरंग का वेग (या चाल) उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के गुणनफल के बराबर होता है।
समीकरण तरंग समीकरण कहलाता है।
प्रश्न 3. किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति तथा वेग है। इस तरंग की तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
हल - दिया गया है -
तरंग वेग =
तरंग की आवृत्ति =
तरंगदैर्घ्य = ?
वेग () = तरंगदैर्घ्य () आवृत्ति ()
तरंगदैर्घ्य () =
=
अतः इस तरंग की तरंगदैर्घ्य होगी।
प्रश्न 4. किसी ध्वनिस्रोत से दूरी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य की ध्वनि सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अंतराल होगा?
हल - दिया गया है -
ध्वनि की आवृत्ति () =
आवर्तकाल () = ?
हम जानते हैं कि -
आवृत्ति =
या
अतः स्रोत से दूर बैठे व्यक्ति तक क्रमागत संपीडनों के बीच का आवर्तकाल होगा।
पृष्ठ 150
प्रश्न 1. ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
उत्तर - ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर -
| प्रबलता | तीव्रता |
|---|---|
| 1. कानों की संवेदनशीलता की माप को ध्वनि की प्रबलता कहते हैं। | इकाई क्षेत्रफल से, एक सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं। |
| 2. ध्वनि की प्रबलता को मापा नहीं जा सकता। | ध्वनि की तीव्रता मापी जा सकती है। |
| 3. ध्वनि की प्रबलता, तरंग की ऊर्जा की तुलना में, हमारे कानों की संवेदनशीलता पर अधिक निर्भर करती है। | ध्वनि की तीव्रता का सम्बन्ध उसकी ऊर्जा से होता है। |
588
पृष्ठ 150
प्रश्न 1. वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
उत्तर- लोहे में से ध्वनि वायु और जल की अपेक्षा तेज चलती है।
पृष्ठ 152
प्रश्न 1. कोई प्रतिध्वनि पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल हो तो स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच कितनी दूरी होगी?
हल- ध्वनि की चाल
प्रतिध्वनि सुनने में लिया गया समय
ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी
में प्रतिध्वनि सुनाई देती है।
अतः में ध्वनि ने स्रोत तथा परावर्तक के बीच की दुगुनी दूरी तय की।
अतः उन दोनों के बीच की दूरी
उत्तर
पृष्ठ 153
प्रश्न 1. कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती हैं?
उत्तर- कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार इसलिए बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल के सभी भागों में पहुँच जाए। कभी-कभी वक्राकार ध्वनि-पट्टों को मंच के पीछे रख दिया जाता है, जिससे कि ध्वनि, ध्वनि-पट्ट से परावर्तन के पश्चात् समान रूप से पूरे हॉल में फैल जाये।
चित्र-कंसर्ट हॉल की वक्राकार छत
पृष्ठ 154
प्रश्न 1. सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास क्या है?
उत्तर- मनुष्यों में ध्वनि की श्रव्यता का परास लगभग से तक होता है।
प्रश्न 2. निम्न से संबंधित आवृत्तियों का परास क्या है?
(a) अवश्रव्य ध्वनि (b) पराध्वनि।
उत्तर- (a) अवश्रव्य ध्वनि- से कम आवृत्ति की ध्वनियों को अवश्रव्य ध्वनि कहते हैं, जिन्हें सामान्य व्यक्ति सुन नहीं सकता।
(b) पराध्वनि- से अधिक की ध्वनियों को पराध्वनि या पराश्रव्य ध्वनि कहते हैं। इनको भी हम सुन नहीं सकते। डॉल्फिन, चमगादड़, पॉरपॉइज पराध्वनि उत्पन्न करते हैं।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर- ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है, जो हमारे कान में श्रवण संवेदना उत्पन्न करती है। अतः ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है, जिससे हमें सुनाई देता है। हम अपने दैनिक जीवन में अपने चारों ओर अनेक ध्वनियाँ सुनते हैं।
हम विभिन्न वस्तुओं में घर्षण द्वारा, खुरच कर, वायु फूँक कर या उनको हिलाकर ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं। हम वस्तु को कंपन करते हैं और ध्वनि उत्पन्न करते हैं। मनुष्यों में वाक्ध्वनि उनके वाक्-तंतुओं के कंपित होने के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई पक्षी पंख को फड़फड़ाता है, तो ध्वनि उत्पन्न होती है। मक्खी के भिनभिनाने से ध्वनि उत्पन्न होती है। एक खींचे हुए रबड़ के छल्ले को बीच में से खींचकर छोड़ने पर यह कंपन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। इस प्रकार ध्वनि कंपन करती हुई वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है।
प्रश्न 2. एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट वायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर- ध्वनि का संचरण-ध्वनि के संचरण के लिए वायु सबसे अधिक सामान्य माध्यम है। जब कोई कंपन करने वाली वस्तु आगे की ओर कंपन करती है, तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीडित करती है, जिससे कि उच्च दबाव का क्षेत्र बनता है। यह
क्षेत्र 'संपीडन' (C) कहलाता है। यह क्षेत्र कंपित वस्तु से दूर आगे की ओर गति करता है।
जब कंपित वस्तु पीछे की ओर कंपन करती है, तो उससे एक निम्न दाब का क्षेत्र बनता है, जिसे 'विरलन' (R) कहते हैं। जैसे-जैसे वस्तु कंपन करती है, वैसे-वैसे हवा में संपीडनों और विरलनों की एक श्रेणी बन जाती है। यही संपीडन और विरलन ध्वनि तरंग बनाते हैं, जिसका हवा में संचरण होता है।
चित्र-कंपमान वस्तु किसी माध्यम में संपीडन (C) तथा विरलन (R) की श्रेणी उत्पन्न करते हुए
प्रश्न 3. ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है?
उत्तर- किसी माध्यम में ध्वनि संपीडनों तथा विरलनों के रूप में संचरित होती है। जब ध्वनि तरंगें संचरित होती हैं, तब हवा के कण तरंग की गति की दिशा के अनुदिश अर्थात् समानान्तर गति करते हैं। इसलिए ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य होती है।
प्रश्न 4. ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है?
उत्तर- ध्वनि की गुणता वह अभिलक्षण है जो हमें आवाज पहचानने में सहायता करता है और हम मित्र की आवाज पहचान लेते हैं।
प्रश्न 5. तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं। लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर- तड़ित की चमक व गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं लेकिन पहले चमक दिखाई देती है, गर्जन की आवाज बाद में सुनाई देती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वायु में प्रकाश की गति बहुत तीव्र होती है जबकि ध्वनि की गति अपेक्षाकृत कम है। अतः ध्वनि कुछ सेकण्ड बाद सुनाई देती है।
प्रश्न 6. किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परास से है। इन दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग लीजिए।
हल- दिया गया है-
(I) आवृत्ति
वायु में ध्वनि का वेग
तरंगदैर्ध्य
वेग = तरंगदैर्ध्य आवृत्ति
अतः तरंगदैर्ध्य
(II) आवृत्ति
वायु में ध्वनि का वेग
तरंगदैर्ध्य
वेग = तरंगदैर्ध्य आवृत्ति
इस प्रकार, और के अनुरूप तरंगदैर्ध्य है क्रमशः और
प्रश्न 7. दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल- हवा में ध्वनि का वेग
ऐलुमिनियम में ध्वनि का वेग
माना ऐलुमिनियम रॉड की लम्बाई मीटर है।
या
हवा में लिया गया समय सेकण्ड
इसी प्रकार से ऐलुमिनियम में लिया गया समय
590
सेकण्ड
अनुपात लेने पर-
अतः समय का अनुपात होगा
प्रश्न 8. किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति है। एक मिनट में यह कितनी बार कम्पन करेगा?
हल - आवृत्ति
समय
कंपनों की संख्या
उत्तर
प्रश्न 9. क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए।
उत्तर - हाँ, ध्वनि भी परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है, जिनका प्रकाश की तरंगें करती हैं। ये नियम इस प्रकार से हैं-
(i) परावर्तक सतह पर खींचे गये अभिलम्ब तथा ध्वनि के आपतन होने की दिशा तथा परावर्तन की दिशा के बीच बने कोण आपस में बराबर होते हैं।
(ii) इन तीनों की दिशाएँ एक ही तल में होती हैं।
प्रश्न 10. ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक सतह के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक सतह की दूरी स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी-(i) जिस दिन तापमान अधिक हो? (ii) जिस दिन तापमान कम हो?
उत्तर - चूँकि
अर्थात् समय और वेग में प्रतिलोम अनुपात होता है।
किसी भी माध्यम का ताप बढ़ाने से उसमें ध्वनि का वेग बढ़ जाता है इसलिए गर्म दिन में अधिक तापमान के कारण ध्वनि का वेग बढ़ जाएगा और हमें प्रतिध्वनि ठंडे दिन की अपेक्षा शीघ्र सुनाई देगी।
प्रश्न 11. ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर - (i) मेगाफोन, लाउडस्पीकर, हॉर्न, शहनाई आदि को आगे से खुला और शंक्वाकार आकार के बनाये जाते हैं, जिससे स्रोत से उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगों को बार-बार परावर्तित करके श्रोताओं की ओर आगे की दिशा में भेजा जा सके।
(ii) चिकित्सकों के द्वारा हृदय तथा फेफड़ों में उत्पन्न ध्वनि को सुनने के लिए स्टेथोस्कोप का प्रयोग किया जाता है। इससे रोगी के हृदय की धड़कन बार-बार परावर्तन के कारण डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।
प्रश्न 12. ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में इसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी?
तथा ध्वनि की चाल
हल - मीनार की ऊँचाई
ध्वनि की चाल
ध्वनि द्वारा तालाब से मीनार की चोटी पर पहुँचने में लगा समय
पत्थर द्वारा चोटी से तालाब तक पहुँचने में लगा समय
से
अतः ध्वनि को मीनार की चोटी तक पहुँचने में लगा कुल समय
उत्तर
प्रश्न 13. एक ध्वनि तरंग की चाल से चलती है। यदि इसकी तरंगदैर्घ्य हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी? क्या यह श्रव्य होगी?
हल - ध्वनि की चाल
तरंगदैर्घ्य
हम जानते हैं-
चाल
अतः यह श्रव्य नहीं है।
प्रश्न 14. अनुरणन क्या है? इसे कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर - अनुरणन - किसी बड़े हॉल में उत्पन्न होने वाली ध्वनि दीवारों से बारंबार परावर्तन के कारण काफी समय तक बनी रहती है। जब तक कि यह इतनी कम न हो जाये, कि यह सुनाई ही न पड़े। यह बारंबार परावर्तन, जिसके कारण ध्वनि-निर्बंध होता है, अनुरणन कहलाता है।
अनुरणन को कम करने के लिए सभा भवन की छतों तथा दीवारों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थों जैसे संपीड़ित फाइबर बोर्ड, खुरदरे प्लास्टर अथवा पर्दे लगा देते हैं।
प्रश्न 15. ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर - किसी ध्वनि की प्रबलता उसकी तीव्रता है। ध्वनि की प्रबलता ध्वनि के आयाम पर निर्भर करती है। ऐसी ध्वनि को जिसमें अधिक ऊर्जा होती है, उसकी प्रबलता कहते हैं अर्थात् इकाई क्षेत्र से सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि को प्रबलता कहते हैं।
कारक - यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है -
(i) आयाम पर
(ii) ऊर्जा पर
(iii) तीव्रता पर
(iv) तरंग के वेग पर।
इकाई क्षेत्र से सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि को प्रबलता कहते हैं।
प्रश्न 16. वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
उत्तर - पराध्वनि वस्तुओं के प्रायः उन भागों को साफ करने में उपयोग की जाती है जिन तक पहुँचना कठिन होता है। जैसे-सर्पिलाकार नली, विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि। जिन वस्तुओं को साफ करना कठिन होता है, उन्हें साफ करने वाले मार्जन विलयन में रखते हैं और इस विलयन में पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण धूल, चिकनाई तथा गंदगी के कण अलग होकर नीचे गिर जाते हैं। इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है।
प्रश्न 17. किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर - पराध्वनि का उपयोग धातुओं से बने ब्लॉकों (पिण्डों) में दरारों तथा अन्य दोषों का पता लगाने के लिए किया जाता है। धातु के ब्लॉकों में विद्यमान दरार या छिद्र जो बाहर से दिखाई नहीं देते, भवन या पुल की संरचना की मजबूती को कम कर देते हैं। पराध्वनि तरंगें धातु के ब्लॉक से गुजारी (प्रेषित की) जाती हैं और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। यदि थोड़ा-सा भी दोष होता है, तो पराध्वनि तरंगें परावर्तित हो जाती हैं, जो दोष की उपस्थिति को दर्शाती हैं।
--- अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न ---
बहुचयनात्मक प्रश्न -
एक पूर्णतः दृढ़ छड़ में ध्वनि की चाल होती है-
(अ) शून्य
(ब) अनन्त
(स)
(द)एक दर्शक समुद्र के किनारे खड़ा होकर देखता है कि तरंगें एक मिनट में किनारे तक पहुँचती है।
हैं। यदि तरंगों की तरंगदैर्घ्य मीटर हो तो उनकी चाल होगी-
(अ) (ब)
(स) (द) शून्य
ध्वनि की चाल निम्न में से किसमें अधिकतम होती है-
(अ) पानी में (ब) लोहे में
(स) हवा में (द) निर्वात मेंकिसी गैस में उत्पन्न ध्वनि तरंग सदैव होती है-
(अ) अनुदैर्घ्य (ब) अनुप्रस्थ
(स) अप्रगामी (द) विद्युत चुम्बकीय तरंगेंएक रेडियो प्रसारण केन्द्र की आवृत्ति है। केन्द्र से प्रसारित तरंगों की तरंगदैर्घ्य होगी-
(अ) मीटर (ब) मीटर
(स) मीटर (द) मीटरनिम्न में से कौनसी ध्वनि का तारत्व अधिक होता है?
(अ) शोर (ब) संगीत
(स) तीक्ष्ण ध्वनि (द) मोटी ध्वनितरंग गति में दो लगातार श्रृंगों के मध्य दूरी सेमी. है तथा किसी बिन्दु से प्रति सेकण्ड तरंग गुजरती हैं। तरंग वेग का मान होगा-
(अ) सेमी./सेकण्ड
(ब) सेमी./सेकण्ड
(स) सेमी./सेकण्ड
(द) सेमी./सेकण्डअनुप्रस्थ तरंगें संचरित हो सकती हैं-
(अ) केवल धातुओं में
(ब) केवल गैसों में
(स) गैस तथा धातुओं में
(द) न गैसों में और न ही धातुओं में
उत्तरमाला
| 1. (ब) | 2. (ब) | 3. (ब) | 4. (अ) | 5. (ब) |
|---|---|---|---|---|
| 6. (स) | 7. (ब) | 8. (अ) |
रिक्त स्थान वाले प्रश्न-
वह तरंग जिसमें संपीडन और विरलन है, कहलाती है ....................।
ध्वनि की चाल .................... में अधिकतम होती है।
प्रति सेकण्ड समय में पूर्ण किये गये दोलनों की संख्या को .................... कहते हैं।
एक स्वतन्त्र रूप से लटकी स्लिंकी को खींचकर छोड़ दिया जाये तो .................... प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं।
उत्तरमाला- 1. अनुदैर्घ्य तरंग 2. ठोस 3. आवृत्ति 4. अनुदैर्घ्य तरंगें।
सत्य/असत्य कथन वाले प्रश्न-
निम्नलिखित कथनों में सत्य तथा असत्य कथन छाँटिए-
- ध्वनि संचरण के लिये माध्यम की आवश्यकता होती है। (सत्य/असत्य)
- जब किसी तरंग में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं, तब अनुदैर्घ्य तरंगें होती हैं। (सत्य/असत्य)
- ध्वनि की चाल माध्यम के गुणों पर निर्भर नहीं करती है। यह माध्यम के ताप पर भी निर्भर नहीं करती है। ध्वनि की चाल ठोसों में कम तथा गैसों में अधिक होती है। (सत्य/असत्य)
- ध्वनि की चाल आर्द्रता बढ़ने पर बढ़ती है। (सत्य/असत्य)
उत्तरमाला- 1. सत्य 2. असत्य 3. असत्य 4. सत्य।
मिलान वाले प्रश्न-
निम्नलिखित प्रश्न में भाग (अ) का मिलान भाग (ब) से करके सही कूट (कोड) का चयन कीजिए-
| प्रश्न 1. भाग (अ) | भाग (ब) |
|---|---|
| (i) पराश्रव्य तरंगें | (a) आवृत्ति तरंगदैर्घ्य |
| (ii) प्रघाती तरंगें | (b) आवृत्ति से |
| (iii) अपश्रव्य तरंगें | (c) आवृत्ति से अधिक |
| (iv) श्रव्य तरंगें | (d) वस्तु की चाल ध्वनि की चाल से अधिक |
| (v) तरंग का वेग | (e) आवृत्ति से कम |
उत्तर- (i) (c) (ii) (d) (iii) (e) (iv) (b) (v) (a)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. ध्वनि तरंगों के अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर- आवृत्ति, आयाम और वेग।
प्रश्न 2. ध्वनि तरंगें किस प्रकार की तरंगें होती हैं?
उत्तर- अनुदैर्घ्य तरंगें।
प्रश्न 3. ध्वनि संचरण के लिए सबसे अधिक सामान्य माध्यम कौनसा है?
उत्तर-वायु।
प्रश्न 4. ध्वनि संचरण को ग्राफीय निरूपण द्वारा दर्शाने पर वक्र का शिखर किसको प्रदर्शित करता है?
उत्तर-अधिकतम संपीडन के क्षेत्र को।
प्रश्न 5. प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
उत्तर-हैनरिच रुडोल्फ हर्ट्ज।
प्रश्न 6. तरंगदैर्घ्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-तरंगों के दो क्रमागत संपीडनों (C) अथवा दो क्रमागत विरलनों (R) के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य कहलाती है।
प्रश्न 7. टोन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-एकल आवृत्ति की ध्वनि को टोन कहते हैं।
प्रश्न 8. अनुप्रस्थ तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं?
उत्तर-ठोसों में तथा द्रवों की सतह पर, जिनमें दृढ़ता होती है।
प्रश्न 9. जल में पत्थर फेंकने पर जल की सतह पर किस प्रकार की तरंगें होती हैं?
उत्तर-अनुप्रस्थ तरंगें।
प्रश्न 10. स्वर (note) किसे कहते हैं?
उत्तर-अनेक आवृत्तियों के मिश्रण से उत्पन्न ध्वनि को स्वर कहते हैं।
प्रश्न 11. ध्वनि क्या है?
उत्तर-ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है, जो हमारे कानों में श्रवण का संवेदन उत्पन्न करती है।
प्रश्न 12. कम्पन का क्या अर्थ है?
उत्तर-किसी वस्तु का तेजी से बार-बार आगे-पीछे गति करना।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. क्या कारण है कि जब हम अपने हाथों को आगे-पीछे करते हैं तो इसकी ध्वनि सुनाई नहीं देती है?
उत्तर-जब हम अपने हाथों को हिलाते हैं तो हाथ के कम्पन की आवृत्ति से कम होती है। चूँकि मनुष्य से कम्पन प्रति सेकण्ड के बीच आवृत्ति वाली ध्वनि को ही सुन सकता है। इसी कारण जब हम अपने हाथ आगे-पीछे करते हैं तब हमें ध्वनि सुनाई नहीं देती है।
प्रश्न 2. क्या कारण है कि महिलाओं की आवाज पतली और पुरुषों की आवाज मोटी होती है?
उत्तर-ध्वनि की आवाज मोटी और पतली ध्वनि के तारत्व पर निर्भर करती है। चूँकि महिलाओं की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है, इसलिए इनकी आवाज पतली होती है। इसके विपरीत पुरुषों की ध्वनि का तारत्व कम होता है, जिसके कारण इनकी आवाज मोटी होती है।
प्रश्न 3. क्या कारण है कि हम भूकम्प से उत्पन्न तरंगों को नहीं सुन पाते जबकि चमगादड़ या कुत्ते सुन सकते हैं?
उत्तर-हम अपने कान से से तक की आवृत्तियों वाली ध्वनियों को ही सुन सकते हैं। आवृत्ति का यह परास श्रवण परास कहलाता है। भूकम्प से पैदा हुई तरंगों की आवृत्ति इस परास में नहीं आती है। यही कारण है कि हम इन तरंगों को नहीं सुन सकते परन्तु चमगादड़ और कुत्ते के कान भूकम्प द्वारा पैदा हुई तरंगों के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए चमगादड़ और कुत्ते आसानी से इन तरंगों को सुन सकते हैं।
प्रश्न 4. मच्छर की आवाज शेर की आवाज से तीखी क्यों होती है?
उत्तर-मच्छर की आवाज की प्रबलता कम होती है परन्तु आवृत्ति अधिक होती है। दूसरी तरफ शेर की आवाज की प्रबलता अधिक होती है लेकिन आवृत्ति कम होती है। इसी कारण मच्छर की आवाज शेर की आवाज से तीखी होती है।
प्रश्न 5. पराश्रव्य तरंगों के कोई छ: उपयोग लिखिए।
उत्तर-(i) माँसपेशियों के दर्द तथा जोड़ों के दर्द के निवारण में इनकी सहायता ली जाती है।
(ii) पराश्रव्य तरंगों से गुर्दों की पथरी की जाँच की जाती है।
(iii) पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग शरीर के भीतर होने वाले कैंसर और माँस पिण्डों को जाँचने में किया जाता है।
(iv) इन तरंगों से भ्रूण की जाँच की जा सकती है।
(v) इससे समुद्र की गहराई मापी जाती है।
(vi) हवाई जहाजों, रेलवे लाइनों तथा पाइपों के दोषों को इनकी सहायता से ढूँढा जाता है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. ध्वनि तरंगों के बारे में समझाइए।
उत्तर-ध्वनि तरंगें-
(1) ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं।
(2) ध्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य तरंगें हैं जिनमें दोलन तरंग की दिशा में समान्तर होता है।
(3) ध्वनि तरंगें निर्वात में से नहीं गुजर सकतीं।
594
इनको संचार के लिए किसी ठोस, द्रव या गैसों जैसे भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।
(4) ध्वनि तरंगों की वायु में चाल होती है।
(5) ध्वनि तरंगें संबंधित माध्यम के कणों के दोलन के कारण उत्पन्न होती हैं।
(6) ध्वनि तरंगों की आवृत्ति कम तथा तरंग लम्बाई अधिक होती है।
(7) ध्वनि तरंगों को ध्रुवित नहीं किया जा सकता है।
(8) ध्वनि तरंगें हमारे कानों को प्रभावित करती हैं।
(9) ध्वनि तरंगों का वेग तरंग लम्बाई से स्वतन्त्र होता है।
(10) इसमें आयतन की तन्यता का उपयोग होता है।
(11) अनुदैर्ध्य तरंगें संपीडनों और विरलनों से बनती हैं।
(12) अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैसों तीनों माध्यमों में से गुजर सकती हैं।
प्रश्न 2. अनुदैर्ध्य तरंगों के उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर- अनुदैर्ध्य तरंगों के उदाहरण-
(i) ढीले स्प्रिंग की तरंग- यदि स्प्रिंग का एक सिरा निरन्तर इधर-उधर हिलता रहता है तो अनुदैर्ध्य तरंग संपीडन और विरलन के रूप में स्प्रिंग के साथ-साथ गति करती है। स्प्रिंग आगे-पीछे तरंग की दिशा में दोलन करता है।
(ii) क्षैतिज दिशा में लटके गोलक- क्षैतिज दिशा में बंधे धागे से लटके गोलकों पर विचार करो। पहले गोलक को हिलाकर तरंग उत्पन्न करो, जिससे कि वह धागे के तल में दोलित हो और गोलक एक-दूसरे से टकरायें भी नहीं। गोलक उसी दिशा में दोलित है, जिसमें हलचल जारी है अतः यह एक अनुदैर्ध्य तरंग का उदाहरण है।
(iii) ध्वनि तरंगें- ध्वनि तरंगें भी अनुदैर्ध्य तरंग होती हैं, जो माध्यम में से गुजरते समय संपीडन और विरलन की श्रृंखला से युक्त होती हैं। जब ध्वनि तरंग वायु में गुजरती है, तो वायु के कण उसी दिशा में दोलित होते हैं, जिसमें ध्वनि तरंग गतिशील होती है।
प्रश्न 3. अनुधैर्य और अनुदैर्ध्य तरंगों में क्या अन्तर है?
उत्तर-
| अनुप्रस्थ तरंग | अनुदैर्ध्य तरंग |
|---|---|
| 1. अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लम्बवत् दोलन करते हैं। | अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समान्तर दोलन करते हैं। |
| 2. अनुप्रस्थ तरंग शीर्षों तथा गर्तों से बनती है। | अनुदैर्ध्य तरंग संपीडनों और विरलनों से बनती है। |
| 3. अनुप्रस्थ तरंगों का ध्रुवण हो सकता है। | अनुदैर्ध्य तरंगों का ध्रुवण सम्भव नहीं है। |
| 4. ये तरंगें ठोस में से या द्रव के तल के ऊपर से गुजर सकती हैं। ये तरंगें गैसों से बिल्कुल नहीं गुजर सकती हैं। | अनुदैर्ध्य तरंग ठोस, द्रव और गैस, तीनों में से गुजर सकती है। |
| 5. अनुप्रस्थ तरंगों में आकार की तन्यता का उपयोग होता है। | इसमें आयतन की तन्यता का उपयोग होता है। |
प्रश्न 4. पराध्वनि संसूचक के विषय में लिखिए।
उत्तर- पराध्वनि संसूचक- यह एक ऐसा यंत्र है, जो पराध्वनि तरंगों का उपयोग करके मानव शरीर के आंतरिक अंगों का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए काम में लाया जाता है। इस संसूचक से रोगी के अंगों, जैसे- यकृत, पित्ताशय, गर्भाशय, गुर्दे आदि का प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सकता है। यह संसूचक शरीर की असामान्यताएँ, जैसे- पित्ताशय तथा गुर्दे में पथरी तथा विभिन्न अंगों में अर्बुद (ट्यूमर) का पता लगाने में सहायता करता है।
इस तकनीक में पराध्वनि तरंगें शरीर के ऊतकों में गमन करती हैं तथा उस स्थान से परावर्तित हो जाती हैं, जहाँ ऊतक के घनत्व में परिवर्तन होता है। इसके पश्चात् इन तरंगों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित किया जाता है, जिससे कि उस अंग का प्रतिबिम्ब बना लिया जाए। इन प्रतिबिम्बों को मॉनीटर पर प्रदर्शित किया जाता है या फिल्म पर मुद्रित कर लिया जाता है। इस तकनीक को 'अल्ट्रासोनोग्राफी' कहते हैं।
अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग गर्भकाल में भ्रूण की जाँच तथा उसके जन्मजात दोषों तथा उसकी वृद्धि की अनियमितताओं का पता लगाने में किया जाता है।
आंकिक प्रश्न-
प्रश्न 1. किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति