RajBoardExam
📚 कक्षा 9 विज्ञान (Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 6: ऊतक

Tissues

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 विज्ञान (RBSE) 📘 विज्ञान सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Tissues

ऊतक

त्वरित नेविगेशन: 📚 पाठ्यपुस्तक प्रश्न

रसधानियों में कोशिका द्रव्य भरा रहता है और ये कोशिकाओं को स्फीति तथा कठोरता प्रदान करती हैं। पौधों के लिए आवश्यक बहुत से पदार्थ रसधानी में स्थित होते हैं। ये अमीनो अम्ल, शर्करा, विभिन्न कार्बनिक अम्ल तथा कुछ प्रोटीन हैं। एक कोशिकीय जीवों, जैसे अमीबा में भोजन इन्हीं रसधानियों में भरा रहता है।

कार्य-(i) पादप कोशिका में ये कोशिका को स्फीति तथा कठोरता प्रदान करती हैं।
(ii) आवश्यक पदार्थ अमीनो अम्ल, शर्करा व विभिन्न कार्बनिक अम्ल इनमें संचित रहते हैं।
(iii) कुछ कोशिकाओं में रसधानियाँ अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने व जल नियमन का कार्य भी करती हैं।


पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 67

प्रश्न 1. ऊतक क्या है?

उत्तर- ऊतक-कोशिकाओं का समूह जो संरचना, कार्य तथा उद्गम में समान होता है, उसे ऊतक कहते हैं।

प्रश्न 2. बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का क्या उपयोग है?

उत्तर- बहुकोशिक जीवों में लाखों कोशिकाएँ होती हैं, जो परस्पर मिलकर ऊतकों के रूप में विशेष कार्यों को संपन्न करती हैं। मनुष्यों तथा पशुओं में पेशीय कोशिका फैलती और सिकुड़ती है, जिससे गति होती है। तंत्रिका कोशिकाएँ संदेशों की वाहक होती हैं। रक्त, ऑक्सीजन, भोजन, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का वहन करता है। पौधों में वाहक नलियों से सम्बन्धित कोशिकाएँ भोजन और पानी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं। ऊतक पेड़-पौधों को स्थिरता प्रदान करते हैं, उन्हें सहारा व मजबूती प्रदान करते हैं। इस प्रकार बहुकोशिक जीवों में ऊतकों के अनेक उपयोग हैं।

पृष्ठ 71

प्रश्न 1. प्रकाश-संश्लेषण के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है?

उत्तर- प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2\text{CO}_2) की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2. पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्यों का उल्लेख करें।

उत्तर- पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्य-

(i) पौधों में तापमान नियंत्रित करता है।
(ii) इसके कारण भूमि से खनिज लवणों के अवशोषण में सहायता मिलती है।
(iii) वाष्पोत्सर्जन के कारण पौधों में जल के अवशोषण, रसारोहण तथा समान वितरण में सहायता मिलती है।
(iv) जलवाष्प स्टोमेटा द्वारा पत्तियों से बाहर आती है तथा इससे जल जड़ों से ऊपर आता रहता है।
(v) वाष्पोत्सर्जन के कारण पौधे सड़ने व गलने नहीं पाते।
(vi) फलों में शर्करा आदि पोषक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि होती है।

पृष्ठ 73

प्रश्न 1. सरल ऊतकों के कितने प्रकार हैं?

उत्तर- सरल ऊतक तीन प्रकार के होते हैं-

(i) पैरेन्काइमा
(ii) कॉलेनकाइमा
(iii) स्क्लेरेन्काइमा।

प्रश्न 2. प्ररोह का शीर्षस्थ विभज्योतक कहाँ पाया जाता है?

उत्तर- प्ररोह का शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ों एवं तने के वृद्धि वाले भागों में पाया जाता है। ये तने की लम्बाई में वृद्धि करते हैं।

प्रश्न 3. नारियल का रेशा किस ऊतक का बना होता है?

उत्तर- नारियल का रेशा स्क्लेरेन्काइमा ऊतक (दृढ़ ऊतक) का बना होता है।

प्रश्न 4. फ्लोएम के संघटक कौन-कौन से हैं?

उत्तर- फ्लोएम के संघटक हैं-(i) चालनी नलिका (ii) सहचरी कोशिकाएँ (साथी कोशिकाएँ) (iii) फ्लोएम पैरेन्काइमा (iv) फ्लोएम रेशे।

पृष्ठ 77

प्रश्न 1. उस ऊतक का नाम बताएँ, जो हमारे शरीर में गति के लिए उत्तरदायी है।

उत्तर- पेशीय ऊतक।

प्रश्न 2. न्यूरॉन देखने में कैसा लगता है?

528

उत्तर-न्यूरॉन देखने में लम्बे धागे के समान दिखाई देता है इसकी लम्बाई एक मीटर तक हो सकती है। न्यूरॉन का आगे का मुख्य भाग कोशिकाकाय कहलाता है। जिसमें केन्द्रक व कोशिका द्रव्य पाया जाता है। कोशिका से लम्बा बेलनाकार प्रवर्ध निकलता है जिसे एक्सॉन कहते हैं। इसके अतिरिक्त कोशिकाकाय से छोटे-छोटे अनेक धागे नुमा रचनाएँ निकलती हैं जिसे डेन्ड्राइट्स कहते हैं। न्यूरॉन की संरचना निम्न प्रकार की दिखाई देती है-

न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई
न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई

चित्र-न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई

प्रश्न 3. हृदय पेशी के तीन लक्षणों को बताएँ।

उत्तर-(i) हृदय की पेशी कोशिकाएँ बेलनाकार, शाखित एवं एक-केन्द्रकीय होती हैं।

(ii) ये अनैच्छिक पेशियाँ हैं, जो केवल हृदय भित्ति में पायी जाती हैं।
(iii) ये पेशियाँ जीवनभर लयबद्ध होकर प्रसार और संकुचन करती हैं।

प्रश्न 4. एरियोलर ऊतक के क्या कार्य हैं?

उत्तर- एरियोलर ऊतक, रक्त वाहिनियों और तंत्रिका के आस-पास की पेशियों, त्वचा व मांसपेशियों के मध्य होते हैं।

कार्य-(1) यह अंगों के भीतर के रिक्त स्थान को भरता है।
(2) यह आंतरिक अंगों को सहारा देता है।
(3) यह ऊतकों की मरम्मत में सहायता करता है।


पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. ऊतक को परिभाषित करें।

उत्तर- ऊतक-कोशिकाओं का एक ऐसा समूह जिसकी उत्पत्ति, संरचना एवं कार्य समान होते हैं, ऊतक कहलाता है।

प्रश्न 2. कितने प्रकार के तत्व मिलकर जाइलम ऊतक का निर्माण करते हैं? उनके नाम बताएँ।

उत्तर- जाइलम ऊतक चार प्रकार के अवयवों से मिलकर बनता है। जो हैं-(i) ट्रैकीड (वाहिनिका) (ii) वाहिका (iii) जाइलम फाइबर (iv) जाइलम पैरेन्काइमा।

प्रश्न 3. पौधों में सरल ऊतक जटिल ऊतक से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर- सरल ऊतक एवं जटिल ऊतक में अन्तर-

सरल ऊतक जटिल ऊतक
1. ये एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। ये एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं।
2. इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है। इनकी कोशिका भित्ति मोटी होती है।
3. यह आधारीय पैकिंग पदार्थ के रूप में जल व भोजन संचय करने तथा यांत्रिक सहायता देने का काम करते हैं। यह संवहन ऊतक का कार्य करते हैं एवं पौधों को यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करते हैं।
4. इनकी कोशिकाएँ जीवित होती हैं। इनकी अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं।
5. उदाहरण-पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा। उदाहरण-जाइलम एवं फ्लोएम।

प्रश्न 4. कोशिका भित्ति के आधार पर पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा के बीच भेद स्पष्ट करें।

उत्तर- पैरेन्काइमा ऊतक पतली कोशिका भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। इसकी कोशिका भित्ति प्राय: सैल्यूलोज की बनी होती है।

कॉलेन्काइमा ऊतक की कोशिका भित्ति भी पैक्टिन तथा सैल्यूलोज की बनी होती है।
स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की कोशिका भित्ति लिग्निन की बनी होती है तथा मोटी होती है।

प्रश्न 5. रंध्र के क्या कार्य हैं?

उत्तर- रंध्र के कार्य निम्न प्रकार हैं-

(i) वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन गैसों का आदान-प्रदान रंध्रों के द्वारा होता है।
(ii) वाष्पोत्सर्जन रंध्र के द्वारा ही होता है।

प्रश्न 6. तीनों प्रकार के पेशीय रेशों के चित्र बनाकर अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर- तीनों प्रकार की पेशियों में अन्तर-

क्र.सं. ऐच्छिक पेशी अनैच्छिक पेशी हृदय पेशी
1. यह बेलनाकार होती है। ये आकृति में तर्कुरूपी होती है। ये सूक्ष्म बेलनाकार होती है।
2. अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य धारियाँ पाई जाती हैं। केवल अनुदैर्ध्य धारियाँ पाई जाती हैं। अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य धारियाँ दोनों अस्पष्ट।
3. संकुचन शीघ्रता एवं तेजी से होता है। संकुचन धीमी गति से होता है। संकुचन मध्यम गति से होता है।
4. यह ऐच्छिक धारीदार एवं कंकाल पेशी है। ये अनैच्छिक एवं चिकनी पेशी है। हृदयी एवं अनैच्छिक पेशी है।
5. यह बहुकेन्द्रकीय होती है। यह एक केन्द्रकीय होती है। यह भी एक केन्द्रकीय होती है।
6. ये अशाखित होती है। यह भी अशाखित होती है। जबकि ये शाखित होती हैं।
ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशी का चित्र (रेखित पेशी, चिकनी पेशी, कार्डिक पेशी)
ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशी का चित्र (रेखित पेशी, चिकनी पेशी, कार्डिक पेशी)

प्रश्न 7. कार्डिक (हृदयक) पेशी का विशेष कार्य क्या है?

उत्तर- कार्डिक पेशी जीवनभर लयबद्ध प्रसार एवं संकुचन का कार्य करती है। इससे प्राणियों में रक्त परिसंचरण होता है।

प्रश्न 8. रेखित, अरेखित तथा कार्डिक (हृदयक) पेशियों में स्थित कार्य और स्थान के आधार पर अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर- रेखित, अरेखित तथा कार्डिक पेशियों में अन्तर-

अन्तर का आधार रेखित पेशी अरेखित पेशी कार्डिक पेशी
1. शरीर में स्थिति हाथ, पैर, आमाशय, जीभ, डायफ्राम, ग्रसनी में पाई जाती हैं। नलिकाकार अंगों, धमनियों, शिराओं, फेफड़ों की श्वसनी, आँख की पुतली आदि में पाई जाती हैं। केवल हृदय की दीवार (भित्ति) में पाई जाती हैं।
2. कार्य ये शरीर को इच्छानुसार गति प्रदान करती हैं। अनैच्छिक गति को नियंत्रित करती हैं। पेशियाँ स्वयं गति को नियंत्रित कर हृदय की गतिविधि संचालित करती हैं।

530

प्रश्न 9. न्यूरॉन का एक चिह्नित चित्र बनाइए।

उत्तर- न्यूरॉन का चित्र-

न्यूरॉन का चित्र (केन्द्रक, डेंड्राइट, तंत्रिकाक्ष, कोशिकाकाय)
न्यूरॉन का चित्र (केन्द्रक, डेंड्राइट, तंत्रिकाक्ष, कोशिकाकाय)

प्रश्न 10. निम्नलिखित के नाम लिखें-
(a) ऊतक जो मुँह के भीतरी अस्तर का निर्माण करता है।
(b) ऊतक जो मनुष्य में पेशियों को अस्थि से जोड़ता है।
(c) ऊतक जो पौधों में भोजन का संवहन करता है।
(d) ऊतक जो हमारे शरीर में वसा का संचय करता है।
(e) तरल आधात्री सहित संयोजी ऊतक।
(f) मस्तिष्क में स्थित ऊतक।

उत्तर-

(a) शल्की एपिथीलियम ऊतक
(b) कंडरा (tendon)
(c) फ्लोएम ऊतक
(d) वसामय ऊतक (Adipose tissue)
(e) रक्त (Blood)
(f) तंत्रिका ऊतक (न्यूरॉन)।

प्रश्न 11. निम्नलिखित में ऊतक के प्रकार की पहचान करें-
त्वचा, पौधे का वल्क, अस्थि, वृक्कीय नलिका अस्तर, संवहन बंडल।

उत्तर-

त्वचा - शल्की एपिथीलियम ऊतक
पौधे का वल्क - एपिडर्मिस रक्षी ऊतक
अस्थि - संयोजी कंकाल ऊतक
वृक्कीय नलिका अस्तर - घनाकार एपिथीलियम ऊतक
संवहन बंडल - जटिल स्थायी ऊतक (जाइलम एवं फ्लोएम)

प्रश्न 12. पैरेन्काइमा ऊतक किस क्षेत्र में स्थित होते हैं?

उत्तर- पैरेन्काइमा ऊतक पौधों के तने और जड़ों में स्थित होते हैं।

प्रश्न 13. पौधों में एपिडर्मिस की क्या भूमिका है?

उत्तर- पौधों की कोशिकाओं की सबसे बाहरी परत एपिडर्मिस है। शुष्क स्थानों पर मिलने वाले पौधों में यह मोटी हो जाती है और पानी की हानि को कम कर उनकी रक्षा करती है। पौधों की पूरी सतह एपिडर्मिस से ढकी रहती है, इसलिए यह पौधों के सभी भागों की रक्षा करती है। एपिडर्मल कोशिका पौधे की बाह्य सतह पर प्रायः एक मोम जैसी जल प्रतिरोधी परत बनाती है, जो जल हानि के विरुद्ध यांत्रिक आघात तथा परजीवी कवक के प्रवेश से पौधों की रक्षा करती है। पत्तियों की एपिडर्मिस में उपस्थित छोटे-छोटे रंध्रों को स्टोमेटा कहते हैं। स्टोमेटा को दो वृक्क के आकार की कोशिकाएँ घेरे रहती हैं, जिन्हें रक्षी कोशिकाएँ कहते हैं। ये कोशिकाएँ वायुमण्डल से गैसों का आदान-प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं, इन्हीं से वाष्पोत्सर्जन क्रिया होती है।

जड़ों की एपिडर्मल कोशिकाएँ पानी को सोखने का कार्य करती हैं। मरुस्थलीय पौधों की बाहरी सतह वाले एपिडर्मिस में (जल अवरोधक रासायनिक पदार्थ) क्यूटिन का लेप होता है, जिस कारण वाष्पोत्सर्जन की क्रिया नहीं होती।

प्रश्न 14. छाल (कॉक) किस प्रकार सुरक्षा ऊतक के रूप में कार्य करता है?

उत्तर- छाल (कॉक) मोटी भित्ति वाली मृत कोशिकाओं का बना होता है। इसकी भित्ति पर सुबेरिन नामक रसायन होता है जो हवा और पानी को प्रवेश नहीं करने देता है अर्थात् कॉक को हवा पानी के लिए अभेद्य बनाता है।

इस प्रकार छाल (कॉक) सुरक्षा ऊतक के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 15. निम्न दी गई तालिका को पूर्ण करें-

स्थायी ऊतक वर्गीकरण चार्ट
स्थायी ऊतक वर्गीकरण चार्ट

उत्तर-

पूर्ण स्थायी ऊतक वर्गीकरण चार्ट
पूर्ण स्थायी ऊतक वर्गीकरण चार्ट

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

  1. जटिल ऊतक का उदाहरण है-
    (अ) पैरेन्काइमा (ब) कॉलेनकाइमा
    (स) संवहन ऊतक (द) स्क्लेरेन्काइमा
  2. ऐरेन्काइमा पाया जाता है-
    (अ) जलीय पादपों में
    (ब) समतलीय पादपों में
    (स) मरुस्थलीय पादपों में
    (द) उपर्युक्त सभी
  3. सुबेरिन पाया जाता है-
    (अ) जाइलम ऊतक में (ब) फ्लोएम ऊतक में
    (स) रक्षी ऊतक में (द) पैरेन्काइमा में
  4. वह संयोजी ऊतक जो मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है, कहलाता है-

(अ) डेंड्राइट्स (ब) एक्सॉन
(स) कंडरा (द) एडिपोस
5. विभज्योतक पादप में निम्न स्थान पर उपस्थित होता है-
(अ) शीर्षस्थ (ब) पार्श्वीय
(स) अन्तर्विष्ट स्थल (द) उपर्युक्त सभी
6. मरुस्थलीय पौधों की बाहरी सतह वाली एपिडर्मिस में किसका लेप होता है?
(अ) सेल्युलोज (ब) लिग्निन
(स) क्यूटिन (द) सुबेरिन
7. फ्लोएम ऊतक का मृत भाग है-
(अ) चालनी कोशिका (ब) साथी कोशिका
(स) फ्लोएम पैरेन्काइमा (द) फ्लोएम रेशे
8. ग्रन्थियों का निर्माण किस ऊतक से होता है?
(अ) एपिथिलियमी ऊतक
(ब) संयोजी ऊतक
(स) पेशी ऊतक
(द) तंत्रिका ऊतक

उत्तरमाला

1. (स) 2. (अ) 3. (स) 4. (स) 5. (द)
6. (स) 7. (द) 8. (अ)

रिक्त स्थान वाले प्रश्न-

  1. तने की लम्बाई में वृद्धि ........................ के कारण होती है।
  2. रक्त एक प्रकार ........................ का ऊतक है।
  3. दो अस्थियाँ आपस में ........................ से जुड़ी होती हैं।
  4. प्रत्येक न्यूरॉन में एक लम्बा प्रवर्ध होता है, जिसे ........................ कहते हैं।
  5. ऊतक ........................ का समूह होता है।

उत्तर- 1. शीर्षस्थविभज्योतक 2. संयोजी 3. स्नायु 4. एक्सॉन 5. कोशिकाओं।

सत्य/असत्य कथन वाले प्रश्न-
निम्नलिखित कथनों में सत्य तथा असत्य कथन छाँटिए-

  1. नारियल का रेशेयुक्त छिलका कॉलेनकाइमा का बना होता है। (सत्य/असत्य)
  2. विभज्योतक कोशिकाओं में रसधानी नहीं होती है। (सत्य/असत्य)
  3. स्क्लेरेन्काइमा ऊतकों में क्लोरोफिल पाया जाता है। (सत्य/असत्य)
  4. वाष्पोत्सर्जन की क्रिया स्टोमेटा के द्वारा होती है। (सत्य/असत्य)
  5. रक्त के तरल आधात्री भाग को प्लाज्मा कहते हैं। (सत्य/असत्य)

उत्तर- 1. असत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. सत्य 5. सत्य।

मिलान वाले प्रश्न-
निम्नलिखित प्रश्नों में सही कूट (कोड) का चयन कीजिए-

प्रश्न 1.

अंग ऊतक
(a) त्वचा (i) चपटी एपिथिलियम
(b) श्वास नली (ii) घनाकार एपिथिलियम
(c) लार ग्रन्थि (iii) स्तरित शल्की एपिथिलियम
(d) कूपिका (iv) पक्ष्माभी स्तम्भाकार एपिथिलियम

उत्तर- (a) (iii) (b) (iv) (c) (ii) (d) (i)

प्रश्न 2.

ऊतक रसायन
(a) एपिडर्मिस (i) प्रोटीन
(b) कॉर्क (छाल) (ii) क्यूटिन
(c) अस्थि (iii) कैल्सियम
(d) पेशी (iv) सुबेरिन

उत्तर- (a) (ii) (b) (iv) (c) (iii) (d) (i)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. पौधों में कठोरता और मजबूती किस ऊतक के कारण होती है?

उत्तर- स्क्लेरेन्काइमा के कारण।

प्रश्न 2. स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की कोशिकाएँ कैसी होती हैं?

उत्तर- मृत, लम्बी और पतली।

532

प्रश्न 3. रक्षी कोशिकाएँ कहाँ पाई जाती हैं?

उत्तर- स्टोमेटा में।

प्रश्न 4. संवहन ऊतकों के नाम लिखिए।

उत्तर- जाइलम तथा फ्लोएम।

प्रश्न 5. प्लाज्मा क्या है?

उत्तर- रक्त का तरल आधात्री भाग प्लाज्मा कहलाता है।

प्रश्न 6. अस्थि कोशिकाएँ कठोर क्यों होती हैं?

उत्तर- कैल्शियम एवं फॉस्फोरस के कारण अस्थि कोशिकाएँ कठोर होती हैं।

प्रश्न 7. मानव में पेशीय कोशिकाओं का क्या कार्य है?

उत्तर- पेशीय कोशिकाएँ फैलती और सिकुड़ती हैं जिससे गति होती है।

प्रश्न 8. रक्त किन पदार्थों का वहन करता है?

उत्तर- रक्त ऑक्सीजन, भोजन, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का वहन करता है।

प्रश्न 9. पौधे एवं जन्तु के ऊतकों में एक विशेष अन्तर क्या है?

उत्तर- पौधे के अधिकांश ऊतक मृत होते हैं, जबकि जन्तुओं में अधिकांश जीवित होते हैं।

प्रश्न 10. हृदय की पेशी कोशिकाओं की संरचना किस तरह की होती है?

उत्तर- हृदय की पेशी कोशिकाएँ बेलनाकार शाखाओं वाली और एक-केन्द्रकीय होती हैं।

प्रश्न 11. 'तंत्रिका स्पंदन' किसे कहते हैं?

उत्तर- तंत्रिका रेशे से गुजरने वाली संवेदना को तंत्रिका स्पंदन कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. एककोशिक और बहुकोशिक जीवों के मौलिक कार्य संपादन में क्या अन्तर है?

उत्तर- एककोशिक जीवों जैसे-अमीबा, पेरामीशियम आदि में एक ही कोशिका सभी कार्य जैसे गति, भोजन लेने की क्रिया, श्वसन क्रिया और उत्सर्जन क्रिया आदि को सम्पन्न करती है जबकि बहुकोशिक जीव जैसे-बिल्ली, कीट और मानव आदि में श्रम विभाजन का प्रक्रम होता है। बहुकोशिक जीवों में किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए विशेष अंग होते हैं। उदाहरणार्थ, मनुष्य में हृदय-रुधिर को पम्प करने के लिए, फेफड़े-श्वसन के लिए, आमाशय-भोजन के पाचन के लिए आदि। किसी कार्य विशेष को सम्पन्न करने के लिए उस कार्य में दक्ष कोशिकाएँ एक समूह में और एक निश्चित स्थान पर होती हैं।

प्रश्न 2. जन्तुओं के संरचनात्मक संगठन व कार्यों के आधार पर जन्तु ऊतक में क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?

उत्तर- जन्तु ऊतकों की विशेषताएँ-

(1) जन्तु भोजन, साथी व सुरक्षा की तलाश में इधर-उधर घूमते रहते हैं। अतः उन्हें पादपों की अपेक्षा अधिक ऊर्जा चाहिए, अतः जन्तु ऊतक जीवित एवं सक्रिय हैं।
(2) जन्तुओं में एकसमान वृद्धि होती है, अतः जन्तुओं में विभाज्य और अविभाज्य क्षेत्रों की निश्चित सीमा नहीं होती।
(3) अंगों के विशिष्ट कार्यों के लिए विशिष्ट ऊतक की आवश्यकता है।

प्रश्न 3. विभज्योतक ऊतक की कोशिकाओं की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर- विभज्योतक ऊतक की कोशिकाओं की विशेषताएँ-

(i) इन ऊतकों की कोशिकाएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं।
(ii) इनकी भित्तियाँ पतली होती हैं तथा इनमें बहुत अधिक कोशिकाद्रव्य भरा रहता है।
(iii) इनमें स्पष्ट केन्द्रक पाया जाता है किन्तु इनमें रसधानियाँ नहीं होती हैं।
(iv) ये सदा विभाजन करती रहती हैं।

प्रश्न 4. जन्तुओं में पाये जाने वाले विभिन्न ऊतकों के नाम लिखिए।

उत्तर- जन्तुओं में चार प्रकार के ऊतक होते हैं-

(i) एपिथीलियमी ऊतक (ii) संयोजी ऊतक
(iii) पेशीय ऊतक (iv) तंत्रिका ऊतक।

प्रश्न 5. स्क्लेरेन्काइमा ऊतक के विषय में लिखिए।

उत्तर- स्क्लेरेन्काइमा ऊतक-यह एक प्रकार का सरल स्थायी ऊतक है, जो पौधे को कठोर एवं मजबूत बनाता है। इसकी कोशिकाएँ मृत, लम्बी व पतली होती हैं क्योंकि इसकी भित्ति लिग्निन के कारण मोटी होती है। ये भित्तियाँ प्रायः इतनी मोटी होती हैं कि कोशिका के भीतर कोई आंतरिक स्थान नहीं होता। यह ऊतक तने में, संवहन बंडल के समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों और फलों के कठोर छिलके में पाया जाता है।

प्रश्न 6. एपिथीलियम ऊतक के मुख्य कार्य लिखिए।

उत्तर- एपिथीलियम ऊतक के कार्य-

(i) यह ऊतक बाह्य आवरण का सतत निर्माण करता है और अन्दर के अंगों की सुरक्षा करता है।
(ii) यह जल तथा अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण करता है।

(iii) यह अपशिष्ट पदार्थों के निष्कर्षण में मदद करता है; जैसे-त्वचा द्वारा पसीने का निष्कर्षण।
(iv) विभिन्न प्रकार की एपिथीलियमी कोशिकाओं के बीच की पारगम्यता शरीर तथा बाहरी वातावरण और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रश्न 7. रुधिर क्या है? रुधिर के विभिन्न घटकों के नाम लिखिए।

उत्तर- रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक (Connective tissue) है, जिसके द्वारा सम्पूर्ण शरीर में पदार्थों का संवहन होता है।

रुधिर के मुख्य घटक निम्न हैं-

  1. कणिकीय अवयव-
    (i) लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells—R.B.C.)
    (ii) श्वेत रक्त कोशिकाएँ (White Blood Cells—W.B.C.)
    (iii) पट्टिकाणु कोशिकाएँ (Platelets)
  2. तरल अवयव-प्लाज्मा (Plasma)।

प्रश्न 8. ऊतक किसे कहते हैं? विभिन्न रक्त कोशिकाओं के नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर- समान संरचना समान उत्पत्ति एवं समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं।

रक्त कोशिकाओं के चित्र-

रक्त कोशिकाओं के चित्र (लाल रक्त कणिका, कोशिकाद्रव्य, केन्द्रक, विभिन्न श्वेत रक्त कणिकाएँ - न्यूट्रोफिल, ईओसिनोफिल, क्षाररंजी (बेसोफिल), लिम्फोसाइट, मोनोसाइट, प्लेटलेट)
रक्त कोशिकाओं के चित्र (लाल रक्त कणिका, कोशिकाद्रव्य, केन्द्रक, विभिन्न श्वेत रक्त कणिकाएँ - न्यूट्रोफिल, ईओसिनोफिल, क्षाररंजी (बेसोफिल), लिम्फोसाइट, मोनोसाइट, प्लेटलेट)

प्रश्न 9. पेशीय ऊतक की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर- (1) शरीर की माँसपेशियाँ पेशीय ऊतक की बनी होती हैं।

(2) इनमें धागे की तरह की संरचना पाई जाती है, जिसके कारण ये पेशीय तन्तु भी कहलाते हैं।

(3) माँसपेशियों का संकुचन एवं फैलाव इन्हीं के द्वारा होता है।
(4) पेशियों में एक विशेष प्रकार की प्रोटीन होती है, जिसे 'सिकुड़ने वाला प्रोटीन' कहते हैं, जिसके संकुचन एवं प्रसार से गति होती है।

प्रश्न 10. गति के आधार पर पेशियाँ कितने प्रकार की होती हैं? इनका वर्णन कीजिए।

उत्तर- गति के आधार पर पेशियाँ दो प्रकार की होती हैं-

(i) ऐच्छिक पेशी (ii) अनैच्छिक पेशी
(i) ऐच्छिक पेशी- वह पेशी, जिसकी गति हम इच्छानुसार कर सकते हैं, ऐच्छिक पेशी कहलाती है; जैसे- हाथ व पैर की माँसपेशियाँ। अधिकतर ऐच्छिक पेशियाँ हड्डियों से जुड़ी रहती हैं और वे रेखीय पेशी होती हैं।

(ii) अनैच्छिक पेशी- वह पेशी, जिसकी गति हमारी इच्छा पर निर्भर नहीं करती, अनैच्छिक पेशी कहलाती है; जैसे- आहार नाल, हृदय, आँख की पलक, फेफड़ों की श्वसनी आदि की पेशियाँ। ये अरेखित पेशियाँ हैं।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. एपिथीलियमी ऊतक को आवश्यक ऊतक क्यों कहते हैं? वसा ऊतक तथा रुधिर ऊतक में विभेद कीजिए।

उत्तर- एपिथीलियमी ऊतक शरीर या किसी अंग की बाह्य सतह को आवरित करता है अथवा नलिकाओं या गुहिकाओं की भीतरी सतह के अस्तर का निर्माण करता है। इसलिए इसे आवश्यक (Covering) ऊतक कहते हैं।

वसा ऊतक तथा रुधिर ऊतक विभेद

क्र. सं. वसा ऊतक रुधिर ऊतक
1. यह मुख्यतया त्वचा के नीचे स्थित होता है। यह मुख्यतया, हृदय, धमनियों एवं शिराओं में पाया जाता है।
2. वसा ऊतक में वसा गोलिकाएँ होती हैं। रुधिर में तीन प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं- (i) RBC (ii) WBC (iii) प्लेटलेट्स।
3. वसा ऊतक वसा के महत्त्वपूर्ण खाद्य भण्डार होते हैं। जबकि रुधिर खाद्य पदार्थों का वितरण का कार्य करता है।
4. इसके अतिरिक्त ये अंगों के अत्यधिक दबाव, खिंचाव, चक्कों आदि से बचाते हैं। जबकि यह ऊतक दैहिक ताप के नियन्त्रण में सहायता करता है।
5. यह शरीर को आकृति प्रदान करता है। इसके द्वारा कोई आकृति प्रदान नहीं की जाती है।

प्रश्न 2. न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए। न्यूरॉन के कार्य लिखिए।

उत्तर—न्यूरॉन का चित्र

न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई
न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई

चित्र : न्यूरॉन-तंत्रिका ऊतक की इकाई

न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका)—न्यूरॉन एक सूक्ष्मदर्शी संरचना है जो तीन भागों से मिलकर बना होता है—

  1. सोमा (Soma) अथवा कोशिकाकाय—यह कोशिका का प्रमुख भाग होता है जिसमें एक केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य पाया जाता है। केन्द्रक में एक स्पष्ट केन्द्रिका होती है जबकि कोशिका द्रव्य में निस्सल कणिकाएँ पायी जाती हैं। सोमा से दो प्रकार के प्रवर्ध निकलते हैं, जिन्हें क्रमशः द्रुमिकाएँ (Dendrites) एवं तंत्रिकाक्ष (Axon) कहते हैं।

  2. द्रुमिकाएँ (Dendrites)—ये छोटे शाखित प्रवर्ध होते हैं। इनमें संदेश सोमा की ओर चलता है।

  3. तंत्रिकाक्ष (Axon)—यह एक बड़ा लम्बा, मोटा एवं बेलनाकार प्रवर्ध होता है जो सोमा से निकलता है। तंत्रिकाक्ष में संदेश सोमा से दूर चलते हैं।

तंत्रिकाक्ष (Axon) न्यूरोलिया नामक झिल्ली से स्तरित होता है। इसके बीच में वसा का स्तर होता है। तंत्रिकाक्ष का अन्तिम सिरा शाखाओं में विभाजित होता है। इसके अन्तिम सिरे पर सिनैप्टिक घुण्डियाँ होती हैं। तंत्रिकाक्ष से तंत्रिका तन्तुओं का निर्माण होता है।

कार्य—यह शरीर के अन्दर तंत्रिका आवेगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने का कार्य करती है।

प्रश्न 3. पेशी ऊतक किसे कहते हैं? स्नायु एवं कंडरा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—पेशी ऊतक—पेशी संकुचनशील ऊतक है। पेशी का निर्माण पेशी कोशिकाओं के द्वारा होता है। पेशी कोशिकाएँ लम्बी पतली होती है, इसलिए इन्हें पेशी तंतु भी कहा जाता है। पेशियों में संकुचनशीलता एवं उत्तेजनशीलता का गुण होने के कारण ये गति एवं चलन में महत्त्वपूर्ण होती है।

स्नायु एवं कंडरा में अन्तर

क्र. सं. स्नायु (Ligament) कंडरा (Tendon)
1. यह लचीले होते हैं। यह लचक रहित होते हैं।
2. अस्थि से अस्थि को जोड़ने वाली रचना को स्नायु कहते हैं। पेशियों को अस्थि से जोड़ने वाली रचना को कंडरा कहते हैं।
3. यह अस्थियों को अपने स्थान से हटने को रोकता है। जबकि कंडरा गति में सहायक होता है।
4. स्नायु में पीले तन्तु होते हैं। कंडरा में श्वेत तन्तु होते हैं।

प्रश्न 4. पादप ऊतक विभज्योतक को समझाइए।

उत्तर—विभज्योतक—पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्रों में ही होती है। ऐसे क्षेत्रों में विभज्योतक पाए जाते हैं। विभज्योतक ऊतकों को इनकी उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आधार पर शीर्षस्थ, कैम्बियम (पार्श्वीय) और अंतर्विष्ट भागों में वर्गीकृत किया जाता है। विभज्योतक की कोशिकाएँ शुरू में बढ़ती हैं और परिपक्व होती हैं। इनके गुणों में धीरे-धीरे परिवर्तन होता है और ये दूसरे ऊतकों के घटकों के रूप में विभाजित हो जाती हैं।

इस प्रकार स्थिति के आधार पर विभज्योतक तीन प्रकार के होते हैं-

(i) शीर्षस्थ विभज्योतक—प्ररोह के शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ों एवं तनों की वृद्धि वाले भाग में विद्यमान रहता है तथा वह इनकी लम्बाई में वृद्धि करता है।

किसी पौधे में विभज्योतक की स्थिति
किसी पौधे में विभज्योतक की स्थिति

चित्र—किसी पौधे में विभज्योतक की स्थिति

(ii) पार्श्वीय विभज्योतक—तने की परिधि या मूल में वृद्धि इसके कारण होती है।

(iii) अंतर्विष्ट विभज्योतक—यह पत्तियों के आधार में या टहनी के पर्व (internode) के दोनों ओर उपस्थित होते हैं।

विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएँ बहुत क्रियाशील होती हैं। इनके पास बहुत अधिक कोशिका द्रव्य, पतली कोशिका भित्ति और स्पष्ट केन्द्रक होते हैं, परन्तु इनमें रसधानियों का अभाव होता है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. पौधों में सरल स्थायी ऊतक कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक की संरचना तथा कार्य लिखिए।

उत्तर- सरल स्थायी ऊतक - सरल ऊतक कोशिकाओं का एक समूह है, जिसमें सभी कोशिकाएँ उत्पत्ति, प्रकार तथा कार्यों में समान होती हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं-

(1) पैरेन्काइमा- कोशिकाओं की कुछ परतें ऊतक के आधारीय पैकिंग का निर्माण करती हैं, इन्हें पैरेन्काइमा ऊतक कहते हैं। यह पतली कोशिका भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। ये कोशिकाएँ जीवित होती हैं। ये प्रायः बंधनमुक्त होती हैं तथा इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाओं के मध्य काफी रिक्त स्थान होता है।

पैरेन्काइमा ऊतकों के कार्य-
(i) यांत्रिक मजबूती प्रदान करना तथा आधारीय पैकिंग करना।
(ii) भोजन का संग्रह करना। उदाहरण- गाजर, चुकंदर आदि।
(iii) कभी-कभी (किसी-किसी पौधे में), ये अपशिष्ट पदार्थ जैसे गोंद, टेनिन, रेजिन, क्रिस्टल आदि का संचय करते हैं।
(iv) स्फीति अवस्था के समय यह पादप अंगों को दृढ़ता प्रदान करता है।
(v) यह पौधों के घाव भरने में भी सहायता करता है।

पैरेन्काइमा कोशिकाओं में रूपान्तरण-
(i) जब पैरेन्काइमा कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) पाया जाता है तब वे हरे रंग की होती हैं और उन्हें क्लोरेन्काइमा (हरित लवक) कहते हैं। ये कोशिकाएँ प्रकाश-संश्लेषण कर भोजन बनाती हैं। ये कोशिकाएँ पत्तियों के मीजोफिल एवं नवजात तनों के बाह्य आवरण में पाई जाती हैं।

चित्र-पैरेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन
चित्र-पैरेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन

(ii) जब पैरेन्काइमा कोशिकाओं में अन्तःकोशिकीय स्थान बहुत बढ़ जाता है तब इन्हें एरेन्काइमा (Aerenchyma) कहते हैं। ये जलीय पौधों में पाई जाती हैं। अन्तःकोशिकीय स्थानों में वायु भरी होती है। ये जलीय पौधों को तैरने में उत्प्लावन बल प्रदान करते हैं।

(2) कॉलेन्काइमा- इस ऊतक की कोशिकाएँ जीवित लम्बी और अनियमित ढंग से कोनों पर मोटी होती हैं। इन कोशिकाओं के बीच बहुत कम स्थान होता है। यह पौधों के विभिन्न भाग पत्ती, तने में पाई जाती हैं। इनकी स्थिति एपिडर्मिस के नीचे पर्णवृन्त में होती है।

बाह्य रूप से यह अण्डाकार, गोलाकार व बहुभुजाकार तथा सघन रूप से विन्यासित रहती हैं। ऊतक अप्रत्यास्थ तथा तन्य होते हैं। इनमें प्रसार की क्षमता पाई जाती है।

चित्र-कॉलेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन
चित्र-कॉलेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन

कॉलेन्काइमा ऊतक के कार्य-
(i) यह पौधों के विभिन्न भागों में बिना टूटे लचीलापन लाता है।
(ii) पर्ण वृंतों, पुष्प वृंतों, तने की शाखाओं, जड़ों तथा फलों को यांत्रिक सहारा प्रदान करते हैं।
(iii) यह कुछ पत्तियों के किनारों पर उपस्थित रहता है तथा हवा के प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है।

(3) स्क्लेरेन्काइमा- इस ऊतक की कोशिकाएँ लम्बी व पतली होती हैं; क्योंकि इस ऊतक की भित्ति लिग्निन के कारण मोटी होती है। लिग्निन पादपों को मजबूत बनाता है। ये मृत कोशिकाएँ होती हैं। ये ऊतक तने में संवहन बंडल के समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों व फलों के छिलकों में उपस्थित होता है।

चित्र-स्क्लेरेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन
चित्र-स्क्लेरेन्काइमा-(i) अनुप्रस्थ सैक्शन (ii) अनुदैर्ध्य सैक्शन

कार्य-(i) यह ऊतक पौधों को कठोर व मजबूत बनाता है।
(ii) फल तथा बीज के कठोर छिलके इन ऊतकों का परिणाम हैं।
(iii) यह पौधों को यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करता है।

प्रश्न 2. जटिल ऊतक से क्या आशय है? पादपों में पाये जाने वाले जटिल ऊतकों को सचित्र समझाइए।

उत्तर- जटिल ऊतक-ये ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं तथा ये सभी कोशिकाएँ एक साथ मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करती हैं। जाइलम और फ्लोएम इसी प्रकार के जटिल ऊतक हैं।

इन दोनों को संवहन ऊतक भी कहते हैं और ये मिलकर संवहन बंडल का निर्माण करते हैं। यह ऊतक बड़े पौधों की एक विशेषता है, जो उनको स्थलीय वातावरण में रहने के अनुकूल बनाती है।

पौधों में पाए जाने वाले जटिल ऊतक निम्न प्रकार से हैं-

(1) जाइलम-यह चार प्रकार की कोशिकाओं-ट्रैकीड (वाहिनिका), वाहिका, जाइलम पैरेन्काइमा और जाइलम फाइबर (रेशे) से मिलकर बना होता है। इन कोशिकाओं की कोशिका भित्ति मोटी होती है और इनमें से अधिकांश मृत होती हैं। ट्रैकीड और वाहिकाओं की संरचना नलिकाकार होती है। इनके द्वारा पानी और खनिज लवण का ऊर्ध्वाधर संवहन होता है।

पैरेन्काइमा भोजन का संग्रह करता है और यह किनारे की ओर पानी के पाश्र्वीय संवहन में मदद करता है। फाइबर (रेशे) मुख्यतः सहारा देने का कार्य करते हैं।

जाइलम के प्रकार: (i) ट्रैकीड, (ii) वाहिका, (iii) जाइलम पैरेन्काइमा
जाइलम के प्रकार: (i) ट्रैकीड, (ii) वाहिका, (iii) जाइलम पैरेन्काइमा

(2) फ्लोएम-फ्लोएम चार प्रकार के अवयवों से मिलकर बना होता है-चालनी नलिका, साथी (सहचरी) कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेन्काइमा और फ्लोएम फाइबर (रेशे)।

चालनी नलिका छिद्रित भित्ति वाली तथा नलिकाकार कोशिका होती है। फ्लोएम, जाइलम के असमान पदार्थों को कोशिकाओं में दोनों दिशाओं में गति करा सकते हैं।

फ्लोएम पत्तियों से भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। फ्लोएम रेशों को छोड़कर, फ्लोएम कोशिकाएँ जीवित कोशिकाएँ होती हैं।

फ्लोएम-सैकशन
फ्लोएम-सैकशन

चित्र-जटिल ऊतकों के प्रकार

प्रश्न 3. एपिथीलियम ऊतक के विभिन्न प्रकारों का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।

उत्तर- एपिथीलियम ऊतक-ये ऊतक जन्तु की बाहरी सतह तथा आंतरिक गुहाओं का आवरण बनाते हैं। ये विभिन्न आकृति तथा माप के होते हैं। कार्य के आधार पर इनको निम्न प्रकार वर्गीकृत किया गया है-

(i) शल्की एपिथीलियम-कोशिकाओं में रक्त नलिका अस्तर या कूपिका जहाँ पदार्थों का संवहन वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा होता है, वहाँ पर चपटी एपिथीलियम ऊतक कोशिकाएँ होती हैं। ये अत्यधिक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल स्तर का निर्माण करती हैं। आहार नली तथा मुँह का अस्तर इनके द्वारा बना होता है। शरीर की त्वचा का निर्माण भी शल्की एपिथीलियम द्वारा ही होता है।

(a) शल्की एपिथीलियम
(a) शल्की एपिथीलियम

(ii) स्तरित शल्की एपिथीलियम-त्वचा की एपिथीलियम कोशिकाएँ इनको कटने तथा फटने से बचाने के लिए कई परतों में व्यवस्थित रहती हैं, इसलिए इसे स्तरित शल्की एपिथीलियम कहते हैं।

(b) स्तरित शल्की
(b) स्तरित शल्की