Constitutional Design
[राजनीति] संविधान निर्माण
838
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. नीचे कुछ गलत वाक्य दिए गए हैं। हर एक में की गई गलती पहचानें और इस अध्याय के आधार पर उसको ठीक करके लिखें।
(क) स्वतंत्रता के बाद देश लोकतांत्रिक हो या नहीं, इस विषय पर स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने अपना दिमाग खुला रखा था।
(ख) भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान में कही गई हरेक बात पर सहमत थे।
(ग) जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था ही होगी।
(घ) संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है इसलिए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
उत्तर :
(क) स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं की इस बारे में स्पष्ट धारणा थी कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् देश में लोकतंत्र होना चाहिए।
(ख) भारतीय संविधान सभा के अलग-अलग सदस्यों के विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचार थे, किन्तु उन्होंने अपने मतभेद सुलझा लिए और संविधान के मूलभूत सिद्धांतों पर उन्होंने एक समान राय रखी।
(ग) जिन देशों में संविधान है, वहाँ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था ही हो, यह जरूरी नहीं है।
(घ) यद्यपि संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है, तथापि संसद द्वारा एक विशिष्ट बहुमत से उसमें संशोधन किया जा सकता है।
प्रश्न 2. दक्षिण अफ्रीका का लोकतांत्रिक संविधान बनाने में, इनमें से कौन-सा टकराव सबसे महत्त्वपूर्ण था :
(क) दक्षिण अफ्रीका और उसके पड़ोसी देशों का
(ख) स्त्रियों और पुरुषों का
(ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का
(घ) रंगीन चमड़ी वाले बहुसंख्यकों और अश्वेत अल्पसंख्यकों का।
उत्तर : (ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का।
प्रश्न 3. लोकतांत्रिक संविधान में इनमें से कौन-सा प्रावधान नहीं रहता?
(क) शासन प्रमुख के अधिकार
(ख) शासन प्रमुख का नाम
(ग) विधायिका के अधिकार
(घ) देश का नाम।
उत्तर : (ख) शासन प्रमुख का नाम।
प्रश्न 4. संविधान निर्माण में इन नेताओं और उनकी भूमिका में मेल बैठाएँ :
| (क) मोतीलाल नेहरू | 1. संविधान सभा के अध्यक्ष |
|---|---|
| (ख) बी.आर. अंबेडकर | 2. संविधान सभा की सदस्य |
| (ग) राजेंद्र प्रसाद | 3. प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष |
| (घ) सरोजिनी नायडू | 4. 1928 में भारत का संविधान बनाया |
उत्तर : (क)-4, (ख)-3, (ग)-1, (घ)-2
प्रश्न 5. जवाहर लाल नेहरू के नियति के साथ साक्षात्कार वाले भाषण के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों का जवाब दें :
(क) नेहरू ने क्यों कहा कि भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं है?
(ख) नये भारत के सपने किस तरह विश्व से जुड़े हैं?
(ग) वे संविधान निर्माताओं से क्या शपथ चाहते थे?
(घ) "हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की कामना हर आँख से आँसू पोंछने की है।" वे इस कथन में किसका जिक्र कर रहे थे?
उत्तर :
(क) नेहरू ने ऐसा इसलिए कहा था जिससे भारत के लोग उन वायदों को पूरा करने के निरन्तर प्रयास करें, जो उन्होंने किए थे।
(ख) नये भारत के सपने हैं-दरिद्रता, अज्ञान, बीमारियों और अवसर की असमानता का अन्त करना है। यह विश्व शांति और समृद्धि के लिए आवश्यक है।
(ग) वे भारतीय संविधान के निर्माताओं से यह वचन लेना चाहते थे कि वे भारत के संसाधनों तथा जनता के प्रति मानवता के हित में अपने आपको समर्पित कर दें।
(घ) वे इस कथन में महात्मा गांधी का जिक्र कर रहे थे।
| (क) संप्रभु | 1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी। |
| (ख) गणतंत्र | 2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है। |
| (ग) बंधुत्व | 3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है। |
(घ) धर्मनिरपेक्ष - 4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए।
उत्तर -
| स्तम्भ 'अ' | स्तम्भ 'ब' |
|---|---|
| (क) संप्रभु | 2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है। |
| (ख) गणतंत्र | 3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है। |
| (ग) बंधुत्व | 4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए। |
| (घ) धर्मनिरपेक्ष | 1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी। |
प्रश्न 7. कुछ दिन पहले नेपाल से आपके एक मित्र ने वहाँ की राजनैतिक स्थिति के बारे में आपको पत्र लिखा था। वहाँ अनेक राजनैतिक पार्टियाँ राजा के शासन का विरोध कर रही थीं। उनमें से कुछ का कहना था कि राजा द्वारा दिए गए मौजूदा संविधान में ही संशोधन करके चुने हुए प्रतिनिधियों को ज्यादा अधिकार दिए जा सकते हैं। अन्य पार्टियाँ नया गणतांत्रिक संविधान बनाने के लिए नई संविधान सभा गठित करने की मांग कर रही थीं। इस विषय में अपनी राय बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें।
उत्तर - इस संबंध में हमारे सामने दो विचार रखे गये हैं। पहले विचार के अनुसार चुने हुये जन-प्रतिनिधियों को अधिक शक्ति दी जानी चाहिये ताकि संपूर्ण व्यवस्था को अधिक से अधिक जनतांत्रिक बनाया जा सके। दूसरा समूह राजशाही को खत्म कर इसकी जगह नए गणतांत्रिक संविधान के निर्माण की बात कर रहा है। इससे तीन बातें उभरकर सामने आती हैं- (1) निर्वाचित प्रतिनिधियों को और अधिक शक्तियाँ देने के लिए संविधान में संशोधन की माँग, (2) गणतंत्रात्मक संविधान लिखने के लिए नई संविधान सभा और (3) राजा के शासन का विरोध। ये तीनों ही तथ्य यह बताते हैं कि लोग लोकतंत्रात्मक शासन चाहते हैं और राजतंत्रात्मक शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में नई संविधान सभा गठित कर नया गणतांत्रिक संविधान का निर्माण करना ही नेपाल के हित में होगा।
[नोट- पत्र स्वयं लिखें।]
प्रश्न 8. भारत के लोकतंत्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे में कुछ अलग-अलग विचार इस प्रकार हैं। आप इनमें से हर कथन को भारत में लोकतंत्रात्मक व्यवस्था के लिए कितना महत्त्वपूर्ण कारण मानते हैं?
(क) अंग्रेज शासकों ने भारत को उपहार के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था दी। हमने ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी प्रांतीय असेंबलियों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया।
(ख) हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने औपनिवेशिक शोषण और भारतीय लोगों को तरह-तरह की आजादी न दिए जाने का विरोध किया। ऐसे में स्वतंत्र भारत को लोकतांत्रिक होना ही था।
(ग) हमारे राष्ट्रवादी नेताओं की आस्था लोकतंत्र में थी। अनेक नव स्वतंत्र राष्ट्रों में लोकतंत्र का न आना हमारे नेताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
उत्तर - (क) इस कारक के योगदान को बहुत हद तक स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि इसे अंग्रेजों की देन नहीं माना जा सकता है। यह सच है कि यदि हमें पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त नहीं होता तो भारत जैसे विशाल देश में आरंभिक दौर में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना बहुत ही कठिन होती।
(ख) इस कारक का भी भारत में लोकतंत्र की स्थापना में योगदान रहा है। चूँकि हमारे संघर्ष का तरीका, हमारे राजनैतिक दलों की संरचना सब लोकतांत्रिक थी, अतः लोकतंत्र की अच्छाइयों को हम महसूस कर रहे थे। दूसरी तरफ, चूँकि लोगों को विभिन्न स्वतंत्रताएँ नहीं मिली थीं, अतः लोकतंत्र ही एकमात्र ऐसी व्यवस्था थी जो उनकी इन आकांक्षाओं को पूरा कर सकती थी।
प्रश्न 9. 1912 में प्रकाशित 'विवाहित महिलाओं के लिए आचरण' पुस्तक के निम्नलिखित अंश को पढ़ें :
840
प्रश्न 10. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। क्या आप उनसे सहमत हैं? अपने कारण भी बताइए।
(क) संविधान के नियमों की हैसियत किसी भी अन्य कानून के बराबर है।
(ख) संविधान बताता है कि शासन व्यवस्था के विविध अंगों का गठन किस तरह होगा।
(ग) नागरिकों के अधिकार और सरकार की सत्ता की सीमाओं का उल्लेख भी संविधान में स्पष्ट रूप में है।
उत्तर- (क) इस कथन से हम सहमत नहीं हैं, क्योंकि संवैधानिक नियम मौलिक नियम हैं, जबकि दूसरे अन्य नियमों की वैधानिकता इस आधार पर तय होती है कि वे संवैधानिक नियमों के अनुरूप हैं अथवा नहीं।
(ख) इस कथन से हम सहमत हैं, क्योंकि हमारे संविधान में सरकार के तीनों अंगों-विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के संगठन तथा शक्ति की विस्तृत चर्चा की गई है।
(ग) इस कथन से हम सहमत हैं, क्योंकि हमारे संविधान में नागरिकों को दिये गये विभिन्न मौलिक अधिकारों के लिये उपबंध किये गये हैं। साथ ही, सरकार की क्या शक्तियाँ तथा सीमाएँ हैं, इसकी भी विस्तृत चर्चा की गई है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
दक्षिण अफ्रीका में गोरों के प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया-
(अ) नेल्सन मंडेला ने
(ब) महात्मा गांधी ने
(स) अबुल कलाम आजाद ने
(द) सोमनाथ लाहिड़ी ने।भारत की संविधान सभा में प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे-
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ब) डॉ. भीमराव अंबेडकर
(स) पं. जवाहर लाल नेहरू
(द) अबुल कलाम आजाद।भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष थे-
(अ) पं. जवाहर लाल नेहरू
(ब) वल्लभ भाई पटेल
(स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(द) डॉ. भीमराव अंबेडकर।26 अप्रैल, 1994 को मध्य रात्रि को दक्षिण अफ्रीका में क्या हुआ?
(अ) अफ्रीका गणराज्य का नया झंडा लहराया गया।
(ब) रंगभेद वाली शासन व्यवस्था समाप्त हुई।
(स) सभी नस्ल के लोगों की मिली-जुली सरकार का गठन हुआ।
(द) उपरोक्त सभी।झारखण्ड पार्टी के संस्थापक थे-
(अ) अबुल कलाम आजाद
(ब) टी.टी. कृष्णमाचारी
(स) जयपाल सिंह
(द) जी. दुर्गाबाई देशमुख।भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे-
(अ) जवाहर लाल नेहरू
(ब) वल्लभ भाई पटेल
(स) राजगोपालाचारी
(द) राजेन्द्र प्रसाद।भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे-
(अ) सोमनाथ लाहिड़ी
(ब) अटल बिहारी वाजपेयी
(स) श्यामा प्रसाद मुखर्जी
(द) भीमराव अंबेडकर।
उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (ब) 3. (स) 4. (द) 5. (स) 6. (द) 7. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
- .................... को 28 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका की सबसे भयानक जेल, रोब्बेन द्वीप में कैद रखा गया। (नेल्सन मंडेला/महात्मा गाँधी)
- .................... के संविधान से दुनियाभर के लोकतांत्रिक लोग प्रेरणा लेते हैं। (भारत/दक्षिण अफ्रीका)
- दक्षिण अफ्रीका का संविधान .................... और भविष्य, दोनों की बात करता है। (अर्थशास्त्र/नीतिशास्त्र/इतिहास)
- .................... में मोतीलाल नेहरू और कांग्रेस के आठ अन्य नेताओं ने भारत का एक संविधान लिखा था। (1931/1928)
उत्तर-1. नेल्सन मंडेला 2. दक्षिण अफ्रीका 3. इतिहास 4. 1928
निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये-
- रंगभेद नस्ली भेदभाव पर आधारित उस व्यवस्था का नाम है जो दक्षिण अफ्रीका में विशिष्ट तौर पर चलाई गई।
- जिन देशों में लोकतांत्रिक शासन है, वहाँ संविधान का होना जरूरी नहीं है।
- भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत की संविधान सभा की प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष थे।
उत्तर- 1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. असत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| 1. झारखण्ड पार्टी के संस्थापक | (a) भीमराव रामजी अंबेडकर |
| 2. भारत के प्रथम राष्ट्रपति | (b) कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी |
| 3. रिपब्लिक पार्टी ऑफ इण्डिया के संस्थापक | (c) श्यामाप्रसाद मुखर्जी |
| 4. स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक | (d) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| 5. भारतीय जनसंघ के संस्थापक | (e) जयपाल सिंह |
उत्तर- 1. (e) 2. (d) 3. (a) 4. (b) 5. (c)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संविधान क्या है?
उत्तर- संविधान देश के सर्वोच्च कानूनों का एक आलेख है जिसमें देश की राजनीति तथा समाज को व्यवस्थित वाले मूलभूत नियम सम्मिलित होते हैं।
प्रश्न 2. संविधान की प्रस्तावना क्या होती है?
उत्तर- संविधान की प्रस्तावना संविधान की भूमिका होती है जिसमें संविधान के आदर्श तथा मूलभूत सिद्धांतों का उल्लेख होता है।
प्रश्न 3. रंगभेद की नीति क्या है?
उत्तर- चमड़ी के रंग के आधार पर मनुष्य-मनुष्य के बीच भेदभाव करने की नीति को रंगभेद की नीति कहते हैं।
प्रश्न 4. संविधान सभा क्या है?
उत्तर- संविधान नामक आलेख के प्रारूप को तैयार करने वाली निर्वाचित प्रतिनिधियों की एक सभा को संविधान सभा कहते हैं।
प्रश्न 5. भारतीय संविधान, संविधान सभा द्वारा कब पारित किया गया और इसे कब लागू किया गया?
उत्तर- भारतीय संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान के प्रारूप को पारित किया तथा 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू किया गया।
प्रश्न 6. संविधान सभा के किन्हीं दो कांग्रेसी सदस्यों के नाम लिखिये।
उत्तर- (1) पं. जवाहर लाल नेहरू (2) अबुल कलाम आजाद।
प्रश्न 7. संविधान सभा के किन्हीं दो गैर-कांग्रेसी सदस्यों के नाम लिखिये।
उत्तर- (1) भीमराव रामजी अंबेडकर (2) श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
प्रश्न 8. दक्षिण अफ्रीका में गोरी सरकार के शासन के दौरान लोगों के प्रमुख समूह कौन-कौनसे थे?
उत्तर- (1) श्वेत (2) अश्वेत (3) रंगीन चमड़ी वाले लोग (मिली-जुली नस्लों वाले लोग) और (4) भारत मूल के लोग।
(1) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार। (2) स्वतंत्रता एवं समानता का अधिकार। (3) अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा।
प्रश्न 10. संविधान संशोधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- लोगों की इच्छा तथा समाज में आए बदलावों के अनुरूप संविधान को नियमित रूप से संशोधित करते रहने की जरूरत होती है। संविधान के उपबंधों में इस तरह के संशोधन को 'संविधान संशोधन' कहते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. ऐसी दो घटनाओं के नाम बताइए जिनके बाद से सभी लोकतांत्रिक देशों में एक लिखित संविधान रखने का प्रचलन शुरू हुआ।
उत्तर- (1) ब्रिटेन के विरुद्ध स्वतंत्रता संघर्ष के पश्चात, अमेरिकी लोगों द्वारा अपने लिए संविधान तैयार किया गया।
(2) फ्रांसीसी क्रांति के पश्चात वहां के लोगों ने एक लोकतांत्रिक संविधान का अनुमोदन किया।
प्रश्न 2. 'भारत एक पंथनिरपेक्ष देश है।' स्पष्ट करें।
उत्तर- भारत एक पंथनिरपेक्ष देश है क्योंकि-
(1) भारत में सभी नागरिकों को कोई भी धर्म अपनाने की स्वतंत्रता है।
(2) भारत सरकार का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं है।
(3) भारतीय सरकार सभी धर्मों के विश्वासों तथा रिवाजों को बराबर सम्मान देती है।
प्रश्न 3. हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?
अथवा
संविधान के प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—संविधान निम्नलिखित प्रमुख कार्य करता है, इसलिए हमें संविधान की आवश्यकता है-
(i) यह सहयोग एवं विश्वास की वह भावना पैदा करता है ताकि विभिन्न तरह के लोग एक-साथ मिल-जुल कर रह सकें।
(ii) संविधान यह स्पष्ट करता है कि सरकार का निर्माण कैसे होगा तथा निर्णय लेने की अन्तिम शक्ति किसके पास होगी।
(iii) यह सरकार की शक्तियों की सीमा तय करता है तथा जनता के अधिकारों का उल्लेख करता है।
प्रश्न 4. 1994 के बाद दक्षिण अफ्रीका के संविधान में क्या परिवर्तन किये गए हैं?
उत्तर—1994 के बाद दक्षिण अफ्रीका के संविधान में निम्नलिखित परिवर्तन किये गए हैं-
(i) इस संविधान ने बहुजातीय सरकार के निर्माण का मार्ग खोल दिया।
(ii) दक्षिण अफ्रीका के सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार दिए गए।
(iii) राजनीतिक दलों पर रोक तथा मीडिया पर प्रतिबन्ध समाप्त कर दिये गये।
प्रश्न 5. दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध अश्वेत, रंगीन त्वचा वाले तथा भारतीयों द्वारा किये गए संघर्ष की चर्चा कीजिए।
उत्तर—(1) दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत लोगों ने रंगभेद की राजनीति का विरोध प्रकट करने के लिए रैलियां निकालीं तथा हड़ताल की।
(2) अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस ने गोरों की अलगाव की भेदभावपूर्ण सरकारी नीति के विरुद्ध लड़ाई लड़ी।
(3) कई देशों ने रंगभेद की जातिवादी तथा अन्यायपूर्ण नीति के रूप में विरोध किया।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न—
प्रश्न 1. संविधान सभा द्वारा सत्तर साल से भी पहले बनाए गए संविधान को हम क्यों मानते हैं?
उत्तर—संविधान के मानने के कारण—73 साल से भी पहले बनाए गए संविधान को हमारे द्वारा मानने के प्रमुख कारण अग्रलिखित हैं-
(1) व्यापक सहमतियों पर आधारित—संविधान सिर्फ संविधान सभा के सदस्यों के विचारों को ही व्यक्त नहीं करता, बल्कि यह अपने समय की व्यापक सहमतियों को व्यक्त करता है।
(2) प्रतिनिधिपूर्ण संविधान सभा—संविधान सभा भी भारत के लोगों का ही प्रतिनिधित्व कर रही थी। देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों का इसमें उचित प्रतिनिधित्व हो गया था। सभी राजनैतिक दलों, सभी समूह, जाति, वर्ग, धर्म और पेशों के लोग इसमें थे।
(3) व्यवस्थित कार्यप्रणाली—संविधान सभा का काम काफी व्यवस्थित, खुला और सर्वसम्मति बनाने के प्रयास पर आधारित था।
प्रश्न 2. 'हमारा संविधान अपने समय की व्यापक सहमतियों को व्यक्त करता है।' इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—हमारा संविधान अपने समय की व्यापक सहमतियों को व्यक्त करता है क्योंकि—
(1) दुनिया के कई देशों में संविधान को पुनः इसलिए लिखना पड़ा है क्योंकि संविधान में दर्ज बुनियादी बातों पर वहां के सभी सामाजिक समूहों या राजनैतिक दलों की सहमति नहीं थी।
(2) कई देशों में संविधान है पर वह कागज़ का टुकड़ा या किसी भी अन्य किताब की तरह का दस्तावेज भर हैं, कोई भी उस पर आचरण नहीं करता।
लेकिन 73 सालों में हमारे संविधान पर किसी भी बड़े सामाजिक समूह या राजनैतिक दल ने स्वयं संविधान की वैधता पर सवाल नहीं उठाए हैं।
प्रश्न 3. स्पष्ट कीजिए कि भारतीय संविधान सभा भारत के लोगों की ही प्रतिनिधित्व कर रही थी।
उत्तर—यद्यपि भारत की संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक मताधिकार से नहीं हुआ था, तथापि भारत की संविधान सभा भारत के लोगों की ही प्रतिनिधित्व कर रही थीं क्योंकि-
(1) इसका चुनाव निर्वाचित प्रान्तिय असेम्बलियों के सदस्यों ने किया था। इसके कारण देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों का इसमें उचित प्रतिनिधित्व हो गया था।
(2) इस संविधान सभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्यों का प्रभुत्व था जिसने राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया था। लेकिन स्वयं कांग्रेस के अन्दर कई राजनैतिक समूह और विचारों के लोग थे। सभा में कई सदस्य ऐसे थे जो कांग्रेस के विचारों से सहमत नहीं थे।
(3) सामाजिक रूप से इस सभा में सभी समूह, जाति, वर्ग, धर्म और पेशों के लोग थे। अगर संविधान सभा
का गठन वयस्क सार्वभौमिक मताधिकार के द्वारा हुआ होता तो भी इसका स्वरूप कुछ इसी तरह का होता।
प्रश्न 4. भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान संशोधन का प्रावधान क्यों रखा?
उत्तर- भारतीय संविधान के निर्माताओं को लगा कि इसे लोगों की भावनाओं के अनुरूप चलना चाहिए और समाज में हो रहे बदलावों से दूर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संविधान को पवित्र, स्थायी और न बदले जा सकने वाले कानून के रूप में नहीं देखा था। इसलिए उन्होंने बदलावों को समय-समय पर शामिल करने का प्रावधान भी रखा। इन बदलावों को ही संविधान संशोधन कहते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. संविधान क्या है? इसका क्या औचित्य (महत्त्व) है?
उत्तर- संविधान का अर्थ- एक देश का संविधान लिखित नियमों का एक आलेख है जो कि देश में रहने वाले सभी लोगों को स्वीकृत होता है। यह सर्वोच्च कानून है, जो देश में रहने वाले लोगों के बीच तथा लोगों और सरकार के बीच सम्बन्ध सुनिश्चित करता है।
संविधान का महत्त्व (औचित्य)-
संविधान का महत्त्व या औचित्य का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है-
(1) भरोसा और सहयोग- संविधान साथ रह रहे विभिन्न तरह के लोगों के बीच जरूरी भरोसा और सहयोग विकसित करता है।
(2) सरकार का गठन- संविधान यह स्पष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा और किसे फैसले लेने का अधिकार होगा।
(3) अधिकारों का निर्धारण- संविधान सरकार के अधिकारों की सीमा तय करता है और हमें बताता है कि नागरिकों के क्या अधिकार हैं।
(4) लोगों की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति- संविधान एक अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में किन चार आदर्शों पर बल दिया गया है?
उत्तर- प्रस्तावना में निहित आदर्श- भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित आदर्शों पर बल दिया गया है-
(1) न्याय- प्रस्तावना में कहा गया है कि भारत के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय प्राप्त कराने के लिए इस संविधान को भारत के लोग अंगीकृत करते हैं। इसका अभिप्राय यह है कि भारतीय नागरिकों के साथ जाति, धर्म तथा लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। सामाजिक असमानताओं को कम करने तथा सबके कल्याण के लिए उपेक्षित वर्गों के लिए कार्य करना होगा।
(2) स्वतंत्रता- प्रस्तावना में कहा गया है कि नागरिकों को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रदान की जायेगी।
(3) समानता- संविधान की प्रस्तावना में नागरिकों को प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्रदान करने पर बल दिया गया है। इसका आशय यह है कि कानून के सामने सभी समान हैं; सरकार कोई भेदभावपूर्ण कानून नहीं बनायेगी। साथ ही सरकार नागरिकों के व्यक्तित्व के विकास के लिए सबको समान अवसर प्रदान करेगी।
(4) बंधुत्व- प्रस्तावना में नागरिकों में बंधुता बढ़ाने पर बल दिया गया है अर्थात् प्रस्तावना में कहा गया है कि संविधान भारत के नागरिकों के बीच बंधुता बढ़ाने का प्रयास करेगा। संविधान सब नागरिकों के साथ एक परिवार के सदस्यों की तरह व्यवहार करेगा। कोई भी नागरिक अपने साथी नागरिक के साथ हीनता का व्यवहार नहीं करेगा।
प्रश्न 3. भारतीय संविधान में सांस्थानिक व्यवस्थाओं की किस तरह व्याख्या की गई है?
उत्तर- भारतीय संविधान में सांस्थानिक व्यवस्थाओं की व्याख्या
भारतीय संविधान में सांस्थानिक व्यवस्थाओं की व्याख्या निम्न प्रकार की गई है-
(1) चुनाव की प्रक्रिया तथा शासन संस्थाओं की शक्तियों का निर्धारण- भारतीय संविधान द्वारा देश पर शासन करने के लिए व्यक्तियों के चुनाव की प्रक्रिया प्रदान की गई है तथा यह बताया गया है कि किन नियमों के तहत शासकों का चुनाव किया जाएगा। यह तय करता है कि किसके पास, कौनसा निर्णय करने के लिए कितनी शक्ति होगी तथा कौन किसके बारे में फैसले लेगा।
(2) सरकार की सीमा तथा नागरिकों के अधिकारों का निर्धारण- संविधान नागरिकों को कुछ अधिकार देकर यह तय करता है कि सरकार के कार्य करने की सीमा क्या है। सरकार जनता के इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती।
(3) संवैधानिक उपचारों की व्यवस्था- संविधान में भारतीय जनता के मूल अधिकारों के उल्लेख के साथ-साथ उनको अवरोधित करने की स्थिति में संवैधानिक उपचारों की भी व्यवस्था करता है।
(4) सरकार के अंगों की स्पष्ट व्याख्या- संविधान सरकार के सभी तीन अंगों-विधायिका,