People as Resource
[अर्थशास्त्र] संसाधन के रूप में लोग
करने हेतु भूमि सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। बिना भूमि के किसी भी वस्तु का उत्पादन करना संभव नहीं है। इसके अन्तर्गत भूमि व अन्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, वन, खनिज आदि को भी सम्मिलित किया जाता है। भूमि उत्पादन का स्थिर साधन है।
(2) श्रम-श्रम उत्पादन का सक्रिय साधन है। उत्पादन करने हेतु श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। उत्पादन प्रक्रिया में कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
(3) भौतिक पूँजी-पूँजी के बिना किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन संभव नहीं है। भौतिक पूँजी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी। स्थायी भौतिक पूँजी के अन्तर्गत वे मदें शामिल हैं जो कई वर्षों तक चलती हैं, जैसे-औजार, मशीनें, भवन इत्यादि। कार्यशील पूँजी के अन्तर्गत उत्पादन हेतु आवश्यक कच्चे माल एवं नकदी को शामिल किया जाता है।
(4) मानव पूँजी अथवा साहसी-उत्पादन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन साहसी है जो उत्पादन के अन्य साधनों भूमि, श्रम एवं भौतिक पूँजी को एकत्रित कर उत्पादन करते हैं। अतः उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता पड़ती है, इसे मानवीय पूँजी कहा जाता है।
पाठगत प्रश्न / क्रियाकलाप
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प्रश्न-बताइए कि ये क्रियाकलाप आर्थिक क्रियाएँ हैं या गैर-आर्थिक-
(अ) विलास गाँव के बाजार में मछली बेचता है।
(ब) विलास अपने परिवार के लिए खाना पकाता है।
(स) सकल एक प्राइवेट फर्म में काम करता है।
(द) सकल अपने छोटे भाई और बहिन की देखभाल करता है।
उत्तर-(अ) आर्थिक क्रिया है। (ब) गैर-आर्थिक क्रिया है। (स) आर्थिक क्रिया है। (द) गैर-आर्थिक क्रिया है।
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आरेख 2.1 का अध्ययन करें और निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दें :
प्रश्न-क्या 1951 से जनसंख्या की साक्षरता दर बढ़ी है?
उत्तर- हाँ, वर्ष 1951 से भारत की जनसंख्या की साक्षरता दर में निरन्तर वृद्धि हुई है।
प्रश्न-किस वर्ष भारत में साक्षरता दर सर्वाधिक रही?
उत्तर-भारत में वर्ष 2018 में साक्षरता दर सर्वाधिक रही।
प्रश्न-भारत में पुरुषों में साक्षरता दर अधिक क्यों है?
उत्तर-भारतीय समाज पुरुष प्रधान, रूढ़िवादि और परम्परावादी है। यहाँ पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक सुविधा दी जाती है। अतः लिंग-भेद के कारण पुरुषों की साक्षरता दर अधिक है।
प्रश्न-पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ कम शिक्षित क्यों हैं?
उत्तर-भारत में स्त्रियों का परम्परागत कार्य क्षेत्र घर की चार-दीवारी के कार्य माने गये हैं। लिंग-भेद, परम्परागत सोच आदि के कारण भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ कम शिक्षित हैं।
प्रश्न-आप भारत में लोगों की साक्षरता दर का परिकलन कैसे करेंगे?
उत्तर-साक्षरता दर का आकलन करने हेतु साक्षर लोगों का देश की कुल जनसंख्या से अनुपात निकाला जाता है। साक्षर लोगों में उन लोगों को शामिल किया जाता जिनकी आयु वर्ष या उससे अधिक होती है तथा वे किसी भी भाषा को समझने के साथ-साथ एक साधारण परिच्छेद को पढ़ एवं लिख सकते हैं। इन साक्षर लोगों का कुल जनसंख्या से अनुपात ही साक्षरता दर कहलाती है। इस हेतु अग्र सूत्र प्रयोग किया जाता है-
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. 'संसाधन के रूप में लोग' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-जिस प्रकार भूमि एवं पूँजी उत्पादन के मुख्य संसाधन होते हैं उसी प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण सुविधाओं में निवेश कर लोगों को भी मानव पूँजी में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे मानव पूँजी भी भूमि एवं भौतिक पूँजी की भाँति उत्पादक बन जाती है, इसे ही 'संसाधन के रूप में लोग' की संज्ञा दी जा सकती है।
प्रश्न 2. मानव संसाधन, भूमि और भौतिक पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से कैसे भिन्न है?
उत्तर-मानव संसाधन, भूमि और भौतिक पूँजी से कई प्रकार से भिन्न है। भूमि एवं भौतिक पूँजी आर्थिक विकास के साधन मात्र हैं जबकि मानव पूँजी आर्थिक विकास का साधन एवं साध्य दोनों है। मानव पूँजी एक तरफ तो वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करती है, दूसरी ओर वह उनका उपभोग कर उनकी मांग में भी वृद्धि करती है जिससे उत्पादन की प्रेरणा में वृद्धि होती है। भूमि एवं पूँजी का प्रयोग अपने आप नहीं हो सकता है, इनका प्रयोग मानव संसाधन के माध्यम से ही होता है। भूमि एवं पूँजी की उत्पादकता स्थिर रहती है जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण सुविधाओं में निवेश कर मानव संसाधनों की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। भूमि एवं पूँजी उत्पादन के निष्क्रिय साधन हैं जबकि मानव संसाधन उत्पादन का सक्रिय साधन होता है।
प्रश्न 3. मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका है?
उत्तर-मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण योगदान है। शिक्षा के बिना मानव पूँजी का निर्माण करना अत्यन्त जटिल कार्य है। शिक्षा मानव पूँजी निर्माण को कई प्रकार से प्रभावित करती है। शिक्षित श्रमिक अधिक उत्पादक एवं कार्यकुशल होता है। शिक्षा के माध्यम से लोगों की कुशलता एवं कौशल में वृद्धि की जाती है जिसके फलस्वरूप उन्हें रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होते हैं। शिक्षा के माध्यम से जनसंख्या की गुणवत्ता में वृद्धि की जा सकती है जिससे वे आर्थिक एवं सामाजिक विकास में अधिक योगदान दे पाते हैं। शिक्षा के फलस्वरूप लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार होता है जिससे उनकी उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा शिक्षा जनसंख्या नियंत्रण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान देती है। देश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार कर मानवीय संसाधनों को अधिक कुशल एवं उत्पादक बनाया जा सकता है। इस प्रकार मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 4. मानव पूँजी निर्माण में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?
उत्तर-मानव पूँजी निर्माण में स्वास्थ्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। एक स्वस्थ व्यक्ति किसी भी अस्वस्थ व्यक्ति से अधिक उत्पादक एवं कुशल होता है तथा वह उत्पादन प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है जबकि अस्वस्थ व्यक्ति किसी भी संगठन पर बोझ होता है। अतः मानव को संसाधन के रूप में परिवर्तित करने में उसका स्वास्थ्य महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति लम्बे समय तक पूरी कुशलता एवं ईमानदारी के साथ कार्य कर सकता है जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार कर अधिक कुशल एवं उत्पादक जनशक्ति का निर्माण किया जा सकता है।
प्रश्न 5. किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?
उत्तर-किसी भी व्यक्ति की उत्पादक क्षमता उस व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसे अपनी क्षमता को प्राप्त करने और बीमारियों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति, अस्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अधिक कुशल एवं उत्पादक होता है। इससे उस व्यक्ति की स्वयं की आय में भी वृद्धि होती है तथा उसके सम्मुख और भी अधिक वेतन के अवसर उपलब्ध होते हैं। इस प्रकार स्वस्थ व्यक्ति की आय बढ़ती है जिसके फलस्वरूप वह पहले से बेहतर जीवनयापन कर पाता है। अतः किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके कामयाब जीवन का आधार है।
प्रश्न 6. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में किस तरह की विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती हैं?
उत्तर-किसी भी अर्थव्यवस्था में लोगों द्वारा की गई विभिन्न आर्थिक क्रियाओं को निम्न तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) प्राथमिक क्षेत्रक-प्राथमिक क्षेत्रक के अन्तर्गत कृषि एवं सम्बद्ध क्रियाओं को शामिल किया जाता है। इस क्षेत्रक में कृषि, वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्ग़ीपालन, खनन इत्यादि को शामिल किया जाता है।
(2) द्वितीयक क्षेत्रक-द्वितीयक क्षेत्रक में उन सभी क्रियाओं को शामिल किया जाता है जिनसे कच्चे माल को मानव उपयोगी निर्मित माल में परिवर्तित किया जाता है। द्वितीयक क्षेत्रक में उत्खनन एवं विनिर्माण क्रियाओं को शामिल किया जाता है।
(3) तृतीयक क्षेत्रक-अर्थव्यवस्था के तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है। तृतीयक क्षेत्रक में व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सेवाएँ इत्यादि को शामिल किया जाता है।
प्रश्न 7. आर्थिक एवं गैर-आर्थिक क्रियाओं में क्या अन्तर है?
उत्तर-आर्थिक एवं गैर-आर्थिक क्रियाओं में अन्तर निम्न प्रकार है-
(1) आर्थिक क्रियाएँ-आर्थिक क्रियाओं का
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सम्बन्ध लोगों के धन कमाने एवं व्यय करने सम्बन्धी क्रियाओं से है। इसके अन्तर्गत लोग जिन भी क्रियाओं से वेतन अथवा लाभ प्राप्त करते हैं उन्हें आर्थिक क्रियाओं में शामिल करते हैं। इसके अन्तर्गत सरकारी सेवाओं सहित वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन शामिल किया जाता है।
(2) गैर-आर्थिक क्रियाएँ-गैर-आर्थिक क्रियाएँ वे होती हैं जिनका सम्बन्ध किसी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ से नहीं होता है। गैर-आर्थिक क्रियाएँ अधिकांशतः स्वउपभोग हेतु की जाती हैं।
प्रश्न 8. महिलाएँ क्यों निम्न वेतन वाले कार्यों में नियोजित होती हैं?
उत्तर-भारत में अधिकतर महिलाओं के पास कम शिक्षा और निम्न कौशल स्तर हैं। अतः कम शिक्षा और निम्न कौशल स्तर के कारण महिलाओं को कम वेतन वाले कार्यों में नियोजित होना पड़ता है। जबकि उच्च शिक्षा और उच्च कौशल वाली महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन मिलता है।
प्रश्न 9. 'बेरोजगारी' शब्द की आप कैसे व्याख्या करेंगे?
उत्तर-बेरोजगारी का तात्पर्य उस स्थिति से है जिसमें किसी व्यक्ति में काम करने की योग्यता एवं इच्छा होने के उपरान्त उसे प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार नहीं मिलता।
प्रश्न 10. प्रच्छन्न और मौसमी बेरोजगारी में क्या अन्तर है?
उत्तर-प्रच्छन्न बेरोजगारी-प्रच्छन्न बेरोजगारी का तात्पर्य उस अवस्था से है जिसमें किसी कार्य पर आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं। वे लोग काम करते तो नजर आते हैं परन्तु वास्तव में वे बेरोजगार होते हैं क्योंकि उनका उत्पादन में कोई योगदान नहीं होता है। भारत में कृषि क्षेत्र में प्रच्छन्न बेरोजगारी पाई जाती है जिसमें कृषि भूमि पर आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए रहते हैं। उदाहरण के लिए, किसी कृषि भूमि पर तीन व्यक्तियों के योग्य कार्य है किन्तु उस पर परिवार के 5 लोग लगे हुए हैं तथा उनमें से 2 लोगों को काम से हटा लेने पर भी उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसे प्रच्छन्न बेरोजगारी कहेंगे।
मौसमी बेरोजगारी-मौसमी बेरोजगारी का तात्पर्य उस अवस्था से है जिसमें किसी व्यक्ति को किसी मौसम विशेष या किसी विशेष समय अवधि हेतु ही रोजगार मिलता है तथा शेष समय अवधि में वह बेरोजगार रहता है तथा रोजगार की तलाश करता है। जैसे गुड़ तथा चीनी
उद्योग में लगे मजदूरों को उस समय विशेष के लिए ही रोजगार मिलता है जब गन्ने का उत्पादन होता है।
प्रश्न 11. शिक्षित बेरोजगारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों है?
उत्तर-भारत में शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी एक विशेष समस्या है, क्योंकि-
(1) भारत में शहरी क्षेत्रों में शिक्षा का निरन्तर विस्तार हो रहा है किन्तु रोजगार के अवसरों में इतनी वृद्धि नहीं हो रही है।
(2) यहाँ किसी एक क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक लोग शिक्षित और प्रशिक्षित हैं तथा दूसरे क्षेत्रों में प्रशिक्षितों की कमी है। एक ओर तकनीकी अर्हता प्राप्त लोगों के बीच बेरोजगारी है, तो दूसरी ओर आर्थिक संवृद्धि के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल की कमी भी है।
(3) यहाँ की शिक्षा रोजगारोन्मुखी नहीं है।
(4) भारत में जिस तेजी से पिछले 70 वर्षों में जनसंख्या बढ़ी है, उस तेज गति से रोजगार के अवसर सृजित नहीं हुए हैं।
प्रश्न 12. आपके विचार से भारत किस क्षेत्रक में रोजगार के सर्वाधिक अवसर सृजित कर सकता है?
उत्तर-भारत में तृतीयक क्षेत्रक में रोजगार के सर्वाधिक अवसर सृजित किए जा सकते हैं। प्राथमिक अथवा कृषि क्षेत्रक में प्रच्छन्न बेरोजगारी पाई जाती है तथा आवश्यकता से अधिक लोग रोजगार में लगे हुए हैं अतः कृषि क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर सृजित नहीं किए जा सकते हैं। द्वितीयक क्षेत्र में उद्योग एवं विनिर्माण को सम्मलित किया जाता है, इस क्षेत्र में छोटे पैमाने पर होने वाले विनिर्माण अर्थात् लघु एवं कुटीर उद्योगों को शामिल किया जाता है जिसमें रोजगार के काफी अवसर सृजित किए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में पूँजी का निवेश बढ़ाकर भी रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। लेकिन तृतीयक क्षेत्र, जिसमें विभिन्न प्रकार की सेवाएँ आती हैं, में प्रशिक्षण प्रदान कर भारत में रोजगार के सर्वाधिक अवसर प्रदान किये जा सकते हैं, विशेषकर जब देश उदारीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति को अपना रहा है।
प्रश्न 13. क्या आप शिक्षा प्रणाली में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या दूर करने के लिए कुछ उपाय सुझा सकते हैं?
उत्तर-भारत में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या दूर करने के शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं-
(1) भारतीय शिक्षा प्रणाली रोजगार-उन्मुख नहीं
है। अतः भारतीय शिक्षा प्रणाली को रोजगार उन्मुख बनाना चाहिए।
(2) भारतीय शिक्षा प्रणाली के अन्तर्गत स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।
(3) भारत में शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों को स्वरोजगार हेतु भी प्रेरित किया जाना चाहिए ताकि उन्हें रोजगार न मिलने पर वे स्वयं का व्यवसाय कर सकें।
(4) भारत में रोजगार उपलब्ध करवाने एवं रोजगार सम्बन्धी मार्गदर्शन करने वाली संस्थाओं को अधिक विकास किया जाना चाहिए।
(5) भारत में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त लोगों को स्वयं के व्यवसाय हेतु ऋण उपलब्ध करवाया जाना चाहिए ताकि उन्हें रोजगार मिल सके।
प्रश्न 14. क्या आप कुछ ऐसे गाँवों की कल्पना कर सकते हैं जहाँ पहले रोजगार का कोई अवसर नहीं था, लेकिन बाद में बहुतायत में हो गया?
उत्तर-मेरे गाँव के आस-पास कई ऐसे गाँव हैं जो पहले बहुत अधिक पिछड़े हुए थे। इन गाँवों में पहले बहुत से निर्धन लोग रहते थे जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि था तथा अधिकांश लोग कृषि में लगे हुए थे। उस समय परिवार के सभी सदस्य खेती में ही लगे रहते थे तथा परिवार के बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा जाता था। उन गाँवों में रोजगार के अन्य कोई अवसर नहीं थे।
उनमें से एक गाँव में सरकारी विद्यालय में एक अध्यापक की नियुक्ति हुई। उसने गाँव की स्थिति को देखा तथा गाँव के मुखिया से मिलकर गाँव वालों की एक बैठक बुलाई। अध्यापक ने गाँव वालों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्व समझाया तथा उनसे अपने बच्चों को शिक्षा दिलवाने का अनुरोध किया तथा माता-पिता को स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने हेतु प्रोत्साहित किया। इस सबसे प्रभावित होकर कई ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलवाया। इन बच्चों ने स्कूल शिक्षा प्राप्त कर निकट के शहर में आगे की पढ़ाई पूरी की। उसके पश्चात् उनमें से कई छात्र नौकरी करने लगे। कुछ लोग गाँव वापस आ गए तथा उन्होंने सरकार से ऋण लेकर कई लघु औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की। इससे गाँव के कई अन्य लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। गाँव की कुछ लड़कियों ने स्कूल शिक्षा पूरी कर सिलाई एवं कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्होंने गाँव में अपना व्यवसाय प्रारम्भ किया जिससे उनकी आमदनी भी होने लगी। गाँव के इन शिक्षित लोगों से प्रेरणा लेकर गाँव के अन्य भी कई अशिक्षित युवाओं
ने तकनीकी कौशल प्राप्त कर अपने-अपने कुटीर उद्योग प्रारम्भ किए।
प्रश्न 15. किस पूँजी को आप सबसे अच्छा मानते हैं-भूमि, श्रम, भौतिक पूँजी और मानव पूँजी? क्यों?
उत्तर-हम मानव पूँजी को सबसे श्रेष्ठ मानेंगे क्योंकि मानव पूँजी उत्पादन का साध्य एवं साधन दोनों है। एक तरफ तो मानव पूँजी उत्पादन में सहायक है, दूसरी तरफ मानव पूँजी वस्तुओं एवं सेवाओं का उपभोग भी करती है जिससे बाजार में माँग उत्पन्न होती है तथा उत्पादन को प्रेरणा मिलती है। मानव पूँजी को श्रेष्ठ इसलिए भी माना जाता है क्योंकि मानव पूँजी ही भूमि एवं श्रम का उपयोग करती है। कुशल मानव पूँजी साधनों का कुशलता से उपयोग करती है। मानव पूँजी की एक और महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि अधिक शिक्षित एवं स्वस्थ लोगों के लाभ स्वयं उन तक ही सीमित नहीं होते हैं, बल्कि उनका लाभ उन तक भी पहुँचता है जो स्वयं उतने शिक्षित एवं स्वस्थ नहीं हैं जबकि भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी के संदर्भ में ऐसा नहीं होता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
निम्न में से कौनसी क्रिया प्राथमिक क्षेत्रक के अन्तर्गत आती है-
(अ) कृषि
(ब) वानिकी
(स) मत्स्यपालन
(द) उपर्युक्त सभीतृतीयक अथवा सेवा क्षेत्रक में सम्मिलित आर्थिक क्रिया है-
(अ) परिवहन एवं संचार सुविधाएँ
(ब) बैंकिंग
(स) बीमा
(द) उपर्युक्त सभीभारत में सर्वाधिक साक्षरता दर किस राज्य में है?
(अ) महाराष्ट्र
(ब) केरल
(स) उड़ीसा
(द) राजस्थाननिम्न में से किसे मानव पूँजी माना जा सकता है?
(अ) डॉक्टर
(ब) अध्यापक
(स) इंजीनियर
(द) उपर्युक्त सभी कोभारत में सर्वाधिक लोग किस क्षेत्र में कार्यरत हैं?
(अ) प्राथमिक क्षेत्र
(ब) द्वितीयक क्षेत्र
(स) तृतीयक क्षेत्र
(द) विनिर्माण क्षेत्रनिम्न में से कौनसी क्रिया द्वितीयक क्षेत्र में शामिल है?
(अ) मत्स्य पालन
(ब) विनिर्माण
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(स) परिवहन (द) व्यापार
7. प्राय: किस उद्योग में मौसमी बेरोजगारी देखने को मिलती है?
(अ) वस्त्र उद्योग (ब) चीनी उद्योग
(स) जूता उद्योग (द) बर्तन उद्योग
उत्तरमाला-1. (द) 2. (द) 3. (ब) 4. (द) 5. (अ) 6. (ब) 7. (ब)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
- मानव पूँजी में निवेश द्वारा इसे एक... सम्पत्ति में बदला जा सकता है।
(अनुत्पादक/उत्पादक) - .................... क्षेत्रक के अन्तर्गत कृषि, वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन और खनन व उत्खनन शामिल हैं।
(द्वितीयक/प्राथमिक) - स्वास्थ्य एवं पर्यटन .................... क्षेत्रक में शामिल है। (द्वितीयक/तृतीयक)
- वर्ष 1951 में भारत में साक्षरता दर... प्रतिशत थी। (18/28)
उत्तर-1. उत्पादक, 2. प्राथमिक, 3. तृतीयक, 4. 18।
निम्न वाक्यों में सत्य/असत्य कथन छाँटिए-
- भारतीय अर्थव्यवस्था में तृतीयक क्षेत्र का योगदान निरन्तर बढ़ रहा है। ( )
- भारत में सबसे अधिक लोग तृतीयक क्षेत्रक में लगे हुए हैं। ( )
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य में वृद्धि द्वारा मानव पूँजी का निर्माण किया जा सकता है। ( )
- किसान द्वारा अन्न उपजाना एक गैर-आर्थिक क्रिया है। ( )
उत्तर-1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. असत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) खनन | (a) तृतीयक क्षेत्र |
| (ii) विनिर्माण | (b) द्वितीयक क्षेत्र |
| (iii) संचार | (c) प्राथमिक क्षेत्र |
| (iv) 2011 में केरल की साक्षरता दर | (d) 62 प्रतिशत |
| (v) 2011 में बिहार की साक्षरता दर | (e) 94 प्रतिशत |
उत्तर-(i) (c), (ii) (b), (iii) (a), (iv) (e), (v) (d)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. मानव पूँजी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-मानव पूँजी कौशल और उसमें निहित उत्पादन के ज्ञान का स्टॉक है।
प्रश्न 2. अधिक जनसंख्या का एक सकारात्मक पहलू बताइए।
उत्तर-अधिक जनसंख्या में शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य में निवेश कर अधिक मानव पूँजी का निर्माण किया जा सकता है।
प्रश्न 3. समाज में कार्यरत ऐसे दो व्यक्तियों का उदाहरण दीजिए जिन्हें मानव पूँजी कहा जा सकता है।
उत्तर-(1) डॉक्टर (2) अध्यापक।
प्रश्न 4. गैर-बाजार क्रियाओं से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-गैर-बाजार क्रियाओं से अभिप्राय स्व-उपभोग के लिए उत्पादन तथा कार्य करना है।
प्रश्न 5. बाजार क्रियाओं से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर-बाजार क्रियाओं में वेतन या लाभ के उद्देश्य से की गई वे क्रियाएँ शामिल हैं जिनके लिए पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है।
प्रश्न 6. बाजार में किसी व्यक्ति की आय के निर्धारक कोई दो घटक बताइए।
उत्तर-(1) शिक्षा (2) कौशल।
प्रश्न 7. संसाधन के रूप में जनसंख्या की गुणवत्ता के कारक बताइए।
अथवा
जनसंख्या की गुणवत्ता किन तत्वों पर निर्भर करती है?
उत्तर-जनसंख्या की गुणवत्ता साक्षरता दर, जीवन प्रत्याशा से निरूपित व्यक्तियों के स्वास्थ्य और देश के लोगों द्वारा प्राप्त कौशल निर्माण पर निर्भर करती है।
प्रश्न 8. शिशु मृत्यु-दर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-शिशु मृत्यु-दर से अभिप्राय एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं के प्रति 1000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या है।
प्रश्न 9. जन्म-दर का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-जन्म-दर का अभिप्राय एक विशेष अवधि में प्रति एक हजार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या से है।
प्रश्न 10. मृत्यु-दर का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-मृत्यु-दर का अभिप्राय एक विशेष अवधि में प्रति एक हजार व्यक्तियों के पीछे मरने वाले व्यक्तियों की संख्या से है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. उच्च आय से अधिक शिक्षित और स्वस्थ व्यक्ति के साथ-साथ समाज को भी लाभ होता है। कैसे?
उत्तर-उच्च आय से न केवल अधिक शिक्षित और अधिक स्वस्थ लोगों को लाभ होता है, बल्कि समाज को भी लाभ होता है क्योंकि अधिक शिक्षित और अधिक स्वस्थ जनसंख्या का लाभ उन लोगों तक भी पहुँचता है जो स्वयं प्रत्यक्ष रूप से उतने शिक्षित या स्वस्थ नहीं हैं।
प्रश्न 2. मानव पूँजी उत्पादन के अन्य संसाधनों से श्रेष्ठ है। कैसे?
उत्तर-मानव पूँजी अन्य संसाधनों, जैसे-भूमि और भौतिक पूँजी से श्रेष्ठ है, क्योंकि मानव संसाधन भूमि और पूँजी का उपयोग कर सकता है। भूमि और पूँजी अपने आप में उपयोगी नहीं है।
प्रश्न 3. शिक्षित बेरोजगारी से क्या आशय है?
उत्तर-जहाँ मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारी अनेक युवक रोजगार पाने में असमर्थ हैं एवं मैट्रिक की तुलना में स्नातक व स्नातकोत्तर डिग्रीधारी युवकों में बेरोजगारी अधिक होती है, वहाँ उसे शिक्षित बेरोजगारी कहा जाता है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. "दूसरे संसाधनों की भाँति ही जनसंख्या भी एक संसाधन है।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-हम इस कथन से सहमत हैं कि दूसरे संसाधनों की भाँति ही जनसंख्या भी एक संसाधन है। जनसंख्या देश के उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण साधन भी है। यदि हम जनसंख्या पर शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य में निवेश करें तो मानव पूँजी का निर्माण किया जा सकता है तथा जनसंख्या को मानव पूँजी में परिवर्तित कर उसे अधिक कुशल एवं उत्पादक बनाया जा सकता है। मानव पूँजी निर्माण भी भौतिक पूँजी निर्माण की ही भाँति देश की उत्पादन शक्ति में वृद्धि करता है। मानव पूँजी निर्माण का देश के विकास एवं संवर्द्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान है अतः दूसरे संसाधनों की भाँति ही जनसंख्या भी एक संसाधन है।
प्रश्न 2. मानव पूँजी का निर्माण किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर-मानव पूँजी का निर्माण निम्न प्रकार से किया जा सकता है-
(1) मानव संसाधन अथवा मानव निर्माण हेतु शिक्षा में निवेश किया जाना चाहिए, शिक्षित व्यक्ति अधिक उत्पादक एवं कुशल होते हैं।
(2) स्वास्थ्य में निवेश करके मानव पूँजी का निर्माण किया जा सकता है, स्वस्थ व्यक्ति अस्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अधिक उत्पादक होता है।
(3) श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण में निवेश कर उन्हें मानव पूँजी में परिवर्तित किया जा सकता है, प्रशिक्षण से उनकी कुशलता में वृद्धि होती है।
(4) विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय करके भी मानव पूँजी का निर्माण किया जा सकता है।
प्रश्न 3. मानव पूँजी निर्माण से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले कोई चार सकारात्मक प्रभाव बताइए।
उत्तर-(1) मानव पूँजी निर्माण से अधिक जनसंख्या को भी उत्पादन के साधन के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
(2) मानव पूँजी निर्माण से व्यक्तियों को अधिक उत्पादक एवं अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
(3) मानव पूँजी निर्माण के माध्यम से लोगों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होते हैं जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या का समाधान होता है।
(4) मानव पूँजी निर्माण के फलस्वरूप मनुष्य उत्पादन के अन्य संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग कर सकता है जिससे उत्पादक एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है।
प्रश्न 4. संक्षेप में बेरोजगारी के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-भारत में बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या तथा अर्थव्यवस्था पर बेरोजगारी के अनेक नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। बेरोजगारी के कारण मानवीय संसाधनों की बर्बादी होती है जिन्हें उपयोगी ढंग से नियोजित किया जा सकता था। अगर लोगों को संसाधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सके, तो वे स्वाभाविक रूप से अर्थव्यवस्था के लिए दायित्व में बदल जाते हैं। लोग बेरोजगारी के कारण अपने व अपने परिवार का भररण-पोषण ठीक प्रकार से नहीं कर पाते हैं। इस कारण बेरोजगारी से समाज के जीवन की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बेरोजगारी से निर्धनता एवं अन्य सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा मिलता है। बेरोजगारी का अर्थव्यवस्था के समग्र विकास एवं संवृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत में शिक्षा के विस्तार एवं विकास हेतु क्या-क्या प्रयास किए गए हैं?
उत्तर-भारत में शिक्षा के विकास एवं विस्तार हेतु निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं-
(1) देश में शिक्षा पर किए जाने वाले सार्वजनिक व्यय में लगातार वृद्धि की गई है।
(2) प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय जैसे प्रगति निर्धारक विद्यालय स्थापित किये गए हैं।