Rajasthan Board RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 5

RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 5(ii) Textual Questions

Activity 1: Comprehension
A. Say whether the following statements are True or False. Write ‘T’ for true and ‘F’ for false:
1. Environmental purity is needed for total health.
2. The purity of society brings about harmony and unity.
3. Drona never summoned the Pandavas and Kauravas for any test.
4. Yudhishthira found everyone to be pious and pure.
5. Purity has the power to transform even the villains and murderers.
6. Pavaharibaba offered the rest of the food also to the thief.
7. Proud Gautam was humbled by the purity of a simple house-wife and an ordinary man.
8. Nurturing can change the behaviour of human beings as well as animals.
Answer:
1. True
2.True
3. False
4. True
5. True
6. True
7. True
8. True

B. Answer the following questions in about 30-40 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में दीजिए:

Question 1.
In which areas do we need purity?
हमें किन क्षेत्रों में पवित्रता की आवश्यकता होती है?
Answer:
We need purity in all fields of life. Without purity, everything is useless and ugly. We need pure food, pure water, pure air, pure environment, pure love and heart, pure society, pure knowledge, pure thoughts, pure mind and pure speech.

हमें जीवन के हर क्षेत्र में पवित्रता की आवश्यकता होती है। पवित्रता से रहित हर वस्तु बेकार और कुरूप है। हमें पवित्र भोजन, पवित्र जल, पवित्र वायु, पवित्र वातावरण, पवित्र प्रेम और हृदय, पवित्र समाज, पवित्र ज्ञान, पवित्र विचार, पवित्र मन और पवित्र वाणी की आवश्यकता है।

Question 2. Write the importance of purity of the environment.
पर्यावरण की पवित्रता का महत्व लिखिए।
Answer:
The purity of the environment is very essential for overall health. The environment is a quite wide system including air, water, food, society and everything that surrounds us. We need a pure environment for physical and mental health.

सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण की पवित्रता-शुद्धता अति आवश्यक है। वायु, जल, भोजन, समाज और हमें चारों ओर से आवृत्त किये हुए हर वस्तु को सम्मिलित कर पर्यावरण अति विस्तृत तंत्र है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें पवित्र पर्यावरण की आवश्यकता है।

Question 3.
What different tasks were assigned to Yudhishthira and Duryodhana?
युधिष्ठिर व दुर्योधन को कौन से अलग-अलग कार्य सौंपे गए?
Answer:
Drona assigned two different tasks to Yudhishthira and Duryodhana. He asked Yudhishthira to bring a bad person from the society of Hasthinapura. He asked Duryodhana to bring one good person from the same society.

द्रोण ने युधिष्ठिर और दुर्योधन को दो अलग-अलग कार्य सौंपे। उन्होंने युधिष्ठिर को हस्तिनापुर के समाज से एक बुरा व्यक्ति लाने को कहा। उन्होंने दुर्योधन को उसी समाज में से एक अच्छा व्यक्ति लाने को कहा।

Question 4.
“Child, the food is insufficient for you. You may have this also.” What does this statement suggest about Pavaharibaba’s attitude?
”बालक, यह भोजन तुम्हारे लिए अपर्याप्त है। तुम इसे भी लेसकते हो।” यह कथन पावाहरि बाबा के दृष्टिकोण के बारे में क्या बताता है?
Answer:
This statement suggests that the heart and mind of Pavaharibaba were completely pure. He did not see a thief in the thief. He saw a hungry man in the thief who needed food. He knew that it was his duty to feed a hungry man.

यह कथन यह प्रकट करता है कि पावाहरि बाबा के हृदय और मन पूर्णत: पवित्र थे। उन्होंने चोर में एक चोर (के हृदय) को नहीं देखा। उन्होंने उस चोर में एक भूखा आदमी देखा जिसे भोजन की आवश्यकता थी। वह जानते थे कि भूखे आदमी को भोजन कराना उनका कर्तव्य है।

Question 5.
How did the thief react when Pavaharibaba offered him more food?
जब पावाहरि बाबा ने चोर को और अधिक भोजन दिया तो चोर ने कैसा व्यवहार किया?
Answer:
When Pavaharibaba offered more food to the thief, he was wonder-struck at the affectionate words of Baba. There was a change in him. He prostrated himself before the saint and begged his pardon.

जब पावाहरि बाबा ने उस चोर को और अधिक भोजन प्रदान किया तो वह बाबा के स्नेहपूर्ण शब्दों को सुनकर आश्चर्यचकित रह गया। उस चोर में परिवर्तन आ गया। उसने उस सन्त के समक्ष दण्डवत् प्रणाम किया और उनसे क्षमा माँगी।

Question 6.
Mention the manner of Gautam’s tapasya?
गौतम की तपस्या की विधि बताइए।
Answer:
Gautam Rishi observed rigorous austerities for several years. He did not eat and drink. He stood on his one foot. He controlled his senses and meditated on the chosen deity.

गौतम ऋषि ने कई वर्ष तक कठोर तपस्या की। उन्होंने न खाया, न पिया। वह अपनी एक टांग पर खड़े रहे। उन्होंने अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण किया और इष्ट देवता (अपने इष्ट देवता) का ध्यान किया।

Question 7.
“I was serving my husband and feeding my children” What does this statement suggest about the lady’s attitude towards duty?
”मैं अपने पति की सेवा कर रही थी और बच्चों को भोजन करा रही थी।” यह कथन कर्त्तव्य के प्रति स्त्री के दृष्टिकोण के विषय में क्या व्यक्त करता है?
Answer:
This statement suggests that the lady was very sincere towards her duty. She considered that work is worship. It is true that one who is sincere in service and faithful in doing duties rises high.

यह कथन व्यक्त करता है कि वह स्त्री अपने कर्तव्य के प्रति बहुत निष्ठावान थी। वह मानती थी कि कर्म ही पूजा है। यह सत्य है कि जो अपने कार्य के प्रति निष्ठा तथा कर्तव्य पालने में आस्था रखता है वह ऊँचा उठता है।

Question 8.
“The man was bright with purity”. How does the author bring this out?
“वह आदमी पवित्रता से प्रकाशित था।” लेखक इस तथ्य को कैसे स्पष्ट करता है?
Answer:
The author says that the test of genuine purity is in its metamorphosing ability. The man seemed neither well educated nor a saint. But Rishi Gautam was completely transformed in his presence. So the man was bright with purity.

लेखक कहता है कि यथार्थ पवित्रता की परीक्षा उसकी परिवर्तन करने की क्षमता से होती है। वह आदमी न तो सुशिक्षित प्रतीत होता था और न कोई सन्त! लेकिन उसकी उपस्थिति में ऋषि गौतम पूर्णतः बदल गए। इसलिए वह आदमी पवित्रता से प्रकाशित था।

Question 9.
How was Gautam’s ego purified?
गौतम का अहंकार कैसे पवित्र हुआ?
Answer:
Gautam’s ego was purified by a pious lady and a pious man. Gautam was surprised to meet these two persons. They knew all that he did and thought in his mind. So his ego was purified.

एक पवित्र स्त्री और एक पवित्र पुरुष ने गौतम के अहंकार को पवित्र कर दिया। गौतम इन दो व्यक्तियों से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए। वे वह सब कुछ जानते थे जो गौतम करते थे और अपने मन में सोचते थे। इस प्रकार गौतम का अहंकार पवित्र हो गया।

Question 10.
Who is pure according to the author?
लेखक के अनुसार पवित्र कौन है?
Answer:
According to the author, the person whose mind is pure is pure. The purity of mind makes our vision, words and deeds pure. Such a person has the power to transform a bad man into a good man.

लेखक के अनुसार वह व्यक्ति पवित्र है जिसका मन पवित्र है। मन की पवित्रता हमारे विचार, वाणी और कर्मों को पवित्र कर देती है। ऐसा व्यक्ति किसी बुरे व्यक्ति को अच्छे व्यक्ति में परिवर्तित करने की शक्ति (क्षमता) रखता है।

Question 11.
What is the importance of pure atmosphere?
पवित्र वातावरण का क्या महत्व है?
Answer:
There is great importance of pure atmosphere in making a man physically and mentally pure. One who is brought up in pure atmosphere becomes pure. Impure atmosphere contaminates even a pure man.

व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध-पवित्र-बनाने में पवित्र वातावरण का बहुत महत्व है। जिसका पालन-पोषण पवित्र वातावरण में होता है, वह पवित्र हो जाता है। अपवित्र वातावरण पवित्र मनुष्य को भी अपवित्र कर देता है।

C. Answer the following questions in about 125 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए।

Question 1.
What are the merits of purity? (S. S. Exam 2018)
पवित्रता के गुण क्या हैं?
OR
Describe purity in different areas and their merits.
विभिन्न क्षेत्रों में पवित्रता एवं उसके गुणों का वर्णन कीजिये।
Answer:
Purity is a divine gift for mankind on this earth. The purity of the body promotes our physical health. The purity of thought promotes our morality and purity of mind provides us with mental peace. The purity of heart promotes unselfish love for humanity. The purity of action develops a sincere and unselfish service. The purity of society develops the spirit of harmonious unity. The purity of the environment provides us with soul-elevating serenity. The purity of mind makes our vision, words and deeds pure. Purity makes a man so great and powerful that he can change a bad one into a good man. Purity provides us spiritual power and lightens our brain. Purity is the key to all success. It establishes harmony and unity in social life. Purity itself has the power to make people pure.

पवित्रता इस पृथ्वी पर मानवता के लिए एक दैवी उपहार है। शरीर की पवित्रता हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाती है। विचारों की पवित्रता हमारी नैतिकता को बढ़ाती है और मन की पवित्रता हमें मानसिक शान्ति प्रदान करती है। हृदय की पवित्रता मानवता के लिए निस्वार्थ प्रेम को बढ़ावा देती है। कार्य की पवित्रता सच्ची और निस्वार्थ सेवा का विकास करती है। समाज की पवित्रता सामंजस्यपूर्ण एकता की भावना का विकास करती है। पर्यावरण की पवित्रता हमें आत्मोत्थान हेतु शान्ति प्रदान करती है। मस्तिष्क की पवित्रता हमारी दृष्टि, वाणी तथा कार्यों को पवित्र बनाती है। पवित्रता किसी व्यक्ति को इतना महान और शक्तिशाली बना देती है कि वह एक बुरे आदमी को अच्छे आदमी में बदल सकता है। पवित्रता हमें आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है और हमारे मस्तिष्क को प्रकाशित करती है। पवित्रता सभी सफलताओं की कुंजी है। यह सामाजिक जीवन में सामंजस्य एवं एकता स्थापित करती है। पवित्रता में स्वयं ही लोगों को पवित्र बनाने की शक्ति होती है।

Question 2.
‘As is the mind so is the vision.’ Explain it with reference to the Mahabharata episode cited by the writer.
‘जिस प्रकार का मन होता है, वैसी ही दृष्टि हो जाती है।’ लेखक के द्वारा उधृत महाभारत की घटना के संदर्भ में इस कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer:
Once Drona Summoned the Pandavas and the Kauravas for a test. The eldest of the Pandavas, Yudhishthira, was asked to fetch an evil man and similarly, the eldest of the Kauravas, Duryodhana, was asked to fetch a good man from the society of Hasthinapur. Yudhishthira being pure hearted, found everyone to be pious and pure and Duryodhana being impure minded, found everyone evil and impure. Therefore neither Yudhishthira could find out an evil man nor could Duryodhana find out a good man from the society of Hasthinapur. Both of them failed in their mission. The proverb, ‘as is the mind, so is the vision’ holds good in both the cases. All things are good to the good and all things are bad to the bad.

एक बार द्रोणाचार्य ने पाण्डवों और कौरवों को परीक्षा के लिए बुलाया। पाण्डवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर को एक बुरे व्यक्ति को व कौरवों में सबसे बड़े दुर्योधन को एक अच्छे व्यक्ति को हस्तिनापुर के समाज में से ढूँढ़कर लाने को कहा गया। युधिष्ठिर ने शुद्ध-हृदय व्यक्ति होने के कारण सभी को पवित्र समझा। इसी तरह से दुर्योधन ने अपवित्र (बुरे) विचारों वाला व्यक्ति होने के कारण सबको खराब समझा। इसलिए न तो युधिष्ठिर हस्तिनापुर के समाज से एक बुरा आदमी खोज सका और न दुर्योधन एक अच्छा आदमी खोज सका। दोनों ही अपने-अपने लक्ष्य में असफल रहे। जिस प्रकार का मन होता है, वैसी ही दृष्टि हो जाती है, यह कहावत दोनों ही के मामलों में खरी उतरती है। अच्छों के लिए सभी चीजें अच्छी होती हैं और बुरों के लिए सब कुछ बुरा ही हुआ करता है।

Question 3.
Describe the significance of the crane episode.
सारस वाली घटना के महत्व का वर्णन कीजिए।
Answer:
The crane episode is related to Gautam rishi who wanted to obtain certain powers through tapasya. He observed rigorous austerities for a long period. One day the rishi was having a holy dip in the river when the droppings of a crane, sitting among the branches of a tree, fell on his head. The rishi got angry and killed the bird with his angry gaze. This event created pride in Gautam. After this, he went to a nearby village to have alms. When the house lady got late to come out, Gautam became angry. At this, she said that she was not a crane. Hearing this Gautam got surprised and humbled. Then she sent him to a man who was also pure and simple. That lady and that pious man rooted out Gautam’s pride and since then Rishi Gautam became simple and gentle.

सारस वाली घटना गौतम ऋषि से सम्बन्धित है जो तपस्या द्वारा कुछ शक्तियाँ प्राप्त करना चाहते थे। उन्होंने एक लम्बी अवधि तक कठोर संयम (सदाचार) का पालन किया। ऋषि एक दिन नदी में पवित्र स्नान कर रहे थे कि पेड़ की शाखाओं पर बैठे हुए एक सारस की बीट ऋषि के सिर पर गिर गई । ऋषि नाराज हो गए। और उन्होंने अपने क्रोधपूर्ण घूरने (एकटक दृष्टि) से पक्षी को मार डाला। इस घटना ने गौतम में घमण्ड पैदा कर दिया। इसके उपरान्त वह समीप के ग्राम में भिक्षा के लिए गये। जब गृहस्वामिनी को आने में देर हो गई तो गौतम नाराज हो गये। इस पर उसने कहा कि वह सारस नहीं है। यह सुनकर गौतम आश्चर्यचकित और अपमानित सा हो गये। तब उस स्त्री ने गौतम को एक व्यक्ति के पास भेजा जो पवित्र और साधारण था। उस स्त्री और उस पवित्र व्यक्ति ने गौतम के घमण्ड को नष्ट कर दिया और तब से ऋषि गौतम सरल और विनम्र हो गये।

Question 4.
Why are Samskaras important in our life?
संस्कार हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण क्यों होते हैं?
Answer:
Samskaras are important in our life because these wash off our impurities and bad habits and put the base on which a wall of virtues could be erected. There are some weaknesses present even in a very good boy or girl. Samskaras are in fact psychological and religious treatment to root out the weaknesses and to implant good thoughts and views. When a parrot if trained properly can imitate the human voice, then why can a human child not become more perfect and efficient through Samskaras? Therefore our forefathers have designed sixteen Samskaras to make a man a true man, a pure man. It is a fact that virtues enable a person to live a quality life. And qualities of life come through psychological and religious treatment. That’s why Samskaras are important in our life.

संस्कार हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ये हमारी अपवित्रताओं और बुरी आदतों को धो डालते हैं और ऐसे आधार को रखते हैं जिस पर सद्गुणों की दीवार खड़ी की जा सके। एक बहुत अच्छे लड़के या लड़की में भी कुछ कमियाँ होती हैं। संस्कार यथार्थ में उन कमियों को दूर करने एवं अच्छे विचारों को स्थापित करने के मनोवैज्ञानिक एवं धार्मिक उपचार हैं। जब एक तोता यदि भली-भाँति प्रशिक्षित हो जाये तो एक मनुष्य की आवाज़ की नकल कर सकता है तो संस्कारित होकर एक मनुष्य का बालक और अधिक योग्य और सक्षम क्यों नहीं हो सकता? इसीलिए हमारे पूर्वजों ने मनुष्य को सच्चा मनुष्य, पवित्र मनुष्य बनाने के लिए सोलह संस्कारों की रूपरेखा बनाई है। यह एक तथ्य है कि सद्गुण ही मनुष्य को उत्कृष्ट जीवन जीने हेतु सक्षम बनाते हैं । और जीवन के गुण मनोवैज्ञानिक और धार्मिक उपचारों के माध्यम से ही पनपते हैं। यही कारण है कि संस्कार हमारे जीवन में अति महत्त्वपूर्ण हैं।

Question 5.
How does bringing up make all the difference in shaping lives? Illustrate with the help of the parrots’ episode.
पालन-पोषण किस प्रकार जीवन को आकृति देने में अन्तर पैदा कर देता है? तोतों वाली घटना की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
Answer:
The method of bringing up and the atmosphere available around greatly influence the kid’s life. One who is brought up in a peaceful and civilized atmosphere becomes gentle and civilized while the other who is brought up in an uncivilized atmosphere becomes uncivilized. It can be well understood with the help of parrot episode. There were two parrots born together from the same mother. One of them was taken away by a hunter while the other one was taken by a scholar. One who was brought up by the hunter learnt the vulgar slang while the one brought up by the scholar learnt to speak with softness, refinement and culture. This was due to the way of bringing up and the atmosphere available around. It is a crystal clear fact that Samskaras and environment influence people very much.

पालन-पोषण करने की विधि एवं आस-पास का वातावरण बच्चे के जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं। वह जिसकी पालन-पोषण शान्त और सभ्य वातावरण में होता है, सभ्य और विनम्र बन जाता है जबकि कोई दूसरा जिसका पालन-पोषण असभ्य वातावरण में होता है, असभ्य बन जाता है। इसे तोतों वाली घटना से अच्छी प्रकार समझा जा सकता है। एक ही माँ से एक साथ जन्मे दो तोते थे। उनमें से एक को एक शिकारी ले गया जबकि दूसरे को एक विद्वान व्यक्ति ले गया। वह जिसका पालन-पोषण शिकारी ने किया, गन्दी और असभ्य भाषा बोलना सीख गया जबकि दूसरा जिसका पालन विद्वान के यहाँ हुआ, कोमलता, शिष्टता और सभ्यता के साथ बोलना सीख गया। यह सब उनके पालन-पोषण करने की विधि और आस-पास उपलब्ध वातावरण के कारण था। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि व्यक्ति के ऊपर उसके संस्कारों और आस-पास के वातावरण का बहुत ही ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

Question 6.
Justify the title of the lesson, ‘Purity is Power’.
‘पवित्रता ही शक्ति है’ पाठ के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
Answer:
‘Purity is Power’ is a quite appropriate title of this lesson. The total theme of the lesson moves around the kinds and importance of purity. In the beginning, the lesson explains the types of purity. The purity of body, purity of thoughts, purity of words, purity of mind, purity of environment etc. are different kinds of purities. Along with the types of purity, the effects of these different purities have been mentioned. Apart from this, it has been illustrated with examples from epics that what happens when a person becomes pure in mind, words and deeds. A pure person becomes so powerful that he can transform a bad man into a good one. All these things signify that the title of this lesson ‘Purity is Power’ is quite appropriate. Purity strengthens soul and body.

‘पवित्रता ही शक्ति है’ पाठ का यह शीर्षक बिल्कुल उचित है। पाठ की सम्पूर्ण कथावस्तु पवित्रता के प्रकार और महत्व के आस-पास घूमती है। सर्वप्रथम यह बताया गया है कि पवित्रता कितने प्रकार की होती है। शरीर की पवित्रता, विचारों की पवित्रता, वाणी की पवित्रता, मन की पवित्रता, पर्यावरण की पवित्रता आदि अनेक प्रकार पवित्रताएँ हैं। पवित्रता के प्रकारों के साथ-साथ इन विभिन्न प्रकार की पवित्रताओं के प्रभावों या परिणामों को बताया गया है। इसके अलावा, महाकाव्यों से उदाहरण लेकर यह स्पष्ट किया गया है कि जब कोई व्यक्ति मन, वाणी और कर्म से पवित्र हो जाता है तो क्या होता है। एक पवित्र व्यक्ति इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह एक बुरे व्यक्ति को अच्छे व्यक्ति में बदल सकता है। ये सभी चीजें यह स्पष्ट करती हैं कि इस पाठ का शीर्षक ‘पवित्रता ही शक्ति है’ बिल्कुल उचित है। पवित्रता आत्मा और शरीर दोनों को शक्तिशाली बनाती है।

RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 5(ii) Additional Questions

A. Answer the following questions in about 30-40 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में दीजिए:

Question 1.
What do we want for good health?
हम अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या चाहते हैं?
Answer:
For good health, we want pure food, pure water, pure air, pure surroundings and environment, pure love and care, and pure society. It is because purity promotes health and strengthens us.

अच्छे स्वास्थ्य के लिए हम पवित्र भोजन, पवित्र जल, पवित्र वायु, पवित्र वातावरण, पवित्र प्रेम और देखभाल तथा पवित्र समाज चाहते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पवित्रता स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करती है और हमें मजबूत बनाती है।

Question 2.
What is injurious to health and why?
स्वास्थ्य के लिए क्या हानिकारक है और क्यों?
Answer:
Impurity is injurious to health. It is because impurity creates diseases and toxins inside the body and mind. Everyone hates impurity because complications arise from it and it gradually makes us weak physically and mentally.

अपवित्रता या अशुद्धि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अपवित्रता हमारे शरीर और मन के अन्दर रोग और विषैले तत्व पैदा करती है। अपवित्रता से प्रत्येक व्यक्ति घृणा करता है क्योंकि इससे जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं और यह हमें धीरे-धीरे शरीर और मन से कमजोर बनाती है।

Question 3.
What are the different kinds of purities? Describe.
विभिन्न प्रकार की पवित्रताएँ क्या हैं? वर्णन कीजिए।
Answer:
Physical health is the purity of the body. Unsullied truth is the purity of speech. Unselfish love is the purity of heart. The righteous reason is the purity of thought and wholesome peace is the purity of mind. Unselfish service is the purity of action.

शारीरिक स्वास्थ्य शरीर की पवित्रता है। निष्कलंक सत्य वाणी की पवित्रता है और नि:स्वार्थ प्रेम हृदय की पवित्रता है। न्यायसंगत तर्क विचार की पवित्रता है। पूर्ण शांति मन की पवित्रता है। नि:स्वार्थ सेवा कर्म की पवित्रता है।

Question 4.
How does ‘purity’ help a man? (Sample Paper 2018)
‘पवित्रता’ मनुष्य की किस प्रकार सहायता करती है?
Answer:
Purity is a divine gift for mankind. It can purify an impure person. Evils run away in the presence of purity as darkness disappears in the presence of the sunlight. Fools, villains and criminals become wise, gentle and obedient before a pure man.

पवित्रता मानवता के लिए एक दैवी उपहार है। यह एक अपवित्र मानव को पवित्र कर सकती है। जैसे सूर्य के प्रकाश में अंधकार गायब हो जाता है उसी प्रकार पवित्रता के सामने बुराइयाँ भाग जाती हैं। मूर्ख, दुष्ट व अपराधी प्रवृत्ति के लोग पवित्र आत्मा वाले व्यक्ति के सम्मुख बुद्धिमान, अच्छे और आज्ञाकारी व्यक्ति बन जाते है।

Question 5. How did Drona test the purity of Yudhishthira and Duryodhana?
द्रोण ने युधिष्ठिर और दुर्योधन की पवित्रता की परीक्षा कैसे ली?
Answer:
Acharya Drona asked Yudhishthira to bring a bad man from the society of Hasthinapur and asked Duryodhana to bring a good man from the same society. It was the test taken by Drona to see the amount of purity in them.

आचार्य द्रोण ने युधिष्ठिर से हस्तिनापुर के समाज में से एक बुरा आदमी लाने के लिए कहा और दुर्योधन से उसी समाज में से एक अच्छा आदमी लाने के लिए कहा। यह उनके अन्दर पवित्रता की मात्रा को जानने हेतु द्रोण द्वारा ली गई परीक्षा थी।

Question 6.
Could Duryodhana find out a good man from the society of Hasthinapur? If not, why?
क्या दुर्योधन हस्तिनापुर के समाज में से एक अच्छा आदमी खोजकर ला सका? यदि नहीं, तो क्यों?
Answer:
Duryodhana could not find out a good man from the society of Hasthinapur. It was because the heart and mind of Duryodhana were impure. It is a fact that as is the mind, so is the vision.

दुर्योधन हस्तिनापुर के समाज में से एक अच्छा आदमी खोज कर नहीं ला सका। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दुर्योधन के हृदय और मन अपवित्र थे। यह सत्य है कि जैसा मन होता है वैसी ही दृष्टि होती है।

Question 7.
What are the powers of purity?
पवित्रता की क्या शक्तियाँ हैं?
Answer:
Purity is a very powerful virtue. It can purify an impure person. Evils run away in the presence of purity as darkness disappears in the presence of sunlight. Fools, villains and criminals become gentle and obedient before a pure man.

पवित्रता हमारा बहुत शक्तिशाली गुण है। यह अपवित्र व्यक्ति को पवित्र कर सकता है। पवित्रता की उपस्थिति में बुराइयाँ भाग जाती हैं जैसे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अंधकार गायब हो जाता है। मूर्ख, दुष्ट और अपराधी किसी पवित्र व्यक्ति के समक्ष विनम्र और आज्ञाकारी हो जाते हैं।

Question 8.
Why did Pavaharibaba run after the thief?
पावहरि बाबा चोर के पीछे क्यों दौड़े?
Answer:
Pavaharibaba ran after the thief because he wanted to offer him some more food. Baba was pure and pious and he thought the thief to be a hungry man who had come in with the intention of food.

पावाहरि बाबा चोर के पीछे भागे क्योंकि वे उसको कुछ अधिक भोजन देना चाहते थे। बाबा शुद्ध और पवित्र थे, उन्होंने चोर को एक भूखा आदमी समझा जो भोजन की इच्छा से अन्दर आया था।

Question 9.
Why did the thief prostrate before the saint?
चोर ने सन्त के आगे दण्डवत्-प्रणाम क्यों किया?
Answer:
When Pavaharibaba offered him some more food instead of scolding him and told him to eat that food with happiness, the thief melted and changed. Baba’s purity transformed him and he prostrated before the saint.

जब पावाहरि बाबा ने उसे डाँटने की बजाय और अधिक भोजन प्रदान किया और प्रसन्नतापूर्वक उस भोजन को खाने को कहा तो चोर का हृदय पिघल गया और वह बदल गया। बाबा की पवित्रता ने उसे बदल दिया और उसने सन्त के सामने दण्डवत्-प्रणाम किया।

Question 10.
What is the test of genuine purity?
यथार्थ पवित्रता की परीक्षा क्या है?
Answer:
The test of genuine purity is in its metamorphosing ability. If a person is pure in mind, words and deeds, he has the power to transform a bad man into a good one. All evil turns into goodness in the presence of a truly pure person.

यथार्थ पवित्रता की परीक्षा उसकी परिवर्तन करने की क्षमता से होती है। यदि कोई व्यक्ति मन, वचन और कर्म से पवित्र है तो उसके पास एक बुरे आदमी को अच्छे आदमी में बदलने की शक्ति होती है। एक वास्तविक रूप से पवित्र व्यक्ति के सामने सारी बुराई अच्छाई में परिवर्तित हो जाती है।

Question 11.
Who was Gautam and what did he think after killing the bird by his stare?
गौतम कौन थे और उन्होंने अपनी दृष्टि से पक्षी को मारकर क्या सोचा?
Answer:
Gautam was a Rishi. Once he stared at a bird (crane) with anger and that bird fell down dead. At this, he thought himself very powerful and a feeling of pride developed in him.

गौतम एक ऋषि थे। एक बार उन्होंने एक पक्षी (सारस) को क्रोधपूर्ण नजर से उसकी ओर देखा और वह पक्षी मृत होकर नीचे गिर पड़ा। इस पर उन्होंने स्वयं को बहुत शक्तिशाली समझा और उनके अन्दर घमंड की भावना विकसित हो गई।

Question 12.
Who rooted out the whole pride of Rishi Gautam?
गौतम ऋषि का सम्पूर्ण घमण्ड किसने नष्ट किया?
Answer:
An ordinary housewife who served her husband and children well considering her work as worship and an ordinary man who did his duty honestly rooted out the pride of Rishi Gautam.

एक सामान्य गृहिणी ने जो अपने पति और बच्चों की सेवा अपने कार्य को पूजा मानकर करती थी तथा एक सामान्य आदमी ने जो अपने कर्तव्य का पालन सचाई से करता था, गौतम ऋषि को घमण्ड नष्ट किया।

Question 13.
What kind of power did the lady and the man have that changed Gautam from an egoist to a gentleman?
उस महिला और आदमी के अन्दर किस प्रकार की शक्ति थी कि जिससे उन्होंने गौतम ऋषि को एक घमण्डी से विनम्र व्यक्ति बना दिया?
Answer:
The lady and the man had the power of purity. Both were pure and pious at heart and mind. They were not very learned and did not live the life of austerity. But honesty and purity in work had made them so powerful.

उस महिला और आदमी के अन्दर पवित्रता की शक्ति थी। दोनों के हृदय और मन शुद्ध और पवित्र थे। वे कोई बड़े विद्वान नहीं थे और न तप का जीवन जीते थे। लेकिन कर्म के प्रति ईमानदारी तथा पवित्रता ने उनको इतना शक्तिशाली बना दिया था।

Question 14.
What kind of person is pure and what ability does he have?
किस प्रकार का व्यक्ति पवित्र होता है और उसके पास क्या क्षमता होती है?
Answer:
According to the author, such a person is pure who is sincere in service, faithful in doing duties and loves without selfishness. Such a person has a metamorphosing ability. His purity can change evil into goodness.

लेखक के अनुसार वह व्यक्ति पवित्र है जो सेवा करने में निष्ठा रखता है, कर्तव्यपालन के प्रति वफादार है और नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करता है। ऐसे व्यक्ति के अन्दर परिवर्तन करने वाली क्षमता होती है। उसकी पवित्रता बुराई को अच्छाई में परिवर्तित कर सकती है।

Question 15.
If the inborn nature of a child is a little impure, can we make him/her pure? If yes, how?
यदि किसी बच्चे के जन्मजात स्वभाव में कुछ अपवित्रता है तो क्या हम उसे पवित्र बना सकते हैं? यदि हाँ तो कैसे?
Answer:
Yes, if the inborn nature of a child is a little impure, we can rectify it with the help of proper nurture. Proper training in a proper atmosphere washes away all impurities and develops great character.

हाँ, यदि किसी बच्चे के जन्मजात स्वभाव में कुछ अपवित्रता है तो हम उसे उचित पालन-पोषण द्वारा ठीक कर सकते हैं। अच्छे वातावरण में उचित प्रशिक्षण सभी प्रकार की अपवित्रताओं को मिटा देता है और महान चरित्र का विकास करता है।

Question 16.
‘Through training, man becomes a man’. What does this statement mean?
‘प्रशिक्षण द्वारा, मनुष्य मनुष्य बनता है। इस कथन का क्या तात्पर्य है?
Answer:
When a man is born, he inherits some weaknesses and impurities resembling with animals. But through proper training or Samskaras, the impure legacy is washed off and the latent purity in man is made to shine.

जब कोई मनुष्य पैदा होता है तो वह जानवरों से मिलती-जुलती कुछ कमजोरियों और अपवित्रताओं को लेकर जन्मता है। लेकिन उचित प्रशिक्षण या संस्कारों के माध्यम से उसकी अपवित्र विरासत धुल जाती है और मनुष्य के अन्दर गुप्त रूप से विद्यमान पवित्रता चमकने लगती है।

Question 17.
How can you prove that proper training or samskaras remove the impurities of a human child? The answer according to the lesson ‘Purity is Power’.
आप कैसे सिद्ध कर सकते हैं कि उचित प्रशिक्षण और संस्कार मानव शिशु की अपवित्रताओं को मिटा देते हैं? ‘पवित्रता ही शक्ति है’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
Answer:
If dogs of streets with dirty habits are brought up properly, they begin to behave methodically and decently. It is obviously possible that the most refined species i.e. humans can be made pure through training or Samskaras.

यदि गन्दी आदतों से युक्त गलियों के कुत्तों की उचित प्रकार से देख-रेख की जाती है तो वे सभ्य और सुन्दर ढंग से व्यवहार करने लगते हैं। तो फिर यह तो स्पष्ट रूप से सम्भव है कि सर्वाधिक परिष्कृत प्रजाति अर्थात् मनुष्यों को प्रशिक्षण या संस्कारों द्वारा पवित्र किया जा सकता है।

B. Answer the following questions in about 125 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिएः

Question 1.
What kinds of purities do we long for and how can we attain them?
हम किस प्रकार की पवित्रताओं की आकांक्षा रखते हैं और उन्हें कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
Answer:
We long for many kinds of purities. A meaningful life can’t even be imagined in the absence of purity. We want purity of food, water and air. We want the purity of the environment and society. We want the purity of heart and love. We need purity of mind. We need all these purities for good physical and mental health. We can attain the purity of the body through physical health, purity of speech through unsullied truth, purity of heart through unselfish love, purity of thoughts through righteous reason, purity of mind through wholesome peace, purity of action through sincere and unselfish service, purity of society through harmonious unity and purity of environment through soul-elevating serenity.

हम अनेक प्रकार की पवित्रताओं की आकांक्षा रखते हैं। पवित्रता के अभाव में सार्थक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हम भोजन, जल और वायु की पवित्रता चाहते हैं। हम पर्यावरण और समाज की पवित्रता चाहते हैं। हम हृदय और प्रेम की पवित्रता चाहते हैं। हमें मन की पवित्रता की आवश्यकता है। इन सभी प्रकार की पवित्रताओं की आवश्यकता हमें अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए होती है। हम शारीरिक स्वास्थ्य के द्वारा शरीर की पवित्रता, निष्कलंक सत्य द्वारा वाणी की पवित्रता, नि:स्वार्थ प्रेम द्वारा हृदय की पवित्रता, न्यायसंगत तर्क द्वारा विचारों की पवित्रता, शरीर और मन पर अच्छा प्रभाव डालने वाली शांति द्वारा मन की पवित्रता, निष्ठापूर्ण और नि:स्वार्थ सेवा द्वारा कर्मों की पवित्रता, झगड़ों से मुक्त एकता द्वारा समाज की पवित्रता तथा आत्मोत्थान करने वाली शांति द्वारा पर्यावरण की पवित्रता प्राप्त कर सकते हैं।

Question 2.
How did Acharya Drona test the state of mind of Yudhishthira and Duryodhana? Explain.
आचार्य द्रोण ने युधिष्ठिर और दुर्योधन के मन की अवस्था की परीक्षा कैसे की? व्याख्या कीजिए।
Answer:
Drona tested the state of mind of Yudhishthira and Duryodhana on the basis of concept “As is the mind, so is the vision.” Acharya asked Yudhishthira to bring a bad man from the society of Hasthinapura and asked Duryodhana to bring a good man from the same society. Yudhishthira could not find out even a single bad man because he was himself pure. His mind was pure and whoever he saw, seemed pure to him. Likewise, Duryodhana too could not find out even a single good man from society. It was because he was impure and he saw impurity in everyone. In this way, Drona tested the state of mind of Yudhishthira and Duryodhana. He came to know that Yudhisthira was pure at heart and Duryodhana had an impure heart.

“जैसा मन वैसी दृष्टि (विचार)’ अवधारणा के आधार पर द्रोण ने युधिष्ठिर और दुर्योधन के मन की अवस्था की परीक्षा की। आचार्य ने युधिष्ठिर से हस्तिनापुर के समाज में से एक बुरा व्यक्ति लाने के लिए कहा और दुर्योधन से उसी समाज में से एक अच्छा आदमी खोज कर लाने के लिए कहा। युधिष्ठिर एक भी बुरा आदमी खोजकर नहीं ला सका क्योंकि वह स्वयं पवित्र था। उसका मन पवित्र था और उसने जिस किसी को भी देखा वह उसे पवित्र ही प्रतीत हुआ। इसी प्रकार दुर्योधन भी एक भी अच्छी आदमी उसी समाज में से न खोज सका। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह अपवित्र था और उसे प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर अपवित्रता दिखाई देती थी। इस प्रकार द्रोण ने युधिष्ठिर और दुर्योधन के मन की अवस्था की परीक्षा की। उन्हें पता चल गया कि युधिष्ठिर का हृदय पवित्र था और दुर्योधन का हृदय अपवित्र था।

Question 3.
Who was Pavaharibaba? How did he treat a thief? Describe.
पावाहरि बाबा कौन थे? उन्होंने एक चोर के साथ कैसे व्यवहार किया? वर्णन कीजिए।
Answer:
Pavaharibaba was a saint. He was pure and pious by heart and soul. He lived a very simple life. One day, when he was asleep, a thief entered his dwelling place and ran away with a vessel containing food. The saint woke up and he saw the running thief. Baba picked up the remaining two vessels containing boiled vegetables and curd. He ran after the thief, approached him and told him with love, “Child, the food is insufficient for you. You may have this also. Please sit and eat without hurry.” When the thief heard these words full of love, he melted. He prostrated before the saint and begged pardon. In this way, the purity of mind and heart of baba changed the mentality of the thief.

पावाहरि बाबा एक सन्त थे। वह पूरी तरह से और पवित्र थे। वह एक अति साधारण जीवन जीते थे। एक दिन जब वह सोये हुए थे तो एक चोर ने उनके निवासस्थान में प्रवेश किया और भोजन के एक बर्तन को लेकर भागा। सन्त जाग गए और चोर को भागते हुए देखा। बाबा ने उबली हुई सब्जी और दही वाले शेष दो बर्तनों को उठाया। वे चोर के पीछे दौड़े, उसके समीप पहुँचे और उससे प्रेम से कहा “बच्चे, यह भोजन तुम्हारे लिए अपर्याप्त है। तुम इसे भी ले सकते हो। कृपया बैठो और आराम से खाओ।” जब चोर ने इन प्रेमपूर्ण शब्दों को सुना तो वह पिघल गया। उसने सन्त के सामने दण्डवत् प्रणाम किया और क्षमा माँगी। इस प्रकार बाबा के मन और हृदये की पवित्रता ने चोर की मानसिकता को बदल दिया।

Activity 2: Vocabulary
Rewrite each of the following sentences correctly replacing the word(s) in bold letters by the word given in brackets:
मोटे अक्षरों में दिये गए शब्दों को उनके सामने कोष्ठकों में दिये गए शब्दों द्वारा विस्थापित करके निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य को ठीक करके पुनः लिखिए:
Question 1.
We yearn for a pure heart. (purity)
Answer:
We yearn for the purity of heart.

Question 2.
Impurities are injurious to health. (injury)
Answer:
Impurities cause injury to health.

Question 3.
Purity provides peace of mind. (mental)
Answer:
Purity provides mental peace.

Question 4.
He was busily serving his parents. (busy)
Answer:
He was busy serving his parents.

Question 5.
But a well brought up dog is not only clean but also behaves very methodically and decently (method, decency).
Answer:
But a well brought up dog is not only clean but also behaves with method and decency.

Question 6.
He was pious (piety).
Answer:
He was full of piety.

Activity 3: Speech Activity
Question 1.
Give a short speech on each of the following in your school assembly:
अपने विद्यालय की सभा में निम्नलिखित में से प्रत्येक विषय पर एक संक्षिप्त भाषण दीजिए:
(i) Work is Worship (कार्य ही पूजा है)
(ii) Handsome is that Handsome Does (सुन्दर वह होता है जो सुन्दर कार्य करता है)
(iii) A Healthy Body has a Healthy Mind. (स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है).
Answer:

(i) Work is Worship (कार्य ही पूजा है)
Respected Principal, all the teachers and my dear friends! Lord Krishna quotes in the Geeta that no man can live without work even for a single moment. Work makes us healthy and active. Work provides us with food, shelter and everything that is needed to live a happy life. One who does his or her duty honestly gets good results. As is work, so is the result. No work, no achievement. Then why should we not consider our work as the worship of that Almighty? God is Himself busy in handling the universe, then why should we not remain busy in discharging our duties? We should always keep in our mind “Work is Worship”.

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण व मेरे प्रिय! मित्रो, गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि कोई भी मनुष्य एक भी क्षण बिना कोई कार्य किए नहीं रह सकता है। कार्य हमें स्वस्थ एवं सक्रिय बनाती है। कार्य से हमें प्रसन्नतापूर्वक जीवन यापन हेतु भोजन, आवास व आवश्यकता की प्रत्येक वस्तु प्राप्त होती है। अपने कार्य को ईमानदारी से करने पर व्यक्ति को अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। जैसा कार्य होता है, वैसा ही उसका परिणाम होता है। कोई कार्य नहीं, तो कोई उपलब्धि नहीं। तो फिर हम अपने कार्य को इस सर्वशक्तिमान् ईश्वर की पूजा क्यों न समझे? ईश्वर स्वयं भी ब्रह्माण्ड की देखभाल के कार्य में लगा ही है तो फिर हम अपने कर्तव्यपालन में व्यस्त क्यों न रहें? हमें सदा याद रखना चाहिए कि कार्य ही पूजा है।

(ii) Handsome is that Handsome Does (सुन्दर वह होता है जो सुन्दर कार्य करता है)
Respected Principal, all the teachers and my dear friends! Who is handsome? One who appears handsome but commits crimes or the one who does not appear so handsome but performs the deeds of social welfare and upliftment. Just think and the answer will come out soon. Ravana was very handsome but no one discusses his appearance. He is condemned for his bad deeds. Shivaji was not so handsome but he rules over the heart of almost all countrymen. One who does good enjoys fame and love of all public while a handsome criminal resides inside the prison. Thus handsome is that handsome does.

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय मित्रो! सुन्दर कौन है? वह जो दिखने में सुन्दर है और अपराधों में लिप्त है या वह जो दिखने में तो अधिक सुन्दर नहीं है परन्तु समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए कार्य करता है। जरा सोचिए और उत्तर आपको तुरन्त मिल जायेगा। रावण बहुत सुन्दर था परन्तु कोई उसके सुन्दर होने की बात भी नहीं करता है। उसके बुरे कार्यों के लिए उसकी निन्दा होती है। शिवाजी अधिक सुन्दर नहीं थे परन्तु वह लगभग सभी देशवासियों के हृदय पर राज क़रते हैं। अच्छे कार्य करने वाले को प्रसिद्धि व सभी का प्रेम मिलता है। जबकि सुन्दर अपराधी कारावास में रहता है। इस प्रकारे सुन्दर वह होता है जिसके कार्य सुन्दर होते हैं।

(iii) A Healthy Body has a Healthy Mind (स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है)
Respected Principal, all the teachers and my dear friends! If we want to have a healthy mind, we need a healthy body first. A sick man cannot enjoy mental health and happiness. He always remains troubled with an ailing disposition. He loses the efficiency to work and becomes an inactive and hopeless person. On the other hand, the person blessed with strong physique can enjoy not only mental pleasure but also mental and spiritual joys. It is true that health and happiness beget each other. As our mind affects our body, in the same way, our body also influences the mind. Therefore we should be careful about our physical health.

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण व मेरे प्रिय मित्रो। एक बीमार व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ व प्रसन्न नहीं रह सकता है। वह हमेशा खराब स्वास्थ्य के कारण परेशान रहता है। वह कार्य करने की क्षमता खो देता है और एक निष्क्रिय एवं निराश व्यक्ति बन जाता है। दूसरी ओर, अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य वाला व्यक्ति न केवल मानसिक बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी आनन्दित रहता है। यह पूर्णतः सत्य है कि स्वास्थ्य व प्रसन्नता एक-दूसरे पर निर्भर हैं। जिस प्रकार हमारी मनोदशा का प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है, उसी प्रकार हमारा शरीर भी मन को प्रभावित करता है। इसलिए हमें अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।

Activity 4: Composition
Question 1.
Write a letter to the editor of The Hindustan Times commenting on “The Influence of TV and Internet on Students”.
विद्यार्थियों पर ‘TV और इण्टरनेट का प्रभाव’ विषय पर अंपने विचार व्यक्त करते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स के सम्पादक को पत्र लिखिए।
Answer:
50-Vasant Vihar
Bikaner
15 November 20–
The Editor
The Hindustan Times
New Delhi
Subject:
The Influence of TV and Internet on Students. Dear Sir Through the column of your esteemed newspaper, I want to draw the attention of parents as well as authorities governing TV and internet services that some channels and websites are providing unwanted material which is polluting young generation. Playstations and vulgar videos on the internet are ruining their life. 3-G and 4-G smartphones have become a status symbol among the students. Students have left their playground and remain busy with the internet. It is the time to think over the matter seriously.
Yours faithfully
Satyam

Question 2.
You wish to join the Indian Army. Write a letter to the editor of The Hindu praising the illustrious history and tradition of the Indian Army.
आप भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते हैं। भारतीय सेना के शानदार इतिहास और परम्परा की प्रशंसा करते हुए The Hindu के सम्पादक को एक पत्र लिखिए।
Answer:
52-Krishna Nagar
Kota
10 January 20 —
The Editor
The Hindu
Jaipur
Subject:
Views on Illustrious History and Tradition of the Indian Army.
Dear Sir
Through the column of your esteemed newspaper, I want to draw the attention of young boys towards the illustrious history and tradition of the Indian Army. Since independence, Indian Army has fought three battles against Pakistan and won all of them. It is playing a great role in fighting against terrorism and keeping the unity of India intact. Indian Army is known for its discipline. It plays an extraordinary role whenever a natural calamity or havoc occurs inside or outside India. Whenever I see an army officer or a soldier, I feel proud of my country. I wish to join Indian Army and invite my friends to become glorious soldiers of my mother-land. Jai Hind.
Yours faithfully
Ved Vatsal

Question 3.
Write a short article for your school magazine on spiritualism and ethical values in ancient India.
अपने विद्यालय की पत्रिका के लिए प्राचीन भारत में अध्यात्मवाद एवं नैतिक मूल्यों पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer:
Spiritualism and Ethical Values in Ancient India:
India is known for its spiritual and ethical values from the time immemorial. Spiritualism is the lifeline of Indian culture. The most ancient book on religion ‘The Rigveda’ belongs to India. The most perfect science of physical, mental and spiritual health ‘The Yoga’ belongs to India. Indian history is full of such episodes when people not only renounced their property and family but also their lives to keep their words and ideas. Universal brotherhood, motherhood in the earth; work is worship are a few of those innumerable principles that signify the spiritual and ethical values in the society of ancient India.

भारत शाश्वत काल से अपने आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। अध्यात्मवाद भारतीय संस्कृति की जीवन रेखा है। धर्म पर सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ भारत में ही रचा गया। शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्वास्थ्य का सम्पूर्ण विज्ञान ‘योग’ भी भारत की ही सम्पत्ति है। भारतीय इतिहास ऐसी घटनाओं परिपूर्ण है जब लोगों ने अपने वचन व आदर्शों के लिए न केवल सम्पत्ति व परिवार का बल्कि अपने जीवन का भी परित्याग कर दिया। विश्व बन्धुत्व, पृथ्वी में मातृत्व भाव, कर्म में पूजा का भाव उन असंख्य सिद्धान्तों में से कुछ हैं जो प्राचीन भारतीय समाज में प्रचलित आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों का महत्व प्रदर्शित करते हैं।