Physical Features of India
[भूगोल] भारत का भौतिक स्वरूप
और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूह के साथ कि.मी. है। भारत के उत्तर-पश्चिम, उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी सीमा पर नवीनतम वलित पर्वत है। इसके दक्षिण का भू-भाग उत्तर में चौड़ा है और उत्तरी अक्षांश से हिन्द महासागर की ओर संकरा होता गया है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत तथा विश्व पर एक टिप्पणी लिखिये।
अथवा
भारत की स्थिति के सन्दर्भ में प्राचीनकाल से भारत के विश्व के देशों के साथ सम्पर्कों का वर्णन कीजिये।
उत्तर- भारत तथा विश्व-भारत एशिया महाद्वीप के पूर्व और पश्चिम के मध्य में स्थित है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर है जो कि पश्चिम में यूरोपीय देशों तथा पूर्वी एशियाई देशों को मिलाता है। इससे भारत यहाँ केन्द्रीय स्थिति में आ जाता है। हिन्द महासागर में किसी भी देश की तटीय सीमा भारत जैसी नहीं है। भारत की इसी महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण एक महासागर का नाम इस पर रखा गया है।
भारत की स्थिति के सन्दर्भ में विश्व के देशों के साथ इसके सम्पर्कों का वर्णन निम्न बिन्दुओं में किया जा सकता है-
(1) दक्षिण का पठार हिन्द महासागर में शीर्षवत् फैला हुआ है और पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों के साथ-साथ पूर्वी एशिया के देशों से भी पूर्वी तट के माध्यम से निकटतम सम्बन्ध बनाये हुए है।
(2) विश्व के देशों के साथ भारत का सम्पर्क युगों पुराना है, किन्तु यह सम्बन्ध समुद्री जलमार्गों की अपेक्षा भूभागों से होकर था।
(3) उत्तर में पर्वतीय दरों से अनेक यात्री प्राचीन काल में भारत आये। इन मार्गों से प्राचीन समय से विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान होता रहा है।
(4) भारत का पश्चिम-मध्य और पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया के पड़ोसी देशों के साथ एक अलग तरह का सामाजिक, सांस्कृतिक सम्पर्क रहा है। इसी कारण भारत के उपनिषदों के विचार, रामायण तथा पंचतंत्र की कहानियाँ, भारतीय अंक एवं दशमलव प्रणाली, बौद्ध धर्म आदि संसार के विभिन्न भागों तक पहुँचे।
(5) भारत के विभिन्न देशों से व्यापारिक सम्बन्ध भी थे। भारत से मसाले, मलमल आदि कपड़े तथा व्यापार के अन्य सामानों का विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता था।
(6) विभिन्न संस्कृतियों से सम्पर्क के कारण यूनानी स्थापत्य कला तथा पश्चिमी एशिया की वास्तुकला का भारत पर प्रभाव पड़ा। देश के अनेक भागों में यूनानी स्थापत्यकला एवं वास्तुकला के प्रतीक मीनारों एवं गुंबदों का प्रभाव देखा गया।
इस प्रकार भारत के विश्व के अनेक देशों के साथ महत्वपूर्ण सम्बन्ध रहे हैं।
प्रश्न 2. भारत तथा उसके पड़ोसी देशों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर- भारत तथा पड़ोसी देश-भारत एक विशाल देश है। इसकी सीमाएँ अनेक पड़ोसी देशों को छूती हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव भारत के पड़ोसी देश हैं। भारत के साथ इनकी स्थिति निम्न प्रकार है-
(1) भारत भूमि की सीमाएँ उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ लगती हैं।
(2) उत्तर में चीन (तिब्बत), नेपाल तथा भूटान के साथ भारत भूमि की सीमाएँ लगती हैं।
(3) पूर्व में म्यांमार तथा बांग्लादेश के साथ इसकी सीमाएँ लगती हैं।
(4) श्रीलंका और मालदीव द्वीप समूह दक्षिण में समुद्र पार हमारे पड़ोसी राष्ट्र हैं। भारत और श्रीलंका के बीच में छोटा समुद्री रास्ता पाक जलसंधि तथा मन्नार की खाड़ी है। मालदीव, लक्षद्वीप समूह के दक्षिण में स्थित है।
भारत के अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ भौगोलिक एवं ऐतिहासिक सम्बन्ध बहुत अच्छे रहे हैं।
2. भारत का भौतिक स्वरूप
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 8
प्रश्न- महान हिमालय में पायी जाने वाली हिमानियों तथा दरों के नाम ज्ञात कीजिये।
उत्तर- (1) महान हिमालय में पाए जाने वाली हिमानियाँ-(i) सियाचिन, (ii) बलटारो, (iii) बिआफो, (iv) हिस् पार, (v) गंगोत्री, (vi) चतुरंगी।
(2) महान हिमालय में पाए जाने वाले दरें- (i) नाथुला दर्रा, (ii) शिपकी ला दर्रा, (iii) काराकोरम दर्रा, (iv) अशील दर्रा, (v) जोजिला दर्रा, (vi) मानानीति दर्रा।
प्रश्न- भारत के उन राज्यों के नाम लिखिए जहाँ ऊँचे शिखर स्थित हैं।
(पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 8 पर दी गई तालिका के अनुसार)
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उत्तर-(1) कंचनजंगा - सिक्किम
(2) नंगा पर्वत - जम्मू और कश्मीर
(3) नंदा देवी - उत्तराखण्ड
(4) कामेट - उत्तराखण्ड
(5) नामचा बरुआ - अरुणाचल प्रदेश
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए-
(i) एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो-
(क) तट (ख) प्रायद्वीप
(ग) द्वीप (घ) इनमें से कोई नहीं
(ii) भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम-
(क) हिमाचल (ख) पूर्वांचल
(ग) उत्तराखण्ड (घ) इनमें से कोई नहीं
(iii) गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिम तटीय पट्टी-
(क) कोरोमण्डल (ख) कन्नड़
(ग) कोंकण (घ) उत्तरी सरकार
(iv) पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर-
(क) अनाईमुडी (ख) महेंद्रगिरी
(ग) कंचनजंगा (घ) खासी
उत्तरमाला- (i) (ख) (ii) (ख) (iii) (ग) (iv) (ख)
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए-
(i) 'भाबर' क्या है?
उत्तर- नदियाँ पर्वतों से नीचे उतरते समय शिवालिक की ढाल पर से कि.मी. की चौड़ी पट्टी में गुटिका का निक्षेपण करती हैं। इसे 'भाबर' के नाम से जाना जाता है।
(ii) हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए।
उत्तर- उत्तर से दक्षिण के क्रम में हिमालय के तीन प्रमुख विभाग निम्न प्रकार हैं-
(1) महान या आन्तरिक हिमालय या हिमाद्रि
(2) निम्न हिमालय या हिमाचल
(3) बाहरी हिमालय या शिवालिक।
(iii) अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में कौनसा पठार स्थित है?
उत्तर- मालवा का पठार।
(iv) भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के हैं।
उत्तर- लक्षद्वीप द्वीप-समूह (लकादीव, मिनीकाय एवं अमीनदीव) प्रवाल भित्ति के हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-
(i) बांगर और खादर
(ii) पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट।
उत्तर-(i) बांगर और खादर में अंतर-
| बांगर | खादर |
|---|---|
| 1. उत्तरी मैदान के पुरातन जलोढ़ को बांगर कहते हैं। | 1. बाढ़ के मैदानों के नवीन तथा युवा जलोढ़ को खादर कहते हैं। |
| 2. ये नदियों के बाढ़ वाले मैदान के ऊपर स्थित हैं जहाँ बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता है। | 2. इन क्षेत्रों में बाढ़ के समय नदी का पानी सम्पूर्ण क्षेत्र में फैल जाता है तथा नयी जलोढ़-परत जम जाती है। |
| 3. इनका प्रति-वर्ष पुनर्निर्माण नहीं होता है। | 3. इनका प्रत्येक वर्ष पुनर्निर्माण होता है। |
| 4. यह कम उपजाऊ होते हैं। | 4. यह अधिक उपजाऊ होते हैं। |
(ii) पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में अंतर-
| पूर्वी घाट | पश्चिमी घाट |
|---|---|
| 1. ये दक्षिणी पठार के पूर्वी घाट पर स्थित हैं। | 1. ये दक्षिणी पठार के पश्चिमी घाट पर स्थित हैं। |
| 2. पूर्वी घाटों की औसत ऊँचाई मी. है। | 2. पश्चिमी घाट पूर्वी घाट की अपेक्षा ऊँचे हैं। इनकी औसत ऊँचाई मी. है। |
| 3. पूर्वी घाट बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों द्वारा खण्डित, अनियमित और कटा-फटा है। | 3. पश्चिमी तट के समानान्तर चलते हुए, पश्चिमी घाट बेहद समानता दर्शाता है। ये निरन्तरता लिए हुए हैं और इन्हें दर्रों से होकर ही पार किया जा सकता है। |
| 4. महेंद्रगिरी ( मी.), पूर्वी घाट का सर्वोच्च पर्वत शिखर है। | 4. सबसे ऊँचे शिखरों में अनाईमुडी ( मी.) और डोडा बेटा ( मी.) शामिल हैं। |
| 5. पूर्वी घाट में वर्षा बहुत कम होती है। | 5. वर्षा वाहक आर्द्र पवनों को रोककर पश्चिमी घाट, पर्वतीय वर्षा कराने में सहायक होते हैं। |
प्रश्न 4. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौनसे हैं? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अन्तर है?
उत्तर - भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग निम्नलिखित हैं-
(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला
(2) उत्तरी मैदान
(3) प्रायद्वीपीय पठार
(4) भारतीय मरुस्थल
(5) तटीय मैदान
(6) द्वीप-समूह।
हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में अन्तर निम्न प्रकार है-
| हिमालय क्षेत्र | प्रायद्वीपीय पठार |
|---|---|
| 1. हिमालय को उत्तर से दक्षिण की ओर तीन भागों में बाँट सकते हैं- (i) महान या हिमाद्रि (ii) हिमाचल या निम्न हिमालय (iii) शिवालिक | 1. प्रायद्वीपीय पठार के दो मुख्य भाग हैं- (i) मध्य उच्च भूमि (ii) दक्कन का पठार |
| 2. हिमालय में ऊँचे शिखर तथा गहरी घाटियाँ हैं। | 2. इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं। |
| 3. यह अवसादी शैलों से बना है। | 3. यह आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है। |
| 4. यह नवीन वलित पर्वतीय क्षेत्र है। | 4. यह पठारी क्षेत्र अति प्राचीन भूखण्ड है। |
| 5. हिमालय क्षेत्र में अधिक हिमनद तथा दरें पाये जाते हैं। | 5. प्रायद्वीपीय पठार में हिमनद नहीं पाये जाते हैं और दरें भी सीमित मात्रा में पाये जाते हैं। |
प्रश्न 5. भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर - भारत का उत्तरी मैदान
भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन निम्न बिन्दुओं में किया जा सकता है-
(1) निर्माण - उत्तरी मैदान का निर्माण तीन प्रमुख नदी प्रणालियों-सिन्धु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र एवं इनकी सहायक नदियों की आपसी क्रियाओं से हुआ है। यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन में जलोढ़ों का निक्षेप हुआ, जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है।
(2) स्थिति व आकृति - उत्तर का विशाल मैदान धनुषाकार आकृति वाला है। यह लगभग किलोमीटर लम्बाई तथा से किलोमीटर चौड़ाई में फैला हुआ है। यह हिमालय पर्वत व दक्षिण के पठार के मध्य में स्थित है। इसे सतलज-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान के नाम से भी जाना जाता है।
(3) क्षेत्रफल - उत्तर के विशाल मैदान का क्षेत्रफल लगभग लाख वर्ग किलोमीटर है।
(4) उत्तरी मैदान का विभाजन - उत्तरी मैदान को अग्र तीन उपवर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
(i) पंजाब का मैदान - उत्तरी मैदान का पश्चिमी भाग पंजाब का मैदान कहलाता है। यह सिन्धु तथा इसकी सहायक नदियों द्वारा बनाया गया है। इसका बहुत बड़ा भाग पाकिस्तान में स्थित है। पंजाब के मैदान में दोआब बहुत अधिक संख्या में हैं।
(ii) गंगा का मैदान - गंगा का मैदान घग्घर तथा तिस्ता नदियों के बीच स्थित है। यह उत्तरी भारत के राज्यों हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड के कुछ भाग तथा पश्चिम बंगाल में फैला है।
(iii) ब्रह्मपुत्र का मैदान - ब्रह्मपुत्र का मैदान इसके पश्चिम विशेषकर असम में स्थित है।
(5) धरातलीय उच्चावच में भिन्नता - उत्तरी मैदान के धरातलीय उच्चावच में भी कुछ विविधता पाई जाती है। आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदान को निम्न चार भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(i) भाबर - नदियाँ पर्वतों से नीचे उतरते समय शिवालिक की ढाल पर से कि.मी. की चौड़ी पट्टिका में गुटिका का निक्षेपण करती हैं। इस क्षेत्र को भाबर कहते हैं।
(ii) तराई - भाबर पट्टी के दक्षिण में स्थित नम तथा दलदली क्षेत्र तराई कहलाता है।
(iii) बांगर - पुराने जलोढ़ से निर्मित उत्तरी मैदान का सबसे विशालतम भाग बांगर कहलाता है। यह वेदिका जैसी आकृति प्रदर्शित करता है।
(iv) खादर - बाढ़ वाले मैदानों के नये तथा युवा निक्षेप खादर कहलाते हैं। इनका प्रतिवर्ष पुनर्निर्माण होता है। इसलिए ये उपजाऊ होते हैं तथा गहन खेती के लिए आदर्श होते हैं।
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(6) महत्त्व-भारत के उत्तरी मैदान का बहुत महत्त्व है। यहाँ सघन जनसंख्या पाई जाती है। उपजाऊ मृदा, पानी की पर्याप्त उपलब्धता तथा अनुकूल जलवायु के कारण कृषि की दृष्टि से यह भारत का अत्यधिक उपजाऊ क्षेत्र है।
प्रश्न 6. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए-
(i) मध्य हिमालय (ii) मध्य उच्च भूमि (iii) भारत के द्वीप-समूह।
उत्तर-(i) मध्य हिमालय- इसका वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) इसे हिमाचल या निम्न हिमालय के नाम से भी जाना जाता है।
(2) मध्य हिमालय श्रृंखला सर्वाधिक असम है।
(3) इन श्रृंखलाओं का निर्माण मुख्यतः अत्यधिक संपीड़ित तथा परिवर्तित शैलों से हुआ है।
(4) इनकी ऊँचाई मीटर से मीटर के बीच तथा औसत चौड़ाई किलोमीटर है।
(5) मध्य हिमालय की पीर पंजाल श्रृंखला सबसे लम्बी तथा सबसे महत्त्वपूर्ण श्रृंखला है। धौलाधर एवं महाभारत श्रृंखलाएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं।
(6) इसी पर्वत श्रृंखला में कश्मीर की घाटी तथा हिमाचल के कांगड़ा एवं कुल्लू की घाटियाँ स्थित हैं।
(7) धर्मशाला, डलहौजी, शिमला, नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग आदि कई पर्वतीय नगर भी इसके निचले भागों में स्थित हैं।
(8) इस क्षेत्र को पहाड़ी नगरों के लिए भी जाना जाता है।
(ii) मध्य उच्च भूमि- इसका वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है, मध्य उच्च भूमि के नाम से जाना जाता है। विंध्य श्रृंखला दक्षिण में सतपुड़ा श्रृंखला तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है।
(2) इस क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ-चंबल, सिंध, बेतवा तथा केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं।
(3) मध्य उच्च भूमि पश्चिम में चौड़ी लेकिन पूर्व में संकीर्ण है।
(4) इस पठार के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखण्ड तथा बघेलखण्ड के नाम से जाना जाता है।
(5) इसके और पूर्व के विस्तार को दामोदर नदी द्वारा अपवाहित छोटा नागपुर पठार दर्शाता है।
(iii) भारत के द्वीप-समूह- भारत में दो द्वीप-समूह हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
I. लक्षद्वीप समूह- (1) यह छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है जो केरल के मालाबार तट के पास अरब सागर में स्थित है।
(2) द्वीपों का यह समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है।
(3) यह वर्ग किमी. के छोटे-से क्षेत्र में फैला है।
(4) में इनका नाम लक्षद्वीप समूह रखा गया। पहले इन द्वीपों को लकादीव, मीनीकाय एवं अमीनदीव के नाम से जाना जाता था।
(5) कावारत्ती द्वीप लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय है।
(6) इस द्वीप-समूह पर पादप तथा जन्तु के बहुत से प्रकार पाए जाते हैं।
(7) पिटली द्वीप, जहाँ मनुष्य का निवास नहीं है, वहाँ एक पक्षी अभयारण्य है।
II. अण्डमान निकोबार द्वीप-समूह- (1) ये द्वीप बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की तरफ फैले हुए हैं।
(2) ये द्वीप-समूह आकार में बड़े, संख्या में बहुल तथा बिखरे हुए हैं।
(3) इस द्वीप-समूह को दो भागों में बाँटा गया है-उत्तर में अण्डमान तथा दक्षिण में निकोबार।
(4) इन द्वीप-समूहों में पाए जाने वाले पादप एवं जन्तुओं में बहुत अधिक विविधता है।
(5) ये द्वीप विषुवत् वृत्त के समीप स्थित हैं अतः यहाँ की जलवायु विषुवतीय है तथा ये घने जंगलों से आच्छादित हैं।
(6) यह माना जाता है कि ये द्वीप-समूह निमज्जित पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं।
मानचित्र कौशल
प्रश्न- भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाइए-
(i) पर्वत शिखर-के-2, कंचनजंगा, नंगा पर्वत, अनाईमुडी।
(ii) पठार-शिलांग, छोटा नागपुर, मालवा तथा बुंदेलखण्ड।
(iii) थार मरुस्थल, पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप समूह, गंगा-यमुना दोआब तथा कोरोमण्डल तट।
उत्तर -
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न-
हिमालय की भारत में सर्वोच्च चोटी है-
(अ) माउण्ट एवरेस्ट (ब) कंचनजंगा
(स) के-2 (द) नंगा पर्वत।निम्न हिमालय की सबसे लम्बी एवं सबसे महत्त्वपूर्ण श्रृंखला है-
(अ) पीर पंजाल श्रृंखला (ब) धौलाधर
(स) महाभारत
(द) इनमें से कोई नहीं।शिवालिक है-
(अ) आन्तरिक हिमालय (ब) निम्न हिमालय
(स) सबसे बाहरी हिमालय
(द) इनमें से कोई नहीं।माउण्ट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?
(अ) 8848 मीटर (ब) 8481 मीटर
(स) 8172 मीटर (द) 8126 मीटरउत्तरी मैदान का विस्तार कितने क्षेत्र में है?
(अ) 6 लाख वर्ग किमी.
(ब) 7 लाख वर्ग किमी.
(स) 8 लाख वर्ग किमी.
(द) 9 लाख वर्ग किमी.
- मरुस्थल में पाये जाने वाले अर्धचन्द्राकार बालू के टीले कहलाते हैं-
(अ) बरखान (ब) खादर
(स) भाबर (द) टिब्बे
- पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर है-
(अ) अनाईमुडी (ब) डोडा बेटा
(स) महेन्द्र गिरी (द) कोडईकनाल
उत्तरमाला- 1. (ब) 2. (अ) 3. (स) 4. (अ) 5. (ब) 6. (अ) 7. (अ)।
निम्न रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
हिमालय की पूरी श्रृंखला एक .................... स्थलाकृति को दर्शाती है। (युवा/प्रौढ़)
हिमालय की सबसे उत्तरी भाग में स्थित श्रृंखला को ....................कहते हैं। (शिवालिक/हिमाद्रि)
हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला को .................... कहा जाता है। (महान हिमालय/शिवालिक)
उत्तरी मैदान .................... मृदा से बना है। (काली/जलोढ़)
उत्तर- 1. युवा 2. हिमाद्रि 3. शिवालिक 4. जलोढ़।
निम्न में से सत्य/असत्य कथन छाँटिए-
- प्रवाल पॉलिप्स कम समय तक जीवित रहने वाले सूक्ष्म प्राणी हैं। ( )
- आस्ट्रेलिया का 'ग्रेट बैरियर रीफ' प्रवाल रोधिका का उदाहरण है। ( )
- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी लक्षद्वीप पर स्थित है। ( )
- चिल्का झील पश्चिमी तट पर स्थित है। ( )
उत्तर- 1. सत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. असत्य।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
| (अ) | (ब) |
|---|---|
| (i) माउण्ट एवरेस्ट ऊँचाई | (a) भारत |
| (ii) कंचनजंगा की ऊँचाई | (b) पूर्वी घाट |
| (iii) धौलागिरि की स्थिति | (c) 8848 मीटर |
| (iv) नंदादेवी की स्थिति | (d) 8598 मीटर |
| (v) चिल्का झील की स्थिति | (e) नेपाल |
उत्तर- (i) (c), (ii) (d), (iii) (e), (iv) (a), (v) (b)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग या भौतिक स्वरूप कौनसे हैं?
उत्तर- (1) हिमालय पर्वत श्रृंखला
(2) उत्तरी मैदान (3) प्रायद्वीपीय पठार
(4) भारतीय मरुस्थल (5) तटीय मैदान
(6) द्वीप-समूह
प्रश्न 2. दून किसे कहते हैं?
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उत्तर-निम्न हिमाचल एवं शिवालिक के बीच स्थित लम्बवत् घाटी को दून कहते हैं।
प्रश्न 3. किन्हीं दो प्रसिद्ध दून के नाम लिखिए।
उत्तर- (1) देहरादून (2) पाटलीदून।
प्रश्न 4. प्रमुख उत्तर-पूर्वी या पूर्वांचल पहाड़ियों के नाम बताइए।
उत्तर- पटकाई पहाड़ी, नागा पहाड़ी, मणिपुर पहाड़ी तथा मिजो पहाड़ी।
प्रश्न 5. उस नदी तन्त्र का नाम बताइए जिसने उत्तरी मैदानों का निर्माण किया।
उत्तर- उत्तरी विशाल मैदानों का निर्माण सिन्धु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा हुआ।
प्रश्न 6. उत्तरी विशाल मैदानों का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर- हिमालय के गिरिपद में स्थित विशाल बेसिन में लाखों वर्ष तक नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी के भरते जाने से उत्तरी विशाल मैदानों का निर्माण हुआ।
प्रश्न 7. वितरिकाएँ किसे कहते हैं?
उत्तर- सिल्ट के जमाव के कारण नदियाँ अपने निचले बहाव में कई धाराओं में विभाजित हो जाती हैं। इन्हीं धाराओं को वितरिकाएँ कहते हैं।
प्रश्न 8. दोआब किसे कहते हैं?
उत्तर- दो नदियों के बीच के भाग को दोआब कहते हैं।
प्रश्न 9. दुनिया का सबसे बड़ा बसा हुआ नदीय-द्वीप कौनसा है?
उत्तर- ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित माजोली द्वीप दुनिया का सबसे बड़ा बसा हुआ नदीय द्वीप है।
प्रश्न 10. भू-आकृति में विविधता के आधार पर उत्तरी मैदान को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर- चार भागों में-(1) भाबर, (2) तराई, (3) भांगर तथा (4) खादर।
प्रश्न 11. 'तराई' किसे कहते हैं?
उत्तर- उत्तरी मैदान में भाबर क्षेत्र के दक्षिण में छोटी धाराएँ एवं नदियाँ फिर से निकल आती हैं तथा एक नम एवं दलदली क्षेत्र का निर्माण करती हैं, जिसे 'तराई' कहते हैं।
प्रश्न 12. दक्षिण के पठार के उत्तर-पूर्व के भाग को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर- दक्षिण के पठार के उत्तर-पूर्व के भाग को स्थानीय रूप से 'मेघालय', 'कार्बी एंगलोंग पठार' तथा 'उत्तर कचार पहाड़ी' के नाम से जाना जाता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत के पूर्वी हिस्सों की पर्वत श्रेणियों पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- ब्रह्मपुत्र नदी के पूर्व में स्थित श्रेणियों को पूर्वी हिमालय के नाम से जाना जाता है। इसका वर्णन निम्न है-
(1) दिहांग श्रृंखला के आगे हिमालय तेजी से दक्षिण की ओर मुड़कर पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इसे पूर्वांचल कहा जाता है।
(2) पूर्वांचल में पटकाई, नागा पहाड़ियाँ, मिजो पहाड़ियाँ तथा मणिपुर पहाड़ियाँ शामिल हैं।
प्रश्न 2. पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियों की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर- (i) पूर्वांचल की पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों से होकर गुजरती हैं।
(ii) ये मजबूत बलुआ पत्थरों, जो अवसादी शैलों से बने हैं, से बनी हैं तथा घने जंगलों से ढकी हैं।
(iii) ये पहाड़ियाँ अधिकतर समानांतर श्रृंखलाओं एवं घाटियों के रूप में फैली हैं।
प्रश्न 3. शिवालिक पर्वत श्रेणी की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर- हिमालय की बाहरी श्रृंखला को शिवालिक कहा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ ये हैं-
(i) इस पर्वत श्रेणी की चौड़ाई से किमी. एवं ऊँचाई से मीटर के मध्य है।
(ii) यह पर्वत श्रेणी जलोढ़ अवसादों से निर्मित है।
(iii) शिवालिक और हिमाचल के बीच स्थित लम्बवत् घाटी को दून के नाम से जाना जाता है। कुछ प्रसिद्ध दून हैं-देहरादून, कोटलीदून तथा पाटली दून।
प्रश्न 4. उत्तर के मैदान भारत के सर्वाधिक सघन आबादी वाले क्यों हैं?
उत्तर- इसके निम्न कारण हैं-(1) गंगा, सिन्धु एवं ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों की जलोढ़ मृदा से यह मैदान बना है।
(2) अपनी उपजाऊ काँप मिट्टी, पर्याप्त जलापूर्ति तथा अनुकूल जलवायविक परिस्थितियों ने इसे कृषि की दृष्टि से देश का सर्वाधिक उत्पादक क्षेत्र बना दिया है।
(3) यहाँ रेल एवं सड़क परिवहन का अच्छा एवं विकसित नेटवर्क है। इसके कारण व्यक्ति एवं वस्तु के परिवहन में आसानी होती है।
प्रश्न 5. अरावली पहाड़ियों की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर- (1) अरावली की पहाड़ियाँ प्रायद्वीपीय
पठाए के पश्चिमी एवं उत्तरी-पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं।
(2) ये अत्यधिक अपरदित हैं तथा खंडित पहाड़ियाँ हैं।
(3) ये दक्षिण-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्व दिशाओं में गुजरात से दिल्ली तक फैली हुई हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत की भूमि की भौतिक विभिन्नताओं को समझाइए।
उत्तर- भारत की भूमि में अनेक भौतिक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) उत्तर में असममित उच्चावच पाया जाता है। यहाँ अवसादी शैलों से निर्मित हिमालय पर्वत श्रृंखला स्थित है जिसमें ऊँचे शिखर, गहरी घाटियाँ तथा तेज बहने वाली नदियाँ स्थित हैं।
(2) उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं तथा ये भी नवीन स्थलाकृतियाँ हैं। इसमें भी भाबर, तराई, बांगर तथा खादर के रूप में उच्चावच की भिन्नता देखने को मिलती है।
(3) दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार है जो आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से निर्मित है जहाँ कम ऊँची पहाड़ियाँ तथा चौड़ी घाटियाँ हैं।
(4) पूर्वी तथा पश्चिमी किनारों पर तटीय मैदान पाये जाते हैं।
प्रश्न 2. भारत के तटीय मैदान पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-भारत का तटीय मैदान- (i) भारत का तटीय मैदान प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर संकीर्ण तटीय पट्टियों का विस्तार है।
(ii) यह पश्चिम में अरब सागर से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक स्थित है।
(iii) मोटे रूप से इसे दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है- (अ) पश्चिमी तटीय मैदान और (ब) पूर्वी तटीय मैदान।
(iv) पश्चिमी तटीय मैदान पश्चिमी घाट तथा अरब सागर के बीच स्थित एक संकीर्ण मैदान है जिसके तीन भाग हैं- (1) उत्तरी भाग (कोंकण) (2) मध्य भाग (कन्नड़ मैदान) और (3) दक्षिणी भाग (मालाबार तट)।
(v) पूर्वी तटीय मैदान बंगाल की खाड़ी के साथ विस्तृत चौड़ा एवं समतल मैदान है। इसके उत्तरी भाग को 'उत्तरी सरकार' तथा दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट के नाम से जाना जाता है। चिल्का झील इस तट पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण भू लक्षण है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत के प्रमुख भौतिक स्वरूपों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत के भू-आकृतिक विभाजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर - भारत के भौतिक स्वरूप
भौगोलिक रूप से अत्यधिक विस्तृत क्षेत्र में फैले होने के कारण भारत का भौगोलिक उच्चावच एकसमान नहीं है। उसमें अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भौतिक विभिन्नताओं के आधार पर भारत को निम्न भौतिक स्वरूपों में बाँटा गया है-
(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला- यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है। भूगर्भीय रूप से यह युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से मोड़दार पर्वत श्रृंखला है। यह अत्यधिक असमम श्रृंखला है। यह पर्वत श्रृंखला किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त में फैली है। कश्मीर में इसकी चौड़ाई किमी. तथा अरुणाचल में किमी. है। इस पर्वत श्रृंखला में विश्व की सर्वाधिक ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट स्थित है।
(2) उत्तरी मैदान- इस मैदान का विस्तार लाख वर्ग कि.मी. के क्षेत्र पर है। यह मैदान लगभग किमी. लम्बा तथा से किमी. चौड़ा है। यह तीन नदी प्रणालियों-सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र के आपसी संक्रियाओं का परिणाम है। यह उपजाऊ-जलोढ़ मृदा से बना है। यह सघन जनसंख्या वाला भौगोलिक क्षेत्र है जो समृद्ध मृदा आवरण, पर्याप्त पानी की उपलब्धता एवं अनुकूल जलवायु वाला अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है।
(3) प्रायद्वीपीय पठार- यह आग्नेय एवं कायान्तरित चट्टानों से बनी एक उच्च भूमि है। इसमें चौड़ी एवं उथली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। इस पठार के दो प्रमुख भाग हैं-मध्य उच्च भूमि तथा दक्कन का पठार।
(4) भारतीय मरुस्थल- यह अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारों की ओर स्थित है। यहाँ की जलवायु शुष्क है तथा बहुत कम मात्रा में वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। यहाँ अधिकांश भागों पर रेत के टीले पाए जाते हैं।
(5) तटीय मैदान- यह मैदान प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी किनारों पर संकीर्ण तटीय पट्टियों का विस्तार है।
(6) द्वीप समूह- इसमें दो द्वीप-समूह शामिल हैं-लक्द्वीप द्वीप-समूह तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह। लक्षद्वीप द्वीप-समूह अरब सागर में स्थित है
जबकि अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं।
प्रश्न 2. हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन कीजिए।
अथवा
हिमालय पर्वतीय क्षेत्र के प्रमुख भागों का भौगोलिक वर्णन कीजिये।
उत्तर - हिमालय पर्वत श्रृंखला
हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है-
(1) स्थिति, आकृति एवं विस्तार- हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत है। यह एक नवीन एवं वलित पर्वत श्रृंखला है। हिमालय पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम से पूर्व दिशा में सिन्धु से लेकर ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं। ये किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त का निर्माण करती हैं। कश्मीर में इसकी चौड़ाई किमी. तथा अरुणाचल में किमी. है। यह विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है तथा अत्यधिक असम है। इसके पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।
(2) विभाजन- देशान्तरीय विस्तार के साथ हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं को निम्न तीन मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) महान या आन्तरिक हिमालय या हिमाद्रि- यह सर्वाधिक निरन्तर श्रेणी है, जिसकी औसत ऊँचाई मी. है। इसमें दुनिया की सर्वाधिक ऊँची चोटी भी स्थित है। इसका आन्तरिक भाग ग्रेनाइट का बना हुआ है। इसके मोड़ की प्रकृति असममित है। यह सालभर बर्फ से ढँका रहता है तथा इससे कई हिमनद बाहर निकलते हैं।
(ii) निम्न हिमालय- इसे हिमाचल भी कहा जाता है। यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है तथा सर्वाधिक कटे-फटे पर्वत तन्त्र का निर्माण करता है। इसकी ऊँचाई मी. से मी. के बीच है। यह श्रेणी अपने हिल स्टेशनों के लिए प्रसिद्ध है।
(iii) शिवालिक- यह हिमालय की सबसे बाहरी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई मी. से मी. के बीच तथा चौड़ाई से किमी. के बीच है। यह सुदूर उत्तर में स्थित मुख्य हिमालयी श्रेणियों से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई अवसादों से बनी है। इसमें कई प्रसिद्ध 'दून' स्थित हैं।
पश्चिम से पूर्व तक स्थित क्षेत्रों के आधार पर हिमालय को अग्र प्रकार से विभाजित किया जा सकता है -
(i) पंजाब हिमालय- सतलुज एवं सिन्धु के बीच स्थित क्षेत्र।
(ii) कुमाऊँ हिमालय- सतलुज एवं काली नदियों के बीच।
(iii) नेपाल हिमालय- काली तथा तिस्ता नदियों के बीच।
(iv) असम हिमालय- तिस्ता तथा दिहांग नदियों के बीच।
(3) पूर्वांचल- ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा बनाती है। दिहांग गार्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर एक तीव्र मोड़ बनाते हुए भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इन्हें पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है। ये पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों में विस्तृत हैं। ये अवसादी शैल की बनी हैं। यहाँ घने जंगल हैं। पूर्वांचल में पटकाई, नागा, मिजो तथा मणिपुर पहाड़ियाँ आती हैं।
प्रश्न 3. प्रायद्वीपीय पठार का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताएँ बतलाइए।
उत्तर - प्रायद्वीपीय पठार
प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) स्थिति, आकृति एवं निर्माण- प्रायद्वीपीय पठार उत्तर के मैदान के दक्षिण में स्थित है। यह एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है। यह बहुत प्राचीनतम भूभाग है। यह गोंडवानालैण्ड के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।
(2) मुख्य भाग- प्रायद्वीपीय पठार को निम्न दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) मध्य उच्च भूमि- नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित प्रायद्वीपीय पठार का भू-भाग मध्य उच्च भूमि कहलाता है। इसके अन्तर्गत मालवा का पठार, बुन्देलखण्ड का पठार तथा छोटा नागपुर पठार शामिल हैं। अरावली श्रेणी तथा विन्ध्य श्रेणी इस भाग की मुख्य पर्वत श्रेणियाँ हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ चम्बल, सिंध, बेतवा तथा केन हैं जो दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं।
(ii) दक्षिण का पठार- दक्षिण का पठार की आकृति त्रिभुजाकार है। यह नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है।
मुख्य पहाड़ियाँ एवं श्रृंखलाएँ- उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है जबकि महादेव, कैमूर की पहाड़ी तथा मैकाल श्रृंखला इसके पूर्वी विस्तार