Working of Institutions
[राजनीति] संस्थाओं का कामकाज
(2) परस्पर आरोप-प्रत्यारोप तथा गलत तरीकों का प्रयोग-राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता के तहत विभिन्न राजनैतिक दल एवं नेता प्राय: एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं। वे चुनाव जीतने के लिए कई बार गलत तरीकों का प्रयोग करते हैं। | और कार्यक्रमों के लिए दबाव डाल सकते हैं। अतः वे चुनावों में वोट के महत्त्व को समझते हैं।
(3) समाजसेवी लोगों की राजनीतिक सक्रियता से दूरी-राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता के उपर्युक्त दोषों के कारण समाज और देश की सेवा करने की चाह रखने वाले कई अच्छे लोग भी चुनावी मुकाबले में नहीं उतरते। उन्हें इस मुश्किल और बेढंगी लड़ाई में उतरना अच्छा नहीं लगता। | (iv) भारत में साल दर साल चुनाव से संबंधित गतिविधियों में लोगों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। 1996 में यह सक्रियता जहाँ 8 प्रतिशत थी, वह 2004 में बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई।
(4) अन्य दोष-चुनावी दौड़ जीतने का दबाव सही किस्म की दीर्घकालिक राजनीति को पनपने नहीं देता। | इन निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि जनता चुनावों में उत्साह से भाग ले रही है।
| (3) चुनाव परिणामों की स्वीकृति-चुनाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने का एक अन्य पैमाना उसके नतीजे हैं। अगर चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से न हों तो परिणाम हमेशा ताकतवर पार्टी या उम्मीदवारों के पक्ष में ही जाते हैं। इस दृष्टि से भारत के चुनाव परिणामों को
किस्म की दीर्घकालिक राजनीति को पनपने नहीं देता।
प्रश्न 3. उन कारकों का विवेचन कीजिये जो भारत में चुनाव को लोकतांत्रिक बनाते हैं।
उत्तर- भारत में चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने वाले कारक
भारत में चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं-
(1) स्वतंत्र चुनाव आयोग- भारत में चुनाव एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग द्वारा करवाए जाते हैं। इसे न्यायपालिका के समान ही स्वतंत्रता प्राप्त है। मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन नियुक्ति के बाद वह राष्ट्रपति या सरकार के प्रति उत्तरदायी नहीं रहता। उसे निर्वाचन कराने के समस्त अधिकार प्राप्त हैं। वह समूची चुनाव प्रक्रिया का अधीक्षक, संचालक तथा नियंत्रक है, आदर्श चुनाव संहिता लागू करवाता है, चुनाव के दौरान सरकार को दिशा-निर्देश देता है तथा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोकता है। वह निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव कराने की
म हो जाते हैं। इस दृष्टि से भारत के चुनाव परिणामों का देखें तो ये निष्कर्ष निकलते हैं-
(i) भारत में शासक दल राष्ट्रीय और प्रान्तीय स्तर पर प्राय: चुनाव हारते रहे हैं।
(ii) भारत में निवर्तमान सांसदों और विधायकों में से आधे चुनाव हार जाते हैं।
(iii) पूँजीपति या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार भी चुनाव हारते रहे हैं।
(iv) प्राय: हारी हुई पार्टी भी चुनाव के परिणामों को जनादेश मानकर स्वीकार करती रही है।
इससे भी स्पष्ट होता है कि भारत में चुनावों का स्वरूप लोकतांत्रिक है।
4. संस्थाओं का कामकाज
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
- अगर आपको भारत का राष्ट्रपति चुना जाए तो आप निम्नलिखित में से कौन-सा फैसला खुद
दिशा-निर्देश देता है तथा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोकता है। वह निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव कराने की दृष्टि से आवश्यक आदेश-निर्देश दे सकता है।
(2) चुनाव में लोगों की भागीदारी-चुनावी प्रक्रिया की लोकतांत्रिकता को जांचने का एक अन्य तरीका यह है कि जनता इसमें कितने उत्साह से भाग लेती है। इस दृष्टि से भारतीय चुनाव में लोगों की भागीदारी सम्बन्धी कुछ निष्कर्ष इस प्रकार हैं-
(i) पिछले पचास वर्षों में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लोकतांत्रिक देशों में मतदान का प्रतिशत जहाँ कम हुआ है, वहाँ भारत में यह या तो स्थिर रहा है या ऊपर गया है।
(ii) भारत में अमीर और बड़े लोगों की तुलना में गरीब, निरक्षर और कमजोर लोग ज्यादा संख्या में मतदान करते हैं।
(iii) भारत में आम लोग यह सोचते हैं कि वे राजनैतिक दलों पर चुनाव के जरिये अपने अनुकूल नीति
- अगर आपका भारत का राष्ट्रपति चुना जाए तो आप निम्नलिखित में से कौन-सा फैसला खुद कर सकते हैं?
(क) अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन सकते हैं।
(ख) लोकसभा में बहुमत वाले प्रधानमंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं।
(ग) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं।
(घ) मंत्रिपरिषद में अपनी पसंद के नेताओं का चयन कर सकते हैं।
उत्तर-(ग) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिये कह सकते हैं।
- निम्नलिखित में कौन राजनैतिक कार्यपालिका का हिस्सा होता है?
(क) जिलाधिकारी
(ख) गृह मंत्रालय का सचिव
(ग) गृहमंत्री
(घ) पुलिस महानिदेशक
उत्तर-(ग) गृहमंत्री।
3. न्यायपालिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा बयान गलत है?
(क) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है।
(ख) अगर कोई कानून संविधान की भावना के खिलाफ है तो न्यायपालिका उसे अमान्य घोषित कर सकती है।
(ग) न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतंत्र होती है।
(घ) अगर किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है तो वह अदालत में जा सकता है।
उत्तर-(क) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है।
4. निम्नलिखित राजनैतिक संस्थाओं में से कौन-सी संस्था देश के मौजूदा कानून में संशोधन कर सकती है?
(क) सर्वोच्च न्यायालय (ख) राष्ट्रपति
(ग) प्रधानमंत्री (घ) संसद
उत्तर-(घ) संसद।
5. उस मंत्रालय की पहचान करें जिसने निम्नलिखित समाचार जारी किया होगा :
| (क) देश से जूट का निर्यात बढ़ाने के लिए एक नई नीति बनाई जा रही है। | 1. रक्षा मंत्रालय |
| (ख) ग्रामीण इलाकों में टेलीफोन सेवाएँ सुलभ कराई जाएँगी। | 2. कृषि, खाद्यान्न और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय |
| (ग) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बिकने वाले चावल और गेहूँ की कीमतें कम की जाएँगी। | 3. स्वास्थ्य मंत्रालय |
| (घ) पल्स पोलियो अभियान शुरू किया जाएगा। | 4. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय |
| (ङ) ऊँची पहाड़ियों पर तैनात सैनिकों के भत्ते बढ़ाए जाएँगे। | 5. संचार और सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय |
उत्तर-(क) 4, (ख) 5, (ग) 2, (घ) 3, (ङ) 1
प्रश्न 6. देश की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में से उस राजनैतिक संस्था का नाम बताइए जो निम्नलिखित मामलों में अधिकारों का इस्तेमाल करती है-
(क) सड़क, सिंचाई जैसे बुनियादी ढाँचों के विकास और नागरिकों की विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा।
(ख) स्टॉक एक्सचेंज को नियमित करने सम्बन्धी कानून बनाने की कमेटी के सुझाव पर विचार-विमर्श करती है।
(ग) दो राज्य सरकारों के बीच कानूनी विवाद पर निर्णय लेती है।
(घ) भूकम्प पीड़ितों की राहत के प्रयासों के बारे में सूचना माँगती है।
उत्तर-(क) कार्यपालिका (ख) विधायिका (ग) न्यायपालिका (घ) विधायिका।
प्रश्न 7. भारत का प्रधानमंत्री सीधे जनता द्वारा क्यों नहीं चुना जाता? निम्नलिखित चार जवाबों में सबसे सही को चुनकर अपनी पसंद के पक्ष में कारण दीजिए-
(क) संसदीय लोकतंत्र में लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी का नेता ही प्रधानमंत्री बन सकता है।
(ख) लोकसभा, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें हटा सकती है।
(ग) चूँकि प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति नियुक्त करता है लिहाजा उसे जनता द्वारा चुने जाने की जरूरत ही नहीं है।
(घ) प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव में बहुत ज्यादा खर्च आएगा।
उत्तर-(क) संसदीय लोकतंत्र में लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी का नेता ही प्रधानमंत्री बन सकता है।
पक्ष में कारण-भारतीय संविधान में यह व्यवस्था है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। लेकिन राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या पार्टियों के गठबंधन के नेता को ही प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं। यही कारण है कि भारत में प्रधानमंत्री का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्षतः नहीं किया जाता है।
प्रश्न 8. तीन दोस्त एक ऐसी फिल्म देखने गए जिसमें हीरो एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनता है और राज्य में बहुत से बदलाव लाता है। इमरान ने कहा कि देश को इसी चीज की जरूरत है। रिजवान ने कहा कि इस तरह का, बिना संस्थाओं वाला एक व्यक्ति का राज खतरनाक है। शंकर ने कहा कि यह तो एक
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कल्पना है। कोई भी मंत्री एक दिन में कुछ भी नहीं कर सकता। ऐसी फिल्मों के बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर-यह फिल्म आदर्शवाद तथा वास्तविक स्थिति दोनों पर ही आधारित है। फिल्म में दिखाई गई समस्याएँ तो वास्तविक हैं किन्तु जो हल सुझाए गये हैं वे प्रतिशत तक आदर्श पर आधारित हैं। किन्तु मुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे नायक द्वारा किए गये सभी कार्य संस्था की सीमा के अन्तर्गत हैं। हाँ, फर्क इतना है कि मुख्यमंत्री के रूप में अव्यावहारिक रूप से नायक को जमीनी स्तर पर ऐसे कार्य करते हुये दिखाया गया है जो कि काल्पनिक हैं। दूसरे, राज्य में परिवर्तन लाने के लिए एक व्यावहारिक योजना बनाने की आवश्यकता होती है। अतः केवल एक दिन में परिवर्तन वाला संभव नहीं है।
प्रश्न 9. एक शिक्षिका छात्रों की संसद के आयोजन की तैयारी कर रही थी। उसने दो छात्राओं से अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की भूमिका करने को कहा। उसने उन्हें विकल्प भी दिया। यदि वे चाहें तो राज्य सभा में बहुमत प्राप्त दल की नेता हो सकती थीं और अगर चाहें तो लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल की। अगर आपको यह विकल्प दिया गया तो आप क्या चुनेंगे और क्यों?
उत्तर-(i) मैं लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल की नेता की भूमिका चुनूँगी।
(ii) क्योंकि, लोकसभा के सदस्यों द्वारा ही अपने सदन के नेता का चुनाव किया जाता है तथा जिस व्यक्ति को बहुमत प्रदान किया जाता है, उसे प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है तथा वही व्यक्ति केन्द्र में सरकार बनाता है।
प्रश्न 10. आरक्षण पर आदेश का उदाहरण पढ़कर तीन विद्यार्थियों की न्यायपालिका की भूमिका पर अलग-अलग प्रतिक्रिया थी। इनमें से कौन-सी प्रतिक्रिया, न्यायपालिका की भूमिका को सही तरह से समझती है?
(क) श्रीनिवास का तर्क है कि चूँकि सर्वोच्च न्यायालय सरकार के साथ सहमत हो गई है लिहाजा वह स्वतंत्र नहीं है।
(ख) अंजैया का कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है क्योंकि वह सरकार के आदेश के खिलाफ फैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को उसमें संशोधन का निर्देश दिया।
(ग) विजया का मानना है कि न्यायपालिका न तो स्वतंत्र है, न ही किसी के अनुसार चलने वाली है बल्कि वह विरोधी समूहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। न्यायालय ने इस आदेश के समर्थकों और विरोधियों के बीच बढ़िया संतुलन बनाया।
आपकी राय में कौन-सा विचार सबसे सही है?
उत्तर-इन तीनों प्रतिक्रियाओं में से अंजैया (ख) का विचार सरकार के आरक्षण सम्बन्धी आदेशों को न्यायालय द्वारा न्यायसंगत पाया गया है। साथ ही उनमें अपेक्षित कमियों को देखते हुये न्यायालय ने सरकार को इसमें संशोधन करने का आदेश भी दिया है। न्यायालय ने पिछड़े वर्गों के सही व्यक्ति तक इस आदेश का लाभ पहुँचे, इसके लिये इस वर्ग के सम्पन्न लोगों की पहचान कर उन्हें इस लाभ से अलग रखने के लिये आवश्यक कदम उठाने हेतु सरकार को निर्देश दिया।
मेरे विचार में यही सबसे सही राय है जो न्यायपालिका सरकार के आदेशों के खिलाफ फैसला सुना सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
विधायिका का काम है-
(अ) कानूनों का निर्माण करना
(ब) कानूनों को क्रियान्वित करना
(स) कानूनों की व्याख्या करना
(द) कार्यालय ज्ञापन जारी करनाभारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा को कहा जाता है-
(अ) विधानसभा (ब) मंत्रिमण्डल
(स) मंत्रिपरिषद (द) संसदभारत का राष्ट्राध्यक्ष होता है-
(अ) राष्ट्रपति (ब) प्रधानमंत्री
(स) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
(द) थल सेनाध्यक्षमंडल आयोग का अध्यक्ष थे-
(अ) वी.पी. सिंह
(ब) अटल बिहारी वाजपेयी
(स) काका कालेलकर
(द) बी.पी. मंडलभारत सरकार ने किस वर्ष दूसरा पिछड़ी जाति आयोग गठित किया था?
(अ) सन् में (ब) सन् में
(स) सन् में (द) सन् में
देश की न्यायिक प्रक्रिया को नियंत्रित करता है-
(अ) राष्ट्रपति (ब) सर्वोच्च न्यायालय
(स) एटॉर्नी जनरल (द) लोकसभा अध्यक्ष
वित्त विधेयक पहले प्रस्तुत किया जाता है-
(अ) राज्य सभा में (ब) विधानपरिषद में
(स) लोकसभा में (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तरमाला- 1. (अ) 2. (द) 3. (अ) 4. (द) 5. (द) 6. (ब) 7. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
- राष्ट्रीय स्तर पर भारत की सरकार को .................... की सरकार कहा जाता है। (राज्य/संघ)
- .................... में राष्ट्रपति और दो सदन-लोकसभा और राज्यसभा होते हैं। (संसद/कैबिनेट)
- .................... वह संस्था है जहाँ नागरिक और सरकार के बीच विवाद सुलझाये जाते हैं। (सर्वोच्च न्यायालय/संसद)
- कानून निर्माण का काम करने वाली संस्था को .................... कहते हैं। (न्यायपालिका/विधायिका)
उत्तर- 1. संघ 2. संसद 3. सर्वोच्च न्यायालय 4. न्यायपालिका।
निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये-
- जनता द्वारा खास अवधि तक के लिए निर्वाचित लोगों को राजनैतिक कार्यपालिका कहते हैं।
- भारत में राष्ट्रपति अपनी मर्जी से किसी को भी प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं।
- राज्यमंत्री मंत्रिपरिषद के नाम पर फैसले करने के लिए बैठक करते हैं।
- भारत में जहाँ प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है, वहीं राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होता है।
उत्तर- 1. सत्य 2. असत्य 3. असत्य 4. सत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| 1. सरकार का प्रमुख | (a) राष्ट्रपति |
| 2. राष्ट्र का प्रमुख | (b) प्रधानमंत्री |
| 3. राज्यसभा का पदेन सभापति | (c) लोकसभा |
| 4. निम्न सदन | (d) राज्यसभा |
| 5. उच्च सदन | (e) उपराष्ट्रपति |
उत्तर- 1. (b) 2. (a) 3. (e) 4. (c) 5. (d)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संस्था से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- लोकतंत्र में सरकार के कार्यों तथा जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए जो व्यवस्थाएँ की जाती हैं, उन्हें संस्था कहते हैं।
प्रश्न 2. लोकतांत्रिक सरकारें संस्थाओं पर जोर क्यों देती हैं?
उत्तर- लोकतांत्रिक सरकारों में निर्णय लागू करने से पहले संस्थाओं में इन पर पूर्ण विचार-विमर्श किया जाता है, इसके कारण कोई गलत निर्णय लेने की संभावना नहीं रहती।
प्रश्न 3. संसद क्या है?
उत्तर- भारत में चुने हुए प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा, जो विधायिका का काम करती है, संसद कहलाती है।
प्रश्न 4. संसद के कोई दो कार्य बताइये।
उत्तर- (1) संसद नये कानून बनाती है, वर्तमान कानूनों में संशोधन करती है।
(2) यह मंत्रिमंडल पर नियंत्रण रखती है।
प्रश्न 5. भारत में संसद के दो सदन कौन-से हैं?
उत्तर- भारत में संसद के दो सदन ये हैं-
(1) लोकसभा (निम्न सदन) (2) राज्य सभा (उच्च सदन)।
प्रश्न 6. लोकसभा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- (1) लोकसभा राष्ट्रीय स्तर पर जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलकर बना सदन है।
(2) यह संसद का प्रथम तथा निम्न सदन है।
प्रश्न 7. राज्य सभा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- (1) राज्य सभा प्रान्तीय विधानसभाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलकर बना सदन है।
(2) यह संसद का उच्च सदन है।
प्रश्न 8. संसद के निर्णय किसकी मंजूरी के बाद लागू होते हैं?
उत्तर- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद।
प्रश्न 9. भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?
उत्तर- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
प्रश्न 10. सरकार की तीन संस्थाओं के नाम लिखें।
अथवा
सरकार के तीनों अंगों के नाम लिखो।
उत्तर- (1) विधायिका (2) कार्यपालिका (3) न्यायपालिका।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. धन विधेयक के सम्बन्ध में राज्य सभा की क्या शक्ति है?
उत्तर- धन विधेयक का आरंभ केवल लोकसभा में हो सकता है। लोकसभा से पारित करके इसे राज्यसभा में भेजा जाता है। राज्यसभा इसे अस्वीकार नहीं कर सकती, यह इसे केवल 14 दिन के लिए रोक सकती है अथवा इसमें संशोधन का सुझाव दे सकती है। यह लोकसभा का अधिकार है कि वह उन सुझावों को स्वीकार करे या अस्वीकार करे।
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प्रश्न 2. लोकसभा एवं राज्यसभा के सदस्यों को कौन निर्वाचित करता है?
उत्तर— (1) लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से आम चुनाव में किया जाता है।
(2) राज्य सभा के सदस्यों का निर्वाचन राज्यों की विधानसभाओं द्वारा किया जाता है। इसमें 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किये जाते हैं जो कला, साहित्य, विज्ञान आदि के क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं।
प्रश्न 3. प्रधानमंत्री के कोई दो कार्य बताइये।
उत्तर— प्रधानमंत्री के दो कार्य निम्नलिखित हैं-
(1) प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है। सभी मंत्री उसके अधीन कार्य करते हैं। वह विभिन्न मंत्रियों के कार्यों में तालमेल बनाए रखता है।
(2) मंत्रियों के बीच कार्य का विवरण एवं पुनर्वितरण प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है। वह किसी भी मंत्री को अपने पद से हटा सकता है।
प्रश्न 4. भारत के मंत्रिपरिषद में कितने मंत्री हो सकते हैं तथा कितने प्रकार के मंत्री होते हैं?
अथवा
मंत्रिपरिषद् में मंत्रियों के कौन-से विभिन्न वर्ग होते हैं?
उत्तर— भारत के मंत्रिपरिषद् में सामान्यतः 60 से 80 मंत्री होते हैं। मंत्रिपरिषद् में मंत्रियों के प्रमुख वर्ग निम्न होते हैं-
(1) कैबिनेट मंत्री- ये शासक दल के सर्वोच्च स्तर के नेता होते हैं जिन्हें प्रमुख विभागों का प्रभार दिया जाता है। ये सभी कैबिनेट की बैठकों में भाग लेते हैं।
(2) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)- ये प्रायः छोटे विभागों के प्रभारी होते हैं। ये विशेष रूप से आमंत्रित किये जाने पर कैबिनेट की बैठकों में भाग लेते हैं।
(3) राज्य मंत्री- ये कैबिनेट मंत्रियों की सहायता करते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर— राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता-
(1) निर्णय लेने के लिए- लोगों के हित सम्बन्धी निर्णय लेने हेतु प्रत्येक लोकतांत्रिक देश को राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता होती है। ये संस्थाएँ जनहित के उद्देश्य से विभिन्न नीतियाँ व कार्यक्रम बनाती हैं।
(2) निर्णयों को क्रियान्वित करने हेतु- लिए गए निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए भी इन राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता होती है।
(3) झगड़े निपटाने हेतु- विभिन्न संस्थाओं के बीच, नागरिकों के बीच, नागरिकों व संस्थाओं के बीच विवादों को निपटाने के लिए भी राजनीतिक संस्थाओं की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2. भारतीय संसद के दोनों सदनों की शक्तियों, कार्यकाल तथा चुनाव की तुलना करें।
उत्तर—
| विषय | लोकसभा | राज्य सभा |
|---|---|---|
| कार्यकाल | लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का है किन्तु इसकी अवधि समाप्त होने से पहले ही इसे भंग किया जा सकता है। | यह स्थायी सदन होता है। एक सदस्य 6 वर्ष तक रह सकता है। |
| शक्तियाँ | यह अधिक शक्तिशाली होती है क्योंकि इसकी सदस्य संख्या अधिक है। वित्त पर इसका नियंत्रण है और कार्यपालिका इसके प्रति उत्तरदायी होती है। | यह कम शक्तिशाली होती है। |
| चुनाव | इसके सदस्यों का चुनाव जनता प्रत्यक्ष रूप से करती है। | इसके सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। |
प्रश्न 3. शासन की राष्ट्रपति प्रणाली व संसदीय प्रणाली में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर— शासन की राष्ट्रपति प्रणाली एवं संसदीय प्रणाली में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
(1) राष्ट्रपति प्रणाली में कार्यपालिका का चुनाव जनता द्वारा निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष मतदान से किया जाता है, जबकि संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है।
(2) राष्ट्रपति प्रणाली में सत्ता में रहने के लिए कार्यपालिका को संसद के समर्थन की आवश्यकता नहीं होती है, जबकि संसदीय प्रणाली में संसद के बहुमत के समर्थन की आवश्यकता होती है।
(3) राष्ट्रपति प्रणाली में राष्ट्र की नाममात्र की एवं वास्तविक कार्यपालिका दोनों एक ही होती हैं, जबकि संसदीय प्रणाली में ये दोनों अलग-अलग होती हैं।
(4) राष्ट्रपति प्रणाली में राष्ट्रपति की केन्द्रीय
भूमिका होती है, जबकि संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री की केन्द्रीय भूमिका होती है।
प्रश्न 4. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कार्य एवं शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कार्य एवं शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) सर्वोच्च न्यायालय देश में न्यायिक प्रशासन को नियंत्रित करता है तथा देश की सभी अदालतों को उसका फैसला मानना होता है।
(2) वह इनमें से किसी भी विवाद की सुनवाई कर सकता है-
(i) देश के नागरिकों के बीच
(ii) नागरिकों और सरकार के बीच
(iii) दो या उससे अधिक राज्य सरकारों के बीच, और
(iv) केन्द्र और राज्य सरकार के बीच।
(3) यह फौजदारी और दीवानी मामले में अपील के लिए सर्वोच्च संस्था है।
(4) यह उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ सुनवाई कर सकता है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संसद के प्रमुख कार्य एवं शक्तियों की व्याख्या करें।
उत्तर- संसद के कार्य एवं शक्तियाँ
संसद के प्रमुख कार्य व शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) विधायी शक्तियाँ- संसद संघ सूची और समवर्ती सूची में दिए गए सभी विषयों पर कानून बना सकती है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में वह राज्य सूची में दिए गए विषयों पर भी कानून बना सकती है। अवशिष्ट विषयों पर भी वह कानून बना सकती है।
(2) वित्त पर नियंत्रण- संघीय सरकार का वार्षिक बजट संसद द्वारा पारित किया जाता है। संसद की स्वीकृति के बिना सरकार न कोई कर लगा सकती है और न ही कोई खर्च कर सकती है।
(3) कार्यपालिका पर नियंत्रण- संसद किसी मंत्रालय या सरकार के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर उसे त्यागपत्र देने के लिए कह सकती है। सरकार और उसके मंत्रियों पर नियंत्रण रखने के लिए वह संसद में विविध प्रकार के प्रश्न पूछकर मंत्रिमंडल पर नियंत्रण रखती है।
(4) चुनाव सम्बन्धी कार्य- संसद राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्य सभा के उपसभापति का चुनाव करती है।
(5) अन्य कार्य- (i) संसद संविधान में संशोधन कर सकती है।
(ii) संसद राष्ट्रपति की संकटकालीन घोषणा को स्वीकृति प्रदान करती है।
(iii) वह महाभियोग प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटा सकती है।
प्रश्न 2. सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों तथा कार्यों का विवेचन कीजिए।
अथवा
सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकारों का विवेचन कीजिए।
उत्तर- सर्वोच्च न्यायालय के कार्य व शक्तियाँ
अथवा
सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार
सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार एवं शक्तियों का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है-
(1) प्रारंभिक क्षेत्राधिकार- प्रारंभिक क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत वे विवाद आते हैं जो सीधे ही सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। ये विवाद हैं- (i) देश के नागरिकों के बीच (ii) दो या उससे अधिक राज्य सरकारों के बीच (iii) नागरिक और सरकारों के बीच तथा (iv) केन्द्र और राज्य सरकार के बीच।
(2) अपीलीय क्षेत्राधिकार- सर्वोच्च न्यायालय फौजदारी तथा दीवानी मामलों में अपील के लिए सर्वोच्च संस्था है। यह उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील की सुनवाई कर सकता है।
(3) परामर्श सम्बन्धी क्षेत्राधिकार- राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से कानून सम्बन्धी परामर्श लेने का अधिकार प्राप्त है, परन्तु राष्ट्रपति इसके द्वारा दिए गए परामर्श को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
(4) संविधान का संरक्षक- सर्वोच्च न्यायालय संविधान के संरक्षक के रूप में भी कार्य करता है। यदि संसद कोई ऐसा कानून पारित करती है या सरकार कोई ऐसा आदेश जारी करती है, जो संविधान की उल्लंघना करता हो तो सर्वोच्च न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।
(5) मौलिक अधिकारों का संरक्षक- सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में कार्य करता है। यदि किसी नागरिक के अधिकारों पर सरकार या किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण
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किया जाए, तो वह सर्वोच्च न्यायालय से संरक्षण मांग सकता है।
प्रश्न 3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता से आप क्या समझते हैं? भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को किस प्रकार सुनिश्चित किया गया है?
उत्तर- न्यायपालिका की स्वतंत्रता-न्यायपालिका की स्वतंत्रता से आशय है कि न्यायपालिका किसी व्यक्ति अथवा संस्था अर्थात् कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के प्रभाव या नियंत्रण में नहीं होगी। न्यायाधीश अपने निर्णय स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर प्रदान करेंगे।
भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता
भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को निम्न प्रकार सुनिश्चित किया गया है-
(1) न्यायाधीशों की नियुक्ति- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की सलाह पर की जाती है। व्यावहारिक तौर पर अब इस व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के नये न्यायाधीशों को चुनते हैं। इसमें राजनैतिक कार्यपालिका की दखल की गुंजाइश बेहद कम है।
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश को ही अमूमन मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है।
(2) कार्यकाल की सुरक्षा अथवा पद से हटाना- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने कार्यकाल तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। उन्हें केवल दुराचार या अयोग्यता के आधार पर संसद महाभियोग का प्रस्ताव पारित करके ही इससे पूर्व हटा सकती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दो-तिहाई बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित किया जाना आवश्यक है। इस प्रकार स्पष्ट है कि न्यायाधीशों के कार्यकाल को सुनिश्चित करके न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया गया है।
(3) न्यायपालिका के अधिकार- भारतीय न्यायपालिका के अधिकार एवं स्वतंत्रता उसे मौलिक अधिकारों के रक्षक के रूप में काम करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
प्रश्न 4. भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है? प्रधानमंत्री की प्रमुख शक्तियों तथा कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर- भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति- भारत में प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत दल के नेता या मिली-जुली पार्टियों के बहुमत प्राप्त नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।
भारत के प्रधानमंत्री की शक्तियाँ तथा कार्य
भारत के प्रधानमंत्री की प्रमुख शक्तियाँ तथा कार्य निम्नलिखित हैं-
(1) मंत्रिमण्डल का गठन- प्रधानमंत्री की सलाह पर ही राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। प्रधानमंत्री ही उन्हें विभिन्न मंत्रालय प्रदान करता है अर्थात् उन्हें विभाग प्रदान करता है। वह चाहे जब मंत्रिमण्डल में फेरबदल कर सकता है। यदि वह किसी मंत्री के कार्य से संतुष्ट न हो, तो वह उसे त्यागपत्र देने के लिए कह सकता है।
(2) मंत्रिमण्डल और राष्ट्रपति के मध्य कड़ी- प्रधानमंत्री मंत्रिमण्डल और राष्ट्रपति के मध्य कड़ी का काम करता है। वह मंत्रिमण्डल के निर्णयों की जानकारी तथा सरकार के अन्य सभी कार्यों की जानकारी राष्ट्रपति को देता है।
(3) लोकसभा, दल तथा राष्ट्र का नेता- प्रधानमंत्री लोक सभा का नेता होता है। वह लोकसभा में सरकार की नीतियों का आधिकारिक अधिवक्ता होता है। अपने दल की नीति निर्धारण में उसकी प्रमुख भूमिका होती है। प्रधानमंत्री अंतर्राष्ट्रीय जगत में राष्ट्र का नेतृत्व करता है। वह राष्ट्र का नेता होता है। देश की जनता उसके विचारों को ध्यानपूर्वक सुनती है।
(4) प्रमुख नीति का निर्धारक- प्रधानमंत्री विदेश नीति के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह देश की आन्तरिक या बाह्य नीतियों का भी निर्धारण करता है।
प्रश्न 5. राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियों और अधिकारों का वर्णन कीजिये।
उत्तर- राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियाँ और अधिकार
राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियाँ व अधिकार निम्नलिखित हैं-
(1) कार्यपालिका सम्बन्धी शक्तियाँ- राष्ट्रपति देश का मुखिया होता है। देश का प्रशासन उसी के नाम पर चलाया जाता है। सभी निर्देश उसी के नाम पर जारी होते हैं।
वह प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है। उसे लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन के नेता को