Rajasthan Board RBSE Class 12 English Literature Essay Writing

नोट – आपके पाठ्यक्रम में निम्नलिखित दो प्रकार के निबंध हैं –
(i) Argumentative – इस प्रकार के निबंधों में किसी समसामयिक घटनाक्रम इत्यादि पर कोई विचार या वाद-विवाद प्रस्तुत किया जाता है।
(ii) Discursive – इस प्रकार के निबंधों में विविध प्रकार के विषयों को शामिल किया जा सकता है।

Healthy Mind in a Healthy Body

Health begets happiness. The state of mind largely depends on the health of our mind and the health of our mind ultimately depends on the health of our body.

We must feed our mind and body properly and sufficiently. This very thing is equally true in the opposite. If we want to have a healthy mind we should develop a healthy body. A sick man cannot enjoy mental health and happiness. He always remains troubled with ailing physique. On the other hand, the person blessed with a strong physique can enjoy not only the mental pleasure but also psychological and spiritual joys of the world. It is right to say that health and happiness beget each other.

As our mind affects our body in the same way our body also influences the mind a great deal. There are so many men and women in the history who enjoyed and possessed not only sound mind but also sound physique. Swami Dayanand Saraswati was so learned that he defeated religious teachers of repute in arguments over religious scriptures of Hinduism. On the physical ground, he could hold a chariot drawn by four horses. Thus, it may be easily concluded that there is a healthy mind in a healthy body.

स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क

स्वास्थ्य प्रसन्नता की जननी है। हमारी मानसिक स्थिति बहुत कुछ हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। एवं हमारा मानसिक स्वास्थ्य अन्ततः हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

हमें अपने मस्तिष्क व शरीर को उचित व पर्याप्त मात्रा में पोषण देना चाहिये। यही बात विपरीत रूप में भी उतनी ही सत्य है। यदि हम एक स्वस्थ मस्तिष्क पाना चाहते हैं तो हमें अपना शरीर स्वस्थ रखना चाहिये। एक रोगी व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य व प्रसन्नता का आनंद नहीं उठा सकता है। वह हमेशा ही रोगी शरीर से पीड़ित रहेगा। दूसरी ओर स्वस्थ शरीर वाला व्यक्ति न केवल मानसिक आनंद अपितु संसार के मनोवैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक आनंद भी ले सकता है। यह कहना सही होगा कि स्वास्थ्य व प्रसन्नता एक-दूसरे को जन्म देते हैं।

जिस प्रकार से हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर को प्रभावित करता है उसी प्रकार से हमारा शरीर भी हमारे मस्तिष्क को अत्यधिक प्रभावित करता है। इतिहास में ऐसे कई पुरुष व स्त्री हुये हैं जिनका न केवल स्वस्थ मस्तिष्क अपितु स्वस्थ शरीर भी था और उन्होंने इसका आनंद भी उठाया था। दयानंद सरस्वती इतने विद्वान थे कि उन्होंने प्रसिद्ध धार्मिक गुरुओं को हिन्दुत्व के धार्मिक ग्रंथों पर हुये वाद-विवाद में हरा दिया। शारीरिक स्तर पर वे चार घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ को रोक सकते थे। इस प्रकार से यह निष्कर्ष आसानी से निकाला जा सकता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।

Peaceful Uses of Atomic Energy

Growing population is rapidly depleting the conventional resources of energy. Diesel, petrol and liquefied petroleum gas (LPG) etc are not going to last forever. Mankind will heavily depend upon atomic energy to cater to its needs as a huge amount of energy can be obtained from a little amount of radioactive elements such as Uranium, Thorium, etc: Atomic energy has given great power in the hands of man. It can be used for constructive as well as destructive purposes.

Atomic energy is used for various purposes. It is used for power generation and this power may be used for various purposes.

It will help to produce electricity at a lower cost. It will run our factories and mills. The use of atomic energy will lower the cost of production.
Atomic energy can drive ships, aeroplanes, trains, buses and cars. It will be a substitute for petrol and coal.

Atomic energy is proving its best in the field of medical science. It is helping the doctors in diagnosing the diseases and in the treatment of the patients. Radioactivity can also be used for curing brain tumours.

Industries can make use of atomic power for increasing their production. With increased production in the field of agriculture and industry, we can make our life happier and better.

Atomic energy should be used for bringing peace and prosperity in the world. Its use for destructive purposes must be banned. In short, atomic energy, if used for peaceful purposes, will bestow marvellous power in the hands of man and will definitely bless him with more human virtues.

आणविक ऊर्जा के शान्तिपूर्ण उपयोग।

बढ़ती हुई जनसंख्या ऊर्जा के परम्परागत संसाधनों को तेजी से घटा रही है। डीजल, पेट्रोल और लिक्विफाईड पेट्रोलियम गैस (एल. पी. जी.) आदि हमेशा के लिए नहीं चलने वाले हैं। भविष्य में मानव-जाति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आणविक ऊर्जा पर निर्भर होगी क्योंकि यूरेनियम, थोरियम जैसे रेडियो एक्टिव तत्वों की थोड़ी-सी ही मात्रा से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। आणविक ऊर्जा ने मनुष्य के हाथों में महान शक्ति दे दी है। इसका उपयोग रचनात्मक व विध्वंसात्मक, दोनों ही प्रकार के उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

आणविक ऊर्जा का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिये किया जाता है। आणविक ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है और यह विद्युत विविध उद्देश्यों के लिए उपयोग की जा सकती है। – यह कम कीमत पर विद्युत उत्पादन में सहायता करेगी। यह उद्योगों व कारखानों को चलायेगी। आणविक ऊर्जा का उपयोग उत्पादन-मूल्य को कम कर देगा।

आणविक ऊर्जा जलयानों, वायुयानों, रेलगाड़ियों, बसों व कारों को चला सकती है। यह पेट्रोल व कोयले का विकल्प होगी। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आणविक ऊर्जा सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हो रही है। यह चिकित्सकों को रोगों का पता लगाने में और मरीजों के उपचार में सहायता कर रही है। रेडियोएक्टिविटी का प्रयोग ब्रेन ट्यूमर के इलाज में भी किया जा सकता है।

औद्योगिक ईकाइयाँ अपना उत्पादन बढ़ाने में आणविक ऊर्जा को इस्तेमाल कर सकती हैं। कृषि व उद्योग के क्षेत्र में बढ़े हुए उत्पादन से हम अपने जीवन को अधिक प्रसन्न और बेहतर बना सकते हैं।

आणविक ऊर्जा का उपयोग विश्व में शान्ति व समृद्धि लाने के लिए किया जाना चाहिए। विध्वंसात्मक उद्देश्यों के लिए इसके उपयोग पर रोक होनी चाहिए। संक्षेप में, आणविक ऊर्जा का उपयोग यदि शान्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाये तो यह मनुष्य के हाथ में आश्चर्यजनक शक्ति उपहारस्वरूप दे देगी और निश्चित रूप से उसे अधिक मानवीय गुणों को आशीर्वादस्वरूप देगी।

Television
Or
Television as a Means of Education

Television is one of the most distinguished inventions of modern age. Just turn on the switch and the whole world is in a small room. It brings immediate and first hand information with pictures about anything happening any time, anywhere in the world.

Many people consider television as a means of recreation. No doubt, it has won the hearts of millions of people by its different entertaining programmes. But in many countries, television has been used as a source and tool of education. It is used for both formal and informal education. It boosts cultural, economic and social development activities. It makes people aware of their environment, rights, duties, privileges, etc. It enhances the quality of education.

In the name of modernity, vulgarity and nudity are being served on some channels such as Fashion TV. They affect the tender feelings and minds of small children.

Television is the strongest electronic media that has brought a revolution in social and cultural fields. Besides, it can be more educative if used wisely.

टेलीविजन अथवा टेलीविजन :
शिक्षा के माध्यम के रूप में

टेलीविजन आधुनिक युग के सबसे विशिष्ट आविष्कारों में से एक है। बस, बटन दबाइये और सारा संसार एक छोटे-से कमरे में होता है। यह संसार में किसी भी समय, किसी भी स्थान पर होने वाली किसी भी घटना की तुरन्त व ताजा सूचना चित्रों के साथ लाता है।

बहुत-से लोग टेलीविजन को मनोरंजन का साधन मानते हैं। निस्सन्देह इसने अपने विविध मनोरंजक कार्यक्रमों से लाखों लोगों के दिल जीते हैं। लेकिन अनेक देशों में टेलीविजन का उपयोग शिक्षा के स्त्रोत व यन्त्र के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग औपचारिक वे अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा के लिये किया जाता हैं। यह सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास सम्बन्धी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। यह लोगों को उनके आस-पास के पर्यावरण, उनके अधिकारों, उनके कर्तव्यों, विशेषाधिकारों आदि के विषय में जागरूक बनाता है। यह शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाता है।

आधुनिकता के नाम पर फैशन टीवी जैसे चैनलों पर अश्लीलता व नग्नता प्रस्तुत की जा रही है। ये चीजें छोटे। बच्चों की कोमल भावनाओं व मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। टेलीविजन सबसे सशक्त इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है जिसने सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में क्रान्ति ला दी है। इसके अलावा, यदि बुद्धिमत्ता से इसका प्रयोग किया जाये तो यह अधिक शिक्षाप्रद हो सकता है।

If I Were the Principal of My School

“Uneasy lies the head that wears a crown.” The post of a Principal is not a bed of roses as we think. It requires not only great scholarship but also a lot of administrative ability.

It is my earnest desire to be the Principal of a school. If I were the Principal, all the possible hobbies and extra-curricular activities would be encouraged.

Various reforms that I would like to make – I would make my students disciplined and well-behaved. I would see to it that they obeyed their teachers. It would be my first and foremost duty to see that efficient teaching work went on to bring praiseworthy results.

I would introduce yoga and moral teaching in the school. Periodical talks would be given on the duty of students towards their parents, teachers, country and God.

These are some of the reforms which I would introduce in the school. The reforms would be introduced by and by with the co-operation of all. I would try my best to bring multi-dimensional development in my students’ personality.

यदि मैं अपने विद्यालय का प्रधानाचार्य होता

“शासक सदा चिन्ताओं से घिरा रहता है।” प्रधानाचार्य का पद कोई फूलों की सेज नहीं है जैसा कि हम सोचते हैं। इसके लिए न केवल महान विद्वत्ता बल्कि बहुत अधिक प्रशासकीय योग्यता भी आवश्यक होती है।

मैं तत्परता से चाहता हूँ कि मैं किसी विद्यालय का प्रधानाचार्य बनें। यदि मैं प्रधानाचार्य होता तो सभी सम्भव अभिरुचियों व पाठ्यक्रमातिरिक्त गतिविधियों को प्रोत्साहित करता।

विभिन्न सुधाार जो मैं करना चाहता हूँ मैं अपने विद्यार्थियों को अनुशासित ब सद्व्यवहार करने वाला बनाता। मैं इस बात का ध्यान रखता कि वे अपने अध्यापकों की आज्ञा का पालन करें।

यह देखना मेरा पहला व सर्वप्रमुख कर्तव्य होता कि प्रशंसनीय परिणाम लाने के लिए योग्य अध्यापन-कार्य चलता रहे।

मैं विद्यालय में योग व नैतिक शिक्षा प्रारम्भ करूंगा। विद्यार्थियों से उनके माता-पिता, अध्यापकों, देश व ईश्वर के प्रति कर्तव्यों के विषय में समय-समय पर चर्चा करूंगा।

ये उनमें से कुछ सुधार हैं जिन्हें मैं विद्यालय में प्रारम्भ करू। ये सुधार सभी के सहयोग से धीरे-धीरे प्रारम्भ किये जायें। मैं अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास करने का पूर्ण प्रयास करूं।

Preservation of Wild Life

The term ‘Wild Life’ means-the untamed and undomesticated animals living a free life in forests, valleys or hills. They are a beautiful link in our ecosystem and help sustain our environment.

Man has been hunting wild animals for food, for adventure and for greed of money. Deforestation is also a cause of disappearance of wild animals.

As an effort to preserve wildlife, Central Wild Life Act was passed in 1972. Some voluntary organisations like the Bombay Natural History Society and the World Wild Life Funds are also doing praiseworthy work in this field.

It is with the aim of preserving wildlife that over two hundred sanctuaries have been established in India.

Wildlife must be preserved because some wild animals work as natural scavengers. Some of these animals are the source of drugs like insulin and anti-venom. India is famous for her Gir lions all over the world. The sanctuaries are source of great income from tourism.

In short, wild animals and birds are highly useful to mankind. The government has introduced a number of measures to protect wild life and we also must do our best to save the glory of our country i.e. wild life from extinction.

वन्य जीवन संरक्षण

‘वन्य जीवन’ शब्द का तात्पर्य है- जंगलों, घाटियों या पहाड़ियों में स्वतन्त्र जीवन व्यतीत करने वाले गैर पालतू। जंगली जानवर। वे हमारे पारिस्थितिकीय तन्त्र में एक सुन्दर कड़ी हैं और हमारे वातावरण को स्थिर रखने में सहायता करते हैं।

मनुष्य भोजन के लिए, साहस प्रदर्शन के लिए और पैसों के लालच के लिए वन्य पशुओं का शिकार करता रहा है। वनों का विनाश भी वन्य पशुओं के लुप्त होने का एक कारण है।

वन्य जीवन की रक्षा के एक प्रयास के रूप में, 1972 में केन्द्रीय वन्य जीवन अधिनियम’ पास किया गया। ‘बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ व ‘वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फन्ड्स’ जैसी कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ भी इस क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य कर रही हैं।

वन्य जीवन की रक्षा के उद्देश्य से ही भारत में दो सौ से अधिक अभ्यारण्य स्थापित किये गये हैं।

वन्य जीवन की अवश्य ही सुरक्षा की जानी चाहिए क्योंकि कुछ वन्य पशु प्राकृतिक सफाईकर्मी के रूप में कार्य करते हैं। इनमें से कुछ पशु इन्सुलिन व विष-प्रतिरोधक जैसी दवाइयों के स्रोत हैं। भारत अपने गीर के शेरों के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध है। (वन्य जीवन) अभयारण्य पर्यटन से होने वाली आय का एक बड़ा स्रोत हैं।

संक्षेप में, वन्य पशु व पक्षी मानव-जाति के लिए अत्यधिक उपयोगी हैं। सरकार ने वन्य जीवन की रक्षा के लिए कई उपाय प्रारम्भ किये हैं और हमें भी अपने देश के वैभव अर्थात् वन्य जीवन को लुप्त होने से बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करना चाहिए।

If I Were a Millionare (S.S. Exam.2016)

To be a millionare can be anybody’s dream. I wish, I were a millionare.

If by the grace of God, I got millions of rupees, I would judiciously spend them on neglected class. I would open an orphanage to give shelter to downtrodden and neglected children. I would provide them good education and make them the best of the citizens. Besides, I would make old age houses for those uncared for elderly people and bring their honour back.

To be a millionaire is like a long cherished dream come true. I have always craved for money, not because I want to lead a luxurious life, but because I always want to serve humanity. I also want to visit other countries and collect ideas to be implemented in our country for the betterment of our society.

There are a lot of people around us, who adorn the list of millionaires but for them charity begins and ends at home. But to me, it would be an opportunity to serve mankind.

यदि मैं लखपति होता

लखपति होना किसी का भी स्वप्न हो सकता है। काश कि मैं लखपति होऊँ।

यदि ईश्वर की कृपा से मुझे लाखों रुपए मिल जायें तो मैं उन्हें बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से उपेक्षित वर्ग पर व्यय करूं। मैं एक अनाथालय खोलें जिसमें दबे-कुचले, उपेक्षित बच्चों को शरण मिल सके। मैं उन्हें अच्छी शिक्षा हूँ तथा एक उत्तम नागरिक बनाऊँ। इसके अतिरिक्त, मैं तिरस्कृत बुजुर्गों के लिए वृद्ध-आश्रम खोलें और उनका सम्मान वापस लाऊँ।

लखपति होना चिरप्रतीक्षित स्वप्न के साकार होने जैसा है। मैंने हमेशा धन को चाहा है किन्तु इसलिए नहीं कि मैं विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें, बल्कि इसलिए कि मैं हमेशा मानवता की सेवा करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं विभिन्न देशों का दौरा करू और अनेक विचार एकत्र करके उन्हें अपने देश में, अपने समाज की अच्छाई के लिए लागू करू।

दुनिया में बहुत-से ऐसे लोग हैं जो लखपतियों की सूची को सुशोभित तो करते हैं परन्तु उनके लिए दान घर से आरम्भ होकर घर पर ही समाप्त हो जाता है। लेकिन मेरे लिए यह मानवता की सेवा का एक अवसर होगा।

My Aim of Life
Or
The Ambition of My Life
Or
Choice of Profession
Or
My Plan for My Career (S.S. Exam.2017)

A life without an aim is like a ship without a rudder or an engine without fuel. We must therefore have some definite aim in life.

The right choice of a profession is very difficult to make, but necessary. Every profession cannot suit everybody. So while choosing a profession, we should keep in mind the natural taste, physical fitness, opinion and guidance of teachers, elders and parents, economic condition of the family and the future prospects in the profession.

Keeping in mind the factors for right choice, I wish to be a doctor. In this profession, there is a great opportunity for service. Secondly, this profession is an independent one. A doctor gives his time, energy and skill in curing the sick. From the very beginning, I have dreamed of serving the poor of my town. I want to be an ideal doctor. Kindness will be my motto. I shall give free treatment to the patients who are poor and needy.

It is not for high status that I wish to become a doctor. It is something nobler than this. It is my wish to serve humanity. I am sure of being a successful doctor. Sincerity and devotion will be my guiding factors. May God fulfil my aspirations!

मेरे जीवन का उद्देश्य
अथवा।
मेरे जीवन की महत्वाकांक्षा
अथवा
व्यवसाय का चयन
अथवा
मेरे भविष्य (जीवन-वृत्त) के लिए मेरी योजना

एक उद्देश्यहीन जीवन पतवार के बिना जहाज अथवा ईधन के बिना इंजन के समान है। इसलिए हमारे जीवन में एक निश्चित उद्देश्य अवश्य होना चाहिए।

व्यवसाय का उचित चयन करना अति आवश्यक है। प्रत्येक व्यवसाय प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। इसलिए व्यवसाय का चयन करते समय हमें अपनी स्वाभाविक रुचि; शारीरिक योग्यता; अध्यापकों, बड़ों व माता-पिता के विचार व दिशानिर्देश; परिवार की आर्थिक स्थिति और उस व्यवसाय के भविष्य के पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए।

सही चयन के पक्षों को ध्यान में रखते हुए मैं एक डॉक्टर बनना चाहता हूँ। इस व्यवसाय में सेवा के लिये पर्याप्त अवसर हैं। दूसरी बात, इस व्यवसाय में स्वतन्त्रता है। एक डॉक्टर बीमारों को ठीक करने के लिए अपना समय, शक्ति व योग्यता प्रदान करता है। बहुत आरम्भ से ही मैंने अपने कस्बे के गरीबों की सेवा करने का सपना देखा है। मैं एक आदर्श डॉक्टर बनना चाहता हूँ। दयालुता मेरा आदर्श होगा। मैं गरीब व जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क उपचार दूंगा।

मैं (समाज में) ऊँचा स्थान पाने के लिए डॉक्टर बनना नहीं चाहता हूँ। मेरे इस चयन का कारण इससे कहीं अधिक श्रेष्ठ है। मानवता की सेवा करना मेरी कामना है। मुझे पूरा विश्वास है कि मैं एक सफल डॉक्टर बनूंगा। ईमानदारी व समर्पण मेरे पथ-प्रदर्शक होंगे। ईश्वर मेरी इच्छाओं को पूरा करे !

Afforestation and its Importance (S.S. Exam 2012)

Afforestation refers to the process of converting a non-forest land into a forest. If there are no trees, there will be no life on the earth. Trees supply oxygen for our need. Through the process of photosynthesis, they absorb carbon dioxide from the atmosphere and release oxygen into it. Forests help bring rain and prevent soil erosion. Besides, we get food, fruits, timber and medicines, etc. from forests. They give shelter to wild animals. In order to earn money, man has cut down forest after forest and laid the mountains and lands bare. Recently, in the south, Sandalwood forests were cut down and sold out to earn money by poachers and smugglers. Such thoughtless activities have created an ecological imbalance.

Although the government enacted ‘The Forest Conservation Act’ in 1980, in the absence of its forceful implementation, it is lying almost dead. On the other hand, festival-like ‘Van-Mahotsava’ has been started by our government, but it needs to be more convincing.

Hence afforestation is necessary to combat the issues of global warming, soil erosion, pollution, and the maintenance of biodiversity and ecological balances.

वनारोपण एवं इसका महत्त्व

वनारोपण या वृक्षारोपण वन रहित भूमि या बंजर भूमि को वन में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को इंगित करती है। अगर पृथ्वी पर वृक्ष नहीं होंगे तो जीवन भी नहीं होगा। पेड़-पौधे हमारे लिए आवश्यक ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं। प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा वे वातावरण से कॉर्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर लेते हैं तथा ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ते हैं। वन वर्षा लाने में सहायक होते हैं तथा भूमि का क्षरण रोकते हैं। इसके अतिरिक्त, वन हमें भोजन, फल, इमारती लकड़ी तथा औषधि इत्यादि देते हैं। ये जंगली पशुओं को शरण प्रदान करते हैं।

धन कमाने के लिये मनुष्य ने जंगल के जंगल काट गिराये हैं तथा पहाड़ों और भूमि को नंगा कर दिया है। हाल ही में दक्षिण भारत में, जंगली जानवरों को अवैध रूप से मारने वालों ने तथा तस्करों ने धन कमाने हेतु चन्दन के वने काट कर बेच दिये। इस प्रकार के विचारहीन कार्यों से पर्यावरण-सन्तुलन बिगड़ गया है।

यद्यपि सरकार ने 1980 में ‘वन संरक्षण कानून बनाया, परन्तु किसी प्रभावकारी कार्यान्वयन के अभाव में वह लगभग मृत है। दूसरी तरफ सरकार ने ‘वन-महोत्सव’ जैसे उत्सव को आरम्भ किया है परन्तु उसे अधिक सशक्त होने की आवश्यकता है।

अतः ग्लोबल वार्मिग, मिट्टी के कटाव, पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने और जैव विविधता व पारिस्थितिक संतुलन बनाये रखने के लिये वनारोपण आवश्यक है।

Water Conservation

Water is known as the elixir of life. All living things consist mostly of water e.g. the human body is made of two thirds of water. Man can live without food but not without water. That is why water needs be conserved before it completely gets exhausted.

Water conservation is a method to collect water for future use. Generally, it so happens that we let the rainwater go into the drains and when there is no rain, we cry for water. Saving rain water wisely is what we mean by water conservation.

Water is needed for the very survival of all creatures. It is needed for all kinds of vegetation and crops to grow. While our demand for water has risen because of rising population and growing industrialisation, it is high time we should think of water conservation.

Water can be conserved in many ways. Trees play a very important role in conserving water. Protecting trees means protecting water. More and more trees should be planted in order to have more groundwater. ‘Rainwater harvesting’ is another effective way of conserving water. It means collecting rainwater in an underground tank that is connected to the roof of the building, and recycling it for future use.

Water is one of the nature’s most precious gifts to mankind. So we should conserve water to save life.

जल संरक्षण

जल को जीवन के अमृत के रूप में जाना जाता है। सभी जीवों में जल विद्यमान रहता है जैसे कि किसी मनुष्य के शरीर में दो-तिहाई भाग जल होता है। व्यक्ति भोजन के बिना रह सकता है किन्तु बिना जल के नहीं रह सकता। इसी कारण, इससे पहले कि जल बिल्कुल समाप्त हो जाए, जल का संरक्षण करना चाहिए।

जल संरक्षण, जल को भविष्य में प्रयोग के लिए एकत्र करना है। सामान्यतया ऐसा होता है कि हम वर्षा के जल को नालियों में बह जाने देते हैं और जब वर्षा नहीं होती है तो जल के लिए रोते-चिलाते हैं। जल संरक्षण से हमारा तात्पर्य वर्षा के जल को बुद्धिमत्तापूर्वक बचाने से है।

जल हर प्राणी के जीवन के लिए आवश्यक है। यह हर प्रकार की वनस्पति एवं फसल के उगने के लिए आवश्यक है। अब जब बढ़ती हुई जनसंख्या व औद्योगीकरण के कारण जल की माँग बढ़ गई है तो यह बिल्कुल सही समय है कि जल के संरक्षण के विषय में सोचा जाए।

जल कई प्रकार से संरक्षित किया जा सकता है। जल संरक्षण में वृक्ष महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्ष बचाना अर्थात् जल बचाना। अधिक से अधिक भूमिगत जल प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाने चाहिए। ‘वर्षा के जल का एकत्रीकरण’ जल-संरक्षण की एक अन्य प्रभावशाली विधि है। इसका अर्थ है भवन की छत से जुड़े हुए एक भूमिगत टैंक में वर्षा का जल एकत्र करना और उसे भविष्य में प्रयोग करना।

जल प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान किये गये सबसे बेशकीमती उपहारों में से एक है। इसलिए जीवन को बचाने के लिए हमें जल संरक्षण करना चाहिये।

Water Crisis Will Lead to the Third World War

After air, water is the most important commodity for life. Though 70% of the earth is covered with water yet an acute shortage of potable water is being felt. Scarcity of water is called water crisis.

Not only India but many other countries of the world are also facing the problem of water scarcity. There are a number of places where people fight among themselves just for a drop of water. What to say of countries, even states belonging to the same country are involved in tussles related to water, as we see Punjab checking the flow of water into Rajasthan and Karnataka into Tamil Nadu.

Shortage of anything makes people fight over it. As is the present day condition of water shortage, it is easily imaginable that a day will come when nations with an acute lack of water will attack the nations with enough resources.

It can very easily be figured out that being in extreme need of water, nobody will think of fair play and in that case Third World War will be a reality. The need of the hour is to conserve water thoughtfully.

जल संकट तृतीय विश्वयुद्ध की ओर ले जायेगा

वायु के बाद, जल जीवन के लिए सबसे आवश्यक वस्तु है। यद्यपि पृथ्वी के 70% भाग पर जल है फिर भी पीने योग्य जल की अत्यधिक कमी अनुभव की जा रही है। जल की कमी जल संकट कहलाती है।

भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य बहुत से देश भी जल की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे बहुत-से स्थान हैं जहाँ लोग एक बूंट पानी तक के लिए आपस में लड़ पड़ते हैं। देशों का तो कहना ही क्या, एक ही देश के राज्य भी जल को लेकर खींचातानी में लगे हुए हैं, जैसा कि हम पंजाब के द्वारा राजस्थान में व कर्नाटक के तमिलनाडु में जल के बहाव को रोकने के विषय में देखते हैं।

किसी भी वस्तु की कमी के कारण लोग इसके लिए लड़ते हैं। जल की कमी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह आसानी से कल्पना की जा सकती है है कि एक दिन ऐसा भी आयेगा जब जल की अत्यधिक कमी वाले राष्ट्र पर्याप्त संसाधनों से युक्त राष्ट्रों पर आक्रमण कर देंगे।

आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि पानी की अत्यधिक आवश्यकता होने पर कोई भी ईमानदारी के विषय में नहीं सोचेगा और उस स्थिति में, तृतीय विश्वयुद्ध (की कल्पना) एक वास्तविकता बन जायेगा। समय की आवश्यकता है कि हम विचारपूर्वक जल का संरक्षण करें।

A Disaster Caused by Flood

Floods are common in India. They are a natural calamity. They occur on account of heavy rainfall. They cause a huge loss of life and property. Last year in the months of June and July, there were no rains. But in the beginning of September, it rained cats and dogs for twenty days in a row. The water in the river Chambal began to rise and very soon it crossed the danger point.

The scene of the Chambal was very alarming and tragic. Thousands of men, women and children were rendered homeless. We saw a number of thatches and animals, floating on the water. They were being swept away in the current of the water. Crops were damaged, trees were uprooted, houses were washed away, cattle were drowned. Heavy loss of life and property took place and epidemic broke out.

Thousands of people lost their lives in the floods of Uttarakhand and Jammu-Kashmir in the last few years. We cannot check extensive rains. Man is powerless in this respect. To avoid the danger of the flood, big tanks and canals should be made. Big dams should be constructed to prevent the flooding of rivers. Thus, we will be able to control them to some extent.

बाढ़ की विनाश लीला भारत में बाढ़े सामान्य हैं। वे प्राकृतिक आपदा हैं। वे भारी वर्षा के कारण आती हैं। वे जीवन व सम्पत्ति को बड़ा नुकसान पहुँचाती हैं।

पिछले वर्ष जून व जुलाई के महीनों में बिल्कुल वर्षा नहीं हुई। लेकिन सितम्बर के प्रारम्भ में, लगातार बीस दिन तक मूसलाधार वर्षा हुई। चम्बल नदी में पानी बढ़ने लगा और जल्दी ही यह खतरे के निशान से ऊपर आ गया।

चम्बल नदी का दृश्य अति चेताने वाला व दु:खद था। हजारों पुरुष, स्त्री व बच्चे बेघर हो गये। हमने बहुत-से छप्पर व पशु, पानी पर तैरते हुए देखे। वे पानी की धारा के द्वारा बहाये ले जा रहे थे। फसलें नष्ट हो गईं, पेड़ जड़ से उखड़ गये, घर बह गये, मवेशी डूब गये। जीवन व सम्पत्ति का भारी नुकसान हुआ और महामारी फैल गई।

गतवर्षों में उत्तराखण्ड व जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के कारण हजारों लोगों की जान चली गई। हम अत्यधिक वर्षा को रोक नहीं सकते। इस विषय में मनुष्य शक्तिहीन है। बाढ़ के खतरे से बचने के लिए बड़े-बड़े तालाब और नहरें बनायी जानी चाहिये। बाढ़ वाली नदियों के पानी को रोकने के लिए बड़े-बड़े बाँध बनाये जाने चाहिए। तभी हम कुछ सीमा तक बाढ़ पर नियन्त्रण रख पायेंगे।

Drug Addiction

Drug addiction has become a world wide phenomenon. We can’t pinpoint its real cause but it can be due to discontent with life.

Today, people are frustrated due to many reasons. They take drugs because drugs alone mean to provide an escape from the feeling of boredom. They don’t find themselves to be fit to face the competitive state of life. Drugs provide an escape from the frustration of failure. Many people take it for enjoyment but they are wrong. After taking the drug they have no control over their mind and body. A drunkared can be easily seen staggering.

Drugs taken for any length of time cause addiction. The person is gripped by the habit. This grip keeps growing stronger and stronger. One day he becomes so much addicted that he cannot live without drugs.

Drugs cause permanent harm to body organs like-brain, liver, kidney and nervous system. Many times, prolonged medical treatment fails to save an addict.

It is high time we should think over the problem and educate the people telling them the harmful effects of drugs. They should know that it costs the life of a person.

डुग सेवन

ड्रग (नशीले पदार्थों) का सेवन करना पूरी दुनिया में फैली हुई एक सच्चाई बन चुकी है। हम इसके मूल कारण को इंगित नहीं कर सकते हैं लेकिन यह जीवन के असंतोष की वजह से हो सकता है।

आज लोग कई कारणों से हताश हैं। वे ड्रग के आदी हो जाते हैं क्योंकि मात्र ड्रग ही एक माध्यम उन्हें दिखाई देता है जो उनको उबाऊपन से बचाती है। वे अपने आपको जीवन की प्रतियोगी अवस्था का सामना करने में योग्य नहीं मानते हैं। ड्रग हताशी से बचाती है। कई लोग इसका आनन्द की खातिर सेवन करते हैं लेकिन वे गलत हैं। ड्रग का सेवन करने के पश्चात् उनका मस्तिष्क व शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है। एक पियक्कड़ को आसानी से लड़खड़ाते हुए देखा जा सकता है।

ड्रग को कितने भी समय के लिये लिया जाये ये लत बन जाती है। व्यक्ति ड्रग की पकड़ में आ जाता है। यह पकड़ बढ़ती और बढ़ती जाती है। एक दिन वह इतना आदी हो जाता है कि वह ड्रग के बगैर रह नहीं पाता है।

ड्रग दिमाग, यकृत तथा तंत्रिका तंत्र जैसे शारीरिक अंगों को स्थायी नुकसान पहुँचाती हैं। कई बार व्यसनी को। बचाने के लिए एक लम्बा उपचार भी असफल रहता है।

अब समय आ गया है कि हम समस्या पर विचार करें तथा लोगों को ड्रग्स के हानिकारक प्रभाव के बारे में बताते। . हुए शिक्षित करें। उन्हें यह जानना चाहिये कि यह मनुष्य की जान की कीमत माँगता है।

Drug Abuse

Drug abuse has spread in many countries. Millions of rupees are spent internationally in preventing drug use, treating addicts, and fighting drug-related crime. Although, drugs threaten many societies, their effects can also be combated successfully.

Drug abuse causes multiple problems for countries and communities. The medical and psychological effects are very obvious. Addicts cannot function as normal members of society. They neglect or abuse their families, and eventually require expensive treatment or hospitalization. The second effect is on crime. Huge police forces are needed to fight against smuggling. Criminal gangs and Mafia underworlds finance their operations with money from drugs.

However, the menace of drugs can be fought. Education is the first battle. Children need to be told at home and in school about drugs. People need to be aware of the effects so that they can avoid this problem. Families and counsellors need to talk to children and people at risk.

In conclusion, although the problem of drugs may seem impossible to eliminate, there are concrete steps that can be taken to weaken the hold of drugs on society. The danger from drugs is too great to ignore.

नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन

नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन कई देशों में फैल गया है। नशीले पदार्थों के प्रयोग को रोकने के लिए, दुर्व्यसनियों का उपचार करने के लिए तथा नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं। यद्यपि नशीले पदार्थों ने कई समाजों को डरा दिया है, फिर भी इनके प्रभाव से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है।

ड्रग का दुर्व्यसन देशों व समुदायों के लिए कई प्रकार की समस्याएँ पैदा करता है। चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव बड़े ही स्पष्ट हैं। लती व्यक्ति समाज के एक सामान्य व्यक्ति की तरह से कार्य नहीं कर सकता है। वे अपने परिवार को उपेक्षित करते हैं या उनसे दुर्व्यवहार करते हैं, और अंततः उन्हें खर्चीले उपचार या अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। दूसरा प्रभाव अपराध पर होता है। स्मगलिंग से निपटने के लिए बहुत ही विशाल पुलिस बल की आवश्यकता होती है। ड्रग के धन से अपराधियों के संगठित गिरोह तथा माफिया अन्डरवर्ल्ड की गतिविधियाँ पोषित होती हैं।

फिर भी, ड्रग की धमकी से निपटा जा सकता है। शिक्षा पहली लड़ाई है। बच्चों को घरों पर तथा विद्यालयों में ड्रग के बारे में बताये जाने की आवश्यकता है। लोगों को प्रभावों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि वे इस समस्या से बच सकें। परिवारों तथा सलाहकारों को खतरे में पड़े बच्चों व लोगों से बातचीत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष रूप में, भले ही ड्रग की समस्या को समाप्त करना असंभव लगे फिर भी कुछ ठोस कदम हैं जिन्हें समाज पर ड्रग की पकड़ को कमजोर करने के लिए उठाया जा सकता है। ड्रग का खतरा इतना बड़ा है कि इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है।

Corruption in India

“Power tends to corrupt, and absolute power corrupts absolutely.” It is not easy to define corruption. But in a narrow sense, corruption is mostly concerned with ‘bribery’ and it takes several forms. Corruption is a global phenomenon and it is omnipresent. Corruption has progressively increased and is now rampant in our society.

Corruption in India is a consequence of the nexus between bureaucracy, politicians and criminals. India is now no longer considered a soft state. It has now become a considerate state where everything can be had for a consideration. Today, the number of ministers with an honest image can be counted on fingers. At one time, bribe was paid for getting wrong things done, but now bribe is paid for getting right things done at the right time.

Here, the most important thing is the nature of the human being. People have a big thirst for luxuries and comfort. As a result of this they get themselves involved in corruption. Another important reason is that moral and spiritual values are not given utmost importance in our educational system. This fact is highly responsible for the moral deterioration of society.

Corruption is a difficult problem. Like diabetes, it can only be controlled, but not totally eliminated. It may not be possible to root out corruption completely at all levels, but it is possible to contain it within tolerable limits. Corruption is a global problem that all countries of the world have to confront, solutions, however, can only be home grown. We have tolerated corruption for so long. The time has now come to eliminate it from its roots. Some reformers like Anna Hazare and Swami Ramdev are protesting against corruption these days. If they get success in their aim, our country can attain its past glory.

भारत में भ्रष्टाचार

“ताकत भ्रष्टाचार को जन्म देती है और निरंकुश ताकत निरंकुश भ्रष्टाचार को जन्म देती है।”

भ्रष्टाचार को परिभाषित करना आसान नहीं है। लेकिन संकीर्ण अर्थ में, भ्रष्टाचार का संबंध विशेषतौर पर रिश्वत से होता है और यह कई रूपों में पाया जाता है। भ्रष्टाचार एक वैश्विक घटना है और यह सर्वव्याप्त है। भ्रष्टाचार लगातार बढ़ा है और अब हमारे समाज में उग्र हो गया है।

भारत में भ्रष्टाचार नौकरशाहों, राजनेताओं और अपराधियों के बीच बंधन का परिणाम है। आज, ईमानदार छवि वाले मंत्रियों को अंगुलियों पर गिना जा सकता है। कभी रिश्वत गलत काम को करवाने के लिए दी जाती थी लेकिन अब रिश्वत सही काम को समय पर करने के लिए दी जाती है।

यहाँ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है मनुष्य का स्वभाव। विलासिता व आराम या सुख-सुविधाओं के प्रति उसकी प्यास बहुत ज्यादा होती है। इसका परिणाम होता है कि वे स्वयं को भ्रष्टाचार में लिप्त कर लेते हैं। अन्य महत्वपूर्ण कारण है। (भ्रष्टाचार को) कि शैक्षिक व्यवस्था में नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है। समाज के पतन के लिये यह तथ्य बेहद जिम्मेदार है।

भ्रष्टाचार एक कठिन समस्या है। भ्रष्टाचार का हर स्तर पर समूल विनाश कर पाना सम्भव नहीं है लेकिन इसे सहन किये जाने योग्य स्तर तक लाया जा सकता है। भ्रष्टाचार एक वैश्विक समस्या है जिसका सामना संसार के सभी देशों को करना होता है, फिर भी इसका हल हमारे द्वारा ही खोजा जा सकता है। हमने भ्रष्टाचार को बहुत सह लिया है। अब इसे जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। अन्ना हजारे और स्वामी रामदेव जैसे समाज सुधारक आज भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि वे अपने ध्येय में सफल होते हैं, तो भारत अपनी खोई हुयी गरिमा को प्राप्त कर सकता है।

Today’s Students Tomorrow’s Nation Builders

The backbone of any strong nation is its students. Students who are the youth of a country help the nation in times of emergency, drought, floods or any type of riots. Students, by virtue of their energy, are best suited for tough jobs for building the foundation of a nation.

They can undergo any type of sacrifice. Students have a fund of immense knowledge which can prove to be of great help and value. Whenever the honour and freedom of a nation are facing danger, it is students who come to the forefront and protect it at the cost of their lives. They can prove themselves to be the true and proud sons of their motherland. Students must learn from the very beginning of their academic life the lessons of self-reliance and sacrifice towards the causes of nation-building. A nation with indisciplined youth is always in the danger of extinction and can never prosper. Indiscipline can play havoc with the social life of a nation.

Today’s students will be tomorrow’s citizens. As such, if our students today start learning to lead a disciplined life, tomorrow they will be mature and disciplined citizens of the nation. These students can pave the way for building a strong and progressive nation in future.

आज के छात्र भविष्य के राष्ट्र निर्माता

किसी मजबूत राष्ट्र की रीढ़ उसके छात्र होते हैं। विद्यार्थी जो कि किसी भी देश के युवा होते हैं वे आपातकाल, सूखे, बाढ़ या अन्य किसी प्रकार के विद्रोह के समय राष्ट्र की सहायता करते हैं। अपनी ऊर्जा के द्वारा वे राष्ट्र की नींव के निर्माण के.कठिन कार्य के लिए उपयुक्त होते हैं। वे किसी भी प्रकार का बलिदान कर सकते हैं। विद्यार्थियों में ज्ञान का बहुत भण्डार होता है जो कि बहुत मददगार व कीमती साबित होता है। जब कभी भी देश के सम्मान व स्वतंत्रता को खतरा होता है तब विद्यार्थी ही आगे आते हैं व अपने जीवन की कीमत पर इसकी रक्षा करते हैं।

वे अपने आप को अपनी मातृभूमि के सच्चे व शानदार पुत्र साबित कर सकते हैं। विद्यार्थियों को अपने शैक्षिक जीवन के प्रारम्भ से ही आत्म-विश्वास तथा राष्ट्र निर्माण की खातिर बलिदान का पाठ सीखना चाहिये। अनुशासनहीन युवाओं का राष्ट्र हमेशा ही अस्तित्व के संकट में होता है और कभी भी तरक्की नहीं कर सकता है। अनुशासनहीनता किसी राष्ट्र के सामाजिक जीवन का विनाश करती है।

आज के विद्यार्थी ही कल के नागरिक होंगे। इस प्रकार से यदि हमारे विद्यार्थी आज अनुशासित जीवन जीने लगे। तो कल वे देश के परिपक्व व अनुशासित नागरिक होंगे। ये विद्यार्थी भविष्य में एक मजबूत व विकासशील राष्ट्र का। निर्माण करने का रास्ता तैयार कर देंगे।

Digital India

Digital India Project was launched by the Prime Minister Narendra Modi on 1st of July, 2015. It is a very effective scheme for better growth and development of India. It aims to give India a digital push for good governance and more jobs. The present Prime Minister is trying his best towards digitizing India. He is doing it in order to bridge the gap between government services and people. Digitization is needed in India for its bright future.

Digital India Program is very beneficial for India. Some of its benefits are:

  • It reduces paperwork by minimizing the usage of physical documents.
  • It ensures the achievement of various online goals set by the government.
  • It makes possible for the people to submit their documents/certificates online anywhere which reduces physical work.
  • It may ease the important healthcare services through an e-hospital system such as online registration, taking doctor appointments, fee payment, online diagnostic tests, blood check-up, etc.
  • It is a big platform which facilitates efficient delivery of government or private services all over the country to its citizens.
  • Bharat Net Program (a high-speed digital highway) will connect almost 250,000 Gram panchayats of India.
  • Farmers can get any agricultural information online.
  • Any citizen can get any information from any department under RTI Act online without wasting time here and there.
  • People can do their banking work, railway bookings, flight bookings, hotel bookings, etc. online.
  • Concludingly it can be said that the Digital India Program has saved our time and energy and made our life easy.

डिजिटल इंडिया।

डिजिटल इंडिया प्रोजैक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2015 को आरम्भ किया गया था। यह भारत की बेहतर वृद्धि व विकास के लिये एक बहुत ही प्रवावशाली स्कीम (योजना) है। इसका उद्देश्य भारत में सुशासन व अधिक नौकरियों सम्बन्धी कार्यों में डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देना है। भारत के लिये डिजिटाइजेशन अभियान में वर्तमान प्रधानमंत्री अपने सम्पूर्ण प्रयास लगा रहे हैं। वह ऐसा सरकारी सेवाओं व लोगों के बीच दूरी को कम करने के लिये कर रहे हैं। भारत के उज्जवल भविष्य हेतु यहाँ डिजिटाइजेशन की आवश्यकता है।

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम या डिजिटाइजेशन कार्यक्रम भारत के लिये अत्यन्त उपयोगी है। इसके लाभों में से कुछ हैं

  • यह दस्तावेजों के प्रयोग को कम करते हुए पेपर वर्क को कम करता है।
  • यह सरकार द्वारा बनाये गये विविान्न ऑनलाइन लक्ष्यों सम्बन्धी उपलब्धी को सुनिश्चित करता है।
  • यह लोगों के लिये उनके दस्तावेजों/प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन जमा कराना सम्भव बनाता है जिससे कि उन्हें। आने-जाने की भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ती।
  • यह ई-हॉस्पीटल सिस्टम के माध्यम से लोगों के लिये स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाता है जैसे-ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना, डॉक्टर से मिलने की तारीख लेना, फीस का भुगतान करना, टैस्टिंग सुविधा, रक्त जाँच आदि।
  • यह एक बड़े स्तर का प्लेटफॉर्म है जो देश भर में नागरिकों को सरकारी व प्राइवेट क्षेत्र की बेहतरीन सेवाएँ सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराता है।
  • भारत नैट कार्यक्रम (ए हाईस्पीड डिजिटल हाइवे) भारत की लगभग 250,000 ग्राम पंचायतों को एक साथ जोड़ेगा।
  • किसान कृषि सम्बन्धी किसी भी प्रकार की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
  • कोई भी नागरिक सूचना के अधिकार के अन्तर्गत किसी भी विभाग से सम्बन्धित कोई भी सूचना बिना समय बरबाद किये आनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
  • लोग अपना बैंक सम्बन्धी कार्य, रेलवे या फ्लाइट बुकिंग, होटल बुकिंग आदि ऑनलाइन करा सकते हैं। निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने हमारे समय व ऊर्जा की बचत की है और हमारे जीवन को आसान बना दिया है।

Clean India Drive

Clean India Drive or Mission is a Swachh Bharat Abhiyan. It is launched by the Indian government. Its aim is to cover the 4041 statutory towns for the cleanliness of streets, roads and infrastructure of the country. Prime Minister Mr Narendra Modi launched this mission on 2nd October (the birth anniversary of Mahatma Gandhi) in 2014 at Rajghat, New Delhi (Bapu’s Samadhi Sthal)

On the day of launching the event PM himself had cleaned the road. It is the biggest cleanliness drive ever in India. Approximately, three million government employees including students from different schools and colleges participated in the cleanliness activities. On the same day, the PM nominated nine people to participate in the drive in their own areas. He also requested each of those nine nominees to call another nine people to participate as well as continue the chain of calling nine people by each and every participant. It should continue until the message reaches to every Indian in every corner of the country. We have to make it a national mission.

Its mission is to join each and every Indian from all walks of life. Swachh Bharat Mission aims to construct individual sanitary toilets for household purposes. It is to create awareness among people especially living under the poverty line.

The main objectives of Swachh Bharat Abhiyan are removing the trend of open defecation, bringing behavioural changes among people, and enhance awareness about sanitation, etc.

स्वच्छ भारत अभियान
Clean India Drive एक स्वच्छ भारत अभियान है। इसे भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया है। इसका लक्ष्य है। भारत के 4041 शहरों व कस्बों को गलियों, सड़कों व देश के infrastructure को सफाई हेतु इस अभियान में सम्मिलित करना। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर (महात्मा गाँधी का जन्म दिवस) 2014 को दिल्ली के राजघाट (बापू का समाधिस्थल) पर इसका शुभारम्भ किया था।

शुभारम्भ दिवस पर स्वयं प्रधानमंत्री ने सड़क पर सफाई की। भारत में यह स्वच्छता का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है। लगभग तीस लाख सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न स्कूल व कॉलेजों के विद्यार्थियों ने इस स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। इसी दिन प्रधानमंत्री ने नौ लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में इस सफाई अभियान में भाग लेने हेतु नामित किया और उन्होंने उन सभी नौ लोगों से आग्रह किया कि उनमें से प्रत्येक सदस्य अन्य नौ-नौ लोगों को इस स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेने के लिये नामित कर इस श्रृंखला को आगे बढ़ायें। स्वच्छता का संदेश जब तक देश के कोने-कोने में प्रत्येक भारतवासी तक नहीं पहुँच जाता तब तक यह अभियान जारी रहेगी।

इस मिशन (अभियान) का उद्देश्य है जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से प्रत्येक भारतवासी को इस अभियान से जोड़ना। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य है प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण करवाना। यह अभियान लोगों में विशेषरूप से गरीब वर्ग में जागरुकता (स्वच्छता के प्रति) उत्पन्न करने के लिये है।

स्वच्छ भारत मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं-खुले में शौच की आदत को समाप्त करना, लोगों में व्यवहार सम्बन्धी (स्वच्छता के प्रति) परिवर्तन लाना और स्वच्छता के विषय में जागरुकता लाना इत्यादि।

Make in India
Make in India program is the BJP-led NDA government’s program. Prime Minister Mr Narendra Modi launched this program on 25 September, 2014. It was started with the intention to boost the domestic manufacturing industry. And to attract foreign investors to invest in India. Manufacturing industry currently contributes just over 15% to the national GDP. The aim of this compaign is to increase this to 25%. In the process, the government expects to generates jobs, attract much foreign direct investment, and transform India into a manufacturing hub.

The logo for the Make in India compaign is an elegant lion. It is inspired by the Ashoka Chakra. It is designed to represent India’s success in all spheres. The campaign was dedicated by the PM to the eminent patriot, philosopher and political personality Pandit Deen Dayal Upadhyaya. For this program, the government of India has identified 25 priority sectors that shall be promoted adequately. Some of them are-automobiles, aviation, biotechnology, Chemicals, IT and BPM, leather, media and entertainment, mining, space, renewable energy, roads and highways, textiles and garments, thermal power, etc..

The PM promised the investors that his administration would aid the investors by making India a pleasant experience. He stressed on employment generation and poverty alleviation that would inevilably accompany the success of this compaign.

मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया प्रोग्राम BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार का प्रोग्राम (कार्यक्रम) है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस कार्यक्रम का 25 सितम्बर, 2014 को शुभारम्भ किया था। घरेलु उत्पादन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने (आगे बढ़ाने) के लिये इसको आरम्भ किया गया और भारत में विदेशी निवेशकों को निवेश करने हेतु इसे शुरू किया गया। राष्ट्रीय GDP में वर्तमान में उत्पादन क्षेत्र का योगदान 15% के लगभग है। इस अभियान का उद्देश्य इसे 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत पर लाना है। इस प्रक्रिया में सरकार नौकरी के अवसरों में वृद्धि, अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने और भारत को एक उत्पादक केन्द्र के रूप में स्थापित करने की अपेक्षा करती है।

मेक इन इंडिया अभियान का प्रतीक (चिह्न) एक शानदार शेर है। यह (प्रतीक) अशोक चक्र से प्रेरित है। इसको हर क्षेत्र में भारत की सफलता का प्रतिनिधित्व करने हेतु डिजाइन किया गया है। इस अभियान को प्रधानमंत्री द्वारा विख्यात देशभक्त, दार्शनिक व राजनीतिक शख्सियत पंडित दीनदयाल उपाध्याय को समर्पित किया गया। इस कार्यक्रम हेतु भारत सरकार ने ऐसे 25 क्षेत्रों को चिह्नित (पहचान) किया है जिनको पर्याप्त रूप से प्रोत्साहित किया जायेगा।

उनमें से कुछ हैं-ऑटोमोबाइल, उड्डूयन, बायोटैक्नोलॉजी, रसायन उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी, चमड़ा, मीडिया व मनोरंजन, खनन, अन्तरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, सड़क, हाइवेज, वस्त्र उद्योग, ऊष्मीय शक्ति आदि।

Skill India

Skill India program was launched by the government of India. It was launched under the leadership of the prime minister Mr. Narendra Modi in 2015. Its main objective is to create job opportunities and space for the development of the talent of Indian youth. And to develop more of these sectors which have already been put under skill development for the last so many years. And also to identify new sectors for skill development. This programme aims at providing training and skill development to 500 million youth of India by 2020. It would cover each and every village.

Some of the important features of SKILL INDIA program are :

  • To make the youth skilled in such a way so that they get employment.
  • To improve entrepreneurship.
  • To provide training, support and guidance for all traditional type of occupations as-carpenters, cobblers, welders, blacksmiths, masons, nurses, tailors, weavers, etc.

More emphasis will be given on new areas like real estate, construction, transportation, textile, gem industry, jewellery designing, banking, tourism, etc.

The best part of the Skill India program is that the training program would be on the lines of international level. Due to this the youth of our country cannot only meet the domestic demands but also of other countries.

स्किल इंडिया स्किल

इंडिया कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया था। इसे सन 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आरम्भ किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली भारतीय युवाओं के विकास के लिये नौकरी/कार्य के अवसरों का सृजन करना है और उन क्षेत्रों का और अधिक विकास करना है जो पहले से ही वर्षों से कौशल विकास (skill development) हेतु चिन्हित हैं। और कौशल विकास हेतु नये क्षेत्रों की पहचान करना भी इसके उद्देश्य में शामिल है। इस कार्यक्रम (मिशन/अभियान) का लक्ष्य है सन् 2020 तक भारत के पचास करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना व उनका कौशल विकास करना। इस अभियान में प्रत्येक गाँव को शामिल किया जायेगा।

स्किल इंडिया कार्यक्रम की कुछ मुख्य विशेषताएँ हैं-

  • युवाओं के कौशल को इस प्रकार विकास करना जिससे कि उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके।
  • उद्यमशीलता में सुधार लाना।
  • परम्परागत प्रकार के लगभग सभी व्यवसायों में प्रशिक्षण, सहायता व मार्गदर्शन प्रदान करना जैसे- बढ़ई, मोची का कार्य, बैल्डिंग, लोहार का कार्य, राजमिस्त्री, नर्स, दर्जी, जुलाहे का कार्य आदि।

नवीन क्षेत्रों पर और अधिक जोर दिया जायेगा जैसे-जमीन जायदाद सम्बन्धी कार्य, निर्माण कार्य, परिवहन, वस्त्र उद्योग, रत्न उद्योग, आभूषण डिजाइनिंग, बैंकिंग, पर्यटन, आदि।

स्किल इंडिया प्रोग्राम (अभियान) की सबसे अच्छी बात है कि इसके अन्तर्गत दिया जाने वाला प्रशिक्षण अन्तरराष्ट्रीय स्तर का होगा। इस कारण हमारे देश के युवा न सिर्फ घरेलू (भारतीय) माँग (कौशल की) को पूरा कर सकेंगे बल्कि अन्य देशों में भी कार्य करने में कुशल होंगे।

Cleanliness Campaign in Your School

Cleanliness is very important in our life. We should take care of it throughout our life. Practice of cleanliness starts from the home and the school from a very young age. It affects us very badly when we do not maintain cleanliness.

From time to time cleanliness campaigns are conducted in our school. In those campaigns, we are told about the importance of cleanliness. And we are also told how to keep our school and community clean. Keeping our school clean is the responsibility of each one of us. Students are asked to use garbage bins placed by the doors to keep the floors clean. Nobody is allowed to throw any kind of paper in the classrooms. To keep the classrooms clean dustbins are kept in all the classrooms. Parents, students and staff members are encouraged to use reusable containers for lunches.

Physical cleanliness keeps us clean from outside. And gives us a feeling of well-being and confidence. While internal cleanliness keeps us mentally peaceful and away from anxiety. Hence complete cleanliness is keeping the heart, body, and mind clean and peaceful.

We need to keep our surroundings clean so that we can live a healthy life. Cleanliness keeps us away from epidemics and diseases.

आपके स्कूल में स्वच्छता अभियान

स्वच्छता का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हमें स्वच्छता पर हमेशा ध्यान देना चाहिए। स्वच्छता (सप्लाई) का अभ्यास बहुत छोटी उम्र से ही हमारे घर व स्कूल से आरम्भ हो जाता है। जब हम सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो इसका हमारे शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

हमारे स्कूल में समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाये जाते हैं। इन अभियानों में हमें स्वच्छता के महत्व के विषय में बताया जाता है। और हमें यह भी बताया जाता है कि हम अपने स्कूल और अपने क्षेत्रों में सफाई किस प्रकार रखें। छात्रों को दरवाजों के पास रखे कूड़ेदानों का प्रयोग करने के लिये कहा जाता है ताकि फर्श को साफ-सुथरा रख सकें। किसी को भी किसी भी प्रकार का कागज कक्षा में फेंकने की अनुमति नहीं है। कक्षाओं में सफाई बनाये रखने के लिये सभी कक्षाओं में कूड़ेदान रखे हुए हैं। माता-पिता, छात्र व स्टाफ सदस्यों सभी के लंच में पुनः प्रयोग में आने वाले लंच बॉक्स के इस्तेमाल हेतु उत्साहित किया जाता है।

शारीरिक स्वच्छता हमें बाहर से साफ-सुथरा रखती है। और हमें खुशी व आत्मविश्वास का एहसास कराती है। जबकि आन्तरिक सफाई हमें मानसिक शान्ति का अनुभव कराती है और चिंता/तनावे से दूर रखती है। अतः सम्पूर्ण स्वच्छता हमारे हृदय, तन और मन को स्वच्छ व शान्त रखती है। हमें अपने आस-पास की जगह को स्वच्छ रखना चाहिए जिससे हम स्वस्थ जीवन जी सकें। स्वच्छता हमें महामारी व बीमारियों से दूर रखती है।

The Pen Is Mightier Than the Sword
(From Prudence:Page 151)

The power of a pen is enormously larger than a sword. What a sharp edged sword cannot achieve, can be achieved by the help of the minute tip of a pen. It means the power of writings is much stronger than the power of hatred, war, and fighting. A war always ends in killings.

The pen is linked with writings. It helps a writer to put his thoughts on paper while a sword is a weapon used forcefully against someone. A sword can be wielded well only by a man who is physically strong. But words can flow from the pen of even a weak man. If he is a good writer, he can use the words to his desired impact. That’s why many great writers had inspired revolutions. For example, the French revolution was the result of the writings of great French writer like Rousseau. Writings can evoke different emotions as love, hatred, sympathy, etc. It is something that is to be regarded with awe and respect. Hence pen is mightier than the sword.

A pen helps a man to fulfil his dream while a sword is used to kill a man. A pen makes the future of writer, society, nation and the whole world. It stands for the might of the human intellect. While the sword stands for man’s physical power.

कलमे तलवार से अधिक ताकतवर होती है।

एक कलम की ताकत एक तलवार की ताकत से बहुत ज्यादा होती है। एक तलवार की धार जो नहीं कर सकती, वह कार्य एक कलम (पैन) की एक छोटी सी निब की सहायता से किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि लेखन की ताकत, घृणा, युद्ध और झगड़े से बहुत ज्यादा अधिक होती है। एक युद्ध का अन्त हमेशा हत्याओं के रूप में होता है।

कलम का सम्बन्ध लेखन से है। यह एक लेखक को अपने विचारों को कागज पर उतारने में सहायता करता है। जबकि तलवार एक हथियार है जिसका प्रयोग बलपूर्वक किसी के विरुद्ध किया जाता है। एक तलवार सिर्फ उसी व्यक्ति के द्वारा अच्छी तरह चलाई जा सकती है जो शारीरिक रूप से तंदुरुस्त हो। लेकिन शब्द एक कमजोर आदमी की कलम से भी निकल सकते हैं। यदि वह एक अच्छा लेखक है तो वह शब्दों का इस्तेमाल अपने इच्छित प्रभाव के लिये कर सकता है (अर्थात इच्छित परिणाम हासिल कर सकता है)। इसीलिये अनेक महान लेखकों ने क्रान्तियों को प्रेरित किया। उदाहरण के लिये, फ्रेंच रिवोल्युशन (फ्रांस की क्रान्ति) Rousseau जैसे महान फ्रांसीसी लेखक के लेखन का परिणाम थी। लेखन विभिन्न संवेगों (भावनाओं) को उभारता है जैसे-प्रेम, घृणा, सहानुभूति आदि। इसे (लेखन को) प्रभाव व सम्मान के नजरिये से देखा जाना चाहिये। अतः कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली होती है।

एक कलम किसी व्यक्ति को उसके स्वप्न को साकार करने में सहायता करती है जबकि एक तलवार का प्रयोग किसी को मारने के लिये किया जाता है। एक कलम (उसके) लेखक के, समाज के, राष्ट्र के और सम्पूर्ण विश्व के भविष्य को बनाती है। इसका सम्बन्ध मानव की बुद्धि की ताकत के साथ है जबकि तलवार का सम्बन्ध व्यक्ति की शारीरिक ताकत से है।

Climate Change
(From Prudence:Page 152)

Climate change is basically a change in weather. Its effect is global. It can last for decades, centuries or in some cases even longer. Climate change is the term that is often heard today with the term global warming. Scientists believe that global warming is caused by pollution. However, not all climate changes are caused by human beings.

The most common cause of climate changes in the past has been the light of the sun being blocked causing an ice age as the planet freezes over. But not all climate changes bring a cooling effect on the planet. One thing that is believed to be a cause of a climate change happening now is global warming. Global warming is the condition when the earth gets warmed up instead of cooling down. Pollution is considered to be the cause of global warming. While its scientific reason is depletion of the ozone layer of the atmosphere due to which harmful ultraviolet rays of the sun reach the earth and heat it up.

This climate change and global warming are posing a threat to this planet (the earth). It is dangerous for human beings, wild life, vegetation and everything else. Damage has already been caused to the atmosphere and to the life on this planet. And it is irreversible. But still, we all can make efforts to reduce further damage. For this, we will have to control pollution and will have to stop other anti-nature activities by human beings.

जलवायु परिवर्तन जलवायु परिवर्तन मूलतः मौसम में एक प्रकार का परिवर्तन है। इसका प्रभाव (असर) वैश्विक होता है। इसका प्रभाव दशकों, सदियों और कभी-कभी इससे भी अधिक लम्बे समय तक रहता है। जलवायु परिवर्तन एक ऐसा शब्द है जो आजकल ग्लोबल वार्मिग (वैश्विक तापमान में वृद्धि) के साथ अधिकांशतः सुनाई देता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्लोबल वार्मिग का कारण पर्यावरण प्रदूषण है। फिर भी जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी सभी कारण मानव जनित नहीं होते हैं।

अतीत में जलवायु परिवर्तन को सर्वाधिक सामान्य कारण पृथ्वी तक सूर्य के पर्याप्त प्रकाश नहीं पहुँच पाने के कारण कम तापमान का होना रहा जिसके परिणामस्वरूप हिम युग (बर्फ का जमना) सामने आया। लेकिन जलवायु सम्बन्धी सभी परिवर्तन पृथ्वी पर ठंडा प्रभाव नहीं डालते हैं। इस समय (वर्तमान में) जो जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसका कारण ग्लोबल वार्मिग (विश्व के तापमान में वृद्धि) को माना जा रहा है। ग्लोबल वार्मिग वह स्थिति है जब पृथ्वी ठंडी होने के बजाय गर्म होने लगती है। पर्यावरण प्रदूषण को ग्लोबल वार्मिग का कारण माना जा रहा है। जबकि इसका वैज्ञानिक कारण है। वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन परत में कमी या उसका क्षतिग्रस्त होना। सूर्य की हानिकारक पैराबैंगनी किरणों के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है जिससे यह गर्म हो रही है।

यह जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिग पृथ्वी के लिये चुनौती (खतरा) उत्पन्न कर रहा है। यह मानव जाति, वन्य जीवों, वनस्पति व सभी के लिये खतरनाक है। वायुमण्डल के लिये व पृथ्वी पर जीवन के लिये पहले ही इससे क्षति पहुँच चुकी है और इस क्षति की भरपाई करना असम्भव है। लेकिन हम सब मिलकर आगे होने वाली क्षति को रोकने के प्रयास अब भी कर सकते हैं। इसके लिये हमें पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना होगा। और मानव को अपनी प्रकृति विरोधी गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।

Should Smoking be Banned?

Awareness in the world has grown today to condemn smoking because it is injurious to health. It should be banned completely.

Smokers believe that it helps them relax. For some, it even improves concentration. A further point is that governments throughout the world make huge profits by levying taxes on cigarettes. This provides funds which are used for building schools, hospitals, etc. The tobacco industry also employs tens of thousands of people in poor countries like India.

Most glaring fact, however, is that smoking is dangerous to health. It causes heart disease, bronchitis, lung cancer, etc. A further issue is that smoking costs the government millions of rupees to treat the patients for smoking-related problems. There is also concern today about passive smoking. Recent research has shown that non-smokers can suffer health problems if they spend long periods of time among active smokers (people who smoke).

In general, the world would be a better place without cigarettes. However, the decision as to whether to smoke or not should be for each individual to make.

The people employed in the tobacco industry can be given employment opportunities in some other fields so that they could easily quit this industry. Without imposing ban on smoking, it is almost impossible to keep people away from smoking.

क्या धूम्रपान प्रतिबंधित होना चाहिए?

आज दुनिया में धूम्रपान के प्रति जागृति बढ़ गई है जिससे कि हम धूम्रपान की निंदा कर सकें क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

धूम्रपान कर्ताओं का विचार है कि वह लोगों को तनावमुक्त होने में मदद करता है। कुछ के लिये यह एकाग्रता को भी सुधारता है। अतिरिक्त बिंदु यह है कि पूरी दुनिया में सरकारें सिगरेट पर कर लगाकर भारी मात्रा में लाभ कमाती हैं। यह विद्यालयों, अस्पतालों आदि को बनाने के लिये कोष उपलब्ध करवाता है। भारत जैसे गरीब देशों में तम्बाकू उद्योग दसियों-हजार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाता है।

किन्तु, सबसे प्रमुख तथ्य यह है कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इससे दिल तथा फेफड़े की बीमारियाँ व कैंसर होता है। एक अतिरिक्त बात यह कि धूम्रपान से होने वाली बीमारियों के मरीजों के उपचार में सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। आज अप्रत्यक्ष धूम्रपाने भी बड़ी ही चिंता का विषय है। हाल ही की खोजों से पता चला है कि धूम्रपान नहीं करने वाले भी स्वास्थ्य समस्या से ग्रसित हो सकते हैं यदि वे धूम्रपान करने वाले लोगों के बीच अधिक समय तक रहें तो।

सामान्यरूप में, बगैर सिगरेट के दुनिया एक बहुत ही अच्छा स्थान होगी। फिर भी, यह प्रत्येक व्यक्ति खुद ही निश्चय कर सकता है कि धूम्रपान करना चाहिये या नहीं। तम्बाकू उद्योग में कार्यरत (कर्मियों) लोगों को रोजगार के अन्य अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हैं जिससे कि वे आसानी से इस क्षेत्र को छोड़ सकें। धूम्रपाने पर प्रतिबन्ध लगाये बिना लोगों को धूम्रपान से अलग रखना लगभग असम्भव है।

Anti-social Habits and Practices

Every man will become an outcaste in the society if through faulty up-bringing and training he inculcates anti-social habits. His company is not liked by others and he is treated with indifference.

Customs, traditions and practices are socially approved habits but there are some anti-social practices which hinder the progress of mankind. Some of them are-child marriage, untouchability, communalism and casteism, dowry system, etc. Marriage at an immature age is harmful for the couple. There are several prohibitive legislations but it still persists. Casteism has been struck off from the country by the Constitution of India but it is still present and eroding our social fabric. Dowry system has taken a very ugly shape in the present day. Social legislation seems to be ineffective in curbing this evil.

Anti-social habits of people not only hinder the progress of their families but also hinder the progress of the society and the nation. So we should develop social consciousness against then if we want to save our society and our country and promote social welfare of the people. Antisocial habits can be controlled by enhancing the educational standard of the society.

असामाजिक आदतें एवं अभ्यास। प्रत्येक वह व्यक्ति जो गलत लालन-पालन या प्रशिक्षण के द्वारा असामाजिक आदतें विकसित कर ले, वह जाति से बाहर हो जाता है। उसकी संगति दूसरों के द्वारा पसंद नहीं की जाती है और उसके साथ उपेक्षित व्यवहार किया जाता है।

रीति-रिवाज, परंपराएँ तथा आचरण सामाजिक रूप से स्वीकार्य आदतें होती हैं, किन्तु कुछ असामाजिक व्यवहार होते हैं। जो मानवता के विकास में बाधक होते हैं। उनमें से बाल विवाह, अस्पृश्यता, जातिवाद, संप्रदायवाद व दहेज प्रथा आदि कुछ प्रमुख हैं। अपरिपक्व आयु में विवाह दंपत्ति के लिए नुकसानदायक है। अनेक कानूनी प्रतिबंधों के बाद भी यह अभी व्याप्त है। भारत के संविधान के द्वारा जातिवाद को समाप्त किया जा चुका है लेकिन यह अभी भी हमारे समाज के तानेबाने को तहस-नहस कर रहा है।

वर्तमान में दहेज प्रथा ने अत्यधिक बुरा रूप ले लिया है। सामाजिक कानून इस बुराई को रोकने में बेअसर प्रतीत होता है। लोगों की असामाजिक आदतें न सिर्फ उनके परिवारों की उन्नति को बाधित करती हैं बल्कि समाज व राष्ट्र की प्रगति को भी बाधित करती हैं। इसलिये यदि हम अपने समाज, देश को बचाना चाहते हैं तो हमें सामाजिक जागरुकता उत्पन्न करनी चाहिये और लोगों के सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देना चाहिये। समाज के शैक्षिक स्तर में वृद्धि करके असामाजिक आदतों को नियंत्रित किया जा सकता है।

Blood Donation

Blood donation is called ‘mahadan’ (the highest form of donation) because a little amount of our blood can save somebody’s life. Every hospital needs large supplies of blood for transfusions. It is given by voluntary blood-donors.

Before donating blood, the donor is tested to determine his/her blood group and make sure he/she is not suffering from certain diseases. When this has been done, the donor’s blood can be taken.

Blood donation is a simple process. The blood donor is made to lie down and rest his/her arm on a pillow. Next, the nurse puts the cuff of the sphygmomanometer around his upper arm and inflates it to compress the veins. At this stage, she cleans his skin with ether and inserts the needle into a vein. As she does this, the blood begins to flow into a bottle. Meanwhile, the donor of the blood opens and closes his hand to increase the flow.

As soon as the bottle is full, the nurse takes off the sphygmomanometer and withdraws the needle. Finally, she puts a dressing on the donor’s arm. The blood is immediately labelled and kept for refrigeration.

We should create awareness among the people and encourage them to donate blood because it is not in any way harmful to the donor.

रक्तदान

रक्तदान को महादान कहा जाता है क्योंकि हमारा थोड़ा सा रक्त किसी के जीवन को बचा सकता है। प्रत्येक अस्पताल को जरूरतमंदों को खून चढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में खून की आवश्यकता होती है। यह दानदाताओं द्वारा दिया जाता है। रक्तदान से पूर्व रक्तदाता को उसका रक्त समूह निर्धारित करने के लिए तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह किन्हीं विशिष्ट बीमारियों से पीड़ित नहीं हैं उसकी जाँच की जाती है। इसके उपरान्त ही उसका रक्त लिया जा सकता है।

रक्तदान एक साधारण प्रक्रिया होती है। सबसे पहले रक्तदाता को लिटाया जाता है और उसके हाथ को तकिये पर स्थिर रखा जाता है। फिर नर्स स्फिग्नोमेनोमीटर (blood pressure नापने का एक यंत्र) के कफ को उसकी ऊपरी भुजा पर

लपेटती है तथा नसों को दबाने के लिए हवा भरी जाती है। इस स्तर पर वह ईथर से उसकी त्वचा को साफ करती है तथा नस में सुई घुसाती है। जब वह यह करती है तो बोतल में रक्त बहता है। इस बीच रक्तदाता बहाव को बढ़ाने के लिए अपनी मुट्ठी को खोलता व बंद करता है।

जैसे ही बोतल पूरी भर जाती है, नर्स स्फिग्नोमेनोमीटर को खोल देती है तथा सुई को निकाल देती है। अंत में, वह रक्तदाता की भुजा पर पट्टी कर देती है। रक्त पर तुरन्त ही लेबल लगा दिया जाता है व प्रशीतन के लिये रख दिया जाता है।

हमें लोगों में जागरुकता लानी चाहिये और रक्तदान के प्रति उन्हें उत्साहित करना चाहिये क्योंकि यह रक्तदान करने वाले व्यक्ति (रक्तदाता) के लिये किसी भी रूप में हानिकारक नहीं है।

Road – Accidents (Board Sample Paper 2012)

Introduction : Road accidents often take place in a city where vehicles run on the road in a large number. It is a matter of serious concern that there is continuous rise in the cases of road accidents everywhere. Nobody feels safe while travelling on the road. The data of police stations, hospitals, insurance companies and local newspapers show that the number of accidents is increasing every year.

♦ Causes of road accidents:

  1. An increasing number of vehicles on the roads is one of the main causes of road accidents.
  2. The poor condition of the roads is also responsible for the problem.
  3. Unchecked encroachments on the roads increase the problem.
  4. In the evenings, the street not lighted because of a power cut.
  5. Driving licences are issued without checking the applicant’s driving skills.
  6. Offenders are hardly punished.
  7. Smoking and talking on mobile during driving distract the driver’s attention.

♦ Preventive Measures :

  1. Wherever needed, roads must be immediately repaired and inspected periodically.
  2. Licence issuing rules must be made stricter and more rigid.
  3. All encroachments must be removed.
  4. Laws to punish offenders should be implemented more effectively.
  5. Video monitoring of traffic and surprise checks may be introduced to check reckless driving.

सड़क-दुर्घटनाएँ सड़क दुर्घटनायें प्राय नगर में होती हैं जहाँ गाड़ियां भारी संख्या में सड़कों पर दौड़ती हैं। यह गंभीर चिन्ता का विषय है कि हर जगह सड़क दुर्घटनाओं में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है। सड़क-यात्रा में कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं करता है। थानों, अस्पतालों, बीमा कंपनियों और समाचार पत्रों के आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है।

♦ सड़क दुर्घटनाओं के कारण

  1. सड़कों पर बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या मुख्य कारणों में से एक है।
  2. सड़कों की बुरी दशा भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है।
  3. सड़कों पर आगे बढ़कर दुकानें लगाना समस्या को और बढ़ाता है।
  4. बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण संध्या के समय सड़कों पर रोशनी नहीं होती।
  5. ड्राईवर की गाड़ी चलाने की कुशलता को चैक किये बिना ही उसे ड्राईविंग लाईसेंस दे दिया जाता है।
  6. गलती करने वालों को दण्ड नहीं दिया जाता।
  7. धूम्रपान करना और मोबाइल पर बात करना ड्राईवर के ध्यान को बाँटता है।

♦ रोकथाम के उपाय

  1. जहाँ कहीं भी आवश्यक हो सड़कों की तुरन्त मरम्मत की जानी चाहिये और समय अन्तर पर उनका निरीक्षण होना चाहिये।
  2. लाईसेंस प्रदान करने के नियम कठिन होने चाहिये और कठोरता से उनका पालन करना चाहिये।
  3. समस्त सड़कों पर अनुचित कब्जा हटवा देना चाहिये।
  4. गलती करने वालों को दण्ड देने के नियम प्रभावशाली ढंग से लागू होने चाहिये।
  5. ड्राईविंग को चैक करने के लिये वीडियो कैमरे द्वारा नियन्त्रण और अचानक चैकिंग होनी चाहिए।

Saving Is a Good Habit (S.S. Exam 2012)

Extravagance loses what Industry (कड़ी मेहनत) gains. Our ancestors lived a simple and frugal life. They laid emphasis on saving against a rainy day. A sudden disease, an accident or emergency may occur without warning any time. Naturally, extra money is needed for its remedy. A person who has not thought of such misfortunes will be in a difficult situation like the grasshopper who saved nothing for the winter. He went to the wise ant to borrow food.

But the ant disappointed him saying “We ants never borrow, we ants never lend”. The youth of today under the impact of western culture is aping the latest fashions. Fashions change rapidly and give place to new ones. He has become a reckless consumer. He borrows to gratify his wild desires. In this race, he is always a loser. He lives life only for today and never thinks of the future.

Wisdom lies in living a simple and frugal life. Saving habit will always help him like a faithful friend. The saved money will help him discharge his duties to his children as well as to his old parents. He will live a happy life without worries.

A hard earner saves wisely and spends wisely. One may get a very good salary but without the habit of saving, he shall always spread out hands for help. Saving habit assures a happy present and a safe future.

बचत एक अच्छी आदत

जो कुछ कठोर परिश्रम कमाता है फिजूल खर्ची उसे खो देती है। हमारे पूर्वज सादा और कम खर्च का जीवन बिताते थे। वे आड़े समय के लिय बचत पर जोर देते थे। अचानक बीमारी, दुर्घटना या कोई भी आपातकालीन आवश्यकता कभी भी चेतावनी के बिना आ सकती है। स्वाभाविक है कि इस के उपचार के लिये काफी पैसे की आवश्यकता होगी। एक ऐसा व्यक्ति जिसे ऐसी मुसीबतों का पूर्ण विचार नहीं है वह टिड्डे की तरह विकट परिस्थितियों में फंसेगा जिसने शीतकाल के लिये कुछ नहीं बचाया।

वह बुद्धिमान चींटी के पास सहायता मांगने के लिये गया परन्तु चींटी ने यह कहकर निराश कर दिया हम चींटियाँ न उधार लेती हैं ना उधार देती हैं। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में आज का नौजवान फैशन की नकल कर रहा है। फैशन तो तेजी से बदलते हैं और अपना स्थान नये फैशन को दे देते हैं। वह निरंकुश रूप से पैसे को बर्वाद करने वाला हो गया है। अपनी असीमित इच्छाओं को पूरा करने के लिये वह उधार लेता है। इस नकल करने की दौड़ में वह सदा हारता है। वह केवल आज का जीवन व्यतीत करता है और भविष्य की नहीं सोचता।

बुद्धिमानी सादा और कम खर्च का जीवन व्यतीत करने में है। बचाने की आदत सदा वफादार मित्र की तरह उसकी सहायता करेगी। बचाया हुआ पैसा उसको अपने बच्चों के प्रति और वृद्ध माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियां निभाने में सहायता करेगा। वह चिन्तारहित आनन्दमय जीवन व्यतीत करेगा।

मेहनत से कमाने वाला बुद्धिमानी से बचाता है और बुद्धिमानी से खर्च करता है। किसी व्यक्ति को कितना ही अच्छा वेतन मिलता हो परन्तु बचाने की आदत के बिना वह सदा ही सहायता के लिये हाथ फैलायेगा। बचाने की आदत खुशहाल वर्तमान और सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

India – A Land of Festivals (S.S. Exam 2013)

A festival is a celebration of life. Festivals bring peace and joy to the masses. They break the monotony of life. Indian festivals are numerous. They are of three types—national, religious and seasonal.

The first type of festivals, i.e. national festivals are celebrated with great patriotic feelings, the religious festivals are associated with religious feelings of the people. Third ones mark the change of season.

The national festivals include Republic Day, Independence Day, Gandhi Jayanti, etc. These days are declared as national holidays and are celebrated in all parts of the country with a lot of enthusiasm.

The religious festivals of India include Guru Parva, Holi, Lohri, Buddha Purnima, Diwali, Janmashtami, Chath, Navaratri, Eid, Christmas, etc.
The seasonal festivals include Baisakhi, Onam, Pongal, Basant Panchmi, etc.

Festivals also have a negative influence on our society. The bursting of crackers during Diwali pollute the atmosphere. Gambling disturbs public life. During Holi, drunkards brawl in streets. Temples are decorated at the cost of millions of rupees. The money used for such events could be utilized for the economic development of the country.

Festivals should be celebrated with simplicity. They should be celebrated to promote national integration and communal harmony.

भारत-त्यौहारों का देश।

त्यौहार जीवन का समारोह है। त्यौहार सभी लोगों के लिए शान्ति व प्रसन्नता लाते हैं। ये जीवन की नीरसता को समाप्त करते हैं। वे तीन प्रकार के हैं-राष्ट्रीय, धार्मिक और मौसमी।

प्रथम प्रकार के त्यौहार अर्थात् राष्ट्रीय त्यौहार राष्ट्रीय भावना के साथ मनाए जाते हैं। दूसरे प्रकार के त्यौहार धार्मिक भावनाओं से जुड़े हैं। तीसरे प्रकार के त्यौहार मौसम के परिवर्तन को चिन्हित करते हैं।

राष्ट्रीय त्यौहार में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गाँधी जयंती आदि आते हैं। ये सभी दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित किये गए हैं और पूरे ही देश में अति उत्साह से मनाए जाते हैं।

धार्मिक त्यौहारों में गुरू पर्व, होली, लोहड़ी, बुद्ध पूर्णिमा, महावीर जयंती, दशहरा, दिवाली, जन्माष्टमी, छठ, नवरात्रि, ईद, क्रिसमस आते हैं।

मौसमी त्यौहारों में वैशाखी, ओणम, पोंगल, बसंत पंचमी आते हैं। त्यौहारों के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हमारे समाज पर पड़ते हैं। दीपावली पर पटाखों को छुड़ाना पूरे वातावरण को प्रदूषित करते हैं। जूआ खेलकर लोग सार्वजनिक जीवन की शांति भंग कर देते हैं। होली के समय शराबी लोग सार्वजनिक स्थलों पर उपद्रव करते हैं। लाखों-लाखों रूपयों से मंदिरों को सजाया जाता है। इन सब पर हुए खर्चे को देश के आर्थिक उत्थान में उपयोग में लाया जा सकता है।

त्यौहारों को अत्यंत सादगी से मनाया जाना चाहिए। इन त्यौहारों को इस रूप में मनाना चाहिए कि राष्ट्रीय अखण्डता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बना रहे और इनकी वृद्धि होती रहे।

Election Campaign (S.S. Exam 2014)

Elections for the State Assemblies and the Parliament are essential for the survival of Democracy. So the regional and the national political parties hold public rallies to assure the people of better services and facilities. They send their promises and messages through their written election manifesto also. After independence, elections and election campaigns took place very smoothly in a civilized way. But with the passage of time, the anti social and irresponsible elements got the upper hand in most of the political parties.

Instead of talking about their manifestos and their good performances, leaders and spokespersons start mud-slinging on other parties. They think themselves to befool the public for all the coming future and keep their family in power forever. They forget that new generations had come up who understand their scams and crimes very well. They know that most of the political leaders shed crocodile tears and show lip-sympathy.

The emergence of Mr Narendra Modi, the Prime Minister of India is the result of the faith and hope of the public in the new leadership. This show a clear rejection of those who loot the wealth of the public.

चुनाव अभियान

गणतन्त्र को जीवित रखने के लिये विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव अतिआवश्यक हैं। अतः क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टियाँ जन सभायें करती हैं जनता को बेहतर सेवाओं और सुविधाओं के प्रति अश्वस्त करने के लिये। वे अपने वायदों और सन्देशों को अपने चुनावी घोषणापत्र के द्वारा भी जनता तक भेजते हैं। आजादी के बाद चुनाव और चुनावी प्रचार आराम से एक समय ढंग से चलते रहे परन्तु समय के व्यतीत होने के साथ-साथ अधिकांश राजनैतिक दलों में समाज विरोधी और गैर जिम्मेदार लोगों की पकड़ हो गई।

अपने चुनावी घोषणपत्रों के बारे में बात करने के बजाय नेता लोग और उनके प्रवक्ता दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछालना शुरू कर देते हैं। वे अपने आपको ऐसा चतुर समझते हैं कि आने वाले भविष्य में वे जनता को मूर्ख बनाते रहेंगे और अपने वंश को सदा सत्ता में रख सकेंगे। वे भूल जाते हैं कि नई पीढ़ियाँ आ गई हैं जो उनके घोटालों और अपराधों को अच्छी तरह से समझती है। वे जानते हैं कि अधिकांश राजनैतिक दल मगरमच्छ के आँसू बहाते हैं और कहने मात्र की सहानुभूति दिखाते हैं।

माननीय मोदी जी का भारतवर्ष के प्रधानमंत्री के रूप में निकल कर आना जनता की नवीन आशा और विश्वास का परिणाम है। यह स्पष्ट रूप से जनता के धन को लूटने वालों को नकारना है।

Pulse Polio Campaign in India (S. S. Exam 2014)

1. Introduction: Poliomyelitis, generally called polio, starts from inflammation of the backbone. Children up to the age of five years are found vulnerable to the poliovirus. It is the tragic cause of paralysis and bone deformity.

2. The Pulse Polio Immunization campaign: The first PPI programme started in India about twenty years ago. However, 733 polio affected cases were still reported. Out of the first sample of children, only 30-35% of the parents under study showed faith in the campaign. They willingly accepted polio vaccine for their children. The majority of the parents opposed the PPI programme.

3. Major Obstacles: People still have misconceptions about polio vaccine. They are told that the vaccine is anti-religion. The campaigners must convince the people that the PPI polio vaccine is in no way harmful to their children. The vaccine has saved their children from the paralytic effect and bone deformity.

4. How to make the campaign a success: Our duty is to identify these misconceptions and create among such people awareness about the advantages of Pulse Polio Immunization polio vaccine. It is a pity that in spite of intensive and extensive campaigning, we have not been able to convince the people that polio vaccine is for the benefit of their children. In spite of the best efforts of the goverment and other social service organisations, the aim of making India a polio-free nation is a far cry.

1. परिचय- पोलियो मेंलिटिस जो साधारण भाषा में पोलियो कही जाती है इस बीमारी की शुरूआत रीढ़ की हड्डी की सूजन से आरम्भ होती है। पांच वर्ष की आयु तक के बच्चों पर पोलियो का वाइरस भारी पड़ता है। यह बीमारी लकवा और हड्डियों की टेढ़ी-मेढ़ी होने का दर्दनाक कारण है।

2. पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान- समय रहते पोलियो की बीमारी की रोकथाम का अभियान भारतवर्ष में लगभग 20 साल पहले आरम्भ हुआ। अभियान के बावजूद भी 733 बच्चे पोलियों से प्रभावित मिले। बच्चों के पहले सैम्प्लि में से केवल 30-35% व्यक्तियों ने इस अभियान में विश्वास दिखाया। उन्होंने स्वेच्छा से अपने बच्चों के लिये पोलियो वैक्सीन को स्वीकारा। अधिकांश माता-पिता ने इसका (पोलियो वैक्सीन का) विरोध किया।

3. मुख्य रूकावटें-लोगों के मस्तिष्क में अभी भी गलत अवधारणायें हैं। उन्हें बताया जाता है कि पोलियो वैक्सीन धर्म विरोधी है। अभियान कार्यकर्ताओं को ऐसी गलत धारणाओं को रखने वाले लोगों को विश्वस्त करना चाहिये कि पोलियो वैक्सीन किसी भी प्रकार से उनके बच्चों के लिये हानिकारक नहीं है। पोलियो वैक्सीन ने उनके बच्चों को लकवा और टेढ़ी-मेढ़ी हड्डियाँ बन जाने के प्रकोप से बचाया है।

4. अभियान को सफल कैसे बनाया जाये- हमारा यह कर्त्तव्य है कि हम ऐसी गलत धारणाओं वाले लोगों का पता लगायें और उनके अन्दर पोलियो वैक्सीन के लाभों के प्रति जागरुकता पैदा करें। बड़ी दयनीय स्थिति है कि सघने और प्रचार-प्रसार युक्त प्रचार के बावजूद हम लोगों को आश्वस्त नहीं कर पाये कि पोलियो वैक्सीन उनके बच्चों के हित में है। सरकार और अन्य समाज-सेवी संगठनों के अथक प्रयासों के बावजूद भारत को पोलियो मुक्त करना एक स्वप्न जैसा ही है।

Hazards of Using Polythene Bags (S.S. Exam 2015)

Use of polythene bags has become a fashion of our day-to-day life. Oils, milk, butter, biscuits, sweets, confectioneries, groceries, spices and almost all the things of our daily needs are available in polythene pouches. The shop-keepers sell their loose wares and eatables in polythene bags. We do not know that in manufacturing polythene many harmful chemicals are used. These chemicals harm the health of all the living animals, plants and human beings.

The main problem with use of plastic bags is that contents of polythene bags do not remain fresh for a long time. The perishable fruits, dry fruits and other eatable perish before their time. They become unfit for use. If they are used by ignorant people, they fall ill. They invite complex diseases and spoil their good health. The cows and the cattle swallow polythene bags with the foodstuff offered to them. They cannot digest it. They fall ill. Their milk is polluted with the toxin. This toxin directly affects the health of the children and persons who use this milk.

The most horrible fact about polythene is that it is not biodegradable. It means the bacteria underground cannot convert it into particles of clay. It remains buried and destroys the fertility of the soil. When it is burnt, it emits many poisonous gases and pollutes the environment. The ratios of toxic gases increases and life-supporting oxygen decrease.

Some states of our country like Rajasthan have strictly banned the manufacturing and use of polythene bags. Other states too should follow it.

पॉलीथीन के थैलों का प्रयोग हमारे दैनिक जीवन में एक फैशन बन गया है। तेल, दूध, मक्खन, बिस्कुट्स, मिठाईयाँ अन्य टाफियाँ, सब्जियाँ, मसाले और लगभग हमारी दैनिक आवश्यकता की सभी वस्तुएँ पोलीथीन के पाऊचों में उपलब्ध हैं। दुकानदार अपना खुला (अनपैक्ड) सामान और खाने-पीने की अन्य वस्तुओं को पॉलीथीन थैलों में ही बेचते हैं। हम नहीं जानते कि पॉलीथीन को बनाने में बहुत से हानिकारक पदार्थों का प्रयोग होता है। यह रासायनिक तत्व सभी जीवित जगत के प्राणियों के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं-जानवर, पेड़-पौधे और मानव जाति।

प्लास्टिक थैली के प्रयोग करने की मुख्य समस्या है कि प्लास्टिक थैलों में रखी वस्तुएँ एक दीर्घ समय तक ताजा नहीं रहती। जल्दी खराब होने वाले फल, मेवे और खाने पीने की अन्य वस्तुएँ समय से पूर्व खराब हो जाती हैं। वे प्रयोग करने के लायक नहीं रहती। यदि अनजान व्यक्ति उनका प्रयोग करते हैं, वे बीमार हो जाते हैं। वे गंभीर बीमारियों को निमन्त्रण देते हैं तथा अपना स्वास्थ्य खराब कर लेते हैं।

गाय और अन्य पशु पॉलीथीन के थैलों समेत उन खाने की चीजों को निगल जाते हैं जो उन्हें खाने के लिये लोग देते। हैं। वे इस पॉलीथीन को हजम नहीं कर सकते हैं। वे बीमार पड़ जाते हैं। उनका दूध टॉक्सीन पदार्थ से दूषित हो जाता है यह टॉक्सीन सीधे बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और उन सभी व्यक्तियों के स्वास्थ्य को जो इस दूध का प्रयोग करते हैं।

पोलीथीन के विषय में सब से भयंकर सच्चाई यह है कि यह घुलनशील नहीं है। इसका अर्थ यह है कि वैश्विक जीवाणु जो जमीन के अन्दर पाये जाते हैं इसको छोटे-छोटे मिट्टी के कणों में नहीं बदल सकते। यह मिट्टी के अन्दर दबा पड़ा रहता है और मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करता है। जब इस को जलाया जाता है तो यह अनेकों प्रकार की जहरीली गैसों को उत्पन्न करता है और वातावरण प्रदूषित करता है। जहरीली गैसों का अनुपात बढ़ जाता है और प्राणदायिनी ऑक्सीजन का अनुपात कम हो जाता है।

हमारे देश के कुछ राज्यों जैसे राजस्थान ने कठोरता से पॉलीथीन के निर्माण तथा प्रयोग पर रोक लगा दी। दूसरे राज्यों को भी इसका अनुसरण करना चाहिए।

Importance of Newspaper (S. S. Exam 2016)

In this age of information, newspaper is the most powerful tool to express ideas and share information. It is a part and parcel of modern life. It plays a vital role by providing information and creating awareness among people.

There are many advantages of a newspaper. It keeps us informed about the current affairs of the whole world. Without a newspaper, we cannot have a true picture of our surroundings. It also enhances our knowledge. It broadens our vision. It makes us realize that we are living in a dynamic world of knowledge and learning. It is also a source of entertainment for those who love sports, games, cinema, etc. Advertisements are also a very important feature of a newspaper. It contains many advertisements which promote economic activities. Hence it is important not only for information and entertainment but also for promoting economic activities.

In the field of education also, newspaper plays a very important role. It gives us news about foreign countries also. It educates us in many branches of knowledge. We can know about new discoveries and inventions. It also educates us about our rights and duties. Even sitting at our home, we can know what is happening in the world. A newspaper broadens our outlook. It is a very powerful weapon for moulding and directing public opinion.

समाचार पत्र का महत्व। सूचना के इस युग में समाचार पत्र विचारों को व्यक्त करने और सूचना के आदान-प्रदान का एक सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। यह आधुनिक जीवन शैली का एक अभिन्न अंग है। यह लोगों को सूचना प्रदान करके और उनमें जागरुकता लाकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। समाचार पत्र के अनेक लाभ हैं। यह दुनिया भर में घटित होने वाली समसामयिक घटनाओं/विषयों के सम्बन्ध में हमारी जानकारी को बनाये रखता है। बिना समाचार पत्र के हम अपने आस-पास की वास्तविक तस्वीर (हालात) को नहीं जान सकते।

यह हमारे ज्ञान को भी बढ़ाता है। यह हमारे दृष्टिकोण (सोच) को विस्तृत बनाता है। यह (समाचार पत्र) हमें महसूस कराता है कि हम ज्ञान के गतिशील व सक्रिय संसार में रहते हैं। यह उन लोगों के लिये मनोरंजन का भी एक साधन है जो खेल-कूद, सिनेमा आदि पसंद करते हैं। विज्ञापन भी समाचार पत्र का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण हिस्सा (विशेषता) होते हैं। इसमें बहुत से ऐसे विज्ञापन प्रकाशित होते हैं जो कि आर्थिक गतिविधयों को प्रोत्साहित करते हैं। इसलिए यह न सिर्फ सूचना व मनोरंजन के लिये महत्वपूर्ण होता है बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी समाचार पत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमें अन्य देशों से सम्बन्धित खबरें भी उपलब्ध कराता है। यह हमें ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षित करता है। (इसके माध्यम से) हम नवीन खोजों व आविष्कारों के विषय में जान सकते हैं। यह हमें हमारे अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में भी शिक्षित बनाता है। यहाँ तक कि हम अपने घरों में बैठे-बैठे ही यह जान सकते हैं कि दुनिया भर में क्या हो रहा है। समाचार पत्र हमारे नजरिये को वृहद बनाता है। यह जनता के विचारों को परिवर्तित करने व दिशा देने का एक बेहद सशक्त हथियार है।

Role of Family in Our Society (S. S. Exam 2017)

The primary role of a family in society is to foster an environment where children learn skills, values and morals. Families provide initial socialization for children. It shapes their personality, attitude, values and behaviour. Families create structure and stability in the lives of their members. Children also learn about structure, rituals and routines in their families. A family also provides an environment of accountability, where family members learn about the rewards and consequences.

A family is capable enough to leave its impact on the entire society by its positive example. The parents must show love towards their children. They should spend time with them. They should build a good relationship with their children. In order to fulfil its role in society, the family should educate children moral values so that the children will pass on these values to future generations. It will make society a safe and happy place for all people to live and prosper.

The importance of family in our society is incalculable. What we learn in our family, is reflected in our personality. Wherever we move, we carry our family values with us. Infact, our family is responsible for our identity. Our society, and the whole world know us by our actions, not by our intentions.

हमारे समाज में परिवार की भूमिका समाज में किसी भी परिवार की प्रारम्भिक भूमिका होती है एक ऐसे स्वस्थ वातावरण का निर्माण करना जहाँ बच्चे कौशल, संस्कारों व नैतिक मूल्यों को सीखते हैं। परिवार बच्चों को आरम्भिक सामाजिकरण उपलब्ध कराते हैं। परिवार बच्चों के व्यक्तित्व, उनके सोचने के तरीके, उनके संस्कारों/मूल्यों और व्यवहार आदि को आकार प्रदान करता है। परिवार अपने सदस्यों के जीवन को एक संगठित रूप में स्थायित्व प्रदान करते हैं। बच्चे संगठित रूप (ढाँचे), रीति-रिवाजों, व दैनिक क्रिया-कलापों को भी अपने परिवारों में सीखते हैं। परिवार उत्तरदायित्व का एक वातावरण भी उपलब्ध कराता है जहाँ परिवार के सदस्य पुरस्कारों व परिणामों (विभिन्न कार्यों के) के विषय में भी सीखते हैं।

एक परिवार अपने सकारात्मक/अच्छे उदाहरण के कारण सम्पूर्ण समाज को प्रभावित कर सकने में पर्याप्त रूप से सक्षम होता है। माता-पिता को अपने बच्चों के प्रति प्रेम व्यक्त करना चाहिए। उन्हें उनके (बच्चों) के साथ समय व्यतीत करना चाहिये। उन्हें अपने बच्चों के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने चाहिये। समाज में अपनी भूमिका को निभाने के लिये एक परिवार को अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों से शिक्षित करना चाहिये जिससे कि (ये) बच्चे इन मूल्यों (संस्कारों) को भावी पीढ़ियों में पहुँचायें। यह समाज को सभी लोगों के रहने व खुशहाली की अनुभूति करने के लिये एक सुरक्षित और सुखद स्थान बनायेगा।

हमारे समाज में एक परिवार की भूमिका अगणनीय (अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हम जो कुछ भी अपने परिवार में सीखते हैं, वही हमारे व्यक्तित्व में झलकता है। हम जहाँ कहीं भी कदम रखते हैं, अपने परविार से ग्रहण किये हुए मूल्य/संस्कार हमारे साथ चलते हैं। वास्तव में हमारी पहचान के लिये हमारा परिवार उत्तरदायी होता है। हमारा समाज व सम्पूर्ण दुनियाँ हमें हमारे कार्यों से पहचानता है, हमारी इच्छाओं से नहीं।