Lost Spring [खोया हुआ बसंत] Anees Jung

About the Lesson (पाठ के बारे में)

Anees Jung (1964) एक प्रसिद्ध भारतीय विद्वान तथा कवि हैं। आपने भारत व विदेश में प्रमुख समाचार-पत्रों के लिए पत्रकार के रूप में काम किया है। आप विशेषकर अपने जिंदादिल व सजीव विवरण के लिए जानी जाती हैं। Lost Spring में Anees Jung उन परिवारों की दयनीय व शोचनीय दशा का चित्रण करती हैं जो गरीबी व शिक्षा के अभाव के कारण शोषण के दुष्चक्र में फँसकर अभाव का जीवन जीते हैं। आप उन बच्चों की तरफ ध्यान खींचती हैं जो अपने परिवारों की आय को अनुपूरित करने (कमी पूरी करने) के लिए छोटे | मोटे तथा. खतरनाक कार्य करते हैं। उनमें से अधिकतर अपनी युवावस्था प्राप्त करने से पूर्व ही विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

“Sometimes I find………..a perpetual state of poverty. (Page 21)

कठिन शब्दार्थ : Garbage (गाबिज्) = कूड़ा-कचरा । encounter (इन्काउन्टर)) = मिलती हूँ। scrounging (स्क्राउंजिंग) = खोजबीन करते हुए। dumps (डम्प्स) = ढेर | amidst (अमिड्स्ट) = के बीच। swept away (स्वेप्ट अवे) = बहा ले गये। mutters (मट्ज) = बुदबुदाता है, अस्पष्ट बोलता है। glibly (ग्लिब्लि) = लापरवाही के साथ। hollow (हॉलो) = अर्थहीन, खोखली। half-joking (हाफ-जोकिंग) = थोड़े मजाक में। broadly (ब्रॉड्लि) = खुलकर। embarrassed (इम्बैरॅस्ट्) =

असमंजस में। bleak (ब्लीक्) = नीरस एवं निराशापूर्ण | announces (अनाउन्स्ज) = जोर से बोलता है। universe (यूनिवॅस) = विश्व। roams (रोम्ज) = भटकता है। barefoot (बेअफुट) = नंगे पैर। shelf (शेल्फ) = ताक। shuffles (शफल्ज) = इधर-उधर घसीटता है। owned (ओन्ड) = स्वामित्व रखा। tradition (ट्रडिशन्) = परम्परा । excuse (इक्स्क्यू ज) = बहाना । perpetual (पॅपेचुअल) = स्थायी।

हिन्दी अनुवाद-‘कभी-कभी मुझे कूड़े-कचरे में एक रुपया मिल जाता है।

“तुम यह क्यों करते हो?” मैं साहेब से पूछती हूँ जिससे मेरा सामना प्रत्येक सुबह होता है और जो मेरे पडौस में कूड़े-कचरे के ढेरों में सोने की खोजबीन करता रहता है। साहेब ने अपना घर काफी समय पूर्व छोड़ दिया था। ढाका के हरे-भरे खेतों के बीच स्थित उसका घर अब दूर की स्मृति भी नहीं रह गया है। कई तूफान जो उनके खेतों एवं घरों को बहा ले गये थे, उसकी माँ उसे बताती है। इसी कारण वे छोड़कर आ गये, सोने की तलाश करने, बड़े शहर में जहाँ वह अब रहता है। “मुझे करने को कुछ और काम नहीं है”, वह दूसरी ओर देखते हुए उत्तर देता है। “स्कूल जाया करो”, मैं लापरवाही के साथ कहती, तुरन्त यह महसूस करते हुए कि मेरी सलाह कितनी निरर्थक एवं खोखली प्रतीत होगी।

“मेरे पडौस में कोई स्कूल नहीं है। जब वे स्कल बना देंगे, तो मैं चला जाऊँगा।” “अगर मैं एक स्कूल शुरू कर दूं तो क्या तुम आओगे?” मैं पूछती हूँ, थोड़े मजाक के साथ। “हाँ”, वह कहता है, खुलकर मुस्कराते हुए। कुछ दिनों बाद मैं उसे अपने पास दौड़कर आते हुए देखती हूँ। “क्या आपका स्कूल तैयार हो गया है?” “स्कूल बनाने में काफी ज्यादा समय लगता है”, मैं असमंजस में उत्तर देती हूँ, एक ऐसा वादा करने के कारण जिसे पूरा करने का कोई मन्तव्य नहीं था। लेकिन मेरे जैसे वादे उसकी नीरस एवं निराशापूर्ण दुनिया के हर कोने में भरे पड़े रहते हैं। महीनों तक उसे जानने के बाद मैं उससे उसका नाम पूछती हूँ। “साहेब-ए-आलम”, वह जोर से बोलता है। वह नहीं जानता कि इसका तात्पर्य क्या होता है। अगर वह इसका अर्थ जाने—संसार का मालिक तो उसे विश्वास करने में बड़ी कठिनाई होगी। अपने नाम के अर्थ से अनभिज्ञ रहते हुए वह अपने दोस्तों के साथ गलियों में भटकता है, नंगे पैरों वाले लड़कों की फौज जो सुबह के पक्षियों की भाँति प्रकट होते हैं और दुपहर तक गायब हो जाते हैं। इतने महीनों के बाद मैं उन्हें पहचानने लगी हूँ, प्रत्येक को।

“तुम चप्पलें क्यों नहीं पहने हो?” मैं एक लड़के से पूछती हूँ। “मेरी माँ ने उन्हें (चप्पलों को) ताक से नीचे नहीं उतारा।” उसने सरलता से जवाब दिया। “अगर उसने उतार कर दे भी दिया होता तो भी वह उन्हें फेंक देगा”, दूसरे लड़के ने बताया जिसने बेमेल जूते पहन रखे थे। जब मैं इस पर टिप्पणी करती हूँ तो वह अपने पैरों को इधर-उधर घसीटता है और कुछ भी नहीं कहता है। “मुझे जूतों की आवश्यकता है”, तीसरा लड़का कहता है जिसके पास जिन्दगी भर से जूते नहीं रहे । देश-भर में घूमते हुए मैंने बच्चों को नंगे पैर चलते देखा है, शहरों में, गाँव की सड़कों पर। ऐसा पैसों की कमी के कारण नहीं है, बल्कि नंगे पैर रहना एक परम्परा है, यह एक स्पष्टीकरण है। मुझे आश्चर्य होता है कि क्या यह एक बहाना मात्र है, दरिद्रता की एक स्थायी स्थिति को समझा डालने का।

I remember a story…… ..remain shoeless. (Pages 21-22)

कठिन शब्दार्थ : Priest (प्रीस्ट्) = पुजारी। drowned (ड्राउन्ड) = डूबा हुआ। desolation

(डेसलेशन्) = खालीपन, उजाड़ा। panting (पैन्टिंग) = हाँफता हुआ। rag pickers (रैग् पिकॅज) = कचरा इकट्ठा करने वाले।

हिन्दी अनुवाद-मुझे एक कहानी याद है जिसे उडीपी के एक व्यक्ति ने एक बार मुझे सुनाई थी। एक छोटे लड़के के रूप में वह एक पुराने मन्दिर के पास से गुजर कर स्कूल पहुँचता था, जहाँ उसके पिता पुजारी थे। वह मन्दिर पर थोड़े समय के लिए रुकता था और जूतों की एक जोड़ी के लिए प्रार्थना करता था। तीस वर्ष बाद मैं उसके नगर तथा उसके मन्दिर में गई जहाँ अब खालीपन एवं उजाड़ का वातावरण था। पिछवाड़े में, जहाँ अब नया पुजारी रहता था, वहाँ लाल एवं सफेद प्लास्टिक की कुर्सियाँ थीं। एक लड़का जिसने स्लेटी रंग की वर्दी, जुर्राबें तथा जूते पहन रखे थे, हाँफता हुआ आया और उसने अपना स्कूल का थैला सिमट जाने वाले पलंग पर फेंक दिया। लड़के की ओर देखते हुए मुझे दूसरे लड़के की प्रार्थना का स्मरण हुआ जो उसने देवी माँ से की थी जब उसे अन्त में जूते प्राप्त हो गये थे, “मैं इन्हें कभी न खोऊँ।” देवी ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली थी। वर्तमान पुजारी के पुत्र के जैसे लड़के अब जूते पहनते थे। किन्तु कई अन्य, जैसे मेरे पड़ोस में कचरा बीनने वाले लड़के, आज भी जूतों के बिना ही हैं।

My acquaintance…. …….it is even more. (Page 22)

कठिन शब्दार्थ : Acquaintance (अक्वेन्टन्स्) = जान-पहचान । periphery (परिफरि) = सीमा।

metaphorically (मेटफारिलि ) = उपमा की दृष्टि से। squatters (स्क्वाटज) = सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमा कर रहने वाले I wilderness (विल्डनस्) = उजाड़, सुनसान जगह । structures (स्ट्रक्चेंज) = घर, झोंपड़ियाँ । sewage (सूइज्) = गंदे पानी का निकास। drainage (ड्रेनिज्) = जमीन के अन्दर गंदे पानी आदि के पाइपों की व्यवस्था। running water (रनिंग वॉटॅ(र)) = नलों से मिलने वाला पीने योग्य पानी। identity (आइडेन्टॅटि) = पहचान। permits (पॅमिट्स) = आज्ञा-पत्र । survival

इवल) = जीवन। aching (एकिंग) = दर्द करता हुआ। tattered (टैटड्) = फटी हुई, चिथड़ा। pitch (पिच) = गाड़ देते हैं। transit (ट्रैन्जिट्) = अस्थायी। proportions (प्रपॉश्न्ज ) = आकार, कलेवर । fine art (फाइन् आट्) = ललित कला।

हिन्दी अनुवाद-नंगे पैर कचरा बीनने वालों से मेरा परिचय मुझे सीमापुरी ले जाता है, जो दिल्ली की सीमा पर है लेकिन अन्य प्रकार से इससे (दिल्ली से) मीलों दूर है। जो लोग यहाँ रहते हैं वे अवैध रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं। ये बंगलादेश से 1971 में आये थे। साहेब का परिवार भी इन्हीं में से एक है। तब सीमापुरी एक उजाड स्थान था। अभी भी यह ऐसा ही है किन्तु अब यह खाली नहीं है। मिट्टी से बने मकानों में, जिन पर टीन तथा त्रिपालों की छतें हैं, जो गंदे पानी के निकास, जमीन के अन्दर गंदगी ले जाने वाले पाइपों की व्यवस्था अथवा पीने योग्य नल के पानी की व्यवस्था से रहित हैं, दस हजार कचरा बीनने वाले लोग रहते हैं। ये लोग 30 से भी अधिक वर्षों से यहाँ रह रहे हैं, बिना किसी पहचान के, बिना आज्ञा-पत्र के, किन्तु राशन कार्ड के सहित, जिससे उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाते हैं और उन्हें अनाज खरीदने में समर्थ बना देते हैं। भोजन जीवन के लिए अधिक आवश्यक होता है, पहचान की अपेक्षा । “अगर दिन के अन्त में हम अपने परिवारों को भोजन खिला सकते हैं और बिना पेट में दर्द के सो सकते हैं, तो हम यहाँ रहना चाहेंगे बजाय उन खेतों पर जो हमें अनाज नहीं देते थे,” ऐसा औरतों के एक समूह का कहना है जो फटी पुरानी साड़ियाँ पहने हैं, जब मैं उनसे पूछती हूँ कि उन्होंने हरे-भरे खेतों तथा नदियों वाली जमीन को क्यों छोड़ दिया था। जहाँ भी उन्हें भोजन मिल जाता है, वे अपना तंबू वहीं गाड़ देते हैं जो उनके अस्थायी घर बन जाते हैं। बच्चे इनमें बड़े होते हैं और जिन्दा रहने में भागीदार बनते हैं। और सीमापुरी में जिन्दा रहने के मायने हैं, कचरा बीनना। वर्षों की अवधि में कचरा बीनना, एक ललित कला का कलेवर ग्रहण कर चुका है। कचरा उन लोगों के लिए सोना (स्वर्ण) होता है। यह कचरा उनकी रोजाना की रोटी, उनके सिरों पर एक छत, फिर यह टपकने वाली छत ही क्यों न हो, होता है। लेकिन एक बच्चे के लिए यह इससे भी कुछ अधिक होता है।

“I sometimes find……………………..no longer his own master. (Pages 22-23)

कठिन शब्दार्थ : Lighting up (लाइटिंग अप) = चमक उठती हुई। wrapped (रैप्ट) = लिपट हुआ। fenced (फेन्स्ट) = बाड़ लगा हुआ। hums (हम्ज) = गुनगुनाता हुआ बोलता है। content (कन्टेन्ट) = सन्तुष्ट। discarded (डिस्काड्ड) = त्यागे हुए। intently (इन्टेट्लि ) = ध्यान से। carefree (केअफ्री) = बेफिक्र।

हिन्दी अनुवाद-“मुझे कभी-कभी एक रुपया मिल जाता है, यहाँ तक कि दस रुपये का नोट भी”, साहेब कहता है, उसकी आँखें चमक उठती हैं। जब आपको कचरे के ढेर में चाँदी का एक सिक्का मिल जाता है तो आप छान-बीन बन्द नहीं कर देते हैं, क्योंकि और अधिक पीने की उम्मीद जो रहती है। ऐसा लगता है कि बच्चों के लिए कचरे का एक अलग ही अर्थ होता है, उनके माता-पिता के लिए अर्थ की तुलना में। बच्चों के लिए कचरा आश्चर्य में लिपटी चीज होता है, बड़ों के लिए यह जिन्दा रहने का साधन होता है।

सर्दी की एक सुबह मैं साहेब को पडौस के क्लब के बाड लगे दरवाजे के पास खडा देखती हैं, जो सफेद वस्त्र पहने हुए दो युवकों को टेनिस खेलता देख रहा है। “मैं इस खेल को पसन्द करता हूँ”, वह गुनगुनाकर बोलता है तथा वह इसे बाड़ के पीछे खड़े रहते हुए देखकर ही सन्तुष्ट है। “मैं अन्दर चला जाता हूँ जब कोई भी आसपास नहीं होता है”, वह स्वीकार करता है। “द्वारपाल मुझे झूला काम में लेने देता है।”

साहेब भी टेनिस के जूते पहने हुए है जो उसके रंग उड़ चुकी कमीज तथा निकर के साथ अटपटे दिखायी देते हैं। “किसी ने मझे ये जते दिए थे” वह स्पष्टीकरण के रूप में कहता है। यह

धनाढ्य लड़के के ठुकराये हुए जूते थे जिसने शायद इन्हें पहनने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि किसी एक जूते में छिद्र हो गया था, जो साहेब को परेशान नहीं करता है। नंगे पैरों से चलने वाले एक व्यक्ति के लिए, छिद्र वाले जूते भी किसी स्वप्न के सच हो जाने से कम नहीं होते। लेकिन जिस खेल को वह इतने ध्यान से देख रहा है वह उसकी पहुँच से बाहर है।

इस सुबह साहेब दूध के बूथ की ओर जा रहा है। उसके हाथ में एक स्टील का कनस्तर है। “अब मैं उधर सड़क पर चाय की एक थड़ी पर काम करता हूँ।” वह दूर की ओर इशारा करते हुए बोलता है। “मुझे 800 रु. तथा सभी वक्त का भोजन मिलता है।” क्या उसे काम पसन्द है? मैं पूछती हूँ। मैं देखती हूँ कि उसके चेहरे ने निश्चिन्तता का भाव खो दिया है। स्टील का कनस्तर उस प्लास्टिक के थैले से अधिक भारी प्रतीत होता है जिसे वह अपने कंधे पर इतनी आसानी से ढोया करता था। वह थैला उसी का था। कनस्तर उस व्यक्ति का है जो चाय की । दुकान पर स्वामित्व रखता है। साहेब अब स्वयं का मालिक नहीं रहा।

“I want to drive…………………………….art of making bangles. (Pages 23-24)

कठिन शब्दार्थ : Insists (इन्सिस्ट्स) = जोर देता है, अड़ा हुआ है। looms (लूम्ज) = अस्पष्ट किन्तु विशाल आकार में दिखाई देता है। mirage (मिराश्) = मृगमरीचिका | glass-blowing (ग्लास ब्लोइंग) = काँच को आकार देना। furnaces (फनिस्ज) = भट्टियाँ। welding (वेल्डिंग) = जोड़ना।

Illegal (इलीग्ल्) = गैर-कानूनी। dingy (डिन्जि) = गंदी एवं अन्धेरी। cells (सेल्ज) = कोठरियाँ। slog (स्लॉग) = मेहनत करते हैं। beam (बीम्) = चमकने लगती हैं। volunteers (वॉलनटिअज) = स्वेच्छा प्रकट करता है। stinking (स्टिंकिंग) = बदबूदार। hovels (हॉव्ल्ज् ) = टूटी फूटी झोंपड़ियाँ । wobbly (वॉब्लि) = डगमगाते हुए। co-existing (को-इन्जिस्टिंग) = साथ-साथ रहते हुए। primeval (प्राइमविल) = आदिकालीन। bangs (बॅग्ज) = ठोकर मारता है। thatched (थैच्ट) = फूस का छप्पर। sizzling (सिजलिंग) = छन-छन की ध्वनि के साथ उबलता हुआ। frail (फ्रेल) = पतली-दुबली। veil (वेल्) = चूंघट। impoverished (इम्पॉवरिश्ट) = कंगाल एवं शक्तिहीन। renovate (रेनवेट) = मरम्मत करना।

हिन्दी अनुवाद-“मैं कार चलाना चाहता हूँ।” । मुकेश स्वयं का स्वामी होने पर जोर देता है। “मैं एक मोटर सुधारने वाला मिस्त्री बनूँगा।” वह घोषणा करता है। ‘क्या तुम कारों के बारे में कुछ जानते हो?” मैं पूछती हूँ। “मैं कार चलाना सीख लूँगा”, वह उत्तर देता है, सीधे मेरी आँखों में देखते हुए। उसका स्वप्न मृगमरीचिका की भाँति फिरोजाबाद नामक उसके शहर की गलियों में भरी धूल के बीच अस्पष्ट दिखाई देता है। यह शहर यहाँ की चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। फिरोजाबाद का हर दूसरा परिवार चूड़ियाँ बनाने में लगा है। काँच उद्योग का केन्द्र है जहाँ के परिवारों ने कई पीढियाँ, भट्टियों के चारों ओर काम करते हुए, काँच जोड़ते हुए तथा देश की सभी औरतों के लिए चूड़ियाँ बनाते हुए बिता दी हैं, ऐसा प्रतीत होता है।

मुकेश का परिवार भी इन्हीं में से एक है। उनमें से कोई भी नहीं जानता है कि उस जैसे बच्चों के लिए ऊँचे तापक्रम वाली भट्टियों में, गंदी अंधेरी कोठरियों में, जहाँ हवा एवं रोशनी का अभाव है काम करना गैर कानूनी है; कि अगर कानून को लागू किया जाये तो वह उसे तथा उन सभी 20,000 बच्चों को गर्म भट्टियों से बाहर निकलवा सकता है जहाँ वे दिन का समय कड़ी मेहनत करते हुए गुजारते हैं, प्रायः अपनी आँखों की चमक खो देते हुए। मुकेश की आँखें प्रसन्नता से चमक उठती हैं जब वह मुझे उसके घर ले जाने की स्वेच्छा प्रकट करता है, जिसके लिए वह गर्व से कहता है कि उसे पुनः बनाया जा रहा है। हम दुर्गन्ध से भरी, कचरे से अटी पड़ी गलियों में चलते हैं, उन घरों के पास से जो टूटती हुई दीवारों वाली गंदी झौंपड़ियाँ ही हैं, जिनके दरवाजे डगमगाने वाले हैं, जो खिड़कियों से रहित हैं, जिनमें मनुष्यों एवं जानवरों के परिवार आदिम युग की भाँति साथ-साथ जीते हैं। वह ऐसे ही एक घर के दरवाजे पर रुकता है, अपने पैर से डगमग करते लोहे के दरवाजे पर धक्का मारता है, और इसे धकेल कर खोल देता है। हम एक अर्द्ध-निर्मित कुटिया में प्रवेश करते हैं। इसके एक हिस्से में जो सूखी घास के छप्पर से ढका है, लकड़ी से जलने वाला चूल्हा है जिस पर एक बड़ा बरतन रखा है जिसमें छन-छन की आवाज के साथ पालक की पत्तियाँ उबल रही हैं। जमीन पर, बड़ी एलुमिनिअम की थालियों में और कटी हुई सब्जियाँ रखी हैं। एक पतली-दुबली युवती सारे परिवार के लिए शाम का भोजन पका रही है। धुएँ से भरी आँखों से वह मुस्कराती है। वह मुकेश के बड़े भाई की पत्नी है। अधिक उम्र की न होते हुए भी उसने परिवार की बहू के रूप में सम्मान प्राप्त करना शुरू कर दिया है। पहले से ही उस पर तीन लोगों-उसका पति, मुकेश तथा उनके पिता की जिम्मेदारी है। जब अधिक उम्र का व्यक्ति घर में प्रवेश करता है तो वह आहिस्ता से टूटी हुई दीवार के पीछे चली जाती है और अपना धूंघट अपने चेहरे के निकट ले आती है। जैसी कि प्रथा है, बड़ी उम्र के पुरुषों के समक्ष बहुओं को अपने चेहरे पूँघट से ढक लेने होते हैं। इस मामले में बड़ी उम्र का पुरुष चूड़ियाँ बनाने वाला एक शक्तिहीन एवं कंगाल व्यक्ति है। वर्षों तक की लम्बी मेहनत के बावजूद, पहले एक दर्जी के रूप में तथा फिर एक चूड़ी बनाने वाले के रूप में, वह अपने घर की मरम्मत कराने में असफल रहा है तथा अपने दो पुत्रों को स्कूल नहीं भेज सका है। केवल वह उन्हें वही सब सिखा पाया है जो वह स्वयं जानता है—चूड़ियाँ बनाने की कला।

“It is his karam,.. …….for the family to live in.” (Pages 23-24) कठिन शब्दार्थ : Destiny (डेसटन्)ि = नियति, भाग्य। lineage (लिनिज) = वंश-परम्परा, जातिगत व्यवसाय। implies (इम्प्लाइज) = अर्थ लगाती है। spirals (स्पाइरल्ज) = घेरे, मालाओं के रूप में चूड़ियों के गुच्छे । mounds (माउन्ड्स) = ढेर। unkempt (अन्केम्प्ट) = बिना संवारे। piled (पाइल्ड) = ढेर के रूप में | shanty (शैन्टी) = झोपड़ियों से भरे। hutments (हटमेंट्स) = झोंपड़ियाँ। flickering (फ्लिकरिंग) = टिमटिमाते। flames (फ्लेम्ज) = ज्वालाएँ। Drab (ड्रेब्) = भद्दा, नीरस । soldering (सोल्डरिंग) = टाँका लगाते हुए। sanctity (सैंक्टिटि) = पवित्रता। auspiciousness (आस्पिशस्नस्) = शुभ होना। draped (ड्रेप्ट) = लिपटा हुआ। drained (ड्रेन्ड) = रहित।

हिन्दी अनुवाद-“यह इसकी नियति है”, मुकेश की दादी बोलती है, जिसने चूड़ियों के काँच की पॉलिश करने से उड़ती धूल से अपने पति को अंधा होते हुए देखा है। “क्या ईश्वर-प्रदत्त वंश-परम्परा को तोड़ा जा सकता है?” उसका निहितार्थ होता है। चूड़ी बनाने वालों की जाति में पैदा होकर उन्होंने चूड़ियों के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं देखा है-घर में, अहाते में प्रत्येक दूसरे मकान में, प्रत्येक दूसरे अहाते में, फिरोजाबाद की प्रत्येक गली में। चूड़ियों के मालानुमा बंडल, चमकदार सुनहरे, धान जैसे हरे, नीले, गुलाबी, बैंगनी, इन्द्रधनुष के सात रंगों से जन्मे प्रत्येक रंग वाले–बिना संवरे अहातों में बड़े-बड़े ढेरों में पड़े होते हैं, चार पहियों वाली हाथ-गाड़ियों में ढेर लगे होते हैं, जिन्हें झोंपड़ियों के इस शहर की संकरी गलियों में युवा लोग धकेलते हैं। और अन्धेरी झोंपडियों में टिमटिमाते दीपकों की ज्वालाओं की पंक्तियों के आगे, लडके लड़कियाँ अपने माता-पिताओं के साथ बैठे होते हैं, रंगीन काँच के टुकड़ों को चूड़ियों को गोलाकार आकृतियों में जोड़ते हुए। उनकी आँखों का समायोजन बाहर की रोशनी की अपेक्षा अन्धेरे के साथ अधिक रहता है। इसीलिए वे प्राय: अपनी आँखों की रोशनी वयस्क होने से पूर्व ही खो देते हैं।

फल सविता, एक युवती एक भद्दी गुलाबी ड्रेस में एक बुजुर्ग महिला के निकट बैठती है और काँच के टुकड़ों को जोड़ती है (टाँका लगाती है)। जब उसके हाथ मशीन के चिमटों की भाँति यान्त्रिकता के साथ चलते हैं तो मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उसे पता है कि इन चूड़ियों की पवित्रता क्या होती है जिन्हें बनाने में वह मदद कर रही है। यह एक भारतीय स्त्री के सुहाग का प्रतीक है, जिसका अर्थ है, वैवाहिक जीवन में शुभत्व। एक दिन अचानक उसे मालूम होगा जब उसका सिर लाल रंग के चूँघट से ढका होगा, उसके हाथ मेहंदी से लाल रंगे होंगे और लाल रंग की चूड़ियाँ उसकी कलाइयों पर सरका दी जायेंगी। तब वह एक दुल्हन बन जायेगी। उस वृद्ध औरत के समान जो उसके पास बैठी है जो कई वर्षों पूर्व ऐसी ही दुल्हन बनी थी। उसकी कलाई पर अभी भी चूड़ियाँ हैं, लेकिन उसकी आँखों में रोशनी नहीं है। “एक बार भी सेर भर (पेट भर) खाना नहीं खाया”, वह आनन्दरहित स्वर में कहती है। उसने पूरे जीवन-काल में एक बार भी भरपेट भोजन का आनन्द नहीं उठाया है। यही फसल उसने काटी है। उसका पति, एक वृद्ध व्यक्ति जिसकी लहराती हुई दाढ़ी है, कहता है, “मैं चूड़ियों के अलावा और कुछ भी नहीं जानता। मैं इतना ही कर पाया हूँ कि मैंने परिवार के रहने हेतु घर बना लिया है।”

Hearing him, one wonders…… ………airplanes fly over Firozabad.

(Pages 24-25) कठिन शब्दार्थ : Rings (रिंग्ज्) = सुनाई देता है। echo (एको) = दोहराते हैं। lament (लमेन्ट) = विलाप। mind-numbing (माइन्ड्-नमिंग) = चेतनाशून्य करने वाला। toil (टॉइल) = मेहनत। initiative (इनिरॉटिव) = पहल करने की क्षमता। cooperative (कोऑपरेटिव) = सहकारिता। vicious circle (विशस् सॅक्ल) = कुचक्र । middlemen (मिड्लमैन) = बिचौलिए। trapped (ट्रैप्ट) = फँसा लिया। hauled up (हॉल्ड अप) = घसीट ले जाये जायेंगे। apathy (ऐपथि) = उदासीनता। web (वेब) = जाल। stigma (स्टिग्मा) = कलंक। baggage (बैगिज) = बोझ। dare (डेअ(र)) = चुनौती देना। embarrassment (इमबैरेसमॅन्ट) = शर्मिंदगी। content (कन्टेन्ट) = सन्तुष्ट । hurtling down (हटलिंग डाउन) = तेजी से दौड़ती हुई।

हिन्दी अनुवाद-उसकी बात सुनकर किसी व्यक्ति को आश्चर्य हो जाता है कि क्या उसने वो पा लिया है जो अन्य कई लोग अपने जीवन काल में प्राप्त करने में असफल रहे हैं। उसके सिर पर एक छत जो है!

ड़ियाँ बनाने के काम को करते रहने के अलावा कुछ भी अन्य कार्य करने हेतु धन का अभाव होने, खाने को भी पर्याप्त पैसा न होने, के दु:ख की कराहट हर घर में गूंजती है। युवा लोग अपने से बड़ों के विलाप को दोहराते हैं। ऐसा लगता है कि फिरोजाबाद में समय के साथ कुछ नहीं बदला है। वर्षों की चेतना शून्य कर देने वाली मेहनत ने पहल करने की सारी क्षमता तथा स्वप्न देखने की सामर्थ्य को मार दिया है।

” “आप लोग सहकारिता में संगठित क्यों नहीं हो जाते हैं?” मैं युवकों के एक समूह से पूछती हूँ जो उन बिचौलियों के कुचक्र में फँस गये हैं जिन्होंने उनके पिताओं तथा पूर्वजों को फाँस लिया था। “अगर हम संगठित हो भी जाते हैं तो हमें ही पुलिस के द्वारा घसीट लिया जायेगा, पीटा जायेगा तथा जेल में डाल दिया जायेगा, किसी गैर-कानूनी कार्य को करने के अपराध में”, वे कहते हैं। उन लोगों के बीच कोई मार्गदर्शक नहीं है, कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो उन्हें भिन्न प्रकार से देखने में मदद कर सके। उनके पिता उतने थके हुए हैं जितने वे स्वयं । वे अन्तहीनता के साथ उत्तरोत्तर बोलते चले जाते हैं, गरीबी से उदासीनता, उदासीनता से लालच तथा अन्याय के बारे में।

उनकी बातें सुनते हुए मुझे दो दुनिया स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं-एक परिवार की दुनिया जो गरीबी के जाल में फँसी है तथा जन्म की जाति के कलंक से दबी है; दूसरी दुनिया है साहूकारों, बिचौलियों, पुलिसवालों, कानून को लागू करने वालों, नौकरशाहों तथा राजनेताओं के कुचक्र की दुनिया। दोनों ने मिलकर बच्चे पर ऐसा बोझ लाद दिया है जिसे वह उतार नहीं सकता। एहसास होने से पूर्व ही वह इसे उतने ही स्वाभाविक रूप से स्वीकार कर लेता है जितने स्वाभाविक रूप से उसके पिता ने स्वीकार किया था। इसके अलावा कुछ और करना चुनौती देना हो जायेगा। और चुनौती देना उसके बड़े होने का हिस्सा नहीं है। जब मैं मुकेश में इस बात की क्षणिक चमक देखती हूँ तो मैं प्रसन्न हो उठती हूँ। “मैं एक मोटर सुधारने वाला मिस्त्री बनना चाहता हूँ”, वह दोहराता है। वह किसी गैराज में जायेगा और काम सीख लेगा। लेकिन गैराज उसके घर से दूर है। “मैं पैदल चल लँगा”. वह जोर देकर कहता है। “क्या तुम हवाई जहाज उडाने का स्वप्न भी देखते हो?” वह अचानक चुप हो जाता है। “नहीं”, वह कहता है, जमीन की ओर घूरते हुए। उसकी छोटी सी गुनगुनाहट में एक लज्जा का भाव है जो अभी पश्चात्ताप में परिवर्तित नहीं हुआ है। वह कारों का स्वप्न देख कर ही सन्तुष्ट है जिन्हें वह अपने शहर की गलियों में तेज गति से दौड़ती हुई देखता है। मुश्किल से ही कोई वायुयान फिरोजाबाद के ऊपर से उड़ते हैं।