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📚 कक्षा 9 विज्ञान (Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 9: गुरुत्वाकर्षण

Gravitation

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📚 कक्षा 9 विज्ञान (RBSE) 📘 विज्ञान सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Gravitation

गुरुत्वाकर्षण

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कितने बल की आवश्यकता होगी? यदि बल को दोगुना कर दिया जाये तो त्वरण कितना हो जायेगा?

हल-वस्तु का द्रव्यमान m=20m = 20 किलोग्राम

वस्तु का उत्पन्न त्वरण a=2.5a = 2.5 मी./से.2^2
F=?F = ?
F=ma\because F = ma
या F=20×2.5F = 20 \times 2.5

=50= 50 न्यूटन (N)
अतः: आवश्यक बल का मान 5050 न्यूटन होगा।
बल को दुगुना करने पर, बल का मान 100100 न्यूटन हो जायेगा अतः वस्तु में अब
त्वरण a=Fma = \frac{F}{m}
a=100 N20a = \frac{100 \text{ N}}{20}
या a=5a = 5 मीटर/सेकण्ड2^2 उत्तर

प्रश्न 3. किसी 1010 ग्राम के द्रव्यमान में 55 मीटर/सेकण्ड2^2 का त्वरण उत्पन्न करने में अधिक बल की आवश्यकता होगी अथवा 2020 ग्राम के द्रव्यमान में 55 मीटर/सेकण्ड2^2 का त्वरण उत्पन्न करने में?

हल-पहली अवस्था में,

दिया है-द्रव्यमान (m1)=10(m_1) = 10 ग्राम

=101000= \frac{10}{1000} किग्रा.
=10103=10×103= \frac{10}{10^3} = 10 \times 10^{-3} किग्रा.
त्वरण (a1)=5(a_1) = 5 मीटर/सेकण्ड2^2
\therefore बल (F1)=m1a1(F_1) = m_1a_1

=(10×1010 किग्रा.)×(5 मीटर/सेकण्ड2)= (10 \times 10^{-10} \text{ किग्रा.}) \times (5 \text{ मीटर/सेकण्ड}^2)
F1=5×102=0.05F_1 = 5 \times 10^{-2} = 0.05 न्यूटन
दूसरी अवस्था में,
m2=20m_2 = 20 ग्राम =20×103= 20 \times 10^{-3} किग्रा.
a2=5a_2 = 5 मीटर/सेकण्ड2^2
11 बल (F2)=m2a2(F_2) = m_2a_2 से

=(20×103 किग्रा.)×(5 मीटर/सेकण्ड2)= (20 \times 10^{-3} \text{ किग्रा.}) \times (5 \text{ मीटर/सेकण्ड}^2)
=10×102= 10 \times 10^{-2} न्यूटन

=0.1= 0.1 न्यूटन उत्तर

F2\because F_2 का परिमाण F1F_1 से अधिक है। अतः दूसरी अवस्था में अर्थात् 2020 ग्राम द्रव्यमान में 55 मीटर/सेकण्ड2^2 का त्वरण उत्पन्न करने के लिये अधिक बल की आवश्यकता होगी।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 115

प्रश्न 1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम लिखिए।

उत्तर-गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-ब्रह्माण्ड में प्रत्येक कण, दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह आकर्षण बल दोनों कणों के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है और उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह आकर्षण बल दोनों कणों को जोड़ने वाली रेखा की दिशा की ओर होता है। यही गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहलाता है।

दो वस्तुओं के मध्य आकर्षण बल
दो वस्तुओं के मध्य आकर्षण बल

मान लीजिए दो वस्तुओं (कणों) का द्रव्यमान क्रमशः m1m_1 और m2m_2 है और उनके मध्य दूरी RR है। उन दोनों वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल FF न्यूटन के नियमानुसार-
Fm1m2F \propto m_1 m_2 .....(1)
और F1R2F \propto \frac{1}{R^2} .....(2)
(1) और (2) को एक साथ लिखने पर
Fm1m2R2F \propto \frac{m_1 m_2}{R^2}
या F=Gm1m2R2F = G \frac{m_1 m_2}{R^2}

यहाँ GG एक समानुपाती स्थिरांक है जिसको गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। इसका मान 6.67×10116.67 \times 10^{-11} न्यूटन मी.2^2/किग्रा.2^2 होता है।

प्रश्न 2. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।

उत्तर-सूत्र F=GMmd2F = G \frac{Mm}{d^2} से पृथ्वी की सतह के लिए

d=Rd = R
अतः: F=GMmR2F = G \frac{Mm}{R^2}
यहाँ पर MM तथा mm पृथ्वी तथा उसके पृष्ठ पर रखी किसी वस्तु का द्रव्यमान है और RR उनके मध्य की दूरी है। यह बल पृथ्वी और वस्तु को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है। इसका मान सदैव धनात्मक आता है।

पृष्ठ 117

प्रश्न 1. मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर गुरुत्वीय बल के कारण आकर्षित करती है। अतः जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर केवल इसी बल के कारण गिरती हैं, तो हम कहते हैं कि वस्तुएँ मुक्त पतन में हैं।

प्रश्न 2. गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तब गिरते समय वस्तु की गति की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं होता परन्तु पृथ्वी के आकर्षण के कारण वेग के परिमाण में परिवर्तन होता है। वेग में यह परिवर्तन त्वरण उत्पन्न करता है। यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण होता है, इसलिए इस त्वरण को पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं जिसे 'gg' से निर्दिष्ट करते हैं एवं इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड2^2 होता है।

पृष्ठ 119

प्रश्न 1. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?

उत्तर- द्रव्यमान तथा भार में अन्तर-

भार द्रव्यमान
1. भार वह बल है, जिससे वस्तु पृथ्वी के केन्द्र की ओर आकर्षित होती है। द्रव्यमान वस्तु में विद्यमान पदार्थ की मात्रा है।
2. यह अचर राशि नहीं है। यह गुरुत्वीय त्वरण के परिवर्तन के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलता रहता है। यह एक अचर राशि है।
3. यह एक सदिश राशि होती है। द्रव्यमान एक अदिश राशि है।
4. वस्तु का भार पृथ्वी के केन्द्र पर शून्य हो सकता है अर्थात् g=0g = 0 वस्तु का द्रव्यमान कभी भी शून्य नहीं हो सकता है।
5. भार को स्प्रिंग तुला से मापा जाता है। द्रव्यमान को भौतिक तुला से मापा जाता है।
6. भार को किलोग्राम भार या न्यूटन में मापा जाता है। इसका मात्रक किलोग्राम है।

प्रश्न 2. किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का 16\frac{1}{6} गुणा क्यों होता है?

उत्तर- चन्द्रमा का द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान की तुलना में बहुत कम होता है। इस कारण चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान, पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण के मान से 66 गुणा कम होता है। चूँकि किसी स्थान पर किसी वस्तु का भार, उस स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण के समानुपाती होता है। अतः चन्द्रमा पर किसी वस्तु का भार, पृथ्वी पर उसके भार का 16\frac{1}{6} गुणा होता है।

पृष्ठ 122

प्रश्न 1. एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?

उत्तर- यदि स्कूल बैग को एक पतली और मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से उठाया जाये तो प्रणोद के कारण यह कार्य अति कठिन होगा। चूँकि स्कूल बैग की पट्टी पतली होने से बैग का भार कंधे के एक बहुत कम क्षेत्र पर पड़ता है, जिससे बैग उठाना मुश्किल हो जाता है।

प्रश्न 2. उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- प्रत्येक द्रव का वह गुण, जिसके कारण किसी वस्तु को उसमें डुबाये जाने पर वह वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल आरोपित करता है, उत्प्लावकता कहलाता है।

प्रश्न 3. पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है?

उत्तर- जब किसी वस्तु को पानी की सतह पर रखा जाता है तो उस वस्तु पर दो बल कार्य करते हैं-

(1) प्रथम वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (वस्तु का भार) नीचे की ओर, तथा
(2) द्वितीय वस्तु पर पानी का उत्प्लावन बल ऊपर की ओर।

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किसी वस्तु का पानी में डूबना या तैरना उपर्युक्त दोनों बलों के आपेक्षिक मानों पर निर्भर करता है।
(1) यदि वस्तु का भार उत्प्लावन बल से अधिक है तो वस्तु पानी में डूब जायेगी।
(2) यदि वस्तु का भार उत्प्लावन बल से कम है तो वस्तु पानी में तैरेगी।
(3) यदि वस्तु का भार उत्प्लावन बल के बराबर है तो वस्तु पानी में पूरी डूबकर तैरती रहेगी।

किसी वस्तु के जल में तैरने या डूबने का ज्ञान उस वस्तु के घनत्व से प्राप्त किया जा सकता है। यदि किसी वस्तु का घनत्व जल के घनत्व से कम है तो वह वस्तु पानी में तैरेगी। इसके विपरीत यदि उस वस्तु का घनत्व, जल के घनत्व से अधिक है तो वह वस्तु जल में डूब जायेगी।

Tight Equation derivation
Tight Equation derivation

अतः वस्तु के बीच की दूरी को आधा करने पर उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना हो जाता है।

प्रश्न 2. सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती?

उत्तर- स्वतंत्र रूप से गिरते समय प्रत्येक वस्तु gg गुरुत्वीय त्वरण के मान को अनुभव करती है। वस्तु के प्रतिरोध के कारण एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से नीचे नहीं गिरती है। चूँकि हल्की वस्तु पर लगने वाला वायु का प्रतिरोध भारी वस्तु पर लगने वाले प्रतिरोध से अधिक होता है।

प्रश्न 3. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg1\text{ kg} की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6×1024 kg6 \times 10^{24}\text{ kg} तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4×106 m6.4 \times 10^6\text{ m} है।)

हल- दिया गया है-

वस्तु का द्रव्यमान m1=1 kgm_1 = 1\text{ kg}
पृथ्वी का द्रव्यमान m2=6×1024 kgm_2 = 6 \times 10^{24}\text{ kg}
पृथ्वी की त्रिज्या R=6.4×106 mR = 6.4 \times 10^6\text{ m}
d=Rd = R
G=6.67×1011N×m2kg2G = 6.67 \times 10^{-11}\frac{\text{N} \times \text{m}^2}{\text{kg}^2}
\therefore पृथ्वी तथा वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल-
F=Gm1×m2R2F = G \frac{m_1 \times m_2}{R^2}


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प्रश्न 1. एक तुला (weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg42\text{ kg} नोट करते हैं। क्या आपका द्रव्यमान 42 kg42\text{ kg} से अधिक है या कम?

उत्तर- चूँकि हम किसी वस्तु का द्रव्यमान वायु में मापते हैं, अतः वायु की उत्प्लावकता के कारण तुला का पाठ्यांक सदैव ही वस्तु के वास्तविक द्रव्यमान से कम होता है। इस कारण हमारा वास्तविक द्रव्यमान 42 kg42\text{ kg} से कुछ अधिक होगा, परन्तु यह अन्तर अत्यन्त कम होगा।

प्रश्न 2. आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg100\text{ kg} द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक-दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?

उत्तर- लोहे की छड़ भारी है क्योंकि लोहे का घनत्व (kg/m3\text{kg/m}^3) रुई के घनत्व से अधिक है।

घनत्व (D)=द्रव्यमान (m)आयतन (V)\text{घनत्व (D)} = \frac{\text{द्रव्यमान (m)}}{\text{आयतन (V)}}


पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?

उत्तर- हम जानते हैं कि दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

मान रखने पर

=6.67×1011×(1)×(6×1024)(6.4×106)2= \frac{6.67 \times 10^{-11} \times (1) \times (6 \times 10^{24})}{(6.4 \times 10^6)^2}
=6.67×6×10136.4×6.4×1012=6.67×606.4×6.4= \frac{6.67 \times 6 \times 10^{13}}{6.4 \times 6.4 \times 10^{12}} = \frac{6.67 \times 60}{6.4 \times 6.4}

=9.77 N= 9.77 \text{ N}
अतः F=9.77 NF = 9.77 \text{ N} उत्तर

प्रश्न 4. पृथ्वी तथा चंद्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?

उत्तर- न्यूटन के क्रिया-प्रतिक्रिया नियम के अनुसार पृथ्वी का चंद्रमा पर आकर्षण बल, चंद्रमा के पृथ्वी पर आकर्षण बल के बराबर है।

प्रश्न 5. यदि चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?

उत्तर- न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार, चंद्रमा और पृथ्वी दोनों एक-दूसरे को बराबर और विरोधी बल से आकर्षित करते हैं लेकिन न्यूटन की गति के दूसरे नियम के अनुसार त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

a=Fma = \frac{F}{m}
चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक है इसलिए एक-दूसरे पर समान परिमाण का आकर्षण बल होने पर भी चंद्रमा की ओर पृथ्वी का त्वरण लगभग नगण्य के बराबर है। इस कारण से हम पृथ्वी को चंद्रमा की ओर गति करते नहीं देखते हैं।

प्रश्न 6. दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि-
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?

उत्तर- (i) Fm1m2\because F \propto m_1 m_2

इसलिए किसी एक वस्तु के द्रव्यमान को दोगुना करने पर वस्तुओं के बीच लगने वाला बल भी दोगुना हो जायेगा।

Tight Equation/Derivation Block
Tight Equation/Derivation Block

अतः जब वस्तुओं के बीच दूरी को दोगुना किया जाता है, तो उनके बीच लगने वाला बल एक-चौथाई रह जाता है जबकि दूरी तीन गुना करने पर बल का मान घटकर 9वाँ भाग रह जाता है।

(iii) यदि m1=2m1m_1 = 2m_1 और m2=2m2m_2 = 2m_2 कर दिया जाये तब
F1=G(2m1)(2m2)R2F_1 = \frac{G(2m_1)(2m_2)}{R^2}
F1=4(Gm1m2R2)=4FF_1 = 4 \left( \frac{Gm_1m_2}{R^2} \right) = 4F
F1=4FF_1 = 4F

अतः यदि दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाता है तो उनके बीच लगने वाला बल चार गुना हो जाता है।

प्रश्न 7. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्त्व हैं?

उत्तर- गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के महत्त्व- यह नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की व्याख्या करता है, जो प्राचीनकाल में असम्बद्ध मानी जाती थीं, जैसे-

(i) यह वह बल है जिसके कारण हम पृथ्वी से बँधे रहते हैं।
(ii) सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति की व्याख्या की जाती है।
(iii) चंद्रमा तथा सूर्य के कारण समुद्रों में ज्वार-भाटा आता है।

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(iv) पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति की व्याख्या की जाती है।
(v) कृत्रिम उपग्रहों को पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने के लिए अभिकेन्द्रीय बल इसके कारण प्राप्त होता है।
पृथ्वी की कक्षा में कृत्रिम उपग्रह स्थापित करना चन्द्रमा तथा अन्य ग्रहों तक खोजी यान भेजना तथा अन्तरिक्ष स्टेशन स्थापित करना आदि इसी नियम का ज्ञान प्राप्त होने के बाद ही सम्भव हो पाया है।

प्रश्न 8. मुक्त पतन का त्वरण क्या है?

उत्तर- जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है तो उसमें त्वरण उत्पन्न होता है। यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होता है। यही कारण है कि इसे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न त्वरण या गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। मुक्तपाती वस्तुओं में उत्पन्न त्वरण सभी वस्तुओं के लिए समान होता है और वह गिरती हुई वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं होता है। इसे gg से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान 9.8 m/s29.8 \text{ m/s}^2 होता है।

प्रश्न 9. पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?

उत्तर- पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को वस्तु का भार कहेंगे।

प्रश्न 10. एक व्यक्ति A अपने एक मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं, तो क्यों?
( gg का मान विषुवत वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)

उत्तर- नहीं, चूँकि किसी वस्तु का भार gg के मान पर निर्भर करता है।

ध्रुवों पर gg का मान अधिक होता है और विषुवत वृत्त पर कम, जिसके कारण ध्रुवों पर किसी वस्तु का भार अधिक होगा और विषुवत वृत्त पर कम।
अतः विषुवत रेखा पर gg के मान में कमी के कारण सोने का भार, ध्रुव पर उसके भार से कम होगा।

प्रश्न 11. एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?

उत्तर- कागज की शीट और उसी प्रकार की शीट को मोड़कर बनाई गई गेंद का द्रव्यमान चाहे समान हो पर कागज की शीट पर लगने वाला वायु का प्रतिरोध उसके फैले हुए आकार के कारण कागज की शीट से बनी गेंद से अधिक होगा, जिस कारण कागज की शीट गेंद की तुलना में धीमी गति से गिरती है।

प्रश्न 12. चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 16\frac{1}{6} गुणा है। एक 10 kg10 \text{ kg} की वस्तु का चंद्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?

हल- दिया गया है-

पृथ्वी पर वस्तु का भार m=10 kgm = 10 \text{ kg}
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण g=9.8 मीटर/सेकण्ड2g = 9.8 \text{ मीटर/सेकण्ड}^2
\therefore पृथ्वी पर वस्तु का भार W1=mgW_1 = mg

=10×9.8=98 N= 10 \times 9.8 = 98 \text{ N}
चूँकि चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण gg

=16×पृथ्वी पर गुरुत्वीय बल= \frac{1}{6} \times \text{पृथ्वी पर गुरुत्वीय बल}
\therefore चन्द्रमा पर वस्तु का भार W2W_2

=16×पृथ्वी पर वस्तु का भार= \frac{1}{6} \times \text{पृथ्वी पर वस्तु का भार}
या W2=16×W1W_2 = \frac{1}{6} \times W_1

=16×98 न्यूटन= \frac{1}{6} \times 98 \text{ न्यूटन}
W2=16.33 न्यूटनW_2 = 16.33 \text{ न्यूटन}
अतः पृथ्वी पर वस्तु का भार 98 N98 \text{ N} तथा चन्द्रमा पर इसका भार 16.3 N16.3 \text{ N} होगा।

प्रश्न 13. एक गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s49 \text{ m/s} के वेग से फेंकी जाती है। परिकलन कीजिए-
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है।
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।

हल- दिया गया है-

गेंद का आरम्भिक वेग, u=49 m/su = 49 \text{ m/s} ऊपर की ओर
अन्तिम वेग, v=0 m/sv = 0 \text{ m/s}
गुरुत्वीय त्वरण, g=9.8 m/s2g = -9.8 \text{ m/s}^2 (पृथ्वी तल से विपरीत दिशा में जाने के कारण ऋणात्मक चिह्न)
तय की गई दूरी (ऊँचाई) h=?h = ?
ऊपर तक जाने में समय tt लेती है।
गति के तीसरे नियम से-
v2=u2+2ghv^2 = u^2 + 2gh
0=(49)2+2(9.8)×h0 = (49)^2 + 2 (-9.8) \times h

0=(49)22×9.8×h0 = (49)^2 - 2 \times 9.8 \times \text{h}
या 2×9.8×h=(49)2=49×492 \times 9.8 \times \text{h} = (49)^2 = 49 \times 49
h=49×492×9.8\Rightarrow \text{h} = \frac{49 \times 49}{2 \times 9.8}

=2452=122.5 m= \frac{245}{2} = 122.5 \text{ m}
अब गेंद को ऊपर जाने में लगा समय
v=u+gt\text{v} = \text{u} + \text{gt}
0=49+(9.8)×t0 = 49 + (- 9.8) \times \text{t}
9.8 t=49\Rightarrow 9.8 \text{ t} = 49
t=499.8=49098\Rightarrow \text{t} = \frac{49}{9.8} = \frac{490}{98}
t=5 सेकण्ड\text{t} = 5 \text{ सेकण्ड}
\therefore वस्तु द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई 122.5122.5 मीटर है। कोई वस्तु जितना समय उच्चतम बिन्दु तक जाने में लेती है, उतना ही समय पृथ्वी तल तक वापस आने में लेती है। अतः:
पृथ्वी की सतह तक लौटने में लगा समय
5s+5s=10s5\text{s} + 5\text{s} = 10\text{s}

प्रश्न 14. 19.6 m19.6 \text{ m} ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए।

हल- दिया गया है-

मीनार की ऊँचाई h=19.6 m\text{h} = 19.6 \text{ m}
गुरुत्वीय त्वरण g=9.8 m/s2\text{g} = 9.8 \text{ m/s}^2
आरंभिक वेग (u)=0 m/s(\text{u}) = 0 \text{ m/s}
अंतिम वेग (v)=?(\text{v}) = ?
गति के तीसरे समीकरण से जब वस्तु ऊपर से नीचे गिर रही है
v2=u2+2gh\text{v}^2 = \text{u}^2 + 2\text{gh} से
v2=(0)2+2×9.8×19.6\text{v}^2 = (0)^2 + 2 \times 9.8 \times 19.6
v2=0+2×98×19610×10\Rightarrow \text{v}^2 = 0 + \frac{2 \times 98 \times 196}{10 \times 10}
v2=196×19610×10\Rightarrow \text{v}^2 = \frac{196 \times 196}{10 \times 10}
v=196×19610×10=19610\Rightarrow \text{v} = \sqrt{\frac{196 \times 196}{10 \times 10}} = \frac{196}{10}
v=19.6 m/s\text{v} = 19.6 \text{ m/s}
अतः: पत्थर का पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अंतिम वेग

v=19.6 m/s\text{v} = 19.6 \text{ m/s} उत्तर

प्रश्न 15. कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s40 \text{ m/s} के प्रारम्भिक वेग से फेंका गया है। g=10 m/s2\text{g} = 10 \text{ m/s}^2 लेते हुए ग्राफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुँची अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?

हल- दिया गया है-

पत्थर का प्रारम्भिक वेग (ऊपर की ओर) u=40 m/s\text{u} = 40 \text{ m/s}
गुरुत्वीय त्वरण g=10 m/s2\text{g} = - 10 \text{ m/s}^2
(पृथ्वी तल से विपरीत दिशा में जाने के कारण ऋणात्मक चिह्न)
अधिकतम ऊँचाई पर पत्थर का अन्तिम वेग शून्य होगा।
v=0 m/s\therefore \text{v} = 0 \text{ m/s}
हम जानते हैं कि v=ugt\text{v} = \text{u} - \text{gt} .....(1)
v=4010 t\text{v} = 40 - 10 \text{ t}
0=4010 t0 = 40 - 10 \text{ t}
10t=4010\text{t} = 40
t=4010=4s\text{t} = \frac{40}{10} = 4\text{s}
अतः: 44 सेकण्ड के बाद पत्थर अधिकतम ऊँचाई प्राप्त करेगा।
उपर्युक्त समीकरण (1) में t\text{t} का मान 1 sec,2 sec,3 sec1 \text{ sec}, 2 \text{ sec}, 3 \text{ sec}4 sec4 \text{ sec} रखने पर वेग तालिका निम्न प्रकार प्राप्त होगी-

समय सेकण्ड में 0 1 2 3 4
वेग ms1\text{ms}^{-1} 40 30 20 10 0

उपर्युक्त सारणी की सहायता से खींचा गया वेग-समय ग्राफ निम्न प्रकार से है-

Velocity-Time Graph showing a straight line from (0,40) to (4,0) labeled A and B respectively
Velocity-Time Graph showing a straight line from (0,40) to (4,0) labeled A and B respectively

ग्राफ द्वारा अधिकतम तय की गई दूरी

=ΔOAB= \Delta\text{OAB} का क्षेत्रफल

568

=12×OB×OA= \frac{1}{2} \times \text{OB} \times \text{OA}
=12×4×40= \frac{1}{2} \times 4 \times 40

=80 m= 80 \text{ m}
(i) पत्थर द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई =80 m= 80 \text{ m} होगी। उत्तर

(ii) वस्तु का कुल विस्थापन =0= 0 चूँकि वस्तु वापस धरती पर लौट आती है। उत्तर

(iii) वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी =80 m+80 m=160 m= 80 \text{ m} + 80 \text{ m} = 160 \text{ m} उत्तर

प्रश्न 16. पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान =6×1024 kg= 6 \times 10^{24} \text{ kg} तथा सूर्य का द्रव्यमान =2×1030 kg= 2 \times 10^{30} \text{ kg}। दोनों के बीच औसत दूरी 1.5×1011 m1.5 \times 10^{11} \text{ m} है।

हल-दिया गया है-

पृथ्वी का द्रव्यमान,
me=6×1024 kgm_e = 6 \times 10^{24} \text{ kg}
सूर्य का द्रव्यमान,
ms=2×1030 kgm_s = 2 \times 10^{30} \text{ kg}
दोनों के बीच औसत दूरी,
RR या d=1.5×1011 md = 1.5 \times 10^{11} \text{ m}
गुरुत्वीय स्थिरांक,
G=6.67×1011 Nm2 kg2G = 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2 \text{ kg}^{-2}
सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियमानुसार,
F=Gm1m2R2F = G \frac{m_1 m_2}{R^2}
F=GmemsR2\therefore F = G \frac{m_e m_s}{R^2}
मान रखने पर
F=6.67×1011×6×1024×2×1030(1.5×1011)2F = \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24} \times 2 \times 10^{30}}{(1.5 \times 10^{11})^2}

=6.67×6×2×1024+30111.5×1.5×1022= \frac{6.67 \times 6 \times 2 \times 10^{24+30-11}}{1.5 \times 1.5 \times 10^{22}}
=6.67×12×10432.25×1022=6.67×12×1043222.25= \frac{6.67 \times 12 \times 10^{43}}{2.25 \times 10^{22}} = \frac{6.67 \times 12 \times 10^{43-22}}{2.25}

=667×12×1021225= \frac{667 \times 12 \times 10^{21}}{225}
=3.56×1022 N= 3.56 \times 10^{22} \text{ N} उत्तर

प्रश्न 17. कोई पत्थर 100 m100 \text{ m} ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s25 \text{ m/s} के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे?

उत्तर-पत्थर की ऊपर से नीचे गति के लिए-माना दोनों पत्थर बिन्दु CC पर मिलते हैं। माना AA से CC तक की दूरी xx (मीटर) है।

दिया गया है-
u=0 m/su = 0 \text{ m/s}
g=10 m/s2g = 10 \text{ m/s}^2
h=xh = x (मीटर)
गति के दूसरे समीकरण से
h=ut+12gt2h = ut + \frac{1}{2}gt^2
x=0×t+12×10×t2x = 0 \times t + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2
x=0+5t2=5t2x = 0 + 5t^2 = 5t^2 .....(1)

Motion diagram showing points A, C, B with distances x and 100-x
Motion diagram showing points A, C, B with distances x and 100-x

पत्थर की नीचे से ऊपर की गति
u=25 m/su = 25 \text{ m/s}
h=(100x) mh = (100 - x) \text{ m}
गति के दूसरे समीकरण से
h=ut+12gt2h = ut + \frac{1}{2}gt^2
(100x)=25t12×10×t2(100 - x) = 25t - \frac{1}{2} \times 10 \times t^2
(100x)=25t5t2(100 - x) = 25t - 5t^2
5t2=25t(100x)5t^2 = 25t - (100 - x)

=25t100+x= 25t - 100 + x
5t2=25t100+x5t^2 = 25t - 100 + x .....(2)
समीकरण (1) से xx का मान रखने पर
5t2=25t100+5t25t^2 = 25t - 100 + 5t^2
0=25t100\Rightarrow 0 = 25t - 100
25t=100\Rightarrow 25t = 100
t=10025=4t = \frac{100}{25} = 4
t=4 st = 4 \text{ s}
tt का मान समीकरण (1) में रखने पर
x=5×(4)2=5×16=80 mx = 5 \times (4)^2 = 5 \times 16 = 80 \text{ m}
\therefore पत्थर जहाँ मिलेंगे =10080=20 m= 100 - 80 = 20 \text{ m}
अतः पत्थर, प्रारम्भिक क्षण से 44 सेकण्ड बाद, पृथ्वी तल से 2020 मीटर की ऊँचाई पर मिलेंगे।
या पत्थर प्रारम्भिक क्षण से 44 सेकण्ड बाद, चोटी से 8080 मीटर नीचे मिलेंगे।

प्रश्न 18. ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर

फेंकी गई एक गेंद 6 s6\text{ s} पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए-
(i) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई;
(ii) गेंद द्वारा पहुँचई गई अधिकतम ऊँचाई; तथा
(iii) 4 s4\text{ s} पश्चात् गेंद की स्थिति।

हल- गेंद को ऊपर जाने और ऊपर से नीचे आने में समान समय लगता है।

\therefore गेंद को ऊपर जाने में लगा समय =3 s= 3\text{ s}

(i) u=?u = ?
g=9.8 m/s2g = -9.8\text{ m/s}^2
t=3 st = 3\text{ s}
v=0v = 0 (अधिकतम ऊँचाई पर जाकर जहाँ से वस्तु पुनः वापस आती है)
गति के प्रथम समीकरण से
v=u+gtv = u + gt से
0=u+(9.8)×30 = u + (-9.8) \times 3
0=u29.40 = u - 29.4
u=29.4 m/s\therefore u = 29.4\text{ m/s}
अतः गेंद 29.429.4 मीटर/सेकण्ड के वेग से फेंकी गई थी। उत्तर

(ii) गति के दूसरे समीकरण से
v2=u2+2ghv^2 = u^2 + 2gh से
0=(29.4)2+2(9.8)×h0 = (29.4)^2 + 2 (-9.8) \times h
0=29.4×29.42×9.8×h0 = 29.4 \times 29.4 - 2 \times 9.8 \times h
2×9.8×h=29.4×29.4\Rightarrow 2 \times 9.8 \times h = 29.4 \times 29.4
h=29.4×29.42×9.8=29.4×29.419.6h = \frac{29.4 \times 29.4}{2 \times 9.8} = \frac{29.4 \times 29.4}{19.6}
h=44.1 mh = 44.1\text{ m}
अतः गेंद द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई =44.1= 44.1 मीटर उत्तर

(iii) 33 सेकण्ड बाद गेंद वापस गिरने लगेगी
u=0u = 0
g=9.8 m/s2g = 9.8\text{ m/s}^2
t=43=1t = 4 - 3 = 1
h=ut+12gt2h = ut + \frac{1}{2}gt^2 से

=0+12×9.8×(1)2= 0 + \frac{1}{2} \times 9.8 \times (1)^2
=0+4.9=4.9 m= 0 + 4.9 = 4.9\text{ m}
अतः नीचे से गेंद की ऊँचाई =44.14.9=39.2 m= 44.1 - 4.9 = 39.2\text{ m}
अतः 44 सेकण्ड बाद गेंद पृथ्वी तल से 39.239.2 मीटर ऊपर होगी।


प्रश्न 19. किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?

उत्तर- किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल ऊपर की ओर अर्थात् भार के विपरीत दिशा में कार्य करता है।

प्रश्न 20. पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?

उत्तर- जब किसी प्लास्टिक के गुटके को पानी के भीतर छोड़ते हैं तो यह पानी की सतह पर आ जाता है। चूँकि प्लास्टिक का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है। इस कारण प्लास्टिक के गुटके को जल में डुबोने पर उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल गुटके के भार से अधिक होगा। अतः गुटका पानी की सतह पर आ जाता है।

प्रश्न 21. 50 g50\text{ g} के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm320\text{ cm}^3 है। यदि पानी का घनत्व 1 g cm31\text{ g cm}^{-3} हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा?

उत्तर- दिया गया है-

50 g50\text{ g} पदार्थ का आयतन =20 cm3= 20\text{ cm}^3
पदार्थ का द्रव्यमान =50 g= 50\text{ g}
आयतन =20 cm3= 20\text{ cm}^3
जल का घनत्व =1 ग्राम/सेमी3= 1\text{ ग्राम/सेमी}^3
पदार्थ का घनत्व =?= ?

घनत्व=द्रव्यमानआयतन=50 g20 cm3\text{घनत्व} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}} = \frac{50\text{ g}}{20\text{ cm}^3}
घनत्व=2.5 g/cm3\text{घनत्व} = 2.5\text{ g/cm}^3

सापेक्षिक घनत्व=पदार्थ का घनत्वपानी का घनत्व\text{सापेक्षिक घनत्व} = \frac{\text{पदार्थ का घनत्व}}{\text{पानी का घनत्व}}

=2.5 g/cm31 g/cm3=2.5= \frac{2.5\text{ g/cm}^3}{1\text{ g/cm}^3} = 2.5

चूँकि पदार्थ का सापेक्षिक घनत्व 2.52.5 है जो कि पानी के घनत्व 11 से अधिक है, अतः पदार्थ पानी में डूब जायेगा।

प्रश्न 22. 500 g500\text{ g} के एक मोहरबंद पैकेट का आयतन 350 cm3350\text{ cm}^3 है। पैकेट 1 g cm31\text{ g cm}^{-3} घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?

हल- दिया गया है-

पैकेट का द्रव्यमान =500 g= 500\text{ g}
पैकेट का आयतन =350 cm3= 350\text{ cm}^3

570

पैकेट का घनत्व = ?
जल का घनत्व = 1 ग्राम/सेमी31 \text{ ग्राम/सेमी}^3

पैकेट का घनत्व = द्रव्यमानआयतन\frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}

=500 g350 cm3=1.428 g/cm3= \frac{500 \text{ g}}{350 \text{ cm}^3} = 1.428 \text{ g/cm}^3

अतः पैकेट का घनत्व = 1.428 g/cm31.428 \text{ g/cm}^3
\because पैकेट का घनत्व > जल का घनत्व
यहाँ पर पैकेट का घनत्व 1.428 g/cm31.428 \text{ g/cm}^3 है लेकिन पानी का घनत्व 1 g/cm31 \text{ g/cm}^3 है इसलिए पैकेट डूब जाएगा।
चूँकि पैकेट पानी में डूब जाता है, अतः यह अपने आयतन (350 cm3350 \text{ cm}^3) के बराबर पानी को विस्थापित करेगा।
अतः पैकेट द्वारा विस्थापित पानी = 350 cm3350 \text{ cm}^3
विस्थापित पानी का द्रव्यमान = विस्थापित पानी का आयतन ×\times पानी का घनत्व

=350×1= 350 \times 1
=350 g= 350 \text{ g} उत्तर


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुचयनात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी 'r' है तो उन वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल समानुपातिक होता है-
(अ) r2r^2 के
(ब) rr के
(स) 1r\frac{1}{r} के
(द) 1r2\frac{1}{r^2} के

प्रश्न 2. एक पत्थर को किसी मीनार से गिराते हैं। मीनार से 2020 मीटर गिरने पर इसका वेग कितना होगा? (g=10 मीटर/सेकण्ड2g = 10 \text{ मीटर/सेकण्ड}^2)-
(अ) 10 मीटर/सेकण्ड-10 \text{ मीटर/सेकण्ड}
(ब) 10 मीटर/सेकण्ड10 \text{ मीटर/सेकण्ड}
(स) 20 मीटर/सेकण्ड-20 \text{ मीटर/सेकण्ड}
(द) 20 मीटर/सेकण्ड20 \text{ मीटर/सेकण्ड}

प्रश्न 3. जब कोई गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी जाती है तो गुरुत्वीय त्वरण-
(अ) उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में होता है।
(ब) उसकी गति की ही दिशा में होता है।
(स) गेंद के नीचे आते समय बढ़ता जाता है।
(द) गेंद की उच्चतम स्थिति पर शून्य हो जाता है।

प्रश्न 4. दो वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल निर्भर नहीं करता है-
(अ) वस्तुओं के मध्य दूरी पर
(ब) वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल पर
(स) वस्तुओं के द्रव्यमान के योग पर
(द) गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक पर।

प्रश्न 5. यदि दो वस्तुओं का द्रव्यमान दुगुना कर दिया जाए और उनके मध्य दूरी को भी दुगुना कर दिया जाए तो दोनों वस्तुओं के मध्य लगने वाला बल पहले की अपेक्षा हो जाएगा-

(अ) 88 गुना
(ब) 44 गुना
(स) 22 गुना
(द) 11 गुना

प्रश्न 6. गुरुत्वीय त्वरण का मान अधिकतम होता है-
(अ) पृथ्वी की भूमध्य रेखा पर
(ब) पृथ्वी के ध्रुवों पर
(स) किसी पहाड़ की चोटी पर
(द) पृथ्वी के अन्दर गहरी खान में

प्रश्न 7. गुरुत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों की अपेक्षा भूमध्य रेखा पर-
(अ) पृथ्वी की आकृति व चक्रण दोनों के कारण घटता है
(ब) पृथ्वी की आकृति के कारण बढ़ता है, पर चक्रण के कारण घटता है
(स) पृथ्वी की आकृति के कारण घटता है, पर चक्रण के कारण बढ़ता है
(द) पृथ्वी की आकृति व चक्रण दोनों के कारण बढ़ता है।

प्रश्न 8. gg का मान सबसे अधिकतम कहाँ पर होता है?
(अ) पृथ्वी की सतह पर
(ब) ऊँचाई पर
(स) गहराई में
(द) केन्द्र पर।

1. (द) 2. (द) 3. (अ) 4. (स) 5. (द)
6. (ब) 7. (अ) 8. (अ)

रिक्त स्थान वाले प्रश्न-

  1. दो पिण्डों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र F=F = \dots\dots\dots\dots\dots\dots होता है।

  2. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियतांक GG का मान किसी \dots\dots\dots\dots\dots\dots नहीं करता है।

  3. वह अवस्था जब वस्तु का भार शून्य हो जाता है, \dots\dots\dots\dots\dots\dots कहलाती है।

  4. जब वस्तुयें पृथ्वी की ओर गुरुत्वीय आकर्षण बल के कारण गिरती हैं, तब उनकी गति \dots\dots\dots\dots\dots\dots कहलाती है।

उत्तरमाला- 1. Gm1m2d2\frac{\text{Gm}_1\text{m}_2}{\text{d}^2} 2. निर्भर 3. भारहीनता 4. मुक्तपतन।

सत्य/असत्य कथन वाले प्रश्न-
निम्नलिखित कथनों में सत्य तथा असत्य कथन छाँटिए-

  1. वस्तु की वृत्ताकार गति के लिये आवश्यक बल अभिकेन्द्र बल होता है। सत्य/असत्य
  2. निर्वात में स्वतंत्रतापूर्वक गिरते हुए पिण्डों का बल समान होता है। सत्य/असत्य
  3. चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान 1.571.57 मीटर/से2^2 होता है। सत्य/असत्य
  4. चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान, पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का 16\frac{1}{6} भाग होता है। सत्य/असत्य

उत्तरमाला- 1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. सत्य।

मिलान वाले प्रश्न-
निम्नलिखित प्रश्न में भाग (अ) का मिलान भाग (ब) से करके सही कूट (कोड) का चयन कीजिए-

भाग (अ) भाग (ब)
(i) गुरुत्वाकर्षण का नियम (a) भास्कराचार्य
(ii) प्रयोगशाला में G के मान की गणना (b) कॉपरनिकस
(iii) खगोल पिण्डों की गति का मॉडल (c) हेनरी कैवेंडिस
(iv) भूकेन्द्रीय मॉडल (d) आर्यभट्ट
(v) सिद्धान्त शिरोमणि (e) न्यूटन

उत्तर-(i) (e) (ii) (c) (iii) (b) (iv) (d) (v) (a)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. उस बल का नाम बताइए जो ग्रहों का सूर्य के चारों तरफ चक्कर काटते रहने के लिए आवश्यक है।

उत्तर- गुरुत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 2. वस्तुओं का पृथ्वी की ओर गिरने के लिए कौनसा बल उत्तरदायी है?

उत्तर- गुरुत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 3. चन्द्रमा किसकी परिक्रमा करता है?

उत्तर- पृथ्वी की परिक्रमा।

प्रश्न 4. गुरुत्वाकर्षण बल के तथ्य को सबसे पहले किसने समझा था?

उत्तर- आइजक न्यूटन ने।

प्रश्न 5. न्यूटन को गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचने के लिए किस क्रिया ने प्रेरित किया था?

उत्तर- पेड़ से सेब नीचे गिरने की क्रिया ने।

प्रश्न 6. दाब का सूत्र लिखिए।

उत्तर- दाब = प्रणोदक्षेत्रफल\frac{\text{प्रणोद}}{\text{क्षेत्रफल}}

प्रश्न 7. यदि पृथ्वी के द्वारा सेब अपनी ओर आकृष्ट किया जाता तो सेब की ओर पृथ्वी क्यों नहीं खिंच पाती?

उत्तर- पृथ्वी की अपेक्षा सेब का द्रव्यमान नगण्य होता है, इसलिए सेब की तरफ पृथ्वी नहीं खिंच पाती है।

प्रश्न 8. गुरुत्वाकर्षण बल क्या है?

उत्तर- विश्व के सभी पिण्ड एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। वस्तुओं के बीच यह आकर्षण बल गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।

प्रश्न 9. पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण का मान क्या होगा?

उत्तर- गुरुत्वीय त्वरण gg का मान शून्य होगा इसलिए इसका भार भी शून्य होगा।

प्रश्न 10. चन्द्रमा पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल लगता है तो भी चन्द्रमा पृथ्वी पर क्यों नहीं गिरता?

उत्तर- चन्द्रमा स्थिर कक्षा में है तथा पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल चन्द्रमा की गति के लम्बवत् लगता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. गुब्बारे पर सुई चुभोने पर वह फट जाता है, परन्तु दबाने पर नहीं। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर- सुई की नोक का क्षेत्रफल बहुत कम होता है। इस कारण इससे लगने वाले बल का प्रभाव भी अधिक होता है। परन्तु गुब्बारे को हाथ से दबाने से हाथों का क्षेत्रफल गुब्बारे के बड़े क्षेत्र को घेरता है, जिससे लगने वाला बल अधिक क्षेत्र में वितरित हो जाता है। इस कारण गुब्बारा फटता नहीं है।

प्रश्न 2. आर्किमिडीज का सिद्धान्त लिखिए।

उत्तर- आर्किमिडीज का सिद्धान्त- यदि किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है तो वह ऊपर की दिशा में एक बल का अनुभव करती है, जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।

प्रश्न 3. GG की परिभाषा दो। इसका मान और मानक इकाई लिखिए।

उत्तर- दो वस्तुओं के बीच लगने वाला...

572

गुरुत्वाकर्षण बल
F=Gm1m2R2F = G \frac{m_1 m_2}{R^2} होता है।
यदि m1=m2=1m_1 = m_2 = 1 इकाई और R=1R = 1 इकाई
तब F=GF = G

अतः गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G) वह आकर्षण बल है जो इकाई द्रव्यमान वाली दो वस्तुओं के मध्य क्रिया करता है, जो कि एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थिर होती है।
CGS प्रणाली में G का मान 6.67×1086.67 \times 10^{-8} डाइन सेमी.2^2/ग्राम2^2 है। मानक इकाई में इसका मान 6.67×1011 Nm2/kg26.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2/\text{kg}^2 है।

प्रश्न 4. द्रव्यमान और भार के अभिलक्षण लिखिए।

उत्तर- द्रव्यमान के अभिलक्षण-किसी वस्तु में उपस्थित द्रव्य की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं। इसके प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित हैं-

(1) यह प्रत्येक स्थान पर समान रहता है।
(2) यह एक अदिश राशि है तथा इसे भौतिक तुला में तोला जाता है।
भार के अभिलक्षण-किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उसे अपनी ओर खींचती है। इसके प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित होते हैं-
(1) यह एक सदिश राशि है, जिसे कमानीदार तुला से तोला जाता है।
(2) यह स्थान-स्थान पर बदलता है।
(3) यह द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 5. दाब किसे कहते हैं? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर- इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।

अतः दाब (P)=बल (F)क्षेत्रफल (A)(P) = \frac{\text{बल } (F)}{\text{क्षेत्रफल } (A)}
बल का मात्रक न्यूटन और क्षेत्रफल का मात्रक मीटर2^2
इस प्रकार दाब का मात्रक न्यूटन/मीटर2^2 होता है।
इसका SI मात्रक पास्कल (Pa) होता है।
पिन, कुल्हाड़ी, कील, चाकू, कैंची आदि औजारों में बल का प्रभाव बढ़ाने के लिए उस क्षेत्रफल को कम किया जाता है, जिस पर ये क्रिया करते हैं। क्षेत्रफल कम होने से दाब बढ़ जाता है।

प्रश्न 6. भारी वाहनों के पहियों के टायर काफी चौड़े क्यों बनाए जाते हैं?

उत्तर- भारी वाहनों के पहियों के टायर काफी चौड़े बनाए जाते हैं क्योंकि भारी वाहनों के टायर चौड़े होने से सड़क (जमीन) पर इनके द्वारा लगने वाला दाब कम हो जाता है। चूँकि वाहन का भार अधिक क्षेत्रफल पर लगता है, इसलिए वाहन के पहिए जमीन में धंसने से बच जाते हैं।

प्रश्न 7. लोहे से बना जहाज समुद्र में तैरता रहता है। क्यों?

उत्तर- लोहे के जहाज का ढाँचा अवतल होता है तथा वह अन्दर से खोखला बनाया जाता है। जैसे ही जहाज समुद्र में प्रवेश करता है, उसके द्वारा (उसकी बनावट के कारण) इतना जल हटा दिया जाता है कि उसके द्वारा हटाए गए जल का भार, जहाज (जहाज एवं उसके समस्त सामान सहित) के कुल भार के बराबर हो जाता है। इसी कारण प्लवन के सिद्धान्त के अनुसार लोहे का जहाज जल में डूबता नहीं है, वरन् तैरता रहता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. सिद्ध कीजिए कि गुरुत्व-त्वरण का मान वस्तु के द्रव्यमान के मान से स्वतन्त्र होता है।

उत्तर- पृथ्वी तल पर mm द्रव्यमान वाली एक वस्तु पर विचार करते हैं। माना MM तथा RR पृथ्वी का द्रव्यमान और त्रिज्या है।

वस्तु पर क्रिया कर रहा FF गुरुत्व बल है।
तब F=GMmR2F = G \frac{Mm}{R^2}
वस्तु का त्वरण =बलद्रव्यमान= \frac{\text{बल}}{\text{द्रव्यमान}}

=GMmR2m= \frac{G \frac{Mm}{R^2}}{m}
या त्वरण =GMR2= G \frac{M}{R^2}
इसे ही गुरुत्व-त्वरण कहते हैं।
g=GMR2\therefore g = G \frac{M}{R^2}

इस समीकरण में वस्तु का द्रव्यमान mm शामिल नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि गुरुत्व बल के कारण किसी वस्तु द्वारा प्राप्त गुरुत्वीय त्वरण इसके द्रव्यमान से स्वतन्त्र होता है। अतः हम कहते हैं कि सभी आकार और द्रव्यमान वाली वस्तुएँ किसी भी स्थान पर समान त्वरण से गिरती हैं।

प्रश्न 2. जब किसी वस्तु को सीधे ऊपर फेंका जाता है तो उसके द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई ज्ञात करने के लिए समीकरण लिखिए।

उत्तर- अधिकतम ऊँचाई के लिए व्यंजक- जब किसी वस्तु को आरम्भिक वेग uu से ऊपर फेंका जाता है, तो वह अधिकतम ऊँचाई पर जाकर थोड़े समय के लिए रुक जाती है और उसी समय नीचे गिरना प्रारम्भ करती है। यहाँ पर वस्तु का अन्तिम वेग vv शून्य हो जाता है। यहाँ पर गुरुत्व वेग gg ऋणात्मक होगा। यदि अधिकतम ऊँचाई hh हो तो गति के तीसरे नियम से

v2=u2+2ghv^2 = u^2 + 2gh से
(0)2=(u)2+2(g)×h(0)^2 = (u)^2 + 2 (-g) \times h
0=u22gh0 = u^2 - 2gh
u2=2ghu^2 = 2gh
h=u22g\therefore h = \frac{u^2}{2g}

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. एक ग्रह की त्रिज्या और द्रव्यमान दोनों ही पृथ्वी की त्रिज्या और द्रव्यमान के आधे हैं तो ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी की तुलना में कितना होगा?

हल- पृथ्वी का द्रव्यमान = MeM_e

तब ग्रह का द्रव्यमान Mp=Me2M_p = \frac{M_e}{2}
पृथ्वी की त्रिज्या = ReR_e
तब ग्रह की त्रिज्या Rp=Re2R_p = \frac{R_e}{2}
ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण gpg_p ज्ञात करना है।

gpge=(MpMe)×(ReRp)2\therefore \frac{g_p}{g_e} = \left( \frac{M_p}{M_e} \right) \times \left( \frac{R_e}{R_p} \right)^2

या gpge=(Me2Me)×(2ReRe)2\frac{g_p}{g_e} = \left( \frac{M_e}{2M_e} \right) \times \left( \frac{2R_e}{R_e} \right)^2

या gpge=12×41=2\frac{g_p}{g_e} = \frac{1}{2} \times \frac{4}{1} = 2

या gp=2geg_p = 2 g_e
अतः ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण से दुगुना होगा।
इस प्रकार पृथ्वी पर 1.51.5 मीटर की छलांग लगाने वाला व्यक्ति इस ग्रह पर 0.750.75 मीटर की छलांग ही लगा पाएगा क्योंकि gp=2geg_p = 2g_e है।

प्रश्न 2. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम को समझाइये। आवश्यक चित्र बनाकर गुरुत्वीय जनित त्वरण gg, गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक GG, पृथ्वी के द्रव्यमान MeM_e और पृथ्वी की त्रिज्या ReR_e में सम्बन्ध ज्ञात कीजिये। 'g' का मान पृथ्वी पर कैसे परिवर्तित होता है?

उत्तर- न्यूटन ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के नियम का प्रतिपादन किया था। इस नियम के अनुसार "दो कणों के मध्य एक बल कार्य करता है जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं।" इस बल को न्यूटन ने निम्न प्रकार समझाया-

ब्रह्माण्ड में प्रत्येक कण, दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह आकर्षण बल दोनों कणों के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है और उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह आकर्षण बल दोनों कणों को जोड़ने वाली रेखा की दिशा की ओर होता है।

Two masses m1 and m2 separated by distance R with force F
Two masses m1 and m2 separated by distance R with force F

चित्र-दो वस्तुओं के मध्य आकर्षण बल

माना दो वस्तुओं (कणों) का द्रव्यमान क्रमशः m1m_1 और m2m_2 है और उनके मध्य दूरी RR है। उन दोनों वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल FF न्यूटन के नियमानुसार-
Fm1m2F \propto m_1 m_2 .....(1)
और F1R2F \propto \frac{1}{R^2} .....(2)
(1) और (2) को एक साथ लिखने पर
Fm1m2R2F \propto \frac{m_1 m_2}{R^2}
या F=Gm1m2R2F = G \frac{m_1 m_2}{R^2}

यहाँ GG एक समानुपाती स्थिरांक है जिसको गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। इसका मान 6.67×10116.67 \times 10^{-11} न्यूटन मी.2^2/किग्रा.2^2 होता है।

गुरुत्वीय त्वरण geg_e, स्थिरांक GG, पृथ्वी का द्रव्यमान MeM_e और पृथ्वी की त्रिज्या ReR_e में सम्बन्ध- MM द्रव्यमान की पृथ्वी के केन्द्र से RR दूरी पर स्थित mm द्रव्यमान की वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगने वाले बल का मान होगा-

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F=GMmR2F = G \frac{Mm}{R^2} .....(1)
यदि गुरुत्वीय त्वरण का मान gg है तो mm द्रव्यमान वाली वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वीय बल FF का मान होगा-
F=mgF = mg .....(2)
समीकरण (1) व (2) से-
mg=GMmR2mg = G \frac{Mm}{R^2}
या g=GMR2g = G \frac{M}{R^2} .....(3)
समीकरण (3) से स्पष्ट है कि-
स्वतंत्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु के गुरुत्वीय त्वरण का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है। यह केवल पृथ्वी के द्रव्यमान व पृथ्वी के केन्द्र से वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है। यदि पृथ्वी के धरातल पर गुरुत्वीय त्वरण का मान geg_e है, पृथ्वी का द्रव्यमान MeM_e है और पृथ्वी की त्रिज्या ReR_e है तो समीकरण (3) से-
ge=GMeRe2g_e = G \frac{M_e}{R_e^2}
gg का मान ऊँचाई पर जाते समय घटता है। gg का मान पृथ्वी के भीतर (गहराई पर) जाने पर भी घटता है।
gg का मान पृथ्वी तल पर अधिकतम होता है।

आंकिक प्रश्न-

प्रश्न 1. पृथ्वी का द्रव्यमान 6×1024 kg6 \times 10^{24} \text{ kg} है तथा चन्द्रमा का द्रव्यमान 7.4×1022 kg7.4 \times 10^{22} \text{ kg} है। यदि पृथ्वी तथा चन्द्रमा के बीच की दूरी 3.84×105 km3.84 \times 10^5 \text{ km} है तो पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर लगाये गये बल का परिकलन कीजिए।
G=6.7×1011 Nm2 kg2G = 6.7 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2 \text{ kg}^{-2}

हल- पृथ्वी का द्रव्यमान Me=6×1024 kgM_e = 6 \times 10^{24} \text{ kg}

चन्द्रमा का द्रव्यमान m=7.4×1022 kgm = 7.4 \times 10^{22} \text{ kg}
पृथ्वी तथा चन्द्रमा के बीच की दूरी
dd या R=3.84×105 kmR = 3.84 \times 10^5 \text{ km}

=3.84×105×103 m= 3.84 \times 10^5 \times 10^3 \text{ m}
=3.84×108 m= 3.84 \times 10^8 \text{ m}
G=6.7×1011 Nm2 kg2G = 6.7 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2 \text{ kg}^{-2}
पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर लगाया गया बल निम्न सूत्र से ज्ञात करेंगे-
F=GMemR2F = G \frac{M_e m}{R^2}

मान रखने पर

=6.7×1011×6×1024×7.4×1022(3.84×108)2= \frac{6.7 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24} \times 7.4 \times 10^{22}}{(3.84 \times 10^8)^2}
=6.7×6×7.4×1024+22113.84×3.84×1016= \frac{6.7 \times 6 \times 7.4 \times 10^{24+22-11}}{3.84 \times 3.84 \times 10^{16}}

=6.7×6×7.4×10353.84×3.84×1016= \frac{6.7 \times 6 \times 7.4 \times 10^{35}}{3.84 \times 3.84 \times 10^{16}}
=6.7×6×7.4×1035163.84×3.84= \frac{6.7 \times 6 \times 7.4 \times 10^{35-16}}{3.84 \times 3.84}

=6.7×6×7.4×10193.84×3.84= \frac{6.7 \times 6 \times 7.4 \times 10^{19}}{3.84 \times 3.84}
=20.17×1019= 20.17 \times 10^{19}
या =2.017×1020 N= 2.017 \times 10^{20} \text{ N}
अतः पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर लगाया गया बल =2.017×1020 N= 2.017 \times 10^{20} \text{ N} उत्तर

प्रश्न 2. एक आदमी का पृथ्वी पर भार 500 N500 \text{ N} है। उसका द्रव्यमान क्या है? (g=10 m/s2g = 10 \text{ m/s}^2 लें) यदि उसे चन्द्रमा पर ले जाया जाये, उसका भार 100 N100 \text{ N} होगा। चन्द्रमा पर उसका द्रव्यमान क्या है? चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण क्या है?

हल-(i) दिया गया है-

पृथ्वी पर मनुष्य का भार, W=500 NW = 500 \text{ N}
पृथ्वी पर मनुष्य का द्रव्यमान m=?m = ?
और गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी पर g=10 m/s2g = 10 \text{ m/s}^2
हम जानते हैं W=mgW = mg
m=Wg\therefore m = \frac{W}{g}

=50010=50 kg= \frac{500}{10} = 50 \text{ kg}
अतः पृथ्वी पर मनुष्य का द्रव्यमान 50 kg50 \text{ kg} है।
चूँकि किसी पिण्ड का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर समान रहता है। इसलिए इस आदमी का द्रव्यमान चन्द्रमा पर भी 50 kg50 \text{ kg} होगा।
(ii) चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण-
W=m×g\therefore W = m \times g
चन्द्रमा पर मनुष्य का भार =100 N= 100 \text{ N}
चन्द्रमा पर मनुष्य का द्रव्यमान m=50 kgm = 50 \text{ kg}
गुरुत्वीय त्वरण (चन्द्रमा पर) g=?g = ?
मान रखने पर-
100=50×g100 = 50 \times g
g=10050=2 m/s2g = \frac{100}{50} = 2 \text{ m/s}^2
अतः चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण 2 m/s22 \text{ m/s}^2 है।