Socialism in Europe and the Russian Revolution
[इतिहास] यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
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(8) प्रत्येक नागरिक बोलने, लिखने और छापने के लिए आजाद है। लेकिन कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसी स्वतंत्रता के दुरुपयोग की जिम्मेदारी भी उसी की होगी।
(9) सार्वजनिक सेना तथा प्रशासन के खर्चे चलाने के लिए एक सामान्य कर लगाना अपरिहार्य है। सभी नागरिकों पर उनकी आय के अनुसार समान रूप से कर लगाया जाना चाहिए।
(10) संपत्ति के अधिकार से किसी भी व्यक्ति को वंचित नहीं किया जा सकता है, जब तक कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक आवश्यकता के लिए संपत्ति का अधिग्रहण करना आवश्यक न हो। ऐसे मामले में अग्रिम मुआवजा जरूर दिया जाना चाहिए।
2. यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रान्ति
क्रियाकलाप
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प्रश्न-निजी संपत्ति के बारे में पूँजीवादी और समाजवादी विचारधारा के बीच दो अंतर बताइए।
उत्तर-
| पूँजीवादी विचारधारा | समाजवादी विचारधारा |
|---|---|
| 1. पूँजीवादी निजी सम्पत्ति के पक्षधर थे। | 1. समाजवादी मानते थे कि समस्त संपत्ति समाज के नियंत्रण में होनी चाहिए। |
| 2. पूँजीवादी मानते थे कि लाभ के अधिकारी फैक्ट्री मालिक ही होंगे। | 2. समाजवादी मानते थे कि संपत्ति मजदूरों के कठिन श्रम का ही परिणाम है, इसलिए वे ही इसके अधिकारी हैं। |
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प्रश्न-रूस में 1905 में क्रांतिकारी उथल-पुथल क्यों पैदा हुई थी? क्रांतिकारियों की क्या माँगें थीं?
उत्तर-(1) 1905 में क्रांतिकारी उथल-पुथल पैदा होने के कारण- आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ीं कि वास्तविक वेतन में प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी। पुतिलोव आयरन वर्क्स से अनेक श्रमिकों को निकाल दिया गया था। इसलिए मजदूरों ने हड़ताल कर दी। मजदूर स्त्रियाँ, पुरुष तथा बच्चे शांतिपूर्ण ढंग से एक जुलूस के रूप में पादरी गैपॉन के नेतृत्व में जार को ज्ञापन देने जा रहे थे। परन्तु विंटर पैलेस के सामने पहुँचने पर पुलिस तथा कौसैक्स द्वारा उन पर गोलियाँ बरसाई गईं, जिससे से अधिक मजदूर मारे गए व से अधिक घायल हुए। रूस में 1905 की क्रांतिकारी गतिविधियाँ इसी कारण हुईं।
(2) क्रांतिकारियों की माँगें थीं- केवल आठ घंटे काम, वेतनों में बढ़ोतरी, कार्य की परिस्थितियों में सुधार तथा नागरिक स्वतंत्रता के अधिकारों की प्राप्ति।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात 1905 से पहले कैसे थे?
उत्तर- 1905 से पहले रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट हैं-
(1) सामाजिक हालात- (i) देहाती क्षेत्रों में समाज किसानों, सामंतों तथा चर्च के बीच बंटा हुआ था। देहात की ज्यादातर जमीन पर किसान खेती करते थे लेकिन विशाल सम्पत्तियों पर सामंतों, राजशाही और ऑर्थोडॉक्स चर्च का कब्जा था।
(ii) किसान बहुत धार्मिक स्वभाव के थे। वे सामंतों और नवाबों का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करते थे। इन्हें सामंतों के अनेक अत्याचारों का सामना करना पड़ता था। यहाँ के किसान समय-समय पर सारी जमीन को अपने कम्यून को सौंप देते थे और फिर कम्यून ही प्रत्येक परिवार की जरूरत के हिसाब से किसानों को जमीन बांटता था।
(iii) कुलीन और मध्यम वर्ग के लोग किसान तथा मजदूरों को हीन तथा घृणा की दृष्टि से देखते थे। पादरी वर्ग भी जनसाधारण वर्ग के लोगों का शोषण करता था।
(iv) शहरी समाज कारीगरों, मजदूरों तथा कुलीनों एवं उद्योगपतियों में बंटा हुआ था। उद्योग बहुत कम थे। ज्यादातर उत्पादन कारीगर ही करते थे। 1900 तक कुछ इलाकों में तो कारीगरों और कारखाना मजदूरों की संख्या लगभग बराबर हो चुकी थी।
(v) सामाजिक स्तर पर मजदूर बंटे हुए थे। मजदूरों की तरह किसान भी बंटे हुए थे।
(vi) महिलाएँ भी कारखानों में काम करती थीं लेकिन उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता था।
(2) आर्थिक हालात- (i) 1905 से पूर्व रूसी साम्राज्य की लगभग प्रतिशत जनता आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर थी। इनमें अधिकतर श्रमिक या छोटे किसान थे। उनकी दशा बहुत दयनीय थी।
(ii) देहात की विशाल सम्पत्तियों पर सामंतों, राजशाही और ऑर्थोडॉक्स चर्च का कब्जा था।
(iii) शहरों में अधिकतर लोग कारीगर तथा मजदूर थे। ज्यादातर कारखाने उद्योगपतियों की निजी सम्पत्ति थे। बहुत सारे कारखाने 1890 के दशक में चालू हुए।
(iv) मजदूरों को बहुत कम वेतन दिया जाता था। उन्हें कारखानों में 10 से 12 घण्टों तक कार्य करना पड़ता था। महिलाओं का वेतन पुरुषों से कम होता था।
(v) जार की निरंकुश सरकार ने श्रमिकों, मजदूरों तथा किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए कोई प्रयत्न नहीं किया था।
(3) राजनीतिक हालात-(i) 1905 से पहले रूस में निरंकुश राजशाही थी। वहाँ अजबायदेह तथा स्वेच्छाचारी शासन था। जारशाही की निरंकुशता के कारण सर्वत्र असंतोष व्याप्त था। इसी समय रूस-जापान युद्ध में रूसी सेनाओं को भारी पराजय का सामना करना पड़ा। इसने जनता के असंतोष को चरम पर पहुँचा दिया था।
(ii) जार राष्ट्रीय संसद के अधीन नहीं था। अतः जार के समक्ष संसद का कोई महत्त्व नहीं था।
(iii) मजदूरों, भूमिहीनों तथा महिलाओं को शासन में भाग लेने का कोई अधिकार नहीं था। प्रशासन अयोग्य और भ्रष्ट अधिकारियों के हाथों में था।
(iv) राजनीतिक दलों के गठन को मान्यता नहीं थी।
प्रश्न 2. 1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले किन-किन स्तरों पर भिन्न थी?
उत्तर- 1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले निम्न स्तरों पर भिन्न थी-
(1) रूसी साम्राज्य की लगभग 85 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर थी जबकि यूरोप के बाकी देशों में खेती पर आश्रित जनता का प्रतिशत इतना नहीं था।
(2) रूसी साम्राज्य के किसान अपनी जरूरतों के साथ-साथ बाजार के लिए भी अन्न उपजाते थे जबकि अधिकांशतः यूरोप में ऐसा नहीं था।
(3) रूसी किसानों की जोतें अन्य यूरोपीय देशों के किसानों की तुलना में छोटी थीं।
(4) रूस के किसान नवाबों व सामंतों का बिल्कुल सम्मान नहीं करते थे, जबकि यूरोप के अन्य देशों के किसान इनका सम्मान करते थे।
(5) रूस में उद्योग कम थे। अतः मजदूर भी कम थे, जबकि यूरोप के अन्य देशों में मजदूरों की संख्या अधिक थी।
(6) रूस के किसानों तथा मजदूरों में यूरोप के अन्य देशों की अपेक्षा संगठन की कमी थी।
(7) रूस के किसान स्वाभाविक रूप से समाजवादी भावना वाले लोग थे। वे समय-समय पर अपनी जमीन कम्यून (मीर) को सौंप देते थे और फिर कम्यून ही प्रत्येक परिवार की जरूरत के हिसाब से किसानों को जमीन बाँटता था, जबकि यूरोप के बाकी देशों में ऐसा नहीं था।
प्रश्न 3. 1917 में जार का शासन क्यों खत्म हो गया?
उत्तर- 1917 में जार का शासन खत्म होने के निम्न कारण थे-
(1) निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक-रूस में निरंकुश राजशाही थी। तत्कालीन जार निकोलस II भी निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक था। उसकी नीतियों से प्रजा में असंतोष व्याप्त था।
(2) 1905 की क्रांति-1905 की क्रांति ने जार के शासन के खात्मे की भूमिका तैयार कर दी थी। 1905 की क्रांति के दौरान जार को एक निर्वाचित परामर्शदाता संसद या ड्यूमा के गठन पर अपनी सहमति देनी पड़ी थी। 25 फरवरी, 1917 को इस ड्यूमा की बर्खास्तगी भी जार के शासन के अन्त का प्रमुख कारण बनी।
(3) प्रथम विश्व युद्ध-1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने पर जार ने रूस के भी युद्ध में भाग लेने की घोषणा कर दी। शुरू में जनता ने जार का साथ दिया। युद्ध लम्बा खिंचने पर जार ने ड्यूमा में मौजूद मुख्य पार्टियों से सलाह लेना छोड़ दिया। इससे जार के प्रति जनसमर्थन कम होने लगा।
इसके साथ ही जर्मनी और आस्ट्रिया में रूस की भारी पराजय हुई। 1917 तक 70 लाख व्यक्ति मारे जा चुके थे तथा 30 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गये थे। सैनिक युद्ध के विरुद्ध हो गये थे। सेना की शक्ति बढ़ाने के लिए किसानों तथा श्रमिकों को सेना में जबरदस्ती भर्ती किया जाने लगा। इससे लोगों में असंतोष था।
(4) तात्कालिक कारण-(i) 1916-17 में रूस में अनाज (रोटी तथा आटे) की भारी किल्लत हो गई। रोटी की दुकानों पर अक्सर दंगे होने लगे।
(ii) 22 फरवरी को पेत्रोग्राद में एक फैक्ट्री में तालाबंदी घोषित कर दी गई। इसके समर्थन में 50 अन्य फैक्ट्रियों के मजदूरों ने भी हड़ताल कर दी।
(iii) 25 फरवरी को सरकार ने ड्यूमा को बर्खास्त कर दिया। इसके विरोध में भारी संख्या में लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किये।
(iv) 27 फरवरी को रोटी, तनख्वाह, काम के घंटों में कमी तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के पक्ष में नारे लगाते।
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असंख्य लोग सड़कों पर जमा हो गए। सरकार ने घुड़सवार फौज को प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ बरसाने का आदेश दिया किन्तु सैनिक टुकड़ियों ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। कुछ अन्य रेजीमेन्टों ने भी बगावत कर दी तथा मजदूरों के साथ मिल गये।
उसी शाम को सिपाहियों तथा मजदूरों ने मिलकर पेत्रोग्राद सोवियत का निर्माण कर लिया। सैनिक कमान्डरों की सलाह पर मार्च को जार ने गद्दी छोड़ दी।
इस प्रकार उपर्युक्त कारणों से में जार का शासन खत्म हो गया।
प्रश्न 4. दो सूचियाँ बनाइये : एक सूची में फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाओं और प्रभावों को लिखिए और दूसरी सूची में अक्टूबर क्रांति की प्रमुख घटनाओं और प्रभावों को दर्ज कीजिए।
उत्तर - सूची I : फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाएँ तथा प्रभाव
फरवरी, - नेवा नदी के दाहिने किनारे की एक फैक्ट्री में तालाबंदी।
फरवरी, - फैक्ट्रियों के श्रमिकों की हड़ताल।
फरवरी, - सरकार द्वारा ड्यूमा को बर्खास्त कर दिया गया। राजनीतिज्ञों द्वारा इस कदम की आलोचना।
फरवरी, - श्रमिक बहुत बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे।
फरवरी, - श्रमिकों ने पुलिस मुख्यालय पर हमला करके उसे नष्ट कर दिया।
मार्च, - जार का पदत्याग।
प्रभाव - जार के शासन का अंत।
अंतरिम सरकार का गठन।
जनसभाओं तथा संगठन बनाने पर प्रतिबन्ध हटाये गये।
बोल्शेविकों के नेता व्लादिमीर लेनिन रूस लौट आए और उन्होंने 'अप्रैल थीसिस' का मांग पत्र रखा।
जुलाई, में अंतरिम सरकार और बोल्शेविकों के बीच टकराव बढ़ा।
सूची II : अक्टूबर क्रांति की मुख्य घटनाएँ तथा प्रभाव
जैसे-जैसे अंतरिम सरकार और बोल्शेविकों के बीच संघर्ष बढ़ता गया, वैसे-वैसे बोल्शेविकों का विद्रोह बढ़ता गया। सितम्बर में लेनिन ने सरकार के विरुद्ध विद्रोह हेतु चर्चा प्रारंभ कर दी थी।
अक्टूबर, - लेनिन ने पेत्रोग्राद सोवियत और बोल्शेविक पार्टी को सत्ता हथियाने के लिए राजी कर लिया। इस कार्य हेतु एक सैन्य क्रांतिकारी समिति का गठन किया गया।
अक्टूबर, - विद्रोह की शुरुआत हुई। सरकार समर्थक सैनिकों द्वारा दो बोल्शेविक समाचारपत्रों की इमारतों तथा टेलीफोन व टेलीग्राफ विभागों पर नियंत्रण किया गया। विंटर पैलेस की सुरक्षा का प्रबंध किया गया। इन सरकारी गतिविधियों के जवाब में सैन्य क्रांतिकारी समिति के सदस्यों ने अनेक सैन्य ठिकानों पर कब्जा किया। रात होते-होते पूरा शहर समिति के नियंत्रण में आ गया और मंत्रियों ने त्यागपत्र दे दिए।
दिसम्बर, तक मॉस्को-पेत्रोग्राद क्षेत्र पर बोल्शेविकों का पूर्ण नियंत्रण हो गया।
प्रभाव - अन्तरिम सरकार का पतन।
बोल्शेविकों का सत्ता पर नियन्त्रण तथा साम्यवादी दौर की शुरुआत।
समस्त उद्योगों तथा बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
भूमि को सामाजिक सम्पत्ति घोषित कर दिया गया।
शहरों में बड़े मकानों के छोटे-छोटे हिस्से कर दिये गए और उनमें बेघरबार व जरूरतमन्द लोगों को जगह दी गई।
कुलीन वर्ग द्वारा पुरानी पदवियों के प्रयोग पर रोक लगा दी।
प्रश्न 5. बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति के फौरन बाद कौन-कौन से प्रमुख परिवर्तन किए?
उत्तर - बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति के तुरंत बाद निम्नलिखित परिवर्तन किये-
राष्ट्रीयकरण - अधिकतर उद्योग और बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और उनका स्वामित्व व प्रबंधन सरकार के नियंत्रण में आ गया।
निजी सम्पत्ति का अधिकार समाप्त - बोल्शेविकों ने निजी सम्पत्ति के अधिकार को समाप्त कर दिया और भूमि को सामाजिक संपत्ति घोषित कर दिया गया तथा किसानों को अभिजात वर्ग की जमीनों पर नियंत्रण करने का अधिकार दिया गया। शहरों में मकान-मालिकों के लिए पर्याप्त हिस्सा छोड़कर उनके बड़े घरों के अनेक छोटे-छोटे हिस्से कर उनमें बेघरबार कई परिवारों को आवास दिया गया।
अभिजात पदवियों की समाप्ति - अभिजात वर्ग द्वारा पुरानी पदवियों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई।
वर्दी बदलना - बदलाव को स्पष्ट रूप से
प्रदर्शित करने के उद्देश्य से सेना और सरकारी अधिकारियों की वर्दियां बदल दी गईं।
(5) पार्टी का नाम बदलना- बोल्शेविक पार्टी का नाम बदलकर रूसी साम्यवादी पार्टी (बोल्शेविक) कर दिया गया।
(6) एक दलीय अधिनायकत्व- अखिल रूसी सोवियत कांग्रेस को देश की संसद का दर्जा दे दिया गया तथा रूस अब एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था वाला देश बन गया। ट्रेड यूनियनों पर पार्टी का नियंत्रण हो गया तथा गुप्तचर पुलिस बोल्शेविकों की आलोचना करने वालों को दंडित करती थी।
प्रश्न 6. निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखिये-
(1) कुलक
(2) ड्यूमा
(3) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार
(4) उदारवादी
(5) स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम।
उत्तर-
(1) कुलक- रूस में सम्पन्न किसानों को कुलक कहा जाता था। 1928 में साम्यवादी पार्टी के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया तथा कुलकों के खेतों में अनाज उत्पादन व संग्रहण का निरीक्षण किया। कुलकों के ठिकानों पर छापे भी मारे गये। स्टालिन के सामूहिकीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत रूस में कुलकों का सफाया किया गया।
(2) ड्यूमा- रूस में निर्वाचित परामर्शी संसद को ड्यूमा कहते हैं। इसे 1905 की क्रांति के पश्चात् जार द्वारा गठित किया गया था। अपनी सत्ता पर किसी भी तरह की जवाबदेही या अंकुश से बचने के लिए जार इसे बार-बार बर्खास्त कर देता था। उसने प्रथम ड्यूमा 75 दिनों के भीतर स्थगित कर दी। दूसरी ड्यूमा को 3 महीने के भीतर बर्खास्त कर दिया। तीसरी ड्यूमा में उसने रूढ़िवादी राजनेताओं को भर डाला।
(3) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार- फैक्ट्री मजदूरों का 31 प्रतिशत महिला कामगारों का था, परंतु उन्हें पुरुष श्रमिकों से कम मजदूरी मिलती थी। इसी कारण उन्होंने विद्रोह में पुरुषों का साथ दिया। 22 फरवरी, 1917 को कई फैक्ट्रियों में महिला कामगारों ने हड़ताल की। बाद में इस दिन को 'अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस' का नाम दिया गया। वर्तमान कैलेंडर के अनुसार यह तिथि 8 मार्च है। रूसी क्रांति के दौरान महिलाएँ पुरुष क्रांतिकारियों को प्रेरित करती थीं।
(4) उदारवादी- (i) उदारवादी रूस में सामाजिक परिवर्तन के पक्षधर थे।
(ii) वे राजवंश की अनियंत्रित शक्ति के विरुद्ध थे।
(iii) वे चाहते थे कि राष्ट्र धर्म-निरपेक्ष हो, अर्थात् सभी धर्मों का सम्मान हो।
(iv) वे सरकार के विरुद्ध व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा चाहते थे।
(v) वे चाहते थे कि राष्ट्र को एक निर्वाचित संसद द्वारा गठित और एक स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा लागू विधान के अनुसार चलाया जाए।
(vi) किंतु वे लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते थे। वे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के भी विरुद्ध थे। वे चाहते थे कि केवल सम्पत्तिधारी पुरुष ही वोट दें।
(5) स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम-
(i) रूस में अनाज की कमी को देखते हुए स्टालिन ने छोटे-छोटे खेतों के सामूहिकीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की क्योंकि वह मानता था कि छोटे-छोटे भूमि के टुकड़े आधुनिकीकरण में बाधा डालते हैं।
(ii) इसलिए कुलकों का सफाया कर तथा छोटे-छोटे किसानों से उनकी जमीन छीनकर राज्य के नियंत्रण में एक विशाल जमीन का टुकड़ा बनाया गया।
(iii) सभी किसानों को राज्य ने बाध्य किया कि वे सामूहिक खेती में कार्य करें।
(iv) सामूहिक खेती करने के लिए बड़ी भूमि अर्जित करना ही स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम कहलाया। इसके तहत ज्यादातर जमीन और साजो-सामान सामूहिक खेतों के स्वामित्व में सौंप दिए गए। सभी किसान सामूहिक खेतों में काम करते थे और कोलखोज के मुनाफे को सभी किसानों के बीच बाँट दिया जाता था।
(v) उसके इस कार्यक्रम की अनेक लोगों ने आलोचनाएँ भी कीं किन्तु उसने आलोचकों को सख्ती से दबा दिया।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
निजी सम्पत्ति के विरोधी थे-
(अ) उदारवादी
(ब) रैडिकल
(स) रूढ़िवादी
(द) समाजवादीमहिला मताधिकार आंदोलन के समर्थक थे-
(अ) उदारवादी
(ब) रैडिकल
(स) रूढ़िवादी
(द) समाजवादीअतीत का सम्मान करते हुए सामाजिक परिवर्तन लाने की धीमी प्रक्रिया के समर्थक थे-
(अ) उदारवादी
(ब) समाजवादी
(स) रूढ़िवादी
(द) साम्राज्यवादसामूहिक उद्यम के विचार में दिलचस्पी रखने वाले समाजवादी थे-
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(अ) लुई ब्लैंक (ब) कार्ल मार्क्स
(स) फ्रेडरिक एंगेल्स (द) गिसेस्पे मेजिनी
5. 'औद्योगिक समाज एक पूँजीवादी समाज है।' यह विचार है-
(अ) रूसो का (ब) लॉक का
(स) मार्क्स का (द) मॉण्टेस्क्यू का
6. रूसी क्रान्ति के समय रूस का शासक था-
(अ) निकोलस प्रथम (ब) लेनिन
(स) निकोलस द्वितीय (द) ट्राटस्की
7. बोल्शेविक क्रान्ति के नाम से जाना जाता है-
(अ) फ्रांस की क्रांति को (ब) रूस की क्रांति को
(स) अमरीकी क्रांति को (द) भारत की क्रांति को
उत्तरमाला-1. (द) 2. (ब) 3. (स) 4. (अ) 5. (स) 6. (स) 7. (ब)
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
- रूस में ........................ में 'रूसी सामाजिक लोकतांत्रिक श्रमिक पार्टी' का गठन किया गया था। (सन् 1898/सन् 1900/सन् 1917/सन् 1914)
- ........................ प्रथम विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों के खेमों में शामिल राष्ट्र था। (जर्मनी/आस्ट्रिया/तुर्की/रूस)
- रूस के जार ने ........................ को राजगद्दी छोड़ दी। (2 मार्च, 1917/2 फरवरी, 1917/2 अप्रैल, 1917)
- ........................ में सोवियत संघ (यू एस एस आर) की स्थापना हुई। (1917/1918/1920/1922)
उत्तर-1. सन् 1898 2. रूस 3. 2 मार्च, 1917 4. 1922
निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये-
- 1914 तक यूरोप में समाजवादी कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। ( )
- 1915 की अक्टूबर क्रांति के जरिए रूस की सत्ता पर समाजवादियों ने कब्जा कर लिया। ( )
- जनवरी 1920 तक भूतपूर्व रूसी साम्राज्य के अधिकतर भाग पर बोल्शेविकों का नियंत्रण कायम हो चुका था। ( )
- 1914 में रूस और उसके पूरे साम्राज्य पर लेनिन का शासन था। ( )
उत्तर-1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. असत्य
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) रूसी साम्राज्य में सक्रिय मुस्लिम सुधारवादी | (a) सोवियत |
| (ii) महिला मताधिकार आंदोलन के समर्थक | (b) जदीदी |
| (iii) वोट का अधिकार केवल | (c) रेडिकल समूह |
| (iv) निजी सम्पत्ति के विरोधी | (d) उदारवादी समूह |
| (v) रूस के स्थानीय स्वशासी संगठन | (e) समाजवादी समूह |
| सम्पत्तिधारियों को देने के पक्षधर |
उत्तर-(i) (b), (ii) (c), (iii) (d), (iv) (e), (v) (a)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. सन् 1898 ई. में रूस में समाजवादियों ने किस पार्टी की स्थापना की?
उत्तर- रूसी सामाजिक लोकतांत्रिक श्रमिक पार्टी की।
प्रश्न 2. रूसी क्रांति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि क्या थी?
उत्तर- चर्च की शक्ति एवं निरंकुश शासन की समाप्ति।
प्रश्न 3. रूस की क्रांति को विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटना क्यों माना जाता है?
उत्तर- समाजवाद की स्थापना के कारण।
प्रश्न 4. मताधिकार आन्दोलन किसे कहते हैं?
उत्तर- वोट डालने का अधिकार पाने के लिए चलाये गये आन्दोलन को मताधिकार आन्दोलन कहते हैं।
प्रश्न 5. राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं का क्या उद्देश्य था?
उत्तर- राष्ट्रवादी कार्यकर्ता क्रांति के द्वारा ऐसे राष्ट्रों की स्थापना करना चाहते थे जिनमें सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हों।
प्रश्न 6. कोऑपरेटिव क्या थे?
उत्तर- कोऑपरेटिव ऐसे लोगों के समूह थे जो मिलकर चीजें बनाते थे और मुनाफे को प्रत्येक सदस्य द्वारा किये गये काम के हिसाब से आपस में बांट लेते थे।
प्रश्न 7. समाजवाद के बारे में नए तर्क किसने पेश किये?
उत्तर- कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने।
प्रश्न 8. 1917 की रूसी क्रांति किस विचारधारा से सर्वाधिक प्रभावित थी?
उत्तर- समाजवादी विचारधारा से।
प्रश्न 9. विचारधारा के आधार पर रूस में समाजवादियों के दो मुख्य दल कौनसे थे?
उत्तर- (1) बोल्शेविक (2) मेन्शेविक।
प्रश्न 10. कॉमिनटर्न से क्या आशय है?
उत्तर- कॉमिनटर्न कम्युनिस्ट पार्टियों की अन्तर्राष्ट्रीय संस्था है। यह शब्द 'कम्युनिस्ट इंटरनेशनल' (Communist International) का संक्षिप्त रूप है।
प्रश्न 11. चेका क्या थी?
उत्तर—चेका एक गुप्तचर पुलिस थी। बाद में इसका नाम ओजीपीयू तथा एनकेवीडी रखा गया।
प्रश्न 12. समाजवाद की कोई दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर—(1) समाजवाद निजी सम्पत्ति का विरोध करता है।
(2) समाजवाद में उत्पादन के समस्त साधनों पर सरकार का नियंत्रण होता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. 19वीं शताब्दी में यूरोप में किस प्रकार के सामाजिक-आर्थिक बदलाव आ रहे थे?
उत्तर—फ्रांस की क्रांति के बाद के यूरोप में 19वीं शताब्दी में नए शहर बस रहे थे, नये-नये औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे थे, रेलवे का काफी विस्तार हो चुका था और औद्योगिक क्रांति सम्पन्न हो चुकी थी। औद्योगीकरण ने लोगों को कारखानों में ला दिया था।
प्रश्न 2. रेडिकल और उदारवादियों की मान्यता के अनुसार समाज कब तरक्की कर सकता है?
उत्तर—रेडिकल और उदारवादियों का व्यक्तिगत प्रयास, श्रम और उद्यमशीलता में गहरा विश्वास था। उनकी मान्यता थी कि यदि हरेक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता दी जाये, गरीबों को रोजगार मिले और जिनके पास पूँजी है, उन्हें बिना रोक-टोक काम करने का मौका दिया जाये, तो समाज तरक्की कर सकता है।
प्रश्न 3. 1917 की रूस की क्रान्ति ने यूरोप के अन्य देशों के समाजवादी संगठनों के किस समीकरण को बदल दिया था?
उत्तर—यद्यपि 1914 तक इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी आदि यूरोप के देशों में समाजवादी संगठन बन चुके थे, लेकिन वे कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। उनके प्रतिनिधि बड़ी संख्या में जीतते भी रहे थे। लेकिन 1917 की रूस की अक्टूबर क्रांति ने यूरोप के इस समीकरण को उलट दिया और रूस की सत्ता पर समाजवादियों ने कब्जा कर लिया।
प्रश्न 4. 'खूनी रविवार' घटना पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर—रूस में हड़ताली मजदूरों का एक जुलूस जब फादर गैपॉन के नेतृत्व में विंटर पैलेस (जार का महल) पहुँचा तो पुलिस और कोसैक्स ने मजदूरों पर हमला बोल दिया। इस घटना में 100 से ज्यादा मजदूर मारे गये तथा लगभग 300 मजदूर घायल हुए। यह रविवार का दिन था। जार की इस बर्बरतापूर्ण कार्यवाही की घटना को इतिहास में 'खूनी रविवार' के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 5. कुछ रूसी समाजवादी क्यों मानते थे कि रूस में किसान ही समाजवादी क्रांति की मुख्य शक्ति बनेंगे?
उत्तर—कुछ रूसी समाजवादियों को लगता था कि रूसी किसान जिस तरह से कम्युन व्यवस्था के तहत समय-समय पर जमीन बाँटते हैं। उससे पता लगता है कि वे स्वाभाविक रूप से समाजवादी भावना के लोग हैं। इसी आधार पर उनका मानना था कि रूस में मजदूर नहीं, किसान ही क्रांति की मुख्य शक्ति बनेंगे।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न—
प्रश्न 1. उदारवादी तथा रैडिकल के विचारों में अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—उदारवादी तथा रैडिकल के विचारों में अन्तर निम्न प्रकार थे—
| उदारवादी | रैडिकल |
|---|---|
| 1. उदारवादी वंश-आधारित शासकों की अनियंत्रित सत्ता के विरोधी थे। यह समूह प्रतिनिधित्व पर आधारित निर्वाचित सरकार के पक्ष में था। परन्तु सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के पक्ष में नहीं था। | 1. रैडिकल ऐसी सरकार के पक्षधर थे जो देश की आबादी के बहुमत के समर्थन पर आधारित हो। |
| 2. इसका मानना था कि वोट का अधिकार केवल सम्पत्तिधारियों को ही मिलना चाहिए। | 2. ये सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार के समर्थक थे। |
| 3. ये बड़े जमींदारों तथा सम्पन्न उद्योगपतियों को विशेषाधिकार देने के समर्थक थे। | 3. ये बड़े जमींदारों तथा सम्पन्न उद्योगपतियों को प्राप्त किसी भी तरह के विशेषाधिकारों के खिलाफ थे। |
| 4. ये निजी सम्पत्ति के पक्षधर थे। | 4. ये भी निजी सम्पत्ति के विरोधी नहीं थे किन्तु केवल कुछ लोगों के पास सम्पत्ति के संकेन्द्रन का विरोध करते थे। |
प्रश्न 2. औद्योगीकरण द्वारा हुए सामाजिक व आर्थिक परिवर्तनों का वर्णन करो।
उत्तर—औद्योगीकरण द्वारा अग्र सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन हुए—
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(1) औद्योगीकरण के कारण अनेक नये उद्योग खुले तथा नये-नये औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हुआ।
(2) रेलवे का काफी विकास एवं विस्तार हुआ।
(3) तेजी से शहरीकरण में वृद्धि हुई। नये शहर बसे।
(4) शहरीकरण से आवास की समस्या पैदा हुई, गंदी बस्तियों का विकास हुआ, साफ-सफाई का काम मुश्किल हुआ।
(5) औरतें-आदमी, बच्चे सब कारखानों में काम करने लगे।
(6) काम की पारी के घण्टे बहुत अधिक होते थे तथा मजदूरी कम होती थी।
(7) बेरोजगारी की समस्या आम थी। औद्योगिक वस्तुओं की मांग में गिरावट आने पर बेरोजगारी और तेजी से बढ़ जाती थी।
प्रश्न 3. '1870 के दशक तक समाजवादी विचार पूरे यूरोप में फैल चुके थे।' स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- 1870 के दशक तक समाजवादी विचार पूरे यूरोप में फैल चुके थे। यह बात निम्न तथ्यों से स्पष्ट हो जाती हैं-
(i) समाजवादियों ने अपने प्रयासों में समन्वय लाने के लिए द्वितीय इन्टरनेशनल के नाम से एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था भी बना ली थी।
(ii) जर्मनी में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मजदूर संगठनों के गहरे रिश्ते थे। 1905 तक ब्रिटेन के समाजवादियों और ट्रेड यूनियन आंदोलनकारियों ने लेबर पार्टी नाम से अपनी एक अलग पार्टी बना ली थी। फ्रांस में भी सोशलिस्ट पार्टी के नाम से एक पार्टी का गठन किया गया।
(iii) संकट के समय अपने सदस्यों को मदद पहुँचाने के लिए इन संगठनों ने कोष स्थापित किए और काम के घंटों में कमी तथा मताधिकार के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया था।
प्रश्न 4. सन् 1917 में हुई अक्टूबर क्रांति में लेनिन की भूमिका का वर्णन तीन बिन्दुओं में कीजिए।
उत्तर- सन् 1917 में हुई अक्टूबर क्रांति में लेनिन की महत्वपूर्ण भूमिका थी-
(1) अप्रैल, 1917 में लेनिन रूस लौट आया। उसने कहा कि अब सोवियतों को सत्ता अपने हाथों में ले लेनी चाहिए।
(2) लेनिन ने अप्रैल थीसिस द्वारा तीन मांगें कीं- (i) युद्ध समाप्त किया जाये (ii) सारी जमीन किसानों के हवाले की जाये (iii) बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाये।
(3) लेनिन ने 16 अक्टूबर, 1917 को सत्ता पर कब्जा करने के लिए लियोन ट्रॉट्स्की के नेतृत्व में सोवियत की ओर से एक सैनिक क्रांतिकारी समिति का गठन कर दिया।
अन्ततः लेनिन के प्रयत्नों से बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति को अंजाम दे दिया।
प्रश्न 5. प्रथम विश्वयुद्ध का रूसी साम्राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर- प्रथम विश्वयुद्ध का रूसी साम्राज्य पर बुरा प्रभाव पड़ा। इसके प्रमुख प्रभाव निम्न रहे-
(1) इस युद्ध में 1914 से 1916 के बीच जर्मनी तथा आस्ट्रिया में रूसी सेनाओं को भारी पराजय झेलनी पड़ी, जिससे रूसी साम्राज्य की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची।
(2) 1917 तक रूस के 70 लाख लोगों की मृत्यु युद्ध के कारण हो चुकी थी।
(3) युद्ध के फलस्वरूप उद्योगों, फसलों, घरों की भारी तबाही हुई तथा 30 लाख लोग बेघर होकर शरणार्थी बन गये थे।
(4) जवान तथा स्वस्थ लोगों को युद्ध में भेजा गया जिससे देश में मजदूरों की कमी हो गई।
(5) ज्यादातर अनाज सैनिकों का पेट भरने के लिए मोर्चे पर भेजा जाने लगा। इससे रोटी तथा आटे की कमी पैदा हो गई।
इस प्रकार प्रथम विश्व-युद्ध का रूसी साम्राज्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. फ्रांसीसी क्रांति के पश्चात् यूरोप में किस तरह के विचारों का उदय हुआ? ये किस तरह के बदलाव चाहते थे?
उत्तर- फ्रांसीसी क्रांति के पश्चात् यूरोप में मुख्यतः तीन तरह के विचारों का उदय हुआ। ये समूह (1) उदारवादी (2) रैडिकल तथा (3) रूढ़िवादी कहलाये। इनके विचार निम्न प्रकार थे-
I. उदारवादी- (1) उदारवादी एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण चाहते थे, जिसमें सभी धर्मों को सम्मान मिले एवं एक समान स्थान मिले। ये वंश आधारित शासकों की अनियंत्रित सत्ता के अधिकार का विरोध करते थे।
(2) ये एक ऐसी सरकार के पक्ष में थे जो निर्वाचित हो, शासकों और अफसरों के प्रभाव से मुक्त हो तथा सुप्रशिक्षित न्यायपालिका द्वारा स्थापित किए गए कानूनों के अनुसार शासन-कार्य चलाए।
(3) लेकिन ये वयस्क सार्वभौमिक मताधिकार के पक्षधर नहीं थे, बल्कि केवल संपत्तिधारियों को मताधिकार देने के पक्ष में थे।
(4) सरकार के समक्ष व्यक्ति मात्र की रक्षा के पक्षधर