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📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 16: [राजनीति] लोकतांत्रिक अधिकार

Democratic Rights

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (RBSE) 📘 लोकतांत्रिक राजनीति-1 सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Democratic Rights

[राजनीति] लोकतांत्रिक अधिकार

प्रधानमंत्री नियुक्त करना होता है। लेकिन जब किसी पार्टी या गठबंधन को लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं होता तो राष्ट्रपति अपने विवेक से काम लेता है और वह ऐसे नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जो उसकी राय में लोकसभा में बहुमत जुटा सकता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। वह उन्हें पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलवाता है। आवश्यकता पड़ने पर प्रधानमंत्री तथा अन्य मंत्री अपना त्यागपत्र उसे सौंपते हैं। दूसरे, सभी प्रमुख नियुक्तियाँ राष्ट्रपति के नाम पर ही होती हैं। वह भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, राज्यपालों, चुनाव आयुक्तों और दूसरे देशों के राजदूतों आदि को नियुक्त करता है।

(ख) ईसाई मिशनों द्वारा मिशनरी स्कूलों की श्रृंखला चलाना।
(ग) सरकारी नौकरी में औरत और मर्द को समान वेतन मिलना।
(घ) बच्चों द्वारा मां-बाप की संपत्ति विरासत में पाना।

उत्तर - (घ) बच्चों द्वारा मां-बाप की संपत्ति विरासत में पाना।

प्रश्न 2. इनमें से कौन-सी स्वतंत्रता भारतीय नागरिकों को नहीं है?
(क) सरकार की आलोचना की स्वतंत्रता
(ख) सशस्त्र विद्रोह में भाग लेने की स्वतंत्रता
(ग) सरकार बदलने के लिए आंदोलन शुरू करने

और दूसरे देशों के राजदूतों आदि को नियुक्त करता है। सभी अन्तर्राष्ट्रीय संधियाँ और समझौते उसी के नाम से होते हैं। भारत के रक्षा बलों का सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति ही होता है। लेकिन राष्ट्रपति अपने इन अधिकारों का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही करता है। वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर पुनर्विचार के लिए कह सकता है। लेकिन यदि वही सलाह दोबारा उसे मिलती है तो वह उसे मानने के लिए बाध्य होता है।

(2) विधायिका सम्बन्धी शक्तियाँ- राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के अधिवेशन बुलाता है। वह दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के लिए निर्देश देता है। वह प्रधानमंत्री के परामर्श पर लोकसभा को अवधि समाप्त होने से पहले ही भंग कर सकता है। राज्य सभा के 12 सदस्यों को वह मनोनीत करता है। किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है। वह किसी विधेयक को पुनर्विचार के लिए एक बार संसद के पास लौटा सकता है।

(ग) सरकार बदलने के लिए आंदोलन शुरू करने की स्वतंत्रता

उत्तर-(ख) सशस्त्र विद्रोह में भाग लेने की स्वतंत्रता।

प्रश्न 3. भारतीय संविधान इनमें से कौन-सा अधिकार देता है?
(क) काम का अधिकार
(ख) पर्याप्त जीविका का अधिकार
(ग) अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार
(घ) निजता का अधिकार

उत्तर-(ग) अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार।

प्रश्न 4. उस मौलिक अधिकार का नाम बताएँ जिसके तहत निम्नलिखित स्वतंत्रताएँ आती हैं-
(क) अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता
(ख) जीवन का अधिकार
(ग) छुआछूत की समाप्ति
(घ) बेगार पर प्रतिबंध

है। वह किसी विधेयक को पुनर्विचार के लिए एक बार संसद के पास लौटा सकता है।

(3) परामर्श सम्बन्धी अधिकार-राष्ट्रपति संविधान के किसी अनुच्छेद के सम्बन्ध में न्यायपालिका से परामर्श मांग सकता है। लेकिन राष्ट्रपति के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह न्यायपालिका के परामर्श को स्वीकार करे या न करे।

5. लोकतांत्रिक अधिकार


पाठ्यपुस्तक के प्रश्न


प्रश्न 1. इनमें से कौन-सा मौलिक अधिकारों के उपयोग का उदाहरण नहीं है?
(क) बिहार के मजदूरों का पंजाब के खेतों में काम करने जाना।


(ग) छुआछूत की समाप्ति
(घ) बेगार पर प्रतिबंध

उत्तर-(क) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

(ख) स्वतंत्रता का अधिकार
(ग) समानता का अधिकार
(घ) शोषण के विरुद्ध अधिकार।

प्रश्न 5. लोकतंत्र और अधिकारों के बीच संबंधों के बारे में इनमें से कौन-सा बयान ज्यादा उचित है? अपनी पसंद के पक्ष में कारण बताएँ।
(क) हर लोकतांत्रिक देश अपने नागरिकों को अधिकार देता है।
(ख) अपने नागरिकों को अधिकार देने वाला हर देश लोकतांत्रिक है।
(ग) अधिकार देना अच्छा है, पर यह लोकतंत्र के लिए जरूरी नहीं है।

उत्तर-(क) यह सर्वाधिक उपयुक्त कथन है, क्योंकि लोकतांत्रिक देश में वहाँ के नागरिकों को उनके कुछ अधिकारों की गारंटी दी जाती है। कई बार लोगों के पास गैर-लोकतांत्रिक देश में भी कुछ अधिकार हो सकते हैं। अतः इस आधार पर उन्हें लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता।

प्रश्न 6. स्वतंत्रता के अधिकार पर ये पाबंदियाँ क्या उचित हैं? अपने जवाब के पक्ष में कारण बताएँ।
(क) भारतीय नागरिकों को सुरक्षा कारणों से कुछ सीमावर्ती इलाकों में जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
(ख) स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए कुछ इलाकों में बाहरी लोगों को संपत्ति खरीदने की | प्रश्न 7. मनोज एक सरकारी दफ्तर में मैनेजर के पद के लिए आवेदन देने गया। वहाँ के किरानी ने उसका आवेदन लेने से मना कर दिया और कहा, 'झाड़ लगाने वाले का बेटा होकर तुम मैनेजर बनना चाहते हो। तुम्हारी जाति का कोई कभी इस पद पर आया है? नगरपालिका के दफ्तर जाओ और सफ़ाई कर्मचारी के लिए अर्जी दो।' इस मामले में मनोज के किस मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है? मनोज की तरफ से जिला अधिकारी के नाम लिखे एक पत्र में इसका उल्लेख करो।
उत्तर- |

| | दिनांक 06/04/20XX

कुछ इलाकों में बाहरी लोगों को संपत्ति खरीदने की
अनुमति नहीं है।
( ग ) शासक दल को अगले चुनाव में नुकसान
पहुँचा सकने वाली किताब पर सरकार प्रतिबंध
लगाती है।

उत्तर-(क) देश की सुरक्षा, जनता की सुरक्षा

है। यदि सरकार इसको देखते हुये कुछ संवेदनशील
सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के घूमने पर प्रतिबंध लगाती है
तो यह सर्वथा उचित है। क्योंकि, इससे न केवल
संबंधित व्यक्ति/व्यक्तियों की सुरक्षा को खतरा हो
सकता है, बल्कि इसका फायदा उठाकर राष्ट्रविरोधी
गतिविधियों में शामिल लोग दुश्मन से सूचनाओं का
आदान-प्रदान भी कर सकते हैं। साथ ही, इस तरह की
स्वतंत्रता से सीमा के आर-पार अवैध व्यापार तथा
घुसपैठ को बढ़ावा मिल सकता है।

(ख) नागरिकों को संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता
के अन्तर्गत देश में कहीं भी बस जाने की स्वतंत्रता भी
है। किंतु, यदि सरकार स्थानीय लोगों के हित में यह

06/04/20XX

सेवा में,
जिला कलेक्टर,
.....................................
.............................

विषय-मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में
श्रीमान्,

नम्न आवेदन है कि मैं मनोज, पुत्र श्री..................
निवासी ............ दिनांक 5-4-20XX को .................
के सरकारी दफ्तर में मैनेजर के पद के लिए आवेदन देने
गया। वहाँ संबंधित किरानी ने आवेदन लेने से मना कर
दिया जबकि मैं उक्त पद हेतु समस्त योग्यताओं को पूरा
करता हूँ। उन्होंने मुझे जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल द्वारा
अपमानित किया।

श्रीमान् हमारे संविधान में नागरिकों को विभिन्न
मौलिक अधिकार दिये गये हैं। उपर्युक्त घटना में हमारे
'अवसर की समानता' के अधिकार का उल्लंघन हुआ
है। साथ ही संविधान के उपबंध के तहत अस्पृश्यता का

के अन्तर्गत देश में कहीं भी बस जाने की स्वतंत्रता भी है। किंतु, यदि सरकार स्थानीय लोगों के हित में यह फैसला लेती है कि कोई बाहरी व्यक्ति किसी विशेष क्षेत्र में संपत्ति नहीं खरीद सकता, तो यह उचित ही है। ऐसा वह वहाँ के लोगों की विशेष सांस्कृतिक पहचान को बनाये रखने के लिये करती है।

(ग) लोगों को संविधान के अन्तर्गत अपने विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है और किताब विचार व्यक्त करने का एक माध्यम है। शर्त यह है कि ऐसे विचार समाज विरोधी अथवा राष्ट्र विरोधी न हों। किंतु यदि सरकार सिर्फ इस कारण से किताब के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाती है कि यह उसकी पार्टी के विरोध में है अथवा आगामी चुनाव में उसकी पार्टी पर इसका प्रभाव पड़ सकता है, तो यह सरासर गलत है। क्योंकि, इससे व्यक्ति के स्वतंत्रता के अधिकार का हनन होता है।

'अवसर की समानता' के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। साथ ही संविधान के उपबंध के तहत अस्पृश्यता का अंत किया गया है, किंतु मेरे साथ अस्पृश्य व्यवहार किया गया है।

अतः श्रीमान् से साग्रह निवेदन है कि आवश्यक कदम उठाते हुये हमारे अधिकारों की रक्षा हेतु संबंधित अधिकारी को इस पद के लिए मेरा आवेदन स्वीकार करने का आदेश दें। इसके लिये हमेशा श्रीमान् का आभारी रहूँगा।

प्रार्थी
मनोज

प्रश्न 8. जब मधुरिमा संपत्ति के पंजीकरण वाले दफ्तर में गई तो रजिस्ट्रार ने कहा, "आप अपना नाम मधुरिमा बनर्जी, बेटी ए. के. बनर्जी नहीं लिख सकतीं। आप शादीशुदा हैं और आपको अपने पति का ही नाम

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इसके लिये हम वनवासी सदैव श्रीमान् के आभारी रहेंगे।
भवदीय
वनवासी
............क्षेत्र
सरकार का पक्ष
क्षेत्र के विकास तथा वन्य जीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये सरकार ने यह फैसला किया है कि सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी वन्यजीव अभयारण्य तथा पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रों से वनवासियों को विस्थापित कर कहीं और उनका पुनर्वास किया जाये। इससे न केवल वन्यजीवों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में विकास कार्यों द्वारा यहाँ के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा

तरह का रिवाज पुरुष-प्रधानता का सूचक है। यह महिला-पुरुष समानता के विचार का भी विरोधी है। यह महिला स्वतंत्रता की भावना के विरुद्ध है।

प्रश्न 9. मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के पिपरिया में हजारों आदिवासी और जंगल में रहने वाले लोग सतपुड़ा राष्ट्रीय पार्क, बोरी वन्यजीव अभयारण्य और पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य से अपने प्रस्तावित विस्थापन का विरोध करने के लिए जमा हुए। उनका कहना था कि यह विस्थापन उनकी जीविका और उनके विश्वासों पर हमला है। सरकार का दावा है कि इलाके के विकास और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनका विस्थापन जरूरी है। जंगल पर आधारित जीवन जीने वाले की तरफ से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक पत्र, इस मसले पर सरकार द्वारा दिया जा सकने वाला संभावित जवाब और इस मामले पर मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट तैयार करो।

उत्तर-सेवा में,

अध्यक्ष,
विकास कार्यों द्वारा यहाँ के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से भी जोड़ा जा सकेगा। इनके लिये स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, आवास आदि जैसी मौलिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा सकेंगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान तथा बोरी एवं पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रों से लोगों के विस्थापन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को देखते हुये आयोग ने सरकार के इस कदम पर आपत्ति उठाई है। आयोग का कहना है कि सरकार पहले उनके जीविका तथा पुनर्वास की व्यवस्था करे फिर इस तरह के कदम उठाये। इन लोगों की जीविका वनों से चलती है। विस्थापन की स्थिति में हजारों परिवार प्रभावित होंगे। न केवल उनकी जीविका छिनेगी, बल्कि उनकी मान्यताओं तथा परंपराओं पर भी प्रभाव पड़ेगा। अतः सरकार एक समिति बनाकर पहले इससे जुड़ी सभी समस्याओं की जानकारी ले, फिर अन्य आवश्यक कदम उठाए, ताकि उनके मानवीय अधिकारों का हनन न हो।

प्रश्न 10. इस अध्याय में पढ़े विभिन्न अधिकारों

उत्तर-सेवा में,

अध्यक्ष,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली
महोदय,
निवेदन है कि हम वनवासी लोग सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी वन्यजीव अभयारण्य तथा पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रों में सैकड़ों वर्षों से रहते आ रहे हैं। हम वनवासियों की हर गतिविधि वन से जुड़ी हुई है। हमारी जीविका का मुख्य स्रोत वन हैं। इन वनों से हमारी परम्पराएँ तथा मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं।
आज सरकार विकास तथा वन्य जीवों की सुरक्षा के नाम पर हमें यहाँ से विस्थापित करना चाहती है। इससे हमारा जीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
अतः श्रीमान् से साग्रह निवेदन है कि हमारी समस्याओं को ध्यान में रखते हुये हमें न्याय दिलाएँ।

प्रश्न 10. इस अध्याय में पढ़े विभिन्न अधिकारों को आपस में जोड़ने वाला एक मकड़जाल बनाएँ। जैसे-आने-जाने की स्वतंत्रता का अधिकार तथा पेशा चुनने की स्वतंत्रता का अधिकार आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसका एक कारण है कि आने-जाने की स्वतंत्रता के चलते व्यक्ति अपने शहर या गांव के अन्दर ही नहीं, दूसरे गांव, दूसरे शहर और दूसरे राज्य तक जाकर काम कर सकता है। इसी प्रकार इस अधिकार को तीर्थटन से जोड़ा जा सकता है जो किसी व्यक्ति द्वारा अपने धर्म का अनुसरण करने की आजादी से जुड़ा है। आप इस मकड़जाल को बनाएँ और तीर के निशानों से बताएं कि कौन-से अधिकार आपस में जुड़े हैं। हर तीर के साथ सम्बन्ध बताने वाला एक उदाहरण भी दें।

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उत्तर -

Flowchart of Fundamental Rights
Flowchart of Fundamental Rights

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न -

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौनसा अधिकार भारतीय संविधान में अब मूल अधिकार नहीं है परन्तु संवैधानिक अधिकार है-
(अ) समानता का अधिकार
(ब) स्वतंत्रता का अधिकार
(स) सम्पत्ति का अधिकार
(द) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

प्रश्न 2. 'सरकार किसी से भी उसके धर्म, जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती।' यह कथन निम्न में से किस मूल अधिकार से संबंधित है-
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार
(ब) समानता का अधिकार
(स) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(द) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

प्रश्न 3. 'छुआछूत एक दंडनीय अपराध है।' यह किस मूल अधिकार से संबंधित है-
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार
(ब) शिक्षा व संस्कृति का अधिकार
(स) समानता का अधिकार
(द) शोषण के विरुद्ध अधिकार

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौनसा शोषण के विरुद्ध अधिकार से संबंधित नहीं है-
(अ) मनुष्य जाति के अवैध व्यापार का निषेध
(ब) किसी किस्म के बेगार या जबरन काम लेने का निषेध
(स) बाल मजदूरी का निषेध
(द) छुआछूत का निषेध

प्रश्न 5. डॉ. अंबेडकर ने किस मूल अधिकार को हमारे संविधान की आत्मा और हृदय कहा है-
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार
(ब) समानता का अधिकार
(स) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(द) संवैधानिक उपचारों का अधिकार

प्रश्न 6. भारत में कानून द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई-
(अ) 19901990 में
(ब) 19911991 में
(स) 19921992 में
(द) 19931993 में

प्रश्न 7. सर्वोच्च न्यायालय ने भोजन के अधिकार को निम्न में से किस अधिकार का हिस्सा माना है-
(अ) जीवन का अधिकार
(ब) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(स) समानता का अधिकार
(द) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

उत्तरमाला- 1. (स) 2. (ब) 3. (स) 4. (द) 5. (द) 6. (द) 7. (अ)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

  1. ........................ में एक वंश का शासन चलता है। (सऊदी अरब/पाकिस्तान)
  2. ........................ लोगों के तार्किक दावे हैं, इन्हें समाज से स्वीकृति और अदालतों द्वारा मान्यता मिली होती है। (अधिकार/कर्तव्य)
  3. संविधान ने ........................ को दण्डनीय अपराध घोषित किया है। (आरक्षण/छुआछूत)
  4. ........................ शासन वह है जहाँ किसी भी धर्म को अधिकारिक धर्म की मान्यता नहीं होती। (धार्मिक/धर्मनिरपेक्ष)

उत्तर- 1. सऊदी अरब 2. अधिकार 3. छुआछूत 4. धर्मनिरपेक्ष।

निम्न कथनों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये-

  1. सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकार लागू कराने के मामले में रिट जारी करने का अधिकार है।
  2. अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद का शैक्षिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार नहीं है।
  3. हमारा संविधान किसी किस्म के 'बेगार या जबरन' काम लेने का निषेध करता है।
  4. किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाने की स्वतन्त्रता नहीं है।

उत्तर- 1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. असत्य।

स्तंभ 'अ' को स्तंभ 'ब' से सुमेलित कीजिए-

स्तंभ (अ) स्तंभ (ब)
(1) निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा (a) जीवन का अधिकार
(2) अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा (b) समानता का अधिकार
(3) कानून का शासन (c) स्वतंत्रता का अधिकार
(4) बालश्रम और बेगारी पर रोक (d) संस्कृति एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार
(5) भोजन का अधिकार (e) शोषण के विरुद्ध अधिकार

उत्तर- 1. (c) 2. (d) 3. (b) 4. (e) 5. (a)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. गुआंतानामो बे किस बात को लेकर चर्चा में थी?

उत्तर- क्यूबा के नजदीक स्थित गुआंतानामो बे टापू पर अमेरिकी नौ सेना का नियंत्रण है, यहाँ पर अमेरिका ने लगभग 600 लोगों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पकड़कर जेल में डाल दिया था।

प्रश्न 2. 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर- यह स्वयंसेवकों का अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो मानवाधिकारों के लिये अभियान चलाता है तथा दुनियाभर में मानवाधिकारों की अवहेलना पर स्वतंत्र रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

प्रश्न 3. किस संस्था ने यह रिपोर्ट दी कि गुआंतानामो बे की जेल में कैदियों को प्रताड़ित किया जा रहा है?

उत्तर- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने।

प्रश्न 4. पुराने यूगोस्लाविया के किस प्रान्त में किस वर्ष जातीय नरसंहार हुआ?

उत्तर- कोसोवो प्रान्त में, सन् 1999 ई. में।

प्रश्न 5. मौलिक अधिकार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- कुछ ऐसे अधिकार हैं जो हमारे जीवन के लिये मूलभूत एवं प्रभावशक्त हैं, उन्हें संविधान में विशेष स्थान दिया है। इन्हीं अधिकारों को मौलिक अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 6. किन्हीं तीन बुराइयों का वर्णन करें, जिन्हें शोषण के विरुद्ध अधिकार के अन्तर्गत गैर-कानूनी घोषित किया गया है।

उत्तर- (i) मनुष्यों का अवैध व्यापार (ii) बेगार श्रम (iii) बाल मजदूरी।

प्रश्न 7. 'जीवन के अधिकार' या 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का क्या अभिप्राय है?

उत्तर- किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के अधिकार या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी तरीके से वंचित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 8. 'बंधुआ मजदूर' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- जब बेगारी किसी मजदूर को जीवन भर के लिये करनी पड़ती है तो उसे 'बंधुआ मजदूर' कहा जाता है।

प्रश्न 9. 'रिट' क्या है?

उत्तर- यह एक आधिकारिक दस्तावेज है जिसमें सरकार के लिये अदालती आदेश होता है। यह उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किया जाता है।

प्रश्न 10. 'PIL' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- 'PIL' या जनहित याचिका के अन्तर्गत कोई नागरिक या नागरिकों का समूह किसी विशेष कानून या सरकारी कार्रवाई के विरुद्ध जनहित की सुरक्षा हेतु सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय से संपर्क कर सकता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. लोकतांत्रिक सरकार के तीन बुनियादी तत्व कौनसे हैं?

उत्तर- लोकतांत्रिक सरकार के तीन बुनियादी तत्व निम्नलिखित हैं-

(i) लोकतांत्रिक सरकार का निर्धारित अवधि में लोगों द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से निर्वाचित होना।
(ii) लोकतांत्रिक सरकार को कुछ ऐसी संस्थाओं के ऊपर निर्भर होना चाहिए जो निर्धारित कायदे-कानून के अनुसार कार्य करे।

(iii) नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का होना।

प्रश्न 2. भारतीय संविधान द्वारा आश्वासित अधिकारों को मूल अधिकार क्यों कहते हैं?

उत्तर- भारतीय संविधान द्वारा आश्वासित अधिकारों को मूल अधिकार इसलिये कहते हैं, क्योंकि-

(i) ये अधिकार नागरिकों के सम्पूर्ण विकास के लिये आवश्यक होते हैं।
(ii) ये अधिकार संविधान द्वारा सभी नागरिकों को दिये गये हैं और कोई भी सरकार इन्हें रद्द नहीं कर सकती।
(iii) ये लोकतंत्र की धुरी हैं।
(iv) ये कानून के न्यायालयों में लागू किये जाते हैं।

प्रश्न 3. कानून के शासन की व्याख्या कीजिये।

उत्तर-(i) 'कानून के शासन' का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। इस आधार पर किसी राजनेता या सरकारी अधिकारी या एक साधारण नागरिक के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

(ii) प्रत्येक नागरिक, प्रधानमंत्री से लेकर दूर-दराज के गाँव के एक गरीब नागरिक तक सभी पर समान कानून लागू होता है।
(iii) कोई भी व्यक्ति कानूनी तौर पर किसी खास व्यवहार का दावा नहीं कर सकता, चाहे वह कितना ही महत्त्वपूर्ण व्यक्ति क्यों न हो।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. अधिकार क्या हैं? लोकतंत्र में अधिकारों की क्या जरूरत है?

उत्तर- अधिकार से आशय-अधिकार लोगों के तार्किक दावे हैं, इन्हें समाज से स्वीकृति और अदालतों द्वारा मान्यता मिली होती है।

लोकतंत्र में अधिकारों की आवश्यकता-(i) लोकतंत्र की स्थापना के लिए अधिकारों का होना आवश्यक है। इस हेतु लोकतंत्र में हर नागरिक को वोट देने और चुनाव लड़कर प्रतिनिधि चुने जाने के अधिकार का होना आवश्यक है। इसके साथ ही लोकतांत्रिक चुनाव हों इसके लिए भी लोगों को अपने विचारों को व्यक्त करने की, राजनैतिक पार्टी बनाने और राजनैतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता का होना आवश्यक है।
(ii) लोकतंत्र में अधिकार बहुसंख्यकों के दमन से अल्पसंख्यकों की रक्षा करते हैं।
(iii) अधिकार बहुमत द्वारा अल्पमत पर प्रभुत्व कायम करने के कारण स्थितियों के बिगड़ने पर एक तरह की गारन्टी जैसे हैं।

प्रश्न 2. एमनेस्टी इंटरनेशनल क्या है? गुआन्तानामो 'बे' में इसने क्या सूचनाएँ एकत्र की थीं?

उत्तर- एमनेस्टी इंटरनेशनल-एमनेस्टी इंटरनेशनल मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है। यह संगठन दुनिया भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर स्वतंत्र रिपोर्ट जारी करता है। गुआन्तानामो बे के कैदियों की स्थितियों के बारे में इसने निम्न सूचनाएँ एकत्र कीं-

(1) इसने बताया कि इन कैदियों के साथ ज्यादती की जा रही है।
(2) उनके साथ अमेरिकी कानूनों के अनुसार भी व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
(3) अनेक कैदियों ने भूख हड़ताल करके इन स्थितियों के खिलाफ विरोध करना चाहा पर उनको जबरन खिलाया गया या नाक के रास्ते उनके पेट में भोजन पहुँचाया गया।
(4) जिन कैदियों को आधिकारिक रूप से निर्दोष करार दिया गया था, उनको भी नहीं छोड़ा गया।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा करायी गई एक स्वतंत्र जाँच में भी इन बातों की पुष्टि हुई।

प्रश्न 3. NHRC के बारे में आप क्या जानते हैं? इसकी शक्तियों के बारे में संक्षिप्त में लिखिये।

उत्तर-(1) NHRC या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) एक स्वतंत्र आयोग है जिसकी स्थापना 19931993 में की गई थी।

(2) इस आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इसमें अवकाश प्राप्त न्यायाधीश, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक शामिल होते हैं। इसकी प्रमुख शक्तियाँ ये हैं-
(i) यह किसी अन्य अदालत की तरह सम्मन जारी कर सकता है।
(ii) यह किसी भी सरकारी अधिकारी से पूछताछ कर सकता है तथा आधिकारिक दस्तावेजों की माँग कर सकता है।
(iii) यह किसी भी जेल का निरीक्षण कर सकता है तथा कार्य-स्थल पर जाँच के लिये अपने दल भेज सकता है।

प्रश्न 4. मूल अधिकारों की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर- मूल अधिकारों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) सार्वभौमिक- ये अधिकार सार्वभौमिक हैं अर्थात् ये बिना किसी भेदभाव के भारत के सभी नागरिकों के लिये हैं।
(2) प्रतिबंध- हमारे अधिकार पूर्ण नहीं हैं। प्रत्येक अधिकार पर कुछ प्रतिबंध लगाये गये हैं।
(3) न्यायपूर्ण- मूल अधिकार न्यायपूर्ण हैं अर्थात् यदि कोई व्यक्ति अथवा सरकार उसके अधिकारों का उल्लंघन करती है तो नागरिक न्यायालय की शरण में जा सकते हैं।
(4) व्यापक- ये अधिकार व्यापक होते हैं। वे हमारे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक हितों की सुरक्षा करते हैं।


(5) रोक के योग्य - राष्ट्रीय आपातकालीन स्थिति में इन अधिकारों को रोका जा सकता है।

(6) लोकतंत्र का आधार - इन अधिकारों को हमारे लोकतंत्र का आधार माना जाता है।

निबन्धात्मक प्रश्न -

प्रश्न 1. मूल अधिकारों का विस्तार से उल्लेख करें जो संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये गये हैं।
अथवा
मौलिक अधिकार किसे कहते हैं? भारतीय संविधान द्वारा आपको प्राप्त अधिकारों का वर्णन कीजिये।

उत्तर - मूल अधिकार से आशय - कुछ ऐसे अधिकार जो हमारे जीवन के लिए मूलभूत एवं परम आवश्यक हैं और उन्हें संविधान में विशेष स्थान दिया गया है। इन्हीं अधिकारों को मौलिक अधिकार कहते हैं।

भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार
भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं -

(1) समानता का अधिकार - संविधान के अनुसार भारत में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार किसी से भी उसके धर्म, वंश, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं कर सकती। इनके आधार पर किसी को सार्वजनिक स्थलों के प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता तथा सरकार में किसी पद पर नियुक्ति या रोजगार के मामले में सभी को अवसर की समानता है।

(2) स्वतंत्रता का अधिकार - भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को छ: स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं। ये हैं - (i) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (ii) शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने की स्वतंत्रता (iii) संगठन और संघ बनाने की स्वतंत्रता (iv) देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता (v) देश के किसी भी भाग में बसने की स्वतंत्रता तथा (vi) कोई भी काम-धन्धा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।
किसी भी व्यक्ति को जीवन के अधिकार व निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जायेगा तथा सभी को निवारक नजरबंदी के अधिकार दिये गये हैं।

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार - संविधान ने कमजोर वर्ग के शोषण को समाप्त करने के लिए यह अधिकार प्रदान किया है कि (i) संविधान मनुष्य जाति के अवैध व्यापार का निषेध करता है। (ii) संविधान किसी किस्म की बेगार का निषेध करता है। (iii) संविधान बाल मजदूरी का भी निषेध करता है।

(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार - भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म मानने, उस पर आचरण करने और शांतिपूर्वक उसका प्रचार करने का अधिकार है।

(5) सांस्कृतिक और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार - नागरिकों को अपनी भाषा तथा संस्कृति को बचाने का अधिकार है। सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए धर्म के आधार पर निषेध नहीं किया जा सकता तथा सभी अल्पसंख्यकों को अपनी निजी शिक्षण संस्थाएँ खोलने का अधिकार है।

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार - संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अन्तर्गत उक्त मूल अधिकारों को न्यायालय में वादयोग्य बनाया गया है।

प्रश्न 2. भारतीय संविधान में वर्णित समानता के मूल अधिकार का विवेचन कीजिए।

उत्तर - समानता का अधिकार

(1) कानून के समक्ष समानता तथा कानून का समान संरक्षण - हमारा संविधान कहता है कि सरकार भारत में किसी व्यक्ति को कानून के सामने समानता या कानून के संरक्षण के मामले में समानता के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती।
इसका अभिप्राय यह है कि किसी व्यक्ति का दर्जा या पद चाहे जो हो, सब पर कानून समान रूप से लागू होता है। कोई भी व्यक्ति कानून के ऊपर नहीं है।
सरकार किसी से भी उसके धर्म, जाति, समुदाय, लिंग और जन्म स्थल के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती।

(2) सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश की समानता - दुकान, होटल और सिनेमाघरों जैसे सार्वजनिक स्थल में किसी के प्रवेश को रोका नहीं जा सकता। इसी प्रकार सार्वजनिक कुएं, तालाब, स्नान घाट, सड़क, खेल के मैदान और सार्वजनिक भवनों के इस्तेमाल से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता।

(3) सरकारी नौकरियों में अवसर की समानता - सरकार में किसी पद पर नियुक्ति या रोजगार के मामले में सभी नागरिकों को अवसर की समानता प्रदान करेगी। जाति, धर्म, वंश लिंग, जन्म स्थल के आधार पर किसी भी नागरिक को रोजगार के अयोग्य नहीं करार दिया जा सकता या उसके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

(4) आरक्षण की व्यवस्था - सरकार सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अवसर की समानता स्थापित करने की दृष्टि से विशेष सुविधाएं प्रदान कर सकती है। इस हेतु भारत सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था की है। अवसर की समानता सुनिश्चित करने के लिए ही आरक्षण की यह व्यवस्था की गई है। इसी दृष्टि से संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि इस तरह का आरक्षण समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है।

(5) छुआछूत का निषेध - समानता के अधिकार के अन्तर्गत संविधान में छुआछूत या अस्पृश्यता का निषेध किया गया है। संविधान ने इसे दंडनीय अपराध घोषित किया है।

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