Rajasthan Board RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 7

RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 7 Textual Questions

Activity 1: Comprehension
A. State whether the following statements are True or False. Write ‘T’ for true and ‘F’ for false:
1. Raj Kumar Shukla was a landlord.
2. Gandhiji went to Champaran on his own to begin the Civil Disobedience Movement.
3. All the peasants of Champaran agreed to sign a contract with the British landlords for compensation.
4. Gandhiji did not want to meet Prof Malkani and Dr Rajendra Prasad.
5. Gandhiji was a lawyer so he did not scold the lawyers for charging a heavy fee from poor peasants.
6. Gandhiji helped the poor peasants in their upliftment, by making them aware of education, hygiene, fundamental rights, and self-reliance.
7. Champaran was Gandhiji’s Waterloo.
(चम्पारण की घटना गाँधीजी के राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना थी।)
Answers:
1. False
2. False
3. False
4. False
5. False
6. True
7. True

B. Answer the following questions in about 30-40 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में दीजिए:

Question 1.
Why did Raj Kumar Shukla approach Gandhiji?
राजकुमार शुक्ला गाँधीजी से जाकर क्यों मिला?
Answer:
Raj Kumar Shukla approached Gandhiji to take him to Champaran along with himself. He wanted him to do something about the injustice of the landlord system prevailing there.

राजकुमार शुक्ला गाँधीजी को अपने साथ चम्पारण ले जाने के लिए उनसे मिला। वह चाहता था कि वह वहाँ प्रचलित जर्मीदारी प्रथा के अन्याय के विषय में कुछ करें।

Question 2.
What were the terms of the contract between British landlords and peasants?
अंग्रेज जमींदारों व किसानों के बीच समझौते की क्या शर्ते थीं?
Answer:
Most of the arable land there was divided into large estates owned by Britishers and worked by Indian tenants. The landlords compelled them to plant 3/20 or 15 per cent of their holdings with indigo and surrender the entire indigo harvest as rent.

वहाँ की ज्यादातर कृषि योग्य भूमि बड़ी-बड़ी जागीरों में बँटी थी जिसके मालिक अंग्रेज थे और जिस पर भारतीय काश्तकार काम करते थे। वे काश्तकारों को पूरी जमीन के 3/20 या 15 प्रतिशत पर नील बोने और उसकी| पूरी फसल को किराए के रूप में देने के लिए मजबूर करते थे।

Question 3.
Why did Gandhiji not agree to proceed to Champaran with Raj Kumar Shukla immediately?
गाँधी जी राजकुमार शुक्ला के साथ तुरन्त चम्पारण जाने को सहमत क्यों नहीं हुए?
Answer:
Gandhiji did not agree to proceed to Champaran with Raj Kumar Shukla immediately because he had an appointment in Cawnpore (Kanpur). He was also committed to going to other parts of India. He could not miss these already fixed appointments.

गाँधीजी राजकुमार शुक्ला के साथ तुरन्त चम्पारण जाने को इसलिए सहमत नहीं हुए क्योंकि उनका कानपुर में किसी से मिलने का कार्यक्रम तय था। उन्होंने भारत के अन्य भागों में भी जाने का वादा किया हुआ था। वह इन पहले से तय कार्यक्रमों को नहीं छोड़ सकते थे।

Question 4.
What happened when Gandhiji and Raj Kumar Shukla wanted to meet Rajendra Prasad?
जब गाँधीजी और राजकुमार शुक्ला ने राजेन्द्र प्रसाद से मिलना चाहा तो क्या हुआ?
Answer:
When Gandhiji and Raj Kumar Shukla wanted to meet Rajendra Prasad, they reached his home. But Rajendra Prasad was out of town. The servants let the two stay on the grounds there.

जब गाँधीजी और राजकुमार शुक्ला ने राजेन्द्र प्रसाद से मिलना चाहा तो वे उनके घर पहुँच गए। परन्तु राजेन्द्र प्रसाद शहर से बाहर गए हुए थे। नौकरों ने उन दोनों को वहाँ खुले मैदान में ठहरने दिया।

Question 5.
Why did Gandhiji plan to go to Muzzafarpur?
गाँधी जी ने मुजफ्फरपुर जाने की योजना क्यों बनाई?
Answer:
Gandhiji went to Champaran at the request of a peasant, Rajkumar Shukla had complained to him about the plight of peasants there. He decided to go first to Muzzafarpur to obtain more complete information about the conditions.

गाँधीजी एक किसान राजकुमार शुक्ला के आग्रह पर चम्पारण गये। राजकुमार शुक्ला ने उनसे वहाँ के किसानों की दयनीय दशा के बारे में शिकायत की थी। उन्होंने स्थितियों की और अधिक पूर्ण जानकारी लेने के लिए पहले मुजफ्फरपुर जाने का निश्चय किया।

Question 6.
What was the effect of synthetic indigo on the natural indigo crop?
कृत्रिम नील को प्राकृतिक नील की खेती पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer:
The landlords in Champaran came to know that Germany had developed synthetic indigo. Now they lost interest in natural indigo crop and planned to terminate the contract where they got indigo harvest as rent.

चम्पारण में जमींदारों को पता चला कि जर्मनी ने कृत्रिम नील विकसित कर लिया है। अब उनकी प्राकृतिक नील की फसल में रुचि समाप्त हो गई और उन्होंने उस समझौते को समाप्त करने की योजना बनाई जिसमें वे जमीन के भाड़े के रूप में नील की फसल लेते थे।

Question 7.
How did British landlords compel poor peasants? (S. S. Exam 2018)
अंग्रेज जमींदार गरीब किसानों को किस प्रकार मजबूर करते थे?
Answer:
British landlords compelled poor peasants to plant 15 per cent of their holdings with indigo and surrender the entire indigo harvest as rent. This was done with a long term contract.

अंग्रेज जर्मीदार गरीब किसानों को उनकी पूरी जमीन के 15 प्रतिशत भाग पर नील की खेती करने और नील की पूरी फसल को भाड़े के रूप में देने को मजबूर करते थे। यह एक लम्बे समय तक चलने वाले समझौते के आधार पर किया जाता था।

Question 8.
Why did Gandhiji scold the lawyers?
गाँधीजी ने वकीलों को क्यों लताड़ा?
Answer:
Muzzafarpur lawyers who frequently represented peasant groups in court came to meet Gandhi. They told him about their cases and reported the size of their fees. Gandhiji chided them for charging big fees from the poor sharecroppers.

मुजफ्फरपुर के वकील जो निरन्तर किसानों के समूहों का न्यायालय में प्रतिनिधित्व करते थे, गाँधीजी से मिलने आये। उन्होंने उनके (किसानों के) मुकदमों के बारे में और अपनी फीस के आकार की सूचना उन्हें (गाँधीजी को) दी। गाँधीजी ने उन्हें गरीब किसानों से बड़ी फीस लेने पर लताड़ा।

Question 9.
How did the Champaran episode prove to be a turning point in the political career of Gandhiji?
चम्पारण की घटना गाँधीजी के राजनीतिक जीवन में किस प्रकार एक महत्त्वपूर्ण घटना सिद्ध हुई?
Answer:
The Champaran episode proved to be a kind of declaration that the British could not order Gandhiji about his own country. It was the beginning of the civil disobedience movement.

चम्पारण की घटना एक प्रकार की घोषणा सिद्ध हुई कि अंग्रेज गाँधी जी को उनके अपने देश के विषय में आदेश नहींदे सकते हैं। यह सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत थी।

Question 10.
What did Gandhiji do for social upliftment of poor families of peasants?
गाँधीजी ने गरीब किसान परिवारों के सामाजिक उद्धार हेतु क्या किया?
Answer:
Gandhiji with the help of volunteers opened primary schools in six villages. His wife Kasturba taught the poor families of peasants rules on personal cleanliness and community sanitation.

गाँधीजी ने स्वयंसेवकों की सहायता से छः गाँवों में प्राइमरी विद्यालय खोले। उनकी पत्नी कस्तूरबा ने गरीब किसान परिवारों का व्यक्तिगत स्वच्छता व सामुदायिक स्वच्छता के नियम सिखाए।

C. Answer the following questions in about 125 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए:
Question 1.
How did Gandhiji help the peasants in Champaran? (Sample Paper 2018)
गाँधीजी ने चम्पारण में किसानों की सहायता किस प्रकार की?
Answer:
The peasants in Champaran were being exploited by the British landlords. Gandhiji stood up as their leader. Some lawyers, as well as lots of commoners, followed him in the struggle to liberate peasants from the clutches of British landlords. With his bold efforts and through civil disobedience, he got the poor peasants in Champaran win their battle against injustice and exploitation. Gandhiji worked for their cultural and social upliftment also. With the help of volunteers, he opened primary schools in six villages. His wife Kasturba taught the villagers rules on personal cleanliness as well as community sanitation. Thus Gandhiji helped those people politically as well as socially.

चम्पारण में अंग्रेज जमींदार किसानों का शोषण कर रहे थे। गाँधीजी उनके नेता के रूप में खड़े हुए। अंग्रेज जमींदारों के चुंगल से किसानों को मुक्त कराने के संघर्ष में कुछ वकीलों और बहुत से आम लोगों ने उनका अनुसरण किया। अपने बहादुरीपूर्ण प्रयासों और सविनय अवज्ञा के माध्यम से उन्होंने चम्पारण के गरीब किसानों को अन्याय व शोषण के विरुद्ध उनके युद्ध में विजय दिलाई। गाँधीजी ने उनके सांस्कृतिक व सामाजिक उद्धार के लिए भी कार्य किया। उन्होंने स्वयंसेवकों की सहायता से छः गाँवों में प्राथमिक विद्यालय खोले। उनकी पत्नी कस्तूरबा ने ग्रामीणों को व्यक्तिगत व सामुदायिक स्वच्छता के नियम सिखाए। इस प्रकार गाँधीजी ने उन लोगों की राजनीतिक और सामाजिक दोनों प्रकार से सहायता की।

Question 2.
Explain in your own words, how Raj Kumar Shukla convinced Gandhiji to proceed to Champaran.
अपने शब्दों में वर्णन कीजिए कि राजकुमार शुक्ला ने गाँधीजी को चम्पारण चलने के लिए कैसे राजी किया।
Answer:
Raj Kumar Shukla was a poor peasant from Champaran. Deeply disturbed at the injustice of the landlord system in Bihar, he reached to see Gandhiji during the 1916 annual convention of the Indian National Congress in Lucknow. Somebody had told him that Gandhiji could help him in the matter. So he approached Ghandjiji to take him to Champaran along with himself but Gandhiji had several appointments at that time. So he refused to go to Champaran with Raj Kumar Shukla immediately. Shukla did not lose his patience. He accompanied him everywhere. Shukla followed him to his ashram also. He begged Gandhiji to fix a date to proceed to Champaran. Impressed with him, Gandhiji told him to meet him in Calcutta on a fixed date. Shukla arrived there and from there they both proceeded to Champaran.

राजकुमार शुक्ला चम्पारण का एक गरीब किसान था। बिहार में चल रही जमींदारी प्रथा के अन्याय से अत्यधिक परेशान होकर वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1916 में लखनऊ में चल रहे वार्षिक अधिवेशन में गाँधीजी से मिलने पहुँचा। किसी ने उसे बताया था कि गाँधीजी इस मामले में उसकी सहायता कर सकते थे। इसलिए वह गाँधीजी को अपने साथ चम्पारण ले जाने के लिए उनके पास पहुँचा, लेकिन उस समय गाँधीजी के कई कार्यक्रम तय थे इसलिए उन्होंने राजकुमार शुक्ला के साथ तुरन्त चम्पारण जाने से मना कर दिया। शुक्ला ने धीरज नहीं खोया। वह हर जगह उनके साथ गया । वह उनके पीछे-पीछे उनके आश्रम में भी पहुँच गया। उसने गाँधीजी से चम्पारण चलने की तारीख तय करने का आग्रह किया। उससे प्रभावित होकर गाँधीजी ने उससे कहा कि अमुक तिथि को मुझसे कलकत्ता में मिलना। शुक्ला वहाँ पहुँच गया और वहाँ से वे दोनों चम्पारण के लिए निकल गए।

Question 3.
Why did Gandhiji decide to consult Prof Malkani and Dr Rajendra Prasad?
गाँधीजी ने प्रोफेसर मलकानी व डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से सलाह-मशविरा करने का निश्चय क्यों किया?
Answer:
While going to Champaran with Raj Kumar Shukla, Gandhiji decided to go first to Muzzafarpur, which was en route to Champaran. He wanted to obtain complete information about conditions. There he stayed for two days in the home of Professor Malkani to discuss the condition of Champaran with him. He also decided to consult Dr Rajendra Prasad who was a lawyer. Being a lawyer, Dr Rajendra Prasad could give him proper advice regarding the legal aspect of the matter. With full information about the sharecroppers’ problem, he could accordingly plan his course of action with proper information of events. He could decide what to do to help the poor peasants of Champaran.

राजकुमार शुक्ला के साथ चम्पारण जाते समय गाँधीजी ने पहले मुजफ्फरपुर जाने का निश्चय किया जो कि चम्पारण के रास्ते में था। वह स्थितियों की पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते थे। वहाँ वह चम्पारण की स्थिति पर चर्चा करने के लिए दो दिन प्रोफेसर मलकानी के घर ठहरे। उन्होंने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से भी सलाह-मशविरा करने का निश्चय किया जो कि एक वकील थे। वकील होने के कारण डॉ. राजेन्द्र प्रसाद उन्हें मामले के कानूनी पक्ष के सम्बन्ध में समुचित सलाह दे सकते थे। बँटाईदारों की समस्या से सम्बन्धित पूर्ण जानकारी होने पर वह घटनाओं की समुचित जानकारी के साथ अपनी कार्ययोजना उसी के अनुसार बना सकते थे। वह तय कर सकते थे कि चम्पारण के गरीब किसानों की सहायता के लिए क्या किया जाए।

Question 4.
What were the old terms and conditions of the contract between British landlords and peasants?
अंग्रेज जर्मीदारों और किसानों के बीच समझौते की पुरानी शर्ते क्या थीं?
Answer:
Most of the arable land in the Champaran district of Bihar was divided into large estates. These estates were owned by British landlords. The peasants in Champaran were sharecroppers. As tenants, they worked on them. The chief commercial crop was indigo. The landlords compelled all tenants to plant three-twentieths or 15 per cent of the holdings with indigo. The British landlords forced the sharecroppers to surrender the entire indigo harvest as rent. This was done by a long-term contract. This sharecropping arrangement was irksome to the peasants. The peasants in Champaran were suffering from the injustice of this system. It was exploitation over them.

बिहार के चम्पारण जिले में अधिकांश कृषि योग्य भूमि बड़ी-बड़ी जागीरों में बँटी थी। इन जागीरों के मालिक अंग्रेज जमींदार थे। चम्पारण के किसान बँटाईदार थे। वे इन जमीनों पर भाड़े के मजदूर के रूप में काम करते थे। मुख्य व्यावसायिक फसल नील थी। जमींदार सभी बँटाईदारों को कुल जमीन के 3/20 अथवा 15 प्रतिशत भाग पर नील की खेती करने को बाध्य करते थे। अंग्रेज जमींदार बँटाईदारों को नील की पूरी फसल को जमीन के भाड़े के रूप में देने हेतु बाध्य करते थे। इसके लिए एक दीर्घकालिक कानूनी समझौता था। बँटाई की खेती की यह व्यवस्था किसानों के लिए झुंझलाहट उत्पन्न करती थी। चम्पारण के किसान इस व्यवस्था के अन्यायसे पीड़ित थे। यह उनका शोषण था।

Question 5.
What was the impact of le Champaran episode on the peasants and the British government?
चम्पारण के प्रकरण का किसानों व अंग्रेज सरकार पर क्या प्रभाव हुआ?
Answer:
Through the Champaran episode, Gandhiji showed the British that they could not order Indians about their own country. Peasants came to know the power of unity. With Gandhiji, they took part in the Civil Disobedience Movement. Till now, the planters had behaved as lords above the law but now the peasants saw that they too had rights and their defenders. They learned courage. The British government realized that the Indians would no more bow down to exploitation and injustice. Within a few years after the Champaran épisode, the British planters abandoned their estates. These estates were returned to the peasants. Indigo sharecropping disappeared. In this way, the Champaran episode brought a positive change in India.

चम्पारण प्रकरण के माध्यम से गाँधी जी ने अंग्रेजों को दिखा दिया कि अंग्रेज भारतीयों को उनके अपने देश के मामलों में आदेश नहीं दे सकते हैं। किसानों को एकता की शक्ति का पता चला। उन्होंने गाँधी जी के साथ सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया। अब तक जमींदारों ने ऐसा व्यवहार किया था मानो वे कानून से ऊपर भगवान हों परन्तु अब किसानों ने देखा कि उनके भी अधिकार हैं और अधिकारों के रक्षक भी। उन्होंने साहस करना सीखा। अंग्रेज सरकार को महसूस हो गया कि भारतीय अब शोषण व अन्याय के समक्ष नहीं झुकेंगे। चम्पारण प्रकरण के बाद कुछ ही वर्षों के भीतर अंग्रेज जमींदारों ने अपनी जागीरें छोड़ दीं। ये जागीरें किसानों को लौटा दी गईं। नील की बँटाईदारी समाप्त हो गई। इस प्रकार चम्पारण प्रकरण भारत में एक सकारात्मक परिवर्तन लाया।

RBSE Class 12 English Rainbow Chapter 7 Additional Questions

A.Answer the following questions in about 30-40 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में दीजिए:

Question 1.
Why do you think the servants at Rajendra Prasad’s home thought Gandhiji to be another peasant?
आपके विचार से राजेन्द्र प्रसाद के घर के नौकरों ने गाँधीजी को एक अन्य किसान क्यों समझा?
Answer:
Rajkumar Shukla was a peasant. He often visited Rajendra Prasad regarding peasants’ problems. Gandhiji accompanied Rajkumar Shukla. So the servants thought that he (Gandhi) was also a peasant.
राजकुमार शुक्ला एक किसान थे। किसानों की समस्याओं को लेकर वे राजेन्द्र प्रसाद के यहाँ जाया करते थे। गाँधीजी राजकुमार शुक्ला के साथ गये थे। इसलिए नौकरों ने सोचा कि वह भी एक किसान थे।

Question 2.
What did the peasants pay the British landlords as rent? What did the British now want instead and why?
किसान अंग्रेज जागीरदारों को किराये के रूप में क्या देते थे? अब इसकी जगह अंग्रेज क्या चाहते थे और क्यों?
Answer:
The peasants had to grow indigo on the 15% area of their land. They paid their whole indigo harvest to the British landlords as rent. The British wanted now compensation to free them from their commitment.

किसान अपनी जमीन के 15% भाग पर नील उगाने के लिए मजबूर थे। वे किराये के रूप में अंग्रेज जागीरदारों को पूरा नील देते थे। अब अंग्रेज उन्हें उनके समझौते से मुक्त करने के बदले क्षतिपूर्ति चाहते थे।

Question 3.
Why did Gandhiji agree to a settlement of 25 per cent refund to the peasants?
गाँधीजी किसानों को 25 प्रतिशत वापसी के समझौते से क्यों सहमत हो गए?
Answer:
The British landlords offered to make 25 per cent refunds to the peasants. Gandhiji agreed to the settlement of 25 per cent refund to the peasants because for him the amount of money was not as important as the token victory of the peasants.

अंग्रेज जमींदारों ने किसानों को 25 प्रतिशत पैसा वापस करने का प्रस्ताव किया। गाँधीजी किसानों को 25 प्रतिशत वापसी के समझौते के लिए सहमत हो गए क्योंकि उनके लिए धन की मात्रा इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं थी जितनी की किसानों की प्रतीकात्मक विजय।

Question 4.
Which incident made Gandhiji decide to urge the departure of the British?
किस घटना से गाँधीजी ने अंग्रेजों पर भारत छोड़ने का दबाब बनाने का निश्चय कर लिया?
Answer:
The peasants at Champaran were being forced by the British landlords to pay compensation for being free from the agreement of growing indigo. This injustice touched Gandhiji and he decided to urge the departure of the British.
चम्पारण के किसानों को अंग्रेज जमींदार नील की खेती के समझौते से मुक्त होने के लिए हर्जाना देने को मजबूर कर रहे थे। इस अन्याय ने गाँधीजी को प्रभावित किया और उन्होंने अंग्रेजों पर भारत छोड़ने का दबाब बनाने का निश्चय कर लिया।

Question 5.
Why was Gandhiji not allowed to draw water from the well at Rajendra Prasad’s house in Patna?
पटना में राजेन्द्र प्रसाद के घर पर गाँधीजी को कुएँ से पानी खींचने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
Answer:
Gandhiji was not allowed to draw water from the well at Rajendra Prasad’s house at Patna lest some drops from his bucket should pollute the entire source. His servants thought that he could be untouchable.

पटना में राजेन्द्र प्रसाद के घर पर गाँधीजी को कुएँ से पानी खींचने की अनुमति इसलिए नहीं दी गई कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी बाल्टी से कुछ बूंदें सारे पानी को प्रदूषित कर दें। उनके नौकरों ने सोचा कि शायद वह कोई अछूत हों

Question 6.
How was Gandhiji welcomed at the Muzzafarpur railway station?
मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर गाँधीजी का कैसा स्वागत हुआ?
Answer:
Gandhiji had informed in advance his arrival at Muzzafarpur to professor J.B. Kriplani, of the Arts College in Muzzafarpur. When Gandhiji’s train arrived, Kriplani was waiting at the station with a large body of students.

गाँधीजी ने मुजफ्फरपुर Arts College के प्रोफेसर जे. बी. कृपलानी को अपने मुजफ्फरपुर आगमन की सूचना पहले ही दे दी थी। जब गाँधीजी की ट्रेन पहुँची, कृपलानी बहुत सारे छात्रों के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे।

Question 7.
What was the condition of the arable land of Champaran when Gandhiji visited there?
जब गाँधीजी चम्पारण आए, वहाँ की कृषियोग्य भूमि की क्या स्थिति थी?
Answer:
Most of the arable land in the Champaran district was divided into large estates. Britishers were the owners of those estates. Indian peasants worked in those estates. The chief commercial crop was indigo.

चम्पारण जिले की ज्यादातर कृषि योग्य भूमि बड़ी-बड़ी जागीरों में बँटी थी। इन जागीरों के मालिक अंग्रेजथे। भारतीय किसान इन जागीरों में काम करते थे। मुख्य व्यावसायिक फसल नील थी।

Question 8.
What conclusion did Gandhiji present before the Muzzafarpur lawyers?
गाँधीजी ने मुजफ्फरपुर के वकीलों के सामने क्या निष्कर्ष प्रस्तुत किया?
Answer:
Gandhiji told them that he had come to the conclusion that they should stop going to law courts. Taking such cases to the court did little good. Where the peasants were so crushed and fear-stricken, the real relief for them was to be free from fear.

गाँधीजी ने उन लोगों से कहा-मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि हमें न्यायालयों में जाना बन्द कर देना चाहिए। ऐसे मामलों को न्यायालय में ले जाने का कोई लाभ नहीं है। जहाँ किसान इतने दबे-कुचले व भयभीत हैं, उनके लिए वास्तविक राहत भय से मुक्त होने में है।

Question 9.
What did the poor peasants of Champaran come to know and why did they want their money back?
चम्पारण के गरीब किसानों को क्या पता चला तथा वे अपना पैसा वापस क्यों चाहते थे?
Answer:
The poor peasants of Champaran came to know about synthetic indigo. The British landlords had taken compensation from the poor peasants to free them from the agreement. Now they wanted their money back.

चम्पारण के गरीब किसानों को कृत्रिम नील के बारे में जानकारी हो गई। अंग्रेज जमींदार किसानों को समझौते से मुक्त करने के लिए क्षतिपूर्ति ले चुके थे। इस पर, उन्होंने अपना पैसा वापस लेना चाहा।

Question 10.
What did Gandhiji do after knowing the miserable condition of the farmers at Champaran?
चम्पारण के किसानों की खराब स्थिति का पता लगने के बाद गाँधीजी ने क्या किया?
Answer:
First, Gandhiji visited the secretary of the British landlords association who gave him no information. Then he called on the British official commissioner of the Tirhut division who proceeded to bully him. He then went to Motihari, with several lawyers and continued his investigation.

पहले गाँधीजी ब्रिटिश लैण्डलॉर्ड एसोसिएशन के सेक्रेटरी के पास गये जिसने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। तब वे तिरहुत डिवीजन के ब्रिटिश कमिश्नर के पास गये जिसने उन्हें धमकाया एवं डराया गया। तब वे कई वकीलों के साथ मोतीहारी गये और वहाँ अपनी जाँच जारी रखी।

Question 11.
How did Gandhiji impress the lawyers of Bihar during his visit to Champaran?
गाँधीजी ने अपनी चम्पारण यात्रा के दौरान बिहार के वकीलों को किस प्रकार प्रभावित किया?
Answer:
Gandhiji chided the lawyers of Bihar for charging big fees from the poor peasants. He told them that it was futile to take their cases to the law courts. Gandhiji asked them to do something to relieve the peasants from the fear of the Britishers.

गाँधीजी ने गरीब किसानों से अधिक फीस वसूलने पर बिहार के वकीलों को बुरा-भला कहा। उन्होंने वकीलों से कहा कि किसानों के मसलों को न्यायालय में ले जाना बेकार है। गाँधीजी ने उनसे किसानों को अंग्रेजों के भय से मुक्त करने के लिए कुछ करने को कहा।

Question 12.
Give an example of Gandhiji’s civil disobedience.
गाँधीजी की सविनय अवज्ञा का एक उदाहरण दीजिए।
Answer:
At Motihari, Gandhiji was served an official notice to quit Champaran immediately. Gandhiji signed a receipt for the notice and wrote on it that he would disobey the order. He thought that it was against his humanitarian and national duties.

मोतिहारी में गाँधीजी को तुरन्त चम्पारण छोड़ने का एक आधिकारिक नोटिस मिला। उन्होंने नोटिस की एक प्रति पर हस्ताक्षर किए और लिखा कि वह उस आदेश की अवज्ञा करेंगे। उन्होंने सोचा कि यह उनके मानवीय एवं राष्ट्रीय कर्तव्यों के विरुद्ध था।

Question 13.
What happened when Gandhiji did not comply with the official notice?
जब गाँधीजी ने आधिकारिक नोटिस का सम्मान नहीं किया तो क्या हुआ?
Answer:
When Gandhiji conveyed the message that he would disobey the order, he received a summons to appear in the court the next day. Gandhiji telegraphed Rajendra Prasad to come from Bihar with influential friends. He also wired a full report to the Viceroy.

जब गाँधीजी ने यह संदेश दे दिया कि वे आदेश की अवज्ञा करेंगे तो उन्हें अगले दिन न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दे दिया गया। गाँधीजी ने राजेन्द्र प्रसाद को टेलिग्राम भेजा कि वह प्रभावशाली मित्रों को लेकर बिहार से वहाँ आ जाएं। उन्होंने वायसराय को भी एक पूरी रिपोर्ट तार कर दी।

Question 14.
Describe the incident that was the beginning of the peasants’ liberation from fear of the British?
उस घटना का वर्णन कीजिए जो अंग्रेजों के भय से किसानों की मुक्ति की शुरुआत थी?
Answer:
The morning, when Gandhiji had to appear in the court, found the town of Motihari black with peasants. Their spontaneous demonstration in thousands around the courthouse was the beginning of their liberation from fear of the British.

उस सुबह, जब गाँधीजी को न्यायालय में उपस्थित होना था, मोतिहारी कस्बा किसानों से भर गया। न्यायालयके चारों ओर हजारों की संख्या में उनका सहज प्रदर्शन अंग्रेजों के भय से उनकी मुक्ति की शुरुआत थी।

Question 15.
Why was the government baffled when Gandhiji presented himself in the court?
जब गाँधीजी न्यायालय में पेश हुए तो सरकार पूरी तरह से क्यों घबरा गई?
Answer:
When Gandhiji presented himself in the court, the government was baffled because thousands of people gathered around the court in support of Gandhiji. They demonstrated against Britishers. The officials felt powerless without Gandhiji’s cooperation.

जब गाँधीजी ने न्यायालय में स्वयं को पेश किया तो सरकार पूरी तरह घबरा गई क्योंकि गाँधीजी के समर्थन में हजारों की संख्या में लोग न्यायालय के चारों ओर एकत्रित हो गए। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन किया। गाँधीजी के सहयोग के बिना सरकारी अधिकारियों ने खुद को शक्तिविहीन महसूस किया।

Question 16.
How did Gandhi show respect to law?
गाँधीजी ने कानून के प्रति सम्मान किस प्रकार दिखाया?
Answer:
When a crowd of peasants demonstrated in Gandhi’s favour, he helped the officials regulate the crowd. In a lawful manner, he proved to them that their might could be challenged by Indians.

जब गाँधीजी के समर्थन में किसानों की भीड़ ने प्रदर्शन किया तो गाँधीजी ने भीड़ को संयमित करने में अधिकारियों की सहायता की। उन्होंने कानून का पालन करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय अंग्रेजों की शक्ति को चुनौती देने में समर्थ थे।

Question 17.
‘It would be shameful desertion’. What would be shameful desertion according to the lesson ‘Indigo’?
‘यह एक शर्मनाक बात होगी।’ ‘Indigo’ पाठ के अनुसार कौन-सी बात शर्मनाक होगी?
Answer:
The lawyers of Bihar wouldn’t fight for peasants, in case Gandhiji was sent to jail. But realising that despite being a stranger, Gandhiji was ready to go to prison for the peasants, the lawyers felt that their giving up the fight would be shameful desertion.

अगर गाँधीजी को जेल भेज दिया जाता तो बिहार के वकील किसानों के लिए नहीं लड़ते। परन्तु यह महसूस करने के बाद कि बाहरी व्यक्ति होने के बावजूद भी गाँधीजी गरीब किसानों के लिए जेल जाने को तैयार थे, वकीलों ने यह महसूस किया कि यदि वे इस लड़ाई को त्यागेंगे तो यह शर्मनाक होगा।

Question 18.
How did the Civil Disobedience come out triumphant?
सविनय अवज्ञा की किस प्रकार जीत हुई?
Answer:
Gandhi followed by several prominent lawyers was ready to go to jail for the cause of the peasants. Baffled at this state, the Lieutenant Governor of the province ordered the case to be dropped. Thus Civil Disobedience had triumphed.

गाँधीजी, और उनके पीछे-पीछे, कई प्रमुख वकील किसानों के उदेश्य के लिए जेल जाने को तैयार थे। इस स्थिति से घबराकर उस राज्य के लेफ्टिनेन्ट गवर्नर ने केस समाप्त करने का आदेश दे दिया। इस प्रकार सविनय अवज्ञा की जीत हो गई थी।

Question 19.
What did Gandhiji and the lawyers of Bihar do to conduct a far-flung inquiry into the grievance of the farmers?
किसानों की शिकायतों की व्यापक जाँच करने के लिए गाँधीजी और बिहार के वकीलों ने क्या किया?
Answer:
Gandhiji and the lawyers of Bihar wrote down formal statements of about ten thousand peasants and made notes on other evidence. They collected evidence from the whole area.

गाँधीजी और बिहार के वकीलों ने लगभग दस हजार किसानों के औपचारिक बयान लिखे और अन्य साक्ष्यों के आधार पर टिप्पणियाँ लिखीं। उन्होंने पूरे क्षेत्र से साक्ष्य एकत्रित किए।

Question 20.
How was the commission of inquiry appointed? Whom did it consist of?
पूछताछ हेतु आयोग किस प्रकार नियुक्त किया गया? इसमें कौन-कौन से लोग थे?
Answer:
Gandhiji had four interviews with the Lieutenant Governor, who as a result appointed an official commission of inquiry into the indigo sharecroppers’ situation. The commission consisted of landlords, government officials, and Gandhiji as the sole representative of the peasants.

गाँधीजी ने लेफ्टिनेन्ट गवर्नर से चार बार भेंट कर बातचीत की जिसके परिणामस्वरूप उसने नील के बंटाईदारों की स्थिति का पता लगाने के लिए एक आधिकारिक आयोग नियुक्त कर दिया। इस आयोग में जमींदार, सरकारी अधिकारी, और किसानों के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गाँधीजी थे।

Question 21.
How did the big planters get ready to make refunds to the peasants?
बड़े जमींदार किसानों को उनका पैसा वापस करने को क्यों तैयार हो गए?
Answer:
The official inquiry assembled a crushing mountain of evidence against the big planters. When they saw this, they agreed to make refunds to the peasants, but only in principle. First of all, they wanted to know about the amount they had to pay.

अधिकारिक जाँच में बड़े जमींदारों के विरुद्ध साक्ष्यों का पहाड़ इकट्ठा हो गया। जब उन्होंने यह देखा तो वे किसानों का पैसा वापस करने को तैयार हो गए, लेकिन केवल सैद्धान्तिक तौर पर। सर्वप्रथम वे उनके द्वारा चुकायी जाने वाली राशि के बारे में जानना चाहते थे।

Question 22.
How did Gandhiji break the deadlock about the refund of money to the peasants?
किसानों को उनका पैसा वापस किये जाने सम्बन्धी गतिरोध को गाँधीजी ने किस प्रकार समाप्त किया?
Answer:
Thinking probably that Gandhiji would not give way, the representative of the planters offered to refund to the extent of 25 per cent. To his amazement, Gandhiji took him at his word and thus broke the deadlock.

शायद यह सोचकर कि गाँधीजी नहीं झुकेंगे, जमींदारों के प्रतिनिधि, ने 25 प्रतिशत तक पैसा वापस करने का प्रस्ताव रखा। गाँधीजी ने उसे आश्चर्यचकित करते हुए उसकी बात मान ली और इस प्रकार गतिरोध समाप्त कर दिया।

Question 23.
How did the peasants learn courage?
किसानों ने साहस किस प्रकार सीखा?
Answer:
The planters had been behaving with the peasants as lords above the law. When they had to refund the peasants’ money, as well as surrender part of their prestige, the peasants saw that they too had rights. They learned courage.

जमींदार किसानों के साथ ऐसा व्यवहार करते आ रहे थे मानो वे कानून से ऊपर भगवान हों। जब उन्हें किसानों का पैसा वापस करना पड़ा और साथ ही उनकी शान भी कम हुई तो किसानों ने देखा कि उनके भी अधिकार हैं। उन्होंने साहस करना सीख लिया।

Question 24.
How did indigo sharecropping disappear?
बँटाई पर नील की खेती किस प्रकार समाप्त हो गई?
Answer:
Within a few years after the incident of the victory of the peasants, the British planters abandoned their estates, which reverted to the peasants. These events justified Gandhiji’s position, and indigo sharecropping disappeared.

किसानों की जीत की घटना के बाद कुछ ही वर्षों के अन्दर-अन्दर अंग्रेज जागीरदारों ने अपनी जागीरें छोड़ दीं जो किसानों को वापस मिल गईं। इन घटनाओं ने गाँधीजी की स्थिति को सही सिद्ध किया और बँटाई पर नील की खेती समाप्त हो गई।

Question 25.
How do you know that Gandhiji was a good administrator?
आपको कैसे पता चलता है कि गाँधीजी एक अच्छे प्रशासक थे?
Answer:
We know this in the way that during his long stay in Champaran, Gandhiji kept a long distance watch on his ashram. He sent regular instructions by mail and asked for financial accounts.

हमें यह इस तरह पता चलता है कि चम्पारण में अपने लम्बे प्रवास के दौरान गाँधीजी दूर से ही अपने आश्रम पर नज़र रखते थे। वह नियमित रूप से डाक द्वारा निर्देश भेजते रहते थे और वित्तीय लेखा-जोखा मँगाते रहते थे।

Question 26.
What type of politics did Gandhiji follow?
गाँधीजी किस प्रकार की राजनीति करते थे?
Answer:
Gandhiji’s politics was intertwined with the practical, day-to-day problems of the people. His loyalty was not to abstractions; it was to living human beings. He always tried to address the distress of the common people.

गाँधीजी की राजनीति लोगों की व्यावहारिक, दिन-प्रतिदिन की समस्याओं से जुड़ी थी। उनकी निष्ठा अमूर्त सिद्धान्तों के प्रति न होकर जीवित मानव-प्राणियों के प्रति थी। वह हमेशा साधारण लोगों के दुखों को दूर करने का प्रयास करते थे।

Question 27.
How long did Gandhiji stay in Champaran? On whose request did he remain there?
गाँधीजी चम्पारण में कितने समय रहे? वे वहाँ किसकी प्रार्थना पर रहे?
Answer:
Gandhiji visited Champaran on the request of Raj Kumar Shukla. He stayed there for about a year. But his long stay was not due to any request. Gandhiji kept working for social upliftment of the poor peasants. He fought against illiteracy, insanitation and ill-health.

गाँधीजी राजकुमार शुक्ला की प्रार्थना पर चम्पारण गये। वे वहाँ लगभग एक वर्ष ठहरे। परन्तु उनका लम्बा ठहराव किसी प्रार्थना के कारण नहीं था। गाँधीजी गरीब किसानों के सामाजिक उत्थान के लिए काम करते रहे। उन्होंने अशिक्षा, अस्वच्छता तथा अस्वस्थता के विरुद्ध लड़ाई लड़ी।

Question 28.
What was the attitude of the average Indians in smaller localities towards advocates of ‘home-rule’?
छोटी जगहों पर रहने वाले औसत भारतीय का स्वराज के पक्षधरों के प्रति क्या दृष्टिकोण था?
Answer:
The average Indians in smaller localities were scared of the British. They had no courage to show sympathy with the advocates of home rule. They did not even entertain them in their houses.

छोटी जगहों पर रहने वाले औसत भारतीय अंग्रेजों से डरते थे। उनमें स्वराज के पक्षधरों के प्रति सहानुभूति दिखाने का जरा भी साहस नहीं था। वे उनको अपने घर पर भी स्वागत-सत्कार नहीं करते थे।

B. Answer the following questions in about 125 words each:
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर, लगभग 125 शब्दों में दीजिए:

Question 1.
What change did the Champaran episode bring about in the lives of peasants?
चम्पारण प्रकरण ने किसानों के जीवन की दशा किस प्रकार बदल दी?
Answer:
The peasants in Champaran were sharecroppers. The British landlords had an agreement with them. The peasants were to grow indigo on 3/20 or 15% of their land. They were forced to give their whole indigo crop as rent to the British landlords. With the advent of synthetic indigo, the British landlords asked for compensation from the peasants to free them from the agreement. Gandhiji led them in their struggle to get their right and succeeded too. After the episode of 25 per cent refund of money, the peasants came to know that they had rights and defenders. They also learned to behave courageously. The British landlords were so much demoralised that they abandoned their estates which were given to the peasants and indigo sharecropping disappeared.

चम्पारण के किसान बंटाईदार थे। अंग्रेज जमीदारों ने उनके साथ एक समझौता कर रखा था। किसानों को अपनी 3/20 या 15 प्रतिशत जमीन पर नील उगानी पड़ती थी। उन्हें अपनी पूरी नील की फसल किराये के रूप में अंग्रेज जागीरदारों को देने के लिए मजबूर किया जाता था। कृत्रिम नील के आने के साथ ही अंग्रेज जागीरदारों ने किसानों को समझौते से मुक्त करने के लिए क्षतिपूर्ति माँगी। गाँधीजी ने उनके अधिकारों को पाने के संघर्ष में उनका नेतृत्व किया और सफल भी हुए। 25 प्रतिशत धन वापसी के समझौते के बाद, किसान जान गये कि उनके पास अधिकार हैं तथा उनके साथ उनके रक्षक भी हैं। उन्होंने साहसपूर्वक व्यवहार करना भी सीख लिया। अंग्रेज जागीरदार इतने हतोत्साहित हो गए कि उन्होंने जमीनें छोड़ दीं जिन्हें किसानों को दे दिया गया और नील की बँटाईदारी समाप्त हो गई।

Question 2.
Why do you think Gandhiji considered the Champaran episode to be a turning point in his life?
आपके अनुसार गाँधीजी चम्पारण प्रकरण को अपने जीवन को बदलाव बिन्दु क्यों मानते थे?
Answer:
The Champaran episode was a turning point in Gandhiji’s life because his method consisting of disobedience and acceptance of punishment came out successful. The whole nation came to know that they could oppose the British. The peasants became aware of their strength and they came to know that if they were united, they could make the British landlords work on their own terms. This episode emerged as the first ray of hope for the Indians. Now the Britishers were no longer invincible for them and the peasants were no longer utterly fear-stricken poor fellows. The clear message of this episode was that Gandhi Ji could not be ordered about in his own country. This was his successful attempt to mould a new free Indian.

चम्पारण प्रकरण गाँधीजी के जीवन का बदलाव बिन्दु था क्योंकि अवज्ञा और दण्ड स्वीकार करने का उनका तरीका सफल सिद्ध हुआ। पूरा देश जान गया कि वे अंग्रेजों का विरोध कर सकते थे। किसानों को अपनी शक्ति का अहसास हो गया और वे यह जान गये कि यदि वे संगठित रहेंगे तो वे अंग्रेज जमीदारों से अपनी शर्तों पर काम करवा सकेंगे। यह प्रकरण भारतीयों के लिए आशा की पहली किरण की तरह निकलकर आया। अब उनके लिए अंग्रेज अजेय नहीं रह गये थे और किसान सिर्फ भयग्रस्त बेचारे नहीं थे। इस प्रकरण को स्पष्ट संदेश यह था कि गाँधीजी को उनके ही देश में आदेश नहीं दिया जा सकता था। यह उनका एक नये स्वतंत्र भारतीय को ढालने का सफल प्रयास था।

Question 3.
How was Gandhiji able to influence lawyers? Give instances.
गाँधीजी वकीलों को प्रभावित करने में किस तरह सफल हुए? उदाहरण दीजिए।
Answer:
Muzzafarpur lawyers told Gandhiji about their cases and the amount of their fee. Gandhi rebuked the lawyers for collecting that much of fee from the poor peasants. Gandhiji said that law courts were useless if the peasants were so crushed and fear-stricken. Again when Gandhiji was going to be tried in the court at Motihari, he asked them what they would do if he was sent to prison. One of the lawyers said that they would go home if he was sent to prison. Gandhiji asked them what would happen to the peasants and who would fight for them. He told them that it would be an injustice to the peasants. When the lawyers noticed that despite being a stranger Gandhi was ready to go to jail for the peasants, they felt ashamed. They promised to follow him. That is how Gandhiji was able to influence the lawyers.

मुजफ्फरपुर के वकीलों ने गाँधीजी को अपने मुकदमों के बारे में तथा फीस की राशि के बारे में बताया। गाँधीजी ने इतनी ज्यादा फीस वसूलने पर वकीलों को फटकारा। गाँधीजी ने कहा कि यदि किसान इतने दबे हुए और भयभीत हैं तो अदालतें बेकार हैं। पुनः जब गाँधीजी की मोतिहारी की अदालत में सुनवाई की जानी थी तो गाँधीजी ने उनसे पूछा कि यदि उन्हें| (गाँधीजी को) जेल भेज दिया गया तो वे क्या करेंगे। एक वकील ने कहा कि यदि उन्हें जेल भेजा जाएगा तो वे घर चले जाएंगे। गाँधीजी ने उनसे पूछा कि किसानों का क्या होगा और उनके लिए कौन लड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसानों के साथ अन्याय होगा। जब वकीलों ने देखा कि एक अजनबी होते हुए भी वे किसानों के लिए जेल जाने को तैयार थे, तो उन्होंने शर्म महसूस की। उन्होंने उनका अनुसरण करने का वादा किया। इस तरह गाँधीजी ने वकीलों पर अपना प्रभाव डाला।

Question 4.
How do we know that ordinary people too contributed to the freedom movement?
हमको कैसे पता चलता है कि साधारण लोगों ने भी स्वतन्त्रता आन्दोलन में योगदान किया था?
Answer:
The freedom movement was for ordinary people. No leader could do anything for ordinary people without their involvement. So the contribution of ordinary people could never be ruled out in this case also. Gandhiji wanted ordinary people to be courageous and fearless. The people showed their courage by following Gandhiji. Gandhiji could not have done anything for them if the peasants had not been united. When the peasants of Motihari knew that Gandhiji was in trouble, they came to support him. People gathered around the court where Gandhiji was summoned. Even the British authorities could not control them. This shows people gave up their indifference. But without the participation of the common men, the freedom movement could not be successful.

स्वतन्त्रता आन्दोलन जन सामान्य के लिए ही था। लोगों की भागीदारी के बिना कोई नेता उनके लिए कुछ नहीं कर सकता था। अतः इस मामले में भी जन भागीदारी को नकारा नहीं जा सकता था। गाँधीजी चाहते थे कि आम जन साहसी व निर्भीक बने। लोगों ने गाँधीजी को अनुगमन कर अपने साहस का परिचय दिया। अगर किसान संगठित न होते तो गाँधीजी उनके लिए कुछ भी नहीं कर पाते। जब मोतिहारी के किसानों को पता चला कि गाँधीजी परेशानी में हैं तो वे उनका समर्थन करने आ गये। लोग न्यायालय के चारों ओर जमा हो गए जहाँ गाँधीजी को बुलाया गया था। ब्रिटिश अधिकारी भी उन्हें नियन्त्रित न कर सके । इससे पता लगता है कि लोगों ने अपनी उदासीनता त्याग दी थी। आम जन की सहभागिता के बिना, स्वतन्त्रता आन्दोलन सफल नहीं हो सकता था।

Question 5.
“The battle of Champaran is won,” Explain the statement.
“चम्पारण की लड़ाई जीत ली गई है,” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
OR
Narrate the incident that is an example of Gandhiji’s civil disobedience.
उस घटना का वर्णन कीजिए जो गाँधीजी की सविनय अवज्ञा का एक उदाहरण है।
Answer:
In the year 1917, the condition of the farmers of Champaran was very pitiable. Gandhiji visited the secretary of the British landlords’ association who denied to give him any information. Then he went to the British official commissioner but he threatened and advised him to leave the place. But Gandhiji did not leave. He was served a notice to quit Champaran but Gandhiji disobeyed the order. He was summoned to the court the next day. On the next morning, thousands of peasants gathered to support Gandhiji. All the advocates were also ready to follow him to jail. When Gandhiji saw that the public was ready to support him and to go to jail with him in the protest against the policy of the government, he exclaimed, “The battle of Champaran is won.”

सन् 1917 में चम्पारण के किसानों की दशा अत्यंत दयनीय थी। गाँधीजी ब्रिटिश लैण्डलॉर्ड एसोसिएशन के सेक्रेटरी से मिले जिसने उन्हें कोई भी सूचना देने से मना कर दिया। तब वे ब्रिटिश अधिकारी कमिश्नर के पास गए जिसने उन्हें धमकी दी और उस स्थान से चले जाने की सलाह दी। परन्तु गाँधीजी नहीं गये। उन्हें एक नोटिस थमा दिया गया जिसके अनुसार उन्हें चम्पारण छोड़ने का आदेश मिला, पर उन्होंने इस आदेश की अवहेलना कर दी। उन्हें अगले दिन न्यायालय में उपस्थित होने का कानूनी आदेश मिल गया। दूसरे दिन प्रात:काल गाँधीजी के समर्थन में हजारों किसान एकत्र हो गए। सभी वकील भी उनके साथ जेल जाने को तैयार हो गए। जब गाँधीजी ने देखा कि सारी जनता उनके साथ सरकारी नीति का विरोध करने और जेल जाने को तैयार है तब उन्होंने घोषणा की कि “चम्पारण की लड़ाई जीत ली गई है।”

Question 6.
What did Gandhiji do for social and cultural upliftment of Champaran? (S.S. Exam.2017)
चम्पारण के सामाजिक तथा सांस्कृतिक उद्धार हेतु गाँधीजी ने क्या किया?
Answer:
Gandhiji saw the social and cultural backwardness of Champaran, he wanted to do something about it immediately. First of all, he appealed to teachers. Mahadev Desai and Narhari Parekh with their wives volunteered for the work. Several more persons came forward from all over the country to give their services. His son Devdas and wife, Kasturba, also came there. Primary schools were opened in six villages. Kasturba taught the rules on personal cleanliness and community sanitation. In Champaran, health conditions were also miserable. Gandhiji got a doctor to volunteer his services for six months. Gandhiji also noticed the filthy state of women’s clothes. He asked Kasturba to talk to them about it.

गाँधीजी ने चम्पारण के सांस्कृतिक व सामाजिक पिछड़ेपन को देखा और वे शीघ्र ही इन सबके बारे में कुछ काम करना चाहते थे। सर्वप्रथम उन्होंने अध्यापकों से अपील की। महादेव देसाई, नरहरि पारेख और उनकी पत्नियों ने इस काम के लिए स्वयं को पेश किया। देशभर से और भी कई लोग अपनी सेवाएँ देने के लिए आगे आए। उनका पुत्र देवदास और पत्नी कस्तूरबा भी वहाँ आ गए। छ: गाँवों में प्राइमरी स्कूल खोले गए। कस्तूरबा वैयक्तिक स्वच्छता और सामुदायिक स्वच्छता के नियम सिखाती थीं। चम्पारण में स्वास्थ्य के हालात भी दयनीय थे। गाँधीजी को छ: माह तक स्वेच्छा से अथवा निःशुल्क सेवा करने के लिए एक डॉक्टर मिल गया। गाँधीजी ने महिलाओं के कपड़ों की गन्दी हालत भी देखी। उन्होंने कस्तूरबा से उनसे इस विषय में बात करने को कहा।

Question 7.
The events in this part of the text illustrate Gandhiji’s method of working. Can you identify some instances of this method and link them to his ideas of Satyagraha and non-violence?
पाठ के इस अंश की घटनाएँ गाँधीजी की कार्यशैली के उदाहरण हैं। क्या आप इस कार्यशैली के उदाहरण पहचान सकते हैं तथा उन्हें उनके सत्याग्रह तथा अहिंसा के विचारों से जोड़ सकते हैं?
Answer;
Gandhiji arrived in Champaran and visited the parties concerned. Gandhiji was asked to leave the place by the commissioner of the area but he didn’t. Accompanied by several lawyers, Gandhiji went to Motihari. A peasant was maltreated in a nearby village. Gandhiji decided to go and see. Gandhiji was served a notice to leave Champaran immediately. Gandhiji wrote on the receipt that he would disobey the order. As a result, Gandhiji was asked to appear in the court the next day. Gandhiji went to appear in the court, and a great crowd of his supporters also gathered there. Gandhiji helped the authorities in maintaining law and order. Gandhiji asked them to punish him as he had disobeyed Government order and told the authorities that he had done so for a greater cause. These are the instances that show his great faith in Satyagraha and non-violence.

गाँधीजी चम्पारण पहुँचे और सम्बन्धित पक्षों से मिले। गाँधीजी को वहाँ के कमिश्नर द्वारा उस स्थान को छोड़ने के लिए कहा गया परन्तु उन्होंने स्थान नहीं छोड़ा। कई वकीलों के साथ गाँधीजी मोतिहारी गए। पास के एक गाँव में किसी किसान के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। गाँधीजी ने जाकर देखने का निश्चय किया। गाँधीजी को तुरन्त चम्पारण छोड़ने का एक नोटिस मिला। गाँधीजी ने रसीद पर लिखा कि वे आदेश का उल्लंघन करेंगे। इसके परिणामस्वरूप गाँधीजी को अगले दिन न्यायालय में उपस्थित होने को कहा गया। गाँधीजी न्यायालय में उपस्थित होने गये, और वहाँ उनके समर्थकों की भारी भीड़ भी जमा हो गई। गाँधीजी ने कानून और व्यवस्था बनाये रखने में प्रशासन की सहायता की। चूँकि गाँधीजी ने आज्ञा का उल्लंघन किया था अतः उन्होंने अंग्रेजों से उन्हें दण्ड देने के लिए कहा और उनसे कहा कि उन्होंने ऐसा किसी महानतर कार्य के लिए किया है। ये ऐसे उदाहरण हैं जो दर्शाते हैं कि गाँधीजी का सत्याग्रह और अहिंसा में बहुत विश्वास था।

Question 8.
What was the beginning of the peasants’ liberation from fear of the British? Write your answer with reference to the farmers of Champaran.
ब्रिटिश लोगों के डर से किसानों की मुक्ति की शुरुआत क्या थी? चम्पारण के किसानों के सन्दर्भ के साथ अपना उत्तर दीजिए।
Answer:
When a report came to Gandhiji that a peasant had been maltreated in a nearby village, he started out to see him. But the police stopped him and served him a notice to leave Champaran immediately. Gandhiji was not at all ready to leave Champaran. He decided not to obey the British. He wrote on the receipt that he would not obey the order served to him. He was summoned to the court. The peasants of nearby villages had heard that a Mahatma who wanted to help them was in trouble with the authorities. They came to Motihari in large number to support their champion. Gandhiji was overwhelmed with this and declared that gathering in thousands around the courthouse was the beginning of their liberation from fear of the British.

जब मोतीहारी में गाँधीजी के पास एक सूचना आई कि वहाँ निकट के एक गाँव में एक किसान के साथ दुर्व्यवहार किया गया है, तब वे उसे देखने निकल पड़े। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और उन्हें शीघ्र चम्पारण छोड़ने का नोटिस दे दिया। गाँधीजी चम्पारण छोड़ने को बिल्कुल तैयार नहीं थे। उन्होंने अंग्रेजों की आज्ञा न मानने का निश्चय कर लिया। उन्होंने रसीद पर लिख दिया कि वे आदेश का पालन नहीं करेंगे। उन्हें न्यायालय बुलाया गया । आस-पास के गाँवों के किसानों ने यह सुना था कि एक महात्मा जो उन्हें सहायता देना चाहता है वह अधिकारियों से उलझ गया था। वे अपने हिमायती के समर्थन में बहुत बड़ी संख्या में मोतिहारी। आये। इससे गाँधीजी अभिभूत हो गये और उन्होंने घोषणा की कि न्यायालय के इर्द-गिर्द हजारों की संख्या में उनको प्रदर्शन अंग्रेजों के भय से उनकी मुक्ति की शुरुआत थी।

Question 9.
Why was the official inquiry commission appointed? What did the findings of the commission reveal? What was its impact on British planters?
सरकारी जाँच आयोग की नियुक्ति क्यों की गई थी? आयोग की जाँच से क्या उजागर हुआ? इसका अंग्रेज जमींदारों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer:
Gandhiji compelled the British authorities to take note of the poor peasants’ plight. The Lieutenant Governor appointed an official commission of inquiry into the indigo sharecroppers’ situation. The commission consisted of landlords, government officials, and Gandhiji as the sole representative of the peasants. The official inquiry assembled a crushing mountain of evidence against the big planters. The findings of the commission revealed the plight of the peasants of Champaran. Seeing this, the British planters agreed, in principle, to make refunds to the peasants. They asked Gandhiji how much they should pay. They agreed to pay only 25% of the money which they had illegally and deceitfully extorted from the sharecroppers.

गाँधीजी ने अंग्रेजों को मजबूर कर दिया कि वे गरीब किसानों की परेशानी पर ध्यान दें। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने नील के बँटाईदारों की स्थिति की जाँच के लिए एक सरकारी आयोग नियुक्त किया। इस आयोग में जमींदार थे, सरक़ारी अधिकारी थे, और किसानों के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गाँधीजी थे। इस सरकारी जाँच ने बड़े जमींदारों के विरुद्ध बहुत से साक्ष्य एकत्र किये। आयोग की जाँच ने स्पष्ट किया कि चम्पारण के किसान दयनीय दशा में थे। यह देखकर अंग्रेज जमींदार सैद्धान्तिक रूप में किसानों को पैसा लौटाने के लिए सहमत हो गए। उन्होंने गाँधीजी से पूछा कि उन्हें कितना पैसा लौटाना चाहिए। वे बँटाईदारों से गैरकानूनी रूप से और धोखे से ऐंठे गये। पैसे का मात्र 25% लौटाने को सहमत हुए।

Question 10.
The lesson ‘Indigo’ brings out several qualities of Gandhiji’s character. Write your answer in about 125 words.
‘Indigo’ पाठ गाँधीजी के चरित्र की अनेक विशेषताओं को उजागर करता है। अपना उत्तर लगभग 125 शब्दों में लिखो।
Answer:
Gandhiji today is not just a man but a whole school of thought. He has provided humanity with a unique philosophy and way to fight against injustice and oppression. In the light of the lesson ‘Indigo’, let us discuss a few traits of his charming personality. Gandhiji was a very simple man. He was available even to an illiterate peasant like Rajkumar Shukla. He did everything systematically. He did not at once plunge into a fight. Instead, he first understood the problem and worked out a plan and acted accordingly. The force behind all his actions was the plight of the poor and the downtrodden. And as for his courage, it was par excellence. He was also a good administrator. During his long stay at Champaran, he kept a long distance watch at his ashram through the mail.

आज गाँधीजी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं वरन् एक विचार संस्थान हैं। उन्होंने मानव जाति को अन्याय और अत्याचार से लड़ने का अद्वितीय तरीका और दर्शन प्रदान किया है। ‘Indigo’ पाठ के प्रकाश में, आइये उनके आकर्षक व्यक्तित्व के कुछ गुणों की चर्चा करें। गाँधीजी बहुत ही सरल व्यक्ति थे। वे राजकुमार शुक्ला जैसे अनपढ़ किसान के लिए भी सुलभ थे। वे प्रत्येक कार्य को व्यवस्थित तरीके से करते थे। वे तुरन्त ही लड़ाई में नहीं कूदे। बजाय इसके उन्होंने पहले समस्या को समझा, एक योजना बनाई और तदनुरूप कार्य किया। उनके हर कार्य के पीछे की शक्ति दलित और गरीब की परेशानी होती थी। और जहाँ तक उनकी बहादुरी का सवाल है, यह उच्चकोटि की थी। वह एक अच्छे प्रशासक भी थे। चम्पारण में अपने लम्बे प्रवास के दौरान वे दूर से ही डाक द्वारा अपने आश्रम पर नज़र रखते थे।

Activity 2: Vocabulary

Question (a).
Given below are some phrasal verbs, consult a dictionary and use each of them in a Sentence:
नीचे कुछ phrasal verbs दिये हुए हैं। शब्दकोष की सहायता से उनमें से प्रत्येक का किसी वाक्य में प्रयोग कीजिए:
act upon, add up to, aim at, argue down, ask after, back down, back out, backup, bring up, ring about.
Answer:
1. act upon – He acted upon his lawyer’s advice.
2. add up to – All his notes added up to exactly two thousand.
3. aim at – Gandhiji aimed at making India free.
4. argue down – Shyam argued down his opponent in the debate.
5. ask after – Gandhi always asked after his ashram in his letters.
6. back down – Owing to protest, the government backed down the new tax.
7. back out – Losing trust, he backed out of the deal at the last moment.
8. back up – Gandhiji backed up the peasants’ struggle.
9. bring up – Parents bring up their children with great love and care.
10. bring about – The struggle brought about a change in the British government’s attitude.

Question (b).
Given below are some confusing words. Consult a dictionary and use each of them in a Sentence:
नीचे कुछ भ्रमित करने वाले शब्द दिये गए हैं। शब्दकोष की सहायता से इनमें से प्रत्येक का एक वाक्य में प्रयोग कीजिए:

"RBSE
Answer:
RBSE Solutions for Class 12 English Rainbow Chapter 7 Indigo activity 2b

Activity 3: Speech Activity

Question 1.
Draft a speech on non-violence as a potent weapon for world peace.
विश्वशान्ति के लिए एक सम्भावित अस्त्र के रूप में अहिंसा पर एक भाषण तैयार कीजिए।
Answer:
Respected Principal sir, teachers and friends! I am going to speak on ‘non-violence as a potent weapon for world peace’. The path of non-violence shown by a number of sages is a way to the theory of ‘live and let live’. Mahatma Gandhi defeated the British Empire and won the freedom for India using the weapon of non-violence. He showed the world that non-violence is not only a way of life but also a weapon for peaceful struggle. As far as I think, non-violence has great potential as a weapon for world peace. A world, based on the principle of non-violence, will be the most beautiful world.

Question 2.
Prepare a speech for your prayer assembly on the role of the revolutionary leaders of the Indian Freedom Struggle.
भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में क्रान्तिकारी नेताओं की भूमिका पर अपनी प्रार्थना सभा के लिए एक भाषण तैयार कीजिए।
Answer:
Respected Principal, teachers and my friends! I’m going to speak on the role of the revolutionary leaders of the Indian freedom struggle. During the days of our freedom struggle, two parallel powers were working against the British rule. On one side there were non-violent demonstrations under the leadership of Mahatma Gandhi. The other side was led by revolutionary leaders like Subhash Chandra Bose, Bhagat Singh, Sukhdev, Rajguru, Chandrashekhar Azad etc. These revolutionary leaders were full of vigour and did everything to terrorise the British. In my view, the revolutionary leaders played a great role in getting our freedom from the British.

Activity 4: Composition
Write a letter to the editor of the Indian Express about the exploitation of the Indigo farmers at the hands of the English landlords on the basis of this lesson.
इस पाठ के आधार पर अंग्रेज जमींदारों के द्वारा नील के किसानों के शोषण के विषय में Indian Express के सम्पादक को एक पत्र लिखिए।
Answer:
Hari Mohan
27, Ranjeet Nagar
Bharatpur
July 18 —
The Editor
The Indian Express
Bharatpur

Subject:
Regarding exploitation of the Indigo farmers at the hands of the English landlords.
Sir
It’s very painful to inform that most of the Indian farmers were working as sharecroppers in Champaran. They were working on the land of English landlords and were forced to grow indigo on the fifteen per cent area of the total farmland. This whole cultivation was to be surrendered to the landlords as the rent of the land. The British landlords were asking for compensation from the farmers to free them from the agreement. It was an unfair act of the English landlords. They exploited our poor Indian farmers. But due to the efforts of Gandhiji, the English landlords gave in and the exploitation of Indian farmers came to an end. You are respectfully requested to publish this article about the exploitation of the English landlords in your esteemed newspaper.
Yours sincerely
Hari Mohan