RajBoardExam
📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 9: [भूगोल] जलवायु

Climate

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
📚 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (RBSE) 📘 समकालीन भारत-1 (भूगोल) सत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

Climate

[भूगोल] जलवायु


सहायक नदियों से मिलकर असम में ब्रह्मपुत्र का निर्माण करती है। असम होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश कर यह गंगा नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश में इसे जमुना कहा जाता है।

(iv) जल एवं सिल्ट की मात्रा—तिब्बत एक शीत एवं शुष्क क्षेत्र है। अतः यहाँ इस नदी में जल एवं सिल्ट की मात्रा बहुत कम होती है। भारत में यह उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों से गुजरती है। इसलिए यहाँ इस नदी में सिल्ट एवं जल की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण नदी की सतह बढ़ जाती है और यह बार-बार अपनी धारा के मार्ग में परिवर्तन लाती है एवं बाढ़ के द्वारा असम तथा बांग्लादेश में बहुत अधिक क्षति पहुँचाती है।

(v) नदीय द्वीप—असम में ब्रह्मपुत्र अनेक धाराओं में बहकर एक गुंफित नदी के रूप में बहती है तथा अनेक नदीय द्वीपों का निर्माण करती है। विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप माजोली ब्रह्मपुत्र में ही स्थित है।

(vi) लम्बाई तथा क्षेत्र—ब्रह्मपुत्र नदी की लम्बाई सिन्धु नदी से कुछ अधिक है। लेकिन इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है।

प्रश्न 3. प्रायद्वीपीय नदियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिये।

उत्तर— प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रायद्वीपीय नदियों को उनके अपवाह क्षेत्र के आधार पर दो भागों में बाँटा जा सकता है-

I. पश्चिम में बहने वाली अथवा अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ—पश्चिमी घाट से पश्चिम में बहने वाली तथा अरब सागर में गिरने वाली नदियों में नर्मदा व तापी नदी मुख्य हैं। ये ज्वार-नद-मुख का निर्माण करती हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-

(1) नर्मदा द्रोणी—नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश में अमरकंटक पहाड़ी के निकट है। वहाँ से निकलकर यह भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है। यह नदी अपने अपवाह क्षेत्र में अनेक दर्शनीय स्थलों का निर्माण करती है। जबलपुर के निकट संगमरमर की चट्टानों में यह गहरे गार्ज से बहती है तथा आगे तीव्र ढाल से गिरकर 'धुँआधार प्रपात' बनाती है। इसकी सभी सहायक नदियाँ छोटी हैं। नर्मदा द्रोणी मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ भागों में विस्तृत है।

(2) तापी द्रोणी—यह मध्यप्रदेश के बेतुल जिले में सतपुड़ा की श्रृंखलाओं से निकलती है। यह भी भ्रंश घाटी से होकर बहती है। इसकी लम्बाई बहुत कम है। तापी की द्रोणी मध्यप्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्यों में है।

पश्चिम की ओर बहने वाली अन्य नदियाँ साबरमती, माही, भारत-पुजा तथा पेरियार हैं।

II. पूर्व की ओर बहने वाली अथवा बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ—इनमें मुख्य नदियाँ गोदावरी, महानदी, कृष्णा तथा कावेरी हैं।

(1) गोदावरी—यह सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट की ढालों से निकलती है। यह लगभग 15001500 कि.मी. लम्बी है। इसका अपवाह क्षेत्र प्रायद्वीपीय नदियों में सबसे बड़ा है। पूर्णा, वर्धा, प्रान्हिता, मांजरा, वेनगंगा एवं पेनगंगा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। इसकी लम्बाई एवं बड़े अपवाह क्षेत्र के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।

(2) महानदी—महानदी छत्तीसगढ़ की उच्च भूमि से निकलती है। इसकी लम्बाई 860860 कि.मी. है। यह महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखण्ड तथा उड़ीसा में होकर बहती है।

(3) कृष्णा नदी—यह पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के निकट एक झरने से निकलती है। यह 14001400 कि.मी. लम्बी है। तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मुसी तथा भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।

(4) कावेरी नदी—यह पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी श्रेणी से निकलती है। अमरावती, भवानी, हेमावती तथा काबिनी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु से होकर बहती है। यह 760760 कि.मी. लम्बी है। दामोदर, ब्राह्मणी, वैतरणी तथा सुवर्ण रेखा पूर्व की ओर बहने वाली कुछ अन्य नदियाँ हैं।


4. जलवायु

[पाठगत प्रश्न]

पृष्ठ 27

प्रश्न—राजस्थान में घरों की दीवार मोटी तथा छत चपटी क्यों होती हैं?

उत्तर— राजस्थान एक उष्ण प्रदेश है। यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है। यहाँ घरों की दीवार मोटी इसलिए बनाई जाती है ताकि वे देरी से गर्म हों। इससे घर के अन्दर का तापमान कम रहता है एवं ठंडक बनी रहती है। राजस्थान में वर्षा भी कम होती है, अतः यहाँ छत चपटी बनाई जाती है। चपटी छतों का आँधियों में उड़ने का खतरा भी कम रहता है।

प्रश्न—तराई क्षेत्र तथा गोवा एवं मैंगलौर में ढाल

808

वाली छतें क्यों होती हैं?

उत्तर—तराई क्षेत्र तथा गोवा एवं मैंगलोर अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। गोवा और मैंगलोर में 300400300-400 से.मी. से अधिक वर्षा होती है तथा तराई क्षेत्रों में 150200150-200 सेमी. तक वर्षा होती है। इसलिए इन क्षेत्रों में ढलान वाली छतें बनाई जाती हैं ताकि पानी छतों पर रुके नहीं; बल्कि ढलवाँ छतों के सहारे सहजता से बह जाए।

प्रश्न—असम में प्राय: कुछ घर बाँस के खम्भों (Stilt) पर क्यों बने होते हैं?

उत्तर—असम में प्रति वर्ष 300300 सेमी. से भी अधिक वर्षा होती है तथा बाढ़ आने पर सारा क्षेत्र पानी में डूब जाता है। धरती पर लगभग पूरे वर्ष बाढ़ का पानी भरा रहता है जिससे विषैले साँप व अन्य जानवर उनमें रहने लगते हैं। घर को पानी के भराव से तथा विषैले जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए असम में कुछ घर बाँस के खम्भों पर बने होते हैं।

प्रश्न—विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण कटिबन्धीय भागों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे पर क्यों स्थित हैं?

उत्तर—उपोष्ण कटिबन्धों में सर्वाधिक वर्षा व्यापारिक पवनों के द्वारा होती है, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती हैं। जब वे किसी महाद्वीप के पूर्वी छोर से उठती हैं, तब वे नमी से भरपूर होती हैं तथा पूर्वी किनारों पर अवरोधों के आते ही भारी मात्रा में वर्षा करती हैं। महाद्वीप के पश्चिमी छोर पर पहुँचने पर ये शुष्क हो जाती हैं। इनकी आर्द्रता समाप्त हो जाती है। परिणामस्वरूप, पश्चिमी छोर वर्षारहित रह जाता है। यही कारण है कि विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण कटिबन्धीय भागों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे पर स्थित हैं।


पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

(i) नीचे दिए गए स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है?
(क) सिलचर (ख) चेरापूंजी
(ग) मासिनराम (घ) गुवाहाटी

(ii) ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है?

(क) काल वैशाखी (ख) व्यापारिक पवनें
(ग) लू (घ) इनमें से कोई नहीं

(iii) भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है-
(क) मई के प्रारम्भ में (ख) जून के प्रारम्भ में
(ग) जुलाई के प्रारम्भ में (घ) अगस्त के प्रारम्भ में

(iv) निम्नलिखित में से कौनसी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है-
(क) गर्म दिन एवं गर्म रातें
(ख) गर्म दिन एवं ठण्डी रातें
(ग) ठण्डा दिन एवं ठण्डी रातें
(घ) ठण्डा दिन एवं गर्म रातें

उत्तरमाला—(i) (ग) (ii) (ग) (iii) (ख) (iv) (ख)

प्रश्न 2. निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए-

(i) भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौनसे कारक हैं?

उत्तर—भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

(1) अक्षांश (2) ऊँचाई (3) वायुदाब एवं पवन तंत्र-(a) वायुदाब एवं धरातलीय पवनें, (b) ऊपरी वायु परिसंचरण तथा (c) पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ एवं उष्णकटिबंधीय चक्रवात (4) समुद्र से दूरी (5) महासागरीय धाराएँ तथा उच्चावच लक्षण।

(ii) भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है?

उत्तर—(1) मानसून का प्रभाव उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 2020^{\circ} उत्तर तथा 2020^{\circ} दक्षिण के बीच रहता है। भारत का अधिकांश भाग इसी क्षेत्र में आता है। (2) मानसूनी पवनों से अत्यधिक प्रभावित होने के कारण यहाँ की जलवायु मानसूनी प्रकार की है।

(iii) भारत के किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है एवं क्यों?

उत्तर—भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है; क्योंकि यहाँ जल की मात्रा बहुत कम है। रेतीली मिट्टी नमी व ताप को ग्रहण (सोख) नहीं कर सकती। वायुमण्डल में भी जलवाष्प की कमी होती है। लू अर्थात् धूलभरी गर्म एवं शुष्क पवनें दिन के समय इस क्षेत्र में चलती हैं। तेजी से गर्म होने के कारण दिन में तापमान बहुत बढ़ जाता है। कभी-कभी ये गर्म एवं शुष्क पवनें यहाँ देर शाम तक जारी रहती हैं।

(iv) किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है?

उत्तर—अरब सागर से आने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है।

(v) मानसून को परिभाषित करें। मानसून में

विराम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर— मानसून-मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द 'मौसिम' से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है-मौसम। मानसून का अर्थ, एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन है।

मानसून में विराम- मानसून में विराम, मानसून से सम्बन्धित एक परिघटना है। इसमें आर्द्र एवं शुष्क दोनों तरह के अन्तराल होते हैं। दूसरे शब्दों में, मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। इसमें वर्षा रहित अन्तराल भी होते हैं। इसे ही 'मानसून में विराम' के नाम से जाना जाता है।

(vi) मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला क्यों समझा जाता है?

उत्तर— भारत एक विशाल देश है। यहाँ उच्चावच, जलवायु, वनस्पति तथा जनजीवन में विविधता मिलती है। किन्तु मानसून एक ऐसा भौगोलिक कारक है जो देश की इन विविधताओं को एक सूत्र में बाँधकर एकता स्थापित करता है।

मानसून के आगमन पर समस्त देश में वर्षा होती है। ये मानसूनी पवनें हमें जल प्रदान कर कृषि प्रक्रिया में तेजी लाती हैं। समस्त भारतीय भू-परिदृश्य, इसका वन्य और वनस्पति जीवन, पूरा कृषि कार्यक्रम, लोगों की जीवन शैली और उनके त्यौहार; सभी कुछ मानसून के इर्द-गिर्द घूमते हैं। सभी भारतीय प्रतिवर्ष मानसून की प्रतीक्षा करते हैं। यही कारण है कि मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला समझा जाता है।

प्रश्न 3. उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है?

उत्तर— उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटने के निम्न कारण हैं-

(1) आर्द्रता से युक्त बंगाल की खाड़ी की शाखा तीव्र गति से उत्तरी-पूर्वी राज्यों की ओर प्रवेश करती है और वहाँ पर स्थित पहाड़ियों से टकराकर घनघोर वर्षा करती है। इससे वहाँ अधिक वर्षा होती है।

(2) यहाँ से मानसूनी पवनें हिमालय के सहारे-सहारे पश्चिम में गंगा के मैदान की ओर बढ़ जाती हैं। आगे बढ़ने के साथ-साथ इनमें नमी की मात्रा कम होती जाती है तथा वर्षा की मात्रा भी घटती जाती है।

(3) पश्चिमी भाग समुद्र से दूर होने के कारण भी वहाँ पहुँचते-पहुँचते मानसूनी हवाएँ शुष्क हो जाती हैं तथा कम वर्षा होती है।

प्रश्न 4. कारण बताएँ।

(i) भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है?

उत्तर— भारतीय उपमहाद्वीप में वायु दाब एवं पवन तंत्र अद्वितीय है। यथा-(अ) शीत ऋतु में हिमालय के उत्तर में उच्च दाब का केन्द्र बन जाता है, जबकि महासागरीय क्षेत्र अर्थात् जलीय भाग पर निम्न दाब होता है। अतः ठण्डी शुष्क पवनें स्थल से महासागरीय क्षेत्र (उत्तर से दक्षिण) की ओर बहती हैं।

(ब) गर्मी के मौसम में, भूमि जल की तुलना में अधिक गर्मी ग्रहण करती है। इससे यहाँ वायु गर्म होकर ऊपर उठ जाती है जिसके कारण आंतरिक एशिया और उत्तर-पूर्वी भारत के ऊपर एक निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। इसके कारण गर्मी के दिनों में वायु की दिशा पूरी तरह से परिवर्तित हो जाती है। इस प्रकार पवनें दक्षिण में स्थित हिंद महासागर के उच्च दाब वाले क्षेत्र से दक्षिण-पूर्वी दिशा में बहते हुए विषुवत वृत्त को पार कर दाहिनी ओर मुड़ते हुए भारतीय उपमहाद्वीप पर स्थित निम्न दाब की ओर बहने लगती हैं। अर्थात् पवनें जल से स्थल की ओर चलती हैं।

(ii) भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है।

उत्तर— भारत में अधिकांश वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से होती है जो भारत में केवल जून से सितम्बर के मध्य सक्रिय होता है। यही कारण है कि भारत में अधिकतर वर्षा इन्हीं कुछ महीनों में होती है।

(iii) तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है।

उत्तर—(अ) शीत ऋतु में तमिलनाडु तट भारत में चलने वाली उत्तरी-पूर्वी शुष्क पवनों के प्रभाव के क्षेत्र में पड़ता है। जब ये पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरती हैं तो काफी मात्रा में आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं और तमिलनाडु के तट से टकराकर खूब वर्षा करती हैं।

(ब) तमिलनाडु का तट दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ने के कारण ग्रीष्म ऋतु में वर्षा प्राप्त नहीं कर पाता है।

(iv) पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते हैं।

उत्तर— नवम्बर की शुरुआत में उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर बना निम्न दाब वाली अवस्था बंगाल की खाड़ी पर स्थानान्तरित हो जाती है। यह स्थानान्तरण चक्रवाती निम्न दाब से जुड़ा होता है, जो कि अण्डमान सागर के ऊपर उत्पन्न होता है। यह चक्रवात जब भारत के पूर्वी तट से गुजरता है तो भारी और व्यापक वर्षा होती है। ये उष्णकटिबंधीय चक्रवात बहुत विध्वंसक होते हैं। गोदावरी, कृष्णा, कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले

810

डेल्टा प्रदेशों में प्रायः चक्रवात आते हैं जिसके कारण बड़े पैमाने पर जान एवं माल की क्षति होती है।

(v) राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है।

उत्तर-(1) राजस्थान और गुजरात के कुछ भाग, जो पश्चिमी छोर पर स्थित हैं, सूखा प्रभावित हैं क्योंकि जब मानसूनी पवनें इन क्षेत्रों में पहुँचती हैं, उनकी आर्द्रता समाप्त हो चुकी होती है।

(2) पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र पवन-विमुख ढाल पर स्थित होने के कारण यहाँ वर्षा न्यूनतम होती है। अतः यह सूखा प्रभावित क्षेत्र है।

प्रश्न 5. भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताओं को उदाहरण सहित समझाएँ।

उत्तर-भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) तापमान सम्बन्धी क्षेत्रीय विविधताएँ-(i) गर्मियों में, राजस्थान के मरुस्थल में कुछ स्थानों का तापमान 5050^{\circ} से. तक पहुँच जाता है जबकि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में यह लगभग 2020^{\circ} से. रहता है।

(ii) सर्दी की रात्रि में जम्मू-कश्मीर में द्रास का तापमान 45-45^{\circ} से. तक पहुँच जाता है जबकि तिरुवनन्तपुरम में यह लगभग 2222^{\circ} से. हो सकता है।

(iii) स्थान विशेष पर दिन और रात के तापमान में भी भारी अन्तर पाया जा सकता है। जैसे-थार के मरुस्थल में दिन का तापमान 5050^{\circ} से. तक हो सकता है, जबकि उसी रात को यह गिरकर 1515^{\circ} से. भी रह सकता है। दूसरी ओर, केरल या अण्डमान एवं निकोबार में दिन तथा रात का तापमान प्रायः समान ही रहता है।

(iv) तटीय क्षेत्रों की अपेक्षा देश के आंतरिक भागों में तापमान में अधिक अन्तर पाया जाता है।

(2) वर्षा सम्बन्धी क्षेत्रीय विविधताएँ-वर्षण के रूप तथा प्रकार में ही नहीं, बल्कि इसकी मात्रा एवं ऋतु के अनुसार वितरण में भी भिन्नता होती है। यथा-(i) हिमालय में वर्षण प्रायः हिम के रूप में होता है, जबकि शेष भारत में यह वर्षा के रूप में होता है।

(ii) पश्चिमी तट के भागों तथा उत्तर-पूर्वी भारत में जहाँ वार्षिक वर्षा 400400 से.मी. हो जाती है वहाँ पश्चिमी राजस्थान तथा इससे सटे पंजाब, हरियाणा तथा गुजरात के भागों में यह 6060 से.मी. से भी कम होती है।

(iii) देश के अधिकतर भागों में जून से सितम्बर तक वर्षा होती है लेकिन कुछ क्षेत्रों जैसे तमिलनाडु के तट पर अधिकतर वर्षा अक्टूबर तथा नवम्बर में होती है।

(iv) उत्तरी मैदान में पूर्व की ओर अधिक वर्षा होती है जो पश्चिम की ओर घटती जाती है।

(3) पवनों की दिशा सम्बन्धी अन्तर-ग्रीष्म ऋतु में पवनें समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं जबकि शीत ऋतु में ये स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।

प्रश्न 6. शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर-शीत ऋतु की मौसमी अवस्था एवं विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) अवधि-शीत ऋतु मध्य नवम्बर से आरम्भ होकर फरवरी तक रहती है। भारत के उत्तरी भाग में दिसम्बर और जनवरी सबसे ठण्डे महीने होते हैं।

(2) तापमान-तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर घटता जाता है। पूर्वी तट पर चेन्नई में औसत तापमान 2424^{\circ} से. से 2525^{\circ} से. के बीच होता है, जबकि उत्तरी मैदानों में यह 1010^{\circ} से. से 1515^{\circ} से. के बीच होता है। इस ऋतु में दिन गर्म और रातें ठण्डी होती हैं। उत्तर में तुषारापात सामान्य है और हिमालय के उच्च ढलानों में हिमपात होता है।

(3) पवनें-इस मौसम में देश में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें प्रवाहित होती हैं। ये स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं। इसलिए देश के अधिकतर भाग में शुष्क मौसम होता है।

(4) वर्षा-उत्तर-पूर्वी पवनों से तमिलनाडु तट पर कुछ वर्षा होती है, क्योंकि यहीं से ये पवनें समुद्र से स्थल की ओर बहती हैं।

(5) वायुदाब-देश के उत्तरी भाग में एक कमजोर उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है, जिसमें हल्की पवनें इस क्षेत्र से बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं। उच्चावच से प्रभावित होकर ये पवनें पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम गंगा घाटी में बहती हैं।

(6) जलवायु दशाएँ-शीत ऋतु में मौसम सुखद होता है। इस ऋतु में साफ आसमान, कम तापमान, कम आर्द्रता और पवनें धीरे-धीरे चलती हैं।

(7) चक्रवाती विक्षोभ-शीत ऋतु में उत्तरी मैदानों में पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम से चक्रवाती विक्षोभ का अन्तर्वाह विशेष लक्षण है। यह कम दाब वाली प्रणाली भूमध्यसागर एवं पश्चिमी एशिया के ऊपर उत्पन्न होती है तथा पश्चिमी पवनों के साथ भारत में प्रवेश करती है। इसके कारण शीतकाल में मैदानों में वर्षा तथा पर्वतों पर हिमपात होता है।

(8) मावट-शीतकाल में होने वाली वर्षा मात्रा में कम होती है; किन्तु यह रबी की फसलों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। स्थानीय तौर पर इसे 'मावट' या 'महावट'

कहते हैं।

(9) प्रायद्वीपीय भाग अप्रभावित - प्रायद्वीपीय भागों में शीत ऋतु स्पष्ट नहीं होती है। समुद्री पवनों के प्रभाव के कारण शीत ऋतु में भी यहाँ तापमान के प्रारूप में न के बराबर परिवर्तन होता है।

प्रश्न 7. भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर - भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) अवधि - भारत में मानसूनी वर्षा का समय प्रायः जून के आरम्भ से लेकर मध्य सितम्बर तक का है। भारत में अधिकांश वर्षा (लगभग 98%98%) दक्षिणी-पश्चिमी ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनों से होती है। शीतकालीन मानसूनों से यहाँ वर्षा मात्र 55 प्रतिशत होती है।

(2) समय की अनिश्चितता - मानसून के आगमन तथा वापसी के समय में निश्चितता का अभाव रहता है। कभी भारी वर्षा होती है और कभी सूखा ही पड़ जाता है।

(3) वर्षण की मात्रा में अनिश्चितता - मानसूनी वर्षा में वर्षण की मात्रा भी अनिश्चित होती है। इसमें क्षेत्र तथा अवधि दोनों आधारों पर अन्तर पाया जा सकता है।

(4) क्षेत्रानुसार मानसून की कुल अवधि में अन्तर - भारत में क्षेत्रानुसार मानसून की कुल अवधि में भी अन्तर पाया जाता है। पश्चिमी राजस्थान में मानसून की अवधि दो माह से भी कम होती है, जबकि केरल एवं अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह में यह छ: महीने की अवधि का होता है।

(5) मानसून में विराम - मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। इसमें वर्षा रहित अन्तराल भी होती हैं, जिन्हें मानसून में विराम के नाम से जाना जाता है।

(6) बाढ़ तथा सूखा - शुष्क एवं आर्द्र स्थितियों की तीव्रता, आवृत्ति एवं समय काल में भिन्नता होती है। इसके कारण मानसूनी वर्षा के समय यदि एक भाग में बाढ़ आ रही होती है, तो दूसरे भाग में सूखा पड़ रहा होता है।

(7) असमान वितरण - मानसूनी वर्षा का वितरण असमान होता है। मानसून की अधिकतर वर्षा देश के उत्तर-पूर्वी भागों में होती है। खासी पहाड़ी के दक्षिणी श्रृंखलाओं में स्थित मासिनराम विश्व में सबसे अधिक औसत वर्षा प्राप्त करता है। गंगा की घाटी में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है तथा राजस्थान के मरुस्थलीय भाग में बहुत कम वर्षा होती है।

(8) मूसलाधार वर्षा - मानसूनी वर्षा मूसलाधार वर्षा होती है। एक बार आने पर यह लगातार कई दिनों तक जारी रहती है।


मानचित्र कौशल

प्रश्न - भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाएँ -
(i) 400400 सेमी. से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र
(ii) 2020 सेमी. से कम वर्षा वाले क्षेत्र
(iii) भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दिशा।

उत्तर -

भारत वार्षिक वर्षा मानचित्र
भारत वार्षिक वर्षा मानचित्र

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न -

  1. एक विशेष समय में एक क्षेत्र के वायुमण्डल की अवस्था के लिए निम्नलिखित में से कौनसा एक शब्द प्रयोग किया जाता है?
    (अ) मौसम (ब) पवनें
    (स) जलवायु (द) दाब

  2. निम्न में से कौनसा कारण पवन को अपने साधारण मार्ग से विचलित करने के लिए उत्तरदायी है?

(अ) अभिकेन्द्रिक बल (ब) अपकेन्द्रिक बल
(स) कोरियोलिस बल (द) गुरुत्वाकर्षण बल

  1. कौनसा नगर भारत में सबसे ठण्डा स्थान है?
    (अ) द्रास (ब) श्रीनगर

812

(स) शिलांग (द) बीकानेर
4. भारत के उत्तरी-पश्चिमी राज्यों से मानसून की वापसी आरंभ हो जाती है-

(अ) सितम्बर से (ब) जून से
(स) अक्टूबर से (द) नवम्बर से
5. शीत ऋतु की अवधि है-
(अ) मई से जून तक
(ब) जून से मध्य सितम्बर तक
(स) मध्य नवम्बर से फरवरी तक
(द) दिसम्बर से मार्च तक
6. भारत में ग्रीष्म ऋतु की अवधि है-
(अ) मार्च से मई (ब) जून से सितम्बर
(स) सितम्बर से नवम्बर (द) जनवरी से अप्रैल
7. स्टैलैग्माइट एवं स्टैलैक्टाइट गुफाएँ कहाँ स्थित हैं?
(अ) मुम्बई में (ब) ओडिशा में
(स) मासिनराम में (द) गोवाहाटी में

उत्तरमाला-1. (अ) 2. (स) 3. (अ) 4. (अ) 5. (अ) 6. (अ) 7. (स)।

निम्न रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

  1. .................... एक विशेष समय में एक क्षेत्र के वायुमण्डल की अवस्था को बताता है। (जलवायु/मौसम)

  2. एक विशाल क्षेत्र में लम्बे समयावधि में मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं का कुल योग .................... कहलाता है। (ऋतु/जलवायु)

  3. उत्तरी मैदान में वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम में .................... जाती है। (घटती/बढ़ती)

  4. कर्क वृत्त के उत्तर में स्थित भाग .................... कटिबन्धीय है। (उपोष्ण/उष्ण)

उत्तर-1. मौसम 2. जलवायु 3. घटती 4. उपोष्ण।

निम्न में से सत्य/असत्य कथन छाँटिए-

  1. मासिनराम विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। ( )
  2. तिरुवनंतपुरम् की जलवायु सम है। ( )
  3. गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेशों में प्राय: चक्रवात नहीं आते हैं। ( )
  4. अक्टूबर एवं नवम्बर का महीना वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है। ( )

उत्तर-1. सत्य 2. सत्य 3. असत्य 4. सत्य।

निम्न को सुमेलित कीजिए-

(अ) मानसून आगमन (ब) तिथि
(i) बेंगलुरु (a) 5 जून से 10 जून
(ii) हैदराबाद (b) 1 जून से 5 जून
(iii) मुम्बई (c) 10 जून से 15 जून
(iv) भोपाल (d) 15 जून से 1 जुलाई

उत्तर-(i) (b), (ii) (a), (iii) (e), (iv) (c), (v) (d)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. मौसम और जलवायु के तत्त्व कौन-कौन से हैं?

उत्तर-मौसम और जलवायु के तत्त्व हैं-तापमान, वायुमंडलीय दाब, पवन, आर्द्रता और वर्षा।

प्रश्न 2. मानसून का अर्थ बताइए।

उत्तर-मानसून का अर्थ एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन से है।

प्रश्न 3. भारत में मानसून का विशिष्ट लक्षण बताइए।

उत्तर-भारत में मानसून का विशिष्ट लक्षण है-वर्षा की अनिश्चितता और उसका असमान वितरण।

प्रश्न 4. लू क्या है?

उत्तर-भारत के उत्तरी-पश्चिमी भागों में मई और जून के महीनों में दिन के समय बहने वाली गरम व शुष्क हवाओं को लू कहते हैं।

प्रश्न 5. महाद्वीपीय अवस्था किसे कहते हैं?

उत्तर-समुद्र से दूरी वाले स्थानों पर लोग विषम मौसमी अवस्थाओं को अर्थात् गर्मी में बहुत अधिक गर्म तथा सर्दी में बहुत अधिक ठण्डा महसूस करते हैं, इसे ही महाद्वीपीय अवस्था कहते हैं।

प्रश्न 6. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताइए।

उत्तर-(1) अक्षांश, (2) ऊँचाई।

प्रश्न 7. कोरियोलिस बल किसे कहते हैं?

उत्तर-पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न आभासी बल को कोरियोलिस बल कहते हैं।

प्रश्न 8. कोरियोलिस बल का क्या प्रभाव होता है?

उत्तर-कोरियोलिस बल के कारण पवनें उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर विक्षेपित हो जाती हैं।

प्रश्न 9. 'महावट' या 'मावट' किसे कहते हैं?

उत्तर-शीतकाल में देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में भूमध्यसागरीय चक्रवातों से होने वाली वर्षा को स्थानीय तौर पर 'महावट' कहा जाता है।

प्रश्न 10. 'काल वैशाखी' किसे कहते हैं?

उत्तर-उत्तर भारत में ग्रीष्म ऋतु में कभी-कभी तीव्र हवाओं के साथ गरज वाली मूसलाधार वर्षा होती है। वैशाख के महीने में होने के कारण पश्चिम बंगाल में

इसे 'काल वैशाखी' कहा जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. मौसम और जलवायु में क्या अन्तर है?

उत्तर- मौसम और जलवायु में अन्तर-मौसम और जलवायु में मुख्यतः अवधि तथा क्षेत्र का अन्तर है। एक विशाल क्षेत्र में एक लम्बी समयावधि (30 वर्ष से अधिक) में मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं का कुल योग ही जलवायु है, जबकि मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्र के वायुमण्डल की अवस्था को बताता है।

प्रश्न 2. भारत की जलवायु कैसी है और क्यों है?

उत्तर- भारत की जलवायु-भारत की जलवायु मानसूनी जलवायु है। मानसून का प्रभाव उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में लगभग 2020^{\circ} उत्तर एवं 2020^{\circ} दक्षिण के बीच रहता है। भारत का अधिकांश भाग इसी क्षेत्र में स्थित है। अतः यहाँ मानसूनी जलवायु पाई जाती है। अन्य शब्दों में एशिया में इस प्रकार की जलवायु मुख्यतः दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व में पाई जाती है।

प्रश्न 3. पहाड़ियाँ गर्मी के मौसम में भी ठंडी क्यों होती हैं?

उत्तर- जब कोई व्यक्ति पृथ्वी की सतह से ऊँचाई की ओर जाता है, तो वायुमण्डल की सघनता कम हो जाती है और तापमान घट जाता है। अतः ऊँचाई पर वायुमण्डल की सघनता कम हो जाने के कारण ही पहाड़ियाँ गर्मी के मौसम में भी ठंडी होती हैं।

प्रश्न 4. भारत में शीतकाल में मैदानों में वर्षा तथा पर्वतों पर हिमपात किसके कारण होता है?

उत्तर- शीत ऋतु में भारत के उत्तरी मैदानों में पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम से चक्रवाती विक्षोभ का अन्तर्वाह विशेष लक्षण है। यह कम दाब वाली प्रणाली भूमध्यसागर एवं पश्चिमी एशिया के ऊपर उत्पन्न होती है तथा पश्चिमी पवनों के साथ भारत में प्रवेश करती है। इसके कारण भारत में शीतकाल में मैदानों में वर्षा होती है और पर्वतों पर हिमपात होता है।

प्रश्न 5. उत्तरी भारत में धूलभरी आँधियाँ कब आती हैं और इनका क्या प्रभाव होता है?

उत्तर- उत्तरी भारत में मई के महीने के दौरान सामान्यतः धूलभरी आँधियाँ आती हैं। ये आँधियाँ अस्थायी रूप से आराम पहुँचाती हैं क्योंकि ये तापमान को कम कर देती हैं तथा अपने साथ ठंडे समीर एवं हल्की वर्षा लाती हैं।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. किसी क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित (नियंत्रित) करने वाले कोई तीन कारक बताइये।

उत्तर- किसी क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित (नियंत्रित) करने वाले तीन कारक अग्रलिखित हैं-

(1) अक्षांश- पृथ्वी की गोलाई के कारण अक्षांश के अनुरूप प्राप्त सौर ऊर्जा की मात्रा विभिन्न जगहों पर अलग-अलग होती है। इस तापमान से किसी स्थान की जलवायु प्रभावित होती है।
(2) ऊँचाई- जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊँची जगहों पर जाते हैं, वायुमण्डल की सघनता कम होती जाती है तथा तापमान घटता जाता है। अतः पृथ्वी की सतह से ऊँचाई किसी स्थान की जलवायु को नियंत्रित करती है।
(3) समुद्र से दूरी- समुद्र से दूरी किसी स्थान की जलवायु के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण कारक है।

प्रश्न 2. दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की विशेषताएँ लिखिये।

उत्तर- दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) दक्षिण-पश्चिम मानसून का समय जून से मध्य सितम्बर तक का है।
(2) इन महीनों में उत्तर भारत में निम्न दाब का क्षेत्र बढ़ जाता है।

(3) इस मानसून की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व होती है।

(4) इस अवधि में सम्पूर्ण भारत में मानसूनी पवनें फैलकर वर्षा करती हैं।
(5) भारत में अधिकांश वर्षा (98%) इन्हीं मानसूनी पवनों से होती है।

प्रश्न 3. उष्ण कटिबंधीय निम्न दाब की तीव्रता एवं आवृत्ति मानसूनी वर्षा की मात्रा व समय को किस प्रकार निर्धारित करती है?

उत्तर- उष्ण कटिबंधीय निम्न दाब का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनता है तथा मुख्य स्थलीय भाग को पार कर जाता है। यह गर्त निम्न दाब के मानसून गर्त के अक्ष के अनुसार होता है। शुष्क एवं आर्द्र स्थितियों की तीव्रता, आवृत्ति एवं समय काल में भिन्नता होती है। इसके कारण यदि एक भाग में बाढ़ आती है तो दूसरे भाग में सूखा पड़ता है। इसका आगमन तथा वापसी प्रायः अव्यवस्थित होता है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. किसी क्षेत्र की जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।

814

उत्तर-जलवायु को नियन्त्रित करने वाले कारक

किसी भी क्षेत्र की जलवायु को नियन्त्रित करने वाले प्रमुख कारक छ: हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-

(1) अक्षांश-पृथ्वी की गोलाई के कारण अक्षांश के अनुरूप प्राप्त सौर-ऊर्जा की मात्रा विभिन्न जगहों पर अलग-अलग होती है। फलतः वायु का तापमान विषुवत् रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता है, जिससे किसी स्थान की जलवायु निर्धारित होती है।

(2) तुंगता अथवा ऊँचाई-जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊँची जगहों पर जाते हैं, वायुमण्डल की सघनता कम होती जाती है तथा तापमान घटता जाता है, जिससे किसी स्थान की जलवायु निर्धारित होती है।

(3) वायुदाब एवं पवन तन्त्र-वायुदाब एवं पवन तन्त्र किसी स्थान के अक्षांश एवं ऊँचाई पर निर्भर करते हैं। वायुदाब एवं पवन तन्त्र किसी स्थान की जलवायु पर व्यापक प्रभाव डालते हैं; क्योंकि इनके द्वारा वर्षा का प्रारूप तथा तापमान नियन्त्रित होते हैं।

(4) समुद्र से दूरी-समुद्र द्वारा जलवायु पर समकारी प्रभाव डाला जाता है, अतः समुद्र से दूरी किसी स्थान की जलवायु के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण कारक है।

(5) महासागरीय धाराएँ-महासागरीय धारा समुद्र से तट की ओर चलने वाली हवाओं के साथ उस स्थान की जलवायु को प्रभावित करती है। जैसे-कोई तटीय क्षेत्र जहाँ से गर्म अथवा ठण्डी धाराएँ बहती हों, वहाँ गर्मी या ठण्डी होगी-यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहाँ अपतटीय हवाएँ मौजूद हैं या नहीं।

(6) उच्चावच लक्षण-उच्चावच की किसी स्थान की जलवायु के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। ऊँची पर्वत श्रृंखलाएँ ठण्डी या गर्म हवाओं से रक्षा करती हैं। पर्याप्त रूप से ऊँची होने तथा उनके रास्ते में वर्षा वाहक हवाओं के आने पर ये वर्षा करने में भी मदद करती हैं। पर्वतों के पवनविमुख ढाल अपेक्षाकृत सूखे रहते हैं।

प्रश्न 2. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं-

(1) अक्षांश-भारत जिन अक्षांशों के मध्य स्थित है, उनका उसकी जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कर्क रेखा देश के मध्य भाग, पश्चिम में कच्छ के रन से लेकर पूर्व में मिजोरम से लेकर गुजरती है। देश का लगभग आधा भाग कर्क रेखा के दक्षिण में स्थित है, जो उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र है। कर्क रेखा के उत्तर में स्थित शेष भाग उपोष्ण कटिबन्धीय है। इसलिए भारत की जलवायु में उष्ण कटिबन्धीय जलवायु एवं उपोष्ण कटिबन्धीय जलवायु दोनों की विशेषताएँ मौजूद हैं।

(2) ऊँचाई-भारत भूमि की ऊँचाई भी इसकी जलवायु को प्रभावित करती है। भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत है। इसकी औसत ऊँचाई लगभग 60006000 मीटर है। भारत के विशाल तटीय क्षेत्र की अधिकतम ऊँचाई लगभग 3030 मीटर है। हिमालय मध्य एशिया से आने वाली ठण्डी हवाओं को भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करने से रोकता है। इन्हीं पर्वतों के कारण अपेक्षाकृत उच्च अक्षांशों के बावजूद उत्तरी भारत में ठण्ड कम पड़ती है।

(3) वायुदाब एवं पवन-भारत में जलवायु तथा सम्बन्धित मौसमी अवस्थाएँ निम्न वायुमण्डलीय अवस्थाओं से संचालित होती हैं-

(i) वायुदाब एवं धरातलीय पवनें-भारत में शीत ऋतु तथा ग्रीष्म ऋतु में वायु की दिशा पूरी तरह परिवर्तित हो जाती है। शीत ऋतु में, हिमालय के उत्तर में उच्च दाब होता है। इस क्षेत्र की ठण्डी शुष्क हवाएँ दक्षिण में निम्न दाब वाले महासागरीय क्षेत्र के ऊपर बहती हैं। ग्रीष्म ऋतु में, आन्तरिक एशिया एवं उत्तर-पूर्वी भारत के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसके कारण गर्मी के दिनों में वायु की दिशा पूरी तरह से परिवर्तित हो जाती है। वायु दक्षिण में स्थित हिन्द महासागर के उच्च दाब वाले क्षेत्र से दक्षिण-पूर्वी दिशा में बहते हुए विषुवत् वृत्त को पार कर दाहिनी ओर मुड़ते हुए भारतीय उपमहाद्वीप पर स्थित निम्न दाब की ओर बहने लगती हैं। ये हवाएँ ही दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी पवनें कहलाती हैं। ये पवनें महासागरों के ऊपर से बहती हुई नमी ग्रहण करती जाती हैं तथा भारत की मुख्य भूमि पर वर्षा करती हैं।

(ii) ऊपरी वायु परिसंचरण-भारतीय प्रदेश में, ऊपरी वायु परिसंचरण पश्चिमी प्रवाह के प्रभाव में रहता है। इस प्रवाह का एक मुख्य घटक जेट धारा है। भारत में ये जेट धाराएँ ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती हैं। गर्मियों में, सूर्य की आभासी गति के साथ ही उपोष्ण कटिबन्धीय पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में चली जाती है। एक पूर्वी जेट धारा जिसे उपोष्ण कटिबन्धीय पूर्वी जेट धारा कहा जाता है, गर्मी के महीनों में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर लगभग 1414^{\circ} उत्तरी अक्षांश में प्रवाहित होती है।

(iii) पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ तथा उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात-सर्दी के महीनों में भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाले पश्चिमी प्रवाहों के द्वारा पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ उत्पन्न होते हैं। ये भारत के उत्तर एवं उत्तर-पश्चिमी भागों में वर्षा करते हैं। मानसून

और अध्याय देखें / Explore More Chapters

Social Science

[इतिहास] फ्रांसीसी क्रांति

पढ़ें [इतिहास] फ्रांसीसी क्रांति
Social Science

[इतिहास] यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

पढ़ें [इतिहास] यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
Social Science

[इतिहास] नात्सीवाद और हिटलर का उदय

पढ़ें [इतिहास] नात्सीवाद और हिटलर का उदय
Social Science

[इतिहास] वन्य समाज और उपनिवेशवाद

पढ़ें [इतिहास] वन्य समाज और उपनिवेशवाद
Social Science

[इतिहास] आधुनिक विश्व में चरवाहे एवं मानचित्र कार्य

पढ़ें [इतिहास] आधुनिक विश्व में चरवाहे एवं मानचित्र कार्य
Social Science

[भूगोल] भारत-आकार और स्थिति

पढ़ें [भूगोल] भारत-आकार और स्थिति
Social Science

[भूगोल] भारत का भौतिक स्वरूप

पढ़ें [भूगोल] भारत का भौतिक स्वरूप
Social Science

[भूगोल] अपवाह

पढ़ें [भूगोल] अपवाह