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📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 10: [भूगोल] प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

Natural Vegetation and Wild Life

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (RBSE) 📘 समकालीन भारत-1 (भूगोल) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Natural Vegetation and Wild Life

[भूगोल] प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

के लौटने के साथ-साथ अक्टूबर एवं नवम्बर के महीनों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात आते हैं। ये पूर्वी प्रवाह के एक भाग होते हैं। इनके द्वारा भारत के पूर्वी तट पर व्यापक एवं भारी वर्षा होती है। कोरोमण्डल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती है।

इस प्रकार उपर्युक्त सभी कारक भारत की जलवायु को बहुत प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 3. लौटते हुए मानसून पर एक टिप्पणी लिखिये।

अथवा

मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर- मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) अक्टूबर तथा नवम्बर के महीनों में परिवर्तनीय मौसम रहता है। इस दौरान दक्षिण की तरफ सूर्य की आभासी गति के कारण मानसून गर्त (निम्न दाब वाला गर्त) उत्तरी मैदानों के ऊपर शिथिल हो जाता है और धीरे-धीरे उच्च दाब प्रणाली इसका स्थान ले लेती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून शिथिल हो जाते हैं और धीरे-धीरे पीछे की ओर हटने लगते हैं।

(2) अक्टूबर के प्रारम्भ में मानसूनी पवनें उत्तर के मैदान से हट जाती हैं।

(3) अक्टूबर एवं नवम्बर का महीना, वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है।

(4) मानसून की वापसी होने से आसमान साफ एवं तापमान में वृद्धि हो जाती है। दिन का तापमान उच्च होता है, जबकि रातें ठण्डी एवं सुहावनी होती हैं।

(5) इस समय स्थल में आर्द्रता बनी रहती है। अतः उच्च तापमान एवं आर्द्रता वाली अवस्था के कारण तीव्र उमस होती है। इसे सामान्यतः 'क्वार की उमस' कहते हैं।

(6) अक्टूबर के उत्तरार्द्ध में उत्तरी भारत में तापमान तेजी से गिरने लगता है।

(7) नवम्बर के प्रारंभ में, उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर निम्न दाब वाली अवस्था बंगाल की खाड़ी पर स्थानान्तरित हो जाती है। यह स्थानान्तरण चक्रवाती निम्न दाब से संबंधित होता है जो कि अंडमान सागर के ऊपर उत्पन्न होता है। ये चक्रवात सामान्यतः भारत के पूर्वी तट को पार करते हैं और भारत के पूर्वी तट पर व्यापक एवं भारी वर्षा करते हैं। ये प्रायः विनाशकारी होते हैं। गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेशों में इनके द्वारा जान एवं माल की भारी क्षति होती है।

(8) कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं।

(9) कोरोमण्डल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती है।


5. प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. वैकल्पिक प्रश्न-

(i) रबड़ का सम्बन्ध किस प्रकार की वनस्पति से है?
(क) टुंड्रा (ख) हिमालय
(ग) मैंग्रोव (घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं?
(क) 100100 सेमी. (ख) 7070 सेमी.
(ग) 5050 सेमी. (घ) 5050 सेमी. से कम वर्षा

(iii) सिमलीपाल जीव-मण्डल निचय कौनसे राज्य में स्थित है?
(क) पंजाब (ख) दिल्ली
(ग) ओडिशा (घ) पश्चिम बंगाल

(iv) भारत के कौनसे जीव-मण्डल निचय विश्व के जीव-मण्डल निचयों में लिए गए हैं?
(क) मानस (ख) मन्नार की खाड़ी
(ग) नीलगिरी (घ) पन्ना

उत्तरमाला- (i) (घ) (ii) (क) (iii) (ग) (iv) (ख), (ग) एवं (घ)।

प्रश्न 2. संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न-

(i) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है?

उत्तर- भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है-

(1) भू-आकृति (2) मृदा (3) तापमान (4) सूर्य का प्रकाश तथा (5) वर्षण।

(ii) जीव-मण्डल निचय से क्या अभिप्राय है? कोई दो उदाहरण दो।

उत्तर- जीव-मण्डल निचय एक बहु-उद्देशीय संरक्षित क्षेत्र होता है। जहाँ प्रत्येक पादप एवं जीव-प्रजाति को प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके दो उदाहरण अग्र हैं-

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(1) सुन्दर वन (प. बंगाल) (2) नंदा देवी (उत्तराखण्ड)।

(iii) कोई दो वन्य-प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्ण कटिबन्धीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।

उत्तर- 1. उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन-(a) हाथी (b) बन्दर।

  1. पर्वतीय वनस्पति-(a) याक (b) हिम तेंदुआ।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में अन्तर कीजिए-
(i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत
(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन।

उत्तर- (i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत में अन्तर

वनस्पति जगत प्राणी जगत
1. वनस्पति जगत शब्द से किसी विशेष क्षेत्र में, किसी समय में पौधों की जाति का ज्ञान होता है। 1. प्राणी जगत शब्द से किसी विशेष क्षेत्र में, किसी समय में जीवों का बोध होता है।
2. भारत में लगभग 47,00047,000 प्रकार की विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं। 2. भारत में जीवों की लगभग 90,00090,000 प्रकार की प्रजातियाँ मिलती हैं।

(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन में अन्तर

सदाबहार वन पर्णपाती वन
1. सदाबहार वन भारी वर्षा वाले प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ अल्पकालिक शुष्क मौसम के साथ, 200200 से.मी. से अधिक वर्षा होती है। 1. ये वन 7070 से.मी. और 200200 से.मी. के बीच होने वाली वर्षा वाले स्थानों पर पाए जाते हैं।
2. इन्हें वर्षा वन भी कहते हैं। 2. इन्हें मानसून वन भी कहते हैं।
3. यहाँ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं, जैसे-वृक्ष, झाड़, लताएँ आदि। क्योंकि यहाँ की जलवायु गर्म और आर्द्र होती है। 3. जलवायु के आधार पर ये वन दो भागों में बँटे होते हैं- (i) आर्द्र पर्णपाती-ये वन 100100 से 200200 से.मी. के बीच वर्षा वाले इलाकों में पाए जाते हैं। (ii) शुष्क पर्णपाती-ये वन 7070 से 100100 से.मी. के बीच वर्षा वाले इलाकों में मिलते हैं।
4. इन वनों में पतझड़ का समय या मौसम निश्चित नहीं होता है। अतः वन पूरे साल हरा-भरा दिखाई पड़ता है। 4. यहाँ शुष्क मौसम में लगभग 66 से 88 सप्ताह के लिए पतझड़ का दौर होता है। प्रत्येक वृक्ष प्रजाति का पतझड़ का एक निश्चित समय होता है। अतः वन उजड़ा हुआ नहीं लगता है।
5. ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, असम और तमिलनाडु के कुछ भागों, लक्षद्वीप और अण्डमान-निकोबार द्वीप-समूहों में पाए जाते हैं। 5. आर्द्र पर्णपाती वन उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपदों में, झारखण्ड, पश्चिमी उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी घाट के पूर्वी ढालों पर पाए जाते हैं। शुष्क पर्णपाती वन प्रायद्वीपीय पठार, बिहार और उत्तर प्रदेश के मैदानों के छोटे-छोटे भागों में मिलते हैं।

| 6. इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं-एबोनी, महोगनी, रोजवुड, रबड़ और सिनकोना। | 6. सागोन इस वन की सबसे विशिष्ट प्रजातियों में से एक है। अन्य हैं-बाँस, साल, शीशम, चंदन, खैर, अर्जुन, पीपल, नीम आदि। |

प्रश्न 4. भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।

उत्तर- भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति निम्न हैं-

(1) उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
(2) उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन
(3) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन तथा झाड़ियाँ
(4) पर्वतीय वन
(5) मैंग्रोव वन।

अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति- पर्वतीय भागों में ऊँचाई के साथ-साथ वनस्पति में अन्तर देखने को मिलता है। यथा-
(i) 10001000 मी. से 20002000 मी. तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन पाये जाते हैं। इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक और चेस्टनट जैसे वृक्षों की प्रधानता होती है।
(ii) 15001500 मी. से 30003000 मीटर की ऊँचाई के बीच शंकुधारी वृक्ष जैसे-चीड़ (पाइन), देवदार, सिल्वर-फर, स्प्रूस, सीडर आदि पाये जाते हैं।
(iii) अधिक ऊँचाई पर प्राय: शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान पाये जाते हैं। प्राय: 3,6003,600 मी. से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है।

सिल्वर-फर, जुनीपर, पाइन और बर्च इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं। जैसे-जैसे हिम रेखा की ओर बढ़ते हैं, उत्तरोत्तर ये पेड़-पौधे बौने होते जाते हैं। अन्ततः, झाड़-झंखाड़ में बदलकर ये अल्पाइन घास के मैदानों में विलीन हो जाते हैं। अत्यधिक ऊँचाइयों पर मॉस, लिचन आदि घास मिलती हैं।

प्रश्न 5. भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं। उदाहरण सहित कारण दीजिए।

उत्तर- भारत में बहुत संख्या में जीव तथा पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं। भारत में लगभग 1,3001,300 पादप प्रजातियाँ संकट में हैं तथा 2020 प्रजातियाँ विनष्ट भी हो चुकी हैं। इसी प्रकार काफी जीव-प्रजातियाँ संकट में हैं और कुछ विनष्ट भी हो चुकी हैं।

(अ) जीव जन्तु- भारत में जीव जन्तुओं के संकटग्रस्त होने के निम्न कारण हैं-
(1) प्राकृतिक आश्रय स्थलों का नष्ट होना- वन्य जीवों के नष्ट होने का सबसे बड़ा कारण उनके प्राकृतिक आश्रय स्थलों का नष्ट होना है। घरों, कृषि-भूमि, बाँधों तथा राजमार्गों के लिए वन काटने से वन्य-जीवों के आवास नष्ट हो जाते हैं। वन नष्ट होने से पादप प्रजातियाँ भी संकट में आ जाती हैं।
(2) शिकार- शिकार वन्य-जीवों के उन्मूलन का दूसरा प्रमुख कारण है। सरिस्का में शिकारियों ने बाघों का शिकार कर वहाँ सभी बाघों को खत्म कर दिया था। अब वहाँ रणथम्भौर से बाघ लाकर छोड़े गये हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में सींगों के लिए गैंडों का शिकार किया जाता है। पशुओं तथा पक्षियों को उनके चमड़े, पंखों तथा अन्य अवयवों के लिए एवं कभी-कभी संग्रहालयों में रखने के लिए मारा जाता है। वन्य जीवों के संकट में आने से पादप प्रजातियाँ भी संकट में आती हैं।
(3) कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग तथा प्रदूषण- कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग तथा वायुमंडलीय प्रदूषण भी जीवों और पादप प्रजातियों के लिए संकट का कारण है।
(4) रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट- बढ़ते औद्योगीकरण के कारण रासायनिक तथा औद्योगिक अवशिष्ट भी बढ़ता जा रहा है। इससे भी जीव तथा पादप प्रजातियों को खतरा है।
(5) अतिक्रमण- वनों में अतिक्रमण के कारण भी वन्य-जीवन को नुकसान हो रहा है। अभी हाल में ही रणथम्भौर में होटलों द्वारा वन क्षेत्र में स्थायी निर्माण सामने आये थे।

(ब) पादप प्रजातियाँ- भारत में पादप प्रजातियों के संकटग्रस्त होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(i) विकास कार्य- नगरीय विकास, सड़क, बाँध निर्माण एवं अधिक कृषि क्षेत्र उपलब्ध कराने हेतु जंगलों की निरन्तर कटाई हो रही है।
(ii) जलावन की लकड़ी- घरेलू आवश्यकता हेतु जलावन की लकड़ी के लिए स्थानीय लोगों द्वारा पेड़ों की कटाई की जा रही है।
(iii) बढ़ती जनसंख्या- बढ़ती जनसंख्या के लिए आवास गृह बनाने तथा अधिक कृषि क्षेत्र उपलब्ध कराने के लिए भी जंगलों की अधिक कटाई हो रही है।

प्रश्न 6. भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी क्यों है?

उत्तर- भारत एक विशाल देश है। यहाँ लगभग 47,00047,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं तथा लगभग 90,00090,000 जातियों के जीव पाये जाते हैं। इस प्रकार यह वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है। इसके मुख्य कारण निम्न हैं-

(1) भारत एक विशाल देश है। यहाँ पर्वतीय प्रदेश से लेकर पूर्वी और पश्चिमी पार्श्व में लम्बी तट रेखा तक, भारत का विस्तार बहुत अधिक है।
(2) भारत में जलवायुक विविधता भी पाई जाती है। यहाँ रेगिस्तानी प्रदेश, हिमालय का ठण्डा प्रदेश, तटवर्ती सम-जलवायु वाला प्रदेश सब पाये जाते हैं। अतः यहाँ विभिन्न जातियों के पादप तथा जीव भी बहुलता से मिलते हैं।
(3) वर्षण की दृष्टि से भारत में अल्पतम वर्षा

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वाले इलाके भी हैं तथा विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र भी है।
(4) यहाँ अनेक प्रकार की मृदाएँ भी पाई जाती हैं, जो विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के विकास में सहायक हैं।

मानचित्र कौशल

प्रश्न-भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ और अंकित करें-
(i) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
(ii) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन।

उत्तर -

भारत वनस्पति के प्रकार का मानचित्र
भारत वनस्पति के प्रकार का मानचित्र

(iii) भारत के मानचित्र में दो जीव-मण्डल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में दिखाएं तथा अंकित करें।

उत्तर-(1) उत्तरी भाग में-(i) नंदा देवी, (ii) ठंडा रेगिस्तान

(2) दक्षिणी भाग में-(i) मन्नार की खाड़ी, (ii) अगस्त्यमलाई
(3) पूर्वी भाग में-(i) दिहांग-दिबांग, (ii) सुंदरवन
(4) पश्चिमी भाग में-(i) कच्छ का रन, (ii) पचमढ़ी।

भारत का मानचित्र (जीव-मण्डल निचय)
भारत का मानचित्र (जीव-मण्डल निचय)

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

  1. मानव सहायता के बिना प्राकृतिक रूप से उगने वाले पादप समुदाय को कहा जाता है-
    (अ) अक्षत वनस्पति (ब) आकर्षक पौधे
    (स) टुण्ड्रा (द) टैगा

  2. निम्न में से कौनसे वन के वृक्ष शुष्क गर्मियों में अपनी पत्तियाँ दो महीने के लिए गिराते हैं?
    (अ) उष्ण कटिबंधीय सदाहरित वन
    (ब) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
    (स) उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन
    (द) मैंग्रोव

  3. आबनूस, महोगनी, रोजवुड और रबड़ जैसे महत्त्वपूर्ण वृक्ष निम्नलिखित में से कौनसे वन में पाये जाते हैं?
    (अ) पर्वतीय वन
    (ब) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
    (स) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
    (द) उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन

  4. नदियों के डेल्टा क्षेत्र में पाये जाते हैं-
    (अ) कंटीली झाड़ियाँ (ब) मैंग्रोव वन
    (स) शंकुधारी वन (द) पर्वतीय वन

  5. कौनसा पादप खांसी और जुकाम की दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है?

(अ) तुलसी (ब) बबूल
(स) जामुन (द) कचनार
6. लक्षद्वीप तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूहों पर किस प्रकार की वनस्पति पायी जाती है?
(अ) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन
(ब) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन
(स) पर्वतीय वन
(द) मैंग्रोव वन
7. असम और पश्चिमी बंगाल के दलदली क्षेत्र में पाया जाने वाला जन्तु है-
(अ) बाघ (ब) एक सींग वाला गैंडा
(स) भालू (द) शेर

उत्तरमाला-1. (अ) 2. (ब) 3. (ब) 4. (ब) 5. (अ) 6. (अ) 7. (ब)।

निम्न रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

  1. लद्दाख की बर्फीली ऊँचाइयों पर .................... पाया जाता है। (याक/ऊँट)
  2. सिमलीपाल जीव मण्डल निचय .................... राज्य में है। (असम/ओडिशा)
  3. कच्छ जीव मण्डल निचय .................... राज्य में स्थित है। (गुजरात/महाराष्ट्र)
  4. थार के मरुस्थल में .................... पाए जाते हैं। (बाघ/ऊँट)

उत्तर-1. याक 2. ओडिशा 3. गुजरात 4. ऊँट।

निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य वाक्य छाँटिए-

  1. भारत में वन क्षेत्र पर्याप्त क्षेत्रफल में विस्तृत है। ( )
  2. एक सींग वाले गैंडे असम और पश्चिमी बंगाल के दलदली क्षेत्र में मिलते हैं। ( )
  3. उष्णकटिबन्धीय पर्णपाती वनों को मानसूनी वन भी कहते हैं। ( )
  4. कचनार का अल्सर एवं दमा रोगों के लिए प्रयोग होता है। ( )

उत्तर-1. असत्य 2. सत्य 3. सत्य 4. सत्य।

निम्न को सुमेलित कीजिए-

(अ) जीव मण्डल निचय (ब) राज्य
(i) नंदादेवी (a) मेघालय
(ii) नोकरेक (b) असम
(iii) मानस (c) पश्चिमी बंगाल
(iv) सुन्दरवन (d) गुजरात
(v) कच्छ (e) उत्तराखण्ड

उत्तर-(i) (e), (ii) (a), (iii) (b), (iv) (c), (v) (d).

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. जैव विविधता किसे कहते हैं?

उत्तर- किसी प्राकृतिक प्रदेश में मिलने वाले पालतू एवं जंगली जीव-जन्तुओं तथा वनस्पतियों की विभिन्नता की बहुलता को जैव विविधता कहते हैं।

प्रश्न 2. प्राकृतिक वनस्पति अथवा अक्षत वनस्पति किसे कहते हैं?

उत्तर- वनस्पति का वह भाग जो मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप पैदा होता है और लम्बे समय तक उस पर मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता, प्राकृतिक वनस्पति अथवा अक्षत वनस्पति कहलाती है।

प्रश्न 3. देशज तथा विदेशज वनस्पति किसे कहते हैं?

उत्तर- वह वनस्पति जो मूल रूप से भारतीय है 'देशज वनस्पति' कहलाती है तथा वे पौधे जो भारत के बाहर से लाये गये हैं वह 'विदेशज वनस्पति' कहलाती है।

प्रश्न 4. जीवोम किसे कहते हैं?

उत्तर- धरातल पर एक विशिष्ट प्रकार की वनस्पति या प्राणी जीवन वाले विशाल पारिस्थितिक तन्त्र को जीवोम अथवा बायोम कहते हैं।

प्रश्न 5. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वनों में कौनसे जीव पाये जाते हैं?

उत्तर- उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वनों में प्राय: सिंह, सूअर, हिरण, हाथी, विविध प्रकार के पक्षी, छिपकली, साँप तथा कछुए पाये जाते हैं।

प्रश्न 6. काँटिदार पेड़ एवं झाड़ियाँ कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर- ये वनस्पतियाँ देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों समेत गुजरात के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा में पाई जाती हैं।

प्रश्न 7. मैंग्रोव वन कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर- मैंग्रोव वन गंगा, महानदी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के द्वारा निर्मित डेल्टा क्षेत्रों में पाये जाते हैं।

प्रश्न 8. भारत में औषधि के रूप में प्रयुक्त होने वाले कोई चार पादपों के नाम बताइए।

उत्तर- (1) सर्पगंधा (2) नीम (3) तुलसी (4) जामुन।

प्रश्न 9. भारत जीव सुरक्षा अधिनियम कब लागू किया गया?

उत्तर- भारत जीव सुरक्षा अधिनियम सन् 1972 में लागू किया गया।

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प्रश्न 10. कोई दो जीव-मण्डल निचयों के नाम बताइए।

उत्तर- (1) सुन्दर वन (पश्चिम बंगाल) (2) नंदा देवी (उत्तराखण्ड)।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन भारत में कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर- उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन उन क्षेत्रों में विकसित हैं जहाँ 200200 सेमी. से अधिक वर्षा के साथ एक थोड़े समय के लिए शुष्क ऋतु पाई जाती है। भारत में ये वन पश्चिमी घाटों के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों, असम के ऊपरी भागों तथा तमिलनाडु के तट पर पाए जाते हैं।

प्रश्न 2. भारत में कटीले वन तथा झाड़ियाँ कहाँ पाई जाती हैं?

उत्तर- जहाँ 7070 सेमी. से कम वर्षा होती है, उन क्षेत्रों में ये वन व झाड़ियाँ पाई जाती हैं। भारत में ये देश के उत्तरी-पश्चिमी भागों में गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व हरियाणा के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 3. भारत में आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन कहाँ पाए जाते हैं तथा इनमें किस प्रकार के वृक्षों की प्रधानता है?

उत्तर- भारत में 10001000 मी. से 20002000 मी. तक की ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में ये वन पाए जाते हैं। इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक तथा चेस्टनट जैसे वृक्षों की प्रधानता होती है।

प्रश्न 4. शंकुधारी वृक्ष भारत में कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर- भारत में 15001500 मी. से 30003000 मी. की ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में शंकुधारी वृक्ष जैसे-चीड़, देवदार, सिल्वर-फर, स्प्रूस, सीडर आदि पाए जाते हैं। ये वन प्राय: हिमालय की दक्षिणी ढलानों, दक्षिण व उत्तर-पूर्व भारत के अधिक ऊँचाई वाले भागों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 5. मैंग्रोव वन कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर- मैंग्रोव वन गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, तथा कावेरी नदियों के डेल्टा भाग में पाए जाते हैं। इनमें सुंदरी वृक्ष, नारियल, ताड़, क्योड़ा व एंगार के वृक्ष पाए जाते हैं।

प्रश्न 6. पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर- पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के मुख्य कारण हैं-

(i) लालची व्यापारियों का अपने व्यवसाय के लिए अत्यधिक शिकार करना, (ii) रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट, (iii) तेजाबी जमाव के कारण प्रदूषण, (iv) विदेशी प्रजातियों का प्रवेश, (v) कृषि तथा निवास के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. भारत में पायी जाने वाली जैव विविधता की विशेषताएँ बतलाइए।

उत्तर- भारत में पाई जाने वाली जैव विविधता की विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) भारत विश्व के मुख्य 1212 जैव विविधता वाले देशों में से एक है।
(2) यहाँ लगभग 47,00047,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं। इस दृष्टि से भारत विश्व में दसवें स्थान पर तथा एशिया में चौथे स्थान पर है।
(3) भारत में लगभग 15,00015,000 फूलों के पौधे हैं, जो विश्व में फूलों के पौधों का 66 प्रतिशत है।
(4) भारत में जीवों की 90,00090,000 प्रजातियाँ मिलती हैं।
(5) भारत में 20002000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह कुल विश्व का 1313 प्रतिशत है।
(6) भारत में मछलियों की 25462546 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो विश्व की लगभग 1212 प्रतिशत है।

प्रश्न 2. मनुष्य के लिए वनों की आवश्यकता के कारण बतलाइये।

उत्तर- मनुष्य के लिए वनों की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्न हैं-

(1) वन वातावरण की गुणवत्ता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
(2) वनों द्वारा स्थानीय जलवायु में रूपान्तरण, मृदा अपरदन पर नियन्त्रण तथा नदियों के प्रवाह का विनियमन किया जाता है।
(3) ये कई तरह के उद्योगों के आधार हैं। कई समुदायों के लिए आजीविका उपलब्ध कराते हैं।
(4) अपनी मनोरम प्राकृतिक छटा के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
(5) ये पवन तथा तापमान को नियन्त्रित करते हैं तथा वर्षा में भी सहायक होते हैं।
(6) ये मनुष्य एवं वन्य-जीवन को मृदा एवं आश्रय उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न 3. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती आर्द्र वनों की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर-उष्ण कटिबंधीय आर्द्र (नम) पर्णपाती वन-इन वनों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 100100 से.मी. से 200200 से.मी. तक वर्षा होती है।
(2) भारत में ऐसे वन देश के पूर्वी भागों, उत्तरी-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपद प्रदेशों, झारखंड, पश्चिमी उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी घाटों के पूर्वी ढालों में पाए जाते हैं।

(3) सागौन इन वनों की सबसे प्रमुख प्रजाति है। बाँस, साल, शीशम, चंदन, खैर, कुसुम, अर्जुन तथा शहतूत के वृक्ष व्यापारिक महत्त्व वाली प्रजातियाँ हैं।
(4) इन वनों में सिंह, शेर, सूअर, हिरण, हाथी तथा विविध प्रकार के पक्षी व रेंगने वाले जानवर पाए जाते हैं।

प्रश्न 4. उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनों की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर- शुष्क पर्णपाती वनों की विशेषताएँ-उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा 7070 से.मी. से 100100 से.मी. के बीच होती है।
(2) ये वन प्रायद्वीपीय पठार के ऐसे वर्षा वाले क्षेत्रों, उत्तर-प्रदेश तथा बिहार के मैदानों में पाए जाते हैं।

(3) इन वनों में प्राय: सागौन, साल, पीपल और नीम के पेड़ उगते हैं।
(4) इन वनों में प्राय: शेर, सूअर, हिरण, हाथी, अन्य जानवर, विविध प्रकार के पक्षी तथा रेंगने वाले जानवर भी पाए जाते हैं।

प्रश्न 5. मानव किस प्रकार पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है?

उत्तर- मनुष्य भी अपने पारिस्थितिक तन्त्र का अविच्छिन्न भाग होता है। मानव निम्न प्रकार पारिस्थितिक तन्त्र को प्रभावित करता है-

(1) मनुष्य वन्य जीवन तथा वनस्पति का अपने लाभ के लिए प्रयोग करता है।
(2) खनिज संसाधनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करता है।
(3) वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई करता है।
(4) अपने स्वार्थ के कारण जानवरों का शिकार करता है।
इस प्रकार वह पारिस्थितिक तन्त्र में असंतुलन पैदा करता है। मनुष्य के इन अविवेकी कार्यों के परिणामस्वरूप अनेक प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर आ गयी हैं।

प्रश्न 6. उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन तथा झाड़ियों की कोई तीन विशेषताएँ बतलाइए।

उत्तर- उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन तथा झाड़ियों की तीन विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) ये वन 7070 से.मी. से भी कम वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(2) इन वनों में पेड़ छितराये हुए होते हैं तथा नमी प्राप्त करने के लिए इनकी जड़ें जमीन में गहराई तक पहुँची होती हैं।
(3) इन पेड़ों की पत्तियाँ अधिकतर मोटी तथा आकार में छोटी होती हैं ताकि वाष्पीकरण से जल हानि कम-से-कम हो सके।

प्रश्न 7. गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में पाई जाने वाली वनस्पति और वन्य जीवन का वर्णन करें।

उत्तर- गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में पाई जाने वाली वनस्पति-गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में मैंग्रोव प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। इस वनस्पति में पौधों की जड़ें पानी में डूबी रहती हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुन्दरी वृक्ष पाए जाते जिनसे मजबूत लकड़ी प्राप्त होती है। नारियल, ताड़, क्योड़ा एवं ऐंगार के वृक्ष भी इन भागों में पाए जाते हैं।

वन्य जीवन-इस क्षेत्र में विश्वप्रसिद्ध रॉयल बंगाल टाइगर पाया जाता है। इसके अलावा कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल एवं कई प्रकार के साँप पाए जाते हैं।

प्रश्न 8. हमारे देश में पादपों और जीवों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा किये गये किन्हीं तीन उपायों का वर्णन कीजिए।
अथवा
वन्य जीवन के संरक्षण के चार उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- हमारे देश में पादपों और जीवों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा निम्न उपाय किये गये हैं-

(1) सरकार ने देश में अठारह जीव-मण्डल निचय (आरक्षित क्षेत्र) स्थापित किए हैं।
(2) सन् 19921992 से सरकार द्वारा पादप उद्यानों को वित्तीय तथा तकनीकी सहायता देने की योजना बनाई है।
(3) शेर संरक्षण, बाघ संरक्षण, गैंडा संरक्षण, भारतीय भैंसा संरक्षण तथा पारिस्थितिक तन्त्र के सन्तुलन के लिए अनेक योजनाएँ बनाई गई हैं।
(4) देश में 103103 नेशनल पार्क, 535535 वन्य प्राणी अभयवन और कई चिड़ियाघर राष्ट्र की पादप और जीव-सम्पत्ति की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।

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