Food Security in India
[अर्थशास्त्र] भारत में खाद्य सुरक्षा
क्या समझते हैं?
उत्तर- निर्धनता के प्रति असुरक्षा से आशय कुछ विशेष समुदायों, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक, विधवा महिलाएँ, विकलांग व्यक्तियों आदि के भावी वर्षों में निर्धन होने या निर्धन बने रहने की अधिक संभावना से है। असुरक्षा का निर्धारण परिसम्पत्तियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों के रूप में जीविका खोजने के लिए विभिन्न समुदायों के पास उपलब्ध विकल्पों से होता है। समाज के कुछ वर्गों में उपर्युक्त मापदंडों के आधार पर लम्बे समय तक निर्धन बने रहने की संभावना रही है, इसे ही निर्धनता के सम्बन्ध में असुरक्षा कहेंगे।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत में निर्धनता के प्रमुख कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्हें दूर करने हेतु सुझाव दीजिए।
उत्तर - निर्धनता के कारण एवं दूर करने हेतु सुझाव
भारत में निर्धनता हेतु अनेक कारण जिम्मेदार हैं। भारत में निर्धनता के प्रमुख कारणों एवं उन्हें दूर करने हेतु सुझावों को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है -
(1) औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा शोषण- भारत लम्बे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा तथा उन्होंने अपनी नीतियों से भारत का शोषण किया तथा यहाँ के उद्योग-धन्धों एवं पारम्परिक हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया जिससे बेरोजगारी बढ़ी एवं निर्धनता में भी वृद्धि हुई। सरकार को विभिन्न रियायतें एवं प्रोत्साहन देकर देश के हस्तशिल्प एवं अन्य लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
(2) विकास की धीमी गति- भारत में विकास की धीमी दर 1980 के दशक तक जारी रही। इसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर घटे और आय की वृद्धि दर गिरी।
(3) जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि- भारत में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है तथा रोजगार के अवसरों में धीमी गति से वृद्धि हो रही है, जिससे बेरोजगारी एवं निर्धनता की समस्या बढ़ रही है। अतः सरकार को जनसंख्या नियन्त्रण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना चाहिए।
(4) क्षेत्रीय असमानता- देश में रोजगार के अवसरों के सम्बन्ध में तथा आर्थिक गतिविधियों के सम्बन्ध में काफी असमानता पाई जाती है जिससे कुछ क्षेत्रों का विकास तीव्र हो गया तथा कुछ राज्य पिछड़
गए। अतः सरकार को पिछड़्रे हुए राज्यों में आर्थिक विकास के प्रयास तेज करने चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(5) बेरोजगारी- भारत में निर्धनता की समस्या का मुख्य कारण बेरोजगारी है, अधिक बेरोजगारी से निर्धनता भी बढ़ती है। इस सम्बन्ध में सरकार को रोजगार सृजन कार्यक्रमों को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(6) आय असमानता- देश में व्यक्तियों में आय में काफी असमानता पाई जाती है। यह आय असमानता निर्धनता को और बढ़ाती है; क्योंकि धनी लोग अधिक धनी एवं निर्धन लोग अवसरों के अभाव में और निर्धन हो जाते हैं। अतः सरकार को विभिन्न तरीकों से धनियों से पैसा लेकर उन्हें निर्धनों के कल्याण में लगाना चाहिए।
(7) कृषि का पिछड़ापन- देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है तथा कृषि की स्थिति अत्यन्त पिछड़ी हुई है, अतः इससे निर्धनता को बढ़ावा मिलता है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा सरकार द्वारा कृषकों की समस्याओं को दूर करने के प्रयास करने चाहिए।
(8) सामाजिक रीति-रिवाज- भारत में अशिक्षा, अन्धविश्वास एवं पुराने रीति-रिवाजों के फलस्वरूप लोगों को भारी व्यय करना पड़ता है जिससे वे ऋणग्रस्त हो जाते हैं तथा निर्धनता के कुचक्र में फँस जाते हैं। अतः ऐसे लोगों को जागरूक बनाना चाहिए तथा अनावश्यक व्ययों पर रोक लगाने के प्रयास करने चाहिए।
4. भारत में खाद्य सुरक्षा
पाठगत प्रश्न / क्रियाकलाप
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प्रश्न- कृषि एक मौसमी क्रिया क्यों है?
उत्तर- कृषि एक मौसमी क्रिया इसलिए है कि कृषि पदार्थों का उत्पादन एक विशेष मौसम में ही होता है। जैसे रबी एवं खरीफ की फसल के लिए एक निश्चित मौसम है। कृषि के अन्तर्गत बुआई, कटाई, निराई आदि का कार्य निश्चित मौसम में ही होता है। इसी कारण कृषि क्षेत्र में लगे मजदूर वर्ष में कई महीने बेरोजगार रहते हैं क्योंकि कृषि में उन्हें एक मौसम विशेष में ही रोजगार मिलता है।
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प्रश्न-एफ.सी.आई. के भंडारों में खाद्यान्न ठसाठस क्यों भरा हुआ है?
उत्तर-एफ.सी.आई. के भंडारों में खाद्यान्न ठसाठस इसलिए भरा हुआ है क्योंकि (i) पी. डी. एस. डीलर की दुकान पर घटिया किस्म का खाद्यान्न होने के कारण उसकी बिक्री नहीं होती है। (ii) कार्ड की व्यवस्था और कीमतों की अलग-अलग दर के कारण लोग पी. डी. एस. डीलर से खाद्यान्न नहीं खरीदते हैं। क्योंकि ए. पी. एल. परिवार कार्ड धारकों के लिए निर्धारित कीमतें बाजार कीमतों के समकक्ष हैं।
प्रश्न 1. भारत में खाद्य सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर- भारत में सरकार द्वारा तैयार की गई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के कारण अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख घटक निम्न प्रकार हैं-
(1) बफर स्टॉक- बफर स्टॉक भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से सरकार द्वारा क्रय कर एकत्रित किया अनाज, गेहूँ और चावल का भण्डार है। बफर स्टॉक में सरकार न्यूनतम समर्थित कीमत पर खाद्यान्न खरीदती है तथा निर्धन लोगों को कम कीमत पर अनाज उपलब्ध करवाती है; साथ ही, आपातकालीन स्थिति में भी सरकार बफर स्टॉक का उपयोग करती है। अतः बफर स्टॉक से भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
(2) सार्वजनिक वितरण प्रणाली- भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का दूसरा महत्त्वपूर्ण घटक सार्वजनिक वितरण प्रणाली है। इस प्रणाली के अन्तर्गत सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर उचित दर वाली अथवा राशन की दुकानें खोलती है तथा इन दुकानों के माध्यम से सरकार निर्धन वर्ग को बहुत कम कीमत पर खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक वस्तुएँ; जैसे- चीनी, साबुन, तेल आदि उपलब्ध करवाई जाती हैं।
(3) सरकारी कार्यक्रम एवं योजनाएँ- भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अनेक सरकारी कार्यक्रम एवं योजनाएँ चलाई हैं। भारत सरकार ने 1975 में एकीकृत बाल विकास सेवाएँ शुरू कीं, 1977-78 में काम के बदले अनाज योजना प्रारम्भ की। 2013 में भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया। इसके अतिरिक्त भी सरकार द्वारा अनेक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनसे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
प्रश्न 2. कौन लोग खाद्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हो सकते हैं?
उत्तर- भारत में अनेक आर्थिक वर्ग एवं सामाजिक वर्ग हैं, जो खाद्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हो सकते हैं। भारत में खाद्य एवं पोषण की दृष्टि से अधिक असुरक्षित लोग निम्न प्रकार हैं-
(i) ग्रामीण क्षेत्रों के निम्न आर्थिक समूह- भारत में खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से सबसे असुरक्षित लोगों में ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक, पारम्परिक दस्तकार, पारम्परिक सेवाएँ प्रदान करने वाले लोग, अपना छोटा-मोटा काम करने वाले लोग, निराश्रित, भिखारी आदि शामिल हैं।
(ii) शहरी क्षेत्रों के निम्न आर्थिक समूह- शहरी क्षेत्रों में खाद्य दृष्टि से सर्वाधिक असुरक्षित परिवार वे हैं जिनमें कार्य करने योग्य सदस्य प्रायः कम वेतन वाले व्यवसायों और अनियत श्रम बाजार में कार्य करते हैं तथा उन्हें बहुत कम मजदूरी पर भी पूरे समय का रोजगार नहीं मिलता है।
(iii) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ी जातियों के लोग- सामाजिक वर्गों में प्रायः खाद्य दृष्टि से सर्वाधिक असुरक्षित वर्ग में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जाति के उन परिवारों को शामिल किया जाता है, जिनके पास बहुत कम भूमि है अथवा जिनकी भूमि की उत्पादकता अत्यन्त कम है।
(iv) प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोग- वे लोग भी खाद्य दृष्टि से काफी असुरक्षित हैं जिन्हें प्राकृतिक आपदाओं के कारण कार्य की तलाश में दूसरी जगह जाना पड़ता है।
(v) निर्धन परिवारों की महिलाएँ व बच्चे- भारत में निर्धन परिवारों की महिलाएँ एवं बच्चे भी खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से काफी असुरक्षित हैं।
(vi) पिछड़े राज्यों के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के निर्धन लोग- भारत में पिछड़े हुए राज्यों, जहाँ काफी प्राकृतिक आपदाएँ आती रहती हैं, के निर्धन लोग खाद्य दृष्टि से काफी असुरक्षित हैं।
प्रश्न 3. भारत में कौन से राज्य खाद्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हैं?
उत्तर- भारत में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, छत्तीसगढ़,
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मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र का कुछ भाग खाद्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हैं।
प्रश्न 4. क्या आप मानते हैं कि हरित क्रान्ति ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना दिया है? कैसे?
उत्तर—भारत में 1960 के दशक के मध्य में खाद्यान्न उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु हरित क्रान्ति की नीति अपनाई। हरित क्रान्ति के फलस्वरूप देश में खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, विशेषकर गेहूँ एवं चावल के उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय प्रगति हुई। देश में हरित क्रान्ति के अन्तर्गत उच्च उत्पादकता वाले बीजों (एच.वाई.वी. बीजों) का उपयोग किया गया, रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उपयोग में वृद्धि हुई, सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ तथा कृषि में यन्त्रीकरण को बढ़ावा दिया गया। इन सबके फलस्वरूप देश में खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई तथा पिछले तीस वर्षों में खाद्यान्नों के मामले में भारत आत्म-निर्भर हो गया है।
प्रश्न 5. भारत में लोगों का एक वर्ग अभी भी खाद्य से वंचित है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर—भारत में निर्धनता रेखा से नीचे के लोगों की अभी भी आधारभूत आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पा रही हैं। समाज के कई आर्थिक एवं सामाजिक वर्ग ऐसे हैं, जो खाद्य की दृष्टि से सर्वाधिक असुरक्षित हैं; जैसे- भूमिहीन श्रमिक, शहरों में अनियत मजदूरी वाले श्रमिक, छोटा-मोटा काम करने वाले अनियत मजदूर, भिखारी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कई परिवार इत्यादि। साथ ही साथ प्राकृतिक आपदा एवं अकालग्रस्त क्षेत्रों में लोगों को खाद्य पदार्थ नहीं मिल पाते और वे मर जाते हैं। अतः अभी भी भारत में एक वर्ग ऐसा है, जो खाद्यान्न के अभाव में भुखमरी का शिकार है।
प्रश्न 6. जब कोई आपदा आती है तो खाद्य पूर्ति पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर—जब भी देश में कोई भी आपदा आती है तो खाद्यान्न पूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसी भी प्राकृतिक आपदा, चाहे वह अकाल हो या चाहे बाढ़ हो, खाद्यान्न की कुल उपज में गिरावट आती है। इस कारण प्राकृतिक आपदा वाले क्षेत्रों में खाद्यान्न में कमी आ जाती है, खाद्यान्न की पूर्ति में कमी एवं मांग में वृद्धि के कारण खाद्यान्न की कीमतों में वृद्धि होती है, इन ऊँची कीमतों पर कुछ लोग खाद्यान्न नहीं खरीद पाते। अगर यह आपदा अधिक विस्तृत क्षेत्र में आती है या अधिक लम्बे
समय तक बनी रहती है तो देश में उस आपदा क्षेत्र में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। भारत में कई स्थानों पर अकाल एवं भुखमरी के कारण कई मौतें हुईं हैं। यह सब खाद्य की कमी के कारण हुआ।
प्रश्न 7. मौसमी भुखमरी और दीर्घकालीन भुखमरी में भेद कीजिए।
उत्तर—मौसमी भुखमरी और दीर्घकालीन भुखमरी में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
(1) मौसमी भुखमरी फसल उगाने और काटने के चक्र से संबंधित है जबकि दीर्घकालीन भुखमरी मात्रा एवं गुणवत्ता के आधार पर अपर्याप्त आहार ग्रहण करने से सम्बन्धित है।
(2) मौसमी भुखमरी तब होती है, जब कोई व्यक्ति पूरे वर्ष काम पाने में असमर्थ रहता है। मौसमी भुखमरी ग्रामीण क्षेत्र में कृषि क्रियाओं की मौसमी प्रकृति के कारण तथा नगरीय क्षेत्र में नियमित श्रम की उपलब्धता न होने के कारण पायी जाती है; जबकि दीर्घकालीन भुखमरी निर्धन लोगों में अपनी निम्न आय और जीवित रहने के लिए खाद्य पदार्थ खरीदने की अक्षमता के कारण पायी जाती है।
प्रश्न 8. गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए सरकार ने क्या किया? सरकार की ओर से शुरू की गई किन्हीं दो योजनाओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर—भारत में गरीबों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने हेतु सरकार ने कई प्रयास किए हैं। यथा-
(1) बफर स्टॉक की व्यवस्था—सरकार ने बफर स्टॉक की व्यवस्था की है जिसके अंतर्गत सरकार भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से किसानों से उचित कीमत पर खाद्यान्न लेकर उसका भंडारण करती है तथा निर्धन लोगों को बहुत कम कीमत पर बेचती है।
(3) अनेक कार्यक्रम व योजनाएँ—सरकार ने खाद्य सुरक्षा हेतु अनेक कार्यक्रम व योजनाएँ चलाई हैं, जैसे-राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम, अन्नोदय अन्न योजना, दोपहर भोजन योजना, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम आदि।
भारत में खाद्य सुरक्षा हेतु प्रारम्भ किए गए दो प्रमुख
कार्य निम्न प्रकार हैं-
(i) राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम- पूरक श्रम रोजगार के सृजन को तीव्र करने हेतु राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम 14 नवम्बर, 2004 को प्रारंभ किया गया। यह कार्यक्रम उन सब ग्रामीण गरीबों के लिए था, जिन्हें वेतन पर रोजगार की आवश्यकता है और जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। इसमें मजदूरी के रूप में नकद व अनाज प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम को शत प्रतिशत केन्द्र द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया। इसे अब महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम में मिला दिया गया है।
(ii) अंत्योदय अन्न योजना- अंत्योदय अन्न योजना दिसम्बर, 2000 में प्रारम्भ की गई। इस योजना के अन्तर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आने वाले निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों में से एक करोड़ लोगों की पहचान की गई जिन्हें 2 रुपये किलो में गेहूँ तथा 3 रु. किलो में चावल का कुल 25 किलोग्राम अनाज उपलब्ध करवाया गया। वर्तमान में इस योजना से लाभान्वित लोगों की संख्या 2 करोड़ हो गई है तथा अनाज की मात्रा भी बढ़ाकर 35 किलोग्राम कर दी गई है।
प्रश्न 9. सरकार बफर स्टॉक क्यों बनाती है?
उत्तर– सरकार द्वारा बफर स्टॉक बनाने के दो प्रमुख कारण हैं- पहला, देश में खाद्यान्न की कमी वाले क्षेत्रों में और समाज के निर्धन लोगों में कम कीमत पर अनाज उपलब्ध करवाने के लिए तथा दूसरा, देश में आपातकाल या अन्य किसी विपदा के समय अनाज उपलब्ध करवाने के लिए।
प्रश्न 10. टिप्पणियाँ लिखें :
( क ) न्यूनतम समर्थित कीमत; ( ख ) बफर स्टॉक; ( ग ) निर्गम कीमत; ( घ ) उचित दर की दुकान।
उत्तर-( क ) न्यूनतम समर्थित कीमत-न्यूनतम समर्थित कीमत, वह कीमत है जिस पर सरकार भारतीय खाद्य निगम द्वारा किसानों से अनाज खरीदती है।
( ख ) बफर स्टॉक-बफर स्टॉक भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज, गेहूँ और चावल का भण्डार है।
( ग ) निर्गम कीमत-निर्गम कीमत वह कीमत है जिस पर सरकार राशन की दुकानों के माध्यम से निर्धनों को अनाज का वितरण करती है।
प्रश्न 11. राशन की दुकानों के संचालन में क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर- राशन की दुकानों के संचालन में कई समस्याएँ आती हैं, यथा-(1) राशन की दुकानों के संचालन में सबसे बड़ी समस्या संचालकों द्वारा की जाने वाली बेईमानी है। राशन की दुकानों के डीलर प्रायः खाद्यान्न एवं अन्य वस्तुएँ अधिक लाभ पर खुले बाजार में बेच देते हैं। इसके अतिरिक्त ये डीलर अच्छा अनाज बाजार में बेच देते हैं तथा राशन की दुकानों पर घटिया अनाज का वितरण करते हैं। (2) राशन की दुकानें समय पर नहीं खोली जाती हैं। (3) राशन की दुकानों के डीलर कम तौल के द्वारा भी बेईमानी करते हैं। (4) घटिया किस्म के अनाज का पड़ा रहना एक आम बात है, जो बिक नहीं पाता। यह एक बड़ी समस्या साबित होती रही है। राशन की दुकानें इन अनाजों को बेच नहीं पातीं, तो एफ.सी.आई. के गोदामों में अनाज का विशाल स्टॉक जमा हो जाता है। (5) वर्तमान में तीन प्रकार के कार्ड दिए जाने से भी समस्या उत्पन्न हुई है। इस व्यवस्था में निर्धनता रेखा से ऊपर वाले किसी भी परिवार को राशन की दुकान पर बहुत कम छूट मिलती है। ए.पी.एल. परिवारों के लिए कीमतें लगभग उतनी ही ऊँची हैं, जितनी खुले बाजार में। इसलिए अब लोग राशन की दुकानों से सामान खरीदने हेतु कम प्रोत्साहित होते हैं।
प्रश्न 12. खाद्य और सम्बन्धित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों की भूमिका पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर- खाद्य और सम्बन्धित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। सहकारी समितियाँ निर्धन लोगों को खाद्यान्न की बिक्री के लिए कम कीमत की दुकानें खोलती हैं। दिल्ली में मदर डेयरी उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर दूध एवं सब्जियाँ उपलब्ध करवाती है। इसी प्रकार गुजरात में अमूल के प्रयासों के फलस्वरूप ही श्वेत क्रान्ति का जन्म हुआ। महाराष्ट्र में एकाडेमी ऑफ़ डेवलपपेट साइंसेज (ए.डी.एस.) ने विभिन्न क्षेत्रों में अनाज बैंकों की स्थापना के लिए गैर-सरकारी संगठनों के नेटवर्क में सहायता की है। उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा के सम्बन्ध में सहकारी समितियों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
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बहुविकल्पीय प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत में खाद्य की दृष्टि से सर्वाधिक असुरक्षित लोगों में सम्मिलित हैं-
(अ) ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक
(ब) अनियत मजदूरी वाले श्रमिक
(स) अनुसूचित जनजाति के कुछ परिवार
(द) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 2. सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा हेतु की गई व्यवस्था में शामिल हैं-
(अ) बफर स्टॉक
(ब) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
(स) सरकारी कार्यक्रम एवं योजनाएँ
(द) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 3. हरित क्रांति का सर्वाधिक लाभ निम्न में से किन राज्यों को हुआ?
(अ) राजस्थान व उत्तरप्रदेश
(ब) पंजाब व हरियाणा
(स) महाराष्ट्र व तमिलनाडु
(द) बिहार व उड़ीसा।
प्रश्न 4. अंत्योदय अन्न योजना का लक्षित समूह है-
(अ) सभी ग्रामीण लोग
(ब) दीन वरिष्ठ नागरिक
(स) निर्धनों में सबसे निर्धन
(द) निर्धन और गैर-निर्धन।
प्रश्न 5. भारत में श्वेत क्रान्ति का सम्बन्ध था-
(अ) अण्डे उत्पादन से (ब) अनाज उत्पादन से
(स) दुग्ध उत्पादन से (द) फल उत्पादन से
प्रश्न 6. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली कब लागू की गई?
(अ) 1992 में (ब) 1997 में
(स) 2004 में (द) 2014 में
प्रश्न 7. भारत में खाद्य सुरक्षा अधिनियम किस वर्ष लागू किया गया?
(अ) 2003 में (ब) 2009 में
(स) 2013 में (द) 2018 में
उत्तरमाला- 1. (द) 2. (द) 3. (ब) 4. (स) 5. (स) 6. (ब) 7. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
प्रश्न 1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश में वर्ष में लागू की गई।
प्रश्न 2. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लक्षित समूह को खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जाता है।
प्रश्न 3. 2019-20 में देश में अनाज का उत्पादन लगभग करोड़ टन का रहा।
प्रश्न 4. बफर स्टॉक के माध्यम से सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज, गेहूँ और चावल का भंडार है। (भारतीय खाद्य निगम / भारतीय वित्त निगम)
उत्तर- 1. 1992, 2. 35 किलो, 3. 297, 4. भारतीय खाद्य निगम।
निम्न वाक्यों में सत्य/असत्य कथन छाँटिए-
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 5 किलो खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रति माह दिया जाता है।
- अमूल एक सार्वजनिक कम्पनी है।
- अंत्योदय अन्न योजना से जुड़े परिवारों की संख्या 5 करोड़ है।
- वर्ष 2018-19 में राज्य में 277 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ।
उत्तर- 1. सत्य 2. असत्य 3. असत्य 4. असत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) अंत्योदय अन्न योजना प्रारम्भ | (a) 276 करोड़ टन |
| (ii) 2016-17 में खाद्यान्न उत्पादन | (b) 277 करोड़ टन |
| (iii) 2017-18 में खाद्यान्न उत्पादन | (c) 2000 में |
| (iv) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रारम्भ | (d) 2013 में |
| (v) भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम- | (e) 1997 में |
उत्तर- (i) (c), (ii) (a), (iii) (b), (iv) (e), (v) (d)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. खाद्य सुरक्षा का क्या तात्पर्य है?
उत्तर- खाद्य सुरक्षा का तात्पर्य सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की उपलब्धता, पहुँच तथा उसे प्राप्त करने के लोगों के सामर्थ्य से है।
प्रश्न 2. भारत में खाद्य दृष्टि से सर्वाधिक असुरक्षित दो वर्गों के नाम बताइए।
उत्तर- (1) ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक (2) शहरी अनियत मजदूरी वाले श्रमिक।
प्रश्न 3. भारत में खाद्य सुरक्षा कैसे निश्चित की जाती है?
उत्तर-भारत में खाद्य सुरक्षा पर्याप्त मात्रा में बफर स्टॉक बनाकर एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा की जाती है।
प्रश्न 4. अंत्योदय अन्न योजना किस वर्ष प्रारम्भ की गई?
उत्तर-अंत्योदय अन्न योजना वर्ष 2000 में प्रारम्भ की गई।
प्रश्न 5. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम कब प्रारम्भ किया गया?
उत्तर-राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम 14 नवम्बर, 2004 को प्रारम्भ किया गया।
प्रश्न 6. सहायिकी अथवा सब्सिडी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-सहायिकी अथवा सब्सिडी वह भुगतान है, जो सरकार द्वारा किसी उत्पादक को बाजार कीमत की अनुपूर्ति के लिए किया जाता है।
प्रश्न 7. वर्ष 2000 में खाद्य सुरक्षा हेतु कौन सी दो योजनाएँ प्रारम्भ की गईं?
उत्तर-(1) निर्धनों में सबसे निर्धन लोगों हेतु अंत्योदय अन्न योजना।
(2) दीन वरिष्ठ नागरिकों के लिए अन्नपूर्णा योजना।
प्रश्न 8. निर्गम कीमत क्या होती है?
उत्तर-यह वह कीमत है जिस पर सरकार राशन की दुकानों के माध्यम से निर्धनों को अनाज का वितरण करती है।
प्रश्न 9. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कितना खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जाता है?
उत्तर-इस अधिनियम के तहत किलो खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रति माह उपलब्ध करवाया जाता है।
प्रश्न 10. भारत में बफर स्टॉक किसके द्वारा रखा जाता है?
उत्तर-भारत में बफर स्टॉक भारतीय खाद्य निगम द्वारा रखा जाता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. खाद्य सुरक्षा के प्रमुख आयामों को समझाइये।
उत्तर-खाद्य सुरक्षा के प्रमुख आयाम निम्न हैं-
(1) खाद्य उपलब्धता-इसका अर्थ देश में खाद्य उत्पादन, खाद्य आयात और सरकारी अनाज भंडारों में संचित पिछले वर्षों के स्टॉक से है।
(2) पहुँच-इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को खाद्य मिलते रहें।
(3) सामर्थ्य-लोगों के पास अपनी भोजन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीदने हेतु धन उपलब्ध हो।
प्रश्न 2. किसी देश में खाद्य सुरक्षा कब सुनिश्चित होती है?
उत्तर-किसी देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने की निम्न तीन शर्तें हैं-(1) सभी लोगों के लिए पर्याप्त खाद्य उपलब्ध हो। (2) सभी लोगों के पास स्वीकार्य गुणवत्ता के खाद्य-पदार्थ खरीदने की क्षमता हो। (3) खाद्य की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं हो।
प्रश्न 3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली क्या है?
उत्तर-सार्वजनिक वितरण प्रणाली-भारतीय खाद्य निगम द्वारा अधिप्राप्त अनाज को सरकार विनियमित राशन की दुकानों के माध्यम से समाज के गरीब वर्गों में वितरित करती है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहते हैं। राशन की दुकानों पर चीनी, खाद्यान्न और मिट्टी के तेल का वितरण बाजार कीमत से कम कीमत पर गरीब वर्गों को किया जाता है।
प्रश्न 4. हरित क्रान्ति आने के बाद से देश में अनाज की उपलब्धता किस कारण सुनिश्चित हो गई है?
उत्तर-(i) हरित क्रान्ति आने के बाद से देश में मौसम की विपरीत दशाओं के दौरान भी अकाल नहीं पड़ा है।
(ii) देशभर में उपजाई जाने वाली विविध फसलों के पिछले तीन वर्ष में देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है।
(iii) सरकार द्वारा बफर स्टॉक तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नीतियों को अपनाने से अनाज की उपलब्धता और भी सुनिश्चित हो गई है।
दीर्घउत्तरी प्रश्न-
प्रश्न 1. "हरित क्रान्ति से क्षेत्रीय असमानता में वृद्धि हुई है।" इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-हरित क्रान्ति से क्षेत्रीय असमानता में वृद्धि हुई है। हरित क्रान्ति का लाभ मुख्य रूप से सम्पन्न राज्यों को ही मिला है; क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति सही थी, जबकि निर्धन राज्यों को इस क्रान्ति का विशेष लाभ नहीं मिल पाया। उदाहरण के लिए, पंजाब और हरियाणा में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई। तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश में चावल के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। दूसरी ओर बिहार, उड़ीसा और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्पादन का स्तर पिछड़ता रहा। अतः हरित क्रान्ति ने क्षेत्रीय असमानता में वृद्धि की।
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प्रश्न 2. गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए सरकार द्वारा कौनसी योजनाएँ चलाई जा रही हैं?
उत्तर-गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। कुछ प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित हैं-
(1) एकीकृत बाल विकास सेवाएँ। (2) काम के बदले अनाज। (3) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली। (4) दोपहर का भोजन। (5) गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। (6) राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम। (7) अंत्योदय अन्न योजना। (8) अन्नपूर्णा योजना। (9) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013
प्रश्न 3. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में समय-समय पर कई संशोधन किए गए। भारत सरकार ने जून, 1997 में 'सभी क्षेत्रों में गरीबों' को लक्षित करने के सिद्धान्त को अपनाने के लिए लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रारम्भ की। इसके अन्तर्गत लक्षित समूह को दो भागों में विभाजित किया- निर्धन तथा गैर-निर्धन वर्ग। यह पहला मौका था जब इन दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग कीमत नीति अपनाई। इस प्रणाली में लक्षित समूह के परिवार को प्रति परिवार प्रतिमाह राशन कार्ड पर 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली की संचालित राशन की दुकानों की हो रही शिकायतों का उल्लेख करते हुए, इन्हें दूर करने के उपाय सुझाइये।
उत्तर-राशन की दुकानों की शिकायतें
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की संचालित राशन की दुकानों की निम्न प्रमुख शिकायतें हो रही हैं-
(1) पी. डी. एस. डीलर अधिक लाभ कमाने के लिए राशन के अनाज को खुले बाजारों में बेच देते हैं।
(2) वे राशन के अच्छे अनाज को अधिक कीमत में खुले बाजार में बेचकर घटिया अनाज को दुकानों पर बेचते हैं।
(3) वे नियमित रूप से समय पर दुकानें नहीं खोलते हैं, कम तौलते हैं।
(4) अब तीन भिन्न कीमतों वाले टी. पी. डी. एस. की व्यवस्था में निर्धनता रेखा से ऊपर वाले किसी भी परिवार को राशन की दुकान पर बहुत कम छूट मिलती है। ए. पी. एल. परिवारों के लिए कीमत लगभग उतनी ही है जितनी खुले बाजार में है। इसलिए राशन की दुकान से इन चीजों की खरीददारी के लिए उनको बहुत कम प्रोत्साहन प्राप्त है।
शिकायतों को दूर करने के उपाय
(1) भारत के दक्षिणी-पश्चिमी भागों में सहकारी समितियाँ खाद्य-सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे निर्धन लोगों को खाद्यान्न की बिक्री के लिए कम कीमत वाली दुकानें खोलती हैं। इस व्यवस्था को पूरे देश में चलाया जाए।
(2) गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से महाराष्ट्र की तर्ज पर अन्य क्षेत्रों में अनाज बैंकों की स्थापना की जाये।
(3) जिन राशन की दुकान की शिकायत आती है उनकी जाँच करवा कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।