Electoral Politics
[राजनीति] चुनावी राजनीति
न्यायपालिका तथा कार्यपालिका की संरचना, शक्ति तथा उनके कार्यों की स्पष्ट व्याख्या करता है। | उत्तर-मतदान केन्द्रों तथा मतगणना केन्द्रों पर विभिन्न पार्टियों के एजेंट उपस्थित रहते हैं, क्योंकि-
3. चुनावी राजनीति | (i) किसी पार्टी अथवा मतदाता द्वारा मतदान के दौरान किये जाने वाली किसी धाँधली को रोका जा सके।
पाठगत प्रश्न | (ii) मतगणना के दौरान मत केंद्र पर होने वाली किसी भी तरह की अनियमितता पर नजर रखी जा सके तथा उसे संबंधित अधिकारियों के सामने लाया जा सके।
पृष्ठ 46 | प्रश्न-इनमें कौन-सा काम आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है, कौन-सा नहीं?
प्रश्न-उम्मीदवारों को अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा देने की जरूरत क्यों होती है? | (i) मतदान की तारीख से पहले मंत्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिये नई रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना करना।
उत्तर-सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को अपने नामांकन के समय अपने और अपने परिवार के सदस्यों की सम्पत्ति का ब्यौरा देना आवश्यक कर दिया गया है। इसलिये उम्मीदवारों को | (ii) एक उम्मीदवार ने वायदा किया कि चुने जाने
आवश्यक कर दिया गया है। इसलिये उम्मीदवारों को अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा देने की जरूरत होती है।
प्रश्न - भारत की चुनाव प्रणाली की कुछ विशेषताएँ और कुछ सिद्धान्त दिए गये हैं। इनके सही जोड़े बनाएँ।
| सिद्धान्त | चुनाव प्रणाली की विशेषता |
|---|---|
| (i) सार्वभौम वयस्क मताधिकार | हर चुनाव क्षेत्र में लगभग बराबर मतदाता |
| (ii) कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व | 18 वर्ष और उससे ऊपर के सभी को मताधिकार |
| (iii) खुली राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता | सभी को पार्टी बनाने या चुनाव लड़ने की आजादी |
| (iv) एक मत, एक मोल | अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिये सीटों का आरक्षण |
उत्तर -
(ii) एक उम्मीदवार ने वायदा किया कि चुने जाने पर वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में नई रेलगाड़ी चलवाएगा।
(iii) एक उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा मतदाताओं को एक मंदिर में ले जाकर उनसे उसी उम्मीदवार को वोट देने की शपथ दिलाना।
(iv) किसी उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा झुग्गी बस्ती में वोट के वायदे लेकर कंबल बांटना।
उत्तर - (i) आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
(ii) आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन नहीं है।
(iii) आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
(iv) आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
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प्रश्न - चुनाव आयोग के पास इतनी शक्ति क्यों है? क्या यह लोकतंत्र के लिये अच्छा है?
उत्तर - चुनाव आयोग को इतनी शक्ति इसलिये दी गई है ताकि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं प्रभावी रूप से संपन्न करवाया जा सके। यह लोकतंत्र के लिये अच्छा है। इससे...
उत्तर -
(i) सार्वभौम वयस्क 18 वर्ष और उससे ऊपर
मताधिकार के सभी को मताधिकार
(ii) कमजोर वर्गों का अनुसूचित जातियों/
प्रतिनिधित्व जनजातियों के लिये
सीटों का आरक्षण
(iii) खुली राजनैतिक सभी को पार्टी बनाने या
प्रतिद्वंद्विता चुनाव लड़ने की आजादी
(iv) एक मत, एक मोल हर चुनाव क्षेत्र में लगभग
बराबर मतदाता
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प्रश्न-मतदान केन्द्रों और मतगणना केन्द्रों पर
पार्टी या उम्मीदवार के एजेन्ट क्यों मौजूद होते हैं?
प्रश्न 2. भारत के चुनाव लोकतांत्रिक हैं, यह बताने के लिए इनमें कौन-सा वाक्य सही कारण नहीं देता?
(क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।
(ख) भारत में चुनाव आयोग काफी शक्तिशाली है।
(ग) भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर व्यक्ति मतदाता है।
(घ) भारत में चुनाव हारने वाली पार्टियाँ जनादेश स्वीकार कर लेती हैं।
उत्तर-(क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।
(vi) मतदान
(vii) पुनर्मतदान का आदेश
(viii) मतगणना
(ix) चुनाव परिणामों की घोषणा।
प्रश्न 5. सुरेखा एक राज्य विधानसभा क्षेत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली अधिकारी है। चुनाव के इन चरणों में उसे किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
(क) चुनाव प्रचार (ख) मतदान के दिन (ग) मतगणना के दिन।
उत्तर-(क) चुनाव प्रचार-एक प्रभारी अधिकारी के रूप में सुरेखा को चाहिये कि स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव को ध्यान में रखते हुये वह सुनिश्चित करे कि
मतदाता हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में मेल ढूँढें :
(क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि
(ख) कुछ निर्वाचन-क्षेत्र अनु. जाति और अनु. जनजाति के लिए आरक्षित हैं ताकि
(ग) प्रत्येक को सिर्फ एक वोट डालने का हक है ताकि
(घ) सत्ताधारी दल को सरकारी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं क्योंकि
- समाज के हर तबके का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके।
- हर एक को अपना प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले।
- हर उम्मीदवार को चुनावों में लड़ने का समान अवसर मिले।
- संभव है कुछ लोग उस जगह से अलग चले गए हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था।
उत्तर-(क) 4, (ख) 1, (ग) 2, (घ) 3
चुनाव को ध्यान में रखते हुये वह सुनिश्चित करे कि,
(i) कोई भी उम्मीदवार अथवा अन्य व्यक्ति मतदाताओं को बहका अथवा धमका नहीं रहा है अथवा उन्हें किसी तरह का लालच देकर अपने समर्थन में वोट डालने के लिये प्रेरित तो नहीं कर रहा है।
(ii) उम्मीदवारों द्वारा धर्म अथवा जाति के नाम पर मतदाताओं से समर्थन तो नहीं मांगा जा रहा है।
(iii) सरकारी मशीनरियों का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है।
(iv) क्या ये लोग तय सीमा में चुनाव अभियान के दौरान खर्च कर रहे हैं?
(ख) मतदान के दिन-सुरेखा को चाहिये कि वह इस बात का ध्यान रखे कि मतदाताओं को किसी भी तरह से वोट डालने से रोका तो नहीं जा रहा है। किसी तरह की धाँधली तो नहीं की जा रही है? उसे मतपेटियाँ छीनने, जबरन बूथ पर कब्जा करने आदि जैसी चीजों की रिपोर्ट तुरंत आयोग को करनी चाहिये।
(ग) मतगणना के दिन-मतों की स्वतंत्र तथा
उत्तर-(क) 4, (ख) 1, (ग) 2, (घ) 3
प्रश्न 4. इस अध्याय में वर्णित चुनाव संबंधी
सभी गतिविधियों की सूची बनाएँ और इन्हें चुनाव में
सबसे पहले किए जाने वाले काम से लेकर आखिर
तक के क्रम में सजाएँ। इनमें से कुछ मामले हैं :
चुनाव घोषणा पत्र जारी करना, वोटों की गिनती,
मतदाता सूची बनाना, चुनाव अभियान, चुनाव नतीजों
की घोषणा, मतदान, पुनर्मतदान के आदेश, चुनाव
प्रक्रिया की घोषणा, नामांकन दाखिल करना।
उत्तर- (i) मतदाता सूची का निर्माण
(ii) चुनाव प्रक्रिया की घोषणा
(iii) नामांकन पत्र दाखिल करना
(iv) चुनाव घोषणा पत्र जारी करना
(v) चुनाव अभियान
देंगे? अगर हाँ, तो क्यों और किस समुदाय के लिए? अगर नहीं, तो क्यों? | (ग) सत्ताधारी पार्टी के लिये चुनाव जीतना बहुत आसान होता है।
| समुदाय का प्रतिनिधित्व (प्रतिशत में) | उत्तर-नहीं, शासक दल के लिये चुनाव जीतना अपेक्षाकृत कठिन है, क्योंकि-
| अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में | अमेरिकी समाज में | (i) मतदाता चुनाव के दौरान किये गये वादों को पूरा नहीं किये जाने के कारण प्राय: इनसे नाराज रहते हैं।
| अश्वेत | 8 | 13 | (ii) विरोधी पार्टियों द्वारा नए वादे करने के कारण माहौल उनके पक्ष में चला जाता है।
| हिस्पैनिक | 5 | 13 | (iii) सत्ताधारी दल भी निरंतर चुनाव हारते आए हैं।
| श्वेत | 86 | 70 | (घ) अपने चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाने के लिये कई कदम उठाने जरूरी हैं।
उत्तर-हाँ, अमेरिकी कांग्रेस में आरक्षण की पद्धति लागू की जानी चाहिये क्योंकि इसके द्वारा प्रत्येक समुदाय को प्रतिनिधि सभा में बराबर का प्रतिनिधित्व (उनकी आबादी के अनुपात में) मिलना संभव हो सकेगा। | उत्तर-हाँ, चुनावों को पूर्ण स्वतंत्र तथा निष्पक्ष बनाने के लिये वर्तमान में सुधारों की आवश्यकता बढ़
आबादी के अनुपात में) मिलना संभव हो सकेगा।
आबादी में काले लोगों तथा हिस्पैनिक का कुल प्रतिशत हिस्सा 26% होने के बावजूद, कांग्रेस में केवल उन्हें 13% (अर्थात् अपनी आबादी के अनुपात में आधा) प्रतिनिधित्व प्राप्त है, जबकि गोरे लोगों को उनकी आबादी से भी 16% अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
प्रश्न 7. क्या हम इस अध्याय में दी गई सूचनाओं के आधार पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाल सकते हैं? इनमें से सभी पर अपनी राय के पक्ष में दो तथ्य प्रस्तुत कीजिए।
(क) भारत के चुनाव आयोग को देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करा सकने लायक पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
उत्तर- नहीं, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिये चुनाव आयोग को पर्याप्त शक्तियाँ दी गई हैं -
(i) चुनाव संबंधी सरकार की किसी भी सलाह को मानने के लिये आयोग बाध्य नहीं है।
(ii) आयोग सत्ताधारी पार्टी को सरकारी मशीनरीयों
बनाने के लिये वर्तमान में सुधारों की आवश्यकता बढ़ गई है। उसे चुनाव में धन के दुरुपयोग को रोकना चाहिए तथा उसे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को चुनाव लड़ने से रोकना चाहिए।
प्रश्न 8. चिनप्पा को दहेज के लिए अपनी पत्नी को परेशान करने के जुर्म में सजा मिली थी। सतबीर को छुआछूत मानने का दोषी माना गया था। दोनों को अदालत ने चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी। क्या यह फैसला लोकतांत्रिक चुनावों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जाता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर- न्यायालय का यह निर्णय लोकतान्त्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध नहीं जाता है। आयोग के निर्देशानुसार गंभीर आपराधिक मामले जिन व्यक्तियों पर साबित हुये हैं, उन्हें वह चुनाव लड़ने से वंचित कर सकता है। पहले को दहेज के जुर्म में सजा मिली थी और दूसरे ने संवैधानिक प्रावधान के तहत छुआछूत के व्यवहार का एक दंडनीय अपराध किया था।
प्रश्न 9. यहाँ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में
मानने के लिये आयोग बाध्य नहीं है।
(ii) आयोग सत्ताधारी पार्टी को सरकारी मशीनरियों
के दुरुपयोग से रोक सकता है।
(iii) यह चुनाव आचार संहिता लागू करता है तथा
इसका उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों या दलों को सजा
देता है।
(iv) चुनावी ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी चुनाव
आयोग के अधीन कार्य करता है, न कि सरकार के अधीन।
(ख) हमारे देश के चुनाव में लोगों की जबर्दस्त
भागीदारी होती है।
उत्तर-हाँ, यह सच है और यह स्वतंत्र तथा निष्पक्ष
चुनाव का सूचक है।
यदि चुनावों में धाँधली होती तो मतदाताओं की
संख्या निरंतर घटती जाती, जबकि भारत में मतदान का
प्रतिशत पहले से बढ़ गया है।
होते हैं तथा उनके सामने मतों की गणना की जाती है। इतना ही नहीं, किसी भी तरह का संदेह होने पर पुनर्मतगणना की भी व्यवस्था है।
(ख) फिजी में चुनाव से ठीक पहले एक परचा बाँटा गया जिसमें धमकी दी गई थी कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री महेंद्र चौधरी के पक्ष में वोट दिया गया तो खून-खराबा हो जाएगा। यह धमकी भारतीय मूल के मतदाताओं को दी गई थी।
उत्तर- हाँ, फिजी के लोग भारतीय चुनाव पद्धति से सीख ले सकते हैं-
(i) इस तरह की धमकियों से निपटने के लिये संवैधानिक तथा विधिक प्रावधान होने चाहिये तथा ऐसी शक्तिशाली एजेंसी होनी चाहिये जो तत्काल दंडात्मक कार्यवाही कर सके।
(ii) यह प्रावधान होना चाहिये कि जो कोई दल या उम्मीदवार इस तरह के कार्यों में लिप्त पाया जायेगा, उसको चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिया जायेगा।
(ग) अमेरिका के हर प्रांत में मतदान, मतगणना और चुनाव संचालन की अपनी-अपनी प्रणालियाँ हैं। सन् 2000 के चुनाव में फ्लोरिडा प्रांत के अधिकारियों ने जॉर्ज बुश के पक्ष में अनेक विवादास्पद फैसले लिए पर उनके फैसले को कोई भी नहीं बदल सका।
उत्तर- अमेरिका, भारतीय चुनाव पद्धति से सीख ले सकता है-
(i) यहाँ चुनाव में आयोजन के लिये एकीकृत व्यवस्था है जो राष्ट्रीय चुनाव आयोग के रूप में काम करती है। इसके नियम और आदेश संपूर्ण देश में समान रूप से लागू होते हैं।
(ii) यह संस्था स्वतंत्र तथा सरकारी प्रभाव से मुक्त है। यह चुनाव के दौरान सरकार के फैसलों पर रोक लगा सकती है, यदि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के हित में न हों।
प्रश्न 10. भारत में चुनावी गड़बड़ियों से संबंधित कुछ रिपोर्टें यहाँ दी गई हैं। प्रत्येक मामले में समस्या की पहचान कीजिए। इन्हें दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है?
(क) चुनाव की घोषणा होते ही मंत्री महोदय ने बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा खोलने के लिए वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।
(ख) विपक्षी दलों का आरोप था कि दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके बयानों और चुनाव अभियान को उचित जगह नहीं मिली।
(ग) चुनाव आयोग की जाँच से एक राज्य की मतदाता सूची में 20 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम मिले।
(घ) एक राजनैतिक दल के गुंडे बंदूकों के साथ घूम रहे थे, दूसरी पार्टियों के लोगों को मतदान में भाग लेने से रोक रहे थे और दूसरी पार्टी की चुनावी सभाओं पर हमले कर रहे थे।
उत्तर-
(क) (i) चुनाव की घोषणा के बाद मंत्री द्वारा की गई यह घोषणा जनमत को प्रभावित करने वाला कदम है जो निष्पक्ष चुनाव में बाधक है। यह आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।
(ii) इसके लिये चुनाव आयोग मंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करे तथा अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर उसकी उस घोषणा को अवैध घोषित करे तथा दंडात्मक कार्यवाही करे।
(ख) (i) यह निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न करने में बाधक है। इससे उन पार्टियों को जनता तक अपनी बात पहुंचाने का समान अवसर प्राप्त नहीं हुआ है। फलतः मतदान के प्रभावित होने की आशंका है।
(ii) आयोग को चाहिये कि अविलंब इसकी जाँच करवाए तथा सही पाये जाने पर उन पार्टियों की भी दूरदर्शन तथा रेडियो तक पर्याप्त पहुँच सुनिश्चित करने की व्यवस्था करे।
(ग) (i) इस तरह से स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव बाधित होगा क्योंकि ये सभी वोटर किसी एक पार्टी के पक्ष में मत करेंगे।
(ii) चुनाव आयोग इस मतदाता सूची को खारिज करे तथा सही मतदाता सूची तैयार करने का आदेश जारी करे। इस कार्य में लिप्त अधिकारियों को दंडित करने के आदेश जारी किये जायें।
(घ) (i) राजनीति के इस अपराधीकरण से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के होने की संभावना कम हो जायेगी। लोग इनके डर से चुनाव में भाग लेने के लिए आगे नहीं आयेंगे।
(ii) आयोग को चाहिए कि ऐसे तत्वों तथा संबंधित पार्टी का पता लगाकर उन पर उचित कार्यवाही करे। सभी उम्मीदवारों को समुचित सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाये। प्रशासन से विधि-व्यवस्था की चौकसी बढ़ाने के लिये कहा जाये।
प्रश्न 11. जब यह अध्याय पढ़ाया जा रहा था तो रमेश कक्षा में नहीं आ पाया था। अगले दिन कक्षा में आने के बाद उसने अपने पिताजी से सुनी बातों को दोहराया। क्या आप रमेश को बता सकते हैं कि उसके इन बयानों में क्या गड़बड़ी है?
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(क) औरतें उसी तरह वोट देती हैं जैसा पुरुष उनसे कहते हैं इसलिए उनको मताधिकार देने का कोई मतलब नहीं है।
(ख) पार्टी-पॉलिटिक्स से समाज में तनाव पैदा होता है। चुनाव में सबकी सहमति वाला फैसला होना चाहिए, प्रतिद्वंद्विता नहीं होनी चाहिए।
(ग) सिर्फ स्नातकों को ही चुनाव लड़ने की इजाजत होनी चाहिए।
उत्तर- (क) वोट के अधिकार का संबंध इस बात से बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति अपने उस अधिकार का किस तरह प्रयोग करता है। हाँ, महिलाओं को उनके वोट का महत्त्व अवश्य बतलाया जाना चाहिए। अतः लैंगिक पक्ष का विचार किये बिना प्रत्येक को वोट का अधिकार होना चाहिए।
(ख) यह सच है कि पार्टी राजनीति समाज में तनाव पैदा करती है, किंतु चुनावों में प्रायः सहमति की संभावना नगण्य है, क्योंकि प्रत्येक उम्मीदवार विजयी होना चाहता है तथा इस मुद्दे पर सहमति बनने की कोई संभावना ही नहीं है। अतः स्वस्थ प्रतियोगिता ही चुनाव का बेहतर विकल्प है।
(ग) नहीं, यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। खासकर हमारे देश में, जहाँ अशिक्षा बहुत अधिक है, अतः ऐसा करने से अशिक्षित या कम शिक्षित लोगों के मतदान के अधिकार का हनन होगा।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
भारत में आम चुनाव कितने वर्ष के अन्तराल के बाद कराये जाते हैं?
(अ) चार वर्ष (ब) छ: वर्ष
(स) पांच वर्ष (द) तीन वर्षलोकसभा के हर क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि को कहा जाता है-
(अ) विधायक (ब) सांसद
(स) महापौर (द) मेम्बरभारत में मतदाता की न्यूनतम आयु क्या है?
अथवा
भारत में वयस्क मताधिकार की आयु है-
(अ) 21 वर्ष (ब) 25 वर्ष
(स) 20 वर्ष (द) 18 वर्षभारत में चुनावों का संचालन किया जाता है-
अथवा
भारत में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों को संचालित किया जाता है-
(अ) राष्ट्रपति द्वारा (ब) प्रधानमंत्री द्वारा
(स) चुनाव आयोग द्वारा
(द) सर्वोच्च न्यायालय द्वाराभारत में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है-
(अ) राष्ट्रपति (ब) प्रधानमंत्री
(स) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
(द) लोकसभा अध्यक्षजब किसी निर्वाचित सदस्य की मृत्यु या त्यागपत्र देने की स्थिति में रिक्त सीट पर पुनः चुनाव कराया जाता है, तो वह कहलाता है-
(अ) चुनाव (ब) आम चुनाव
(स) उपचुनाव (द) मध्यावधि चुनाव
- चुनाव घोषणा पत्र जारी किया जाता है-
(अ) प्रधानमंत्री द्वारा
(ब) निर्वाचन आयोग द्वारा
(स) राजनीतिक दल द्वारा (द) राष्ट्रपति द्वारा
उत्तरमाला- 1. (स) 2. (ब) 3. (द) 4. (स) 5. (अ) 6. (स) 7. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
- भारत में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव प्रत्येक .................... साल बाद होते हैं। (पाँच/छ:)
- किसी लोकसभा सदस्य की मृत्यु या इस्तीफे के बाद खाली हुए एक चुनाव क्षेत्र में होने वाले चुनाव को .................... कहते हैं। (आम चुनाव/उपचुनाव)
- भारत में लोकसभा के चुनाव के लिए देश को .................... निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा गया है। (500/543)
- भारत में लोकसभा के लिए .................... सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं। (84/47)
उत्तर- 1. पाँच 2. उपचुनाव 3. 543 4. 84।
निम्न में सत्य/असत्य कथन छांटिये-
- हमारे देश में 18 वर्ष और उससे ऊपर की उम्र के सभी नागरिक चुनाव में वोट डाल सकते हैं। (सत्य/असत्य)
- काँग्रेस (इ) पार्टी ने 1971 के लोकसभा चुनावों में गरीबी हटाओ का नारा दिया था। (सत्य/असत्य)
- मतों की गिनती के समय सभी दलों के अध्यक्ष रहते हैं जिससे मतगणना का काम निष्पक्ष ढंग से हो सके। (सत्य/असत्य)
- हमारे देश में चुनाव लोक सेवा आयोग द्वारा करवाये जाते हैं। (सत्य/असत्य)
उत्तर- 1. सत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. असत्य।
निम्नलिखित स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए-
| स्तम्भ (अ) | स्तम्भ (ब) |
|---|---|
| 1. देवीलाल | (a) कांग्रेस |
| 2. इन्दिरा गाँधी | (b) तेलगूदेशम |
| 3. एन.टी. रामाराव | (c) गुलबर्गा संसदीय क्षेत्र |
| 4. जयप्रकाश नारायण | (d) लोकदल |
| 5. मल्लिकार्जुन खड़गे | (e) जनता पार्टी |
उत्तर- 1. (d) 2. (a) 3. (b) 4. (e) 5. (c)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. चुनाव क्या है?
उत्तर- ऐसी व्यवस्था जिसके द्वारा लोग नियमित अंतराल के बाद अपने प्रतिनिधियों को चुन सकें और इच्छा हो तो उन्हें बदल भी दें, चुनाव कहलाती है।
प्रश्न 2. चुनाव में मतदाता कितनी तरह से चुनाव करते हैं?
उत्तर- (1) चुनाव में मतदाता अपने लिए कानून बनाने वाले का; सरकार बनाने और बड़े फैसले करने वाले का चुनाव कर सकते हैं।
(2) वे सरकार बनाने वाली पार्टी का चुनाव कर सकते हैं।
प्रश्न 3. एक प्रतिनिधि लोकतंत्र के लिए चुनाव क्यों आवश्यक समझे जाते हैं?
उत्तर- एक प्रतिनिधि लोकतंत्र के लिए चुनाव आवश्यक होते हैं क्योंकि-
(i) चुनाव के द्वारा लोग नियमित अन्तराल पर अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं।
(ii) अगर लोगों की इच्छा हो तो वे वर्तमान प्रतिनिधि को बदल भी सकते हैं।
प्रश्न 4. लोकतांत्रिक चुनावों के लिए दो जरूरी न्यूनतम शर्तों का उल्लेख कीजिये।
(2) चुनाव नियमित अंतराल के बाद तथा निरन्तर हों।
प्रश्न 5. चुनाव में राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता के दो रूपों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- (1) चुनाव में राजनैतिक पार्टियों के बीच राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता होती है।
(2) निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के बीच राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता पायी जाती है।
प्रश्न 6. चुनावी प्रतिद्वन्द्विता की दो हानियाँ लिखिये।
उत्तर- (1) चुनावी प्रतिद्वन्द्विता से हर बस्ती, हर घर में बंटवारे जैसी स्थिति आ जाती है।
(2) समाज और देश-सेवा करने की चाह रखने वाले कई लोग इस कारण चुनावी मुकाबले में नहीं उतरते।
प्रश्न 7. चुनावी प्रतिद्वन्द्विता का क्या लाभ है?
उत्तर- चुनावी प्रतिद्वन्द्विता के कारण ही राजनैतिक दल और इसके नेता, लोगों की सेवा के लिए बाध्य होते हैं।
प्रश्न 8. निर्वाचन क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर- चुनाव के उद्देश्य से भारत को अनेक क्षेत्रों में बांट लिया गया है। इन्हें निर्वाचन क्षेत्र कहते हैं। एक क्षेत्र में रहने वाले मतदाता अपने एक प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं।
प्रश्न 9. आम चुनाव क्या है?
उत्तर- जब लोकसभा अथवा विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक साथ एक ही दिन या कुछ दिनों के अन्दर चुनाव कराए जाते हैं तो इसे 'आम चुनाव' कहा जाता है।
प्रश्न 10. संसद सदस्य किसे कहते हैं?
उत्तर- प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि को संसद सदस्य कहते हैं।
प्रश्न 11. विधायक किसे कहते हैं?
उत्तर- प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित प्रतिनिधि को विधायक कहते हैं।
प्रश्न 12. भारत के प्रथम निर्वाचन आयुक्त कौन थे?
उत्तर- सुकुमार सेन भारत के प्रथम निर्वाचन आयुक्त थे।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्थाओं में चुनावों की जरूरत क्यों है?
उत्तर- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्थाओं में लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करते हैं। इसके लिए ऐसी व्यवस्था करने की जरूरत है जिससे लोग नियमित अंतराल पर अपने प्रतिनिधियों को चुन सकें और अगर इच्छा हो तो उसे बदल सकें। इस व्यवस्था को चुनाव कहते हैं। इसलिए प्रतिनिध्यात्मक लोकतंत्र में चुनावों की जरूरत है।
प्रश्न 2. भारत में उन स्तरों का उल्लेख कीजिए जहाँ जनता विधायिकाओं के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है।
उत्तर- भारत में जनता निम्नलिखित तीन स्तरों पर अपने प्रतिनिधि चुनती है-
(1) वह राष्ट्रीय स्तर पर सांसदों का चुनाव करती है।
(2) वह राज्य स्तर पर विधायकों का चुनाव करती है।
(3) वह स्थानीय स्तर पर पंचायतों तथा शहरी निकायों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करती है।
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प्रश्न 3. उन विकल्पों का उल्लेख कीजिये जिनका चुनाव जनता चुनाव के दौरान करती है।
उत्तर- जनता चुनाव के दौरान निम्न विकल्पों का चुनाव करती है-
(1) वह इसका चुनाव कर सकती है कि उनके लिए कानून कौन बनायेगा।
(2) वह सरकार बनाने और बड़े फैसले करने वाले का चुनाव कर सकती है।
(3) वह उस पार्टी का चुनाव कर सकती है जिसकी नीतियाँ सरकार तथा कानून बनाने की प्रक्रिया को निर्देशित करेंगी।
प्रश्न 4. हर चुनाव से पूर्व मतदाता सूची को क्यों सुधारा जाता है?
उत्तर- चूंकि हर अगले चुनाव में नए लोग मतदाता बनने की उम्र तक आ जाते हैं। इसलिए हर चुनाव से पूर्व मतदाता सूची को सुधारा जाता है। जो लोग उस इलाके से बाहर चले जाते हैं या जिनकी मौत हो जाती है, उनके नाम इस सूची से काट दिए जाते हैं। हर पांच वर्ष में मतदाता सूची का पूर्ण नवीनीकरण किया जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत के चुनाव आयोग के अधिकारों का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर- भारत में चुनाव आयोग के प्रमुख अधिकार निम्नलिखित हैं-
(1) चुनाव आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करने से लेकर चुनाव के परिणामों तक पर प्रभावी नियंत्रण रखता है।
(2) यह आदर्श चुनाव संहिता लागू करता है एवं इसका उल्लंघन करने वाले उम्मीदवार व दलों को सजा भी देता है।
(3) यह चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग एवं अधिकारियों के स्थानान्तरण को रोकता है।
(4) चुनाव कार्य हेतु लगाये गये अधिकारी एवं कर्मचारियों पर चुनाव आयोग का नियंत्रण होता है।
प्रश्न 2. चुनावी अभियानों के लिए आदर्श आचारसंहिता की व्याख्या कीजिये।
उत्तर- आदर्श आचारसंहिता के अनुसार किसी भी राजनैतिक दल या उम्मीदवार द्वारा-
(1) चुनाव प्रचार के लिए किसी धर्म-स्थल का उपयोग नहीं किया जा सकता।
(2) चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहनों, वायुयानों, अधिकारियों व कर्मचारियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
(3) एक बार चुनावों की घोषणा हो जाने के पश्चात् कोई भी मंत्री किसी नई परियोजना की आधारशिला नहीं रख सकता, कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले सकता और जनता से कोई जनसुविधा उपलब्ध करवाने का वादा नहीं कर सकता है।
प्रश्न 3. किन्हीं तीन कारकों का उल्लेख कीजिये जो भारतीय चुनावों को लोकतांत्रिक बनाते हैं।
उत्तर- भारत में चुनावों को लोकतांत्रिक बनाने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
(1) स्वतंत्र चुनाव आयोग- भारत में चुनाव चुनाव-आयोग द्वारा कराये जाते हैं। चुनाव आयोग बहुत अधिक शक्तिशाली तथा स्वतंत्र है।
(2) लोकप्रिय जनसहभागिता- भारत में पिछले पांच दशकों में जनसहभागिता या तो स्थिर रही है या बढ़ी है। चुनावों में बढ़ती जनता की रुचि चुनावों की लोकतांत्रिक को सिद्ध करती है।
(3) चुनाव परिणामों की स्वीकृति- भारत में सत्ताधारी दल, शक्तिशाली उम्मीदवार चुनाव हारते रहे हैं तथा वे उसे स्वीकार करते भी रहे हैं।
प्रश्न 4. हमारे संविधान निर्माताओं ने कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र की विशेष व्यवस्था क्यों अपनाई?
उत्तर- हमारा संविधान प्रत्येक नागरिक को अपना प्रतिनिधि चुनने और जनप्रतिनिधि के तौर पर चुने जाने का अधिकार देता है। लेकिन हमारे संविधान निर्माताओं को चिंता थी कि संभव है- खुले चुनावी मुकाबले में कमजोर समूहों के लोग लोकसभा और विधानसभाओं में पहुंच नहीं पाएँ। संभव है कि चुनाव लड़ने और जीतने लायक जरूरी संसाधन, शिक्षा और सम्पर्क उनके पास हों ही नहीं तथा संसाधनों वाले प्रभावशाली लोग उनको चुनाव जीतने से रोक भी सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संसद और विधानसभाओं में हमारी जनसंख्या के एक बड़े हिस्से की आवाज ही नहीं पहुँच पायेगी। इससे हमारी व्यवस्था कम लोकतांत्रिक होगी।
इसीलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र की विशेष व्यवस्था का प्रावधान किया।
प्रश्न 5. एक लोकतांत्रिक चुनाव के लिए न्यूनतम शर्तें क्या हैं?
उत्तर- एक लोकतांत्रिक चुनाव के लिए न्यूनतम शर्तें
एक लोकतांत्रिक चुनाव के लिए न्यूनतम आवश्यक शर्तें अग्रलिखित हैं-
(2) विकल्पों का होना - चुनाव में विकल्प उपलब्ध हों। पार्टियों और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता हो और वे चुनावी प्रतियोगिता में उतरकर मतदाताओं के समक्ष विकल्प प्रस्तुत करें।
(3) नियमित अंतराल पर चुनाव - चुनाव का अवसर जनता को एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से मिलता रहे। नए चुनाव एक निश्चित अवधि के पश्चात् जरूर कराए जाने चाहिए।
(4) वास्तविक चुनाव - लोग जिसे चाहें वास्तव में चुनाव उसी का होना चाहिए। अर्थात् जनता द्वारा वरीयता प्राप्त उम्मीदवारों का ही चयन होना चाहिए।
(5) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव - चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से कराए जाने चाहिए जिससे लोग अपनी इच्छा से व्यक्ति का चुनाव कर सकें।
निबन्धात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. क्या भारत का चुनाव आयोग स्वतंत्र है? उसके अधिकार तथा शक्तियों का वर्णन कीजिये।
उत्तर - चुनाव आयोग की स्वतंत्रता - भारत में चुनाव एक स्वतंत्र और बहुत ताकतवर चुनाव आयोग द्वारा करवाये जाते हैं। इसे न्यायपालिका के समान स्वतंत्रता प्राप्त है। मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं। एक बार नियुक्त हो जाने के बाद चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति या सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं रहता। सरकार को उसे हटाना भी अत्यधिक कठिन होता है।
चुनाव आयोग के अधिकार व शक्तियाँ
भारत के चुनाव आयोग को निम्नलिखित अधिकार व शक्तियाँ प्राप्त हैं-
(1) चुनाव प्रक्रिया का संचालन व अधीक्षण करना - चुनाव आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करने से लेकर चुनावी परिणामों की घोषणा तक की समूची चुनाव प्रक्रिया के संचालन के हर पहलू पर निर्णय लेने की शक्ति रखता है।
(2) आदर्श चुनाव संहिता लागू करवाना - चुनाव आयोग आदर्श चुनाव संहिता लागू करवाता है और इसका उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को सजा देता है।
(3) सरकार को दिशा-निर्देश देना - चुनाव के दौरान चुनाव आयोग सरकार को दिशा-निर्देश मानने के आदेश दे सकता है। इसमें सरकार द्वारा चुनाव जीतने के लिए चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग रोकना या अधिकारियों का तबादला करना भी शामिल है।
(4) चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों पर नियंत्रण - चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी सरकार के नियंत्रण में न होकर चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते हैं।
(5) अन्य शक्तियाँ - चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का विस्तार करते हुए सरकार और प्रशासन को उनकी गलतियों के लिए फटकार लगायी है। कुछ मतदान केन्द्रों या पूरे चुनाव क्षेत्र में फर्जी मतदान की रिपोर्टों के आधार पर वह वहां फिर से मतदान का आदेश दे सकता है।
प्रश्न 2. राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता क्या है? इसके गुण तथा दोषों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर - राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता - चुनाव में जीतने के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों व उम्मीदवारों के बीच जो प्रतियोगिता या प्रतिद्वन्दिता पायी जाती है, उसी को राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता या प्रतियोगिता कहा जाता है।
राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता के गुण
राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं -
(1) जनता के हित के लिए कार्य करने की प्रेरणा - नियमित चुनावी प्रतियोगिता से राजनैतिक दलों तथा राजनेताओं को प्रेरणा मिलती है। वे जानते हैं कि यदि वे जनहित से जुड़े मुद्दे उठाते हैं तो आने वाले चुनाव में उन्हें विजय मिलेगी। इससे उन्हें जनता के लिए काम करने की प्रेरणा मिलती है।
(2) राजनैतिक दलों को जनहित के कार्य करने को बाध्य करती है - राजनैतिक प्रतियोगिता राजनैतिक दलों को जनहित के कार्य करने को बाध्य करती है क्योंकि सत्तारूढ़ दल यह जानता है कि अगर वह जनहितकारी कार्य नहीं करेगा तो आगामी चुनाव में जनता उनके उम्मीदवारों को हराकर उसे सत्ता से अपदस्थ कर देगी। अतः उसे जनहित के कार्य बाध्य होकर करने ही पड़ते हैं।
राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता के दोष
राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं -
(1) एकता की भावना का ह्रास - राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता प्रत्येक स्थान पर लोगों में एकता की भावना को ठेस पहुँचाती है तथा दलगत राजनीति को जन्म देती है। इससे हर बस्ती, हर घर में बंटवारे जैसी स्थिति हो जाती है।