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📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 5: [इतिहास] आधुनिक विश्व में चरवाहे एवं मानचित्र कार्य

Pastoralists in the Modern World & Map Work

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (RBSE) 📘 इतिहास (भारत और समकालीन विश्व-1) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Pastoralists in the Modern World & Map Work

[इतिहास] आधुनिक विश्व में चरवाहे एवं मानचित्र कार्य

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(2) यूरोपीय कम्पनियों का एकाधिकार-अंग्रेजों के आने के बाद वन-उत्पादों का व्यापार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में चला गया। ब्रिटिश सरकार ने कई बड़ी यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों को विशेष इलाकों में वन-उत्पादों के व्यापार का एकाधिकार सौंप दिया। इससे इन कम्पनियों को बहुत लाभ पहुँचा।

(3) परम्परागत जीवनयापन पर प्रतिबन्ध-लोगों द्वारा शिकार करने और पशुओं को चराने पर बंदिशें लगा दी गईं। इस प्रक्रिया में मद्रास प्रेसीडेंसी के कोरावा, कराचा व येरुकुला जैसे अनेक चरवाहे और घुमंतू समुदाय अपनी जीविका से हाथ धो बैठे। इनमें से कुछ को 'अपराधी कबीले' कहा जाने लगा और ये सरकार की निगरानी में फैक्ट्रियों, खदानों व बागानों में काम करने को मजबूर हो गए।

(4) काम के नये अवसर-यूरोपियों के आने से पूर्व स्थानीय लोग अपने रोजगार के लिए प्रकृति पर निर्भर करते थे, परन्तु अब उन्हें नियमित रोजगार मिलने लगे। कइयों ने वन विभाग में श्रमिकों तथा पहरेदारों की नौकरी कर ली।

(5) कम मजदूरी तथा खराब कार्यदशाएँ-लोगों को काम के नये अवसर मिले किन्तु उनकी जीवन दशाएँ खराब हुईं। जैसे असम के चाय बागानों में काम करने के लिए झारखंड के संथाल और उराँव व छत्तीसगढ़ के गोंड जैसे आदिवासी पुरुषों व औरतों, दोनों की भर्ती की गयी। उनकी मजदूरी बहुत कम थी और कार्य परिस्थितियाँ उतनी ही खराब। उन्हें उनके गाँवों से उठा कर भर्ती तो कर लिया गया लेकिन उनकी वापसी आसान नहीं थी।

प्रश्न 2. बस्तर के विद्रोह पर एक लेख लिखिये।

उत्तर-बस्तर का विद्रोह-बस्तर के विद्रोह का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है-

  1. विद्रोह के कारण-
    (i) औपनिवेशिक सरकार ने 19051905 में, वनों का दो-तिहाई हिस्सा आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा।
    (ii) घुमंतू कृषि पर प्रतिबंध लगाया।
    (iii) शिकार करने तथा वन उत्पादों को एकत्र करने पर प्रतिबंध लगाया।
    (iv) गाँवों के लोगों को बगैर किसी सूचना या मुआवजे के गाँवों से हटा दिया गया।
    (v) लोग बढ़े हुए लगान, औपनिवेशिक अफसरों के हाथों बेगार तथा चीजों की निरन्तर मांग से त्रस्त थे।
    इन सब कदमों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए स्थानीय लोगों को मजबूर किया।

  • विद्रोह का विकास-
    (i) लोगों ने बाजारों तथा त्योहारों के मौके पर अथवा जहाँ कहीं भी कई गाँवों के मुखिया व पुजारी इकट्ठे होते थे, इन सब विषयों पर चर्चा करनी आरम्भ कर दी। कांगेर वनों के धुर्वा समुदाय द्वारा इस सम्बन्ध में पहल की गई, जहाँ सबसे पहले आरक्षण लागू हुआ। इस विद्रोह का मुख्य नेता नेथानार गाँव का गुंडा धूर था।

  • (ii) 19101910 में, गाँवों में आम की टहनियों, मिट्टी के ढेलों, मिर्ची तथा तीर-कमानों को घुमाना आरम्भ हुआ। वास्तव में, ये ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बगावत करने के लिए, ग्रामीणों को आमंत्रित करने के संदेश थे।

    (iii) प्रत्येक गाँव ने बगावत के खर्चे के लिए कुछ योगदान दिया।

    (iv) बाजारों को लूटा गया, अधिकारियों तथा व्यापारियों के घरों, स्कूलों तथा पुलिस स्टेशनों को जलाया गया तथा लूटा गया और अनाज बाँटा गया। जिन पर आक्रमण किया गया, उनमें से अधिकतर औपनिवेशिक शासन तथा दमन के कानूनों से सम्बन्ध रखते थे।

    1. विद्रोह का दमन-अंग्रेजों ने बगावत को दबाने के लिए सेना भेजी। आदिवासी नेताओं ने समझौता करने का प्रयास किया, परन्तु अंग्रेजों ने उनके शिविरों को घेर कर उन पर गोली चलाई। इसके बाद उन्होंने गाँव की ओर मार्च किया तथा बगावत में भाग लेने वालों को सजा दी। अधिकतर गाँव खाली हो गए क्योंकि लोग जंगलों में भाग गए। अंग्रेजों को फिर से नियंत्रण करने के लिए तीन महीने (फरवरी-मई) लग गए, परन्तु वे गुंडा धूर को कभी पकड़ न पाए।

    2. बगावत के परिणाम-(i) आरक्षण पर कार्य कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। (ii) आरक्षित करने वाला क्षेत्र 19101910 से पहले की योजना से लगभग आधा रह गया। (iii) इस विद्रोह ने अन्य कबीले के लोगों को भी ब्रिटिश सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध बगावत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    5. आधुनिक विश्व में चरवाहे

    पृष्ठ 101

    प्रश्न 1. संक्षेप में बताइए कि चरवाहा परिवारों के औरत-मर्द क्या-क्या काम करते थे?

    उत्तर-चरवाहा परिवारों के औरत-मर्द निम्न कार्य करते थे-

    (1) पुरुष मुख्यतः मवेशियों को चराने का कार्य करते हैं तथा इसके लिए वे कई सप्ताहों तक अपने घरों से

    दूर रहते हैं। इसके अलावा वे थोड़ी-बहुत खेती भी करते हैं।

    (2) महिलाएँ अपने सिर पर टोकरी रखकर रोज बाजार जाती हैं। इन टोकरियों में मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तनों में दैनिक खान-पान की चीजें; जैसे-दूध, मक्खन, घी आदि होती हैं। इन्हें बेचकर अपना घर चलाती हैं।

    प्रश्न 2. आपकी राय में चरवाहे जंगलों के आसपास ही क्यों रहते हैं?

    उत्तर- मेरी राय में चरवाहे निम्न कारणों से जंगलों के आसपास ही निवास करते हैं-

    (1) जंगल के छोर पर छोटे-छोटे गाँवों में रहते हुए वे जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों पर कृषि-कार्य करते हैं।

    (2) वे अपने मवेशियों तथा उनसे प्राप्त उत्पादों को नजदीक के शहरों में बेच पाते हैं।

    (3) कुछ लोग अपने मवेशियों को जंगलों में चराने ले जाते हैं तथा कुछ लोग खेतों में कृषि-कार्य करते हैं तथा शहरों में अपने उत्पाद तथा पुआल एवं जलावन की लकड़ी आदि बेचते हैं।


    पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

    प्रश्न 1. स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं?

    उत्तर- घुमंतू समुदायों को निम्न कारणों से बार-बार एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है-

    (1) घुमंतू समुदाय का मुख्य कार्य अपने जानवरों को चराना होता है। अतः वे चारे के लिए अनुकूल जगहों पर घूमते रहते हैं। इसमें मौसमी दशाएँ मुख्य भूमिका निभाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले घुमंतू समुदाय के लोग सर्दी-गर्मी के अनुसार अपना स्थान परिवर्तन करते हैं। दक्षिण के गोल्ला, कुरुमा तथा कुरुबा समुदाय के लोग बरसात और सूखे मौसम के अनुसार एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। ये लोग सूखे महीनों में तटीय इलाकों की तरफ चले जाते हैं तथा वर्षा आने पर वापस चले आते हैं। इसी प्रकार राजस्थान के राइका भी बरसात और सूखे मौसम के अनुसार जगह बदलते हैं।

    (2) घुमंतू समुदाय अच्छे चरागाहों की तलाश में जगह बदलते रहते हैं।

    (3) रोजी-रोटी की तलाश तथा जीवनयापन की अनुकूल दशा हेतु वे एक से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे।

    निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को लाभ-

    (1) निरन्तर आवागमन से किसी एक चरागाह के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बच जाते हैं तथा उनमें दोबारा हरियाली व जिन्दगी भी लौट आती है।

    (2) घुमंतू समुदायों के मवेशी खेतों में घूम-घूम कर गोबर देते रहते हैं। इससे कृषि भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है।

    (3) निरन्तर आवागमन से उनके मवेशियों को हरा-भरा चारा प्राप्त होता रहता है।

    (4) घुमंतू समुदायों के निरन्तर आवागमन से प्राकृतिक वनस्पति को पुनः वृद्धि करने का अवसर मिलता है। वनस्पति के इस संरक्षण से पर्यावरण सन्तुलन भी बना रहता है।

    प्रश्न 2. इस बारे में चर्चा कीजिये कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइये कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा?

    (1) परती भूमि नियमावली
    (2) वन अधिनियम
    (3) अपराधी जनजाति अधिनियम
    (4) चराई कर।

    उत्तर- (1) परती भूमि नियमावली-कारण- (i) औपनिवेशिक सरकार के लिये भारत में सभी गैर-कृषि (बंजर या परती) भूमि अनुत्पादक थी जिससे न तो राजस्व प्राप्त होता था और न ही कृषि-उत्पाद। अतः ऐसी भूमि को कृषि-कार्य के अंतर्गत लाने की आवश्यकता थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए औपनिवेशिक सरकार ने 19वीं सदी के मध्य से देश के विभिन्न भागों में परती भूमि के विकास के लिये नियम बनाए।

    (ii) परती भूमि नियमावली द्वारा बहुत सी चरागाह भूमि को कृषि के अन्तर्गत लाया गया।

    (iii) कृषि से एक तरफ उन्हें राजस्व की प्राप्ति होगी; दूसरे, वे कृषि से इंग्लैंड के लोगों के लिए जरूरत की चीजें पैदा कर उन्हें उपलब्ध कराना चाहते थे।

    चरवाहों के जीवन पर प्रभाव- (i) गैर-कृषि भूमि चरवाही लोगों से छीनकर खास लोगों को दे दी गई।

    (ii) इन खास लोगों को कई तरह की छूट दी गई तथा इन्हें प्राप्त भूमि को कृषि-कार्य के अंतर्गत लाने तथा वहाँ बसने के लिये प्रोत्साहित किया गया।

    (iii) इनमें से कुछ लोगों को नये साफ किये गये क्षेत्रों में गाँवों का मुखिया या प्रधान बना दिया गया।

    (iv) जो भूमि छीनी गई वह ज्यादातर चरागाह भूमि थी जिसका उपयोग नियमित रूप से चरवाही समुदायों द्वारा अपने मवेशियों को चराने के लिये जाता था। इससे चरागाहों की कमी हुई तथा चरवाहों को अपने पशुओं को चराने की समस्या उत्पन्न हो गई।

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    ( 2 ) वन अधिनियम-औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कारणों से वन अधिनियम बनाए-
    (i) औपनिवेशिक सरकार वनों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती थी ताकि उसे पर्याप्त मात्रा में देवदार, सागौन या साल जैसी कीमती लकड़ी प्राप्त होती रहे।
    (ii) औपनिवेशिक अधिकारियों का मानना था कि पशुओं के चरने से छोटे जंगली पौधे और पेड़ों की नई कोपलें नष्ट हो जाती हैं।
    (iii) वन अधिकारियों का मानना था कि चरवाहों के रेवड़ छोटे पौधों को कुचल देते हैं तथा कोपलों को खा जाते हैं। इससे नये पेड़ों की बढ़त रुक जाती है।

    वन अधिनियमों का चरवाहों के जीवन पर प्रभाव-
    (i) कई जंगलों को आरक्षित घोषित कर दिया गया तथा वहाँ चरवाहों के घुसने पर पाबन्दी लगा दी गई।
    (ii) उन्हें उन वनों में प्रवेश करने से रोका गया जो उन्हें अपने पशुओं के लिये चारा उपलब्ध कराता था।
    (iii) जिन क्षेत्रों में उन्हें प्रवेश करने की अनुमति थी वहाँ भी उन्हें सिर्फ सीमित गतिविधि करने की छूट दी गई थी।
    (iv) उन्हें वनों में प्रवेश करने के लिये परमिट लेना पड़ता था।
    (v) उनके वनों में प्रवेश करने तथा बाहर निकलने का समय निश्चित कर दिया गया था। साथ ही वनों में बिताये जाने वाले दिनों की संख्या भी निश्चित कर दी गई थी।
    (vi) समय सीमा के उल्लंघन पर उन पर जुर्माना लगाया था।

    इस प्रकार इन वन अधिनियमों ने चरवाहों के लिए आजीविका की गतिविधियाँ ठीक प्रकार से चलाने में कठिनाइयाँ उत्पन्न कर दीं। अब उन्हें अपने पशुओं की संख्या कम करनी पड़ी।

    ( 3 ) अपराधी जनजाति अधिनियम- औपनिवेशिक सरकार ने अपराधी जनजाति अधिनियम निम्न कारणों से बनाया-
    (i) अंग्रेज अफसर घुमन्तू किस्म के लोगों को शक की नजर से देखते थे। वे गाँव-गाँव जाकर अपनी चीजें बेचने वाले कारीगरों व व्यापारियों और हर मौसम में अपनी रिहाइश बदलने वाले चरवाहों पर यकीन नहीं कर पाते थे।
    (ii) ऐसे घुमन्तू लोगों की पहचान करना और उन्हें नियंत्रित करना, एक जगह टिक कर रहने वाले लोगों की अपेक्षा कठिन था।
    (iii) घुमन्तू लोगों को वे अशांतिप्रिय, कानून का पालन न करने वाले तथा अपराधी मानते थे।

    इन सब कारणों से सरकार ने सन् 18711871 में अपराधी जनजाति अधिनियम पारित किया।

    चरवाहों के जीवन पर प्रभाव- इस अपराधी जनजाति अधिनियम ने चरवाहों के जीवन को निम्न प्रकार प्रभावित किया-
    (i) चरवाहों के बहुत सारे समुदायों को जन्म तथा स्वभाव से अपराधी जनजाति घोषित कर दिया गया।
    (ii) इस अधिनियम के लागू होने पर उनसे उम्मीद की जाती थी कि वे केवल एक अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्र में निवास करेंगे।
    (iii) इन क्षेत्रों से बिना अनुमति के उन्हें बाहर निकलने की छूट नहीं थी।
    (iv) ग्रामीण पुलिस द्वारा उन पर लगातार नजर रखी जाती थी।
    (v) उनकी बिना परमिट आवाजाही पर रोक लगा दी गई।

    ( 4 ) चराई कर-
    कारण- अंग्रेजी सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए 1919वीं शताब्दी के मध्य में चरवाही क्षेत्रों में चराई कर लगाया। इसके लिए चरागाहों में चरने वाले प्रत्येक जानवर पर टैक्स वसूल किया जाने लगा। प्रति मवेशी टैक्स की दर भी तेजी से बढ़ती चली गई एवं कर वसूली की व्यवस्था दिन-प्रतिदिन मजबूत होती गई।

    चरवाहों पर प्रभाव-
    (i) चरवाहों पर पहले ही बहुत बन्दिशें लग चुकी थीं। चराई कर लगने से उनकी आर्थिक स्थिति बहुत गिर गई।

    (ii) 18501850 से 18801880 के दशकों के बीच टैक्स वसूली का कार्य ठेकेदार करते थे। वे चरवाहों से ज्यादा से ज्यादा टैक्स वसूल करते थे। बाद में सरकार अपने कारिंदों के माध्यम से सीधे चरवाहों से टैक्स वसूलने लगी थी।
    (iii) प्रत्येक चरवाहे को एक 'पास' दिया जाता था। पास दिखाकर तथा टैक्स चुकाकर ही चरागाहों में प्रवेश किया जा सकता था। इससे चरवाहों का शोषण होने लगा जिससे बाध्य होकर उन्हें अपने पशुओं की संख्या कम करनी पड़ी।

    प्रश्न 3. मासाई समुदाय के चरागाह उससे क्यों छिन गये? कारण बताएँ।

    उत्तर- मासाई समुदाय के चरागाह छिनने के प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं-

    (1) उपनिवेशवाद- 1919वीं शताब्दी के अन्त में, यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच, अफ्रीका के, क्षेत्रीय अधिकारों के लिए छीना-झपटी हो गई, जिस कारण क्षेत्र अनेक छोटे-छोटे उपनिवेशों में बँट गया। 18851885 में ब्रिटिश कीनिया तथा जर्मन तांगानयिका के बीच एक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा खींचकर मासाईलैण्ड के दो बराबर टुकड़े कर दिये।

    गये। श्रेष्ठ चरागाहों पर धीरे-धीरे गोरों को बसा दिया गया तथा मासाई लोगों को दक्षिण कीनिया तथा उत्तर तन्जानिया में एक छोटे से क्षेत्र में धकेल दिया गया। मासाई लोगों ने अपनी पूर्व उपनिवेशीय भूमि का 60%60% खो दिया। वे एक शुष्क प्रदेश तक ही सीमित हो गए जहाँ अनिश्चित वर्षा होती थी तथा घटिया चरागाह थे।

    (2) कृषि का विस्तार-पूर्वी अफ्रीका में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने स्थानीय किसानों को कृषि का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। जैसे-जैसे कृषि का विस्तार हुआ, चरागाह कृषि-खेतों में बदल गए। मासाई लोगों के चरागाहों पर स्थानीय किसानों ने अपना अधिकार कर लिया और वे असहाय हो गये।

    (3) शिकार हेतु आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना-बहुत से चरागाहों को शिकार के लिए आरक्षित कर दिया गया जैसे-कीनिया में मासाई मारा तथा सांबुरू नेशनल पार्क तथा तन्जानिया में सेरेनोटी पार्क। चरवाहों को इन आरक्षित क्षेत्रों में जाने की आज्ञा न थी। इनमें से अधिकतर क्षेत्र मासाई पशुओं के लिए नियमित चरागाह भूमियाँ थीं। उदाहरण के लिए सेरेगेटी नेशनल पार्क का 14,76014,760 वर्ग कि.मी. से भी अधिक क्षेत्र मासाइयों के चरागाहों पर कब्जा करके बनाया गया था।

    (4) चरागाहों की गुणवत्ता में कमी-अच्छे चराई क्षेत्रों के छिन जाने तथा जल संसाधनों के अभाव से मासाई लोगों के छोटे से क्षेत्र पर दबाव पड़ा। छोटे से क्षेत्र में निरन्तर चराई से चरागाहों का स्तर गिर गया तथा चारे की हमेशा कमी रहने लगी।

    (5) सरहदें बन्द होना-19वीं सदी के आखिरी दशकों से पहले मासाई चरवाहे चरागाहों की खोज में दूर-दूर तक चले जाते थे, किन्तु 19वीं सदी के आखिरी दशकों से औपनिवेशिक सरकार ने उनकी आवाजाही पर अनेक पाबन्दियाँ लगा दीं। इससे भी इनके चरागाह छिन गये।

    प्रश्न 4. आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गडिरयों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे।

    उत्तर- वे परिवर्तन जो भारतीय चरवाहा समुदायों तथा मासाई पशुपालकों के लिये समान थे, वे हैं-

    (1) सरहदें बन्द करना-औपनिवेशिक काल से पहले मासाई भूमि उत्तरी तन्जानिया के घास के मैदानों से उत्तरी कीनिया तक विस्तृत क्षेत्र में फैली थी। अफ्रीका में, जब यूरोपीय शक्तियों की क्षेत्रीय अधिकारों के लिए छीना-झपटी हुई, तो मासाई क्षेत्र को आधा कर दिया गया, जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमाएँ ब्रिटिश कीनिया तथा तन्जानिया से लगती थीं। श्रेष्ठ भूमि पर गोरों ने अधिकार कर लिया तथा स्थानीय लोगों को प्रतिबन्धित चरागाहों के एक छोटे से क्षेत्र की ओर धकेल दिया।

    भारत में देश के विभाजन ने राइका चरवाहा समुदाय को हरियाणा में नए चरागाह खोजने के लिए मजबूर किया क्योंकि राजनैतिक विभाजन के कारण अब उन्हें पाकिस्तान के सिन्ध में जाने की आज्ञा न थी।

    (2) वन अधिनियम-विभिन्न वन कानून भी भारत तथा अफ्रीका में चरवाहों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए उत्तरदायी थे। भारत में वनों को आरक्षित तथा सुरक्षित दो वर्गों में विभाजित किया गया। किसी भी चरवाहे को आरक्षित वनों में जाने की आज्ञा न थी। सुरक्षित वनों में उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी।

    अफ्रीका में चरागाह भूमियों के बड़े क्षेत्र को शिकार के लिए आरक्षित कर दिया गया था। चरवाहों का इनमें प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया गया।

    श्रेष्ठ चरागाहों के छिन जाने तथा चरवाहों की गतिविधियों पर प्रतिबन्धों ने उनकी जीवनशैली पर बुरा प्रभाव डाला।


    अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

    बहुविकल्पीय प्रश्न-

    1. गुज्जर समुदाय का निवास का क्षेत्र है-
      (अ) गढ़वाल तथा कुमाऊँ (ब) छोटा नागपुर क्षेत्र
      (स) कोटा तथा बारां क्षेत्र (द) बस्तर क्षेत्र

    2. जम्मू और कश्मीर में पाये जाते हैं-
      (अ) गद्दी (ब) गुज्जर बकरवाल
      (स) गोल्ला (द) धंगर

    3. महाराष्ट्र का जाना-माना चरवाहा समुदाय है-
      (अ) बंजारे (ब) राइका
      (स) धंगर (द) गुज्जर

    4. राजस्थान के रेगिस्तानों में मुख्य चरवाहा समुदाय रहता है-
      (अ) बंजारे (ब) गोल्ला
      (स) गुज्जर बकरवाल (द) राइका

    5. राजस्थान में जैसलमेर के निकट थार के रेगिस्तान में ऊँट पालकों की बस्ती को कहा जाता है-
      (अ) ढंडी (ब) मारु
      (स) राइका (द) मारु राइका

    6. निम्न में अफ्रीका का चरवाहा समुदाय है-
      (अ) मासाई (ब) राइका
      (स) संथाल (द) गोंड

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    1. गोल्ला, कुरुमा और कुरुबा चरवाहा समुदाय के लोग रहते हैं-
      (अ) जम्मू-कश्मीर में
      (ब) कर्नाटक व आंध्रप्रदेश में
      (स) महाराष्ट्र में (द) राजस्थान में

    उत्तरमाला-1. (अ) 2. (ब) 3. (स) 4. (द) 5. (अ) 6. (अ) 7. (ब)

    रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

    1. पहाड़ी चरवाहे मौसमी उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए .................... के हिसाब से अपनी जगह बदलते रहते थे। (सर्दी-गर्मी/बरसात-सूखे मौसम)
    2. पठारी, मैदानी तथा रेगिस्तानी चरवाहे .................... और .................... के हिसाब से अपनी जगह बदलते थे। (बरसात-मौसम/सर्दी-गर्मी)
    3. हिमाचल प्रदेश के चरवाहा समुदाय को .................... कहते हैं। (गद्दी/राइका)
    4. .................... महाराष्ट्र का एक जाना-माना चरवाहा समुदाय है। (राइका/धंगर/बंजारा)

    उत्तर-1. सर्दी-गर्मी 2. बरसात-मौसम 3. गद्दी 4. धंगर

    निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये-

    1. दुनिया की आधी से अधिक चरवाहा आबादी अफ्रीका में रहती है।
    2. मासाई चरवाहा समुदाय मुख्यतः दक्षिणी अफ्रीका का निवासी है।
    3. औपनिवेशिक शासन में मासाइयों से उनकी जमीन का 6060 प्रतिशत हिस्सा उनसे छीन लिया गया था।
    4. गढ़वाल और कुमाऊँ के गुज्जर गर्मियों में भाबर की ओर चले जाते हैं।
    5. राजस्थान के रेगिस्तानों में राइका समुदाय रहता था।

    उत्तर-1. सत्य 2. असत्य 3. सत्य 4. असत्य 5. सत्य।

    निम्न को सुमेलित कीजिए-

    (अ) (ब)
    (i) धंगर - (a) कर्नाटक
    (ii) गोल्ला - (b) राजस्थान
    (iii) राइका - (c) जम्मू-कश्मीर
    (iv) गुज्जर बकरवाल - (d) हिमाचल प्रदेश
    (v) गद्दी - (e) महाराष्ट्र

    उत्तर-(i) (e), (ii) (a), (iii) (b), (iv) (c), (v) (d)

    अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

    प्रश्न 1. घुमंतू किसे कहते हैं?

    उत्तर-घुमंतू ऐसे लोग होते हैं जो किसी एक जगह टिक कर नहीं रहते बल्कि रोजी-रोटी के जुगाड़ में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं।

    प्रश्न 2. भाबर किसे कहते हैं?

    उत्तर-गढ़वाल और कुमाऊँ के इलाके में पहाड़ियों के निचले हिस्से के आसपास पाये जाने वाले शुष्क या सूखे जंगल के इलाके को भाबर कहते हैं।

    प्रश्न 3. कोंकणी किसानों से धंगर चरवाहा समुदाय किस प्रकार लाभान्वित होता है?

    उत्तर-(1) कोंकणी किसान धंगरों के मवेशियों के लिए चरागाह उपलब्ध कराते हैं।

    (2) कोंकणी किसान धंगरों को चावल देते हैं।

    प्रश्न 4. पहाड़ी चरवाहों तथा पठारी चरवाहों की चक्रिक आवाजाही में क्या भिन्नता है?

    उत्तर-पहाड़ी चरवाहों की चक्रिक आवाजाही सर्दी-गर्मी से तय होती है, जबकि पठारी चरवाहों की चक्रिक आवाजाही बरसात और सूखे मौसम से तय होती है।

    प्रश्न 5. बंजारों के मुख्य इलाके बतलाइये।

    उत्तर-बंजारों के मुख्य इलाके उत्तरप्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्र हैं।

    प्रश्न 6. चरवाहों ने अपने जीवन में आये बदलावों का सामना कैसे किया?

    उत्तर-(1) कुछ चरवाहों ने अपने पशुओं की संख्या कम कर दी।

    (2) कुछ चरवाहों ने नये-नये चरागाह ढूँढ लिए।

    प्रश्न 7. अफ्रीका के कुछ चरवाहा समुदायों के नाम लिखिए।

    उत्तर-बेदुईन्स, बरबेर्स, मासाई, सोमाली, बोरान तथा तुर्काना।

    प्रश्न 8. मासाई चरवाहे कहाँ निवास करते हैं?

    उत्तर-मासाई मुख्य रूप से पूर्वी अफ्रीका के देश कीनिया एवं तंजानिया के अर्द्ध-शुष्क घास स्थलों में निवास करते हैं।

    प्रश्न 9. उपनिवेश बनने से पहले मासाई समाज किन श्रेणियों में बँटा हुआ था?

    उत्तर-दो श्रेणियों में-(1) वरिष्ठ जन (ऐल्डर्स) (2) योद्धा (वॉरियर्स)।

    प्रश्न 10. वरिष्ठ जन का क्या कार्य था?

    उत्तर-वरिष्ठ जन शासन चलाते थे। समुदाय से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श करने तथा अहम फैसले लेने के लिए वे समय-समय पर सभा करते थे।

    लघूत्तरात्मक प्रश्न-

    प्रश्न 1. चरागाहों की कमी से क्या समस्याएँ उत्पन्न हुईं?

    उत्तर-(1) चरागाहों की कमी से बचे-खुचे चरागाहों में चरने वाले जानवरों की संख्या बढ़ने लगी।

    (2) सीमित चरागाहों के बेहिसाब इस्तेमाल से उनकी गुणवत्ता गिरने लगी थी।
    (3) चारे की कमी से जानवरों की सेहत तथा संख्या में कमी आने लगी थी।

    प्रश्न 2. घुमन्तू समुदायों के बार-बार एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने से पर्यावरण को क्या लाभ हैं?

    उत्तर- घुमन्तू समुदायों के बार-बार एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने से पर्यावरण को निम्नलिखित लाभ हैं-

    (1) इससे एक चरागाह जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बच जाता है तथा उनमें दुबारा हरियाली व जिंदगी लौट आती है।
    (2) इससे कृषि भूमि की उर्वरता में भी वृद्धि होती है क्योंकि घुमन्तू समुदाय के मवेशी खेतों में घूम-घूम कर गोबर देते रहते हैं।

    प्रश्न 3. धनगर चरवाहा समुदाय की प्रमुख विशेषताएँ लिखिये।

    उत्तर- धनगर चरवाहा समुदाय की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

    (1) धनगर महाराष्ट्र का एक प्रमुख चरवाहा समुदाय है।
    (2) यह समुदाय बरसात के समय महाराष्ट्र के मध्य पठारों में रहता है। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है।
    (3) 20वीं सदी के प्रारंभ में इस समुदाय की जनसंख्या लगभग 4,67,0004,67,000 थी।

    प्रश्न 4. राजस्थान में राइका समुदाय पर एक लेख लिखो।
    अथवा
    राजस्थान के राइका समुदाय के बारे में आप क्या जानते हैं?
    अथवा
    राजस्थान के राइका समुदाय पर एक टिप्पणी लिखें।

    उत्तर- राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले राइका खेती के साथ-साथ चरवाही का भी काम करते थे। इनका एक समुदाय ऊँट तथा दूसरा समुदाय भेड़-बकरियां पालता था। बरसात में ये बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के अपने पैतृक गाँवों में ही रहते थे। पर, अक्टूबर आते-आते ये लोग नए चरागाहों की तलाश में दूसरे इलाकों की तरफ निकल जाते थे और अगली बरसात में ही वापस लौटते थे।

    प्रश्न 5. औपनिवेशिक काल में मासाई समाज में क्या बदलाव आए?

    उत्तर- औपनिवेशिक काल में मासाई समाज में दो स्तरों पर बदलाव आए-

    (i) वरिष्ठजनों और योद्धाओं के बीच उम्र पर आधारित परंपरागत फर्क बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
    (ii) अमीर और गरीब चरवाहों के बीच नया भेदभाव मुखिया चरवाहे तथा गरीब चरवाहे के रूप में पैदा हुआ।

    दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

    प्रश्न 1. चरवाहा समाज को किन तीन बातों का विशेष ख्याल रखना पड़ता था? उल्लेख कीजिए।

    उत्तर- चरवाहा समाज को निम्न तीन बातों का विशेष ख्याल रखना पड़ता था-

    (1) उन्हें यह ध्यान रखना पड़ता था कि उनके रेवड़ एक इलाके में कितने दिन तक रह सकते हैं तथा उन्हें कहाँ पानी और चरागाह मिल सकते हैं।
    (2) उन्हें एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने का सही समय चुनना पड़ता था तथा साथ ही यह भी देखना होता था कि उन्हें किन इलाकों से गुजरने की छूट मिल पायेगी और किन इलाकों से नहीं?
    (3) उन्हें सफर के दौरान रास्ते में पड़ने वाले गाँवों के किसानों से अच्छे सम्बन्ध बनाने पड़ते थे ताकि उनके मवेशी किसानों के खेतों में चर सकें तथा उन्हें उपजाऊ बना सकें।

    प्रश्न 2. चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने भारत में परती भूमि नियमावली क्यों लागू की?
    अथवा
    अंग्रेजी सरकार चरागाह की समस्त जमीन को खेती की जमीन में क्यों बदलना चाहती थी?
    अथवा
    अंग्रेजों ने बेकार भूमि नियम क्यों लागू किये?

    उत्तर- अंग्रेजी सरकार चरागाहों की समस्त जमीन को खेती की जमीन में तब्दील कर देना चाहती थी। इसके निम्न कारण थे-

    (1) जमीन से मिलने वाला लगान उसकी आमदनी का एक बड़ा स्रोत था। खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर सरकार अपनी आय में और बढ़ोतरी करना चाहती थी।
    (2) इसके अलावा इससे जूट (पटसन), कपास, गेहूँ और अन्य खेतिहर चीजों के उत्पादन में भी इजाफा हो जाता, जिनकी इंग्लैंड में बहुत ज्यादा जरूरत रहती थी।
    (3) अंग्रेज अफसर बिना खेती की जमीन, जिससे न तो लगान मिलता था और न ही उपज, को 'बेकार' मानते थे। अतः वे उसे खेती के लायक बनाना चाहते थे।

    प्रश्न 3. चरवाहों ने बदलते नियमों का सामना किस प्रकार किया?

    उत्तर- चरवाहों ने बदलते नियमों का सामना निम्न प्रकार किया-

    (i) कुछ चरवाहों ने तो अपने जानवरों की संख्या ही

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    कम कर दी क्योंकि अब अधिक जानवरों के चराने के लिए पहले की तरह बड़े-बड़े और बहुत सारे चरागाह नहीं बचे थे।

    (ii) जब पुराने चरागाहों का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया तो कुछ चरवाहों ने नए-नए चरागाह ढूँढ लिए। उदाहरण के लिए 1947 के बाद राइकाओं ने सिंधु नदी के किनारे के चरागाहों के स्थान पर हरियाणा के खेतों में अपने मवेशियों को ले जाना शुरू कर दिया।

    (iii) समय गुजरने के साथ कुछ धनी चरवाहे जमीन खरीद कर एक जगह बस कर रहने लगे तथा खेती या व्यापार करने लगे।

    (iv) कुछ चरवाहों ने सूदखोरों के चक्कर में अपनी मवेशी खो दी और वे अब खेतों या कस्बों में मजदूरी करने लगे।

    प्रश्न 4. अफ्रीका में चरवाहों पर लगाये गये विभिन्न प्रतिबन्धों का वर्णन कीजिये।
    अथवा
    औपनिवेशिक सरकार द्वारा अफ्रीकी चरवाहों पर क्या प्रतिबंध लगाए गए?

    उत्तर- अफ्रीका में चरवाहों पर निम्न प्रतिबन्ध लगाये गये -

    (1) चरवाहों को एक सीमित एवं विशेष आरक्षित इलाकों में ही रहने को बाध्य किया गया।

    (2) केवल विशेष परमिट लेकर ही चरवाहे जानवरों सहित बाहर जा सकते थे। लेकिन परमिट प्राप्त करना एक कठिन काम था तथा नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सजा दी जाती थी।

    (3) चरवाहों को गोरों के इलाकों में पड़ने वाले बाजारों में दाखिल होने पर प्रतिबन्ध लगाया गया। बहुत सारे इलाकों में तो वे कई तरह के व्यापार भी नहीं कर सकते थे।

    निबन्धात्मक प्रश्न-

    प्रश्न 1. जम्मू-कश्मीर के गुज्जर-बकरवाल समुदाय पर एक टिप्पणी लिखिये।

    उत्तर- जम्मू-कश्मीर में गुज्जर बकरवाल समुदाय एक घुमंतू चरवाहा समुदाय है। इस समुदाय के लोग भेड़-बकरियों के बड़े-बड़े रेवड़ रखते हैं। इस समुदाय के अधिकतर लोग अपने मवेशियों के लिए चरागाहों की तलाश में भटकते-भटकते उन्नीसवीं सदी में जम्मू-कश्मीर आए थे। समय बीतने के साथ-साथ वे यहीं के होकर रह गए।

    ये लोग सर्दी-गर्मी के हिसाब से अलग-अलग चरागाहों में जाते हैं। जाड़ों में जब ऊँची पहाड़ियाँ बर्फ से ढक जातीं तो वे शिवालिक की निचली पहाड़ियों में आकर डेरा डाल लेते। जाड़ों में निचले इलाके में मिलने वाली सूखी झाड़ियाँ ही उनके जानवरों के लिए चारा बन जातीं। अप्रैल के अंत तक गर्मियों के चरागाहों के लिए वे उत्तर दिशा में जाने लगते।

    इस सफर में कई परिवार काफिला बनाकर साथ-साथ चलते थे। वे पीर पंजाल के दर्रों को पार करते हुए कश्मीर की घाटी में पहुँच जाते। जैसे ही गर्मियाँ शुरू होतीं, जमी हुई बर्फ की मोटी चादर पिघलने लगती और चारों तरफ हरियाली छा जाती। इन दिनों में यहाँ उगने वाली तरह-तरह की घास से मवेशियों का पेट भी भर जाता था और उन्हें सेहतमंद खुराक भी मिल जाती थी।

    सितंबर के अंत में बकरवाल एक बार फिर अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लगते। इस बार वे वापस अपने जाड़ों वाले ठिकाने की तरफ नीचे की ओर चले जाते। जब पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ जमने लगती तो वे निचली पहाड़ियों की शरण में चले जाते।

    प्रश्न 2. उपनिवेशी शासन काल के अन्तर्गत चरवाहों के जीवन में क्या परिवर्तन आये?

    उत्तर- उपनिवेशी शासन काल के अन्तर्गत चरवाहों के जीवन में अग्र परिवर्तन आये-

    (1) औपनिवेशिक सरकार ने चरागाहों की भूमि को कृषि-योग्य भूमि में परिवर्तित कर दिया। इसका प्रभाव यह हुआ कि चरागाहों की कमी हो गई। चरागाहों का इलाका सिकुड़ गया।

    (2) वन अधिनियम पारित करके वनों को 'आरक्षित' एवं 'संरक्षित' वन घोषित कर दिया गया। इससे चरवाहों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। अब उन्हें नये चरागाह तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा। सीमित चरागाहों का इस्तेमाल अधिकाधिक बढ़ गया जिससे उनकी गुणवत्ता में कमी आयी।

    (3) सरकार ने घुमंतू चरवाहों को नियंत्रित करने के लिए 'अपराधी जनजाति अधिनियम' बनाकर कई समुदायों को अपराधी जाति घोषित करके कई इलाकों में उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे इनका जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    (4) सरकार ने अपनी राजस्व वृद्धि करने के लिए 19वीं सदी के मध्य में 'प्रति जानवर चराई टैक्स' लगा दिया, जिससे चरवाहों की स्थिति दयनीय होने लगी।

    (5) इन परिस्थितियों में अनेक चरवाहे सूदखोरों के चक्कर में फँस गये तथा कर्ज एवं ब्याज न चुकाने पर उनके हाथ से उनके मवेशी चले गए और वे मजदूर बन कर रह गये।


    मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न

    प्रश्न 1. यूरोप के राजनैतिक मानचित्र में प्रथम महायुद्ध में भाग लेने वाले निम्न देशों को दर्शाइए-
    (अ) जर्मनी (ब) फ्रांस (स) इंग्लैण्ड (द) इटली।
    अथवा
    यूरोप के राजनैतिक मानचित्र में प्रथम महायुद्ध में शामिल यूरोपीय देशों को दर्शाइये।

    उत्तर -

    Map of Europe showing countries involved in World War I with a legend indicating Central Powers, Allied Powers, Neutral States, and states that joined later.
    Map of Europe showing countries involved in World War I with a legend indicating Central Powers, Allied Powers, Neutral States, and states that joined later.

    प्रश्न 2. दिये गये मानचित्र में 19421942 में यूरोप की स्थिति के अनुसार निम्न को दर्शाइये-
    (अ) वृहत्तर जर्मनी
    (ब) धुरी शक्तियों को मदद करने वाले देश
    (स) जर्मन कब्जे वाले इलाके
    (द) इटली और उसका क्षेत्र
    (य) तटस्थ देश।

    उत्तर -

    Map of Europe in 1942 showing various territories
    Map of Europe in 1942 showing various territories

    प्रश्न 3. भारत के रेखा मानचित्र में निम्न चरवाहा समुदायों का क्षेत्र दर्शाइए-
    (1) राइका
    (2) धंगर
    (3) गद्दी
    (4) गोल्ला
    (5) बंजारे
    (6) कुरुमा तथा कुरुबा
    (7) गुज्जर बकरवाल
    (8) मरुस्थल क्षेत्र मालधारी
    (9) भोटिया
    (10) गुज्जर
    (11) मोनपा।

    उत्तर -

    Map of India showing pastoral communities
    Map of India showing pastoral communities