Poverty as a Challenge
[अर्थशास्त्र] निर्धनता : एक चुनौती
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(3) हाई स्कूल के विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल से सम्बन्धित व्यवसाय उपलब्ध कराने के लिए व्यावसायिक शाखाएँ विकसित की गई हैं।
(4) ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों एवं उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालयों की तेजी से स्थापना की गई है।
(5) 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने हेतु 'सर्वशिक्षा अभियान' चलाया गया है।
(6) प्राथमिक शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के लिए 'सेतु पाठ्यक्रम' एवं 'स्कूल लौटो शिविर' प्रारंभ किए गए हैं।
(7) बच्चों की स्कूल में उपस्थिति एवं उनके पोषण को बढ़ाने के लिए 'दोपहर के भोजन' की योजना प्रारम्भ की गई है।
(8) दसवीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा में नामांकन वृद्धि हेतु प्रयास किए गए हैं।
(9) दसवीं योजना दूरस्थ शिक्षा, औपचारिक, अनौपचारिक, दूरस्थ तथा संचार प्रौद्योगिकी की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों के अभिसरण पर भी केन्द्रित है।
(10) देश में उच्च शिक्षण संस्थानों में भी विस्तार किया गया है।
प्रश्न 2. बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? भारत में बेरोजगारी के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—बेरोजगारी का अभिप्राय—साधारण बोलचाल की भाषा में बेरोजगारी का अभिप्राय किसी व्यक्ति को रोजगार के अवसर प्राप्त न होने से लिया जाता है। अन्य शब्दों में बेरोजगारी का अर्थ उन व्यक्तियों को काम नहीं मिलने से है जो काम करने के इच्छुक एवं योग्य हैं पर उनकी इच्छा एवं योग्यता के बावजूद प्रचलित कीमतों पर उन्हें रोजगार नहीं मिलता है।
बेरोजगारी के प्रकार—भारत में बेरोजगारी के कई स्वरूप हैं। भारत में बेरोजगारी के मुख्य स्वरूप निम्न प्रकार हैं-
(1) मौसमी बेरोजगारी—मौसमी बेरोजगारी का तात्पर्य उस अवस्था से है जब श्रमिक को वर्ष भर निरन्तर काम नहीं मिलता है तथा किसी मौसम विशेष में ही उसे काम मिलता है, शेष समय वह श्रमिक बेकार बैठा रहता है या फिर रोजगार की खोज करता रहता है। जैसे भारत में चीनी उद्योग के कर्मचारी वर्ष में केवल उसी समय अधिक काम पर रहते हैं जब गन्ने का उत्पादन होता है। इसी प्रकार भारत में रबी और खरीफ की फसलों के बीच की अवधि में मानसून न आने पर किसान बेरोजगार होते हैं।
(2) प्रच्छन्न बेरोजगारी—प्रच्छन्न बेरोजगारी को छिपी हुई बेरोजगारी भी कहते हैं। इसमें श्रमिक कार्य पर लगा हुआ तो प्रतीत होता है किंतु वास्तव में उत्पादन में उसका योगदान नहीं होता है। अर्थात् प्रच्छन्न बेरोजगारी वह अवस्था है जिसमें किसी कार्य पर आवश्यकता से अधिक लोग काम पर लगे हों। उदाहरण के लिए, भारत में कृषि क्षेत्र में पूरा परिवार कृषि कार्य में लगा होता है जबकि उस कार्य को परिवार के कम लोग भी पूरा कर सकते हैं तथा अतिरिक्त लोगों को हटाने से उत्पादन पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
(3) शिक्षित बेरोजगारी—शिक्षित बेरोजगारी मुख्य रूप से शहरों में पाई जाती है। इस बेरोजगारी में विभिन्न शिक्षित लोगों को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाता है। देश में यह भी देखा गया है कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों में बेरोजगारी की दर अधिक पाई जाती है। इसे शिक्षित बेरोजगारी कहते हैं।
पाठगत प्रश्न/क्रियाकलाप
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प्रश्न—निर्धनता से सम्बन्धित निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा करें—
(i) भूमिहीनता (ii) बेरोजगारी (iii) परिवार का आकार (iv) निरक्षरता (v) खराब स्वास्थ्य/कुपोषण (vi) बाल श्रम (vii) असहायता।
उत्तर—(i) भूमिहीनता—भूमिहीनता का तात्पर्य उस स्थिति से है जिसमें व्यक्ति के पास कृषि भूमि न हो। भूमिहीनता की स्थिति में श्रमिक निर्धन होता है तथा दूसरों के यहाँ मजदूरी करता है।
(ii) बेरोजगारी—बेरोजगारी वह स्थिति होती है जब किसी काम करने के इच्छुक योग्य व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार नहीं मिलता है। इससे निर्धनता बढ़ती है।
(iii) परिवार का आकार—परिवार का आकार परिवार के सदस्यों की संख्या से है। अधिक संख्या वाला परिवार बड़ा होता है तथा प्रायः यह परिवार निर्धन होता है। जबकि कम सदस्यों वाला परिवार छोटा एवं समृद्ध होता है।
(iv) निरक्षरता—निरक्षरता का तात्पर्य शिक्षा के अभाव से है। प्रायः निरक्षर व्यक्ति के पास रोजगार के कम अवसर होते हैं तथा कम आय ही कमा पाता है।
अतः वह निर्धन होता है। शिक्षित व्यक्ति के पास रोजगार के अधिक अवसर होते हैं।
(v) खराब स्वास्थ्य/कुपोषण—खराब स्वास्थ्य वाला व्यक्ति या श्रमिक कम उत्पादक होता है, वह अधिक काम नहीं कर पाता है। इस कारण उसकी आय कम होती है तथा वह निर्धन होता है।
(vi) बाल श्रम—बाल श्रम वह स्थिति होती है जिसमें बच्चों से आर्थिक क्रियाएँ करवाई जाती हैं। यह निर्धनता के कारण उत्पन्न समस्या है। निर्धनता के कारण माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं।
(vii) असहायता—निर्धनता के कारण लोग असहाय हो जाते हैं तथा वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में निर्धनता रेखा का आकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर—भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण मानव के लिए आवश्यक प्राथमिक आवश्यकताओं-रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा आदि की भौतिक मात्रा को रुपये में उनकी कीमतों से गुणा करके किया जाता है।
वर्तमान निर्धनता रेखा के लिए सूत्र वांछित कैलोरी आवश्यकता पर आधारित है जो कि ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तथा शहरी क्षेत्र के लिए 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन ऊर्जा देने वाले भोजन से है।
प्रश्न 2. क्या आप समझते हैं कि निर्धनता आकलन का वर्तमान तरीका सही है?
उत्तर—निर्धनता निर्धारण का हमारा वांछित कैलोरी उपभोग का तरीका न्यूनतम मूलभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, ईंधन तथा प्रकाश आदि के उपभोग पर आधारित है, अतः यह तरीका सही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कैलोरी उपभोग एवं शहरी क्षेत्रों में कैलोरी उपभोग का मापदण्ड रखा है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोग अधिक शारीरिक परिश्रम करते हैं अतः उन्हें अधिक कैलोरी उपभोग की आवश्यकता पड़ती है।
प्रश्न 3. भारत में 1973 से निर्धनता की प्रवृत्तियों की चर्चा करें।
उत्तर—भारत में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत पूर्व के दो दशकों () में गिरा है। है। 1993 से 2011-12 तक भारत में निर्धनता की प्रवृत्तियों को निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है-
तालिका : भारत में निर्धनता के अनुमान ( तेंदुलकर कार्यप्रणाली )
| वर्ष | निर्धनता अनुपात (प्रतिशत) | निर्धनों की संख्या (मिलियन) | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ग्रामीण | शहरी | योग | ग्रामीण | शहरी | संयुक्त योग | |
(स्त्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2018)
उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि (1) भारत में वर्ष 1993-94 में निर्धनता अनुपात लगभग 45 प्रतिशत था वह वर्ष 2011-12 में 22 प्रतिशत रह गया है। अतः भारत में निर्धनता प्रतिशत में निरन्तर कमी होने की प्रवृत्ति है। (2) भारत में ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता का अनुपात शहरी क्षेत्र की तुलना में अधिक रहा है। (3) संख्या के आधार पर भारत में वर्ष 1993-94 में 40.4 करोड़ लोग निर्धनता की श्रेणी में आते थे जबकि वर्ष 2011-12 में 27 करोड़ लोग निर्धनता रेखा से नीचे निवास करते थे।
प्रश्न 4. भारत में निर्धनता में अन्तर-राज्य असमानताओं का एक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर—भारत में वर्ष 2011-12 में लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या निर्धन थी; किन्तु भारत में विभिन्न राज्यों में निर्धनता अनुपात में काफी असमानता पाई गई है। सभी राज्यों में निर्धनता का अनुपात समान नहीं है। कुछ राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओडिशा में निर्धनता अनुपात राष्ट्रीय अनुपात से ज्यादा है। बिहार और ओडिशा क्रमशः 33.7 और 32.6 प्रतिशत निर्धनता औसत के साथ दो सर्वाधिक निर्धन राज्य बने हुए हैं। ओडिशा, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में ग्रामीण निर्धनता के साथ नगरीय निर्धनता भी अधिक है।
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इसकी तुलना में केरल, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिमी बंगाल में निर्धनता में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में भी निर्धनता अनुपात काफी कम पाया जाता है। अतः स्पष्ट है कि देश में विभिन्न राज्यों में निर्धनता अनुपात में कमी तो आ रही है किन्तु अभी भी विभिन्न राज्यों में निर्धनता अनुपात में काफी असमानता पाई जाती है।
प्रश्न 5. उन सामाजिक और आर्थिक समूहों की पहचान करें जो भारत में निर्धनता के समक्ष निरुपाय हैं।
उत्तर—भारत में निम्नलिखित सामाजिक और आर्थिक समूह निर्धनता के समक्ष निरुपाय हैं-
(1) सामाजिक समूह-भारत में सामाजिक समूहों में सर्वाधिक असुरक्षित अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार हैं। भारत में अनुसूचित जनजातियों में निर्धनता अनुपात लगभग 43 प्रतिशत एवं अनुसूचित जातियों में निर्धनता अनुपात लगभग 29 प्रतिशत रहा जो काफी अधिक है।
(2) आर्थिक समूह-भारत में आर्थिक दृष्टि से सबसे असुरक्षित समूह नगरीय अनियत मजदूर परिवार एवं ग्रामीण कृषि श्रमिक परिवार हैं। नगरीय अनियत मजदूरों में 34 प्रतिशत लोग एवं ग्रामीण अनियत कृषि श्रमिकों में भी 34 प्रतिशत लोग निर्धनता के समक्ष निरुपाय हैं। ये लोग निर्धनता रेखा के नीचे अपना जीवन-यापन कर रहे हैं।
प्रश्न 6. भारत में अन्तर्राज्यीय निर्धनता में विभिन्नता के कारण बताइए।
उत्तर—भारत में अन्तर्राज्यीय निर्धनता में विभिन्नता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(i) राज्यों में कृषि वृद्धि दर में अन्तर का होना-पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य उच्च कृषि वृद्धि दर से निर्धनता कम करने में सफल रहे हैं।
(ii) मानव संसाधन विकास पर कम और अधिक ध्यान देना-केरल ने मानव संसाधन विकास पर अधिक ध्यान दिया है और उन राज्यों से निर्धनता को कम करने में सफल रहा है, जिनमें इस ओर कम ध्यान दिया गया है।
(iii) भूमि सुधार उपायों को लागू करने में अन्तर का होना-पश्चिम बंगाल में भूमि सुधार उपायों से निर्धनता कम करने में सहायता मिली है।
(iv) अनाज के सार्वजनिक वितरण में अन्तर-आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु ने अनाज का सार्वजनिक वितरण कर निर्धनता में सुधार किया है।
(v) अन्य कारण-(अ) राज्यों में जनसंख्या घनत्व में असमानता विद्यमान है।
(ब) राज्यों के लोगों में शिक्षा के प्रतिशत की असमानता है।
(स) राज्यों में प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता में भी असमानता है।
प्रश्न 7. वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों की चर्चा करें।
उत्तर—(1) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में निर्धनता अनुपात में काफी असमानता पाई जाती है। (2) हालांकि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर निर्धनता में कमी आई है। विभिन्न देशों में 1990 में निर्धनता का अनुपात 36 प्रतिशत से गिरकर 2015 में 10 प्रतिशत हो गया है। तीव्र आर्थिक प्रगति और मानव संसाधन विकास में वृहत निवेश के कारण चीन एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में निर्धनता में उल्लेखनीय कमी आई है, जबकि दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों-जैसे भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान आदि में निर्धनता में गिरावट इतनी तीव्र नहीं रही है। (3) निर्धनों के प्रतिशत में गिरावट के साथ ही निर्धनों की संख्या में भी कमी आई है जो 2005 में 510.4 मिलियन से घटकर 2013 में 274.5 मिलियन रह गई है। (4) अफ्रीका के देशों में निर्धनता अनुपात काफी ऊँचा है, जैसे सब सहारा अफ्रीका में निर्धनता अनुपात 2005 के 51 प्रतिशत से घटकर 2018 में 40.2 प्रतिशत हो गया है। रूस जैसे देशों में निर्धनता अनुपात में पुनः वृद्धि हुई है। अतः विश्व के विभिन्न देशों में निर्धनता अनुपात में काफी भिन्नता पाई गई है।
प्रश्न 8. निर्धनता उन्मूलन की वर्तमान सरकारी रणनीति की चर्चा करें।
उत्तर—भारत में सरकार ने निर्धनता उन्मूलन हेतु अनेक प्रयास किए हैं। सरकार की निर्धनता उन्मूलन की रणनीति को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहित करना, (2) लक्षित निर्धनता निरोधी कार्यक्रम प्रारंभ करना।
(1) आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहित करना-सरकार ने देश में निर्धनता दूर करने हेतु आर्थिक संवृद्धि दर को बढ़ाने का प्रयास किया है। विकास की उच्च दर ने निर्धनता को कम करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आर्थिक संवृद्धि की दर में वृद्धि होने से अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ता है जिससे उत्पादन एवं रोजगार दोनों में वृद्धि
होती है। इससे मानव विकास में निवेश के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते हैं। इन सबके फलस्वरूप अर्थव्यवस्था में निर्धनता को कम करने में मदद मिलती है।
(2) लक्षित निर्धनता निरोधी कार्यक्रम प्रारम्भ करना- सरकार ने देश में निर्धनता को कम करने हेतु निर्धनता उन्मूलन एवं रोजगार सृजन हेतु अनेक कार्यक्रम चलाए हैं। सरकार द्वारा चलाए जाने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम निम्न प्रकार हैं-
(i) महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम 2005- इस योजना के तहत चयनित जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में चयनित परिवार के एक सदस्य को वर्ष में कम-से-कम 100 दिन अकुशल श्रम वाले रोजगार की गारण्टी दी गई है। इसमें प्रस्तावित रोजगारों का एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित है।
(ii) काम के बदले अनाज कार्यक्रम- यह कार्यक्रम निर्धनता उन्मूलन एवं रोजगार सृजन का एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसे वर्ष 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया था। यह कार्यक्रम उन सभी ग्रामीण निर्धनों के लिए था, जिन्हें मजदूरी पर रोजगार की आवश्यकता थी और जो अकुशल, शारीरिक काम करने के इच्छुक थे। यह शत प्रतिशत केन्द्र प्रायोजित कार्यक्रम था। इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना में मिला दिया गया था।
(iii) प्रधानमंत्री रोजगार योजना- यह योजना गरीबी निवारण एवं स्वरोजगार की योजना है। इस योजना को 2 अक्टूबर, 1993 को प्रारंभ किया गया जिसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों एवं छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्हें लघु व्यवसाय तथा उद्योग स्थापित करने में सहायता दी जाती है।
(iv) ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम- यह कार्यक्रम 1995 में प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। दसवीं योजना में इस कार्यक्रम के तहत 25 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया था।
(v) स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना- यह कार्यक्रम 1 अप्रैल, 1999 को प्रारंभ किया गया, इसमें पूर्व में चले आ रहे छः कार्यक्रमों को मिला दिया गया। इस योजना का उद्देश्य सहायता प्राप्त स्वरोजगारियों को बैंक ऋण एवं सरकारी सब्सिडी के जरिये आय सूजक परिसम्पत्तियों के प्रावधान के जरिये गरीबी रेखा से ऊपर लाना है।
(vi) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना- यह योजना वर्ष 2000 में प्रारंभ की गई। इस योजना के अन्तर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आश्रय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी मूल सुविधाओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
(vii) अन्त्योदय अन्न योजना- यह योजना निर्धनता उन्मूलन हेतु वर्ष 2000 में अन्नपूर्णा योजना के साथ प्रारंभ की गई। इन योजनाओं में गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब को लक्षित किया गया तथा उन्हें सस्ती दरों पर खाद्यन्न उपलब्ध करवाया गया।
प्रश्न 9. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दें-
( क ) मानव निर्धनता से आप क्या समझते हैं?
( ख ) निर्धनों में भी सबसे निर्धन कौन है?
( ग ) महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर-( क ) मानव निर्धनता का तात्पर्य उस अवस्था से है, जिसके अन्तर्गत लोगों को उनकी आवश्यकता की मूलभूत जरूरतें; जैसे- भोजन, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएँ, रोजगार की सुरक्षा, उनका आत्मसम्मान आदि नहीं मिल पाए।
( ख ) निर्धन परिवारों की महिलाएँ, बच्चियाँ तथा वृद्ध लोग निर्धनों में भी सबसे निर्धन हैं।
( ग ) महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम, 2005- इस अधिनियम के तहत चयनित जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में चयनित परिवार के एक सदस्य को वर्ष में कम से कम 100 दिन अकुशल श्रम वाले रोजगार की गारण्टी प्रदान की गई। इसमें प्रस्तावित रोजगारों का एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसके अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी कोष तथा राज्य सरकार राज्य रोजगार गारण्टी कोष की स्थापना करेगी। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत यदि आवेदक को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं करवाया जाता है तो वह दैनिक बेरोजगारी भत्ते का अधिकारी होगा।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न–
1. निर्धनता का मापन किस सामाजिक सूचक के माध्यम से किया जा सकता है-
(अ) निर्धनों में निरक्षरता स्तर
(ब) स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
(स) रोजगार के अवसरों की कमी
(द) उपर्युक्त सभी
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भारत में सर्वाधिक निर्धनता अनुपात वाला राज्य है-
(अ) राजस्थान
(ब) बिहार
(स) ओडिशा
(द) हरियाणाभारत में निर्धनता का मुख्य कारण है-
(अ) बेरोजगारी
(ब) जनसंख्या की तीव्र वृद्धि
(स) कृषकों की ऋणग्रस्तता
(द) उपर्युक्त सभीभारत में निर्धनता के आकलन हेतु प्रतिदर्श सर्वेक्षण कौन करवाता है?
(अ) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया
(ब) राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO)
(स) नीति आयोग
(द) भारतीय संसद
निम्न में से किस राज्य का निर्धनता अनुपात भारत के औसत निर्धनता अनुपात से नीचे है?
(अ) ओडिशा
(ब) मध्यप्रदेश
(स) उत्तरप्रदेश
(द) आन्ध्रप्रदेश
संयुक्त राष्ट्र के नए सतत् विकास लक्ष्य को किस वर्ष तक गरीबी समाप्त करने का लक्ष्य रखा है?
(अ) 2020 तक
(ब) 2025 तक
(स) 2030 तक
(द) 2035 तकस्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना किस वर्ष प्रारम्भ की गई?
(अ) 1996
(ब) 1998
(स) 1999
(द) 2014
उत्तरमाला- 1. (द) 2. (ब) 3. (द) 4. (ब) 5. (द) 6. (स) 7. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें -
- स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना का आरम्भ ....................... में किया गया। (1996/1999)
- 2011-12 में भारत में मोटे तौर पर ....................... मिलियन लोग निर्धनता में जीते हैं। (410/270)
- 1993-94 में भारत में निर्धनता अनुपात ....................... प्रतिशत था। (45/37)
- पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य उच्च ....................... वृद्धि दर से निर्धनता कम करने में पारम्परिक रूप से सफल रहे हैं। (कृषि/उद्योग)
उत्तर- 1. 1999, 2. 270, 3. 45, 4. कृषि।
निम्न वाक्यों में सत्य/असत्य कथन छाँटिए -
- राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम 2014 में लागू किया गया गया। ( )
- प्रधानमन्त्री रोजगार योजना वर्ष 1993 में प्रारम्भ की गई। ( )
- श्रीलंका में निर्धनता अनुपात काफी ऊँचा पाया गया है। ( )
- बिहार एवं ओडिशा भारत के सर्वाधिक निर्धनता अनुपात वाले राज्य हैं। ( )
उत्तर- 1. असत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. सत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए -
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) बांग्लादेश का निर्धनता अनुपात | (a) 14.3 प्रतिशत |
| (ii) 2011 जनगणना के अनुसार-भारत का निर्धनता अनुपात | (b) 270 मिलियन |
| (iii) 2004-05 में भारत में निर्धनों की संख्या | (c) बिहार |
| (iv) 2011-12 में निर्धनों की संख्या | (d) 407 मिलियन |
| (v) सबसे निर्धन राज्य | (e) 22 प्रतिशत |
उत्तर- (i) (a), (ii) (e), (iii) (d), (iv) (b), (v) (c).
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न -
प्रश्न 1. निर्धनता का क्या अभिप्राय है?
उत्तर- निर्धनता का तात्पर्य उस स्थिति से है जब लोग अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर सकते हैं।
प्रश्न 2. भारत में उपभोग के आधार पर निर्धनता का मापदण्ड क्या रखा गया है?
उत्तर- भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में जिनका उपभोग प्रतिदिन 2400 कैलोरी एवं शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 2100 कैलोरी से कम है वे निर्धनता रेखा से नीचे माने जाएँगे।
प्रश्न 3. भारत में निर्धनता सम्बन्धी आँकड़ों का संकलन किस संगठन द्वारा किया जाता है?
उत्तर- भारत में निर्धनता सम्बन्धी आँकड़ों का संकलन राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 4. अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने निर्धनता रेखा का मापदण्ड क्या रखा है?
उत्तर- अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने निर्धनता रेखा का मापदण्ड 1.9 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के समतुल्य न्यूनतम उपलब्धता का रखा है।
प्रश्न 5. भारत में कौनसे सामाजिक समूह निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं?
उत्तर- भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार निर्धनता के प्रति सर्वाधिक
असुरक्षित हैं।
प्रश्न 6. भारत में कौनसे आर्थिक वर्ग निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं?
उत्तर-भारत में ग्रामीण कृषि श्रमिक तथा नगरीय अनियत मजदूर परिवार निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं।
प्रश्न 7. भारत में निर्धनता के कोई दो प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर-(1) भारत में बेरोजगारी निर्धनता का मुख्य कारण है। (2) भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या भी निर्धनता हेतु जिम्मेदार है।
प्रश्न 8. भारत में निर्धनता उन्मूलन हेतु सरकार द्वारा अपनाए गए कोई दो कार्यक्रमों के नाम लिखिए।
उत्तर-(1) प्रधानमंत्री रोजगार योजना (2) स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना।
प्रश्न 9. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में कैलोरी आवश्यकता का मापदण्ड शहरों की तुलना में अधिक क्यों रखा गया है?
उत्तर-भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अधिक शारीरिक परिश्रम करते हैं, अतः उन्हें अधिक कैलोरी उपभोग की आवश्यकता पड़ती है।
प्रश्न 10. निर्धनता अनुपात से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-देश में निर्धन व्यक्तियों का कुल जनसंख्या से अनुपात निर्धनता अनुपात कहलाता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समूहों को किन दोहरी असुविधा का सामना करना पड़ता है?
उत्तर-अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूहों को दोहरी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ये दोहरी असुविधाएँ निम्नलिखित हैं-
(1) प्रथमतः ये समूह सामाजिक रूप से सुविधावंचित समूह हैं।
(2) दूसरे, ये समूह भूमिहीन अनियत दिहाड़ी श्रमिक भी हैं।
प्रश्न 2. भारत में निर्धनता के आयामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-भारत में निर्धनता के प्रमुख आयाम हैं-
(1) निर्धनता रेखा से नीचे के लोगों का अनुपात भारत में सभी सामाजिक समूहों में एक समान नहीं है। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवार निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं।
(2) आर्थिक समूहों में सर्वाधिक असुरक्षित समूह
ग्रामीण कृषि श्रमिक परिवार और नगरीय अनियत मजदूर परिवार हैं।
(3) भारत के प्रत्येक राज्य में निर्धन लोगों का अनुपात समान नहीं है।
प्रश्न 3. भारत में आगामी 10-15 वर्षों में निर्धनता उन्मूलन में तेजी की सम्भावना क्यों की जा रही है?
उत्तर-भारत में आगामी 10-15 वर्षों में निर्धनता उन्मूलन में तेजी की सम्भावना मुख्यतः उच्च आर्थिक संवृद्धि, सर्वजनीन निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा पर जोर, जनसंख्या विकास में गिरावट, महिलाओं और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बढ़ते सशक्तीकरण के कारण है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. निर्धनता का लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-भारत में निर्धनता की समस्या बहुत जटिल समस्या है। निर्धनता के फलस्वरूप लोग अपनी मूलभूत आवश्यकताएँ भी नहीं जुटा पाते हैं तथा उनका जीवन स्तर काफी निम्न होता है। इस अवस्था में माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दिला पाते हैं। यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है तो उसे चिकित्सा सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। स्वच्छ जल एवं सफाई का अभाव पाया जाता है तथा लोगों के पास कोई नियमित रोजगार नहीं होता है तथा निर्धनों के साथ सभी स्थानों पर दुर्व्यवहार होता है। अतः निर्धन लोगों का जीवन काफी कष्टपूर्ण एवं निम्न स्तर का होता है।
प्रश्न 2. सामाजिक अपवर्जन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-सामाजिक अपवर्जन निर्धनता का कारण एवं परिणाम दोनों है। सामाजिक अपवर्जन की अवधारणा के अनुसार निर्धनता को इस संदर्भ में देखा जाता है कि निर्धनों को बेहतर माहौल और अधिक अच्छे वातावरण में रहने वाले सम्पन्न लोगों की सामाजिक क्षमता से अपवर्जित रहकर केवल निकृष्ट वातावरण में दूसरे निर्धनों के साथ रहना पड़ता है। दूसरे शब्दों में, सामाजिक अपवर्जन एक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति या समूह उन सुविधाओं, लाभों और अवसरों का उपभोग नहीं कर पाता है जिनका उपभोग उच्च वर्ग के लोग करते हैं। इस प्रकार सामाजिक अपवर्जन लोगों की आय में ही कमी नहीं करता, बल्कि उससे कहीं अधिक क्षति पहुँचाता है।
प्रश्न 3. निर्धनता के संदर्भ में असुरक्षा से आप