The Story of Village Palampur
[अर्थशास्त्र] पालमपुर गाँव की कहानी
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अर्थशास्त्र
1. पालमपुर गाँव की कहानी
पाठगत प्रश्न/क्रियाकलाप
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प्रश्न-क्या सिंचाई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना आवश्यक है? क्यों?
उत्तर- भारत एक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था है तथा यहाँ अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है किन्तु भारत में अधिकांश कृषि मानसून पर निर्भर है। यहाँ सिंचाई सुविधाओं का अभाव है। भारत के कुल क्षेत्र का लगभग प्रतिशत भाग ही सिंचित है। अतः देश में कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने हेतु सिंचाई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना आवश्यक है ताकि जिस क्षेत्र में वर्ष में केवल एक फसल पैदा की जाती है, वहाँ सिंचाई के द्वारा वर्ष में दो या तीन फसलें पैदा करके उत्पादन में वृद्धि की जा सके। दूसरे, भारत में कुछ फसलों हेतु अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है अतः वहाँ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अति आवश्यक है। अतः निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि देश में सिंचाई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना आवश्यक है।
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प्रश्न 1. बहुविधि फसल प्रणाली और खेती की आधुनिक विधियों में क्या अन्तर है?
उत्तर- बहुविधि फसल प्रणाली और खेती की आधुनिक विधि में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
(1) बहुविधि फसल प्रणाली में वर्ष में किसी भूमि पर एक से अधिक फसलें पैदा की जाती हैं। उदाहरण के लिए बरसात में किसान ज्वार, बाजरा आदि उगाते हैं, अक्टूबर व दिसम्बर के बीच कृषक आलू की खेती करते हैं तथा सर्दी में वह कृषक गेहूँ उगाता है। इस प्रकार एक वर्ष में एक भूमि पर एक से अधिक फसलों का उत्पादन करने को बहुविधि फसल प्रणाली कहते हैं। दूसरी तरफ खेती की आधुनिक विधियों के अन्तर्गत एक ही फसल से अधिक मात्रा में अनाज पैदा किया जाता है क्योंकि इसमें रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों, उच्च उत्पादकता वाले बीजों एवं सिंचाई आदि का उपयोग किया जाता है।
(2) बहुविधि फसल प्रणाली में खेती की परम्परागत या आधुनिक किसी भी विधि का प्रयोग हो सकता है जबकि आधुनिक कृषि विधि में आधुनिक कृषि यंत्र, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाइयां तथा गहन सिंचाई का ही प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 2. आधुनिक कृषि विधियों को अपनाने वाले किसान के लिए आवश्यक कार्यशील पूँजी क्या है?
उत्तर- आधुनिक कृषि विधियाँ अपनाने वाले किसान के लिए रासायनिक खाद, कीटनाशक, उच्च उत्पादकता वाले बीज, दवाइयां, सिंचाई तथा मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी मुख्य कार्यशील पूँजी है।
प्रश्न 3. पहले की तुलना में कृषि की आधुनिक विधियों के लिए किसानों को अधिक नकद की जरूरत पड़ती है। क्यों?
उत्तर- पहले किसान परम्परागत विधियों का प्रयोग करते थे। इन परम्परागत विधियों में वे अपने ही बीजों का, पशुओं के गोबर से बनी खाद का प्रयोग करते थे तथा सिंचाई एवं अन्य कृषि कार्यों हेतु परम्परागत तकनीकों का उपयोग करते थे जिसमें बहुत कम नकद की आवश्यकता पड़ती थी।
वर्तमान में कृषि हेतु आधुनिक विधियों का प्रयोग किया जाता है जिसमें आधुनिक कृषि आगतों जैसे रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, उन्नत बीजों, ट्रैक्टर, थ्रेसर तथा अन्य आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। ये सभी आगतें कृषकों को बाजार से क्रय करनी पड़ती हैं जिसके कारण कृषकों को अधिक नकद की जरूरत पड़ती है।
अतः परम्परागत विधियों की तुलना में कृषि की आधुनिक विधियों के लिए कृषकों को अधिक नकद की आवश्यकता पड़ती है।
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प्रश्न 1. आधुनिक या परम्परागत या मिश्रित खेती की इन विधियों में से किसान किसका प्रयोग करते हैं? एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- वर्तमान में हमारे कृषक मिश्रित खेती का अधिक उपयोग करते हैं जिसमें आधुनिक एवं परम्परागत दोनों विधियाँ सम्मिलित होती हैं। इसका कारण यह है कि भारतीय कृषकों की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है तथा ज्यादातर कृषकों के पास छोटी-छोटी कृषि भूमि है। अतः वे सभी आधुनिक विधियों का उपयोग नहीं पाते। हाँ, वे उच्च उत्पादकता वाले बीजों, रासायनिक खाद आदि का सीमित मात्रा में उपयोग करते।
हैं। छोटे कृषक जुताई एवं कटाई हेतु भी परम्परागत विधियों का ही प्रयोग करते हैं। अतः हमारे कृषक मिश्रित खेती विधियों का प्रयोग करते हैं।
प्रश्न 2. सिंचाई के क्या स्रोत हैं?
उत्तर- भारत में सिंचाई के मुख्य स्रोत कुएँ, नलकूप, तालाब, नहरें तथा वर्षा का जल हैं।
प्रश्न 3. कृषि भूमि के कितने भाग में सिंचाई होती है?
( बहुत कम / लगभग आधी / अधिकांश / समस्त )
उत्तर- भारत में कृषि भूमि के लगभग आधे भाग पर सिंचाई होती है।
प्रश्न 4. किसान अपने लिए आवश्यक आगत कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर- किसान अपने लिए आवश्यक आगत बड़े कस्बे या शहर से प्राप्त करते हैं।
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प्रश्न- क्या आप इस बात से सहमत हैं कि पालमपुर में कृषि भूमि का वितरण असमान है? क्या भारत में भी ऐसी ही स्थिति है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर- हाँ, हम इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि पालमपुर में कृषि भूमि के वितरण में काफी असमानता है। पालमपुर गाँव में 450 परिवार निवास करते हैं जिनमें से 150 परिवारों के पास तो कृषि भूमि ही नहीं है तथा 240 परिवार ऐसे हैं जिनके पास हेक्टेयर या उससे कम कृषि भूमि है जबकि 60 परिवार ऐसे हैं जिनके पास हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है तथा इन 60 परिवारों में से कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके पास 10 हेक्टेयर से भी अधिक कृषि भूमि है।
पालमपुर की ही भाँति भारत में भी कृषि भूमि के वितरण में काफी असमानता पाई जाती है। भारत में कुल किसानों के लगभग 85 प्रतिशत किसान छोटे कृषक हैं जिनके पास छोटी-छोटी जोतें हैं तथा इन 85 प्रतिशत कृषकों के पास कृषि क्षेत्र का मात्र 44.6 प्रतिशत भाग ही है जबकि दूसरी तरफ कुल किसानों के 15 प्रतिशत किसान मझोले एवं बड़े कृषक हैं जिनके पास कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 55.4 प्रतिशत है। अतः भारत में कृषि भूमि के वितरण में काफी असमानता है।
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प्रश्न 1. किशोर की स्थायी पूँजी क्या है?
उत्तर- किशोर की स्थायी पूँजी भैंस तथा भैंसा गाड़ी है।
प्रश्न 2. क्या आप सोच सकते हैं कि उसकी कार्यशील पूँजी कितनी होगी?
उत्तर- किशोर को कार्यशील पूँजी की आवश्यकता भैंस हेतु चारे एवं भैंसागाड़ी की मरम्मत की व्यवस्था हेतु होती है जिसमें लगभग पाँच-छः हजार रुपये पर्याप्त होंगे। अतः किशोर की कार्यशील पूँजी लगभग पाँच-छः हजार रुपये होगी।
प्रश्न 3. किशोर कितनी उत्पादन क्रियाओं में लगा हुआ है?
उत्तर- किशोर दुग्ध उत्पादन एवं परिवहन सेवा कार्य में लगा हुआ है।
प्रश्न 4. क्या आप कह सकते हैं कि किशोर को पालमपुर की अच्छी सड़कों का लाभ हुआ है?
उत्तर- अच्छी सड़कों का किशोर को अत्यन्त लाभ हुआ है। अच्छी सड़कों के कारण वह आसानी से व शीघ्रता से वस्तुएँ निकट कस्बे तक ले जा सकता है तथा परिवहन सम्बन्धी अन्य कार्य भी आसानी से कर सकता है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में जनगणना के दौरान दस वर्ष में एक बार प्रत्येक गाँव का सर्वेक्षण किया जाता है। पालमपुर से सम्बन्धित सूचनाओं के आधार पर निम्न तालिका को भरिए :
( क ) अवस्थिति क्षेत्र
( ख ) गाँव का कुल क्षेत्र
( ग ) भूमि का उपयोग ( हेक्टेयर में )
| कृषि भूमि | भूमि जो कृषि के लिए उपलब्ध नहीं है (निवास स्थानों, सड़कों, तालाबों, चरागाहों आदि के क्षेत्र) |
|---|---|
| सिंचित | असिंचित |
( घ ) सुविधाएँ :
| शैक्षिक | |
| चिकित्सा | |
| बाजार | |
| बिजली पूर्ति | |
| संचार | |
| निकटतम कस्बा |
उत्तर-
( क ) अवस्थिति क्षेत्र- रायगंज से 3 किलोमीटर दूर।
( ख ) गाँव का कुल क्षेत्र- 226 हेक्टेयर।
( ग ) भूमि का उपयोग ( हेक्टेयर में )-
| कृषि भूमि | भूमि जो कृषि के लिए उपलब्ध नहीं है (निवास स्थानों, सड़कों, तालाबों, चरागाहों आदि के क्षेत्र) |
|---|---|
| सिंचित | असिंचित |
| 200 हे. | - |
( घ ) सुविधाएँ-
| शैक्षिक | 2 प्राथमिक विद्यालय, 1 हाई स्कूल |
|---|---|
| चिकित्सा | 1 राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1 निजी औषधालय |
| बाजार | स्थानीय छोटा बाजार, रायगंज तथा शाहपुर के बाजार |
| बिजली पूर्ति | अधिकांश घरों में उपलब्ध |
| संचार | अनुपलब्ध |
| निकटतम कस्बा | शाहपुर |
प्रश्न 2. खेती की आधुनिक विधियों के लिए ऐसे अधिक आगतों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर- यह कथन एकदम सत्य है कि खेती की आधुनिक विधियों के लिए ऐसी आगतों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है; कृषि की आधुनिक विधियों के अन्तर्गत जुताई हेतु ट्रैक्टर का उपयोग किया जाता है; कटाई हेतु हार्वेस्टर, थ्रेशर आदि का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त आधुनिक कृषि-विधियों में रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों आदि का प्रयोग किया जाता है, सिंचाई हेतु पम्प सेटों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक कृषि कई मशीनों का उपयोग किया जाता है तथा अन्य कई आगतों का उपयोग किया जाता है जिनका निर्माण उद्योगों में किया जाता है।
प्रश्न 3. पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की किस तरह मदद की?
उत्तर- पालमपुर गाँव में बिजली की पर्याप्त पूर्ति से कृषकों को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हुए। पालमपुर गाँव में अधिकांश घरों में बिजली है। पालमपुर गाँव में कृषकों को बिजली प्रसार का सबसे प्रमुख लाभ सिंचाई क्षेत्र में मिला, बिजली के प्रसार से पालमपुर गाँव की सिंचाई की पद्धति ही बदल गई। पालमपुर में बिजली के प्रसार से पूर्व किसान परम्परागत विधियों, जैसे-रहट से पानी निकालना आदि से सिंचाई करते थे, किन्तु बिजली के प्रसार के पश्चात् किसान बिजली से चलने वाले नलकूपों का उपयोग करने लगे। बिजली से चलने वाले नलकूपों के फलस्वरूप बहुत कम समय में अधिक क्षेत्र में सिंचाई होने लगी तथा पालमपुर का सम्पूर्ण क्षेत्र सिंचित हो गया।
सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र के सिंचित होने से कृषकों की आय में भी वृद्धि हुई, क्योंकि सिंचाई सुविधाओं में विस्तार से कृषक बहुविध फसल प्रणाली द्वारा पहले से अधिक पैदावार करने लगे।
प्रश्न 4. क्या सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है? क्यों?
उत्तर- ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित होती है अतः वहाँ सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बिना सिंचित क्षेत्र बढ़ाए उत्पादन वृद्धि करना संभव नहीं है। गाँव में सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना निम्न कारणों से महत्त्वपूर्ण है-
(1) कृषि में उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने हेतु सिंचित क्षेत्र का विस्तार करना अति आवश्यक है। कई क्षेत्रों में वर्षा अनियमित एवं अनिश्चित होती है अतः वहाँ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार महत्त्वपूर्ण है।
(2) देश के कई क्षेत्रों में वर्षा बहुत कम होती है तथा कई बार वर्षा होती ही नहीं है, ऐसी स्थिति में सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाना आवश्यक है।
(3) कई फसलें ऐसी होती हैं जिन्हें केवल वर्षा के आधार पर उत्पादित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनमें अधिक पानी की आवश्यकता होती है अतः सिंचाई सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।
(4) सिंचित क्षेत्र में विस्तार किए बिना कृषक बहुविध फसल प्रणाली नहीं अपना सकते हैं। अतः सिंचाई सुविधाओं में विस्तार कर वर्ष में कई फसलों का उत्पादन किया जा सकता है।
(5) कृषि क्षेत्र में हरित क्रान्ति के फलस्वरूप उच्च उत्पादकता वाले बीजों, रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का अधिक उपयोग किया जाने लगा परन्तु इनके प्रयोग हेतु पर्याप्त जल की आवश्यकता पड़ती है। अतः सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है।
प्रश्न 5. पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि के वितरण की एक सारणी बनाइए।
उत्तर- सारणी : पालमपुर गाँव की कृषि भूमि का वितरण
| कृषकों के प्रकार | परिवारों की संख्या | भूमि/जोत का आकार |
|---|---|---|
| भूमिहीन | 150 | भूमिहीन कृषक |
| छोटे कृषक | 240 | 2 हेक्टेयर से कम भूमि |
| मझोले एवं बड़े कृषक | 60 | 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि |
| कुल कृषक/परिवार | 450 |
पालमपुर में कुल 450 परिवार हैं जिनमें से 150 परिवारों के पास कोई भूमि नहीं है। वहाँ 240 परिवार छोटे किसानों के हैं जिनके पास हेक्टेयर से कम भूमि तथा 60 परिवार मझोले एवं बड़े किसानों के हैं जिनके पास हेक्टेयर से अधिक की भूमि जोतें हैं। पालमपुर में कुछ बड़े किसानों के पास 10 हेक्टेयर या इससे अधिक भूमि भी है।
प्रश्न 6. पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम क्यों है?
उत्तर—सरकार द्वारा खेतों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक दिन की न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये निर्धारित की है किन्तु पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों को इससे काफी कम मजदूरी मिलती है। इसका मुख्य कारण श्रमिकों की बहुत ज्यादा स्पर्धा है। पालमपुर में 240 परिवार छोटे कृषकों के हैं जो स्वयं खेतों में मजदूरी करते हैं तथा 150 परिवार भूमिहीन हैं तथा बड़े एवं मझोले कृषकों के 60 परिवार हैं जो खेतों पर किराए के श्रमिक लगाते हैं। अत: पालमपुर में श्रमिक अधिक हैं तथा रोजगार कम है। अतः उन श्रमिकों में अधिक स्पर्धा है तथा वे कम मजदूरी पर भी कार्य करने को तैयार हो जाते हैं।
प्रश्न 7. अपने क्षेत्र के दो श्रमिकों से बात कीजिए। खेतों में काम करने वाले या विनिर्माण कार्य में लगे मजदूरों में से किसी को चुनें। उन्हें कितनी मजदूरी मिलती है? क्या उन्हें नकद पैसा मिलता है या वस्तु रूप में? क्या उन्हें नियमित रूप से काम मिलता है? क्या वे कर्ज में हैं?
उत्तर—अपने क्षेत्र के खेती कार्य में लगे मजदूर एवं विनिर्माण कार्य में लगे मजदूर से बात करने के उपरान्त यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अधिकांश खेतिहर एवं विनिर्माण मजदूरों को काफी कम वेतन मिलता है। मजदूरी के रूप में उन्हें नकद अथवा अनाज अथवा दोनों मिलते हैं। खेतिहर मजदूर एवं विनिर्माण मजदूरों को पूरे साल नियमित कार्य नहीं मिलता, उन्हें बहुत थोड़े-थोड़े समय के लिए काम मिलता है तथा वे साल भर काम की तलाश में रहते हैं। पूरे समय के लिए नियमित कार्य न मिलने तथा कार्य की बहुत कम मजदूरी मिलने के कारण खेतिहर मजदूरों एवं विनिर्माण मजदूरों को अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी कर्ज लेना पड़ता है।
प्रश्न 8. एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग कौन से तरीके हैं? समझाने के लिए उदाहरणों का प्रयोग करें।
उत्तर—एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने की दो महत्वपूर्ण विधियाँ हैं-
(1) खेती की आधुनिक विधियाँ-कृषि भूमि पर आधुनिक विधियों से खेती करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। कृषि की आधुनिक विधियों में बिजली-चालित नलकूपों, ट्रैक्टर, थ्रेशर, विभिन्न कृषि उपकरणों, उच्च उत्पादकता वाले बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक का उपयोग किया जाता है। इन सब आधुनिक कृषि आगटों के उपयोग से एक ही कृषि भूमि पर पहले से काफी अधिक मात्रा में उत्पादन संभव हो पाया है। उदाहरण के लिए, भारत में 1960 के दशक में हरित क्रान्ति को अपनाया तथा इसके अन्तर्गत कई फसलों की उत्पादकता बढ़ाने हेतु उच्च उत्पादकता वाले बीजों (HYV) का प्रयोग किया गया। इन बीजों के उपयोग के फलस्वरूप उसी कृषि भूमि पर पहले की अपेक्षा काफी अधिक मात्रा में अनाज उत्पादित हुआ। भारत में पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश में कृषि के आधुनिक तरीकों से गेहूँ के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।
(2) बहुविध फसल प्रणाली-एक ही भूमि पर एक से अधिक फसल उगाने की प्रणाली को बहुविध फसल प्रणाली कहा जाता है। एक वर्ष में एक ही भूमि पर कई फसल उगाने से उत्पादन में वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग के गाँवों में कृषक बरसात के मौसम में ज्वार और बाजरा उगाते हैं, जिसका उपयोग वे पशुओं के चारे के रूप में करते हैं। इसके पश्चात् वे अक्टूबर और दिसम्बर के मध्य आलू की खेती करते हैं। सर्दी के मौसम में वे अपने खेतों में गेहूँ उगाते हैं तथा भूमि के एक भाग पर गन्ने की खेती करते हैं। इस प्रकार वहाँ के किसान एक ही भूमि पर एक वर्ष में कई खेती कर उत्पादन में वृद्धि करते हैं।
प्रश्न 9. एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के कार्य का ब्योरा दीजिए।
उत्तर—ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसानों की संख्या काफी अधिक होती है। एक हेक्टेयर भूमि वाला किसान अपनी भूमि पर श्रम का कार्य स्वयं ही करता है तथा उसकी आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण वह ऋण लेकर कृषि कार्य करता है, उसे कृषि आगटों के लिए ऋण लेना पड़ता है। एक हेक्टेयर भूमि के स्वामी के पास अपने खेत में पर्याप्त काम नहीं होता। अतः वह घर के अन्य कार्य भी करता है तथा कई बार बड़े किसानों के यहाँ मजदूर के रूप में भी कार्य करता है। एक हेक्टेयर भूमि का मालिक उस भूमि से अपने परिवार का पालन-पोषण नहीं कर पाता है। अतः वह अन्य गैर कृषि कार्य भी करता है, जैसे पशुपालन इत्यादि।
प्रश्न 10. मझोले और बड़े किसान कृषि से कैसे पूँजी प्राप्त करते हैं? वे छोटे किसानों से कैसे भिन्न हैं?
उत्तर—मझोले एवं बड़े किसान कृषि अधिशेष के द्वारा पूँजी प्राप्त करते हैं। मझोले एवं बड़े किसानों के पास अधिक जमीन होती है तथा उस पर अधिक उत्पादन होता है। ये किसान अपनी आवश्यकता का अनाज अपने पास रखकर शेष अतिरिक्त अनाज को बाजार में बेच देते हैं तथा इस धन को वे बैंक में जमा करा देते हैं। इस बचत को वे कई तरह से उपयोग में लेते हैं। कुछ धन तो वे अगले मौसम के लिए पूँजी की व्यवस्था के लिए बचा लेते हैं। कुछ धन से वे पशु, ट्रेक्टर, थ्रेशर आदि क्रय करते हैं, इसे हम गैर कृषि कार्यों के लिए पूँजी कहते हैं। शेष बचे धन को ये किसान छोटे किसानों को उधार देते हैं तथा उनसे ऊँचा ब्याज प्राप्त करते हैं।
छोटे किसानों के पास बहुत कम कृषि भूमि होती है तथा कई बार तो अपनी पारिवारिक आवश्यकता योग्य अनाज भी उत्पादित नहीं कर पाते। इन किसानों को अपनी अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े किसानों के यहाँ काम करना पड़ता है तथा उनसे ऋण भी लेना पड़ता है। अधिशेष के बारे में ये छोटे किसान सोच भी नहीं पाते हैं। अतः इनके पास कृषि उत्पादन से किसी प्रकार की पूँजी एकत्रित नहीं होती है।
प्रश्न 11. सविता को किन शर्तों पर तेजपाल सिंह से ऋण मिला है? क्या ब्याज की कम दर पर बैंक से कर्ज मिलने पर सविता की स्थिति अलग होती?
उत्तर—सविता एक लघु कृषक है तथा उसे अपनी जमीन पर खेती करने के लिए कई कृषि आगतों की आवश्यकता थी। अतः उसने कठोर शर्तों पर तेजपाल सिंह से ऋण लिया। तेजपाल सिंह ने बहुत ऊँची ब्याज दर अर्थात् प्रतिशत की दर पर ऋण दिया। साथ ही सविता को कटाई के मौसम में तेजपाल के खेतों पर श्रमिक के रूप में रु. प्रतिदिन मजदूरी पर कार्य करने की शर्त भी माननी पड़ी। अतः सविता को ऋण लेने हेतु तेजपाल की कई शोषणकारी शर्तों को मानना पड़ा।
यदि सविता को यही ऋण बैंक से प्राप्त होता तो उसकी स्थिति विपरीत होती। एक तो उसे बहुत कम ब्याज का भुगतान करना पड़ता जिससे उसकी आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता। इसके अतिरिक्त बैंक से ऋण लेने पर उसे बहुत कम मजदूरी पर दूसरे के खेतों पर काम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वह स्वयं का कार्य आराम से कर सकती थी तथा अपने पारिवारिक कामों को भी आसानी से पूरा कर लेती।
प्रश्न 12. अपने क्षेत्र के कुछ पुराने निवासियों से बात कीजिए और पिछले वर्षों में सिंचाई और उत्पादन के तरीकों में हुए परिवर्तनों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए (वैकल्पिक)।
उत्तर—अपने क्षेत्र के कई पुराने निवासियों एवं वृद्धजनों से चर्चा करने के पश्चात् मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि सिंचाई एवं उत्पादन के तरीकों में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। इन परिवर्तनों को हम निम्न प्रकार से स्पष्ट कर सकते हैं—
सिंचाई के तरीकों में परिवर्तन—पिछले वर्षों में सिंचाई के तरीकों में व्यापक परिवर्तन आया है। वर्ष पहले बिजली नहीं होती थी तथा किसान कुओं से रहट के माध्यम से पानी निकाल कर अपने खेतों की सिंचाई किया करते थे। पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास के फलस्वरूप गाँवों में बिजली से चलने वाले नलकूपों से ज्यादा प्रभावकारी ढंग से अधिक क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। अधिक सिंचाई सुविधाओं के आधार पर गाँवों में बहुविध फसल प्रणाली अपनाई जा रही है।
उत्पादन के तरीकों में परिवर्तन—विगत वर्षों में उत्पादन के तरीकों में भी व्यापक परिवर्तन हुए हैं। पहले परम्परागत तरीकों से खेती की जाती थी। कृषक बैलों से खेत जोतते थे तथा परम्परागत बीजों का उपयोग करते थे। वे खाद के रूप में गोबर की खाद या अन्य प्राकृतिक खाद काम में लेते थे तथा परम्परागत तरीकों से ही अनाज निकालते थे।
पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन के तरीकों में परिवर्तन आए हैं। जुताई हेतु ट्रेक्टर काम में लिए जाते हैं, बिजली चालित नलकूपों से सिंचाई होती है, रासायनिक उर्वरक काम में लिए जाते हैं, कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है, उच्च उत्पादकता वाले बीजों का उपयोग किया गया तथा अनाज निकालने हेतु भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक विधियों का उपयोग करने से उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि पुराने समय में कृषि कार्य में मानवीय श्रम की अधिकता थी जबकि वर्तमान समय में यांत्रिक श्रम अधिक काम आता है।
प्रश्न 13. आपके क्षेत्र में कौन से गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं? इसकी एक संक्षिप्त सूची बनाइए।
उत्तर—ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सबसे प्रमुख कार्य है तथा अधिकांश लोग कृषि कार्यों में लगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि उत्पादन कार्यों में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल की जाती हैं—
() डेयरी कार्य।
() लघु स्तरीय विनिर्माण कार्य, जैसे—मिट्टी के बर्तन बनाना, गुड़ बनाना, तेल मिल।
() छोटे दुकानदार।
() परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना, जैसे—रिक्शा, तांगा, जीप, ट्रक, ट्रेक्टर, बैलगाड़ी आदि।
() हस्तशिल्प कार्य, जैसे—बान, रस्सी, ढकोले आदि के निर्माण का कार्य आदि।
प्रश्न 14. गाँवों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारम्भ करने के लिए क्या किया जा सकता है?
उत्तर—ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारम्भ करने के लिए निम्न प्रयास किए जा सकते हैं -
(1) ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करवाना चाहिए ताकि वे अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारम्भ कर सकें।
(2) ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गैर-कृषि क्षेत्र में उपलब्ध कई रोजगार विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं रखते। अतः इन लोगों को विभिन्न गैर-कृषि कार्यों की जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
(3) ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का और अधिक विस्तार करना चाहिए जिससे लोगों को कई प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे तथा उद्योगों के विकास में भी मदद मिलेगी।
(4) ग्रामीण क्षेत्रों में आधारिक संरचना के विकास को बढ़ावा देना चाहिए ताकि अन्य लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना हो सके।
(5) ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ताकि वे स्वयं का कोई व्यवसाय प्रारम्भ कर सकें।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न—
भूमि के पश्चात् उत्पादन का दूसरा आवश्यक कारक है -
(अ) श्रम
(ब) पानी
(स) मानव
(द) उपर्युक्त में से कोई नहींग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं में सम्मिलित है -
(अ) पशुपालन
(ब) लघुस्तरीय विनिर्माण
(स) डेरी
(द) उपर्युक्त सभीनिम्न में से उत्पादन का प्रमुख साधन है -
(अ) भूमि
(ब) श्रम
(स) पूँजी
(द) उपर्युक्त सभीनिम्न में से कौनसी मद स्थायी पूँजी में सम्मिलित नहीं है -
(अ) मशीनें
(ब) कच्चा माल
(स) भवन
(द) औजार1960 के दशक के अन्त में प्रारम्भ की गई 'हरित क्रान्ति' का सम्बन्ध है -
(अ) पशुपालन से
(ब) मत्स्य पालन से
(स) कृषि क्षेत्र से
(द) लघु उद्योगों सेऔजार, मशीन, भवन आदि को शामिल किया जाता है -
(अ) स्थायी पूँजी में
(ब) कार्यशील पूँजी में
(स) मानव पूँजी में
(द) कृषि पूँजी मेंनिम्न में से कौनसी फसल खरीफ की है?
(अ) गेहूँ
(ब) बाजरा
(स) सरसों
(द) फल
उत्तरमाला—1. (अ) 2. (द) 3. (द) 4. (ब) 5. (स) 6. (अ) 7. (ब)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें—
औजार, मशीनों और भवनों का उत्पादन में कई वर्षों तक प्रयोग होता है और इन्हें...............कहा जाता है। (स्थायी पूँजी/कार्यशील पूँजी)
कच्चा माल व नकद पैसों को...............कहते हैं। (कार्यशील पूँजी/स्थायी पूँजी)
पालमपुर में...............उत्पादन की प्रमुख क्रिया है। (उद्योग/खेती)
एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को...............प्रणाली कहते हैं। (द्विविधि/बहुविधि फसल)
उत्तर—1. स्थायी पूँजी, 2. कार्यशील पूँजी, 3. खेती, 4. बहुविधि फसल।
निम्न वाक्यों में सत्य/असत्य कथन छाँटिए—
कच्चा माल व नकद पैसों को स्थायी पूँजी कहते हैं। ( )
पालमपुर में खेती उत्पादन की प्रमुख क्रिया है। ( )
भारत में पंजाब, हरियाणा और प. उत्तर प्रदेश के किसानों ने खेती के आधुनिक तरीकों का सबसे पहले प्रयोग किया। ( )
कृषि की आधुनिक पद्धतियों में अधिक पूँजी की आवश्यकता नहीं होती है। ( )
उत्तर—1. असत्य 2. सत्य 3. सत्य 4. असत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए—
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) भवन मशीन | (a) कार्यशील पूँजी |
| (ii) कच्चा माल | (b) स्थायी पूँजी |
| (iii) परिवहन, दुकानदारी | (c) कृषि क्रिया |
| (iv) खाद्यन्न उत्पादन | (d) गैर कृषि क्रियाएँ |
| (v) ज्वार, बाजरा | (e) खरीफ फसल |
उत्तर—(i) (b), (ii) (a), (iii) (d), (iv) (c), (v) (e)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश जनसंख्या किस कार्य में लगी हुई है?
उत्तर—ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है।
प्रश्न 2. ग्रामीण क्षेत्र की मुख्य गैर-कृषि उत्पादन गतिविधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर—ग्रामीण क्षेत्र में गैर-कृषि उत्पादन गतिविधियों में पशुपालन, लघुस्तरीय विनिर्माण कार्य, दुकानदारी, परिवहन इत्यादि प्रमुख हैं।
प्रश्न 3. स्थायी पूँजी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर—उत्पादन में औजार, मशीनें, भवन आदि का कई वर्षों तक प्रयोग होता है, इन्हें ही स्थायी भौतिक पूँजी कहा जाता है।
प्रश्न 4. भौतिक पूँजी को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर—भौतिक पूँजी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) स्थायी पूँजी (2) कार्यशील पूँजी।
प्रश्न 5. उत्पादन के कारक किसे कहते हैं?
उत्तर—उत्पादन भूमि, श्रम और पूँजी को संयोजित करके संगठित होता है, जिन्हें उत्पादन के कारक कहा जाता है।
प्रश्न 6. आधुनिक कृषि का प्रयोग सर्वप्रथम भारत के किन राज्यों में किया गया?
उत्तर—आधुनिक कृषि का प्रयोग सर्वप्रथम भारत के पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किया गया।
प्रश्न 7. बहुविध फसल प्रणाली किसे कहा जाता है?
उत्तर—एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को बहुविध फसल प्रणाली कहा जाता है।
प्रश्न 8. हरित क्रान्ति के अन्तर्गत अधिक उपज किस प्रकार संभव हुई?
उत्तर—हरित क्रान्ति के अन्तर्गत अधिक उपज केवल अति उपज प्रजातियों वाले बीजों, सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों आदि के संयोजन से ही संभव हो पाई।
प्रश्न 9. हरित क्रान्ति का एक दुष्प्रप्रभाव बताइए।
उत्तर—हरित क्रान्ति में अधिक रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरकता कम हो गई।
लघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. रासायनिक उर्वरकों से होने वाली हानियाँ बतलाइये।
उत्तर—रासायनिक उर्वरकों से निम्न हानियाँ हैं-
(1) रासायनिक उर्वरकों के खनिज पानी में खुलकर पौधों को तुरन्त उपलब्ध तो हो जाते हैं, लेकिन मिट्टी इन्हें लम्बे समय तक धारण नहीं कर पाती है।
(2) रासायनिक उर्वरक मिट्टी से निकलकर भौम जल, नदियों तथा तालाबों को प्रदूषित करते हैं।
(3) रासायनिक उर्वरक मिट्टी में उपस्थित जीवाणुओं तथा सूक्ष्म अवयवों को नष्ट कर सकते हैं।
(4) इनके प्रयोग के पश्चात् मिट्टी पहले की तुलना में कम उपजाऊ रह जाती है।
प्रश्न 2. पालमपुर में उत्पादन के एक साधन श्रम की क्या स्थिति है?
उत्तर—पालमपुर में श्रम की पूर्ति उत्पादन के अन्य साधनों की तुलना में सबसे अधिक प्रचुर है। लेकिन खेती में श्रमिकों का उपयोग सीमित है और अवसरों की तलाश में श्रमिक आस-पड़ोस के गाँवों, शहरों तथा कस्बों में जा रहे हैं। कुछ श्रमिकों ने गाँव में ही गैर-कृषि क्षेत्र में काम करना प्रारम्भ कर दिया है।
प्रश्न 3. भविष्य में गाँव में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं में वृद्धि क्यों आवश्यक है?
उत्तर—भविष्य में गाँव में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं में वृद्धि आवश्यक है क्योंकि-
(i) कृषि के विपरीत, गैर-कृषि कार्यों में कम भूमि की आवश्यकता होती है।
(ii) लोग कम पूँजी से भी गैर-कृषि कार्य आरम्भ कर सकते हैं।
प्रश्न 4. गाँव में गैर-कृषि कार्य प्रसार के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?
उत्तर—गाँव में गैर-कृषि कार्य प्रसार हेतु निम्न कार्यों को किया जाना आवश्यक है-(i) कर्ज, ब्याज की कम दर पर उपलब्ध हो, ताकि बिना बचत वाले लोग भी गैर-कृषि कार्य शुरू कर सकें।
(ii) ऐसे बाजार हों, जहाँ वस्तुएँ और सेवाएँ बेची जा सकें।
(iii) गाँव, कस्बों और शहरों से अच्छी सड़क, परिवहन और टेलीफोन से जुड़ें।
दीर्घउत्तरीयन प्रश्न—
प्रश्न 1. भौतिक पूँजी के अन्तर्गत कौन-कौनसी मदों को सम्मिलित किया जाता है?
उत्तर—भौतिक पूँजी उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। भौतिक पूँजी को निम्न दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
(1) स्थायी पूँजी-उत्पादन क्रिया में औजार, मशीनों तथा भवनों का कई वर्षों तक प्रयोग किया जाता है, जिसे स्थायी पूँजी कहते हैं।
(2) कार्यशील पूँजी-उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत कई प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता पड़ती है तथा व्यवसाय की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने
के लिए कुछ नकदी की आवश्यकता भी पड़ती है। अतः कच्चे माल एवं नकद को कार्यशील पूँजी कहा जाता है।
प्रश्न 2. ‘हरित क्रान्ति’ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-भारत में कृषि में क्रान्तिकारी परिवर्तनों हेतु 1960 के दशक के मध्य में हरित क्रान्ति की नीति अपनाई गई। इस नीति में कृषि के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करने हेतु कई आधुनिक विधियों को अपनाया गया। हरित क्रान्ति की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि इसमें उच्च उत्पादकता वाले (एच.वाई.वी.) बीजों का उपयोग किया गया। इस नीति में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग में वृद्धि हुई, साथ ही सिंचाई सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इन सबका कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
प्रश्न 3. कृषि जोतों के आधार पर कृषि भूमि के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-भारत में कृषि जोतों के आधार पर कृषि जोतों को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है -
(1) छोटी जोत-छोटी जोतों के अन्तर्गत उन जोतों को शामिल किया जाता है, जिनका आकार हेक्टेयर से कम होता है। यह छोटे कृषकों के पास होती है तथा देश की अधिकांश कृषि भूमि छोटी जोतों के अन्तर्गत ही आती है।
(2) मध्यम जोतें-मध्यम जोतों के अन्तर्गत वे कृषि भूमि आती हैं जिनका आकार हेक्टेयर से अधिक होता है किन्तु हेक्टेयर से कम होता है।
(3) वृहद् जोतें-बड़े जोतों के अन्तर्गत वे कृषि भूमि आती हैं जिनका आकार हेक्टेयर से अधिक होता है, यह जोतें ज्यादातर बड़े कृषकों के पास होती हैं।
प्रश्न 4. ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कृषकों की विभिन्न समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश छोटे कृषक हैं, उनके सम्मुख कई प्रकार की समस्याएँ हैं। इनमें निम्न मुख्य हैं -
(1) छोटे कृषकों के पास इतनी कम भूमि होती है कि वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाते अतः उन्हें अन्य बड़े कृषकों के यहाँ मजदूरी करनी पड़ती है तथा बड़े कृषकों द्वारा उन्हें अत्यन्त कम मजदूरी दी जाती है।
(2) वर्तमान में कृषि कार्यों हेतु अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पड़ती है अतः उन्हें साहूकारों एवं व्यापारियों से ऋण लेना पड़ता है तथा साहूकार एवं
व्यापारी अत्यधिक ब्याज लेते हैं तथा अन्य भी कई तरीकों से शोषण करते हैं।
(3) ग्रामीण क्षेत्र में छोटे कृषकों के पास कृषि हेतु आधुनिक आगतों की भी कमी रहती है जिस कारण उनके खेतों में उत्पादन मात्रा भी कम होती है।
प्रश्न 5. पालमपुर गाँव की गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-पालमपुर में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाएँ-पालमपुर में अन्य गैर-कृषि आर्थिक क्रियाएँ निम्नलिखित हैं -
(1) डेरी-यहाँ कई परिवारों में डेरी एक प्रचलित क्रिया है। ये लोग अपनी भैंसों को घास, ज्वार-बाजरा चरी खिलाते हैं और दूध को बड़े गाँव रामगंज में बेचा जाता है।
(2) लघुस्तरीय विनिर्माण-पालमपुर में से कम लोग विनिर्माण कार्यों में लगे हैं। यहाँ विनिर्माण से सरल उत्पादन विधियों का प्रयोग किया जाता है तथा उसे छोटे पैमाने पर ही किया जाता है। विनिर्माण कार्य पारिवारिक श्रम की सहायता से ही घरों पर किया जाता है। गुड़ बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना, तेल निकालना जैसे विनिर्माण कार्य यहाँ किए जाते हैं।
(3) व्यापार-पालमपुर में कुछ लोग व्यापार करते हैं। ये शहरों के थोक बाजारों से कई प्रकार की वस्तुएँ खरीदते हैं और उन्हें गाँव लाकर बेचते हैं।
(4) परिवहन कार्य-पालमपुर और रामगंज के बीच सड़क पर कई प्रकार के वाहन चलते हैं। रिक्शावाले, तांगेवाले, जीप, ट्रक ड्राइवर तथा परम्परागत व दूसरी गाड़ियाँ चलाने वाले वे लोग हैं, जो परिवहन सेवाओं में सम्मिलित हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. उत्पादन के विभिन्न साधनों पर एक लेख लिखिए।
अथवा
वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने हेतु आवश्यक साधनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाता है, जिससे लोगों की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सके।
उत्पादन के साधन-किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु कई साधनों की आवश्यकता पड़ती है। मुख्य रूप से उत्पादन के साधनों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता है -
(1) भूमि-किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन